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कोलकाता गैंगरेप को दबा नहीं पाई TMC तो अपने ही विधायक-सांसद के बयानों से झाड़ लिया पल्ला, ‘दोस्त ने किया बलात्कार’ से लेकर ‘गलती लड़की की है’ तक को बताया ‘निजी सोच’

कोलकाता लॉ कॉलेज में महिला छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं की ओर की गई संवेदनहीन बयानबाजी के बाद पार्टी का एक आधिकारिक बयान सामने आया। बयान में पार्टी ने टीएमसी के विधायक मदन मित्रा और सांसद कल्याण बनर्जी के विवादित बयानों पर उनसे दूरी बना ली है और नेताओं की निंदा भी की है।

टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में कहा कि सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा की टिप्पणियाँ पूरी तरह से उनकी निजी राय हैं और पार्टी के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।

बलात्कार की यह घटना बुधवार (25 जून 2025) को कोलकाता के कस्बा इलाके में स्थित दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज में घटी थी, जिसमें कॉलेज की 24 वर्षीय महिला लॉ छात्रा को निशाना बनाया गया। इस मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस छात्र परिषद (TMCP) के नेता मनोजीत मिश्रा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

यह मामला सामने आने के बाद लोगों में भारी रोष है। इस साल की शुरुआत में आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद से शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिर से गंभीर बहस शुरू हो गई है। इसी बीच, टीएमसी के दो नेताओं सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा ने इस मामले पर बेहद आपत्तिजनक बयान दिए, जिन पर जमकर आलोचना हो रही है।

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुआ कहा था, “अगर कोई दोस्त अपने दोस्त के साथ बलात्कार करता है तो क्या किया जा सकता है? क्या अब स्कूलों में भी पुलिस तैनात होगी? यह छात्रों ने एक अन्य छात्रा के साथ किया। उसकी सुरक्षा कौन करेगा?”

इसके अलावा उन्होंने कहा, “यह सब अपराध और छेड़छाड़ कौन करता है? कुछ पुरुष करते हैं। तो महिलाओं को किसके खिलाफ लड़ना चाहिए? महिलाओं को इन विकृत पुरुषों के खिलाफ लड़ना चाहिए।” इन बातों को पीड़िता को दोष देने और अपराध को हल्का बताने की कोशिश के रूप में देखा गया है।

टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने भी चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि पीड़िता को कॉलेज नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “अगर वह लड़की वहाँ नहीं गई होती, तो ऐसा नहीं होता। अगर वह जाने से पहले किसी को सूचित करती या अपने साथ कुछ दोस्तों को ले जाती, तो ऐसा नहीं होता।” उन्होंने आगे कहा, “जिसने यह गंदा काम किया, उसने मौके का फायदा उठाया।”

इन दोनों नेताओं की बातों पर चारों तरफ से निंदा होने लगी, जिसके बाद पार्टी को सफाई देना पड़ी। टीएमसी ने स्पष्ट किया, “सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा द्वारा दक्षिण कलकत्ता लॉ कॉलेज में हुए जघन्य अपराध के बारे में जो टिप्पणियाँ की गईं, वे पूरी तरह से उनकी व्यक्तिगत राय हैं। पार्टी न केवल इन बयानों से खुद को अलग करती है, बल्कि इनकी कड़ी निंदा भी करती है। ये विचार किसी भी रूप में पार्टी के रुख को नहीं दर्शाते हैं।

बता दें कि इस मामले पर महुआ मोइत्रा ने भी पार्टी नेताओं के बयान का विरोध किया था और उन्हें घृणित करार दिया था। हालाँकि कल्याण बनर्जी ने उसपर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “महुआ हनीमून मनाकर वापस भारत आई और मुझसे झगड़ने लगी हैं! वह मुझ पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाती हैं, वह क्या हैं?” महुआ मोइत्रा पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “उन्होंने (महुआ) 40 साल की शादी तोड़कर 65 साल के आदमी (पिनाकी मिश्रा) से शादी कर ली है, क्या उसने महिला को चोट नहीं पहुँचाई?

महराज जी मेरी शादी नहीं हो रही… अनिरुद्धाचार्य को हिंदू श्रद्धालु ने बताई ‘पीड़ा’, Video देख शाहिदा से ‘खुशी’ बनी महिला ने पति संग मिल रची साजिश: शादी के बाद गहने-रुपए लूट कर दी हत्या

मध्य प्रदेश के जबलपुर के एक अतिथि शिक्षक की गोरखपुर बुला कर हत्या कर दी गई। हत्यारों ने उसे कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की वीडियो के माध्यम से उससे सम्पर्क किया था। मृतक 45 वर्ष का था और गोरखपुर शादी करने आया था। उसकी हत्या शाहिदा उर्फ़ ख़ुशी नाम की एक महिला और उसके पति ने की। अब दोनों पुलिस की गिरफ्त में हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक का नाम इंद्र कुमार तिवारी था। वह 3-10 मई, 2025 के बीच पॉपुलर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अनिरुद्धाचार्य का यह आयोजन जबलपुर के ही एक गाँव में हुआ था। यहाँ इंद्र कुमार तिवारी ने अनिरुद्धाचार्य से प्रश्न पूछे थे।

अनिरुद्धाचार्य से इंद्र कुमार तिवारी ने विवाह नहीं होने की बात कही थी। इंद्र कुमार तिवारी ने कहा था कि उनकी उम्र 45 वर्ष है और 18 बीघे जमीन के मालिक हैं लेकिन विवाह नहीं हो रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। यह अब भी यूट्यूब समेत कई जगह पड़ी हुई है।

इस वीडियो को देख कर कौशल और उसकी पत्नी शाहिदा उर्फ़ ख़ुशी ने इंद्र कुमार तिवारी को ठगने का प्लान बनाया। कौशल ने ख़ुशी का भाई बन कर इंद्र कुमार तिवारी से अपनी बहन का विवाह करवाने की बात इंद्र कुमार तिवारी से कही। इसके बाद ख़ुशी भी इंद्र तिवारी से बात करने लगी।

कौशल ने इंद्र तिवारी के गाँव पहुँच कर शादी की बात भी पक्की कर दी और साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि 5 जून को शादी गोरखपुर में होगी। इंद्र तिवारी ने इसके लिए गहने बनवाए और शादी करने अकेले गोरखपुर चले गए। यहाँ उनकी शादी भी ख़ुशी से करवा दी गई और इसकी तस्वीरें उनके गाँव पहुँच गईं।

ख़ुशी ने हालाँकि इसके बाद इंद्र तिवारी के साथ उनके मध्य प्रदेश में स्थित गाँव जाने से मना कर दिया। ख़ुशी और कौशल ने इसके बाद इंद्र तिवारी से अपना गाँव दिखाने की बात कही और हत्या कर दी। इंद्र तिवारी का शव दोनों ने मिलकर झाड़ियों में फेंक दिया।

इंद्र तिवारी के शव की सूचना एक राहगीर ने दी। उनके परिवार ने इसी बीच पुलिस से सम्पर्क किया। पुलिस ने जाँच की तो पता चला ख़ुशी और कौशल ने लाखों के गहने और पैसे इंद्र कुमार तिवारी से लूट लिए हैं और उनको मार कर फेंक दिया है। दोनों को अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि मामला ठगी और हत्या का है।

अब आगे जाँच की जा रही है।

कपड़े, ड्रिंक्स और अब जूट… भारत ने बांग्लादेश को दिया ₹1200 करोड़+ का झटका: आयात पर लगाया प्रतिबन्ध, आदेश में कहा- जमीन के रास्ते नहीं घुसने देंगे

तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता में आई मोहम्मद यूनुस के पेंच मोदी सरकार ने कसने चालू कर दिए हैं। भारत विरोधी रवैया अपनाने वाले बांग्लादेश को भारत ने आर्थिक फ्रंट पर एक और झटका दिया है। भारत ने बांग्लादेश से जूट के आयात पर पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इससे बांग्लादेश के निर्यात बड़े स्तर पर प्रभावित होने की आशंका है। भारत इससे पहले भी भी बांग्लादेश से आने वाले कई उत्पादों के आयात पर प्रतिबन्ध लगा चुका है।

क्या है फैसला?

विदेशी व्यापार महानिदेशक (DGFT) के 27 जून, 2025 के एक आदेश के अनुसार, बांग्लादेश से आने वाले जूट और कई तरह के यार्न के भारत में निर्यात पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि बांग्लादेश और भारत की सीमा पर कहीं से भी यह उत्पाद भारत में नहीं आने दिए जाएँगे।

बांग्लादेश इन उत्पादों को किसी दूसरे रास्ते से भी भारतीय बाजारों में नहीं उतार सकता है, यह भी इस आदेश में स्पष्ट कर दिया गया है। इसमें लिखा गया है कि बांग्लादेश के जूट और यार्न को भूटान और नेपाल के रास्ते भारत में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

भारत जूट बांग्लादेश प्रतिबन्ध
बांग्लादेश से जूट निर्यात को रोकने वाला आदेश

DGFT के आदेश हालाँकि यह छूट दी गई है कि बांग्लादेश मुंबई स्थित न्हावा शेवा बंदरगाह से यह उत्पाद भारत में भेज सके। इसके अलावा भारत ने यह छूट भी बांग्लादेश को दी है कि वह भारत के रास्ते अपने यह उत्पाद भूटान और नेपाल में भेज सके।

अगस्त, 2025 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास आई है। बांग्लादेश के लापरवाह क़दमों की वजह से भारत ने भी उनका जवाब देना चालू कर दिया है। भारत व्यापार के रास्ते बांग्लादेश के लिए अब बंद कर रहा है।

भारतीय जूट उद्योग हो रहा था प्रभावित

इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वर्ष 2023-24 में बांग्लादेश से 144 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1230 करोड़) का जूट आयात किया था। भारत ने इससे पहले यह आयात कम करने को कई बार प्रयास भी किए, पर बांग्लादेशी व्यापारियों की बेईमानी के चलते यह काम नहीं आया।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बांग्लादेश का जूट भारत में ना आने देने के पीछे और भी कई कारण हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया है कि बांग्लादेश जूट को भारत में डंप करने के लिए अपने यहाँ सब्सिडी देता है और भारत-बांग्लादेश के बीच मुक्त व्यापार समझौते का गलत लाभ उठाता है।

यह भी बताया गया है कि बांग्लादेश के व्यापारी कई कानूनी लूपहोल्स का फायदा उठाते हैं और भारतीय बाजार को प्रभावित करते हैं। इसके चलते भारत में जूट का बाजार और उसका उत्पादन प्रभावित होता है आया है। इसका सीधा असर भारत और विशेष कर पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के ग्रामीण इलाकों में पड़ा है, जहाँ जूट बड़ी आबादी की आय का स्रोत है।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि बांग्लादेश के भारत में अनियंत्रित तरीके से जूट भेजने के चलते यहाँ जूट मिल्स भी ढंग से नहीं चल पा रही हैं। जूट उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन ने वर्ष 2024 में इस मामले में केन्द्र सरकार से सहायता भी माँगी थी।

जूट मिल्स एसोसिएशन ने कहा था कि 2024 में जूट की बम्पर फसल के बावजूद बांग्लादेश से बड़ी मात्रा में जूट का आयात किया गया क्योंकि उसके दामों में अंतर था। जूट मिल्स एसोसिएशन ने कहा था कि भारतीय मिलें इसके चलते भुगतान नहीं कर पर रहीं हैं। अब इस फैसले से भारतीय उत्पादकों और मिलों को कुछ राहत मिलने की संभावना है।

पहले ही लग चुके कई प्रतिबन्ध

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब भारत ने बांग्लादेश पर व्यापारिक प्रतिबन्ध लगाए हों। बांग्लादेश ने इसकी शुरुआत की थी। बांग्लादेश ने अप्रैल, 2025 में भारत मछली, कपड़े समेत कई उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी थी। उसने अपने रास्ते का इस्तेमाल करने देने के लिए भी भारत से 1.8 टका प्रति टन का शुल्क लेना चालू कर दिया था।

बांग्लादेश ने यहाँ तक कि दूध के पाउडर तक के भारत से आयात पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में भारत ने मई, 2025 में बांग्लादेश से आने वाले रेडिमेड कपड़ों, प्रोसेस्ड फ़ूड और फ्रूट ड्रिंक्स आदि पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। भारत ने बांग्लादेश से आने वाले प्लास्टिक और लकड़ी के सामान पर भी कई तरह के प्रतिबन्ध लगाए थे।

भारत ने कहा था कि वह अब बांग्लादेश से आने वाले कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, बेक्ड सामान, स्नैक्स, चिप्स और कन्फेक्शनरी, कपास और कॉटन याम अपशिष्ट, प्लास्टिक और पीवीसी से तैयार सामान और लकड़ी के फर्नीचर के सामान को असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम और पश्चिम बंगाल में किसी भी जमीनी पोर्ट के माध्यम से घुसने नहीं देगा।

भारत द्वारा लगाए इन प्रतिबन्धों के चलते बांग्लादेश को वार्षिक तौर 770 मिलियन डॉलर (₹6500 करोड़+) का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था। यह बांग्लादेश के भारत को कुल निर्यातों का लगभग 42% बनता है। भारत व्यापार के मामले में बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा पार्टनर है।

मोहम्मद यूनुस की सरकार ने बनाया है द्वेष का माहौल

अगस्त, 2024 में शेख हसीना की सरकार को इस्लामी कट्टरपंथियों ने सत्ता से हटा दिया था। इसके कुछ दिनों बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के तौर पर देश का मुखिया बनाया गया था। मोहम्मद यूनुस की सरकार लगातार भारत विरोधी कदम उठा रही है।

उसने भारत की अपेक्षा पाकिस्तान से रिश्ते मजबूत किए और यहाँ तक कि पाकिस्तान के फौजी जनरलों को भी बुलाया। मोहम्मद यूनुस ने चीन में जाकर भी भारत के उत्तरपूर्वी हिस्से को लेकर एक विवादित बयान दिया था। इसके अलावा मोहम्मद यूनुस की सरकार आने के बाद बांग्लादेश में लगातार हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं।

बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की सरकार हिन्दुओं पर हमले रोकने के बजाय उन्हें मानने तक से इनकार करती आई है। इसके चलते भी दोनों देशों के रिश्तों में खटास है। हाल ही में बांग्लादेश में अवैध बता कर एक हिन्दू मंदिर को फौजी बुलाकर गिरा दिया गया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी कड़ी आलोचना की थी।

बांग्लादेश भारत ने शेख हसीना को शरण दिए जाने को लेकर भी प्रलाप करता आया है। हालाँकि, भारत ने अब तक बांग्लादेश के क़दमों पर नरमी ही बरती है।

बांग्लादेश में चाकू की नोक पर BNP नेता फजोर अली ने किया हिंदू महिला का रेप, नंगा कर वीडियो बनाई: हाथ जोड़ती दिखी पीड़िता, पुलिस ने रमजान समेत 5 को पकड़ा

बांग्लादेश में हिंदू महिला से रेप का मामला प्रकाश में आया है। बलात्कारी कोई और नहीं बल्कि बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी का नेता फजोर अली है। उसने अपनी साथियों संग मिलकर महिला का चाकू की नोंक पर रेप किया और इसका वीडियो भी बनाई। अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर जगह-जगह वायरल है। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता 21 साल की है और उसके दो बच्चे भी हैं। पीड़िता का पति दुबई में नौकरी करता और वहीं रहता है। वह 15 दिन पहले ही मुरादनगर अपने पिता के घर रहने आई थी। तब से ही 38 वर्षीय फजोर अली उसके पीछे पढ़ा था।

गुरुवार (26 जून 2025) रात को पीड़िता घर में अकेली थी। इसका फायदा उठाते हुए रात 10 बजे फजोर अली घर ने घर का दरवाजा खटखटाया। पीड़िता ने दरवाजा खोलने से इनकार किया तो जबरदस्ती भीतर घुसा। यहाँ बंदूक की नोंक से डराकर महिला से रेप किया। उसके साथियों ने रेप का वीडियो भी बनाया। पीड़िता मदद की गुहार लगाते हुए चिल्लाई। आवाज सुनकर पड़ोसी आए और फजोर अली को जमकर पीटा।

इसके बावजूद फजोर अली बचकर निकल गया। इसके बाद पीड़िता को कुमिल्ला मेडकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ रेप की पुष्टि हुई। अगले दिन शुक्रवार (27 जून 2025) को पीड़िता ने मुरादगनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस रेप की घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

बीएनपी नेता फजोर अली समेत 5 गिरफ्तार

पीड़िता की शिकायत पर मुरादगनर पुलिस ने महिला एवं बाल उत्पीड़न निवारण अधिनियम, 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके आधार पर पुलिस ने घटना का वीडियो वायरल करने वाले 4 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं, मुख्य आरोपित फजोर अली को भी पकड़ लिया गया है।

कुमिल्ला एसपी नाजिर अहमद खान ने बताया कि रविवार (29 जून 2025) सुबह 5 बजे ढाका के सईदाबाद क्षेत्र से फजोर को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 4 आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है।

इनकी पहचान अनिक, सुमन, रमजान और बाबू के रूप में हुई है। सभी आरोपित एक ही गाँव के रहने वाले हैं। वहीं, मुख्य आरोपित फजोर अली बीएनपी का लोकल नेता है और मुरादगनर के बहेचर (पुरबो पारा) गाँव का रहने वाला है।

चर्च में समर कैंप के नाम पर हुआ बच्चों का ब्रेनवॉश, मिला यीशु मसीह वाला ज्ञान: अंबाला में बजरंग दल ने पुलिस को दी शिकायत, पादरी बोला- हम तो ये हर साल करते हैं

हरियाणा के अंबाला छावनी के हिम्मतपुरा की एक चर्च में बच्चों का धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है। बजरंग दल का आरोप है कि यहाँ समर कैंप के नाम पर बच्चों का धर्म परिवर्तन कराया जाता था।  

अंबाला छावनी वार्ड 7 के हिम्मतपुरा स्थित एक चर्च में बजरंग दल ने शनिवार (28 जून 2025) को जमकर हंगामा किया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि चर्च में समर कैंप का आयोजन किया गया है, लेकिन यहाँ बच्चों को गलत शिक्षा दी जाती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि चर्च में समर कैंप की गतिविधियों के नाम पर बच्चों को क्रिश्चियन बनाने के लिए उन्हें इससे जुड़ी बातें बताकर लुभाने की कोशिश की जाती है। मौके पर पहुँची पुलिस ने चर्च में आए बच्चों से बात कि तो उन्होंने कहा कि वे समर कैंप के लिए आए थे, लेकिन उन्हें यहाँ यीशु मसीह के बारे में जानकारियाँ दी जाती थी।

वहीं चर्च के पास्टर ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए बजरंग दल पर ही निराधार हंगामे का इल्जाम लगा दिया। पास्टर ने कहा, “हम हर साल समर कैंप जैसी गतिविधियाँ कराते हैं। उनका कहना है कि बजरंग दल ने जबरदस्ती चर्च में घुसकर हंगामा शुरू कर दिया, जबकि धर्म परिवर्तन की बात सच नही है।”

बजरंग दल के जिला प्रधान देवी लाल का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि चर्च में बच्चों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। इसे रोकने के लिए जब वे चर्च में पहुँचे तो दूसरे पक्ष ने बात को नकारने की कोशिश की और बहस करने लगे।

पुलिस करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों को शांत कराने में लगी रही। चर्च में ही नही दोनों पक्षों के बीच पड़ाव थाने में भी जमकर बहस हुई। मामले में पड़ाव थाना प्रभारी धर्मवीर का कहना है कि उन्हें चर्च में बच्चों का धर्मामतरण कराने की सूचना मिली थी। दोनों पक्ष की शिकायत के आधार पर जाँच की जा रही है।

बालों का गुच्छा, हॉकी स्टिक और लिक्विड… कोलकाता गैंगरेप मामले में पुलिस ने क्राइम सीन रीक्रिएट करवाया, 7 घंटों का CCTV खंगालकर जुटाए सबूत: मेडिकल रिपोर्ट में आई नोंचने, खरोंचने और काटने की बात

कोलकाता के लॉ कॉलेज में 24 साल की छात्रा से गैंगरेप मामले में सामने आई मेडिकल रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। रिपोर्ट में पीड़िता के साथ हुए बलात्कार के सबूत मिले हैं और ये भी पता चला है कि उसके साथ कितनी दरिंदगी की गई। पुलिस ने पीड़िता के बयान और रिपोर्ट आने के बाद अब सीन रीक्रिएट कराया है। साथ ही घटनास्थल से बालों के गुच्छों से लेकर लिक्विड की बोतल तक बरामद की है।

मेडिकल रिपोर्ट में क्या

दरअसल, शुक्रवार (27 जून 2025) को पीड़िता की मेडिकल जाँच कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेड एंड हॉस्पिटल (CNMC) में कराई गई थी। मेडिकल रिपोर्ट से ही गैंगरेप की पुष्टि हुई है। पीड़िता के साथ जबरन रेप किया गया। इससे शरीर पर काटने और नाखून से खरोंचने के निशान मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की गर्दन पर खरोंच के निशान हैं। वहीं सीने और जांघों के भीतरी हिस्सों में चोटें मिली हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पीड़िता की ब्लड प्रेशर रीडिंग 120/82 और पल्स रेट 72 थी। प्रेग्नेंट रिपोर्ट नैगेटिव सामने आई है। वहीं, एलएमपी (अंतिम मासिक धर्म) 18 जून 2025 को दर्ज किया गया है। साथ ही फोरेंसिक टीम ने तीन स्वाब नमूने लिए है, जिनसे डीएनए और बाकी जैविक साक्ष्य जुटाए जाएँगे।

क्राइम सीन रीक्रिएट किया

गैंगरेप की शिकायत पर पुलिस ने लॉ कॉलेज में क्राइम सीन रीक्रिएट किया। साउथ सबअर्बन डिवीजन की डीसी बिदिशा कलिता ने बताया कि वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। इसीलिए करीब 7 घंटे की सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया है। यह फुटेज दोपहर 3.30 जे से रात 10.50 बजे तक का है।

पुलिस ने घटनास्थल यानी स्टूडेंट यूनियन रूम को ठीक तरह से खँगाला। इसके अलावा वॉशरूम और गार्डरूम की भी तलाशी ली गई। पुलिस ने इन तीनों जगह से वारदात से संबंधित अहम सुराग जुटाए हैं। इनमें बालों के गुच्छे, हॉकी स्टिक और कुछ लिक्विड से भरी बोतलें शामिल हैं।

पीड़िता का बयान दर्ज

पुलिस ने पीड़िता का बयान भी दर्ज कर लिया है। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि 25 जून 2025 की शाम 7.30 बजे से रात 10.50 बजे तक उसके साथ रेप किया गया। इसके साथ बेरहमी से भी पीटा। पीड़िता के अनुसार, घटना के वक्त वह ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही थी। पीड़िता ने आरोपितों से अस्पताल ले जाने की भी भीख माँगी, लेकिन हैवानों ने उसकी एक न सुनी।

पीड़िता ने बताया कि मुख्य आरोपित मनोजीत ने उसे शादी करने के लिए प्रपोज किया। लेकिन पीड़िता ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जिसके चलते पीड़िता से गैंगरेप किया गया। आरोपितों ने गैंगरेप का वीडियो भी बनाया। धमकी दी कि अगर किसी से कुछ भी कहा तो वीडियो वायरल कर देंगे।

क्या है मामला ?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 25 जून 2025 को लॉ कॉलेज में गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया। यहाँ कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर के एक रूप में 24 वर्षीय छात्रा को बुलाया। वहाँ तीन लोग पहले से मौजूद थे, जिन्होंने छात्रा को बंधक बना लिया। इसके बाद तीन घंटे तक छात्रा का बलात्कार किया।

मामले में मुख्य आरोपित तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) छात्र नेता और कॉलेज का पूर्व छात्र मनोजीत मिश्रा है। इसके अलावा कॉलेज की ही छात्र प्रोमित मुखर्जी और जैद अहमद का भी नाम सामने आया है। पुलिस ने मामले की जाँच के बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, लॉ कॉलेज के गार्ड पिनाकी बनर्जी को भी अरेस्ट किया गया है। गार्ड पर वारदात के दौरान बाहर खड़े रहकर पहरेदारी करने का आरोप है।

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ISS पर मौजूद IAF के ग्रुप कैप्टन शुधांशु शुक्ला से पीएम मोदी ने की बात, कहा – यह गगनयान की सफलता का पहला अध्याय: जानें – ध्यान से लेकर ग्रैविटी तक पर पूछे सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station) पर मौजूद भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की है। शुभांशु पहले भारतीय हैं, जो इस मिशन के पायलट बनकर अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुँचे हैं।

इस बातचीत में पीएम मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से उन्हें बधाई दी और कहा, “आप मातृभूमि से सबसे दूर हैं, लेकिन भारतीय दिलों के सबसे करीब हैं। आपके नाम में शुभ है और आपकी यात्रा नए युग का शुभारंभ (auspicious beginning) है।” शुभांशु ने जवाब में कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व ने उनके सपनों को सच करने का मौका दिया। उन्होंने देशवासियों के प्यार और आशीर्वाद का शुक्रिया अदा किया।

अंतरिक्ष से दिखा भव्य भारत का नजारा

शुभांशु ने बताया कि जब वे पहली बार अंतरिक्ष में पहुँचे और पृथ्वी को देखा, तो वह नजारा बेहद भव्य (Magnificent) था। उन्होंने कहा, “पृथ्वी पूरी तरह एक दिखती है, कोई बॉर्डर या सीमा रेखा नहीं दिखती।” खास तौर पर भारत को अंतरिक्ष से देखने का अनुभव उनके लिए भावुक करने वाला था। उन्होंने कहा, “हम नक्शे में भारत को जितना बड़ा देखते हैं, असल में वह उससे कहीं ज्यादा विशाल और गौरवशाली (Glorious) लगता है।”

शुभांशु ने यह भी बताया कि अंतरिक्ष से देखने पर यह अहसास होता है कि कोई देश, राज्य या सीमा नहीं है, सिर्फ मानवता (Humanity) है और पृथ्वी हमारा एकमात्र घर है।

जीरो ग्रैविटी के अनुभव पर कही ये बात

पीएम मोदी ने शुभांशु से पूछा कि जीरो ग्रैविटी (Zero Gravity) में जीवन कैसा है और वे वहाँ कैसे ढल रहे हैं। शुभांशु ने हँसते हुए बताया कि अंतरिक्ष में सब कुछ अलग है।

उन्होंने कहा, “पिछले एक साल की ट्रेनिंग में मुझे सारे सिस्टम्स (Systems) और प्रक्रियाओं (processes) की जानकारी थी, लेकिन यहाँ आकर सब बदल गया। हमारे शरीर को ग्रैविटी की आदत होती है, लेकिन यहाँ माइक्रो ग्रैविटी (microgravity) में छोटी-छोटी चीजें भी मुश्किल हो जाती हैं। मैं अभी बात करते वक्त अपने पैर बाँध रखा हूँ, वरना ऊपर उड़ जाऊँगा। माइक छोड़ दूँ तो वो तैरने लगेगा।” उन्होंने बताया कि पानी पीना, चलना और सोना भी चुनौतीपूर्ण है।

पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में हलवा के बारे में भी पूछा

पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि शुभांशु जो गाजर का हलवा लेकर गए थे, उसे अपने साथियों को खिलाया या नहीं। शुभांशु ने जवाब दिया, “मैं गाजर का हलवा, मूँग दाल का हलवा और आमरस लेकर आया था। मेरे साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने इसका स्वाद लिया और सबको बहुत पसंद आया। कुछ साथियों ने कहा कि वे भारत आएँगे तो फिर से इसका स्वाद लेंगे।”

उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात थी कि भारत की समृद्ध खानपान परंपरा (Culinary Heritage) को दुनिया के सामने पेश कर सके।

पीएम मोदी ने ध्यान के बारे में भी पूछा सवाल

पीएम मोदी ने पूछा कि क्या अंतरिक्ष में माइंडफुलनेस (Mindfulness) और ध्यान (Meditation) का कोई लाभ मिलता है। शुभांशु ने कहा, “यहाँ सब कुछ उल्टा-पुल्टा है। माइंडफुलनेस बहुत मदद करती है। लॉन्च के दौरान या तनावपूर्ण (Stressful) परिस्थितियों में दिमाग को शांत रखने से बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विज्ञान (Science) और आध्यात्मिकता (Spirituality) दोनों में है। शुक्ला ने कहा, “यह मिशन भारत की प्रगति की पहली सीढ़ी है। हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

पीएम मोदी ने शुभांशु को दिया होमवर्क

पीएम मोदी ने शुभांशु को गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission), भारतीय स्पेस स्टेशन, और चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री की लैंडिंग जैसे भविष्य के मिशनों के लिए होमवर्क दिया। उन्होंने कहा, “आपके अनुभव इन मिशनों के लिए बहुत कीमती होंगे।” शुभांशु ने जवाब दिया, “मैं हर अनुभव को स्पंज (Sponge) की तरह सोख रहा हूँ। ये अनुभव गगनयान और अन्य मिशनों के लिए बहुत काम आएंगे। मेरे साथी भी पूछते हैं कि वे कब गगनयान पर जा सकते हैं। मुझे यकीन है कि ये सपना जल्द पूरा होगा।”

युवाओं के लिए खास संदेश

शुभांशु ने देश के युवाओं को संदेश दिया, “सपने बड़े देखो और कभी हार मत मानो। सफलता का कोई एक रास्ता नहीं होता, लेकिन मेहनत और लगन से आप जरूर कामयाब होंगे। स्काई इज नेवर द लिमिट (Sky is never the limit)।” उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर तिरंगा लगाया, जो उनके लिए गर्व का पल था। “यह देखकर गर्व होता है कि भारत आज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुँच चुका है।”

गगनयान मिशन के लिए पहला स्टेप

पीएम मोदी ने कहा कि शुभांशु की यह यात्रा गगनयान मिशन की सफलता का पहला अध्याय है। पीएम मोदी ने कहा, “यह यात्रा सिर्फ अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत की यात्रा को गति देगी। भारत अब सिर्फ उड़ान नहीं भरेगा, बल्कि भविष्य में नई उड़ानों के लिए मंच तैयार करेगा।” उन्होंने शुभांशु और उनके साथियों को मिशन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं और कहा, “हम सबको आपकी वापसी का इंतजार है। माँ भारती का सम्मान बढ़ाते रहिए।”

बातचीत के अंत में शुभांशु ने कहा, “यह मेरे लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा देश का सामूहिक गौरव है।” उन्होंने अंतरिक्ष से तिरंगे को दिखाते हुए कहा, “यह तिरंगा मैंने कल ही यहाँ लगाया। यह मुझे बहुत भावुक करता है।” अंत में उन्होंने जोर से कहा, “भारत माता की जय!” इस पल ने पूरे देश को गर्व और खुशी से भर दिया।

राजदीप सरदेसाई ने रथ यात्रा पर फैलाया TMC का प्रोपेगेंडा तो इंडियन एक्सप्रेस निकला एक कदम आगे: ममता सरकार के बनाए मंदिर को बता दिया पुरी जगन्नाथ धाम के बराबर

खुद को ‘पत्रकार’ कहलाना पसंद करने वाले ‘प्रोपेगेंडा बाज’ राजदीप सरदेसाई ने ममता बनर्जी की चरणवंदना की सभी हदें पार कर दी हैं। इसी कड़ी में राजदीप सरदेसाई ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। दरअसल, इस बार उन्होंने ओडिशा के पुरी में बने 900 साल पुराने जगन्नाथ धाम की तुलना पश्चिम बंगाल के दीघा में ममता बनर्जी सरकार द्वारा बनाए गए नए जगन्नाथ मंदिर से कर दी है।

मौजूदा समय में पुरी जगन्नाथ की रथ यात्रा चल रही है। इस पवित्र मौके को भी उन्होंने ममता सरकार के लिए प्रोपेगेंडा फैलाने में इस्तेमाल किया। ऐसे में शुक्रवार (27 जून 2025) को राजदीप ने ट्वीट किया, “जगन्नाथ यात्रा के अब दो ठिकाने हैं: एक असली पुरी में, दूसरा नया दीघा में।”

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ये ट्वीट एक सोची-समझी चाल का हिस्सा लगता है, जिसमें पुरी के ऐतिहासिक जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। बता दें, दीघा का मंदिर अभी दो महीने पहले ही (30 अप्रैल 2025) को खुला है।

माना जा रहा है कि यह ममता बनर्जी की सरकार की एक रणनीति है, जो हिंदू भावनाओं को भुनाकर आगामी विधानसभा चुनावों में लाभ लेना चाहती है। टीएमसी सरकार द्वारा बनाए गए दीघा मंदिर को पुरी के पौराणिक मंदिर के समकक्ष दिखाने की यह कोशिश न केवल धार्मिक परंपराओं का अपमान है, बल्कि जनता की आस्था से भी सीधा खिलवाड़ है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक संस्थानों तक विरोध हो रहा है।

कौन हैं राजदीप सरदेसाई?

राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष पहले पत्रकार थीं और अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में राजदीप का ये ट्वीट TMC के लिए प्रचार करने की कोशिश माना जा रहा है। रथ यात्रा जैसे पवित्र मौके पर उन्होंने ऐसा दिखाने की कोशिश की जैसे ममता सरकार ने दीघा में भगवान जगन्नाथ के लिए कोई नया और खास ठिकाना बना दिया हो।

दरअसल, यह टीएमसी सरकार की चुनाव से पहले हिंदू वोटरों को लुभाने की कोशिश मानी जा रही है। सालों तक मुस्लिम तुष्टिकरण और ‘बाहरी बनाम बंगाली’ जैसे नैरेटिव पर चलने वाली पार्टी को अब समझ आ गया है कि सिर्फ इन्हीं बातों से चुनाव नहीं जीता जा सकता।

इसलिए अब पार्टी दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर जैसे धार्मिक प्रयासों को दिखाकर हिंदुओं को अपनी तरफ करने की कोशिश कर रही है। राजदीप सरदेसाई के इस पोस्ट इसी एजेंडा को बढ़ावा देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस ने भी फैलाया ऐसा ही झूठ

नेशनल अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस‘ ने भी शनिवार (28 मार्च 2025) को एक लेख छापा, जिसमें पुरी के जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। लेख का शीर्षक था, “दीघा में नए जगन्नाथ मंदिर के उभरने के बीच ओडिशा ने पुरी में रथ यात्रा के लिए पूरी ताकत झोंक दी।” इस लेख में ऐसा दिखाया गया जैसे दोनों मंदिरों के बीच कोई तुलना हो सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस की समाचार रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

पुरी जगन्नाथ धाम और दीघा के मंदिर की कोई तुलना नहीं

बता दें कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर और पश्चिम बंगाल के दीघा में बने नए जगन्नाथ मंदिर दोनों की आपस में न तो कोई तुलना हैं और न ही इनमें कोई प्रतिस्पर्धा है। पुरी का मंदिर 12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव ने बनवाया था।

यह 900 साल पुराना है और हिंदू आस्था परंपरा और कलिंग शैली की वास्तुकला का केंद्र माना जाता है। इसका संचालन गजपति महाराजा की अध्यक्षता में एक समिति करती है। वहीं दीघा का मंदिर हाल ही में करीब दो महीने पहले खुला है और इसे पश्चिम बंगाल सरकार ने बनवाया है।

यह पुरी मंदिर की एक प्रतिकृति (रेप्लिका) मात्र भर है। इस मंदिर के उद्घाटन के समय ये विवादों में भी घिर गया था, खासकर ‘हलाल प्रसाद‘ और मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को लेकर। ममता सरकार अब इस नए मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम‘ कहकर राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है, जिससे लोगों को यह भ्रम हो कि यह पुरी के प्राचीन मंदिर जितना ही महत्वपूर्ण है। इससे यह भी आरोप लग रहा है कि सरकार जानबूझकर असली जगन्नाथ धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

TMC का दोहरा चरित्र हो चुका है बेनकाब

ममता सरकार ने जहाँ दीघा में नया मंदिर बनाकर हिंदुओं को लुभाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के मुस्लिम-बहुल मालदा जिले में 629 साल पुरानी ‘रथ मेला‘ पर रोक लगा दी। ये दिखाता है कि TMC की हिंदू-समर्थक छवि सिर्फ दिखावा है।

पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने साफ कहा है कि दीघा का मंदिर ‘भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्ति से कोई लेना-देना नहीं रखता।’ फिर भी राजदीप सरदेसाई और इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया हाउस दीघा के मंदिर को पुरी के जगन्नाथ धाम के बराबर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह से लोगों में गलतफहमी और नाराजगी दोनों ही बढ़ती जा रही है।

ममता सरकार कर रही हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़

ममता बनर्जी की TMC सरकार ने दीघा में मंदिर बनाकर और उसे ‘जगन्नाथ धाम’ कहकर हिंदू धर्म की परंपराओं और शास्त्रों का अपमान किया है। राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबार इस प्रचार में शामिल होकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। पुरी का जगन्नाथ धाम 900 साल की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जबकि दीघा का मंदिर सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए बनाया गया नया मंदिर है, जो दिखने में जगन्नाथ धाम की तरह हो सकता है। ऐसे में इस तरह का प्रचार न सिर्फ गलत है, बल्कि हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है।

न अस्थियाँ बहाईं, न पाँव में पहनी चप्पल: 3 साल से इंतजार कर रहा कन्हैया लाल का बेटा, अब तक नहीं मिला न्याय

उदयपुर में 25 जून 2025 को हुए चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड को तीन साल बीतने वाले हैं। लेकिन अब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिल सका है। 28 जून 2022 को हुए इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। कन्हैयालाल तेली पेशे से दर्जी थे। उनकी दुकान पर दिनदहाड़े गला रेतकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया था।

कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश तेली पिता के निधन के तीन साल बाद आज भी न्याय और इंसाफ की उम्मीद लिए बैठे हुए हैं। पिता की हत्या के बाद यश ने तीन प्रण लिये थे। इसी प्रण के तहत उन्होंने अब तक न पिता की अस्थियों का विसर्जन किया है। न ही अपने बाल कटवाए हैं और न ही पैरों में चप्पल पहनी है।

बीते तीन साल से यश बिना जूते-चप्पल के नंगे पैर रहते हैं। यश का कहना है कि जब तक पिता के हत्यारों को फाँसी की सजा नहीं मिल जाती। वह अपना कोई भी प्रण नही तोड़ेंगे।

क्या था मामला?

28 जून 2022 को उदयपुर के हथीपोल क्षेत्र में कन्हैयालाल की सिलाई की दुकान पर आरोपित मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ग्राहक बनकर आए थे। कन्हैयालाल जब उनकी नाप ले रहे थे उसी समय दोनों ने उन पर पर धारदार हथियार से हमला किया और उनकी हत्या कर दी।

इतना ही नहीं, इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया। वायरल वीडियो में दोनों आरोपितों ने हत्या करने की बात भी स्वीकार की थी। हत्या करने के पीछे दोनों ने कन्हैयालाल द्वारा इस्लाम का अपमान करने का हवाला दिया था।

दरअसल कन्हैयालाल ने पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर विवादित बयान का समर्थन करने वाली पोस्ट शेयर की थी। दोनों ने इसे ही हत्या का कारण बताया। मनबढ़ हत्यारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धमकी दी थी। इस घटना के बाद उदयपुर में इंटरनेट सेवा सस्पेंड कर कर्फ्यू लगा दिया गया था।

मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? बेटे यश ने नेताओं पर लगाया झूठे वादे करने का आरोप

घटना के बाद राजस्थान पुलिस ने रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद को राजसमंद जिले से गिरफ्तार कर लिया था। बाद में 29 जून 2022 को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मामले की जाँच शुरू की।

NIA ने इसे आतंकी घटना करार देते हुए गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया। और मुख्य आरोपितों सहित कुल 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया। इन आरोपितों में मोहम्मद जावेद, फरहाद मोहम्मद, मोहसिन,आसिफ, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली और मुस्लिम मोहम्मद शामिल रहे। वहीं दो अन्य आरोपितों में पाकिस्तान के कराची के रहने वाले सलमान और अबू इब्राहिम आज भी फरार हैं।

गिरफ्तार हुए 9 आरोपितों में से दो आरोपितों को NIA की विशेष अदालत ने जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपित फरहाद मोहम्मद उर्फ बबला को जमानत इसलिए दी गई, क्योंकि उस पर केवल आर्म्स एक्ट के तहत मामला था और कोई हथियार बरामद नहीं हुआ था। वहीं, 5 सितंबर 2024 को राजस्थान हाईकोर्ट ने मोहम्मद जावेद को जमानत दी, क्योंकि NIA उसकी लोकेशन या उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी।

कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश का कहना है कि अभी तक इस मामले को फास्ट ट्रैक में नहीं लिया गया है। 6 महीने से कोई पेशी भी नहीं हुई है। उनका कहना है कि घटना के बाद राजनेताओं ने बड़े-बड़े वादे किए थे और आरोपितों को फाँसी की सजा दिलाने का भरोसा दिया था। लेकिन आज भी आरोपितों को सजा नहीं मिल पाई है और वे न्याय के इंतजार में बैठे हुए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में जिस अधिकारी ने संभाला ‘जासूसी का मोर्चा’, मोदी सरकार ने उसे सौंपी खुफिया एजेंसी की कमान: जानें – R&AW के नए चीफ IPS पराग जैन के बारे में सबकुछ

भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) को 1 जुलाई 2025 से एक नया ‘सुपर जासूस’ मिलने जा रहा है। मोदी सरकार ने शनिवार (28 जून 2025) को पंजाब कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पराग जैन को RAW का नया प्रमुख नियुक्त किया। वे मौजूदा प्रमुख रवि सिन्हा की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है।

पराग जैन का नाम खुफिया हलकों में ‘सुपर जासूस’ के तौर पर गूँजता है। चाहे वह ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करना हो, जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क बनाना हो या फिर कनाडा और श्रीलंका में भारत-विरोधी साजिशों को नाकाम करना हो। आईपीएस पराग जैन ने हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। वो हमेशा पर्दे के पीछे रहकर भारत की सुरक्षा की ढाल बने रहे हैं। इस लेख में आगे हम R&AW की जगह RAW लिख रहे हैं।

आज जब भारत को पाकिस्तान, चीन, खालिस्तानी नेटवर्क और साइबर हमलों जैसे कई बाहरी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। तब पराग जैन की नियुक्ति एक मजबूत संदेश देती है – भारत अब अपनी खुफिया रणनीति को और सशक्त करने जा रहा है।

पराग जैन – ग्राउंड इंटेलीजेंस में महारत रखने वाला सुपर जासूस

पराग जैन कोई साधारण पुलिस अधिकारी नहीं हैं। 1989 बैच के पंजाब कैडर के इस आईपीएस अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत तब की, जब पंजाब आतंकवाद (Terrorism) के आग में जल रहा था। भटिंडा, मानसा और होशियारपुर जैसे संवेदनशील जिलों में उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा संभाला। उस दौर में जैन ने जमीनी स्तर पर खतरनाक ऑपरेशनों को अंजाम दिया। बाद में वे चंडीगढ़ के एसएसपी और लुधियाना के डीआईजी बने, जहाँ उन्होंने आतंकवाद-विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई।

लेकिन पराग जैन की असली ताकत तब सामने आई, जब वे RAW से जुड़े। वर्तमान में वे RAW के विशेष निदेशक हैं और एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) का नेतृत्व कर रहे हैं। ARC वो इकाई है, जो हवाई निगरानी और तकनीकी खुफिया जानकारी (TECHINT) जुटाने में माहिर है। जैन ने इसे और मजबूत किया। उनकी खासियत है कि वे इंसानों से मिली खुफिया जानकारी (HUMINT) और तकनीकी जानकारी को मिलाकर ऐसी रणनीति बनाते हैं, जो दुश्मनों के लिए पहेली बन जाती है।

उनका करियर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। कनाडा और श्रीलंका में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने खालिस्तानी नेटवर्क और भारत-विरोधी साजिशों पर गहरी नजर रखी। 1 जनवरी 2021 को उन्हें पंजाब में पुलिस महानिदेशक (DGP) का प्रमोशन मिला, लेकिन तब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे, इसलिए सिर्फ नाममात्र का लाभ मिला। फिर भी उन्हें केंद्रीय DGP के समकक्ष पद पर रखा गया, जो उनकी साख को दर्शाता है।

जैन चुपचाप काम करते हैं, लेकिन उनके काम का असर इतना बड़ा होता है कि दुश्मन के होश उड़ जाते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में RAW का मास्टरस्ट्रोक

पराग जैन का नाम हाल के समय में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। ये ऑपरेशन भारत की खुफिया और सैन्य ताकत का एक शानदार नमूना है। इस ऑपरेशन में जैन की अगुआई में RAW और ARC ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों की सटीक जानकारी जुटाई, जिसके आधार पर मिसाइल हमले किए गए।

बाहर से देखने में ये हमले कुछ मिनटों की कार्रवाई लगते हैं, लेकिन इसके पीछे सालों की मेहनत थी। जैन और उनकी टीम ने जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क (Spy Network) बनाया, लोगों से सूचनाएँ जुटाईं, सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य तकनीकों से जानकारी को सत्यापित (Verify) किया। ये काम इतना आसान नहीं था। पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए साहस, रणनीति और धैर्य चाहिए। जैन ने अपने अनुभव और तकनीकी दक्षता के दम पर इसे मुमकिन बनाया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के साथ-साथ ये संदेश भी दिया कि भारत अपनी सीमाओं से बाहर भी दुश्मनों को जवाब दे सकता है। ये ऑपरेशन भारत की रणनीतिक ताकत का प्रतीक बन गया, और इसके पीछे पराग जैन जैसे सिपाही थे, जो पर्दे के पीछे काम करते हैं।

भारत-पाक तनाव में RAW की भूमिका अहम

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा से एक गंभीर मुद्दा रहा है। हाल के वर्षों में ये तनाव और बढ़ा है, खासकर जब से भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित (Suspend) किया है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा मिला है और उनके भारत-विरोधी बयान इस तनाव को और भड़का रहे हैं। उन्होंने कश्मीर को ‘पाकिस्तान की गले की नस’ कहा और आतंकवाद को फिर से प्राथमिकता दी। ऐसे में RAW की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

जैन का जम्मू-कश्मीर में गहरा अनुभव और पाकिस्तान से जुड़े मामलों की उनकी समझ उन्हें इस चुनौती से निपटने के लिए सबसे मुफीद बनाती है। अनुच्छेद 370 (Article 370) के निरस्तीकरण और बालाकोट एयर स्ट्राइक (Balakot Airstrike) जैसे मौकों पर उन्होंने जमीनी खुफिया जानकारी जुटाने में अहम भूमिका निभाई। पाकिस्तान में खुफिया नेटवर्क बनाना आसान नहीं है, क्योंकि वहाँ की खुफिया एजेंसी ISI हर कदम पर नजर रखती है। फिर भी जैन ने अपने नेटवर्क और रणनीति से कई बार पाकिस्तान को चौंका दिया है।

विदेशों में RAW के ऑपरेशन्स बेहद जटिलता और चुनौतीपूर्ण

RAW का काम भारत की सीमाओं के बाहर खुफिया जानकारी जुटाना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन विदेशों में ऑपरेशन्स चलाना बच्चों का खेल नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती है गुप्त रूप से काम करना। अगर किसी एजेंट की पहचान उजागर (Expose) हो जाए, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसके अलावा, दुश्मन देशों में तकनीकी निगरानी (Surveillance), साइबर हमले (Cyber attacks) और ड्रोन जैसे खतरे बढ़ गए हैं।

पाकिस्तान और चीन जैसे देशों में खुफिया नेटवर्क बनाना बेहद जटिल है। वहाँ की सरकारें और उनकी खुफिया एजेंसियाँ भारत के हर कदम पर नजर रखती हैं। फिर भी जैन ने कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क पर नजर रखकर और श्रीलंका में भारत के हितों को बढ़ावा देकर दिखाया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी माहिर हैं। कनाडा में उन्होंने खालिस्तानी नेटवर्क की साजिशों को समय रहते उजागर किया और दिल्ली को चेतावनी दी कि ये नेटवर्क बड़ा खतरा बन सकता है। श्रीलंका में उन्होंने तमिल संगठनों और चीन की बढ़ती मौजूदगी पर नजर रखी।

लेकिन अब चुनौतियाँ और बड़ी हैं। हाल के वर्षों में RAW को कुछ नाकामियों का सामना करना पड़ा। मालदीव और बांग्लादेश में संकटों को समय रहते नहीं भाँप पाने की आलोचना हुई। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को रोकने में RAW नाकाम रहा, जिससे सवाल उठे। जैन को अब जमीनी और तकनीकी खुफिया जानकारी को और मजबूत करना होगा। साइबर खुफिया (Cyber Intelligence), ड्रोन हमले और सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) जैसे नए खतरे उनकी सबसे बड़ी चुनौती होंगे।

भारत सरकार को RAW पर इतना भरोसा क्यों?

RAW भारत की बाहरी सुरक्षा की रीढ़ है। सरकार को इस एजेंसी पर भरोसा इसलिए है, क्योंकि ये बार-बार अपनी काबिलियत साबित कर चुकी है। चाहे वह बालाकोट एयर स्ट्राइक हो, ऑपरेशन सिंदूर हो या फिर अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिरता बनाए रखना – RAW ने हमेशा सटीक और समय पर जानकारी दी। इस एजेंसी की खासियत है कि ये गुप्त रूप से काम करती है और इसके ऑपरेशन्स की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुँचती।

RAW के पास अनुभवी अधिकारी, आधुनिक तकनीक और वैश्विक नेटवर्क हैं। ये न केवल दुश्मन देशों पर नजर रखती है, बल्कि दोस्त देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnerships) भी बनाए रखती है। पराग जैन जैसे अनुभवी नेतृत्व के साथ सरकार को उम्मीद है कि RAW और प्रभावी होगी।

पराग जैन का कार्यकाल और उनसे उम्मीदें

पराग जैन 1 जुलाई 2025 से दो साल के लिए RAW प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे, यानी उनका कार्यकाल जून 2027 तक रहेगा। इस दौरान उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी भारत की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करना। पाकिस्तान और चीन के अलावा, खालिस्तानी गतिविधियां, साइबर हमले और दक्षिण एशियाई देशों में अस्थिरता (Instability) जैसे मुद्दों पर उनकी नजर रहेगी

जैन से उम्मीद है कि वे RAW को और आधुनिक बनाएँगे। ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और साइबर खुफिया जानकारी जैसे क्षेत्रों में RAW को और भी मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही जमीनी नेटवर्क को और गहरा करना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में पहलगाम जैसे हमले रोके जा सकें।

जैन की नियुक्ति क्यों खास?

पराग जैन की नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की खुफिया रणनीति में एक बड़ा कदम है। RAW प्रमुख की दौड़ में सुनील अचैया जैसे नाम भी चर्चा में थे, लेकिन सरकार ने जैन पर भरोसा जताया। इसका कारण है उनकी संतुलित सोच, जमीनी अनुभव और तकनीकी समझ।

जैन चुपचाप लेकिन असरदार ढंग से काम करते हैं। वे टीम के साथ मिलकर काम करने में यकीन रखते हैं और सिस्टम में बदलाव लाने की कला जानते हैं। उनकी नियुक्ति ये बताती है कि सरकार RAW को सिर्फ एक जासूसी संस्था नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सुरक्षा स्तंभ (Pillar) के रूप में देख रही है।

पराग जैन क्या बदलाव लाएँगे?

जैन की सबसे बड़ी खासियत है कि वे फाइलों और कागजी काम तक सीमित नहीं रहते। वे ग्राउंड लेवल पर मजबूत नेटवर्क बनाते हैं। चाहे वो कनाडा हो, कश्मीर हो या खाड़ी देश, जैन हर जगह भारत की खुफिया मौजूदगी को और मजबूत कर सकते हैं।

उम्मीद है कि वे RAW को ड्रोन तकनीक, साइबर खुफिया, और AI जैसे क्षेत्रों में और सशक्त करेंगे। साथ ही, वे जमीनी नेटवर्क को और गहरा करेंगे, ताकि भारत को हर खतरे की समय रहते जानकारी मिल सके।

भारत की खुफिया एजेंसी का एक नया अध्याय, एक नया संदेश

पराग जैन का RAW प्रमुख बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि भारत की खुफिया रणनीति में एक नया अध्याय है। ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट, और जम्मू-कश्मीर जैसे उनके पिछले कारनामों ने उनकी काबिलियत को साबित किया है। लेकिन चुनौतियाँ कम नहीं हैं। पाकिस्तान, चीन, खालिस्तानी नेटवर्क और साइबर हमले जैसे खतरे उनके सामने हैं।

जैन का अनुभव, उनकी HUMINT और TECHINT को मिलाने की कला और उनकी रणनीतिक सोच RAW को और मजबूत कर सकती है। आने वाले दो साल भारत की खुफिया और सुरक्षा नीतियों के लिए बेहद अहम होंगे। जैन की अगुआई में RAW न केवल भारत की सुरक्षा को और सशक्त करेगी, बल्कि वैश्विक खुफिया मंच पर भारत को और मजबूत बनाएगी।

अब सवाल ये है – क्या पराग जैन भारत को वैश्विक खुफिया मंच पर एक और बड़ा खिलाड़ी बनाएँगे? उनकी शुरुआत तो शानदार रही है। ऐसे में भारत के दुश्मनों को अब सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि अब परदे के पीछे से पराग जैन देख रहे हैं!