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हिंदू लड़कियों को फँसाओ, उनसे निकाह करके धंधा करवाओ: इंदौर में लव जिहाद केस के लिए मुस्लिम लड़कों को पैसे दे रहा था कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी, खुलासा होते ही हुआ फरार

मध्य प्रदेश के इंदौर लव जिहाद मामले में कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ अनवर डकैत का नाम उजागर हुआ है। आरोप है कि उसने हिंदू लड़कियों को फँसवाने के लिए अपने दो गुर्गे साहिल शेख और अल्ताफ खान को लाख-लाख रुपए दिए थे। उसने इन दोनों को पैसे देकर कहा था कि हिंदू लड़कियों को शादी करके फँसाओ और फिर देह व्यापार में धकेल दो। अब पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पार्षद फरार है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

पुलिस ने शुक्रवार को आरोपित साहिल और अल्ताफ को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने कॉन्ग्रेस पार्षद से पैसे लेने की बात स्वीकारी है। साहिल ने बताया कि उसे हिंदू लड़की से शादी करने के 2 लाख रुपए दिए गए थे। वहीं, अल्ताफ ने भी माना कि उसे भी 1 लाख रुपए ही मिले थे। पार्षद ने काम पूरा होने के बाद बाकी पैसे देने का वादा किया था। दोनों के बयान का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में लव जिहादी साहिल और अल्ताफ अपने फोन में कुछ हिंदू लड़कियों की तस्वीरें भी दिखाते हैं। इन लड़कियों को उन्होंने सोशल मीडिया पर हिंदू आईडी बनाकर फँसाया था। फिर मिलने के लिए बुलाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद शादी कर धर्म परिवर्तन करवाने की योजना थी। लव जिहादियों ने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्षद ने उन्हें इन लड़कियों से ‘धंधा’ करवाने के लिए भी कहा था।

पुलिस ने लव जिहादियों के बयान के आधार पर कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए घर पहुँचे, तो वह फरार हो चुका था। अब पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस ने बताया कि साहिल और अल्ताफ को सोमवार (16 जून 2025) तक रिमांड में रखकर पूछताछ की जा रही है।

बजरंग दल ने लव जिहादियों को रंगे हाथों पकड़ा

साहिल शेख और अल्ताफ खान को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रंगे हाथों पकड़ा था। जब वह हिंदू लड़की के साथ सार्वजनिक जगह पर मिलने गए थे। बजरंगल दल ने साहिल को सुपर कॉरिडोर इलाके में दबोचा। इसके बाद लड़की को घर के लिए रवाना कर दोनों जिहादियों को खूब पीटा।

साहिल और अल्ताफ ने कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी के कहने पर हिंदू लड़कियों को फँसाने की बात कही। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। कार्यकर्ताओं ने दोनों को पकड़कर बाणगंगा पुलिस के हवाले कर दिया। इनमे साहिल कार शोरूम में काम करता है और अल्ताफ पेंटर है।

बजरंग दल के कार्यकर्ता ने बताया कि एक लव जिहादी के मोबाइल फोन में चैट खुली मिली थी। इसमें वो किसी हिंदू युवक से बात करते हुए धमकी दे रहा है। जिहादी कहता है, “मैं लड़की का बॉयफ्रेंड हूँ और नरवल में रहता हूँ। तुझसे जो बने कर लेना। इसे इस्लाम धर्म कबूल करवाऊँगा और तू मेरा कुछ नहीं कर पाएगा।” युवक ने जब कारण पूछा तो कहने लगा, “हमारे धर्म में ऐसा ही लिखा है।”

जिहादी की इंस्टाग्राम पर धमकी देते हुए चैट्स (साभार: R.Bharat)

जिहादी ने आगे कहा, “तू इतना सब क्यों पूछ रहा है। तू संगठन का आदमी है, मुझे सब पता चल जाता है। तुम्हारे संगठन के आदमी मुझसे भी जुड़े हैं।” इसके बाद बजरंग दल ने जब उसका फोन खंगाला तो हिंदू युवतियों के साथ महाकाल दर्शन के फोटो भी मिले। ये जिहादी इंस्टाग्राम पर हिंदू नाम से आईडी बनाकर लड़कियों को फँसाते थे।

बताया गया कि साहिल ने अर्जुन और अल्ताफ ने राज नाम से फेक आईडी बनाई हैं। इन आईडी का इस्तेमाल कर वे हिंदू लड़कियों से दोस्ती करते थे। बजरंग दल ने इन दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने दोनों आरोपतों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, इस साजिश में फंडिंग करने वाला कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी की जल्द गिरफ्तारी की माँग भी उठाई जा रही है।

दो हिंदू युवतियों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज

पुलिस ने बताया कि दो पीड़िताओं ने साहिल और अल्ताफ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई हैं। इसके आधार पर मौनी बाबा आश्रम के पीछे सांवेर रोड बाणगंगा के रहने वाले 20 वर्षीय अल्ताफ खान और नरवल निवासी साहिल शेख पर दुष्कर्म और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पार्लर में काम करने वाली युवती से बनाए अवैध संबंध

19 वर्षीय पीड़िता ने माँ के साथ पहुँचकर बाणगंगा पुलिस में अल्ताफ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। युवती ने बताया कि वह पार्लर में काम करती है। अल्ताफ उसका पड़ोसी है। साल 2020 में अल्ताफ से मकान खरीदा था। पड़ोने होने के चलते दोनों के बीच आम बातचीत शुरू हुई।

फिर अल्ताफ ने युवती को प्रपोज कर दिया। कहा कि वह युवती से शादी करना चाहता है। साथ ही बात करने के लिए कीपैड मोबाइल भी दिलाया। लेकिन अल्ताफ की हरकतों के चलते युवती ने उससे दूरी बना ली। ये देख अल्ताफ ने उसके घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी और दुष्कर्म किया।

बुर्का पहनने को कहा- कैफे में ले जाकर किया दुष्कर्म

वहीं, एक अन्य हिंदू युवती केयरटेकर का काम करती है। पीड़िता ने साहिल शेख के खिलाफ शिकायत की है। पीड़ित युवती ने बताया कि पाँच महीने पहले इंस्टाग्राम पर साहिल से बातचीत शुरू हुई थी। उसने खुद को हिंदू बताकर दोस्ती की थी। इस बीच 12 मई 2025 को पीड़िता को मिलने बुलाया और सांवेर रोड स्थित दोस्त के कमरे पर ले गया।

यहाँ साहिल ने युवती से कहा कि वो उससे बहुत प्यार करता है। शादी का झाँसा देकर शारीरिक संबंध भी बनाए। पीड़िता ने बदनामी के डर के यह बात किसी से नहीं कही थी। फिर सच सामने आने पर साहिल से दूरी बना ली। लेकिन 30 मई 2025 को साहिल ने विजय नगर स्थित कैफे में मिलने बुलाकर दुष्कर्म किया।

युवती ने कहा कि उसके विरोध करने पर साहिल ने उसे पैसे का लालच दिया। साहिल ने कहा, “तू सिर्फ एक बार धर्म परिवर्तन कर ले, तुझे जितना बोलेगी उतना पैसा दूँगा।” युवती ने बताया कि साहिल ने उस पर जबरन बुर्का पहनने का दबाव भी बनाया।

‘पेचकसबाजी’ पर तंज कसने वालों को ‘मेक इन इंडिया’ का करारा जवाब, अब भारत में बने स्मार्टफोन के पार्ट भी देसी: रिपोर्ट में बताया- 20% से ऊपर पहुँचा वैल्यू एडिशन

भारत में बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक निर्माण क्षेत्र में अभूतपूर्व तेजी आई है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता बन कर उभरा है। एप्पल, सैमसंग समेत तमाम विदेशी कम्पनियाँ भारत में अपने फोन बना रही हैं। इनके निर्यात से भारत को अरबों डॉलर का फायदा भी हो रहा है।

इस सफलता के पीछे बड़ा हाथ मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम का है। हालाँकि, इसे भी कुछ अर्थशास्त्री ‘पेचकसबाजी’ यानी सिर्फ पार्ट जोड़ने का नाम देकर चिढ़ाते थे। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने ऐसे आलोचकों को भी करारा जवाब दे दिया है।

20% से अधिक पार्ट भारत में ही बन रहे

बिजनेस स्टैण्डर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बनने वाले एप्पल के फोन और बाकी उत्पादों में लगने वाले 20% से अधिक पार्ट देश में ही बन रहे हैं। यानी भारत में बनने वाले किसी आईफोन के लगभग 20% पार्ट स्थानीय स्तर पर ही निर्मित होते हैं।

यह उपलब्धि एप्पल को अलग-अलग पार्ट सप्लाई करने वाले वेंडर्स ने हासिल की है। एप्पल के भारत भर में पार्ट सप्लायर्स मौजूद हैं। इनमें TDK कॉर्पोरेशन, होन हाई प्रिसिजन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉक्सलिंक समेत तमाम कम्पनियाँ हैं। यह उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु समेत अलग-अलग राज्यों में पार्ट बनाती हैं।

लम्बे समय से एप्पल की सबसे बड़ी फैक्ट्री चलाने वाले चीन भी अभी तक 35%-40% के स्तर पर पहुँच पाया है। भारत ने 20% की उपलब्धि 5 ही वर्षों में हासिल कर ली है। स्थानीय स्तर पर पार्ट बनाने के मामले में सिर्फ एप्पल ही नहीं बल्कि सैमसंग ने भी बड़ी भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग और डिक्सन भी 20%-25% तक भारत में बने पार्ट ही उपयोग कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि इसे आने वाले वर्षों में 35%-40% के स्तर पर ले जाया जाए। इससे भारतीय उद्योग भी मजबूत होंगे और जरूरी पार्ट्स के लिए विदेशों पर निर्भरता भी कम होगी।

स्थानीय स्तर पर पार्ट बनने से तकनीकी क्षमताएँ भी बढ़ती है और लागत में भी लगातार कमी आती है। भारत ने इससे पहले वाहन निर्माण क्षेत्र में ऐसी सफलता हासिल की है। 1980 के दशक में सुजुकी ने भारत में गाड़ियों को केवल एक साथ जोड़ना (असेम्बली) चालू किया थी लेकिन अब भारत में बनने वाली सुजुकी की हर गाड़ी में 95% पार्ट भारतीय होते हैं।

भारत ने ₹2 लाख करोड़+ के स्मार्टफोन किए निर्यात

भारत अब चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता है। जहाँ एक ओर देश में बिकने वाले अधिकांश स्मार्टफोन अब यहीं बने हुए हैं तो इससे भारत को निर्यात में भी बड़ा फायदा हो रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 24 बिलियन डॉलर ( लगभग ₹2 लाख करोड़) के स्मार्टफोन निर्यात किए थे।

यह पिछले वर्ष के मुकाबले 55% अधिक था। इनमें बड़ा हिस्सा एप्पल द्वारा निर्मित आईफोन का था। एप्पल ने वित्त वर्ष 2024-25 में 17 बिलियन डॉलर (₹1.46 लाख करोड़) से अधिक के आईफोन भारत में बनाकर निर्यात किए थे। एप्पल की हालिया दिनों में भारत पर निर्भरता और भी बढ़ गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के चीन समेत बाकी देशों पर टैरिफ लगाने के बाद अब भारत में बने आईफोन ही अमेरिका को निर्यात किए जा रहे हैं। भारत पर जहाँ अमेरिका ने 25% टैरिफ लगाया है तो वहीं चीन पर यह टैरिफ कहीं अधिक है।

हाल ही में आई एक और रिपोर्ट बताती है कि भारत में बने 97% आईफोन को एप्पल अमेरिका निर्यात कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति एप्पल पर यह भी दबाव बना चुके हैं कि वह भारत नहीं बल्कि अमेरिका में आईफोन का निर्माण करे। हालाँकि, एप्पल ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में आगामी दिनों में वह अपनी निर्माण क्षमता बढ़ाएगा।

वर्तमान में भारत में ताइवानी कम्पनी फॉक्सकॉन और भारतीय कम्पनी टाटा आईफोन का निर्माण करती है। इसके अलावा विस्ट्रन भी इस क्षेत्र में उतर रही है। यह कम्पनियाँ वर्तमान में तमिलनाडु और कर्नाटक में बड़े स्तर पर आईफोन का निर्माण कर रही हैं।

बांग्लादेश में 24 घंटे में 6 मंदिरों में लूट, देवी-देवताओं के आभूषण-बर्तन लूटे: घर खाली करवा लगाया मदरसे का साइन बोर्ड, पीड़ितों ने सुनाई इस्लामी कट्टरपंथियों के अत्याचार की कहानी

बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हमले और तेज हो गए हैं। शुक्रवार (13 जून) को चरमपंथियों ने 24 घंटे में 6 हिंदू मंदिरों को लूट लिया। यह घटना बांग्लादेश के गोपालगंज जिले के कोटालीपारा इलाके में हुई। एनटीवी न्यूज़ की एक रिपोर्ट में एक हिंदू महिला के हवाले से बताया गया, “कल (12 जून) को दुआरीपारा में एक मंदिर को लूट लिया गया। आज हमारे 4 मंदिरों को लूट लिया गया। पूजा करने के लिए रखे गए सभी सामान को लूट लिया गया।”

हिन्दू महिला के मुताबिक, “अगर ऐसा होता रहा, तो हम हर बार चोरी की गई पूजा सामग्री को वापस नहीं कर पाएंगे। पीतल और कांसे से बने पूजा के बर्तन खरीदने में काफी पैसे लगते हैं। हमारे पास हर बार इन्हें खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं,”

महिला ने कहा, “हमारे कीमती सामान की लूट को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। मैं सरकार से दिल से अनुरोध कर रही हूँ। हिंदू समुदाय अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “अब हम कैसे जीवित रहेंगे? हम सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अपराधियों को पकड़ना सरकार का काम है। हम असहाय हैं और हम इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।”

एक बुजुर्ग महिला ने लूट के बारे में बताया, “जब मैं शुक्रवार (13 जून) को सुबह-सुबह पूजा करने के लिए मंदिर आई, तो मैंने पाया कि भगवान की बालियाँ गायब थीं।” उन्होंने देखा तो गोपाल, राधा कृष्ण, मनसा माता की मूर्तियों को सोने के आभूषण से सजाया गया था, जो कहीं नहीं मिले।


बुजुर्ग महिला ने बताया कि उनके मंदिर में ज्यादातर मूर्तियाँ पीतल की बनी हुई हैं, जबकि राधा कृष्ण की मूर्ति चाँदी की बनी है। उन्होंने कहा, “मेरे सबसे छोटे बेटे ने मुझे यह मूर्ति उपहार में दी थी। मैं पिछले 3-4 सालों से रोजाना पूजा-अर्चना कर रही हूँ।”

एक अन्य हिंदू महिला ने बताया, “मंदिर से सारे आभूषण लूट लिए गए हैं। पहले वे घर में घुसे और फिर मंदिर में घुस गए, जो हमेशा खुला रहता है।” उन्होंने कहा, “हमें रात में पता ही नहीं चला कि क्या हुआ? हमें सुबह ही डकैती के बारे में पता चला।”

एक युवक ने बताया कि ₹40-50 हजार की कीमत की काँसे की थाली, घड़ा और पूजा का सामान लूट लिया गया। उसने दुख जताते हुए कहा, “हम सभी डरे हुए हैं।”

नेत्रोकोना में मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के घरों को नष्ट कर दिया

बांग्लादेश के नेत्रोकोना जिले के पुरबाधला इलाके में हिन्दुओं को लूटने का सिलसिला जारी है। हरिदास समुदाय के कई हिंदू परिवार यहाँ बेघर हो गए हैं। यहाँ मुस्लिम भीड़ ने हाल ही में इनके घरों को नष्ट कर दिया और उनका सामान लूट लिया।

सोमॉय नेशनल की शुक्रवार (13 जून) को प्रकाशित एक खबर के अनुसार, पिछले कई महीनों से इस इलाके में 50 साल से रह रहे हिंदू परिवारों को उजाड़ने की कोशिश की जा रही थी और पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा था। अब मुस्लिम चरमपंथियों ने इस क्षेत्र को ‘जनाब अली मरकजुन नूर अल इस्लामिया मदरसा’ की संपत्ति घोषित करते हुए साइनबोर्ड लगा दिए हैं।

जब हिंदू परिवारों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की, तो मुस्लिम चरमपंथी भीड़ के रूप में आए और हिन्दू घरों को टारगेट करते हुए हमला किया। इस हमले में कम से कम 5 घरों को जमींदोज कर दिया गया और नकदी के अलावा सोना-चांदी सहित सभी कीमती सामान लूट लिए गए।

बेघर हुए हिन्दू अब परिस्थितियों के हाथों मजबूर हैं और अब बिना छत के खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं।

एक हिंदू व्यक्ति ने बताया, “हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। वे (मुस्लिम भीड़) रविवार (8 जून) को आए और हमारे 3 अन्य घरों को नष्ट कर दिया।” एक अन्य हिंदू महिला ने बताया कि कैसे चरमपंथियों ने उसके और उसके पति के साथ मारपीट की।

एक हिंदू पीड़ित ने बताया, “वे यहां एक मदरसा खोलना चाहते हैं।” पीड़ित हिंदू परिवारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

कभी मुहम्मद गौरी, कभी सुल्तान महमूद और कभी औरंगजेब… मुगल आक्रांताओं ने कई बार गिराना चाहा विश्वनाथ धाम, हिंदू शासक कराते रहे जीर्णोद्धार: आज सोने से चमकता है शिखर, चांदी शिवलिंग पर

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम है। ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें ‘विश्वनाथ’ या ‘विश्वेश्वर’ यानी संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो भगवान शिव को समर्पित है। गंगा नदी के पावन तट पर बसे इस मंदिर को हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है। मान्यता है कि मंदिर के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मंदिर का इतिहास

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास अनेक कहानियों से भरा पड़ा है। इतिहासकार के अनुसार, मंदिर को 11वीं से 15वीं शताब्दी तक कई बार नष्ट करने की कोशिश की गई। हर बार मंदिर का जीर्णोद्धार भारत के शासकों ने कराया। मुगलों और विदेशी आक्रमणकारियों ने मंदिर पर कई बार हमला करवाया।

1194 में मुहम्मद गौरी ने मंदिर को ध्वस्त कर दिया था जिसके बाद राजा हरीशचंद्र ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, लेकिन वर्ष 1447 में जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह ने मंदिर को दोबारा गिरा दिया। इसके बाद 16वीं शताब्दी में अकबर के वित्तमंत्री राजा टोडरमल ने इसका पुनर्निर्माण कराया। इसके बाद 1669 ईस्वी में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने इसे फिर से गिरा दिया और उस जगह ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई।

वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया। आगे चलकर पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को शुद्ध सोने से मढ़वाया, जिससे इसकी भव्यता और भी अधिक बढ़ गई। हाल ही में साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की शुरुआत की, जिससे यह मंदिर आधुनिक सुविधाओं के साथ और भी सुलभ और सुव्यवस्थित हो गया।

मंदिर की संरचना

काशी विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला बेहद आकर्षक और विशिष्ट है। मंदिर के गर्भगृह में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है जो चांदी के आधार पर टिका हुआ है। यह शिवलिंग लगभग 60 सेंटीमीटर ऊँचा और 90 सेंटीमीटर परिधि वाला है। मंदिर का मुख्य शिखर करीब 15.5 मीटर ऊँचा है, जिसे महाराजा रणजीत सिंह द्वारा सोने से मढ़वाया गया है।

मंदिर के आसपास कई छोटे मंदिर भी हैं जो देवी पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, काल भैरव और अन्य देवताओं को समर्पित हैं। गर्भगृह से पहले एक सभा मंडप है। जहाँ भक्तजन एकत्र होकर पूजा करते हैं।

मंदिर परिसर में ही मौजूदी ज्ञानवापी कुआँ ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। विद्वानों के अनुसार, औरंगज़ेब के आक्रमण के दौरान इसी कुएँ में शिवलिंग को छिपा दिया गया था। वर्तमान में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के माध्यम से गंगा नदी से मंदिर तक सीधा मार्ग बन चुका है, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधाजनक दर्शन का अवसर मिलता है।

कैसे पहुँचे ?

वाराणसी रेलवे स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुँचने का सबसे सुगम मार्ग है। स्टेशन से मंदिर की दूरी सिर्फ पाँच मिनट है। इसके अलावा दिल्ली से सीधी बस सेवाएँ वाराणसी के लिए उपलब्ध हैं। जबकि वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी लगभाग 20 किलोमीटर है। एयरपोर्ट से सीधे टैक्सी या निजी वाहन से मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।

बंकर में परिवार लेकर छुपा अयातुल्ला खामेनेई, जान बचाने बीच में आया अमेरिका: इजरायल ने कहा- उससे मत करो बात, वहाँ आतंक को बढ़ाने वाली सरकार; तेहरान में फँसे 1500 भारतीय छात्र

ईरान-इजरायल के बीच जारी भयानक युद्ध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई परिवार समेत बचने के लिए बंकर में चले गए हैं। इजरायल लगातार ईरान के परमाणु और मिसाइल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। वहीं ईरान ने भी मिसाइल से तेलअवीव पर हमले किए हैं।

अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने की इजरायली कोशिश पर वीटो लगा दिया है। अमेरिका अधिकारी ने इसका दावा किया है। इजरायल ने अमेरिका को अपने प्लान के बारे में बताया था जिसके तहत वह खामेनेई को मारना चाहता था। इस पर व्हाइट हाउस ने रोक लगा दिया है। अमेरिका का मानना है कि खामेनेई की हत्या से ईरान का रूप ज्यादा विकराल हो जाएगा और इस संघर्ष को रोकना काफी मुश्किल हो जाएगा।

इजरायल और ईरान के बीच जारी भयानक जंग के बीच भारतीय छात्रों को ईरान से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने तेहरान में भारत के दूतावास से भारतीय छात्रों को आर्मेनिया की नॉर्डुज़ सीमा तक पहुँचाने की अनुमति दे दी है। भारतीय दूतावास कश्मीर के कई छात्रों सहित भारतीय छात्रों को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आर्मेनिया भेज रहा है।

इस बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए सभी लोगों के संपर्क में है। यहाँ तक कि कई छात्रों को ईरान के भीतर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।

इजरायल की सेना ने दावा किया है कि उसने तेहरान में कुद्स फोर्स, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और ईरानी सेना के कई हथियार उत्पादन करने वाले ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। इजराइल और ईरान के बीच रविवार रात से लेकर सोमवार सुबह (16 जून 2025) तक मिसाइल हमलों में तेजी आई है। युद्ध विराम के लिए अंतरराष्ट्रीय अपीलों को नजरअंदाज करते हुए दोनों एक-दूसरे पर बम बरसा रहे हैं।

कतर-ओमान की मध्यस्थता की कोशिश को लगा झटका

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर और ओमान की मध्यस्थता को झटका लगा है। ईरान ने इन देशों को बता दिया है कि जब तक इजरायल के हमले जारी रहेंगे, वह सीजफायर समझौता नहीं कर सकता। एजेंसी के मुताबिक ईरान ने कहा है कि वो पहले इजरायल को जवाब देगा फिर समझौते पर बात करेगा।

तेहरान ने इजराइल पर अपनी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के खुफिया प्रमुख और दो अन्य वरिष्ठ जनरलों की हत्या करने का आरोप लगाया। ईरान ने यह भी कहा कि हवाई हमलों में रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया गया।

वहीं ईरान ने भी इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। सोमवार (16 जून 2025) सुबह तेलअवीव पर मिसाइलों से हमले में 3 लोगों की मौत की खबर है जबकि 30 लोग घायल हुए हैं। इससे इमारतों को काफी नुकसान पहुँचा है।

ईरानी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक पिछले 3 दिनों में इजरायली हमले में मरने वालों की संख्या 224 हो गई है, जबकि 1,277 लोग घायल हुए हैं। हालाँकि अधिकारियों ने यह साफ नहीं किया है कि मरने वालों में कितने नागरिक हैं और कितने सुरक्षाकर्मी।

वहीं इजरायल ने कहा कि तेहरान ने शुक्रवार से 270 से अधिक मिसाइलें लॉन्च की हैं। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, अधिकांश को इजरायल की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रोक दिया गया था, लेकिन 22 मिसाइल आवासीय क्षेत्रों में गिरा जिससे 14 लोग मारे गए और 390 अन्य घायल हो गए।

असम में काली मंदिर के पास फिर फेंका गया गाय का कटा सिर, भड़क उठे हिंदू: पुलिस ने बोदिर अली, हजरत अली, तारा मिया, शजामल मियाँ और जहाँगीर आलम को किया गिरफ्तार

असम के लखीपुर में शनिवार (14 जून 2025) को काली मंदिर के पास फिर से गौमांस फेंके जाने की घटना हुई, जिससे इलाके में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने गाय का कटा सिर मंदिर परिसर में फेंक दिया।

ये दूसरा ऐसा मामला है, क्योंकि इससे पहले धुबरी में भी ऐसा ही कुछ हुआ था। लखीपुर के काली मंदिर के पास गाय का कटा हुआ सिर मिलने से स्थानीय लोग बहुत गुस्से में हैं।

पुलिस को जैसे ही इसकी खबर मिली, वो तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और गाय का कटा हुआ सिर अपने कब्जे में ले लिया। साथ ही पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी ताकि तनाव और न बढ़े।

इस मामले में पुलिस ने 5 इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस की गिरफ्त में आए इस्लामी कट्टरपंथियों के नाम हैं- बोदिर अली, हजरत अली, तारा मिया, शजामल मिया और जहाँगीर आलम।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद अपने ट्विटर (एक्स) पर इन गिरफ्तारियों की जानकारी दी।

स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि ये कोई नई बात नहीं है। पहले भी मुस्लिम चरमपंथियों ने वार्ड नंबर 10 के मंदिर परिसर में गौमांस फेंका था। उस वक्त भी लोगों ने खूब विरोध किया, तब जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जाँच शुरू की।

इससे पहले भी शुक्रवार 13 जून 2025 के अगले दिन मुस्लिम बहुल धुबरी इलाके में एक स्थानीय हनुमान मंदिर में एक गाय का कटा हुआ सिर पाया गया। इसके बाद वहाँ भी विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए। तनाव इतना अधिक बढ़ गया कि खुद असम के मुख्यमंत्री को वहाँ का दौरा करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने लोगों को आश्वासन देते हुए आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की बात कही और सीधा गोली मारने का आदेश जारी कर दिया। हालाँकि धुबरी की घटना पर पुलिस की रातभर चली जाँच में कुल 38 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

असम में बीते कई दिनों से मुस्लिम चरमपंथियों द्वारा हिन्दू मंदिरों को टारगेट करके बार-बार गौमांस फेंकने का प्रयास किया जा रहा है और हिन्दूओं की आस्था का मज़ाक उड़ाया जा रहा है।

ब्रिटिश काल में ऑक्सफोर्ड संग्रहालय ले जाए गए 200 से अधिक पूर्वजों के अवशेषों की वापसी के लिए नागा पहुँचे ब्रिटेन, म्यूजियम की निदेशक ने अतीत की गलतियों को किया स्वीकार

नागा जनजाति समुदाय के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूनाइटेड किंगडम (UK) की यात्रा पर है। यह प्रतिनिधिमंडल ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में ले जाए गए नागा पूर्वजों के मानव अवशेषों की वापसी की माँग कर रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में नागा जनजातीय निकायों, फोरम फॉर नागा रिकॉन्सिलिएशन (FNR) और रिकवर, रिस्टोर एंड डीकोलोनाइज (RRaD) टीम के सदस्य शामिल हैं। बताया गया है कि ब्रिटिश शासन के दौरान नागा जनजातियों के 200 से अधिक मानव अवशेषों को ईक्ठा कर के यूनाइटेड किंगडम ले जाया गया।

इन अवशेषों में से काफी सारे अवशेषों को 2020 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पिट रिवर म्यूजियम (PRM) में प्रदर्शित किया गया था। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में शनिवार (14 जून 2025) को नागा प्रतिनिधिमंडल ने एक घोषणा की।

इसमें कहा गया कि यह वापसी प्रक्रिया नागा लोगों के लिए उपचार और आत्म-सम्मान की दिशा में एक जरूरी कदम है। उन्होंने कहा, “हमें खेद है कि इसमें कई दशक लग गए, लेकिन अब हम अपने पूर्वजों को उनकी मातृभूमि में सम्मानपूर्वक लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

प्रतिनिधिमंडल ने संग्रहालय से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और इन अवशेषों को सम्मानजनक विश्राम स्थल तक पहुँचाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम नागा जनजातियों की एकता और सभी पीढ़ियों के लिए शांति का प्रतीक बनेगा।

नागालैंड ट्रिब्यून

पिट रिवर म्यूजियम की निदेशक प्रोफेसर डॉ. लॉरा वैन ब्रोकहोवेन ने नागा प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कहा कि यह प्रक्रिया अतीत की गलतियों को स्वीकार करने और भविष्य में सुलह की दिशा का एक अवसर है।

RRaD के समन्वयक और FNR के सदस्य रेवरेंड डॉ. एलेन कन्याक जमीर ने कहा, “यह यात्रा हमारे पूर्वजों की वापसी की एक पवित्र शुरुआत है। हमें PRM के नैतिक रुख की सराहना है और हमें आशा है कि यह प्रक्रिया हमारे समुदायों को संतोष देगी।”

पिट रिवर म्यूजियम, जो विश्व के प्रमुख नृवंशविज्ञान संग्रहालयों में से एक है, उन्होंने हाल ही  के वर्षों में औपनिवेशिक काल के मानव अवशेषों को हटाना शुरू कर दिया है। 2020 में मिस्र की ममियों और सिकुड़े हुए मानव सिर को प्रदर्शनी से हटाया गया था। नागा प्रतिनिधिमंडल की यह पहल वैश्विक स्वदेशी अधिकार आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें जनजाति समुदाय अपने पूर्वजों और सांस्कृतिक विरासत की वापसी की माँग कर रहे हैं।

साइप्रस दौरे पर पीएम मोदी, इस्लामी दुनिया के खलीफा बन रहे तुर्की को कड़ा संदेश: जानें – भारत ही नहीं, दुनिया के लिए क्यों खास है ये दौरा, दुश्मन को चारों तरफ से घेरने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइप्रस पहुँचे हैं। ये 20 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का साइप्रस दौरा है। इससे पहले 1983 में इंदिरा गाँधी और 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी वहाँ गए थे। साइप्रस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। वहाँ उन्होंने भारतीय मूल के लोगों से भी मुलाकात की। यहाँ पीएम मोदी की राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स से भी मुलाकात होगी।

तुर्की को हैरान करने वाला है पीएम मोदी का दौरा

पीएम मोदी का साइप्रस दौरा सिर्फ दो देशों के बीच दोस्ती बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि तुर्की को एक सख्त संदेश भी देता है। दरअसल, तुर्की पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ खुलकर बोल रहा है, खासकर कश्मीर के मुद्दे पर और पाकिस्तान को सैन्य और कूटनीतिक समर्थन दे रहा है।

भारत इसका जवाब तुर्की के विरोधी देशों – जैसे ग्रीस, आर्मेनिया, मिस्र और अब साइप्रस के साथ अपनी दोस्ती मजबूत करके दे रहा है। भारत इन देशों के साथ न सिर्फ व्यापारिक बल्कि सामरिक संबंध भी मजबूत कर रहा है। ये एक तरह से तुर्की को चारों तरफ से घेरने की रणनीति है। साइप्रस के बाद मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएँगे, जिससे भारत की वैश्विक ताकत और बढ़ेगी।

साइप्रस और भारत की दोस्ती बेहद खास

भारत और साइप्रस की दोस्ती पुरानी और गहरी है। साइप्रस ने हमेशा भारत का साथ दिया है। 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण के समय, 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते में और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए साइप्रस ने खुलकर समर्थन किया। आतंकवाद और कश्मीर जैसे मुद्दों पर साइप्रस ने कभी पाकिस्तान या तुर्की का साथ नहीं दिया।

दूसरी तरफ भारत भी साइप्रस की एकता और अखंडता का समर्थन करता है। भारत चाहता है कि साइप्रस का मसला संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हल हो। पीएम मोदी का ये दौरा इस दोस्ती को और मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति, और शायद रक्षा सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

साइप्रस-तुर्की विवाद क्या है?

साइप्रस और तुर्की का झगड़ा 1974 से चला आ रहा है। उस साल ग्रीस के समर्थन से साइप्रस में तख्तापलट हुआ, जिसका मकसद साइप्रस को ग्रीस के साथ मिलाना था। जवाब में तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। तब से साइप्रस दो हिस्सों में बँटा हुआ है।

  1. दक्षिणी हिस्सा: ये ग्रीक साइप्रियट्स है। इसे पूरी दुनिया मान्यता देती है। इसे ही रिपब्लिक ऑफ साइप्रस कहते हैं।
  2. उत्तरी हिस्सा: ये तुर्की साइप्रियट्स है। इसे तुर्की ने तुर्की रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस घोषित किया, लेकिन इसे सिर्फ तुर्की ही मान्यता देता है। इसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता नहीं है।

तुर्की ने उत्तरी साइप्रस में अपनी सेना तैनात कर रखी है और वहाँ की समुद्री सीमाओं पर भी विवाद करता रहता है। साइप्रस के पास समुद्र में प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार हैं, जिन्हें तुर्की अपने नियंत्रण में लेना चाहता है।

तुर्की का कहना है कि साइप्रस जैसे छोटे द्वीप को इतना बड़ा समुद्री क्षेत्र (EEZ) नहीं मिलना चाहिए, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून इसके खिलाफ है। तुर्की ने साइप्रस के समुद्री क्षेत्र में अपने जहाज भेजकर गैस खोजने की कोशिश की, जिससे साइप्रस, ग्रीस और यूरोपीय संघ के साथ उसका तनाव बढ़ गया। भारत का साइप्रस के साथ खड़ा होना तुर्की के लिए साफ संदेश है कि भारत उसके खिलाफ उन देशों का समर्थन करेगा, जो तुर्की की आक्रामकता से परेशान हैं।

IMEC को लेकर साइप्रस का महत्वपूर्ण स्थान

साइप्रस की भौगोलिक स्थिति इसे बहुत खास बनाती है। ये भूमध्य सागर में तुर्की के दक्षिण में, लेवांत (सीरिया-लेबनान-फिलिस्तीन-इजरायल) के पश्चिम में और स्वेज नहर के पास है। यानी ये यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच एक अहम पड़ाव है।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) में साइप्रस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। IMEC एक ऐसा व्यापारिक रास्ता है, जो भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ेगा। साइप्रस इस कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा बन सकता है, क्योंकि ये व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक प्रभाव के लिए एक शानदार जगह है।

साइप्रस के पास 12-15 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस के भंडार हैं। ये भंडार भले ही वैश्विक स्तर पर बहुत बड़े न हों, लेकिन साइप्रस जैसे छोटे देश के लिए बहुत मायने रखते हैं। यूरोप रूस से गैस कम लेना चाहता है और साइप्रस इसमें मदद कर सकता है। लेकिन तुर्की की दखलंदाजी की वजह से साइप्रस को अपनी गैस निर्यात करने में दिक्कत होती है।

साइप्रस अब ग्रीस या मिस्र के रास्ते गैस निर्यात करने की योजना बना रहा है, ताकि तुर्की को बाइपास किया जा सके। भारत अगर साइप्रस के साथ ऊर्जा, व्यापार या बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाता है, तो ये तुर्की के लिए बड़ा झटका होगा।

तुर्की को घेरना अब भारत की रणनीति

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोआन ने कई बार कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत के खिलाफ बयान दिए हैं। वो खुद को इस्लामिक दुनिया का नेता दिखाने की कोशिश करते हैं और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत की आलोचना करते हैं।

तुर्की ने पाकिस्तान के साथ अपनी सैन्य और कूटनीतिक साझेदारी भी बढ़ाई है। भारत इसका जवाब तुर्की के विरोधी देशों के साथ दोस्ती बढ़ाकर दे रहा है। साइप्रस के अलावा, भारत ग्रीस, आर्मेनिया और मिस्र के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है। ये सभी देश तुर्की के साथ किसी न किसी तरह के विवाद में हैं।

मोदी का साइप्रस दौरा तुर्की को साफ बताता है कि भारत उसकी हरकतों का जवाब देना जानता है। साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य है और भारत का पुराना दोस्त है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति और रक्षा सहयोग को नया बढ़ावा मिलेगा। साथ ही साइप्रस IMEC में भारत के लिए एक अहम साझेदार बन सकता है।

साइप्रस के बाद जी7 शिखर सम्मेलन के लिए जाएँगे पीएम मोदी

साइप्रस के बाद मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएँगे। ये भारत के लिए अपनी वैश्विक ताकत दिखाने का एक और मौका होगा। साइप्रस दौरा और जी7 में हिस्सा लेना दोनों ही भारत की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें वो वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। तुर्की जैसे देशों को घेरने के साथ-साथ भारत उन देशों के साथ दोस्ती बढ़ा रहा है, जो उसके हितों का समर्थन करते हैं। साइप्रस के साथ भारत का ये रिश्ता न सिर्फ तुर्की को जवाब है, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का भी प्रतीक है।

इजरायल ने ईरान के फौजी ठिकानों को बनाया निशाना तो कॉन्ग्रेस के भीतर का ‘उम्माह’ जागा, पर उन इजरायली नागरिकों की अर्थी पर हुई रतौंधी जो मुस्लिम मुल्क के मिसाइल हमलों में मारे गए

कॉन्ग्रेस ने रविवार (15 जून 2025) को इजरायल की ईरान में सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इजरायल ने ये हमले ईरान की परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुँचाने और वहाँ काम करने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए किए थे। कॉन्ग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इसे ‘खतरनाक कदम’ बताया, जिसके क्षेत्रीय और वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।

लेकिन कॉन्ग्रेस ने इस बात को पूरी तरह अनदेखा कर दिया कि ईरान लगातार इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है। इन हमलों से इजरायल में न सिर्फ संपत्ति को नुकसान हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों की जान भी जा रही है। जयराम रमेश ने ट्वीट करके कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस ईरानी जमीन पर इजरायल की हालिया बमबारी और टारगेटेड हत्याओं की स्पष्ट निंदा करती है। ये कदम तनाव को खतरनाक ढंग से बढ़ाने वाला है।”

जयराम रमेश ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस हिंसा में नहीं, बल्कि कूटनीति, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में विश्वास रखती है। उनके मुताबिक, भारत को ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि भारत दोनों देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखता है। साथ ही पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय काम करते हैं, इसलिए वहाँ शांति भारत के हित में है।

जयराम ने ये भी कहा कि भारत को हर कूटनीतिक तरीके से तनाव कम करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया कि इजरायल का हमला ईरान के परमाणु हथियार बनाने के खतरे के जवाब में था।

इसके अलावा ईरान ने भी इजरायल पर हमले किए, जिनमें कई आम नागरिक मारे गए और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचा। खास तौर पर ईरानी मिसाइलों ने रिशोन लेजियन में आम लोगों के घरों को निशाना बनाया, जिसमें दो नागरिकों की मौत हो गई।

दूसरी तरफ, इजरायल अपने हमलों में सैन्य ठिकानों और नेताओं को निशाना बनाता है और कोशिश करता है कि आम नागरिकों को कम से कम नुकसान हो। इजरायल ने सैन्य ठिकानों के पास रहने वाले लोगों को पहले ही चेतावनी दी थी कि वे वहाँ से चले जाएँ। वहीं ईरान बिना किसी चेतावनी के सीधे रिहायशी इलाकों पर मिसाइलें दाग रहा है।

यही नहीं, एक दिन पहले ही प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भारत को यूएन में गाजा पर वोटिंग से दूर रहने पर घेरने की कोशिश की थी। शायद उन्हें अब भी लगता है कि इजरायल को लेकर रूख उनके पिता-परनाना-दादी वाली ही होगी। हालाँकि भारत ने साफ कर दिया था कि वो द्विराष्ट्र सिद्धांत का समर्थक है और अपने पुराने रूख पर कायम है।

कॉन्ग्रेस पार्टी कूटनीति और बातचीत की वकालत तो करती है, लेकिन इजरायल के सटीक हमलों की निंदा करके और ईरान के मिसाइल हमलों पर चुप रहकर ये अपनी विश्वसनीयता खो रही है। इससे भारत का वैश्विक मामलों में संतुलित रुख भी कमजोर पड़ रहा है।

जब खालिस्तानी आतंकियों ने 110 हिंदुओं की ली जान, 2 ट्रेनों पर बरसाई ताबड़तोड़ गोलियाँ: 34 साल पहले का लुधियाना नरसंहार, गृह मंत्री की गाड़ी के पास भी हुआ था विस्फोट

पंजाब में  34 साल पहले 15 जून 1991 एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था। रात 9:35 के करीब फिरोजपुर से लुधियाना जा रही एक ट्रेन जब लुधियाना जिले के बद्दोवाल स्टेशन के पास धीरे हुई, तो खालिस्तानी आतंकवादियों ने उस पर हमला कर दिया।

आतंकियों ने पहले सिग्नल बॉक्स को हॉट-वायर करके ट्रेन को रोका और फिर ऑटोमैटिक हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में 62 लोग मारे गए, जिनमें से ज्यादातर हिंदू यात्री थे और करीब 40 लोग घायल हो गए। इस हमले ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी और यह घटना उस दौर के सबसे खतरनाक आतंकी हमलों में से एक मानी जाती है।

स्रोत: हिंदूपोस्ट

पंजाब के लुधियाना जिले में 15 जून 1991 को एक और खौफनाक आतंकी हमला हुआ। जहाँ किला राजन के पास धुरी-हिसार पैसेंजर ट्रेन को खालिस्तानी आतंकवादियों ने निशाना बनाया। उन्होंने पहले हिंदू और सिख यात्रियों को अलग-अलग किया और फिर कई यात्रियों को जबरन ट्रेन से नीचे उतार लिया।

इसके बाद यात्रियों को रेलवे ट्रैक पर एक लाइन में खड़ा किया गया और गोलियों से मार दिया गया। इस हमले में 48 लोग मारे गए और 30 घायल हुए। आतंकियों का संबंध कथित तौर पर खालिस्तान कमांडो फोर्स से था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकियों ने ट्रेन के गार्ड और ड्राइवर का अपहरण कर लिया और फिर मौके से फरार हो गए।

यह हमला उसी दिन हुआ था, जिस दिन बद्दोवाल स्टेशन पर दूसरी ट्रेन पर भी हमला हुआ था। एक ही दिन में हुई इन दोनों घटनाओं को उस समय की सबसे बड़ी सामूहिक हत्याओं में गिना जाता है। दिल दहला देने वाली इन घटनाओं से ठीक एक दिन पहले पंजाब को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया था और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए वहाँ सेना तैनात कर दी गई थी।

जतिंदर सिंह की हत्या

पंजाब के इतिहास में 15 जून 1991 का दिन सबसे भयावह दिनों में से एक था। इस दिन खालिस्तानी आतंकवादियों ने न केवल ट्रेनों पर हमला किया, बल्कि कई अन्य स्थानों पर भी हमले किए।

रोपड़ जिले के चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISSF) के उम्मीदवार जतिंदर सिंह की रतलाँगड़ी गाँव के एक गुरुद्वारे में गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमले में उनका गनमैन भी घायल हो गया।

कहा जाता है कि जतिंदर सिंह बिना सुरक्षा गार्डों को बताए लोगों से मिलने गए थे, जिससे उन पर हमला करना आसान हो गया। वह AISSF के दूसरे उम्मीदवार थे जिनकी हत्या हुई और खालिस्तानी आतंकियों द्वारा मारे गए कुल 21वें चुनाव उम्मीदवार थे।

इसी दिन अन्य हिस्सों में भी हिंसा फैली रही। तरनतारन जिले के धोतियाँ गाँव में एक ही परिवार के पाँच सदस्यों और एक महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई। एक अलग हमले में दो पुलिसकर्मी भी मारे गए।

वहीं, कोटला माझा सिंह गाँव के पास हुई मुठभेड़ में खालिस्तान कमांडो फोर्स के एरिया कमांडर सुखदेव सिंह उर्फ लाली समेत पाँच आतंकवादियों को मार गिराया गया। ये सभी हमले उस दिन हुए जब देशभर में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हुए केवल पाँच घंटे ही हुए थे।

पंजाब में उस दिन वोटिंग नहीं हुई थी, क्योंकि वहाँ की स्थिति बेहद अस्थिर थी। वहाँ 22 जून को सेना की सुरक्षा में मतदान कराने की योजना बनाई गई थी। उस समय पंजाब 1987 से केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण (यानि President’s Rule) में था और अप्रैल 1991 में राज्य विधानसभा चुनावों की घोषणा की गई थी। 15 जून तक, पंजाब में हुए लगातार हमलों में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी।

गृह मंत्री की हत्या का प्रयास

उस समय पंजाब में हालात इतने खराब थे कि आतंकवादी हमलों की आशंका के चलते रात के समय यात्रा पर पाबंदी लगा दी गई थी। आए दिन हो रहे हमलों की वजह से कॉन्ग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने चुनाव रद्द करने की माँग की थी।

स्थिति इतनी गंभीर थी कि देश के उस समय के गृह मंत्री सुबोध कांत सहाय पर भी हमला होने की कोशिश हुई। जब वह लुधियाना के पास से गुजर रहे थे, तो उनकी कार के पास बजरी के ढेर में विस्फोट हो गया, लेकिन वे सुरक्षित बच गए। हालात को देखते हुए मतदान से ठीक एक दिन पहले चुनाव रद्द कर दिए गए।

दिसंबर 1991 में खालिस्तानी आतंकवादियों ने ट्रेन पर हमला कर 49 हिंदुओं की हत्या कर दी थी

पंजाब में खालिस्तानी आतंकवादियों ने 26 दिसंबर 1991 को एक यात्री ट्रेन को हाईजैक कर लिया और उसमें सवार हिंदू यात्रियों को चुन-चुन कर गोली मार दी। इस भीषण हमले में 49 लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हुए। यह हमला पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक दो महीने पहले हुआ था।

बताया गया कि जब ट्रेन लुधियाना से रवाना हुई, तभी आतंकवादी उसमें सवार थे। शाम करीब 7:30 बजे, जब ट्रेन  सोहेन गाँव के पास पहुँची, तो आतंकियों ने आपातकालीन कॉर्ड खींचकर ट्रेन को रोक दिया। जैसे ही ट्रेन रुकी, चार आतंकियों ने अपनी AK-47 राइफलें निकाली और डिब्बों की तलाशी शुरू की। उन्होंने हिंदू प्रतीत होने वाले यात्रियों को सीधे गोली मार दी। कुछ देर बाद छह और आतंकी ट्रेन में सवार हो गए और उन्होंने भी गोलीबारी शुरू कर दी। कुल मिलाकर 49 यात्रियों की हत्या और 20 को घायल करने के बाद सभी आतंकी रात के अंधेरे में फरार हो गए।

इस नरसंहार से पहले नवंबर 1991 में केंद्र सरकार ने चुनावों को शांतिपूर्वक कराने के लिए पंजाब में 1,40,000 सुरक्षा बलों को तैनात किया था। लेकिन उस समय ट्रेनों पर इस तरह के हमले आम हो गए थे, खासकर चुनावों से पहले, जिनमें आतंकवादी हिंदू यात्रियों को निशाना बनाते थे।

इसके अलावा जून 1991 से लेकर उत्तर भारत, खासकर पंजाब और उत्तरी उत्तर प्रदेश में कई बम धमाके और आम नागरिकों पर हमले हुए। उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में खालिस्तानी समर्थकों को पनाह मिलती थी। हाल ही में पीलीभीत में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के आतंकवादियों को मार गिराया, जिन्हें पाकिस्तान की ISI द्वारा ट्रेनिंग दी गई थी।

1991 में हुआ यह ट्रेन नरसंहार भारत के इतिहास में सबसे भयानक आतंकी घटनाओं में से एक माना जाता है। इसमें न सिर्फ निर्दोष हिंदू यात्रियों को मारा गया, बल्कि यह हमला लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया को अस्थिर करने की सोची-समझी साजिश भी था।