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सुप्रीम कोर्ट में PM मोदी की सुरक्षा में हुई चूक का मामला: पंजाब के मुख्य सचिव और DGP को सस्पेंड करने की माँग, CM चन्नी ने भी गठित की जाँच समिति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना के समक्ष इस मामले को लेकर याचिका दायर की गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने अपनी याचिका में चीफ जस्टिस से बुधवार (5 जनवरी 2022) को पंजाब में पीएम मोदी का काफिले को रोके जाने और उनके वापस लौटने के मामले की न्यायिक जाँच कराने की गुजारिश की है।

वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने अपनी याचिका में कहा है कि इस तरह की घटना भविष्य में ना हो, ये सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने मनिंदर सिंह से कहा है कि वो केंद्र और पंजाब सरकार को भी इस याचिका की एक-एक कॉपी उपलब्ध करा दें। शुक्रवार (7 जनवरी 2021) को सुप्रीम कोर्ट इस पर सुनवाई करेगी।

याचिका में जाँच के अलावा पंजाब के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी और पुलिस महानिदेशक (DGP) सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को निलंबित करने की भी माँग की गई है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में कहा गया कि सुरक्षा चूक स्पष्ट रूप से जानबूझकर की गई थी। इसके लिए पंजाब में कॉन्ग्रेस सरकार को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि पंजाब में राष्ट्रीय सुरक्षा और वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था द्वारा निभाई गई भूमिका गंभीर सवाल उठाती है। 

इधर पंजाब सरकार ने पीएम मोदी के फिरोजपुर दौरे के दौरान हुई चूक की जाँच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन की है। समिति में रिटायर्ड जज मेहताब सिंह गिल और प्रमुख सचिव (गृह मामले एवं न्याय) अनुराग वर्मा शामिल होंगे। कमेटी 3 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

हालाँकि, पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी बुधवार को ही साफ कह चुके हैं कि घटनाक्रम में पीएम की सुरक्षा में चूक जैसी कोई बात नहीं हुई है। वहीं उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सीएम चन्नी के बयान के उलट माना कि सचमुच सुरक्षा में चूक हुई है। इस दौरान सीएम चन्नी बार-बार अपना बयान बदलते रहे

गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार को हवाई मार्ग से बठिंडा पहुँचे थे, जहाँ से उन्हें हेलिकॉप्टर से हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक जाना था। बारिश और खराब विजिबिलिटी के चलते बाद में उनका सड़क मार्ग से जाना तय हुआ। प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से हुसैनीवाला स्थित राष्ट्रीय शहीद स्मारक पर जाने के लिए निकले तो उनके काफिले को एक फ्लाईओवर पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क ब्लॉक कर रोक लिया। प्रधानमंत्री 15-20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फँसे रहे। इसके बाद पीएम मोदी बठिंडा एयरपोर्ट और वहाँ से दिल्ली वापस लौट आए।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसे पीएम की सुरक्षा में गंभीर चूक मानते हुए पंजाब सरकार से रिपोर्ट माँगी है। यह घटना इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि जिस जगह यह घटना हुई, वह पाकिस्तान की सीमा से सिर्फ 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहाँ से अक्सर बम बरामद होते रहते हैं।

कंगना रनौत ने पंजाब में PM मोदी की सुरक्षा में चूक को बताया शर्मनाक और लोकतंत्र पर हमला, एक्ट्रेस भी हो चुकी हैं उपद्रवी भीड़ का शिकार

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक की घटना को बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने शर्मनाक और लोकतंत्र पर हमला बताया है। एक्ट्रेस ने इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा, “पंजाब में जो हुआ, वो शर्मनाक है। आदरणीय प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए नेता/प्रतिनिधि और 140 करोड़ जनता की आवाज हैं। उन पर हमले का मतलब है, देश के हर नागरिक पर हमला। यह हमारे लोकतंत्र पर भी हमला है। पंजाब आतंकी गतिविधियों का अड्डा बनता जा रहा है। अगर हम इसे अभी नहीं रोकते हैं तो देश को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” इसके साथ ही कंगना ने हैशटैग लिखा- “भारत स्टैंड विद मोदी जी।”

कंगना रनौत की इंस्टाग्राम स्टोरी

इस घटना पर अभिनेता अनुपम खेर ने भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “आज भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिक्युरिटी के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, वो पंजाब पुलिस और सरकार के लिए अफ़सोसजनक और शर्मनाक था। इस मामले में देश के प्रधानमंत्री के प्रति कुछ लोगों की नफरत उनकी कायरता की निशानी है। पर याद रखिए- जाको राखे साइँया, मार सके ना कोय!”

वहीं, बीजेपी के पूर्व सांसद और अभिनेता परेश रावल ने ट्विटर पर लिखा, “पीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक पूरी तरह अस्वीकार्य, अक्षम्य और हैरान करने वाली है। यह कहने की जरूरत नहीं है, लेकिन वो और ताकतवर, लोकप्रिय और कृतसंकल्प होकर उभरेंगे।”

फिल्ममेकर अशोक पंडित ने इस चूक के लिए कॉन्ग्रेस को निशाने पर लेते हुए लिखा, “कॉन्ग्रेस ने आतंकवाद को समर्थन देने की वजह से दो प्रधानमंत्री खो दिए, फिर भी सबक नहीं सीखा। पंजाब दुखद रूप से उन्हीं स्थितियों की ओर बढ़ रहा है।” 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (5 जनवरी 2022) को पंजाब के फिरोजपुर में एक रैली को संबोधित करने जा रहे थे, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक के चलते इसे रद्द कर दिया गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, पंजाब के हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से करीब 30 किलोमीटर दूर जब प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर पहुँचा तो पाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क को ब्लॉक कर दिया था। करीब 15-20 मिनट तक प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर फँसे रहे। फिर वापस आ गए।

बता दें कि कुछ वक्त पहले कंगना रनौत भी इन ‘प्रदर्शनकारियों’ की भीड़ का शिकार हो चुकी है। पंजाब के कीरतपुर साहिब के बूंगा साहिब में किसानों ने कंगना की कार को घेर कर हमला कर दिया था। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी थी और लाइव वीडियो भी दिखाया था। उन्होंने बताया था कि मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस होने के बावजूद तथाकथित किसानों ने उनकी गाड़ी को रोका और हमला किया।

PM मोदी की सुरक्षा में चूक या साजिश? जाम लगाने वालों को पहले से थी रूट की खबर, पंजाब पुलिस ने ‘Blue Book’ का नहीं किया पालन

पंजाब के फिरोजपुर जिले के पियारियाना गाँव में रैली के लिए जाने के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा में भारी चूक हुई। वे 20 मिनट तक फँसे रहे और उन्हें वापस लौटना पड़ा। अब बताया जा रहा है कि जिस पंजाब पुलिस को कंधों पर प्रधानमंत्री की सुरक्षा जिम्मेदारी थी, उसने ही उनका रूट लीक किया था। इसके अलावा पंजाब पुलिस ने ‘ब्लू बुक’ का पालन नहीं किया और पीएम की यात्रा के लिए आकस्मिक मार्ग तैयार नहीं किया था। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इसकी वजह से ही प्रधानमंत्री की यात्रा की दौरान पंजाब में ऐसी स्थिति पैदा हुई।

मालूम हो कि किसी दौरे पर एसपीजी के जवान पीएम की सुरक्षा में करीब रहते हैं, जबकि दूसरे सुरक्षा इंतजाम राज्य सरकार द्वारा किए जाते हैं। किसी भी तरह के अचानक घटनाक्रम के मामले में राज्य की पुलिस एसपीजी को जानकारी देती है और वीआईपी मूवमेंट उसी के अनुसार बदल दिया जाता है।

इसे विडंबना ही कहेंगे कि प्रदर्शनकारी खुद कह रहे हैं कि उन्हें पुलिस के माध्यम से पीएम मोदी के हर मूवमेंट की जानकारी थी, जबकि पंजाब पुलिस का कहना था कि उनको जानकारी ही नहीं थी कि प्रदर्शनकारियों ने फ्लाईओवर जाम कर रखा है। बता दें कि कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि पंजाब पुलिस उन प्रदर्शनकारियों के साथ चाय की चुस्की ले रही थी, जिन्होंने प्रधानमंत्री के काफिले को 20 मिनट तक रोके रखा था।   

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले को रोकने की जिम्मेदारी लेने वाले संगठन भारतीय किसान संघ (क्रांतिकारी) प्रमुख सुरजीत सिंह फूल ने टाइम्स नॉउ से बात करते हुए दावा किया कि उन्हें पुलिस ने बताया था कि प्रधानमंत्री इसी रास्ते से आ रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने रास्ता खाली नहीं किया। उन्होंने कहा, “दोपहर करीब 2 बजे हमें पता चला कि पीएम बठिंडा से सड़क मार्ग से आ रहे हैं। रैली के पास एक बड़ा हेलीपैड था। पुलिस ने कहा कि वह सड़क मार्ग से आ रहे हैं तो हमने सोचा कि पुलिस झूठ बोल रही है और पीएम हवाई मार्ग से आ रहे होंगे। इसलिए हमने रास्ता नहीं छोड़ा। हमने कहा कि आप झूठ बोल रहे हैं।” फूल ने कहा कि पंजाब से 12 या 13 संगठन थे जिन्होंने विरोध करने का फैसला किया था।

बीकेयू (क्रांतिकारी) के महासचिव बलदेव जीरा ने भी इस बात को स्वीकार किया कि फिरोजपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) हरमनदीप सिंह ने प्रदर्शनकारियों को बताया था कि पीएम का काफिला उस रास्ते से आने वाला है, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उस पर विश्वास नहीं किया। उन्हें लगा कि यह उन्हें वहाँ से हटाने की पुलिस की चाल है, ताकि भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक रैली में पहुँच सकें।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के विरोध में किसानों के एक समूह ने पियारेना गाँव के पास फ्लाईओवर को जाम कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने काफिले को आते देखा, तो वे सड़कों पर बैठ गए और नारेबाजी करने लगे। बताया जा रहा कि प्रदर्शनकारी हरे और लाल झंडे लिए हुए थे, जो कि बीकेयू क्रांतिकारी के झंडे हैं। बीकेयू क्रांतिकारी को अति वामपंथी किसान संघ माना जाता है। 2009 में यूनियन के अध्यक्ष सुरजीत सिंह फूल को यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया और पाँच महीने तक जेल में रखा गया। उन्हें कथित तौर पर माओवादी संगठनों से संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

‘इस थूक में जान है’: जावेद हबीब ने महिला के बालों में ​थूका, Video वायरल होने पर सामने आई पीड़िता, बताया- मंच पर बुलाकर बदतमीजी की

सोशल मीडिया पर हेयर एक्सपर्ट जावेद हबीब का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वो एक महिला के बालों में थूकते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद कई यूजर जावेद हबीब के बॉयकॉट की माँग कर रहे हैं।

वायरल वीडियो में हबीब कुर्सी पर बैठी एक महिला के बालों को सेट कर रहे हैं। इस दौरान वो महिला के बालों को गंदा बताते हुए शैम्पू करने को बोल रहे। इसी क्रम में वो आगे पानी कम होने की बात करते हुए महिला के बालों पर थूक देते हैं। साथ ही कहते हैं, “इस थूक में जान है।” इस दौरान वहाँ मौजूद तमाम लोग तालियाँ बजाते हुए हँसते दिखाई देते हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद अब वो महिला सामने आई है, जिसके बालों में थूका गया था। महिला ने अपना नाम पूजा गुप्ता बताया है। उसने बताया है, “मैं बड़ौत की रहने वाली हूँ। मैं एक पॉर्लर चलाती हूँ। मैं जावेद हबीब के सेमिनार में गई थी। उन्होंने ही मुझे मंच पर मुझे बाल कटवाने के लिए बुलवाया था। इस दौरान उन्होंने मेरे साथ बदतमीजी की। यह दिखाने की कोशिश की कि अगर पानी न हो तो थूक से ही बाल काट सकते हो। मैं अपने गली के नाई से बाल कटवा लूँगी पर जावेद हबीब से कभी नहीं।”

शेफाली वैद्य ने इस वीडियो को शेयर करते हुए कहा है, “जिस महिला पर थूका गया वो हँस रही और बाकी सभी ताली बजा रहे हैं। यह घृणित है।”

अजमेर के डिप्टी मेयर नीरज जैन ने भी जावेद हबीब के बहिष्कार की माँग की है। साथ ही उन्होंने इस हरकत को ‘थूक जिहाद’ बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वीडियो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का है। इसी सप्ताह जावेद हबीब ने होटल किंग विला में आयोजित वर्कशॉप में डेमोस्ट्रेशन दिया था। यह होटल हाइवे पर स्थित है। इस मामले में एसएसपी मुजफ्फरनगर का कहना है कि वायरल वीडियो की जाँच करवाई जा रही है। पुष्टि होने पर नियमनुसार कार्रवाई की जाएगी।

‘कानून से बढ़कर कोई नहीं’: वर्ल्ड नंबर 1-9 बार ऑस्ट्रेलियन ओपन जीता, फिर भी ऑस्ट्रेलिया ने नोवाक जोकोविच को एयरपोर्ट से लौटाया

टेनिस खिलाडी नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) को ऑस्ट्रेलिया (Australia) में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई है। ऐसा उनके फुली वैक्सीनेटेड (Corona Vaccine) नहीं होने के कारण किया गया है। उनके वीज़ा को भी रद्द कर दिया गया है। यह जानकारी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन (Scott Morrison) ने 6 जनवरी (गुरुवार) को दी। ऑस्ट्रेलियन ओपन (Australian Open) में हिस्सा लेने के लिए पहुँचे जोकोविच को मेलबोर्न एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया था।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने कहा है, “जोकोविच का वीज़ा (Visa) कैंसिल कर दिया है। हमारे देश के अंदर जो कानून है वह लागू होगा। कानून से बढ़कर कोई भी नहीं है। इन्ही कड़े कानूनों से ही हमारे देश में कोरोना काल में दुनिया में सबसे कम मृत्यु दर रही थ। हम कानूनों का उललंघन नहीं होने देंगे।?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑस्ट्रेलियन ओपन के लिए कुल मिला कर लगभग 3000 खिलाडियों और स्टाफ ने आवेदन किया था। इसमें से 26 लोगों ने वैक्सीन नहीं लगवाई थी। जोकोविच पर वैक्सीन संबंधी झूठे कागज़ात पेश करने का भी आरोप लगा है। ऐसे में उन्हें लम्बे समय तक एयरपोर्ट पर रोका गया। इस पूरे घटनाक्रम पर जोकोविच ने एयरपोर्ट से ट्वीट भी किया है। यह भी बताया जा रहा है कि ऑस्ट्रेलियाई सरकार के फैसले को वे अदालत में चुनौती दे सकते हैं। यह खबर भी आई थी कि ऑस्ट्रेलियन ओपन में हिस्सा लेने के लिए जोकोविच को वैक्सीनेशन नियमों में छूट दी गई थी।

गौरतलब है कि नोवाक जोकोविच 9 बार के ऑस्ट्रेलियन ओपन चैम्पियनशिप के विजेता हैं। उन्हें बुधवार को ऑस्ट्रेलियन बॉर्डर फ़ोर्स ने एयरपोर्ट पर रोक लिया था। इस दौरान स्टेट विक्टोरिया गर्वनमेंट से सम्पर्क किया गया। आखिरकार लगभग 10 घंटे तक चली लम्बी जद्दोजहद के बाद उनको वापस भेजने का फैसला किया गया।

‘मैं हूँ बुल्ली बाई का मास्टरमाइंड, बेगुनाहों को परेशान करना बंद करे मुंबई पुलिस’: ट्विटर यूजर का दावा, Bulli Bai 2.0 लाने की धमकी

बुल्ली बाई का मास्टरमाइंड कौन है? क्या इस मामले में मुंबई पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ा है वे निर्दोष हैं? एक ट्विटर यूजर के दावे ने ये सवाल खड़े कर दिए हैं। जीआईवाईयू44 (@giyu44) नामक यूजर ने ट्वीट कर खुद को मुस्लिम महिलाओं की नीलामी वाले इस ऐप का मास्टरमाइंड बताया है। कहा है कि मुंबई पुलिस बेगुनाहों को परेशान करना बंद करे। ऐसा नहीं होने पर Bulli Bai 2.0 लॉन्च करने की धमकी भी दी है।

दावा करने वाला युवक नेपाल का रहने वाला बताया जा रहा है। उसने 5 जनवरी (बुधवार) को यह ट्वीट किया। एक लिंक साझा करते हुए इस ऐप को बनाने के लिए इस्तेमाल किए गया यूजरनेम, पासवर्ड और सोर्स कोड साझा करने की भी पेशकश की है।

@giyu44 ने महाराष्ट्र के गृहराज्य मंत्री (शहरी) सतेज डी पाटिल के ट्वीट को कोट करते हुए यह दावा किया है। पाटिल ने अपने ट्वीट में मुंबई पुलिस (Mumbai Police) द्वारा बुल्ली बाई एप मामले में 21 वर्षीय युवक की बेंगलुरु से गिरफ़्तारी की जानकारी दी थी।

यूजर ने उसको निर्दोष बताते हुए कहा है, “मैंने ही अपने दोस्तों स्वाति और विशाल के ई-मेल अकाउंट का प्रयोग किया था। उन दोनों को तो पता भी नहीं है कि ऐसा कैसे हुआ। उन्हें मेरी वजह से गिरफ्तार किया गया है। अगर कोई मेरे लिए फ्लाइट का टिकट इंतज़ाम कर दे तो मैं खुद को कानून के हवाले करने को तैयार हूँ।”

गौरतलब है कि इस मामले में अभी तक 3 गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं। मास्टरमाइंड के तौर पर उत्तराखंड की 18 वर्षीया श्वेता को बताया जा रहा है। उसके साथी 20 वर्षीय मयंक रावत को भी आरोपित किया गया है। पहली गिरफ्तारी 21 वर्षीय विशाल झा की थी, जिसे बेंगलरू से पकड़ा गया था।

‘देख क्या रहे हो, गोली चलाओ’: बेअंत के कहते ही इंदिरा गाँधी पर सतवंत ने खाली कर दी पूरी कार्बाइन… केहर के साथ फाँसी पर लटकाया गया

6 जनवरी 1989 वह तारीख है, जिस दिन सुबह 6 बजे दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह (हत्या की साजिश में शामिल) को फाँसी दी गई थी। तकरीबन 4 साल पहले सतवंत सिंह और बेअंत सिंह इंदिरा गाँधी के सुरक्षाकर्मी थे। इन दोनों ने 31 अक्टूबर, 1984 को इंदिरा को उनके सरकारी आवास पर गोलियों से भून डाला था। इस साजिश में केहर सिंह भी शामिल था। बेअंत सिंह को उसी वक्त मौके पर मौजूद अन्य सुरक्षाकर्मियों ने मार गिराया था। आइए आपको बताते हैं कि 37 साल पहले यानी 31 अक्टूबर 1984 को कैसे इंदिरा गाँधी की हत्या की गई थी?

30 अक्टूबर 1984 के दिन इंदिरा गाँधी ओडिशा में चुनाव प्रचार करने के बाद दिल्ली पहुँची थी। ओडिशा से लौटने के बाद ​इंदिरा को यही सलाह दी गई थी कि वह लोगों से ना मिलें, लेकिन उस दिन एक आयरिश डॉक्यूमेंट्री मेकर पीटर उस्तीनोव से उनकी मुलाकात तय थी। पीटर पूर्व प्रधानमंत्री पर एक डॉक्यूमेंट्री बना रहे थे। इसके लिए इंदिरा पीटर को इंटरव्यू देने की तैयारी कर रही थीं। सुबह तकरीबन नौ बजे इंटरव्यू की तैयारियाँ पूरी हो चुकी थी।

इसके बाद वह (इंदिरा) सफदरजंग रोड को अकबर रोड से जोड़ने वाले गेट के पास पहुँची, जहाँ दिल्ली पुलिस की सिक्योरिटी विंग के कॉन्स्टेबल बेअंत सिंह की तैनाती थी और बगल में सतवंत सिंह हाथों में ऑटोमैटिक कार्बाइन गन लिए खड़ा था। इंदिरा गाँधी जैसे ही उनके पास पहुँची उन्हें नमस्ते की आवाज आई और कुछ पलों में गोली चलने की आवाज। बेअंत सिंह ने अपनी सर्विस रिवाल्वर से उन पर गोली चला दी। किसी को कुछ समझ नहीं आया। बिना देर किए बेअंत सिंह ने दो और गोलियाँ इंदिरा के पेट में मार दी। 3 गोलियाँ लगते ही इंदिरा गाँधी जमीन पर गिर गईं और बोली तुम लोग ये क्या कर रहे हो?

इसके बाद बेअंत सिंह ने साथ खड़े सतवंत सिंह से चिल्लाकर कहा- देख क्या रहे हो, गोली चलाओ। यह सुनते ही सतवंत ने अपनी पूरी कार्बाइन इंदिरा और उन्हें बचाने दौड़े सब इंस्पेक्टर रामेश्वर दयाल पर खाली कर दी। उसने काफी देर तक ट्रिगर से हाथ नहीं उठाया। सतवंत सिंह इंदिरा के शरीर में कुल 30 गोलियाँ उतार चुका था। इस हादसे से कुछ देर पहले ही इंदिरा गाँधी और उनके निजी सचिव आर के धवन बातें कर रहे थे। वे इस हमले से बिल्कुल बेखबर थे। गोलियाँ चलाने के बाद बेअंत सिं​ह ने कहा कि हम अपना काम कर चुके हैं अब आप अपना काम करें, लेकिन वहाँ मौजूद आर के धवन के दिमाग में केवल एम्बुलेंस का ख्याल आया।

बेअंत सिंह को वहीं मौजूद एसीपी दिनेश चंद ने पकड़ लिया और पास में खड़ा हेड कॉन्स्टेबल डॉक्टर बुलाने के लिए दौड़ा। उधर इंटरव्यू के लिए बाहर इंतजार कर रहे पीटर ने गोलियों की आवाज सुनी, लेकिन वह वहीं बैठे इंतजार करते रहे।

इसके बाद इंदिरा को क्षत-विक्षत हालत में एम्स ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों की टीम उन्हें बचा नहीं पाई। 31 अक्टूबर 1984 को लगभग सवा दो बजे बजे इंदिरा गाँधी की मृत्यु का मेडिकल बुलेटिन जारी कर दिया गया। इसके बाद आनन-फानन में राजीव गाँधी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई, जिसके तुरंत बाद ही देश में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे, जिसमें हजारों सिखों की जान चली गई थी।

वहीं, प्रधानमंत्री आवास के सुरक्षा गार्डों ने दोनों हमलावरों को पकड़ लिया था। बेअंत सिंह भागने की कोशिश में सुरक्षा गार्डों की गोलियों से मारा गया। इसके बाद सतवंत सिंह और केहर सिंह को (बेअंत सिंह का रिश्तेदार) और बलबीर सिंह (जिस पर वीभत्स साजिश रचने का आरोप था) को भी पकड़ लिया गया था।

यह हाई-प्रोफाइल मामला हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुँचा। बचाव पक्ष की ओर से राम जेठमलानी, पी.एन. लेखी और आर.एस. सोढ़ी जैसे बड़े-बड़े वकील पेश हुए। इन वकीलों की दलीलों के कारण कई बार हत्यारों की फाँसी को टाला गया, यहाँ तक कि सबूतों के अभाव में बलबीर सिंह को बरी भी कर दिया गया था। इसके बाद सतवंत सिंह और केहर सिंह को फाँसी की सजा सुनाई जानी थी, लेकिन इन दोनों की फाँसी को भी कई बार टाला गया। आखिरकार, 6 जनवरी 1989 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद इंदिरा के हत्यारों को फाँसी दी गई।

21000 फीट ऊँची चोटी, 1500 फीट की दीवार, -50°C तापमान: जब Pak से पोस्ट छीन भारतीय जवानों ने उनके ही स्टोव पर बनाया चावल

वो 26 जून, 1987 का दिन था। स्थान – सियाचिन ग्लेसियर। भारत की सबसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में ‘जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री (JAK LI)’ के नायब सूबेदार बन्ना सिंह (Naib Subedar Bana Singh) ने खुद के कंधों पर एक जिम्मेदारी ली। ये जिम्मेदारी थी उस टास्क फोर्स में शामिल होना, जिसे पाकिस्तानी फ़ौज द्वारा कब्ज़ा में लिए गए ‘क़ाएद पोस्ट’ को खाली कराना था। 21,000 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर के माहौल में उन्होंने ये कारनामा कर दिखाया, वो भी तब तक तापमान -50 डिग्री सेल्सियस को छू रहा था।

इतना ही नहीं, लगातार बर्फीले तूफ़ान चल रहे थे और ऑक्सीजन की कमी के कारण खुद को ज़िंदा रखना ही एक बहुत बड़ी चुनौती थी। विजिबिलिटी काफी बुरी थी, अर्थात कुछ दिख नहीं रहा था। ऐसे में ‘JAK LI’ के 8 जवानों ने बर्फ से बनी 457 मीटर (1500 फ़ीट) ऊँची दीवार पर चढ़ कर इसे लाँघने का निर्णय लिया। इस ऊँचाई पर पहुँचने में वो कामयाब भी रहे और वहाँ स्थित दुश्मन की पोस्ट को ग्रेनेड्स की बमबारी से तबाह कर दिया। भारत के पराक्रमी जवानों ने अपनी बंदूकों में लगे धारदार हथियारों से ही कई पाकिस्तानी फौजियों को मौत के घाट उतार दिया।

कई पाकिस्तानी फौजी तो अपनी जान बचाने के लिए डर के मारे ऊपर से ही कूद गए। पाकिस्तान का बंकर भारतीय सेना ने तबाह कर दिया। अति प्रतिकूल परिस्थितियों में भी विशिष्ट वीरता और उत्कृष्ट नेतृत्व का प्रदर्शन करने के लिए नायब सूबेदार बन्ना सिंह को परमवीर चक्र से नवाजा गया। 1988 को गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर उन्हें पुरस्कृत किया गया। बन्ना सिंह मूल रूप से जम्मू के रणबीर सिंह पोरा तहसील में स्थित कदयाल गाँव के रहने वाले हैं।

उनके पिता का नाम अमर सिंह और माता का नाम भोला देवी था। उन्होंने बर्फ की दीवारों से घिरी सियाचिन ग्लेशियर पर पाकिस्तानी पोस्ट को जिस तरह से अति प्रतिकूल परिस्थितियों में भी तबाह किया, उससे उनकी बहादुरी का पता चलता है। भारत ने पाकिस्तान द्वारा नामित किए गए ‘क़ाएद पोस्ट’ की जगह उस चोटी का नाम नायब सूबेदार के सम्मान में ‘बन्ना पोस्ट’ रखा। उनका परिवार लुबाना सिख समुदाय से ताल्लुक रखता है, जहाँ उनके पिता किसान थे, उनके चाचा लोग पहले से भारतीय सेना में सेवा देते रहे थे।

उन्होंने 6 जनवरी, 1969 से ‘JAK LI’ की आठवीं बटालियन में सेवा देना शुरू किया। गुलमर्ग में 1948 में स्थापित किए गए ‘हाई ऑल्टीट्यूड वॉरफेयर स्कूल (HAWS)’ में उनका प्रशिक्षण संपन्न हुआ। 16 अक्टूबर, 1985 को बन्ना सिंह को हवलदार से नायब सूबेदार के रैंक पर प्रमोट किया गया। इसके दो साल बाद ही उन्होंने ‘ऑपरेशन राजीव’ में अपनी बहादुरी का परिचय दिया। 6 जनवरी, 1949 को जन्मे बन्ना सिंह 20 अक्टूबर, 1996 को मेजर के रूप में प्रमोट किए गए और 31 अक्टूबर, 2000 को वो कैप्टन के रूप में रिटायर हुए।

ऑपरेशन राजीव: सियाचिन ग्लेशियर और पाकिस्तान की फजीहत

सियाचिन ग्लेशियर पर स्थित ‘एक्चुअल ग्राउंड पोजीशन लाइन (AGPL)’ पर नियंत्रण के लिए जून 1986 में ‘ऑपरेशन राजीव’ को अंजाम दिया गया था। 1984 में ‘ऑपरेशन मेघदूत’ के दौरान भारत ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण लिया था, लेकिन अप्रैल 1986 में पाकिस्तान यहाँ आ जमा। वहाँ से वो पूरे सलतोरो-सियाचिन के पूरे क्षेत्र को देख सकते थे। कई बार भारत ने प्रयास किया, लेकिन अंत में बन्ना सिंह के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को वहाँ से उखाड़ फेंका। भारतीय सेना के सेकेंड लेफ्टिनेंट रहे राजीव पांडेय के नाम पर इसे ‘ऑपरेशन राजीव’ नाम दिया गया था। इसी चोटी पर नियंत्रण के प्रयास में वो बलिदान हुए थे।

26 जून, 2019 को इस युद्ध की बरसी पर भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा था, “असम्भव भी सम्भव… 26 जून, 1987 को नायब सूबेदार बन्ना सिंह ने सियाचिन में अपनी टोली के साथ सैकड़ों मीटर ऊँची खड़ी बर्फ की दीवार चढ़ कर पाकिस्तान के काएद चौकी पर कब्ज़ा किया। आज उसे बाना पोस्ट के नाम से जाना जाता है। पुरस्कृत परमवीर चक्र” बता दें कि ‘क़ाएद पोस्ट’ का नाम पाकिस्तान में ‘कायदे आजम’ नाम से जाने जाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना के सम्मान में रखा गया था। 1987 में जून ही नहीं, सितम्बर-अक्टूबर में ही एक और एनकाउंटर हुआ था। उसकी भी चर्चा कर लेते हैं।

उस चोटी का नाम है ‘बिलाफोंड ला (Bilafond La)’, जहाँ भारतीय सेना ने कई दिनों से डेरा डाला हुआ था। करीब 20,000 फ़ीट की ऊँचाई पर स्थित इस इलाके और इसके आसपास हमेशा बर्फ जमी रहती है। भारतीय सेना यहाँ से सियाचिन ग्लेशियर पर नजर रख रही थी और आशंका थी कि नीचे से पाकिस्तानी फ़ौज हमला करेगी। दूरबीन के जरिए वो पाकिस्तानियों पर नजर रख रहे थे, जिन्होंने पहले से कहीं ज्यादा हथियार और खाद्य सामग्रियाँ अपने साथ रखी हुई थीं।

भारतीय सैनिकों ने अनौपचारिक रूप से ही पाकिस्तानियों को सूचित किया कि वो किसी प्रकार का कोई हमला न करें। लेकिन, पाकिस्तानी फ़ौज ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और 23 सितम्बर, 1987 को उन्होंने भारतीय पोस्ट पर मोर्टार शेल्स से हमला बोलना शुरू कर दिया। चारों तरफ से घेर कर भारतीय सैनिकों पर मोर्टल शेल्स दागे जाने लगे। साथ ही वो लम्बी दूरी की मिसाइलें भी छोड़ रहे थे, इस उम्मीद में कि भारतीय पक्ष का ज्यादा से ज्यादा नुकसान हो।

लेकिन, भारतीय सैन्य अधिकारी और जवान इसके लिए पहले से तैयार थे। रात को पाकिस्तानियों ने भारतीय जवानों पर दावा बोलने की कोशिश की, लेकिन उनकी इस छापेमारी को अगली 2-3 रातों तक विफल किया जाता रहा। 25 सितम्बर को पाकिस्तानी फ़ौज पीछे हट गई। उस समय प्रकाशित ‘इंडिया टुडे’ की एक खबर के अनुसार, भारतीय सेना ने 150 पाकिस्तानी फौजियों को मार गिराने और इतनी ही संख्या में घायल किए जाने की जानकारी दी थी।

हालाँकि, इस युद्ध में सूत्रों के हवाले से 20 से 50 भारतीय जवानों के वीरगति को प्राप्त होने की बात कही गई थी। 1984 में ही पाकिस्तान ने सियाचिन ग्लेशियर पर स्थित रणनीतिक बिंदुओं पर अपने पोस्ट्स स्थापित कर लिए थे। एक भारतीय सैन्य अधिकारी के शब्दों में ही कहें तो ये पाकिस्तान के लिए ‘करो या मरो’ वाली स्थिति बन गई थी, जिसका परिणाम ‘मरो और कुछ नहीं करो’ के रूप में हुआ। पाकिस्तान के तत्कालीन रक्षा मंत्री राना नईम महमूद ने इस युद्ध में भारत के दावे को नकार दिया था और अपने फौजियों के मरने की खबर को निरर्थक करार दिया था।

लेकिन, पाकिस्तानी अख़बारों ने ही उनकी पोल खोल दी और जानकारी दी कि भारतीय सेना ने अब उस स्थान को भी अपने नियंत्रण में ले लिया है, जहाँ कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने दौरा किया था। पाकिस्तान ने जीत के दावे किए, लेकिन उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि किस क्षेत्र में कहाँ उन्हें फायदा हुआ है। सियाचिन के आसपास सभी पहाड़ियों पर भारतीय सेना ने डेरा डाल दिया था। ये ऐसी विषम जगह है, जहाँ सैनिक बन्दूक की गोली से ज्यादा गिरने से मरते हैं।

सितंबर-अक्टूबर में यहाँ धूप आने और बर्फ पिघलने के साथ ही पाकिस्तानियों की कारगुजारी शुरू हो जाती थी। 1984 में इसी को देखते हुए हैलिकॉप्टरों का इस्तेमाल कर के भारतीय सेना ने यहाँ निगरानी रखी हुई थी। पाकिस्तान को पता था कि उस समय भारत का श्रीलंका के साथ तनाव चल रहा है और तिब्बत में भी वो फँसा हुआ है, इसीलिए उसने हमले के लिए ये समय चुना। पाकिस्तान के राष्ट्रपति और जनरल रहे ज़ियाउल हक़ पर भी विपक्ष का दबाव था।

जून 1986 में सियाचिन में तिरंगा और बन्ना सिंह की बहादुरी और उनका जीवन

बन्ना सिंह ने खुद कई ग्रेनेड पाकिस्तानी फौजियों की तरफ फेंके थे। गोलीबारी के बीच वो फायरिंग करते हुए और ग्रेनेड फेंकते हुए आगे बढ़े थे। उन्होंने बंकर के दरवाजे पर ग्रेनेड फेंक कर इसे ध्वस्त किया और उसके साथ ही 6 पाकिस्तानी फौजी मारे गए। इसके बाद ‘हैंड तो हैंड’ लड़ाई हुई, जिसमें कई पाकिस्तानी फौजी खेत रहे। ये फौजी पाकिस्तानी इलीट सर्विसेज ग्रुप के ‘शाहीन कंपनी’ से ताल्लुक रखते थे। बाद में इसका पता चला। इसके बाद भारतीय सेना ने बंदूकों का निशाना पाकिस्तान की तरफ किया, जो इससे पहले दक्षिण की तरफ भारत की ओर मुड़ा हुआ था।

विजय हासिल करने के बाद भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी स्टोव का इस्तेमाल कर के ही चावल बनाया। पिछले 3 दिनों से उन्होंने कुछ खाया नहीं था और ये उन 3 दिनों में उनका पहला भोजन था। बाद में बन्ना सिंह ने बताया था कि भारतीय सैनिक भूख और युद्ध के कारण इतने बेचैन थे कि भाँगड़ा कर के जश्न मनाने लायक भी उनमें ताकत नहीं बची थी। उनका कहना था कि अगर थोड़ी भी सुस्ती हमने दिखाई होती, तो शायद पाकिस्तान वहाँ आने वाले कई वर्षों के लिए ‘क़ाएद’ पोस्ट पर बना रहता।

26 जून, 1987 के दिन भारत का झंडा सियाचिन ग्लेशियर पर फहरा रहा था। शाम के 5 बजे उन्होंने ये कारनामा कर दिखाया। कारगिल युद्ध के एक वर्ष बाद बन्ना सिंह भारतीय सेना में 32 वर्षों की सेवा के बाद रिटायर हुए। मेजर रामास्वामी परमेश्वरम के अलावा शांतिकाल में परमवीर चक्र पाने वाले वो अकेले सैनिक हैं। उनके बेटे राजिंदर सिंह ने भी वयस्क होते ही भारतीय सेना में शामिल होने का फैसला लिया। बन्ना सिंह को रिटायरमेंट के बाद जम्मू कश्मीर सरकार मात्र 166 रुपए का पेंशन देती थी, जिसका उन्होंने विरोध किया।

उन्होंने राज्य सरकार को कई बार याचिका भेजी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। तब पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने उन्हें 10 लाख रुपए का सम्मान देने की घोषणा की। उससे पहले 20 वर्षों तक उन्हें सिर्फ वादे मिलते रहे, लेकिन काम नहीं हुआ। तब मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस के गुलाम नबी आज़ाद से उनकी मुलाकात हुई, ‘J&K एक्स सर्विसमेन लीग’ ने उनकी बात उठाई, 4 सदस्यीय कमिटी बनी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। तब पंजाब में परमवीर चक्र विजेता को 12,500 रुपए, हरियाणा में 10,400 रुपए और हिमाचल प्रदेश में 10,000 रुपए मिलते थे।

जम्मू कश्मीर की सरकार ने उन्हें हिमाचल प्रदेश के बराबर पेंशन देने का वादा किया, लेकिन इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। अक्टूबर 2006 में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सामान राशि का ऐलान किया और मार्च 2007 में तत्कालीन पंजाब सीएम प्रकाश सिंह बादल के हाथों उन्हें ये सम्मान प्राप्त हुआ। बन्ना सिंह ने तब कहा था कि हमारी सरकार कैसे देश के लिए अपना जीवन दाँव पर लगाने वाले सैनिकों के साथ व्यवहार करती है, ये आप देख सकते हैं। उनका कहना था कि जम्मू कश्मीर सरकार को इस मामले में संवेदनशील बनना चाहिए।

‘मेरे ख्वाब में मुसलमान आ रहे हैं और कह रहे हैं कि सपा को वोट नहीं देंगे’: ओवैसी ने अखिलेश के ‘श्रीकृष्ण वाले सपने’ पर कसा तंज

विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने (Asaduddin Owaisi) बुधवार (5 जनवरी 2022) को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर निशाना साधा। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में आयोजित रैली में अखिलेश के भगवान कृष्ण के सपने में आने वाले बयान पर तंज कसते हुए ओवैसी ने कहा, “भाजपा राम को देखती है और अखिलेश कृष्ण को देखते हैं। अखिलेश यादव के सपने में आकर जब भगवान श्रीकृष्ण ने कह दिया कि तुम मुख्यमंत्री बन रहे हो तो फिर चुनाव की जरूरत क्या है? ऐसे ही कह दीजिए कि भगवान से मैंने कहा है कि अब मुझे मुख्यमंत्री बना दीजिए।”

इसके बाद औवेसी ने कहा, “मेरे ख्वाब में भी मुजफ्फरनगर के मुसलमान आ रहे हैं और कह रहे हैं कि अब सपा को वोट नहीं देंगे। वह मुझसे कह रहे हैं कि कोई तो हमारे हक की आवाज बुलंद करे। अब मजलिस के विधायक जीतकर विधानसभा में जाएँगे और विधानसभा की दीवारों पर नाराज तकदीर और आंबेडकर जिंदाबाद के नारों को बुलंद करेंगे।”

औवेसी यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “मैं आपके मान-सम्मान की लड़ाई लड़ रहा हूँ तो मुझे कहा जाता है कि ये वोट काटने आया है। मैं वोट काटने नहीं आया हूँ। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा मिलकर लडे़ फिर भी 15 सांसद जीते। आजम खान और शफीकुरर्हमान बर्क जीते तो वे अपनी ताकत की वजह से जीते। समाजवादी पार्टी की वजह से नहीं जीते। अगर तुम्हारे वोट एक साथ पड़ जाते तो सपा और बसपा वाले 15 ही सीट क्यों जीतते?”

उन्होंने मुसलमान को मिटाने की बात करने वालों को भीमराव आंबेडकर के संविधान का दुश्मन बताया। औवेसी ने कहा, “मैं मुसलमान हूँ और मुझे अपने वतन से प्यार है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल करते हुए ओवैसी ने कहा कि बताएँ कि जो धर्म संसद करके मुस्लिमों को मिटाने की बात कर रहे हैं, वे कौन लोग हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, बीते दिनों अखिलेश यादव ने AIMIM से गठबंधन करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि किसी ऐसे साथी को गठबंधन में नहीं लिया है जिस पर बहुत ज्यादा आरोप लग रहे हों।

सुबह विदेश में राहुल गाँधी की ‘सीक्रेट मीटिंग’ की बातें, दोपहर को PM मोदी की सुरक्षा में चूक: स्पीकर से बुलाई भीड़, कार तक पहुँचे उपद्रवी

एक तरफ कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी विदेश दौरे पर हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी पार्टी की सरकार पंजाब में आलोचना का शकर हो रही है। बठिंडा के पियारेणा स्थिर फ्लाईओवर पर जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले को 20 मिनट तक रोका रखा गया और उन्हें फिरोजपुर रैली रद्द कर के वापस लौटना पड़ा, उस पर बार-बार मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह का बयान बदलना और डिप्टी सीएम का उनसे उलट बयान देना कॉन्ग्रेस के खिलाफ जनता के आक्रोश का नया कारण बना है।

बुधवार (5 जनवरी, 2021) की सुबह पंजाब में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू ने बयान दिया कि वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ‘गुप्त बैठक’ के लिए विदेश गए हैं। 51 वर्षीय नेता के बारे में सिद्धू ने कहा कि लोगों को पता नहीं होता कि वो छुट्टियाँ मनाने विदेश गए हैं या फिर किसी गुप्त बैठकों में हिस्सा लेने। उन्होंने कहा था कि जब कोई और विदेश छुट्टियाँ मनाने जाता है तो कोई सवाल नहीं पूछे जाते। साथ ही जोड़ा कि राहुल गाँधी अपनी व्यक्तिगत राय रखने या कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ गुप्त बैठक के लिए भी विदेश गए हुए हो सकते हैं।

भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने सिद्धू के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा था कि क्या राहुल गाँधी चीन के हैंडलरों से मिलने के लिए विदेश गए हैं? उन्होंने राहुल गाँधी के विदेश दौरे के कारणों का खुलासा करने के लिए कॉन्ग्रेस से कहा। बता दें कि दीवाली 2021 के मौके पर जहाँ राहुल गाँधी लंदन में थे, अंग्रेजी नववर्ष 2022 के अवसर पर वो इटली निकल गए। 2014 में कॉन्ग्रेस की हार के बाद 2015 में राहुल गाँधी 55 दिनों के लिए विदेश गए थे, जो उस समय खासा मुद्दा बना था।

दूरदर्शन न्यूज़ के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने राहुल गाँधी के विदेश दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक को जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “सुबह सिद्धू का बयान आया था कि राहुल गाँधी सीक्रेट मीटिंग के लिए गए हैं। शाम तक पंजाब में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक की खबर आ गई।” साथ ही उन्होंने ‘PM Security Breach’ का टैग भी लगाया। ये भी सामने आया है कि पीएम मोदी की यात्रा का रूट पहले ही लीक हो गया था और स्पीकर पर आवाज़ लगा कर भीड़ जुटाई गई थी।

कई किसान संगठन इसमें शामिल थे। रैली में जा रहे भाजपा कार्यकर्ताओं को जबरन रोका जा रहा था। एक अन्य वीडियो में भीड़ हटाने की बजाए पुलिस प्रदर्शनकारियों के साथ ही चाय की चुस्की ले रही है। ट्रॉली लगा कर फ्लाईओवर को जाम किया गया। प्रधानमंत्री की कार से 8-10 किलोमीटर दूर बैठे प्रदर्शनकारी उनके कार तक भी पहुँच गए थे। हालात बिगड़ने की आशंका के चलते प्रधानमंत्री के सुरक्षा अधिकारियों ने वापस लौटने का फैसला लिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि 10 मिनट पहले तक वहाँ कोई जाम नहीं था, लेकिन पीएम के पहुँचते ही जानबूझ कर सड़क ब्लॉक करवाई गई।