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‘पहले अपने बेटा-बेटी को बॉर्डर पर भेजो’: पाक PM इमरान खान को ‘बड़ा भाई’ बताने पर बरसे गंभीर, मालवीय बोले- राहुल गाँधी ने इसीलिए चुना

पंजाब कॉन्ग्रेस के प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू अपने पाकिस्तान प्रेम के चलते एक बार फिर से विवादों में घिर गए हैं। करतारपुर गुरुद्वारा के दौरे पर गए नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तारीफ करते हुए उन्हें ‘बड़ा भाई’ बताया है। इसको लेकर पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर और भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सिद्धू पर निशाना साधा है। गंभीर ने कहा, “पहले अपने बेटा या बेटी को बॉर्डर पर भेजो, उसके बाद किसी आतंकी देश के मुखिया को बड़ा भाई बोलो।”

हालाँकि, गौतम गंभीर ने सीधे तौर पर तो किसी का भी नाम नहीं लिया, लेकिन उन्होंने इशारों में नवजोत सिंह सिद्धू पर निशाना साधा है। इस मामले में बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी सिद्धू पर जुबानी हमला किया है। मालवीय ने नवजोत सिद्धू को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का करीबी बताया।

मालवीय ने ट्वीट किया, “राहुल गाँधी के फेवरेट नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘बड़ा भाई’ कहा। पिछली बार उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा को गले लगाकर उनकी तारीफ की थी। इसमें किसी को आश्चर्य है कि गाँधी के भाई-भतीजों ने दिग्गज अमरिंदर सिंह की जगह पाकिस्तान से प्रेम करने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को क्यों चुना?”

मनीष तिवारी ने भी किया विरोध

नवजोत सिंह सिद्धू के इमरान खान को बड़ा भाई बताने पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने भी नाराजगी जताई। उन्होंने सिद्धू को पाक द्वारा पोषित आतंकवाद का हवाला दिया और पुंछ की घटना याद दिलाई।

तिवारी ने ट्वीट किया, “इमरान खान किसी के भी बड़े भाई हो सकते हैं, लेकिन भारत के लिए वह पाक डीप स्टेट आईएसआई-मिलिट्री गठबंधन का वह बिल्ली का पंजा हैं, जो पंजाब में हथियार और नशीले पदार्थ भेजता है और जम्मू-कश्मीर में एलओसी के पार हर दिन आतंकवादियों को भेजता है। क्या हम पुंछ में अपने जवानों की वीरगति को इतनी जल्दी भूल गए?”

करी पत्ते की आड़ में 4 महीने में 1 टन गाँजा तस्करी: जाँच में सहयोग नहीं कर रहा अमेजॉन, अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज

मध्य प्रदेश के भिंड जिला स्थित गोहद चौराहा पुलिस ने करी पत्तों की आड़ में गाँजा की तस्करी के मामले में अमेजॉन के अधिकारियों के विरुद्ध NDPS एक्ट के तहत FIR दर्ज की है। आरोपितों में कंपनी के कार्यकारी निदेशक भी शामिल हैं। हाल ही में राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी बताया था कि अमेजॉन के अधिकारी जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्होंने चेताया था कि अगर उनका रुख ऐसा ही रहा तो कंपनी के MD और CEO के विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

मध्य प्रदेश पुलिस ने गोहद चौराहा पर रहने वाले पिंटू उर्फ बिजेंद्र तोमर और ग्वालियर के रहने वाले सूरज उर्फ कल्लू पवैया के पास से 21.734 किलोग्राम गाँजा जब्त किया था। इस मामले में ग्वालियर निवासी मुकुल जायसवाल और मेहगाँव के रहने वाले चित्रा बाल्मीक को भी दबोचा गया था। ये लोग करी पत्ते की आड़ में अमेजन पर गाँजे की तस्करी में लिप्त थे। गाँजा के अलावा अमेजॉन की पैकिंग के डिब्बे, रैपर और बारकोड टैगिंग जैसी चीजें भी जब्त की गई थीं।

पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपितों ने अब तक 1 टन से भी अधिक गाँजे की तस्करी कर के सप्लाई की है। पूछताछ के दौरान कई जानकारियाँ सामने आईं, जिनके आधार पर पुलिस ने अमेजॉन के अधिकारियों को भी कुछ सवाल भेजे थे, लेकिन उनका संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। माजरा कुछ यूँ है कि सूरज उर्फ कल्लू पवैया और मुकुल जायसवाल ने बाबू टेक्स (Babu Tex) नाम की एक फर्जी कंपनी बना ली थी। इसके बाद इसे ASSL अमेजॉन कंपनी में सेलर के रूप में रजिस्टर कर दिया था।

फिर ये लोग ‘STEVIA’ ब्रांड बन कर अपने ग्राहकों को विशाखापट्टनम से गाँजा की तस्करी और सप्लाई करवा रहे थे। अमेजॉन ने जो दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए हैं, उनमें और जाँच के तथ्यों में अंतर सामने आया है। इसीलिए, उनके अधिकारियों के विरुद्ध ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत मामला दर्ज किया गया। भिंड पुलिस अधीक्षक मनोज सिंह ने कहा कि अमेजॉन इस देश से भारी कमाई कर रहा है, ऐसे में यहाँ उसकी कुछ सामाजिक जिम्मेदारी भी बनती है।

पुलिस ने बताया कि अमेजॉन के अधिकारियों के पास टीम भेजी गई थी, लेकिन इससे कुछ खास फायदा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि कंपनी अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। उनके अधिकारियों को ईमेल से नोटिस भेजी गई है। वहीं ‘अमेजॉन इंडिया’ के प्रवक्ता का कहना है कि हम जाँच के प्रति प्रतिबद्ध हैं और यहाँ के प्रशासन/एजेंसियों का पूरा सहयोग करते हैं। कंपनी ने कहा कि सूचनाएँ जुटा कर सहयोग किया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इस देश में जो उत्पाद प्रतिबंधित हैं, उन्हें वो बिक्री के लिए सूचीबद्ध नहीं करता है।

इस मामले के सामने आने के बाद व्यवसायियों की संस्था CAIT (कैट) के प्रदेश (मध्य प्रदेश) अध्यक्ष भूपेंद्र जैन ने कहा कि अमेजॉन से कढ़ी पत्ता के नाम पर गाँजा की सप्लाई होना गंभीर बात है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। कैट मंगलवार (16 अक्टूबर) से देश भर में अमेजॉन पर कार्रवाई के लिए अभियान चलाएगी। इस संबंध में प्रदेश व देश के गृहमंत्री से मिलकर उच्चस्तरीय जाँच की माँग की जाएगी। अमेजॉन प्लेटफॉर्म के जरिए आरोपितों ने पिछले 4 महीने में 1 टन (1,000 किलोग्राम) गाँजा की तस्करी की है।

गैंगस्टर मुख्तार अंसारी ने धमका कर व्यवसायी से ₹5 लाख में ले ली थी करोड़ों की जमीन, पेट्रोल पंप सहित जमीन कुर्क करेगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार माफियाओं के खिलाफ लगातार शिकंजा कस रही है। इसी क्रम में पहले से ही जेल की हवा खा रहे कुख्यात माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ एक और कार्रवाई की है। आजमगढ़ जिले के एसपी अनुराग आर्य ने जिले के कलेक्टर को पत्र लिखकर लखनऊ में अवैध कमाई से हासिल की गई मुख्तार अंसारी की जमीन को कुर्क करने की आग्रह किया है। इस संपत्ति की कीमत लगभग तीन करोड़ रुपए है।

रिपोर्ट के मुताबिक, गैंगस्टर मुख्तार अंसारी के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। इसी के तहत उसकी संपत्तियों को पुलिस ने चिन्हित कर रखा है। इस मामले में कार्रवाई के लिए आजमगढ़ की पुलिस लखनऊ रवाना हो गई है। माफिया मुख्तार ने लखनऊ के हुसैनगंज विधानसभा मार्ग पर स्थित इस जमीन को साल 2007 में एक व्यापारी से केवल पाँच लाख रुपए में अपनी पत्नी के नाम पर रजिस्ट्री करवा ली थी।

जिले के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि आरोपित अंसारी के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। संपत्ति को कुर्क करने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया है। गौरतलब है कि माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ आजमगढ़ के तरवाँ थाने में उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम 1986 के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। इस मामले की जाँच स्क्वाट टीम के प्रभारी प्रशांत श्रीवास्तव कर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि हुसैनगंज की इस जमीन पर मुख्तार अंसारी का एक पेट्रोल पंप भी है। एसपी ने बताया कि 2007 में माफिया मुख्तार अंसारी ने लोगों को डरा-धमका कर करोड़ों की संपत्ति को औने-पौने दामों में ले लिया था। जिलाधिकारी के आदेश पर मुख्तार के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट 14 (1) के तहत कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि योगी सरकार माफिया मुख्तार अंसारी समेत उसके कई गुर्गों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। अब तक सरकार अंसारी और उसकी बीवी के नाम पर दर्ज करोड़ों की संपत्तियों को न केवल जब्त कर चुकी है, बल्कि अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर भी चला चुकी है।

‘तुम्हें दबोच कर किस कर लेता’: 17 साल की लड़की को उस Pak मूल के क्रिकेटर का मैसेज, जिसे मीडिया बता रही रेसिज्म का ‘व्हिसलब्लोअर’

यॉर्कशायर ने पूर्व क्रिकेटर अजीम रफीक लगातार विवादों में बने हुए हैं। साथी अंग्रेज खिलाड़ी पर रेसिज्म का आरोप लगाने के कारण मीडिया ने उन्हें ‘व्हिसलब्लोअर’ का तमगा दे दिया। अब उन पर आरोप लगा है कि 6 साल पहले उन्होंने एक लड़की को अश्लील मैसेज्स भेजे थे। पीड़िता गायत्री अजीत ने बताया कि उन्हें दिसंबर 2015 में अजीम रफीक ने ये मैसेज्स भेजे थे। दोनों की मुलाकात मेनचेस्टर से दुबई जा रही एक फ्लाइट में हुई थी। गायत्री अजीत की उम्र तब मात्र 16 वर्ष थी।

गायत्री अजीत ने अब अजीम रफीक को अपनी उम्र एक वर्ष ज्यादा बताई थी। उनका कहना है कि थोड़ा ज्यादा उम्र की दिखने के लिए उन्होंने अपनी आयु 17 साल बता दी थी। उनके कहने पर फ्लाइट में वो अजीम रफीक के साथ वोडका कोक पीने के लिए भी राजी हुई थीं। लेकिन, इसके बाद पूर्व क्रिकेटर ने उन्हें दुबई में डिनर के लिए बुलाया, लेकिन गायत्री अजीत ने इसे ठुकरा दिया। दिसंबर 2015 में भेजे गए मैसेज में अजीम रफीक ने लिखा था, “तुम्हें पता है मैं फ्लाइट में क्या करना चाह रहा था? मैं तुम्हें दबोच कर दीवार के सहारे खड़ा करता और तुम्हें किस कर लेता।”

इसके बाद गायत्री अजीत ने उन्हें रिप्लाई किया, “क्या आपको इसका भान है कि मैं मात्र 17 साल की हूँ?” इस पर पाकिस्तानी मूल के इंग्लिश क्रिकेटर ने लिखा, “क्या इसका मतलब ये है कि मुझे किस करने की सोचने की अनुमति नहीं है?” साथ ही उन्होंने पूछा था, “क्या तुम मुझे किस करने देती?” फ़िलहाल यॉर्कशायर में रहने वाली 22 वर्षीय गायत्री अजीत का कहना है कि ये मैसेज्स डरावने थे। तब उन्होंने मैसेज भेज कर अजीम रफीक को एक ‘विकृत व्यक्ति’ भी कह दिया था।

‘यॉर्कशायर पोस्ट’ को गायत्री अजीत ने बताया, “इस तरह के भोंडेपन वाले मैसेंजर पाकर मैं हैरान थी। वो काफी अश्लील थे। मैं उनके द्वारा लगाए गए रेसिज्म के आरोपों को नकार नहीं रही, क्योंकि मैं निश्चित हूँ कि वो वास्तविक अनुभव हैं। लेकिन, उनके द्वारा कही गई कुछ बातों के बातें मेरे लिए फिट नहीं बैठतीं। वो कह रहे हैं कि उन्हें उनके टीम के साथियों ने पीने को मजबूर किया, तो क्या वो फ्लाइट में अकेले नहीं पी रहे थे और एक 17 साल की लड़की को पीने के लिए उकसा रहे थे?”

पीड़िता ने कहा कि रेसिज्म का आरोप लगाते समय अजीम रफीक ने जो बातें कही, उनके साथ पूर्व क्रिकेटर का व्यवहार उसके एकदम उलट था। उन्होंने ‘बराबरी और सम्मान’ की बाते करने वाले पाकिस्तानी मूल के क्रिकेटर पूछा कि महिलाओं के प्रति उनकी ये भावना नहीं दिखती, तो क्या ये दोहरा रवैया नहीं है? उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव की बातें करने वाले अजीम रफीक खुद समस्या का हिस्सा हैं। अजीम रफीक की टीम ने कहा है कि वो इस पर बाद में जवाब देंगे।

क्यों चर्चा में हैं पाकिस्तानी मूल के अंग्रेज क्रिकेटर अजीम रफीक

नवंबर 2021 के पहले हफ्ते में ही इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और कमेंटेटर माइकल वॉन को खिलाड़ियों द्वारा नस्लवाद का आरोप लगाने के बाद बीबीसी के शो से बाहर कर दिया गया था। एक रिपोर्ट में कहा गया था कि माइकल वॉन ने अजीम रफीक सहित एशियाई समूह के खिलाड़ियों से कहा था, ”इस समूह में आप जैसे बहुत खिलाड़ी हैं, हमें इसके बारे में कुछ करने की आवश्यकता है। यह रफीक का इंग्लिश काउंटी में पहला सीजन था।” माइकल वॉन ने एक कॉलम में लिखा था, ”मैं पूरी तरह और स्पष्ट रूप से इनकार करता हूँ, मैंने कभी उन शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया, मेरे पास कुछ भी छिपाने के लिए नहीं है।”

यॉर्कशायर के पूर्व खिलाड़ी अजीम रफीक ने लीड्स एम्प्लॉयमेंट ट्रिब्यूनल को अपने साथ हुई नस्लवादी घटना की पूरी जानकारी मंगलवार (16 नवंबर 2021) को दी थी। यॉर्कशायर के लिए खेलते हुए अपने पाकिस्तानी मूल के कारण अजीम रफीक ने जो-जो नस्लवादी टिप्पणी सही, उसके खिलाफ उन्होंने यॉर्कशायर क्रिकेट क्लब के खिलाफ मामला भी दर्ज कराया था। आरोप है कि यॉर्कशायर के लिए खेलते समय उन्हें मैथ्यू हॉगर्ड (इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व फास्ट बॉलर) ने “राफा द काफिर (Raffa the Kaffir)” से लेकर “सूअर (Pigs)” और “हाथी धोने वाला (Elephant washer)” तक कहा

हाल ही में अजीम रफीक ने अपने एक बयान के लिए 10 साल बाद माफी माँगी है। उन्होंने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि एक दशक पहले उन्होंने यहूदियों पर अपनी बयानबाजी की थी। वह उसके लिए आज माफी माँगते हैं। उनके मुताबिक 10 साल बाद वो बिलकुल अलग इंसान हैं। उन्होंने लिखा, “मुझे आज 2011 की एक फोटो भेजी गई। मैंने इसे देखा तो यह मेरे ही अकाउंट से थी और इसे मैंने ही किया था। मेरे पास कोई बहाना नहीं है। मुझे इस बात का पछतावा है। मैंने अब इसे हटा दिया है ताकि इससे कोई और नुकसान न हो। मैं उस समय 19 साल का था। मैं उम्मीद करता हूँ और विश्वास करता हूँ कि आज मैं अलग इंसान हूँ।”

12वीं की 2 बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न, दोनों ने की आत्महत्या: सुरक्षा बिना शिक्षा कब तक?

हिंदू शास्त्रों में छोटी कन्याओं और नारी को देवी का स्थान दिया गया है और उन्हें पूजनीय बताया गया है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन्ते तत्र देवता: अर्थात् जिस स्थान पर नारी की पूजा होती है, वहाँ देवता भी निवास करते हैं।’ वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण, गरिमामय, उच्च स्थान प्रदान करते हैं। ऐसे में जब हम शिक्षा के मंदिर में बेटियों के अस्मत के साथ खिलवाड़ की खबरें सुनते हैं तो उस संकीर्ण मानसिकता से घिन होने लगती है, जो इस कुकृत्य को अंजाम देता है।

वर्तमान में ‘बे​टियाँ शिक्षित होंगी तभी समाज शिक्षित होगा’, यही सोचकर शहरों और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले माता-पिता अपनी बेटियों को स्कूल भेजते हैं, ताकि वे अपने बेहतर भविष्य का निर्माण सकें। लेकिन, अभिभावक इस बात से बिल्कुल अनजान होते हैं कि वे जिस जगह को सबसे सुरक्षित मानकर अपनी बेटियों को भेज रहे हैं, वही जगह उनके लिए सबसे असुरक्षित साबित होगी। जिस गुरु के पास वह अपनी बेटी को शिक्षा लेने के लिए भेज रहे हैं, वही उनकी बेटी के सम्मान के साथ खिलवाड़ करेगा।

स्कूलों में बेटियों की अस्मत से लगातार खिलवाड़ हो रहा है। तमिलनाडु में पिछले एक हफ्ते में दो छात्राओं ने आत्महत्या की है। कोयंबटूर में 17 साल की एक लड़की ने अपने ही स्कूल के शिक्षक मिथुन चक्रवर्ती पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली थी। वहीं, तमिलनाडु के ही करूर में 12वीं कक्षा की छात्रा ने 19 नवंबर की शाम को स्कूल से घर लौटते ही अपनी विधवा माँ की अनुपस्थिति में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसने भी यौन उत्पीड़न के चलते यह कदम उठाया था।

इन बच्चियों का डर ही था, जिसकी वजह से वह अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार को सहती रहीं। मानसिक रूप से परेशान होने के बावजूद वह इस बारे में अपने माता-पिता से कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाईं। उन्हीं की तरह ऐसी और भी लडकियाँ हैं, जो अपने साथ होने वाले यौन उत्पीड़न को छिपाती हैं और डरती हैं कि अगर उन्होंने अपने परिजन से इस बारे में बात की तो वे उन्हें स्कूल भेजना बंद कर देंगे। कुछ तो बेहद तनाव में रहती हैं। उन्हें लगता है कि अगर इस बारे में स्कूल के अधिकारियों से शिकायत की तो उन्हें कहीं और ज्यादा परेशान ना किया जाने लगे।

स्कूल में यौन उत्पीड़न का शिकार होने पर लड़कियाँ डर के कारण आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हो जाती हैं। उस दौरान वे भूल जाती हैं कि उनके भी कुछ सपने हैं, जिन्हें वह साकार करना चाहती हैं। वे जीना चाहती हैं, समाज में एक मुकाम हासिल करना चा​हती हैं। देश की तरक्की में कुछ योगदान देना चाहती हैं। ऐसे में ना चाहते हुए भी वो मौत को गले लगाने को मजबूर हो जाती हैं, क्योंकि उन्हें उस समय केवल और केवल इस समस्या का एकमात्र समाधान यही नजर आता है।

हम महसूस कर सकते हैं कि उस समय उनके दिलो-दिमाग में क्या चल रहा होगा, जिसकी वजह से उन्होंने अपने परिवार, अपने चाहने वालों को छोड़ने का फैसला लिया होगा। यह बेहद शर्मनाक है कि कथित शिक्षित लोग जो मासूम बच्चियों को ऐसा करने के लिए मजबूर करते हैं, वे इस समाज में खुलकर और बिना किसी भय के साँस लेते हैं। उन्हें अपने किए पर तनिक भी पछतावा नहीं होता है। ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए। इन दोषियों के अलावा माता-पिता भी अपनी बच्चियों की मौत के उतने ही जिम्मेदार हैं, जो उन्हें स्कूल भेजकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं।

उन्हें स्कूल में जाकर सभी अध्यापकों, महिला शिक्षकों और प्रिंसिपल से बेटियों से जुड़ी हर एक गतिविधि के बारे में पता करना चाहिए। उनके साथ अभिभावक की बजाए एक साथी की तरह पेश आना चाहिए, ताकि वो आपको कुछ भी बताने से डरे नहीं। यदि समय रहते ये बच्चियाँ अपने साथ होने वाले यौन शोषण के बारे में अपने माता-पिता को बता देतीं तो शायद ही उन्हें आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ता।

बल्लेबाज ने जड़ा छक्का तो बौखलाए पाकिस्तानी गेंदबाज शाहीन अफरीदी, बॉल मार के कर दिया घायल: लोगों ने की बैन की माँग

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच टी20 सीरीज खेली जा रही है। इस सीरीज के दूसरे मैच के दौरान पाकिस्तान के तेज गेंदबाज शाहीन शाह अफरीदी की गेंद पर बांग्लादेशी बल्लेबाज ने छक्का जड़ दिया। इसके बाद जानबूझकर शाहीन ने उन्हें एक गेंद जड़ दिया, जिससे बल्लेबाज अफिफ हुसैन चोटिल हो गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तीसरे ओवर की दूसरी गेंद के बाद हुई, जिसे बांग्लादेशी गेंदबाज ने तुरंत पवेलियन भेज दिया। अफरीदी ने लेग-स्टंप हाफ वॉली फेंकी थी, जिसे आफीफ ने फाइन लेग क्षेत्ररक्षक के ऊपर छक्का लगा दिया। इसके बाद बल्लेबाज ने अगली गेंद को डिफेंसिव तरीके से खेला तो खिसियाए अफरीदी ने घूमकर गेंद को बल्लेबाज पर फेंक दिया, जो अफिफ के टखने पर जाकर लगा। खास बात ये है कि आफिफ अपनी क्रीज के भीतर ही थे और वो उनका रन लेने का कोई भी इरादा नहीं था।

आफरीदी की गेंद लगने के बाद आफिफ नीचे गिर गए। हालाँकि, बाद में गेंदबाज ने अपने इस अनुचित व्यवहार के लिए माफी माँग ली। चोट लगने के कारण फिजियो को बुलाना पड़ा, इसलिए कुछ देर के लिए खेल को भी रोकना पड़ा।

पाकिस्तानी गेंदबाज की इस अनुचित आक्रामकता को सोशल मीडिया यूजर्स ने हाथों-हाथ लिया। लोगों ने शाहीन अफरीदी पर जानबूझकर बल्लेबाज को गेंद से मारने का आरोप लगाया।

सोशल मीडिया यूजर्स ने शाहीन शाह अफरीदी के खिलाफ निकाली भड़ास

एक ट्विटर उपयोगकर्ता नेकहा कि गेंदबाजों द्वारा प्रदर्शित इस तरह का व्यवहार सही नहीं है। गेंदबाज का इरादा बल्लेबाज को आउट करने का नहीं, बल्कि अपनी निराशा को बाहर निकालने का है।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने खेल भावना नहीं दिखाने के लिए शाहीन शाह अफरीदी की खिंचाई करते उस पर कम से कम एक मौच के लिए प्रतिबंधित लगाने की माँग की।

अधिकतर वक्त अनुचित और अतार्किक बातें करने वाले पाकिस्तानी क्रिकेट फैस भी शाहीन अफरीदी के इस अनुचित व्यवहार का विरोध करने से पीछे नहीं रहे। यूजर ने गेंदबाज के इस तरह के व्यवहार को पूरी तरह से गलत करार दिया।

उल्लेखनीय है कि शाहीन शाह अफरीदी पाकिस्तान के वही तेज गेंदबाज हैं, जिन्हें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में लगातार तीन छक्के लगे थे, जिसके कारण पाकिस्तान टी-20 विश्व कप से बाहर हो गया था। विश्व कप से पाकिस्तान के बाहर होने के बाद शाहीन अफरीदी की जगह हसन अली को पाकिस्तानी नागरिकों के कोप का सामना करना पड़ा था। सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों ने हसन अली को ऑस्ट्रेलिया से हार के लिए जिम्मेदार ठहराया और उन्हें शिया मुस्लिम बता कर गालियाँ दी गईं।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी टीम फ़िलहाल बांग्लादेश के दौरे पर है, जहाँ उसे बांग्लादेश के साथ 3 टी-20 और 2 टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है। खास बात यह है कि एक मैच जीतकर पाकिस्तान 1-0 से आगे चल रहा है।

‘तुम्हारी मुंडी घुमाकर तुम्हें सुधार देंगे’ : नायडू के आँसू देख TDP नेता ने दी सत्ताधारी पार्टी को धमकी, पत्रकार को जड़ चुके हैं झापड़

आंध्र प्रदेश विधानसभा में तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू की पत्नी का अपमान होने के बाद उनके परिवार में सत्ताधारी पार्टी और उसके नेताओं के ख़िलाफ़ गुस्सा है। ऐसे में नंदमुरी परिवार के साथ हुई नायडू की बैठक के बाद मशहूर एक्टर व टीडीपी विधायक बालाकृष्णा नंदमुरी ने आवेश में बयान दिया है। उन्होंने नायडू की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद YSRCP को धमकाया है। इस कॉन्फ्रेंस में नायडू भावुक होकर रोने लगे थे।

बालाकृष्णा ने कहा, “हम यहाँ चुप नहीं बैठे। अगर तुम नहीं बदले। हम तुम्हारी मुंडी घुमाकर तुम्हें सुधारेंगे। सिर्फ इसलिए क्योंकि तुम्हारे पास बहुमत है। हम तुम्हारी कही कोई भी भी बर्दाश्त नहीं कर लेंगे।” उन्होंने धमकी देते हुए कहा,

“चंद्रबाबू की वजह से ही हम शांत रहे हैं, लेकिन एक हद्द तक। हमें अब उनसे पूछने की जरूरत नहीं है। राज्य जिन मुद्दों का सामना कर रहा है, उनकी बात करें, महिलाओं को राजनीति में न घसीटें। सावधान रहें और जुबान संभाल कर रखें। हम इस तरह की टिप्पणियों को अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे, यह अंतिम चेतावनी है।”

सत्ताधारी पार्टी को धमकी देते हुए नंदमुरी रामकृष्णा जूनियर ने कहा कि YSRCP ने अपनी हदों को पार किया है। वह बोले, “निजी मुद्दों पर निजी हमलें न करें। हमारा सब्र न देखें। अगर तुमने हद पार की तो हम भी करेंगे। ऐसे बयान दोबारा न आ जाएँ।”

ऐसे ही नंदमुरी परिवार के अन्य लोगों ने भी नायडू की पत्नी पर हुए हमले की निंदा की। उन लोगों ने वाईएसआरसीपी विधायक गन्नावरम वल्लभनेनी वामसी द्वारा नारा के खिलाफ की गई ‘निंदनीय टिप्पणियों’ पर दुख व्यक्त किया।

बता दें कि साउथ के एक्टर बालाकृष्णा रिश्ते में चंद्रबाबू नायडू के बहनोई लगते हैं। उनका ऐसा धमकाने वाला रवैया पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले साल 2019 में बालाकृष्णा ने चुनाव प्रचार के दौरान वहाँ मौजूद एक पत्रकार को थप्पड़ जड़ दिया था। इसके साथ ही उससे बदतमीजी की थी और गालियाँ देते हुए मारने की धमकी दी थी। पूरी घटना सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। वह साउथ के मशहूर एक्टर और टीडीपी से विधायक हैं।

पाकिस्तान-चीन ने किसानों में फैलाया प्रोपेगेंडा, राहुल-अखिलेश-ममता-केजरीवाल… सबका दुष्प्रचार यथार्थ पर भारी

युद्ध जीतने के लिए कभी कभी कुछ मोर्चों से पीछे हटना ज़रूरी होता है। अच्छे सेनापति वो होते हैं जो किसी एक मोर्चे पर अटक कर नहीं रह जाते। वे अपनी लक्ष्य सिद्धि के सदा नए-नए रास्ते तलाशते है। देश में लम्बे समय से एक युद्ध चल रहा है वह है ग्रामीण विपन्नता के साथ युद्ध। जब तक देश का कृषि क्षेत्र उन्नत नहीं होगा सम्पूर्ण देश गरीबी के दुष्चक्र से बाहर नहीं आएगा। दशकों से किसान संगठन, अर्थशास्त्री और कृषि विशेषज्ञ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार की माँग कर रहे थे। तीन कृषि कानून उसी लम्बे विमर्श के नतीजे में आये थे। पर कोई भी युद्ध बिना सैनिकों की भागीदारी के जीता नहीं जा सकता।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधार के इस युद्ध में किसान एक तरह से अग्रिम पंक्ति के सैनिक ही हैं। पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश अन्न उपजाने के मामले में देश का अग्रणी हिस्सा है। पंजाब देश का सीमावर्ती राज्य होने के कारण बेहद संवेदनशील प्रान्त है। इस भूभाग के किसानों को सरकार समझा ही नहीं पाई कि किसान कानून उनके हित में हैं। कई विरोधी ताकतें, जिनमें देश के दुश्मन पाकिस्तान और चीन शामिल है, ये प्रोपेगंडा फैलाने में सफल रहे कि तीनों कानून उनके खिलाफ हैं। पंजाब बड़े समय तक आतंकवाद भी झेल चुका है। चाहे मुट्ठीभर ही सही, पर वहाँ विदेश पोषित कुछ तत्व तो है ही जो राष्ट्रद्रोही अलगाववादी मनोवृत्ति रखते हैं। इन्होंने किसानों के असंतोष की आग में खूब घी डाला।

कृषि बिल विरोध की आड़ में पंजाब में हिन्दू सिख भाईचारे को भी नुकसान पहुँचाने की भरसक कोशिश हुईं। 26 जनवरी की लाल किले की घटना को इससे जोड़कर देखा जा सकता है। पाकिस्तान ने इस दौरान वहाँ की शांति में खलल डालने के लिए ड्रोन द्वारा हथियार भी भेजे। इसका जिक्र पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने लगातार किया है। खालिस्तान के नाम पर चले आतंकवाद के उस दौर को दोहराने के लिए कई तत्व आमादा हैं। इसकी अनदेखी कोई सरकार नहीं कर सकती। इसी सिलसिले में NIA की एक टीम पिछले दिनों कनाडा में थी। उसका फीडबैक भी महत्वपूर्ण रहा होगा। पंजाब में अमनचैन से बड़ा कोई कृषि सुधार नहीं हो सकता।

कृषि सुधारों से एक बड़े बिचौलिए वर्ग को भी कठिनाई हो रही थी। सरकार अपने संवाद की विफलता का विपक्ष को दोष नहीं दे सकती क्योंकि दूसरे दलों का तो काम ही विरोध करना है। कुल मिलाकर इन सबका एक घातक मिश्रण बन गया। स्वभावतः सरल ग्रामीण मन को इन सब ने बरगलाया और एक बात इस भूभाग के किसानों के मन में बिठा दी कि ये कानून उनकी जमीन तक हड़पने के औज़ार बन सकते हैं। किसान अपनी ज़मीन से अपनी संतान से भी ज़्यादा लगाव रखता है। बात चाहे गलत ही थी, पर कई बार दुष्प्रचार भी यथार्थ से अधिक शक्तिशाली बन जाता है। सरकार और भाजपा का प्रचार तंत्र इसके सामने बौना पड़ गया। इस बीच केंद्र सरकार सिर्फ कृषि कानून विरोध को विपक्षी दलों का प्रचार मानकर अपनी धुन में ऐंठी रही।

वैसे बीजेपी को उसी समय चेत जाना चाहिए था जब उसका सबसे पुराना सहयोगी अकाली दल पंजाब में इस मुद्दे पर गठजोड़ तोड़कर केंद्र सरकार से अलग हो गया था। जहाँ एक और सरकार किसानों से संवाद में विफल रही वहीँ दूसरी और ये एक बड़ी राजनीतिक विफलता भी थी। इस राजनीतिक विफलता का शिकार भाजपा महाराष्ट्र में पहले शिवसेना के साथ करके एक बड़ा राज्य गँवा ही चुकी है। गठबंधन धर्म के मर्म को समझने में विफलता तथा उससे उत्पन्न संकेतों को न पढ़ पाने पर तुलसीदास की एक पंक्ति कही जा सकती है – ‘सत्ता मद केहि नहिं बौराया।’

विपक्षी दल कह रहे हैं कि मोदी ने ये फैसला उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा व अन्य राज्यों के चुनावों के मद्देनज़र किया है। ऐसा किया है भी तो इसमें गलत क्या है। राजनीतिक दलों का काम ही हैं कि वे जनता की नब्ज़ पहचाने और उसके अनुसार अपनी नीतियों में बदलाव करें। चुनाव जीतने के लिए कोशिश करना उनका मूल धर्म है। मोदी ने चुनाव जीतने के लिए अगर ये ऐलान किया है, तो क्या अखिलेश यादव, राहुल गाँधी, मायावती, ममता बनर्जी, केजरीवाल आदि रामनामी ओढ़ कर संन्यास पर जाने के लिए किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे थे?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु परब पर राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में संवाद की सरकारी विफलता को ठीक पहचाना और तीनों कानूनों को वापस लेने का ऐलान कर जता दिया कि वे सच्चे मायनों में जनता के मन को पढ़ना जानते हैं। मोदी सदा फ्रंटफुट पर खेलते आये हैं। इस नाते इस बड़े फैसले को अपने ऊपर ओढ़कर उन्होंने बड़े मन और लचीलेपन का भी परिचय दिया। इस सम्बोधन की भाषा, शैली और हावभाव ने उनका कद और बढ़ा दिया है। अपनी बात से पीछे हटने के लिए, वह भी सार्वजनिक तौर पर, बड़ा कलेजा और साहस चाहिए। मोदी जैसा बड़ा नेता ही ऐसा कर सकता है। इसलिए ये एक साहसी निर्णय है जो उनके जैसे कद्दावर नेता के ही बूते की बात है।

पूजा स्थल पर कुरान छिपा कर ले जा रहा था मीज़ान, हिन्दुओं ने पकड़ कर पुलिस को सौंपा: दुर्गा पूजा वाली साजिश दोहराने की कोशिश

बांग्लादेश के सिलहट डिवीजन के हबीबगंज में चौधरी बाजार के सार्वजनिक पूजा स्थल पर एक स्थानीय मुस्लिम कुरान छिपा कर ले जा रहा था। मौके पर मौजूद लोगों ने उसको पकड़ लिया है। आरोपित को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया है। पुलिस ऐसा करने के पीछे की मंशा का पता लगा रही है। यह घटना शुक्रवार (19 नवम्बर 2021) की है। पकड़े गए आरोपित का नाम मीज़ान बताया जा रहा है जिसकी उम्र लगभग 25 वर्ष है।

बांग्लादेशी हिन्दुओं के साथ अत्याचार का विरोध करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता व बंगलादेश माइनॉरिटी वॉच के सदस्य जयंता कर्माकर ने इस घटना को अपने ट्विटर हैंडल पर साझा किया है। उनके अनुसार, एक मुस्लिम लड़के को दंगे फैलाने की साजिश रचते हुए गिरफ्तार किया गया है। इसी के साथ उन्होंने #SaveBangladeshiHindus नाम से हैशटैग भी लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पकड़ा गया आरोपित मूल रूप से गाँव लुइतापुर, बेगमगंज जिला नोवाखाली का रहने वाला है। वो काफी समय तक पूजा स्थल के आस पास घूमता रहा जिस से वहाँ मौजूद लोगों को शक हुआ। जब वह मुख्य द्वारा से अंदर जाने लगा तब उसको पकड़ लिया गया। तलाशी के दौरान उसके पास से कुरान मिली जिसे वो छिपा कर अंदर ले जा रहा था। आरोपित को स्थानीय हबीबगंज सदर मॉडल पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया है। पुलिस स्टेशन प्रभारी दौस मोहम्मद इस मामले की जाँच कर रहे हैं।

इस से पहले इसी साल 13 अक्टूबर को चरमपंथी इक़बाल हुसैन ने कुमिला जिले में एक दुर्गापूजा पंडाल में घुस पर कुरान को हनुमान जी की मूर्ति के पैरों में रख दिया था। इसके बाद बांग्लादेश के तमाम हिस्सों में हिन्दू विरोधी हिंसा हुई थी। हिन्दू समुदाय ने तब कहा था कि उनमे से किसी ने भी ऐसा नहीं किया था। इसी के साथ उन्होंने बताया था कि ये सब उन पर हमले की साजिश है। इसके बाद भी 5 दिनों तक हिन्दुओं के घरों, दुकानों और पूजा स्थलों पर चरमपंथी हमले होते रहे। सोशल मीडिया पर देवी देवताओं की मूर्तियाँ तोड़ते, पंडालों में तोड़फोड़ करते और हिन्दुओं के घरों पर हमले करने के कई वीडियो वायरल हुए थे।

बाद में पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपित इक़बाल की पहचान की थी। इस बात की पुष्टि कुमिला जिले के SP फ़ारूक़ अहमद ने की थी। इक़बाल हुसैन को 21 अक्टूबर 2021 को कॉक्स बाज़ार पुलिस ने रात 11 बजे गिरफ्तार कर लिया था। इस गिरफ्तारी की पुष्टि चट्टोग्राम रेंज के एडिशनल DIG अपराध एवं जाँच ज़ाकिर हुसैन ने की थी। बाद में आरोपित इक़बाल हुसैन कुमिला पुलिस को सौंप दिया गया था।

CCTV फुटेज में यह भी पाया गया था कि आरोपितों ने लोगों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काया था। इसी के साथ हिन्दुओं पर हमले के लिए चरमपंथियों की भीड़ को उकसाया भी गया था। कुमिला जिले के SP फारूक अहमद के अनुसार सबूत के तौर पर 12 CCTV फुटेज को जमा किया गया है। इसी से साबित हुआ है कि आरोपित इक़बाल ने ही दुर्गा पूजा पंडाल में घुस कर कुरान को रात 2.10 से 3.10 के बीच रखा था।

1000 ट्रैक्टर के साथ संसद मार्च करेंगे किसान: टीकरी-गाजीपुर बॉर्डर पर जमावड़ा शुरू, सभी माँगें पूरी होने तक आंदोलन की चेतावनी

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बावजूद कथित किसान संगठन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान संगठन 29 नवंबर को संसद कूच करने वाले हैं। इसके लिए दिल्ली-एनसीआर के चारों बॉर्डर (सिंघु, टीकरी, गाजीपुर और शाहजहाँपुर) पर किसानों का जमावड़ा बढ़ाया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल सिंह का कहना है कि प्रदर्शनकारी किसानों की सिर्फ एक माँग (तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान) पूरी हुई है, लेकिन अभी उनकी आधा दर्जन महत्वपूर्ण माँगों पर केंद्र सरकार को गौर करना होगा।

बताया जा रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा की 9 सदस्यीय कमेटी ने फैसला लिया गया है कि 29 नवंबर को गाजीपुर बॉर्डर और टीकरी बॉर्डर से 500-500 किसान ट्रैक्टर पर संसद भवन के लिए रवाना होंगे। इस बीच अगर किसानों को कहीं रोका जाता है तो वे वहीं धरने पर बैठ जाएँगे। दर्शन पाल का कहना है कि वे अपने पुराने रूख पर कायम हैं कि जब तक उनकी पुरानी माँगे पूरी नहीं की जाती हैं, तब तक दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन चलता रहेगा। 

दर्शन पाल सिंह यही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, ”22, 26 और 29 नवंबर के हमारे कार्यक्रम हमेशा की तरह जारी रहेंगे। 22 को लखनऊ रैली, 26 को ऐतिहासिक किसान संघर्ष के एक साल पूरे होने पर एक सभा आयोजित करेंगे और 29 नवंबर को ट्रैक्टर मार्च (संसद तक) निकाला जाएगा। ये आंदोलन जारी रहेगा।”

उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के अलावा उनकी और भी माँगे हैं। उनमें एमएसपी, किसान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना, बिजली विधेयक 2020 व वायु गुणवत्ता अध्यादेश को वापस लेना और मृतक प्रदर्शनकारी किसानों का स्मारक बनाने के लिए स्थान का आवंटन शामिल हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन मुद्दों को हल करने के लिए बैठक बुलाएगी।

किसान नेता ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ”22 तारीख को लखनऊ की रैली को कामयाब करना है। अगर लखीमपुर खीरी में हमारे साथियों को परेशान करने की कोशिश की जाती है तो फिर हम लखीमपुर खीरी इलाके में आंदोलन चलाएँगे।”

इससे पहले गाजीपुर बॉर्डर के धरना प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार से सिर्फ तीनों कृषि कानूनों पर ही नहीं, बल्कि एमएसपी, प्रदूषण और बिजली बिल जैसे मुद्दों पर भी बात की जानी चाहिए है और यह भी देखना चाहिए कि सरकार किसानों से बात करने आगे आती है या नहीं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (19 नवंबर, 2021) को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि इन कानूनों को किसानों के फायदे के लिए लाया गया था, लेकिन एक समूह को इसके फायदे समझाने में सरकार असफल रही।