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पश्चिम बंगाल में बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस की 12 बोगियाँ पटरी से उतरीं: 5 की मौत और 50 घायल, रेल मंत्री ने मुआवजे की घोषणा की

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के जलपाईगुड़ी में गुरुवार (13 जनवरी 2022) को हुए रेल हादसे (Train Accident) में कम-से-कम 5 लोगों की मौत हो गई है और 50 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बोगियों में फँसे लोगों को बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घटना की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी। प्रधानमंत्री मोदी ने घटना के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से बात की।

हादसा जलपाईगुड़ी के दोमोहनी और मैनागुड़ी के बीच हुआ है। यहाँ पटना से गुवाहाटी जा रही बीकानेर-गुवाहाटी एक्सप्रेस की पाँच बोगियाँ पटरी से उतरी गईं। हादसे के बाद ट्रेन के लगभग 12 बोगियों पर असर पड़ा है। जिलाधिकारी ने 5 मौतों की पुष्टि की है।

इस घटना को लेकर रेलवे ने अपने बयान में कहा कि शाम करीब पाँच बजे हुई और 15633 अप ट्रेन की 12 बोगियाँ पटरी से उतर गईं। DRM और ADRM घटनास्थल पर पहुँच चुके हैं और घायलों को सहायता के लिए घटनास्थल पर मेडिकल वैन को भी भेजा गया है। वहीं, नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे की अधिकारी गुनीत कौर ने बताया कि बेटरी हुईं 12 में से 2 बोगी पास के ही एक तालाब में गिर गई हैं।

बोगियों में फँसे लोगों को निकालने के लिए गैस कटर की मदद से बोगियों में फँसे लोगों को निकालने का काम किया जा रहा है। NDRF और स्थानीय पुलिस की टीम के साथ-साथ स्थानीय लोग भी मौके पर पहुँचकर लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। कौर ने बताया कि रेस्क्यू का काम लगभग पूरा हो चुका है।

रेल मंत्री वैष्णव कल दुर्घटनास्थल का मुआयना जाएँगे। उन्होंने कहा कि अभी मेन फोकस लोगों को बचाने पर है। इस दुर्घटना के कारणों का अभी पता नहीं चला है। इसकी जाँच के लिए एक हाई लेवल कमिटी गठित की गई है। घटना में जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिजनों को 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपए और अन्य घायलों को 25 हजार की मदद देने की घोषणा की गई है।

रेलवे ने 03564 255190, 050 34666, 0361-273162, 2731622, 2731623 से हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इन नंबरों पर यात्रियों के परिजन कॉल कर जानकारी ले सकते हैं।

‘भारत करे शुरुआत, मॉरीशस-भूटान समेत 15 देश हिंदू राष्ट्र बनने के लिए तैयार’: पुरी के शंकराचार्य ने कहा- 52 देशों से हो चुकी है बात

पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चल रहे गंगासागर मेले (Ganga Sagar Fair) में मकर संक्रांति के मौके पर शाही स्नान करने के लिए आए पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती (Shankaracharya Swami Nishchalanand Saraswati) ने हिंदू राष्ट्र की संकल्पना पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी 52 देशों के उच्च प्रतिनिधियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत हुई है, जिसमें मॉरीशस, भूटान समेत 15 देशों के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा है कि अगर भारत खुद को हिंदू राष्ट्र घोषित करता है तो वे भी इस दिशा में कदम उठाएँगे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने एकमात्र हिंदू राष्ट्र नेपाल को लेकर बात करते हुए कहा कि वो अब चीन की कठपुतली बनता जा रहा है। उसको लेकर हमारी विदेश नीति में कमी आई है। इसके साथ ही संत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं को निशाना बनाए जाने पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बाग्लादेश में हिंदू मंदिरों और देवी-देवताओं को निशाना बनाए जाने और मूर्तियों को तोड़ने पर नाराजगी व्यक्त की।

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती कहते हैं कि दुनियाभर में हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कहीं भी सहन नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि अगर भारत में अल्पसंख्यक आराम से रहते हैं तो बांग्लादेश में हिंदू क्यों नहीं रह सकते हैं? उन्होंने कहा कि आखिर बांग्लादेश भारत से ही तो पैदा हुआ था।

राजनीति पर किया कटाक्ष

शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती राजनीति और कोरोना को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने इस मामले में तल्ख लहजे में कहा कि कोरोना के इस दौर में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए हैं और होने भी जा रहे हैं। जब कभी कोई राजनीतिक कार्यक्रम होते हैं तो वहाँ कोरोना नहीं होता। लेकिन जैसे ही कोई धार्मिक कार्यक्रम शुरू होता है तो कोरोना का हवाला दिया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने तीर्थ स्थलों को पर्यटन स्थल घोषित करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि तपोभूमि को भोग भूमि नहीं बनाना चाहिए।

कश्मीरी व्यापारी जावेद शाह 30 साल से मूर्तियों की कर रहा था तस्करी: महाबलीपुरम से 11वीं सदी की तकरीबन ₹40 करोड़ की मूर्तियाँ बरामद

तमिलनाडु पुलिस ने मंगलवार (11 जनवरी 2022) को मूर्ति चोरी के अंतरराष्ट्रीय रैकेट से जुड़कर तस्करी करने वाले जावेद शाह (Javed Shah) नाम के एक कश्मीरी व्यापारी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से लगभग 40 करोड़ रुपये मूल्य की मूर्ति जब्त की गई है। पुलिस उसके संपर्कों को खंगाल कर इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुड़ गई है।

तमिलनाडु पुलिस की सीबी-सीआईडी की मूर्ति विंग के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) को सूचना मिली की महाबलीपुरम के एक दुकान पर अवैध रूप से कुछ मूर्तियाँ रखी हुई हैं। सूचना के आधार पर एक विशेष पुलिस दल का गठन किया गया। उसके बाद टीम ने जावेद शाह की दुकान भारतीय हस्तशिल्प एम्पोरियम में छापेमारी की। सूचना सही होने के बाद पुलिस ने जावेद शाह को भी गिरफ्तार कर लिया।

छापेमारी में पुलिस ने उसकी दुकान से प्राचीन मूर्तियाँ एवं वस्तुएँ जब्त कीं। इनमें आठ वस्तुओं सहित 11 मूर्तियाँ हैं। पुरातत्व विभाग ने जाँच के बाद बताया कि ये मूर्तियाँ 11वीं शताब्दी की हैं। इसके बाद पुलिस ने जावेद को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने जब जाँच की तो पता चला कि पता चला कि जावेद के पास इन मूर्तियों को बेचने का लाइसेंस ही नहीं है।

जब्त की गई मूर्तियों में देवी पार्वती की एक मूर्ति, भगवान कृष्ण की बाँसुरी बजाती हुई मूर्ति, दस सिरों वाला रावण की मूर्ति एवं अन्य प्राचीन वस्तुएँ शामिल हैं। अंतराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत लगभग 40 करोड़ रुपए है। पुलिस का कहना है कि जावेद शाह इस रैकेट का सिरा हो सकता है और उसके कनेक्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े अपराधियों से हो सकते हैं। इस मामले में पुलिस की नजर कई संदिग्धों पर है।

जावेद कश्मीर का रहने वाला है और महाबलीपुरम में मूर्तियों की दुकान चलाता है। पूछताछ के दौरान जावेद ने पुलिस को बताया कि वह पिछले 30 सालों से तस्करी के काम लगा हुआ है। उसने बताया कि शहर के होटल में आने वाले पर्यटकों को वह कीमती मूर्तियाँ गुप्त रूप से बेचा करता था। गिरफ्तारी के बाद उसे रिमांड पर भेज दिया है। वहीं, उसका भाई फरार बताया जा रहा है। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है, ये मूर्तियाँ किन मंदिरों से संबंधित हैं।

बता दें महाबलीपुरम यूनेस्को के विश्व धरोहर की सूची में शामिल है। वर्ष 1984 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया जा चुका हैं। यहां के कुछ प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में पंच रथ, शोर मंदिर, गणेश मंदिर आदि शामिल हैं। महाबलीपुरम को मामल्लापुरम के नाम से भी जाना जाता है और यह जटिल नक्काशीदार मंदिरों और पत्थरों को काटकर बनाई गई गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है। दक्षिण भारत का यह एक महत्वपूर्ण टूरिस्ट प्लेस है।

जिन प्रयोगों से योगी सरकार में बदली बुंदेलखंड की तस्वीर, ‘मॉडल गाँव’ से अब हर जगह को वैसे ही बदलने की कवायद

2019 के आम चुनावों का वक्त था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के बाँदा में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने एक अधिकारी की मंच से जमकर सराहना की। यह पहला मौका था, जब देश ने आईएएस अधिकारी डॉ. हीरा लाल (Dr. Heera Lal) के बारे में सुना। डॉ. लाल उस समय बाँदा के कलेक्टर थे। प्रधानमंत्री ने कहा था, “सरकारी मशीनरी जो होती है, वह चुनाव में इसी में लगी रहती है कि ये करो, ये न करो। मुझे बताया गया कि यहाँ जिले के जो चुनाव अधिकारी हैं, वे हंड्रेड पर्सेंट वोटिंग के लिए मेहनत कर रहे हैं। ये बहुत अच्छी बात है। मैं उन्हें बधाई देता हूँ।”

अगस्त 2018 में बाँदा के कलेक्टर की जिम्मेदारी सँभालने वाले डॉ. लाल का फरवरी 2020 में तबादला हो गया। फिलहाल वे उत्तर प्रदेश में नेशनल हेल्थ मिशन के एडिशनल डायरेक्टर हैं। लेकिन बाँदा के डीएम रहते हुए उन्होंने जो प्रयोग किए थे, वह अब ‘मॉडल गाँव’ (Model Gaon) के रूप में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्यों में भी फैलता जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि बाँदा उत्तर प्रदेश के उस इलाके का हिस्सा है जिसे बुंदेलखंड कहा जाता है। विकास के मायनों पर यह इलाका काफी पिछड़ा माना जाता रहा है। 2017 में जब उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो इस इलाके में भी विकास को रफ्तार दी गई। इसका असर यह हुआ कि बाँदा में भूजल का स्तर बढ़ा। हरियाली बढ़ी। क्रॉप प्रोडक्टिविटी में इजाफा हुआ। कुपोषण में कमी आई। इसके पीछे उन प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही जो डॉ. लाल के कार्यकाल में शुरू की गई थी। मसलन, कुआँ-तालाब जियाओ अभियान, पौध प्रसाद अभियान वगैरह।

करीब डेढ़ साल पहले डॉ. लाल ने ‘मॉडल गाँव’ की शुरुआत की थी। वे इसके एडवाइजर हैं। उन्होंने ऑपइंडिया को बताया, “यह अभियान मेरे अनुभवों पर आधारित है। अगस्त 2018 से फरवरी 2020 तक करीब 18 महीने बाँदा में कलक्टर रहते मैंने 20-22 प्रयोग किए थे। इनसे विभिन्न क्षेत्रों में सुधार आया था। इन्हीं प्रयोगों को एक साथ जोड़कर तकनीक की मदद से देश-विदेश के अन्य इलाकों तक पहुँचाने का अभियान है मॉडल गाँव।”

वे बताते हैं कि इस अभियान का मकसद ग्रामीण जीवन में सुधार लाना और गाँवों को बाजार से जोड़ना है ताकि ग्रामीण इलाकों का सर्वांगीण विकास हो सके। इसके लिए गाँव घोषणा पत्र (विलेज मेनिफेस्टो) तैयार किया जाता है। इनमें वे पहलू शामिल किए जाते हैं जिससे गाँव में खुशहाली आ सके। मसलन, साफ-सफाई, हर व्यक्ति को अक्षर ज्ञान देना, इलाज-दवा के साथ योग से लोगों को जोड़ना, पीने और सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था, सौर ऊर्जा पर गाँव को आत्मनिर्भर बनाना, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) वगैरह।

हाल ही में ‘मॉडल गाँव’ की वर्ष 2021 की एनुअल परफारमेंस रिपोर्ट जारी की गई है। इसके मुताबिक यह अभियान अब तक भारत के 24 राज्यों एवं 3 देशों में फैल चुका है। 4641 लोग इस मिशन से जुड़ चुके हैं। 3366 लोग अपने गाँव में बुनियादी परिवर्तन हेतु विलेज मेनिफेस्टो तैयार कर चुके हैं। सबसे ज्यादा 4094 लोग उत्तर प्रदेश में ही जुड़े हैं। इनमें से 2838 लोग विलेज मेनिफेस्टो बना चुके हैं। इस अभियान को नाबार्ड और दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान जैसी संस्थाओं का सहयोग भी हासिल है। डॉ. लाल ने बताया कि नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक रहे मुनीश गंगवार बतौर अध्यक्ष ‘मॉडल गाँव’ के अभियान को लीड कर रहे हैं।

कहते हैं कि भारत की आत्मा गाँवों में बसती है। गाँवों के चहुमुॅंखी विकास के बिना विकसित भारत की कल्पना नहीं की जा सकती। मॉडल गाँव जैसे अभियान अपने इरादों में जितने सफल होंगे, भारत के विकास की रफ्तार उतनी तीव्र होगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि ऐसे वक्त में जब उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव को लेकर प्रचार जोरों पर है, वादों की बरसात हो रही है, राजनीतिक दल मॉडल गाँव जैसी परिकल्पना को लेकर गंभीरता दिखाएँगे। वैसे भी योगी सरकार में डॉ. लाल जैसे अधिकारियों ने इसे जमीन पर उतारकर दिखाया भी है।

जीतेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी हरिद्वार से गिरफ्तार, धर्म संसद मामले में गुलबहार खान ने की थी उत्तराखंड में शिकायत

उत्तराखंड (Uttarakhand) के हरिद्वार में हुई धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने के मामले में जीतेंद्र नारायण त्यागी (पूर्व नाम वसीम रिजवी) (Wasim Rizvi alias Jitendra Narayan Tyagi) को उत्तराखंड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उन्हें हरिद्वार के नारसन बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया। रिजवी हरिद्वार नगर कोतवाली लेकर आई है। इस बीच उनके समर्थन में कोतवाली में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।

इस घटना को लेकर ऑपइंडिया ने स्वामी यति नरसिंहानंद महाराज (Yati Narsinghanand Maharaj) से संपर्क किया। उन्होंने जीतेंद्र नारायण त्यागी की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। यति नरसिंहानंद जीतेंद्र नारायण त्यागी की गिरफ्तारी के मामले में इस बात पर अड़े हुए हैं कि या तो उन्हें पुलिस छोड़े या फिर नरसिंहानंद को भी गिरफ्तार करे।

उल्लेखनीय है कि हरिद्वार निवासी गुलबहार खान ने ही पुलिस में शिकायत की थी। इस शिकायत में ये आरोप लगाय़ा गया था, “वसीम रिज़वी जो अब जितेंद्र नारायण त्यागी के नाम से जाने जाते हैं, ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर पैगम्बर मोहम्मद और उनके अनुयायियों के खिलाफ गलत बयानी की है। यह एक सोची-समझी साजिश है। आरोपितों ने इन बयानों को सोशल मीडिया पर भी शेयर किया है।” ये धर्म संसद खड़खड़ी स्थित वेद निकेतन में 7 से 19 दिसंबर 2021 के दौरान आयोजित हुआ था।

गौरतलब है कि इस मामले में उनके खिलाफ पुलिस ने धारा 153A के तहत केस दर्ज किया था। अपने खिलाफ केस दर्ज कराए जाने पर जितेंद्र नारायण त्यागी ने ऑपइंडिया को बताया था। उन्होंने कहा था, “मेरे विरुद्ध हरिद्वार में जो मुकदमा दर्ज करवाया गया है, इससे पहले असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में भी मुकदमा दर्ज करवाया था। भारत के विभिन्न थानों में हेट स्पीच बता कर मेरे विरुद्ध जो मुकदमे दर्ज करवाए जा रहे हैं ये कट्टरपंथी मुल्लाओं की, मुस्लिम समाज के आतंकी लोगों की बौखलाहट है। क्योंकि वो समझ रहे हैं कि उनकी पोल खुल चुकी है। सच्चाई कहना हेट स्पीच नहीं है।”

दारा सिंह चौहान बालू खनन माफिया… CM योगी से पड़ चुकी है डाँट, BJP में नहीं गली दाल तो भागे सपा में : पार्षद धर्मदेव चौहान का खुलासा

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से इस्तीफा देकर अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले दारा सिंह चौहान को लेकर गोरखपुर के पार्षद धर्मदेव चौहान ने एक बड़ा खुलासा किया है। पत्रकारों से बातचीत में धर्मदेव चौहान ने आरोप लगाया कि दारा सिंह बालू खनन माफिया हैं जो 6 माह से इस काम को कर रहे थे। धर्मदेव चौहान ने पूर्व मंत्री को लेकर कहा कि उन्होंने चौहान समाज को छलने का काम किया है। उनके विरुद्ध जाँच चल रही है। जाँच के बाद कार्रवाई की जाएगी। उनके मुताबिक दारा सिंह ने पार्टी में गंदा काम किया और फिर पार्टी छोड़कर भाग गए।

उन्होंने कहा, “दारा सिंह चौहान बीजेपी छोड़कर भागे हैं। उसके संदर्भ में मैं कहना चाहूँगा कि दारा सिंह ने बीजेपी में रहते हुए, सत्ता का मजा लेते हुए परिवारवाद किया है और समाज को लूटा है। समाज को गुमराह किया है। चौहान समाज बीजेपी का अनुयायी है। इन्होंने यहाँ आकर वोट लेने का काम किया है और हमने जो उन्हें वोट दिया उसके बदले इन्होंने धोखा दिया। हमारा समाज बीजेपी को समर्थन दे रहा है। इनका जल्द ही में एक काला चिट्ठा सामने आने वाला है। वन मंत्री रहते हुए इन्होंने बालू खनन का काम किया। जब महाराज (सीएम योगी) को पता चला तो उन्होंने इन्हें बुलवाकर डांटा। तब इन्हें लगा कि इनका इस पार्टी में काम नहीं चलेगा, तब इन्होंने पार्टी छोड़ी। इनको ये नहीं पता एक पृथ्वीराज चौहान थे जो जुबान देकर हटते नहीं थे और एक ये हैं जिन्होंने मोहम्मद गौरी के अनुयायियों के समक्ष झुकने का काम किया है।”

धर्मदेव चौहान कहते हैं कि दारा सिंह चौहान का कारनामा अभी हाल ही में सामने आया है। ये पहले से ऐसे नहीं थे। बीच में इन्हें लगा होगा वो ये काम बीजेपी में रहकर नहीं कर पाएँगे इसलिए उन्होंने वहाँ अख्तियार किया। ये न अपने समाज के हुए और न ही अपने देश के हुए। चौहान समाज को दुख है कि अगर ये बीजेपी में आए तो ऐसा काम करके क्यों गए। इनके पोस्टर लगने शुरू हो गए थे कि वह क्षेत्र से नदारद हैं। इनकी ख्याति खत्म हो चुकी थी। इन्हें ये भी पता था कि वे अपने क्षेत्र से हारने वाले हैं इसलिए उन्होंने उस जगह (सपा) को चुना। अब मामले में जाँच हो रही है, जो सच होगा वो सामने आएगा।

धर्मदेव चौहान ने कहा कि चुनाव के समय पार्टी छोड़ने वाले इसलिए भी गए क्योंकि उन्हें लग गया था कि वो चुनाव नहीं जीतेंगे। वो लोग अपने क्षेत्रों में गए ही नहीं। सिर्फ लखनऊ में बैठकर राजशाही करते रहे। ऐसे लोगों को हारना ही है। वो दूसरे दल में जाकर अपना सम्मान बचाएँगे ही। क्यों यहाँ रहेंगे। उन्होंने पत्रकारों के सामने साफ किया कि जो लोग भी बीजेपी में रहते हुए गलत काम करेंगे उनके ऊपर जाँच की जाएगी। खुद के चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी ऐसा कुछ विचार नहीं है। उन्होंने बताया कि दारा सिंह के इस्तीफे से पहले से उनके ऊपर जाँच चल रही है।

राजधानी दिल्ली में ओमिक्रोन से जान गँवाने वालों में 70% को नहीं लगी थी वैक्सीन, 27561 नए मामले, संक्रमण दर 26.22 प्रतिशत

देश में कोरोना के रोज मिलने वाले मरीजों का आँकड़ा अब डराने लगा है। देश में बुधवार को कोरोना के 2.47 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए। ये आँकड़ा इसलिए डराता है क्योंकि 26 मई के बाद देश में नए मामले 2 लाख के पार पहुँचा है। उसमें भी दिल्ली, महाराष्ट्र जैसे राज्यों के आँकड़े ज़्यादा बड़े हैं।

दिल्ली में पिछले 24 घंटों में 27,561 नए कोरोना मामले सामने आए हैं। साथ ही एक दिन के भीतर 40 मरीजों की मौतों की भी पुष्टि हुई है। इसी के साथ दिल्ली में अब कोरोना से कुल मौत का आँकड़ा 25,240 हो चुका है। साथ ही यहाँ संक्रमण दर 26.22% दर्ज की गई। दिल्ली में अभी 56,991 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। राजधानी में सक्रिय कोरोना मरीजों की दर 4.79 फीसदी है जबकि रिकवरी दर 93.70 फीसदी है। 24 घंटे में 14,957 लोग डिस्चार्ज हुए हैं। अब तक कुल 1505031 लोग कोरोना को हरा चुके हैं। दिल्ली में कंटेनमेंट जोन्स की संख्या अभी 20,878 है जबकि कोरोना डेथ रेट 1.56 फीसदी है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक दिल्ली में बीते सप्ताह 97 कोरोना संक्रमित मरीजों ने जान गँवाई है। जान गँवाने वालों में से 70 लोगों को वैक्सीन नहीं लगी थी। वहीं, 19 मरीजों ने वैक्सीन की केवल एक ही डोज ली थी। सिर्फ 8 मरीजों ने ही वैक्सीन की दोनों डोज ली थी। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो दिल्ली में कोरोना से मरने वालों में 70 फीसदी ने वैक्सीन नहीं लगवाई थी।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली में मंगलवार को 21,259, सोमवार को 19166 और रविवार को 22 हजार से ज्यादा नए कोरोना मामले सामने आए थे। संक्रमण दर क्रमश: 25.65, 25 और 23 फीसदी तक पहुँच गई थी। बीते 8 महीने में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले बुधवार को ही सामने आए हैं।

1 जनवरी के बाद बढ़े केस

1 जनवरी को दिल्ली में 2796 केस आए, जबकि 2 जनवरी की रिपोर्ट में 3194 केस, 3 जनवरी को 4099, 4 जनवरी को 5481, 5 जनवरी 10,665, 6 जनवरी को 15097, 7 जनवरी को 17335, 8 जनवरी को 20181, 9 जनवरी को 22751 और 10 जनवरी को यह आँकड़ा 19166 तक पहुँच गया है। वहीं, 11 जनवरी को 21,259 नए केस निकले। इससे पहले, दिल्ली में 29 दिसंबर को कोरोना के 923 केस दर्ज हुए थे। इसके बाद 30 दिसंबर को 1313 केस, 31 दिसंबर को 1796 केस आए।

ओमिक्रोन को लेकर PM मोदी की मीटिंग से गायब उद्धव ठाकरे, लेकिन महामारी से निपटने के नाम पर केंद्र से माँगों की है लंबी लिस्ट

देशभर में कोरोना वायरस (Covid 19) की तीसरी लहर तेजी से फैल रही है। इसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) गुरुवार (13 जनवरी 2022 ) को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए मीटिंग कर रहे हैं। लेकिन खबर आ रही है कि कोरोना से सबसे अधिक त्रस्त राज्यों में शामिल महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) इस मीटिंग में शामिल नहीं होंगे। लेकिन उन्होंने अपने माँगों की लम्बी लिस्ट केंद्र को भेज दी है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की जगह PM की वीडियो कॉन्फ्रेंस में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे (Rajesh Tope) शामिल होंगे। सीएनएन न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री के साथ मीटिंग में सीएम उद्धव ठाकरे भले ही शामिल नहीं होंगे, लेकिन उन्हें ये बताया जाएगा कि राज्य सरकार प्रदेश में दोबारा से लॉकडाउन नहीं लगाएगी। इसके साथ ही पीएम को कोरोना के लिहाज से राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी दी जाएगी।

वहीं राजेश टोपे ने कोरोना को लेकर कहा, “उपलब्ध बुनियादी ढाँचे पर किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है। हॉस्पिटल्स में ऑक्सीजन और बेड्स की पर्याप्त व्यवस्था है। प्रदेश में इस समय ऑक्सीजन की कुल माँग 275 मीट्रिक टन है। इसमें गैर-कोविड कारणों से होने वाली माँग भी शामिल है। महाराष्ट्र के अस्पतालों में 5% मरीज हैं, जिनके कारण 2.82% ऑक्सीजन बेड फुल है। जबकि, आईसीयू बेड में 3.2 फीसदी लोग हैं। इसके अलावा 6 प्रतिशत वेंटिलेटर बेड भी फुल हैं।”

केंद्र से माँगों की है लंबी लिस्ट

भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोरोना को लेकर की जा रही अहम मीटिंग में उद्धव ठाकरे शामिल न हो रहे हों, लेकिन कोरोना से निपटने के लिए महाराष्ट्र सरकार की केंद्र से माँग की एक लंबी लिस्ट है। वैक्सीनेशन के लिए उद्धव सरकार ने केंद्र सरकार से 60 लाख कोविशील्ड और 40 लाख कोवैक्सिन की डोज की माँग की है। इस तरह से महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र से 1 करोड़ वैक्सीन की डोज माँगी है।

इसके अलावा कोरोना से मुकाबले के लिए मानव संसाधन के लिए भी महाराष्ट्र सरकार केंद्र सरकार से वित्तीय मदद चाहता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार चाहती है कि ईसीआरपी2 जरिए मिलने वाले फंड को केंद्र सरकार दे ताकि राज्य में मानव संसाधन जुटाए जा सकें। मौजूदा वक्त में हमें उस फंड का इस्तेमाल कोरोना के खिलाफ मानव संसाधन जुटाने में करने की अनुमति नहीं है, लेकिन अगर अनुमति दी जाती है तो इससे हमें काफी मदद मिलेगी।

इसके अलावा उद्धव सरकार यह भी चाहती है कि केंद्र सरकार एक मोबाइल फोन पर CoWin ऐप पर होने वाले रजिस्ट्रेशन की संख्या को भी 6 से बढ़ाकर 10 करे। साथ ही कॉकटेल एंटीबॉडी जैसी दवाओं की भी आपूर्ति करे। गौरतलब है कि बीते 24 घंटे में राज्य में कोरोना के 46,000 नए संक्रमित मिले हैं, जिनमें से अकेले मुंबई से 16,420 मरीज मिले हैं। वहीं संक्रमण दर बढ़कर 21.4% हो गई है।

आतंकी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के खालिस्तानी एजेंडे के समर्थन में उतरा पाकिस्तान, उल्टा भारत पर ही मढ़ा बदनाम करने का आरोप

पाकिस्तान सरकार के मुखपत्र रेडियो पाकिस्तान ने गुरुवार (12 जनवरीस 2022) को एक और भारत विरोधी प्रोपेगेंडा शुरू किया और प्रतिबंधित खालिस्तानी आतंकवादी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (Sikh For Justice)’ का पक्ष लिया। रेडियो पाकिस्तान ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में दावा किया कि भारत सिख फॉर जस्टिस को ‘बदनाम’ करने के लिए प्रोपेगेंडा चला रहा है।

हाल ही में भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई खुफिया जानकारी के आधार पर जर्मन अधिकारियों ने सिख फॉर जस्टिस के आतंकवादी जसविंदर सिंह मुल्तानी को गिरफ्तार किया था। वह लुधियाना कोर्ट विस्फोट में शामिल था। रेडियो पाकिस्तान ने यह कहकर एसएफजे का बचाव करने की कोशिश की कि उसने आतंकी हमले से खुद को दूर कर लिया है। पाकिस्तान ने आगे दावा किया कि अमेरिकी प्रशासन ने खालिस्तान आंदोलन को आतंकवादी के रूप में लेबल करने के भारत के नैरेटिव को अस्वीकार कर दिया था।

SFJ ने इमरान खान को कई बार समर्थन के लिए लिखा है

उल्लेखनीय है कि सिख फॉर जस्टिस ने खालिस्तान आंदोलन को आधिकारिक रूप से समर्थन देने के लिए कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। हाल ही में स्वर्ण मंदिर लिंचिंग मामले से ठीक दो दिन पहले SFJ के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को पत्र लिखकर एसएफजे को ‘मुक्त पंजाब’ और ‘खालिस्तान’ बनाने के लिए समर्थन करने के लिए लिखा था।

16 दिसंबर को खान को लिखे पत्र में आतंकवादी संगठन SFJ ने खुद को ‘मानवाधिकार वकालत समूह’ कहा था। जनमत संग्रह का समर्थन माँगते हुए पत्र में उसने लिखा है, “SFJ इस सवाल पर अपना पहला वैश्विक गैर-सरकारी खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित कर रहा है कि ‘क्या भारतशासित पंजाब को एक स्वतंत्र देश होना चाहिए’?”

उल्लेखनीय है कि हाल ही में SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू ने नई धमकी देते हुए ऐलान किया कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। प्रतिबंधित संगठन ने इसके लिए ‘इनाम’ के रूप में $1 मिलियन डॉलर (7.39 करोड़ रुपए) देने की घोषणा की है। इसके अलावा सिख फॉर जस्टिस की तरफ से एक पोस्टर भी जारी किया गया है, जिसमें पीएम मोदी की तस्वीर भी है। उस पर लिखा गया है कि 26 जनवरी को पीएम मोदी के तिरंगे को ब्लॉक करके खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। 

गुरपतवंत सिंह पन्नू का भारत विरोधी दुष्प्रचार

गौरतलब है कि SFJ का संस्थापक और आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू सालों से भड़काऊ भाषण देता आ रहा है। वह 26 जनवरी की उस घटना से सीधे तौर पर जुड़ा था, जिसमें उसने सिख युवाओं से लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए उकसाया था। 26 जनवरी को पवित्र सिख चिन्ह के साथ लाल किले पर दो झंडे फहराए गए थे। हाल ही में एसएफजे ने फिरोजपुर में पीएम मोदी के काफिले की नाकेबंदी की जिम्मेदारी ली थी। सुप्रीम कोर्ट के कई अधिवक्ताओं ने हाल ही में रिपोर्ट किया था कि उन्हें यूके से एसएफजे के कार्यकर्ताओं से धमकी भरे फोन आए थे, जिसमें उन्होंने शीर्ष अदालत को मामले को न ले जाने की चेतावनी दी थी।

हाथ ‘ग्लैमर’ और ‘हिंसा’ के साथ: हस्तिनापुर से ‘बिकनी गर्ल’ अर्चना गौतम तो लखनऊ मध्य से सदफ जफर कॉन्ग्रेस की उम्मीदवार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के लिए कॉन्ग्रेस ने पहली लिस्ट जारी की है। इसमें 125 नाम हैं, जिनमें 50 महिला हैं। इन उम्मीदवारों में से एक सदफ जफर हैं। CAA विरोधी हिंसा में वे आरोपित रही हैं। बिकनी गर्ल के नाम से मशहूर अर्चना गौतम को भी कॉन्ग्रेस ने मैदान में उतारा है।

कॉन्ग्रेस ने सदफ जाफर को लखनऊ मध्य से उम्मीदवार बनाया है। जाफर को लखनऊ में हुए प्रदर्शन व हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वे फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। पुलिस ने उपद्रवियों के जो पोस्टर लगाए थे उनमें भी उनकी तस्वीर थी। उनपर पत्थरबाजी के लिए लोगों को उकसाने के आरोप लगे थे। उनके गिरफ्तार होने के बाद प्रियंका गाँधी भी उनके बचाव में उतरी थीं और उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी सारी हदें पार कर दी हैं। प्रियंका गाँधी ने ट्वीट करके कहा था कि सदफ के दोनों बच्चे अपनी माँ की रिहाई का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 

कॉन्ग्रेस ने हस्तिनापुर से बिकनी गर्ल्स के नाम से मशहूर अर्चना गौतम को भी मैदान में उतारा है। अर्चना ने 2018 में मिस बिकनी का खिताब हासिल किया था। अर्चना ने 2015 में बॉलीवुड फ़िल्म ग्रेट ग्रैंड मस्ती में अभिनय से की शुरुआत की थी। इससे पहले उन्होंने कई ब्रांड्स के लिए प्रिंट और टेलीविजन पर विज्ञापनो में मॉडलिंग भी की। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने अर्चना गौतम को पिछले नवंबर में दोबारा कॉन्ग्रेस ज्वॉइन कराई थी। इससे पहले वह पार्टी में सम्मान न मिलने की वजह से नाराज हो गई थी।

प्रियंका गाँधी ने गुरुवार (13 जनवरी 2022) को उम्मीदवारों की सूची का ऐलान करते हुए बताया कि पार्टी ने इनमें 50 सीटों पर महिला प्रत्याशियों को उतारा है। वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि कुछ पत्रकार, अभिनेत्री, समाजसेवी और संघर्षशील महिलाओं को मौका दिया गया है। उन्नाव सदर सीट से कॉन्ग्रेस ने रेप पीड़िता की माँ को टिकट दिया। इसके अलावा फर्रुखाबाद से पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद को उम्मीदवार बनाया गया है।