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जिस भगवंत मान के लिए कभी साथी MP ने कहा था- उनके पास से शराब की गंध आती है, उनके पंजाब में AAP का CM चेहरा होने की चर्चा

भगवंत मान आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election 2022) में आम आदमी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार हो सकते हैं। ऐसी चर्चा मीडिया में चल रही है। बताया जा रहा कि AAP ने अपने सीएम कैंडिडेट का नाम लगभग तय कर लिया है। सांसद भगवंत मान ( Bhagwant Mann ) के नाम पर पार्टी पीएसी की बैठक में मुहर लगने की बात कही जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी इसका ऐलान भी जल्द कर देगी। हालाँकि अब तक इसको लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

भगवंत मान 2014 में भी संगरूर से विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने में कामयाब रहे थे। वह आम आदमी पार्टी की पंजाब यूनिट के अध्यक्ष हैं। उनके समर्थक लगातार आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल पर सीएम के चेहरे की घोषणा करने को लेकर दबाव बनाए हुए हैं। केजरीवाल के पंजाब दौरों के दौरान मान के समर्थक उनके समर्थन में नारेबाजी करते भी दिखे हैं। यह भी कहा जा रहा कि आपा 2017 की तरह इस बार भी बिना किसी चेहरे के मैदान में उतरने की गलती नहीं दोहराना चाहती है। बता दें कि 2017 में हुए पंजाब विधानसभा चुनाव के वक़्त भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर मान का नाम चला था।

मान का नाम कई विवादों से भी जुड़ा रहा है। जुलाई 2016 में उन पर सांसद हरिंदर खालसा ने सदन में शराब पीकर आने का आरोप लगाया था। खालसा भी आप से ही चुने गए थे लेकिन बाद में उन्हें पार्टी ने निलंबित कर दिया था। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अपनी सीट बदलने की गुजारिश करते हुए कहा था कि वह मान के बगल वाली सीट पर नहीं बैठ सकते, क्योंकि उनके पास से शराब की बदबू आती है। उन्होंने इस मुद्दे को केजरीवाल के सामने पर भी उठाया था, लेकिन उन्होंने कोई सुनवाई नहीं की।

साल 2020 में कॉन्ग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के दो विधायकों ने भी मान पर शराब पीकर पंजाब विधानसभा में आने का आरोप लगाया था। कॉन्ग्रेस के विधायक कुशलदीप ढिल्लों (किक्की) ने कहा था कि मान को शराब पीने की आदत है और इसके नशे में वह पवित्र स्थान का भी ध्यान नहीं रखते हैं। वहीं शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने ने भगवंत मान पर माँ की सौगंध उठाने के बावजूद शराब पीने का आरोप लगाया था।

निक जोनस के हाथ में ‘मोटी बीड़ी’, बिकिनी पहनी प्रियंका चोपड़ा ने लिखा ‘स्वर्ग’: यूजर ने पूछा- इससे अस्थमा नहीं होता क्या

बॉलीवुड से हॉलीवुड में जाने वाली मशहूर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने पति से अलग होने की तमाम अफवाहों को खारिज करते हुए इंस्टाग्राम पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं। इन तस्वीरों में वो न्यू ईयर सेलीब्रेट करते दिख रही हैं। अभिनेत्री द्वारा शेयर की गई तस्वीरों की खास बात है कि इसमें क्रूज है, पानी है, सूरज है, बिकिनी पहने प्रियंका चोपड़ा हैं, उनके साथ उनका पति है और पति के हाथ में सिगार है।

दिलचस्प बात ये है कि निक के साथ तस्वीर में नजर आने वाली प्रियंका को अस्थमा की शिकायत भी है जिसका जिक्र वो अक्सर दिवाली से ठीक पहले करती हैं और उम्मीद करती हैं कि पूरा भारत उनके अस्थमा का ख्याल रखते हुए पटाखे न जलाए। हालाँकि उनके पति अगर उनके बगल में बैठकर सिगरेट फूँके तो उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है। वो ऐसी तस्वीरों को शेयर करके उनके कैप्शन में ‘हेवन’ यानी ‘स्वर्ग’ लिख रही हैं।

एक यूजर ने तो प्रियंका का ये दोहरा रवैया देखते हुए कह भी दिया कि जो निक सिगरेट पी रहे हैं उन्हें उससे दिक्कत नहीं होती क्या। यूजर ने लिखा, “अच्छा वो निक भैया जो मोटी वाली बीड़ी फूँक रहे हैं उससे आपको अस्थमा नहीं होता क्या।” 

प्रियंका चोपड़ा द्वारा शेयर की गई न्यू ईयर की फोटो और उस पर आया रिएक्शन

ये पहली बार नहीं है कि प्रियंका ने अपने पाखंडी रवैये के चलते अपनी बीमारी का मजाक बनवाया हो। इससे पहले भी वो अपने हाथ में सिगरेट लेकर बीच पर नजर आई थीं और उनके पति बगल में बैठकर सिगार पी रहे थे। वहीं सामने बैठकर उनकी माँ भी सिगार फूँक रही थीं। इस तस्वीर को देखने के बाद लोगों ने उनसे सवाल किया था कि क्या उन्हें जो अस्थमा है वो सिर्फ दिवाली के समय ही अपना काम करता है। सिगरेट पीने से कोई नुकसान नहीं होता है।

मालूम हो कि एक बार प्रियंका चोपड़ा नेटफ्लिक्स की फिल्म द व्हाइट टाइगर की शूटिंग के लिए दिल्ली में आई थीं, तब वो हेवी मास्क लगाकर आई थी। अपनी फोटो के साथ उन्होंने लिखा था कि दिल्ली में शूटिंग करना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने लिखा था, “मुझे समझ नहीं आता कि लोग इन हालातों में यहाँ रह कैसे रहे हैं। शुक्र है कि हमारे पास एयर प्यूरीफायर और मास्क जैसी सुविधा है। गरीबों और बेघरों के लिए दुआ करें। सभी लोग अपना ध्यान रखें।”

प्रियंका चोपड़ा अपने पोस्ट के कारण हुई ट्रोल

प्रियंका चोपड़ा के यही बयान और बाद में सिगरेट, सिगार की ओर उनका झुकाव उनपर भारी पड़ता है। अक्सर पुराने वीडियोज, पुरानी तस्वीर शेयर करके लोग उन्हें याद दिलाते हैं कि जब उन्हे धूम्रपान करने से समस्या नहीं होती तो फिर किसी और को पटाखे जलाने से वो क्यों रोकती हैं। उनसे सवाल ये भी किया जाता है कि आखिर प्रदूषण रोकने के लिए वो इतनी सजग हैं तो अपनी शादी में वो क्यों पटाखे जलवाकर शेखी बघारते दिखाई दिखी थीं।

अब गुरुग्राम के झाड़सा में समाधि को कब्रिस्तान बता मस्जिद निर्माण की कोशिश, भारत माता वाहिनी के विरोध के बाद पीछे हटने को मजबूर हुए मुस्लिम

गुरुग्राम में खुले में नमाज का विरोध तो हो ही रहा था वहीं अब एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ झाड़सा गाँव में एक समाधि को मजार बताकर हड़पकर मस्जिद बनाने की कोशिश हो रही है। शिकायतकर्ता भारत माता वाहिनी के संस्थापक अध्यक्ष दिनेश भारती ने ऑपइंडिया को बताया कि आनन-फानन में रात में खेत में बने समाधी पर कब्जे की कोशिश में 40 से अधिक मुस्लिम इकट्ठे हो गए थे। जिसे रात में किसी ने देख लिया और बात फैलते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। हिन्दू नेताओं के विरोध और पुलिस की सख्ती के कारण राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा एवं इमाम संगठन के पदाधिकारी अब्दुल हसीब कासमी सहित मुस्लिमों को पीछे हटना पड़ा।

शिकायत कर्ता दिनेश ठाकुर ने ऑपइंडिया को बताया, “जहाँ मुस्लिम मजार होने का दावा करते हुए मस्जिद बनाने की कोशिश कर रहे हैं वहाँ एक बुजुर्ग चौकीदार रहता था। जिसकी ठण्ड की वजह से मृत्यु होने पर उसका वहीं दाह संस्कार के बाद समाधि बना दी गई थी। जिस पर बाद में मुस्लिमों ने अपना दावा ठोकते हुए अख़बार में न्यूज़ भी छपवा दिया कि गुरुग्राम सेक्टर 40 में इस 200 गज जमीन पर मस्जिद बनाने जा रहे हैं।”

यह खबर जब हिन्दुओं को लगी तो वो विरोध करते हुए गुरुग्राम के सेक्टर 40 में लिखित शिकायत दर्ज कराई। जिसके बाद मुस्लिम पीछे हटते नजर आए तो वहीं हिन्दू-मुस्लिमों के इकट्ठे होने से मामला बिगड़ता भी नजर आया।

भारत माता वाहिनी की शिकायत

मामले पर बात करते हुए दिनेश भारती ने कहा, “हमने कम्प्लेन दी थी, सेक्टर 40 के थाने में रविवार 2 जनवरी, 2022 को शिकायत दी थी। अब्दुल हसीब कासमी, मुफ़्ती मोहम्मद सलीम कासमी और पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने गुरुग्राम में माहौल बिगाड़ने की लगातार कोशिश की है। यदि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती है तो हम आगे कदम उठाएँगे।” भारत माता वाहिनी के दिनेश भारती ने गुरुग्राम के तेजी से इस्लामीकरण को लेकर भी चिंता जताई।

दिनेश भारती ने ऑपइंडिया को बताया, “जिस जगह को कब्रिस्तान बताकर उस पर कई मंजिला मस्जिद निर्माण की बात कही जा रही है। वह स्थानीय निवासी मक्तू मनिहार की जगह है। जहाँ उन लोगों ने पूर्वजों की समाधि बनाई हुई है।” दिनेश ठाकुर ने बताया कि वह खुद उस जगह गए थे और गाँव वालों ने यह सब पुष्टि भी की है। इसके बाद उन्होंने सेक्टर 40 में शिकायत दी कि मुस्लिम पूर्वजों की समाधि को कब्र बताते हुए उस 200 गज जमीन पर कब्ज़ा करके वहाँ मस्जिद बनाना चाहते हैं।

जैसा कि मुस्लिमों ने ऐलान किया था वह बीते सोमवार को ही वहाँ मस्जिद निर्माण शुरू करेंगे। तो उन्होंने उन समाधियों पर मुस्लिमों द्वारा की जा रही सफाई का भी एक वीडियो ऑपइंडिया से साझा किया जिस पर गाँव वालों के विरोध और प्रशासनिक हस्तक्षेप के कारण मुस्लिम पक्ष पीछे हट गया है।

वहीं इस मामले में पूर्व डीसीपी मकसूद अहमद पर भी मुस्लिमों का साथ देने का आरोप लगाया जा रहा है। दिनेश भारती ने बताया कि खुद हिन्दू हितों की बात करने के कारण उन पर ही कई केस लगा दिए गए हैं। यहाँ तक कि उन्हें कई रातें जेल में भी बितानी पड़ी हैं लेकिन वह मुस्लिमों के जबरदस्ती के आगे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने मुस्लिमों पर दंगा जैसा माहौल बनाने का भी आरोप लगाया। पूरे मामले को हिन्दू वॉरियर मीडिया ने भी कवर किया है जिसका वीडियो आप नीचे देख सकते हैं।

‘लड़की हूँ…’ वाले कॉन्ग्रेसी मैराथन में मची भगदड़, पार्टी की महिला नेता ने कहा- जब वैष्णो देवी में हो सकता है तो यहाँ क्यों नहीं

उत्तर प्रदेश के बरेली में कॉन्ग्रेस की मैराथन में भगदड़ मचने से कई लड़कियाँ घायल हो गई हैं। लेकिन इससे कॉन्ग्रेसियों को फर्क पड़ता नहीं दिख रहा। पार्टी नेता सुप्रिया ऐरन ने कहा है, “जब वैष्णो देवी में भगदड़ मच सकती है, तो यहाँ क्यों नहीं। प्रदेश में जिस तरह से हमारी पार्टी का जनाधार बढ़ रहा है, उसको देखते हुए इस कार्यक्रम को असफल बनाने के लिए साजिश भी की जा सकती है।”

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका गाँधी की ओर से दिए गए नारे ‘मैं लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ के तहत यह मैराथन आयोजित किया गया था। सोशल मीडिया पर मैराथन में भगदड़ का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देख सकते हैं कि इस मैराथन में महिलाओं के साथ छात्राओं ने भी हिस्सा लिया। कई छात्राएँ एक-दूसरे के ऊपर ही गिर गईं, जिससे वे घायल हो गईं।

मामला तूल पकड़ने के बाद कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन ने अपने बेतुके बयान के लिए माफी माफी माँगी है। सोशल मीडिया पर उनका माफी माँगने का वीडियो भी सामने आया है। इसमें उन्होंने ​कहा, “तीर्थयात्रा के लिए लोग वैष्णो देवी गए थे। वहाँ क्या हुआ? उसको आप क्या कहेंगे? ये इंसानी फितरत है कि पहले हम आगे बढ़ जाएँ। यहाँ तो ये छोटी बच्चियाँ हैं, स्कूल में पढ़ ही रही हैं। थोड़ी बहुत भाग दौड़ हो गई। मैं खुद मीडिया से हूँ, इसलिए मेरी आप लोगों से गुजारिश है कि अगर किसी को भी इस बात पर बुरा लग गया हो, तो मैं पूरी कॉन्ग्रेस की तरफ से माफी माँगती हूँ।”

इसके बाद उन्होंने वहाँ मौजूद पत्रकारों से कहा कि मैं सब जानती हूँ कि आप सभी अंदर से कॉन्ग्रेसी हैं। मैं रही हूँ दिल्ली में और जानती हूँ कि सारा मीडिया चाहता है कि कॉन्ग्रेस फिर से वापस आए। कैसे आए यही सब सोच रहे हैं। इसके बाद वहाँ मौजूद एक पत्रकार ने कहा कि आपके लोगों ने मीडिया के साथ अभद्रता की है, यहाँ तक कि हाथापाई की नौबत आ गई। इस पर अपना बचाव करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि देखिए हर तरह के लोग, हर जगह घुस जाते हैं। मैं तो यह भी कहूँगी कि यह किसी साजिश का हिस्सा भी हो सकता है। आपने किसी का चेहरा देखा? वो हम में से नहीं होगा। कॉन्ग्रेस का बढ़ता जनाधार देखकर पता नहीं कौन बीच में आ गया। मैं आपसे उनकी तरफ से भी माफी माँगती हूँ।

बता दें कि इस घटना को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मैराथन में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। कई लड़कियाँ गिर गिरने से घायल हो गईं। शुक्र है कि किसी की जान नहीं गई। आप लोगों ने कोविड प्रोटोकॉल की धज्जियाँ उड़ाई हैं। इसके बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं से सवाल किया कि जीवन के साथ इस तरह खिलवाड़ सही है प्रियंका गाँधी जी? कोविड एक्सपर्ट राहुल चुप क्यों हैं?

‘जिस उत्तर-पूर्व में नेताजी बोस की सेना ने पहली बार झंडा फहराया, वो बन रहा नए भारत के सपनों का द्वार’: मणिपुर और त्रिपुरा में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (4 जनवरी, 2021) को त्रिपुरा और मणिपुर में कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। त्रिपुरा की राजधानी अगरतल्ला को एयरपोर्ट की भी सौगात मिली। वहीं मणिपुर में प्रधानमंत्री ने कहा कि अब से कुछ दिन बाद 21 जनवरी को मणिपुर को राज्य का दर्जा मिले, 50 साल पूरे हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि देश इस समय अपनी आजादी के 75 वर्ष पर अमृत महोत्सव भी मना रहा है, ये समय अपने आप में बहुत बड़ी प्रेरणा है।

मणिपुर में क्या बोले PM मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि देश के लोगों में आजादी का जो विश्वास, यहाँ मोइरांग की धरती ने पैदा किया वो अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने कहा कि जहाँ नेताजी सुभाष की सेना ने पहली बार झंडा फहराया, जिस नॉर्थ ईस्ट को नेताजी ने भारत की स्वतंत्रता का प्रवेश द्वार कहा, वो नए भारत के सपने पूरे करने का प्रवेश द्वार बन रहा है। पीएम मोदी ने बताया कि आज जिन योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है, उनके साथ ही वो आज मणिपुर के लोगों का फिर से धन्यवाद भी करेंगे।

पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया कि जनता ने मणिपुर में ऐसी स्थिर सरकार बनाई जो पूरे बहुमत से, पूरे दमखम से चल रही है। उन्होंने लोगों से कहा कि ये आपके एक वोट के कारण हुआ। पीएम मोदी ने बताया कि वो जब प्रधानमंत्री नहीं बने थे, उससे पहले भी अनेकों बार मणिपुर आए थे। उन्होंने बताया कि उन्हें पता था कि यहाँ की जनता दिल में किस बात का दर्द है, इसलिए 2014 के बाद उन्होंने दिल्ली को, भारत सरकार को मणिपुर की जनता के दरवाजे पर लेकर आ गए।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार की सात वर्षों की मेहनत पूरे नॉर्थ ईस्ट में दिख रही है, मणिपुर दिख रही है। उन्होंने कहा कि आज मणिपुर बदलाव का एक नई कार्य-संस्कृति का प्रतीक बन रहा है और ये बदलाव हैं- मणिपुर Culture (संस्कृति) के लिए, Care (सेवा) के लिए इसमें Connectivity (संयोजकता) को भी प्राथमिकता है, Creativity (सृजनशीलता) का भी उतना ही महत्व है। उन्होंने कहा कि हमने पूर्वोत्तर के लिए ‘एक्ट ईस्ट’ का संकल्प लिया है।

बकौल पीएम मोदी, ईश्वर ने इस क्षेत्र को इतने प्राकृतिक संसाधन दिये हैं, इतना सामर्थ्य दिया है। इन्होने कहा कि यहाँ विकास की, टूरिज्म की इतनी सम्भावनाएँ हैं और नॉर्थ ईस्ट की इन संभावनाओं पर अब काम हो रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर अब भारत के विकास का गेटवे बन रहा है। उन्होंने कहा कि मणिपुर देश के लिए एक से एक नायाब रत्न देने वाला राज्य रहा है और यहाँ के युवाओं ने, और विशेषकर मणिपुर की बेटियों ने पूरी दुनिया में भारत का झंडा उठाया है, गर्व से देश का सर ऊँचा किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि विशेषकर आज देश के नौजवान, मणिपुर के खिलाड़यों से प्रेरणा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज डबल इंजन की सरकार के निरंतर प्रयास की वजह से इस क्षेत्र में उग्रवाद और असुरक्षा की आग नहीं है, बल्कि शांति और विकास की रोशनी है। साथ ही याद किया कि पूरे नॉर्थ ईस्ट में सैकड़ों नौजवान, हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। उन्होंने ये भी कहा कि जिन समझौतों का दशकों से इंतजार था, हमारी सरकार ने वो ऐतिहासिक समझौते भी करके दिखाए हैं और मणिपुर ब्लॉकेड स्टेट से इंटरनेशनल ट्रेड के लिए रास्ते देने वाला स्टेट बन गया है।

पीएम मोदी ने कहा, “21वीं सदी का ये दशक मणिपुर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। पहले की सरकारों ने बहुत समय गँवा दिया। अब हमें एक पल भी नहीं गँवाना है। हमें मणिपुर में स्थिरता भी रखनी है और मणिपुर को विकास की नई ऊँचाई पर भी पहुँचाना है। और ये काम, डबल इंजन की सरकार ही कर सकती है।”

त्रिपुरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा

वहीं त्रिपुरा में प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी का भारत, सबको साथ लेकर, सबके विकास और सबके प्रयास से ही आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कुछ राज्य पीछे रहें, कुछ राज्य के लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते रहें, ये असंतुलित विकास ठीक नहीं। साथ ही उदाहरण दिया कि त्रिपुरा के लोगों ने दशकों तक, यहाँ यही देखा है। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे पहले यहाँ भ्रष्टाचार की गाड़ी रुकने का नाम नहीं लेती थी और विकास की गाड़ी पर ब्रेक लगा हुआ था।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जो सरकार यहाँ थी, उसमें त्रिपुरा के विकास का ना विजन था और ना ही उसकी नीयत थी, जिस कारण गरीबी और पिछड़ेपन को त्रिपुरा के भाग्य के साथ चिपका दिया गया था। उन्होंने ‘हीरा मॉडल’ से कनेक्टिविटी की बात करते हुए कहा कि ‘H से highway, I से Internet way, R से railways और A से Airways’ के जरिए कनेक्टिविटी बढ़ रही है, सुधर रही है। पीएम मोदी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार का कोई मुकाबला नहीं है।

उन्होंने कहा, “डबल इंजन की सरकार यानी संसाधनों का सही इस्तेमाल। डबल इंजन की सरकार यानी संवेदनशीलता। डबल इंजन की सरकार यानी लोगों के सामर्थ्य को बढ़ावा। 21वीं सदी में भारत को आधुनिक बनाने वाले नौजवान मिलें, इसके लिए देश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की जा रही है। इसमें स्थानीय भाषा में पढ़ाई पर भी उतना ही जोर दिया गया है। त्रिपुरा के विद्यार्थियों को अब मिशन-100, ‘विद्या ज्योति’ अभियान से भी मदद मिलने वाली है। देश को सिंगल यूज़ प्लास्टिक का विकल्प देने में भी त्रिपुरा एक अहम भूमिका निभा सकता है। यहाँ बने बाँस के झाड़ू, बाँस की बोतलें, ऐसे प्रोडक्ट्स के लिए बहुत बड़ा बाज़ार देश में बन रहा है।”

पीएम मोदी ने कहा कि इससे बाँस के सामान के निर्माण में हज़ारों साथियों को रोज़गार, स्वरोज़गार मिल रहा है।

अपनी ही मिल को कंगाल घोषित कर खुद खरीद लिया, जिस बैंक से डील वो भी खुद का ही: 5 बार की शिवसेना सांसद के गड़बड़झाले से ED भी हैरान

महाराष्ट्र से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ शिवसेना सांसद भावना गवली ने अपनी ही मिल को कंगाल घोषित कर के उसे औने-पौने दाम में खुद ही खरीद लिया। मामला एक चीनी मिल का है, जिसका नियंत्रण यवतमाल-वाशिम लोकसभा क्षेत्र की शिवसेना सांसद भावना गवली के परिवार के पास है। उन्होंने अपनी चीनी मिल के लिए एक बड़ा लोन लिया, इसके बाद कंपनी को कंगाल घोषित कर दिया। उन्होंने खुद ही ‘Liquidator’ बन कर इस कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में इसे कंगाल घोषित करवाया।

इसके बाद शिवसेना सांसद ने अपनी ही एक अन्य कंपनी के जरिए उस कंगाल घोषित चीनी मिल को औने-पौने दाम में खरीद लिया। स्पष्ट है, ऐसा इसीलिए किया गया क्योंकि उन्होंने चीनी मिल के जरिए बैंक के लोन को नहीं चुकाया। ये सब हमारा नहीं, बल्कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) का कहना है। इस मामले में जाँच एजेंसी ने भावना गवली के अलावा उनके सहयोगी सईद खान के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। भावना गवली यवतमल-वाशिम से लगातार तीसरी बार सांसद बनी हैं।

उससे पहले इस लोकसभा क्षेत्र का नाम वाशिम था। तब भी 1999 और 2004 में भावना गवली ने यहाँ से बतौर सांसद उम्मीदवार जीत दर्ज की थी। इस तरह वो 2024 में बतौर सांसद 25 वर्ष पूरे कर लेंगी। फ़िलहाल वो महाराष्ट्र की सब वरिष्ठ लोकसभा सांसद हैं। ये भी जानने लायक बात है कि अपनी अन्य कंपनी के जरिए अपनी ही कंगाल चीनी मिल को खरीदने वाली भावना गवली के इस करार को एक जिस बैंक के माध्यम से पूरा किया गया, वो भी उनका ही था।

ED इस ‘श्री बालाजी सहकारी पार्टिकल कारखाना डील’ की जाँच कर रही है। अगस्त 2021 में उनके कई ठिकानों पर जाँच एजेंसी ने छापेमारी भी की। स्पेशल PMLA कोर्ट में दायर की गई चार्जशीट में ED ने इस गड़बड़झाले का खुलासा किया है। ‘श्री बालाजी सहकारी पार्टिकल लिमिटेड’ की स्थापना भावना गवली के पिता पुण्डरीकराव गवली ने की थी। 72 वर्षीय पुण्डरीकराव गवली खुद भी वाशिम से 1996 में सांसद रह चुके हैं। मिल की स्थापना उन्होंने 1992 में की थी।

1997 से 2001 के बीच इस मिल ने ‘नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन बैंक’ से 43 करोड़ रुपए का लोन ले लिया। पुण्डरीकराव तब इस मिल के चेयरमैन हुआ करते थे। जिस प्रोजेक्ट के लिए ये लोन लिया गया था, उसे पूरा नहीं किया जा सका। मिल के प्रबंधन ने इसके बाद एक लिक्विडेटर की नियुक्ति की, जो 35 एकड़ वाले इस मिल को नीलाम करेगी। नीलामी से बैंक को लोन चुकाना था। पुण्डरीकराव ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर के अपनी बेटी को ही लिक्विडेटर बोर्ड का अध्यक्ष बनवा दिया।

इसके बाद लिक्विडेटर ने अख़बारों में एक विज्ञापन निकाला। इसके बाद ‘भावना एग्रो प्रोडक्ट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड’ को इस मिल को खरीदने का पात्र बता कर चुना गया। इस कंपनी का नियंत्रण उसके ही पास था। कंपनी को ये मिल 7.09 करोड़ रुपए में बेच दिया गया। इसके बाद मिल की 35 एकड़ जमीन को भी ‘महिला उत्कर्ष प्रतिष्ठान ट्रस्ट’ को बेच दिया गया। इस कंपनी का नियंत्रण भी गवली परिवार के पास ही है। इसके बाद इस ट्रस्ट को एक नॉन-प्रॉफिट कंपनी में बदल दिया गया।

11 ट्रस्टियों वाले इस ट्रस्ट को नॉन-प्रॉफिट कंपनी में बदलने के लिए ‘कंपनी एक्ट’ के सेक्शन-8 का इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत भावना गवली की माँ शालिनी और सहयोगी सईद खान को डायरेक्टर नियुक्त किया गया। इसके माध्यम से गवली परिवार इस 35 एकड़ जमीन का स्वामी बन गया। ED ने पाया है कि ये ट्रस्ट 22 शैक्षिक संस्थान चलाता है, जिसमें फार्मास्यूटिकल कॉलेज भी शामिल हैं। ये ट्रस्ट हर साल डोनेशन के रूप में हर साल कैश में 20 करोड़ रुपए जुटाता है।

‘भावना एग्रो प्रोडक्ट एंड सर्विसेज’ के निदेशकों में से एक अशोक गंडोले ने ED को अपने बयान में बताया कि अप्रैल 2010 में ये कंपनी बनी और उसी साल अगस्त में मिल को खरीद लिया। इस दौरान 75 लाख रुपए दिए गए और बाकी के 6.84 करोड़ रुपए के लिए बैंक गारंटी दी गई। जिस ‘रिसोड अर्बन कोऑपरेटिव बैंक’ की गारंटी दी गई, उसका प्रबंधन भी गवली परिवार के पास ही है। ट्रस्ट को कंपनी में बदलने के दौरान भी 18 करोड़ रुपए की गड़बड़ी के आरोप हैं।

‘बुल्ली बाई’ की मास्टरमाइंड उत्तराखंड की महिला, इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने बनाए सिख नाम से फेक अकाउंट: मुंबई पुलिस

मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर ‘बुल्ली बाई’ नामक ऐप पर नीलाम किए जाने के मामले में मुंबई पुलिस ने 21 साल के युवक को गिरफ्तार किया है। इसकी पहचान विशाल कुमार के तौर पर हुई है। वहीं मुख्य आरोपित एक महिला पाई गई है, जिसे पुलिस ने हिरासत में लिया है, वो उत्तराखंड की रहने वाली है। मुंबई पुलिस के अनुसार, ये दोनों एक दूसरे को जानते थे। युवक इंजीनियरिंग का छात्र है और उसे कल बेंगलुरु से हिरासत में लिया गया था।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, मुंबई पुलिस ने बताया, महिला ‘बुल्ली बाई’ से जुड़े तीन अकॉउंट हैंडल कर रही थी जबकि विशाल कुमार खालसा चरमपंथी के नाम से अकॉउंट चला रहा था। 31 दिसंबर को उसने अपने बाकी अकॉउंट को भी सिख नामों से मिलता-जुलता रख लिया था और फर्जी खालसा अकॉउंट होल्डर्स को दिखाया था।

इससे पहले बुल्ली बाई ऐप को होस्ट करने वाली साइट GitHub ने ऐप बनाने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी और यूजर को ब्लॉक करते हुए बयान दिया था कि वे उत्पीड़न, भेदभाव और हिंसा भड़काने वाली सामग्री अथवा आचरण उसकी नीतियों के खिलाफ हैं। डेवलपर का कहना है कि मामला उठने के बाद संबंधित यूजर के अकाउंट को निलंबित कर दिया गया था। गिटहब ने भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई में हरसंभव सहयोग करने का भी भरोसा दिया है। वहीं भारत के आईटी मंत्री ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए कहा था कि भारत सरकार दिल्ली और मुंबई पुलिस के साथ मिल कर इस केस में काम कर रही है। इससे पहले उन्होंने भी इस बारे में बताया था कि बुल्ली बाई ऐप के होस्टिंग प्लेटफॉर्म गिटहब ने यूजर को खुद ही ब्लॉक कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल हुए सुल्ली डील्स ऐप केस के बाद इस वर्ष की शुरुआत में बुल्ली बाई ऐप सामने आई थी, जो गिटहब एपीआई पर बनी थी। गिटहब ऐप पर बुल्ली बाई (Bulli Bai app on GitHub) नाम से बनाए गए ऐप पर मुस्लिम महिलाओं की तस्वीरों को अपलोड कर उनको नीलाम किया जा रहा था। खुलासा होने पर इसके ट्विटर हैंडल को सस्पेंड किया गया। इसके बायो में लिखा था, “बुल्ली बाई खालसा सिख फोर्स (केएसएफ) के एक समुदाय द्वारा संचालित ओपन-सोर्स ऐप है।” वहीं इसके ट्विटर लोकेशन स्टेटस से पता चला कि यह अकॉउंट यूएस से संचालित किया जा रहा था।

स्कूलों में ‘सूर्य नमस्कार’ का मुस्लिम लॉ बोर्ड ने किया विरोध: कहा- इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता, दूर रहे छात्र-छात्राएँ

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 1 से 7 जनवरी के बीच स्कूलों में ‘सूर्य नमस्कार’ आयोजित करने के केंद्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है। मोदी सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा है, “इस्लाम सूर्य नमस्कार की इजाजत नहीं देता, क्योंकि यह सूर्य पूजा का ही रूप है।”

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने एक बयान जारी कर कहा, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष, बहु धार्मिक और बहु सांस्कृतिक देश है। इन्हीं सिद्धांतों पर हमारा संविधान लिखा गया है। स्कूल पाठ्यक्रमों को भी इसका ध्यान रखकर बनाया गया है। लेकिन यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि वर्तमान सरकार इस सिद्धांत से भटक रही है।”

मौलाना ने आगे कहा, “यहाँ पर बहुसंख्यक समुदाय के रीति-रिवाज और पूजा पद्धति को सभी धर्मों के ऊपर थोपा नहीं जा सकता है।” उन्होंने मुस्लिम छात्र-छात्राओं से सूर्य नमस्कार कार्यक्रम से दूर रहने की अपील की है। साथ ही कहा कि इस्लाम उन्हें इस तरह के कार्यक्रम में भाग लेने की इजाजत नहीं देता है। बोर्ड ने यह भी कहा है, “सूर्य नमस्कार, सूर्य की पूजा का एक रूप है। देश के अल्पसंख्यक न तो सूर्य को देवता मानते हैं, न ही उसकी उपासना को ठीक मानते हैं। इसलिए सरकार का कर्तव्य है कि इस निर्देश को वापस ले और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का सम्मान करे।”

बोर्ड ने कहा है कि शिक्षा मंत्रालय सचिव ने स्वतंत्रता के 75 साल होने पर 30 राज्यों में सूर्य नमस्कार योजना चलाने का निर्णय किया है। इसके तहत पहले चरण में 30 हजार स्कूलों को शामिल किया गया है। 1 जनवरी से 7 जनवरी तक स्कूलों में सूर्य नमस्कार कराया जाना है। 26 जनवरी को भी एक कार्यक्रम प्रस्तावित है। बयान में बोर्ड ने इसे असंवैधानिक कृत्य बताया है। 

गलवान घाटी में शान से लहरा रहा तिरंगा, भारतीय सैनिकों की तस्वीरें भी आईं: चीन के प्रोपेगंडा की पोल खुली, राहुल गाँधी की भी फजीहत

गलवान घाटी से भारतीय सेना की तस्वीर सामने आई है, जहाँ वो राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के साथ दिख रहे हैं। इसके साथ ही चीन के प्रोपेगंडा की पोल भी खुल गई है। समाचार एजेंसी ANI ने सुरक्षा प्रतिष्ठानों में अपने सूत्रों के हवाले से दो तस्वीरें जारी की हैं। एक तस्वीर में भारतीय सेना के जवान हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लिए दिख रहे हैं तो दूसरे में उनके पीछे एक छोटा सा बंकर और वहाँ लगा तिरंगा भी दिख रहा है। इसके साथ-साथ डोगरा रेजिमेंट का झंडा भी दिख रहा है।

बता दें कि उक्त स्थान पर डोगरा रेजिमेंट को ही तैनात किया गया है। रक्षा सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि चीन ने अपने झंडे के साथ जो तस्वीर जारी की थी, वो भारत नहीं बल्कि उनके ही इलाके की थी। इसीलिए, चीन के उस प्रोपेगंडा वीडियो का भारत सरकार खंडन नहीं करेगी। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeiTY) के सूत्रों का कहना है कि चूँकि ये वीडियो चीन के क्षेत्र का है, जहाँ वो अपना झंडा फहरा रहे हैं – इसीलिए, इस वीडियो को इंटरनेट पर ब्लॉक करने की आवश्यकता नहीं है।

चीन ने भी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन वहाँ के कई हैंडल्स ने इस वीडियो को 1 जनवरी, 2021 को सोशल मीडिया पर डाला था। उसी दौरान नववर्ष के मौके पर भारत और चीन के जवानों ने ‘लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC)’ पर कई जगह तोहफों का आदान-प्रदान भी किया था। MeiTY गृह मंत्रालय, सुरक्षा एजेंसियों या अपने आंतरिक जाँच के आधार पर किसी कंटेंट को भारत में इंटरनेट पर ब्लॉक कर सकता है। अगर कंटेंट भारत की सम्प्रभुता या अखंडता या खिलाफ हो अथवा इससे हिंसा का खतरा हो, तो उसे हटा दिया जाता है।

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि ये वीडियो चीन के प्रोपेगंडा का हिस्सा है और उनके ही इलाके में शूट किया गया है। ये भी कहा जा रहा है कि उक्त वीडियो में गलवान नदी का मोड़ नहीं दिख रहा है, ऐसे में ये हाल के दिनों का न होकर पुराना भी हो सकता है। मई 2020 के बाद से दोनों देशों में 13 राउंड की बातचीत हो चुकी है और आगे भी होनी है। चीन ने इस साल सीमाओं पर ‘सामरिक मजबूती और आर्थिक-सामाजिक विकास’ के नाम पर एक नया कानून भी बनाया है।

कई मीडिया संस्थानों ने गलवान में चीनी झंडा फहराए जाने के प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाया (तस्वीर में दिख रही Times Now की खबर ताज़ा है, जो इसका खंडन करती है)

चीनी सोशल मीडिया हैंडल्स ने उस वीडियो को जारी करते हुए कैप्शन में लिखा था, “नववर्ष 2022 के मौके पर गलवान घाटी में चीन का झंडा फहरता हुआ”। साथ ही लिखा गया था कि बीजिंग के तियानानमेन चौक (1989 में छात्रों के विद्रोह का दमन) के बाद ये इस झंडे के लिए सबसे बड़ा क्षण है। चीन के इस प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाते हुए कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी अपनी ट्वीट में लिखा था, “गलवान पर हमारा तिरंगा ही अच्छा लगता है। चीन को जवाब देना होगा। मोदी जी, चुप्पी तोड़ो!”

रामचंद्र गुहा कभी उन्हें भी याद कर लो जो गोधरा में जिंदा जला दिए गए, क्योंकि रामभक्त भी हाड़-माँस के ही इंसान थे

कथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने स्क्रॉल के लिए एक लेख लिखा है। लेख से बेहतर इसे वैचारिक टट्टी कहना सही होगा, जिसके लिए गुहा जाने जाते हैं। इसमें उन्होंने बताया है कि साल 2022 में अरबिंदो घोष की 150वीं पुण्यतिथि, असहयोग आंदोलन के 100 वर्ष, भारत छोड़ो आंदोलन की 80वीं सालगिरह, भारतीय स्वतंत्रता के 75 साल, पहले आम चुनाव के 70 साल और भारत-चीन युद्ध के 60 वर्ष पूरे होंगे। गुहा ने दावा किया है कि पीएम मोदी इन सभी मौकों को उत्सव की तरह मनाएँगे और हर कार्यक्रम में अपने व्यक्तित्व को प्रमोट करेंगे।

मोदी पर तंज कसने के साथ ही लेख के तीसरे पैराग्राफ में गुहा ने गोधरा कांड को याद किया और बताया कि गुजरात में हुए दंगों को 20 साल पूरे हो रहे हैं लेकिन गुहा ने अपने लेख में जो एक विशेष ध्यान दिया है वो शब्द चुनाव का है। अपने इस लेख में उन्होंने  ‘Pogrom’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि जो कुछ भी 2002 में हुआ वो असल में Pogrom था यानी एक समुदाय को विशेष तौर पर बनाया गया निशाना।

गुहा के आर्टिकल की हेडलाइन

गुहा के इस ‘एक समुदाय’ में जाहिर है पीड़ित के तौर पर सिर्फ मुस्लिम आते हैं, क्योंकि इसके अलावा अगर कोई और समुदाय भी आता तो गुहा को गुजरात दंगों के साथ कारसेवकों को जिंदा जलाए जाने की बर्बरता याद आती। हालाँकि, लेख में ऐसा कहीं कुछ नहीं है। अगर है तो वो उस गोधरा कांड को जस्टिफाई करने की कोशिश है जिसे 1984 में हुए सिख नरसंहार से जोड़कर बताया गया है।

गोधरा कांड को छिपाने के लिए कॉन्ग्रेस का महिमामंडन

इस दिशा में भी गुहा संतुलित नहीं हो पाए और गोधरा कांड व सिख नरसंहार के बूते कॉन्ग्रेस के छवि निर्माण में जुट गए। उन्होंने बताया कि कैसे सिख नरसंहार के बाद 1999 में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनते ही सोनिया गाँधी ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में माफी माँगी थी और मनमोहन सिंह 2005 में प्रधानमंत्री बनाए गए थे। उनके अलावा जनरल जेजे सिंह पहले सिख आर्मी स्टाफ के चीफ बने थे और मोंटेक सिंह आहलूवालिया प्लॉनिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमैन बनाए गए थे।

अब गुहा का इन बिंदुओं को समझाने का क्या अर्थ है? ये बात लेख मेंं आगे पता चलती है जब वो कहते हैं कि उन्होंने उस समय (यूपीए काल में) सिखों से बात की थी और उन्हें (सिखों) इस नेतृत्व में हुए बदलाव से ऐसा लगा था कि ये देश उनका है। वहीं गुजरात पर आते हुए उन्होंने कहा कि आज भी गुजरात के मुसलमान उतने ही डरे हुए है जितने वो 2002 में थे।

कॉन्ग्रेस काल से बीजेपी की तुलना करते हुए गुहा ने ये दिखाया कि देखो सोनिया गाँधी ने माफी माँगी लेकिन नरेंद्र मोदी ने गुजरात दंगों पर कोई बात तक नहीं की। या कह सकते हैं कि गुहा अपने उदाहरण इसलिए समझा रहे थे कि उनको चाहिए कि जैसे कॉन्ग्रेस ने सिखों का विश्वास जीतने के लिए उन्हें बड़े पद दिए। वैसे नरेंद्र मोदी की सरकार भी उस समुदाय के हाथ में नेतृत्व दे दे जिसे गुजरात दंगों के बाद डरा हुआ महसूस होता है।

गुहा के इस लेख को पढ़ते-पढ़ते आपको उनकी ये अनकही इच्छा और स्पष्ट हो जाएगी जब वो खुलकर कहते हैं कि मोदी काल में मुस्लिम प्रधानमंत्री आना मुश्किल ही है। उनके मुताबिक मुस्लिमों के साथ मोदी सरकार अभी लंबा भेदभाव करने वाली है और उनकी पार्टी से जुड़े संगठन तो मुस्लिमों को सड़क चलते ढूँढ-ढूँढकर परेशान करते ही हैं। गुहा की शिकायत है कि मोदी आज भी गुजरात दंगों के लिए मुस्लिमों से माफी नहीं माँगते और इसके पीछे की वजह वो आंशिक रूप से उनके घमंड को मानते हैं और ज्यादा जिम्मेदार वो उस राष्ट्रवाद के उनके आदर्शों को मानते हैं जो संविधान के बिलकुल विपरीत थे।

गुजरात दंगों में मोदी को क्लीन चिट

गौरतलब है कि साल 2002 में 27 फरवरी को साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में गुजरात के गोधरा स्टेशन पर समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने आग लगा दी थी, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में अधिकतर कार सेवक थे। इस घटना के बाद 28 फरवरी से 31 मार्च तक गुजरात में दंगे भड़के। जिसके कारण 1200 से अधिक लोग मारे गए थे और साथ ही 1500 लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। इस मामले पर जाँच के लिए नानावती आयोग गठित हुआ था। इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट का पहला हिस्सा 2009 को विधानसभा में पेश किया। फिर अगली रिपोर्ट 18 नवंबर 2014 को दी गई और। साल 2019 में नानावती-मेहता आयोग की फाइनल रिपोर्ट विधानसभा में पेश हुई। इस अंतिम रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी पर लगे आरोपों से उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। इस रिपोर्ट में साफ लिखा था गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस की बोगी जलाए जाने के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा सुनियोजित नहीं थी। इसलिए, आयोग ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली तत्कालीन गुजरात सरकार को अपनी रिपोर्ट में क्लीन चिट दी है।

आपातकाल से लेकर कश्मीर पंडितों का नरसंहार…कौन माँगेगा माफी?

अब दिलचस्प और ध्यान देने वाली बात है ये है कि गुजरात दंगे जिसमें मोदी के नेतृत्व वाली गुजरात सरकार को क्लीन चिट मिली हो और दूसरी ओर कारसेवकों को जलाए जाने की घटना को भी 20 वर्ष पूरे हो रहे हों, उस समय में गुहा के लिए चर्चा का विषय गुजरात दंगे इसलिए हैं क्योंकि निशाने पर मुस्लिम थे। वरना सोचिए उन कारसेवकों की गलती ही क्या थी जो आज उनका जिक्र भी लिबरल मीडिया, वामपंथी इतिहासकार करने से गुरेज करते हैं और ये दिखाते हैं कि साल 2002 में सीधे गुजरात दंगे हुए, जिसकी पृष्ठभूमि उनके हिसाब से कुछ थी ही नहीं। मोदी माफी माँगेगे या नहीं इस पर सवाल ये लोग आए दिन करते हैं लेकिन क्या इनसे नहीं पूछा जाना चाहिए कि जिस कॉन्ग्रेस का वो महिमामंडन करते नहीं थकते वो  1975 के आपातकाल के लिए कब माफी माँगेगे, कब कश्मीर में उपजे हालातों के लिए शर्मिंदा होंगे। सिख नरसंहार के लिए 14-15 साल बाद माफी माँगना क्या इस सवाल को खत्म कर देता है कि आखिर दिल्ली के बिगड़े हालातों पर कानून व्यवस्था क्यों विफल हुई थी।

ये पहली बार नहीं है कि गुजरात दंगों पर दुख मनाते हुए लिबरल गोधरा कांड को भूले हों। पिछले साल भी स्वरा भास्कर समेत कई लिबरलों ने गुजरात मुद्दे पर नरेंद्र मोदी को घेरने का प्रयास किया था और हर साल की तरह इस साल भी वो इस्लामी बर्बरता पर पर्दा डालने का काम शुरू हो गया है जिसकी आग में 59 कारसेवक जलाकर मारे गए।