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मस्जिद के पास DJ बंद करने को कहा, नासिर और उसके साथियों ने घर में घुसकर मीनस के परिवार को पीटा

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में मस्जिद के पास डीजे बंद करने को कहे जाने पर मारपीट का मामला सामने आया है। आरोपित और पीड़ित एक ही समुदाय के हैं। घटना 15 नंवबर 2021 (सोमवार) की है। नोएडा पुलिस ने FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। हमले का आरोप नासिर, नाज़िम, आरिफ, रिज़वान, शाहबाज़ पर लगा है। कुछ अज्ञात भी वारदात में शामिल बताए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार रजपुरा गाँव में एक बारात आई थी। आरोपित DJ बजा रहे थे। बारात पड़ोस के गाँव नेहरवाला से आई थी। जब बारात गाँव के मस्जिद के बगल से गुजरी तब मीनस ने DJ बंद करने को कहा। 38 वर्षीय मीनस का गाँव में ही एक जनरल स्टोर है। मीनस के अनुसार उस समय अज़ान का समय हो रहा था। इस रोकटोक से नाराज हो कर आरोपितों ने मीनस पर डंडे और रॉड से हमला किया। मीनस के अनुसार आरोपित उसके घर में घुस गए। उसकी पत्नी और भतीजे के साथ भी मारपीट की। मीनस की पत्नी गुलिस्तां के सिर में चोट आई है। वहीं मेहंदी हसन के हाथ में फैक्चर है। हमले में मीनस के परिवार के कुल 3 सदस्य घायल हुए हैं।

दनकौर थाना प्रभारी अरविन्द पाठक के अनुसार आरोपितों पर धारा 147, 148 और 323 के तहत केस दर्ज किया गया है। FIR दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

‘यूपी में कभी भी अखिलेश यादव की सरकार नहीं बनेगी’: जिस किन्नर सोनम ने राहुल गाँधी को दी थी चुनौती अब सपा मुखिया को दिया शाप

किन्नर सोनम एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में हैं। योगी सरकार ने उन्हें ट्रांसजेंडर वेलफेयर बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका शाप है कि समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव कभी यूपी की सत्ता में नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव को अपना नाम बदल कर ‘अखिलेश अली जिन्ना’ रखने की सलाह दी है।

रिपोर्ट के अनुसार सोनम का कहना है कि बीजेपी ने उन्हें उनकी उम्मीद से ज्यादा दिया है। इसका इस्तेमाल वे पार्टी और अपने समाज की सेवा में करेंगी। साथ ही कहा कि यूपी में अब कभी भी अखिलेश यादव की सरकार नहीं बनेगी। टिकट मिलने पर उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की बात भी कही है।

बता दें कि सोनम को यूपी सरकार में राज्य मंत्री का दर्जा मिला है। उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे। सोनम किन्नर पिछली बार 2014 में तब चर्चा में आईं थीं जब उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान अमेठी में राहुल गाँधी के खिलाफ पर्चा भरा था। करीब तीन महीने पहले ही उन्होंने सपा छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। तब उन्होंने कहा था कि सपा ने किन्नरों के साथ-साथ पूरे समाज के साथ अन्याय किया है।

सोनम ने कहा था, “सपा में मेरे साथ ही नहीं बल्कि पूरे किन्नर समाज के साथ अन्याय हुआ है। अब मरते दम तक भारतीय जनता पार्टी मे ही रह कर ही राजनीति करूँगी। सपा में कभी वापस नही जाऊँगी।” सोनम का कहना है कि राज्य में करीब 5 लाख किन्नर हैं, उन सभी का आशीर्वाद भाजपा के साथ है। राज्य में अगली सरकार दोबारा भाजपा की बनेगी और योगी आदित्यनाथ सीएम बनेंगे।

वहीं केशव प्रसाद मौर्य ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी बहुत बौखलाहट में है। तीन चुनाव हार चुकी है और चौथा हारने जा रही है। हमारा संगठन बूथ तक है। लिहाजा हमें जमीनी हकीकत पता है। यही कारण है कि समाजवादी पार्टी गुंडे, अपराधी, माफिया, तुुष्टिकरण की राजनीति करते करते जिन्ना तक आ गई है।”

उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव अपना नाम बदल कर अखिलेश अली जिन्ना रख लें और अपनी पार्टी को समाजवादी पार्टी की जगह जिन्नावादी पार्टी बना दे। फिर भी न जिन्ना उनको जिता पाएँगे, न अतीक अहमद जिता पाएँगे, न अंसारी जिता पाएँगे। उत्तर प्रदेश की जनता ने कमल खिलाई है। उसकी खुशबू, उसका सुगंध, उसका लाभ जनता तक ईमानदारी से पहुँच रहा है। यहाँ गुंडागिरी थी, माफियागिरी थी, उसका अंत हुआ है। जनता बहुत सुकून महसूस कर रही है।”

पत्रकार है या प्रोपेगेंडा की मास्टरनी, मिलिए 21 साल की समृद्धि सकुनिया से: छोटी उमर का बड़ा एजेंडा देख चौंक जाएँगे

एक मीडिया संस्थान है- एचडब्ल्यू न्यूज (HW News) नेटवर्क। इसी से जुड़ी हैं पत्रकार समृद्धि के सकुनिया (Samriddhi K Sakunia)। समृद्धि को बीते दिनों एक और पत्रकार स्वर्णा झा के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में इन्हें जमानत दे दी गई। इन पर फेक न्यूज प्रकाशित कर सांप्रदायिक हिंसा भड़काने का आरोप है। 

सकुनिया ने श्रृंखलाबद्ध ट्वीट कर त्रिपुरा में मस्जिद तोड़े जाने का दावा किया था। एक वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया कि जली हुई पुस्तक कुरान है। जिसके हवाले से यह दावा किया गया जब उसके पास त्रिपुरा पुलिस पहुँची तो उसने ऐसा कुछ कहे जाने से इनकार किया। जब इसको लेकर सकुनिया से फोन पर पूछताछ की गई तो उसने कथित तौर पर अपने दावों की पुष्टि के लिए कोई भी सबूत देने से इनकार कर दिया।

समृद्धि सकुनिया के फेक न्यूज का पुराना इतिहास

21 साल की सकुनिया इंडियन एक्सप्रेस, द लिफलेट, द सिटिजन, टू सर्कल्स और न्यूज क्लिक के लिए भी लिखती हैं। सोशल मीडिया में उनके अच्छे-खासे फॉलोअर हैं। इसका इस्तेमाल वह ट्विटर और इंस्टाग्राम पर एजेंडा वाली पत्रकारिता के लिए करती हैं। चाहे सीएए विरोधी आंदोलन हो या कथित किसानों का प्रदर्शन, इजरायल का मसला हो या केंद्र की मोदी सरकार, वह हर मौके पर वामपंथी एजेंडे के हिसाब से प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाते नजर आती हैं।

आरोपित मुस्लिम तो फैक्ट छिपाए

इंस्टाग्राम पर सकुनिया ने एक रिपोर्ट पब्लिश की कि मुस्लिम चूड़ी विक्रेता को हिंदुओं ने पीटा। यह मामला मध्य प्रदेश के इंदौर का है। इस घटना के लिए ‘हिंदू टेरर’ शब्द का इस्तेमाल किया। लेकिन शातिराना तरीके से यह बात छिपा ली कि तस्लीम अली हिंदू नाम से चूड़ी बेच रहा था। उस पर हिंदू नाबालिग लड़की के साथ बदसलूकी करने और दो आधार कार्ड रखने का आरोप है।

लखीमपुरी खीरी में हुई घटना ने पूरे देश को मर्माहत किया। लेकिन इस मामले में भी सकुनिया ने एकपक्षीय एजेंडे को बढ़ाया। प्रदर्शनकारियों की मौत का वीडियो शेयर किया। यह बताया कि कैसे विपक्ष के नेताओं को लखीमपुर नहीं जाने दिया जा रहा है। लेकिन भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाले गए बीजेपी कार्यकर्ताओं का जिक्र तक नहीं किया। न जान की भीख माँगते श्याम सुंदर निषाद का वीडियो शेयर किया। न ही मार डाले गए पत्रकार रमन कश्यप का जिक्र किया।

मई 2021 में सकुनिया ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया। सवाल उठाया कि इसे चुनौती देने वाले याचिकाकर्ता पर अदालत ने जुर्माना लगा दिया। सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को ‘आवश्यक’ बताने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट की आलोचना किए जाने की जरूरत बताई। दावा किया कि जब देश के लोग दवा और वैक्सीन के लिए तरस रहे हैं, यह प्रोजेक्ट आवश्यक नहीं हो सकता। लेकिन इस दौरान इस युवा पत्रकार ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की अनदेखी कर दी। यह तक नहीं बताया कि प्रोजेक्ट के एक छोटे से हिस्से का ही निर्माण कार्य चल रहा था।

इसी साल मई में इजरायल और फिलस्तीन के बीच हिंसक संघर्ष चल रहा था। इस दौरान भी सकुनिया लिबरल, वामपंथी और कट्टरपंथी एजेंडे के तहत इजरायल विरोधी घृणा दिखाने से नहीं बाज आईं। एक वीडियो शेयर कर लोगों से इजरायल का समर्थन नहीं करने की अपील की। अपने अतार्किक तथ्यों के समर्थन में इजरायल के अस्तित्व तक को नकार दिया। 

नवंबर 2020 में सकुनिया ने अपने इंस्टाग्राम से करीब 6 मिनट का एक मोनोलॉग पब्लिश किया। इसके जरिए उसने अपनी ओर से ‘लव जिहाद’ को झूठा साबित करने की भरपूर कोशिश की। बीजेपी पर अंतर धार्मिक विवाह को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया। इसको सुनकर ऐसा लगता है कि देश भर की तमाम लव जिहाद पीड़िताओं ने जो भुगता वह सकुनिया के लिए मायने नहीं रखता। 

जाहिर है कि करियर के शुरुआती दौर में ही सकुनिया जिस तरह से एकपक्षीय प्रोपेगेंडा को विस्तार दे रही हैं, उससे साफ है कि पत्रकारिता का चोला उसने उसी वामपंथी-कट्टरपंथी एजेंडे को हवा देने के लिए ओढ़ा है जो इस देश की मेनस्ट्रीम मीडिया और कथित नामचीन पत्रकारों के लिए प्राणवायु है।

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई अनुराग की यह रिपोर्ट आप विस्तार से इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

मिस्र में मिला 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर, अब तक छह में से 2 मंदिरों की हो चुकी है खोज

मिस्र की राजधानी काहिरा में 4500 साल पुराना सूर्य मंदिर मिला है। कुछ पुरातत्वविदों ने काहिरा के दक्षिण में मौजूद अबु गोराब शहर में सूर्य देव के मंदिर के प्राचीन अवशेषों का पता लगाया है। इसे दशकों की सबसे बड़ी खोज कहा जा रहा है।

माना जाता है कि यह छह सूर्य मंदिरों में से एक है। मिस्र में छह ऐसे और मंदिर हैं, जो 4500 साल पहले बनवाए गए थे। उनमें से एक अभी अबु गोराब के रेगिस्तान में मिला है। मिस्र में अब तक कुल दो प्राचीन सूर्य मंदिरों की खोज की जा चुकी है।

पुरातत्वविदों के अनुसार, यह मंदिर तब बनाया गया था जब पाँचवे साम्राज्य के शासक फैरोह जिंदा थे। इसके पीछे फैरोह का मकसद था कि उन्हें लोग भगवान का दर्जा दें। दूसरी तरफ पिरामिड्स बनवाए गए थे, जहाँ पर फैरोह के मरने के बाद उनकी कब्र बनाई गई थी। ताकि मरने के बाद वह भगवान का स्वरूप हासिल कर सकें।

मिस्र के उत्तरी इलाके में खुदाई करने वाले पुरातत्वविद अबुसीर को सबसे पहले फैरोह न्यूसिरी इनी द्वारा बनाया गए इन सूर्य मंदिरों के बारे में पता चला था, जिन्होंने 25वीं शताब्दी ईसा पूर्व में लगभग 30 वर्षों तक शासन किया था। इसके बाद ही पता चला था कि देश में और भी सूर्य मंदिर हैं, जिसके बाद पूरे देश में इन मंदिरों की खोज शुरू कर दी गई थी।

‘महात्मा गाँधी पर टिप्पणी करने के लायक नहीं, वह नचनिया है’: अब महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस नेता ने कंगना को कहे अपशब्द

अभिनेत्री कंगना रनौत के ‘भीख में आजादी’ वाले बयान पर मचे बवाल के बीच महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के मंत्री विजय वडेट्टीवार ने विवादित बयान दिया है। उन्होंने कंगना रनौत को ‘नचनिया’ कहा। उन्होंने बुधवार (17 नवंबर 2021) को कहा, “वह महात्मा गाँधी पर टिप्पणी करने के लायक नहीं है। वह एक ‘नचनिया’ है, जिसे विवादास्पद लोगों में से एक माना जाता है। महात्मा गाँधी पर उनकी टिप्पणी सूरज पर थूकने के समान है। अगर आप सूरज पर थूकते हैं, तो थूक आप पर पड़ता है।”

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा, “कोई नाचनेवाली महात्मा जी के ऊपर अगर बात करती है तो उसका उत्तर देना मैं ठीक नहीं समझता। कहाँ महात्मा गाँधी, कहाँ कंगना। 10 में से 9 लोग उनके बारे में बुरी बातें करते हैं। मुझे नहीं लगता कि वह बात करने के लायक है।” 

हाल ही में कंगना ने एक पुरानी खबर शेयर किया, जिसमें लिखा था कि किस तरह महात्मा गाँधी इस बात को लेकर राज़ी हो गए थे कि अगर सुभाष चंद्र बोस मिलते हैं तो उन्हें अंग्रेजों को सौंप दिया जाएगा। कंगना रनौत ने लिखा, “जिन्होंने सच में आज़ादी की लड़ाई लड़ी, उन्हें उन लोगों ने अपने मालिकों को सौंप दिया, जिनके खून में वो साहस, गर्मी और आग नहीं ही कि वो स्वतंत्रता के लिए लड़ सकें।”

अभिनेत्री ने लिखा कि भारतीयों पर अत्याचार करने वालों के विरुद्ध लड़ने का साहस न रखने वाले कुछ नेता सत्ता के भूखे थे, धूर्त थे। उन्होंने लिखा कि ऐसे ही लोगों ने हमें सिखाया कि अगर कोई तुम्हारे एक गाल पर तमाचा मारे तो दूसरा गाल आगे कर दो, ऐसे ही आज़ादी मिलेगी। कंगना रनौत ने लिखा कि आज़ादी ऐसे नहीं मिलती है, बल्कि इस तरह से सिर्फ भीख ही मिल सकती है। साथ ही उन्होंने लोगों को अपने नायकों को अच्छे से चुनने की सलाह दी।

कंगना रनौत ने दावा किया कि महात्मा गाँधी ने कभी भी भगत सिंह या नेताजी सुभाष चंद्र बोस का समर्थन नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि ऐसे सबूत मौजूद हैं, जो बताते हैं कि महात्मा गाँधी चाहते थे कि भगत सिंह को फाँसी पर चढ़ाया जाए। उन्होंने लोगों से कहा कि आपको चुनने की ज़रूरत है कि आप किसे अपना नायक मानते हैं, किसका समर्थन करते हैं। कंगना रनौत ने लिखा कि इन सभी को अपनी याद में एक साथ रखना और हर साल उनकी जयंती पर याद करना पर्याप्त नहीं है।

प्रियंका गाँधी पर ‘सुनो द्रौपदी’ चुराने का आरोप, कवि पुष्यमित्र उपाध्याय ने लगाई लताड़; कहा- कविता चोरों से देश क्या उम्मीद रखे

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी पर कविता चोरी का आरोप लगा है। दरअसल उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटीं कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी बुधवार (17 नवंबर 2021) को चित्रकूट पहुँची। उन्‍होंने पहले मत्स्यगजेन्द्रनाथ मंदिर में जलाभिषेक कर आरती उतारी मंदाकिनी की जलधारा में बने मंच से महिलाओं से संवाद किया।

इस दौरान उन्होंने चित्रकूट के रामघाट पर ‘लड़की हूँ-लड़ सकती हूँ’ संवाद को संबोधित करते हुए महिलाओं से उत्तर प्रदेश को बदहाली से निकालने के लिए संघर्ष में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने एक कविता पढ़ते हुए कहा, “बहुत हुआ इंतजार अब, सुनो द्रौपदी शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएँगे। औरों से कब तक आस लगाओगी…।”  उन्‍होंने कहा कि महिलाएँ खुद अपनी लड़ाई लड़ें।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि महिलाओं को अपनी हालत बदलने के लिए ख़ुद संघर्ष करना होगा, कॉन्ग्रेस पार्टी हर क़दम पर उनके साथ है। उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि अगले चुनाव में वे आँख मूँद कर महिलाओं को वोट दें। अब इस कविता को लिखने वाले कवि पुष्यमित्र उपाध्याय ने इस पर आपत्ति जताते हुए प्रियंका गाँधी को लताड़ लगाई है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “प्रियंका गाँधी जी ये कविता मैंने देश की स्त्रियों के लिए लिखी थी न कि आपकी घटिया राजनीति के लिए। न तो मैं आपकी विचारधारा का समर्थन करता हूँ और न आपको ये अनुमति देता हूँ कि आप मेरी साहित्यिक संपत्ति का राजनैतिक उपयोग करें। कविता भी चोरी कर लेने वालों से देश क्या उम्मीद रखेगा?” उन्होंने एक और ट्वीट में इस कविता को लेकर छपी खबर का कटिंग शेयर किया है।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि महिलाओं की स्थिति में तब तक सुधार नहीं होगा जब तक फ़ैसले लेने वाली जगहों पर महिलाएँ नहीं होंगी। कॉन्ग्रेस ने इसीलिए चुनाव में 40 फ़ीसदी टिकट महिलाओं को देने का ऐलान किया है। महिलाएँ ही महिलाओं का दर्द समझ सकती हैं और जब विधानसभा में बड़ी तादाद में महिलाएँ होंगी तो उनके पक्ष में नीतियाँ भी बनेंगी।

ओवैसी ने वसीम रिजवी के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत, कहा- ‘किताब में इस्लाम के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल’ 

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी तथा पार्टी के अन्य नेताओं ने बुधवार (17 नवंबर 2021) को हैदराबाद के पुलिस आयुक्त अजंनी कुमार से मुलाकात की और उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज कराई है।

ओवैसी ने रिजवी पर अपनी किताब में आपत्तिजनक चीजें लिखने का आरोप लगाया है। ओवैसी ने अपनी शिकायत में कहा है, “हिंदी में लिखी गई किताब में इस्लाम और उसके अनुयायियों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।” 

उन्होंने कहा, “किताब की सामग्री और आपत्तिजनक बयानों को उनकी धार्मिक भावनाएँ आहत करने के मकसद से लिखा गया है जो पैगंबर मोहम्मद के अनुयायी हैं और इस्लाम के सिद्धांतों को मानने वाले हैं।”

ओवैसी ने कहा कि रिजवी के बयान का मकसद भारत के मुस्लिमों के विरुद्ध शत्रुता की भावना पैदा करना है। ओवैसी ने धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य की भावना भड़काने के लिए रिजवी और उनके साथियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया। पुलिस आयुक्त से मिलने के बाद ओवैसी ने बताया कि पुलिस आयुक्त ने रिजवी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आश्वासन दिया है। ओवैसी ने उम्मीद जताई है कि रिजवी को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

गौरतलब है कि शिया वक्फ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिजवी ने गाजियाबाद के डासना के महाकाली मंदिर में दर्शन करने के बाद महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती से अपनी किताब ‘मोहम्मद’ का विमोचन कराया था। इससे पहले वसीम रिजवी कुरान की आयतें हटाने की याचिका दायर करने को लेकर भी सुर्खियों में रहे थे। उन्होंने कुरान की 26 आयतों को आतंकवाद को बढावा देने वाली बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए रिजवी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

सांसद व अभिनेत्री नुसरत जहाँ और निखिल जैन की शादी अवैध: कोलकाता के एक कोर्ट का फैसला

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद और बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री नुसरत जहाँ की पहली शादी को कोलकाता की एक कोर्ट ने अमान्य करार दिया है। कोर्ट ने बुधवार (17 नवंबर 2021) को पास किए गए आदेश में नुसरत की बात को सही मानते हुए बताया कि नुसरत जहाँ मुस्लिम हैं वहीं निखिल जैन हिंदू हैं। कोर्ट ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत दोनों की शादी नहीं हुई है। इसके अलावा कोर्ट ने आदेश में बताया कि यह शादी तुर्की में कभी रजिस्टर्ड ही नहीं हुई। इसलिए तुर्की के बोडरम में 19/06/2019 को हुई दोनों की कथित शादी कानूनी रूप से वैध नहीं है।

बता दें कि नुसरत जहाँ ने जून 2019 में निखिल जैन से तुर्की में शादी की थी। लेकिन शादी के कुछ दिन बाद ही दोनों के संबंधों में दरार आ गई। नुसरत जहाँ ने यहाँ तक कह दिया था कि उन्होंने निखिल जैन से कभी शादी ही नहीं की थी।

साभार: सोशल मीडिया

नुसरत का कहना था कि उनकी शादी भारतीय कानून के तहत मान्य नहीं है। ऐसे में तलाक का सवाल ही पैदा नहीं होता। निखिल जैन ने नुसरत पर कई आरोप लगाए। इसके बाद अभिनेत्री ने उन आरोपों को खारिज करते हुए जैन पर कई गंभीर आरोप लगाए।

साभार: सोशल मीडिया

कुछ महीने पहले नुसरत जहाँ माँ बनी हैं, उस वक्त निखिल जैन ने उन्हें बधाई दी थी, हालाँकि उन्होंने यह भी कहा था कि वे इस बच्चे के पिता नहीं हैं। इस बीच नुसरत जहाँ और उनके को-स्टार यश दासगुप्ता के बीच नजदीकी काफी बढ़ी और वे नुसरत और बच्चे का काफी केयर भी करते नजर आए हैं।

बताया जा रहा है कि नुसरत बंगाली अभिनेता यश दासगुप्ता को डेट कर रही हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चे के पिता का नाम देबाशीष दासगुप्ता बताया गया है। इसमें बच्चे का पूरा नाम ‘यिशान जे दासगुप्ता’ दर्ज है। यश दासगुप्ता भाजपा से जुड़े हैं। चंडीताला विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़े थे, लेकिन हार गए थे।

TRF कमांडर अफाक सिकंदर, हैदर, इब्राहिम समेत 5 आतंकियों का सेना ने किया सफाया: J&K के कुलगाम में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों को लगातार दूसरे दिन बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। सेना ने कुलगाम के पोंबे और गोपालपुरा में बड़ी कार्रवाई करते हुए पाँच आतंकियों को मार गिराया है। मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों में टॉप कमांडर अफाक सिकंदर, शकीर, हैदर और इब्राहिम शामिल है और एक की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है।

बताया जा रहा है कि सुरक्षाबलों ने एक गुप्त सूचना मिलने के बाद अपने ऑपरेशन को अंजाम दिया था। पहले उन्होंने कुलगाम के पोंबे इलाके में तीन आतंकियों का सफाया कर दिया। सुरक्षाबलों ने सुरक्षा के लिहाज से इस इलाके में आवाजाही रोक दी थी और ट्रैफिक को सीमित कर दिया है। इसके अलावा कुलगाम के गोपालपुरा इलाके में आतंकियों के साथ सुरक्षाबलों की मुठभेड़ अभी भी जारी है। यहाँ भी दो आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया है।

गौरतलब है कि बीते दिनों जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मौत के घाट उतारा था। कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेस में इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने मीडियाकर्मियों से बताया था कि बीते रविवार को जिस आतंकी ने श्रीनगर के डाउन टाउन इलाके में पुलिसकर्मी पर हमला किया था, उसे मुठभेड़ में मार गिराया गया है।

बता दें कि पुलिस को हैदरपोरा स्थित एक मकान में दो से तीन आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद पुलिस ने सुरक्षाबलों के साथ संयुक्त अभियान चलाकर आतंकियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई में फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें दो आतंकी ढेर हो गए थे।

1962 के युद्ध में चीनी सैनिकों के दाँत खट्टे करने वाले वीरों के सम्मान में रेजांग ला में बना स्मारक: 18 नवंबर को रक्षा मंत्री करेंगे उद्घाटन

भारत औऱ चीन के बीच 1962 में हुए इंडो-सिनो वार में अदम्य वीरता औऱ शौर्य का प्रदर्शन करते हुए 13वीं कुमाऊँ बटालियन की चार्ली कंपनी के मेजर शैतान सिंह ने अपने 114 जवानों के साथ सर्वोच्च बलिदान देने से पहले चीनियों को कई बार मात दी थी। अब इन्हीं रियल लाइफ हीरोज के सम्मान में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत के साथ लद्दाख में रेजांग ला युद्ध की बरसी पर 18 नवंबर को एक नया स्मारक राष्ट्र को समर्पित करेंगे।

रेजांग ला युद्ध के दौरान हथियारों से सुसज्जित चीनी पीएलए ने भारतीय चौकी पर हमला कर दिया। शैतान सिंह के नेतृत्व में बहादुरी और साहस की मिशाल कायम करते हुए भारतीय सेना ने करीब 400 चीनी सैनिकों को ढेर कर दिया था। वीरगति को प्राप्त होने से पहले इस कंपनी ने सात बार चीनियों को धूल चटाई। इसका एक स्मारक चुशूल में युद्ध स्थल के करीब बनाया गया था। अब यहाँ रेजांग ला में बनने वाले स्मारक में 13 कुमाऊँ चार्ली कंपनी के सैनिकों के सम्मान में एक सभागार और एक फोटो गैलरी है। इसमें उन 20 सैनिकों के नाम का भी उल्लेख किया जाएगा, पिछले साल गलवान घाटी में संघर्ष के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे। इसके अलावा यहाँ युद्ध क्षेत्र का मॉडल भी लगाया जाएगा।

पिछली सरकारों ने देश के असली नायकों को दबा दिया था

पिछली सरकारों ने 1962 के युद्ध के दौरान अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले नायकों के बलिदान को भुला दिया था। लेकिन रेजांग ला के युद्ध नायकों के सम्मान में स्मारकों का निर्माण कर मोदी सरकार ने इस दिशा में नीतिगत बदलाव किए हैं। भले ही भारत तकनीकी तौर पर 1962 का युद्ध हार गया था, लेकिन भारत के जवानों की शौर्य का गाथाएँ अमर हैं। 1962 की लड़ाई के बाद सर्वाधिक समय तक सत्ता में रहने वाली कॉन्ग्रेस ने 1962 की बरसी को नजरअंदाज किया था। 2012 में ही इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति पर 1962 के युद्ध को याद करने के लिए औपचारिक समारोह आयोजित किया गया था।

रेजांग ला का युद्ध

रेजांग ला युद्ध 18 नवंबर, 1962 को हुआ था। 13 कुमाऊँ रेजिमेंट के मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में बहादुरी के प्रतिमान गढ़ इतिहास में दर्ज हो गए। भारतीय सेना की अपेक्षा चीनी सैनिकों के अधिक हथियार और सेना होने के बाद भी भारतीय सेना ने दुश्मन को भारी नुकसान पहुँचाते हुए उसे पीछे धकेल दिया।

रेजांग ला युद्ध में भारत के 6 सैनिक ही बच पाए, जिन्होंने समय-समय पर अपने अनुभवों और साथियों की बहादुरी से दुनिया को अवगत कराया। 13 कुमाऊँ रेजिमेंट की चार्ली कम्पनी ने चुसुल में मुस्तैद होकर चीनियों के आक्रमण को ध्वस्त किया, जिससे लद्दाख शेष भारत से अलग होने से बच गया। मेजर (रिटायर्ड) गौरव आर्या ने अपने ब्लॉग पर लिखा था कि 13 कुमाऊँ रेजिमेंट को बारामुला से युद्धस्थल पर भेजा गया था।

गन हिल, गुरुंग पहाड़ी और मुग्गेर पहाड़ियों पर विभिन्न बटालियनों को तैनात किया गया था। इसी तरह चार्ली कम्पनी को रेजांग ला का जिम्मा सौंपा गया था। हड्डी गला देने वाली ठंड, शीत लहर और पत्थरों के बीच हमारे जवान उस परिस्थिति में लड़े, जिसके वे आदी नहीं थे। समुद्र से 16,000 फ़ीट की ऊँचाई पर उनके पास न तो कवर था और न सपोर्ट के लिए कोई और दस्ता। सबसे पहले 9वें पलटन पर 350 चीनी सेना ने आक्रमण किया।

चीनी जैसे ही नजदीक पहुँचे, भारतीय सेना के जवानों ने ऐसा आक्रमण किया कि वहाँ केवल चीनी सैनिकों की ही लाशें नज़र आईं। मेजर शैतान सिंह एक पलटन से दूसरे पलटन तक घूम-घूम कर स्थिति की समीक्षा कर रहे थे और सैनिकों का हौसला बढ़ा रहे थे। कहते हैं कि उन्होंने ऐसा युद्ध किया था कि उन्हें अपने शरीर, अपनी सुरक्षा और अपने आसपास का कुछ भान ही नहीं था। हालाँकि, इस युद्ध में 7वें और 8वें पलटन का एक भी जवान जिन्दा नहीं बचा, सब बलिदान हो गए। मेजर गौरव आर्या ने अपने ब्लॉग में चीनी सैनिकों की संख्या 3000 के करीब बताई है। हालॉंकि इस युद्ध में जीवित बचे सैनिकों के अनुसार चीनी 5-6 हजार की संख्या में थे।

मेजर शैतान सिंह के पार्थिव शरीर को जोधपुर में उनके गाँव बनासर ले जाया गया और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

‘वीर अहीर’ रेजांग ला की बर्फीली चोटियों पर कहावत ‘लास्ट मैन, लास्ट राउंड’ तक लड़े। चार्ली कंपनी के 123 सैनिकों में से 114 वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि बाकी को चीनी सेना ने पकड़ लिया था। हालाँकि, बाद में वे उन्हें चकमा देकर वहाँ से निकलने में सफल रहे। रंजांग ला में सर्वोच्च बलिदान देने वाला हर जवान एक नायक था और कृतज्ञ राष्ट्र उनमें से हर एक को याद करता है।