कोरोना वैक्सीन के असर को लेकर झारखंड से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दावा है कि कोविशील्ड लगने के बाद एक ऐसे व्यक्ति ने चलना-फिरना शुरू कर दिया है जो 5 साल से बिस्तर पर पड़ा था। इस व्यक्ति को 4 जनवरी 2022 को टीका दिया गया था। इस दावे की सत्यता परखने के लिए तीन सदस्यों की मेडिकल टीम का गठन किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला बोकारो के पेटरवार ब्लॉक की उत्तासरा पंचायत के सलगाडीह गाँव का है। यह गाँव जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर है। यहाँ के रहने वाले दुलारचंद मुंडा का 5 साल पहले एक्सीडेंट हो गया था। तब से वे लगातार बिस्तर पर ही पड़े थे। उनकी रीढ़ में चोटें आई थी। इसके चलते वे न ठीक से चल पा रहे थे और न ही ठीक से बोल पा रहे थे। दुलारचंद की उम्र 55 वर्ष बताई जा रही है।
पेटरवार (Peterwar) सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अलबेला के अनुसार, “एक आँगनबाड़ी कार्यकर्ता ने 4 जनवरी को दुलारचंद के घर जाकर कोविशील्ड वैक्सीन की पहली डोज लगाई थी। उनके परिजनों ने अगले दिन उनके शरीर में हरकत की सूचना दी। इसी के साथ दुलारचंद ने बोलना भी शुरू कर दिया।” बताया जाता है कि कोरोना वैक्सीन लेने के अगले दिन परिजन दुलारचंद के शरीर में हरकत होने और उन्हें बोलते देख हैरान हो गए। बोकारो जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर जितेंद्र कुमार ने कहा, “यह चौंकाने वाले परिणाम हैं। हम रोगी के मेडिकल इतिहास का अध्ययन करेंगे। इसकी जाँच के लिए 3 सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।”
गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के मधेपुरा जिले से एक 84 वर्षीय बुजुर्ग द्वारा 11 बार कोरोना वैक्सीन लगवाने की खबर सामने आई थी। इस बुजुर्ग का नाम ब्रह्मादेव मंडल है। उन्होंने बताया था, “वैक्सीन से न सिर्फ मैंने खुद को सुरक्षित किया है बल्कि मेरे कई तरह के दर्द भी खत्म हो गए। मेरी कमर का दर्द खत्म हो गया। मैं चलने-फिरने में असमर्थ था, वह दर्द भी खत्म हो गया। अब मुझे सर्दी खॉंसी भी नहीं होती।” ब्रह्मादेव मंडल पर बार-बार मोबाइल नंबर बदल कर टीका लगवाने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने केस दर्ज करवाया है। तब से वे छिप रहे हैं। एक वीडियो जारी कर उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उन पर कार्रवाई की गई तो वो आत्महत्या कर लेंगे।
आगामी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल (RLD) ने अपने 29 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में RLD के 19 और समाजवादी पार्टी के 10 उम्मीदवार हैं। इन उम्मीदवारों में कई नाम ऐसे हैं जिनका इतिहास विवादित रहा है।
नाहिद हसन
समाजवादी पार्टी द्वारा शामली जिले की कैराना सीट के लिए नाहिद हसन का नाम घोषित किया गया है। नाहिद हसन के खिलाफ पुलिस में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी के साथ उन्हें कैराना से हिन्दुओं के अतिचर्चित पलायन का मास्टरमाइंड भी कहा जाता है। भाजपा ने नाहिद हसन को दोबारा टिकट दिए जाने को समाजवादी पार्टी का ‘जिन्नावाद’ कहा है।
कई भाजपा नेताओं ने नाहिद हसन को दोबारा टिकट दिए जाने पर सवाल खड़े किए हैं। नाहिद हसन पर जमीन खरीदने के मामले में धोखाधड़ी का भी केस दर्ज है। वह शामली जिले की विशेष अदालत से भगोड़ा भी घोषित किया जा चुका है। नाहिद हसन कैराना से सपा के वर्तमान विधायक भी हैं। उनकी माँ तबस्सुम इसी क्षेत्र से पूर्व सांसद रहीं हैं।
लम्बे समय तक फरार रहने वाले नाहिद हसन ने जनवरी 2020 में अदालत में सरेंडर किया था। लगभग 1 माह से अधिक समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी। फरवरी 2021 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने नाहिद हसन, उनकी माँ तबस्सुम और 38 अन्य लोगों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की थी।
प्रदेश का अपराधी नंबर 1 बना समाजवादी पार्टी का प्रत्याशी नंबर 1
अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में जिस कैराना से हिन्दुओं को पलायन करने पर मजबूर किया था आज उसी विधानसभा क्षेत्र से कुख्यात गैंगस्टर को प्रत्याशी बनाकर समाजवादी पार्टी कैराना को फिर से उसी कालखंड में ले जाना चाहती है! pic.twitter.com/ADPvyTpfCz
साल 2019 में वायरल हुए एक वीडियो में नाहिद हसन को कैराना में भाजपा से जुड़े लोगों का बहिष्कार करने की अपील करते देखा गया था।
हिंदुओं की दुकानों का बहिष्कार करने की अपील करने वाले कुख्यात नाहिद हसन को समाजवादी पार्टी ने कैराना से टिकट दिया है यही व्यक्ति कैराना से हिंदुओं के पलायन का जिम्मेदार था और इसी ने कैराना में हिंदुओं का रहना दूभर कर दिया था। pic.twitter.com/gOenfOhAYr
नाहिद हसन का प्रशासनिक अधिकारियों से भी उलझने के कई वीडियो वायरल हुए हैं। सितम्बर 2019 में SDM अमित पाल शर्मा ने जब उनसे वाहन के कागज़ माँगे तक उन्होंने काफी लम्बी जद्दोजहद की थी।
A verbal duel ensued between Kairana SP MLA Nahid Hasan (holding phone in his hand) and local SDM Amit Pal Sharma after latter asked MLA to produce documents of his car. @Uppolicepic.twitter.com/S4eNZtIkZz
मेरठ से समाजवादी पार्टी के विधायक रफीक अंसारी को दोबारा टिकट दिया गया है। उन पर भी कई आपराधिक केस लंबित हैं। वो अपनी ही पार्टी के एक अन्य नेता को मौत की धमकी देने के बाद चर्चित हुए थे। अक्टूबर 2021 में मेरठ की एक अदालत ने बुंदू खान अंसारी की शिकायत पर रफ़ीक अंसारी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। शिकायत में कहा गया था कि विधायक रफ़ीक अंसारी ने उन्हें अपनी जमीन फर्जी कागज़ातों के आधार पर बेच कर उनका पैसा हड़प लिया है।
नवम्बर 2017 में रफीक अंसारी की एक ऑडियो वायरल हुई थी। ऑडियो में वो समाजवादी पार्टी के ही एक अन्य नेता को नगर निगम चुनावों के दौरान जान से मारने की धमकी दे रहे थे। विधायक अंसारी की मेरठ के नौचंदी थाने में हिस्ट्रीशीटर भी है।
चीन को बड़ा झटका लगा है। चीन के आक्रामक रवैये को झेल रहे फिलीपींस ने भारत के साथ दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक एंटी शिप क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की खरीद को मंजूरी दे दी है। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, फिलीपींस के राष्ट्रीय रक्षा विभाग द्वारा ब्रह्मोस के अधिकारियों को इसकी सूचना भेज दी गई है। ब्रह्मोस मिसाइल के लिए यह पहला विदेशी ऑर्डर है। यह सौदा 374.9 मिलियन अमरीकी डॉलर (₹27966750841) का है।
Philippines has accepted BrahMos Aerospace Pvt Ltd’s proposal worth USD 374.9 million to supply Shore-Based Anti-Ship Missile System Acquisition Project for its navy. The Notice of Award has been communicated to BrahMos officials by the Philippines Department of National Defense
इस सौदे में सबसे अहम बात यह है कि अमेरिकी सहयोगी देश फिलीपींस ने चीन के खिलाफ अपनी सैन्य तैयारी के लिए भारत-रूस द्वारा मिलकर बनाई गई ब्रह्मोस मिसाइल पर भरोसा जताया है। ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल ध्वनि की रफ्तार से तीन गुना तेज गति यानी 4321 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से मार करने में सक्षम है।
Philippines accepts BrahMos Aerospace Pvt Ltd’s proposal worth USD 374.9 million to supply Shore-Based Anti-Ship Missile System Acquisition Project for Philippine Navy pic.twitter.com/p167tenWwV
चीन के खिलाफ तटीय इलाकों को सुरक्षित करेगा फिलीपींस
फिलीपींस को आँखे दिखा रहे चीन को इस सौदे से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ फिलीपींस का अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद चल रहा है। ऐसे में ब्रह्मोस मिसाइल को फिलीपींस अपने तटीय इलाकों में तैनात कर सकता है।
इसी हफ्ते, 11 जनवरी को भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया। मिसाइल भारत और रूस के बीच एक संयुक्त व्यापार उपक्रम है जहाँ डीआरडीओ भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। मिसाइल का परीक्षण आईएनएस विशाखापत्तनम से किया गया था।
और देशों से भी जल्द मिल सकते हैं खरीद के ऑर्डर
बताया जा रहा है कि DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन) और ब्रह्मोस एयरोस्पेस इस मिसाइल का मित्र देशों को निर्यात करने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। DRDO ने हाल ही में अमेरिका के साथ मेड इन इंडिया रडार का सौदा भी किया था। भारत को अन्य मित्र देशों से भी मिसाइल प्रणाली के ऑर्डर जल्द मिलने की उम्मीद है क्योंकि कुछ और देशों के साथ भी इसे लेकर सौदेबादी अपने अंतिम दौर में है। इस मिसाइल की क्षमताओं में वृद्धि हुई है और कई आधुनिक विशेषताओं से लैस किया गया है। चीन का एक और पड़ोसी देश वियतनाम भी भारत से यह मिसाइल सिस्टम खरीद सकता है।
केरल की एक अदालत ने बहुचर्चित नन रेप केस (Nun Rape Case) में बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) को शुक्रवार (14 जनवरी 2022) को बरी कर दिया। मुलक्कल भारत के पहले कैथोलिक बिशप थे, जिन्हें नन का यौन शोषण करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। केरल की कोट्टायम पुलिस ने नन के दुष्कर्म मामले में आरोपित बिशप के खिलाफ 2018 में मुकदमा दर्ज किया था।
#BREAKING : A Kerala Court ACQUITTED former Bishop, Franco Mulakkal, for repeatedly raping a nun.
आरोप था कि बिशप ने कथित तौर पर 2014 और 2016 के बीच अपने कॉन्वेंट में एक नन के साथ 13 बार बलात्कार किया। उन पर नन को गलत तरीके से कैद करने, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया था। नन द्वारा इसकी शिकायत किए जाने के बाद कॉन्वेंट की कई नन ने बिशप के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। पीड़िता ने 29 जून 2018 को शिकायत दर्ज कराई। उन्हें पुलिस ने 19 सितंबर 2018 को गिरफ्तार किया था। मुलक्कल को गिरफ्तार करने में तीन महीने लग गए।
26 महीने के ट्रायल के बाद बिशप को बरी किया गया है। इस मामले में जो चार्जशीट दाखिल की गई थी जिसमें 83 गवाहों के बयान दर्ज थे। फैसला आने के बाद फ्रैंको मुअक्कल के वकील ने रिपब्लिक टीवी से कहा कि पीड़िता झूठ बोल रही थी। उसके आरोपों में कोई सच्चाई नहीं थी। वकील ने कहा कि यह मामला फ्रैंको मुअक्कल के खिलाफ नहीं, बल्कि ईसाइयत के खिलाफ था।
#EXCLUSIVE | “She is lying. Nothing is true. This is not a case against Bishop Franco Mulakkal but against Christianity”: Franco Mulakkal’s lawyer to Republic
आइए, इस मामले से जुड़े घटनाक्रम पर एक नजर डालते हैं;
29 जून 2018: जालंधर सूबा के बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ एक नन की शिकायत के आधार पर कुराविलंगड पुलिस ने मामला दर्ज किया। शिकायत के मुताबिक मिशनरीज ऑफ जीसस कॉन्वेंट में बिशप ने नन के साथ कई बार दुष्कर्म किया।
1 जुलाई, 2018: एर्नाकुलम आर्चडीओसीज़ में भक्तों की बिरादरी, आर्चडियोसेसन मूवमेंट फॉर ट्रांसपेरेंसी (AMT) के संयोजक जॉन जैकब ने कार्डिनल मार जॉर्ज अलंचेरी के खिलाफ शिकायत दर्ज की। उन्होंने कार्डिनल पर नन के बलात्कार के आरोप के बारे में पुलिस को सूचित करने में विफल रहने का आरोप लगाया।
05 जुलाई, 2018: चांगनचेरी में प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट ने नन का बयान दर्ज किया। यह मामले में विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा दिए गए अनुरोध के आधार पर कैमरे में किया जाता है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने जाँच में तेजी लाने की माँग की है।
12 जुलाई, 2018: जाँच दल ने कन्नूर जिले के परियाराम और पनाप्पुझा में मठों से आगंतुकों के रजिस्टर को जब्त कर लिया, जब यह पाया गया कि बिशप ने नन द्वारा बताए गए समय के दौरान कॉन्वेंट का दौरा किया था।
24 जुलाई, 2018: कई महिला संगठनों ने दिल्ली में वेटिकन के राजदूत गिआम्बतिस्ता डिक्वाट्रो के साथ एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने उनसे अनुरोध किया कि वह पोप को बिशप को उनके पद से बर्खास्त करने की सलाह दें।
25 जुलाई, 2018: नन के एक रिश्तेदार ने आरोप लगाया कि उन्हें एक दोस्त के जरिए केस वापस लेने का बड़ा ऑफर मिला है। कुछ दिनों के बाद, पादरी एक नन को बुलाता है जो पीड़ित नन के साथ खड़ी होती है और उसे शिकायत वापस लेने की सलाह देती है। कॉल मीडिया में उजागर हो गया है। पुलिस ने नन का बयान दर्ज किया।
30 जुलाई, 2018: कुराविलंगड पुलिस ने फोन करने वाले पादरी फादर जेम्स एर्थायिल के खिलाफ मामला दर्ज किया। सबूत जुटाने के लिए जाँच टीम दिल्ली पहुँची। उन्होंने उज्जैन के बिशप मार सेबेस्टियन वडक्कल का बयान दर्ज किया। उसी दिन कुराविलंगड एसआई का तबादला हो जाता है।
8 अगस्त 2018: जाँच दल बिशप मुलक्कल से पूछताछ करने जालंधर पहुँचा। वे सिस्टर रेजिना, मिशनरीज ऑफ जीसस की मदर जनरल, सिस्टर्स अमला और मारिया के बयान दर्ज करते हैं जो मिशन के कार्यालय में काम करते हैं।
13 अगस्त, 2018: बिशप का निजी सुरक्षा गार्ड मीडियाकर्मियों से भिड़ जाता है और कैमरों और अन्य उपकरणों को तोड़ देता है। वे मीडियाकर्मियों को बिशप के घर के अंदर बंद करने का भी प्रयास करते हैं। इसी दिन अदालत ने बिशप के खिलाफ आरोप तय किए।
30 अगस्त, 2018: संयुक्त ईसाई परिषद (JCC) ने बिशप मुलक्कल की गिरफ्तारी की माँग को लेकर कोच्चि में भूख हड़ताल शुरू की।
11 सितंबर, 2018: पीड़ित नन ने भारत में वेटिकन के राजदूत को पत्र लिखा। उसने अपने लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए वेटिकन के हस्तक्षेप की माँग की। बिशप ने पीड़िता पर आरोप लगाया कि उसे चर्च विरोधी लोगों द्वारा स्पॉन्सर किया गया था।
12 सितंबर, 2018: मिशनरीज ऑफ जीसस ने बिशप मुलक्कल की गिरफ्तारी की माँग को लेकर आंदोलन कर रही ननों के खिलाफ जाँच शुरू की। पीड़ित नन भी पूछताछ के तहत छह नन में से एक है।
17 सितंबर, 2018: बिशप मुलक्कल ने पोप को पत्र लिखा। उन्होंने पोप से अस्थायी रूप से कर्तव्यों से दूर रहने की अनुमति माँगी क्योंकि उन्हें मामले पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
19 सितंबर, 2018: जाँच दल ने फ्रेंको मुलक्कल से थ्रिप्पुनिथुरा में सात घंटे तक पूछताछ की। तीन दिन बाद पुलिस ने मुलक्कल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
9 अप्रैल, 2019: जाँच अधिकारी वैकोम डीएसपी के सुभाष ने मामले में पाला में एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
5 अगस्त 2020: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया।
7 जुलाई 2020: केरल हाई कोर्ट ने नन रेप मामले में आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
7 अगस्त, 2020: बिशप मुलक्कल को दूसरी बार जमानत मिली। उनकी जमानत रद्द होने के बाद उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था।
13 अगस्त 2020: कोट्टायम अदालत ने आरोपित बिशप के खिलाफ आरोप तय किए।
सितंबर 2020: अतिरिक्त सत्र न्यायालय, कोट्टायम में सुनवाई शुरू।
14 जनवरी, 2022: नन रेप मामले में कोर्ट ने आरोपित बिशप मुलक्कल को बरी कर दिया।
एक पोडकास्ट प्रोग्राम है- हाउ टू डू इट। इसमें सेक्स से जुड़ी सलाह दी जाती है। इसी कार्यक्रम में एक अमेरिकी व्यक्ति ने चौंकाने वाला दावा किया। उसका कहना है कि कोरोना संक्रमण की वजह से उसका लिंग करीब 4 सेंटीमीटर (1.5 इंच) सिकुड़ गया है। 30 वर्षीय इस व्यक्ति का कहना है इसकी वजह से उसका आत्मविश्वास प्रभावित हुआ है। साथ ही सेक्स की क्षमता भी प्रभावित हुई है।
जुलाई 2021 में यह व्यक्ति चीनी कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ था। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। इस व्यक्ति के अनुसार कोरोना ने उसके वस्कुलर सिस्टम को नुकसान पहुँचाया है। खून के प्रवाह के लिए यह सिस्टम जिम्मेदार होता है और इसमें नसें और धमनियाँ आती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित ने दावा किया, “मैं 30 साल का हूँ। मुझे जुलाई 2021 में कोरोना हुआ था। कुछ दिन मेरा इलाज अस्पताल में चला। अस्पताल से छुट्टी पाने के बाद मैंने पाया कि मेरा प्राइवेट पार्ट पहले के मुकाबले छोटा हो गया है। मुझे नपुंसकता (Erectile Dysfunction) की भी बीमारी हो गई थी। हालाँकि यह दवाओं से ठीक हो गई। पर मेरे छोटे हुए प्राइवेट पार्ट को डॉक्टरों ने कभी न ठीक हो पाने वाली दिक्क्त बताया है।”
अमेरिकी यूरोलॉजिस्ट एशले विंटर ने बताया, “किसी व्यक्ति की उत्तेजना की स्थिति में उसका दिमाग उसके प्राइवेट पार्ट की नसों में रक्त का प्रवाह भेजता है। पर जब यह नहीं हो पाता है तो प्राइवेट पार्ट तनाव न होने के चलते छोटा रह जाता है। इरेक्टाइल डिस्फंक्शन की बीमारी से भी यही समस्या आती है। प्राइवेट पार्ट में खून को रोकने वाला यह COVID का एक बेहद दुर्लभ लक्षण है। बाद में यही नपुंसकता का कारण भी बन सकता है। इसी बीमारी से उबार चुके 2 अन्य पुरुषों के प्राइवेट पार्ट में भी वायरस के ट्रेसेस पाए गए थे। इससे उनका व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हुआ। इसका इलाज करवाने के लिए उन्हें बाद में इम्प्लांट सर्जरी भी करवानी पड़ी थी।”
उल्लेखनीय है कि लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज ने इसको लेकर एक अध्ययन भी किया था। कोरोना से संक्रमित 3400 लोगों पर हुए इसे अध्ययन में 200 लोगों के साथ यह दुर्लभ समस्या पाई गई थी। इसी तरह वर्ल्ड जर्नल ऑफ मेन्स हेल्थ में प्रकाशित अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी मिलर स्कूल ऑफ मेडिसिन के अध्ययन में भी कहा गया था कि लंबे समय तक संक्रमित रहने के कारण कुछ लोगों में नपुंसकता के लक्षण मिले हैं।
उसका असली नाम कनीज फातिमा है। मूल रूप से बांग्लादेश की रहने वाली है। लेकिन दुनिया उसे अंजलि के नाम से जानती है। उस निवेश पोद्दार की गर्लफ्रेंड/पत्नी समझती है जो नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) के मुखिया दिनेश गोप का राइट हैंड माना जाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार देह के धंधे से जुड़ी फातिमा पहले निवेश के दिल में उतरी फिर नक्सली संगठन की राजदार बन गई।
झारखंड पुलिस ने राँची के रहने वाले निवेश निवेश के साथ जिन लोगों को गिरफ्तार किया था, उनमें फातिमा भी थी। बताया जा रहा है कि निवेश की कथित पत्नी के सीने में कई राज दफन हैं। यही वजह है कि फातिमा से राँची पुलिस के अधिकारी लगातार पूछताछ कर रहे हैं। पुलिस को अंदेशा है कि फातिमा PLFI और निवेश के कई राज जानती है।
गुरुवार (13 जनवरी 2022) को फातिमा को धुर्वा थाना लाया गया, जहाँ वरीय अधिकारियों ने उससे लंबी पूछताछ की। जानकारी के मुताबिक अंजलि उर्फ फातिमा बांग्लादेश के खुलना नामक इलाके की रहने वाली है। पिछले 7-8 सालों से फातिमा दिल्ली में अंजलि नाम से रह रही थी। पुलिस की पूछताछ में फातिमा ने यह बताया है कि बांग्लादेश से दिल्ली आने के बाद उसने अपना नाम अंजलि रख लिया था। वह जिस्मफरोशी के धंधे में लिप्त थी। दिल्ली की बदनाम गलियों में ही रहकर वह अपनी जीविका चला रही थी। इसी दरम्यान उसकी मुलाकात निवेश से हुई और धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे के करीब आ गए।
दरअसल निवेश को भी एक ऐसा राजदार चाहिए था, जो दिल्ली में रहकर उसकी अवैध कमाई को व्हाइट करने के काम की मॉनिटरिंग कर सके। इसके लिए बाकायदा निवेश उसे दिल्ली में सबकी नजरों के सामने पत्नी बनाकर रखे हुए था। पुलिस को अब तक फातिमा का पासपोर्ट नहीं मिला है, लेकिन तलाशी के दौरान फर्जी आधार कार्ड बरामद किया गया है।
पुलिस की जाँच में अब तक ये पता चला है कि लेवी के पैसों को निवेश अपने साथियों के साथ रियल एस्टेट और होटल के कारोबार में लगा रहा था। इस दौरान वह लाखों रुपए के लेन-देन भी एक साथ किया करता था। वहीं इन्हीं पैसों से लग्जरी गाड़ियाँ भी खरीद रखा था। महँगी लग्जरी कार में वह फातिमा को पत्नी के रूप में बिठाकर घूमाता था, ताकि किसी को शक न हो।
निवेश ने पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप के कहने पर दिल्ली में एक थ्री स्टार होटल खरीदा था। यह होटल फातिमा ही चलाती थी। होटल से होने वाली कमाई का पूरा हिसाब दिनेश गोप के पास होता था। इस होटल का इस्तेमाल नक्सलियों को ठहराने के लिए भी किया जाता था।
गौरतलब है कि पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप पर झारखंड पुलिस लगातार शिकंजा कस रही है। राँची पुलिस ने गुरुवार को उसके करीबी सहयोगी निवेश पोद्दार समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तार आरोपितों में निवेश पोद्दार, ध्रुव कुमार, शुभम पोद्दार और अंजलि उर्फ कनीस फातिमा शामिल हैं। आरोपितों के पास से पुलिस ने 6 पिस्टल और 85 कारतूस बरामद किया है।
जाने-माने मलयाली फिल्मकार अली अकबर (Ali Akbar) विधिवत रूप से हिंदू बन गए हैं। गुरुवार (13 जनवरी 2022) को उन्होंने पत्नी लुसिम्मा के साथ सनातन धर्म ग्रहण किया। अब वे राम सिम्हन के नाम से जाने जाएँगे। केरल के इस फिल्मकार ने दिसंबर 2021 में तब घर वापसी का ऐलान किया था, जब मजहबी कट्टरपंथियों ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद खुशी का इजहार किया था।
अली अकबर और लुसिम्मा की कुछ तस्वीरें सामने आईं है। इनमें शुद्धिकरण समारोह के दौरान दोनों के हवन कुंड के पास बैठे और आहुति डालते हुए नजर आ रहे हैं। इस दौरान अली अकबर श्वेत वेशती में अपने कंधों पर भगवा अंगवस्त्र डाले और जनेऊ पहने हुए थे। अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद और हिन्दू सेवा केन्द्रम के नेता प्रतीश विश्वनाथ ने फेसबुक पर इसके बारे में बताया है।
अली अकबर की पूजा करते हुए फोटो शेयर करते हुए प्रतीश विश्वनाथ ने लिखा है, “इतिहास खुद को दोहराता है। अली अकबर रामसिम्हन के रूप में।” साथ ही प्रतीश ने हैशटैग के रूप में #GharWapasi (घर वापसी) लिखा है।
अली अकबर के नए नामकरण के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी बताई जा रही है। कहा जाता है कि करीब आठ दशक पहले मालाबार में इसी तरह एक व्यक्ति ने इस्लाम त्याग कर अपना नाम राम सिम्हन रखा था। इसके बाद मजहबी भीड़ ने ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए उस व्यक्ति के घर पर हमला कर दिया था। राम सिम्हन और उनके भाई की हत्या कर दी गई थी। उनके परिवार के अन्य सदस्यों को जबरन उठाकर भीड़ अज्ञात जगह पर ले गई थी। देश की स्वतंत्रता से कुछ हफ्ते पहले ही इस घटना को अंजाम दिया गया था।
गौरतलब है कि हेलिकॉप्टर हादसे के बाद अली अकबर ने फेसबुक लाइव कर इस्लाम के परित्याग की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, “यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए मैं अपना धर्म छोड़ रहा हूँ, न मेरा और न ही मेरे परिवार का कोई और धर्म है।” उन्होंने लाइव में कहा था, “मैं उन कपड़ों का एक टुकड़ा फेंक रहा हूँ, जिनके साथ मैं पैदा हुआ था।” दरअसल, जब फिल्म निर्देशक ने सीडीएस रावत की वीरगति पर लाइव वीडियो बनाना शुरू किया तो कट्टर इस्लामियों ने उनके वीडियो पर हजारों की संख्या में लॉफिंग की इमोजी लगाकर इसका मजाक उड़ाया, जिससे उनकी भावनाएँ आहत हुई थी। उनके इस ऐलान के बाद प्रतीश विश्वनाथ ने कहा था कि इस्लाम की वर्तमान पीढ़ी को देखकर बहुत अच्छा लग रहा है। जिनके पूर्वजों को बलपूर्वक परिवर्तित किया गया था, वे वापस जड़ों की ओर आ रहे हैं।
लव जिहाद (Love Jihad) या ग्रूमिंग जिहाद (Grooming Jihad) की शिकार दो तरह की लड़कियाँ होती हैं। एक गरीब दलित हिंदू या निम्न आय वर्ग की उच्च जाति की हिंदू लड़कियाँ और दूसरी महाराष्ट्र की ब्राह्मण लड़कियाँ या फिर उच्च जाति के संपन्न परिवार की लड़कियाँ। ये खुलासा सूरत की सामाजिक कार्यकर्ता कविता दुबे ने किया जो लंबे समय से इस विषय पर काम कर रही हैं। वह उत्तरप्रदेश के जौनपुर की रहने वाली हैं और अब सूरत को अपना घर कहती हैं।
ग्रूमिंग जिहाद मामले में हमने पहले आपको सूरत के औद्योगिक इलाके सचिन की रहने वाली पूजा की कहानी बताई थी जो कम उम्र में इसका शिकार हो गई थी। मगर अब वह अपने माता-पिता के पास है।
एक कार्यकर्ता ने नाम न बताने की शर्त पर हमें बताया, “सोनी समुदाय की एक लड़की जो एमएससी में गोल्ड मेडलिस्ट थी, आगे की पढ़ाई नहीं कर पाई क्योंकि वह एक मुस्लिम लड़के के प्रेम में पड़ गई थी जो पास के होटल में वेटर था। उस समय वह बस यही जानती थी कि उसका नाम समीर है। उसे ये नहीं मालूम था कि वो लड़का हिंदू नहीं है। वो उसके साथ मुंबई भागी और वहाँ शादी की। मगर दो साल बाद उसने वापस आने का मन बना लिया। लड़की ने अपनी माँ से संपर्क किया जो बाद में पुलिस, सरकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से उसे वापस लेकर आई।”
कार्यकर्ता ने कहा, “लड़की ने वापस आकर अपने साथ हुई बर्बरता की कहानी सुनाई। लड़की का डेढ़ साल शोषण हुआ। उसे समीर के अन्य दोस्तों के साथ सेक्स करने पर मजबूर किया गया और उसे जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। ये सारी प्रताड़ना समीर की असली पहचान उजागर होने के बाद शुरू हुई।”
लड़की ने खुलासा किया कि उसे मारा जाता था, बुर्का पहनाया जाता था, कुरान पढ़वाई जाती थी, शराब पीने को और दूसरे आदमियों से सेक्स करने को मजबूर किया जाता था, लेकिन वह इसके लिए नहीं मानती थी। कार्यकर्ता ने बताया, “वो लड़की लौट आई है, लेकिन कई लड़कियाँ हैं जो गायब भी हुई हैं।”
सालों से ऑपइंडिया आपके सामने कई केसों की रिपोर्ट करता रहा है, जहाँ अपनी मुस्लिम पहचान छिपाकर लड़कों ने हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फँसाया और फिर उन्हें प्रताड़ित कर इस्लाम कबूल करवाया। साल 2020 के नवंबर में उत्तर प्रदेश प्रशासन ने ग्रूमिंग जिहाद की घटनाओं पर जाँच के लिए SIT गठित की थी। इस मामले में 14 में से 11 केसों में आपराधिकता पाई गई थी। सितंबर 2020 में हमने आपके सामने ग्रूमिंग जिहाद के 20 केसों को रिपोर्ट किया था जो उत्तरप्रदेश में सिर्फ 2 महीनों में हुए थे।
गुजरात में इसी मसले के बारे में बताते हुए कार्यकर्ता ने कहा, “एक अन्य कहानी जैन समुदाय की लड़की है। उसका परिवार आर्थिक रूप से संपन्न था और बहुत पढ़ा-लिखा था। जाहिर है कि ऐसे मामले में जल्दी धर्मांतरण नहीं होता। उसकी शादी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई। लेकिन शादी के कुछ माह बाद ही उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया जाने लगा। कई केसों में हमने देखा है कि लड़की को दरगाह और मौलवी के पास ले जाते हैं ताकि उन्हें कोई धागा बाँधा जाए और उन्हें कोई पानी पिलाया जाए। इसके बाद वह इस्लाम की ओर आकर्षित होने लगती हैं।”
कार्यकर्ता ने समझाया, “जब लड़की ने इस्लाम कबूला तो परिवार के हर सदस्य ने उससे नाता तोड़ लिया और बचाने तब गए जब उन्हें पता चलता है कि आदमी अगली बीवी ला रहा है। लड़की को उसके परिवार ने उसके तीन बच्चों के साथ बचाया। लेकिन धर्म परिवर्तन के बाद वह इस्लामिक पर्सनल लॉ द्वारा शासित है, इसलिए उसके पास बहुत कम कानूनी विकल्प हैं।”
कार्यकर्ता ने कहा कि अगर जोड़ा सौराष्ट्र क्षेत्र से है तो ज्यादातर मामलों में वह जूनागढ़ भागता है और अगर दक्षिण गुजरात से है तो वह मुंबई जाता है। मुंबई, नवपुर, मालेगँव चुनी हुई जगह हैं। वहाँ धर्मांतरण संबंधी कानून इतने सख्त नहीं है। इसलिए वह उसे सुरक्षित मानकर जाते हैं। कार्यकर्ता ने कहा, “आप विश्वास नहीं करेंगी। हमें एक मामला मिला जहाँ निकाहनामा दिल्ली में पंजीकृत हुआ था, लेकिन लड़की दिल्ली कभी नहीं गई थी।”
ग्रूमिंग जिहाद का तंत्र
कार्यकर्ता ने कहा कि शहर के बाहर स्थित कई मस्जिदों और दरगाह में मौलवी इस काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूरत के नजदीक लिंबायत में एक दरगाह है। जहाँ अच्छे दिखने वाले लड़कों को ट्रेनिंग दी जाती हैं कि लड़कियों से कैसे फ्लर्ट करें और उन्हें कैसे फँसाएँ। ट्रेनिंग अन्य गैर सामाजिक कार्यों की भी होती हैं। लड़कों की अमीर लाइफस्टाइल दिखाने के लिए फंड दिया जाता है। आखिर कैसे इस बात को साबित किया जा सकता है कि 10X10 खोली में रहने वाला बुलेट चलाता है, जबकि उसकी आमदनी तो सिर्फ 2 से 5 हजार की है।
कार्यकर्ता बताते हैं कि शहरों के बाहरी हिस्से में स्थित दरगाह और मदरसे ऐसी गतिविधियों के केंद्र हैं। बता दें कि मदरसे इस्लामी शिक्षा के लिए बनाए गए शिक्षण संस्थान हैं, जबकि दरगाह सूफी-संतों के मकबरे हैं जहाँ की यात्रा को जियारत कहा जाता है। कुछ मुसलमान इन्हें पाक द्वार मानते हैं और मृत सूफी संतों से दुआ माँगने के लिए यहाँ आते हैं। हैरानी इस बात की है कि जो समुदाय बुत पूजन को सबसे बड़ा गुनाह मानता है वो मकबरों को पाक स्थल समझता है।
भरूच में कुछ नर्सिंग कॉलेज और अस्पताल हैं जो कुछ ट्रस्ट द्वारा चलाए जाते हैं ताकि आदिवासी महिलाओं को इस्लाम में परिवर्तित किया जा सके। ऑपइंडिया से बात करते हुए भरूच की कार्यकर्ता ने बताया कि कई आदिवासी महिलाएँ हैं जिन्हें नर्स बनने की ट्रेनिंग दी गई और फिर उन्हें वहीं नौकरी दे दी गई जिसके ट्रस्टी मुसलमान हैं। यहाँ ज्यादातर डॉक्टर अहल-अल-हदीस से जुड़े हैं जिसके अनुयायी ‘परंपरावादी’ के रूप में जाने जाते हैं और कुरान व प्रमाणिक हदीस को ही कानून मानते हैं।
इस कॉलेज का ज्यादातर स्टाफ जबरन धर्मांतरण का पीड़ित है। कार्यकर्ता कहते हैं, “उन्हें जॉब का, खाने का, बेहतर भविष्य का लालच दिया गया। आप जानते हैं कि भरूच के रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 3 पर एक दरगाह है। ये सब अतिक्रमण है। लेकिन कोई कुछ नहीं कर सकता।” कथित तौर पर भरूच की यह दरगाह रेलवे स्टेशन पर लंबे समय से है। मेरी दादी का जन्म और पालन भरूच में ही हुआ था। बचपन में मैं वहाँ कई बार गई, लेकिन मैंने इसे कभी नोटिस नहीं किया।
भरूच रेलवे स्टेशन की दरगाह
अन्य दरगाह जहाँ अक्सर हिंदू जाते हैं, वो किम, परयेज और पालेज में है। भरूच और सूरत में लगभग 7-8 दरगाह ऐसी गतिविधियों में शामिल हैं। भरूच में एक गाँव टंकरिया है, जहाँ की आबादी 12-13 हजार है। इसमें 4 हजार हिंदू हैं, लेकिन वहाँ कोई मंदिर नहीं है। जब हिंदुओं के पास उनकी आस्था के लिए कोई ठिकाना ही नहीं होगा तो वो धीरे-धीरे मिट जाएँगे।
हंसोट में एक दरगाह है जहाँ 95 फीसद लोग जो जाते हैं वो हिंदू हैं । 20 साल से इन मुद्दों पर काम करने वाले कार्यकर्ता ने बताया, “उनके (हिंदुओं के) लिए यही आस्था का ठिकाना है। हिंदुओं ने इन मौलवी को अपना गुरु मानना शुरू कर दिया है। जबकि जब इन दरगाहों पर जाने वाले हिंदू खुद को हिंदू मानते हैं, वहीं उनकी आस्था कमजोर होती है। इसलिए कोई यह नहीं कह सकता कि वे जबरन धर्म परिवर्तन के शिकार हैं, उसका कारण वास्तव में आस्था का कमजोर पड़ना है।”
ट्रेनिंग
कार्यकर्ता ने कहा, “मैंने इनके एक ट्रेनिंग सत्र को अटेंड किया है। उन्हें बताया जाता है कि किन हिंदुओं को निशाना बनाया जाए। उन्हें बाइक, पेट्रोल और उन लड़कियों के लिए पैसे मिलते हैं जो उनका सॉफ्ट टारगेट होती हैं। वे लड़कियों से फ्लर्ट करते हैं, उन्हें कॉलेज तक लिफ्ट देने को कहते हैं और उनसे नजदीकियाँ बढ़ाते हैं। कूड़े बीनने वाले लड़के उन लड़कियों से जुड़ी जानकारी लड़कों को देते हैं।”
कार्यकर्ता के अनुसार, “जिम, डांस क्लास और सैलून भी ऐसी जगह हैं जहाँ ये लड़के उन लड़कियों को निशाना बनाते हैं जो संपन्न परिवारों से हैं और कुछ की तो शादी भी हो रखी होती है। वह उन्हें तवज्जो देते हैं। कई बार मुस्लिम लड़कियाँ भी उनका साथ देती हैं। वह लड़की से दोस्ती करती हैं और फिर मुस्लिम लड़कों को उनका नंबर देती हैं। दोस्ती-दोस्ती में हिंदू लड़कियाँ उनके साथ दरगाह भी चली जाती हैं। ”
वह कहते हैं, “कुछ दरगाह में उन्हें धागा पहनाया जाता है या कुछ ताबीज जैसा। उन्हें दरगाह का पानी पिलाया जाता है। ये एक तरह का वशीकरण होता है जिसके बाद वे दरगाह जाती रहती हैं और धीरे-धीरे हिंदू धर्म में आस्था खत्म होती है और वो इस्लाम की ओर खिंचने लगती हैं।” कार्यकर्ता का कहना है कि एमटीबी कॉलेज और नवयुग कॉलेग की लड़कियाँ इनका प्राइमरी टारगेट होती हैं, जिन्हें ये लड़के बाहर खड़े होकर फँसाते हैं।
कई बार हिंदू दलित लड़कियाँ और कम आय वर्ग की लड़कियाँ निशाना होती हैं। सूरत के अन्य कार्यकर्ता कहते हैं, “यह हमारे समय का एक दुर्भाग्यपूर्ण सच है। ये लड़कियाँ बेहद गरीब तबके से आती हैं। उनके पिता, भाई आमतौर पर शराब के आदी हैं और उन्होंने बचपन से ही घरेलू शोषण देखा है। फिर यह लड़का आता है जो उसे उपहार देता है, उन्हें बताता है कि वह तो बिलकुल नहीं पीता, क्योंकि शराब उनके धर्म में हराम है और अपनी सहानुभूति दिखाता है। लड़की फिर उसकी ओर आकर्षित होने लगती है और अंततः वे भाग जाते हैं, शादी कर लेते हैं। वह इस्लाम में परिवर्तित हो जाती है। इनमें से ज्यादातर मामलों में, लड़कियों को यह विश्वास दिलाया जाता है कि लड़का उसके पिता, भाई के विपरीत उसकी देखभाल करने के लिए आर्थिक रूप से काफी मजबूत है। बाद में जब उन्हें सच्चाई का पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।”
भरूच के एक कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि ये लोग पुराने समय से सवर्ण और दलित के बीच के अंतर का फायदा उठाते आ रहे हैं। ये उनके निशाने हैं। ऐसे में मामलों में कोई खुलकर बोलने भी नहीं आता।
कानून से बच जाते हैं ऐसे लोग- कारण है कमियाँ और समर्थन
धर्मांतरण में शामिल वकील पहले से दस्तावेजों, हलफनामों को तैयार रखते हैं। कार्यकर्ता के अनुसार, “ऐसे लोगों को फंडिंग होती है। आर्थिक समर्थन होता है। उन्हें हाई प्रोफाइल वकील डिफेंड करते हैं। अथावा लाइन्स पर एक ज्वेलरी स्टोर का मालिक ऐसे लोगों की बहुत मदद करता है।”
दिलचस्प बात ये है कि इन गतिविधियों में शामिल कई लड़के अलग राज्य के होते हैं। उनके पास प्रमाण के नाम पर सिर्फ रेंट एग्रीमेंट होता है, जिसमें यह फर्जी नाम इस्तेमाल करते हैं। इसलिए जब मामलों को आगे बढ़ाया जाता है तो वो जल्द ही निपट जाते हैं। कार्यकर्ता कहते हैं, “हम प्रेम और विवाह के ख़िलाफ़ नहीं है। बल्कि मंशा के खिलाफ़ हैं जिसके साथ वो ये करते हैं। विशेष विवाह अधिनियम, जो दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करने वाला माना जाता है, का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसमें संशोधन किया जाना चाहिए और प्रावधान किया जाना चाहिए कि पंजीकरण के समय दोनों पक्षों के कम से कम एक रक्त संबंधी रिश्तेदार मौजूद होना चाहिए।”
हकीकत में कई बार धर्मांतरण का खेल दरगाह के बाहरी परिसर में होता है। कार्यकर्ता कहते हैं कि इस तरह दावा किया जाता है कि दरगाह में धर्मांतरण नहीं होता। लेकिन सिर्फ इसलिए कि वो धर्मांतरण के लिए बाहर आ जाते हैं, इससे उन्हें क्लीनचिट नहीं मिलती। दरगाह, आपराधिक गतिविधियों और खासकर धर्मांतरण के केंद्र बन गए हैं।
1992 में अजमेर में हिंदू लड़कियों का यौन शोषण
साल 1992 में राजस्थान के अजमेर से सुनने में आया था कि वहाँ सैंकड़ों हिंदू लड़कियों का शोषण हुआ। कई लड़कियाँ स्कूल में थी। स्थानीय अखबार ‘नवज्योति’ ने कुछ तस्वीरें और कहानी छापी थी जिसमें बताया गया था कि कैसे स्कूल की लड़कियों को स्थानीय गिरोह के लोग ब्लैकमेल करते हैं। बाद में पता चला कि समूह युवा लड़कियों को निशाना बना रहा था। जहाँ वे एक लड़की को फँसाते थे और फिर उसकी अश्लील तस्वीरें लेते थे, फिर लड़की को ब्लैकमेल करते थे कि वो अपनी क्लासमेट्स से उन्हें मिलवाए ताकि अन्य लड़कियों का रेप हो, उन्हें प्रताड़ित किया जाए और उनकी तस्वीरें ली जाए। ये क्रम चलता रहता था। गैंग अपना दायरा बढ़ा रहा था और शहर में पीड़िताओं की संख्या बढ़ रही थी।
मामला सार्वजनिक होने के बाद पता चला कि अधिकारियों को इस संबंध में एक साल पहले से पता था, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। अखबार के एडिटर दीनबंधु चौधरी ने कहा था कि उन्हें ये स्टोरी चलाने में संदेह था, क्योंकि एक आरोपित खादिमों के परिवार से था। खादिम अजमेर दरगाह के केयरटेकर्स का परिवार है, जो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के पहले अनुयायियों के प्रत्यक्ष वंशज होने का दावा करते हैं और स्थानीय समुदाय के बीच प्रभाव रखते हैं। इसी कारण से पुलिस ने भी इस मामले को रोका था, क्योकि स्थानीय राजनेताओं ने चेतावनी दी थी कि आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई से बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक तनाव होगा।
हालाँकि, अंत में, एक प्राथमिकी दर्ज की गई और जाँच में 18 लोगों को आरोपित बनाया गया। अधिकांश आरोपित मुस्लिम थे, कई खादिमों के परिवारों से थे। वहीं पीड़ितों में अधिकांश हिंदू लड़कियाँ थीं। मुख्य आरोपितों में से एक फारूक चिश्ती था, जो युवा कॉन्ग्रेस नेता भी था, उसको मानसिक रूप से अस्थिर घोषित कर दिया गया था। फारूक चिश्ती अजमेर युवा कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष था, जबकि दो अन्य आरोपित नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती शहर में कॉन्ग्रेस इकाई के उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव थे। इस मामले में एक दुर्भाग्यपूर्ण बात ये थी कि बहुत से पीड़ितों ने कमजोर वर्ग से होने की वजह से पहले ही आत्महत्या कर ली थी।
बता दें कि अजमेर शहर को अक्सर सांप्रदायिक सद्भाव के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। अजमेर शरीफ दरगाह भारत की प्रमुख दरगाहों में से एक है। यह सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती का मकबरा है। इस दरगाह पर हिंदू और मुसलमान दोनों आते हैं। यहाँ तक कि अमिताभ बच्चन, प्रियंका चोपड़ा, शशि थरूर और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जैसे अभिनेता और राजनेता भी दरगाह पर आ चुके हैं। उक्त बलात्कार और ब्लैकमेल मामले में कई आरोपित इसी अजमेर शरीफ दरगाह के कार्यवाहकों (केयरटेकर्स) के परिवारों के थे।
जारी है…
(नोट: निजता और सुरक्षा का ध्यान रखते हुए कुछ व्यक्तियों और जगह के नाम रिपोर्ट में बदले गए हैं। यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में निरवा मेहता ने लिखी है, जिसका हिंदी अनुवाद जयंती मिश्रा ने किया है। मूल लेख आप इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।)
‘मकर संक्रांति’ का त्यौहार वैसे तो दही-चूड़ा, लाई, गुड़ और तिल की मिठाइयों और पतंगबाजी के भक्काटे, अगर आप गुजरात निकल गए हैं तो ‘काए पो छे’ के शोर के लिए मशहूर है। हो सकता है, आप खो भी गए हों कि आख़िरी बार कब आपने लम्बे नख से किसी की पतंग काटी थी। बनारस में कटी पतंग के साथ ‘भक्काटे’ का शोर बच्चों के लिए तो महादेव की डमरू से गूँजा अनहद नाद ही है। वहाँ तो हर शरारत को महादेव से जोड़कर बच निकलने का चलन है। बड़े कितना भी डाँटे लेकिन मकर संक्रांति जिसे बनारस में खिचड़ी भी कहते हैं बच्चों के लिए ‘पतंग उत्सव’ ही हो जाता है। गुजरात में तो पतंगबाजी पूरे परिवार के लिए प्रेम का उत्सव भी हो जाता है।
भारत की सांस्कृतिक विरासत यूँ ही इतनी विविधताओं से भरा नहीं है। इन सबके पीछे छिपा है जीवन का सनातन सिद्धांत। भारत की इस अति प्राचीन धरा पर हर कार्य से पहले उसके सफलतापूर्वक सम्पन्न होने की मंगल कामना का विधान है। और, पूरा होने के बाद उत्सवों का दौर अर्थात जीवन के अप्रतिम आनन्द का भोग, तत्पश्चात ही अगले कार्य की तैयारी। मेहनत पहले और आनंद बाद में, भागवत गीता के शब्दों में कहा जाए तो कर्म पहले और फल बाद में, इस तरह आनंद/मंगल/ख़ुशहाली और कर्म का चक्र निरंतर चलता रहता है।
शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्त्व
आम तौर पर उत्तर भारत में 14 जनवरी को मकर संक्रांति और उसके एक दिन पहले लोहड़ी मनाया जाता है। लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार भारतीय त्योहारों के पीछे एक विज्ञान है। उसी के अनुसार हर त्यौहार की तिथि एक लम्बी-चौड़ी गड़ना के उपरांत ही तय होती है। तो इस बार मकर संक्रांति के लिए कौन सी तिथि तय है और क्यों? इसे जान लेते हैं। शास्त्रों में सूर्य के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। कहते हैं, मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्त्व की। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तराय़ण में प्रवेश करते हैं। सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं।
इस वर्ष 2022 में ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, मकर संक्रांति का त्योहार इस साल 14 और 15 जनवरी यानी दो दिन मनाया जा रहा है। स्थान आधारित पंचांग और पुण्यकाल के कारण पर्व में ऐसी स्थिति बनी है। कुछ पंचागों के अनुसार 14 जनवरी तो कुछ के अनुसार 15 जनवरी को मकर संक्रांति है। मार्तण्ड, शताब्दी पंचाग के अनुसार 14 जनवरी को सूर्य दिन में 2:43 उत्तरायण होंगे और मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पुण्यकाल 14 जनवरी को दिन में 2:43 से सांयकाल 5:34 तक रहेगा। वहीं महावीर पंचांग के अनुसार 14 जनवरी की रात्रि 8 :49 पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। सूर्यास्त के बाद सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो संक्रांति होने पर पुण्यकाल अगले दिन मान्य होता है। इसके अनुसार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी।
लोहड़ी मनाती पंजाबी कुड़ियाँ
लोकपर्व की ऐतिहासिकता और गूढ़ वैज्ञानिकता
आज जब वामपंथी प्रकोप से हमारे सभी पर्व त्यौहार उनके विषवमन का शिकार होते जा रहे हैं। ऐसे में अपनी भावी पीढ़ियों को हर त्यौहार की न सिर्फ ऐतिहासिकता बल्कि परंपरा और उसके पीछे की गूढ़ वैज्ञानिकता को भी समझाना ज़रूरी हो जाता है ताकि विषैले वामपंथ की हर विषबेल को काटा जा सके।
ऐसे में यह समझना ज़रूरी है कि लेख के शुरुआत में मकर संक्रांति का जो सामान्य परिचय दिया गया है तो क्या मकर संक्रांति का मतलब इतना ही है? चलिए इसी बहाने मकर संक्रांति के पीछे छिपे गहरे रहस्यों पर भी प्रकाश डालता हूँ। किस तरह मकर संक्रांति का पर्व ब्रह्मांडीय और मानव ज्यामिति की एक गहरी समझ पर आधारित है। मकर संक्रांति फ़सल कटाई के उपरांत आनंद का उत्सव भी है। मकर संक्रांति को फ़सलों से जुड़े त्यौहार या पर्व के रूप में भी बहुतायत कृषक परिवारों में जाना व पहचाना जाता है।
दरअसल, यही वह समय है, जब फ़सल तैयार हो चुकी है और कृषि प्रधान देश का कृषक समाज उसी की ख़ुशी व उत्सव मना रहे होते हैं। इस दिन हम हर उस चीज के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं, जिसने खेती करने व फ़सल उगाने में मदद की है। कृषि से जुड़े संसाधनों व पशुओं का भी जिनका खेती में बड़ा योगदान होता है। इन सबसे भी परे, इस त्यौहार का खगोलीय और आध्यात्मिक महत्व ज़्यादा है।
‘मकर’ का अर्थ है शीतकालीन समय अर्थात ऐसा समय जब सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में सबसे नीचे होता है। और ‘संक्रांति’ का अर्थ है गति। मकर संक्रांति के दिन राशिचक्र में एक बड़ा बदलाव आता है। इस खगोलीय परिवर्तन से जो नए बदलाव होते हैं उन्हें हम धरती पर देख और महसूस कर सकते हैं। ये समय आध्यात्मिक साधना के लिए भी महत्वपूर्ण है। तमाम योगी, साधक एवं श्रद्धालु इस अवसर का उपयोग अपनी आत्मिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए करते हैं। सनातन परंपरा में महाकुम्भ, कुम्भ, अर्ध कुम्भ और मकर संक्रांति के स्नान का भी बड़ा महात्म्य है। इसलिए मकर संक्रांति पर खासतौर से गंगा स्नान करने को श्रद्धालु माँ गंगा के पावन तट पर उमड़ पड़ते हैं फिर चाहे वो हरिद्वार हो, संगम तट प्रयागराज या मोक्षदायिनी काशी सभी जगह भक्तों की भीड़ देखी जा सकती है।
लोकपर्व मकर संक्रांति पर गंगा काशी में गंगा स्नान
क्या होती है संक्रांति
वैसे तो साल भर में 12 संक्रान्तियाँ होती हैं। पर इनमें से दो संक्रातियों का विशेष महत्व है। पहली मकर संक्रांति और दूसरी, इससे बिल्कुल उलट, जून महीने में होने वाली मेष संक्रांति। इन दोनों के बीच में कई और संक्रान्तियाँ होती हैं। हर बार जब-जब राशि चक्र बदलता है तो उसे संक्रांति कहते हैं।
संक्रांति शब्द का मतलब हमें पृथ्वी की गतिशीलता के बारे में याद दिलाना है, और यह एहसास कराना है कि हमारा जीवन इसी गतिशीलता की देन है और इसी से पोषित और संवर्धित भी। कभी सोचा है आपने अगर यह गति रुक जाए तो क्या होगा? अगर ऐसा हुआ तो जीवन संचालन से जुड़ा हर आयाम ठहर जाएगा।
हर 22 दिसंबर को अयनांत (Solstice) होता है। सूर्य के संदर्भ में अगर कहूँ तो इस दिन पृथ्वी का झुकाव सूर्य की तरफ़ सबसे ज़्यादा होता है। फिर इस दिन के बाद से गति उत्तर की ओर बढ़ने लगती है। फलस्वरूप, धरती पर भौगोलिक परिवर्तन बढ़ जाता है। हर चीज़ बदलनी शुरू हो जाती है। यही गतिशीलता ही है, जो जीवन का आधार बनी। जीवन की प्रक्रिया, आदि और अंत भी इसी गतिशीलता की उपज है।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व
जब बात इस गतिशीलता के पीछे के कारणों को जानने की आएगी तो आदिदेव महादेव शिव ‘शंकर’ की विराटता और अनश्वरता की बात आएगी। शिवोहम की बात आएगी। इस चराचर ब्रह्माण्ड के पीछे जो है, वह है शिव। शिव अर्थात वह जो नहीं है। जो नहीं है, वही पूर्ण अचल है। कहा जाता है निश्चलता ही गति का आधार और मूल भी है। बात पहेली सी लग सकती है, इसे आम भाषा में समझाता हूँ।
जब कोई इंसान अपने भीतर की स्थिरता से संबंध बना लेता है, तभी वह गतिशीलता का आनंद ले सकता है। अन्यथा इंसान, जीवन की गतिशीलता से डर जाता है। मनुष्य के जीवन में आने वाला हर बदलाव या किसी भी तरह का परिवर्तन उसके लिए अक्सर दुःख या पीड़ा का कारण हो जाता है।
आज इस भागती-दौड़ती दुनिया का तथाकथित आधुनिक जीवन ही ऐसा हो चुका है। जिसके हर बदलाव में पीड़ा निहित है। आज जब भी बचपन एक तनाव बन चुका है, किशोरावस्था या युवावस्था उससे भी बड़ा दुख। प्रौढ़ावस्था असहनीय है। बुढ़ापा डरा और सकुचा-सहमा हुआ और मृत्यु या जीवन का अंत किसी घोर आतंक या ख़ौफ़ से कम नहीं है। आज पैदा होने से लेकर मृत्यु पर्यन्त जीवन के हर स्तर या चरण पर कुछ न कुछ समस्या है।
वह इसलिए है, क्योंकि इंसान को हर बदलाव से दिक्कत है। ऐसा इसलिए है कि, इन्सान यह स्वीकार करने को ही तैयार नहीं कि जीवन की असली प्रकृति ही बदलाव है। परिवर्तन प्रकृति का नियम है। सदगुरु जग्गी वासुदेव कहते हैं, “आप गतिशीलता का तभी आनंद ले पाएँगे या उत्सव मना पाएँगे, जब आपका एक पैर स्थिरता में दृढ़ता से जमा होगा। और दूसरा गतिशील।” मकर संक्रांति का पर्व इस बात का भी उद्घोष है कि गतिशीलता का उत्सव मनाना तभी संभव है, जब आपको अपने भीतर स्थिरता का एहसास हो।
मकर संक्रांति के बाद से सर्दी धीरे-धारे कम होने लगती है। इस तथ्य से तो आप परिचित ही हैं कि हम सभी सौर ऊर्जा से संचालित हैं। तो मकर संक्रांति का महत्व ये समझने में भी है कि हमारे जीवन का स्रोत कहाँ है? इस ग्रह पर व्याप्त हर एक पौधा, पेड़, कीट, पतंगा, कीड़ा, जानवर, पशु-पक्षी, पुरुष, महिला, बच्चा, हर प्राणी सौर ऊर्जा से संचालित होता है। सौर ऊर्जा कोई नई तकनीक नहीं है। हम सभी सौर ऊर्जा से ही संचालित हैं, सौर ऊर्जा धरती पर जीवन के आरम्भ और उत्कर्ष का आधार भी है।
लोकपर्व मकर संक्रांति पर पतंगबाजी
सदगुरु जग्गी वासुदेव का मकर संक्रांति को लेकर कहना है कि भारतीय संस्कृति में हम साल के इस नए पड़ाव का, जब हमारे पास सर्वाधिक सौर ऊर्जा होती है, हम इसे ‘मकर संक्रांति’ के रूप में मनाते हैं। इसलिए हम सूरज का स्वागत करते हैं। जैसे-जैसे हम हिमालय से दूर जाते हैं। उन जगहों पर आज से ही सूर्य की प्रचंडता बढ़ने लगती है। लोग ग्रीष्म ऋतु के आगमन की आहट पा परेशान होने लगते हैं। उनकी बढ़ती परेशानी की वज़ह ग्लोबल वार्मिंग भी है। आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़रूरत है एक ऐसा माहौल बनाने की, जहाँ हम अपने जीवन के स्रोत का अधिकतम लाभ उठा सकें। ये त्यौहार हमें ये भी याद दिलाते हैं कि हमें अपने वर्तमान और भविष्य को पूरी चैतन्यता और जागरूकता के साथ गढ़ने की ज़रूरत है।
यदि आप चाहते हैं कि इस देश की भावी पीढ़ियाँ आने वाली गर्मी का स्वागत करने एवं आनंद लेने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम हो, तो यह तभी संभव है जब हम प्रकृति के साथ एक अनुकूलन पैदा करें। धरती, वनस्पतियों, जल संसाधनों से समृद्ध और मिट्टी में पानी को सोखने में सक्षम हो। तभी हम सही मायने में मकर संक्रांति का जश्न मना सकते हैं।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में उम्मीदवारों की सूची जारी होने से पहले भाजपा से नेताओं का जाने का ताँता लगा हुआ है। ये वो नेता हैं जो चुनावी मौसम के हिसाब से रंग बदलते हैं। चुनाव पूर्व दल बदलने को लेकर उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने इन नेताओं पर तीखा हमला बोला है।
स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि इन लोगों को भाजपा टिकट नहीं देने जा रही थी, इसी लिए ये लोग पार्टी को छोड़ कर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में शामिल हो रहे हैं। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए उन्होंने ट्वीट कर कहा, “जिन्हें डबल इंजन की ट्रेन का टिकट नहीं मिल रहा उन्हें अपने डग्गामार वाहन का ‘ब्लैक’ में टिकट दे रहे हैं टीपू सुल्तान!”
जिन्हें ‘डबल इंजन’ की ट्रेन का टिकट नहीं मिल रहा उन्हें अपने डग्गामार वाहन का ‘ब्लैक’ में टिकट दे रहे है टीपू सुल्तान!
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछड़ा वर्ग का सबसे बड़ा हितैषी बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिल में इस देश के गरीब, दलित, वंचित और पिछड़े बसते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने समाज के जिन वर्गों का केवल शोषण किया, उन्हें प्रधानमंत्री मोदी ने अपना मानकर गले लगाया, सम्मानित किया और सशक्त बनाया।
भाजपा पर पिछड़ा वर्ग की अनदेखी करने का आरोप लगाकर पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर कटाक्ष करते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “ओबीसी समाज को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जितना भाजपा में मिला है उतना किसी सरकार में नहीं मिला. हमारे लिए ‘P’ का अर्थ ‘पिछड़ों का उत्थान’ है. कुछ लोगों के लिए ‘P’ का अर्थ सिर्फ ‘पिता-पुत्र-परिवार’ का उत्थान होता है।”
ओबीसी समाज को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जितना भाजपा में मिला है उतना किसी सरकार में नहीं मिला।
हमारे लिए ‘P’ का अर्थ ‘पिछड़ों का उत्थान’ है।
कुछ लोगों के लिए ‘P’ का अर्थ सिर्फ ‘पिता-पुत्र-परिवार’ का उत्थान होता है।
वहीं, भाजपा के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जिनको टिकट नहीं मिलने की संभावना है, वे जा सकते हैं। UP की राजनीति में ऐसा होता है। जिनको टिकट नहीं मिलने वाले हैं, वे इधर-उधर जाते हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास अधिक विधायक हैं तो हम कुछ विधायकों के टिकट कटेंगे। जिनको इसकी सूचना पहले मिल जाती है, वे दूसरे दलों में जाएँगे ही।
जिनको टिकट नहीं मिलने की संभावना है वे जा सकते हैं। UP की राजनीति में ऐसा होता है। जिनको टिकट नहीं मिलने वाले हैं, वे इधर-उधर जाते हैं। हमारे पास ज़्यादा विधायक है तो हम कुछ विधायकों के टिकट काटेंगे उनको पहले सूचना मिल जाती है तो वे दूसरे दलों में जाएंगे ही: कैलाश विजयवर्गीय, BJP pic.twitter.com/sYwPYqcWV4
गौरतलब कि पिछले कुछ दिनों में प्रदेश के कई नेता भाजपा से इस्तीफा दे दिए। इनमें से कई नेता समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। इस्तीफा देने वालों में स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, धर्मपाल सिंह सैनी, शिकोहाबाद से भाजपा विधायक मुकेश वर्मा, शाहजहाँपुर के तिलहर से विधायक रोशनलाल वर्मा, बिल्हौर से विधायक भगवती प्रसाद सागर, तिंदवारी से विधायक ब्रजेश प्रजापति, सीतापुर सदर के विधायक राकेश वर्मा, नानपारा से विधायक माधुरी वर्मा, विनय शाक्य, सीताराम वर्मा शामिल हैं। खबर आ रही है कि बाला प्रसाद अवस्थी, दिग्विजय नारायण चौबे, राम फेरन पांडे ने भी इस्तीफा दे दिया है।
बता दें कि स्वतंत्र देव सिंह उत्तर प्रदेश भाजपा कोर ग्रुप और केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के लिए पिछले 3 दिनों से दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय चुनाव समिति की लगभग तीन घंटे की बैठक के बाद पहले चरण में होने के चुनावों के लिए 170 उम्मीदवारों के नामों पर सहमति बन गई है और उनके नामों की सूची जल्दी ही जारी की जा सकती है।