Home Blog Page 3245

मंज़ूर अली ने नंदूबाई से लिए उधार पैसे, वापस माँगने आई महिला को बेरहमी से पीटा: राजस्थान का मामला, वीडियो वायरल

राजस्थान के कोटा जिले में एक महिला को कुछ लोगों द्वारा बेरहमी से पीटने का वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो कोटा के सुकेत थानाक्षेत्र का है। विवाद रुपए के लेन-देन से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार घटना शनिवार (6 नवम्बर 2021) की है। बुरी तरह से घायल महिला को झालावाड़ अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। हमले का आरोपित मंज़ूर अली को बताया जा रहा।

यह वीडियो घटना स्थल पर मौजूद CCTV फुटेज का हिस्सा है। भारतीय जनता पार्टी के नेता लक्ष्मीकांत भरद्वाज ने इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “कोटा, राजस्थान की नंदू बाई अस्पताल में ज़िंदगी की जंग लड़ रही है। उन्हें जानवर की तरह मारने वाले मंज़ूर अली और उसके साथी हैं। इन जानवरों से आपके राज में ये लड़ नहीं सकी प्रियंका गाँधी जी।”

लक्ष्मीकांत भारद्वाज के ट्वीट पर राजस्थान पुलिस ने कोटा पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए थे। लेकिन कोटा सिटी पुलिस को वीडियो के बारे में जानकारी ही नहीं थी। कोटा पुलिस ने भाजपा नेता से ही सवाल कर लिया कि वो वीडियो के स्थान की जानकारी उन्हें दें। कोटा पुलिस ने दोपहर 2.12 पर लिखा है कि उक्त घटना किस थानाक्षेत्र की है, डीएम पर साझा करें।

असल में यह मामला कोटा सिटी का न हो कर कोटा देहात का था। बाद में कोटा सिटी पुलिस ने घटना में कोटा देहात क्षेत्र पुलिस को टैग किया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता का नाम नंदू बाई है। उन्होंने अपने पड़ोसी मकसूद उर्फ़ मंजूर को जरूरत के समय कुछ रुपए उधार दिए थे। इसी को जब वो वापस माँगने पहुँची तब मकसूद ने नंदू बाई पर हमला कर दिया। मकसूद का बेटा भी अपने अब्बा के साथ महिला को पीटने में शामिल हो गया। इस हमले के लिए आरोपित बाप बेटों ने लाठी-डंडे का इस्तेमाल किया। महिला को बुरी तरह से जमीन पर पटका भी गया।

खुद के बचाव के लिए नंदू बाई ने बहुत प्रयास किया लेकिन वो नाकाफ़ी रहा। कोटा देहात पुलिस ने आधिकारिक रूप से बताया कि पीड़ित महिला की शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है। अब तक एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। दूसरे की तलाश की जा रही है। सुकेत थानाध्यक्ष ने इस गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उनके अनुसार महिला और मकसूद दोनों हाट बाज़ार के निवासी हैं। मकसूद ख़ान मज़दूरी करता है।

दो पैसेंजर, संदिग्ध बैग… मुकेश अंबानी की एंटीलिया पर फिर मँडराया खतरा: टैक्सी ड्राइवर की सूचना के बाद सुरक्षा कड़ी

भारतीय अरबपति कारोबारी मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित बंगले एंटीलिया की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। एक टैक्सी ड्राइवर की सूचना के बाद पुलिस ने ये कदम उठाया है। उक्त टैक्सी ड्राइवर ने मुंबई पुलिस को दो संदिग्ध यात्रियों के बारे में जानकारी दी है, जो एंटीलिया के बारे में बातें कर रहे थे। वो अपने साथ एक संदिग्ध बैग भी लेकर चल रहे थे। कैब में उनकी बातें सुनने के बाद तस्य ड्राइवर ने मुंबई पुलिस को कॉल लगाया और सारी जानकारी उपलब्ध कराई।

हालाँकि, वो दोनों कौन थे – इसकी पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य सबूत खँगाल कर उन्हें चिह्नित करने की कोशिश कर रही है। तब तक 568 फ़ीट ऊँची 27 मंजिलों वाली इमारत एंटीलिया के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। DCP स्तर के पुलिस अधिकारी इससे जुड़े घटनाक्रम पर निगरानी रख रहे हैं। पुलिस ने टैक्सी ड्राइवर का बयान भी रिकॉर्ड कर लिया है। ‘आज़ाद मैदान’ पुलिस थाने में टैक्सी ड्राइवर का बयान दर्ज किया गया।

मुंबई पुलिस इस मामले के तथ्यों की भी पुष्टि करने में लगी हुई है। कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए हैं, ताकि उन दोनों यात्रियों की शिनाख्त हो सके। मुकेश अंबानी फ़िलहाल एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं और रिलायंस ग्रुप के अध्यक्ष भी हैं। उनके घर एंटीलिया की कीमत 15,260 करोड़ रुपए आँकी गई है। ये 2010 में बन कर तैयार हुआ था। वैश्विक डिजाइन कंपनी ‘पर्किन्स एंड विल्स’ और ‘हिर्स्च बेंडर एसोसिएट्स’ ने इसे तैयार किया था।ये भूकंप के बड़े झटके भी बर्दाश्त कर सकता है।

महाराष्ट्र के IPS अधिकारी रहे सचिन वाजे के कारण इस साल एंटीलिया काफी चर्चा में रहा है। पता चला था कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार रखने से पहले सचिन वाजे महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख से मिला था। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिह ने इस मामले में रिपोर्ट बदलने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे। 2021 की 25 फरवरी एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार मिली थी और 5 मार्च को कार के मालिक मनसुख हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी से बरामद किया गया था। वाजे फ़िलहाल जेल में है।

‘हिम्मत है तो छू कर दिखाएँ… जुबान काट लेंगे’: तेलंगाना के CM चंद्रशेखर राव ने दी भाजपा नेताओं को धमकी, कहा- ‘भौंकने वाला कुत्ता’

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने रविवार (7 नवंबर 2021) को हुजूराबाद में हार का सामना करने के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेताओं को ‘भौंकने वाला कुत्ता’ बताते हुए धमकियाँ दीं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केसीआर ने चेतावनी दी, “यदि आप हम पर अनावश्यक टिप्पणी करते हैं तो हम आपकी जुबान काट देंगे।”

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बंदी संजय कुमार को धमकी देते हुए केसीआर ने आगे कहा, “आप अपने बारे में क्या सोचते हैं? आप गटर के लेवल की बातें करते रहे, फिर भी मैं आपको माफ करता रहा हूँ। आप कह रहे हैं कि आप मुझे जेल भेज देंगे। भेज दो। हिम्मत है तो मुझे छूकर दिखाएँ, फिर देखिए कि आपके साथ क्या होगा।”

केसीआर का बयान तब आया जब तेलंगाना में भाजपा नेताओं ने केसीआर की पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और दावा किया कि जब राज्य में भाजपा सत्ता में आएगी तो तेलंगाना राष्ट्र समिति के प्रमुख चंद्रशेखर राव को जेल भेज दिया जाएगा।

केसीआर ने बीजेपी नेताओं को कहा ‘भौंकने वाला कुत्ता’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने भाजपा नेताओं को ‘भौंकने वाला कुत्ता’ बताया। केसीआर ने बीजेपी के खिलाफ अपना हमला जारी रखते हुए कहा, “अब तक मैंने उनकी टिप्पणियों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। यह हाथी के गुजरने पर गली में भौंकने वाले कुत्ते की तरह हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अगर भाजपा नेताओं ने ‘शालीनता की रेखा पार’ की तो वह कुमार और अन्य के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

केसीआर ने कहा, “हमारी एक पार्टी है, जिसने तेलंगाना आंदोलन का नेतृत्व किया। आखिर आप कौन हैं? हम आपको कुछ ही समय में बाहर निकाल सकते हैं।”। टीआरएस प्रमुख केंद्र द्वारा धान खरीद को लेकर से नाराज थे। केसीआर ने कहा कि TRS किसानों के अधिकारों के लिए केंद्र के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेगी।

PM मोदी ने पंढरपुर को दी 2 नेशनल हाईवे की सौगात, भगवान विट्ठल से माँगे 3 आशीर्वाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (नवंबर 8, 2021) को वीडियो कांन्फ्रेंसिंग के जरिए पंढरपुर में श्रीसंत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मार्ग (एनएच-965) और संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग (एनएच-965जी) का शिलान्यास किया। इस दौरान पीएम ने बताया कि श्रीसंत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मार्ग का निर्माण 5 चरणों में होगा और संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग का निर्माण तीन चरणों में पूरा किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास से पंढरपुर जाने वाले तीर्थ यात्रियों को काफी आसानी होगी। इन राजमार्गों के विकास को संत तुकाराम और संत ज्ञानेश्वर से जुड़े शहर पंढरपुर की तीर्थयात्रियों की यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार किया गया है।

पीएम मोदी ने बताया कि आज पंढरपुर को जोड़ने वाले करीब सवा 200 किमी लंबे राजमार्ग का भी शुभारंभ हुआ है। इनके निर्माण में करीब 1,200 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। ये महामार्ग भगवान विठ्ठल के भक्तों की सेवा के साथ-साथ इस पूरे पुण्य क्षेत्र के विकास का मार्ग बनेंगे। 

अपने संबोधन में पीएम ने इस यात्रा को दुनिया की सबसे प्राचीन और जन यात्राओं के रूप में पीपुल मूवमेंट से जुड़ी बताया। उन्होंने कहा कि ‘आषाढ एकादशी’ पर पंढरपुर यात्रा का विहंगम दृश्य कौन भूल सकता है जहाँ सैंकड़ों श्रद्धालु खिंचे आते हैं। प्रधानमंत्री ने भारत पर हुए हमलों की याद दिलाई और बताया कि हर मुश्किल के बाद भी कैसे भगवान विट्ठल देव में लोगों की आस्था अटूट रही।

वह बोले, “अतीत में हमारे भारत पर कितने ही हमले हुए! सैकड़ों साल की गुलामी में ये देश जकड़ा गया। प्राकृतिक आपदाएँ आईं, चुनौतियाँ आईं, कठिनाइयाँ आईं, लेकिन भगवान विट्ठल देव में हमारी आस्था, हमारी दिंडी वैसे ही अनवरत चलती रही…जो यह बात सिखाती है कि मार्ग अलग हो सकते हैं लेकिन लक्ष्य अंत में सभी का भागवत पंथ ही होता है।”

पीएम ने कहा, “भगवान विट्ठल का दरबार हर किसी के लिए समान रूप से खुला है। और जब मैं सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास कहता हूँ, तो उसके पीछे भी तो यही भावना है। यही भावना हमें देश के विकास के लिए प्रेरित करती है, सबको साथ लेकर, सबके विकास के लिए प्रेरित करती है।”

पंढरपुर की सेवा को पीएम ने इस दौरान साक्षात हरि की सेवा बताया और कहा कि ये वो भूमि है जहाँ भक्तों के लिए भगवान आज भी साक्षात विराजते हैं। ये वो भूमि है जिसके बारे में संत नामदेव महाराज ने कहा था कि पंढरपुर तबसे है जब संसार की भी सृष्टि नहीं हुई थी।

भारतीय संतों पर बात करते हुए पीएम ने कहा कि भारत भूमि की ये विशेषता है कि समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों में यहाँ महान विभूतियाँ अवतरित हुई हैं जिन्होंने देश को दिशा दिखाई है। अपने संबोधन में पीएम ने देश में स्त्री शक्ति की बात की। उन्होंने पंढरपुर को लेकर भगवान विट्ठल से तीन आशीर्वाद माँगे।

इनमें सबसे पहला कि जो श्रीसंत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी मार्ग का निर्माण होगा, जिस संत तुकाराम महाराज पालखी मार्ग का निर्माण होगा, उसके किनारे जो विशेष पैदल मार्ग बन रहा है, उसके दोनों तरफ हर कुछ मीटर पर छायादार वृक्ष जरूर लगाए जाएँ। दूसरा ये था कि वो पैदल मार्ग पर थोड़ी-थोड़ी दूर पर पानी की व्यवस्था देखना चाहते हैं और इसलिए उन्होंने इन मार्गों पर अनेक प्याऊ बनाने को कहा है। तीसरा ये था कि वो भविष्य में पंढरपुर को भारत के सबसे स्वच्छ तीर्थ स्थलों में देखना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने स्थानीय लोगों को स्वच्छता के आंदोलन का नेतृत्व करने को कहा। 

राष्ट्रपति से पद्मश्री अवॉर्ड लेने नंगे पाँव पहुँचा नारंगी विक्रेता: विदेशी पर्यटक के एक सवाल ने बदल दी थी ज़िंदगी, यूँ जगाई शिक्षा की अलख

एक साधारण से शर्ट और धोती में कर्नाटक के नारंगी विक्रेता हरेकला हजब्बा जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्मश्री का सम्मान लेने पहुँचे, तो सभी की नजरें उनकी तरफ अनायास ही मुड़ गईं। प्रति दिन मात्र 150 रुपए कमाने वाले 68 वर्ष के फल विक्रेता ने अपने खर्चे से गाँव में एक प्राइमरी स्कूल का निर्माण करवाया है। उन्हें सोमवार (8 नवंबर, 2021) को उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्हें भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक पुरस्कार मिला।

ये जानने लायक है कि शिक्षा के क्षेत्र में ये भागीरथी प्रयास करने के लिए उन्हें प्रेरणा कैसे मिली। कई वर्षों पहले एक विदेशी पर्यटक ने उनसे अंग्रेजी में नारंगी का दाम पूछा था। हरेकला हजब्बा को अंग्रेजी नहीं आती थी और इसीलिए उन्हें कुछ समझ में नहीं आया। इस बात ने उन्हें परेशान कर दिया। उन्हें गरीबी के कारण शिक्षा पाने का अवसर नहीं मिल सका था। उसी समय उन्होंने ठान लिया कि वो एक प्राथमिक विद्यालय का निर्माण करवाएँगे, अपने पैसे से।

उन्होंने कहा कि उन्हें तो पढ़ाई-लिखाई का मौका नहीं मिला, लेकिन वो नहीं चाहते थे कि गाँव के आज की पीढ़ी के बच्चे भी शिक्षा से वंचित रह जाएँ। आज उनके बनवाए विद्यालय में दसवीं तक की पढ़ाई होती है और उसमें 175 छात्र पढ़ते हैं। जनवरी 2020 में उन्हें पद्मश्री अवॉर्ड दिए जाने की घोषणा मोदी सरकार ने की थी। लेकिन, कोरोना संक्रमण आपदा के कारण उस साल ये कार्यक्रम नहीं हो सका। इसीलिए, 2020 और 2021 के पद्म सम्मान का कार्यक्रम अब आयोजित किया गया है।

वो मंगलोर शहर से 40 किलोमीटर दूर स्थित हरेकला नाम के गाँव में नारंगी बेचते हैं। 1995 से ही उन्होंने स्कूल बनवाने का कार्य शुरू कर दिया था। सन् 2000 में उन्होंने एक एकड़ जमीन पर अपनी सारी बचत का इस्तेमाल कर शिक्षा के इस मंदिर का निर्माण करवाया। उन्हें नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में ये सम्मान मिला। उनके दिल्ली आने की व्यवस्था के लिए वो स्थानीय सांसद नलिन कुमार क़तील से संपर्क में थे। उन्हें अब तक 500 संस्थाओं से सम्मान प्राप्त हो चुका है।

हरेकला हजब्बा कहते हैं कि उन अवॉर्ड्स के साथ-साथ वो अपने छोटे से घर में पद्मश्री के सम्मान को भी सहेज कर रखेंगे। उनके दिल्ली आने-जाने का खर्च सरकार ने ही उठाया है। उनके बनवाए स्कूल को सरकारी मान्यता मिली हुई है। ‘दक्षिण कन्नड़ जिला पंचायत’ ने उन्हें इसके निर्माण की अनुमति दी थी और शिक्षा विभाग ने भी इसके लिए हरी झंडी दिखाई थी। उनके ऊपर ‘हरेकला हजब्बा जीवन चरित्र’ नाम की एक पुस्तक सामाजिक कार्यकर्ता इस्मत पजीर ने लिखी है।

उनके इलाके में उन्हें प्यार से ‘अक्षर संत’ कह कर बुलाया जाता है। उनका सपना है कि अब उनके गाँव में एक प्री-यूनिवर्सिटी भी हो। उनके बनवाए विद्यालय को ‘हजब्बा स्कूल’ के नाम से लोग जानते हैं। मंगलोर यूनिवर्सिटी में उनके बारे में पढ़ाया जाता है। नवंबर 2012 में बीबीसी ने भी उन पर लेख प्रकाशित किया था। CNN-IBN और रिलायंस फाउंडेशन ने उन्हें ‘रियल हीरोज’ अवॉर्ड से सम्मानित किया था। ‘कन्नड़ प्रभा’ अख़बार ने उन्हें ‘पर्सन ऑफ द ईयर’ चुना था।

उपहार अग्निकांड में 24 साल बाद सजा: कोर्ट ने अंसल बंधुओं को सुनाई 7-7 साल कैद, ₹2.25 करोड़ का जुर्माना

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 24 साल बाद सोमवार (8 नवंबर 2021) को उपहार सिनेमा अग्निकांड के सबूत मिटाने के आरोप में सुशील और गोपाल अंसल को सात साल की जेल की सजा सुनाई। इसके साथ ही कोर्ट ने अंसल बंधुओं पर 2.25 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली की अदालत ने इस मामले में कोर्ट के पूर्व कर्मियों दिनेश चंद शर्मा, पीपी बत्रा और अनूप सिंह को भी सात-सात साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इन तीनों पर 3-3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जज ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा, ”मैंने रात-रातभर इस पर विचार किया और मुझे लगा कि उन्हें सजा मिलनी चाहिए।” वहीं, इस मामले से जुड़े अन्य दो आरोपितों हरस्वरूप पंवार और धर्मवीर मल्होत्रा की मृत्यु हो चुकी है।

दरअसल, उपहार त्रासदी पीड़ित एसोसिएशन (AVUT) ने 24 साल पहले साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में दोनों भाइयों को उम्रकैद की सजा देने की माँग की थी। मालूम हो कि 13 जून 1997 को बॉलीवुड फिल्म ‘बॉर्डर’ की रिलीज के दौरान दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में स्थित उपहार सिनेमाघर में आग लगने से 59 लोगों की मौत हो गई थी।

इस मामले में सुनील अंसल और गोपाल अंसल समेत अन्य दो दोषियों को पहले ही आईपीसी की धारा 409 (आपराधिक उल्लंघन), 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन अब दोनों भाइयों पर 2.5-2.5 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

गौरतलब है कि जाँच में खुलासा किया गया था कि सिनेमा हॉल में अतिरिक्त सीटें लगाकर आने जाने का रास्ता संकरा कर दिया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान अंसल बंधुओं द्वारा याचिकाकर्ताओं को धमकाने और कोर्ट स्टाफ से सांठगांठ कर कोर्ट की फाइलों से छेड़छाड़ की गई। फाइलों से पन्ने फाड़कर गायब कर दिए गए।

बता दें कि इस भयावह त्रासदी में कुल 28 परिवार के लोगों ने अपनों को गँवाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केस सीबीआई को सौंपा गया था। सीबीआई ने 15 नवंबर 1997 को कुल 16 लोगों को आरोपित बनाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें उपहार के मालिकों गोपाल अंसल और सुशील अंसल भी शामिल थे। कोर्ट में यह मामला उपहार त्रासदी पीड़ित एसोसिएशन (AVUT) की अध्यक्ष नीलम कृष्णमूर्ति ने दाखिल किया था।

यूपी कॉन्ग्रेस की नेता माहिरा खान का धंधा पशु तस्करी, गोहत्या से मोटी कमाई: सपा सरकार में बोलती थी तूती, अब गैंगस्टर ऐक्ट में पकड़ी गई

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कॉन्ग्रेस नेता महिरा खान उर्फ महक वारसी को 7 साल पुराने मामलों में गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया है। कॉन्ग्रेस की महिला ईकाई की महानगर अध्यक्ष माहिरा पर गो-हत्या, पशु तस्करी और धोखाधड़ी के आरोप हैं। इन आरोपों में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। माहिरा मुरादाबाद देहात सीट से प्रत्याशी के रूप में टिकट की दावेदारी भी कर चुकी हैं। वहीं, माहिरा की गिरफ्तारी के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

बताया जाता है कि जब प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी, तब माहिरा गोवध और पशु तस्करी के अवैध कारोबार में लगी थी। वह कैंटर का नंबर प्लेट बदलकर पशुओं का अवैध कारोबार करती थीं और उन्हें बुचड़खानों में ले जाकर हत्या कर दी जाती थी। इस अवैध कारोबार से उन्होंने करोड़ों की कमाई की। इस दौरान राजनीतिक हस्तक्षेप की वजह से माहिरा बचती रही। वहीं, जाहिद नाम के एक व्यक्ति ने माहिरा पर धोखाधड़ी का मुकदमा लिखवाया था। जाहिद का कहना था कि इंटर कालेज की मान्यता दिलाने के नाम पर भी माहिरा ने उसके साढ़े तीन लाख रुपये भी हड़प लिए।

धोखाधड़ी एवं गोवध करके अनैतिक एवं भौतिक धन अर्जित करने के आरोप में ठाकुरद्वारा कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक विद्याराम दिवाकर ने सितंबर 2015 में माहिरा सहित चार के खिलाफ गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई की थी। इस मामले में माहिरा के अलावा, अशोक नगर की वंदना, थाना गलशहीद क्षेत्र के रहने वाले मुहम्मद हुसैन, हिमगिरी कालोनी की रहने वाली नईमा वारसी को भी आरोपी बनाया गया था। इसके साथ ही विवेचना कर उसी साल दिसंबर में चार्जशीट भी दाखिल कर दी गई थी। इसके बाद कोर्ट में मुकदमा चल रहा है।

एसपी सिटी अमित कुमार आनंद ने बताया कि माहिरा की गैंगस्टर के मुकदमे में गिरफ्तारी हुई है। उनके खिलाफ कोर्ट का वारंट चल रहा था। वहीं, ठाकुरद्वारा के प्रभारी निरीक्षक धनंजय सिंह ने बताया कि भोजपुर में माहिरा के खिलाफ गोवध अधिनियम की धारा में कई मुकदमे दर्ज हैं। मुगलपुरा थाना के इंस्पेक्टर अमित कुमार ने बताया कि गैंगस्टर कोर्ट से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद शौकत बाग निवासी निवासी माहिरा खान को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

पार्टी नेत्री की गिरफ्तारी पर कॉन्ग्रेस के प्रदेश महासचिव सचिन चौधरी ने कहा कि पार्टी की महिला इकाई की महानगर अध्यक्ष की गिरफ्तारी की सूचना मिली है। इसकी जाँच अनुशासन समिति को दी गई है और उसके बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, माहिरा की गिरफ्तारी के बाद कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुरादाबाद से पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी इमरान प्रतापगढ़ी के साथ माहिरा का फोटो वायरल हो रहा है। इसमें वह इमरान को गुलदस्ता भेंट कर रही हैं।

माहिरा खान के एडवोकेट शौहर शौलत हुसैन ने इसे राजनीतिक षडयंत्र बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी बीवी तेज-तर्रार नेता हैं और देहात सीट से टिकट की दावेदारी पेश कर चुकी हैं। इसलिए उनकी बढ़ती लोकप्रियता और राजनीतिक पकड़ से कुछ राजनीतिक दलों के लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को गिरफ्तार कराने में पीछे इन्हीं लोगों का हाथ है। 

‘जो हमारी बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेगा.. उसकी पीढ़ियाँ भूल जाएँगी कैसे दंगा होता है’: कैराना में CM योगी ने ‘गुंडों’ को चेताया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार (8 नवंबर 2021) को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना पहुँचे। अखिलेश यादव के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो यह इलाका हिंदुओं को स्थानीय मुस्लिम गुंडों द्वारा पलायन करने के लिए मजबूर करने के कारण सुर्खियों में रहा था। उस समय के हालात का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने गुंडों को सख्त लहजों में चेताया। उन्होंने बिना नाम लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर हमले किए। मुजफ्फरनगर दंगे की याद दिलाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री आवास में दंगाइयों को सम्मानित किया जाता था।

कैराना में सीएम योगी ने उन पीड़ित परिवारों का हाल जाना जो राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद दोबारा घर लौटे। उन्होंने करोड़ों की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने के बाद सभा को भी संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “पिछले चार साल में आपने देखा होगा कि कैराना कस्बे में यहाँ के व्यापारी और नागरिकों को पलायन के लिए मजबूर करने वाले अपराधी स्वयं पलायन करने के लिए मजबूर हो गए। किसी अपराधी या किसी माफिया की हैसियत नहीं कि वह सिर उठा कर सड़कों पर चल सके और अगर किसी ने निर्दोष नागरिक और व्यापारी पर गोली मारने का दुस्साहस किया तो वह गोली उस व्यापारी और नागरिक पर तो नहीं लगी, लेकिन उल्टे उसकी ही छाती को भेदते हुए उसको ही दूसरे लोक की यात्रा पर भेज दिया गया।”

सीएम ने कहा, “ये हमारे लिए राजनीतिक मुद्दा नहीं हो सकता है। ये हमारे लिए अस्मिता का मुद्दा है। आन, बान और शान का मुद्दा है। हम किसी के सम्मान के विरुद्ध कार्य नहीं करेंगे। लेकिन अगर कोई हमारी अस्मिता को ठेस पहुँचाने का कार्य करेगा, हमारी बहन बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करेगा, निर्दोष व्यापारियों का उत्पीड़न करेगा, अराजकता की स्थिति पैदा करेगा, दंगा भड़काने का प्रयास करेगा, तो उसकी आने वाली कई पीढ़ियाँ भूल जाएँगी कि कैसे दंगा होता है और कैसे सुरक्षा के साथ खिलवाड़ होता है।”

योगी ने कहा कि जिन लोगों के लिए वोट बैंक सर्वोपरि है, वे मुजफ्फरनगर के दंगाइयों को सम्मानित करते थे। वे कैराना के अतताइयों को सम्मानित करते थे। जब हिंदुओं के घर जलाए जाते थे, ये जातिवाद की राजनीति करने वालों को जाति नहीं दिखाई दी।

उन्होंने कहा, “यह धर्म चक्र है। यह चक्र घूमता है। मोदी ने यह चक्र ऐसा घुमा दिया है कि जो लोग कल तक मंदिर जाने में संकोच करते थे। आज इतना बड़ा तिलक लगाते हैं जैसे वही सबसे बड़े हिंदू हैं। ये आपकी एकता की ताकत है और आपको इसी ताकत का एहसास कराने आए हैं। आपने 2014 में मोदी जी पर विश्वास किया। उन्होंने देश के अंदर सुरक्षा का बेहतर वातावरण दिया। देश की जनता जनार्दन ने मोदी जी पर विश्वास किया, उन्होंने बिना भेदभाव के गरीब कल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर गरीब, हर किसान को दे दिया। हमने तय किया है कि सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं देंगे। कानून को हाथ में लेने की किसी को भी छूट नहीं है। अगर किसी ने सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की तो उसे भी मालूम है कि कौन सी यात्रा पर निकलना है।”

शादीशुदा गुलज़ार ने राज चौधरी के नाम से दिया हिन्दू लड़की को झाँसा: अश्लील वीडियो, ब्लैकमेलिंग, कई शहरों में हुआ दुष्कर्म

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले से लव जिहाद का मामला आया है। यहाँ आरोपित गुलज़ार अहमद है जो जोगी नवादा का रहने वाला है। गुलज़ार पर आरोप है कि उसने शादीशुदा होते हुए भी दूसरे समुदाय की युवती के साथ शादी का झाँसा देकर दुष्कर्म किया। गुलज़ार पर अपना धर्म छिपाने का भी आरोप है। पीड़िता का कहना है कि पोल खुल जाने पर भी गुलज़ार ने उसके बनाए अश्लील वीडियो के नाम पर उसे लम्बे समय तक ब्लैकमेल किया।

युवती के अनुसार पहले गुलज़ार अहमद उसकी बहन के संपर्क में था। आरोप यह भी है कि गुलज़ार पीड़िता से राज़ चौधरी नाम से मिला था। धीरे-धीरे उसकी भी जान-पहचान गाढ़ी होती चली गई। 2 जनवरी 2018 को गुलज़ार ने पीड़िता को जन्मदिन मनाने के बहाने एक रेस्टोरेंट में बुलाया। फिर बहाने से उसे अपने एक दोस्त सुरेश के घर ले गया। यहाँ पर बियर पिला कर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। जब पीड़िता ने विरोध किया तब शादी की बात कह कर उसे चुप करा दिया।

कुछ दिन बाद गुलज़ार उसे घर से भगा ले गया। इसमें गुलज़ार की मदद उसके दोस्त संजीव ने की। गुलज़ार पीड़िता को ले कर रुद्रपुर, मेरठ, दिल्ली और गुरुग्राम गया। इस बीच पीड़िता के साथ लगातार दुष्कर्म होता रहा। कुछ दिन बाद पीड़िता को गुलज़ार के विवाहित होने की जानकारी हुई। तब गुलज़ार अहमद ने अपनी पत्नी को तलाक दे कर उससे शादी की बात कही। थोड़े समय के बाद जब पीड़िता को गुलजार के मुस्लिम समुदाय से होने की जानकारी हुई तो वो नाराज हुई।

इसके बाद गुलज़ार ने उसको अश्लील फोटो और वीडियो के बहाने ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। आख़िरकार पीड़िता ने पुलिस में इसकी शिकायत की और न्याय माँगा। बरेली पुलिस के इंस्पेक्टर कोतवाली हिमांशु निगम के मुताबिक युवती ने इस मामले में गुरुग्राम में निल क्राइम नंबर पर गुलजार अहमद और संजीव के खिलाफ केस दर्ज कराया था। अब यह मुकदमा ट्रांसफर होने के बाद कोतवाली में दर्ज किया गया है। मामले की जाँच चल रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

दिवाली पर दीया इमोजी दुनिया भर में ‘सबसे लोकप्रिय इमोजी’ की लिस्ट में हुई शामिल, देखिए शीर्ष 9 की लिस्ट

दिवाली पर इस बार दीया इमोजी को सबसे अधिक इस्तेमाल किया गया था। आपको जानकार खुशी होगी कि इसे दुनिया भर में सबसे लोकप्रिय इमोजी की सूची में शामिल किया गया है। इमोजीपीडिया के अनुसार, शीर्ष नौ सबसे लोकप्रिय इमोजी में दीया इमोजी 8वें स्थान पर रही। सूची में अन्य इमोजी में रेड हार्ट, फायर, स्पार्कल्स, स्माइलिंग फेस विद स्माइलिंग आईज, थम्स अप और अन्य भी शामिल हैं। वेबसाइट के मुताबिक दीया, स्पार्कल और ओम इस दिवाली पर सबसे लोकप्रिय इमोजी रहे हैं। अन्य इमोजी में मंदिर, प्रार्थना, आतिशबाजी, साड़ी, भारतीय ध्वज और बहुत कुछ शामिल हैं।

दीया इमोजी दिवाली की वजह से दुनिया भर में टॉप इमोजी में से एक है। साभार: इमोजीपीडिया

इमोजीपीडिया लिस्ट कैसे काम करती है?

इमोजी खोजने के लिए इमोजीपीडिया सबसे लोकप्रिय वेबसाइटों में से एक है। यह विभिन्न एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है और ट्विटर आदि पर इमोजी को ट्रैक करता है। हालाँकि, वेबसाइट के मुख्य पेज पर लिस्ट बदलती रहती है। यह हर त्योहार के दौरान इमोजी का इस्तेमाल किए जाने के आधार पर बदलता रहता है। उदाहरण के लिए, हैलोवीन के दौरान, जैक-ओ-लालटेन (कद्दू इमोजी), घोस्ट और स्पार्कल्स ने टॉप इमोजी सूची में अपनी जगह बनाई थी।

हैलोवीन के दौरान इसका इमोजी लिस्ट में टॉप पर था। (साभार: इमोजीपीडिया)

इसी तरह, 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) पर भारतीय ध्वज का इमोजी इस लिस्ट में शामिल किया गया था।

15 अगस्त को, भारतीय ध्वज इमोजी लिस्ट में शामिल किया गया था। साभार: इमोजीपीडिया

इमोजी का एक संक्षिप्त इतिहास

इमोजी का इस्तेमाल पहली बार 1997 में जापानी मोबाइल फोन पर किया गया था। इसे इलेक्ट्रॉनिक संदेशों और वेब पेजों में टेक्स्ट के साथ इस्तेमाल होने वाले पिक्टोग्राम, लॉगोग्राम, आइडियोग्राम या स्माइली के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। इमोजी का उपयोग करने का मुख्य उद्देश्य उन भावनात्मक संकेतों को पूर्ण करना है, जो टेक्स्ट मैसेज की बातचीत में शामिल नहीं हैं। 2010 में इमोजी दुनिया भर में लोकप्रिय हो गए। इमोजी का डेटाबेस बनाने और बनाए रखने वाली इमोजी की स्थापना 2013 में की गई थी। वेबसाइट के अनुसार, सितंबर 2021 तक यूनिकोड मानक में 3,633 इमोजी हैं।