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‘2000 मस्जिद, बाबरी के लिए ₹1000 करोड़, मुस्लिमों को 30% रिजर्वेशन’: वायरल दावा- अखिलेश का वादा, सपा नेता का इनकार

सोशल मीडिया व्हाट्सएप पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया गया है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव ने वादा किया है कि अगर उनकी पार्टी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा 2022 चुनावों में सत्ता में आती है तो वह प्रदेश के पश्चिम और पूर्वांचल क्षेत्र में 2000 नई मस्जिदों का निर्माण करेंगे। वायरल मैसेज के अनुसार, 2000 मस्जिदों के अलावा, सपा प्रमुख ने दलितों और पिछड़े वर्गों के आरक्षण को समाप्त करके मुसलमानों के लिए 30% आरक्षण का वादा किया है।

मैसेज में आगे लिखा गया है कि अगर समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है, तो अयोध्या का नाम बदल दिया जाएगा और अयोध्या में बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए 1000 करोड़ रुपए की राशि दी जाएगी।

व्हाट्सएप पर वायरल वीडियो

अखिलेश यादव ने यह भी कहा था कि उनकी सरकार उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धार्मिक धर्मांतरण निषेध अध्यादेश, 2020 (लव जिहाद कानून) को निरस्त कर देगी। अखिलेश यादव ने कथित तौर पर वायरल हुए व्हाट्सएप संदेश में घोषणा की, “यह मुस्लिमों से मेरा वादा है।” 

व्हाट्सएप को फॉरवर्ड करते हुए, ट्विटर यूजर मदन नायक ने @mgnayak5 हैंडल से लिखा, “यह व्हाट्सएप मैसेज समाजवादी पार्टी के आईटी सेल द्वारा यूपी मे मुसलमानों के व्हाट्सऐप पर भेजा जा रहा है, इस मैसेज को 100 करोड़ हिंदुओं के पास खासकर यूपी के एक-एक हिंदुओं के पास भेजें।”

दैनिक भास्कर के संवाददाता आदित्य तिवारी ने वायरल संदेश के पीछे की सच्चाई जानने के लिए समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मनोज काका से बात की। काका ने मैसेज को बिल्कुल फेक करार दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग यह दावा करते हुए भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं कि अगर सपा सरकार बनेगी, तो राम मंदिर का निर्माण रुक जाएगा, वह झूठ और अफवाहें फैला रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में मतदाताओं को रिझाने के लिए अखिलेश के कदम

हालाँकि, व्हाट्सएप फॉरवर्ड में किए गए दावों की पुष्टि करने के लिए कोई मीडिया रिपोर्ट नहीं है। कई मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि अखिलेश यादव ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सत्ता में आने पर AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल से प्रेरणा लेते हुए घरों में 300 यूनिट मुफ्त बिजली और सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली देने का वादा किया है। यादव ने सत्ता में आने पर राज्य में युवाओं और छात्रों के बीच लैपटॉप बाँटने का वादा कर युवाओं का वोट भी लुभाने की कोशिश की है।

उल्लेखनीय है कि AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने गोवा और पंजाब राज्यों में मुफ्त बिजली की गारंटी देने के लिए इसी तरह के चुनावी वादे किए थे, वहाँ इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। अखिलेश यादव पर प्रतिक्रिया देते हुए, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जब बिजली ही नहीं देते थे तो मुफ्त कहाँ से होता। सीएम ने कहा कि उन्होंने तो उलटा लोगों से वसूली की है, कम से कम इसके लिए तो जनता से माफी माँग लें।

समाजवादी पार्टी की मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति

समाजवादी पार्टी हमेशा से मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति के लिए जानी जाती रही है। दरअसल, हाल ही में AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक चुनावी रैली के दौरान समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए अखिलेश यादव को याद दिलाया था कि कैसे यूपी में मुस्लिम वोटों के सहारे सपा सत्ता में आई थी।

अखिलेश यादव ने भी समाजवादी विजय रथ यात्रा के दौरान एक पार्टी रैली में बोलते हुए मुहम्मद अली जिन्ना की प्रशंसा की थी। सम्मेलन अक्टूबर में उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में आयोजित किया गया था, जहाँ समाजवादी पार्टी के प्रमुख को पाकिस्तान के संस्थापक और भारत विभाजन के वास्तुकार मुहम्मद अली जिन्ना का महिमामंडन करते हुए देखा गया था। मालूम हो कि जब अखिलेश यूपी के सीएम थे, तो उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर केवल एक बैठक बुलाने के लिए गृह सचिव को निलंबित कर दिया था।

दरअसल, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एक बार अखिलेश यादव को याद दिलाया था कि जब वह सीएम थे, तो उनका प्रशासन उनके वोट बैंक को संतुष्ट करने के लिए कब्रिस्तान बनाने में व्यस्त थे और उनके पिता ने सुरक्षा कर्मियों को कारसेवकों पर गोलियाँ चलाने का आदेश दिया था।

‘₹67 लाख लिए, मायावती ने चुनाव की तैयारी करने को कहा, पर टिकट दिया सलमान को’: फूट-फूट रोए BSP नेता अरशद राणा, वीडियो वायरल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच मुजफ्फरनगर जिले से BSP नेता अरशद राणा ने टिकट के नाम पर 67 लाख (₹6700000) रुपए हड़पने का आरोप लगाया है। यह आरोप उनकी ही पार्टी के पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी शम्सुद्दीन राईन पर लगा है। इसकी शिकायत उन्होंने मुज़फ्फरनगर पुलिस से की है। उनका फूट-फूट कर रोते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वायरल वीडियो मुजफ्फरनगर जिले के कोतवाली नगर का है। अरशद राणा खुद को पीड़ित बताते हुए इंस्पेक्टर आनंद देव के आगे फूट-फूट कर रोने लगे। वो कहते सुनाई दे रहे हैं, “इन्होने मेरा तमाशा बना दिया। मैंने तो कभी इस तरह से सोचा भी नहीं था। मुझे अंदर बिठा कर ये कहते कि हम तेरे जगह किसी और को चुनाव लड़वा रहे हैं। सारे एड होर्डिंग मैं ही कर रहा हूँ। उसके बाद भी ये मेरे साथ ऐसा कर रहे हैं।” वीडियो में पुलिस अधिकारी उन्हें परेशान न होने का ढाँढस बँधाते हुए सुनाई दे रहे हैं।

अरशद राणा ने अपने फेसबुक पर यूट्यूब का एक वीडियो भी शेयर किया है। इस वीडियो में उनका दावा है कि आरोपित शम्सुद्दीन राईन उनके नाम की घोषणा विधान सभा प्रभारी के तौर पर कर रहे हैं। अपने कैप्शन में उन्होंने लिखा है, “मैं चरथावल विधानसभा प्रभारी अरशद राणा सभी फ्रेंड्स के साथ में यह वीडियो वह साझा कर रहा हूँ जिसमें शमसुद्दीन राइन पश्चिम प्रभारी घोषणा करते हुए साफ-साफ नजर आ रहे हैं और पूरे मंडल के लोग मंच पर मौजूद है।”

अरशद राणा के मुताबिक, “मुझे दिसंबर 2018 में ही बसपा के पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी शमशुद्दीन राईन ने चरथावल विधानसभा सीट पर प्रत्याशी बनाने का आश्वासन दिया था। इसके बदले मुझ से कुछ रुपयों की माँग की गई थी जिसके लिए मैं तैयार हो गया था। इसके बाद इसी महीने मुजफ्फरनगर के पार्टी कार्यालय पर कई पदाधिकारियों की मौजूदगी में मुझे साल 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ाने के लिए प्रत्याशी भी घोषित कर दिया गया। पार्टी के अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग समय पर मुझ से 67 लाख रुपए ठग लिए। इतने के बाद भी चरथावल विधान सभा पर सलमान सईद को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में अरशद राणा से बात की। अरशद राणा ने बताया, “मैं 2 बार मायावती से मिल चुका हूँ। उन्होंने भी मुझ से कहा था कि जाओ चुनाव की तैयारी करो। शमशुद्दीन राईन किसी से फोन पर कह रहे हैं कि मैं अरशद राणा को जानता भी नहीं। जबकि मैंने उनकी ही वीडियो को अपने फेसबुक पर शेयर किया है जिसमें वो मेरा नाम ले रहे हैं। मैंने अपने फेसबुक पर मायावती के लखनऊ स्थित आवास के आगे आत्मदाह की धमकी दी थी। इसके बाद जिले के पुलिस और अन्य अधिकारी लगातार मुझ से सम्पर्क कर रहे हैं। कल मुझ से तहरीर भी पुलिस ने ली पर अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।”

‘वेश्या मना कर सकती, फिर पत्नी क्यों नहीं’: जानिए क्या है धारा 375, मैरिटल रेप पर कोर्ट में क्यों छिड़ी है बहस

किसी महिला की इच्छा के विरुद्ध उससे जबरन शारीरिक संबंध बनाने को आम भाषा में बलात्कार कहा जाता है। लेकिन यही काम अगर किसी शादीशुदा महिला के साथ उसका पति करे तो लोग इसे मैरिटल रेप कहने से भी हिचकते हैं और इसे अपराध की श्रेणी में भी नहीं रखते। हालाँकि, बीते कुछ समय में मैरिटल रेप को अपराध श्रेणी में रखवाने के लिए कई बार माँग उठी और कोर्ट में याचिकाएँ दायर हुईं। अब इन्हीं याचिकाओं पर दिल्ली हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने आरआईटी फांउडेशन और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वीमेन्स एसोसिएशन की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए गुरुवार को सवाल किया कि आखिर विवाहित महिलाओं को अपने पति को न कहने के अधिकार से कैसे वंचित रखा जा सकता है जबकि अन्य सभी गैर-सहमति वाले मामले में रेप का केस दर्ज हो सकता है।

केस की सुनवाई के समय जस्टिस राजीव शकधर ने इस दलील को माना कि एक वेश्या को भी हक होता है कि वो अपने ग्राहक को मना करे तो आखिर महिला जो कि पत्नी है उसे पति को मना करने के अधिकार से कैसे दूर किया जा सकता है।

वहीं जस्टिस सी हरि शंकर ने एक वेश्या और ग्राहक के रिश्ते की तुलना पति-पत्नी के रिश्ते से करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ग्राहक की जो उम्मीद सेक्स वर्कर से होती है उसे वैवाहिक रिश्ते के साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए। अगर आप ऐसा करते हैं तो ये आप बहुत गलत है।

बता दें कि मैरिटल रेप के अपराधीकरण के लिए धारा 375 के अपवाद को खत्म करने की माँग की गई है जिसके तहत अगर पत्नी 15 साल से ऊपर है तो मैरिटल रेप अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। न्याय मित्रा व वरिष्ठ वकील राजशेखर राव ने इस सुनवाई के दौरान सेक्स वर्कर्स का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि जब तक कानून पति को बचाता रहेगा तब तक मैरिटल रेप बलात्कार नहीं कहा जा सकेगा।

इस दलील को सुन जहाँ जस्टिस राजीव शकधर ने राव के साथ सहमति दी। वहीं न्यायमूर्ति सी हरि शंकर ने इस उदाहरण पर आपत्ति जताई। कोर्ट ने कहा कि वह अगले हफ्ते तक इस मामले की सुनवाई जारी रखेंगे। अगर सरकार अपवाद को खत्म करने का फैसला कर लेती है तो उन्हें इस मामले में फैसला नहीं लिखना पड़ेगा।

जानकारी के मुताबिक इस मामले में केंद्र ने हाई कोर्ट में बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर परामर्श लेना शुरू कर दिया है। सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि मामले में रचनात्मक दृष्टिकोष पर विचार हो रहा है। वहीं मोनिका अरोड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार ने आपराधिक कानूनों में संशोधन के संबंध में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और भारत के मुख्य न्यायाधीश और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों सहित विभिन्न हितधारकों से सुझाव माँगे हैं। 

बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर केरल कोर्ट के फैसले से NCW भी हैरान: पीड़िता का साथ देने वाली नन ने कहा- हम लड़ेंगे, यह बाहुबल-धनबल की जीत

केरल की एक अदालत ने शुक्रवार (14 जनवरी 2022) को बहुचर्चित नन रेप केस (Nun Rape Case) में बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी कर दिया। कोर्ट के इस फैसले से पर हैरानी जताई जा रही है। मामले में 83 गवाह, 30 से अधिक सबूत और 2000 पन्नों की चार्जशीट के बावजूद बिशप बरी किए गए हैं।

सिस्टर अनुपमा समेत 4 नन ने इस मामले पर दुख जताया और कहा कि यह धनबल और बाहुबल की जीत है। उन्होंने हाई कोर्ट में भी अपील करने की बात कही। उन्होंने कहा, “हम अपनी लड़ाई तब तक जारी रखेंगे जब तक हमारी बहन को न्याय नहीं मिल जाता। अगर हमें मरना भी पड़े तो भी हम लड़ाई जारी रखेंगे। बिशप फ्रैंको के पास धनबल और बाहुबल दोनों है।” बता दें कि सिस्टर एल्फी, अनुपमा, जोसेफिन, नीना रोज और एंसेट ने पीड़ित नन का खुले तौर पर समर्थन किया था। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद एक बार फिर इन्होंने कहा है कि वे कॉन्वेंट के अंदर रह कर ही पीड़िता के लिए लड़ेंगी। 

गौरतलब है कि पीड़ित नन ने 28 जून 2018 को पुलिस में मामला दर्ज कराया था। इस मामले में बिशप फ्रैंको मुलक्कल को 19 सितंबर, 2018 में अरेस्ट किया गया था। अप्रैल 2019 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। हालाँकि 40 दिनों के बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। फ्रैंको ने FIR रद्द कराने के लिए केरल हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, लेकिन दोनों कोर्ट ने मना कर दिया था। फ्रैंको मुल्लकल के खिलाफ स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) ने जाँच की थी। टीम ने कोर्ट में 80 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था। इसमें 83 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। सबूत के तौर पर लैपटॉप, मोबाइल फोन और मेडिकल रिपोर्ट जमा किए गए थे। 

इस हाई प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान शुक्रवार को कोट्टायम की अतिरिक्त सत्र न्यायालय में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। बिशप ने अपने ऊपर लगे आरोपों को मानगढ़ंत बताया था। नन यौन शोषण मामले में जाँच का नेतृत्व कर रहे कोट्टायम के एसपी हरिशंकर ने कहा, “हम उम्मीद कर रहे थे कि आरोपित को सजा दी जाएगी। हमने जाँच को लेकर पहले ही बैठक करने का फैसला लिया था।” उन्होंने कहा कि यह फैसला स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ अपील की जानी चाहिए।

लोक अभियोजक जितेश जे. बाबू ने भी कहा है कि पीड़िता के बयान के बावजूद ऐसा फैसला आया। उन्होंने कहा, ‘‘इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।’’ सरकार की मँजूरी मिलने के बाद फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी इस फैसले पर हैरानी जताई और ट्वीट किया, “केरल अतिरिक्त जिला और सत्र अदालत के फैसले से स्तब्ध हूँ। पीड़ित नन को उच्च न्यायालय जाना चाहिए। न्याय की इस लड़ाई में NCW उसके साथ खड़ा है।”

मालूम हो कि बिशप आरोप था कि उसने 2014 और 2016 के बीच अपने कॉन्वेंट में एक नन के साथ 13 बार बलात्कार किया। उन पर नन को गलत तरीके से कैद करने, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने और आपराधिक धमकी देने का आरोप था। बिशप पर पैसा और राजनैतिक संपर्कों की वजह से बचे रहने का भी आरोप लग चुका है।

इस मामले से जुड़े घटनाक्रम इस प्रकार हैं:-

29 जून 2018: जालंधर सूबा के बिशप फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ एक नन की शिकायत के आधार पर कुराविलंगड पुलिस ने मामला दर्ज किया। शिकायत के मुताबिक मिशनरीज ऑफ जीसस कॉन्वेंट में बिशप ने नन के साथ कई बार दुष्कर्म किया।

1 जुलाई, 2018: एर्नाकुलम आर्चडीओसीज़ में भक्तों की बिरादरी, आर्चडियोसेसन मूवमेंट फॉर ट्रांसपेरेंसी (AMT) के संयोजक जॉन जैकब ने कार्डिनल मार जॉर्ज अलंचेरी के खिलाफ शिकायत दर्ज की। उन्होंने कार्डिनल पर नन के बलात्कार के आरोप के बारे में पुलिस को सूचित करने में विफल रहने का आरोप लगाया।

05 जुलाई, 2018: चांगनचेरी में प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट ने नन का बयान दर्ज किया। यह मामले में विशेष जाँच दल (SIT) द्वारा दिए गए अनुरोध के आधार पर कैमरे में किया जाता है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने जाँच में तेजी लाने की माँग की है।

12 जुलाई, 2018: जाँच दल ने कन्नूर जिले के परियाराम और पनाप्पुझा में मठों से आगंतुकों के रजिस्टर को जब्त कर लिया, जब यह पाया गया कि बिशप ने नन द्वारा बताए गए समय के दौरान कॉन्वेंट का दौरा किया था।

24 जुलाई, 2018: कई महिला संगठनों ने दिल्ली में वेटिकन के राजदूत गिआम्बतिस्ता डिक्वाट्रो के साथ एक ज्ञापन सौंपा। उन्होंने उनसे अनुरोध किया कि वह पोप को बिशप को उनके पद से बर्खास्त करने की सलाह दें।

25 जुलाई, 2018: नन के एक रिश्तेदार ने आरोप लगाया कि उन्हें एक दोस्त के जरिए केस वापस लेने का बड़ा ऑफर मिला है। कुछ दिनों के बाद, पादरी एक नन को बुलाता है जो पीड़ित नन के साथ खड़ी होती है और उसे शिकायत वापस लेने की सलाह देती है। कॉल मीडिया में उजागर हो गया है। पुलिस ने नन का बयान दर्ज किया।

30 जुलाई, 2018: कुराविलंगड पुलिस ने फोन करने वाले पादरी फादर जेम्स एर्थायिल के खिलाफ मामला दर्ज किया। सबूत जुटाने के लिए जाँच टीम दिल्ली पहुँची। उन्होंने उज्जैन के बिशप मार सेबेस्टियन वडक्कल का बयान दर्ज किया। उसी दिन कुराविलंगड एसआई का तबादला हो जाता है।

8 अगस्त 2018: जाँच दल बिशप मुलक्कल से पूछताछ करने जालंधर पहुँचा। वे सिस्टर रेजिना, मिशनरीज ऑफ जीसस की मदर जनरल, सिस्टर्स अमला और मारिया के बयान दर्ज करते हैं जो मिशन के कार्यालय में काम करते हैं।

13 अगस्त, 2018: बिशप का निजी सुरक्षा गार्ड मीडियाकर्मियों से भिड़ जाता है और कैमरों और अन्य उपकरणों को तोड़ देता है। वे मीडियाकर्मियों को बिशप के घर के अंदर बंद करने का भी प्रयास करते हैं। इसी दिन अदालत ने बिशप के खिलाफ आरोप तय किए।

30 अगस्त, 2018: संयुक्त ईसाई परिषद (JCC) ने बिशप मुलक्कल की गिरफ्तारी की माँग को लेकर कोच्चि में भूख हड़ताल शुरू की।

11 सितंबर, 2018: पीड़ित नन ने भारत में वेटिकन के राजदूत को पत्र लिखा। उसने अपने लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए वेटिकन के हस्तक्षेप की माँग की। बिशप ने पीड़िता पर आरोप लगाया कि उसे चर्च विरोधी लोगों द्वारा स्पॉन्सर किया गया था।

12 सितंबर, 2018: मिशनरीज ऑफ जीसस ने बिशप मुलक्कल की गिरफ्तारी की माँग को लेकर आंदोलन कर रही ननों के खिलाफ जाँच शुरू की। पीड़ित नन भी पूछताछ के तहत छह नन में से एक है।

17 सितंबर, 2018: बिशप मुलक्कल ने पोप को पत्र लिखा। उन्होंने पोप से अस्थायी रूप से कर्तव्यों से दूर रहने की अनुमति माँगी क्योंकि उन्हें मामले पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

19 सितंबर, 2018: जाँच दल ने फ्रैंको मुलक्कल से थ्रिप्पुनिथुरा में सात घंटे तक पूछताछ की। तीन दिन बाद पुलिस ने मुलक्कल को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

9 अप्रैल, 2019: जाँच अधिकारी वैकोम डीएसपी के सुभाष ने मामले में पाला में एक मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष आरोप पत्र प्रस्तुत किया।

5 अगस्त 2020: सुप्रीम कोर्ट ने आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया।

7 जुलाई 2020: केरल हाई कोर्ट ने नन रेप मामले में आरोपित बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया

7 अगस्त, 2020: बिशप मुलक्कल को दूसरी बार जमानत मिली। उनकी जमानत रद्द होने के बाद उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था।

13 अगस्त 2020: कोट्टायम अदालत ने आरोपित बिशप के खिलाफ आरोप तय किए।

सितंबर 2020: अतिरिक्त सत्र न्यायालय, कोट्टायम में सुनवाई शुरू।

14 जनवरी, 2022: नन रेप मामले में कोर्ट ने आरोपित बिशप मुलक्कल को बरी कर दिया।

गणतंत्र दिवस से पहले देश दहलाने की बड़ी साजिश नाकाम: NSG ने दिल्ली के गाज़ीपुर में किया बम निष्क्रिय तो J&K और पंजाब में मिले भारी विस्फोटक

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) से पहले देश को दहलाने की साजिशें सामने नाकाम हो गईं है। देश की राजधानी दिल्ली, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में आज सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी साजिश नाकाम की हैं। जहाँ दिल्ली पुलिस और NSG ने दिल्ली के गाजीपुर इलाके में विस्फोटक निष्क्रिय कर के एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया गया है। वहीं पंजाब और जम्मू कश्मीर में भी IED और बिस्फोटक सामग्री बरामद हुई है। दिल्ली में आज सुबह 10.20 पर फोन से एक संदिग्ध बैग होने की सूचना मिली थी। विस्फोटक रखने वाले ने स्कूटी का प्रयोग किया था। फ़िलहाल विस्फोटक को बिना किसी जन धन हानि के निष्क्रिय कर दिया गया है।

घटनास्थल गाजीपुर फूलमंडी बताया जा रहा है। यहाँ पर एक दुकानदार ने बताया कि स्कूटी से सामान लेने आया एक व्यक्ति अपनी स्कूटी और बैग वहीं छोड़ कर चला गया। जब वो कुछ देर तक नहीं आया तब शक होने पर दुकानदार ने पुलिस को फोन किया। आनन फानन में पुलिस टीम बम स्क्वायड और फायर ब्रिगेड के साथ मौके पर पहुँच गई। सुरक्षा की दृष्टि से इलाके को खाली करवा लिया गया। सघन तलाशी हुई और बाद में बैग को सुरक्षित जगह ले जाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना ने बरामद विस्फोटक के IED होने की पुष्टि की है। पहले बैग को रोबोटिक स्कैनर से स्कैन किया गया। इसे निष्क्रिय करने के लिए NSG की टीम और बम डिस्पोजल की टीम ने 8 फ़ीट गहरा गड्ढा खोदा। इसके लिए JCB मशीन बुलाई गई। बाद में उसी गड्ढे में इसे दबा कर ब्लास्ट किया गया।

दिल्ली पुलिस दुकानदार और आस-पास के CCTV फुटेज के आधार पर विस्फोटक प्लांट करने वाले की तलाश में जुटी है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अपनी जॉंच शुरू करते हुए अब तक 15 CCTV कैमरों के फुटेज निकलवा लिए हैं। वहीं NSG अधिकारियों के मुताबिक, “NSG के बम निरोधक दस्ते ने एक IED को निष्क्रिय किया है। विस्फोटक का सैम्पल ले लिया गया है। इसकी जाँच कर के इसको बनाने में प्रयोग हुए केमिकल की रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।”

वहीं, श्रीनगर के ख्वाजा बाजार में भी आईईडी बरामद किया गया। इसके अलावा पंजाब में आरडीएक्स की बड़ी खेप बरामद की गई है। पुलिस इन मामलों की जाँच कर रही है।

स्टंप माइक पर विराट कोहली की हरकत से उखड़े गौतम गंभीर, कहा- आप आदर्श नहीं हो सकते: दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट में DRS पर विवाद

साउथ अफ्रीका के ख़िलाफ़ केप टाउन में खेले गए तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन हुए डीआरएस/DRS (डिसिजन रिव्यू सिस्टम) विवाद के चलते विराट कोहली से पूर्व क्रिकेटर्स नाराज हैं। इसी क्रम में गौतम गंभीर ने भी उन पर अपना गुस्सा निकाला है। भारतीय पूर्व बल्लेबाज गौतम गंभीर ने टेस्ट मैच कप्तान विराट कोहली को DRS कॉल विवाद के चलते अपरिपक्व कहा।

दरअसल, मैच के तीसरे दिन साउथ अफ्रीका खिलाड़ी डीन एल्गार को टीवी एंपायर द्वारा नॉट आउट करार दिए जाने पर भारतीय टीम के कई खिलाड़ी नाराज हो गए थे। सबने स्टंप माइक के सामने अपना गुस्सा निकाला था। विराट कोहली ने भी स्टंप माइक के पास आकर कहा था, “अपनी टीम पर भी ध्यान दें, सिर्फ विरोधी टीम पर ही नहीं। हर समय लोगों को पकड़े रहने का प्रयास करते रहते हो।”

इसी टिप्पणी पर गंभीर ने भारतीय कप्तान को कहा कि वो इस तरह की हरकतें करके कभी भी युवाओं के लिए प्रेरणा नहीं बन पाएँगे। स्टार स्पोर्ट्स से बात करते हुए गंभीर ने कहा, “कोहली बहुत अपरिपक्‍व हैं। भारतीय कप्‍तान के लिए स्‍टंप्‍स पर इस तरह की बात करना बहुत गलत है। ऐसा करके आप कभी युवाओं के आदर्श नहीं बन सकते। पहली पारी में विकेटकीपर कैच वाला मामला 50-50 था, तब आप चुप थे और मयंक अपील कर रहे थे। मेरे ख्‍याल से द्रविड़ को इस मामले में कोहली से बातचीत करना चाहिए।”

गंभीर के अलावा आकाश चोपड़ा ने भी इस मामले में कोहली का बर्ताव देख अपनी बात रखी और पूछा, “आपको आवाज उठाने का अधिकार है लेकिन क्या यह सही तरीका है। मैं 100 प्रतिशत निश्चित नहीं हूँ क्योंकि मोर्ने मोर्कल (सह-पैनलिस्ट) ने बताया कि बहुत सारे बच्चे खेल देख रहे हैं और वे वास्तव में DRS, एंपायरों के बारे में एक राय बना सकते हैं।”

बता दें कि एल्गार के आउट होने के बावजूद जब टीवी एंपायर द्वारा उन्हें नॉट आउट करार दिया गया तो इससे भारतीय क्रिकेट टीम नाराज हो गई। विराट की तरह उप-कप्तान के एल राहुल ने भी स्टंप के पास आकर कहा, “’पूरा देश मिलकर 11 खिलाड़ियों के खिलाफ खेल रहा है।” इससे पहले अश्विन अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कह चुके थे कि जीतने के लिए सुपरस्पोर्ट को दूसरे तरीके ढूँढना चाहिए।

पूरा मामला

साउथ अफ्रीका के साथ तीसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन 21 वें ओवर में रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर डीन एल्गार को फील्ड एंपायर मराइस ने LBW ऑउट दिया था। रिप्ले में साफ लग रहा था कि गेंद स्टंप पर लग सकती थी। हालाँकि, बावजूद इसके अफ्रीकी कप्तान ने DRS ले लिया और टीवी एंपायर ने भी उन्हें नॉटआउट कह दिया। इसी बात पर भारतीय क्रिकेट टीम नाराज हो गई और माइक के पास आकर अपना गुस्सा निकालने लगी। टीम का यही गुस्सा पूर्व क्रिकेटर्स को नहीं भाया और उन्हें कप्तान के बचकाने बर्ताव पर अपनी नाराजगी दिखाई।

अमेरिकी हिरोइन ने बरगद पेड़ के नीचे रैपर से की सगाई, बताया- हमने पीया एक-दूसरे का खून: Video पोस्ट कर मेगन फॉक्स ने दी जानकारी

हॉलीवुड एक्ट्रेस मेगन फॉक्स (Megan Fox) ने अपने बॉयफ्रेंड रैपर मशीन गन कैली (Machine Gun Kelly) से सगाई कर ली है। ट्रांसफॉर्मर मूवी स्टार मेगन ने एक अनोखे इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए फैन्स के साथ अपनी सगाई की खबर शेयर की। ये एक बहुत ही इंटीमेट सेरेमनी था, जिसमें मेगन और मशीन गन एक बरगद के पेड़ तले नजर आए। मेगन और कैली की इस बरगद के पेड़ से कई यादें जुड़ी हैं। यही वजह है कि इस खास दिन और इस खास लम्हे को यादगार बनाने के लिए दोनों ने इस बरगद के पेड़ को चुना। बेहद रोमांटिक अंदाज और खूबसूरत रिंग के साथ कैली ने मेगन को प्रपोज किया।

बरगद के नीचे यादगार बनी मोहब्बत

एक लंबे और प्यार भरे मैसेज के साथ मेगन ने अपनी इंगेजमेंट की जानकारी इंस्टाग्राम पर दी। मेगन ने लिखा कि जुलाई 2020 में इसी बरगद के नीचे हम एक-दूसरे से मिले। तकरीबन डेढ़ साल बाद उसी जगह पर कैली ने मुझे प्रपोज किया और शादी के लिए पूछा। इसके आगे मेगन लिखती हैं कि उन्होंने कैली को ‘हाँ’ कह दिया और फिर दोनों ने एक-दूसरे का खून भी पिया। कैली ने भी अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में वो रिंग भी दिखाई है जिसमें एमरॉल्ड और डायमंड दोनों जड़े हैं। दोनों के बर्थ स्टोन को मिलवाकर कैली ने मेगन के लिए ये खास रिंग डिजाइन करवाई है। 

मेगन और कैली ने साल 2020 में एक-दूसरे के साथ अपना रिलेशनशिप ऑफिशयल किया था। दोनों कई जगह पर साथ में स्पॉट किए गए थे, इसके अलावा दोनों एक-दूसरे के साथ सोशल मीडिया पर भी फोटोज शेयर करते रहते हैं।

तीन बच्चों की माँ हैं मेगन

35 साल की मेगन की कैली से ये दूसरी शादी होगी। एक्टर ब्रायन ऑस्टिन ग्रीन से उन्होंने पहली शादी की थी। साल 2010 से 2021 तक ये शादी चली। उनके तीन बेटे भी हैं। 31 साल के कैली की ये पहली ही शादी है। इससे पहले वो एक रिलेशनशिप में थे, जिससे उनकी एक बेटी है।

उनकी इस सगाई से ब्रायन ऑस्टिन ग्रीन भी खुश हैं। उन्होंने कहा कि 2020 में अलग होने से पहले दोनों ने साथ मिलकर अपने तीनों बेटे की परवरिश की। अब वे मेगन के लिए खुश हैं। हालाँकि उनका आधिकारिक तौर पर तलाक होना बाकी है।

पोस्टर गर्ल ने ही खोल दिए ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ की पोल, बताया- प्रियंका गाँधी के सचिव ने टिकट के बदले माँगे पैसे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारी में जुटीं प्रियंका गाँधी के कैम्पेन ‘लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ’ की पोस्टर गर्ल ने ही कॉन्ग्रेस के अंदर धाँधली का आरोप लगा दिया है। पोस्टर गर्ल का नाम डॉ प्रियंका मौर्या है जो कॉन्ग्रेस की सक्रिय कार्यकर्ता हैं। उनके अनुसार प्रियंका गाँधी के सचिव संदीप सिंह ने टिकट के बदले उनसे घूस की डिमांड की थी। प्रियंका मौर्या ने कॉन्ग्रेस पार्टी को महिला विरोधी भी कह डाला। यह आरोप उन्होंने 13 जनवरी, 2022 (बुधवार) को लगाया है।

प्रियंका गाँधी के इस कैम्पन का नाम ‘शक्ति विधान महिला घोषणा पत्र’ है। TV 9 को दिए गए अपने इंटरव्यू पर प्रियंका मौर्या ने कहा, “बात की गई कि लड़की हूँ लड़ सकती हूँ। हमें मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए कहा गया। हमने बहुत मेहनत भी की। जब टिकट देने की बारी आई तो ये पार्टी (कॉन्ग्रेस) महिला और OBC विरोधी पार्टी निकली। सरोजनीनगर से टिकट रूद्रदमन सिंह को देना तय कर लिया गया तब हमें लगा कि ये गलत हुआ है। कैम्पेन के पोस्टर में मेरा चेहरा आगे करना सिर्फ एक लॉलीपॉप जैसा है। मेरे चेहरे का इस्तेमाल कॉन्ग्रेस ने OBC समाज और महिलाओं को लुभाने के लिए किया। जब पहले से ही टिकट किसी और को देना तय था तब स्क्रीनिंग का ड्रामा क्यों किया गया? 35 लोगों की कमेटी, आब्जर्वर और सर्वे की बातें क्यों कही गई? सर्वे की टीम ने भी सबसे ऊपर मेरा नाम रखा था। फिर मुझ से बूथ की लिस्ट मँगवाई गई।”

प्रियंका मौर्या ने आगे बताया, “मैराथन के लिए भी ऊपर से हर घंटे सवाल हो रहा था कि कितनी लड़कियाँ ले कर आ रहे हों अगर टिकट चाहिए तो। हमें बार-बार ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को लाने और रजिस्ट्रेशन के टारगेट दिए जाते रहे। हमने वही किया जो पार्टी कह रही थी। मैं 10 बसें ले कर गई थी। मेरे पास वीडियो भी है जब लड़कियों से 5 किलोमीटर की रेश करवाई गई। रास्ते में कोई रिफ्रेशमेंट भी नहीं रखा गया था। लड़कियाँ दौड़ते हुए रास्ते में गिर जा रहीं थीं। उनकी हालत बहुत खराब थी। जिन लोगों को स्कूटी, स्मार्ट फोन या सर्टिफिकेट मिला है उसके दामों में भी धाँधली की गई है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार (13 जनवरी) को कॉन्ग्रेस ने 125 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी। इस लिस्ट में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी महिलाओं की है। प्रियंका मौर्या को भी खुद के सरोजनीनगर से टिकट की आशा थी। लेकिन वहाँ से रुद्र दमन सिंह का नाम फाइनल कर दिया गया। इसी के बाद डॉ. प्रियंका मौर्या ने ट्वीट करके प्रियंका गाँधी के सचिव संदीप सिंह पर टिकट के बदले पैसे माँगने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि वो पैसे नहीं दे पाईं इसलिए उनके बदले किसी और को टिकट दे दिया गया है।

कोई डूब गया, किसी को बीमारी थी, कोई ट्रैक्टर से कुचला गया… सबकी मौत किसान प्रदर्शन के नाम: 700 से ज्यादा मौतों की हकीकत कुछ और ही

कृषि कानूनों को केंद्र सरकार निरस्त कर चुकी है। अब शोर उन कथित मौतों को लेकर जो इन कानूनों के विरोध में हुए किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई। केंद्र और राज्य सरकारों से किसान संगठन इन मृतक प्रदर्शनकारियों के परिवारों को मुआवजा देने की माँग कर रहे हैं। रिपोर्टों और किसान संगठनों के दावों के मुताबिक विरोध-प्रदर्शन के दौरान 700-750 कथित किसानों की मौत हुई। 

दिसंबर 2021 में जब केंद्र सरकार ने ऐसे मृतकों की सूची नहीं होने की बात कही थी तो कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने एक लिस्ट रखी थी। उन्होंने यह भी कहा था कि इन मृतकों के परिवार को मुआवजा केंद्र सरकार को देना चाहिए। जब किसान संगठन और कॉन्ग्रेस मुआवजे की माँग कर रही है, तब यह तथ्य भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि किसी भी किसान प्रदर्शनकारी की मौत पुलिस कार्रवाई में नहीं हुई। अब इन मौतों का एक विस्तृत विश्लेषण सामने आया है जिससे पता चलता है कि ऐसे किसानों की संख्या काफी कम है, जिनकी मौत विरोध-प्रदर्शन स्थल पर हुई। किसान संगठन जिन करीब 700 मौतों का दावा कर रहे उनमें ज्यादातार की मृत्यु अधिक उम्र, बीमारी, दुर्घटना और ऐसे ही अन्य कारणों से हुई। इनमें से शायद ही कोई मौत सीधे तौर पर कृषि कानूनों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी हुई है। 

एक ब्लॉग पेज ने विरोध-प्रदर्शन के दौरान जान गँवाने वाले किसानों का रिकॉर्ड रख रखा है। एक्टिविस्ट और खोजी पत्रकार विजय पटेल जिनका ट्विटर हैंडल @vijaygajera है, ने इस रिकॉर्ड का गहन अध्ययन कर कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं। विजय ने एक लंबे थ्रेड में इन मौतों की प्रकृति के बारे में बताया है, जिससे साफ है कि ये सीधे तौर पर विरोध-प्रदर्शन से जुड़े नहीं है। कुछ मौतें संदिग्ध आत्महत्या हैं तो कुछेक कोरोना संक्रमण से जुड़ी हैं। मौत हमेशा दुर्भाग्यपूर्ण होती है। लेकिन किसी की मृत्यु का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए करना एक नई तरह की नीचता है। जो तथ्य विजय ने सामने रखे हैं और मृतकों की सूची की पड़ताल के दौरान ऑपइंडिया के सामने आए, उससे जाहिर है कि जिन 700 मौतों को किसानों के विरोध-प्रदर्शन से जोड़कर सामने रखा जा रहा है कि उनको लेकर कुछ स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।

सबसे पहले तो यह स्पष्ट है कि 700 मौतों की संख्या का इस्तेमाल विपक्ष, किसान संगठनों, प्रोपेगेंडाबाजों और वामपंथी झुकाव वाले मीडिया संस्थान केंद्र सरकार की छवि धूमिल करने की नीयत से कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस इसका दुष्प्रचार न केवल किसानों के विरोध-प्रदर्शन, बल्कि कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने के बाद भी राजनीतिक हथियार के तौर पर कर रही है। 

विजय ने जिन 702 मौतों की पड़ताल की है उनमें से केवल 191 की मौत दिल्ली की सीमा के विरोध-प्रदर्शन स्थलों पर हुई। 340 लोगों की मौत विरोध-प्रदर्शन स्थल से घर लौटने के बाद हुई। यह स्पष्ट नहीं है कि क्यों किसान संगठन फिर इनकी मौतों को भी विरोध-प्रदर्शन से जोड़ रहे हैं। क्या केवल इसलिए कि जिनकी मृत्यु हुई वह दिल्ली की सीमा के विरोध-प्रदर्शन स्थलों पर मौजूद थे अथवा मौत से पहले वहाँ आए थे? साफ है कि इन लोगों की मौत को विरोध-प्रदर्शनों से जोड़ना बेतुके आरोप के सिवा कुछ नहीं है। इनके अलावा 108 लोगों की मौत विरोध-प्रदर्शन स्थल से घर लौटते वक्त रास्ते में हुई। इसमें हिंट एंड रन के केस भी शामिल हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि दुर्घटना में मौत को कैसे किसानों के विरोध-प्रदर्शन से जोड़ा जा सकता? इसके अलवा 63 लोगों की मौत दिल्ली की सीमा से इतर अन्य प्रदर्शन स्थलों या अन्यत्र हुई है।

नदी में डूबा लेकिन नाम किसानों की मौत की लिस्ट में जोड़ा गया

मृतकों की सूची में एक नाम सुखपाल सिंह नाम के किसान का भी है। पोस्ट के अनुसार, सिंह ने कई बार दिल्ली सीमा पर विरोध-प्रदर्शनों में भाग लिया था। मगर मृत्यु के समय वह अपने पैतृक स्थान पर थे। रिकॉर्ड में कहा गया है कि सिंह अपने खेत की तरफ गए थे। इसी दौरान गलती से ब्यास नदी में डूब गए। इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि उनकी मृत्यु को एक प्रदर्शनकारी की मृत्यु क्यों कहा गया, जबकि वह अपने खेत में काम करने के दौरान मरे थे।

ट्रेन में चढ़ते समय हुई मौत, लेकिन सूची में जगह मिली

एक अन्य किसान की पहचान गुरलाल सिंह के रूप में हुई है, जो बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का शिकार हो गए। वह घर लौटते समय ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, मगर उनका पैर फिसल गया और यह दुर्घटना घट गई। प्राय: ऐसे हादसे तभी होते हैं जब कोई चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश करता है। हालाँकि यह उल्लेख नहीं है कि ट्रेन चल रही थी या नहीं, मगर यह स्पष्ट है कि 47 वर्षीय गुरलाल की मृत्यु रेलवे स्टेशन पर हुई थी, न कि विरोध स्थल पर। परमा सिंह नाम के एक अन्य प्रदर्शनकारी की भी एक ट्रेन दुर्घटना में मृत्यु हो गई। सिंह टिकरी सीमा से लौटते समय कथित तौर पर ट्रेन से गिर गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। विरोध-प्रदर्शन बंद होने के बाद दिल्ली सीमा से लौटते समय जसविंदर सिंह नाम के एक अन्य किसान की मौत हो गई। वह कथित तौर पर एक ट्रैक्टर से गिर गए और उससे कुचल कर उनकी मौत हो गई। वहीं सुखविंदर सिंह नाम के एक अन्य प्रदर्शनकारी ने सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद दम तोड़ दिया। पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई।

संदिग्ध आत्महत्याएँ

सूची में 40 ऐसे नाम है जिन्होंने आत्महत्या की। इनमें से कई आत्महत्या की जाँच की जरूरत है। विजय ने एक किसान की तस्वीर शेयर की, जिसकी कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई थी। लेकिन उसके चेहरे पर चोट के निशान साफ नजर आ रहे थे।

विरोध के दौरान पहली बार आत्महत्या की खबर 16 दिसंबर, 2020 को संत बाबा राम सिंह की आई। उन्होंने कथित तौर पर खुद को गोली मार ली और एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने दावा किया कि सरकार की आँखें खोलने के लिए आत्महत्या की। हालाँकि उनकी मौत को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे।।

17 दिसंबर, 2020 को बताया गया कि एक समाचार चैनल के एक एंकर से बात करते हुए चंडीगढ़ की अमरजीत कौर नाम की एक नर्स ने इस आत्महत्या पर सवाल उठाए। अपने बयान में उन्होंने कहा कि यह असंभव है कि संत राम सिंह आत्महत्या करे। उसने आगे सुसाइड नोट को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह उनकी हैंडराइटिंग से मेल नहीं खाता है। कौर ने कहा कि जिसने लोगों को समस्याओं से बाहर निकलने और जीवन में मजबूत रहने के लिए प्रोत्साहित किया हो, वह आत्महत्या नहीं कर सकता। उसने कहा कि वह लोगों से कहते थे कि आत्महत्या करना किसी बात का जवाब नहीं है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए।

दूसरी रिपोर्ट की गई मौत कुलबीर सिंह की थी, जिसने विरोध स्थल से वापस आने के बाद आत्महत्या कर ली थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह कर्ज के चलते तनाव में था।

बढ़ते कर्ज के दबाव में किसान द्वारा की गई तीसरी आत्महत्या दिसंबर 2020 में दर्ज की गई थी। गुरलभ सिंह ने विरोध स्थल से लौटने के बाद आत्महत्या कर ली। उन पर 6 लाख रुपए का कर्ज था।

एक अन्य किसान रंजीत सिंह ने भी फरवरी 2021 में धरना स्थल से लौटने के बाद आत्महत्या कर ली थी। उन पर 15 लाख रुपए का कर्ज था। रिपोर्ट्स की मानें तो उन्हें बैंक से कुर्की का नोटिस मिला था। लखविंदर सिंह कॉमरेड ने भी आत्महत्या की। उन पर 15 लाख रुपए का कर्ज था। यहाँ तक कि रिपोर्ट्स में कहा गया था कि कर्ज के चलते उन्होंने खुदकुशी कर ली।

मुकेश को जिंदा जलाने का मामला

17 जून 2021 को, यह बताया गया कि मुकेश नाम के एक किसान को उसके साथी किसानों ने टिकरी बॉर्डर पर कथित रूप से आग लगा दी थी। मृतक ने प्रदर्शनकारियों के साथ नशा किया और बाद में कथित तौर पर मारपीट के बाद उसे आग के हवाले कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश को जातिसूचक गालियाँ दी गईं। सोशल मीडिया पर उसे आग लगाने का एक वीडियो भी वायरल हो गया था, जिसमें आग लगाने से पहले जातिवादी गालियाँ दी रही थी।

मौत की वजहें

अज्ञात बीमारी जो कोरोना या कुछ और भी हो सकती है जो शायद प्रदर्शन स्थल से लेकर लोग गए होंगे से 307 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। हर्ट अटैक से 203 लोगों की जान गई। मौत के लिए ज्ञात यह सबसे बड़ी वजह है। 

विजय ने एक ट्वीट में बताया है कि दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतों को राष्ट्रीय और राज्य औसत के हिसाब से, मौत के प्राकृतिक वजह के रूप में चिह्नित किया जाना चाहिए था और इसके लिए सरकार को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

मौतों के रिकॉर्ड से पता चलता है कि हार्ट अटैक और अज्ञात कारणों के अलावा, किसानों की मौत हिट एंड रन, दुर्घटना, संदिग्ध आत्महत्या और निमोनिया, कोविड-19, ब्रेन स्ट्रोक, कोल्ड स्ट्रोक, पेट में संक्रमण जैसी विभिन्न बीमारियों की वजह से हुई। इस सूची में 3 ऐसे लोगों का भी जिक्र है जिनकी हत्या हुई। लेकिन उस दलित सिख लखबीर सिंह का नाम नहीं है जिसकी हत्या कुंडली बॉर्डर पर अक्टूबर 2021 में निहंग सिखों ने बेरहमी से कर दी थी।

बुजुर्गों को लालच दिया गया

एक ट्विटर यूजर जिसका हैंडल @Hindavi_Swarajy है, ने नवंबर 2021 में एक थ्रेड प्रकाशित किया था। इसमें उन्होंने बताया था कि उनके दादा को विरोध प्रदर्शन स्थल पर फुसलाकर ले जाने के लिए कैसे लोग उनके घर आए थे। उनके दादा की उम्र 80 वर्ष से अधिक है। उन्होंने घर आए लोगों को अपने दादा को प्रदर्शन में ले जाने से मना कर दिया, लेकिन उनके इलाके के कई बुजुर्ग प्रदर्शन में शामिल होने गए थे। 

उन्होंने बताया था कि प्रदर्शन स्थल पर 7 लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने बताया था, “दुर्भाग्य से प्रदर्शन स्थल पर सात लोगों की मौत हो गई। अपने बीमार बुजुर्गों की सेवा करने, उनका इलाज करवाने की जगह मेरे मुहल्ले के लालची लोगों ने उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने भेज दिया। अब वे गिद्ध की तरह मुआवजा मॉंग रहे और मोदी को जिम्मेदार ठहरा रहे। ऐसे लोगों को वाहेगुरु कभी क्षमा नहीं करेंगे।” 

मौतों को कोई उचित नहीं ठहरा सकता। मौतें हमेशा दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं और पीड़ित परिवार से काफी कुछ छीन लेती है। लेकिन, मौतों को राजनीतिक तमाशा बनाना और उनका इस्तेमाल व्यवस्था विरोधी दुष्प्रचार के लिए करना, एक ऐसी नीचता है जिससे हर किसी को दूर रहना चाहिए।

पैगंबर के जन्मदिवस पर ‘कंपल्सरी’ छुट्टी, रामनवमी-जन्माष्टमी पर ‘वैकल्पिक’ : 2022 की हॉलिडे लिस्ट देख भड़के नेटिजन्स, कहा- ये देश प्रोफेट की नहीं, देवताओं की भूमि है

हिंदू बहुल भारत देश में हिंदुओं के त्योहार को क्या तवज्जोह दी जाती है इसका खुलासा साल 2022 में सरकार द्वारा जारी की गई छुट्टियों की लिस्ट से हुआ है। इस लिस्ट में रामनवमी, जन्माष्टमी और महाशिवरात्रि वैकल्पिक अवकाश की श्रेणी में रखे गए हैं और पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन अनिवार्य अवकाश में रखा गया है।

सरकारी छुट्टियों की इस लिस्ट पर ध्यान पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने दिलवाया है। उन्होंने हॉलिडे लिस्ट 2022 साझा करते हुए लिखा, “ये साल 2022 की भारत में छुट्टियों की लिस्ट है जो कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने जारी की है। हैरान हूँ ये देखकर कि पैगंबर मोहम्मद का जन्मदिन कम्पलसरी हॉलिडे है पर रामनवमी, जन्माष्टमी और महाशिवरात्रि वैकल्पिक अवकाश हैं। मोहर्रम कम्पलसरी हॉलिडे है पर होली वैकल्पिक अवकाश है। गज़ब!” 

इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कोई भारत में हिंदुओं की हालत पर दया खा रहा है। कोई हैरान है कि भारत देश में कैसे होली को वैकल्पिक कर दिया गया है।

जतिन भूटानी मौजूदा सरकार पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहते हैं, “सिर्फ सत्ता में बैठे लोग बदले हैं, विचारधारा अब भी सूडो सेकुलरिज्म की है।”

भूपेंद्र लिखते हैं, “एक अल्पसंख्यक समुदाय की 4 कंपल्सरी छुट्टी और बहुसंख्यक समुदाय की सिर्फ 1 छुट्टी? क्या कमाल का सेक्युलरिज्म है।”

आलोक अग्रवाल लिखते हैं, “ये कारण हैं कि हर हिंदू के मन में संदेह है कि भाजपा तुष्टिकरण की ओर मुड़ रही है, ये जानते हुए कि उनमें से कोई भाजपा के लिए वोट नहीं करेगा। अपने समर्थकों के साथ ये सब मत करो, वो भी हाथ से निकल जाएँगे।”

आशीष सती ने लिखा, “सेकुलरिज्म की ये पराकाष्ठा है, ये प्रोफेट का देश नहीं, देवताओं की भूमि हैं। जिनको ये सब पसंद था उनको देश तोड़कर 1/3 हिस्सा दे चुके, अब यहाँ ये करना जिहादी तत्वों को बढ़ावा देना होगा जो देश के लिए घातक है।”

कुछ यूजर्स ने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, ” ये सब क्या है…? मैं ईद-ए-मिलाद को अनिवार्य छुट्टियों में से हटाने को नहीं कहता लेकिन कृपया होली, श्रीराम नवमी, जन्माष्टमी, महाशिवरात्रि को भी कंपल्सरी लिस्ट में रखा जाना चाहिए। ये निश्चित तौर पर बहुत गलत है।”