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नवीन पटनायक सरकार ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से दिए ₹78.76 लाख

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित 13 संस्थानों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से राहत प्रदान की है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंगलवार (4 जनवरी 2021) को एक बयान जारी कर कहा, “ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी (MoC) को सहायता के रूप में मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) से 78.76 लाख रुपए की मंजूरी दी है।”

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, कार्यालय के अनुसार, यह सहायता राज्य के आठ जिलों में संचालित हो रहे मिशनरीज ऑफ चैरिटी (MoC) के संस्थानों के लिए है। इस निर्णय से 900 से अधिक कुष्ठ (Leprosariums) और अनाथालयों (Orphanages) को लाभ होगा।

गौरतलब है कि हाल ही में ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जिला कलेक्टरों को मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित संगठनों के साथ नियमित संपर्क में रहने को कहा था, जबकि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के नवीनीकरण को मंजूरी देने से गृह मंत्रालय ने इनकार कर दिया था।

इसके बाद भी आज नवीन पटनायक ने मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) के धन का इस्तेमाल मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित संगठनों को देने के लिए किया। बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में जानकारी दी थी कि विदेशी अभिदाय विनियमन कानून के तहत पंजीकरण के नवीनीकरण के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के आवेदन को 25 दिसंबर को कुछ पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करने के कारण खारिज कर दिया गया है।

झारखंड के सिमडेगा में दिल दहलाने वाली घटना: उन्मादी भीड़ ने पहले संजू प्रधान को बुरी तरह पीटा, उसके बाद जिंदा जलाया

झारखंड (Jharkhand) के सिमडेगा (Simdega) जिले से दिलदहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ गुस्साई भीड़ ने एक हिंदू युवक को जिंदा जलाकर मार डाला। मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) की इस दर्दनाक वारदात को मंगलवार (4 जनवरी 2021) को कोलेबिरा थाना के जनजातीय बहुल बेसराजारा गाँव में अंजाम दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मारे गए युवक का नाम संजू प्रधान है। वह इसी गाँव का रहने वाला है। उत्तेजित ग्रामीणों की भीड़ ने उसे जिंदा जलाने से पहले बुरी तरह पीटा था।

बताया जा रहा है कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हुई, लेकिन लाठी-डंडों से लैस ग्रामीणों ने उन्हें लगभग 1 घंटे तक गाँव में प्रवेश नहीं करने दिया। बाद में आसपास के तीन चार थानों से अतिरिक्त फोर्स भेजी गई, तब जाकर ग्रामीणों ने पुलिस को गाँव के अंदर जाने दिया।

पुलिस ने मौके पर पहुँचकर फायर ब्रिगेड की मदद से तुरंत आग बुझाई और युवक का अधजला शव बरामद किया। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। कोलेबिरा थाना प्रभारी ने बताया कि इस घटना को उत्तेजित भीड़ द्वारा अंजाम दिया गया है। पूरे इलाके में तनावपूर्ण माहौल है। मामले की जाँच के बाद एफआईआर दर्ज की जाएगी।

वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल से पेड़ों की कटाई करने के कारण गाँव के लोग संजू प्रधान से खासा नाराज थे। उन्होंने उसे कई बार पेड़ों की कटाई करने से रोका था, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं था। उन्होंने इस बारे में वन विभाग से भी उसकी शिकायत की थी। इसके बावजूद जब संजू पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मंगलवार दोपहर को कुछ ग्रामीणों ने संजू प्रधान को पकड़कर पहले उसे बुरी तरह पीटा, जिसके बाद वहाँ अन्य लोग भी जुट गए। फिर कुछ लोगों ने संजू को पकड़कर उसे आग के हवाले कर दिया।

बता दें कि झारखंड विधानसभा में दिसंबर 2021 में ही एंटी मॉब लिंचिंग बिल पारित किया गया है। इसके तहत ऐसी घटना को अंजाम देने का आरोप सिद्ध होने पर दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।

फाइव स्टार होटल में शिबानी के साथ शादी रचाएँगे फरहान अख्तर, लिव-इन में रह रहे: रिपोर्ट; फिल्म में ‘लव जिहाद’ प्रमोट करने के लगे थे आरोप

मीडिया में चर्चा है कि बॉलीवुड अभिनेता फरहान अख्तर 2022 में गायिका और एंकर शिबानी दांडेकर से शादी रचा सकते हैं। शिबानी दांडेकर भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई मूल की गायिका और एंकर हैं। दोनों एक-दूसरे के साथ अक्सर सोशल मीडिया पर अंतरंग तस्वीरें शेयर करते रहते हैं। अब मीडिया में अटकलें लगाई जा रही हैं कि दोनों इस साल शादी कर सकते हैं। कुछ महीनों पहले ही फरहान अख्तर ने शिबानी दांडेकर के साथ अपने रिश्ते को इंस्टाग्राम के माध्यम से सार्वजनिक किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि फरहान अख्तर और शिबानी दांडेकर मार्च 2022 में ही शादी करने की योजना बना रहे हैं। पहले एक भव्य समारोह में शादी की योजना थी, लेकिन ओमीक्रॉन कोरोना वेरिएंट के आने के बाद जिस तरह से संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं और राज्यों में पाबंदियाँ लग रही हैं, उन्होंने अब परिवार और करीबी रिश्तेदारों-दोस्तों की मौजूदगी में एक सादे समारोह में शादी की योजना बनाई है। दोनों साथ रह रहे हैं और महामारी के बीच वो अपनी शादी को और आगे नहीं खिसकाना चाहते।

कहा जा रहा है कि इन्हीं कारणों से उन्होंने इस शादी को एक बेहद ही प्राइवेट कार्यक्रम बनाने का निर्णय लिया है। जल्द ही इस बारे में सोशल मीडिया पर आधिकारिक घोषणा की जा सकती है। रिपोर्ट में ये भी है कि दोनों ने एक फाइव स्टार होटल बुक करने के साथ-साथ अपने शादी के कपड़े भी चुन लिए थे। दोनों इस दौरान सब्यसाची द्वारा डिजाइन किए गए आउटफिट्स पहनेंगे। कुछ दिनों पहले ये दोनों अनुष्का दांडेकर के घर क्रिसमस सेलिब्रेशन में दिखे थे। हाल ही में उन्होंने लंदन में पार्टी भी की है।

हाल ही में फरहान अख्तर पर ‘तूफ़ान’ फिल्म के जरिए ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने के आरोप लगे थे। फरहान अख्तर को CAA विरोधी प्रदर्शनों में भी देखा गया था, जबकि उन्हें इस कानून का एबीसी तक पता नहीं था। उनका कहना था कि इतने लोग प्रदर्शन कर रहे हैं तो वो भी कर रहे हैं। फिल्म में अभिनेता का नाम होता है ‘अज़ीज़ अली’ और उसके साथ जो अभिनेत्री होती है, उसका नाम होता है ‘अनन्य प्रभु’। इसके अलावा उन्होंने ट्विटर के माध्यम से एक झूठ फैलाया था कि CAA और NRC लागू होने के बाद आदिवासियों, दलितों और महिलाओं को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।

इधर ओमीक्रॉन से परेशान दुनिया, उधर चीन में तैयार हो गया ‘नया वुहान’: चीनी सरकारी मीडिया ने भी कबूला – स्थिति वैसे ही बद्तर

ओमीक्रॉन और फ्लोरोना पर चर्चा के बीच चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने स्वीकार किया है कि वहाँ के शियान (Xi’an) शहर में फिर से वुहान जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। ‘चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कण्ट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC)’ के पूर्व प्रमुख महामारी विशेषज्ञ ने कहा है कि वुहान में हुए लॉकडाउन के बाद हाल ही में शियान शहर में उपजी परिस्थिति सबसे बदतर है। शियान कोरोना के डेल्टा वेरिएंट से जूझ रहे हैं। ये वुहान में मिले ओरिजिनल स्ट्रेन से कई गुना ज्यादा तेज़ी से फैलता है।

खुद ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने कबूल किया है कि शियान अब चीन का दूसरा वुहान बन रहा है। बता दें कि ये शहर चीन के उत्तर-पश्चिमी प्रांत शांक्सी (Shaanxi) की राजधानी है, जहाँ पिछले दो सप्ताह से लॉकडाउन लगा हुआ है और वहाँ की 13 लाख की जनसंख्या के लिए क्वारंटाइन सिस्टम विकसित करने में पसीने छूट रहे हैं। ‘नुक्लेइक एसिड टेस्टिंग’ के लिए बड़े पैमाने पर व्यवस्था की गई है। मंगलवार (4 जनवरी, 2022) को भी यहाँ कोरोना के 95 नए मामले सामने आए हैं।

हालाँकि, ‘ग्लोबल टाइम्स’ स्थानीय प्रशासन के हवाले से दावा कर रहा है कि कम्युनिटी ट्रांसमिशन को रोक लिया गया है और नए मामलों का अधिकतर क्वारंटाइन हुए लोगों में ही मिल रहा है, बाहर रह रहे लोगों में नहीं। 1700 कोरोना के मामलों में से यहाँ 195 सिर्फ शैक्षणिक संस्थानों में मिले हैं। पाबंदियों के कारण स्थानीय लोग रोजमर्रा के जरूरत की चीजों की कमी से जूझ रहे हैं। चीन के विशेषज्ञ कह रहे हैं कि पूरा देश शियान का सपोर्ट करेगा तो शुरुआती दौर में इससे उबरने में मदद मिलेगी।

उत्तर-पश्चिमी चीन के सबसे बड़े शहर में 387 क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। बाहर से सप्लाइज मँगाने की जरूरत पड़ रही है। कई बड़ी कंपनियों को वित्तीय मदद के साथ-साथ सब्जियों और माँस की सप्लाई के लिए मैदान में उतरना पड़ा है। 2020 में वुहान में शुरुआती दौर में उपजी स्थिति को याद करते हुए लोग ऑनलाइन मदद माँग रहे हैं। लोग स्थानीय प्रशासन व व्यवस्था की आलोचना कर रहे हैं। सरकार की मदद काफी देर से पहुँच रही है, जिससे लोगों में गुस्सा है।

‘मेरे बच्चे ईसाई बन गए हैं, वो मेरा अंतिम संस्कार करने के योग्य नहीं’: तमिलनाडु में 85 वर्षीय बुजुर्ग ने मंदिर को दान किया अपना 2 करोड़ का घर

तमिलनाडु के कांचीपुरम में रहने वाले एक हिंदू व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपनाने वाले अपने बच्चों से तंग आकर अपना 2 करोड़ का घर दान करने का फैसला किया है। 85 वर्षीय कांचीपुरम निवासी वेलायथम (Velayatham) को डर सता रहा है कि उनकी दोनों बेटियाँ और एक बेटा हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार भी नहीं करेंगे। इसलिए उन्होंने साहसिक कदम उठाते हुए अपने कुल देवता कुमारकोट्टम मुरुगन मंदिर (Kumarakottam Murugan Temple) को अपना घर दान करने का फैसला किया है।

रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार में स्वास्थ्य विभाग में कार्य करने वाले वेलायथम अब रिटायर्ड हो चुके हैं। उनके पास 2,680 वर्ग फुट का घर है, जिसकी कीमत 2 करोड़ रुपए है। एक स्थानीय तमिल दैनिक समाचार पत्र दिनमलार (Dinamalar) से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वह बेहद दुखी हुए। वेलायुधम ने अफसोस जताते हुए कहा कि उन्होंने इस घर को अपनी मेहनत की कमाई से बनाया है, लेकिन उनके तीनों बच्चों ने ईसाई से शादी कर ली है और उस धर्म में कन्वर्ट हो गए हैं। इसलिए हिंदू परंपरा के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार करने वाला परिवार में अब कोई नहीं बचा है।

उन्होंने कहा, “एक हिंदू होने के नाते मेरा अंतिम संस्कार हिंदू परंपरा के अनुसार होना चाहिए। मेरे तीनों बच्चों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। इसलिए, वे हिंदू परंपरा के अनुसार मेरा अंतिम संस्कार करने योग्य नहीं हैं।”

अपने परिवार से अलग-थलग पड़े वेलयथम ने आगे कहा, “अगर मैं ईसाई बनने के बाद मर भी जाऊँ, तो भी वे मेरा अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। इसलिए मैं उन लोगों को अपनी संपत्ति देने का इच्छकु नहीं हूँ, जो ईसाई धर्म में कन्वर्ट हो गए हैं।” फिलहाल उनके दो बच्चे उनके घर के एक हिस्से में रहते हैं। उनके लिए उन्होंने कहा, “वे यहाँ तब तक रह सकते हैं, जब तक मैं और मेरी पत्नी रहते हैं, लेकिन जैसे ही हम मर जाएँगे मंदिर प्रशासन इस घर को हासिल कर लेगा।”

वेलायथम के अनुसार, उन्होंने सेल डीड HRCE मंत्री को सौंप दिया है। दंपति के निधन के बाद उनका घर मंदिर प्रशासन द्वारा अपने कब्जे में ले लिया जाएगा। लंबे समय से धर्म परिवर्तन को लेकर पारिवारिक विवाद की खबरें आती रही हैं। पिछले साल कर्नाटक के विधायक जी शेखर ने विधानसभा में कहा था कि उनकी माँ ने ईसाई धर्म अपना लिया है और अब वह घर में हिंदू रीति-रिवाजों का विरोध करती हैं।

इससे पहले पिछले साल जून में ग्वालियर के धर्म प्रताप सिंह, जो डेविड बन गए थे, उन्होंने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, अपनी माँ का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उनकी नातिन ने अपनी नानी का अंतिम संस्कार करने का फैसला किया और ग्वालियर से करीब 1100 किलोमीटर दूर झारखंड से वह यहाँ पहुँची थी। बता दें कि वर्ष 2018 में ओडिशा के गजपति जिले के निवासी थबीर पांडा को उनकी पत्नी और सास ने ईसाई धर्म में कन्वर्ट करने से इनकार करने पर पीटा था।

मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति वाली सपा को राम, परशुराम, कृष्ण क्यों आ रहे याद, यूपी में योगी की बढ़त से उड़ी अखिलेश यादव की नींद

उत्तर प्रदेश चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है लड़ाई रोचक होती जा रही है। जहाँ एक तरफ अयोध्या में राम मंदिर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और मथुरा में भी भगवान श्रीकृष्ण के भव्य मंदिर निर्माण की तरफ इशारा करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार बढ़त बनाते हुए राज्य में क्लीन स्वीप करते नजर आ रहे हैं। वहीं प्रदेश में हासिए पर जाती समाजवादी पार्टी सहित दूसरी विपक्षी पार्टियाँ भी अब मुस्लिम तुष्टिकरण का लेवल खुद से साफ़ करने में लगी हैं। ऐसे में हिन्दुओं को लुभाने के लिए खुलकर धार्मिक आधार पर राजनीतिक समीकरणों के लिए बिसात बिछाती नजर आ रही हैं।

कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के यूपी में लगातार दौरों और विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास से प्रदेश में सत्ता में CM योगी की पकड़ और भी मजबूत हो गई है और 1985 के बाद प्रदेश के इतिहास में दोबारा उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय है। ऐसे में वापसी का सपना देख रही सपा की इस कदर नींदे उड़ गईं हैं कि अखिलेश यादव दिन में भी सपने देखते नजर आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि अखिलेश यादव ने यह दावा भी कर डाला है कि भगवान कृष्ण रोज उनके सपने में आते हैं और समाजवादी पार्टी की सरकार बनने की बात करते हैं, जो राम राज्य लाएगी।

यही वजह है कि मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव को सपने में कभी कृष्ण तो कभी राम नजर आ रहे हैं यहाँ तक कि ब्राह्मणों को लुभाने के अंतिम प्रयास के रूप में उन्हें भगवान परशुराम के फरसे से भी परहेज नहीं है।

कुल मिलाकर इस बार यूपी चुनाव में राजनीतिक समीकरण बेहद दिलचस्प हो गए हैं। यही वजह है कि अब तक यादवों और मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले अखिलेश इस बार परशुराम के मंदिर और उनके फरसे का अनावरण करते हुए नजर आ रहे हैं। यही नहीं कभी आज़म खान के दबाव में पंचकोसी यात्रा रुकवाने और राम मंदिर के लिए एक बैठक में शामिल होने वाले गृहसचिव को निलंबित करने वाले अखिलेश खुद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान परशुराम की पूजा और आशीर्वाद लेकर चुनावी बिगुल भी फूँकते नजर आ रहे हैं। वर्ना सपा की शाही सवारी कभी पूरी तरह मुस्लिमों पर मेहरबान रही है।

सपा के इस मुखौटे को बेनकाब करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व सीएम अखिलेश यादव जवाहरबाग याद दिला दी। उनके ‘श्रीकृष्ण के सपने’ वाले बयान पर अलीगढ़ में तंज कसते हुए कहा, “जब हम यहाँ पर खुद उपस्थित होकर इस विद्युत् परियोजना का लोकार्पण कर रहे हैं तो लखनऊ में कुछ लोगों के सपने में भगवान कृष्ण आ रहे होंगे और कह रहे होंगे कि अरे अपनी नाकामयाबियों पर अब तो रोओ। जो काम तुम नहीं कर पाए वो बीजेपी की सरकार ने ​कर दिया। भगवान कृ​ष्ण आज उनको कोस रहे होंगे। भगवान कृष्ण ने उन्हें ये भी जरूर कहा होगा कि जब तुम्हें सत्ता मिली थी तब मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, बलदेव के लिए कुछ नहीं कर पाए लेकिन वहाँ पर कंस को पैदा करके जवाहरबाग की घटना जरूर करवा दी थी।”

अखिलेश के इस रूप को देखकर कोई इसे उनकी हताशा से जोड़ रहा है तो कोई इसे मौजूदा माहौल में सपा का अस्तित्व बचाने की आखिरी लड़ाई के रूप में भी देख रहा है। जिस तरह से यूपी में माहौल हिन्दूमय और हिन्दू अस्मिता पर केंद्रित होता नजर आ रहा है। ऐसे में कारसेवकों पर गोली चलवाने वाली, भगवान राम के अस्तित्व को नकारती पार्टी भी अयोध्या में एक साल में भगवान राम का भव्य मंदिर बनवाने का दावा करती नजर आए तो इसे क्या कहा जाए। अखिलेश यादव की इसी बौखलाहट पर तंज कसते हुए भाजपा के कैलाश विजयवर्गीय, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने भी जबरदस्त तंज कसा है।

यूपी की राजनीति अब एक नए मोड़ पर है जहाँ एक तरफ कॉन्ग्रेस यूपी में साफ होती नजर आ रही है और बाकी पार्टियाँ भी कोई खास करामात करती नजर नहीं आ रही हैं वहीं अपने मुस्लिम वोटों को दाव पर लगाकर अखिलेश यादव का एक हाथ में परशुराम का फरसा तो दूसरे हाथ में भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र लेना भी सपा के आखिरी दाव के रूप में देखा जा रहा है। जिसके पीछे कहीं न कहीं मीडिया द्वारा चलाया गया वह नैरेटिव भी है कि ब्राह्मण समुदाय के लोग भाजपा की वर्तमान सरकार से नाराज हैं। ऐसे में अखिलेश यादव इस वर्ग को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि अलग-अलग आँकड़ों में यूपी में ब्राह्मणों की आबादी 9 से 12 फीसदी तक बताई जाती रही है, जो सवर्णों में सबसे ज्यादा है। ऐसे में सपा इस अहम वर्ग को साधने की कोशिश में है। कहा जा रहा है कि 2007 में मायावती की सोशल इंजीनियरिंग, 2012 में अखिलेश यादव को मिली सफलता और फिर 2017 में भाजपा के पूर्ण बहुमत में आने के पीछे ब्राह्मण समुदाय की अहम भूमिका रही है।

ऐसे में यूपी की राजनीति को समझने वालों का मानना है कि अखिलेश यादव ने फरसा और चक्र के जरिए जातिगत राजनीति को साधने का प्रयास किया है। दरअसल अखिलेश पहले भी कई बार खुद को कृष्ण का वंशज बताते हुए यादव बिरादरी को लुभाने के साथ ही भगवान कृष्ण का मंदिर बनाने की बात भी कह चुके हैं।

यही वजह है कि अखिलेश यादव इस चुनाव में मुस्लिमों को अपना परंपरागत वोट मानते हुए कृष्ण के जरिए यादवों को, राम मंदिर के जरिए हिन्दू और ओबीसी समुदाय को तो वहीं परशुराम के जरिए ब्राह्मणों को साधने में लगे हैं। अपने इस बदले हुए रूप से वह यह संदेश भी देना चाहते हैं कि समाजवादी पार्टी महज यादव और मुस्लिम वर्ग की ही पार्टी नहीं है। ऐसे अब यह यूपी चुनाव में ही तय होगा कि उनकी इस कोशिश में भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र, राम राज्य और परशुराम का फरसा कितना फिट बैठते हैं।

‘मेरे माँ-बाप से ज्यादा राजू मुझे करता है प्यार’: मुस्लिम युवक ने 15 साल की हिन्दू लड़की का किया अपहरण, बुर्के में बनवाया वीडियो

देश में ‘लव जिहाद’ के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हालाँकि ‘लिबरल्स’ इसके अस्तित्व को नकार रहे हैं। इसका ताजा मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज से सामने आया है। कासगंज पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। इस पर आरोप है कि इसने हिंदू बनकर नाबालिग हिंदू लड़की को फँसाया और फिर इस्लाम में परिवर्तित करवाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कासगंज के अमनपुर मोहल्ले में 10वीं कक्षा में पढ़ने वाली 15 वर्षीय लड़की का एक मुस्लिम ने अपहरण कर लिया, जिसके बाद लड़की के परिजनों ने उसके खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज कराई। मुस्लिम व्यक्ति ने लड़की को हिंदू लड़का राजू बन कर बरगलाया और फिर स्कूल जाते समय उसका अपहरण कर लिया।

बाद में, सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया, जिसमें उसने बुर्का पहना था। इसमें नाबालिग को साथ वह मुस्लिम व्यक्ति (राजू) भी था। वीडियो में वह मुस्लिम व्यक्ति से प्यार कबूल करती दिखाई देती है। वायरल हुए वीडियो में 15 वर्षीय लड़की कहती दिख रही है कि वह पिछले 7 सालों से ‘राजू’ के साथ रिश्ते में थी और उन्होंने एक-दूसरे पर भरोसा किया। उसने कैमरे के ऊपर वाले व्यक्ति की ओर देखते हुए कहा, “वो (राजू) मुझे मेरे माता-पिता से ज्यादा प्यार करता है। हम शादी करना चाहते हैं। मुझे उससे शादी करने में कोई दिक्कत नहीं है।” लड़की के बोलने से ऐसा लग रहा था जैसे कि उसे ऐसा कहने का निर्देश दिया जा रहा हो।

इसके बाद कासगंज के एसपी रोहन प्रमोद बोत्रे ने आधिकारिक शिकायत दर्ज कर तुरंत मुस्लिम युवक की तलाश में कई टीमें गठित कर उसके मोबाइल को सर्विलांस पर लगाने का आदेश दिया। इसके परिणामस्वरूप 24 घंटे के भीतर मुस्लिम और नाबालिग किशोरी को बरामद कर लिया गया। जानकारी के मुताबिक अमनपुर में परिवार के सदस्यों और हिंदू युवा वाहिनी संगठन ने हिंदू लड़कियों को बरगलाने, धोखा देने और फिर उनका शोषण करने वाले मुस्लिमों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।

कासगंज के एसपी रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि नाबालिग लड़की के पिता की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है और मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “उसे जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।”

इस बीच, हिंदू युवा वाहिनी संगठन के मनोज सोलंकी ने कहा कि ये ‘लव जिहाद’ का मामला गंभीर है और इस पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “नाम बदलकर, तथाकथित शांतिदूत हिंदुओं की बेटियों फँसाते हैं और फिर उनका शोषण करते हैं। कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता। आखिरी मामला अल्ताफ का था। कितने संगठन लड़की के लिए खड़े हुए थे? सहानुभूति अल्ताफ के लिए थी लेकिन कोई भी बच्ची के लिए खड़ा नहीं हुआ।”

पिछले महीने कासगंज में अल्ताफ नाम के मुस्लिम शख्स ने 22 साल की हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया था। लड़की के परिवार की शिकायत पर उसे पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था और उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 363 और 366 के तहत आरोप लगाया गया था। अल्ताफ 9 नवंबर को पुलिस स्टेशन में मृत पाया गया था। पुलिस ने दावा किया कि उसने अपने जैकेट के हुड से एक शौचालय में पानी के पाइप का उपयोग करके खुद को फाँसी लगा ली थी।

बंगाल हिंसा पर TOI ने छापा- रेप के 21 मामलों में कोई सबूत नहीं; कलकत्ता HC के ASG ने फटकारा, कहा- जरा भी सच्चाई नहीं, माफ़ी माँगो

कलकत्ता उच्च-न्यायालय के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) वाईजे दस्तूर ने बंगाल हिंसा पर एक रिपोर्ट को लेकर TOI को फटकार लगाई है। उस रिपोर्ट में ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा को कम कर के दिखाने का प्रयास किया था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने ASG ने अपने पत्र में कहा है कि उस खबर में जरा सी भी सच्चाई नहीं है और TOI के संपादक को उसके लिए माफीनामा जारी करना चाहिए। साथ ही उस खबर को वापस लेने के लिए भी कहा है।

पश्चिम बंगाल में मई के पहले हफ्ते में ही हिंसा का स्तर बढ़ गया था और खासकर भाजपा कार्यकर्ताओं को जम कर निशाना बनाया जा रहा था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर हिंसा के आरोप लगे थे, जिसके कारण कई लोगों को बेघर होना पड़ा और कइयों ने पड़ोसी राज्यों में शरण ली। 4 जनवरी को प्रकाशित TOI की खबर का शीर्षक था, “पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा: बलात्कार और बलात्कार के प्रयास के NHRC द्वारा बताए गए 21 मामलों में कोई सबूत नहीं – CBI ने कहा”

बंगाल हिंसा पर गलत रिपोर्टिंग के लिए TOI को ASG की फटकार

इस खबर में बताया गया था कि CBI ने कलकत्ता हाईकोर्ट में ये बात कही है। साथ ही बताया गया था कि ‘राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)’ की रिपोर्ट में जिन 64 ऐसे मामलों का जिक्र है, उनमें से 39 मामलों में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और 21 मामले पश्चिम बंगाल पुलिस के पास सबूत के लिए वापस भेजे गए हैं। 4 मामलों में जाँच की बात लिखी है। खबर में ये भी लिखा है कि 2 हत्या के मामलों को भी CBI ने सबूत के लिए वापस भेजा है। कलकत्ता हाईकोर्ट में NHRC ने अपनी रिपोर्ट सबमिट की थी।

वहीं TOI को भेजे गए पत्र में ASG ने लिखा है, “3 जनवरी, 2022 को बंगाल चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामले की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में हुई, जिस बारे में अगले दिन TOI ने रिपोर्ट प्रकाशित की। दुर्भाग्य से, इस रिपोर्ट में CBI के हवाले से जो कहा गया है उसमें जरा सी भी सच्चाई नहीं है। उस दिन हुई सुनवाई में CBI ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा, जैसा इस खबर में लिखा है। इस रिपोर्ट के शीर्षक, तथ्य और आँकड़े – सब पूरी तरह गलत हैं।”

साथ ही कलकत्ता उच्च-न्यायालय के ASG ने इस पर आपत्ति जताई है कि एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान द्वारा एक संवेदनशील मुद्दे पर इस तरह की गलत रिपोर्टिंग की गई है। उन्होंने इसे बड़ी चिंता का विषय बताया। इस रिपोर्ट को लेकर तुरंत सार्वजनिक माफीनामा प्रकाशित करने को भी कहा है। TOI ने अपनी खबर में हत्या के मामलों को भी इनवर्टेड कॉमा में डाला था, जिससे ऐसा लगे कि ये सिर्फ आरोप हैं और ये सब हुआ नहीं है। जबकि इस तरह की हिंसा की कई तस्वीरें सोशल मीडिया में मौजूद हैं।

फ्रांस में ओमिक्रॉन से भी घातक ‘IHU’ मिला: दिल्ली में वीकएंड कर्फ्यू, बच्चों को कोरोना का टीका देने में MP-गुजरात सबसे आगे

दुनियाभर में कोरोना वायरस के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीच फ्रांस के वैज्ञानिकों ने एक और नए वैरिएंट ‘IHU‘ का पता लगाया है। यह ओमिक्रॉन से भी ज्यादा तेजी से फैलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्रांस (France) में सामने आए B.1.640.2 यानी IHU वैरिएंट के बारे में कहा जा रहा है कि यह कोरोना वैक्सीन लगवा चुके और एक बार संक्रमित हो चुके लोगों को भी संक्रमित कर सकता है। नया वैरिएंट फ्रांस के अलावा अभी तक किसी और देश में नहीं मिला है।

इस वैरिएंट को IHU मेड‍िटेरेंस इन्‍फेक्‍शन के विशेषज्ञों ने 10 दिसंबर 2021 को खोजा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस वैरिएंट में 46 म्‍यूटेशन हैं, जो ओमिक्रॉन से भी ज्‍यादा खतरनाक है। नए वैरिएंट IHU के कम से कम 12 केस मार्सिलिस में पाए गए हैं। ये सभी संक्रमित अफ्रीकी देश कैमरून से यात्रा करके लौटे थे।

भारत में ओमिक्रॉन की स्थिति

भारत में ओमिक्रॉन के अलावा कोरोना के नए मामले भी तेजी से बढ़ने लगे हैं। देश में अब तक 1200 से अधिक ओमिक्रॉन के मामले सामने आ चुके हैं। महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के मरीजों की संख्या बढ़कर 450 हो गई है। दिल्ली में ओमिक्रॉन के 320 संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं।

दिल्ली में वीकेंड कर्फ्यू

देश की राजधानी में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए नाइट कर्फ्यू के बाद अब वीकेंड कर्फ्यू भी लगाया जाएगा। मंगलवार (4 जनवरी 2021) को दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) की बैठक में यह फैसला लिया गया है। दिल्ली (Delhi) में वीकेंड कर्फ्यू के दौरान हर शनिवार और रविवार को दिन में भी कर्फ्यू लागू रहेगा। यानी अब हर हफ्ते शुक्रवार रात 10 बजे से कर्फ्यू शुरू होगा, जो सोमवार सुबह 5 बजे तक जारी रहेगा।

पंजाब में नाइट कर्फ्यू

कोरोना (Corona) के मामलों के मद्देनजर पंजाब सरकार ने आज से नाइट कर्फ्यू (Night curfew) का ऐलान कर दिया है। अब पंजाब में रात 10 बजे से सुबह पाँच बजे तक कर्फ्यू रहेगा। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थान सहित सभी शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। इसके अलावा यहाँ धारा 144 भी लगा दी गई है। राज्य सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक, सिनेमा हॉल, मॉल, रेस्टोरेंट, स्पा, संग्रहालयों और चिड़ियाघर को 50% क्षमता के साथ खोला जा सकता है।

मुंबई में लग सकता है लॉकडाउन

देश में नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के सबसे अधिक मामले महाराष्ट्र से सामने आ रहे हैं। इसको देखते हुए मंगलवार को मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा, “अगर कोरोना के दैनिक मामले 20 हजार से अधिक सामने आते हैं, तो हमें मुंबई में लॉकडाउन लगाना होगा। शहर के सभी स्कूल फिलहाल बंद कर दिए गए हैं और छात्र ऑनलाइन क्लास ले रहे हैं।”

बता दें कि इस बीच देश में 15 से 18 आयु के बच्चों के लिए 3 जनवरी से टीकाकरण भी शुरू हो गया है। 41.3 लाख से अधिक बच्चों ने सोमवार को रात 11 बजे तक कोविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक ली। बच्चों के टीकाकरण के मामले में मध्य प्रदेश और गुजरात पूरे देश में टॉप पर हैं। मध्य प्रदेश ने जहाँ 7.7 लाख की कुल संख्या के साथ सबसे अधिक टीकाकरण का रिकॉर्ड बना, वहीं गुजरात में भी 5.6 लाख बच्चों को टीके की पहली खुराक दी गई।

पाकिस्तान: सिंध में कारोबारी सुनील कुमार की गोली मारकर हत्या, हिंदुओं ने हत्यारों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस स्टेशन घेरा

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के अनाज मंडी में 44 वर्षीय हिंदू व्यवसायी सुनील कुमार की अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। न्यूज एजेंसी ANI ने इसकी जानकारी दी है। पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस नृशंस हत्या के तुरंत बाद 2 जनवरी को हिंदू एक स्थानीय पुलिस स्टेशन के बाहर धरना देने के लिए जमा हुए। विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंदू व्यापारी के हत्यारों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की गई। इस घटना के कारण शहर में शटडाउन कर दिया गया है।

हाल के वर्षों में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों के खिलाफ हिंसा में काफी वृद्धि देखी गई है। इस तरह की कई घटनाएँ नियमित तौर पर देखने को मिली है, जैसे- महिलाओं के साथ बलात्कार और अपहरण के लिए हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ करना। ऐसा खासकर हिंदू, ईसाई और सिख समुदाय से संबंध रखने वाली महिलाओं के साथ होता है। इसके अलावा मंदिर में तोड़-फोड़ करना, उसे हानि पहुँचाना पाकिस्तान की आम घटना बन चुकी है। कई ऐसे मौके आए, जब अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने की वजह से पाक को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना का शिकार होना पड़ा है, लेकिन इसके बावजूद इमरान खान सरकार ने देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

बता दें कि पिछले महीने एक पाकिस्तानी पत्रकार ने खुलासा किया था कि किस तरह देश के शिक्षण संस्थानों में हिंदुओं के खिलाफ नफरत फैलाई जाती है। उन्होंने यह टिप्पणी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सियालकोट में ईशनिंदा के आरोप में श्रीलंकाई मैनेजर की नृशंस हत्या के बाद की थी।

‘इमरान शफ़क़त के साथ बातें’ (‘Tellings with Imran Shafqat’) पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान, एक पैनलिस्ट ने पाकिस्तान में सरकारी और गैर-सरकारी दोनों स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले असहिष्णुता और कट्टरता को उजागर किया था। उन्होंने बताया था, “हमारे बच्चों को स्कूलों में क्या पढ़ाया जा रहा है? जब मेरे बच्चे स्कूल से लौटते हैं तो मुझसे अजीबोगरीब सवाल पूछते हैं। एक दिन मेरे बेटे ने पूछा कि क्या पाकिस्तान में हिंदू हैं। मैंने उसे अपने हिंदू दोस्त के बारे में बताया। फिर उसने मुझे बताया कि कैसे उनके शिक्षक ने उन्हें सिंध में हिंदुओं को मारने के लिए प्रोत्साहित किया।” पाकिस्तानी पत्रकार के बेटे को स्कूल में पढ़ाया जाता था, “अगर सिंध में हिंदू हैं तो आप लोग उन्हें मार क्यों नहीं देते।”