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JEE, NEET की तरह होगी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक व स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा: विद्यार्थियों को झंझट से मिलेगी मुक्ति

विश्व विद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने पिछले साल दिसंबर में पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आर पी तिवारी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति का गठन सभी 45 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के गैर-व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश सम्बन्धी समस्याओं के समाधान के लिए किया गया था। इसके साथ ही समिति को सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के पीएचडी कार्यक्रमों में प्रवेश हेतु एक स्तरीय और एक समान प्रक्रिया सुझाने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।

आर पी तिवारी कमेटी ने पिछले महीने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को सौंपी। इसमें आयोग ने सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के गैर-पेशेवर स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा (CET) और PHD कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के प्राप्तांकों को आधार बनाने की सिफारिश की है। यह सिफारिश उच्च शिक्षण संस्थानों की प्रवेश-प्रक्रिया को सरल और समरूप बनाने की दिशा में अत्यंत दूरगामी महत्व की है। इस निर्णय से प्रत्येक वर्ष स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध पाठ्यक्रमों के 15-20 लाख अभ्यर्थी और उनके परिजन प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे।

PHD पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के प्राप्तांकों को आधार बनाने से कई समस्याओं का सहज समाधान हो जाएगा। राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों आदि उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति हेतु आधारभूत और अनिवार्य शर्त है। यह एकल राष्ट्रव्यापी परीक्षण-पद्धति है। शोध करने और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यापन के इच्छुक सभी छात्र-छात्रा साल में दो बार आयोजित होने वाली इस परीक्षा में अनिवार्यतः शामिल होते हैं। इसका पाठ्यक्रम भी स्नातकोत्तर स्तरीय होता है। इसमें शोध अभिरुचि, शिक्षण दक्षता, तार्किक क्षमता, सामान्य अध्ययन, विश्लेष्ण क्षमता और विषय विशेष आदि से सम्बंधित प्रश्न होते हैं।

यह अपने आप में सम्बंधित अभ्यर्थी की योग्यता और क्षमता का निष्पक्ष और वस्तुपरक मूल्यांकन करती है। इसलिए विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा अपने शोध-पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु आयोजित की जाने वाली पृथक परीक्षाओं के स्थान पर राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के परिणाम को आधार बनाना व्यावहारिक और समीचीन है। इससे छात्र-छात्राओं के समय, संसाधनों और ऊर्जा की बचत होगी और पीएच. डी. पाठ्यक्रमों की प्रवेश-प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समानता भी सुनिश्चित हो सकेगी। हालाँकि, राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) में अभ्यर्थी की लेखन/भाषा दक्षता, अभिव्यक्ति क्षमता और नैतिक बोध के परीक्षण को शामिल करने पर भी विचार किया जाना चाहिए। एक अच्छे शोधार्थी और शिक्षक में इन तीन गुणों/ क्षमताओं को भी अनिवार्यतः होना चाहिए।

सामान्य प्रवेश परीक्षा के आयोजन संबंधी विश्वविद्यालयअनुदान आयोग का निर्णय ऐसे समय में आया है जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रवेश के लिए अवास्तविक और अकल्पनीय कटऑफ ने अन्य विकल्पों की आवश्यकता को रेखांकित किया है। मार्क्स जिहाद विवाद की पृष्ठभूमि में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा अधिष्ठाता (परीक्षा) प्रोफेसर डी. एस. रावत की अध्यक्षता में गठित नौ सदस्यीय समिति ने भी सामान्य प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का सुझाव दिया है। समिति का विचार है कि जब तक विश्वविद्यालय में स्नातक प्रवेश कट-ऑफ आधारित हैं, तब तक समतापूर्ण और समावेशी प्रवेश संभव नहीं है।

समिति ने देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी उच्च माध्यमिक बोर्डों के छात्रों के लिए प्रवेश में ‘पूर्ण समानता’ बनाए रखते हुए प्रवेश-प्रक्रिया में पर्याप्त निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा का विकल्प सुझाया है। इस प्रस्ताव को विद्वत परिषद और कार्यकारी परिषद जैसी दिल्ली विश्वविद्यालय की सर्वोच्च विधायी संस्थाओं ने भी अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह निर्णय न सिर्फ पाठ्यक्रम विशेष में अ-समान और अधि-प्रवेश को रोकेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक आवेदक की योग्यता के वस्तुनिष्ठ आकलन द्वारा उपलब्ध सीटों का न्यायपूर्ण आवंटन हो।

शिक्षा मंत्रालय भी प्रवेश-प्रक्रिया में व्याप्त अव्यवस्था, अराजकता और असमानता की समाप्ति और एकरूपता, समता, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सामान्य प्रवेश परीक्षा (कॉमन एंट्रेंस टेस्ट) लागू करना चाहता है। निश्चित रूप से दिल्ली विश्वविद्यालय सहित सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश-प्रक्रिया को दुरुस्त करने का एकमात्र विश्वसनीय विकल्प सामान्य प्रवेश परीक्षा ही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी एकल और स्तरीय परीक्षा आयोजित करने का विकल्प सुझाया गया है।

गैर-पेशेवर स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाली यह परीक्षा संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) और राष्ट्रीय पात्रता और प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के समान एकल और स्तरीय प्रवेश परीक्षा होगी। इस बहुविकल्पीय, कंप्यूटर-आधारित परीक्षा में भाषा प्रवीणता, संख्यात्मक क्षमता आदि को परखने के लिए ‘सामान्य योग्यता परीक्षा’ और विषय ज्ञान का आकलन करने के लिए ‘विषय विशिष्ट परीक्षा’ होगी। जेईई इंजीनियरिंग संस्थानों, नीट मेडिकल संस्थानों और कैट मैनेजमेंट संस्थानों में प्रवेश हेतु देशभर में मान्य है। उसी तरह यह परीक्षा भी होगी।

स्तरीकृत और भेदभावपूर्ण स्कूली शिक्षा वाले घोर असमान समाज में सीमित अवसरों के न्यायपूर्ण वितरण के लिए एक निष्पक्ष और वस्तुपरक सामान्य मूल्यांकन ढाँचा ही सर्वोत्तम विकल्प है। कम-से-कम एक इससे एक ऐसे सक्षम और व्यावहारिक समाधान की आशा की जा सकती है जो समाज, स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों की जरूरतों को पूरा करता है। उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) की मूल अवधारणा पूरे देश में मूल्यांकन के एक ही मानदंड के माध्यम से छात्रों को अपनी क्षमता के परीक्षण/प्रदर्शन का अवसर प्रदान करना है।

यह नए भारत की जरूरत है। अलग-अलग विश्वविद्यालयों द्वारा पृथक परीक्षाओं के आयोजन की जगह सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए एक परीक्षा विश्वविद्यालयों, सरकार और राष्ट्र के संसाधनों को भी बचाएगी। इससे छात्र-छात्राओं को अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए अलग-अलग आवेदन करने और अलग-अलग परीक्षा देने के झंझट से मुक्ति मिलेगी। इससे न केवल सभी बोर्डों के छात्रों के मूल्यांकन में एकरूपता आएगी, बल्कि सभी केन्द्रीय विश्वविद्यालयों की प्रवेश-प्रक्रिया भी एकसमान हो जाएगीI इससे छात्रों को बार-बार परीक्षा देने के अनावश्यक तनाव से निजात मिलेगी और उनके समय, धन और ऊर्जा का सदुपयोग हो सकेगा।

इस नई व्यवस्था में कोचिंग सेंटरों की भूमिका बढ़ने की आशंका है। कोचिंग केंद्रित प्रणाली में गरीब, दलित, पिछड़े और ग्रामीण छात्रों का पिछड़ जाना स्वाभाविक है। कुछ लोगों का मानना है कि आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के छात्र शीर्ष विश्वविद्यालयों और पाठ्यक्रमों में प्रवेश नहीं पा सकेंगे। उन्हें आरक्षण की समाप्ति का भी डर है। मगर इन आशंकाओं की वजह से सामान्य प्रवेश परीक्षा का विरोध नहीं किया जाना चाहिए।

इस व्यवस्था में आरक्षण यथावत रहेगा। साथ ही, इस परीक्षा की तैयारी हेतु वंचित पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए संबंधित स्कूलों द्वारा रेमेडियल कक्षायें आयोजित करने का प्रावधान किया जाना चाहिए। सम्बंधित सरकारों को भी इन बच्चों के लिए तीन-चार महीने की गुणवत्तापूर्ण कोचिंग की मुफ़्त व्यवस्था करनी चाहिए। ऐसा करके ही उपलब्ध सीमित सीटों का योग्यता के अनुसार न्यायपूर्ण वितरण संभव होगा।

‘हम पर थूका, उँगली उठाई’ : नाबालिग का रेप करने वाले फादर लॉरेंस को मिली आजीवन कारावास की सजा, माँ ने बताया चर्च में कैसे हुई बेइज्जती

गोवा क्रॉनिकल की एग्जीक्यूटिव एडिटर सोनाक्षी दत्ता को इंटरव्यू देते हुए एक 18 साल के लड़के की माँ ने खुलासा किया है कि कैसे उन्हें अपने बच्चे को न्याय दिलाने के लिए सालों से संघर्ष करना पड़ा जिसका रेप एक चर्च पादरी द्वारा किया गया था। 2015 में फादर लॉरेंस ने 12 साल के लड़के के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाते हुए उसका रेप किया था। ये पादरी मुंबई के दादर के शिवाजी नगर के चर्च में फादर था जिसे इस मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

पीड़ित की माँ ने कहा, “फादर लॉरेंस को अब सजा मिली है लेकिन मुझे पहले ही पता चल गया था कि ये बर्बाद हो जाएगा जब इसने मेरे बेटे के साथ गलत किया था। लॉरेंस ने मेरे और मेरे पति के सामने स्वीकारा था कि उसने हमारे 12 साल के बच्चे के साथ क्या किया। घुटनों पर आकर उसने हमसे माफी माँगी थी कि वो दोबारा ऐसा नहीं करेगा।”

मालूम हो कि 2015 में 12 साल के पीड़त ने पुलिस को बताया था कि वो और उसका भाई चर्च गए थे। प्रार्थना के बाद उसे फादर लॉरेंस ने बुलाया और जब वो अंदर गया तो कमरा बंद कर लिया। उसके बाद उसका यौन शोषण किया। बाद में बच्चे को घायल करके खून से लथपथ छोड़ दिया। बच्चे का कहना था कि ऐसी ही घटना फादर ने उसके साथ कुछ माह पहले भी की थी। बाद में यही सब उसने कोर्ट में बताया था।

बच्चे की माँ के अनुसार, जब उन्होंने फादर के ख़िलाफ़ शिकायत करनी चाही तो लॉरेंस के समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया और इल्जाम लगाया कि पैसों के लिए वो लोग झूठ बोल रहे हैं। इसके बाद जब वो कोर्ट गए तो पादरी के समर्थकों ने उन्हें बेहद अपमानजनक बातें कहीं। पीड़ित लड़के की माँ अफसोस जताती हैं कि उनके बेटे का फादर लॉरेंस द्वारा तीन बार शोषण किया गया जिसकी वजह से उनका बेटा 18 साल होने के बाद भी 12 साल का बच्चा ही रह गया है जो डर से घर के बाहर नहीं जाता और सपोर्ट के लिए उनका हाथ पकड़ता है। इतना ही नहीं माँ ने यह भी बताया कि कैसे उनके बेटे ने इस घटना के बाद दो बार सुसाइड करने की कोशिश की।

वह कहती हैं कि उन्होंने फादर लॉरेंस के बारे में चर्च के वाइस प्रेसिडेंट से शिकायत की थी। इसपर वह बोले ‘जाने दो। कुछ भी हो वो लड़का है।’ इसके बाद वह रोमन कैथॉलिक चर्च के उच्च स्तरीय पादरी पर गईं मगर उन्होंने कहा कि वो रोम जा रहे हैं और आकर समस्या का समाधान करेंगे। हालाँकि जब वह वापस आए तो उन्होंने कभी पीड़ित की ओर ध्यान नहीं दिया बल्कि बाकी लोग पीड़ित परिवार को परेशान करते रहे। उनके परिवार के ख़िलाफ़ चर्च सदस्यों ने मोर्चा खोला और खुली सड़क पर उनके लड़के के साथ हुई घटना के लिए बोलना शुरू किया। चर्च के बड़े पादरी से तो परिवार को आजतक सांत्वना नहीं मिली। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक इंसान उनकी मदद के लिए खड़ा था वो ब्रदर जो सोरोस हैं, वह द सोसायटी ऑफ विंसेट डी पॉल से जुड़े थे और पीड़ित परिवार के साथ हरदम खड़े थे जबकि बड़े पादरी सिर्फ मदद के लिए झूठ बोल रहे थे।

वह बताती हैं कि जब वो और उनके पति चर्च गए थे तो लोगों ने सच में थूक दिया था और उनपर उंगली उठाते हुए ताना दिया था। वह आपबीती बताते हुए कहती हैं कि उनका विश्वास हमेशा से ईश्वर पर था। अब फादर को हुई सजा देख वह कहती हैं कि कुछ भी हो जाए, “हम भयभीत नहीं होंगे और विश्वास है कि बड़े पादरी को भी शीघ्र ही दंडित किया जाएगा।”

नए साल से पहले मुंबई पर मँडराया खालिस्तानी आतंकी हमले का खतरा, हाई अलर्ट पर पुलिस: सभी जवानों की छुट्टियाँ रद्द

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai) पर नए साल से पहले आतंकी साया मंडरा रहा है। खुफिया विभाग (Security intelligence) ने रिपोर्ट जारी की है कि खालिस्तानी आतंकी (Khalistan Terrorism) नए साल की पूर्व संध्या यानि 31 दिसंबर को आतंकी हमले कर सकते हैं। इसे देखते हुए मुंबई पुलिस ने हाई अलर्ट जारी किया है। मुंबई में तैनात पुलिसकर्मियों की सभी छुट्टियों और वीकली ऑफ कैंसिल कर दिए गए हैं।

ANI ने मुंबई पुलिस (Mumbai police) के हवाले से कहा, “पुलिस की सभी छुट्टियाँ और साप्ताहिक छुट्टियाँ कल रद्द कर दी गई हैं और मुंबई में तैनात हर पुलिसकर्मी ड्यूटी पर रहेगा। सूचना मिली थी कि खालिस्तानी तत्व शहर में आतंकवादी हमले कर सकते हैं, जिसके बाद मुंबई पुलिस अलर्ट पर है।”

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई, दादर, बांद्रा चर्चगेट, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, कुर्ला और अन्य स्टेशनों समेत मुंबई के सभी अहम रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद कर दिया गया है। इस मामले में मुबंई रेलवे के पुलिस कमिश्नर कैसर खालिद ने कहा है कि रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रखने के लिए कल 3000 से अधिक रेलवे अधिकारियों को तैनात किया जाएगा।

हालाँकि, कोरोना को देखते हुए मुंबई में पहले से ही CRPC की धारा 144 के तहत प्रतिबंध हैं। इस बीच कोरोना को नए वैरिएंट ओमिक्रोन के खतरे को देखते हुए BMC ने शहर के सभी होटल और रेस्तरां, बार और पब सहित किसी भी बंद या खुली जगह में किसी भी तरह के नए साल के जश्न और समारोहों पर पहले से ही प्रतिबंध लगा दिया था।

गौरतलब है कि लुधियाना कोर्ट बम विस्फोट के मामले में सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का लिंक सामने आने के बाद मुंबई में संभावित खालिस्तानी आतंकी हमले का हाई अलर्ट सामने आया। धमाके में संलिप्तता के मामले में जर्मन पुलिस ने एसएफआई के एक नेता को गिरफ्तार किया है, जो कि कथित तौर पर दिल्ली और मुंबई में विस्फोटों की साजिश में शामिल था। बता दें कि लुधियाना कोर्ट के बाथरूम में लगाए जाने के दौरान बम फट गया था, जिससे बम लगाने वाले आरोपित की भी मौत हो गई थी।

‘ओमिक्रोन के खिलाफ वैक्सीन इफेक्टिव… जरूर लगवाएँ’: WHO की वैज्ञानिक, देश में मिले 13 हजार नए मरीज, सरकार ने किया अलर्ट

दुनियाभर में कोरोना वायरस (Corona virus) की तीसरी लहर का कहर शुरू हो गया है। वहीं कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन (Omicron) की दशहत भी बनी हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ओमिक्रोन को कंट्रोल नहीं किया गया तो यह एक तरह सुनामी ला देगा। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामीनाथन (Saumya swaminathan) ने कहा है कि ओमिक्रोन के खिलाफ वैक्सीन काफी प्रभावी है। अगर आपने टीका नहीं लगवाया है तो कृपया टीका जरूर लगवाएँ।

सौम्या स्वामीनाथन के मुताबिक, भले ही कई देशों में ओमिक्रोन वैरिएंट की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है, लेकिन यह अभी भी गंभीर स्तर पर नहीं है। बुधवार (29 दिसंबर 2021) को एक ट्वीट में उन्होंने कहा, “जैसा कि अपेक्षित था, टी सेल की प्रतिरक्षा (T Cell Immunity) ओमिक्रोन के खिलाफ बेहतर है। यह हमें गंभीर बीमारी से बचाएगा। अगर आपने टीका नहीं लिया है तो कृपया टीका जरुर लगवाएँ।”

उन्होंने ये भी कहा कि अभी तक लैब टेस्ट से ये सामने आया है कि ये वायरस दोनों लोगों को संक्रमित कर रहा है। जिन्होंने वैक्सीन लगवाई है, उन्हें भी और जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई है उन्हें भी। लेकिन ये स्पष्ट हो चुका है कि है वैक्सीन अभी भी बचाव कर रही है।

दूसरी ओर कोरोना एक बार फिर से अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों में तेजी से फैल रहा है। बीते 24 घंटों में ही दुनियाभर में 16 लाख से अधिक लोग संक्रमित मिले। वहीं 7000, से अधिक मौतें हुईं। इस मामले में विश्व स्वास्थ्य संगठन के चीफ ट्रेडोस अधानोम गेब्रेयसियस का कहना है कि बीते सप्ताह की तुलना में इस हफ्ते संक्रमण में 11 फीसदी का उछाल आया। उन्होंने कहा कि 20 से 26 दिसंबर के दौरान दुनियाभर में 50 लाख से अधिक केस सामने आए। इनमें से आधे यूरोप से थे।

स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने ओमिक्रोन के खतरे के बीच कहा है कि देश को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। बीते 24 घंटे में 13,000 नए संक्रमित देशभर में मिले हैं। महाराष्ट्र और केरल दो राज्यों में सबसे अधिक एक्टिव केस हैं। वहीं ओमिक्रोन के सबसे अधिक मामलों में दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं।

लव अग्रवाल के मुताबिक, देश के 90 फीसदी वयस्कों को कोरोना की पहली डोज लग चुकी है। वहीं जिन बुजुर्गों को सतर्कता बरतनी है भारत सरकार उन्हें एसएमएस भेजकर याद दिलाएगी कि जनवरी से डोज लगनी शुरू होगी। इस बीच भारत बायोटेक ने कहा है 2-18 साल के बच्चों पर कोवैक्सीन प्रभावी है।

‘मैं बहुत कु%$# चीज हूँ’ : 1 साल में 7 लड़कों पर 7 फर्जी रेप केस करने वाली आयुषी भाटिया गिरफ्तार, सुनें ऑडियो

हरियाणा के गुरुग्राम पुलिस ने एक 20 साल की लड़की को गिरफ्तार किया है। लड़की का नाम आयुषी भाटिया है और इसका काम है- लड़कों को प्रेम जाल में फँसाना, उनके साथ सेक्स करना, उन्हें धमकी देना, उनपर FIR करवाना और उन्हें जेल में भिजवा देना। आयुषी ये काम बेहिचक करती है और अब तक वह 7 लड़कों की जिंदगी बर्बाद कर चुकी है। आठवाँ लड़का इससे पहले शिकार होता आयुषी का भंडाफोड़ हुआ और अब वह जेल में है।

दीपिका नारायण भारद्वाज नाम की पत्रकार ने अपने ट्विटर, यूट्यूब पर इस पूरे मामले को लेकर जितने सबूत थे सबकी तस्वीर डाली है। इनके तहत इस लड़की ने 7 लड़कों पर 7 रेप केस 7 अलग-अलग पुलिस थानों में दर्ज करवाए थे। ये लड़कों से जिम में, इस्टा पर, क्लब में मिलकर दोस्ती करती थी। फिर बात शारीरिक संबंध तक पहुँचती थी और फिर ये उनपर रेप का इल्जाम मढ़कर उनसे फिरौती ले लेती थी। पढ़ाई की बात करें तो दिल्ली के आत्मा राम कॉलेज से ये बीए अंग्रेजी कर रही है।

23 दिसंबर को इसी लड़की के ख़िलाफ़ गुरुग्राम में एफआईआर हुई थी। पुलिस ने इसके विरुद्ध आईपीसी की धारा 384, 389, 120 बी, 506, 509 के तहत केस दर्ज किया था। अब वो न्यायिक हिरासत में है। उसके साथ उसकी माँ औैर अंकल (चाचा) भी इस काम में साथ देते थे। सितंबर में ही आयुषी ने एक लड़के को रेप केस में फँसाने की धमकी देकर उससे शादी की थी।

जानकारी के मुताबिक, इस मामले में सबसे पहले शिकायत दीपिका नारायण ने ही हरियाणा महिला आयोग की अध्यक्ष प्रीति भारद्वाज को दी। फिर केस पुलिस पर पहुँचा और 2 नवंबर को पुलिस ने एसआईटी गठित करके इस केस की जाँच शुरू की। इसी बीच 23 दिसंबर को इसके विरुद्ध गुरुग्राम में मामला दर्ज हुआ और सच्चाई सामने आने पर आयुषी को गिरफ्तार किया गया। दीपिका भारद्वाज ने अपने यूट्यूब पर आरोपित लड़की की किसी लड़के से बातचीच की ऑडियो लगाई है। कथिततौर पर ये उसका आठवाँ शिकार था।

इस ऑडियो में वह कहती है, “मेरा 5 के साथ केस चल रहा है। उस केस में हम रिलेशन में थे। फिजिकल भी हुए अनगिनत टाइम। मिलते भी थे। मैंने शिकायत में ये बात साफ कही थी कि उस लड़के ने वादे किए, संबंध बनाए और फिर मुझे छोड़ दिया। क्योंकि न क्या होता है कुछ लड़के लड़कियों को यूज करते हैं उन्हें छोड़ देते हैं। ये मेरा चाहे काम समझो चाहे जो। मैं उन लड़को की कंप्लेन करवा देती हूँ और इससे वो जेल में चला गया। उसके घरवालों ने मिन्नतें की कि प्लीज केस वापस ले लो। मैंने नहीं लिया। हर बेल कैंसिल कराई। बाद में हाईकोर्ट ने उसे बेल दी”

जब उससे पूछा गया कि आपका यही काम है क्या तो उसने कहा, “अगर लड़का मुझे धोखा देते हैं तो मैं उनके ख़िलाफ़ शिकायत कराती हूँ। चाहे रिश्ता एक दिन ही का हो। एक घटना में तो लड़का मुझे एक ही घंटे में छोड़कर ओयो से भाग गया तबसे मुझे ओयो नाम से डर लगता है। मैंने शिकायत कराई, वो अरेस्ट हो गया। आप एक हफ्ता कह रहे हो। मेरे पास एक-एक दिन के मामले हैं।”

लड़के से बात करते हुए आयुषी माँ-बहन की गाली देने लगती है। लड़का उसे हद में रहने को कहता है। बाद में वो धमकी देती है कि क्या उसे भी सारी एफआईआर की कॉपी दिखाए। जब लड़के ने कहा थाने में लोग पढ़े-लिखे होते हैं तो आयुषी ने पूछा कि आखिर पहले वाले मामलों में लड़के कैसे अंदर चले गए। लड़के ने कहा कहीं इस बार सब आप पर उलटा न पड़ जाए। आयुषी ठहाके लगाते हुए कहती है,”अगर ऐसा है तो पहले लड़के कैसे अंदर चले गए। तू मुझे जानता नहीं है मैं कितनी गंदी फिल्म हूँ। अगर कोई मेरी शिकायत न लिखे तो मैं उनकी भी कंप्लेन कर देती हूँ। मैं बहुत ज्यादा कु%^& चीज हूँ। मैंने थाने वालों के ख़िलाफ़ शिकायत करवाई हुई है। एक बार तो नौकरी पर बात आ गई थी तो पुलिस वाले को लड़के को अरेस्ट करना पड़ा। आयुषी कहती है अगर मैं थाने नहीं गई तो मेरे ऊपर थूक दियो। करियर बर्बाद कर दूँगी। मैंने सच में ऐसे केस कर रखे हैं।”

‘यूपी में अब बाहुबली नहीं… बजरंगबली दिखते हैं’: अमित शाह ने बताया सपा के NIZAM और LAB का अर्थ, गिनाई योगी सरकार की उपलब्धियाँ

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घामासान शुरू हो चुका है। इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) ने यूपी में ताबड़तोड़ रैलियाँ की। इस दौरान उन्होंने सपा के निजाम और लैब की व्याख्या की। साथ ही अलीगढ़ में कहा कि अब बाहुबली नहीं केवल बजरंग बली दिखाई देते हैं।

मुरादाबाद में अमित शाह

योगी सरकार की तारीफ में अमित शाह ने कहा, “अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) के शासनकाल में 700 दंगे हुए थे। चौधरी चरण सिंह का पश्चिमी उत्तर प्रदेश दंगों के कारण लहु-लुहान हो गया था। आज योगी जी की सरकार में दंगा करने वालों की आँख उठाकर देखने की भी हिम्मत नहीं होती। कुछ ही महीनों में गगनचुंबी राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा।”

शाह ने अखिलेश यादव के निजाम का मतलब समझाते हुए कहा, “अखिलेश बाबू निजाम सपा के समय NIZAM मतलब ‘ N- नसीमुद्दीन, I- इमरान मसूद, ZA- आजम खान, M- मुख़्तार अंसारी’ होता था। मोदीजी और योगीजी की जोड़ी ने उत्तर प्रदेश को इस NIZAM राज से मुक्त कर कानून का शासन स्थापित करने का काम किया है।”

इसके साथ ही उन्होंने सपा के नए प्रकार के LAB का अर्थ भी बताया और कहा कि सपा के समय एक नए प्रकार की प्रयोगशाला बनी थी, जिसका मतलब L- लूट, A- आतंकवाद और B- भ्रष्टाचार है।

उन्होंने आगे कहा, “समाजवादी पार्टी की सरकार में उत्तर प्रदेश के हर जिलें में बाहुबलियों का बोलबाला था। आज योगी जी के नेतृत्व में यूपी में कोई बाहुबली दिखाई नहीं पड़ता सिर्फ बजरंगबली दिखाई पड़ते हैं।”

विकास की बात करते हुए अमित शाह ने अखिलेश यादव, मायावती और प्रियंका गाँधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “विकास बबुआ के बस की बात नहीं है और बुआ जी तो अभी तक ठंड के कारण बाहर ही नहीं निकल पाई हैं। अरे बहनजी चुनाव के मैदान में आ जाइए बाद में मत कहना प्रचार नहीं करने दिया। ये बुआ, बबुआ और बहन तीनों मिलकर एकसाथ भी आ जाएँ तो भी भाजपा कार्यकर्ताओं से नहीं जीत सकते हैं।”

अलीगढ़ में गरजे शाह

वहीं अलीगढ़ में जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आगामी चुनाव में 300 से अधिक सीटें जीतने का दावा करते हुए प्रदेश की योगी सरकार की कानून व्यवस्था की तारीफ की। उन्होंने कहा कि पहले यूपी के हर जिले में गुंडे मवाली होते थे, लेकिन अब यूपी माफिया मुक्त हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि राम मंदिर की बात आते ही उन्होंने अपनी कुर्सी को लात मारकर मंदिर बनने का रास्ता साफ किया, लेकिन अखिलेश यादव को तो जिन्ना दिखते हैं।

उन्नाव में रैली के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि हमने जनता से 2017 में बीजेपी की सरकार लाने को कहा था कि एक बार हमारी सरकार बनाइए माफियाओं को उल्टा लटकाकर सीधा करने का काम हम करेंगे। आज पूरे यूपी से माफियाओं का पलायन हो गया है। आज रोमियो स्क्वाड है। योगी जी के शासन में अपहरण, बलात्कार औऱ रेप में 60 फीसदी की कमी आई है।

सपा के सरकार में तीन P काम करते थे। परिवारवाद, पक्षपात, और पलायन। भाजपा तीन V (वी) के आधार पर चलती है। विकास, व्यापार और सांस्कृतिक विरासत। योगी जी के राज में कोई बाहुबली नहीं दिखता है केवल बजरंगबली दिखाई देते हैं।

8वीं तक स्कूली शिक्षा, भय्यू जी महाराज से दीक्षा : जानिए, एक केमिस्ट के बेटे के कालीचरण महाराज बनने की कहानी

छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुई ‘धर्म-संसद’ में मोहनदास करमचंद्र गाँधी की आलोचना करने के मामले में 30 दिसंबर 2021 को गिरफ्तार हुए कालीचरण महाराज एक समय में अभिजीत धनंजय सरग हुआ करते थे। आज वो अपने माथे पर गोल तिलक और लाल वस्त्र धारण करते हैं। वह शिव और काली के उपासक हैं।

कालीचरण महाराज महाराष्ट्र (Maharashtra Akola) के विदर्भ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अकोला जिले के शिवाजी नगर के रहने वाले हैं। उनके पिता धनंजय सरग मेडिकल की दुकान चलाते हैं। भवसागर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले कालीचरण महाराज को लेकर माना जाता है कि उनका जन्म 1973 में हुआ था। उन्होंने 8वीं कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद पढ़ाई को छोड़ दिया था, जिसके बाद उनके परिवार वालों ने उन्हें उनकी मौसी के पास भेज दिया। मौसी के पास रहते हुए उन्होंने हिंदी सीखी। वो भय्यू जी महाराज के संपर्क में आए और ये वही पल था, जहाँ से आध्यात्म की तरफ उनका झुकाव हुआ। भय्यू जी महाराज से दीक्षा लेने के बाद से ही उन्हें नया नाम ‘कालीचरण महाराज’ मिला।

लोकप्रियता की बात की जाए तो कालीचरण महाराज काफी लोकप्रिय हैं। हिंदू धर्म ग्रंथों से मंत्रों और श्लोकों का जाप करते हुए उनके कई वीडियो वायरल हुए हैं। 2017 में तो उन्होंने निकाय चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई थी, लेकिन सफलता नहीं मिली। अफवाह तो उनके 2019 लोकसभा चुनाव लड़ने की भी थी।

कालीचरण महाराज का शिव तांडव स्तोत्र वीडियो

पिछले साल 2020 में मध्य प्रदेश के भोजेश्वर शिव मंदिर में कालीचरण महाराज ने वीणा के साथ शिव ताँडव स्त्रोत गाया था और वो वीडियो इतना अधिक पसंद किया गया कि उसे केवल यूट्यूब पर दो करोड़ से भी अधिक बार देखा गया। इसके चलते वो काफी लोकप्रिय हो गए थे।

कालीचरण महाराज का एक आधिकारिक यूट्यूब चैनल है, जिस पर बीते तीन सालों से वो वीडियो अपलोड करते रहे हैं, जिनमें अधिकांश आध्यात्मिक सामग्री, साक्षात्कार और कथा वचन हैं। इसी तरह से साल 2018 में उनका एक और वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें वह महिषासुर मर्दिनी स्त्रोतम गाते हुए दिखे थे।

अपने यूट्यूब (YouTube) चैनल पर एक कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय हिंदू समाज में जाति व्यवस्था पर कुठाराघात किया था। उन्होंने कहा था, “हिंदुओं में जाति की सड़ती समस्या बंटवारा पैदा करती है, जो धर्म को विनाश की ओर ले जाती है।” कालीचरण महाराज ने हिंदुओं को शिवाजी महाराज का अनुसरण करने की नसीहत देते हुए कहा कि जाति की जंजीरों को तोड़कर हिंदुत्व के बैनर के नीचे एकत्र होने की जरूरत है। कालीचरण महाराज के मुताबिक, “हिंदू बंटे हुए थे, इसी कारण आक्रमणकारी भारत को जीत पाए। शिवाजी महाराज सभी हिंदुओं को एक साथ लाए और हमें उनके नक्शेकदम पर चलना चाहिए। ”

कालीचरण महाराज का एक अन्य वीडियो मंगलुरू के अन्न पूर्णेश्वरी मंदिर में हाथी का दर्शन करते हुए देखा गया था। इस वीडियो को 9 लाख लोगों ने देखा था।

गौरतलब है कि हाल ही में कालीचरण महाराज रायपुर की धर्म संसद में दिए गए अपने भाषण को लेकर चर्चा में हैं। गाँधी पर उनके भाषण के बाद उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया। बाद में गुरुवार 30 दिसंबर 2021 को रायपुर पुलिस ने एमपी के खजुराहो (Khajuraho) से गिरफ्तार किया था।

इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि हिंदू नेता को गिरफ्तार करने वाली रायपुर पुलिस की कार्रवाई अंतरराज्यीय प्रोटोकॉल का उल्लंघन है और रायपुर पुलिस ने ऑपरेशन करने से पहले MP पुलिस को सूचित नहीं किया था।

माँ-बाप के साथ खेत पर मजदूरी करने जाती थी नाबालिग, पादरी ने मौका देख किया रेप, बीवी से बनवाई Video

गुजरात के तापी जिले के सोनगढ़ गाँव में एक पादरी को 16 साल की नाबालिग लड़की के रेप के आरोप में गिरफ्तार किया गया। कथिततौर पर लड़की से दुष्कर्म करने के इस मामले में पादरी का साथ देने पर उसकी पत्नी को भी पकड़ा गया। उस पर आरोप है कि उसने रेप के दौरान लड़की की वीडियो रिकॉर्ड की और फोटो खींची।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ये घटना मई माह की है। मगर पीड़िता ने इस संबंध में शिकायत अब जाकर दी है। पुलिस को शक है कि शायद फोटो और वीडियो वायरल किए जाने के डर से लड़की ने शिकायत नहीं दी थी।

पुलिस का कहना है कि पीड़िता को लगातार उसकी तस्वीरें और फोटो दिखाकर धमकाया जा रहा था। पादरी की पहचान बलीराम कोकनी और पत्नी की पहचान अनीता के तौर पर हुई है। इन दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस संबंध में मंगलवार को शिकायत दर्ज की गई थी और कुछ देर बाद इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। फिर बुधवार को दोनों को स्थानीय कोर्ट में पेश किया गया। यहाँ से पुलिस को इनकी चार दिन की रिमांड मिली।

अब इस मामले में तापी के डीएसपी आर एल मवानी जाँच कर रहे है। अब तक की जाँच में पता चला है कि पीड़िता खेती में मजदूरी का काम करती है और वहाँ वह अपने माता पिता के साथ जाती थी। वहीं आरोपित पादरी ने उसे अकेले मिलने को कहा और यह घटना घटित हुई।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले आँध्र प्रदेश में भी एक पादरी को भी अनुसूचित जाति की लड़कियों का यौन शोषण करने के आरोप में पकड़ा गया था। उसने 6 अक्टूबर को लड़कियों के साथ इस घटना को अंजाम दिया था मगर उसकी गिरफ्तारी NCPCR द्वारा मामले में हस्तक्षेप करने के बाद 12 नवंबर को हुई थी। इस मामले में पुलिस पर आरोप लगे थे कि वो केस को दर्ज नहीं कर रही थी लेकिन बाद में NCPCR को संपर्क किया गया।

PM मोदी ने उत्तराखंड को दी 17500 करोड़ की सौगात, बोले- ढूँढ-ढूँढकर पुरानी चीजें ठीक कर रहा हूँ, आप उन्‍हें ठीक कीजिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (30 दिसंबर 2021) को उत्तराखंड में 17,500 करोड़ रुपए से अधिक की 23 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान जनता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उत्तराखंड ने बहुत अभाव झेला है। उत्तराखंड के जाे युवा अपना रोजगार करना चाहते हैं उनके साथ हमारी डबल इंजन की सरकार खड़ी है। बिना गारंटी आसानी से लोन मिल रहा है। 

उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियाँ हमारी सेना और हमारे वीरों का अपमान करने से भी नहीं चूके हैं। आपके सपने हमारे संकल्प हैं, आपकी इच्छा हमारी प्रेरणा है और आपकी हर जरूरत को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है। 

उत्तराखंड को सशक्त करेंगे ये प्रोजेक्ट

कहा कि जो पहले सरकार में थे उन्होंने कभी उत्तराखंड के सामर्थ्य की परवाह नहीं की, इसका परिणाम ये हुआ कि हमें न तो कभी पर्याप्त बिजली मिली, न ही किसानों के खेतों को सिंचाई मिली और देश की अधिकतर ग्रामीण आबादी को पाइप से शुद्ध पानी के अभाव में जिंदगी गुजारनी पड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जो प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं वह उत्तराखंड को सशक्त तो करेंगे ही, साथ ही यहाँ के किसानों को सिंचाई में फायदा पहुँचाएँगे। गंगोत्री से गंगासागर तक हम मिशन में जुटे हुए हैं। गंगा में गिरने वाले गंदे नालों की संख्या कम हो रही है। नैनीताल झील के संरक्षण के लिए भी अब काम किया जाएगा। इन सब प्राेजेक्ट का लाभ उत्तराखंड के युवाओं को मिलेगा।

दिन रात झूठ बोल रहा विपक्ष

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विपक्ष दिन रात झूठ बोल रहा है। आज जिन परियोजनाओं का लोकापर्ण और शिलान्यास हुआ है। इससे हल्द्वानी और जगजीतपुर के इलाके में पानी की किल्लत दूर होगी। हमारी सरकार हर घर नल योजना से लोगों को लाभ मिल रहा है। प्रधानमंत्री ने लखवाड़ परियोजना का जिक्र किया। 

उन्होंने कहा, “इस पर 29 साल बाद फिर से काम शुरू हुआ है। यह प्रोजेक्ट चार साल में पूरा होगा। मेरा सात साल का रिकॉर्ड देख लीजिए। पुरानी योजनाओं को पूरा करने में मेरा समय निकल रहा है। मैं काम को ठीक कर रहा हूँ। आप इन कामों को रोकने वालों को ठीक कीजिए। जो पहले सरकार में थे उन्होंने उत्तराखंड के बारे में नहीं सोचा। उत्तराखंड की सामर्थ्य का लाभ नहीं उठाया।”

अफवाह फैला रहे हैं उत्तराखंड विरोधी

प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता का प्यार भाजपा के साथ है। विकास कार्यों पर भाजपा का जोर है। कहा कि कुछ पार्टियों ने अफवाह फैलाने का काम शुरू किया है। आज जब जनता जनार्दन इन लोगों की सच्चाई जान चुकी है, तो इन लोगों ने एक नई दुकान खोल रखी है। वो दुकान है- अफवाह फैलाने की। अफवाह बनाओ, फिर उसे प्रवाहित करो और उसी अफवाह को सच मानकर दिन रात चिल्लाते रहो। 

उत्तराखंड विरोधी टनकपुर बागेश्वर रेल लाइन को लेकर अफवाह फैला रहे हैं। उत्तराखंड अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर चुका है। इस दौरान आपने ऐसे भी सरकार चलाने वाले लोग देखें हैं। जिन्होंने दोनों हाथों से उत्तराखंड लूटा। जिसे उत्तराखंड के प्यार हो वह ऐसा नहीं सोच सकते। उत्तराखंड के विकास की भावना से हमारी सरकार काम कर रही है।

नसीर साहब! जब आपके घर में कॉकरोच आता है तो आप उसे ‘शरणार्थी’ कहते हैं क्या… मुगल भारत के निर्माता नहीं, कॉकरोच थे

आपने अ वेडनेसडे (A Wednesday) देखी है? 2008 में आई इस फिल्म की चर्चा इसलिए क्योंकि मुगलों को शरणार्थी और भारत का निर्माता बताने वाले अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने द वायर (The Wire) के करण थापर को दिए इंटरव्यू में अपनी इस फिल्म का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मों अ वेडनेसडे और सरफरोश के अलावा लाहौर में उनके दिए बयान कि उन्हें वहाँ घर जैसा महसूस हो रहा है, को लेकर उन पर निशाना बनाया जा रहा है।

2006 के मुंबई ट्रेन बलास्ट पर बेस्ड अ वेडनेसडे में नसीर साहब का एक डायलॉग है। इसमें वे कहते हैं, “आपके घर में जब एक कॉकरोज आता है, तो आप क्या करते हैं राठौर साहब (अनुपम खेर), आप उसे मारते हैं ना कि पालते हैं। ये चारों कॉकरोज (आतंंकवादी) मेरा घर गंदा कर रहे थे और आज मैं अपना घर साफ करना चाहता हूँ।”

इसमें कोई दो मत नहीं कि नसीरुद्दीन शाह एक खरे अभिनेता हैं। पर क्या रियल लाइफ में भी वे अपने विचारों को लेकर इतने ही खरे हैं? क्या उन पर ‘मुस्लिम’ दिखने का कोई दबाव है? या फिर वे यह सब मोदी और हिंदू घृणा में कर रहे हैं? इतने सारे सवाल एक साथ इसलिए क्योंकि नसीर साहब को भारत में डर लगता है। वे गृह युद्ध की धमकी देते हैं। जिस पल वे मंदिरों का विध्वंस करने वाले मुगल आक्रांताओं को भारत का निर्माता बताते हैं, उसी पल वे हिंदुओं को धमकी देने वाले अंदाज में पूछ भी लेते हैं कि यदि तुम्हारे मंदिर तोड़े गए तो कैसा लगेगा।

यह भी नहीं है कि नसीरुद्दीन शाह को भारत में पहली बार डर लगा है। जब से मोदी सरकार आई है समय-समय पर उनका डर बाहर आते रहता है। कभी धर्म संसद के बहाने तो भी गाय के बहाने और कभी किसी अन्य बहाने। यह डर केवल तब प्रकट नहीं होता जब हिंदू काटे जाते हैं। जब लव जिहादी शिकार कर रहे होते हैं…

‘The Wire के इंटरव्यू में मुस्लिमों को नरसंहार का भय दिखाते हुए उन्होंने देश में गृह युद्ध की धमकी दी है। कहा है कि देश में सब कुछ मुस्लिमों को भयभीत करने के लिए हो रहा है। सत्ताधारी दल अलगाववाद को बढ़ावा दे रहा है और औरंगजेब को बदनाम किया जा रहा है। वह उस औरंगजेब की पैरवी कर रहे हैं, जिसने अपने शासनकाल में हिंदुस्तान की जनता पर क्रूरतम अत्याचार किए। अपने राज में हिंदुओं के लिए जिसने बेहद कठोर नियम बनाए। हिन्दुओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराया। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या शाह औरंगजेब और उसके शासनकाल में जो हुआ उससे सहमत हैं? क्या वह अभी भी औरंगजेब वाला हिंदुस्तान चाहते हैं?

इससे पहले इसी साल सितंबर में नसीरुद्दीन शाह ने मोदी सरकार की तुलना नाजी जर्मनी से करते हुए कहा था कि फंडिंग करके अपने समर्थन में फिल्में बनवाई जा रही हैं। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री इस्लामोफोबिया से ग्रसित है। ऐसे कई मौके हाल में आए हैं जब नसीरुद्दीन शाह के बयानों में नरेंद्र मोदी और हिंदुओं का विरोध स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ा है।

यह हिंदू घृणा ही है जिसके कारण नसीरुद्दीन शाह उस देश में अपने बच्चों के भविष्य के लिए एक कपोल कल्पित डर बाँट रहे हैं जिस देश ने मजहब देखे बिना एक अभिनेता के तौर पर उनके काम को सराहा। जिस देश में उनके भाई लेफ्टिनेंट जनरल ज़मीरुद्दीन शाह सेना के डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ तक रहे। ये वही नसीरुद्दीन शाह हैं जिनकी पहली पत्नी मनारा सीकरी एक हिन्दू थीं, जिन्होंने शादी के बाद धर्मांतरण के जरिए इस्लाम अपना लिया था। इसके बाद उन्होंने अपना नाम परवीन मुराद रख लिया था। वे अपने शौहर से 15 वर्ष छोटी हैं। ये वही नसीरुद्दीन शाह हैं जो खुद को ‘नॉन-मजहबी व्यक्ति’ बताते हैं, लेकिन बेटी का नाम हीबा रखा है। उनके और रत्ना पाठक शाह के बेटों का नाम इमाद और विवान है।

असल में नसीरुद्दीन शाह बर्बर मुगलों का महिमामंडन करने की कोशिश नहीं कर रहे, वे हमें याद दिलाते रहे हैं कि वे मुस्लिम ही हैं। उनके भीतर का भी इस्लाम उसी तरह कुलांचे भरता है, जैसे किसी कट्टरपंथी या फिर आतंकी जिसे अ वेडनेसडे में नसीर साहब कॉकरोच बता रहे होते हैं, का उफान मारता है।

यह ‘डर’ अच्छा है और यह ‘डर’ तब तक बना रहना चाहिए, जब तक घर की सफाई पूरी नहीं हो जाती है।