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सैफ ने कई बार किया रेप, फिर करा दिया गर्भपात: फेसबुक पर हुई थी दोस्ती, अब दे रहा हत्या की धमकी

उत्तर प्रदेश के कानपुर से लव जिहाद का एक और प्रकरण सामने आया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि शादी न करने पर उसको कत्ल करने की धमकी मिली है। इसी के साथ आरोपित के खिलाफ पीड़िता का गर्भ गिरवाने और 5 लाख रुपए ऐंठने की भी शिकायत की गई है। दोनों में जान पहचान फेसबुक के माध्यम से होना बताया जा रहा है।

प्रकरण कानपुर के कुलीबाजार क्षेत्र का बताया जा रहा जहाँ पीड़िता अपनी बहन और माँ के साथ रह रही है। युवती के पिता की मौत हो चुकी है। इसके चलते वह काफी दुःखी और तनाव में थी। इस दौरान दूसरे समुदाय के एक युवक ने उस से फेसबुक पर दोस्ती की। जब पीड़िता को पता चला कि वो मुस्लिम है तो वो उस से दूरी बनाने लगी। कुछ समय बाद आरोपित पीड़िता के घर आ कर सहानुभूति दिखाने लगा।

उसने युवती की माँ को भी शादी के लिए राजी कर लिया। आरोपित का नाम सैफ बताया जा रहा है। सैफ पर यह भी आरोप है कि उसने पीड़िता को होटल में बुला कर रेप किया था। इसी दौरान उसने युवती की अश्लील तस्वीरें भी खींच ली थी। इस दौरान वो लगातार युवती का शारीरिक शोषण करता रहा। कुछ दिन बाद युवती गर्भवती हो गई तब आरोपित ने उसका अबॉर्शन करवा दिया। एक दिन आरोपित ने कहा कि वह 40 दिन के लिए जमात पर जा रहा है। इसी के साथ उसने बीच में फोन नहीं मिलाने को कहा था। 50 दिन बाद भी जब सैफ की कोई खबर नहीं मिली तब पीड़िता ने उसकी तलाश शुरू की। तलाश के दौरान उसे जानकारी हुई कि उसने निकाह कर लिया है।

इसी दौरान उसने पीड़िता से 5 लाख रुपये ले लिए जिसे अब तक वापस नहीं किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता को शादी न करने की धमकी देने वाले आरोपित ने खुद शादी कर ली है। वो अपने परिवार के साथ रहता है। सैफ पीड़िता की अश्लील फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दे रहा है। पीड़िता के अनुसार डर से वो लम्बे समय तक चुप रही। बताया जा रहा है कि आरोपित थाने का रजिस्टर्ड अपराधी है। इसी के साथ पहले उस पर मिनी गुंडा एक्ट के तहत एक्शन भी लिया जा चुका है। पीड़िता ने प्रेमजाल के बहाने अपने साथ हुए दुष्कर्म की शिकायत पुलिस से की है। आरोप है कि पुलिस ने लम्बे समय तक शिकायत पर कार्रवाई नहीं की।

गौरतलब है कि कानपुर में लव जिहाद के मामलों की जाँच के लिए अगस्त 2021 में SIT का गठन किया था। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने जाँच दौरान जबरन इस्लाम कबूलवाने वाले 14 मामलों को एक अलग श्रेणी में रखा था। इनमें से 9 मामले एसआईटी को ऐसे मिले थे जिसमें हिंदू लड़कियों को जबर्दस्ती धर्म परिवर्तन करवाने के ठोस सबूत भी सामने आए थे। लव जिहाद के आरोपितों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि लव जिहाद वाले नहीं सुधरे तो उनकी ‘राम नाम सत्य’ वाली यात्रा निकल जाएगी।

‘व्हॉट्सएप चैट में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं’ : आर्यन को मिली बॉम्बे HC से जमानत, जानें कोर्ट के आदेश में क्या-क्या

मुंबई के क्रूज ड्रग केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन को 28 अक्टूबर को बेल मिलने के बाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट का इस मामले पर विस्तृत आदेश मीडिया में आया है। इसमें अदालत ने कहा हुआ है कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो ये दिखाए कि आरोपितों ने अपराध करने के लिए कोई प्लान बनाया था।

हाईकोर्ट ने कहा कि आर्यन खान की व्हॉट्सएप चैट में कुछ आपत्तिजनक नहीं मिला जो साजिश की ओर इशारा करे। बेल ऑर्डर के साथ अपना आदेश देते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, “कोर्ट के सामने ये साबित करने के लिए कोई ऑन-रिकॉर्ड पॉजिटिव सबूत पेश नहीं किए गए हैं कि सभी आरोपित व्यक्ति सामान्य इरादे से गैरकानूनी कार्य करने के लिए सहमत हुए।”

14 पन्नों के आदेश में लिखा गया है, “अदालत इस बात के प्रति संवेदनशील है कि सबूत के रूप में बुनियादी सामग्री होनी चाहिए, जिससे आवेदकों के खिलाफ साजिश के मामले को साबित किया जा सके।” कोर्ट के मुताबिक, “केवल इसलिए कि आर्यन, उनके दोस्त अरबाज मर्चेंट, मुनमुन धमेचा एक ही क्रूज पर थे, ये अपने आप में साजिश के आरोप का आधार नहीं हो सकता है।”

बता दें कि ड्रग्स मामले में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान शुक्रवार को ही एनसीबी दफ्तर में हाजिरी लगाने गए थे। पिछले महीने उन्हें बेल देते हुए कोर्ट ने ये शर्त रखी थी कि उन्हें हर शुक्रवार को एनसीबी कार्यालय में पेश होकर अपनी उपस्थिति के बारे में जानकारी देनी होगी। आर्यन की बेल याचिका कुछ शर्तों पर मंजूर हुई थी। 29 अक्टूबर को उन्हें जेल से रिहाई मिली थी। उन्हें 1 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी गई थी। साथ ही शर्त ये भी रखी गई थी कि आरोपित बिन पुलिस को बताए शहर से बाहर भी नहीं जा सकता।

Amazon में 10 सेकेंड में एक पार्सल का टार्गेट, स्टाफ के साथ गुलामों जैसा व्यवहार: पूर्व कर्मचारी ने वर्क स्टेशन को बताया ‘पिंजड़ा’

जेफ बेजोस की स्वामित्व वाली दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजॉन अपनी फास्ट डिलिवरी सर्विस के लिए जानी जाती है, लेकिन इसके कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। अमेजॉन की पूर्व कर्मचारी ओलिविया (काल्पनिक नाम) ने कम्पनी का काला चिट्ठा खोलकर रख दिया है। ओलिविया ने कंपनी को पिंजड़ा बताते हुए कहा कि वहाँ कर्मचारियों से गुलामों की तरह व्यवहार किया जाता है और पार्सल को समय पर डिलीवर करने के लिए उन पर बहुत अधिक मानसिक दबाव डाला जाता है। हालात ये हैं कि कर्मचारियों को ‘पेशाब जाने तक की छुट्टी’ नहीं दी जाती है।

अमेजॉन में ऑर्डर पिकर के रूप में करीब 8 महीने तक काम कर चुकी ओलिविया ने कसम ले ली है कि वो इस ऑनलाइन रिटेलर से किसी भी सामान का दोबारा ऑर्डर नहीं करेंगी। उन्हें इस काम के लिए अमेजॉन में प्रति घंटे करीब 9.70 पाउंड मिलते थे। वो 9 फीट लंबे वर्कस्टेशन में काम करती थीं। जिस कमरे में वो काम करती थीं, वहाँ पर एक कम्प्यूटर की स्क्रीन थी, जिसमें यह दिखाया जाता था कि उन्होंने कितने पार्सल पैक किए हैं।

ओलिविया का कहना है कि जिस कमरे में पार्सल की पैकिंग होती थी, वहाँ काम करने वाले लोगों पर कैमरे के जरिए नजर रखी जाती थी। अगर कभी पॉवर कट होता था तो लोगों को नजर करने के लिए लगा दिया जाता था। ओलिविया को अमेजॉन में जितनी जल्दी हो सके सामानों को ढूँढकर, उसे स्कैन कर पैक करने का काम सौंपा गया था। उन्हें जो टारगेट दिया गया था, उसके हिसाब से उन्हें प्रति घंटे 360 आइटम पैक करने थे, यानि हर 10 सेकेंड में एक आइटम।

सबसे खराब नौकरी

करीब साढ़े 10 घंटे की थका देने वाली शिफ्ट के शुरुआती दिनों में वो टॉयलेट ब्रेक लेने से भी डरती थीं, क्योंकि उन्हें ऐसा लगता था कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो उनका स्कोर गड़बड़ हो सकता है। ओलिविया ने अमेजॉन में अपनी नौकरी को दुनिया की सबसे खराब नौकरी करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने वहाँ काम करने वाले सभी लोगों के लिए अफसोस जताया है।

बेहद खराब स्थिति में काम करते हैं कर्मचारी

ओलिविया ने कंपनी की कार्यशैली को बेहद क्रूर बताया है। उन्होंने बताया कि कर्मचारी को जो लंच के लिए केवल आधे घंटे का वक्त दिया जाता है। एक मिनट की भी देरी होने पर उन्हें चेतावनी दे दी जाती है। बकौल ओलिविया, “यह बहुत ही थकाऊ काम है। दिन की शिफ्ट खत्म होते-होते हालत यह हो जाती है कि पाँव जवाब देने लगते हैं। शरीर का हर अंग थककर चूर हो जाता है।” हर 10 सेकेंड में एक आइटम को पैक करना मतलब, मानसिक दबाव काफी अधिक होता और आप शारीरिक रूप से 10 घंटे से अधिक समय तक ऐसा नहीं कर सकते हैं।

ओलिविया का मानना है कि कंपनी अपने कर्मचारियों से इस बात की उम्मीद करती है कि वो लगातार रोबोट की तरह काम करते रहें, जो कि इंसान के लिए संभव ही नहीं है। अमेजॉन को अगले कुछ हफ्तों में रिकॉर्ड सेलिंग की उम्मीद है। फोर्ब्स मैग्जीन के मुताबिक, इसके मालिक जेफ बेजोस 150 बिलियन पाउंड की संपत्ति के काफी करीब हैं। इस साल भी लोग क्रिसमस की खरीदारी के लिए अमेजॉन का रुख करने वाले हैं, क्योंकि सर्वे से पता चला है कि 86 फीसदी लोग अमेजॉन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारतीय टीम के क्रिकेटरों को बीफ-पोर्क खाने की इजाजत नहीं, मिलेगा ‘हलाल मांस’: रिपोर्ट में दावा – स्वास्थ्य और फिटनेस के लिए नई डायट

भारतीय क्रिकेट टीम के डायटरी प्लान के मुताबिक, उन्हें किसी भी रूप में पोर्क या बीफ खाने में नहीं दिया जाएगा। साथ ही जो भी मांस दिए जाएँगे, वो ‘हलाल’ होंगे। ‘स्पोर्ट्स तक’ मीडिया पोर्टल ने अपनी खबर में इसकी जानकारी दी है। ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ की वेबसाइट ने शनिवार (20 नवंबर, 2021) को सुबह 9:45::53 बजे प्रकाशित खबर में जानकारी दी कि उसे भारतीय क्रिकेट टीम के कड़े डायट प्लान के बारे में पता चला है, जिसमें पोर्क या बीफ किसी भी रूप में शामिल नहीं है।

भारतीय क्रिकेट टीम के डायटरी प्लान को लेकर ‘स्पोर्ट्स तक’ ने दी जानकारी

उक्त खबर में जानकारी दी गई है कि भारतीय क्रिकेट टीम को जिस नए डायट प्लान का अनुसरण करना है, वो कड़ा है। इसके अंतर्गत उन्हें खुद को फिट और स्वस्थ रखने के लिए बीफ और पोर्क जैसे मांस से दूर किया जा रहा है। बता दें कि जहाँ गाय-भैंस के मांस को बीफ कहते हैं, सूअर के मांस को सामान्यतः पोर्क कहा जाता है। अगर किसी खिलाड़ी को मांस चाहिए भी होगा तो उसे सिर्फ ‘हलाल’ मांस ही मिलेगा। आगे आने वाली सीरीजों और ICC टूर्नामेंट्स के लिए ये फैसला लिया गया है। भारतीय क्रिकेट टीम का शेड्यूल अब काफी व्यस्त रहने वाला है।

‘स्पोर्ट्स तक’ ने बताया है कि इसका कड़ाई से पालन भी कराया जा रहा है। कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण के कारण बनाए गए ‘बायो बबल’ के नियम के कारण कुछ खिलाड़ी हर मैच में समान ऊर्जा बनाए रखने में कामयाब नहीं हो रहे हैं। कोरोना प्रोटोकॉल्स से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। इनमें से कई खिलाड़ी रोज मांस खाने के आदी हैं, इसीलिए उनके खानपान की आदतों में सुधार लाने की कोशिश हो रही है। नया डायटरी प्लान उन्हें रोज अपने मन के खाने की आदत को सुधारेगा।

बता दें कि फ़िलहाल भारत और न्यूजीलैंड का T20 सीरीज चल रहा है, जिसमें रोहित शर्मा कप्तानी कर रहे हैं। बतौर टीम इंडिया के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ के लिए भी ये पहली सीरीज है। शुक्रवार (19 नवंबर, 2021) को राँची में खेले गए सीरीज के दूसरे मैच में न्यूजीलैंड को 7 विकेट से हरा कर भारत ने श्रृंखला अपने नाम कर ली है। जयपुर में हुआ पहला मैच भी भारत ने भारत ने 17 नवंबर को 5 विकेट से जीता था। अब रविवार (21 नवंबर, 2021) को सीरीज का आखिरी मैच कोलकाता में खेला जाएगा। इसके बाद कानपुर और मुंबई में दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला भी खेली जाएगी।

भारत लाकर हिंदू नामों से विदेश भेजे जाते थे बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम: एयर इंडिया का स्टाफ करता था मदद, यूपी ATS का खुलासा

उत्तर प्रदेश ATS ने हिन्दू नाम से भारतीय लोगों के फर्जी दस्तावेज लगाकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुसलमानों को विदेश भेजने वाले रैकेट का पर्दाफाश किया है। ATS ने इस रैकेट से जुड़े एक आरोपित को सहारनपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम अजय घिल्डियाल है, जो एयर इंडिया के कस्टमर केयर में काम करता है। पुलिस ने यह जानकारी 19 नवम्बर 2021 (शुक्रवार) को दी है।

अजय दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर साल 2016 से कार्यरत है। अजय देहरादून में पटेल नगर थाना क्षेत्र स्थित रतनपुर नया गाँव का रहने वाला है। अजय पर अब तक लगभग 40 लोगों को फर्जी दस्तावेजों के सहारे स्पेन, ब्रिटेन सहित अन्य यूरोपीय देशों भेजे जाने का आरोप है। पुलिस इस मामले में और जानकारी जुटा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 11 नवंबर 2021 (गुरुवार) को ATS ने बांग्लादेश और म्यांमार से मुस्लिमों को भारत में हिन्दू नाम से प्रवेश करवाने वाले रैकेट का खुलासा किया था। इस मामले में मानव तस्करी गिरोह का मददगार विक्रम को गाज़ियाबाद और समीर मंडल को भी पश्चिम बंगाल के 24 परगना से गिरफ्तार किया गया था। वह ट्रैवल एजेंसी चलाता है। ये आरोपित बांग्लादेशियों और रोहिंग्या मुसलमानों को भारत की नागरिकता दिलाने का भी काम करते थे। इसी भारतीय नागरिकता के सहारे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को विदेश भेजा जाता था। विक्रम से हुई पूछताछ के बाद उसके सहयोगी अजय घिल्डियाल को पकड़ा गया है।

आइजी एटीएस जीके गोस्वामी के मुताबिक, अजय फर्जी दस्तावेजों के सहारे विदेश भेजे जाने वाले हर व्यक्ति पर 15 हजार रुपये मिलते थे। इस पैसे में कई अन्य कर्मचारी भी हिस्सा बंटवाते थे, जो एयरलाइंस ड्यूटी में तैनात हैं। इस मामले में एक अन्य आरोपित गुरप्रीत है। गुरप्रीत लंदन पासपोर्ट ऑफिस में काम करता है। गुरप्रीत अजय को फोन पर निर्देश दिया करता था। विस्तृत पूछताछ के लिए ATS ने अजय को 10 दिन के रिमांड पर लिया है। ATS ने अन्य आरोपित विक्रम का भी रिमांड लिया है। इस दौरान दोनों आरोपितों को आमने-सामने बैठा कर सवाल-जवाब किए जाएँगे।

पकड़े गए आरोपित रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों का हिन्दू नाम से आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र बनवाते थे। बाद में इसी आधार पर फर्जी नाम-पतों पर पासपोर्ट बनवाए जाते थे। मानव तस्करी का यह गिरोह घुसपैठियों की पहचान बदलकर विदेश भेजने के लिए आरटीपीसीआर जाँच की फर्जी रिपोर्ट व जाली वैक्सीनेशन रिपोर्ट भी तैयार करवाता था। बताया जा रहा है कि अभी इस रैकेट से जुड़े कई अन्य लोगों का खुलासा हो सकता है।

भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर T-20 सीरीज अपने नाम की, शशि थरूर ने अगले मैच में श्रेयस अय्यर को कप्तान बनाने की माँग की

भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज पर भारत ने 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली है। भारत को मैच जिताने में रोहित शर्मा, केएल राहुल और हर्षल पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शुक्रवार (26 नवंबर 2021) को कोलकाता के ईडन गार्डन्स में तीसरा मैच खेला जाएगा। भारत की जीत से कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर बेहद खुश हैं। इसको लेकर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका मानना है कि तीसरे टी-20 मुकाबले में सीनियर खिलाड़ियों को आराम देकर श्रेयस अय्यर को कप्तानी करनी चाहिए।

केरल के तिरुवनन्‍तपुरम से सांसद थरूर ने ट्वीट किया, ”भारत को टी-20 सीरीज जीतते देखना अच्छा लगा। अगले मैच के लिए हमें उन लोगों को आराम देना चाहिए, जिन्होंने अपना बेहतर प्रदर्शन दिखाया है। रोहित शर्मा, केएल राहुल, ऋषभ पंत, भुवनेश्वर कुमार और दीपक चाहर को अब आराम करना चाहिए। श्रेयस अय्यर को कप्तान के तौर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलना चाहिए।”

थरूर का यह ट्वीट सोशल मीडिया यूजर्स को पसंद नहीं आया है। एक यूजर ने लिखा, ”इसी तरह, किसी दिन पप्पू प्रदर्शन करेंगे और फिर आराम करेंगे, ताकि आप अध्यक्ष बन सकें।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “शशि जी कृपया क्रिकेट को क्रिकेट ही रहने दे, उसमें राजनीति ना करें। बदलना ही है तो अपनी पार्टी का कप्तान बदले।”

आपको बता दें थरूर जो कि खुद केरल से हैं। उन्होंने श्रेयस अय्यर को कप्तान के तौर पर टीम का नेतृत्व करने की बात कही है, जिनकी जड़ें केरल से हैं। श्रेयस अय्यर का जन्म 6 दिसंबर 1994 को मुबंई के चेंबूर में हुआ था, लेकिन उनके पिता संतोष अय्यर केरल से हैं और माँ रोहिणी अय्यर कर्नाटक के मंगलोरियन तुलुवा से हैं।

बॉक्स ऑफिस पर यश की ‘KGF 2’ और प्रभास से टकराएँगे आमिर खान-वरुण धवन: ‘लाल सिंह चड्ढा’ की रिलीज डेट फाइनल

बॉक्स ऑफिस पर आमिर खान की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ कन्नड़ अभिनेता यश की ‘KGF 2’ और तेलुगु अभिनेता प्रभास की ‘सालार’ से टकराने वाली है। 14 अप्रैल, 2021 को इन तीनों ही फिल्मों का क्लैश होगा। आमिर खान ने अपनी फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ को उस दिन बैसाखी के अवसर पर रिलीज करने का निर्णय लिया है। इससे पहले यश की ‘KGF 2’ और प्रभास की ‘सालार’ के निर्माता पहले ही इसी तारीख़ पर फिल्म की रिलीज का ऐलान कर चुके हैं।

भले ही ये दोनों क्रमशः कन्नड़ और तेलुगु फ़िल्में हों, लेकिन इन्हें हिंदी में भी रिलीज किया जाएगा। यश की ‘KGF’ पूरे भारत में सुपरहिट हुई थी और ये फिल्म इसका दूसरा भाग है। ‘बाहुबली’ सीरीज फेम प्रभास भी अब हर जोन के दर्शकों के बीच जाने-माने नाम हैं। ‘KGF 2’ में मुख्य विलेन का किरदार संजय दत्त निभा रहे हैं तो ‘सालार’ में श्रुति हासन मुख्य अभिनेत्री होंगी। ‘लाल सिंह चड्ढा’ में आमिर खान के अपोजिट करीना कपूर को कास्ट किया गया है।

यश और आमिर खान के फैंस के बीच तो अब से ‘सोशल मीडिया वॉर’ शुरू हो गया है। दोनों के फैंस कह रहे हैं कि दूसरी फिल्म को पीछे हटना पड़ेगा। फिल्म समीक्षक सुमित काडेल ने बताया है कि ‘KGF 2’ आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ का अच्छा-खासा बिजनेस खा जाएगी। उन्होंने कहा कि जहाँ दक्षिण में ‘लाल सिंह चड्ढा’ की कमाई का कोई चांस नहीं है, उत्तर में ‘KGF 2’ आमिर की फिल्म का पर्याप्त व्यवसाय खा जाएगी। उन्होंने यश की फिल्म को ‘2022 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्म’ करार दिया।

इसी बीच ये भी सामने आया है कि वरुण धवन की ‘भेड़िया’ की रिलीज डेट भी यही है। इस हॉरर कॉमेडी फिल्म में दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की बेटी जाह्नवी कपूर भी हैं। ये फिल्म ‘रूही’ और ‘स्त्री’ की अगली इन्सटॉलमेंट है। उत्तर-पूर्वी राज्य अरुणाचंल प्रदेश में इसकी शूटिंग हुई है। ऐसे में अब देखना ये है कि इनमें से कौन ही फिल्म अपना रिलीज डेट खिसकाती है और कौन सी फिल्म अड़ी रहती है। कुछ फिल्म समीक्षकों का मानना है कि भारत जैसे बड़े देश में दो फ़िल्में एक साथ बड़ा व्यापार करने की क्षमता रखती हैं।

‘धर्मांतरण विरोधी कानून से अल्पसंख्यकों के अधिकारों का होगा हनन, फैलेगी अराजकता’: आर्कबिशप ने कर्नाटक CM बोम्मई को लिखा पत्र

अवैध धर्मान्तरण को रोकने के लिए कर्नाटक में सीएम बासवाराज बोम्मई की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार की ‘धर्मान्तरण विरोधी अधिनियम’ का विरोध शुरू हो गया। इसे अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों का हनन बताकर दुष्प्रचार करने का प्रयास किया जा रहा है। बेंगलुरु के आर्कबिशप रेवरेंड पीटर मचाडो ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई को पत्र भी लिखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीटर मचाडो ने सीएम को लिखे पत्र में धर्मान्तरण रोकने के लिए लाए जा रहे बिल को भेदभावपूर्ण और मनमाना करार दिया है। उनका मानना है कि इस बिल के कानून का रूप लेने से न केवल अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन होगा, बल्कि राज्य में शांति और एकता को नुकसान पहुँचेगा। इससे अराजकता की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने मौजूदा कानूनों के रहते नए कानून बनाए जाने को गैर-जरूरी बताया है। इसके साथ ही मचाडो ने दावा किया है कि कर्नाटक का पूरा ईसाई समुदाय एक स्वर में इस कानून का विरोध कर रहा है।

आर्कबिशप के द्वारा लिखा गया पत्र (साभार: ट्विटर)

पत्र में पीटर मचाडो ने संविधान के आर्टिकल 25, 26 का हवाला दिया। उन्होंने कहा, “संविधान के अनुच्छेद 25 में धर्म की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पेशे का विधान है और अनुच्छेद 26 के तहत सभी धर्मों को स्वतंत्रतापूर्वक अपने धार्मिक मामलों की देखरेख करने का अधिकार दिया गया है।” इसके अलावा, आर्क बिशप ने राज्य सरकार द्वारा राज्य में गैर-सरकारी ईसाई मिशनरियों व चर्चों का सर्वे कराने के फैसले का भी विरोध किया है। मचाडो का कहना है कि जनगणना के दौरान जब सरकार एक बार डाटा कलेक्ट कर चुकी है तो दोबारा ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले 26 अक्टूबर 2021 में आर्कबिशप ने ऐलान किया था कि वो सरकार द्वारा लाए जाने वाले धर्मान्तरण विरोधी विधेयक का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसे कानूनों से केवल साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ेंगे। गौरतलब है कि राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र में इस विधेयक को पेश करने जा रही है।

‘गरीबी के कारण बने थे ईसाई…अब जागरूक हो गए हैं’ : छत्तीसगढ़ में 1200 लोगों ने हिंदू धर्म में की वापसी, पाँव धोकर किया गया स्वागत

छत्तीसगढ़ में पत्थलगाँव के खूँटापानी में 400 परिवार के 1200 लोगों ने हिंदू धर्म में वापसी की है। इन लोगों को तीन पीढ़ी पहले ईसाई बनाया गया था। दो दिन के कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए। ये कार्यक्रम आर्य समाज और हिंदू समाज द्वारा आयोजित किया गया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश मंत्री व ऑपरेशन घर वापसी के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने सभी लोगों का पाँव धुलकर हिंदू धर्म में फिर स्वागत किया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश मंत्री व जशपुर राजपरिवार के प्रबल प्रताप सिंह ने कार्यक्रम का हिस्सा बनते हुए कहा कि हिंदुत्व की रक्षा करना उनके जीवन का एकमात्र संकल्प है। उन्होंने बताया कि घर वापसी करने वाले अधिकांश परिवार बसना सराईपाली के थे।

वह बोले, “आज इतनी अधिक संख्या में लोगों की उनके मूल धर्म में वापसी अच्छे संकेत हैं। किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर किया गया काम कभी टिकाउ नहीं होता है। मिशनरियों ने गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनका धर्मांतरण किया था। शिक्षा व स्वास्थ्य के नाम पर धर्म का सौदा किया था, पर हम लगातार इन षड्यंत्रों को बेकनाब करते रहेंगे।”

वहीं हिंदू धर्म में लौटने वाले परिवारों ने बताया कि करीब 3 पीढ़ी पहले उनके पूर्वजों का धर्मांतरण हुआ था। उस वक्त वे बेहद गरीब थे और मिशनरियों की ओर से खेती में कुछ (आर्थिक) मदद और बीमारियों में इलाज की सहायता मिलने के कारण धर्म परिवर्तन किया था। पर अब वे जागरूक हो गए हैं।

बता दें कि इस पूरे घर वापसी अभियान में 100 परिवार स्थानीय थे और 300 परिवार बसना सराईपाली से थे। इन सबको 20 बसों में बैठाकर लाया गया था। पूरे कार्यक्रम में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। ये दो दिवसीय कार्यक्रम था। इसके पहले दिन खूँटापानी में आर्य समाज द्वारा कलश यात्रा निकाली गई थी जिसमें बहुत महिलाएँ शामिल हुई थीं। इसके बाद बाइक रैली निकली, जिसमें 300 युवा शामिल हुए और जोर-जोर से जय श्रीराम के नारे लगाए गए।

‘शराब के गंध से साबित नहीं होता कि व्यक्ति नशे में है’: केरल HC ने सरकारी कर्मचारी के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने को कहा

केरल हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि निजी स्थानों पर शराब का सेवन अपराध नहीं है, जब तक कि वहाँ कोई उपद्रव न हुआ हो। इसी के साथ हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि केवल शराब की गंध से यह साबित नहीं किया जा सकता है कि व्यक्ति नशे में है। यह आदेश जस्टिस सोफी थॉमस ने सरकारी कर्मचारी सलीम कुमार की याचिका पर दिया। सलीम अपने विरुद्ध केरल पुलिस द्वारा साल 2013 में दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करवाने के लिए यह कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। याचिकाकर्ता मूल रूप से कोल्लम जिले के निवासी हैं और वर्तमान में कासरगोडा जिले के राजस्व विभाग में कार्यरत हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सलीम कुमार पर केरल के कासरगोड जिले के बडियाडका (Badiyadka) थाने में धारा 118 (A) के तहत केस दर्ज हुआ था। इस केस में शिकायतकर्ता और गवाह दोनों ही पुलिसकर्मी थे। कुमार की तरफ से वकील वी प्रमोद और जी चंद्रमोहन ने अपने तथ्य अदालत के आगे रखे। अपने विरुद्ध दर्ज केस के निरस्त हो जाने से वो काफी खुश हैं। इस संबंध में उन्होंने मनोरमा ऑनलाइन से बातचीत की है।

कुमार के अनुसार, फरवरी 2013 में उन्होंने अपने एक सहयोगी के साथ अवैध खनन की सूचना पर एक वाहन पकड़ा था। तब ड्राइवर ने अंदर से दरवाजा और खिड़की बंद कर लिया था। इसकी सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस 1 घंटे तक नहीं पहुँची। इस बीच 3 हथियारबंद लोग बाइक से आए, जिनके डर से वे एक पहाड़ी के पीछे छिप गए। इस दौरान मौका पाकर संदिग्ध वाहन भाग निकला।

कुमार का कहना है, “खुद पर हमले की शिकायत दर्ज करवाने के लिए पुलिस ने हमें थाने बुलवाया। 26 फरवरी 2013 को मुझे थाने में संदिग्ध वाहन और आरोपितों की शिनाख्त के लिए बुलाया गया। मेरा सहयोगी बाहर था, इसलिए मैं अकेला गया। पुलिस ने थाने में हमसे बहस की और बेवजह गलतफहमी पैदा करने की कोशिश की। पुलिस ने मुझ पर उन लोगों को पकड़वाने का दबाव बनवाया, जो इस मामले में शामिल नहीं थे।”

कुमार का कहना है कि इस दौरान पुलिस ने उन पर शराब पिए होने का आरोप लगाया और जबरदस्ती उनकी साँसों का परीक्षण किया। कुमार ने बताया कि जब उन्होंने नजदीकी अस्पताल में परीक्षण कराने के लिए कहा तो पुलिसकर्मियों ने मना कर दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनका फोन छीन लिया गया और उनके साथ मारपीट कर उनसे एक कागज़ पर जबरन हस्ताक्षर भी करवाया गया। उसके बाद उन्हें थाने से जमानत पर छोड़ा गया।

कुमार के अनुसर, इस केस में पुलिस ने तमाम मनगढ़ंत बातें लिखी थीं। इसलिए उन्होंने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया। यह केस हाईकोर्ट में साल 2019 में ट्रांसफर कर दिया गया और आखिरकार अब मुझे इसमें जीत मिली है। कुमार के अनुसार, पुलिस के आरोपों में उनके मुँह से शराब की दुर्गंध आना भी शामिल था। न्यायालय ने अपने परीक्षण में यह भी पाया कि अगर मैंने थोड़ी बहुत शराब पी भी थी तो इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि मैंने नशे में किसी के साथ दुर्व्यवहार किया।