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कॉफी, इनरवियर, फुटवियर… मुंबई एयरपोर्ट पर उतरीं केन्या की 18 महिला, जाँच हुई तो हर जगह से निकला सोना

मुंबई इंटरनेशल एयरपोर्ट (Mumbai Airport) पर केन्या से आई कुछ महिलाओं की तलाशी लेने पर सीमा शुल्क अधिकारियों (Custom Officer) ने 3.8 किलो सोना जब्त किया। इसकी कीमत लगभग 1.52 करोड़ बताई जा रही है। केन्याई महिलाएँ अंडरगारमेंट और कॉफी की बोतल में छुपाकर सोना लाई थीं। कस्टम टीम ने शक होने पर उनकी तलाशी ली और पूरा मामला सामने आया। केन्याई महिलाओं (Kenyan Women) का यह ग्रुप शारजाह से आया था।

कस्टम अधिकारी हवाई अड्डे पर चेकिंग कर रहे थे, तभी उन्हें महिलाओं पर शक हुआ। तलाशी लेने पर उनके पास से तार, बिस्कुट और पाउडर के रूप में कॉफी की बोतलों, इनरवियर की लाइनिंग, फुटवियर और मसाला बोतलों से सोना बरामद हुआ। इनमें से एक को गिरफ्तार कर लिया गया है, क्योंकि वह बड़ी मात्रा में सोना ले जा रही थी, जबकि अन्य को सोने जब्त कर जाने दिया गया। बताया जा रहा है कि महिलाएँ किसी तस्करी के गिरोह का हिस्सा नहीं हैं। गरीब परिवारों की महिलाएँ कीनिया से सस्ते दाम में सोना खरीदकर लाईं थीं और उसे मुंबई में ऊँचे दाम पर बेचना चाहती थी। 

पिछले साल चॉकलेट के डिब्बे से जब्त किया गया था सोना

पिछले साल मुंबई एयरपोर्ट पर ही कस्टम अधिकारियों ने सोने की तस्करी के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार कर उसके पास से 481 ग्राम सोना जब्त किया था। यह महिला चॉकलेट के डिब्बे में कार्बन पेपर से रैप कर दुबई से सोना लाई थी। स्कैनिंग के दौरान सोने का पता चला था।

शादीशुदा यासीन ने घर में घुस कर नाबालिग लड़की का किया रेप, 4 बच्चों का है बाप: अक्सर करता था परेशान, FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार की खबर सामने आई है। ये मामला सिहानी गेट पुलिस थाना क्षेत्र का है। नाबालिग लड़की की माँ सरोज देवी ने इस सम्बन्ध में पुलिस के समक्ष शिकायत की, जिसके आधार पर FIR भी दर्ज कर ली गई है। पीड़ित परिवार लोहिया नगर स्थित आंबेडकर कॉलोनी में रहता है। महिला ने बताया कि उनके और उनके पति महेश की एक 14 साल की बेटी है, जिसके साथ यासीन उर्फ़ पप्पू नाम के व्यक्ति ने जबरन अवैध सम्बन्ध बनाए।

इसी शिकायत के आधार पर दर्ज हुई FIR

महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि आरोपित शादीशुदा है और चार बच्चों का पिता भी है। पीड़ित परिवार और आरोपित का घर आसपास ही है, अर्थात दोनों पड़ोसी हैं। आरोपित को एक असामाजिक व्यक्ति बताते हुए शिकायत में कहा गया है कि वो नाबालिग लड़की को हमेशा परेशान करता था। घर पर फोन कॉल कर के भी परेशान करता था। साथ ही उसने लड़की के साथ अवैध सम्बन्ध भी बनाए। किसी को बताने पर जान से मार डालने की धमकी भी दी।

आरोपित यासीन उर्फ़ पप्पू

पुलिस ने इस मामले में ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-376 (किसी महिला के साथ जबरन शारीरिक सम्बन्ध बनाना), 506 (आपराधिक धमकी) और 452 (बिना अनुमति किसी के घर में घुस कर नुकसान पहुँचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा ‘लैंगिक अपराध से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO)’ एक्ट भी लगाया गया है। ये FIR सोमवार (20 दिसंबर, 2021) को रात साढ़े 11 के करीब दर्ज की गई। आरोपित की उम्र लगभग 45 वर्ष है।

6 बॉल डालने में फूलने लगती थी साँस, संन्यास की सोच रहे थे अश्विन; बताया- कैसे कुलदीप यादव को प्रमोट कर रवि शास्त्री ने तोड़ा

टेस्ट क्रिकेट में रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) विकेट लेने के मामले में लगातार नए रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं। इस मामले में भारत में अब उनसे आगे केवल अनिल कुंबले और कपिलदेव ही हैं। टीम इंडिया (India Cricket team) के अनुभवी ऑफ स्पिनर आर अश्विन ने एक इंटरव्यू में कई चौंकाने वाले खुलासे​ किए हैं। उन्होंने बताया है कि 2018 से 2020 के बीच वह क्रिकेट से संन्यास लेने के बारे में सोच रहे थे। इस दौरान वे चोटिल थे और कोई भी खिलाड़ी उनका सपोर्ट नहीं कर रहा था।

35 वर्षीय इस खिलाड़ी ने खुलासा किया है कि एक वक्त ऐसा भी आया था जब सिर्फ 5-6 बॉल डालने के बाद एथलेटिक प्यूबल्जिया और पेटेलर टेंडोनाइटिस (athletic pubalgia and the patellar tendonitis) के कारण उनकी साँस फूलने लगती थी। लेकिन अब वह उस चीज से उबर गए हैं।

ईएसपीएन क्रिकइन्फो को दिए इंटरव्यू में रविचंद्रन अश्विन ने बताया कि 2018 और 2020 के बीच ऐसा वक्त आया था जब वह क्रिकेट से संन्यास लेने की सोचने लगे थे। अश्विन ने कहा कि उस समय मुझे यही लगता था कि खेल को छोड़ देना चाहिए। मैं काफी कोशिश कर रहा था, लेकिन सफल नहीं हो रहा था। मैं जितना ट्राई करता था, उतनी ही चीजें मुश्किल हो रही थीं।

उन्होंने बताया कि 5-6 बॉल डालते ही उनकी साँस फूल जाती थी। उसके बाद लगातार दर्द होता था। उस समय उन्हें एक ब्रेक की जरूरत होती थी। जब उनके घुटने में दर्द बढ़ता तो उसके बाद वे कम उछलते थे। उनकी कमर, कंधों में तकलीफ होने लगती थी। बढ़ती उम्र की वजह से फिटनेस को कंट्रोल में रखना काफी मुश्किल हो रहा था।  

अश्विन ने यह भी बताया कि उनकी चोट को लेकर खिलाड़ी संवेदनशील नहीं थे और कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया। भारतीय टीम में कई खिलाड़ियों पर भरोसा जताया गया, लेकिन अश्विन के साथ ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि कई खिलाड़ियों पर भरोसा जताया गया, तो मुझ पर क्यों नहीं। मैंने कुछ कम नहीं किया। मैंने टीम को कई मैच जिताए, लेकिन मुझ पर भरोसा नहीं जताया गया।”

जब कुलदीप यादव ने सिडनी में पाँच विकेट झटके थे, उस समय रवि शास्त्री ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें भारत का नंबर 1 विदेशी स्पिनर बताया था। इसको लेकर आप पर कोई प्रभाव पड़ा? इस सवाल के जवाब में अश्चिन ने कहा, “हर किसी का समय आता है। उस समय मुझे यही लगा कि किसी और का समय आ गया और मेरा चला गया।” तमिलनाडु के इस स्पिनर ने कहा, “मैं रवि भाई का बहुत सम्मान करता हूँ। हम सब करते हैं। मैं समझता हूँ कि वह हमें कुछ भी कह सकते हैं, लेकिन उस समय मुझे बहुत दुख पहुँचा। मैं बेहद छोटा महसूस कर रहा था। आप मुझे कुछ भी कह सकते हैं या आप मुझे बाहर निकाल सकते हैं, जो की ठीक है, लेकिन आप मेरे इरादे या मेरे संघर्ष पर संदेह नहीं कर सकते हैं। यह सब मेरे लिए पीड़ादायक था। हम सभी के लिए अपने साथियों की सफलता मायने रखती है। मैं कुलदीप के लिए बहुत खुश था, क्योंकि मैं पाँच विकेट हासिल नहीं कर पाया था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उसका पाँच विकेट लेना काफी शानदार था। मैं अच्छी गेंदबाजी के बावजूद 5 विकेट झटकने में नाकामयाब रहा। इसलिए मैं वास्तव में उसके लिए खुश था।”

इंटरव्यू के दौरान अश्विन ने अपनी पत्नी और अपने पिता से मिले सपोर्ट के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि पिता और पत्नी को उन पर पूरा भरोसा था। पिता को लगता था कि उनका बेटा भारत के लिए फिर से टेस्ट क्रिकेट खेलेगा। हालाँकि, इसके बाद अश्विन ने शानदार वापसी की और टी-20 वर्ल्डकप में भी भारतीय टीम में जगह बनाई। टेस्ट में अश्विन टीम इंडिया के सबसे अहम खिलाड़ियों में से एक हैं। भारत के मुख्य स्पिनर होने के साथ ही अश्विन ने कई बार बल्ले के साथ भी कमाल किया है और भारत को मैच जिताए हैं। 26 दिसंबर से सेंचुरियन (Centurion) में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट मैच में अश्विन भी भारत की ओर से खेलने के लिए तैयार हैं।

बता दें कि अश्विन ने 2018 से 2020 के बीच कुल 18 टेस्ट मैच खेले और 24.26 की औसत से 71 विकेट लिए। उन्होंने इस अवधि के बीच विदेशों में भी 10 टेस्ट मैच खेले और 27.02 की औसत से 37 विकेट लिए। कुल मिलाकर अश्विन ने भारत के लिए 81 टेस्ट मैच खेले हैं और 24.12 की शानदार औसत से 427 विकेट झटके हैं। बात करें वर्ष 2021 की तो रविचंद्रन अश्विन के लिए यह वर्ष काफी बेहतरीन रहा है। इस दौरान उन्होंने सिर्फ 8 मैच में 52 विकेट लिए। इसी साल अश्विन ने टेस्ट विकेट लेने के मामले में हरभजन सिंह और वसीम अकरम को पीछे छोड़ा है।

राहुल गाँधी ने नहीं सुना था ‘लिंचिंग’ शब्द, क्योंकि 2014 से पहले इसे ‘बड़ा पेड़ गिरने पर धरती हिलना’ कहते थे: भूले गोधरा और कश्मीर

मोदी सरकार (Modi Government) पर निशाना साधते हुए राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) का कहना है कि 2014 से पहले ‘लिंचिंग’ (Mob Lynching) शब्द सुनने में भी नहीं आता था। आइए, उन्हें इतिहास-बोध का भान कराएँ। जिस कॉन्ग्रेस (Congress) पार्टी के नेताओं के नाम 1984 के सिख नरसंहार में सामने आए हों, उनके मुँह से ये चीजें वैसे भी शोभा नहीं देतीं। इन्होंने ‘लिंचिंग’ का नाम नहीं सुना था, क्योंकि इनकी भाषा में इसे ‘बड़े पेड़ गिरने के बाद धरती का हिलना’ कहते हैं।

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और कपूरथला के निजामपुर गुरुद्वारे में दो युवकों की मॉब लिंचिंग के बाद ये शब्द फिर से चर्चा में है। पंजाब में कॉन्ग्रेस की सरकार है, लेकिन इन घटनाओं के लिए राहुल गाँधी भाजपा को दोषी मान रहे। नेताओं ने निंदा भी बेअदबी की ही की है, जिसके आरोप में हत्याएँ हुईं। इनमें इतनी हिम्मत नहीं कि हत्या की निंदा करें। सरकार और प्रशासन इनका है, लेकिन ‘मॉब लिंचिंग’ के लिए ये 2014 से पहले और 2014 के बाद वाली तुलना कर रहे।

जिस तरह से झारखंड में चोर तबरेज आलम, राजस्थान में पहलू खान और उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश में मोहम्मद अख़लाक़ की हत्या के मामले को उछालते हुए इन सब में हिन्दू धर्म को बदनाम करने वाला सांप्रदायिक मोड़ दिया गया, ‘मॉब लिंचिंग’ के शब्द को भी हिन्दुओं से जोड़ने की साजिश का हिस्सा भी यही घटनाएँ थीं। ये अलग बात है कि नालंदा में शुभम पोद्दार, कासगंज में चन्दन गुप्ता या फिर दिल्ली दंगों में अंकित शर्मा की हत्या इनके लिए ‘मॉब लिंचिंग’ की श्रेणी में नहीं आती।

या तो राहुल गाँधी का इतिहास बोध कमजोर हो गया है या फिर उन्हें इतिहास का ज्ञान ही नहीं है। ये भी हो सकता है कि वो जानबूझ कर ऐसा बोल रहे हों, ताकि लोग ये भूल जाएँ कि अपराध के मामले में अव्वल राजस्थान में उनकी ही पार्टी की सरकार है। इसीलिए, हमारा फर्ज बनता है कि हम उनकी पार्टी के शासनकाल में हुए ऐसे नरसंहारों की उन्हें याद दिलाएँ, जिनमें सीधे गाँधी परिवार और कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम सामने आए। ऐसी एक घटना नहीं है, लेकिन प्रमुख घटनाओं की तो चर्चा हम कर ही सकते हैं।

एक और बात ये भी है कि पहले ये चीजें सुनने में इसीलिए भी नहीं आती होंगी, क्योंकि तब सोशल मीडिया का जमाना नहीं था। सरकारी टेलीविजन पर देश-दुनिया वही सुनती-देखती थी, जो कॉन्ग्रेस चाहती थी। अभी भी नैरेटिव बनाने वाला पूरा का पूरा गिरोह कॉन्ग्रेस के हाथों में खेलता है, जिसमें ‘खान मार्किट’ का पत्रकार से लेकर लिबरल-सेक्युलर गिरोह के कथित एक्टिविस्ट्स शामिल हैं। अब सोशल मीडिया पर आम लोग आवाज़ उठा सकते हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस को बेचैनी हो रही है।

1966 में गोरक्षक साधुओं पर कहर बन कर चली थीं कॉन्ग्रेसी गोलियाँ

आज से 56 साल पहले 7 नवंबर, 1966 को (विक्रम संवत में कार्तिक शुक्ल अष्टमी, जिसे गोप अष्टमी भी कहते हैं) इंदिरा गाँधी की सरकार ने निहत्थे साधु-संतों के नेतृत्व में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की लोकतांत्रिक तरीके से माँग कर रही हजारों की भीड़ पर गोली चलवाई, आँसू गैस के गोले छोड़े, लाठियाँ बरसवाईं। यानी, दमन के वह सभी हथियार जनता को दोबारा चखने को मिले जिनको ब्रिटिश छोड़ कर गए थे, और जिनसे मुक्ति के सब्ज़बाग दिखाकर इन्हीं कॉन्ग्रेसी नेताओं ने आम आदमी को आज़ादी की लड़ाई में जोता था।

संसद भवन के बाहर उन्हें रोक दिया गया और साधु-संतों ने अंदर बैठे सत्ताधीशों को निशाने पर लेकर इकठ्ठा भीड़ को सम्बोधित करना शुरू कर दिया। इसके पहले काफ़ी समय से माँग की जा रही थी कि संविधान के उन हिस्सों, जिन पर अमल करना सरकार के लिए जरूरी नहीं, से गौ-रक्षा को सरकार असली, ठोस नीति के रूप में कानून की शक्ल दे। शांतिपूर्वक चल रही रैली की भीड़ तब उत्तेजित हो गई जब पता चला कि भारतीय जनसंघ के सांसद स्वामी रामेश्वरानंद को “अगरिमापूर्ण आचरण” के आरोप में संसद से धक्के मारकर निकाल दिया गया है।

इसमें मरने वालों की संख्या पर बहुत विवाद है- सरकारी आँकड़े जहाँ महज़ 7 या 8 लोगों के मारे जाने की बात स्वीकारते हैं (और 500 से अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की बात अगले ही दिन एक अखबार में छपी थी)। संघ विचारक केएन गोविंदाचार्य इस आँकड़े को 200 से ज्यादा बताते हैं। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों का दावा है कि असल में 5000 से अधिक लोगों ने जान गँवाई थी, और उन्हें बिना निशान की कब्रों में सरकार ने दफन करा दिया। 209 राउंड पुलिसिया गोलीबारी की बात तब भी सामने आई थी।

1984: जब राजीव गाँधी के शब्दों में ‘बड़ा पेड़ गिरने से हिली थी धरती’

कॉन्ग्रेस के लिए सिखों की जान का कोई महत्व नहीं था, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के नाम इसमें सामने आए थे और उनके उत्तराधिकारी राजीव गाँधी ने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती ही है। आज भी सज्जन कुमार इस मामले में जेल में हैं, जो कॉन्ग्रेस के बड़े नेता थे। दिल्ली कॉन्ग्रेस में सक्रिय जगदीश टाइटलर हों या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कमलनाथ, इन ऐसे कई कॉन्ग्रेस नेताओं पर नरसंहार में शामिल होने के आरोप लगे।

इसी नरसंहार की पीड़ितों को न सिर्फ न्याय दिलाने के लिए मोदी सरकार प्रयास कर रही है, बल्कि मृतकों के आश्रितों को वित्तीय सहायता भी मुहैया कराई जा रही है। अगस्त 2021 में घोषित किए गए एक पैकेज में मृतकों के आश्रितों के लिए 3.50 लाख रुपए एवं घायलों के लिए 1.25 लाख रुपए की व्यवस्था की गई। इस योजना में राज्य सरकारों द्वारा मृतकों की विधवाओं और बुजुर्ग परिजनों को 2,500 रुपए की मासिक पेंशन देने का भी प्रावधान किया गया है।

इस नरसंहार में सिर्फ दिल्ली में ही 3000 सिखों की हत्या कर दी गई थी और 50,000 से भी अधिक सिख बेघर हो गए थे। कई दिनों तक ये नरसंहार चलता रहा था। उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सुलखान सिंह ने 1984 के सिख दंगे को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के इशारे पर सिखों के ख़िलाफ़ किया गया नरसंहार बताया था। उन्होंने लिखा था कि राजीव गाँधी के मुख्य विश्वासपात्र कमलनाथ इस पूरे नरसंहार की मॉनीटरिंग कर रहे थे।

1990 में कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार: कॉन्ग्रेस पार्टी ने तब भी नहीं सुना ‘मॉब लिंचिंग’ का नाम?

1990 में किस तरह कश्मीरी पंडितों को उनके ही साथ रहने वाले मुस्लिमों ने चुन-चुन कर मारा, ये किसी से छिपा नहीं है। अपने ही देश में बेघर हो चुके कश्मीरी हिन्दुओं ने कभी हथियार नहीं उठाया। क्या तब मुस्लिम भीड़ द्वारा महर्षि कश्यप की भूमि से उनके ही वंशजों के नरसंहार को कॉन्ग्रेस ‘मॉब लिंचिंग’ की श्रेणी में नहीं रखती? मुस्लिम भीड़ का अपराध कॉन्ग्रेस की नजर में पुण्य का कार्य है? कॉन्ग्रेस पार्टी के मित्र अब्दुल्लाओं की पार्टी ने वहाँ लम्बे समय तक राज़ किया और इस दौरान आतंकी फलते-फूलते रहे।

आज भी मोदी सरकार ही इस नरसंहार और पलायन के पीड़ितों के लिए कार्य कर रही है और 1000 से भी अधिक कश्मीरी हिन्दुओं को उनकी संपत्ति वापस मिली है। हर जिले में ऐसी संपत्तियाँ चिह्नित की जा रही हैं। उन्हें घाटी में फिर से बसाने के लिए प्रयास तेज़ किए जा रहे हैं। उन्हें नौकरियाँ दी जा रही हैं। IANS समाचार एजेंसी की विदेश मामलों की संपादक आरती टिकू सिंह ने बताया था कि  समुदाय के लोग चुन-चुन कर मारे जा रहे थे, कश्मीरी पंडितों के नेताओं को भी मारा जाने लगा और सीरियल मर्डर्स का माहौल शुरू हो गया। उन्हें 12 वर्ष की उम्र में घर छोड़ना पड़ा था।

कश्मीर में ‘लड़कियों को रखेंगे, लड़को को मार डालेंगे’ का नारा भी लगा था। नैरेटिव बनाने वालों की ताकत ये है कि अख़बारों-पत्रिकाओं में छपवाया गया कि राज्यपाल जगमोहन मुस्लिमों को मरवाना चाहते हैं, इसीलिए उन्होंने ही कश्मीरी पंडितों को वहाँ से निकाला।भारतीय स्तंभकार सुनंदा वशिष्ठ टॉम लैंटॉस एचआर द्वारा आयोजित यूएस कॉन्ग्रेस की बैठक में दुनिया को बताया था कि कैसे 19 जनवरी 1990 की रात घाटी के हर मस्जिद से एक ही आवाज आ रही थी कि हमें कश्मीर में हिंदू औरतें चाहिए, लेकिन बिना किसी हिंदू मर्द के।”

2002 में गोधरा में ज़िंदा जला दिए गए थे रामभक्त

क्या एक साथ 59 हिन्दुओं, जिनमे महिलाएँ-बच्चे-बुजुर्ग भी हों, उनकी हत्या कर देना ‘लिंचिंग’ की श्रेणी में नहीं आएगा? सिर्फ इसीलिए ये कॉन्ग्रेस की डिक्शनरी में ‘लिंचिंग’ नहीं कहा जा सकता क्योंकि मरने वाले रामभक्त थे और मारने वाली भीड़ मुस्लिमों की थी। 59 मृतकों और 48 घायलों के बावजूद ये ‘लिंचिंग’ नहीं है राहुल गाँधी की नजर में। हिन्दुओं को ज़िंदा जला देना उनके लिए शायद अपराध भी न हो। 2000 लोगों की मुस्लिम भीड़ ने जो किया, उसे आज कोई याद नहीं करना चाहता।

आज मुनव्वर फारुकी जैसे कॉमेडियनों को पूरी आज़ादी है कि वो गोधरा में ज़िंदा जला कर मार डाले गए हिन्दुओं का मजाक बनाएँ और कॉन्ग्रेस ऐसे लोगों के शो का आयोजन भी कराती है। इसी कॉन्ग्रेस का पूर्व मुखिया (वर्तमान सर्वेसर्वा) कहता है कि हमने तो 2014 से पहले लिंचिंग का नाम सुना ही नहीं है। गोधरा में 27 फरवरी 2002 की सुबह साबरमती एक्सप्रेस के कोच एस-6 को जला दिया गया। ये कारसेवक अयोध्या से ‘विश्व हिंदू परिषद (VHP)’ द्वारा आयोजित पूर्णाहुति महायज्ञ में भाग लेकर वापस लौट रहे थे। 27 फरवरी की सुबह ट्रेन 7:43 बजे गोधरा पहुँची।

जैसे ही ट्रेन गोधरा स्टेशन से रवाना होने लगी उसकी चेन खींच दी गई। ट्रेन पर 1000-2000 लोगों की भीड़ ने हमला किया। भीड़ ने पहले पत्थरबाजी की फिर पेट्रोल डालकर उसमें आग लगा दी। इसमें 27 महिलाओं, 22 पुरुषों और 10 बच्चों की जलने से मृत्यु हो गई। इसी कॉन्ग्रेस का पूर्व मुखिया (वर्तमान सर्वेसर्वा) कहता है कि हमने तो 2014 से पहले लिंचिंग का नाम सुना ही नहीं है। क्योंकि इस घटना के मुख्य षड्यंत्रकारी गोधरा का मौलवी हुसैन हाजी इब्राहिम उमर और ननूमियाँ थे। इन्होंने सिग्नल फालिया एरिया के मुस्लिमों को भड़काकर इस षड्यंत्र को अंजाम दिया।

राहुल गाँधी इतिहास पढ़ें, वयस्क तो वो 33 साल पहले ही हो चुके हैं

राहुल गाँधी थोड़ा और पीछे जाएँ तो देख सकते हैं कि कैसे लाखों हिन्दुओं को भारत-पाकिस्तान विभाजन के लिए मार डाला गया था और उसके बाद जवाहरलाल नेहरू को सत्ता मिली थी। बंगाल के नोआखली और टिप्पेराह में हुए दंगे कैसे भूल गए राहुल गाँधी? उससे पहले ‘खिलाफत आंदोलन’ को उनकी पार्टी ने समर्थन दिया था और उस दौरान केरल में ‘मोपला नरसंहार’ में सैकड़ों हिन्दुओं को मार डाला गया। हाल ही में बात करें तो TMC की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा में भाजपा कार्यकर्ता चुन-चुन कर निशाना बनाए गए, लेकिन राहुल गाँधी को ये ‘लिंचिंग’ नहीं लगता। बावजूद इसके कि कॉन्ग्रेसी भी इसमें मारे गए थे।

राहुल गाँधी को देश का इतिहास नहीं, सिर्फ अपनी पार्टी कॉन्ग्रेस का ही इतिहास पढ़ लेने की ज़रूरत है, ताकि उन्हें पता चल जाए कि ‘लिंचिंग’ क्या होता है। पार्टी भी छोड़ दीजिए, वो अपने परिवार का ही इतिहास पढ़ लें कम से कम। असल में 2014 से पहले ऐसी ज्यादा ही घटनाएँ सामने आती थीं, लेकिन उसे एक खास नैरेटिव का अंग नहीं बनाया गया और तब का विपक्ष हिन्दुओं को बदनाम करने वाला नहीं था, इसीलिए इसे लेकर ज्यादा हंगामा नहीं हुआ।

कॉन्ग्रेसी कन्हैया ने उमर खालिद को दोस्त मानने से किया इनकार, वीडियो वायरल: भड़का लिबरल गिरोह, बताया- मुस्लिमों के लिए सबक

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार (Kanhaiya Kumar) अब कॉन्ग्रेस (Congress) के नेता हैं और हाल ही में उन्होंने अपने मित्र उमर खालिद से खुद को दूर कर लिया। इतना ही नहीं कन्हैया से जब एक पत्रकार ने उनके दोस्त उमर खालिद (Umar Khalid) पर टिप्पणी के लिए कहा तो वो इससे साफ मुकर गए। उमर खालिद पिछले साल फरवरी 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों (Anti hindu riots) के आरोपितों में से एक है।

कन्हैया की दोस्ती में की दगाबाजी वाली टिप्पणी का यह वीडियो सोशल मीडिया (Social media) पर वायरल हो रहा है। इसके मुताबिक, पत्रकार ने कन्हैया कुमार से पूछा कि क्या उमर खालिद उनके दोस्त हैं या नहीं? इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कन्हैया ने कहा, “तुमसे किसने कहा?” इसके बाद कन्हैया ने आगे पूछा कि पत्रकार को किसने बताया कि वो उमर खालिद के दोस्त हैं, तो पत्रकार ने कहा कि उसने उन्हें एक वीडियो में देखा था। इस पर कन्हैया कुमार ने फिर पूछा कि किस वीडियो में उन्होंने उसे उमर को अपना दोस्त कहते हुए देखा।

बहरहाल, कन्हैया के इस बयान पर कथित ‘लिबरल्स’ और इस्लामवादी (Liberals an silamist) नाराज हो गए और वो अपनी नाराजगी को सोशल मीडिया पर जाहिर कर रहे हैं।

यह मुस्लिमों के लिए सबक

खुद को उदारवादी मानने वाली इरेना अकबर अक्सर घृणित बयानबाजी में लिप्त रहती है। उसने कन्हैया कुमार को पीठ पर छूरा घोंपने वाला करार दिया, जिसने उमर खालिद को धोखा दिया है। उसने लिखा, “एक दोस्त जो आपको आपके कठिन समय में छोड़ देता है, वह पीठ में छुरा घोंपने वाले से कम नहीं है। वह दुश्मन से भी बदतर है। स्वार्थी, अवसरवादी कायर कन्हैया कुमार उमर खालिद की दोस्ती के लायक नहीं थे। उमर के लिए अच्छा है। मुस्लिमों के लिए एक सबक सीखा। हम इसमें अकेले हैं।”

वहीं दूसरे सोशल मीडिया यूजर ने भी कन्हैया को अवसरवादी करार दिया और कहा कि जिसने रोहित वेमुला की दुखद मौत का फायदा उठाकर अपना राजनीतिक करियर बनाया, वह उमर खालिद से मुँह मोड़ रहा है। यूजर ने ट्वीट किया, “सभी सवर्ण पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को शर्म आती है, जिन्होंने दलित और मुस्लिम नेतृत्व पर उनका समर्थन किया था।”

वामपंथी मीडिया पोर्टल द वायर के लिए लिखने वाले स्व-घोषित पत्रकार एम रेयाज ने कन्हैया कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकतर मुस्लिम और लिबरल्स चाहते थे कि मुस्लिम आरजेडी कैंडिडेट की जगह कन्हैया को वोट दें, लेकिन वो उमर खालिद और मीरान हैदर से दूरी बनाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

वहीं महुआ नामक यूजर ने इस बात को दुखद करार दिया कि कन्हैया ने उमर खालिद को पहचानने से इनकार कर दिया।

उमर खालिद के लिए सहानुभूति की टूलकिट

उमर खालिद दिल्ली दंगों का आरोपित है और फिलहाल जेल में बंद है। लेकिन कन्हैया कुमार का खालिद को दोस्त मानने से इनकार करने का वीडियो इंटरनेट पर वायरल होते ही लिबरल्स और इस्लामिस्टों ने खालिद के समर्थन में ट्वीट करना शुरू कर दिया।

कई लोगों ने ट्विटर पर अपना दोस्त बताते हुए ट्वीट किया, जो कि एक टूलकिट रणनीति जैसा प्रतीत होता है। इन पोस्टों में लिबरल्स खालिद के साथ अपनी सहानुभूति दिखा रहे हैं।

मोदी सरकार (Modi Government) के खिलाफ अक्सर प्रोपेगेंडा फैलाने में समय व्यतीत करने वाले मानवाधिकार ‘कार्यकर्ता’ और एमनेस्टी इंडिया के पूर्व प्रमुख आकार पटेल ने भी ट्वीट किया, “उमर खालिद मेरे दोस्त हैं, मुझे उनकी याद आती है। वो निर्दोष हैं और उम्मीद है कि जल्द ही बाहर होगें। ये अमित और मोदी और बेशर्म पुलिस और न्यायपालिका में बीच फँसे हुए हैं। @UmarKhalidJNU ”

स्व-घोषित राजनीतिक कार्यकर्ता कवलप्रीत कौर को उमर खालिद जैसे दिल्ली दंगों के आरोपित को अपना दोस्त कहने में गर्व हो रहा है। उन्होंने ट्वीट किया, “उमर खालिद को अपना दोस्त कहने में गर्व महसूस करना चाहिए, क्योंकि बहुत से लोग न्याय और सम्मान के लिए खड़े नहीं होंगे, जैसा कि उन्होंने किया और वर्तमान में झूठे आरोपों में जेल में है। उमर खालिद हमारे नेता हैं और हमें उन पर गर्व है।”

उमर खालिद और दिल्ली दंगों (Delhi riots) में उनकी भूमिका

लिबरल्स और इस्लामवादी खालिद को अपना दोस्त और नेता भले ही मानते हों, लेकिन हकीकत तो यही है कि उसे 14 सितंबर 2020 को पूर्वी दिल्ली में दंगे भड़काने के मामले में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस (Delhi police) की चार्जशीट में इस बात का खुलासा किया गया था कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प (Donald trump) के भारत दौरे के दौरान खालिद ने अपने साथियों के साथ मिलकर हिंदू विरोधी दंगों की साजिश रची थी। इसके अलावा खालिद कथित तौर पर आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और एक अन्य आरोपित खालिद सैफी से भी मिला था, ताकि पीएफआई में अपने संपर्कों के जरिए दंगों के दौरान सैन्य सहायता ले सके।

‘नशे में थे AAP नेता, गाली-गलौच कर की छेड़छाड़’: महिला नेता का आरोप, कहा- शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान

गुजरात के सूरत में भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष श्रद्धा राजपूत ने ‘आप’ (AAP) नेता इसुदान गढ़वी (Isudan Gadhvi) और उनकी पार्टी के कई कार्यकर्ताओं पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। श्रद्धा का आरोप है कि ‘आप’ नेता इसुदान गढ़वी, गोपाल इटालिया समेत कई लोगों ने नशे में उनके साथ गाली-गलौच और बदसलूकी की। रिपोर्ट्स के मुताबिक महिला नेता की शिकायत के बाद पुलिस गढ़वी, इटालिया और प्रवीण राम को हिरासत में लेकर मेडिकल जाँच के लिए अस्पताल ले गई। जाँच के बाद इन्हें रिहा कर दिया गया। मेडिकल रिपोर्ट बुधवार (22 दिसंबर 2021) को आएगी।

राजपूत ने एक चैनल से बात करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं ने गाँधीनगर में भाजपा कार्यालय की घेराबंदी की थी। जब सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें गेट पर रोकने की कोशिश की तो वे बदतमीजी करने लगे। सभी नशे मे धुत थे। शोर सुनाई पड़ने पर हम बाहर आए। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘आप’ कार्यकर्ता बयानबाजी के दौरान गाली-गलौज कर रहे थे। वे राज्य में 12 दिसंबर को कथित हेड क्लर्क पेपर लीक मामले का विरोध कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि गढ़वी ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मेरे साथ दुर्व्यवहार किया। मैंने उनसे सही से पेश आने के लिए कहा फिर भी वे नहीं रुके। उन्होंने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी की महिला कार्यकर्ताओं ने भी उनके साथ मारपीट की और उन्हें लाठियों से मारा। राजपूत ने यह भी आरोप लगाया कि भीड़ तितर-बितर होने के बाद गोपाल इटालिया और इसुदान गढ़वी दोनों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया। श्रद्धा ने बताया, “मैंने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई। मेरे शरीर के कई हिस्सों पर चोट के निशान हैं, जो मैं दिखा नहीं सकती।”

बता दें कि ‘आप’ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने गाँधीनगर में भाजपा कार्यालय का घेराव किया था। इस दौरान भाजपा कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में पहुँचे और दोनों गुट आपस में भिड़ गए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा था।

‘योगी जी ने गुंडों को सही जगह पहुँचाया’: प्रयाग मातृ-शक्ति के संगम में बोले PM मोदी – बेटियों की शादी की उम्र बढ़ाने से कुछ लोगों को तकलीफ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 2 लाख महिलाओं को सम्बोधित किया और स्वयं सहायता समूहों (SSG) को 1000 करोड़ रुपए की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रयागराज हजारों सालों से हमारी मातृशक्ति की प्रतीक माँ गंगा-यमुना-सरस्वती के संगम की धरती रही है और आज ये तीर्थ नगरी नारी-शक्ति के इतने अद्भुत संगम की भी साक्षी बन रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने, माताओं-बहनों-बेटियों ने ठान लिया है- अब वो पहले की सरकारों वाला दौर, वापस नहीं आने देंगी।

पीएम मोदी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार ने यूपी की महिलाओं को जो सुरक्षा दी है, जो सम्मान दिया है, उनकी गरिमा बढ़ाई है, वो अभूतपूर्व है। उन्होंने कहा कि यूपी में विकास के लिए, महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जो काम हुआ है, वो पूरा देश देख रहा है। साथ ही बताया कि उन्हें ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ की एक लाख से ज्यादा लाभार्थी बेटियों के खातों में करोड़ों रुपए ट्रांसफर करने का सौभाग्य मिला। ये योजना गाँव-गरीब के लिए, बेटियों के लिए भरोसे का बहुत बड़ा माध्यम बन रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि बेटियाँ कोख में ही ना मारी जाएँ, वो जन्म लें, इसके लिए हमने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के माध्यम से समाज की चेतना को जगाने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि आज परिणाम ये है कि देश के अनेक राज्यों में बेटियों की संख्या में बहुत वृद्धि हुई है। उन्होंने जानकारी दी कि हमने गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण, अस्पतालों में डिलिवरी और गर्भावस्था के दौरान पोषण पर विशेष ध्यान दिया। प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत गर्भावस्था के दौरान 5 हज़ार रुपए महिलाओं के बैंक खाते में जमा किए जाते हैं, ताकि वो उचित खान-पान का ध्यान रख सकें।

उन्होंने कहा, “स्वच्छ भारत मिशन के तहत करोड़ों शौचालय बनने से, उज्जवला योजना के तहत गरीब से गरीब बहनों को गैस कनेक्शन की सुविधा मिलने से, घर में ही नल से जल आने से, बहनों के जीवन में सुविधा भी आ रही है और उनकी गरिमा में भी वृद्धि हुई है। दशकों तक ऐसी व्यवस्था रही कि घर और घर की संपत्ति को केवल पुरुषों का ही अधिकार समझा जाने लगा। घर है तो किसके नाम? पुरुषों के नाम। खेत है तो किसके नाम? पुरुषों के नाम। नौकरी, दुकान पर किसका हक? पुरुषों का।”

पीएम मोदी ने ख़ुशी जताई कि आज हमारी सरकार की योजनाएँ इस असमानता को भी दूर कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना को उन्होंने इसका सबसे बड़ा उदाहरण बताते हुए कहा कि इसके तहत जो घर दिए जा रहे हैं, वो प्राथमिकता के आधार पर महिलाओं के ही नाम से बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए, परिवार की आमदनी बढ़ाने के लिए जो योजनाएँ देश चला रहा है, उसमें भी महिलाओं को बराबर का भागीदार बनाया जा रहा है। मुद्रा योजना आज गाँव-गाँव में, गरीब परिवारों से भी नई-नई महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है।

उन्होंने कहा, “दीनदयाल अंत्योदय योजना के जरिए भी देश भर में महिलाओं को सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और ग्रामीण संगठनों से जोड़ा जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूह की बहनों को तो मैं आत्मनिर्भर भारत अभियान की चैपिंयन मानता हूँ। ये स्वयं सहायता समूह, असल में राष्ट्र सहायता समूह हैं। बिना किसी भेदभाव, बिना किसी पक्षपात, डबल इंजन की सरकार, बेटियों के भविष्य को सशक्त करने के लिए निरंतर काम कर रही है। अभी कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने एक और फैसला किया है। पहले बेटों के लिए शादी की उम्र कानूनन 21 साल थी, लेकिन बेटियों के लिए ये उम्र 18 साल ही थी।”

पीएम मोदी ने कहा कि बेटियाँ भी चाहती थीं कि उन्हें उनकी पढ़ाई-लिखाई के लिए, आगे बढ़ने के लिए समय मिले, बराबर अवसर मिलें। इसलिए, बेटियों के लिए शादी की उम्र को 21 साल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश ये फैसला बेटियों के लिए कर रहा है, लेकिन किसको इससे तकलीफ हो रही है, ये सब देख रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि कैसे 5 साल पहले यूपी की सड़कों पर माफियाराज था! यूपी की सत्ता में गुंडों की हनक हुआ करती थी! साथ ही पूछा कि इसका सबसे बड़ा भुक्तभोगी कौन था? मेरे यूपी की बहन बेटियाँ थीं। उन्हें सड़क पर निकलना मुश्किल हुआ करता था। स्कूल, कॉलेज जाना मुश्किल होता था।

पीएम मोदी ने कहा कि महिलाएँ कुछ कह नहीं सकती थीं, बोल नहीं सकती थीं। क्योंकि थाने गईं तो अपराधी, बलात्कारी की सिफ़ारिश में किसी का फोन आ जाता था। उन्होंने कहा कि योगी जी ने इन गुंडों को उनकी सही जगह पहुँचाया है। पीएम मोदी ने स्पष्ट कहा कि आज यूपी में सुरक्षा भी है, अधिकार भी हैं। आज यूपी में संभावनाएं भी हैं, व्यापार भी है। मुझे पूरा विश्वास है, जब हमारी माताओं बहनों का आशीर्वाद है, इस नई यूपी को कोई वापस अंधेरे में नहीं धकेल सकता।

प्रयागराज में लगा मातृ-शक्ति का संगम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) मंगलवार (21 दिसंबर, 2021) को प्रयागराज के दौर पर पहुँचे, जहाँ उन्होंने 2 लाख महिलाओं को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूह (SSG) की महिलाओं से संवाद किया और संस्था के बैंक खातों में 1000 करोड़ रुपए डाले, जिससे 16 लाख महिलाओं को मदद मिलेगी। बम्हरौली मैदान में पीएम मोदी का विशेष विमान उतरा, जहाँ से परेड मैदान पहुँच कर उन्होंने आत्मनिर्भर हो रही महिलाओं को सम्मानित किया।

इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने 202 टेक होम राशन प्लांट का भी शिलान्यास किया। ‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ के 1000 लाभार्थियों के खाते में भी 20 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। हर एक लाभार्थी को 15,000 रुपए मिले। ‘संगम पूजन’ कार्यक्रम के लिए भी पहले से ही तैयारी कर ली गई थी। महिलाओं को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने और उन्हें इसके लिए ज़रूरी कौशल, संसाधन एवं प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

‘दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन’ के तहत 80,000 SSG को सामुदायिक निवेश फंड के अंतर्गत 1.10 लाख रुपए हर एक समूह को दिए गए। इसके अलावा 60,000 अन्य SSG को प्रति समूह 15,000 रुपए सरकार की तरफ से प्रदान किए गए। ‘प्रधानमंत्री सखी योजना’ के तहत 20 हजार सखियों के बैंक खातों में चार-चार हजार रुपए ट्रांसफर किए गए। बता दें कि जमीनी स्तर पर वित्तीय (व्यापार अभिकर्ता) सेवाएँ देने का कार्य इन सखियों को सौंपा गया है।

इस दौरान पीएम मोदी ने महिलाओं के साथ संवाद भी किया और बीच में माहौल भावुक भी हो गया। महिलाओं की बातों को उन्होंने शांति से सुना। प्रयागराज में इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीएम मोदी का स्वागत किया। एक ‘बिजली सखी’ ने बताया कि 22 लाख बिजली का बिल उन्होंने जमा करवाया है, जिसका उन्हें कमीशन भी मिला। इन विशेष महिलाओं में 50772 सामुदायिक शौचालय केयर टेकर, 22210 समूह सखी, 6179 बैंक सखी, 54715 बीसी सखी, 8018 आजीविका सखी, 15434 विद्युत सखी, 4040 टेक होम राशन संचालिका, 79500 स्वयं सहायता समूह की महिलाएँ हैं। 

‘मेरे पति के कई महिलाओं से संबंध’: जिसके ससुर रहे गुजरात के CM उसने अपने कॉन्ग्रेसी पति की ‘करतूत’ सोनिया-राहुल को बताई

गुजरात कॉन्ग्रेस (Gujrat congress) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भरतसिंह सोलंकी (Bharat sinh solanki) की पत्नी रेशमा सोलंकी (Reshmi solanki) ने उन पर कॉन्ग्रेस (Congress) पार्टी को बर्बाद करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। रेशमा का कहना है कि भरत सोलंकी अपने राजनीतिक दबदबे का इस्तेमाल कर कॉन्ग्रेस को सत्ता में आने से रोक रहे हैं। इस मामले में उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गाँधी (Sonia gandhi), उनके बेटे राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) और काँग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) को पत्र लिखा है।

रेशमा सोलंकी ने अपने पति पर दूसरी महिलाओं के साथ अवैध संबंध रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने के लिए भरत सिंह सोलंकी ने दूसरी सक्षम महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ने से रोक दिया। उन्होंने पत्र में लिखा, “मेरे पति पार्टी की ही इन महिलाओं के साथ लगातार बातें करते रहते हैं। वो कहते अगर वह बूढ़े हो गए तो क्या हो गया। उनके 22 साल की उम्र लड़कियों के साथ ही अपने उम्र की बुड्ढी महिलाओं के साथ संबंध हैं। वो अपनी ज्यादातर एनर्जी इन्हीं महिलाओं के पीछे खर्च करते हैं।”

पत्र का पार्ट-1 (साभार: एबीपी लाइव)

अपने पत्र में उन्होंने सोनिया गाँधी से इस मामले में संज्ञान लेते हुए गुजरात कॉन्ग्रेस की गरिमा को बनाए रखने का आग्रह किया है। रेशमा ने पत्र में आरोप लगाया, “24 साल पहले मेरी मर्जी के खिलाफ मुझसे शादी की गई और इतने सालों में मुझे कभी भी पत्नी का अधिकार नहीं मिला। मेरे जीजा अमित चावड़ा (जो सोलंकी के पहले चचेरे भाई हैं) यह सब जानते हैं लेकिन अपना राजनीतिक करियर सेट करने के लिए इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।”

पत्र का पार्ट-2 (साभार: एबीपी लाइव)

पति भरतसिंह सोलंकी पर व्यभिचार का आरोप लगाते हुए रेशमा ने पत्र में लिखा कि रात में बेडरूम में आते ही सोलंकी दरवाजा बंद कर लेते हैं और पार्टी की ही 8/10 महिलाओं को अश्लील मैसेज भेजते हैं। उन्होंने सोनिया गाँधी से इन महिलाओं को सबक सिखाने का आग्रह किया और कहा कि वह उन्हें सही करने का मौका देंगी। रेशमा ने ये भी बताया है कि वो अपने पति से डरती हैं और अब दोस्तों की मदद से अमेरिका में रह रही हैं। लेकिन वहाँ भी उनके सामने जीवन-यापन का संकट है।

उन्होंने आगे कहा, “अगर कोई घर की महिलाओं को न्याय नहीं दे सकता तो वे राज्य की महिलाओं को न्याय कैसे देंगे? मेरे ससुर माधवसिंह सोलंकी (Madhav singh solanki) भी अपने बेटे से नाराज रहते थे। भरतसिंह सोलंकी का नाम अपने पिता के कारण ही राजनीति में है। भरतसिंह के लिए कॉन्ग्रेस एक व्यापार और अपने जुर्मों को छिपाने का तरीका मात्र है।”

पत्र का पार्ट-3 (साभार: एबीपी लाइव)

सोनिया गाँधी से भरत सिंह सोलंकी को कॉन्ग्रेस से बाहर निकालने का आग्रह करते हुए रेशमा ने खुलासा किया है कि उनकी अपने भाई और बहनों से भी नहीं बनती है। सोलंकी की बहन ने भी उसके खिलाफ मामला दर्ज किया है।

उल्लेखनीय है कि इसी साल की शुरुआत में ही एक वाकया सामने आया था, जहाँ रेशमा सोलंकी ने अपने पति भरत सिंह सोलंकी पर मानसिक शोषण और तलाक देने के लिए विवश करने का आरोप लगाया था। रेशमा के मुताबिक COVID-19 से ठीक होने के बाद भरतसिंह सोलंकी ने उनके साथ बदसलूकी की थी। भरत सिंह सोलंकी द्वारा अपनी पत्नी के साथ उनके नाम पर किसी भी लेन-देन में शामिल होने के लिए सार्वजनिक चेतावनी देने के बाद उनका (रेशमा) नोटिस आया था। भरतसिंह सोलंकी ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी बीते चार साल से उनके साथ नहीं रह रहीं थीं।

गुजरात के पूर्व सीएम माधवसिंह सोलंकी के बेटे हैं भरतसिंह सोलंकी

गुजरात कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी के बेटे हैं, जिन्होंने गुजरात में कॉन्ग्रेस के लिए ‘KHAM’ (क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी, मुस्लिम) वोट बैंक सिद्धांत को लाए थे। गुजरात में जब भीषण साम्प्रदायिक दंगे (Communal riots) भड़के थे उस दौरान माधव सिंह सोलंकी ही मुख्यमंत्री थे। बता दें कि 1980 के दशक में गुजरात ,में अंतर्जातीय संघर्ष हुआ था, जो बाद में साम्प्रदायिक दंगों में बदल गया था। माधव सिंह सोलंकी का इसी साल निधन हुआ था।

क्लॉस्टेरोफोबिया बीमारी के कारण आता है जया बच्चन को गुस्सा? बीजेपी को ‘शाप’, सपाइयों की करतूत पर चुप्पी; आखिर माजरा क्या है

राज्यसभा में सपा सांसद जया बच्चन का गुस्सा कल एक बार फिर अपने काबू से बाहर हो गया। वह सदन में चीखी-चिल्लाईं और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं को बुरे दिन का श्राप देती दिखीं। ये पहली दफा नहीं था जब इस तरह जया बच्चन को भड़कते देखा गया हो। बात चाहे सदन की हो या फिर किसी पब्लिक प्लेस की। उन्हें जहाँ गुस्सा आता है वो वहीं अपना आपा खो देती हैं।

जया बच्चन को जगह-जगह आता है गुस्सा

अभी कुछ समय पहले की ही बात है जब बंगाल चुनाव थे और टीएमसी के समर्थन में जया बच्चन मैदान में उतरी थीं। उन्होंने 8 अप्रैल 2021 को शिवपुर और दक्षिण हावड़ा में टीएमसी उम्मीदवारों के समर्थन में रोड शो किया था। इसी दौरान वह खुली हुड वाली कार में गौतम चौधरी के लिए प्रचार कर रही थीं जब एक कार्यकर्ता उनके साथ सेल्फी लेने आया। लेकिन जया बच्चन कार्यकर्ता की इस हरकत पर इतना भड़क गईं कि उन्होंने उस कार्यकर्ता को धक्का मार दिया।

इससे पहले जया बच्चन को रवि किशन पर भड़की दिखी थीं। जब रवि किशन ने सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या मामले पर कहा था कि बॉलीवुड ड्रग्स और नशा का अड्डा बनता जा रहा है। इस पर जया बच्चन ने बॉलीवुड का समर्थन करते हुए कहा था जिस थाली में खाते हो उसी में छेद करते हो। इसके बाद, साल 2019 में हुए हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ हुए गैंगरेप और हत्या मामले पर अपना गुस्सा जाहिर किया था।

इन सबके अलावा एक घटना कुछ साल पुरानी भी है जब जया बच्चन अपने परिवार के साथ पार्टी के लिए जा रही थीं और किसी फोटोग्राफ ने उनकी बहू को आवाज दे दी थी। इस पर जया बच्चन इतना भड़क गई थीं कि उन्होंने फोटोग्राफर को लताड़ लगाई थी और ऐश्वर्या को ‘ऐश्वर्या जी या फिर मिसेज बच्चन’ कहने को कहा था। इतना ही नहीं एक बार एक फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीर मोबाइल से ले ली थी, तब जया बच्चन ने उस फोटोग्राफर को तमीज सीखने की सलाह दी थी और उसकी माफी माँगने पर भी वह शांत नहीं हुई थीं।

क्यों आता जया बच्चन को गुस्सा?

तमाम मीडिया खबरें हैं जो बताती हैं कि जया बच्चन को बहुत गुस्सा आता है। इनके अलावा उनके बच्चे खुद भी इस बात को मानते हैं कि उनकी माँ गुस्सैल स्वभाव की हैं। एक बार कॉफी विथ करण में जया के दोनों बच्चों यानी श्वेता बच्चन और अभिषेक बच्चन ने बताया भी था कि उनकी माँ को क्लॉस्टेरोफोबिया नाम की बीमारी है। ये एक ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें इंसान अचानक भीड़ को देखकर परेशान हो जाता है और गुस्सा करने लगता है।

अभिषेक बच्चन ने इस दौरान माना था कि वह जब अपनी माँ की पैपराजियों पर नाराज होने वाली वीडियोज देखते हैं तो उन्हें बहुत ज्यादा पछतावा होता है। वहीं श्वेता ने अपनी माँ का पक्ष लेते हुए कहा था कि वह परेशान हो जाती हैं जब अपने ईर्द-गिर्द लोगों को देखती हैं। उन्हें यह भी पसंद नहीं आता कि कोई उनकी परमिशन के बिना उनकी तस्वीर ले। अभिषेक-श्वेता ने बताया था कि जया बच्चन को लगता है कि वो सेल्फी में नहीं अच्छी लगती इसलिए उन्हें ये चीज नहीं पसंद कोई उनकी फोटो खींचे। 

सपा नेता की करतूतों पर रहती हैं चुप

दिलचस्प बात ये है कि जया बच्चन जिन्हें छोटे-छोटे मुद्दों पर भी इतना भयंकर गुस्सा आता है कि वो किसी को तमीज में रहने की सलाह देती हैं, किसी को धक्का मार देती हैं, उन्हें कभी अपने पार्टी नेताओं पर गुस्सा नहीं आता। वो आज भी उसी पार्टी में बनी हुई हैं जिसके प्रमुख रहे मुलायम सिंह यादव ने रेप जैसी घटना पर लड़कों का पक्ष लेते हुए कहा था कि ऐसी गलती हो जाती है। इतना ही नहीं, रवि किशन को ‘थाली में छेद’ वाला ताना देने वाली जया बच्चन ने कभी अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान का भी विरोध नहीं किया जिन्होंने जया प्रदा की अंडरवियर पर कमेंट किया था।

भूखा था बेअदबी के नाम पर मॉब लिंचिंग का शिकार विक्षिप्त युवक, कपूरथला गुरुद्वारे में रोटी के लिए गया था: रिपोर्ट

कपूरथला ‘बेअदबी’ मामले में निजामपुर गुरुद्वारा के ग्रंथी द्वारा जो दावा किया गया था अब उसमें नया मोड़ आ गया है। कई रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने बताया है कि मृतक को एक सेवादार (स्वयंसेवक) ने भूतल पर स्थित रसोई में उसे रोटियाँ खाते हुए देखा था। विशेष रूप से इस गुरूद्वारे के भूतल पर केवल सेवादार और ग्रंथी रहते हैं, और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी ऊपरी मंजिल पर हैं।

कपूरथला गुरूद्वारे में 19 दिसंबर को क्या हुआ

रिपोर्टों से यह भी पता चलता है कि जब सेवादार ने उस व्यक्ति को देखा, तो उसने भागने की कोशिश की और अंततः सेवादारों ने उसे पकड़ लिया। उस व्यक्ति की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच में थी, जिसे गुरुद्वारा परिसर के एक कमरे में रखा गया था। पुलिस को उसे हिरासत में नहीं लेने नहीं दिया गया। और गुस्साई भीड़ ने उसे पीट-पीट कर मार डाला। उल्लेखनीय है कि पुलिस ने यह भी कहा कि मृतक के शरीर पर आठ गहरे घाव थे जो तलवार जैसे धारदार हथियार के थे। बुरी तरह से पीटे गए युवक को पुलिस ने जब अस्पताल पहुँचाया , वहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

गौरतलब है कि जब पीड़ित की पीट-पीट कर हत्या की जा रही थी उस वक्त कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे। प्रेस के दौरान, पुलिस ने पुष्टि की थी कि कुछ पुलिसकर्मियों ने पीड़ित को बचाने का प्रयास किया था, लेकिन भीड़ ने उन्हें ऐसा करने से रोका और चूँकि यह एक हिंसक माहौल था, इसलिए उन्होंने ‘संयम’ दिखाया और माहौल को और बिगड़ने नहीं दिया। वहीं दैनिक भास्कर ने खबर दी थी कि हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश में कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आई हैं।

पुलिस को गुरुद्वारे में बेअदबी का कोई सबूत नहीं मिला। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पुलिस ने साफ तौर पर कहा कि निशान साहिब और श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी समेत सब कुछ बरकरार है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरकमलप्रीत सिंह खाख ने बताया कि मृतक चोरी की नीयत से गुरुद्वारा गया था। कथित तौर पर, 295A के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा, पुलिस का कहना कि वे सभी बिंदुओं पर जाँच कर रहे हैं।

इससे पहले, पुलिस ने कहा था कि उन्होंने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भी हत्या का मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में उन्होंने यू-टर्न लिया और कहा कि उन लोगों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है जिन्होंने उसे पीट-पीट कर मार डाला। पुलिस महानिरीक्षक गुरिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा कि वे ग्रंथी अमरजीत सिंह से पूछताछ कर रहे हैं और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पुलिस को सतर्क करने के बजाय, गुरुद्वारा प्रभारी ने सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो बनाना शुरू कर दिया, इस प्रकार भीड़ को उकसाया और आरोप लगाया कि पीड़ित व्यक्ति ने बेअदबी की है। ऐसे ही एक वीडियो में जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, गुरुद्वारा प्रभारी लोगों को यह बता रहे हैं कि पीड़ित को रसोई से रोटियाँ लेते हुए पकड़ा गया था और उसे पकड़कर पीटा गया था। फिर वह कहता है कि उस आदमी ने निशान साहब को छूने की भी कोशिश की।

हालाँकि, पुलिस ने कहा है कि पवित्र पुस्तक को ऊपरी मंजिल पर रखा गया है और किसी के छूने या नुकसान पहुँचाने का कोई संकेत नहीं था।

एसएसपी कपूरथला एचपीएस खाख ने बताया है कि गुरुद्वारा इंचार्ज को पुलिस का आना पसंद नहीं है और वह इलाके में भी पुलिस की मौजूदगी पर आपत्ति जताते रहे हैं। वह अक्सर पाकिस्तान स्थित सिख धर्मस्थलों का भी दौरा करते रहे हैं।

भूखा था भोजन की तलाश में गया गुरुद्वारा

जैसे-जैसे अधिक विवरण सामने आते जा रहे हैं, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि जिस पीड़ित को हिंसक भीड़ द्वारा बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला गया था, वह गरीब और हताश व्यक्ति था जो भूखा था और कुछ खाने की तलाश में रोटियों के लिए गुरुद्वारे के अंदर गया था।

बिहार की महिला ने बताया अपना भाई

वहीं बिहार की एक महिला ने दावा किया है कि पंजाब के कपूरथला के एक गुरुद्वारे में जिस व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, वह उसका भाई था। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, उसने उस व्यक्ति की पहचान अंकित कुमार के रूप में की और उसकी माँ का नाम गीता देवी है। महिला ने पुलिस को फोन पर बताया कि वह मृतक की शिनाख्त के लिए अपनी माँ के साथ कपूरथला जाएगी।

रिपोर्टों से पता चलता है कि महिला ने सत्यापन के लिए पुलिस को कुछ दस्तावेज और तस्वीरें भी भेजीं हैं। जिसकी पुष्टि करते हुए एसएसपी खाख ने कहा कि उन्हें दस्तावेज मिल गए हैं और उनकी जाँच की जा रही है।