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‘लाल किला पर खालिस्तानी झंडा फहराने पर ₹7.40 Cr इनाम’: SFJ का ऐलान – 26 जनवरी पर ‘मोदी के तिरंगे’ को ब्लॉक करो

देश भर में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा और उससे पहले एक बार फिर भारत विरोधी ताकतों ने साजिश शुरू कर दी है। खालिस्तान समर्थक ग्रुप (Khalistani Supporters) सिख फॉर जस्टिस (SFJ) की ओर से नई धमकी दी गई है कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर तिरंगे की जगह खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। यह ऐलान SFJ प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा किया गया है। फेसबुक पर गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा साझा किए गए एक नए प्रोपेगेंडा वीडियो में, प्रतिबंधित संगठन ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में भारतीय तिरंगे के बजाय खालिस्तानी झंडा फहराने वाले शख्स को ‘इनाम’ के रूप में $1 मिलियन डॉलर (7.39 करोड़ रुपए) देने की घोषणा की है।

SFJ
फोटो साभार: सोशल मीडिया

वीडियो में पन्नू को यह कहते हुए सुना गया, “यह सिखों और हिंद की बात है। इस बार दिल्ली में कहीं भी तिरंगा नहीं फहराने दिया जाएगा। खालिस्तानी जनमत संग्रह के जरिए पंजाब को भारतीय कब्जे से मुक्त कराने का अभियान 2022 के विधानसभा चुनावों के बराबर जारी रहेगा।” वह वीडियो में भारतीय झंडे भी जलाते नजर आए।

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फोटो साभार: सोशल मीडिया

इसको लेकर खालिस्तानी ग्रुप सिख फॉर जस्टिस वीडियो कैंपने समेत सोशल मीडिया पर प्रचार अभियान चला रहा है। इसलिए सिख फॉर जस्टिस की तरफ से एक पोस्टर भी जारी किया गया है, जिसमें पीएम मोदी की तस्वीर भी है। उस पर लिखा गया है कि 26 जनवरी को पीएम मोदी के तिरंगे को ब्लॉक करके खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा। इसमें किसानों की मौत को लेकर भी धमकी दी गई है। पन्नू की ताजा धमकी के बाद तमाम सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट मोड में हैं। साथ ही 26 जनवरी की वजह से राजधानी दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

गौरतलब है कि भारत में सिखों को भड़काने का ऐसा ही प्रयास पिछले साल भी किया गया था। उउस समय SJ ने गणतंत्र दिवस पर इंडिया गेट पर खालिस्तान झंडा फहराने के लिए $2.5 लाख के नकद इनाम की घोषणा की थी। 

हाल ही में ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने पंजाब के बठिंडा फ्लाईओवर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला रोके जाने की जिम्मेदारी ली थी। साथ ही इस संगठन ने फोन कॉल कर के सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को धमकाया भी था। संगठन ने अधिवक्ताओं को धमकी देते हुए कहा था कि इस मामले को वो सुप्रीम कोर्ट में न लड़ें। उसने दावा किया कि हुसैनवाला फ्लाईओवर पर 5 जनवरी, 2022 को उसने ही पीएम मोदी के काफिले को 20 मिनट तक रोका था।

अब लखनऊ के इमाम अली होटल में थूक वाली रोटी, वीडियो वायरल: याकूब, दानिश, हाफिज और अनवर पर मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर थूक लगाकर रोटी (Spitting on Bread) बनाने का मामला सामने आया है। ताजा मामला राजधानी लखनऊ का है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस ने थूक लगाकर रोटी बनाने के मामले में होटल के मालिक समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद हमने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए होटल मालिक याकूब, कर्मचारी दानिश, हाफिज मुख्तार फिरोज और अनवर समेत अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वायरल वीडियो काकोरी के इमाम अली होटल का बताया जा रहा है। वीडियो में आप देख सकते हैं कि एक शख्स थूक कर रोटी को तंदूर में पकाता हुआ नजर आ रहा है।

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में थूक लगाकर रोटी बनाने की यह पहली घटना नहीं है। पिछले महीने मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र में आंबेडकर रोड स्थित लक्ष्मीनगर में सगाई समारोह के दौरान थूक लगाकर रोटी बनाने का वीडियो वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में नौशाद नाम का युवक रोटी बना रहा है। वह रोटी पर बार-बार थूक लगा रहा था, तभी एक बच्चे ने उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था।

नवंबर 2021 में गाजियाबाद से भी रोटी बनाते समय उसमें थूकने का वीडियो सामने आया था। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो लोनी के बंथला फ्लाईओवर के पास स्थित एक होटल का था, जिसमें सफेद रंग की टोपी पहने एक शख्स रोटी बनाते समय उस पर थूक रहा था। हिंदू रक्षा दल के लोगों की मदद से पुलिस ने आरोपित को पकड़ा था। बता दें कि पिछले साल (जो शिकायत होने के बाद मीडिया की रिपोर्ट में छपी) 9 महीने में 9 लोग रोटी पर थूक लगा कर सेंकते हुए पकड़े गए थे। spitting-on-roti-in-lucknow-uttar-pradesh

3 दिन, 3 FIR: कर्नाटक में पदयात्रा के नाम पर उड़ी कोरोना नियमों की धज्जियाँ, अध्यक्ष समेत 63 कॉन्ग्रेसियों पर केस दर्ज

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस द्वारा मेकेदातु परियोजना के लिए शुरू की गई पदयात्रा मामले में अब तक प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार के ख़िलाफ़  3 FIR हो चुकी हैं। बुधवार (12 जनवरी 2022) की सुबह भी कोरोना गाइडलाइन्स की धज्जियाँ उड़ाने के लिए शिवकुमार समेत 63 कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के विरुद्ध मामले दर्ज हुए। 

इससे पहले 11 जनवरी 2022 को कर्नाटक कॉन्ग्रेस डीके शिवकुमार पर दूसरा मामला दर्ज हुआ था। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, “डीके शिवकुमार और एमपी डीके सुरेश समेत 41 लोगों का (दूसरी) एफआईआर में नाम है जिन्होंने कोविड नियमों की धज्जियाँ उड़ाईं।” इससे पूर्व रविवार को इस संबंध में पहली एफआईआर दर्ज हुई थी। पहली एफआईआर में 30 लोगों के विरुद्ध केस हुआ था।

बता दें कि कॉन्ग्रेस के मनमाने रवैये को देखते हुए और शिवकुमार द्वारा कोविड चेक अप न कराने पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने उन पर निशाना साधा। हालाँकि, शिवकुमार का कहना है कि राज्य सरकार उन्हें कोविड से इन्फेक्ट करना चाहती है। उन्होंने सोमवार को कहा था, “अतिरिक्त जिला आयुक्त मुझे टेस्ट करने के लिए आए थे। उन्हें भेजा गया था कि मुझे इन्फेक्ट करके टेस्ट में पॉजिटिव दिखाया जाए। सरकार चाहती है कि वो मुझे कोविड पॉजिटिव लोगों के संपर्क में लाए इसलिए उन्होंने अधिकारियों को भेजा था।” वह कहते हैं कि उन्हें कोविड करवाने का आइडिया मुख्यमंत्री का नहीं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री का हो सकता है। 

इससे पहले खबर आई थी कि शिवकुमार ने कोविड चेकअप कराने के लिए कहा है कि वो जेल चले जाएँगे लेकिन कोरोना टेस्ट के लिए स्वैब सैंपल नहीं देंगे। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप मढ़ा था कि उनकी पदयात्रा से सत्ताधारी पार्टी की नाकामी उजागर होगी इसलिए कोविड केसों के नाम पर जनता को डराने और पदयात्रा को रोकने का काम हो रहा है। वह कहते हैं कि बीजेपी कर्फ्यू लगाकर राजनीति खेल रही है।

गौरतलब है कि रविवार (जनवरी 9, 2022) को पदयात्रा शुरू होने के बाद सोशल मीडिया में ऐसे वीडियो वायरल हुए थे, जिनमें शिवकुमार खाँसते और चलते हुए ‘लड़खड़ाते’ नजर आ रहे थे। इस दौरान उनके आसपास कॉन्ग्रेस वर्करों को जमावड़ा भी दिख रहा था। यह सब तब हो रहा है जब कुछ दिन पहले ही चुनावी राज्यों में कोरोना का हवाला देकर कॉन्ग्रेस ने आयोजनों पर रोक लगाने की बात कही थी और लिबरलों ने इसे खूब सराहा था।

‘… तो 30000 स्टाफ के साथ डूब जाएँगे’: क्यों कानूनी पचड़े में फँसा ₹26000 करोड़ का डील, अंबानी-बियानी-बेजॉस का क्या दाँव पर लगा

यदि रिलायंस के साथ 26,000 करोड़ रुपए का सौदा नहीं होता है तो फ्यूचर रिटेल लिमिटेड डूब जाएगी। 30 हजार लोगों की नौकरियाँ चली जाएगी। यह दलील मंगलवार (11 जनवरी 2022) को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई। मामला फ्यूचर रिटेल (Future Retail) और ऑनलाइन दिग्गज अमेजन (Amazon) के बीच जारी कानून लड़ाई से जुड़ा है। फिलहाल शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षा रख लिया है। यह लड़ाई सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग (CCI) और मध्यस्थता पंचाट में चल रही है। मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और जेफ बेजोस (Jeff Bezos) जैसे दुनिया के धनकुबेर इस लड़ाई के किरदार हैं।

क्या है मामला?

बिग बाजार (Big Bazaar) का आपने नाम सुना होगा। किशोर बियाणी की फ्यूचर रिटेल ने इस रिटेल चेन स्टोर की शुरुआत 2001 में की थी। देश में अपनी तरह का यह पहला शुरुआत था। देश के 400 श​हरों में फ्यूचर के 1800 रिटेल स्टोर हैं। 2020 में रिलायंस रिटेल ने फ्यूचर ग्रुप के रिटेल, होलसेल और लॉजिस्टिक्स कारोबार को खरीदने की घोषणा की। इस डील पर अमेजन को आपत्ति है।

अमेजन की आपत्ति

दरअसल फ्यूचर ग्रुप के साथ एक डील 2019 में अमेजन ने भी की थी। इसके तहत करीब 1500 करोड़ रुपए में फ्यूचर कूपन में 49 फीसदी हिस्सेदारी अमेजन को बेची गई थी। अमेजन का कहना है कि रिलायंस और फ्यूचर का सौदा इस डील का उल्लंघन करता है। अमेजन का यह भी कहना है कि 2019 का डील उसे 3 से 10 साल के भीतर फ्यूचर रिटेल में हिस्सेदारी खरीदने का अधिकार भी देता है।

फ्यूचर ने क्यों किया सौदा

फ्यूचर ग्रुप कर्ज में डूबी है। 2019 में उस पर कर्ज 12,778 करोड़ रुपए था। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA ने उसकी रेटिंग निगेटिव कर दी थी। इसके बाद उसने अमेजन के साथ डील किया जिसे नवंबर 2019 में भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग ने मँजूरी दे दी, लेकिन दिसंबर 2021 में निलंबित कर दिया। आर्थिक हालत दुरुस्त नहीं होने पर फ्यूचर ने 2020 में रिलायंस के साथ डील की।

अब तक क्या

अमेजन ने रिलायंस और फ्यूचर के डील को सिंगापुर की मध्यस्थता अदालत में चुनौती दी। अक्टूबर 2020 में मध्यस्थता पंचाट का अंतरिम फैसला अमेजन के पक्ष में आया। अमेजन ने सेबी, सीसीआई, स्टॉक एक्सचेंज को भी इस डील को रोकने के लिए पत्र लिखा। इसके बाद फ्यूचर ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका डाली। दिसंबर 2020 में हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने फ्यूचर के हक में फैसला दिया। उससे पहले नवंबर 2020 में रिलायंस के साथ उसके डील को सीसीआई ने भी मँजूरी दे दी थी। जनवरी 2021 में इस डील को सेबी से भी क्लीयरेंस मिल गई। जनवरी 2021 को फ्यूचर एनसीएलटी भी पहुँच गई। दूसरी तरफ दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल बेंच के फैसले को अमेजन ने डिवीजन बेच में चुनौती दी। मध्यस्थता पंचाट के फैसले को लागू कराने की गुहार लगाई। फरवरी में हाई कोर्ट ने सिंगापुर के पंचाट के फैसले को सही बताया। इसे फ्यूचर ने डिविजन बेंच में चुनौती दी, जिसके खिलाफ अमेजन सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने डील पर फैसला लेने से एनसीएलटी को रोक रखा है। नवंबर 2021 में इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को शीर्ष अदालत ने संयम बरतने को कहा था।

‘PM मोदी के सत्ता में रहने तक शांति की उम्मीद नहीं’: अब 100 पन्नों की नई सुरक्षा नीति लेकर आया पाकिस्तान, जुमे के दिन लॉन्च

पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने देश के लिए नई सुरक्षा नीति बनाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 100 पन्नों की नीति को जन-केंद्रित और मील का पत्थर बताया गया है। कहा गया कि यह पाकिस्तान को आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगा। इस नीति का अनावरण शुक्रवार (14 जनवरी 2022) को प्रधानमंत्री इमरान खान करेंगे।

इस्लामाबाद नीति अनुसंधान संस्थान के कार्यकारी निदेशक हुसैन नदीम ने पाकिस्तान की पहली राष्ट्रीय सुरक्षा नीति शुरू करने को लेकर अपने उत्साह को साझा किया। उन्होंने पॉलिसी पेपर की पहली तस्वीर शेयर करते हुए ट्वीट किया, “इस शुक्रवार को लॉन्च की उम्मीद है।”

पाकिस्तान सरकार के एक अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा नीति के सार्वजनिक संस्करण को जारी करने से बहस शुरू हो जाएगी। इसलिए शुक्रवार को पूरी नीति को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। अधिकारी के अनुसार हर साल और सरकार बदलने के समय नीति की समीक्षा की जाएगी। उक्त राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की मंजूरी मिलने के एक दिन बाद 28 दिसंबर को संघीय कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया था। नीति में बताया गया है कि आने वाले वर्षों में देश को किस दिशा में जाना चाहिए।

अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के पास अलग-अलग रक्षा, विदेश और आंतरिक नीतियाँ हैं। नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति भविष्य के लिए दिशा प्रदान करने वाले एक “अम्ब्रेला डॉक्यूमेंट” (Umbrella Document) के रूप में कार्य करेगी।

पाकिस्तान हमेशा भारत के लिए एक चिंता का विषय रहा है। इस बीच पाक ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में पड़ोसियों के साथ तत्काल शांति की माँग की है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान अगले 100 सालों तक भारत के साथ दुश्मनी नहीं करेगा और आने वाले दिनों में पाकिस्तान अपनी विदेश नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ शांति कायम करने और आर्थिक कूटनीति को बढ़ाने की तरफ ध्यान देगा।

हालाँकि, पड़ोसी देश ने स्पष्ट किया है कि पीएम मोदी के सत्ता में रहने तक भारत के साथ चीजों को सुलझाने की उनकी कोई योजना नहीं है। पाकिस्तानी सरकारी अधिकारियों में से एक ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बात करते हुए स्पष्ट किया कि ‘नई दिल्ली में मौजूदा मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत भारत के साथ तालमेल की कोई संभावना नहीं है।’

नई सुरक्षा नीति में भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को बहाल करने की बात कही गई है। यानी, आने वाले दिनों में पाकिस्तान भारत के साथ एक बार फिर से व्यापारिक रिश्ते कायम कर सकता है और उसमें कश्मीर मुद्दो को विवाद नहीं बनाया जाएगा।

बता दें कि मोदी सरकार ने 2019 में जब से कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म किया है, उसके बाद से पाकिस्तान भारत के साथ तमाम व्यापारिक संबंध भी खत्म कर चुका है। पाकिस्तान ने तब राजनयिक संबंधों को डाउनग्रेड कर दिया था और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को निलंबित कर दिया था।

मालूम हो कि पाकिस्तान की स्वतंत्रता के बाद पहले तीस वर्षों तक, उनकी सुरक्षा नीति भारत केंद्रित रही है, जिसके परिणामस्वरूप 1948, 1965 और 1971 में तीन बड़े युद्ध हुए। पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व जिहादी मानसिकता से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसकी  कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को संरक्षण देने के लिए हमेशा आलोचना भी होती रही है। बताया गया कि इस बार नीति निर्माताओं ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नागरिक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया है।

‘मनोरंजन और मुफ्त बाँटने वाले नहीं, गंभीर लोग चाहिए’: सिद्धू-चन्नी के खिलाफ हुए पंजाब के कॉन्ग्रेस सांसद मनीष तिवारी

पंजाब (Punjab) में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Election) की घोषणा के बाद भी सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस (Congress) की आंतरिक सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। इसी क्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) और प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य को एक गंभीर व्यक्ति की जरूरत है।

मनीष तिवारी ने ये कमेंट इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को रीट्वीट करते हुए किया। उन्होंने लिखा, “पंजाब को ऐसे सीएम की जरूरत है, जिसके पास पंजाब की चुनौतियों का समाधान हो, कड़े फैसले लेने की क्षमता हो। पंजाब को ऐसे गंभीर लोगों की जरूरत है, जिनकी राजनीति सोशल इंजीनियरिंग न हो, मनोरंजन व मुफ्त बाँटने पर ध्यान न हो। जिसे लगातार चुनावों में लोगों ने खारिज कर दिया है।”

दरअसल, रिपोर्ट में पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के एक इंटरव्यू का जिक्र किया गया था। इसमें उन्होंने मंगलवार (11 जनवरी 2022) को पार्टी हाईकमान से प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की माँग की थी। चन्नी ने पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाने की कोशिश करते हुए कहा कि जब भी पार्टी ने राज्य में सीएम फेस अनाउंस किया है वो जीती है। लेकिन जब कभी उसने ऐसा नहीं किया तो वो हारी है।

गौरतलब है कि उनसे कुछ दिन पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने भी कॉन्ग्रेस आलाकमान से मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने की माँग की थी। इसके अलावा चुनावी समर के समय में मंगलवार (11 जनवरी 2022) को सीएम ने तो एक बार फिर से अपना बागी तेवर दिखाते हुए यहाँ तक कह दिया था, “हर कोई सीएम बन सकता है क्या? सीएम हाईकमान नहीं बनाता, बल्कि पंजाब के लोग बनाते हैं। ये किसने कह दिया कि हाईकमान सीएम बनाएगा।” दरअसल, इस तरह का दबाव बनाकर सिद्धू खुद को पंजाब का सीएम घोषित करवाना चाहते हैं। 29 दिसंबर 2021 को उन्होंने पंजाब में सीएम फेस के मुद्दे पर कहा था कि बिना दूल्हे के बाराती कैसा?

‘समाज से दूर हो गए हैं अखिलेश यादव’: मुलायम सिंह के समधी ने थामा BJP का दामन, सपा MLA और बसपा के पूर्व विधायक भी BJP में

स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में जाने के ऐलान के ठीक बाद अब भाजपा ने अखिलेश के कैंप में सेंधमारी की है। बुधवार (12 जनवरी 2022) को सिरसागंज विधानसभा क्षेत्र से सपा के विधायक हरिओम यादव और बेहट सीट से कॉन्ग्रेस के विधायक नरेश सैनी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने दिल्ली में यादव और सैनी के अलावा एतमादपुर से बसपा के पूर्व विधायक धर्मपाल सिंह को पार्टी में शामिल कराया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं के भाजपा में शामिल होने से पार्टी के चुनाव अभियान को मजबूती मिलेगी। 

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। गौरतलब है कि फिरोजाबाद के कद्दावर सपा नेताओं में शुमार, हरिओम यादव तीन बार से विधायक हैं। अटकलें हैं कि यादव ने सपा नेता रामगोपाल यादव से मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। हरिओम यादव, मुलायम सिंह यादव के समधी भी हैं।

इस मौके पर हरिओम यादव ने कहा, “मेरा सम्मान समाजवादी पार्टी में नहीं हुआ इसलिए मैंने आज बीजेपी ज्वाइन की। मुलायम सिंह यादव और राम गोपाल के साथ मिलकर हमने पार्टी को मजबूती दी। 35 सालों तक मैं पार्टी में रहा लेकिन अब वहाँ कोई सुनवाई नहीं है। अखिलेश यादव ऐसे लोगों से घिर गए हैं, जिनका समाज से कोई वास्ता नहीं। स्वामी प्रसाद मौर्य और मेरे जैसे नेताओं में बहुत फर्क है। आपको चुनाव के बाद दिखेगा, पंचायत चुनाव के बाद मुझे पार्टी से निलंबित भी किया गया था।”

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Election 2022) का ऐलान चुनाव आयोग ने 8 जनवरी को किया। 403 सीटों वाली 18वीं विधानसभा के लिए 10 फरवरी से 7 मार्च तक सात चरणों में वोट पड़ेंगे। 10 मार्च को चुनाव के नतीजे (UP Election results) आएँगे। यूपी में सात चरणों के तहत 10 फरवरी, 14 फरवरी, 20 फरवरी, 23 फरवरी, 27 फरवरी, 3 मार्च और 7 मार्च को मतदान (Voting) होगा।

धर्म संसद मामला: SC ने उत्तराखंड और दिल्ली सरकार को जारी किया नोटिस, अगले आयोजन पर रोक से इनकार, कपिल सिब्बल ने की थी माँग

उत्तराखंड के हरिद्वार के धर्म संसद कार्यक्रम में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित भड़काऊ भाषणों के मामले की जाँच की माँग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (12 जनवरी 2022) को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर उत्तराखंड सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और उत्तराखंड सरकार को 10 दिन के भीतर इस मामले पर अपना पक्ष रखने को कहा है। हालाँकि, अदालत ने धर्म संसद नाम से होने वाले आगामी कार्यक्रमों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

बता दें कि पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश और पत्रकार कुर्बान अली ने हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में हेट स्पीच और भड़काऊ बयान देने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिक दायर की थी।

इस याचिका में मुस्लिमों के खिलाफ हेट स्पीच की SIT से स्वतंत्र, विश्वसनीय और निष्पक्ष जाँच की माँग की गई है। दोनों ने हरिद्वार में 17 और 19 दिसंबर, 2021 के बीच अलग-अलग दो कार्यक्रमों में दिए गए हेट स्पीच से संबंधित मामले में तत्काल हस्तक्षेप की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पहला मामला हरिद्वार में यति नरसिंहानंद द्वारा आयोजित और दूसरा दिल्ली में ‘हिंदू युवा वाहिनी’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम का है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में धर्म संसद में दिए गए भाषणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जो बातें की गई हैं, उनको कोर्ट में पढ़ा भी नहीं जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे पर राज्य और केंद्र सरकार का पक्ष जानना भी जरूरी है। ऐसे में फिलहाल वह सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर रही है। दस दिन बाद अब कोर्ट इस पर दोबारा सुनवाई करेगा। इस दौरान उत्तराखंड और दिल्ली की सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।

कपित सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि 23 जनवरी को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में इसी तरह की एक धर्म संसद आयोजित की जाएगी। कोर्ट इस पर रोक लगाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल रोक नहीं लगा रहे हैं। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि वो 23 जनवरी को अलीगढ़ में होने वाली धर्म संसद को रोकने के लिए लोकल अथॉरिटी के पास जा सकते हैं। 

क्या है मामला? 

उत्तराखंड के हरिद्वार शहर में 17 से 19 दिसंबर के बीच धर्म संसद नाम का एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में कथित तौर हिन्दू स्वाभिमान को लेकर बातें होने का दावा किया गया लेकिन जब इस कार्यक्रम के भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर आए तो इसको लेकर हंगामा हो गया। इन वीडियो में कार्यक्रम में शामिल लोग हिंदू धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिमों की आबादी कम करने और हिंसा का आह्वान करते नजर आए। सभा में कथित तौर पर यति नरसिंहानंद ने कहा था कि ‘हिंदू ब्रिगेड को बड़े और बेहतर हथियारों से लैस करना’ ‘मुस्लिमों के खतरे’ के खिलाफ ‘समाधान’ होगा। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर स्वतंत्र जाँच की माँग की गई है।

‘इस्लाम में वापस आ जाओ’: मुस्लिम कट्टरपंथियों ने एक का गला रेता, दूसरे को सिर में मारी गोली, 4 को ज़िंदा जलाया

इस्लामी कट्टरपंथियों ने केन्या में सीमा पर बसे एक गाँव में 6 लोगों की हत्या कर दी। जहाँ एक का गला रेत डाला गया, वहीं चार को ज़िंदा जला दिया गया। पुलिस ने बताया कि ये घटना सोमालिया से सटे एक गाँव की है। इस घटना के पीछे सोमालिया के ही ‘अल शबाब’ आतंकी समूह को बताया जा रहा है। पिछले एक दशक से ये आतंकी संगठन केन्या में घुस कर नागरिकों को मारता रहा है। लामू काउंटी में हुई इस घटना में पीड़ितों के घरों को भी आतंकियों ने जला दिया।

एक व्यक्ति का गला रेत दिया गया। एक अन्य मृतक के सिर में गोली लगने के जख्म मिले। चार ऐसी लाशें मिली हैं, जिनके हाथ बँधे हुए हैं और उन्हें ज़िंदा जला दिया गया है। उन्हें पहचानना तक मुश्किल हो रहा था। 2011 में केन्या ने ‘अल शबाब’ को दुरुस्त करने के लिए सेना की एक टुकड़ी को भी सोमालिया भेजा था। ये आतंकी संगठन 2013 में नैरोबी स्थित एक शॉपिंग मॉल के अलावा 2015 में उत्तर-पूर्व में स्थित एक विश्वविद्यालय को भी निशाना बना चुका है।

‘अफ्रीकन यूनियन पीसकीपिंग फोर्स’ के अंतर्गत केन्या की सेना अभी भी सोमालिया में मौजूद है। केन्या पुलिस ने इस मामले में 8 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये घटना जनवरी महीने की शुरुआत में ही हुई है। जिसे गोली मारी गई, उस व्यक्ति की लाश सड़क के किनारे मिली। जिसका गला रेता गया था, उसके घर को लूट कर आग के हवाले कर दिया गया। हालाँकि, केन्या की पुलिस ने अब तक इस आतंकी संगठन का नाम नहीं लिया है। इस हमले को स्थानीय लोगों के जमीन के विवाद से जोड़ कर भी देखा जा रहा है।

2013 में जो शॉपिंग मॉल हमला हुआ था, उसमें 67 लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी। जनवरी 2020 में ‘अल शबाब’ ने धमकाया था कि केन्या कभी सुरक्षित नहीं रहेगा। पर्यटकों और यहाँ यहाँ वाले अमेरिकी नागरिकों को खास कर के धमकाया गया था। ताज़ा घटना में सारे मृतक ईसाई हैं। लमाउ में एक अमेरिकी बेस पर हमला कर के तीन अमेरिकियों को इस आतंकी संगठन ने मार दिया था। 2014 में केन्या में हुए एक हमले में 100 लोग मार डाले गए थे।

ताज़ा घटना में सबसे पहले एक नारियल तेल विक्रेता का अपहरण किया गया। इसके बाद उनके ही एक पेड़ से उन्हें नीचे गिरा दिया गया। एक व्यक्ति के पास फोन कॉल आया कि ईसाईयों को एक दुकान में कैद कर के रखा गया है। बाद में उस दुकान को भी जला दिया गया। एक अन्य व्यक्ति को आतंकियों ने इस्लाम में वापस आने के लिए धमकाया। ये लोग 7 साल पहले ईसाई बने थे। उसका गला रेत कर घर जला दिया गया। ईसाईयों की संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया गया।

‘मैं हैरान थी, भगवान उसका भला करें’: सिद्धार्थ के माफीनामे पर बोलीं सायना नेहवाल- महिलाओं को ऐसे नहीं कर सकते टारगेट

भारतीय बैडमिंटन स्टार सायना नेहवाल (Saina Nehwal) ने एक्टर सिद्धार्थ सूर्यनारायण (Siddharth Suryanarayan) के माफी माँगने के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, सायना ने कहा, “उन्होंने (सिद्धार्थ) पहले मेरे बारे में कुछ कहा और फिर माफी माँगी। मुझे यह भी नहीं पता कि यह मामला इतना वायरल क्यों हो गया? ट्विटर पर खुद को ट्रेंड करते देख मैं हैरान रह गई। खुशी है कि सिद्धार्थ ने माफी माँगी।”

अभिनेता सिद्धार्थ के माफी वाले ट्वीट पर बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल ने आगे कहा, “आपको महिलाओं को इस तरह से टारगेट नहीं करना चाहिए। यह ठीक है। मैं इससे परेशान नहीं हूँ। मैं अपनी जगह खुश हूँ। भगवान उनका भला करें।”

‘रंग दे बसंती’ फेम एक्टर सिद्धार्थ (Siddharth) ने ट्विटर पर चौतरफा घिरने के बाद मंगलवार देर रात (11 जनवरी 2022) को लंबा-चौड़ा पोस्ट लिखकर बैडमिंटन खिलाड़ी से आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए माफी माँगी थी।

दरअसल, सायना ने पिछले दिनों पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर ट्विटर पर एक पोस्ट लिखा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धार्थ ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसको लेकर सोशल मीडिया यूजर्स ने खिलाड़ी के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करते हुए एक्टर का ट्विटर अकाउंट ब्लॉक करने की माँग की थी।

हालाँकि, चौतरफा आलोचना झेलने के बाद आखिरकार सिद्धार्थ को अपनी अभद्र भाषा के लिए सार्वजनिक मंच पर माफी माँगनी पड़ी। उन्होंने अपने माफीनामे में लिखा, “डियर सायना मैं अपने भद्दे मजाक के लिए आपसे माफी माँगना चाहता हूँ, जो मैंने आपके ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा था। मैं आपसे कई बातों को लेकर असहमत हो सकता हूँ, लेकिन आवेश में मैंने जिन शब्दों और भाषा का प्रयोग किया, वह किसी भी तरह से जायज नहीं था। मैं जानता हूँ कि मुझमें इससे ज्यादा शालीनता है।” यही नहीं उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि वह हमेशा से नारीवाद के समर्थक रहे हैं। उनका एक महिला पर इस तरह से कटाक्ष करने का कोई इरादा नहीं था।

बता दें कि सिद्धार्थ द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर ‘राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)’ ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि सिद्धार्थ ने अक्सर महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने बताया कि इस मामले में कार्रवाई के लिए NCW तमिलनाडु के DGP (पुलिस महानिरीक्षक) से संपर्क में है। ‘टाइम्स नाउ’ की महिला एंकर के खिलाफ अभिनेता के ट्वीट को भी NCW ने आपत्तिजनक, अनैतिक और महिलाओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाला बताया है।