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‘जिहादी दुल्हन’ शमीमा बेगम को सता रहा है डर, जेल से निकालने के लिए वकीलों से लगाई गुहार: 15 साल की उम्र में भागी थी सीरिया

दुनिया भर में ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से कुख्यात और आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) में कभी शामिल रही इंग्लैंड की शमीमा बेगम एक बार फिर सुर्खियों में है। शमीमा बेगम का कहना है कि आईएस के आतंकियों द्वारा जेल शिविर में उसके तंबू में आग लगाने की कोशिश करने के बाद उसे अपनी जान का डर सता रहा है।

पिछले हफ्ते आगजनी के प्रयास के बाद बेगम ने खुद को जेल से बाहर निकालने के लिए वकीलों से मदद की गुहार लगाई है। ‘द सन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आशंका जताई जा रही है कि जेल से निकलने के लिए कई बार झूठ बोलने वाली पूर्व जेहादी बेगम अब एक और झूठ को बढ़ा-चढ़ाकर सबके सामने पेश कर रही है।

इससे पहले सितंबर में शमीमा बेगम ने ISIS से तौबा करते हुए कहा था कि उसे अपने किए ​गए कामों पर पछतावा हो रहा है। उसने ‘गुड मार्निंग ब्रिटेन’ शो के लाइव इंटरव्यू में कहा था कि वह दहशतगर्दों के पास जाने की बजाए मरना पसंद करेगी। शमीमा ने ब्रिटेन के लोगों से माफी माँगते हुए यह भी कहा कि वह अपने देश आकर आतंकवाद के सभी मामलों का सामना करने को तैयार है। कभी लंदन के लोगों को मारने की कसम खाने वाली शमीमा बेगम सीरिया के अल-रोज जेल शिविर में बंद है और वह लंदन वापस लौटना चाहती है।

बता दें कि बांग्लादेशी मूल की शमीमा बेगम का जन्म लंदन में हुआ था और 2014 में इंग्लैंड से भागकर सीरिया चली गई थी और आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हो गई थी। जिहाद के लिए भागने वाली अब 22 साल की हो चुकी शमीमा बेगम की उम्र उस समय केवल 15 साल थी। उसने वहाँ जाकर ISIS के एक आतंकी से निकाह कर लिया था और इस शादी से उसे 2 बच्चे भी हुए।

रिपोर्ट के अनुसार एक विशेषज्ञ ने कहा कि शमीमा बेगम ‘वेस्टर्नाइज्ड’ दिखने की कोशिश कर रही हैं। शमीमा बेगम ने आईटीवी प्रसारक के ‘गुड मार्निंग ब्रिटेन’ शो में कहा, ”मैं ब्रिटेन के लोगों से माफी माँगती हूँ। मैंने बहुत ही कम उम्र में एक बड़ी गलती की थी और उस उम्र के अधिकतर बच्चों को पता भी नहीं होता है कि उन्हें अपने जीवन में क्या करना है। इस उम्र में अधिकतर बच्चे भ्रमित हो जाते हैं और वे आसानी से इस तरह की चीजों के झाँसे में आकर आसानी से बेवकूफ बन जाते हैं।”

‘स्वर्णिम काल था चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन’: CM योगी ने सम्राट अशोक को किया याद, कहा – न भूलें तालिबान ने कैसे तोड़ी बुद्ध की मूर्ति

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में प्रदेश भाजपा द्वारा आयोजित ‘सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन’ में हिस्सा लिया और उसे सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य के शासनकाल को भारत का स्वर्णिम युग करार दिया। सीएम योगी ने कहा कि जब भी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए कोई व्यक्ति समाज का दोहन करता है, समाज उन्नति नहीं कर सकता। उन्होंने अफगानिस्तान के बामियान में तालिबान द्वारा महात्मा बुद्ध की ढाई हजार वर्ष पूर्व मूर्ति तोड़े जाने का जिक्र किया।

उन्होंने कहा कि बुद्ध ने दुनिया पर कभी युद्ध नहीं थोपा और शांति-मैत्री की ही बात की। उन्होंने कहा कि जब भी शांति, मैत्री और करुणा की बात होगी, महामानव महात्मा बुद्ध मानवता के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि किस तरह बम लगा कर बुद्ध की प्रतिमा को तोड़ा गया, वो हमें नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने बुद्ध की प्रतिमा को तोड़ने का मतलब दुनिया में आपसी सौहार्द को नष्ट करने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद जिस तरह अमेरिका के बमों से तालिबानियों की दुर्गति हुई, उनकी चमड़ी झुलसी।

सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूछा कि हमारे देश का राष्ट्रीय चिह्न क्या है? हमारे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बीच में क्या है? इसके बाद लोगों को उन्होंने याद दिलाया कि सम्राट अशोक के स्तंभ के ऊपर जो प्रतीक है न, वही भारत का चिह्न है। फिर उन्होंने समझाया कि तिरंगे के बीच में जो है, वो धर्मचक्र है। फिर उन्होंने पूछा कि भारत का ‘स्वर्ण युग’ कौन सा था? सीएम योगी ने खुद ही जवाब दिया कि चन्द्रगुप्त मौर्य का, जिनके राज्य का हिस्सा पाकिस्तान, बांग्लादेश और कई आया भूभाग भी थे।

उन्होंने कहा कि समय के साथ हम अपनी एकता को बनाए नहीं रख पाए और जाने-अनजाने में मध्य एशिया के कुछ बर्बर जातियों को यहाँ हमला करने को मजबूर कर दिया, जिन्होंने हमारी संपदा को नष्ट किया। उन्होंने कहा कि इतिहास में चन्द्रगोत मौर्य और अशोक को महान नहीं बताया, लेकिन भारत में आकर हारने वाले सिकंदर को महान बता दिया गया। सीएम योगी ने कहा कि इतिहास इस पर मौन इसीलिए रहा, क्योंकि सच्चाई भारतवासियों के सामने आएगी तो समाज खड़ा हो जाएगा और फिर देश खड़ा हो उठेगा।

मुख्यमंत्री ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने के बारे में कहा, “देश का कोई गाँव ऐसा नहीं था, जहाँ आप पैदल चल सकते हैं। पहले गंदगी थी। आज सब साफ़-सुथरा है, क्योंकि गरीबों को शौचालय मिला है। 2014 से पहले सत्ताधारी दल वालों को और विधायक के जाति वालों को ही आवास मिलते थे, चेहरा देख कर। आज 10 करोड़ लोगों को देश में आवास मिला है। अकेले उत्तर प्रदेश में 43 लाख गरीबों को आवास योजना का लाभ मिला है। 5 लाख रुपए की स्वास्थ्य बीमा का कवर दिया गया। कैंसर होने या किडनी खराब होने पर इसे असाध्य मान लिया जाता था।”

सीएम योगी ने कहा कि ‘आयुष्मान भारत’ और ‘मुख्यमंत्री जन आरोग्य’ के तहत लाखों लोगों को स्वास्थ्य बीमा का फायदा मिल रहा है। कोरोना पर आते हुए उन्होंने कहा कि बीमारी चेहरा देख कर नहीं आती, कोई भी उसकी चपेट में आ सकता है। उन्होंने 100 वर्ष पहले प्लेग आने के कारण ढाई करोड़ लोगों की मौत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बीमारी और भूख से भी इनमें से कई मरे थे। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे गाँव के गाँव साफ़ हो गए थे। उन्होंने कोरोना के दौरान टेस्ट, उपचार, टीका और राशन के मुफ्त होने की योजना का जिक्र किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ध्यान दिलाया कि पहले की तरह अब भूख से मौत नहीं हुई, और उपचार भी मुफ्त मिला। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर आज सबसे अच्छा है। उन्होंने टीका लगवाने वालों का अभिनन्दन करते हुए उन्हें प्रेरित करने को कहा, जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाया है। उन्होंने कहा कि ये ‘राष्ट्रीय अभियान’ है और सिर्फ शासन-प्रशासन का काम नहीं। उन्होंने 2022 में होली तक यूपी सरकार की फ्री राशन योजना का जिक्र किया, जिसके तहत दाल, खाद्य तेल और नमक भी मिलेगा।

भीमा-कोरेगाँव हिंसा में भी शामिल था गढ़चिरौली में मारा गया मिलिंद तेलतुम्बड़े, ₹50 लाख का यह इनामी भाई की प्रेरणा से बना था नक्सली

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से लगभग 900 किलोमीटर दूर गढ़चिरौली जिले के घने जंगलों में शनिवार (13 नवम्बर 2021) को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 26 नक्सलियों को मार गिराया था। मारे गए नक्सलियों में 50 लाख का इनामी और मोस्ट वांटेड नक्सली मिलिंद तेलतुम्बड़े भी शामिल है। यह ऑपरेशन सुरक्षा बलों की एंटी नक्सल यूनिट C-60 कमांडों द्वारा किया गया था। ऑपइंडिया से बातचीत में गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक अंकित गोयल ने इस ऑपरेशन की पुष्टि की है।

रिपोर्ट के अनुसार, मिलिंद प्रतिबंधित संगठन सीपीआई-माओवादी का सदस्य था। उस पर 50 लाख रुपये का इनाम था। वह कई अन्य मामलों के साथ भीमा कोरेगांव एल्गार परिषद केस में भी शामिल था। NIA की चार्जशीट के अनुसार, वह कई अन्य आरोपितों के साथ दो दर्जनों मामलों में वांछित था। उस पर UAPA का भी चार्ज लगाया गया था। सरेंडर करने वाले नक्सलियों ने उसके शव की शिनाख्त की है।

मिलिंद तेलतुम्बड़े दीपक प्रवीण, अरुण और सुधीर के छद्म नामों से भी जाना जाता था। वह नए नक्सलियों की भर्ती करवाता था और उन्हें सुरक्षाबलों पर हमले करने के लिए गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग देता था। शनिवार को हुए ऑपरेशन में मिलिंद के साथ 4 शीर्ष नक्सली भी मारे गए हैं। इन सभी पर सरकार ने इनाम घोषित कर रखा था। मारे गए कुल 26 नक्सलियों में 6 महिला नक्सली भी शामिल हैं।

मुठभेड़ में मारे गए अन्य इनामी नक्सलियों में 20 लाख रुपये का इनामी नक्सली लोकेश मांगू, 16 लाख रुपये का इनामी महेश शिवाजी रावजी गोटा, 8 लाख रुपये का इनामी कोरची दलम, 8 लाख का इनामी सन्नू कोवाची और 6 लाख रुपये का इनामी प्रदीप उर्फ़ तिलक मांकुर शामिल हैं। इस मुठभेड़ में पुलिस के 4 जवानों के भी घायल होने की खबर है। घायल जवानों का इलाज नागपुर के अस्पताल में चल रहा है। घायल जवानों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

NIA द्वारा वर्ष 2020 में दाखिल चार्जशीट में आनंद तेलतुम्बड़े, गौतम नवलखा, हनी बाबू, सागर गोरखे, रमेश गैचोर, ज्योति जगताप और स्टेन स्वामी को वामपंथी आतंकवादी संगठन सीपीआई माओवादी विचारधारा से प्रेरित बताया गया था। इन सभी पर सरकार के विरुद्ध असंतोष फैलाने और उसे अस्थिर करने तथा हिंसक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है। इसी के साथ इन सभी पर जाति, धर्म और समुदाय के आधार पर समाज को विभाजित करने की साजिश रचने का भी आरोप है।

मिलिंद तेलतुम्बड़े लम्बे समय से फरार चल रहा था। वह आनंद तेलतुम्बड़े का छोटा भाई था। मिलिंद तेलतुम्बड़े ने कभी बताया था कि इस रास्ते पर चलने की प्रेरणा उसे अपने भाई आनंद तेलतुम्बड़े से ही मिली थी। NIA की चार्जशीट में मिलिंद तेलतुम्बड़े पर अपने भाई के साथ मिलकर शहरी क्षेत्रों में नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप है।

पंजाब के मोगा से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी सोनू सूद की बहन: अभिनेता ने खुद किया ऐलान, कहा – चन्नी और केजरीवाल, दोनों अच्छे इंसान

बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने ऐलान किया है कि उनकी बहन मालविका पंजाब के मोगा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये जानकारी दी। हालाँकि, अभी तक उनकी बहन ने किसी राजनीतिक दल से जुड़ने का ैला नहीं किया है। लेकिन, इसका फैसला जल्द किया जा सकता है। सोनू सूद ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि सीएम से मिल कर अच्छा लगा। उन्होंने चन्नी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, दोनों को अच्छा इंसान बताया।

मोगा स्थित अपने आवास पर बहन मालविका सच्चर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अभिनेता सोनू सूद ने कहा कि फ़िलहाल वो चुनाव नहीं लड़ेंगे और न ही राजनीति का हिस्सा बनेंगे। सोनू सूद ने कहा कि उनकी बहन जनसेवा करना चाहती हैं।उन्होंने बताया कि वो किस पार्टी में शामिल होंगी, इसका ऐलान सही समय पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मालविका सच्चर तैयार हैं और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का कोई सानी नहीं है। उन्होंने कहा कि वो अन्य नेताओं से भी मिलेंगे।

AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के अलावा ‘शिरोमणि अकाली दल’ के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल से भी उनकी मुलाकात हो सकती है। उन्होंने कहा कि राजनीति से जुड़ना ज़िंदगी का बड़ा निर्णय होता है और सिर्फ कुछेक बैठकों से ज्यादा ये विचारधारा पर आधारित होता है। उन्होंने कहा कि उनके राजनीति से जुड़ने से ज्यादा फ़िलहाल मालविका का समर्थन करना ज़रूरी है, क्योंकि वो मोगा में जड़ों से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि वो अपनी योजनाओं का खुलासा बाद में करेंगे।

‘हॉलीवुड इंग्लिश अकादमी’ की CEO मालविका सच्चर के बारे में सोनू सूद ने कहा कि जीतने के बाद स्वास्थ्य सुविधाएँ उनकी पहली प्राथमिकता होगी। जीतने के बाद ज़रूरतमंद मरीजों को मुफ्त में डायलिसिस की सुविधा का भी वादा किया गया। साथ ही राज्य में बेरोजगारी के मुद्दे पर भी उनके द्वारा काम करने की बात कही गई। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवा तभी ड्रग्स का रुख करते हैं, जब उनके पास रोजगार नहीं होता। बकौल सोनू सूद, वो लोग इस पर पहले से ही काम कर रहे हैं।

बता दें कि इस बार पंजाब के मोगा पहुँचे सोनू सूद के आवास पर सियासी हलचल जोरों पर है। बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। पंजाब में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के भी आने की चर्चा थी, लेकिन वो नहीं आए। स्थानीय AAP और कॉन्ग्रेस यूनिट में अटकलों के बाजार गर्म हैं। स्थानीय SSP सुरिंदर जीत सिंह और DSP सिटी जशनदीप सिंह के अलावा कई बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी उनसे मिले। इससे पहले जब वो यहाँ आते थे तो इस तरह की गहमागहमी नहीं देखी गई थी।

महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नवाब मलिक पर ‘आपत्तिजनक’ ट्वीट, ट्विटर यूजर समीत ठक्कर के घर पहुँची 200 पुलिस

ठाणे पुलिस ने नागपुर निवासी समीत ठक्कर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। समीत पर आरोप है – महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक व आवास मंत्री जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट। इस मामले में शुक्रवार (12 नवंबर 2021) को सीनियर इंस्पेक्टर अतुल सबनीस के साथ सीताबुलडी पुलिस की एक टीम बयान दर्ज करने के लिए वाथोडा में ठक्कर परिवार के आवास पर पहुँची थी।

समीत के भाई ऋषि ने बताया कि पुलिस चाहती थी कि उनका छोटा भाई घर से बाहर निकाला जाए, लेकिन पूर्व ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अगले दिन समीत को साथ लाने का भरोसा दिया, जिसके बाद पुलिस मान गई। उन्होंने कहा, “शनिवार को करीब 180-200 पुलिसकर्मी हमारे घर पहुँचे, जो संदिग्ध लग रहे थे।”

ऋषि ने आगे कहा कि एक वरिष्ठ पत्रकार ने एक राजनेता को एक्सपोज करने के लिए उनके भाई को धमकी दी थी। उन्होंने कहा, “मेरा भाई एक कार्यकर्ता है और बिना किसी पार्टी से जुड़े स्वतंत्र पत्रकारिता करता है।” उन्होंने कहा कि समीत को सत्ता में बैठे कुछ लोगों और क्रिकेटरों की सच्चाई सामने लाने के बाद से दबाव बनाया जा रहा था।

इस मामले पर नागपुर पुलिस प्रमुख अमितेश कुमार ने बताया कि शहर की पुलिस ने केवल कलवा पुलिस की मदद की, जो ठक्कर के घर पर मामला दर्ज करने के लिए नोटिस देने गई थी। कुमार ने कहा, “नागपुर पुलिस केवल कलवा टीम के साथ थी। कानून के तहत इस मामले की कार्रवाई की जा रही है।”

टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा कि बावनकुले और भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ ठक्कर के घर तब पहुँची, जब ठाणे पुलिस शहर की पुलिस के साथ नोटिस देने के लिए उस स्थान पर पहले से मौजूद थी। सूत्रों ने बताया कि ठाणे पुलिस ठक्कर को गिरफ्तार करने पर विचार कर रही है, जिन पर पहले से ही सोशल मीडिया पर राजनेताओं को निशाना बनाने के लिए कई अपराध दर्ज हैं।

बुर्के वाली महिला ने भेजा ‘टिफिन बम’: फिरौती नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी चिट्ठी में, अरेस्ट हुआ पप्पू

राजस्थान की राजधानी जयपुर में एक कपड़ा व्यापारी को केक के डिब्बे में बम भेजने की घटना में पुलिस ने ई-रिक्शा ड्राइवर को हिरासत में लिया है। इस मामले में 10 लाख रुपये की फिरौती माँगने का भी आरोप है। हिरासत में लिए गए ड्राइवर ने डमी बम का बॉक्स किसी बुर्के वाली महिला द्वारा पाए जाने की बात कही है। ड्राइवर के अनुसार, यह घटना शुक्रवार (12 नवम्बर 2021) की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत में लिए गए ई-रिक्शा चालक का नाम उमर दराज है और वह किराए का ई-रिक्शा चलाता है। उसे स्थानीय लोग पप्पू नाम से भी जानते हैं। पुलिस ने पप्पू को जवाहर नगर की कच्ची बस्ती से पकड़ा है। पप्पू के अनुसार, शुक्रवार को शाम लगभग 4 बजे मामा होटल के पास उसे एक महिला मिली थी। महिला ने बुर्का पहन रखा था। उसके हाथ में एक डिब्बा था, जिसे उसने मायरा कपड़ा शोरूम को देकर आने को कहा। महिला ने पप्पू को शोरूम का विजिटिंग कार्ड के साथ 50 रुपये भी दिए गए।

जब ड्राइवर पप्पू ने महिला को अपने साथ चलने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, कपड़ा व्यापारी ने लेटर पढ़कर बॉक्स ड्राइवर को वापस कर दिया था। व्यापारी विभु गुप्ता द्वारा लौटाया गया पार्सल लेकर पप्पू वापस होटल पहुँचा, लेकिन उसे वहाँ कोई नहीं मिला। ड्राइवर उमर दराज उर्फ़ पप्पू डिब्बे में केक समझ कर उसे अपने घर ले आया। घर पर अपनी पत्नी द्वारा टोके जाने पर वह डिब्बा और लेटर दोनों नाले के पास फेंक आया। इसके बाद वो अपने मालिक के पास गया और उससे अगले दिन दूसरे रिक्शे की माँग की थी।

जिस व्यापारी को लेटर से धमकी दी गई थी उसका नाम विभु गुप्ता है। विभु लेटर पढ़कर काफी डर गया था। लेटर में बम होने की बात कही थी और उससे फिरौती की माँग की गई थी। उसने धमकी भरे इस लेटर की बात सबसे पहले स्थानीय पार्षद नीरज अग्रवाल को बताई। नीरज अग्रवाल ने पुलिस को सूचित किया। मामला बम, लेटर और फिरौती का था इसलिए पुलिस ने फ़ौरन आसपास के CCTV की पड़ताल की। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने पप्पू को पकड़ा रिक्शा के मालिक से भी पूछताछ की है। अब पुलिस को बुर्के वाली महिला की तलाश कर रही है।

चिट्ठी में 10 लाख की फिरौती के साथ ऐसी भी धमकी थी, जिसे कपड़ा व्यवसायी का कोई परिचित ही जान सकता था। लेटर लिखा गया था कि गुप्ता के पास पैसे कमी नहीं है और अगर उसने फिरौती नहीं दी तो उन्हें बम से उड़ा दिया जाएगा। इसी के साथ लेटर में पुलिस को सूचना देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही गई थी।

इस मामले की जाँच जवाहर नगर पुलिस कर रही है। एहतियातन पुलिस बम निरोधक दस्ता साथ ले गई थी। पुलिस के अनुसार, पार्सल में बारूद नहीं था। माना जा रहा है कि यह सब व्यापारी को डराने के लिए किया गया था। पुलिस ने इस मामले में जाँच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी देने की बात कही है। जयपुर पुलिस के अनुसार, इस मामले में मुकदमा अपराध संख्या 252/2021 दर्ज कर मामले की जाँच की जा रही है।

rajasthan police searching burqa women who send dummy parcel bomb to cloth trader in jaipur and ask extortion money

‘अस्पताल में इलाज नहीं तो आधी रात भी घर से निकलना’ – मदद की आदत के कारण मधुबनी के RTI कार्यकर्ता अविनाश झा की हत्या?

बिहार में एक स्वतंत्र पत्रकार (RTI कार्यकर्ता) बुद्धिनाथ झा का शव मधुबनी जिले से बरामद किया गया है। बुद्धिनाथ झा पिछले 4 दिनों से लापता थे। इनको अविनाश झा नाम से भी जाना जाता था। पिछले कुछ समय से ये प्राइवेट अस्पताल माफियाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

स्थानीय समाचार फ्रंटलाइन 24 के अनुसार बुद्धिनाथ झा का शव अधजले हालत में बरामद हुआ। उनकी लाश एक थैले में बाँध कर पीपल के पेड़ के नीचे डाली गई थी। यह स्थान बेनीपट्टी – बसैठ राजमार्ग 52 पर पड़ने वाले उरैन गाँव के पास है। यह घटना 12 नवम्बर 2021 (शुक्रवार) की है।

बिहार पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। यह केस बेनीपट्टी थाने में दर्ज हुआ है। केस में नामजद किसी को भी नहीं बनाया गया है। थानाध्यक्ष बेनीपट्टी अरविन्द कुमार के अनुसार हर पहलू पर जाँच की जा रही है। उनके अनुसार जल्द ही हत्या के कारणों का पर्दाफाश कर के आरोपितों को गिरफ्तार किया जाएगा। अनुमान के मुताबिक हत्या लगभग 4 दिन पहले ही की जा चुकी थी।

मृत पत्रकार व RTI कार्यकर्ता लोहिया चौक, बेनीपट्टी मधुबनी बिहार के निवासी थे। पिछले कुछ समय से वो निजी अस्पतालों को संचालित कर रहे माफियाओं के खिलाफ आवाज उठा रहे रहे थे। अविनाश झा 9 नवम्बर 2021 (मंगलवार) को रात लगभग 9.58 पर अपने आवास से निकले थे और वापस नहीं लौटे। एक रिपोर्ट के अनुसार शव की पहचान अंगुली में अंगूठी, पैर में तिल, और लाल शर्ट के जले अवशेष से हो पाई।

अविनाश झा की अंतिम तस्वीर घर से निकलते हुए एक CCTV में कैद होने का दावा किया गया है। दैनिक भास्कर के पत्रकार आदित्य तिवारी ने एक ट्वीट में तस्वीर शेयर की है, जिसमें अविनाश झा घर से बाहर लाल शर्ट में कहीं जाते दिखाई दे रहे हैं।

अविनाश झा के भाई चंद्रशेखर झा के अनुसार उन्होंने अविनाश को खोजने की बहुत कोशिश की। उन्होंने हर संभावित स्थान पर जानकारी ली। लेकिन अविनाश का कुछ भी पता नहीं चल पाया। अविनाश का फोन भी स्विच ऑफ आ रहा था। आख़िरकार अविनाश के परिजनों ने थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाई।

मृत अविनाश के भाई चंद्रशेखर के भी अनुसार पिछले कुछ समय से वो निजी अस्पतालों को चला रहे माफिया तंत्र को बेनकाब कर रहे थे। चंद्रशेखर द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में अपहरण की वजह यही बताई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार अविनाश ने कई निजी नर्सिंग अस्पतालों के खिलाफ RTI भी लगाई थी। अविनाश लगभग 4 वर्षों से निजी अस्पतालों की आड़ में हो रहे घोटालों को बेनकाब कर रहे थे। इसी वजह से वो कई लोगों के रडार पर थे।

अपनी शिकायत में चंद्रशेखर ने कई अस्पतालों का नाम भी लिया है। इसमें अम्बेडकर चौक बेनीपट्टी स्थित माँ जानकी सेवा सदन, शिवा पाली क्लिनिक, सुदामा हेल्थ केयर, अंशु कष्ट एन्ड सेंटर, सोनाली अस्पताल, आराधना हेल्थ एन्ड डेंटल केयर, जय माँ काली सेवा सदन, आरएस मेमोरियल अस्पताल, अलीना हेल्थ केयर, सान्वी अस्पताल, अनन्या नर्सिंग होम और अनुराग हेल्थ केयर सेंटर शामिल हैं। ये सभी अस्पताल मधुबनी जिले के अलग-अलग स्थानों पर चल रहे हैं। चंद्रशेखर झा के मुताबिक जब से उनके भाई अविनाश ने इन अस्पतालों के खिलाफ सबूत जुटाए, तब से उन्हें मारने की साजिशें रची जा रहीं थीं।

भारतीय जनता पार्टी के विधायक विनोद नारायण झा ने भी इस घटना पर दुःख प्रकट करते हुए प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। अपने ट्विटर हैंडल पर उन्होंने लिखा, “बेनीपट्टी के पत्रकार श्री अविनाश झा (बुद्धिनाथ) जी का शव संदिग्ध हालत में मिलना अत्यंत ही मर्माहत करने वाला है। मैं इस अत्यन्त दुख की घड़ी में उनके परिजनों के साथ हूँ। प्रशासन इस घटना में संलिप्त दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कठोर कानूनी कार्रवाई करें…!!”

ऑपइंडिया के पास मृतक अविनाश के भाई चंद्रशेखर द्वारा थाने में दी गई तहरीर है। पुलिस ने इस तहरीर पर धारा 363, 365, 120 बी, IPC के तहत 11 नवम्बर 2021 (गुरुवार) को केस दर्ज कर लिया था। इस केस की विवेचना सब इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार को सौंपी गई है। इस घटना पर ऑपइंडिया ने शिकायतकर्ता व मृतक अविनाश झा के भाई चंद्रशेखर झा से बात की। चंद्रशेखर के अनुसार उनके भाई को निजी अस्पतालों को संचालित कर रहे माफियाओं से खतरा था, ये बात स्थानीय पुलिस प्रशासन भी जानता था।

इसी के साथ अविनाश को कई बार मुँह बंद करने का लालच भी दिया गया था। चंद्रशेखर ने बताया कि उनके भाई की हत्या पूरी तरह से सोची-समझी तैयारी के बाद की गई है। जानबूझकर ऐसी जगह बुलाया गया, जहाँ CCTV की नजर में हत्यारे न आ पाएँ। इससे पहले भी अविनाश आधी रात में किसी अस्पताल में ठीक से इलाज न होने की सूचना पर घर से निकल जाया करते थे। इस बार भी उनकी इसी आदत का फायदा उठाया गया।

ABP न्यूज़ द्वारा इस घटना में प्रेम प्रसंग के दावे पर सवाल करने पर शिकायतकर्ता चंद्रशेखर और उनके परिजनों ने बताया कि इस बात को साबित कर के दिखाया जाए। यदि पुलिस अधीक्षक ने ऐसा बयान दिया है तो वो मामले को गलत दिशा देना चाहते हैं और वो सब इसका विरोध करेंगे। गौरतलब है कि SP मधुबनी के बयान के हवाले से ABP न्यूज़ ने दावा किया है कि अविनाश झा की हत्या प्रेम प्रसंग के चलते हुई है। पुलिस ने हत्या में शामिल एक महिला को भी गिरफ्तार करने का दावा किया है। इसी के साथ रिपोर्ट के अनुसार अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

ऑपइंडिया ने इस दावे (प्रेम प्रसंग वाली) की सत्यता जानने के लिए SP मधुबनी को उनके आधिकारिक नंबर पर फोन किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। स्थानीय थाना बेनीपट्टी को भी मामले की जानकारी के लिए सम्पर्क किया गया तो उनका भी फोन नहीं उठा। हालाँकि स्थानीय DSP ने फोन उठाया। उन्होंने बताया कि मृतक अविनाश झा के पत्रकार होने का कोई भी प्रमाण नहीं मिला है। इसी के साथ उनका कहना है कि मामले में एक गिरफ्तारी की गई है। घटना में प्रेम प्रसंग के एंगल पर उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। उनके अनुसार मामले को ट्रेस कर लिया गया है। जल्द ही विस्तृत प्रेस नोट पुलिस द्वारा प्रमाणों के साथ जारी की जाएगी।

ऑपइंडिया ने प्रेम प्रसंग के दावे पर स्थानीय विधायक विनोद कुमार झा से बात की। उन्होंने बताया कि हत्या के कारणों की जाँच का काम पुलिस का है। हत्या किसी भी कारण की गई, वो गलत है। जो भी दोषी हो उसको अधिकतम सज़ा मिले, ऐसी माँग है।

महाराष्ट्र में राजनीतिक लाभ के लिए ‘जलती मस्जिद’ और साजिश: उप-मुख्यमंत्री ने कहा – ‘त्रिपुरा का नाम लाना शर्मनाक’

त्रिपुरा के उप-मुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा ने महाराष्ट्र के कुछ स्थानों पर हुई पथराव की घटनाओं की कड़ी निंदा की है। महाराष्ट्र में जो हिंसा-पथराव किया जा रहा है, उसको त्रिपुरा में ‘कथित सांप्रदायिक हिंसा’ के विरोध का नाम दिया जा रहा है। उप-मुख्यमंत्री जिष्णु देव वर्मा ने इसे नॉर्थ-ईस्ट को बदनाम करने की साजिश बताया है।

त्रिपुरा में कथित सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं के विरोध में जिष्णु देव वर्मा ने शनिवार (14 नवंबर 2021) को सभी वर्ग के लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, ”त्रिपुरा में एक धार्मिक समुदाय पर हमले की घटना अफवाह है। यहाँ कोई मस्जिद नहीं जलाई गई। सोशल मीडिया पर अन्य देशों की फर्जी तस्वीरें अपलोड करके त्रिपुरा को बदनाम किया जा रहा है।”

जिष्णु देव वर्मा ने कहा, ”महाराष्ट्र के कुछ शहरों में त्रिपुरा का नाम लेकर हुई घटनाएँ हमारे लिए शर्मनाक हैं। लोग अपने राजनीतिक लाभ के लिए फर्जी खबरें, तस्वीरें फैलाकर त्रिपुरा की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।”

रिपोर्ट के मुताबिक, अमरावती में पथराव की एक और घटना होने के बाद स्थानीय प्रशासन ने शनिवार को रात 10 बजे से अगले तीन दिनों के लिए इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया है। शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए चार दिन का कर्फ्यू भी लगाया गया है। इसके साथ ही पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए धारा-144 भी लगा दी है।

बता दें कि अमरावती के हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। इस मामले में 20 एफआईआर और 20 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, शुक्रवार को करीब 8,000 मुस्लिमों की भीड़ त्रिपुरा मामले में अमरावती के जिलाधिकारी कार्यालय को ज्ञापन सौंपने के लिए निकली थी।

बीजेपी नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र में उन्मादी मुस्लिमों की भीड़ द्वारा मचाए गए उत्पात की निंदा करते हुए शनिवार (13 नवंबर) को कहा, “त्रिपुरा में जो घटना ही नहीं घटी, उसको लेकर जिस तरह से महाराष्ट्र में दंगे हो रहे हैं, ये बिल्कुल गलत है। त्रिपुरा में जिस मस्जिद को जलाए जाने की अफवाह उड़ाई गई, वहाँ की पुलिस ने उस मस्जिद की फोटो जारी की है। इसके इलावा सोशल मीडिया पर सर्कुलेट की जा रही फेक फोटो का भी पर्दाफाश किया है।”

गौरतलब है कि त्रिपुरा में बीते दिनों हुई कथित घटना के विरोध में महाराष्ट्र के नांदेड़, अमरावती और मालेगाँव में 12 नवंबर को मुस्लिम संगठनों ने जमकर विरोध किया। इस बीच जबरन दुकानें बंद करवाई गईं और पुलिस पर भी पथराव किया गया था।

‘शिक्षकों का काम पढ़ाने का, चुनाव ड्यूटी करने का नहीं’ – इलाहाबाद HC में यह तर्क खारिज, बताया यह गैरकानूनी नहीं

इलाहाबाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए प्राइमरी शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाने को सही ठहराया है। सिंगल बेंच के आदेश के खिलाफ दो जजों की खंडपीठ में विशेष अपील दाखिल कर चुनौती दी गई थी। सिंगल बेंच ने चुनाव ड्यूटी में प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों को लगाने के बेसिक शिक्षा अधिकारी कौशांबी के आदेश को सही ठहराया था। डिवीजन बेंच में दाखिल विशेष अपील में इसी फैसले को चुनौती दी गई थी।

यह आदेश जस्टिस एमएन भंडारी व जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने कौशांबी के बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राइमरी स्कूल के टीचर शिव सिंह, दरियाव का पुरा, नेवादा जिला कौशांबी की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया है।

दरअसल, याची प्राइमरी स्कूल में शिक्षक हैं। उनका कहना था कि उन्हें और उनके साथी शिक्षकों को बीएलओ के रूप में चुनाव ड्यूटी पर लगाया गया, जो कि गलत है। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया था कि शिक्षकों का काम पढ़ाने का है, चुनाव ड्यूटी करने का नहीं। याची ने यह भी तर्क दिया था कि शिक्षकों को शिक्षण के अलावा चुनाव में लगाए जाने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

बता दें कि हाई कोर्ट के सिंगल बेंच ने अपने आदेश में कहा था, ”शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाना गैरकानूनी नहीं है। उत्तर प्रदेश निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली-2011 की धारा 27 शिक्षकों को चुनाव ड्यूटी पर लगाने की अनुमति देता है।”

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में साथ ही यह भी कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इलेक्शन कमिशन ऑफ इंडिया बनाम सेंट मेरी स्कूल केस में यह फैसला दे रखा है।

दिल्ली में 11 और 13 साल की दो बहनों को बहलाकर ले भागे नदीम और सोनू खान, तकिया बेचने के दौरान लिया था लड़कियों का नंबर

देश की राजधानी दिल्ली से लव जिहाद का मामला सामने आया है। पूर्वी दिल्ली के छतरपुर इलाके में लव जिहाद की शिकार 2 नाबालिग बच्चियों के पड़ोस में रहने वाले दो मुस्लिम युवकों ने पहले उन्हें झूठे प्रेम जाल में फँसाया और फिर उन्हें भगा ले गए। दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के रहने वाले हैं। इस मामले में पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित हिंदू परिवार बिहार का रहने वाला है, जो कि दिल्ली के छतरपुर इलाके के राजपुर गाँव में रहता है। वहीं पास में ही एक प्लॉट में गद्दा और रजाई बनाने का काम होता है, जहाँ करीब 15-20 मुस्लिम युवक काम करते हैं। इन्हीं में से नदीम और सोनू खान ने दोनों नाबालिगों से जान पहचान बढ़ाई। धीरे-धीरे दोनों में दोस्ती हो गई और नंबरों का आदान-प्रदान हुआ। वो फोन पर बातें करने लगे। इसके बाद एक दिन दोनों आरोपित लड़कियों को लेकर फरार हो गए।

पीड़िता के पिता का यह भी आरोप है कि एक आरोपित का बहनोई भी इस साजिश में शामिल है। वहीं, एक आरोपित नदीम का कहना है कि एक दिन तकिया बेचने के लिए पीड़ित परिवार के घर की ओर गया था, वहीं लड़कियों का नंबर उसने लिया था, लेकिन उनके गायब होने में उसका हाथ नहीं है। बता दें कि दोनों नाबालिग लड़कियों में से एक 11 साल और दूसरी 13 साल की है।

मैदानगढ़ी पुलिस को दी शिकायत में पीड़िता के पिता ने बताया है कि उनकी दोनों बेटियाँ छतरपुर के ही राजकीय कन्या विद्यालय में कक्षा सातवीं की छात्रा हैं। उन्होंने बताया कि कोरोना के कारण ऑनलाइन क्लास चल रही थी तो एक स्मार्टफोन उनकी बेटियों को दे दिया था। जिस दिन लड़कियाँ गायब हुई थीं, उस दिन उस मोबाइल पर कई अनजान नंबरों से कॉल आए थे, लेकिन उन पर फोन किया तो उन लोगों ने लड़कियों के बारे में जानने से इनकार कर दिया। नाबालिगों के पिता के मुताबिक, उनकी लड़कियाँ 2 नवंबर 2021 की सुबह घूमने के लिए घर से निकलीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं।

इसके बाद पीड़िता के पिता ने मैदानगढ़ी थाने में आरोपितों के खिलाफ शिकायत की। शिकायत के बाद कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। इसके अलावा आरोपितों की तलाश में पुलिस की टीम मेरठ और अलीगढ़ भी गई थी, लेकिन वहाँ आरोपितों का पता नहीं चला।