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‘सतीश को मारा, पंडित था वो.. RSS से जुड़ा था’: जब ‘कश्मीरी पंडितों का कसाई’ ने कबूली हत्याएँ

महीना जनवरी का ही था। साल था 1990। घाटी में धार्मिक नरसंहार का दौर चला था, जिसने तीन से आठ लाख कश्मीरी हिन्दुओं को पलायन के लिए मजबूर किया। कश्मीरी पंडितों को किस तरह निशाना बनाया गया इसे फारूक अहमद डार (Farooq Ahmed Dar) उर्फ बिट्टा कराटे के एक पुराने इंटरव्यू से समझा जा सकता है। जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) का यह आतंकी ‘कश्मीरी पंडितों का कसाई (Butcher of Kashmiri Pandits)’ भी कहा जाता है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी और मेहबूबा मुफ्ती की बहन रुबिया सईद के अपहरण से भी जुड़ा था। उस समय सईद केंद्र सरकार में गृह मंत्री हुआ करते थे और इस घटना के बाद सरकार ने घुटने टेकते हुए रुबिया की रिहाई के लिए आतंकियों को छोड़ दिया था।

बिट्टा कराटे (Bitta Karate) ने कैमरे पर 20 कश्मीरी पंडितों की हत्या की बात कबूली थी। उसने दावा किया था कि उसका निशाना कभी नहीं चूकता था। अब अपने टारगेट के सिर या दिल में ही गोली मारता था। पत्रकार राहुल पंडिता ने एक लेख में उसका जिक्र करते हुए लिखा था: जेकेएलएफ का हत्यारा पिस्तौल लेकर श्रीनगर में घूमता और पंडितों की गंध (बट्ट-ए-मुश्क) खोजता था ताकि उन्हें खोज कर मार सके।

बिट्टा ने एक इंटरव्यू पत्रकार मनोज रघुवंशी को दिया था। इसमें उसने बताया था कि सबसे पहले उसने सतीश कुमार टिक्कू को मारा था क्योंकि वह आरएसएस से जुड़े थे। रघुवंशी ने उससे पूछा था: सबसे पहला व्यक्ति, जिसे मारा वो कौन था? बिट्टा ने कुछ देर सोचने के बाद जबाव दिया​: सतीश कुमार टिक्कू, पंडित था वो। मैंने उसे इसलिए मारा क्योंकि वो आरएसएस से जुड़ा हुआ था। ऊपर से उसे मारने का ऑर्डर मिला था। इस इंटरव्यू के दौरान ही बिट्टा ने कहा था कि उसे मारने के ऑर्डर ऊपर से मिलते थे। साथ ही बताया था कि वह पिस्टल से हत्या करता था। एके-47 के इस्तेमाल को लेकर पूछे जाने पर कहा था कि इससे जवानों पर फायरिंग करता था। उसने यह भी बताया था कि वह अकेले ही हत्याएँ करता था और वो भी बिना नकाब के। रघुवंशी को दिया गया बिट्टा का इंटरव्यू आप नीचे सुन सकते हैं;

कभी बिट्टा कराटे और यासीन मलिक की गहरी जमती थी। बाद में दोनों के बीच विवाद हो गया और जेकेएलएफ भी दो हिस्सों में बँट गया। फिलहाल दोनों दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं।

विरोध के बाद गालीबाज देवदत्त पटनायक वाले सत्र का प्रसारण नहीं, मंत्रालय ने बताया ‘तकनीकी समस्या’: युवा दिवस पर खेल मंत्रालय का कार्यक्रम

‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के उपलक्ष्य पर आयोजित भारत सरकार के कार्यक्रम में गालीबाज देवदत्त पटनायक वाले सत्र का प्रसारण नहीं किया जाएगा। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने बताया कि अप्रत्याशित तकनीकी समस्या आने के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाया, इसीलिए इस दौरान दर्शक किसी अन्य सत्र को देखें। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधियों और इस सत्र को देख रहे लोगों से आग्रह है कि वो किसी अन्य सत्र में ट्यून इन करें।

भारत सरकार का ‘राष्ट्रीय युवा महोत्सव’ और देवदत्त पटनायक: जानिए क्या है पूरा मामला

हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाले देवदत्त पटनायक (Devdutt Pattanaik) को युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा ‘ग्रेट माइंड डिस्कस आइडियास’ कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर बुलाया गया। सामने आए पोस्टर में देख सकते हैं कि रणदीप हुड्डा, विजय शेखर शर्मा की तस्वीर के साथ देवदत्त की फोटो भी लगी है। अब इसी कार्रयक्रम के होने से पहले इसपर विवाद छिड़ा है। कुछ लोग इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। इसी बीच एक भाजपा समर्थक ने ट्वीट करके बताया है कि शायद देवदत्त पटनायक अब कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे।

बता दें कि जब नेशनल यूथ फेस्टिवल 2022 के पोस्टर में देवदत्त को नजर आए, तभी से सवाल किया जा रहा है कि ऐसे गालीबाज व्यक्ति को क्या युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय महान बुद्धिजीवी मानता है क्या जो उन्हें इस कार्यक्रम में आमंत्रण मिला। लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी ने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से पूछा कि क्या आपका मंत्रालय वाकई देवदत्त पटनायक को एक महान दिमाग मानता है? वह हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाला, भारत से नफरत करने वाला, फर्जी इतिहासकार है जो हर भारतीय चीज को कोसने, नरेंद्र मोदी व अमित शाह को श्रापने का आनंद लेता है ताकि उसकी वामपंथी खुजली शांत हो सके।

गौरतलब है कि जिस देवदत्त पटनायक को युवाओं को संबोधित करने के लिए युवा कार्यक्रम व खेल मंत्रालय ने निमंत्रण देकर बुलाया है उसी फर्जी ‘माइथोलॉजी’ एक्सपर्ट देवदत्त पटनायक के खिलाफ पिछले साल ओडिशा के भुवनेश्वर में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पटनायक के खिलाफ यह शिकायत ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के बारे में फर्जी खबरें और झूठ फैलाकर हिंदू समाज में जाति के आधार पर विभाजन को लेकर की गई थी। इतना ही नहीं पटनायक को आप अक्सर हिंदू घृणा से लबरेज सामग्री का प्रचार-प्रसार करते देखेंगे।

PM की सुरक्षा से खिलवाड़ कैसे: जाँच की कमान उनको जो नहीं चाहती थीं सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री, जानिए कौन हैं पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले की जाँच के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी गठित की है। इस कमेटी में NIA के डीजी, चंडीगढ़ के डीजीपी, पंजाब के एडीजीपी और पंजाव एवं हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल शामिल हैं। इनके अलावा एक सबसे महत्वपूर्ण नाम व इस कमेटी की अध्यक्षता की जिम्मेदारी जिन्हें दी गई है वो सेवानिवृत्त जस्टिस इंदू मल्होत्रा हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित यह कमेटी अब पूरे मामले में सारे सीसीटीवी फुटेजों की पड़ताल करेगी। लोगों के बयान से लेकर पुलिस एक्शन के हर बिंदु पर तथ्यों की जाँच होगी। कमेटी यह ध्यान भी देगी कि भविष्य में कभी इस प्रकार की चूक न हो। इस जाँच के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है। हालाँकि कोर्ट ने ये जरूर कहा कि जाँच रिपोर्ट जल्द सौंपी जाए। इसमें पता लगाया गया हो कि आखिर इस लापरवाही के कारण क्या थे।

बता दें कि पीएम सुरक्षा चूक मामले में पीठ की अध्यक्षता करने वाली पूर्व जस्टिस इंदू मल्होत्रा का नाम कई महत्वपूर्ण फैसलों के साथ याद किया जाता है। बेंगलुरु की रहने वाली इंदु मल्होत्रा की रिटायरमेंट पिछले साल ही हुई थी। साल 2018 में उन्हें वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज बनाया गया था। विभिन्न केसों में निर्णय के समय उनकी अलग राय ने हमेशा लोगों का ध्यान उनकी ओर खींचा।

सबसे चर्चित मामला सबरीमाला केस में फैसले के वक्त का है जब जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में बनी पाँच सदस्यीय पीठ में वह अकेली महिला जज थीं, जहाँ चार पुरुषों ने सबरीमाला में महिलाओं को प्रवेश देने का अधिकार देने का समर्थन किया था, वहीं इंदु मल्होत्रा ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाई गई शिकायतें सही नहीं हैं। समानता का अधिकार धार्मिक आज़ादी के अधिकार से ऊपर नहीं हो सकता। जजों की निजी राय गैरज़रूरी है। संवैधानिक नैतिकता को आस्थाओं के निर्वाह की इजाज़त देनी चाहिए।

उन्होंने फैसले पर असहमति देते हुए ये भी कहा था कि इस मुद्दे का असर दूर तक जाएगा। धार्मिक परंपराओं में कोर्ट को दखल नहीं देना चाहिए। अगर किसी को किसी धार्मिक प्रथा में भरोसा है, तो उसका सम्मान होना चाहिए, क्योंकि ये प्रथाएँ संविधान से संरक्षित हैं। अपना मत रखते हुए उन्होंने कहा था कि समानता के अधिकार को धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के साथ ही देखना चाहिए, और कोर्ट का काम प्रथाओं को रद्द करना नहीं है।

इसके अलावा समलैंगिक यौन संबंध मामले में फैसला सुनाने वाली पीठ में भी पूर्व जस्टिस शामिल थीं। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच बनाए गए समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से हटा दिया था। इंदु मल्होत्रा व्यभिचार को क्राइम सूची में रखने वाली आईपीसी की धारा 497 को असंवैधानिक ठहराने और उसे समाप्त करने वाली संविधान पीठ का भी हिस्सा थीं।

पिछले साल 21 मार्च 2021 को वह रिटायर हुई थीं। उनके लिए ये क्षण इतना भावुक करने वाला था कि वो अपना भाषण भी पूरा नहीं कर पाई थीं। उन्हें देख चीफ जस्टिस एस ए बोबड़ ने कहा था कि वह चाहें तो आगे कभी अपना भाषण पूरा कर लें। वहीं अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था, “ये एक विडंबना है कि अच्छे जज बहुत जल्दी रिटायर होते हैं। न्यायधीशों की रिटायरमेंट उम्र 70 की जानी चाहिए। इंदु मल्होत्रा को कम से कम 10 साल और काम करना चाहिए।”

ईसाई को हिन्दू या बौद्ध नहीं बनना, इसी प्रकार हिन्दू या बौद्ध को ईसाई नहीं: स्वामी विवेकानंद का वो भाषण, जिसकी चर्चा कम

पूरे विश्व में शायद ही ऐसे कोई उदहारण होंगे, जहाँ किसी व्यक्ति द्वारा बोले गए परिचयात्मक शब्दों ने दर्शकों को उतना ही उत्साहित किया है जितना कि स्वामी विवेकानंद के 1893 के विश्व धर्म संसद के लिए अभूतपूर्व भाषण ने। “अमेरिका की बहनों और भाइयों” शब्दों से शुरुआत ने, स्वामी विवेकानंद की एक विशिष्ट राष्ट्र या धर्म के न होकर सम्पूर्ण विश्व के नागरिक होने का परिचय दिया। इसने लोगों को यह भी महसूस कराया कि वे किसी ऐसे व्यक्ति के समक्ष हैं जो उन्हें सार्वभौमिक भाईचारे का मार्ग दिखा सकता है।

आज के समय में, स्वामी विवेकानंद का भाषण राष्ट्र और नेताओं के लिए एक प्रकाशस्तंभ और सत्य के स्रोत के रूप में कार्य करता है, जिससे उन्हें रणनीतियों को लागू करने, नीतियों को तैयार करने और अपने नागरिकों को एक साथ लाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलती है, ताकि अन्य लोगों के साथ सम्बन्ध बनाने में मदद मिल सके। स्वामी विवेकानंद भाषण को अक्सर दुनिया भर के नेताओं द्वारा वर्तमान समय में लोगों को उन मूल्यों की याद दिलाने के लिए संदर्भित किया जाता है जो उनके भाषण के लिए खड़े थे और आज के समय में भी सबसे महत्वपूर्ण हैं – करुणा, भाईचारा, सहिष्णुता, स्वीकृति।

जब दुनिया सांप्रदायिकता, कट्टरता और उत्पीड़न की चपेट में है; स्वामी विवेकानंद के भाषण को सुनने और अनुसरण का इससे बेहतर समय कभी नहीं रहा और वास्तव में इस दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने के लिए उन प्रमुख मूल्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। महाद्वीपों में, हमारे देश एक-दूसरे से (बाहरी रूप से) लड़ रहे हैं और उनके लोग जाति, रंग, पंथ (आंतरिक रूप से) की धारणा पर विभाजित हैं।

स्वामी विवेकानंद ने अपने भाषण में विश्व शांति के लिए दो महत्वपूर्ण आवश्यकताओं पर जोर दिया था – भाईचारा और सार्वभौमिक स्वीकृति; और यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ये वही हैं जिनकी दुनिया को सबसे ज्यादा जरूरत है। यदि केवल लोग उन मूल्यों को आत्मसात करना शुरू कर दें जिनके लिए वे खड़े थे, यदि केवल राष्ट्र करुणा और सहिष्णुता पर ध्यान केंद्रित करना शुरू करते हैं, तो क्या यह दुनिया सभी के लिए एक बेहतर जगह नहीं बन सकती है?

उन्नीसवीं सदी के महान योगी स्वामी विवेकानंद अपनी स्पष्ट दृष्टि के कारण अपने समय से बहुत आगे थे। जिस समय दुनिया धार्मिक, वैचारिक श्रेष्ठता के लिए लड़ रही थी और एक-दूसरे की जमीन हड़पने में व्यस्त थी, उन्होंने “मानव सेवा ही भगवान की सेवा” का संदेश दिया – क्योंकि वे प्रत्येक मानव में ईश्वर को देख सकते थे। उन्होंने न केवल भाईचारे की अवधारणा को व्यापक बनाया, बल्कि “सार्वभौमिक भाईचारे” के मॉडल को उठाकर इसकी प्रासंगिकता को भी समझाया, जो किसी भी प्रकार के भेदभाव के बावजूद प्रत्येक मानव आत्मा को शामिल करता है।

विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद का भाषण – पार्ट-1

विश्व धर्म संसद, जो 11 सितंबर से 27 सितंबर 1893 तक चली, में स्वामी विवेकानंद के छह व्याख्यान हुए जिसमें अंतिम दिन अपने अंतिम सत्र के दौरान उन्होंने मानवता के लिए आगे की राह के बारे में बात की और कहा – “ईसाई को हिन्दू या बौद्ध नहीं बनना है, इसी प्रकार हिन्दू या बौद्ध को ईसाई नहीं बनना है, प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को बनाए रखते हुए, दूसरों की भावना को आत्मसात करना चाहिए और विकास के अपने नियम के अनुसार विकसित होना चाहिए।”

विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद का भाषण – पार्ट-2

स्वामी विवेकानंद को अपनी मातृभूमि भारत के लिए गहरा प्रेम था। वह अपने देशवासियों से प्यार करते थे, लेकिन यह भी मानते थे कि इंसानों की कोई पहचान नहीं होती। उन्होंने न केवल इस संदेश का प्रचार किया, बल्कि जीवन भर इसका अभ्यास किया। संपूर्ण मानवता के प्रति उनके प्रेम के कारण ही जिन लोगों ने उन्हें ‘ब्लैक’ और ‘निगर’ कहा, उन्होंने उन सब को भी “मेरी प्यारी बहनों और अमेरिका के भाइयों” के रूप में संदर्भित किया और उसके पश्चात दुनिया उनके चरणों में थी।

यह कहना उचित होगा कि स्वामी विवेकानंद का पूरा जीवन लोगों को उठने और खुद का एक बेहतर संस्करण बनने का आह्वान करती रही है। 1893 का भाषण उनकी समस्त शिक्षाओं का मात्र एक सारांश था। शिकागो का भाषण इस बात की एक झलक है कि वो वास्तव में किसके लिए खड़े थे और यह सुनिश्चित करना हम सभी का दायित्व है कि हम भारत के सबसे सम्मानित पुत्रों में से एक की शिक्षाओं से लाभान्वित हों। यह भारत है जो हमेशा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (दुनिया एक परिवार है) में विश्वास करता है और दुनिया को सार्वभौमिक भाईचारे की ओर ले जा सकता है और सही मायने में ‘विश्व गुरु’ बन सकता है।

सह-लेखिका: डॉ. नेहा सिन्हा, असिस्टेंट प्रोफेसर, एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज

UPA राज की डील में मिलना था ₹167 करोड़ कमीशन, ₹75 करोड़ ही मिला: राहुल-वाड्रा के करीबी संजय भंडारी ने किया केस

भारत में आर्म्स डीलिंग (Arms dealer) के मामले में वॉन्टेड आर्म्स डीलर संजय भंडारी (Sanjay Bhandari) को लेकर यूनाइटेड किंगडम टेलीग्राफ में सोमवार (10 जनवरी 2022) को एक रिपोर्ट पब्लिश की गई। इसमें ये दावा किया गया कि फ्रेंच बिजनेसमैन थेल्स के खिलाफ कमीशन के 92 करोड़ रुपयों के लिए केस दायर किया है। भंडारी ने दावा किया है कि यूपीए के शासनकाल के दौरान भारत में साइन किए गए एक रक्षा लेन-देन के मामले में उसका कमीशन अभी तक बकाया है। यहाँ ये स्पष्ट कर दें कि ऑपइंडिया ने ही संजय भंडारी के राहुल गाँधी के साथ संबंधों को उजागर किया था।

ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के उल्लंघन के मामले में संजय भंडारी वॉन्टेड है और वो अब यूके में शरण माँग रहा है।

साल 2011 में मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में भारतीय वायु सेना (IAF) के मिराज-2000 फाइटर प्लेन को अपग्रेड करने के लिए €2.4 बिलियन (2,01,29,14,37,496 रुपए) का डील हुई थी।

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांसीसी कंपनी पर आरोप है कि उसने इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए बिचौलियों का सहारा लिया था। भंडारी ने अदालत के दस्तावेजों का हवाला देते हुए रक्षा मंत्रालय (Defence ministry) के एक शीर्ष अधिकारी के साथ मिलकर थेल्स को ‘मिराज जेट का अपग्रेड बेचने में मदद की थी।’ उसने ये भी दावा किया है कि कंसल्टिंग फीस के तौर पर उसे €20 मिलियन (167 करोड़ रुपए) चाहिए थी, लेकिन उसे केवल €9 मिलियन (75 करोड़ रुपए) ही मिले।

भगोड़े हथियार लॉबिस्ट का आरोप है कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी (Congress party) का करीबी है, इसीलिए उसे राजनीतिक कारणों से 2016 में फँसाया गया। उसने आरोप लगाया है कि सत्ता में आते ही BJP ने उसे परेशान करना शुरू कर दिया था। इसी कारण से वो ब्रिटेन भाग गया, जहाँ वो प्रत्यर्पण के मामले का सामना कर रहा है। बता दें कि भंडारी यूके में राजनीतिक शरण माँग रहा है।

भंडारी ने केस में खुद ‘भारत में हथियारों और रक्षा में शामिल प्रसिद्ध वाणिज्यिक मध्यस्थ’ बताया है, जिसने ‘भारतीय मंत्रालय के साथ मिलकर हथियारों के कॉन्ट्रैक्ट को लेकर उनकी सहायता करने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय रक्षा कंपनियों के साथ काम किया है। हालाँकि, अभी यह मामला चल ही रहा है और इस पर साल के अंत तक फैसला आने की उम्मीद जताई जा रही है।

द प्रिंट ने फ्रेंच कंपनी के हवाले से कहा, “थेल्स SA ने भंडारी के दावों का खंडन किया है। थेल्स ने कहा है कि उसने इस प्रोजेक्ट के लिए भंडारी या उसकी कंपनियों के साथ कभी भी कोई कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं किया।” रिपोर्ट के मुताबिक, थेल्स कानून का पालन करता है और भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करता है। समूह अपनी इंटेग्रिटी प्रोग्राम का नियमित रूप से मूल्यांकन और संशोधन करता है।

इसी क्रम में रिपब्लिक टीवी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, 2009 से 2015 के बीच रॉबर्ट वाड्रा के करीबी भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी की दुबई स्थित उसकी कंपनियों को 400 करोड़ रुपए की घूस भी मिली थी। जाँच रिपोर्ट के दस्तावेज में कहा गया है, “संजय भंडारी जो न तो विमानन के क्षेत्र में विशेषज्ञ हैं और न ही किसी विश्वसनीय गतिविधि को अंजाम दिया है। उन्होंने भारतीय वायुसेना के लिए ट्रेनर प्लेन की खरीद के लिए स्विटजरलैंड की पिलाटस एयरक्राफ्ट लिमिटेड से 328 करोड़ रुपए से अधिक का घूस हासिल किया था। यह रिश्वत दुबई में भंडारी के स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनियों को मिली थी।”

ऑपइंडिया ने राहुल गाँधी और संजय भंडारी के बीच संबंधों का किया था खुलासा

रॉबर्ट वाड्रा के करीबी संजय भंडारी ने 2012 से 2015 राफेल सौदे में ऑफसेट पार्टनर बनने की कोशिश की थी, लेकिन डसॉल्ट एविएशन ने उसे शामिल करने से मना कर दिया था। दरअसल, 126 राफेल जेट की खरीद वाली फाइल रक्षा मंत्रालय से अचानक से गायब हो गई और बाद में वो सड़क पर मिली। फाइल की चोरी का आरोप भंडारी पर लगा था। उस पर आरोप था कि भंडारी फाइलों की फोटोकॉपी करके उससे जुड़े लीड डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर को दे देता था।

मार्च 2019 में ऑपइंडिया ने एक जानकारी जुटाई, जिसमें कुछ संदिग्ध जमीन के सौदों जरिए राहुल गाँधी और संजय भंडारी के आपसी संबंधों का भी खुलासा हो गया। ऑपइंडिया ने 3 और 4 मई 2017 को एचएल पाहवा पर की गई ED खोज से संबंधित कागजात देखे। इससे पहावा और राहुल गाँधी के बीच जमीन सौदे का खुलासा हुआ। पाहवा को इस कार्य के लिए सीसी थम्पी द्वारा वित्त उपलब्ध कराया गया। सीसी थम्पी और संजय भंडारी के बीच रुपयों का कई बार लेन-देन हुआ। दोनों के बीच कई ट्रांजैक्शंस हुए थे। ये दोनों वाड्रा से भी जुड़े हुए हैं।

एचएल पाहवा के साथ राहुल गाँधी का जमीन का सौदा

ईडी द्वारा पाहवा के पास से जब्त की गई फाइलों से इस बात का खुलासा हुआ था कि हरियाणा के पलवल स्थित हसनपुर में 6.5 एकड़ जमीन एचएल पाहवा से राहुल गाँधी ने पंजीकरण दस्तावेज 4780 तारीख 3 मार्च 2008 को महज 26,47,000 रुपए में खरीदा था। 12 जनवरी 2008 को 24,00,000 और 17 मार्च 2008 को 2,47,000 रुपए का चेक पेमेंट करके जमीन खरीदी गई थी। लेकिन स्टांप ड्यूटी का पेमेंट नकद किया गया था।

ईडी की फाइल के पेज नंबर 60 में इस बात का खुलासा किया गया था कि पाहवा 33,22,003 में जमीन को बेचना चाहता था, लेकिन उसने राहुल गाँधी को 26,47,000 बेच दिया था। बाद में कॉन्ग्रेस पार्टी ने भी संदिग्ध जमीन सौदे को स्वीकार किया था।

ईडी ने अगस्त 2020 में पिलाटस प्लेन घोटाले को लेकर भंडारी के 14 ठिकानों पर छापे मारे थे। खास बात यह है भंडारी रॉबर्ट वाड्रा के लिए बेनामी संपत्तियाँ खरीदने के मामले में भी सीबीआई की जाँच के घेरे में है। CBI ने खुलासा किया था कि 2009 में संजय भंडारी की कंपनी को उसके सिंगापुर वाले बैंक अकाउंट से रिश्वत मिली थी। वहाँ से उस फंड को दुबई की भंडारी की कंपनी को भेजा गया बाद में उसी पैसे से लंदन में संपत्ति खरीदा गया। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने पहले ही अदालत में कहा था कि संजय भंडारी लंदन में वाड्रा के लिए जमीन खरीद रहा था।

वैश्विक समृद्धि के कोड लिख रहा भारत, हमारे पास युवा डेमोग्राफी व डेमोक्रेसी दोनों की असीम ताकत: 25वें युवा महोत्सव के शुभारंभ पर PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (12 जनवरी, 2022) को पुडुचेरी में 25वें युवा महोत्सव का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उद्धाटन किया। युवा महोत्सव का शुभारंभ करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “विश्व ने इस बात को माना कि भारत के पास दो असीम शक्तियाँ हैं। एक डेमाग्राफी व दूसरी डेमोक्रेसी, जिस देश के पास जितनी युवा जनसंख्या होती है, उसकी क्षमताओं को उतना ही बड़ा माना जाता है। भारत के पास ये दोनों ताकत हैं।”

पीएम ने कहा, “आज भारत के युवा में अगर टेक्नालॉजी का चार्म है, तो लोकतंत्र की चेतना भी है। आज भारत के युवा में अगर श्रम का सामर्थ्य है, तो भविष्य की स्पष्टता भी है। इसीलिए, भारत आज जो कहता है, दुनिया उसे आने वाले कल की आवाज़ मानती है। भारत अपने युवाओं को विकास के साथ लोकतांत्रिक मूल्यों की ताकत मानता है। आज भारत व दुनिया के भविष्य का निर्माण हो रहा है।”

उन्होंने यह भी कहा, “आज भारत जो सपने देखता है, संकल्प लेता है उसमें भारत के साथ-साथ विश्व का भविष्य दिखाई देता है। भारत के इस भविष्य का, दुनिया के भविष्य का निर्माण आज हो रहा है। हम मानते हैं कि बेटे-बेटी एक समान हैं। इसी सोच के साथ सरकार ने बेटियों की बेहतरी के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का निर्णय लिया है। बेटियाँ अपना करियर बना पाएँ, उन्हें ज्यादा समय मिले, इस दिशा में ये एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है।”

पीएम ने कहा, “आज भारत का युवा, Global Prosperity (वैश्विक समृद्धि) के कोड लिख रहा है। पूरी दुनिया के यूनिकॉर्न इकोसिस्टम में भारतीय युवाओं का जलवा है। भारत के पास आज 50 हज़ार से अधिक स्टार्ट अप्स का मजबूत इकोसिस्टम है।”

बता दें कि आज राष्ट्रीय युवा दिवस है। युवाओं के सबसे बड़े प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के जन्म-दिवस 12 जनवरी को हर वर्ष राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है।

आप जलते हैं तो हम चलते हैं: 3 साल बस एक झाँकी, आपके साथ-समर्थन से वामपंथियों को कई और धक्के देने हैं बाकी

साल 2018 की बात है। फेसबुक पर मजाक उड़ाया जा रहा था। वजह थी एक पत्रकार की नई नौकरी। मजाक उड़ाने वाले उस पत्रकार के जानने-पहचानने वाले दोस्त-यार थे। ‘वहाँ पत्रकारिता नहीं होती’ का ज्ञान उसे दिया जा रहा था। दोस्त ‘शुभचिंतक’ बन चुके थे। कुछ तो दार्शनिक भी।

खैर, पत्रकार ने नौकरी शुरू की। चमड़ी मोटी थी उसकी। सोशल मीडिया के सवाल-जवाब उसे बेमानी लगते थे… और नई नौकरी की खुशी के समय तंज कसने वाले दोस्त बेमंटा। वो पत्रकार मन लगा कर काम करने लगा। जो-जो टास्क दिया जाता, वो समय से पूरा हो – यह सुनिश्चित करने का काम उसने तन-मन से किया।

करत-करत अभ्यास ते, जडमति होत सुजान।
रसरी आवत जात तें, सिल पर परत निसान॥

ऊपर वाली कहावत सिर्फ कहने भर को नहीं है। यही असली जीवन दर्शन है। उस पत्रकार के ‘शुभचिंतक’ दोस्तों को यह बात शायद पता नहीं थी। साल 2019 की 12 जनवरी से लेकर 2022 की 12 जनवरी तक रस्सी को घिस-घिस कर उस पत्रकार और उसके संस्थान ने पत्रकारिता भी की और ‘पत्रकार’ बने लोगों को इसके मायने भी बखूबी समझाया।

वो पत्रकार मैं हूँ और संस्थान है ऑपइंडिया हिंदी। आप पाठकों के बीच हमने शुरुआत की थी 12 जनवरी 2019 से। तब से लेकर अब तक धीरे-धीरे टीम बनी भी, बढ़ी भी। पाठकों तक पैठ भी हमने धीरे-धीरे बढ़ाई। पहले मेनस्ट्रीम मीडिया और उसकी पत्रकारिता के सहारे खबरें जानने-समझने वाले भी तीखे-चुभते तथ्यों को खोल कर सामने रख देने वाली हमारी पत्रकारिता को समझने लगे। और तो और… पत्रकारिता क्या होती है, शीर्षक क्या होना चाहिए आदि-इत्यादि – अब दूसरे संस्थान भी हमें इस मामले में फॉलो करने लगे हैं।

3 साल के साथ-समर्थन का धन्यवाद

यह सब संभव हुआ है आप जैसे पाठकों के भरोसे। सच मानिए यह हवाई बात नहीं है। न ही इस बात से आपको खुश करने की मेरी मंशा है। क्योंकि पत्रकारिता के कई मॉडल, कई दुकान और भी खुले। सबका हश्र वही है – डब्बा बंद। इसके विपरीत मेनस्ट्रीम मीडिया और उनके भारी-भरकम कॉर्पोरेट मॉडल के आगे ऑपइंडिया हिंदी न सिर्फ टिका हुआ है बल्कि मजबूती से पाँव भी जमाए हुए है तो उसका श्रेय टीम से ज्यादा पाठकों पर जाता है।

आप हमारे वो पाठक हैं, जो न सिर्फ पढ़ते हैं बल्कि टोकते भी हैं। और यही हमारी शक्ति है। हर दिन सीखने, गलती करने पर सुधारने-संभलने के लिए आप ही हमें प्रेरित करते हैं। जब-जब बिग-टेक कंपनियों ने हमारे ऊपर उठने की गति पर ब्रेक लगाने की कोशिश की, आप ही हमारी सीढ़ी भी बने। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो ऑपइंडिया हिंदी की पूरी टीम अगर मशीन है तो उसके पाठक हैं फ्यूल। आप जलते हैं तो हम चलते हैं।

आगे भी चाहिए साथ

समय कठिन है। और यह बात सिर्फ भारत की नहीं है। पूरी दुनिया के वामपंथी लामबंद हो चुके हैं। उनके साथ तमाम पंथ-पक्ष-कंपनी-कॉर्पोरेट (भले मौका-परस्त ही) खड़े हैं। इनका लक्ष्य है दक्षिणपंथी सोच-तर्क पर चोट करना। गूगल-फेसबुक-ट्विटर सब इसी सोच के साथ चल रहे हैं। हमें इनके बीच ही चलना है… और इन्हें मात भी देना है। कैसे?

आप के भरोसे हैं हम। आप हमारे पाठक हैं। आप हमें पढ़ते हैं। अच्छा लगे तो उस पढ़े को आगे भी बढ़ाइए। यार-दोस्त-परिवार के साथ शेयर कीजिए। यही आने वाले वर्षों में हमारी ताकत होगी। यही अब तक हुई भी है। कंटेंट के मामले में कुछ जोर हम लगा रहे हैं, प्रचार-प्रसार के मामले में कुछ जोर आपसे लगाने की उम्मीद कर रहे हैं।

उर्जावान स्वामी विवेकानंद की जयंती पर ऑपइंडिया हिंदी की शुरुआत हुई थी। वो और उनके विचार हमेशा से हम सबकी प्रेरणा रहे हैं, रहेंगे। आज उनकी जयंती पर पूरी ऑपइंडिया हिंदी की टीम उनको नमन कर रही है। उन्हीं के विचारों से प्रेरित होकर आपसे एक अपील भी कर रहे हैं – कोरोना-काल में स्वस्थ रहें, सतर्क रहें।

15 किमी में 1000 मस्जिद, 645 मदरसे: नेपाल बॉर्डर से सटे यूपी के 7 जिलों में 3 साल में 26% मस्जिद-मदरसे बढ़े, SSB ने किया अलर्ट

नेपाल की सीमा से लगे उत्तर प्रदेश के सात जिलों में आश्चर्यजनक तरीके से मस्जिद और मदरसों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसको लेकर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने आगाह किया है। 15 किलोमीटर के दायरे में बढ़ी यह संख्या डेमोग्राफी में बदलाव के भी संकेत करती है। अधिकारियों के अनुसार साल 2018 में 738 मस्जिद थे जो 2021 में बढ़कर 1000 हो गए। इसी तरह मदरसे 500 से बढ़ कर 645 हो गए।

नेपाल के साथ भारत 1 हजार 751 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के इलाके इस सीमा से सटे हैं। नेपाल के साथ उत्तर प्रदेश की 570 किलोमीटर सीमा लगती है। इस क्षेत्र में 30 बॉर्डर पुलिस स्टेशन भी हैं। इकॉनॉमिक्स टाइम्स की खबर के मुताबिक, मस्जिद, मदरसों की संख्या यूपी के सात सीमावर्ती जिलों में बढ़े हैं। ये जिले हैं- महारजगंज, सिद्धार्थ नगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और खीरी। 

SSB के अधिकारियों के मुताबिक, बीते तीन सालों में मस्जिदों और मदरसों के निर्माण में करीब 26 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में डेमोग्राफिक बदलाव के संकेत मिलते हैं। यूपी-नेपाल बॉर्डर पर नकली भारतीय मुद्रा की तस्करी और मादक पदार्थों की तस्करी भी बढ़ी है। भारत के लिए यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि पिछले कुछ समय में न सिर्फ पाकिस्तान ने नेपाल में सुरक्षित आतंकी ठिकाने बनाने शुरू कर दिए हैं, बल्कि चीन भी अब इस छोटे हिमालयी देश में काफी रुचि ले रहा है। 

उल्लेखनीय है कि पिछले साल अक्टूबर में खबर आई थी कि भारत और नेपाल की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में पिछले 20 सालों में मदरसों की संख्या में 4 गुना बढ़ोतरी हुई। अधिकतर मदरसे भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में खुले हैं। उस समय सिद्धार्थनगर जिले में 597 मदरसे चल रहे थे, जिनमें 452 रजिस्टर्ड थे तो 145 मदरसों का कोई रिकॉर्ड नहीं था। वर्ष 1990 तक जिले में कुल 16 मान्यता प्राप्त मदरसे थे। वर्ष 2000 में इन मदरसों की संख्या बढ़कर 147 हो गई, जिनमें मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 45 थी। इससे पहले नेपाल से लगे जिलों में मुस्लिम आबादी की संख्या में 2.5 गुना की बढ़ोतरी की खबर सामने आई थी। 

नेपाल से लगे जिलों में 2.5 गुना बढ़े मुस्लिम

इससे पहले उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में डेमोग्राफी बदलाव को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने चिंता जताई थी। मुस्लिम आबादी में 2.5 गुना वृद्धि की बात कही गई थी। गृह मंत्रालय को दी गई रिपोर्ट में कुमाऊँ के तीन क्षेत्रों को संवेदनशील करार दिया गया था। ये क्षेत्र ऊधमसिंह नगर, चम्पावत व पिथौरगढ़ हैं। इनमें पिथौरगढ़ के दो कस्बे धारचूला व जौलजीवी को अतिसंवेदनशील श्रेणी में रखा गया था। उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों के अलावा उत्तर प्रदेश में भी कई क्षेत्रों को लेकर अलर्ट जारी हुआ था। इसका कारण था कि पिछले 2 साल के अंदर बहराइच, बस्ती व गोरखपुर मंडल से लगी नेपाल सीमा पर वहाँ 400 से अधिक मजहबी शिक्षण संस्थान और मजहबी स्थल खुले, जिसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में दी थी।

‘मुस्लिम पट्टी’ बनाने की साजिश

उत्तर भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी (Muslim Belt)’ बनाने की साजिश चल रही है। इस पट्टी में पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे राज्यों के इलाके होंगे जो पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़ा होगा। यह दावा पिछले साल ‘दैनिक जागरण में प्रकाशित एक लेख में किया गया था। इसमें बताया गया था कि उत्तर भारत में मुस्लिम षड्यंत्रकारियों ने जिस मुस्लिम गलियारे को तैयार करने की साजिश रची है, वो बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा होते हुए पाकिस्तान से मिलेगा। इस गलियारे में मुस्लिमों को बड़ी संख्या में बसाने का काम शुरू किया जा रहा है और असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलन के बाद वहाँ के कई मुस्लिमों को भी इधर ही बसाया गया है।

रेप के बाद नाबालिग को फ्लाईओवर पर फेंक गए बदमाश, प्राइवेट पार्ट से बह रहा था खून: राजस्थान के अलवर की घटना

राजस्थान के अलवर जिले से एक नाबालिग से हैवानियत का मामला सामने आया है। वह बेहोशी की हालत में एक फ्लाईओवर पर मिली। उसके प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा था। अलवर की एसपी तेजस्विनी गौतम ने उसके साथ दुष्कर्म की आशंका जताई है। रिपोर्टों के अनुसार पीड़िता की फिलहाल पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस सीसीटीवी खँगाल रही है ताकि दोषियों को पकड़ा जा सके।

मंगलवार (11 जनवरी 2022) को शिवाजी पार्क थाना क्षेत्र में शाम करीब आठ बजे अज्ञात लोगों ने नाबालिग मंदबुद्धि लड़की को तिजारा पुलिया पर पटक कर फरार हो गए। लड़की की हालत गंभीर थी और सूचना पर पहुँची पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लड़की को अस्पताल पहुँचाया है।

पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स में गंभीर इंटरनल इंजरी थी। उसे तत्काल इलाज के लिए आईसीयू में भर्ती किया गया। प्राइवेट पार्ट से ब्लीडिंग ज्यादा होने से उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर नन्नूमल पहाड़िया और पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम समेत अन्य आलाधिकारी अस्पताल पहुँचे।

एसपी (SP) तेजस्विनी गौतम ने बताया, “सूचना मिली कि एक बच्ची लावारिस हालत में तिजारा फाटक पुल पर पड़ी है, पुलिस मौके पर पहुँची और उसे अस्पताल में भर्ती कराया। अब उसे जयपुर के SMS अस्पताल रेफर किया है। बच्ची मानसिक रूप से विक्षिप्त है। मामला संभवत: दुष्कर्म का है, जाँच जारी है।”

पुलिस के अनुसार मालाखेड़ा थाना इलाके के एक गाँव की रहने वाली बालिका मंगलवार शाम चार बजे से लापता थी। उसके बाद वह रात को तिजारा फाटक पुलिया के पास बेहोशी की हालत में पड़ी मिली। पुलिस ने आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है। अभी तक उनका कोई सुराग नहीं लग पाया है। आरोपितों की धरपकड़ के लिए आसपास के सीसीटीवी फुटेज खँगाले जा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में राजस्थान के भरतपुर जिले के कैथवाड़ा थाना इलाके में लंबे समय से गैंगरेप (Gangrape) की शिकार हो रही एक नाबालिग बच्ची ने समाज में बदनामी के डर से जहर खाकर खुदकुशी (Suicide) कर ली थी। हाफिज और मनीष ने उसके साथ गैंगरेप कर उसके अश्लील फोटो-वीडियो भी बना लिए थे। बाद में आरोपितों ने इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया था।

खेल मंत्रालय के कार्यक्रम में गालीबाज देवदत्त पटनायक का नाम देख भड़के नेटिजन्स, पूछा- इस हिंदूफोबिक को नेशनल यूथ फेस्टिवल से क्यों जोड़ा

हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाले देवदत्त पटनायक (Devdutt Pattanaik) को युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा ‘ग्रेट माइंड डिस्कस आइडियास’ कार्यक्रम में अतिथि के तौर पर बुलाया गया। सामने आए पोस्टर में देख सकते हैं कि रणदीप हुड्डा, विजय शेखर शर्मा की तस्वीर के साथ देवदत्त की फोटो भी लगी है। अब इसी कार्रयक्रम के होने से पहले इसपर विवाद छिड़ा है। कुछ लोग इसका जमकर विरोध कर रहे हैं। इसी बीच एक भाजपा समर्थक ने ट्वीट करके बताया है कि शायद देवदत्त पटनायक अब कार्यक्रम में भाग नहीं लेंगे।

बता दें कि जब नेशनल यूथ फेस्टिवल 2022 के पोस्टर में देवदत्त को नजर आए, तभी से सवाल किया जा रहा है कि ऐसे गालीबाज व्यक्ति को क्या युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय महान बुद्धिजीवी मानता है क्या जो उन्हें इस कार्यक्रम में आमंत्रण मिला। लीगल राइट्स ऑब्जर्वेटरी ने केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से पूछा कि क्या आपका मंत्रालय वाकई देवदत्त पटनायक को एक महान दिमाग मानता है? वह हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाला, भारत से नफरत करने वाला, फर्जी इतिहासकार है जो हर भारतीय चीज को कोसने, नरेंद्र मोदी व अमित शाह को श्रापने का आनंद लेता है ताकि उसकी वामपंथी खुजली शांत हो सके।

LRO ने तमाम ऐसे वाकयों का स्क्रीनशॉट लगाया है जब देवदत्त पटनायक ने ऑनलाइन ही अपनी घटिया  बुद्धि का प्रमाण दिया और कभी किसी को गाली दी तो कभी ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की। 

LRO के अलावा अन्य यूजर्स का कहना है कि देवदत्त पटनायक गंदे-गंदे शब्दों का प्रयोग करके माताओं, महिलाओं को गाली देता हैं। क्या अब वो विवेकानंद के जन्मदिवस पर भारतीय युवाओं को संबोधित करेगा?

एक यूजर ने लिखा, “क्या कार्यक्रम संयोजक दिमाग नहीं चला रहे। आप किसी को कार्यक्रम में बुलाने से पहले उस आदमी के बैकग्राउंड के बारे में इतना अंजान कैसे हो सकते हैं। आखिर क्यों इस हिंदूफोबिक आदमी को  नेशनल यूथ फेस्टिवल में जोड़ा गया है।”

हर्ष वर्धन त्रिपाठी लिखते हैं, “सरकार को सबको लेकर चलना चाहिए, आलोचकों को भी, लेकिन देवदत्त जैसे घोर हिंदू धर्म विरोधी को युवा कार्यक्रम और अमृत महोत्सव में शामिल करके युवाओं को क्या सिखाना चाहते हैं। भगवान राम भ्रम हैं क्या।”

गौरतलब है कि जिस देवदत्त पटनायक को युवाओं को संबोधित करने के लिए युवा कार्यक्रम व खेल मंत्रालय ने निमंत्रण देकर बुलाया है उसी फर्जी ‘माइथोलॉजी’ एक्सपर्ट देवदत्त पटनायक के खिलाफ पिछले साल ओडिशा के भुवनेश्वर में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पटनायक के खिलाफ यह शिकायत ओडिशा के पुरी जगन्नाथ मंदिर के बारे में फर्जी खबरें और झूठ फैलाकर हिंदू समाज में जाति के आधार पर विभाजन को लेकर की गई थी।

इतना ही नहीं पटनायक को आप अक्सर हिंदू घृणा से लबरेज सामग्री का प्रचार-प्रसार करते देखेंगे। कुछ समय पहले उसने श्रीराम भगवान और हनुमान जी का मजाक बनाया था। उसने श्रीराम को नेपाल का, रावण को लंका का करार देते हुए भारत को बंदरों का देश कहा था। इसी तरह एक बार इस कथित इतिहासकार ने एक यूजर की माँ को लेकर अभद्र टिप्पणी की थी। फिर दूसरे के माता-पिता को मूर्ख तक कह दिया था। कई बार इस पटनायक को यूजर्स ने खुलेआम माँ-बहन की गाली देते भी पकड़ा है।