Home Blog Page 3127

16 लाख महिलाओं को ₹1000 करोड़ की मदद, 1000 कन्याओं को 15-15 हजार रुपए भी: प्रयागराज में 2 लाख महिलाओं के कार्यक्रम में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) मंगलवार (21 दिसंबर, 2021) को प्रयागराज के दौर पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने 2 लाख महिलाओं को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूह (SSG) की महिलाओं से संवाद किया और संस्था के बैंक खातों में 1000 करोड़ रुपए डाले, जिससे 16 लाख महिलाओं को मदद मिलेगी। बम्हरौली मैदान में पीएम मोदी का विशेष विमान उतरा, जहाँ से परेड मैदान पहुँच कर उन्होंने आत्मनिर्भर हो रही महिलाओं को सम्मानित किया।

इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने 202 टेक होम राशन प्लांट का भी शिलान्यास किया। ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के 1000 लाभार्थियों के खाते में भी 20 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। हर एक लाभार्थी को 15,000 रुपए मिले। ‘संगम पूजन’ कार्यक्रम के लिए भी पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। महिलाओं को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने और उन्हें इसके लिए ज़रूरी कौशल, संसाधन एवं प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत 80,000 SSG को सामुदायिक निवेश फंड के अंतर्गत 1.10 लाख रुपए हर एक समूह को दिए गए। इसके अलावा 60,000 अन्य SSG को प्रति समूह 15,000 रुपए सरकार की तरफ से प्रदान किए गए। ‘प्रधानमंत्री सखी योजना’ के तहत 20 हजार सखियों के बैंक खातों में चार-चार हजार रुपए ट्रांसफर किए गए। बता दें कि जमीनी स्तर पर वित्तीय (व्यापार अभिकर्ता) सेवाएँ देने का कार्य इन सखियों को सौंपा गया है।

इस दौरान पीएम मोदी ने महिलाओं के साथ संवाद भी किया और बीच में माहौल भावुक भी हो गया। महिलाओं की बातों को उन्होंने शांति से सुना। प्रयागराज में इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी का स्वागत किया। एक ‘बिजली सखी’ ने बताया कि 22 लाख बिजली का बिल उन्होंने जमा करवाया है, जिसका उन्हें कमीशन भी मिला। इन विशेष महिलाओं में 50772 सामुदायिक शौचालय केयर टेकर, 22210 समूह सखी, 6179 बैंक सखी, 54715 बीसी सखी, 8018 आजीविका सखी, 15434 विद्युत सखी, 4040 टेक होम राशन संचालिका, 79500 स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ हैं। 

मंदिर में घुसा और ​हथौड़े से तोड़ दी माँ दुर्गा की मूर्ति: कराची की घटना, पाकिस्तान में 22 महीने में मंदिर पर 9वाँ हमला

पाकिस्तान में एक बार फिर से हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। इस तोड़फोड़ को लेकर भारतीय नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है। भाजपा नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए विदेश मंत्री से इस मुद्दे को उठाने की अपील की है।

जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान के कराची में सोमवार (20 दिसंबर 2021) को एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। पाकिस्तानी समाचार नेटवर्क समा टीवी के अनुसार आरोपित व्यक्ति शाम को कराची के रणछोड़ लाइन इलाके में स्थित एक मंदिर के अंदर पहले घुसा, फिर माँ दुर्गा की मूर्ति को हथौड़े से क्षतिग्रस्त कर दिया।

मंदिर में तोड़फोड़ की घटना की खबर मिलते ही हंगामा मच गया। लोगों ने आरोपित को घटनास्थल पर ही दबोच लिया और उसे स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपित पर ईशनिंदा से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

भारतीय जनता पार्टी के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना की निंदा करते हुए इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ राज्य समर्थित आतंक बताया है। सिरसा ने ट्वीट किया, “पाकिस्तान के कराची में रणछोड़ लाइन में एक और हिंदू मंदिर को अपवित्र कर दिया गया है, हमलावरों ने इस बर्बरता को यह कहते हुए उचित ठहराया कि ‘मंदिर पूजा स्थल होने के योग्य नहीं है’। यह पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के खिलाफ राज्य समर्थित आतंक है।”

एक अन्य ट्वीट में सिरसा ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से अपील करते हुए कहा कि वो सीमा पार हिंदुओं और सिखों की धर्म की स्वतंत्रता का समर्थन करने के लिए इस मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाएँ।

यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में हिन्दूओं के मंदिरों को निशाना बनाया गया है। पिछले 22 महीने में पाकिस्तान में मंदिर पर हमले की ये नौवीं घटना है। इससे पहले अक्टूबर में अज्ञात हमलावरों ने सिंध प्रांत में हनुमान देवी माता मंदिर में भी तोड़फोड़ की थी। वहाँ से वे लोग हजारों रुपए के जेवर और नकदी भी ले गए थे। हाल ही में पाकिस्तान में श्रीलंका के एक नागरिक को ईशनिंदा के आरोप में कट्टरपंथियों ने जिंदा जला दिया था।

लगातार छठी बार जीती भाजपा की पार्षद, KMC में ममता बनर्जी की पार्टी को 133 सीटें, BJP दूसरे नंबर पर: 100 सीटों पर धाँधली के आरोप

हाल ही में ‘कोलकाता नगर निगम (Kolkata Municipal Corporation)’ के लिए चुनाव हुए, जिसमें बमबारी से लेकर धाँधली तक की बातें सामने आईं। मंगलवार (21 दिसंबर, 2021) को इसकी मतगणना हुई, जिसमें ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कॉन्ग्रेस (Trinamool Congress) बड़ी जीत दर्ज करते हुए नजर आ रही है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) दूसरे स्थान पर है। कॉन्ग्रेस (Congress) और वामदलों (Left) का लगभग सफाया हो गया है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर TMC कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाना भी शुरू कर दिया है। जिन भाजपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है, उनमें वार्ड संख्या 23 से विजय ओझा भी शामिल हैं। उन्होंने इसे जनता की जीत बताते हुए कहा कि इस चुनाव की निष्पक्षता के बारे में कहने के लिए कुछ नहीं बचा है, क्योंकि चुनाव के दौरान कई वार्डों में किन-किन तरह की घटनाएँ हुईं – उसके बारे में सबको पता है। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव सही तरीके से कराए जाते तो भाजपा को कहीं ज्यादा सीटें आतीं।

TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी ने इसे एक बड़ी जीत बताते हुए कहा है कि इसका संदेश साफ़ है कि उनके कामकाज को जनता ने सराहा है। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में भाजपा, कॉन्ग्रेस या लेफ्ट कहीं नहीं है। वार्ड संख्या 22 में भाजपा के लिए राहत की खबर आई है, जहाँ मीणा देवी पुरोहित को लगातार छठी बार पार्षद चुना गया। उन्होंने इस पर ख़ुशी जताते हुए इसे जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं की जीत बताया। उन्होंने कहा कि जीत उसी की होगी, जो जनता के लिए कार्य करेंगे।

मीणा देवी पुरोहित ने कहा कि मतदान निष्पक्ष रूप से नहीं कराया गया, क्योंकि अगर ये सही तरीके से कराया गया होता तो भाजपा को और ज्यादा सीटें आतीं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा आरोप लगाया था कि 100 से भी अधिक वार्डों में तृणमूल कार्यकर्ताओं ने जम कर बूथ लूटे और वोट छापे, जिनके इस करतूत में कोलकाता पुलिस भी बराबर की हिस्सेदार थी। उन्होंने कई वीडियो और तस्वीरें भी सबूत के रूप में पेश किए थे। साथ ही प्रशासन के समक्ष धरना भी दिया था।

खबर लिखे जाने तक जहाँ TMC के खाते में 133 सीटें जाती हुई दिख रही थीं, वहीं भाजपा मात्र 4 सीटों पर बढ़त में थी। लेफ्ट और कॉन्ग्रेस 2-2 सीटों पर सिमट गए हैं। तीन सीटें अन्य के खाते में जाती हुई भी दिख रही हैं। ममता बनर्जी ने एक ट्वीट कर के अपनी पार्टी से जीत दर्ज करने वाले सभी पार्षदों को सलाह दी है कि वो काफी कृतज्ञता और तत्परता के साथ जनता के लिए कार्य करें। बता दें कि विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में खूब हिंसा हुई थी।

वैक्सीन सर्टिफिकेट से नहीं हटेगी पीएम मोदी की तस्वीर: केरल HC ने याचिका खारिज कर लगाया ₹1 लाख का जुर्माना

कोरोना वैक्सीन सर्टिफिकेट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर से आपत्ति वाली याचिका को आज (21 दिसंबर 2021) केरल हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस पी वी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि उनके विचार से यह याचिका तुच्छ उद्देश्य से दायर की गई है। कोर्ट ने याचिका को दायर करने की पीछे की मंशा को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया और याचिकाकर्ता के ऊपर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया।

जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि ऐसी याचिकाओं को भारी जुर्माना लगाकर खारिज किया जाना चाहिए। इसलिए यह याचिका 1 लाख रुपए जुर्माने के साथ खारिज की जाती है। अदालत ने माना कि यह कीमत ज्यादा है। लेकिन इस कदम को उठाने से आगे (भविष्य में) तुच्छ याचिकाएँ नहीं डाली जाएँगी। इस जुर्माने को भरने के लिए अदालत ने 6 हफ्तों का समय दिया है। कोर्ट ने कहा देश में हजारों अपराधी अपनी अपीलों की सुनवाई के इंतजार में हैं, हजारों लोग वैवाहिक विवादों के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में कोर्ट को इस याचिका पर जल्द विचार करना चाहिए।

बता दें कि इस याचिका पर एक हफ्ते पहले सुनवाई थी। उस दौरान जस्टिस पी वी कुन्हीकृष्णन ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि आखिर एक सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो होने से क्या दिक्कत है। कोर्ट ने कहा था कि जब जवाहर लाल नेहरू के नाम पर यूनिवर्सिटी हो सकती है तो वैक्सीन सर्टिफिकेट पर पीएम मोदी की फोटो होना क्यों गलत है। अपने बयान में जस्टिस ने कहा था कि जिन देशों ने अपने सर्टिफिकेट पर पीएम की तस्वीर नहीं लगाई उन्हें शायद अपने पीएम पर गर्व नहीं होगा लेकिन हमें है।

जया बच्चन का ‘शाप’ सुना, अब पढ़ लीजिए ऐश्वर्या राय से ED ने क्या-क्या पूछा: पनामा पेपर्स लीक में 7 घंटे चली पूछताछ

पनामा पेपर्स लीक में सोमवार (20 दिसंबर 2021) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन (Aishwarya Rai Bachchan) से पूछताछ की। रिपोर्टों के अनुसार करीब 7 घंटे तक उनसे एजेंसी ने पूछताछ की। उन पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के उल्लंघन का आरोप है। पूछताछ के बाद ऐश्वर्या देर रात मुंबई लौट गईं।

ईडी के अधिकारियों ने ऐश्वर्या राय से लंबी पूछताछ के दौरान एमिक पार्टनर्स के बारे में जानने की कोशिश की। पूछा कि दस्तावेज में सामने आई कंपनी से उनका क्या संबंध है। ईडी ने पूछा कि एमिक पार्टनर्स 2005 में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में निगमित और पंजीकृत कंपनी थी। इस कंपनी के साथ उनका क्या संबंध हैं? क्या वह उस कानूनी फर्म के बारे में जानती हैं जहाँ मोसैक फोन्सेका ने कंपनी को पंजीकृत किया था? इस कंपनी के निदेशकों में ऐश्वर्या, उनके पिता कृष्णाराज राय, माँ वृंदा राय और भाई आदित्य राय शामिल थे। इसके बारे में भी ऐश्वर्या से पूछा गया। ऐश्वर्या से ये भी जानने की कोशिश की गई कि जून 2005 में उनके स्टेटस को शेयरहोल्डर के रूप में क्यों बदला गया? वहीं, 2008 में कंपनी को निष्क्रिय करने की वजह से लेकर लेन-देन में आरबीआई की अनुमति से जुड़े सवाल भी पूछे गए।

दैनिक भास्कर ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि एजेंसी ने ऐश्वर्या से पूछा कि उन्होंने किन कारणों से वह कंपनी केवल 1500 डॉलर में बेच दी, जिसे 50 हजार डॉलर में खरीदा गया था। बच्चन परिवार की बहू बनने के बाद इसे बंद करने की वजह को लेकर भी सवाल किए।

सोमवार को सपा सांसद और ऐश्वर्या राय की सास जया बच्चन संसद में काफी बौखलाई नजर आईं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ निजी टिप्पणी की गई है। आक्रोशित जया बच्चन ने कहा, “मुझ पर निजी हमला किया गया। आप लोगों के बुरे दिन बहुत जल्दी आने वाले हैं। मैं आपको श्राप देती हूँ कि आप लोगों के बुरे दिन आएँगे। 

उल्लेखनीय है कि पनामा पेपर्स मामले की लंबे समय से जाँच चल रही है। ED के अधिकारी देश की कई बड़ी हस्तियों को जाँच में शामिल कर चुके हैं। इसी कड़ी में एक महीने पहले अभिषेक बच्चन भी ED कार्यालय में पहुँचे थे। वे कुछ दस्तावेज भी ED अधिकारियों को सौंप चुके हैं।

स्वर्ण मंदिर में जिसे पीट-पीटकर मार डाला उसे सिख महिला सांसद ने बताया ‘हिंदू आतंकवादी’, विवादों में घिरी तो डिलीट किया ट्वीट

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में हुई घटना को ‘हिंदू आतंकवाद’ कहने वाली ब्रिटिश सिख सांसद प्रीत कौर गिल ने अब अपना ‘विवादित’ ट्वीट डिलीट कर दिया है। ये कदम उन्होंने ब्रिटिश हिंदुओं का विरोध और नेटीजन्स का गुस्सा देखने का बाद उठाया। 

अपने विवादित ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि हिंदू आतंकवादी को स्वर्ण मंदिर में सिखों के खिलाफ हिंसा के कृत्य से रोक दिया गया। इसी ट्वीट के बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई। जगह-जगह ट्वीट के स्क्रीनशॉट शेयर होने लगे। कई हिंदुओं ने इस पर आपत्ति जताई। भारतीय उच्चायोग की ओर से भी ब्रिटिश सांसद की टिप्पणी को अस्वीकार किया गया। 

हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन की अध्यक्ष तृप्ति पटेल ने कहा, “हिंदू समुदाय के लोग ये ट्वीट देखने के बाद हैरान हैं…। उन्होंने बिन किसी तथ्य को जाँचे उन बातों पर यकीन किया और हिंदू विरोधी फर्जी न्यूज फैलाई जबकि वो जानती थीं कि हिंदू सिर्फ आत्मरक्षा में एक्शन लेते हैं और कभी किसी को नहीं मारते।” इसी तरह ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में नस्लवाद का शिकार हुईं रश्मि सामंत ने भी इस घटना पर ब्रिटिश सांसद की निंदा की।

ऐसे ही विरोध और आलोचनाएँ झेलने के बाद प्रीत कौर ने अपने ट्वीट को डिलीट किया। इसके बाद उन्होंने एक अन्य ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा था, “इस तरह से किसी भी पूजा स्थल या समुदाय को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। श्री हरमिंदर साहिब से भयानक दृश्य देखने को मिले हैं।”

प्रीत कौर गिल ने मामले को हिंदू आतंकवाद से जोड़कर पहले जो ट्वीट किया उसे हटाने के बाद उन्होंने लिखा, “बेअदबी की घटना अस्वीकार्य हैं लेकिन दूसरे बंदे की लिंचिंग भी बर्दाश्त योग्य नहीं है। किसी को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। हमें इस मामले में पूरे इंक्वॉयरी चाहिए।”

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार गिल ने अपनी गलती मानने की बजाय उन लोगों को नफरत से भरा और विभाजनकारी बताया जिन्होंने उनके ट्वीट के ऊपर सवाल उठाए। वह बोलीं, “मैंने अपने ट्वीट पोस्ट किए हैं। लेकिन अगर लोगों को मेरे डिलीट किए गए पोस्ट पर भी ध्यान देना है तो उनका अलग एजेंडा है जो नफरत से भरा और विभाजनकारी है।” उनका आरोप है कि उन्हें लगातार एक ट्वीट के लिए ट्रोल किया जा रहा है।

गौरतबल है कि 18 दिसम्बर (शनिवार) को पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में युवक को गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी के आरोप में मार डाला गया था। हत्या बड़ी बेरहमी से की गई थी। बताया गया था कि मौत से पहले 25 वर्षीय उस अज्ञात युवक की उँगलियों को तोड़ डाला गया था। इसी के साथ उनके सिर पर कड़े से वार किए गए थे। मौत के बाद भी बाहर जमा भीड़ उसकी लाश लेने के लिए हंगामा कर रही थी।

इस मामले की निंदा करने बजाय राजनेताओं ने युवक के विरुद्ध ही अपने बयान जारी किए थे। कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब में एक जनसभा के दौरान खुलेआम धर्मग्रंथों की बेअदबी करने वालों को फाँसी की पैरवी की थी। उनका कहना था, “भगवत गीता, कुरान या गुरुग्रंथ साहिब में से किसी की भी बेअदबी करने वाले को सरेआम फाँसी पर लटका देना चाहिए। इन हरकतों को गलती नहीं बल्कि एक कौम को दबाने की साजिश के रूप में माना जाना चाहिए। ये हमारी जड़ों में दीमक लगाना चाह रहे हैं लेकिन इन्हे सफल नहीं होने दिया जाएगा।”

‘माँ की कोख और कब्र ही सुरक्षित’: 11वीं की छात्रा फंदे से लटक गई, सुसाइड नोट में लिखा- न रिश्तेदारों पर भरोसा करो, न शिक्षकों पर

“Stop Sexual harassment, न तो शिक्षकों पर भरोसा करो और न ही रिश्तेदारों पर… लड़कियों के लिए बस अब माँ की कोख और कब्र ही सुरक्षित रह गई है। हर माँ-बाप को अपने बच्चों और लड़कों को सिखाना चाहिए कि लड़कियों का सम्मान करें।”

ये बेहद भावुक कर देने वाली पंक्तियाँ हैं एक सुसाइड नोट की। 11वीं क्लास में पढ़ने वाली इस लड़की ने खुदकुशी कर ली है। ये मामला चेन्नई के बाहरी इलाके का है। पुलिस ने बताया कि 11वीं क्लास में पढ़ने वाली छात्रा शनिवार (18 दिसंबर 2021) को छत से लटकती पाई गई थी। 

सिर्फ माँ की कोख और कब्र ही सुरक्षित

पुलिस को छात्रा के कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है। वायरल हो चुके इस सुसाइड नोट में लिखा है, “सिर्फ माँ की कोख और कब्र ही सुरक्षित रह गई है।” जब छात्रा को उसके माता-पिता ने छत से लटका हुआ पाया तो वे हैरान रह गए। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुँच छात्रा के रूम की तलाशी ली। इसी दौरान पुलिस के हाथ सुसाइड नोट आया।

पुलिस ने लड़की के दोस्तों से पूछताछ की। इस दौरान जानकारी मिली कि हाल के दिनों में उसने खुद को दोस्तों से दूर कर लिया था। वह गुमसुम रहने लगी थी। उसका सुसाइड नोट झकझोरने वाला है। इसमें छात्रा ने अपनी उस पीड़ा को बताया है, जिससे वह पिछले कुछ दिनों से गुजर रही थी। उसने ‘Justice for me’ के साथ सुसाइड नोट का अंत किया है।

‘बुरे सपने आते थे, सो नहीं पाती थी’

इस नोट की शुरूआत ‘Stop Sexual Harrasment’… इन शब्दों के साथ होती है। लड़की ने पत्र में लिखा है कि अब वह और बर्दाश्त नहीं कर सकती है। लिखा है कि वो इतने दर्द में है कि उसे कोई ढाढस भी बँधा नहीं सकता। अब पढ़-लिख पाने की क्षमता उसके अंदर नहीं रह गई है, उसे बार-बार बुरे सपने आते हैं जो उसे सोने नहीं देते थे।  

इस नोट में लिखा गया है, “हर माता-पिता को अपने बेटों को लड़कियों का सम्मान करना सिखाना चाहिए। रिश्तेदारों या शिक्षकों पर भरोसा न करें। एकमात्र सुरक्षित स्थान माँ की कोख और कब्रिस्तान है।” पत्र में यह भी कहा गया है कि स्कूल भी लड़कियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। इस केस की जाँच के लिए मांगडू पुलिस ने 4 स्पेशल टीम बनाई है। ये टीम छात्र के फोन डिटेल समेत कई चीजों की जाँच कर रही है। उसके नंबर पर जिनके कॉल बार-बार आए थे पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। 

पॉक्सो एक्ट के तहत एक गिरफ्तार

मामले में मांगडू पुलिस ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत एक 21 वर्षीय छात्र को गिरफ्तार किया है। उस पर पॉक्सो एक्ट, तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम की धारा 4 के साथ-साथ आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस के मुताबिक युवक ने कबूल किया है कि उसने नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। पिछले दो हफ्तों से वह उसे परेशान और प्रताड़ित कर रहा था। साथ ही गंदे मैसेज और तस्वीरों के आदान-प्रदान का भी पता चला है। इस सब से पहले आठ महीने तक उनके बीच अच्छे- दोस्ताना संबंध थे। मामले की जाँच कर रहे एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीन साल पहले जब लड़की 8वीं कक्षा में थी, तब लड़का उसी स्कूल में 11वीं कक्षा में था। वह बाद में बालिका विद्यालय चली गई, लेकिन दोनों इंस्टाग्राम पर दोस्त बन गए।

पुलिस के मुताबिक दोनों की फोन पर बातचीत होती थी। लड़की को लेकर आरोपित कई जगहों पर गया और कई बार उसका यौन शोषण किया। पुलिस का कहना है कि लड़की के इतना बड़ा कदम उठाने से कुछ दिन पहले कहासुनी हुई थी। लड़के ने लड़की की मौत के एक दिन बाद भी उसे मैसेज किया था। 

स्कूलों में अब जुमे की छुट्टी नहीं: 98% मुस्लिम आबादी वाले लक्षद्वीप में शुक्रवार को बंद रहते थे स्कूल, दशकों बाद बदला नियम

लक्षद्वीप एक मुस्लिम बहुल (98 फीसद) केंद्र शासित प्रदेश है, जहाँ दशकों से शुक्रवार के दिन छात्रों को स्कूल में अवकाश दिया जाता था। हालाँकि, अब यह नियम बदल दिया गया है। हर जगह की तरह द्वीप के स्कूलों में भी छुट्टी शुक्रवार को नहीं रविवार को दी जाएगी। लक्षद्वीप एजुकेशन डिपार्टमेंट ने एक नया कैलेंडर बनाते हुए सभी स्कूलों के लिए शुक्रवार को वर्किंग डे और रविवार को छुट्टी देने का ऐलान किया है।

इस मसले पर निर्णय लेने के लिए कई जगह प्रशासन को सराहा जा रहा है। लोगों का कहना है लक्षद्वीप भारत का हिस्सा है और यहाँ भारत जैसे ही नियम होने चाहिए। लेकिन, इसी बीच लक्षद्वीप में कुछ लोग इसके विरोध में भी हैं। जैसे- सांसद मोहम्मद फैजल ने कहा कि 6 दशक पहले शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जब द्वीपों में स्कूल खुले थे, तो शुक्रवार को छुट्टी करने का फैसला किया गया था और शनिवार को हाफ डे होता था। हालिया फैसला स्कूलों के किसी भी निकाय, जिला पंचायत या स्थानीय सांसद के साथ चर्चा किए बगैर लिया गया है।

फैजल ने पीटीआई से कहा, “ऐसा निर्णय जनता के अधिकार के लिए उचित नहीं है, यह प्रशासन का एकतरफा फैसला है। जब कभी स्थानीय व्यवस्था में ऐसे बदलाव लाए जाते हैं तो लोगों से चर्चा होनी चाहिए।” इसी तरह लक्षद्वीप जिला पंचायत के उपाध्यक्ष और पार्षद पीपी अब्बास ने लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के सलाहकार को पत्र लिखकर इस निर्णय पर दोबारा विचार करने को कहा है।

वहीं आधिकारिक सूत्रों की मानें तो प्रशासन ने ‘संसाधनों का उचित उपयोग और सीखने की प्रक्रिया की आवश्यक योजना’ सुनिश्चित करने के लिए स्कूल के समय और नियमित स्कूल गतिविधियों को संशोधित किया है।

नए कानून बनने का हो चुका है विरोध

बता दें कि लक्षद्वीप में लाए जा रहे बदलावों के विरोध में पहली दफा आवाजें नहीं उठीं। इसी वर्ष मई माह में जब लक्षद्वीप के नए प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल द्वारा नए सुधारों और नए नियमों को लाने का आदेश जारी हुआ था, उस समय भी ऐसा सियासी भूचाल आया था। लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल खोड़ा द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों का कॉन्ग्रेस समेत सभी विपक्षी दल कड़ा विरोध कर रहे थे। उनका दावा था कि नए नियम द्वीप पर रहने वाली मुस्लिम आबादी की धार्मिक भावनाओं को आहत करेंगे। इन कानूनों में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो संतान का नियम, गाय और बैल के अवैध कत्ल पर बैन और पर्यटन को बढ़ाने के लिए शराब की बिक्री शुरू करने की बातें शामिल है।

‘IAS अधिकारी का पाँव छू रहे हैं PM मोदी, काशी कॉरिडोर की शिल्पकार’: सोशल मीडिया पर वायरल फोटो की सच्चाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का लोकार्पण कर देश को समर्पित किया। उस दिन प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम में आई एक महिला के पैर छूकर उन्हें नमन किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पीएम मोदी द्वारा एक महिला के पाँव छूते हुए एक तस्वीर वायरल हो रही है। इसके लिए लोग पीएम की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

साभार: ट्विटर

हालाँकि, कुछ सोशल मीडिया पर कन्फ्यूजन के चक्कर में लोगों ने उक्त महिला को राजस्थान की IAS अधिकारी आरती डोगरा समझ लिया। दावा तो यहाँ तक किया गया कि आरती डोगरा ही काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की शिल्पकार थीं। इस तरह का मैसेज व्हाट्सएप पर भी वायरल हो रहा है।

पोस्ट क्या कहती है?

पोस्ट में लिखा है, “आईएएस अधिकारी आरती डोगरा काशी विश्वनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार के मामले में मुख्य वास्तुकार थीं। वो दिव्यांग हैं। मोदीजी उन्हें इस महान कार्य के लिए सलाम कर रहे हैं।” हालाँकि, वायरल पोस्ट में जिन बातों का जिक्र किया गया है, हकीकत उससे कहीं अलग है।

वॉट्सऐप मैसेज में दावा किया गया है कि पीएम से मुलाकात करने वाली महिला काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की मुख्य वास्तुकार थीं।

कौन है वो महिला जिसके पैर पीएम ने छुए

दरअसल, जिस महिला को लोग आरती डोगरा समझ रहे हैं वो काशी के ही सिगरा की रहने वाली शिखा रस्तोगी हैं। वो दिव्यांग हैं और पीएम मोदी से मिलने आई थीं। 40 वर्षीय शिखा 10वीं पास हैं। शिखा को घर में रहकर अपनी पढ़ाई करनी पड़ी थी क्योंकि काशी के स्कूलों में वो सुविधाएँ ही नहीं थीं जो उनके लिए एक स्कूल में पढ़ना संभव बना सकती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की नींव रखी थी तब पहली बार वो शिखा से मिले थे और उन्हें कॉरिडोर के भीतर एक दुकान का वादा किया था। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार पीएम ने शिखा से किया वादा पूरा कर दिया है। उन्होंने बताया कि शिखा को कॉरिडोर के भीतर एक दुकान आवंटित की गई है।

यूपी टाक को दिए इंटरव्यू में शिखा ने बताया कि 13 दिसंबर को कार्यक्रम में देखते ही पीएम मोदी ने उन्हें तुरंत पहचान लिया। उन्होंने कहा, “जैसा कि पीएम मोदी किसी को अपने पैर छूने नहीं देते जब मैंने उनके पैर छुए, तो सम्मान के तौर पर उन्होंने वापस मेरे पैर छुए।”

कौन हैं आरती डोगरा?

वहीं आरती डोगरा वर्तमान में राजस्थान में कार्यरत एक आईएएस अधिकारी हैं। वह मुख्यमंत्री कार्यालय में राजस्थान के सीएम की विशेष सचिव हैं।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के मुख्य वास्तुकार कौन हैं?

बिमल पटेल काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के मुख्य वास्तुकार हैं। अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से लेकर दिल्ली की सेंट्रल विस्टा परियोजना तक 58 वर्षीय पटेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परियोजनाओं के वास्तुकार रहे हैं।

‘गरीबों को पैसों का लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा, हम ऐसा नहीं होने देंगे’: कर्नाटक सीएम बसवराज बोम्मई

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (CM Basavaraj Bommai) ने सोमवार (20 दिसंबर 2021) को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) द्वारा आयोजित एक समारोह में लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ”हमारी सरकार जल्द ही धर्मांतरण विरोधी कानून लाएगी। सत्तारूढ़ भाजपा सरकार प्रदेश में असहाय लोगों का धर्मांतरण नहीं होने देगी।”

इस दौरान सीएम ने कहा, “प्रदेश के निर्दोष लोगों का धर्म परिवर्तन किया जा रहा है। उन्हें पैसे और वित्तीय सहायता का प्रलोभन दिया ​जाता है। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन केवल लोगों की संख्या बढ़ाने के लिए नहीं है, इस मानसिकता को बदलना होगा। यह शुरू में लुभाता है, लेकिन आखिर में समाज को प्रभावित करेगा। हमारी सरकार, हमारा देश ऐसा नहीं होने देगा। हमारे समाज में गरीबी को भुनाने की कोशिश हो रही है।”

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो लोगों को धर्मांतरण के लिए लुभाने की सुविधा देता हो। संविधान में इसकी कोई गुंजाइश नहीं है, जो लोग धर्मांतरण विरोधी विधेयक का विरोध कर रहे हैं, वे 2019 में इसे लागू करने के लिए तैयार थे। अब वे राजनीतिक मजबूरियों से बँधे हैं। राज्य सरकार इस बर्बरता को रोकने के लिए निर्णायक कदम उठाएगी।

बता दें कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात की तर्ज पर अब कर्नाटक (Karnataka) सरकार भी धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की तैयारी कर रही है। इस कानून के लागू होते ही धर्मांतरण करने वाले पिछड़े समुदाय और अनुसूचित जाति के लोगों को सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं, शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकेगा।

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई (CM Basavaraj Bommai) ने 12 दिसंबर को संकेत दिया था कि जल्द ही धर्मांतरण रोधी विधेयक (Anti Conversion Bill) के मसौदे को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दी जाएगी और इसे बेलगावी में विधानसभा (Belagavi Assembly) के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है।