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वेणु की ‘चेली’, राडिया टेप में ‘नाम’, साइकिल ‘सवार’: 2017 यूपी चुनाव में भी रोहिणी सिंह करवा चुकी है जगहँसाई

यूँ तो रोहिणी सिंह को पत्रकारिता का चोला ओढ़कर समाजवादी पार्टी (SP) के लिए बैटिंग करने में महारत हासिल है। लेकिन इस बार अतिउत्साह में उन्होंने खुद को कानूनी पचड़े में डाल लिया है। उन्होंने भाजपा विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी के पार्टी छोड़ने की फेक न्यूज को हवा दी थी।

इस ट्वीट के चंद घंटों बाद ही बीजेपी विधायक ने उनके ऊपर कार्रवाई की माँग कर डाली। हालाँकि ये पहली बार नहीं है कि बीजेपी के ख़िलाफ़ और सपा के पक्ष में रोहिणी सिंह ने अफवाह फैलाकर अपनी जगहँसाई करवाई हो। साल 2017 में विधानसभा चुनाव के समय इस काम को इस महिला पत्रकार ने धड़ल्ले से किया था।

समाजवादी पार्टी से रोहिणी का लगाव

पाँच साल पहले भी जब विधानसभा चुनाव थे तब भी रोहिणी बीजेपी के ख़िलाफ़ माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही थीं। उनके कुछ पुराने ट्वीट्स पर नजर डालिए।

2017 में चुनाव के नतीजे आने से पहले तक रोहिणी सिंह सिर्फ ये बताने में व्यस्त थीं कि बीजेपी यूपी में संघर्ष कर रही है, उनका सत्ता में आने का कोई चांस नहीं है। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा था, “यूपी में घूम रही हूँ और नोटबंदी के कारण गुस्सा हर जगह देखने को मिल रहा है। अचंभित हूँ कि दिल्ली के विश्लेषक कैसे इसे नजर अंदाज कर रहे हैं।”

एक ट्वीट में उन्होंने अपना चुनावी विश्लेषण कर बताया था, “सबसे बड़ी लूजर भाजपा होगी, आरएलडी को 2 फायदे होंगे। गठबंधन उम्मीद से भी ज्यादा फायदा देने वाला है।”

उस समय इकोनॉमिक टाइम्स में काम कर रही रोहिणी और उनके साथी पत्रकारों की ‘ताबड़तोड़ मेहनत’ के बावजूद 2017 में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ उत्तर प्रदेश की सत्ता में आई। इसके बाद जमीनी हकीकत को नजरंदाज कर एकतरफा रिपोर्टिंग के लिए ईटी को खासी ओलचना झेलनी पड़ी थी।

नीरा राडिया टेप में रोहिणी सिंह का नाम

यहाँ मालूम हो कि रोहिणी सिंह का नाम सिर्फ यूपी चुनावों के कारण मीडिया में चर्चा में नहीं था। नीरा राडिया केस में भी रोहिणी का नाम सामने आया था। द वायर के संस्थापक एम के वेणु ने नीरा राडिया से बातचीत में उन्हें होनहार कहते हुए उनकी तारीफों के पुल बांधे थे।नीरा राडिया टेप का खुलासा होने पर जो बातचीत सामने आई थी उसमें वेणु कहते सुनाई पड़ रहे थे,

“आपको मालूम है क्या एक लड़की ने ज्वाइन किया था जिसने अब ईटी ज्वाइन कर लिया है। वह सीएनबीसी में भी थी तीन-चार साल थी और बेस्टर पर्फॉर्मर थी। फिर उसकी शादी हो गई। वो यूएस से अब लौटी है। उसका नाम रोहिणी सिंह है। अब मैं उसे ईटी नाऊ में ले आया हूँ…. उसके पास संपर्कों का नेटवर्क हैं और  वह चाहती है कि उसे आपके सिस्टम से कुछ लोगों से मिलाया जाए।”

बातचीत से साफ पता चल रहा है कि कैसे एम के वेणुगोपाल रोहिणी सिंह में होनहार पत्रकार देखते थे और साथ ही साथ उनके लिए सिफारिश भी करते थे। शायद यही वजह है कि यूपी चुनावों के बाद ईटी से रिश्ता टूटते ही रोहिणी द वायर से जुड़ गईं। इसे भी कई लोग वेणु की ही ‘कृपा’ बताते हैं।

द वायर के रूप में रोहिणी को अपने विचार प्रचार-प्रसार करने के लिए एक सटीक माध्यम मिल गया था जो उनकी विचारधारा से मेल खाता था। उन्होंने बीते सालों में लगातार बीजेपी के प्रति घृणा फैलाने काम किया है। कोरोना काल में यही रोहिणी सिंह थीं जिन्होंने श्रमिक एक्सप्रेस चलने पर झूठ परोसा था कि मजदूरों से मोदी सरकार ज्यादा किराया वसूल रही है। इतना ही नहीं कुछ दिन पहले प्रोपगेंडा चलाने के कारण उन्हें रुबिका लियाकत ने भी लताड़ा था।

BJP नेताओं से रोहिणी की घृणा और कारनामे

कुछ दिन पहले प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ पर इन्हीं के लेख के कारण अमित शाह के बेटे जय शाह द्वारा मानहानि का केस किया गया था। तब रोहिणी ने जय शाह के व्यापार को लेकर उन पर गंभीर आरोप लगाए थे और इसी बाबत जय शाह ने 100 करोड़ रुपए का मानहानि मुकदमा दायर था। रोहिणी सिंह ने पूर्व रेल मंत्री पीयूष गोयल को लेकर भी घृणा दिखाई थी। पिछले साल रोहिणी सिंह समेत कई वामपंथियों ने पीयूष गोयल पर किसानों को धमकाने का आरोप मढ़ा था जबकि हकीकत में बात कुछ और थीं। उस समय गोयल की बातों को धमकी बताकर फैलाने का काम तेजी से हुआ था। इनके अलावा हालिया मामलों को छोड़ दें तो रोहिणी सिंह पर एक निश्चित सरकार के पक्ष में लिखने पर बीएचके अपार्टमेंट मिलने के आरोप भी लगते रहे हैं। उनसे जुड़े किसी भी विवाद में सामान्य यूजर भी इस टॉपिक को छेड़ देता है और फिर वाकया चर्चा में आ जाता है।

तलाक-उल-सुन्नत को खत्म कराने हाई कोर्ट पहुँची मुस्लिम महिला, बताया- बर्बर रिवाज: केंद्र से अदालत ने माँगा जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को किसी भी समय बेवजह तलाक (तलाक-उल-सुन्नत) मामले में केंद्र सरकार को नोटिस देकर जवाब माँगा है। नोटिस का जवाब देने के लिए केंद्र को 8 सप्ताह का समय दिया गया है। यह नोटिस न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ ने जारी किया है।

यह याचिका एक 28 वर्षीया मुस्लिम महिला ने दाखिल की है जो 9 माह के एक बच्चे की माँ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक याचिका दाखिल करने वाली मुस्लिम महिला ने तलाक उल सुन्नत को मनमानी, असंवैधानिक और बर्बर रिवाज बताया है। महिला के पति ने अगस्त 2021 में उसे तीन तलाक बोल कर छोड़ दिया था।

याचिका दाखिल करने वाली महिला की तरफ से एडवोकेट बजरंग वत्स ने बहस की है। उन्होंने न्यायालय से माँग की है कि तलाक-उल-सुन्नत द्वारा तलाक के संबंध में चेक और बैलेंस के रूप में विस्तृत दिशा-निर्देश या कानून जारी किए जाएँ। साथ ही इस बात की भी माँग की गई है कि मुस्लिम विवाह को केवल एक कॉन्ट्रैक्ट न मान कर एक स्थिति घोषित किया जाए।

केंद्र सरकार की तरफ से इस मामले में एडवोकेट मोनिका अरोड़ा ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बुधवार (12 जनवरी) को अदालत में बताया कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए एक्ट 2019 में तीन तलाक को कवर किया गया है। उसमें तलाक के अन्य रूपों को शामिल नहीं किया गया था।

सितम्बर 2021 में जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने याचिका को PIL के तौर पर सुनवाई के लिए स्वीकार किया था। यह याचिका पिछले साल सितम्बर में ख़ारिज की जा चुकी थी। याचिका को ख़ारिज करने की वजह इस मामले में संसद का पहले से हस्तक्षेप बताया गया था। बाद में इस पर पुनर्विचार की माँग की गई थी। इस मामले में अगली सुनवाई 2 मई को तय की गई है।

क्या है तलाक-उल-सुन्नत

‘तलाक-उल-सुन्नत’ किसी मुस्लिम व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को किसी भी समय बेवजह तलाक देने के एकाधिकार को कहते हैं। यह एक बार में लागू नहीं होती। इसे रिकवरेबल तलाक भी कहा जाता है। तलाक के इस रूप में पति-पत्नी के बीच समझौते की संभावना भविष्य में बनी रहती है। इसलिए यह ट्रिपल तलाक से अलग मानी जाती है। इसे शिया और सुन्नी दोनों अमल में लाते हैं।

#JantaChunegiCM अभियान: ‘लवणासुर सीएम भगवंत मान’ पर करें कॉल, बताएँ पंजाब में कौन हो AAP का मुख्यमंत्री चेहरा

पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) के मद्देनजर शुरू किया गया आम आदमी पार्टी का ताजा पॉलिटिकल स्टंट #JantaChunegiCM एक ट्विटर यूजर के लिए बहुत ही खराब अनुभव साबित हुआ है। दरअसल, हुआ ये कि इस अभियान के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा जो मोबाइल नंबर जारी किया गया था, वह नंबर और पीड़ित ट्विटर यूजर के मोबाइल नंबर से काफी मिलता-जुलता है। अब इस नंबर पर AAP समर्थक, आलोचक और पसंदीदा उम्मीदवार समेत अन्य लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। वहीं, कुछ लोग इसे AAP हॉटलाइन का नंबर समझकर पीड़ित के नंबर पर गालियाँ तक भेज रहे हैं।

आइए जानते हैं क्या है मामला:

दरअसल, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने हाल ही में ‘व्हाट्सएप कॉल/मैसेज’ हॉटलाइन सेवा के लिए एक नंबर का ऐलान किया। इसके जरिए उन्होंने लोगों से आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर उम्मीदवारों के नाम भेजने का आग्रह किया था।

जब इस नंबर को Truecaller पर चेक किया गया तो वहाँ यह नंबर ‘लवणासुर सीएम भगवंत मान’ के नाम से सेव किया गया मिला।

AAP के द्वारा जारी मोबाइल नंबर

बता दें कि लवणासुर नाम अरविंद केजरीवाल को दिया गया है। इसके जरिए सोशल मीडिया पर लोग उनका मजाक उड़ाते हैं। आप यहाँ पढ़ सकते हैं कि आखिऱ केजरीवाल को लवणासुर क्यों कहा जाता है।

आम आदमी पार्टी के समर्थकों समेत कई लोगों ने गलत नंबर नोट कर लिया, जिसके कारण ट्विटर यूजर तरुण भैरम की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

तरुण के द्वारा केजरीवाल को किया गया ट्वीट

आप की इस गलती के बाद तरुण ने अरविंद केजरीवाल को ट्वीट कर बताया कि ऐस लग रहा है कि गलती से केजरीवाल ने पंजाब के सीएम के लिए चलाए गए व्हॉट्सऐप अभियान के लिए उनका नंबर दे दिया है।

तरुण के द्वारा किया गया ट्वीट

पता चला है कि भैरम का फोन नंबर आप की हॉटलाइन से काफी मिलता-जुलता है और आप के कई समर्थकों ने गलत नंबर नोट कर लिया और उन्हें सीएम की अपनी पसंद मैसेज के जरिए बताने लगे। स्क्रीनशॉट में देखा जा सकता है कि ‘ट्रेंडी गर्ल्स’ नाम वाले व्यक्ति समेत कई लोग भगवंत मान को पंजाब के सीएम को रूप में देखना चाहते हैं। ऐसा लगता है कि इन सभी ने गलत नंबर नोट कर लिया है।

बहरहाल, इस मुश्किल समय के लिए तरुण भैरम के प्रति हमारी संवेदनाएँ हैं।

चटाई पर सोना, सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य का पालन: भगवान अयप्पा के द्वार पर अजय देवगन, 41 दिन की कठोर साधना

बाॅलीवुड एक्टर अजय देवगन ने बुधवार (12 जनवरी 2022) को केरल के सबरीमाला (Sabarimala) स्थित भगवान अयप्पा (Lord Ayyappa) स्वामी मंदिर में पूजा की। 41 दिनों की कठिन साधना और व्रत के बाद अजय देवगन सबरीमाला पहुँचे। इसकी कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। तस्वीरों में वे काले वस्त्र पहने, माथे पर तिलक, गले में रुद्राक्ष और सिर पर अरुमुदी केत्तु लिए नजर आए।

रिपोर्टों के अनुसार अजय देवगन ने भगवान अय्यपा के दर्शन के लिए कठिन नियमों का पालन किया। जैसे 41 दिन तक काले कपड़े पहनना, ब्रह्मचर्य जीवन का पालन, नँगे पाँव रहना, जमीन पर सोना, रोज शाम को पूजा और हमेशा गले में तुलसी की माला पहने रखना आदि। परिवार के एक करीबी सूत्र ने ईटाइम्स को बताया कि इस दौरान वह 11 दिन तक फर्श पर चटाई बिछा कर सोए। दिन में दो बार अयप्पा भगवान की पूजा करते थे। बिना लहसुन/प्याज के केवल शाकाहारी भोजन करते थे। जहाँ भी जाते थे नंगे पैर चलते थे। इस दौरान उन्होंने न तो किसी परफ्यूम का इस्तेमाल किया और न ही शराब का सेवन। इन नियमों का पालन करने के बाद अजय ने सबरीमाला मंदिर में भगवान के दर्शन किए। इसके बाद पुजारियों ने अभिनेता को प्रसाद दिया। उनके साथ उनके चचेरे भाई-विक्रांत और धर्मेंद्र भी थे। इन दोनों ने भी अजय के समान ही साधना की थी।

इस कठिन साधना को लेकर अजय देवगन की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दर्शन के बाद वे सीधे काम पर लौट आए। उन्हें डबिंग स्टूडियो के बाहर स्पॉट किया गया, जहाँ वे उसी लुक में थे, जिसमें उन्होंने पूजा की थी। बड़ी बात यह है कि स्टूडियो के बाहर स्पॉट अजय ने पैरों में जूते-चप्पल भी नहीं पहने थे। बता दें कि सबरीमला मंदिर मकराविलाक्कु त्योहार के लिए 29 दिसंबर से खोला गया है। त्योहार 14 जनवरी को है।

गौरतलब है कि अभिनेता ‘कैथी’ (Kaithi) के हिंदी रीमेक में मुख्य भूमिका में नजर आने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वह जल्द ही इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू कर देंगे। ‘कैथी’ की बात करें तो, ऑरिजिनल वर्जन में अभिनेता कार्थी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म के निर्माताओं ने फिल्म के हिंदी टाइटल का भी खुलासा किया है जो ‘भोला’ है। फिल्म से जुड़े एक करीबी एक सूत्र ने खुलासा किया कि ‘भोला’ का पहला शेड्यूल मुंबई में शूट किया जाएगा और राज्य में कोविड की ​​​​स्थिति को देखते हुए मिनिमम यूनिट सेट होगा।

केरल में चाकू से गोद दिया गया छात्र, कॉन्ग्रेस की शमा मोहम्मद ने हत्या को बताया ‘कर्म’: ‘जय श्रीराम’ पर भी फैला चुकी है झूठ

केरल (Kerala) के इडुक्की स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ता धीरज राजेंद्रन की चाकू घोंपकर हत्या (Murder) को कॉन्ग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद (Shama Mohammad) ने ‘कर्म’ (कर्मों का फल) करार दिया है। हत्या के आरोपी केरल यूथ कॉन्ग्रेस (Kerala Youth Congress) के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

SFI स्टूडेंट की हत्या को ‘कर्म’ करार देने पर लोगों ने उनके इस व्यवहार को ‘घृणित’ और ‘बीमार मानसिकता’ बताया। बेशर्मी का अलम ये है कि सोशल मीडिया पर आलोचना होने के बाद भी कॉन्ग्रेस प्रवक्ता शम मोहम्मद ने अपने ट्वीट पर न तो माफी माँगी और न ही उसे हटाया है। कॉन्ग्रेस ने भी इस पर कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं दी है।

गौरतलब है कि कन्नूर के रहने वाले धीरज राजेंद्रन SFI के कार्यकर्ता थे। बताया जा रहा है कि यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता निखिल पैली ने धीरज की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने निखिल पैली और जेरीन जिजो को गिरफ्तार किया है। इस घटना को लेकर पुलिस का कहना था कि कॉलेज में चल रहे चुनावों के कारण इस तरह की झड़पें होती रही हैं और यह राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का मामला है। हालाँकि, SFI कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में CPM की स्टूडेंट इकाई ने मोर्चा निकाला था और उसमें भी हिंसा हुई थी।

हिंदू-मुस्लिम दंगा भड़काने की कोशिश करने का आरोप लग चुका है शमा पर

ऐसा नहीं है कि शमा मोहम्मद अपने बयानों के चलते पहली बार विवादों में हैं। इससे पहले जून 2021 में गाजियाबाद में मुस्लिम बुजुर्ग की पिटाई के मामले में भी शमा मोहम्मद ने झूठ फैलाया था कि हिंदुओं ने मुस्लिम बुजुर्ग को पीटा और उससे जबरन ‘जय श्रीराम’ बुलवाया। वो पीएम मोदी पर भी मुस्लिमों से घृणा करने का आरोप लगा चुकी हैं। यहीं नहीं, साल 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद एक्जिट पोल के नतीजों से बौखलाई शमा मोहम्मद ने उत्तर भारतीयों को दब्बू करार दिया था। शमा ने कहा था कि उत्तर भारत के वोटर्स व्हाट्सप्प पर आई चीजों पर आसानी से विश्वास करते हैं और जल्दी प्रभावित किए जा सकते हैं।

‘कॉन्ग्रेस आलाकमान ने रची थी PM मोदी को मारने की साजिश’: बोले हिमंता सरमा- पंजाब के CM चन्नी की हो गिरफ्तारी

पंजाब में प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में हुई चूक के मामले पर एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद पंजाब पुलिस की कार्यशैली और चन्नी सरकार पर कई सवाल उठ रहे हैं। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में पाँच सदस्यीय पीठ का गठन किया है। वहीं हिमंता बिस्वा सरमा, योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान सहित भाजपा शासित 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कॉन्ग्रेस और चन्नी सरकार पर पीएम मोदी की हत्या के उद्देश्य से एक पूर्वनियोजित साजिश का आरोप लगाया है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कॉन्ग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए गुवाहाटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि पंजाब में 5 जनवरी, 2022 को पीएम मोदी की सुरक्षा में जो चूक हुई, उसमें ना सिर्फ पंजाब सरकार शामिल थी, बल्कि कॉन्ग्रेस हाईकमान का भी हाथ था। सरमा ने एक स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए कहा कि अभी तक जो सबूत मिले हैं वो ये स्पष्ट करते हैं कि कॉन्ग्रेस आलाकमान और पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रची थी। हिमंत बिस्वा सरमा ने इस दौरान कहा कि इस साजिश के लिए न सिर्फ पंजाब के मुख्यमंत्री को माफी माँगनी चाहिए और बल्कि उनको गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

उनका साफ कहना है, “…सबूत स्पष्ट करते हैं कि कॉन्ग्रेस आलाकमान और पंजाब के सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने की साजिश रची।”

असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “SHO बीरबल सिंह ने उस स्टिंग में साफ कहा है कि उनको उस वक्त (प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक के समय) कार्यवाही करने की कोई अधिकृत ज़िम्मेदारी नहीं दी गई थी। उन्होंन यह भी बताया कि जो लोग प्रदर्शन कर रहे थे वह किसान नहीं बल्की खालिस्तानी समर्थक थे।”

आपको बता दें कि इंडिया टुडे के जिस स्टिंग का हिमंत बिस्वा सरमा हवाला दे रहे थे उसमें दावा किया गया है कि पंजाब पुलिस के पास 2 जनवरी, 2022 को ही प्रधानमंत्री की हत्या के प्रयास के बारे में खुफिया रिपोर्ट थी। CM सरमा ने स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए यह भी कहा कि 5 जनवरी की घटना के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा दिए गए बयान ये संकेत देते हैं कि वे सभी इस ‘साजिश’ के बारे में जानते थे।

इसी स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में कहा कि पंजाब दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा के साथ खूनी साजिश रची गई थी। पीएम की सुरक्षा से खिलवाड़ किया गया। यह एक पूर्व नियोजित साजिश थी। CM योगी ने कहा कि डीजीपी, सीएस और सीएम का वहाँ न होना ब्लू बुक का उल्लंघन है। इससे पंजाब सरकार बच नहीं सकती। सुरक्षा की वो खिल्ली उड़ाते हुए नजर आए। देश की संवैधानिक सुरक्षा और राष्ट्र की सुरक्षा के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी खिलवाड़ कर रही है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने गैरजिम्मेदाराना बयान भी दिया जिसके लिए पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए।

सीएम योगी ने कहा कि देश के प्रमुख व्यक्ति के साथ सुरक्षा नियमों का पालन पंजाब सरकार ने नहीं किया। ये प्रायोजित था। पीएम के आगमन पर सीएम, सीएस और डीजीपी स्वयं नहीं आए, जबकि अगवानी का नियम है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि वीवीआईपी मूवमेंट के पहले इंटेलिजेंस के इनपुट आते हैं। जिसमें पूरे मूवमेंट को शासन को उपलब्ध कराया जाता है। खालिस्तानियों के बयान जिस तरह से आ रहे थे और इनपुट में भी पहले से था। योगी ने कहा कि वैकल्पिक रूट की अनदेखी की गई। फ्लीट को रोका गया जहाँ ड्रोन हमले या सुरक्षा से समझौता हो सकता था।

वहीं मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “पीएम मोदी की सुरक्षा में सेंध- अब यह स्पष्ट है कि यह स्वतःस्फूर्त नहीं था बल्कि एक पूर्वनियोजित साजिश थी और एसएचओ और डीएसपी सीआईडी ​​ने इसके बारे में पूर्व सूचना दी लेकिन उच्च अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर दिया। मैं सोनिया गाँधी से पूछना चाहता हूँ कि पीएम के साथ सीएम, डीजीपी क्यों नहीं थे।”

अगरतला में, मुख्यमंत्री बिप्लव देब ने आरोप लगाया कि सुरक्षा उल्लंघन “पूर्व नियोजित और पीएम के जीवन को खतरे में डालने के लिए एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।” उन्होंने आरोप लगाया, “भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने वाले खालिस्तानी संगठन सुरक्षा उल्लंघन में शामिल थे और जिस तरह से कॉन्ग्रेस नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है, उससे स्पष्ट होता है कि कॉन्ग्रेस आलाकमान ने पूरी घटना को प्रायोजित किया।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी “लापरवाही” और “बड़े पैमाने पर साजिश” का आरोप लगाया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “यह कहा जा सकता है कि यह सिर्फ एक गलती नहीं थी बल्कि एक बड़ी साजिश थी। उन्होंने जिस तरह से प्रधानमंत्री को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की, वह स्वतःस्फूर्त नहीं था, बल्कि एक पूर्व नियोजित, प्रायोजित साजिश थी। कॉन्ग्रेस आलाकमान को जवाबदेह होना होगा।”

हरियाणा में, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी कॉन्ग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “स्टिंग ऑपरेशन से पता चला है कि संभावित व्यवधानों पर खुफिया इनपुट के बावजूद, वैकल्पिक व्यवस्था करने के बजाय किसान नेताओं को मार्ग कैसे अवरुद्ध करें पर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। यह पंजाब सरकार की ओर से बेहद शर्मनाक है। जिस तरह से प्रधानमंत्री के जीवन को खतरे में डाला गया वह बेहद निंदनीय है।”

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पीएम मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में चूक पर फिर से कॉन्ग्रेस को घेरा है। एक टीवी चैनल के पीएम की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर स्टिंग ऑपरेशन के सामने आने के बाद स्मृति ईरानी ने कहा, “अब पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक का सच सबके सामने आ गया है।” उन्होंने पंजाब के सीएम चन्नी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि उन्होंने प्रियंका गाँधी को पीएम की सुरक्षा चूक की जानकारी क्यों दी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि पीएम की सुरक्षा मामले में प्रियंका गाँधी को जानकारी देना गलत है। वह एक प्राइवेट व्यक्ति हैं।

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसी ‘स्टिंग’ का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सवाल किया, “पंजाब में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार की सक्रिय मिलीभगत से सुरक्षा उपायों का जानबूझकर उल्लंघन क्यों किया गया? कॉन्ग्रेस में किसने उल्लंघन का लाभ उठाने की कोशिश की?” उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के पुलिसकर्मियों द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार ने जानबूझकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा को नजरअंदाज किया। साथ ही यह सवाल भी उठाया कि इस सुरक्षा चूक से कॉन्ग्रेस में किसने लाभ उठाने की कोशिश की।

उन्होंने मीडिया को बताया, इस ‘स्टिंग’ में पंजाब पुलिस के कुछ अधिकारियों को यह कहते सुना जा सकता है कि उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित कर दिया था कि प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के काफिले के मार्ग को अवरुद्ध कर रखा है, लेकिन कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्मृति ईरानी ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने पीएम को जानबूझकर असुरक्षित रखा।

गौरतलब है कि 5 जनवरी, 2022 को बठिंडा के हुसैनीवाला में स्वतंत्रता के बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले को रोकने के लिए किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा फ्लाईओवर जाम कर दिया गया, जिस कारण उन्हें 20 मिनट तक वहाँ फँसे रहने के बाद वापस दिल्ली लौटना पड़ा। इस मामले में पंजाब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे, जो प्रदर्शनकारियों के साथ चाय की चुस्की लेते हुए दिखी। और पंजाब की चन्नी सरकार बयान बदलती रही। मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा और जाँच के लिए कमिटी बनी। इस पूरे मामले में गृह मंत्रालय ने इसे पीएम मोदी की सुरक्षा में गंभीर चूक मानते हुए पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। बता दें कि फिरोजपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 42,750 करोड़ के विकास कार्यों के शिलान्यास के लिए पहुँचने वाले थे।

इस मामले में ‘इंडिया टुडे’ ने अपनी ‘ऑन ग्राउंड इन्वेस्टीगेशन‘ के आधार पर खुलासा किया है कि पंजाब पुलिस ने जानबूझ कर कार्रवाई नहीं की और उसे सब पहले से पता था। इस ‘स्टिंग ऑपरेशन’ में सबसे पहले ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार ने फिरोजपुर के एसपी सुखदेव सिंह से मुलाकात की। PM मोदी की उस दिन फिरोजपुर में ही रैली थी, जिसे रद्द करना पड़ा था। इसमें उनसे पूछा गया कि आखिर राज्य की ख़ुफ़िया व्यवस्था इस प्रकरण में विफल कैसे हो गई?

इस पर उन्होंने बताया कि एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस को 2 जनवरी को ही इस सम्बन्ध में एक पत्र भेज कर सुझाव दिया गया था कि कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर ट्रैफिक रोका जाए और भाजपा कार्यकर्ताओं को पीएम मोदी की रैली तक पहुँचने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार रिपोर्ट भेज कर आगाह किया गया कि प्रदर्शनकारी रैली के पंडाल में घुस सकते हैं और पुलिस द्वारा रोके जाने पर सड़क पर ही धरना देकर जाम लगा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि ‘बलदेव सिंह जीरा ग्रुप (भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी)’ ने पहले ही भीड़ जुटाने की साजिश रची थी। उन्होंने आगे मार्च किया और सड़क जाम कर दिया। इसके बाद फिर से पुलिस को सूचित किया गया। उन्होंने बताया कि 2, 3, 4 जनवरी को ADG (सिक्योरिटी) नागेश्वर राव आए भी थे, जिन्हें ब्लॉकेड के सम्बन्ध में आगाह करते हुए पत्र दिया गया। बता दें कि पीएम मोदी पहले हैलीकॉप्टर से फिरोजपुर जाने वाले थे, लेकिन मौसम खराब रहने के कारण उन्हें गाड़ी से यात्रा की योजना बनानी पड़ी। इस स्टिंग के सामने आने के बाद से ही कॉन्ग्रेस और पंजाब की चन्नी सरकार बुरी तरह से घिर गई है।

हाथ नहीं आया दाऊद इब्राहिम का भतीजा सोहैल कासकर, अमेरिका से दुबई होते हुए भाग गया पाकिस्तान: रिपोर्ट्स

मुंबई पुलिस (Mumbai Police) की तमाम कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पाकिस्तान में बैठा अंडरवर्ल्ड डॉन और वांछित आतंकी दाऊद इब्राहिम (Dawood Ibrahim) के भतीजे सोहैल कासकर (Sohail Kaskar) को भारत वापस लाने की कोशिश नाकाम हो गई। कासकर के दुबई के रास्ते पाकिस्तान चले जाने की खबर है। सोहैल को अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने नार्को टेररिज्म (Narco Terrorism) के आरोप में गिरफ़्तार किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय जाँच एजेंसियों ने हाल ही में एक आवाज इंटरसेप्ट की थी, जो सोहैल कासकर की थी। एजेंसियों ने जब तहकीकात शुरू की तो पता चला कि वह अमेरिका से निकल चुका है और दुबई होते हुए पाकिस्तान चला गया है। अमेरिका ने सोहैल को भारत को सौंपने के बजाय क्यों जाने दिया, ये अभी पुलिस को भी समझ में नहीं आया है।

सोहैल कासकर और दिल्ली के दानिश अली को साल 2014 में अमेरिकी एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था। इन दोनों पर ड्रग्स तस्करी और एयर मिसाइल की डीलिंग का आरोप था। इसकी जाँच फ़ेडरल ब्यूरो ओफ़ इंवेस्टिगेशन (FBI) ने की थी।

दानिश अली को 2019 में भारत को प्रत्यर्पित कर दिया गया था। उसी के बाद दाऊद के भाई नूरा के बेटे सोहैल कासकर के भारत को प्रत्यर्पण की उम्मीदें जगी थीं। यदि उसे भारत भेजा जाता तो वह दाऊद के बारे में तमाम जानकारियाँ देता। सोहैल की गिरफ़्तारी के दौरान उसके पास से भारतीय पासपोर्ट बरामद हुआ था। साल 2005 में भारत और अमेरिका के बीच हुए म्यूचअल लीगल असिस्टेंट्स ट्रीटी साइन के तहत ही सोहैल को भारत सौंपने की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।

UP के लिए कॉन्ग्रेस की पहली लिस्ट: 125 उम्मीदवारों में 50 महिला, उन्नाव पीड़िता की माँ-सलमान खुर्शीद की बीवी और CAA विरोधी सदफ जाफर का भी नाम

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के विधानसभा चुनावों (Assembly Election) के लिए कॉन्ग्रेस (Congress) ने अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। इसमें 125 उम्मीदवारों को शामिल किया गया है। इसमें प्रियंका गाँधी (Priyanka Gandhi) ने CAA-NRC का विरोध करने वाली सदफ जाफर और उन्नाव रेप पीड़िता की माँ आशा सिंह समेत 50 महिलाओं को टिकट दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के टिकट वितरण पर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी का कहना है कि इस लिस्ट में महिलाओं के साथ ही उन्होंने पत्रकारों और समाजसेवियों को भी टिकट दिया है। प्रियंका गाँधी ने बताया कि जिन 125 उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है, उनमें 40 फीसदी महिलाएँ और 40 प्रतिशत युवाओं को शामिल किया गया है। प्रियंका का कहना है कि वो इस नए पहल के जरिए राज्य में नए तरह की राजनीति की शुरुआत करना चाहती हैं।

कॉन्ग्रेस ने मानदेय बढ़ाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाने वाली आशा कार्यकर्ता पूनम पांडे को शाहजहाँपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है। उन्नाव रेप पीड़िता की माँ आशा सिंह को उन्नाव से ही चुनावी मैदान में उतारा गया है। इसको लेकर प्रियंका गाँधी ने कहा कि इनकी बेटी का रेप करने के बाद उसका एक्सीडेंट कराया गया था।

वहीं, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद (Louise Khurshid) को फर्रूखाबाद से टिकट दिया गया है। उल्लेखनीय है कि खुर्शीद की पत्नी पर 2010 में यूपी के 17 जिलों में दिव्यांगों को व्हीलचेयर देने के लिए दिए गए 71 लाख रुपए के अनुदान में वित्तीय गड़बड़ी करने के आरोप भी हैं। उनके खिलाफ जुलाई 2021 में गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था।

साभार: एआईसीसी

कॉन्ग्रेस ने जिन 125 लोगों की लिस्ट जारी की है, उनमें 15 मुस्लिम हैं। इस लिस्ट से ये समझा जा सकता है कि कॉन्ग्रेस उन लोगों पर फोकस किया है, जो कि किसी न किसी कारण से चर्चा में रहे हैं। बहरहाल, राज्य के 403 विधानसभा सीटों पर 10 फरवरी से मतदान शुरू होंगे, जो कि सात चरणों में संपन्न होंगे। मतगणना 10 मार्च 2022 को होगा।

कोरोना को ऐसे ‘गायब’ कर रहा चीन: मेटल बॉक्स में 21 दिन के लिए 2 करोड़ लोग ठूँसे गए, महिला-बच्चे-बुजुर्ग किसी को नहीं छोड़ रहा

चीन ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए एक नया अमानवीय ढंग ईजाद किया है। इस नए तरीके में कोविड ग्रसित लोगों को मेटल के छोटे डिब्बे (Metal Boxes) में 21 दिन तक बंद करके रखा जा रहा है। चीन प्रशासन का मकसद है कि वो बीजिंग में होने वाले ओलंपिक्स से पहले-पहले अपने देश से कोरोना का नामों-निशान मिटा दें। इसी क्रम में उन्होंने महिला और बच्चे समेत 20 मिलियन (2 करोड़ ) लोगों को इस क्वारंटाइन सेंटर भेजा है। 

इस संबंध में डेलीमेल ने अपनी रिपोर्ट भी प्रकाशित की है और सोशल मीडिया के जरिए भी चीन का ये नया कारनामा उजागर हुआ है। कुछ वीडियोज सामने आई हैं जिसमें दूर-दूर तक सैंकड़ों मेटल के छोटे-छोटे डिब्बे बने दिख रहे हैं और कुछ लोग पीपीई किट पहनकर बाहर बात करते सामान बाँटते भी नजर आ रहे हैं।

संबंधित रिपोर्ट्स बताती हैं कि जियान (Xi’an), अनयांग (Anyang) और यूजोहू (Yuzhou) में कोरोना के कारण कैसे लोगों को पकड़-पकड़कर क्वारंटाइन सेंटर भेजा जा रहा है। कथिततौर पर 2 करोड़ लोगों में से 1.3 करोड़ सिर्फ जियान के हैं, जो चीनी प्रशासन के कारण छोटी जेलों में रहने को मजबूर हैं। इन्हें लकड़ी के डिब्बे, टॉयलेट मिले हैं और बेवजह जबरन 2 हफ्ते का कारावास (क्वारंटाइन)। लोगों का कहना है कि अगर उनके इलाके में कोई एक व्यक्ति भी संक्रमित है तो सबको इन बॉक्स या फिर बसों में क्वारंटाइन होने को मजबूर किया जाता है वरना लॉकडाउन के कड़े प्रतिबंधों के साथ इलाके में रहना पड़ता है। 

कुछ लोगों ने शिकायत की है कि इन मेटल के डिब्बों के अंदर खाने की सामग्री बहुत थोड़ी बची है। वहीं कुछ लोगों ने दावा किया है कि वो इन कैंपों का पार्ट रह चुके हैं और उनके अनुसार, “यहाँ (मेटल के डिब्बे) में कुछ नहीं है। कोई हमें चेक करने नहीं आता। ये कैसा क्वारंटाइन हैं। हमें रात ही रात में बड़ी तादाद में ट्रांस्फर किया गया। हम में कई बुजुर्ग और बच्चे हैं। उनके लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की और लापरवाही के साथ हमें रखा गया।” यूजोहू के स्थानीय प्रशासन ने हाल में बताया था कि वहाँ 1.3 करोड़ की आबादी है। लेकिन इलाके में केवल 3 मरीज मिल जाने से पूरे क्षेत्र को लॉकडाउन में लगा दिया गया है।

बता दें कि चीन का ये नया तरीका उनकी कोविड-जीरो पॉलिसी के तहत चलाया जा रहा है जिसका मकसद है कि वो बीजिंग में होने वाले ओलंपिक्स से पहले पहले कोरोना का नाम मिटा दें। दुखद बात ये है कि चीन पहले तो 21 दिन तक लोगों को मेटल के डिब्बे में रहने को मजबूर करके अपने देश के लोगों के साथ ऐसी अमानवीयता कर रहा है और दूसरी ओर जो इसके विरुद्ध जाकर नियमों का उल्लंघन कर रहा है उन्हें जेल में डाला जा रहा है। अब तक दालियान में 3 लोगों को 4 साल से ज्यादा के लिए जेल भेज दिया गया है।

आंध्र में सत्ता की ये कैसी हनक: तिरुपति एयरपोर्ट पर MLA के बेटे को नहीं मिली एंट्री तो कटवा दिया कर्मचारियों के घरों का पानी कनेक्शन

आंध्र प्रदेश में विधायक के बेटे के साथ विवाद का खामियाजा तिरुपति एयरपोर्ट को भुगतना पड़ा। तिरुपति हवाईअड्डे और इसके कर्मचारियों के आवासीय परिसरों में पानी के कनेक्शन को काट दिया गया। दरअसल, आंध्र प्रदेश के विधायक बी करुणाकर रेड्डी के बेटे और तिरुपति के डिप्टी मेयर अभिनय रेड्डी से रेनीगुंटा एयरपोर्ट के मैनेजर सुनील के साथ विवाद किसी बात पर विवाद हो गया। 

एयरपोर्ट के मैनेजर ने अभिनय रेड्डी को एयरपोर्ट पर एंट्री देने से मना कर दिया। इसको लेकर YSRCP नेता और एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारियों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। बाद में रेनीगुंटा हवाई अड्डे पर और स्टाफ आवासीय क्वार्टरों में पानी की आपूर्ति काट दी गई। इसे अभिनय रेड्डी के प्रतिशोध के रूप में देखा गया। 

हालाँकि, नगर निगम ने दावा किया कि पाइप लाइन में रुकावट के कारण पानी की आपूर्ति बाधित हुई है। वहीं, लोगों ने जल निकासी की समस्या की भी शिकायत की। नगर निगम ने कहा है कि जल निकासी का पानी तेलुगू गंगा के पानी को दूषित करता है, जो पीने के काम में आता है। YSRCP के नेताओं का आरोप है कि रेनीगुंटा हवाईअड्डे के अधिकारियों ने अभिनय के साथ खराब व्यवहार किया और आधिकारिक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

हवाईअड्डे के अधिकारियों और तिरुपति नगर निगम के अधिकारियों ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। इधर विपक्षी नेता और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के महासचिव नारा लोकेश ने ट्विटर पर एक पोस्ट में अभिनय रेड्डी की आलोचना करते हुए कहा, “हवाई अड्डे और स्टाफ क्वार्टर में पानी की आपूर्ति का निलंबन YSRCP के अराजक शासन का एक सबूत है। मैं इस घटना की कड़ी निंदा करता हूँ।”

उल्लेखनीय है कि अभिनय रेड्डी इस सप्ताह की शुरुआत में आंध्र प्रदेश के मंत्री बोत्सा सत्यनारायण के स्वागत के लिए हवाई अड्डे गए थे। बोत्सा सत्यनारायण राष्ट्रीय स्तर की कबड्डी प्रतियोगिता के समापन समारोह में भाग लेने के लिए तिरुपति का दौरे पर थे। उनके साथ तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अध्यक्ष वाईवी सुब्बा रेड्डी भी थे।