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2010 में कश्मीर में निकला जनाजा, प्रदर्शनकारियों ने लगाए नारे; कॉन्ग्रेस ने 2022 में ‘मोदी राज के बेरोजगार युवा’ बता शेयर किया

कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से 12 जनवरी 2022 (बुधवार) को एक वीडियो शेयर किया गया। इस वीडियो में मोदी सरकार पर युवाओं के साथ वादाखिलाफ़ी का आरोप लगाया गया है। ट्वीट में लिखा गया है, “प्रिय भाजपा, आप कुछ ही लोगों को हमेशा बेवकूफ़ बना सकते हैं। लेकिन आप सभी लोगों को हमेशा मूर्ख नहीं बना सकते। हमारे देश के युवाओं को आप कभी भी मूर्ख नहीं बना सकते। इस राष्ट्रीय युवा दिवस (National Youth Day) पर हमारे युवा भाजपा को हराएँगे।”

मोदी सरकार में बेरोजगारी बढ़ने का दावा कर बनाई गई इस वीडियो में प्रयोग हुई एक फोटो ने नेटिजन्स का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। ट्विटर यूजर @BefittingFacts ने इस तस्वीर की तरफ ध्यान दिलाया है। बताया कि मोदी सरकार में बेरोजागर बताए जा रहे ये युवा भारत विरोधी नारे लगाने वाले कश्मीरी प्रदर्शनकारी हैं। यह तस्वीर उस वक्त की है जब 2010 में जम्मू-कश्मीर में एक 19 साल के लड़के के जनाजे के दौरान प्रदर्शन हुआ था और सत्ता में कॉन्ग्रेस ही थी।

गूगल के रिवर्स इमेज सर्च में फोटो साल 2010 की निकली। यह इमेज भी अभी वेबसाइट Alamy पर मौजूद है।

साल 2022 में कॉन्ग्रेस की बड़ी गलतियाँ

साल 2022 को शुरू हुए अभी मात्र 13 दिन ही बीते हैं, लेकिन इतने ही समय में कॉन्ग्रेस ने अपने प्रचार में कई गलतियाँ कर डाली हैं। 9 जनवरी को कॉन्ग्रेस ने भाजपा की केंद्र व राज्य सरकारों की योजनाओं की तस्वीरों को कई स्थानों पर शेयर किया। पहले मामले में एक चित्र में महिलाएँ बसों के आगे खड़ी हो कर सेल्फी लेती दिखीं। उस ट्वीट में वादा किया गया था कि अगर कॉन्ग्रेस सत्ता में आई तो महिलाओं को बसों में फ्री यात्रा करवाएँगे।

उस समय कई ट्विटर यूजर ने बताया कि कॉन्ग्रेस ने बसों के आगे लिखे शब्दों को धुंधला कर दिया था। तब उस ट्वीट में प्रयोग हुई असली तस्वीरों को शेयर किया गया। वे तस्वीरें पिछले साल (2021) जनवरी माह की थीं। तब असम की सर्बानंद सोनोवाल सरकार ने महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए गुवाहाटी में पिंक बस सेवा शुरू की थी। बाद में कॉन्ग्रेस ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया।

कॉन्ग्रेस ने एक और ट्वीट में यूपी की सत्ता में आने के लिए तीन सिलेंडर मुफ्त देने का वादा किया। लेकिन तस्वीर में जिस परिवार की इस्तेमाल की उसका प्रयोग प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में हो रखा है। प्रधानमंत्री उज्जवला योजना ने जब 7 करोड़ सिलेंडर बाँटे जाने का बड़ा आँकड़ा छुआ था तब ये तस्वीर पोस्टर में छपी थी।

इसी तरह 12 जनवरी को बिहार कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का एक मैनिपुलेटेड वीडियो शेयर किया। यह वीडियो सालभर पहले भी वायरल हुआ था। उस समय इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज हुई थी।

जो बोल सकती है केवल ‘माँ और पा’, उसके साथ हैवानियत: गैंगरेप-प्राइवेट पार्ट में नुकीली चीज से वार, राजस्थान पुलिस के हाथ खाली

राजस्थान के अलवर की मूक-बधिर नाबालिग गैंगरेप पीड़िता का जयपुर के जेके लॉन अस्पताल में इलाज चल रहा है। बच्ची को लहूलुहान हालत में अस्पताल लाया गया था। बच्ची का बुधवार (12 जनवरी 2022) दोपहर को तकरीबन तीन घंटे तक ऑपरेशन चला। पीड़िता के शरीर के अंदर के पार्ट्स तक डेमेज हो चुके हैं। ऑपरेशन के बाद बच्ची को आईसीयू में भर्ती कराया गया है। फिलहाल उसकी हालत नाजुक बनी हुई है। बताया जा रहा है कि जब भी वह दर्द से तड़तपी है तो कभी माँ तो कभी ‘पा’ ही उसके मुँह से निकलता है। उधर, 24 घंटे बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।

साभार:दैनिक भास्कर

जानकारी के मुताबिक, पीड़िता अब खतरे से बाहर है, लेकिन उसे दो से तीन दिन तक डॉक्टर के ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा। जेके लॉन अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरविंद शुक्ला ने बताया कि बच्ची का 7 डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन किया है। बच्ची के अंदरूनी हिस्से में काफी गहरे घाव है और बच्ची का रेक्टम अपनी जगह से खिसक गया है। उसके प्राइवेट पार्ट में शार्प कट है। उसे जब अस्पताल में लाया गया तो काफी ब्लीडिंग हो रही थी। बच्ची के पेट में छेद करके अलग से रास्ता बनाया गया है, जिससे मल को बाहर निकाला जा सके। इसे प्लास्टिक सर्जन की मदद से रिपेयर किया जा रहा है। ऑपरेशन के बाद उसे ICU में शिफ्ट कर दिया गया है।

अलवर में मंगलवार (11 जनवरी 2022) रात को 14 साल की एक नाबालिग बच्ची का अपहरण कर उसके साथ गैंगरेप करने के बाद तिजारा फाटक पुलिया पर फेंक दिया गया था। बच्ची एक घंटे तक वहीं तड़पती रही। वह कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं थी। हालत गंभीर होने पर दो यूनिट ब्लड देकर उसे जयपुर जेके लॉन अस्पताल में रेफर कर दिया गया।

पीड़िता का हाल जानने के लिए स्वास्थ्य मंत्री परसादी लाल मीणा, मंत्री टीकाराम जूली, महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश और उद्योग मंत्री शकुंतला रावत, संगीता बेनीवाल, एडीजी स्मिता श्रीवास्तव अस्पताल पहुँची थी। अस्पताल में डॉ सुधीर भंडारी, आईएएस वैभव गलरिया भी निरीक्षण के लिए मौजूद रहे।

परसादी लाल मीणा ने बताया, “डॉक्टरों ने उसका सफल ऑपरेशन किया है और वह अब खतरे से बाहर है। मामले की जाँच के लिए SIT का गठन किया गया है। आरोपित को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर न्याय के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।”

वहीं, अलवर की एसपी तेजस्विनी गौतम ने बताया कि पीड़िता के गुप्तांगों में गहरे घाव मिले हैं। जयपुर के जेके लोन अस्पताल में सर्जरी हो चुकी है। पीड़िता की हालत स्थिर बनी हुई है। डॉक्टरों के मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही सब कुछ स्पष्ट हो सकेगा। पीड़िता के परिवार को 3.50 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई। वहीं, 5 पुलिस टीमों द्वारा छानबीन व आरोपितों की तलाश जारी है।

पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्राइवेट बस पर संदेह जताया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सीसीटीवी फुटेज में तिजारा फाटक ओवरब्रिज से मंगलवार शाम सवा 7 बजे एक प्राइवेट बस निकलती दिख रही है। तब यहाँ पीड़िता नहीं थी। बस गुजरने के बाद पीड़िता नजर आ रही थी। ऐसे में पुलिस को बस को लेकर संदेह है। इसकी जाँच शुरू कर दी गई है। इधर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए अलवर एसपी और जेके लोन हॉस्पिटल के डॉक्टरों से तीन दिन में रिपोर्ट माँगी है।

पत्रिका की रिपोर्ट

गौरतलब है कि एक अन्य घटना में राजस्थान के बाँसवाड़ा (Banswara) जिले के घाटोल क्षेत्र में सोमवार (9 जनवरी 2022) को दिल दहला देने वाली यह घटना सामने आई थी। व्यापारी ने दोपहर को जब दुकान का खोया हुआ सामान तलाशने के लिए दुकान के सीसीटीवी कैमरे खँगाले तो रात में पास ही निर्माणाधीन भवन में मानसिक रूप से बीमार महिला के साथ रेप (Rape) का वीडियो सामने आ गया। वीडियो देखते ही वो चौंक गया और पुलिस को सूचना दी। पीड़िता के माँ-बाप, दोनों मजदूर हैं।

वहीं, राजस्थान के भरतपुर जिले के कैथवाड़ा थाना इलाके में लंबे समय से गैंगरेप (Gangrape) की शिकार हो रही एक नाबालिग बच्ची ने समाज में बदनामी के डर से जहर खाकर खुदकुशी (Suicide) कर ली थी। हाफिज और मनीष ने उसके साथ गैंगरेप कर उसके अश्लील फोटो-वीडियो भी बना लिए थे। बाद में आरोपितों ने इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

‘मोदी के रहते देश और किसानों का हित नहीं हो सकता’: जानिए UP के डिप्टी CM केशव मौर्य के वीडियो का सच, बिहार कॉन्ग्रेस ने शेयर किया

केशव प्रसाद मौर्य उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। बिहार कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से 12 जनवरी 2022 को उनका एक मैनिपुलेटेड वीडियो शेयर किया। इसमें मौर्या को यह कहते सुना जा सकता है, “क्या देश जानता है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के रहते न तो कभी किसानों का हित हो सकता है, न देश का हित हो सकता है, न देशवासियों का हित हो सकता है।” ‘मन की बात’ बताते हुए कॉन्ग्रेस ने इस वीडियो को शेयर किया है।

20 सेकेंड का यह एडिटेड वीडियो फरवरी 2021 में भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस समय फैक्टचेक करने वाली वेबसाइट फैक्ट हंट ने इसकी सच्चाई को विस्तार से बताया था। उस समय यह एडिटेड वीडियो कई वेरिफाइड सोशल हैंडल द्वारा शेयर किया गया था। जनतंत्र TV के मुताबिक असली वीडियो में भाजपा नेता केशव प्रसाद मौर्य कह रहे हैं, “क्या देश जानता है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के रहते न तो कभी किसानों का अहित हो सकता है, न देश का अहित हो सकता है और न देशवासियों का अहित हो सकता है।”

इस वीडियो में काट-छाँट करने वालों ने बड़ी चालाकी से ‘अहित’ शब्द में से ‘अ’ को साइलेंट कर दिया है और अहित के बदले ‘हित’ शब्द को प्रचारित किया है। इस मामले में अधिवक्ता गौरव द्विवेदी द्वारा फरवरी 2021 में IT एक्ट के अंतर्गत FIR भी दर्ज करवाई गई थी।

बावजूद इसके बिहार कॉन्ग्रेस ने यह वीडियो शेयर किया है। इसके बाद नेटिजन्स ने ने बिहार कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल पर कार्रवाई की माँग की है। भाजपा मुंबई के प्रवक्ता सुरेश नखुआ ने उत्तर प्रदेश पुलिस को टैग करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस का आधिकारिक हैंडल UP के डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य का एडिटेड वीडियो वायरल कर रहा है।” उन्होंने ट्विटर और ट्विटर इंडिया को टैग भी किया है।

ट्विटर यूजर अंकुर सिंह ने भी उत्तर प्रदेश पुलिस को टैग करते हुए कॉन्ग्रेस द्वारा किए गए ट्वीट का लिंक शेयर किया है।

खास बात ये है कि बिहार कॉन्ग्रेस के हैंडल पर जो ट्वीट पिन है, उसकी पहली लाइन है, “झूठ फैलाना बंद करो’।

फिर भी एक पुराने वीडियो जिसके साथ छेड़छाड़ की बात सालभर पहले सामने आ चुकी है कॉन्ग्रेस ने मैनिपुलेटेड वीडियो शेयर किया है।

परिवार (भाई-बहन, बाप-बेटी) में सेक्स पर रोक लगाएगा फ्रांस: मंत्री बोले- यह उम्र या सहमति का सवाल नहीं, नहीं रख सकते अपने खून से यौन संबंध

फ्रांसीसी सरकार ने 1791 के बाद पहली बार सगे-संबंधियों के बीच यौन संबंध पर प्रतिबंध लगाने की योजना की घोषणा की है। जानकारी के मुताबिक फिलहाल फ्रांस में अनाचार वैध है, बशर्ते कि उसमें 18 वर्ष से कम उम्र का कोई शामिल न हो। मगर अब इसे पूरी तरह से बैन करने की योजना बनाई जा रही है। फ्रांस के बाल संरक्षण मामलों के मंत्री एड्रियन टैक्वेट ने इसकी जानकारी दी।

टैक्वेट ने AFP के साथ एक इंटरव्यू में कहा, “उम्र चाहे जो भी हो, आप अपने पिता, अपने बेटे या अपनी बेटी के साथ यौन संबंध नहीं बना सकते हैं। यह उम्र का सवाल नहीं है, यह वयस्कों (Adults) की सहमति का सवाल भी नहीं है। हम अनाचार के खिलाफ लड़ रहे हैं। इसके संकेत स्पष्ट होने चाहिए।” जानकारी के मुताबिक नए कानून के तहत, चचेरे भाई-बहनों को अभी भी शादी करने की अनुमति होगी, लेकिन इस बात की पुष्टि होनी बाकी है कि यह प्रतिबंध सौतेले परिवारों तक बढ़ाया जाएगा या नहीं।

चाइल्ड प्रोटेक्शन चैरिटी, लेस पैपिलॉन्स के चेयरमैन लॉरेंट बोएट ने मिस्टर टैक्वेट की घोषणा का स्वागत किया है। उन्होंने द टाइम्स को बताया, “अनाचार सामाजिक रूप से प्रतिबंधित है, लेकिन कानूनी रूप से प्रतिबंधित नहीं है जबकि दोनों का एक साथ होना आवश्यक है।” बता दें कि 1791 में, अनाचार, ईशनिंदा और सोडोमी को फ्रांसीसी दंड संहिता से अपराध की श्रेणी से हटा दिया गया था। उनका मानना था कि अगर कोई पीड़ित नहीं है तो वह अपराध नहीं है।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन पिछले साल जनवरी में उस समय सुर्खियों में आ गए थे, जब उन्होंने एक किताब के प्रकाशन के बाद अनाचार पर नियमों को कड़ा करने का आह्वान किया था। इसमें एक शीर्ष फ्रांसीसी राजनीतिक टिप्पणीकार पर अपने सौतेले बेटे को गाली देने का आरोप लगाया गया था। ओलिवियर डुहामेल ने स्वीकार किया कि उन्होंने 1980 के दशक में किशोर लड़के के साथ दुर्व्यवहार किया था, लेकिन फ्रांसीसी क़ानून की सीमाओं के कारण उन पर कभी मुकदमा नहीं चलाया गया। बीते साल फ्रांस ने रेप की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए भी कानून में बड़ा बदलाव किया था। इसके अनुसार 15 साल के कम उम्र की लड़की के साथ यौन संबंध बनाना रेप माना जाएगा।

अगस्त्य मुनि के आश्रम में जीनत ने लिए फेरे, सचिन शर्मा से विवाह कर बनी ज्योति: बरेली पुलिस से माँगी सुरक्षा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की जीनत नाम की एक लड़की का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में जीनत खुद को बालिग बताते हुए सचिन शर्मा नाम के युवक से शादी कर लेने की बात कह रही है। जीनत ने अपने साथ किसी भी जोर-जबरदस्ती से इनकार किया है। साथ ही उसने बरेली पुलिस से सुरक्षा की माँग की है।

वीडियो में जीनत दुल्हन के रूप में दिख रही है। उसने खुद को नबी नगर की बताया है। जीनत के माथे पर बिंदी भी लगी है। पीछे भगवान विष्णु की तस्वीर दिखाई दे रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब जीनत का नया नाम ज्योति है। सचिन शर्मा का घर बरेली कैंट में है। दोनों में काफी समय से प्रेम था। आखिरकार दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। मंगलवार को (11 जनवरी 2022) सचिन के साथ जीनत चली गई थी। जीनत की माँ ने सचिन के खिलाफ अपनी बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाने की शिकायत की। यह शिकायत बरेली के कैंट थाने में दी गई थी। मामला 2 सम्प्रदायों का था इसलिए पुलिस ने फौरन केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।

इस दौरान सचिन और जीनत ने बरेली के ही बमनपुरी स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में विवाह कर लिया। यह विवाह आश्रम के पुरोहित पंडित केके शंखधर ने करवाया। विवाह में हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। जीनत ने अपना आधार कार्ड दिखा कर खुद की उम्र 21 साल होने का दावा किया। इस विवाह के बाद जीनत ने हिन्दू धर्म में आस्था जताई और अपनी सुरक्षा की माँग को ले कर वीडियो जारी किया। थाना कैंट के इंस्पेक्टर राजीव कुमार सिंह के मुताबिक, “युवती की माँ द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर रिपोर्ट दर्ज हुई है। लड़की स्वयं को बालिग बता रही है। मामले की जाँच की जा रही है।”

एक महीने से अजय देवगन ने नहीं काटे नाखून-बाल-दाढ़ी, कड़ी साधना के बाद सबरीमाला मंदिर में किए दर्शन: सिर पर अरुमुदी केत्तु लिए दिखे

हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन (Ajay Devgn) का नया लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। इसमें माथे पर तिलक और गले में रुद्राक्ष की माला पहने अजय एकदम अलग अवतार में दिखे थे। जिसके बाद फैंस कयास लगा रहे थे कि ये ‘शिवाय 2’ (Shivaay 2) के लिए उनका लुक है। हालाँकि, अजय के इस रूप के पीछे वजह कुछ और थी, जो अब सामने आ चुकी है। बुधवार (12 जनवरी 2022) को उन्होंने सबरीमाला (Sabarimala) स्थित भगवान अयप्पा (Lord Ayyappa) स्वामी मंदिर में पूजा की।

बता दें कि अजय देवगन केरल के सबरीमाला मंदिर में भगवान अयप्पा के दर्शन करने पहुँचे थे। अभिनेता ने मंदिर के अनुष्ठानों और नियमों का एक महीने तक पालन किया था। काले वस्त्र पहने, सिर पर अरुमुदी केत्तु लिए अभिनेता अन्य श्रद्धालुओं के साथ पैदल मंदिर पहुँचे और दर्शन-पूजा किया। देवस्व बोर्ड के अधिकारियों ने उन्हें शॉल भी भेंट किया। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, सबरीमाला की तीर्थयात्रा इंद्रियों की परीक्षा के बारे में है। तीर्थयात्रा के सफल समापन के लिए तीर्थयात्रियों से एक साधारण पवित्र जीवन जीने की उम्मीद की जाती है, जिसे ‘वृथम’ के नाम से जाना जाता है।

ईटाइम्स के अनुसार, “अजय ने एक या दो महीने के लिए कुछ जरूरी अनुष्ठानों का पालन किया। उन्हें काले रंग के कपड़े पहने देखा गया था, उन्होंने तकरीबन एक महीने तक बाल या नाखून नहीं काटे और न ही उन्होंने दाढ़ी बनाई।” हालाँकि, अजय देवगन की तरफ से इस पर किसी भी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पूजा के बाद अजय देवगन सीधे अपने काम पर लौट आए। उन्हें डबिंग स्टूडियो के बाहर स्पॉट किया गया, जहाँ वो उसी अवतार में दिखाई दिए, जिसमें उन्होंने पूजा की। अजय नंगे पाव भी थे।

गौरतलब है कि अभिनेता ‘कैथी’ (Kaithi) के हिंदी रीमेक में मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वह जल्द ही इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर देंगे। ‘कैथी’ की बात करें तो, ऑरिजिनल वर्जन में अभिनेता कार्थी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म के निर्माताओं ने फिल्म के हिंदी टाइटल का भी खुलासा किया है जो ‘भोला’ है। फिल्म से जुड़े एक करीबी एक सूत्र ने खुलासा किया कि ‘भोला’ का पहला शेड्यूल मुंबई में शूट किया जाएगा और राज्य में कोविड की ​​​​स्थिति को देखते हुए मिनिमम यूनिट सेट होगा।

लोगों की मदद करते हुए कोरोना+, 254 दिन चला इलाज-₹8 करोड़ खर्च; फिर भी नहीं बचे किसान धर्मजय सिंह: 50 एकड़ जमीन भी बिक गई

मई 2021 में कोरोना से संक्रमित धर्मजय सिंह की लम्बे इलाज के बाद आख़िरकार मृत्यु हो गई है। उनका इलाज अलग-अलग स्थानों पर 8 महीने चला। इस दौरान लगभग ₹8 करोड़ खर्च हुए। धर्मजय की उम्र लगभग 50 वर्ष थी। वे मध्यप्रदेश के रीवा के निवासी थे। उन्होंने अंतिम सॉंस चेन्नई के अपोलो अस्पताल में ली। उनका देहांत मंगलवार (11 जनवरी 2022) को हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धर्मराज किसान थे। उनके इलाज पर लगभग ₹3 लाख प्रतिदिन का खर्च आ रहा था। इसके लिए उनके परिजनों ने करीब 50 एकड़ जमीन बेच डाली। शुरू में उनका इलाज रीवा के संजय गाँधी अस्पताल में चला। बाद में सुधार न होने के चलते उन्हें एयर एम्बुलेंस से चेन्नई के अपोलो अस्पताल ले जाया गया। वहाँ उन्हें एक्समो मशीन पर रखा गया। उनकी सेहत की निगरानी लंदन के डॉक्टर कर रहे थे।

26 जुलाई 2021 को धर्मजय की हेल्थ रिपोर्ट

मूल रूप से रीवा के मऊगँज के रकरी गाँव निवासी धर्मजय ने 30 अप्रैल 2021 को अपना सैम्पल दिया था। 2 मई 2021 को उनके कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। उनके भाई प्रदीप सिंह के मुताबिक, “धर्मजय के फेफड़े 100% संक्रमित हो चुके थे। रीवा में लगभग 16 दिन इलाज में फायदा न दिखने के बाद उन्हें 18 मई को चेन्नई ले जाया गया। उनकी सेहत सुधर रही थी लेकिन सप्ताह भर पहले उनका ब्लड प्रेशर लो हो गया। इसी दौरान उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।”

धर्मजय सिंह स्ट्राबेरी और गुलाब की खेती के विशेषज्ञ थे। पिछले साल गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2021) पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें सम्मानित भी किया था। उन्हें संक्रमण कोरोना काल में जरूरतमंद लोगों की सेवा के दौरान हुआ। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक धर्मजय के परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद की माँग की थी। सरकार द्वारा उनके परिवार को ₹4 लाख दिए गए थे। गौरतलब है कि इससे पहले मेरठ के विश्वास सैनी का देश में कोरोना का सबसे लंबा इलाज चला था। 130 दिन के इलाज के बाद वे स्वस्थ हो गए थे।

Pak को दिला दिए ₹55 Cr, शरणार्थी हिन्दुओं/सिखों को भरी ठंड में मस्जिदों से निकाल सड़क पर ला दिया: गाँधी का अंतिम अनशन

1947-48 का साल भारत की स्वतंत्रता के लिए याद किया जाता है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के भाषण ‘Tryst With Destiny’ के लिए याद किया जाता है। भारत-पाकिस्तान विभाजन के लिए याद किया जाता है। महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) के अंतिम अनशन (Last Fast) और उनकी हत्या के लिए याद किया जाता है। लेकिन, क्या इन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ये नहीं है कि हम इन दो वर्षों में लाखों लोगों के नरसंहार की बात करें? विभाजन के समय हिन्दुओं/सिखों का नरसंहार हो या गाँधी की हत्या के बाद महाराष्ट्र में चितपावन ब्राह्मणों का कत्लेआम, ये सब क्यों भुला दिया जाता है?

महात्मा गाँधी भारत की आज़ादी के समय पश्चिम बंगाल में थे। 9 सितंबर, 1947 को वो दिल्ली पहुँचे और उनकी नजर में दिल्ली ‘लाशों का शहर’ हो गया था। जनवरी 1948 में वो अपने जीवन के अंतिम उपवास पर बैठे। उनकी माँगें क्या थी, वो जान लीजिए। उनकी माँग थी कि सांप्रदायिक सौहार्दता बनाई रखी जाए और हिन्दू-मुस्लिम एक होकर रहें। वैसे ये पहली बार नहीं था क्योंकि इससे पहले भी दो बार वो तथाकथित हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए उपवास पर बैठ चुके थे।

जनवरी 1948 में महात्मा गाँधी का अंतिम अनशन: जानिए क्या थी उनकी माँगें

उस समय जब जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित हिंसा हो रही थी, महात्मा गाँधी को सिर्फ दिल्ली के मुस्लिमों की चिंता सता रही थी। उनका कहना था कि मुस्लिम दिल्ली में सुरक्षित नहीं हैं। मौलाना आज़ाद से मिल कर उन्होंने अपना अनशन तोड़ने के लिए कुछ शर्तें रखीं – मेहरौली के ख्वाजा बख्तियार दरगाह पर हर साल लगने वाले मेले (उर्स) का शांतिपूर्ण आयोजन हो, दिल्ली में जिन 100 मस्जिदों को शरणार्थी कैंपों में बदल दिया गया है – उन्हें पूर्व की स्थिति में लाया जाए।

इसके अलावा उनकी अन्य माँगें थीं – पुरानी दिल्ली में मुस्लिमों को स्वतंत्र रूप से घूमने-फिरने की व्यवस्था की जाए, पाकिस्तान से लौटने वाले मुस्लिमों को लेकर गैर-मुस्लिम कोई आपत्ति न जताएँ, रेलगाड़ियों में मुस्लिम निडर होकर यात्रा कर सकें, मुस्लिमों का आर्थिक बहिष्कार नहीं किया जाए और हिन्दू शरणार्थियों को मुस्लिमों के इलाके में तभी बसाया जाए जब उनकी अनुमति मिले। इसका सीधा अर्थ है कि महात्मा गाँधी का ये आमरण अनशन मुस्लिमों के लिए था।

रामचंद्र गुहा जैसे इतिहासकारों की मानें तो महात्मा गाँधी भी यही समझते थे कि देश की राजधानी की परिभाषा ही मुस्लिमों से शुरू होती है और यहाँ की कलाकृतियाँ, साहित्य, संगीत और मेडिकल विज्ञान तक पर मुस्लिमों की छाप है। उन्होंने सितंबर 1947 में दिल्ली पहुँच कर हिन्दुओं और मुस्लिमों को ज्ञान दिया कि वो मुस्लिमों को बराबर के नागरिक की तरह रहने दें, दास बना कर नहीं। उन्होंने पाकिस्तान जाकर वहाँ हिन्दुओं और सिखों के लिए प्राण त्यागने की बातें की, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

हिन्दुओं को खुद को दोषी मानने के लिए मजबूर करने के प्रयास में महात्मा गाँधी उनसे पूछते थे कि क्या तुमलोग 4 करोड़ मुस्लिमों का विनाश कर दोगे? उनका कहना था कि मुस्लिमों का हिन्दू धर्म में धर्मांतरण भी उनका ‘नरसंहार’ ही होगा। महात्मा गाँधी अपने 78वें जन्मदिन पर देश के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार पटेल से यही कह रहे थे कि आज मुझे कोई नहीं सुनता है, मैं ज़िंदा ही क्यों हूँ? उनकी चिंता थी कि मुस्लिमों के बाद अब ईसाईयों का क्या होगा।

कितनी अजीब बात है न कि नवंबर 1947 में आयोजित कॉन्ग्रेस के एक कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महात्मा गाँधी ने कहा कि न तो भारत केवल हिन्दुओं का है और न पाकिस्तान केवल मुस्लिमों का। जबकि पाकिस्तान का जन्म ही इस्लाम के आधार पर हुआ था, मजहब के आधार पर हुआ था। उनका दावा था कि चाँदनी चौक से मुस्लिमों की दुकानें हटा दी गई हैं और दिल्ली में 130 मस्जिदों में तोड़फोड़ हुई है। 12 जनवरी, 1948 को महात्मा गाँधी ने अगले दिन से आमरण अनशन की घोषणा की।

महात्मा गाँधी इस बात से भी नाराज़ थे कि भारत अब पाकिस्तान को ‘उसके हिस्से के रुपए’ क्यों नहीं दे रहा। 13 जनवरी, 1948 को सवा 11 बजे महात्मा गाँधी ने अपना आमरण अनशन शुरू किया, जो उनके जीवन का अंतिम था। बाहर पीड़ित हिन्दू भी विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, महात्मा गाँधी के खिलाफ नारे लग रहे थे। 15 जनवरी को ऐलान किया गया था कि महात्मा गाँधी का आमरण अनशन अल्पसंख्यकों के लिए है, भारत के भी और पाकिस्तान के भी।

शरणार्थी हिन्दू सड़क पर आ गए, लेकिन गाँधी को थी मुस्लिमों की चिंता

तब तक भारत सरकार भी पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपए देने के लिए तैयार हो गई थी। 18 जनवरी, 1948 को महात्मा गाँधी ने अपना अनशन खतम कर दिया। उससे पहले डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद से मिल कर सभी धर्मों के नेताओं ने वादा किया था कि दिल्ली में मुस्लिमों को कुछ नहीं होगा। नेहरू सरकार किसी तरह इस अनशन को खत्म कराना चाहती थी, जिसमें वो कामयाब रही। महात्मा गाँधी का कहना था कि ये उनका सबसे बड़ा अनशन था। उससे पहले वो ‘राष्ट्रवाद के नाम पर हिंसा’ के खिलाफ भी अनशन कर चुके थे।

नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे अपनी पुस्तक ‘गाँधी वध क्यों‘ में लिखते हैं कि मस्जिदों से जिन शरणार्थियों को हटाने की बात गाँधी कर रहे थे, वो सभी हिन्दू थे। गोपाल ने बताया है कि ठंड और बारिश में उन्होंने अपनी आँखों से ठिठुरते हुए हिन्दुओं को बाहर निकलते हुए देखा। उन्होंने ही ‘बिरला हाउस’ के बाहर जाकर नारे लगाए, लेकिन गाँधी ने उनकी एक न सुनी। गोपाल गोडसे इस बात से नाराज़ थे कि महात्मा गाँधी ने अपने अनशन में पाकिस्तान सरकर के लिए कोई शर्त क्यों नहीं रखी?

अपनी पुस्तक ‘Freedom At Midnight (आज़ादी आधी रात को)’ में फ्रेंच लेखक डोमिनोक लापिएर्रे (Dominique Lapierre) लिखते हैं कि अनशन के दौरान महात्मा गाँधी पाकिस्तान जाने का प्रबंध कराने में भी लगे हुए थे और इसके लिए मुंबई के कपास दलाल जहाँगीर पटेल की मदद ले रहे थे। लेकिन, जिन्ना ने गाँधी पर अविश्वास जताते हुए मना कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि गाँधी के कारण ही उन्हें कभी कॉन्ग्रेस छोड़नी पड़ी थी। 55 करोड़ रुपए मिलने की घोषणा के बाद जिन्ना तैयार हो गए और गाँधी सीमा से पैदल पाकिस्तान जाने का मन बना लिया।

वो लिखते हैं कि कैसे महात्मा गाँधी ने अनशन के दौरान उन्हें देखने आए माउंटबेटन दंपति के स्वागत करते हुए कहा था, “अच्छा तो जब मुझे अनशन करना पड़ता है, तब पहाड़ मुहम्मद के पास आता है।” उद्योगपति घनश्याम दास बिरला ने गाँधी को समझाया भी कि पाकिस्तान को राशि हस्तानांतरित करने के परिणाम ठीक नहीं होंगे, लेकिन गाँधी नहीं माने। उनका मानना था कि इस रुपए से पाकिस्तान हथियर खरीदेगा। लेकिन, महात्मा गाँधी की जिद के कारण भारत सरकार को तैयार होना पड़ा।

मेरठ के सोतीगंज में कुख्यात कबाड़ी शाकिब की 3 करोड़ की संपत्ति जब्त: यूपी पुलिस को 9 गाड़ियाँ और 6 घर मिले

उत्तर प्रदेश में मेरठ (Meerut) के सोतीगंज (Sotiganj) इलाके से एक और कुख्यात कबाड़ी वाला धरा गया है। पुलिस ने बुधवार (12 जनवरी 2022) को शाकिब उर्फ गद्दू की करोड़ों की संपत्ति जब्त की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपित शाकिब के पास से 9 गाड़ियाँ और 6 आलीशान घर जब्त किए गए हैं।

बताया जा रहा है कि पुलिस ने अवैध कारोबार में लिप्त कुख्यात कबाड़ी शाकिब की संपत्ति देखी तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। हालाँकि, आरोपित के परिवार वालों और घर की महिलाओं ने एएसपी कैंट सूरज राय से अनुरोध किया कि वे उनके घर को जब्त ना करें। अगर उन्होंने ऐसा किया तो वे बेघर हो जाएँगी।

सोतीगंज में पुलिस कार्रवाई (साभार- अमर उजाला)

राय ने बताया कि महिलाओं के लिए राइट टू लाइफ के अंतर्गत एक घर को छोड़ा गया है। संपत्ति खाली करने के लिए आरोपित के परिवार को एक हफ्ते पहले नोटिस भी दिया जा चुका है। हम आदेश का पालन कर रहे हैं।

उन्होंने आगे बताया कि शाकिब उर्फ गद्दू पेशेवर अपराधी है। उस पर दस मुकदमे पहले से दर्ज हैं। एक मामला उस पर पुलिस के ऊपर फायरिंग का भी दर्ज है। आरोपित गाड़ी की सीट काटने से लेकर कई गोरखधंधे में शामिल रहा है। गद्दू की जब्त की गई संपत्ति की कीमत तीन करोड़ रुपए बताई जा रही है।

बता दें कि सोतीगंज में कुख्यात कबाड़ी वालों पर प्रशासन की कार्रवाई जारी है। दावा किया जा रहा था कि सोतीगंज में कबाड़ का खेल अब बंद हो चुका है, लेकिन ऐसा नहीं है।

MLA के टिकट के लिए कॉन्ग्रेस की महिला नेता ने खुद पर चलवाई गोली: यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया, PM मोदी को दिखा चुकी है काला झंडा

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस की एक महिला नेता द्वारा खुद पर ही गोली चलवाने का मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यूपी पुलिस ने खुलासा करते हुए बताया है कि कॉन्ग्रेस की उक्त महिला नेता ने खुद का राजनीतिक कद बढ़ाने के लिए अपने ऊपर ही गोली चलवाने की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में राजपुर टटेरी निवासी धर्मेंद्र यादव, प्रतापपुर कमैचा निवासी मुस्तकीम और पुरवा की रहने वाली रीता यादव को गिरफ्तार किया है।

ये तीनों ही अभियुक्त सुल्तानपुर जिला के चाँदा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों के निवासी हैं। नरहरपुर रेलवे क्रॉसिंग और जसलोक हॉस्पिटल के पास से इन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त धर्मेन्द्र के कब्जे से एक तमंचा (12 बो)र व दो अदद जिन्दा कारतूस भी बरामद किए गए हैं। रीता यादव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में खुद कॉन्ग्रेस की प्रत्याशी बनना चाहती थीं, इसीलिए उन्होंने इस घटना को अंजाम दिया। ये घटना लंभुआ कोतवाली बाईपास की है।

एक और जानने लायक बात ये है कि कॉन्ग्रेस की नेता रीता यादव ने पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काला झंडा दिखाया था। यूपी पुलिस ने कहा कि पूछताछ के दौरान अभियुक्तों द्वारा बताया गया कि रीता यादव ने अपने परिचित पूर्व ग्राम प्रधान माधव यादव से मिलकर सुनियोजित तरीके से योजना बनाकर आगामी विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस पार्टी से विधायक का टिकेट प्राप्त करने के लिए अभियुक्तों को तैयार किया और इस घटना को अंजाम दिया।

यूपी पुलिस ने अपने बयान में कहा, “लंभुआ कस्बे के लखनऊ वाराणसी बाईपास ओवर ब्रिज पर अज्ञात बाइक सवार व्यक्तियों द्वारा संतोष यादव की 35 वर्षीय पत्नी रीता यादव पत्नी (निवासी सुनावा लालू का पुरवा थाना चाँदा जनपद सुल्तानपुर) के बाएँ पैर में गोली मार दी गई थी। अभियुक्तो की गिरफ्तारी हेतु गठित कर अभिसूचना संकलन की कार्यवाही प्रारम्भ की गई तथा अभिसूचना तंत्र विकसित किया गया। पता चला कि अभियुक्त कॉन्ग्रेस नेता के साथ ही गाड़ी में चढ़े थे और फायरिंग कर के भाग निकले।”