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राजस्थान में नशे में धुत टीचर ने छात्राओं के सामने उतारे कपड़े, रोकने पर प्रिंसिपल और स्टाफ को दाँत काटा और नाखून चुभाए

राजस्थान (Rajasthan) में उदयपुर (Udaipur) जिले के कोटड़ा क्षेत्र के एक शराबी टीचर का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। नशे में धुत टीचर ने ना केवल स्कूल में छात्र-छात्राओं के सामने अपने कपड़े उतारे, बल्कि तीन घंटे तक उत्पात मचाते हुए स्टाफ और ग्रामीणों के साथ मारपीट भी की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोटड़ा के खजूरिया स्कूल का पीटीआई (शारीरिक प्रशिक्षण प्रशिक्षक) देवीलाल मीणा दोपहर करीब 12 बजे शराब के नशे में स्कूल पहुँचा। इस दौरान जब प्रिंसिपल आलोक शर्मा और दूसरे शिक्षकों ने उसे रोकने की कोशिश की और समझाया कि आप नशे की हालत में इसलिए घर चले जाएँ। इस पर उसने प्रिंसिपल को नाखूनों से जख्मी कर दिया और साथी शिक्षकों बाबूलाल खेर और भगवतीलाल को दाँतों से काट लिया।

नशे में धुत पीटीआई लगातार सभी को जान से मारने की घमकियाँ दे रहा था। इतना ही नहीं इसके बाद देवीलाल ने एक-एक करके अपने कपड़े उतारना शुरू कर दिया। इस दौरान 200 से ज्यादा छात्र-छात्राएँ मौजूद थे। टीचर को इस हालत में देखकर कई लड़कियाँ वहाँ से भागने लगी। पीटीआई ने शराब पीकर तीन घंटे तक उत्पात मचाया। वहाँ मौजूद लोगों से गली-गलौच की।

बताया जा रहा है कि शोर सुनकर जब ग्रामीण स्कूल में पहुँचे तो पीटीआई उनके साथ भी मारपीट करने लगा। हालाँकि, स्थिति काबू में नहीं आने पर इस बारे में पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने मौके पर पीटीआई को हिरासत में ले लिया और उसे अपने साथ थाने ले गई।

जानकारी के मुताबिक, पीटीआई टीचर इससे पहले भी कई बार स्कूल मे शराब पीकर हंगामा कर चुका है। पुलिस हर बार उसे पकड़कर ले जाती है और बिना कोई कार्रवाई करे उसे छोड़ देती है। इस मामले में कार्रवाई के लिए प्रिंसिपल आलोक शर्मा ने सीबीईओ, डीईईओ और जिला शिक्षा अधिकारी को लिखा है। यह मामला अब राजस्थान बाल आयोग तक भी पहुँच गया है।

‘दलाल किस्म के लोग…’: रोहिणी सिंह ने फैलाई BJP छोड़ने की अफवाह तो विधायक ने लताड़ा, यूपी पुलिस में दर्ज कराई शिकायत

भदोही के भाजपा विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने फर्जी अफवाह फैलाने के आरोप में पत्रकार रोहिणी सिंह के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। दरअसल, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की करीबी पत्रकार रोहिणी सिंह ने ट्वीट कर के लिखा था, “भदोही से विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने भी भाजपा छोड़ी। लेकिन, आधिकारिक पुष्टि तभी होगी जब केशव प्रसाद मौर्य का ट्वीट आएगा – पता नहीं क्यों त्रिपाठी जी ने भाजपा छोड़ दी। उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।”

साथ ही रोहिणी त्रिपाठी ने एक हँसने वाले इमोजी भी लगाया था। विधायक रवींद्र नाथ त्रिपाठी ने इस खबर का खंडन करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश पुलिस से आग्रह है कि उक्त रोहिणी सिंह पर मुझे साज़िश के तहत बदनाम करने, झूठी अफ़वाह फैलाने और मुझे मानसिक तनाव देने हेतु आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का कष्ट करें।” उन्होंने अपना इस्तीफा लिखा हुआ लेटरपैड वायरल करने वालों पर कार्रवाई के लिए शिकायत भी दर्ज कराई है।

रवींद्र नाथ त्रिपाठी के नाम और हस्ताक्षर के साथ वायरल उस लेटर पेड में लिखा था, “अवगत करना है कि भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश सरकार द्वारा अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा करने के दौरान ब्राह्मणों, अल्पसंख्यकों, दलितों और पिछड़े समुदाय के नेताओं को कोई तवज्जोह नहीं दी गई। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों और छोटे व माध्यम उद्योग व्यापारियों की उपेक्षा की गई है। प्रदेश सरकार की ऐसे कूटनीतिक रवैये के कारण मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ।”

इस पत्र में भदोही के विधायक के हवाले से हाल ही में भाजपा छोड़ने वाले कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य को लाचार, गरीबों और पिछड़ों की आवाज़ बताते हुए लिखा गया था कि वो मेरे नेता हैं और मैं उनके साथ हूँ। हालाँकि, विधायक ने इसे TRP के लालच में फैलाई गई अफवाह करार देते हुए कहा कि वो इस मामले में अलग-अलग मुक़दमे दर्ज कराने जा रहे हैं। उन्होंने रोहिणी सिंह को ‘अफवाह बाज’ करार दिया। साथ ही कहा कि ‘दलाल’ किस्म के लोग इस तरह की हरकतें कर रहे हैं।

विधायक ने इन अफवाहों का खंडन करते हुए स्पष्ट कहा कि उनका तन-मन और जीव्न भाजपा परिवार को समर्पित हैं। उन्होंने बताया कि जिन्होंने भी उनके नाम पर फ़र्जी लैटर बनाकर अफ़वाह उड़ाई थी, उनके खिलाफ थाने में तहरीर दी हैं, जल्द उत्तर प्रदेश पुलिस, उनके स्थान विशेष की हवा हवाई बनाएगी। उन्होंने इसे उनकी छवि धूमिल करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से उनका लेटर पैड स्कैन कर के उसे वायरल किया गया है।

ओमिक्रोन से चीन में दहशत: महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को किया मेटल बॉक्स में बंद, बाहर निकलने पर लोगों को पीट रहा ड्रैगन

दुनिया भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) के खतरनाक वैरिएंट ओमिक्रोन (Omicron) का कहर जारी है। इसी बीच खबर है कि चीन इस वैरिएंट पर काबू पाने के लिए अपने देश में कड़े नियमों को लागू कर रहा है। चीनी सरकार अनयांग (Anyang) समेत कई शहरों में लॉकडाउन (Lockdown) लगाकर दो करोड़ से अधिक लोगों को घरों में बंद रहने के लिए मजबूर कर रही है।

‘डेली मेल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अनयांग और युझोउ (Yuzhou) शहरों के अब तक कुल 20 मिलियन (2 ​करोड़) लोगों के घरों से निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यही नहीं उन्होंने बड़े पैमाने पर क्वारंटाइन कैंपस (Quarantine Camps) का एक नेटवर्क भी बनाया है, जहाँ हजारों की संख्या में मेटल बॉक्स बनाए गए हैं। इन मेटल बॉक्स में प्रेग्नेंट महिलाओं, बुजुर्ग, बच्चों समेत तमाम लोगों को आइसोलेट किया जा रहा है। 

दरअसल, ओमिक्रॉन वैरिएंट के दो मामले सामने आने के बाद 5.5 मिलियन (55 लाख) आबादी वाले आन्यांग के अलावा अन्य शहरों में सोमवार देर रात लॉकडाउन लगा दिया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जीरो कोविड पॉलिसी’ के तहत चीन में जिन नियमों के तहत सख्त लॉकडाउन लगाया गया है, उसे ‘दुनिया का सबसे सख्त लॉकडाउन’ कहा जा रहा है। वह मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हुए बेहद क्रूर प्रतिबंधों को अपनी देश की जनता पर थोप रहा है।

चीनी सरकार द्वारा शेयर की गई तस्वीरों के मुताबिक, Shijiazhuang प्रांत में 108 एकड़ में क्वारंटाइन कैंपस बनाया गया है। वहाँ के लोगों को आइसोलेट करने के लिए मेटल के छोटे से बॉक्स में 2 हफ्तों तक बंद करके रखा जा रहा है। इसी में उन्हें बेड और और टॉयलेट भी दिए गए हैं। प्रेग्नेंट महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी इसमें रखा जा रहा है। उन्होंने क्वारंटाइन कैंपस से निकलने के बाद बताया कि वहाँ उन्हें ठंडे मेटल बॉक्स में रखा गया था और खाने के लिए पर्याप्त भोजन भी नहीं दिया गया। कई दिनों तक हम भूखे रहे। हम लोगों को अपना घर छोड़कर यहाँ रहने के लिए दबाव बनाया गया। हमें बसों से भर-भरकर यहाँ लाया गया था।

चीनी सरकार पर आगबबूला होते हुए बीबीसी से एक शख्स ने बताया कि यहाँ कोई भी सुविधा नहीं दी जाती है। हम जिंदा हैं भी या नहीं इससे किसी को कुछ लेना देना नहीं होता। इन 2 हफ्तों में कोई हमें देखने भी नहीं आया। यह किस तरह का क्वारंटाइन सेंटर है? प्रेग्नेंट महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को यहाँ रखा जाता है और बाहर निकलने के बाद उन्हें पीटा भी जाता है।

बता दें कि चीन में वर्ष 2020 में कोरोना महामारी की शुरुआत के वक्त वुहान और हुबेई प्रांत के बाकी हिस्सों को बंद करने के बाद यह अब तक का सबसे सख्त लॉकडाउन है।

हामिद अंसारी के जिस भतीजे से काँपता था पूर्वांचल, योगी राज में उसे खुद की हत्या का डर: ऐसे ढहा मुख़्तार अंसारी का सैकड़ों करोड़ का साम्राज्य

मुख़्तार अंसारी एक ऐसा नाम है, जो सिर्फ पूर्वांचल ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में खौफ का एक पर्याय बन बैठा था। पूरे उत्तर भारत में लोग उसके नाम से अब उसे पहचान जाते हैं, लेकिन अब इसका कारण उसका खौफ नहीं है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से जिस तरह ‘डॉन’ कहे जाने वाले इस माफिया की घिग्घी बँधी हुई है और जिस तरह उसे बचाने के लिए पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, उससे उसका नाम मीडिया में लगातार बना रहा।

योगी राज में पूर्वांचल के इस माफिया के हश्र की बात करेंगे, लेकिन उससे पहले ये जान लीजिए कि कैसे इसने सैकड़ों करोड़ के अपने साम्राज्य को हत्या और फिरौती के बल पर खड़ा किया। असल में वो मुख़्तार अहमद अंसारी का पोता है, जो 1927 में ‘भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस (INC)’ के अध्यक्ष भी रहे थे। उसके भाई अफजल अंसारी गाजीपुर से सांसद हैं। एक अन्य सिबकातुल्लाह अंसारी भी विधायक रहे हैं। एक दशक तक भारत के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी इसी परिवार से आते हैं।

पूर्वांचल में मुख़्तार अंसारी ने कैसे खड़ा किया अपराध का साम्राज्य

पूर्वांचल जैसे पिछड़े इलाके में 70 के दशक में स्थिति ये थी कि सरकार की हर एक परियोजना को लपकने के लिए एक से बढ़ कर एक आपराधिक गिरोह और माफिया तैयार बैठे थे। सरकारी ठेके के लिए खून बहाने का दौर शुरू हो चुका था। 5वीं बार मऊ से विधाक बने इस माफिया पर आज हत्या, हत्या के प्रयास, हथियारबंद तरिके से दंगे भड़काने, आपराधिक साज़िश रचने, आपराधिक धमकियाँ देने, संपत्ति हड़पने के लिए धोखाधड़ी करने, सरकारी काम में व्यावधान पहुँचाने और जानबूझकर चोट पहुँचाने जैसे 16 मामले दर्ज हैं।

एक समय ऐसा था जब इस गैंगस्टर पर 30 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या की घटना। वह 29 नवंबर 2005 का दिन था, जिसे गाज़ीपुर वाले आज भी ‘ब्लैक डे’ कहते हैं। कृष्णानंद राय मुहम्मदाबाद से विधायक थे। वह पिछली केंद्र सरकार में 5 वर्षों तक मंत्री रहे मनोज सिन्हा के क़रीबी भी थे। वही मनोज सिन्हा, जिन्हें गाज़ीपुर से हरा कर मुख़्तार अंसारी का भाई अफ़ज़ल अंसारी इस वर्ष सांसद बना है। 

शासन से बेख़ौफ़ हत्यारों ने 400 राउंड गोलियाँ चलाईं थीं। घटना के बाद पोस्टमॉर्टम के दौरान मृतकों के शरीर से 67 गोलियाँ निकाली गईं। इतनी ज्यादा संख्या में बुलेट अंदर धँसने के बाद शायद ही कोई ज़िंदा बचे, वो भी तब जब ये गोलियाँ एके-47 दागी गई हों। योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में STF के एनकाउंटर में हनुमान पांडेय उर्फ़ राकेश पांडेय मारा गया, जिसने इस गोलीबारी को अंजाम दिया था। उसने ही मुख़्तार अंसारी के इशारे पर 29 नवंबर, 2005 को करीमुद्दीन इलाके में स्थित सोनाड़ी गाँव में एक स्टीकेट मैच का उद्घाटन करने पहुँचे भाजपा विधायक कृष्णनंदन राय की हत्या की थी।

मुख़्तार अंसारी सबसे पहले बसपा के टिकट पर विधायक चुना गया था। उसने पिछले तीन चुनाव जेल से ही जीते हैं, ये है उसके क्षेत्र में उसके लिए मुस्लिमों के ध्रुवीकरण और खौफ का प्रभाव। 80 के दशक में उसका एक अन्य माफिया बृजेश सिंह के साथ गैंगवार शुरू किया था। मऊ, जौनपुर, बलिया और वाराणसी तक उसने अपनी धाक जमा ली थी। अफीम की खेती के लिए कुख्यात रहे इस इलाके में कई युवाओं को उसने अपराध की दुनिया में धकेला। गाजीपुर के युसुफपुर में इसका पैतृक निवास ‘बड़का फाटक’ कभी 4 जिलों की राजनीति का अड्डा हुआ करता था।

2009 में मुख़्तार अंसारी के खिलाग 48 FIR दर्ज थे। मऊ में ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया। इस हत्याकांड के गवाह की भी हत्या कर दी गई। इसी तरह कृष्णानंद राय हत्याकांड के गवाह की भी संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई थी। रईस घराने के मुख़्तार अंसारी के पिता कम्युनिस्ट नेता हुआ करते थे। मुख़्तार अंसारी का भाई अफजल अंसारी भी 5 बार विधायक और 2 बार के सांसद हैं। मुख़्तार अंसारी को मायावती ने कभी बसपा से निकाल दिया था।

योगी सरकार में मुख्तार अंसारी को उत्तर प्रदेश आने में भी लग रहा था डर

पंजाब के जेल में बंद मुख़्तार अंसारी उत्तर प्रदेश आने में डर रहा था, क्योंकि उसे पुलिस एनकाउंटर का भय सता रहा था। वहाँ से जब उसे यहाँ के जेल में स्थानांतरित करने के लिए जाया जा रहा था, तब उसने रास्ते में कुछ भी खाया-पिया नहीं और उसका चेहरा डर के मारे सूजा रहा। हाँ, पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने ज़रूर उसे बचाने के लिए दिन-रात एक कर दिया था। मामला अदालत तक पहुँच गया। आखिरकार उसे बाँदा के के जेल में स्थानांतरित करने में योगी सरकार सफल हुई।

तब प्रियंका गाँधी को लिखे गए पत्र में दिवंगत विधायक कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय ने कहा था, “आपसे मुझे शोक के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके नेतृत्व में पंजाब और राजस्थान की सरकार ने मेरे पति के हत्यारे कुख्यात अपराधी मुख्तार अंसारी और उसके इनामिया बेटे अब्बास अंसारी को राज्य अतिथि का दर्जा दे रखा है। इसका प्रमाण है अखबार में छपी तस्वीरें, जिससे स्पष्ट है कि सरकारी संरक्षण में राजस्थान सरकार ने मुख्तार के इनामिया बेटे अब्बास की धूमधाम से शादी कराई।”

अब ये जान लीजिए कि कैसे योगी सरकार के अंतर्गत मुख़्तार अंसारी की सैकड़ों करोड़ रुपए की संपत्ति न सिर्फ कुर्क की गई है, बल्कि उसके कई दुकानों और संपत्तियों को बुलडोजर चला कर ध्वस्त भी किया गया है। उसकी लगभग 300 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त/जमींदोज की जा चुकी है। उसके गिरोह के 100 से अधिक अपराधी जेल के भीतर हैं अब। वहीं लगभग 75 हथियारों के लाइसेंस भी रद्द किए जा चुके हैं। अफजल अंसारी अब परिवार को योगी सरकार से खतरे की बातें करते हैं।

हाल ही में गाजीपुर के महुआबाग स्थित मुख्तार अंसारी की पत्नी आफशा अंसारी के गजल होटल के नीचले मंजिल पर बने 17 दुकानों को कुर्क किया गया। उससे पहले उसके एक करीबी के कब्जे से 0.091 हेक्टेयर भूमि छुड़ाई गई। इससे पहले अंसारी के करीबी कोयला माफिया एवं त्रिदेव कंस्ट्रक्शन के मालिक उमेश सिंह का भीटी में 10 करोड़ रुपए की लागत से बना चार मंजिला मकान बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया था। मुख्तार अंसारी का शॉर्प शूटर रहा अली शेर मारा गया। 

कभी लोगों के दिल में खौफ बन कर बैठे मुख़्तार अंसारी के दिमाग में डर का आलम अब ये है कि यूपी लाए जाने से पहले उसने कोर्ट में वर्चुअल पेशी के दौरान अपनी हत्या की आशंका जाहिर की थी। उसे खाने में जहर देकर मारे जाने का डर था। विधानसभा के पास उसकी करोड़ों की संपत्ति जब्त हुई। 66 करोड़ रुपए के लोन डकारने वाला उसका गुर्गा शकील हैदर गिरफ्तार हुआ। अगस्त 2021 में लगभग 2 करोड़ 18 लाख रुपए मूल्य की संपत्ति की कुर्की की गई

उसके करीबी नन्हे खान की 53 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी किया। जेल के अंदर मुख्तार अंसारी के 2 गुर्गों मेराज और मुकीम की हत्या हो गई। पंजाब से यूपी स्थानांतरण में उसका डर ये था कि आँखों से लेकर गले तक वो अदालत को रोज नई बीमारियाँ बताता फिरता था। उसकी विधानसभा सदस्यता रद्द कराने की कोशिश भी शुरू हुई। यूपी आने के डर से वो दिन में एक बार ही खाना खाने लगा था। वो व्हीलचेयर पर आ गया था।

ये भी जान लीजिए कि मुख़्तार अंसारी के खिलाफ कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को किस तरह सपा-बसपा शासनकाल में डराया जाता था। जनवरी 2004 में शैलेन्द्र कुमार सिंह यूपी STF की वाराणसी यूनिट के प्रभारी डिप्टी एसपी थे। उन्होंने मुख़्तार अंसारी के ठिकाने से LMG बरामद की थी, जिसके बाद तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने उन्हें प्रताड़ित किया। उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। उनके खिलाफ FIR दर्ज करा दी गई। वह जब जेल गए तो योगी आदित्यनाथ ने उनके परिवार को फोन करके कहा था, ‘जब मैं आऊँगा तो न्याय करूँगा।’ योगी सरकार में उन पर दर्ज फर्जी मुक़दमे वापस हुए

मुख़्तार अंसारी के बीवी और बेटों के पासपोर्ट भी जब्त करने के आदेश न्यायपालिका ने दे दिए हैं। उसके परिवार को फायदा पहुँचाने वाले दो IAS अधिकारियों को योगी सरकार ने हटाया। विधायक मुख्तार अंसारी के नज़दीकी मोहम्मद आज़म ने अपना अवैध निर्माण खुद ही ध्वस्त कर दिया। अंसारी गैंग के मेराज़ तथा मऊ में ईसा खान के गैर कानूनी इमारतों पर बुलडोज़र चला, जिसकी कीमत 20 करोड़ रुपए थी। मुख़्तार अंसारी की पत्नी, जिन पर खुद कई मामले दर्ज हैं, उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर संरक्षण माँगना शुरू कर दिया

इसी तरह मुख़्तार अंसारी के करीबी आजम की संपत्ति पर UP पुलिस का बुलडोजर चला, जिसने गंगा किनारे ₹70Cr में अवैध अस्पताल बनवाया था। गाजीपुर में ‘मुख़्तार अंसारी का ताजमहल’ कहे जाने वाले उसके गजल होटल को ध्वस्त कर दिया गया। संपत्ति कब्जा के आरोप में अफजल अंसारी की बीवी फरहत पर FIR हुई। उसके गिरोह के रजनीश सिंह की 39 लाख रुपए की संपत्ति जब्त की गई। साढ़े 4 करोड़ की उसकी गाड़ियाँ जब्त हुईं। उसके बेटों को अपराधी घोषित किया गया।

अल्लू अर्जुन की फिल्म ‘पुष्पा’ ने हिंदी में कमाए ₹100 करोड़, वहीं रणवीर की ’83’ ने बॉक्स ऑफिस पर तोड़ा दम

अल्लू अर्जुन (Allu Arjun) और रश्मिका मंदाना (Rashmika Mandanna) की फिल्म ‘पुष्पा’ (Pushpa) दक्षिण भारत के साथ उत्तर भारत में भी खूब पसंद की जा रही है। वहीं, रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की फिल्म ’83’ बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई। तीसरे वीकेंड में 100 करोड़ का पड़ाव पार करने के बाद ’83’ ने दम तोड़ दिया है।

दूसरी ओर बात करें अल्लू अर्जुन की फिल्म की तो रिलीज के कई हफ्तों बाद भी ‘पुष्पा’ का जादू दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। 17 दिसंबर 2021 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘पुष्पा: द राइज’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई का रिकॉर्ड बनाया है। चौथे हफ्ते के बाद भी फिल्म की ताबड़तोड़ कमाई जारी है। पुष्पा ने अब तक लगभग 325 करोड़ रुपए का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया है, जिसमें हिंदी वर्जन का नेट कलेक्शन 100 करोड़ को पार कर गया है। नॉर्थ बेल्ट में 100 करोड़ का आँकड़ा छूने वाली ‘पुष्पा’ 5वीं साउथ फिल्म है।

‘पुष्पा: द राइज’ दो दिन बाद यानी 14 जनवरी 2022 को ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेजन प्राइम वीडियो पर हिंदी में भी रिलीज होने वाली है। हालाँकि, इससे पहले फिल्म को चार भाषाओं तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ में रिलीज कर दिया गया है।

ध्यान दें कि ‘पुष्पा’ की तरह ’83’ फिल्म को भी हिंदी के अलावा सभी दक्षिण भारतीय भाषाओं और 3डी फॉर्मेट में रिलीज किया गया था। रणवीर और दीपिका की फिल्म 1983 विश्व कप में भारतीय क्रिकेट टीम की जीत पर आधारित है, लेकिन कबीर खान के निर्देशन में बनने वाली फिल्म दर्शकों को खासा प्रभावित नहीं कर पाई। फिल्म ने 19 दिनों में केवल 101.32 करोड़ की कमाई की है। यही कारण है कि मात्र 2 दिनों में वर्ल्ड वाइड बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपए से अधिक का कलेक्शन करके धमाल मचाने वाली अल्लू की फिल्म ‘पुष्पा’ के हिंदी वर्जन का फैंस ओटीटी पर आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

बता दें कि ’83’ के फ्लॉप होने के बाद रणवीर सिंह ने निर्णय लिया है कि अब वह बायोपिक मूवीज नहीं करेंगे। इस फिल्म के लिए उन्होंने मोटी रकम भी ली थी और प्रॉफिट में से भी उन्हें हिस्सा मिलना था। उनकी पत्नी दीपिका पादुकोण भी फिल्म के निर्माताओं में से एक थीं, जिन्होंने इसमें एक किरदार भी निभाया था। लेकिन, फिल्म से जिस तरह की उम्मीद की जा रही थी, वह बॉक्स ऑफिस उतना कमाल नहीं दिखा पाई।

अभिनेता सिद्धार्थ पर अब हैदराबाद में FIR दर्ज: PM मोदी का सपोर्ट करने पर सायना नेहवाल पर किया था आपत्तिजनक कमेंट

बॉलीवुड और साउथ फिल्मों के एक्टर सिद्धार्थ सूर्यनारायण (Siddharth Suryanarayan) राष्ट्रीय बैटमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल (Saina Nehwal) पर आपत्तिजनक कमेंट करके बुरी तरह फँस गए हैं। उनके खिलाफ हैदराबाद में FIR दर्ज करवाई गई है। हैदराबाद पुलिस और हैदराबाद की साइबर क्राइम की पुलिस ने उनके खिलाफ FIR दर्ज की है। उनके खिलाफ दो धाराओं में FIR धर्ज की गई है। यह FIR प्रेरणा तिरुवैपति और नीलम भार्गव राम ने करवाई है। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट शशांक शेखर झा ने इसकी जानकारी दी है।

बता दें कि इससे पहले मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women) ने सिद्धार्थ पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। NCW ने ट्विटर को इस ट्वीट को हटाने के लिए और एक्टर पर कार्रवाई करने के लिए भी कहा था। इसके अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग ने महाराष्ट्र के डीजीपी से इस मामले की तुरंत जाँच और FIR करने के लिए कहा था। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई करने और आगे उनके द्वारा इस तरह की हरकत न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए भी कहा था। साथ ही रेखा शर्मा ने ट्विटर से एक्टर के ट्विटर अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए भी कहा था।

हालाँकि चौतरफा आलोचना होने के बाद सिद्धार्थ ने सिद्धार्थ मंगलवार देर रात (11 जनवरी 2022) को लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर बैडमिंटन खिलाड़ी से आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए माफी माँग ली है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नेहवाल ने कहा था कि उन्हें इस तरह से महिलाओं को टारगेट नहीं करना चाहिए।

दरअसल, सायना नेहवाल ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ट्वीट किया था। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब में सुरक्षा हुई चूक पर चिंता व्यक्त की थी। सायना नेहवाल ने अपने ट्वीट में लिखा था कि अगर खुद प्रधानमंत्री की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े हो, तो वह देश अपने आप को सुरक्षित नहीं कह सकता है। पंजाब में जो हुआ, वो उसकी कड़े शब्दों में निंदा करती हैं।

सायना नेहवाल के इसी ट्वीट पर एक्टर सिद्धार्थ ने ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने द्विअर्थी शब्दों का इस्तेमाल किया और आगे लिखा कि शेम ऑन यू रिहाना। 

एक्टर सिद्धार्थ के इस ट्वीट पर लोगों ने आपत्ति जताई और महिला आयोग को इसकी शिकायत की। विवाद के बाद सिद्धार्थ ने सफाई भी दी और कहा कि उनके शब्द को गलत तरीके से लिया जा रहा है, किसी का भी अपमान करने की कोशिश नहीं की गई है।

हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत करने के मामले में स्वामी प्रसाद मौर्य के खिलाफ अरेस्ट वारंट: 7 साल पुराना केस, ले रखा था स्टे

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में जारी चुनावी घमासान के बीच योगी मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनके खिलाफ पडरौना MP-MLA कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी किया है। मौर्य के खिलाफ ये वारंट 7 साल पुराने मामले में जारी किया गया है, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयानबाजी की थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, सात साल पुरानी ये घटना वर्ष 2014 की है। उस दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samajwadi Party) में थे। उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ भड़काने की कोशिश करते हुए अपने समर्थकों को पूजा नहीं करने की नसीहत दी थी। जिसके बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। तभी उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी किया गया था। लेकिन साल 2016 में उन्होंने इस पर कोर्ट से स्टे ले लिया था, जिसकी मियाद 12 जनवरी 2022 को खत्म हुई।

स्टे की समय सीमा समाप्त होने के पहले 6 जनवरी 2022 को MP-MLA कोर्ट उन्हें सुल्तानपुर की कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। लेकिन जब वो 12 जनवरी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए तो ये पहले की तरह से जारी हो गया। अब कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 जनवरी 2022 का दिन तय किया है।

बीजेपी से इस्तीफा दे चुके हैं मौर्य

गौरतलब है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंगलवार (11 जनवरी 2022) को बीजेपी से इस्तीफा दे दिया था। वो योगी सरकार में मंत्री थे। उन्होंने ट्विटर पर अपना इस्तीफा पोस्ट करते हुए योगी सरकार पर दलितों, पिछड़ों, किसानों, बेरोजगार नौजवानों एवं छोटे-लघु एवं मध्यम श्रेणी के व्यापारियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, स्वामी प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा है कि वो 14 जनवरी को सपा में शामिल होंगे। मौर्य का कहना है कि उनके पास भाजपा के किसी छोटे या बड़े नेता का फोन नहीं आया है। उनका कहना है कि अगर बीजेपी सार्वजनिक मुद्दों पर काम करती तो ये दिन नहीं देखना पड़ता।

वामपंथी दादा का पोता और कट्टर कॉन्ग्रेसी का बेटा है ‘बुल्ली बाई’ का मास्टरमाइंड नीरज, बहन बोली- ये ऐप मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नहीं

बुल्ली बाई ऐप (Bull Bai App) के मामले में गिरफ्तार किया गया 20 वर्षीय आरोपित नीरज बिश्नोई (Niraj Bishnoi) एक ऑनलाइन ट्रोल्स है, जिससे इसे पैसा तो नहीं मिलता, लेकिन प्रभावित जरूर है। एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपित नीरज के पिता कट्टर कॉन्ग्रेसी (Congress) हैं, जबकि उसके दादा वामपंथी थे।

मूल रूप से राजस्थान (Rajasthan) के नागौर का रहने वाला नीरज का परिवार अब असम (Assam) में रहता है। लेकिन जबसे उसे गिरफ्तार किया गया है परिवार को भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं लॉ की पढ़ाई कर रही उसकी बहन का कहना है कि उसके भाई ने मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ नहीं, बल्कि राम मंदिर के खिलाफ पोस्ट करने वालों के खिलाफ यह ऐप बनाया था।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक नीरज की बहन ने कहा, “यह एप्लीकेशन सेल्फ जेनरेटेड है, जिसकी इस तरह से कोडिंग की गई है कि जैसे ही कोई राम मंदिर (Ram Mandir) के खिलाफ कुछ भी पोस्ट करेगा तो वो बुल्ली बाई ऐप पर पॉप अप होगा।” उसने ये भी बताया कि यहाँ कोई नीलामी नहीं हो रही थी, जैसा कि ‘सुल्ली डील्स’ ऐप पर हो रही थी।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक, नीरज ने इस ऐप में इस तरह से कोडिंग की थी कि ऐप में शामिल 102 महिलाओं में से इसमें किसी का भी नाम डालने पर वह ऊपर आ जाती थी। नीरज के पिता दशरथ बिश्नोई कट्टर कॉन्ग्रेसी हैं। बेटे की इस हरकत को लेकर उन्होंने कहा, “इस बारे में किसी ने ये बात उनकी माँ को बता दिया था कि नीरज 2 लाख रुपए में महिलाओं को खरीदता और 4 लाख रुपए में बेचता है। ये सुनकर वो बीमार हो गई हैं।”

दशरथ कहते हैं, “मेरा बेटा बहुत अंतर्मुखी और संवेदनशील है। राजनेताओं और टीवी न्यूज शो एंकरों को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। वे नहीं जानते उनकी बातों से कौन प्रभावित हो सकता है।”

नीरज के पिता दशरथ का कहना है कि उनके पिता का देहान्त 2012 में हो गया है और उन्हें विश्वास है दादा का प्रभाव नीरज पर नहीं पड़ा है। दशरथ के चार भाई अभी भी राजस्थान में रहते हैं। इनमें से दो सेना के अधिकारी हैं। परिवार का कहना नीरज की गिरफ्तारी के बाद से गाँव में लोगों को लगने लगा है कि वो महिलाओं की तस्करी कर रहा है।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नीरज को असम से 6 जनवरी 2022 को गिरफ्तार किया था। वो B.tech का स्टूडेंट है और भोपाल के वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Vellore Institute of Technology) में पढ़ता है।

बच्चे का धोखे से खतना, बनाया शमशाद: हिंदू पिता की शिकायत पर अम्मी-नानी गिरफ्तार, कहा- मुझ पर भी इस्लाम कबूलने का डालते थे दबाव

छत्तीसगढ़ के जशपुर के सन्ना थाना क्षेत्र में 8 साल के बच्चे का धर्मांतण मामला अब गरमा गया है। आरोप है कि बच्चे की मुस्लिम नानी और अम्मी ने उसे मेला दिखाने के बहाने अंबिकापुर ले जाकर उसका खतना कराया और नाम बदलकर शमशाद करवा दिया। बच्चे के पिता पक्ष को जब इसकी सूचना हुई तो उन्होंने थाने में घटना की शिकायत देते हुए बच्चे की माँ और नानी समेत तीन लोगों पर केस किया। जाँच के बाद पुलिस ने दोनों महिलाओं (अम्मी-नानी) को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सन्ना क्षेत्र के नगरटोली में रहने वाले एक दलित युवक ने दस साल पहले एक मुस्लिम लड़की से प्रेम विवाह किया था। बाद में दोनों के एक बेटा (8) एक बेटी (6) हुए। अब दलित युवक का आरोप है कि 21 नवंबर 2021 को उनका बेटा अपनी अम्मी के संग ननिहाल गया था वहीं से उसे बहाने से अंबिकापुर ले जाया गया और उसका खतना करवा दिया गया, फिर उसका नाम भी शमशाद रख दिया गया।

हिंदू पिता के मुताबिक, उन्हें इस संबंध में कई दिन तक पता नहीं चला। कुछ दिन पहले जब उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने कार्रवाई की माँग की। दो पक्षों से मामला जुड़ा होने के चलते  CWC और अफसरों को इसकी सूचना दी गई है और बच्चे के बयान के आधार पर 3 लोगों पर एफआईआर हुई।

शिकायत में दलित युवक ने क्या कहा

शिकायतकर्ता पिता ने आवेदन में लिखा, “मैं चितरंजन (टिडु) सोनवानी पिता दामडे सोनवानी जाति घासी ग्राम पंचायत सन्ना का स्थाई निवासी हूँ। मैं ग्राम सन्ना में रहता हूँ, हिंदू धर्म का पालन करता हूँ। आज से लगभग 10 वर्ष पूर्व मेरा शादी हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार डुमरकोना हर्राडिपा निवासी रेशमा बेगम के साथ हुई थी। उसके बाद से हम लोग हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार सन्ना में जीवनयापन कर रहे थे। हमारे दाम्पत्य सम्बंध से दो बच्चे हैं, जिनका नाम सौरभ सोनवानी उम्र 8 वर्ष एवं द्वितीय पुत्री सानिया सोनवानी उम्र 6 वर्ष है।”

शिकायत में पीड़ित के पिता ने बताया कि कैसे उनके पुत्र सौरभ सोनवानी का उनकी बीवी ने अपने मायके वालों के साथ मिलकर चुपके से खतना करवाया, जिसकी सूचना उन्हें बाद में मिली। उन्होंने अपनी शिकायत में जानकारी दी कि उनके ससुराल वाले उनके विवाह के पश्चात से उनपर लगातार इस्लाम धर्म स्वीकार करने का दबाव बना रहे थे। इस हेतु उन्हें कई प्रलोभन भी दिए गए, जिसमें पिकअप गाड़ी देने की बात कही गई थी, लेकिन वे इस्लाम धर्म स्वीकार करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे और न ही अब हैं। इसी कारण से उनकी बीवी रेश्मा बेगम और उसके मायके पक्ष भाई वगैरह ने मिलकर उनके नाबालिग पुत्र सौरभ सोनवानी का इस्लाम धर्म में धर्मान्तरण करवा दिया।

बीजेपी नेता प्रबल प्रताप सिंह ने किया विरोध

8 वर्षीय नाबालिग से जुड़े इस धर्मांतरण के मामले ने तूल पकड़ा तो बीजेपी नेता प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का बड़ा बयान सामने आया। उन्होंने कहा कि जिले के सन्ना थाना में दर्ज खतना मामले में हिंदू पिता की सहमति के बिना पुत्र का खतना कर धर्मांतरित किया जाना असहनीय है। प्रशासन इसमें लिप्त सभी कुकर्मियों को अविलंब गिरफ्तार करे और धर्मांतरण पर अंकुश लगाए।

मालूम हो कि प्रबल प्रताप सिंह जूदेव धर्मांतरित लोगों का घर वापसी और धर्मांतरण के खिलाफ लगातार जागरूकता फैलाते रहे हैं। इसके बावजूद धर्मांतरण रुकने का नाम नहीं ले रहा। पहले ईसाई मिशनरियों द्वारा इलाके में कुकर्म को अंजाम दिया जाता था, मगर इस केस में धर्मांतरण के पीछे मुस्लिम समुदाय का हाथ सामने आया है।

‘एक्स-मुस्लिम ऑफ केरल’ : इस्लाम छोड़ने वालों ने बनाया नया संगठन, अब तक 300 जुड़े; जनवरी की इस तारीख को घोषित किया ‘पूर्व मुस्लिम दिवस’

केरल में इस्‍लाम धर्म को छोड़ने वाले लोगों के लिए एक नया संगठन बनाया गया है। इस संगठन का नाम एक्स मुस्लिम ऑफ केरल (Ex-Muslim of Kerala) रखा गया है। इसका उद्देश्य इस्लाम छोड़ने वालों लोगों को सहायता प्रदान करना और उन्‍हें समर्थन देना है। संगठन ने हर साल 9 जनवरी को ‘पूर्व मुस्लिम दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। 9 जनवरी को कोच्चि में मिले केरल के पूर्व मुस्लिम सदस्यों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। संगठन के अध्यक्ष लियाक्कथली सी एम (Liyakkathali C M) ने कहा, “देश में यह पहली बार है जब इस तरह का कोई आधिकारिक संगठन बनाया गया है।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा, “हमने 10 सदस्यीय कार्यकारी समिति का गठन किया है। सदस्यता अभियान जारी है। शुरुआत में हमने 300 मुसलमानों की पहचान की, जिन्होंने वर्षों पहले इस्लाम छोड़ दिया है। वे खुले तौर पर इस संगठन का समर्थन करते हैं।”

लियाक्कथली ने कहा कि संगठन का उद्देश्य इस्लाम छोड़ने वालों को नैतिक समर्थन प्रदान करना है, लेकिन कई मुस्लिम ऐसे भी हैं, जो इस्लाम की खामियों का हवाला देते हुए उसे छोड़ तो चुके हैं, पर सार्वजनिक रूप से इसे स्वीकार करने में डरते हैं। उनके (लियाक्कथली) अनुसार, पूर्व मुस्लिमों का कहना है कि इस्लाम छोड़ने वाले लोगों को सामाजिक बहिष्कार के अलावा मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

इसकी वजह से कई लोग अपना धर्म छोड़ने के बाद अपनी पहचान छिपाकर जीने को मजबूर हैं। उनके परिवार वालों ने भी उनका साथ देने से मना ​कर दिया है। पूर्व मुस्लिमों को उनके कार्यस्थल पर निशाना बनाया जाता है। हम उन लोगों को समर्थन और साहस देना चाहते हैं, जो अपने धर्म को छोड़ने के इच्छुक हैं।

उन्होंने आगे कहा कि यही कारण है कि पूर्व मुस्लिमों के लिए इस संगठन में उनके मानवाधिकारों और गरिमा की रक्षा के लिए संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों को सुनिश्चित किया गया है। हम धार्मिक परंपराओं या प्रथाओं के नाम पर किए गए सभी अत्याचारों के खिलाफ अदालतों का रुख करने की भी योजना बना रहे हैं, जो बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

बता दें कि 9 जनवरी को पूर्व-मुस्लिम दिवस के रूप में चुनने पर लियाक्कथली ने कहा कि पिछले साल इसी दिन इस्लामी उपदेशक एम एम अकबर (M M Akbar) और ई ए जब्बार (E A Jabbar) के बीच इस्लाम को लेकर बहस हुई थी। इस बहस को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक रूप से दिखाया गया था। इस्लाम पर खुली आलोचना ने मार्ग प्रशस्त किया और कई लोगों को धर्म छोड़ने के लिए प्रेरित किया। इसलिए हम चाहते थे कि 9 जनवरी पूर्व-मुस्लिम दिवस के रूप में मनाया जाए।