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हमारा घर बिकाऊ है- आजमगढ़ के मुस्लिम बहुल गाँव में 40 दलित परिवारों ने घरों पर लगाए पोस्टर, पीड़ित हिंदू बोले- ‘जय श्रीराम’ का नारा नहीं लगाने देते, पूजा-पाठ नहीं करने देते हैं

यूपी के आजमगढ़ के मुस्लिम बहुल छोटा पुरा में करीब 40 दलित परिवारों ने अपने मकानों पर ‘घर बिकाऊ है’ के बोर्ड लगा दिए हैं। इन लोगों ने खुद को असुरक्षित बताया है। बार-बार हो रहे उत्पीड़न, रेप की धमकी से ये लोग परेशान हैं और पुलिस पर उदासीनता का आरोप लगा रहे हैं। 3 जून को स्थानीय मुस्लिम युवकों ने एक शादी समारोह के दौरान महिलाओं को परेशान किया था। इस दौरान मुस्लिम और दलित समुदाय के बीच मारपीट हुई है। इससे गाँव का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।

दरअसल 3 जून 2025 को बम्हौर गाँव के युवक राकेश कन्नौजिया की शादी थी। इस मौके पर दलित समुदाय की महिलाएँ और लड़कियाँ पारंपरिक विवाह-पूर्व की रस्में निभा रही थीं। उत्सव का माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब मुस्लिम समुदाय के कई युवक वहाँ पहुँच गये और महिलाओं की सहमति के बिना उनका वीडियो बनाने लगे। इस पर आपत्ति जताने पर मुस्लिम युवकों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए महिलाओं से छेड़छाड़ किया। घबराकर महिलाओं ने मदद के लिए शोर मचाया, जिससे पुरुष रिश्तेदारों को बीच-बचाव करना पड़ा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई, जिसमें करीब 20 लोग घायल हो गए।

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

गाँव के राकेश कन्नौजिया, बृजेश गोंड और रामअवध समेत कई दलित परिवारों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोग घूम-घूमकर धमकी दे रहे हैं। उन्होने दावा है कि 3 जून की झड़प कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि उत्पीड़न का सिलसिला बहुत दिनों से जारी है। दलित परिवारों का आरोप है कि महीनों से उन्हें भक्ति गीत बजाने, शादियों में डीजे बजाने या सांस्कृतिक उत्सवों में भाग लेने पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। यहाँ तक कि ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने और त्यौहार मनाने में भी इन्हें दिक्कतों ता सामना करना पड़ता है।

दलित परिवारों का कहना है कि महिलाएँ और लड़कियाँ घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं। उनके साथ छेड़छाड़ की जाती है और धमकियाँ दी जाती है। उन्होने चेतावनी दी है कि अगर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई तो वे लोग पलायन कर जाएँगे। एक दलित व्यक्ति ने कहा, “हमारी बेटियाँ और पत्नियाँ घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं। त्यौहार खुशियों के बजाय तनावपूर्ण हो गए हैं। और जब हम शिकायत करते हैं, तो कुछ नहीं होता।”

एक दूसरे दलित व्यक्ति ने कहा, “हम कई बार पुलिस के पास गए। हमने बेहतर सुरक्षा और सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया, लेकिन कुछ नहीं बदला। इसलिए हमने अपने घर बेचने का फैसला किया है। कम से कम हम कहीं और शांति से रह सकते हैं।”

आजमगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) मधुवन कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस ऐसे परिवारों से संपर्क कर उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दे रही है। उन्होंने कहा, “हमने ऐसी रिपोर्ट देखी है कि कुछ परिवार पलायन करने की योजना बना रहे हैं। हम उनसे संपर्क कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दे रहे हैं।”

मुबारकपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निहान नंदन ने भी कहा कि शांति बहाल करने के लिए 3 जून की घटना के बाद इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है। हालाँकि पुलिस के आश्वासन के बावजूद अधिकांश परिवार आश्वस्त नहीं दिखते। दलित परिवारों का कहना है कि “पहले यह सुरक्षा कहाँ थी? प्रशासन को जागने के लिए सुर्खियों और विरोध प्रदर्शनों की क्या जरूरत है?”

सोशल मीडिया पर इस घटना पर लोग गुस्से में दिख रहे हैं। अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक का मुद्दा, महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया जा रहा है। फिलहाल लोग अपने घरों की दीवारों पर “घर बिकाऊ है” के बोर्ड लगाए हैं। विरोध की आवाजें छोटापुरा की संकरी गलियों में गूँज रही हैं। दलित परिवार जल्द से जल्द फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने और उन्हें न्याय देने की माँग कर रहे हैं।

G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे पीएम मोदी, कैलगरी में हुआ स्वागत: रिश्ते सुधारने की कोशिश में कनाडा के नए प्रधानमंत्री, कई मुद्दो पर होगी चर्चा

कनानास्किस में 16-17 जून को होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थानीय समयानुसार सोमवार (16 जून 2025) की शाम कनाडा के कैलगरी पहुँचे।

यह लगातार छठवाँ साल है जब प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में प्रतिभाग कर रहे हैं। भारत G-7 देशों का हिस्सा नहीं है, लेकिन कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के निमंत्रण पर वह सम्मेलन में आउटरीच पार्टनर के तौर पर हिस्सा ले रहे हैं। भारत के साथ मेक्सिको और यूक्रेन भी इस फेरहिस्त में शामिल है। इस दौरान पीएम मोदी सम्मेलन में आने वाले देशों के नेताओं से मुलाकात और कुछ द्विपक्षीय बैठकों का हिस्सा बनेंगे।

भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन में भी देश अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में इस सम्मेलन में भारत प्रौद्योगिकी, वैश्विक आर्थिक स्थिरता और जलवायु परिवर्तन पर बात कर सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बैठक को छोड़कर बीच में ही वापस चले गए हैं। इसे पीछे उन्होंने इजरायल और ईरान के युद्ध का कारण दिया है।

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी पहली बार तीन देशों के दौरे पर हैं। इसके तहत पहले वह साइप्रस पहुँचे थे। इसके बाद कनाडा और पिर क्रोएशिया का दौरा शामिल है।

G-7 दुनिया की 7 उन्नत अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। रूस भी पहले इस समूह का हिस्सा था, लेकिन क्रीमिया देश पर कब्जा करने के बाद समूह से उसे निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलब है कि ईरान और इजरायल के बीच लगातार युद्ध की स्थिति बदतर होती जा रही है तो वहीं पश्चिम एशिया के देशों में भी तनाव बढ़ रहा है। वहीं पश्चिम एशिया के देशों में भी तनाव बढ़ रहा है। इसके अलावा G7 के इस समय होने के पीछे एक कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीतियाँ भी हैं।

रिश्ते सुधारने का मौका

भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले साल तब तल्खी आई थी, जब खालिस्तानी समर्थक अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में अक्टूबरल 2024 में ओटावा ने भारत के पाँच डिप्लोमेट को जोड़ने का प्रयास किया था। इस कड़ी में भारत ने देश से कनाडा के राजनयिकों को निष्कासित कर कनाडा से भी अपने उच्चायुक्त और अन्य डिप्लोमेट को वापस बुला लिया था।

मार्च में कनाडा के नए प्रधानमंत्री बने कार्नी ने एक बार फिर भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिहाज से पीएम मोदी को इस सम्मेलन के लिए निमंत्रित किया है।

भारत के लिए कनाडा पोटाश, लकड़ी, कागज और अन्य खनन उत्पादों को आयात करता है। इसी तरह भारत की ओर से कनाडा को कपड़े, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और रत्न निर्यात किया जाता है। इसके अलावा कनाडा में भारतीय छात्रों की भी एक बड़ी संख्या रहती है।

‘तेहरान खाली करो’- ट्रंप का फरमान, नेतन्याहू ने किया खामेनेई के अंत का ऐलान: इजरायल-ईरान के बीच युद्ध चरम पर, लोगों को भागने के लिए नहीं मिल रहा रास्ता

इजरायल और ईरान के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब अपने पाँचवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हर गुजरते दिन के साथ ईरान की आक्रामकता मिडिल ईस्ट में अशांति बढ़ा रही है। इस संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की राजधानी तेहरान को तुरंत खाली करने का आदेश जारी कर दिया है, जिससे दुनिया भर में इस क्षेत्र में ईरान के बढ़ते खतरे की गंभीरता समझ में आ रही है।

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को जान से मारने की धमकी देकर साफ कर दिया है कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। दोनों नेताओं की यह दृढ़ता साफ तौर पर ईरान की आतंकी गतिविधियों और परमाणु महत्वकांक्षा पर लगाम लगाने की ओर इशारा कर रही है, जिससे मिडिल ईस्ट में स्थिरता की उम्मीद जगी है।

तेहरान खाली करो- ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर न करने को लेकर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान का यह रवैया मूर्खतापूर्ण है और इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “ईरान को उस ‘समझौते’ पर हस्ताक्षर करने चाहिए थे, जिस पर साइन करने के लिए मैंने उनसे कहा था। लोगों का मारा जाना कितने शर्म की बात है। साफ शब्दों में कहूँ तो, ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं रख सकता है। मैंने यह बार-बार कहा है। सभी को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए।”

हालाँकि, अमेरिकी प्रवक्ता एलेक्स फिफर और पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने साफ किया है कि अमेरिका अभी तक किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है और उसकी सेनाएँ सिर्फ आत्मरक्षा के लिए तैयार हैं।

लेकिन ट्रंप का राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) को सिचुएशन रूम तैयार रखने का आदेश यह बताता है कि अमेरिका इस स्थिति को कितनी गंभीरता से ले रहा है और ईरान के खतरे को रोकने के लिए बड़े फैसलों की जरूरत पड़ सकती है।

‘खामेनेई को मार डालो’-नेतन्याहू

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को सीधे तौर पर निशाना बनाने की बात कहकर सबको चौंका दिया है। एबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि खामेनेई को निशाना बनाना संघर्ष को बढ़ाएगा नहीं, बल्कि खत्म करेगा।

नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने पहले भी ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है, जो हिटलर की न्यूक्लियर टीम की तरह काम कर रहे थे। नेतन्याहू का मानना है कि खामेनेई की हत्या से यह युद्ध खत्म हो जाएगा और ईरान के परमाणु व बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकेगा, चाहे ईरान खुद ऐसा करे या इजरायल को ऐसा करना पड़े।

नेतन्याहु ने यह भी कहा कि ईरान का शासन बहुत कमजोर है और इस लड़ाई का परिणाम ईरान में तख्तापलट का कारण बन सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट का चेहरा हमेशा के लिए बदल जाएगा और क्षेत्र में स्थिरता आएगी।

नेतन्याहु ने यह भी दावा किया है कि ईरान की राजधानी तेहरान का हवाई क्षेत्र अब इजरायली वायुसेना के कब्जे में हैं।

युद्ध की आग में झुलसता मिडिल ईस्ट

इजरायल और ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में अब तक भारी नुकसान हो चुका है। इजरायली हमलों में 224 ईरानी मारे जा चुके हैं और 1,481 लोग घायल हुए हैं, जबकि इजरायल में 24 लोगों की मौत हुई है और 600 से ज्यादा घायल हुए हैं।

इजरायल ने तेहरान पर कई बार एयरस्ट्राइक की है, जो ईरान की आक्रामकता का जवाब है। वहीं, ईरान ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव और हाइफा पर बमबारी की है, जिससे साफ है कि ईरान की मंशा सिर्फ नुकसान पहुँचाना है।

इस युद्ध के कारण ईरान की राजधानी तेहरान से भागने की कोशिश कर रहे हजारों लोग फँस गए हैं। न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने और टैक्सी न मिलने के कारण लोग सीमा तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, जो ईरान की बदइंतजामी को दर्शाता है।

इजरायल ने अपने नागरिकों से जॉर्डन और मिस्र के जरिए देश छोड़ने को कहा है। चीनी दूतावास ने भी इजरायल में रह रहे अपने नागरिकों से जल्द से जल्द देश छोड़ने की अपील की है और उन्हें जमीन के रास्ते जॉर्डन जाने की सलाह दी है।

भीम आर्मी वाले चन्द्रशेखर को बृजभूषण शरण सिंह ने याद दिलाया ‘घसीटकर ले जाऊँगा’ वाला बयान, पूछा- दलित बेटी पर चुप्पी क्यों: रोहिणी घावरी ने सांसद पर लगाए हैं शोषण के आरोप

भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने सांसद चन्द्रशेखर रावण पर केस दर्ज किए जाने की माँग की है। उन्होंने चंद्रशेखर रावण पर लगे शोषण के आरोपों को लेकर जवाब माँगा है। चंद्रशेखर रावण के खिलाफ रोहिणी घावरी लगातार सोशल मीडिया पर लिख रही हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद बृजभूषण ने कहा, “जब मेरे ऊपर इस तरह के आरोप लगे, तब इन्हीं सांसद महोदय ने कहा था कि अगर समाज मुझे यह अनुमति दे तो मैं इसे घसीटकर ले जाऊँ। आज मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि मेरे ऊपर तो FIR हो गई। मैं न्यायपालिका का सामना कर रहा हूँ। सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। आरोप लगते ही मैंने कहा था कि जिस दिन आरोप सिद्ध हो जाएँगे उस दिन फाँसी पर लटक जाऊँगा।”

आगे उन्होंने कहा, “अगर यह लड़की दूसरे समुदाय से होती, तो अब तक सोशल मीडिया और तमाम मंचों पर तूफान मच चुका होता। मगर आज सब इसलिए चुप हैं क्योंकि वह दबे-कुचले समाज से आती है। आज एक दलित बेटी का सवाल है। उस वक्त जाट बेटी का सवाल था। क्या वो मीडिया के सामने मुँह खोलेंगे। जो लड़की आरोप लगा रही है उसका जवाब देना चाहिए।”

बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को न्याय का ठेकेदार बताने वालों की चुप्पी पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी, ममता बनर्जी और किसान संगठन क्यों मौन हैं।

चंद्रशेखर पर रोहिणी ने लगाए शोषण के आरोप

आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर रावण पर रोहिणी घावरी ने कई आरोप लगाए हैं। रोहिणी घावरी पहले ही खुलासा कर चुकी हैं वो कि वो चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के साथ रिलेशनशिप में थीं और वहाँ उन्हें धोखा मिला।

रोहिणी घावरी ने बड़ा आरोप लगाया था कि चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ अपनी शादी के बारे में छिपा कर कई बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खेल चुके हैं। रोहिणी ने हाल ही में बताया था कि कैसे चन्द्रशेखर (तब वो सांसद नहीं, एक्टिविस्ट हुआ करते थे) ने अपनी शादी की बात छिपाकर कई लड़कियों की इज्जत के साथ खेला

ऑपइंडिया से बात करते हुए डॉ रोहिणी घावरी ने बताया था कि कैसे उन्हें दलित समाज के सामने झूठा साबित करने के लिए उन्हें बदनाम करने की तमाम तरह की कोशिशें हुईं और दबाव डलवाकर उनसे वो पोस्ट्स X से डिलीट करवाए गए। रोहिणी कुछ अन्य लड़कियों की आपबीती भी सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं, ताकि अपने आरोपों की पुष्टि कर सकें।

रोहिणी ने सांसद के कई वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें किसी में वो जमीन पर लेटकर माफ़ी माँगते हुए दिख रहे हैं तो किसी में रोते हुए दिखाई दे रहे हैं।

क्या ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल करेगा FATF? पहलगाम में इस्लामी आतंकियों के हमले पर 55 दिन बाद तोड़ी चुप्पी, कहा- बिना फंडिंग के नहीं हो सकता है ऐसा अटैक

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) ने पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा की है। FATF ने कहा है कि पहलगाम जैसा हमला बिना किसी फंडिंग के नहीं हो सकता। FATF ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है।

FATF ने सोमवार (16 जून, 2025) को यह आधिकारिक बयान जारी किया है। FATF ने कहा, “आतंकवादी हमले दुनिया भर में लोगों की जान लेते हैं, उन्हें अपंग बनाते हैं और भय पैदा करते हैं। FATF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमले पर गहरी चिंता जताई है और इसकी निंदा की है।”

FATF ने कहा, “यह और हाल ही में हुए अन्य हमले, बिना पैसे और आतंकवादी समर्थकों के बीच पैसे के लेन-देन के साधनों के बिना नहीं हो सकते थे।” FATF ने कहा है कि आतंक की फंडिंग रोकने के लिए वह 200 से अधिक जगह नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है।

आधिकारिक बयान में FATF ने कहा है कि वह मामले में एक्शन लेते हुए जल्द ही आतंकी फंडिंग पर एक विश्लेषण भी जारी करेगा। FATF ने कहा कि आतंकवादियों को अपना मकसद पूरा करने में केवल एक बार सफल होने की आवश्यकता होती है, जबकि इसे रोकने के लिए हर बार सफल होना होगा।

पहलगाम आतंकी हमले के लगभग 2 महीने बाद यह बयान जारी करने पर FATF पर प्रश्न भी उठ रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के लिए FATF से माँग भी की थी। पाकिस्तान का दावा है कि FATF ने यह माँग नहीं मानी। हालाँकि, FATF का इस पर क्या रुख है, यह स्पष्ट नहीं हुआ है।

FATF के पहलगाम हमले के बयान के बाद उसके पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन का आधार और मजबूत हो गया है। आतंकी फंडिंग के चलते पाकिस्तान इससे पहले तीन बार FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जा चुका है। आखिरी बार उसे 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था। इससे वह 2022 में निकला था।

FATF की ग्रे अथवा ब्लैक लिस्ट में जाने वाले देशों को विदेशी व्यापार और कर्ज जुटाना मुश्किल हो जाता है। उन पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध भी लग जाते हैं। FATF को वर्ष 1989 में मनी लांड्रिंग पर नजर रखने के लिए बनाया गया था, बाद में इसके अंतर्गत आतंकी फंडिंग देने वाले देशों पर एक्शन का काम भी आ गया।

मंदिर के सामने तुलसी लगाने से भड़के मुस्लिम, ‘जय श्रीराम’ बुलवाने की अफवाह जुनैद की बीवी ने फैलाई; उपद्रव करने लगी 2000 की भीड़: रिपोर्ट, बोले पीड़ित- हिंदुओं की दुकानें चुन-चुनकर जलाई

कोलकाता के महेशतला में 11 जून, 2025 को मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं को निशाना बनाया था। मुस्लिम एक मंदिर के बाहर तुलसी का पेड़ लगाने को भड़के हुए थे। उन्होंने इस दौरान मंदिर पर भी हमला किया था और तोड़फोड़ की थी। उन्होंने हिन्दुओं की दुकानों और घरों को चुन चुन कर निशाना बनाया था। पुलिस इस मामले में 7 FIR कर चुकी है।

हिन्दुओं ने दैनिक भास्कर को बताया है कि शिव मंदिर के सामने मुस्लिम लगातार तुलसी मंच नहीं बनाने दे रहे थे। रुबाई घोष ने बताया कि कि जुनैद नाम का एक फल वाला यहाँ मंदिर के सामने कब्जा करके बैठा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 जून को एक भी मुस्लिम ने दुकान नहीं खोली और वो हजारों की संख्या में इकट्ठा हो गए।

विजेंद्र गोस्वामी ने बताया कि इस भीड़ ने पथराव और हिंसा चालू कर दी, उन्होंने हिन्दू लोगों के साथ ही पुलिस को निशाना बनाया। मुस्लिम भीड़ ने शिव मंदिर अन्दर से तोड़ने की कोशिश की और दुकानों में रखा सारा सामान लूट लिया। हिन्दुओं का आरोप है कि उनकी गाड़ियाँ भी तोड़ दी।

मुस्लिम भीड़ की इस हिंसा में घायल हुए एक अरबिंदो बालो ने बताया कि मुस्लिम भीड़ का नेतृत्व फल वाला जुनैद कर रहा था जबकि उसकी बीवी रानी भीड़ को भड़का रही थी। आसपास रहने वाले हिन्दुओं ने स्पष्ट किया कि मामले को बातचीत से निपटाने की बजाय मुस्लिम भीड़ हिंसा पर उतारू रही और उनकी दुकानों को निशाना बनाती गई।

अरबिंदों बालों ने बताया कि जुनैद की बीवी ने जय श्री राम जबरदस्ती बुलवाने की अफवाह फैलाई। उन्होंने कहा कि उस वक्त 2-3 हजार लोग इकट्ठा हो गए थे और पुलिस उनकी हिंसा के दौरान कुछ नहीं कर पाई। मुस्लिमों ने इस बीच दावा किया है कि जुनैद से जय श्री राम बोलने को कहा गया और तुलसी लगाने के चलते हिंसा हुई।

पुलिस ने इस मामले में 7 FIR दर्ज की हैं। पुलिस 41 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जुनैद भी गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस मुस्लिमों की भूमिका की जाँच भी कर रही है। पुलिस ने कुछ हिन्दुओं को भी गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है कि कि कोलकाता के महेशतला में 11 जून, 2025 को मुस्लिम भीड़ ने हिंसा की थी। इस हिंसा का टार्गेट एक शिव मंदिर था, इसमें तोड़फोड़ की गई थी। हिंसा में 60 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिनमे पुलिसवाले भी थे। इसकी वीडियो भी सामने आई थी, जिसमें दंगा होते दिखा था। मामले में भाजपा ने दोषियों के खिलाफ एक्शन की माँग की थी।

‘यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान’: PM मोदी को साइप्रस ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा, 11 साल में भारतीय प्रधानमंत्री को 20+ देश कर चुके हैं सम्मानित; जानिए सबके बारे में

पीएम मोदी को साइप्रस ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान गैंड ‘क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस 3’ से सम्मानित किया है। उम्मीद की जा रही है कि ये सम्मान भारत और साइप्रस के संबंधों को नई ऊँचाईयाँ देगा। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने पीएम मोदी के साथ मिलकर मीडिया से बात की और आतंकवाद के खिलाफ जंग में पूरा समर्थन का भरोसा दिया।

वहीं पीएम मोदी ने कहा कि ये सम्मान सिर्फ उनका नहीं बल्कि भारत के 140 करोड़ जनता का सम्मान है, इसलिए वो ह्रदय से आभार जताते हैं। पीएम मोदी ने कहा, ” मैं यह सम्मान भारत और साइप्रस के बीच दोस्ताना संबंधों और साझा मूल्यों को समर्पित करता हूँ।”

पीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच साझेदारी नई ऊँचाईयाँ छूएगी। उन्होंने कहा, ” हम न सिर्फ अपने देशों की प्रगति को मजबूत करेंगे बल्कि शांतिपूर्ण, सुरक्षित वैश्विक माहौल को बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।”

सीमा पार आतंकवाद पर बोले पीएम मोदी

सीमा पार आतंकवाद के निपटने में भारत के रुख का साइप्रस ने समर्थन किया है। पीएम ने इसके लिए साइप्रस का आभार जताया। आतंकवाद, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी की रोकथाम के लिए रियल टाइम इंफोर्मेशन एक्सचेंज का मैकेनिज्म तैयार किया जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अगले 5 सालों में एक ठोस रोड मैप तैयार करेंगे और इसको हकीकत में तब्दील करने के लिए द्विपक्षीय प्रोग्राम बनाएँगे। साइबर सिक्योरिटी पर अलग से बातचीत होगी।”

पीएम ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में रिफॉर्म्स को लेकर दोनों देश सहमत हैं और साइप्रस भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। साइप्रस में योग और आयुर्वेद को काफी प्रोत्साहित किया गया है। साइप्रस भारतीय टूरिस्टों का अब पसंदीदा जगहों में एक हो गया है।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध पर जताई चिंता

पीएम ने कहा कि पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे संघर्ष को लेकर दोनों देश चिंतित हैं। इसका असर न सिर्फ उन देशों पर पड़ रहा है जो इसमें शामिल हैं, बल्कि दुनिया के बाकी देश भी इससे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, ” ये युग अब युद्ध का नहीं बल्कि संवाद और समाधान के साथ मानवता का है।”

पीएम मोदी को 20 से ज्यादा देश कर चुके हैं सम्मानित

इतिहास में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भारतीय नेता पीएम मोदी हैं जिन्हें 21 देशों ने सम्मानित किया है।

  • सऊदी अरब ने 2016 में ‘ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज’ से सम्मानित किया।
  • अफगानिस्तान ने 2016 में ‘स्टेट आर्डर ऑफ़ ग़ाज़ी आमिर अमानुल्लाह खान’ से सम्मानित किया।
  • फिलिस्तीन ने 2018 में ‘ग्रैंड कॉलर’ से सम्मानित किया।
  • मालदीव ने 2019 में ‘निशान इज्जुद्दीन’ से नवाजा।
  • संयुक्त अरब अमीरात ने 2019 में ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से सम्मानित किया।
  • बहरीन ने 2019 में ‘किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ से नवाजा।
  • अमेरिका ने 2020 में ‘लीजन ऑफ मेरिट’ की सर्वोच्च डिग्री से सम्मानित किया।
  • फिजी ने 2023 में सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किया।
  • पापुआ न्यू गिनी ने 2023 में ‘ऑर्डर ऑफ लोगोहू ‘ से नवाजा।
  • मिस्र ने 2023 में ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से सम्मानित किया।
  • फ्रांस ने 2023 में ‘लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया ।
  • ग्रीस ने 2023 में ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो’ से नवाजा गया।
  • भूटान ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो’ से सम्मानित किया।
  • रूस ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द ए पोस्टल’ से नवाजा।
  • नाइजीरिया ने 2024 में ‘ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर’ से सम्मानित किया।
  • डोमिनिका ने 2024 में ‘ डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर ‘ से सम्मानित किया।
  • गुयाना ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ से सम्मानित किया।
  • कुवैत ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर’ से नवाजा।
  • रूस ने 2024 में ‘ग्रैंड क्रॉस विद कॉलर’ से सम्मानित किया।
  • बारबाडोस ने 2025 में ‘ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ से नवाजा।
  • मॉरीशस ने 2025 में ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार और की ऑफ द इंडियन ओशन’ से नवाजा।
  • श्रीलंका ने 2025 में ‘मित्र विभूषण’ अवॉर्ड से नवाजा।
  • साइप्रस ने 2025 में ‘क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस 3’ से नवाजा।

अवैध दरगाह को समतल करने पहुँचा बुलडोजर, भीतर मिले स्पेशल रूम से लेकर ऐशोआराम के सामान: बाथटब-संगमरमर के कमरे, लिखा था- याद रखोगे तो बरकत पाओगे

गुजरात के जामनगर में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई की गई है। यहाँ लाखों स्क्वायर किलोमीटर में बनाए गए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला है। मेगा डिमोलिशन के तहत 300 से अधिक मकान भी ध्वस्त कर दिए गए हैं। कुछ मजहबी ढाँचे भी ध्वस्त किए गए हैं। यहाँ एक दरगाह में ऐशोआराम की तमाम चीजें पाई गई हैं। यह कार्रवाई लगातार चालू है।

ऑपइंडिया ने जामनगर के एसपी प्रेमसुख डेलू से इस मामले मे बातचीत की है। एसपी प्रेमसुख डेलू ने बताया कि जामनगर सिटी A डिवीजन पुलिस स्टेशन क्षेत्र में 7 लाख वर्ग फीट जमीन पर अवैध मजहबी ढाँचे बनाए गए थे।

उन्होंने बताया कि इस जमीन की कीमत ₹193.57 करोड़ है। एसपी डेलू ने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों से धार्मिक ढाँचों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि वाघेर वाडो और बच्चूनगर इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दरगाहों और मस्जिदों का निर्माण किया गया है।

उन्होंने बताया हिया जामनगर नगर निगमऔर जामनगर पुलिस ने इन पर संयुक्त अभियान चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की है। पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि रंगमती नदी के किनारे 300 से अधिक अवैध मकान और 7 से 8 धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया गया है।

दरगाह में मिला ऐशोआराम का सामान

ध्वस्तीकरण के दौरान सरकारी जमीन पर बनाए मजहबी ढांचों पर भी जाँच जारी है। एक मजहबी स्थल पर संदेह गहरा गया है। यह दरगाह बहुत विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी और भव्य थी। इसके अंदर कई शानदार वस्तुएँ भी मिली हैं। पुलिस प्रशासन ने इसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि दरगाह में आलीशान बाथटब लगे हुए हैं और शानदार कमरे भी बने हुए हैं। दरगाह को विदेशी फंडिंग का शक भी गहरा रहा है। दरगाह काफी भव्य तरीके से बनाई हुई है। यहाँ महलों जैसे बाथटब मिले हैं। एसपी डेलू ने बताया है कि इसकी जाँच चालू हो गई है।

जामनगर पुलिस ने आगे बताया कि बच्चूनगर इलाके में लगभग 11,000 वर्ग फीट के क्षेत्र में एक दरगाह का निर्माण किया गया है, जिसके अंदर एसपी प्रेमसुख डेलू और उनकी टीम निरीक्षण करने गई थी। इस बीच पुलिस अंदर की आलीशान सुविधाएं आदि देखकर हैरान रह गई।

इस दरगाह में लिखित घोषणा की गई है जिसमें कहा गया है कि इस स्थान पर किसी भी प्रकार का पैसा स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि जब पैसा नहीं लिया गया तो इतना आलीशान निर्माण कैसे किया गया।

इस दरगाह में किसी भी प्रकार का बक्सा या डिब्बा नहीं रखा जाता है तथा यहां धन रखना भी वर्जित है। इसके अलावा दरगाह में यह भी लिखा है कि, “बादशाह के दरबार में कोई भीख माँगने ही आता है, दान देने नहीं।”

इसके अतिरिक्त यह भी लिखा था कि यहाँ किसी भी प्रकार की धनराशि स्वीकार नहीं की जाएगी। जिला पुलिस प्रमुख प्रेमसुख डेलू और एक अन्य पुलिस टीम ने इसका जब निरीक्षण किया, इस दौरान दरगाह में कई आलीशान सुविधाएँ भी देखने को मिलीं। रंग-बिरंगे और आकर्षक टाइलों और संगमरमर जड़े हुए कई कमरे भी देखे गए।

दरगाह से अलग एक विशेष कमरा बनाया गया था, जिसमें बाथटब भी देखने को मिला। इस बाथटब रूम के दरवाजे पर एक अलग नोटिस भी चिपकाया गया था। इसमें कहा गया कि उस कमरे में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है।

दरगाह में एक विशेष सूचना भी लिख दी गई कि किसी को भी इस कमरे में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इसके अलावा एक नारा भी लिखा था, जिसमें कहा गया था, ”याद रखोगे तो बरकत पाओगे, भूल करोगे तो बर्बाद हो जाओगे।” फिलहाल दरगाह का चौकीदार फरार है, पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

ऑपइंडिया से बातचीत में हिंदू कार्यकर्ता युवराज सोलंकी ने कहा कि दरगाह में कई आलीशान चीजों की मौजूदगी संदेह पैदा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि दरगाह में बर्गलर बार और बाथटब आदि जैसे कमरों की कोई जरूरत नहीं है लेकिन फिर भी, यह सब एक आलीशान ढाँचे में था। उन्होंने इस बात पर संदेह जताया कि क्या दरगाह को कोई बाहरी फंडिंग मिलती है और इसकी उचित जाँच की माँग की।

PM मोदी पर खालिस्तानी ख़तरा, आतंकियों की शरणस्थली है कनाडा: उन संगठनों का कच्चा चिट्ठा, जो G7 में डाल सकते हैं रंग में भंग

विश्व के सात महत्वपूर्ण देशों के समूह G7 की बैठक कनाडा में आयोजित हो रही है। इस वार्षिक शिखर सम्मलेन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कनाडा जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस बैठक के लिए न्योता नए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कनाडा यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के संबंध कुछ खास अच्छे हैं। कनाडा बीते कुछ वर्षों में खालिस्तानी और इस्लामी आतंकियों की शरणस्थली बन चुका है।

कनाडा में G7 की यह बैठक अल्बर्टा में हो रही है। 16-17 जून, 2025 को होने वाले इस शिखर सम्मलेन के लिए प्रधानमंत्री मोदी सोमवार (16 जून, 2025) को कनाडा पहुँच रहे हैं। इस बीच खालिस्तानी आतंकियों ने प्रधानमंत्री मोदी के अल्बर्टा दौरे पर बड़े विरोध प्रदर्शनों और यहाँ तक कि हमले तक की तैयारी कर ली है, ऐसी सूचना है। इस काम को कनाडा में वर्तमान में मौजूद कई खालिस्तानी आतंकी संगठन अंजाम दे सकते हैं। इनमें से कई लम्बे समय से सक्रिय हैं।

बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI)

बब्बर खालसा सबसे पुराने और सबसे संगठित खालिस्तानी आतंकवादी समूहों में से एक है। इसकी जड़ें 1920 के बब्बर अकाली आंदोलन से जुड़ी हैं, लेकिन औपचारिक रूप से इसने 1978 में बैसाखी के दिन अखंड कीर्तनी जत्थे और निरंकारियों के बीच हुई झड़पों के बाद आकार लिया था।

बब्बर खालसा को UAPA कानून के तहत भारत में प्रतिबंधित किया गया है। 24 अप्रैल, 1980 को निरंकारी प्रमुख गुरबचन सिंह की हत्या के बाद, बीबी अमरजीत कौर के अनुयायियों ने खुद को बब्बर खालसा घोषित किया था। इसने 1981 में कनाडा की धरती से काम करना चालू किया था।

इसकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI पैसा देती है। इसी संगठन ने 1985 में एअर इंडिया के विमान कनिष्क को बम विस्फोट से उड़ाया था, जिसमें 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा इसी संगठन ने पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह की हत्या करवाई थी। इसका सरगना वाधवा सिंह बब्बर वर्तमान में पकिस्तान में रहता है।

बब्बर खालसा इंटरनेशनल में वर्तमान में वाधवा सिंह के अलावा लखबीर लांडा, हरविंदर रिंदा और गोल्डी बराड़ जैसे आतंकी काम करते हैं। यह सभी भारत से बाहर बैठ कर पंजाब समेत बाकी देश में अशांति फैलाना चाहते हैं।

इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF)

इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन को भी भारत ने UAPA के तहत बैन किया हुआ है। यह यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, कनाडा और अमेरिका में अपनी ब्रांच के माध्यम से काम करता है। ISYF का मुख्य उद्देश्य भी खालिस्तान बनाना है। इस संगठन को पहले जरनैल सिंह भिंडरावाले का भतीजा लखबीर सिंह रोडे चलाता था।

उसकी पाकिस्तान में 2023 में मौत हो गई थी। वर्तमान में उसका बेटा भगत बराड़ इसमें शामिल है। वह कनाडा में एक व्यापारी है लेकिन लगातार खालिस्तानी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान जाया करता है। उसे कनाडा ने भी नो फ्लाई लिस्ट में रखा हुआ है।

इसके अलावा एक और आंतकी मनवीर सिंह दुह्डा भी कनाडा में रह कर वर्तमान में ISYF को पैसा देता है और इसकी आतंकी गतिविधि बढ़ाता है। इसके अलावा सुलिंदर सिंह विर्क और मलकीत सिंह फौजी जैसे आतंकी भी इस संगठन में शामिल हैं।

सिख लिबरेशन फ्रंट (SLF)

विदेश में बसने वाले खालिस्तानियों का समूह माने जाने वाले सिख लिबरेशन फ्रंट में कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका के खालिस्तानी शामिल हैं। यह अन्य खालिस्तानी समूहों से अलग है क्योंकि इसका कोई औपचारिक ऑनलाइन या सार्वजनिक अस्तित्व नहीं है। यह एक संगठन की तरह कम और एक समूह की तरह ज्यादा काम करता है।

इसमें अमेरिका और कनाडा के तीन समूह शामिल हैं। इसकी गतिविधियों पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार नजर बनाए रखती हैं। इसका कामधाम अभी मोहिंदर सिंह बुअल देखता है। वह कनाडा के वैंकूवर का रहने वाला है और कनाडाई खालिस्तानी नेता जगमीत सिंह का ख़ास है। उसके लिंक एक आतंकी परिवार से ही हैं।

खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स (KZF)

आतंकी रंजीत सिंह नीता की अगुवाई में 1993 में बना खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स वर्तमान में भारत में UAPA के तहत बैन है। KZF के तीन आतंकी हाल ही में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मार गिराए गए थे। KZF मुख्य तौर पर सिख युवाओं को ऑनलाइन भड़का कर उनसे हमला करवाता है।

पंजाब के SBS नगर में चौकी पर हमला भी इसने ही करवाया था। इसके तार अमेरिका, कनाडा, मलेशिया से लेकर जर्मनी और नेपाल तक फैले हुए हैं। 1996 में झेलम एक्सप्रेस में धमाका करवाने से लेकर दिल्ली के पहाड़गंज में 2000 में बम ब्लास्ट करवाने तक की जिम्मेदारी इसी संगठन ने ली है।

इसका मुखिया नीता भी UAPA के तहत बैन है। वह NIA और पंजाब पुलिस का वांटेड है। इस संगठन में भूपिंदर सिंह भिंदा नाम का आतंकी भी शामिल है। उसने डेरा राधास्वामी सत्संग व्यास के मुखिया को मारने की योजना बनाई थी, इस मामले में उसे सजा भी हुई थी। इसके अलावा इस संगठन में गुरमीत सिंह बग्गा नाम का आतंकी भी शामिल है।

सिख फॉर जस्टिस (SFJ)

सिख फॉर जस्टिस (SFJ) अमेरिका से काम करने वाला खालिस्तानी संगठन है। इसको 2009 में वकील गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बनाया था। यह भी आजाद खालिस्तान बनाना चाहता है। SFJ ने दुनिया भर में खालिस्तान के नाम पर खालिस्तान रेफरेंडम का लगातार आयोजन किया है। इसके अलावा यह संगठन लगातार सोशल मीडिया पर आतंक को बढ़ावा देता रहा है।

इसे 2019 में मोदी सरकार ने UAPA के तहत बैन कर दिया था। यह समूह कभी भारत के नक़्शे से छेड़छाड़ करता है तो भारतीय नेताओं और अफसरों को मारने की धमकियाँ देता है। इस काम के लिए SFJ ने इनामों की घोषणा भी की है।

इस संगठन का चेहरा गुरपतवंत सिंह पन्नू है। पन्नू लगातार सोशल मीडिया का इस्तेमाल खालिस्तानी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए करता है। उसके पहले भी कई आतंकियों से लिंक रहे हैं।

खालिस्तान कमांडो फ़ोर्स (KCF)

खालिस्तान कमांडो फोर्स 1986 में बना था। इसका उद्देश्य हिंसा के जरिए खालिस्तान बनाना था। ये लोग सशस्त्र संघर्ष, फिरौती के लिए अपहरण और बैंकों को लूटना, हथियार खरीदने और लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए धन जुटाने जैसे काम करते आए थे। इसका सरगना परमजीत सिंह पंजवार था।

पंजवार के नेतृत्व में, KCF ने 80 और 90 के दशक के अंत में कई आतंकी हमले अंजाम दिए। इनमे राजनीतिक हत्याओं से लेकर कॉलेजों में मर्डर तक शामिल थे। KCF नेने फिरोजपुर में 10 राय सिखों की भी हत्या की थी। इसका उद्देश्य डर पैदा करना था।

इसके बाद उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के प्रमुख मेजर जनरल बी.एन. कुमार की हत्या और पटियाला के थापर इंजीनियरिंग कॉलेज में 18 छात्रों की हत्या को अंजाम दिया। KCF का पंजवार ही कर्ता धर्ता है। वह लगातार भारत विरोधी साजिशें रचता रहता है।

खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स (KTF)

खालिस्तान टाइगर फोर्स या KTF की स्थापना जगतार सिंह तारा ने की थी। वह पहले बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सदस्य था। तारा 31 अगस्त, 1995 को पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में शामिल था। भारत ने वर्तमान में खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स को बैन किया हुआ है।

जगतार सिंह तारा भी 2015 में गिरफ्तार हो चुका है। उसकी गिरफ्तारी थाईलैंड में हुई थी। इस संगठन के तार ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका, फ्रांस और यहाँ तक कि स्पेन में भी जुड़े हैं। KTF में अर्शदीप डल्ला और मनदीप सिंह धालीवाल जैसे आतंकी शामिल हैं। यह लगातार भारत विरोधी साजिशें रच रहे हैं।

पीएम के दौरे पर आतंकी साया

जब कोई राष्ट्राध्यक्ष किसी वैश्विक शिखर सम्मेलन में जाता है, तो आम तौर पर सहयोग, विकास और नीति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जी-7 के लिए अल्बर्टा की यात्रा के मामले में, कनाडा के सरकार की शह पर काम करने वाले खालिस्तानी आतंकियों ने दूसरी तरफ मोड़ दिया है।

खालिस्तानी कोई छिपे हुए कोनों में अलग-थलग आवाज़ें नहीं हैं। उनको मोटी फंडिंग मिलती है और वो भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक फैले हुए हैं। कुछ मामलों में उन्हें तमाम सरकारें तक मदद कर रही हैं।

इस कहानी में पाकिस्तान की ISI एक जाना-पहचाना नाम है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वास्तव में इस बात की चिंता होनी चाहिए कि इनमें से कितने ऑपरेटिव कनाडा, यूके, यूएस और मुख्य भूमि यूरोप में स्वतंत्र रूप से घूमते हैं। वे देश जो अक्सर मानवाधिकारों और कानून के शासन को बढ़ावा देते हैं, वही इन आतंकियों को पनाह देते हैं।

खालिस्तानी आतंकी भारतीय राजनयिकों पर हमले करके यह दिखा भी चुके हैं कि वह किसी भी भारतीय को निशाना बनाने से चूकेंगे नहीं। ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा और इसमें खालिस्तानियों के कारनामों पर सबकी नजर रहने वाली है।

जो पूछ रहे थे सिंधु का पानी पाकिस्तान जाने से रोकोगे कैसे, उनको 113 किमी लंबी नहर से जवाब देगी मोदी सरकार: चिनाब से जुड़ेगी रावी-सतलुज-व्यास, राजस्थान में भी आएगी हरियाली

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। हालाँकि पाकिस्तानी सरकार भारत को पत्र लिखकर लगातार संधि को फिर से शुरू करने की गुहार लगा रही है। पाकिस्तान जहाँ भारत को संधि को फिर से शुरू करने के लिए पत्र भेज रहा है, वहीं उसके राजनेता भी ‘खून बहेगा’ और ‘हम तुम्हारी सांस रोक देंगे’ जैसी धमकियाँ दे रहे हैं। हालाँकि भारत परियोजना को स्थगित रखने के रुख पर कायम है ।

सिन्धु नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल के लिए भारत ने बड़ी योजना बना ली है। इसके तहत 113 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी। ये नहर चिनाब नदी को रावी, सतलुज, व्यास नदियों के सिस्टम को जोड़ेगी। इस परियोजना का फायदा न सिर्फ जम्मू कश्मीर, बल्कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को भी मिलेगा। योजना का मकसद चिनाब के जल का बेहतर इस्तेमाल है, साथ ही पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोक कर उन जगहों तक पहुँचाना है जहाँ पानी कम है।लग

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश के पंचमढ़ी में बीजेपी के प्रशिक्षण शिविर में इस योजना की जानकारी दी। उन्होने कहा, ” सिंधु का पानी तीन साल के भीतर नहरों के माध्यम से श्री गंगानगर तक पहुँचाया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान पानी की हर बूँद के लिए तरस जाएगा”

प्रस्तावित नहर नेटवर्क के तहत 11 नहरों को जोड़ने की योजना है और अंत में इंदिरा गाँधी नहर सिस्टम में ये मिलेगा। इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान को फायदा होगा और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पानी पहुँचाया जा सकेगा। पानी के इस वितरण का असर जलवायु परिवर्तन और बारिश के पैटर्न में हो रहे बदलाव पर भी दिखेगा।

रणबीर नहर की बढ़ाई गई लंबाई

इस काम को आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने रणबीर नहर की लंबाई दोगुना करने की योजना बनाई है। अब ये 60 किलोमीटर से बढ़ाकर 120 किलोमीटर कर दिया गया है। प्रताप नहर को लेकर भी सरकार की ऐसी ही योजना है।

रणवीर नहर (फोटो साभार- जम्मू कश्मीर विरासत)

उझ परियोजना को दी जा रही गति

रावी की सहायक नदी उझ पर बहुउद्देशीय परियोजना बनाने का काम कई सालों से रुका हुआ है। मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के कठुआ में उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना को पुनर्जीवित करने की तैयारी कर ली है। इस परियोजना का उपयोग पनबिजली, सिंचाई और पीने के उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। उझ के नीचे एक दूसरा रावी-ब्यास लिंक अब बड़ी नहर परियोजना का हिस्सा होगा। इसे पहले रावी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने के लिए बनाई गई थी। परियोजना में अब ब्यास बेसिन में पानी स्थानांतरित करने के लिए एक बैराज और सुरंग भी बनाया जा रहा है।।

पनबिजली परियोजनाओं पर काम तेज

चिनाब नदी पर बने बागलीहार और सलाल हाइड्रो परियोजनाओं के जलाशयों में गाद निकालने का काम जोरों से चल रहा है। सिंधु जल परियोजना के तहत आने वाली पनबिजली परियोजनाओं जैसे- पाकल दुल (1000 मेगावाट), किरु (624 मेगावाट) क्वार (540 मेगावाट) और रतले (850 मेगावाट) पर काम चल रहा है।

मोदी सरकार चाहती है कि इन योजनाओं का फायदा जल्दी से जल्दी लोगों को मिले इसलिए परियोजनाओं का काम तेजी हो रहा है।

1960 में हुआ था भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता

19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से समझौता हुआ था। यह समझौता भारत और पाकिस्तान द्वारा सिंधु नदी प्रणाली के जल के उपयोग को नियंत्रित करता है। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल अय्यूब खान द्वारा हस्ताक्षरित, यह संधि हिमालय से निकलने वाली छह नदियों के पानी को आवंटित करती है, जिन्हें मोटे तौर पर दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: पूर्वी नदियाँ और पश्चिमी नदियाँ।

पूर्वी नदियाँ रावी (हिमाचल प्रदेश में उद्गम), ब्यास (हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होकर बहती है), और सतलुज (तिब्बत से निकलती है, भारत से होकर पाकिस्तान में बहती है) भारत को दिया गया। जबकि सिंधु, चिनाब और झेलम का पानी पाकिस्तान को आवंटित की गईं।

भारत पूर्वी नदियों के पानी का प्रभावी ढंग से जलविद्युत, सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करता है। इस बीच, सिंधु, झेलम और चिनाब नदियाँ पाकिस्तान की पनबिजली, सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए आवश्यक हैं। सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवन रेखा से कम नहीं है।

सिंधु जल संधि समझौते को आपसी सहयोग और शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया था। हालाँकि यह संधि निश्चित रूप से संतुलित नहीं थी। इससे पाकिस्तान को अधिक लाभ हुआ क्योंकि इसके अंतर्गत आनेवाली नदियाँ का जल प्रवाह पश्चिमी दिशा में ज्यादा है।

इसकी वजह से भारत इन नदियों में बहने वाली कुल जल प्रवाह का लगभग 20 फीसदी ही नियंत्रित करता है, जो सालाना करीब 33 मिलियन एकड़ फीट या 41 बिलियन क्यूबिक मीटर होता है। जबकि पाकिस्तान को 80 प्रतिशत मिलता है, जो लगभग 135 मिलियन एकड़ फीट या 99 बिलियन क्यूबिक मीटर होता है। इस समझौते में पश्चिमी नदियों में बड़े बहुउद्देशीय परियोजनाओं के बनाने पर रोक लगी थी साथ ही इसमें पाकिस्तान में जल प्रवाह को अवरुद्ध करने या नाटकीय रूप से बदलने पर प्रतिबंध लगा दिया।

हालाँकि संधि के स्थगित होने के बाद भारत को अब पाकिस्तान की ‘चिंताओं’ या ‘आपत्तियों’ (भारतीय परियोजनाओं के डिजाइनों पर जानबूझकर अवरोधों को पढ़ें) पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपने पूर्ण आवंटन का उपयोग करने के लिए लगातार काम किया है। खासकर 2016 के उरी हमले के बाद भारत ने योजना को गति दी है। भारत ने हाल के वर्षों में पूर्वी नदियों से पानी को पकड़ने और पश्चिमी नदियों के सीमित उपयोग के लिए बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।

पीएम मोदी ने किया किशनगंगा परियोजना का उद्घाटन

इसको देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मई 2018 में जम्मू और कश्मीर में झेलम की पश्चिमी नदी पर किशनगंगा परियोजना का उद्घाटन किया। किशनगंगा परियोजना में उझ नदी से संग्रहित लगभग 0.65 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी का उपयोग करके 300 मेगावाट से अधिक बिजली पैदा की जा सकती है और कम से कम 30,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकती है। पाकिस्तान के विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने ये साहसिक कदम उठाया।

सिंधु की सहायक नदियों पर स्थित किशनगंगा जलविद्युत संयंत्र का निर्माण 2007 में शुरू हुआ था और चिनाब पर बने रतले जलविद्युत संयंत्र की आधारशिला 2013 में रखी गई थी।

लंबे समय तक, भारत ने रावी नदी के कुछ पानी को बिना इस्तेमाल किए पाकिस्तान में बहने दिया। हालांकि, 2024 में शाहपुरकंडी बैराज के पूरा होने के साथ ही इस प्रवाह को रोक दिया गया और करीब 1,150 क्यूसेक पानी को सिंचाई के लिए जम्मू-कश्मीर और पंजाब की ओर मोड़ दिया गया। इसके साथ ही भारत ने न केवल घरेलू उपयोग के लिए आवंटित पूर्वी नदी का अधिकतम उपयोग किया, बल्कि पाकिस्तान तक पहुँचने वाले पानी को भी कम किया। इस बीच, रावी नदी पर उझ बहुउद्देशीय परियोजना और मकौरा पट्टन बैराज और चिनाब और झेलम पर बन रहे रतले और कीरू सहित रन-ऑफ-रिवर (आरओआर) परियोजनाओं के निर्माण कार्य में भी तेजी लाई गई है।