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स्कूलों में जुम्बा डांस के विरोध में उतरे इस्लामी संगठन, बताया दीन के खिलाफ: बैकफुट पर केरल की वामपंथी सरकार

केरल में शिक्षा विभाग के जुम्बा डांस शुरू करने पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए हैं। इस्लामी कट्टरपंथी इसे ‘नैतिक मूल्यों के खिलाफ’ बता रहे हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि लड़के-लड़कियों का एक साथ नाचना, घुलना-मिलना और कम कपड़े पहनना बिल्कुल गलत है।

वहीं वामपंथी सरकार ने दावा किया है कि यह फैसला छात्रों में तनाव कम करने और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान का हिस्सा है।

इस्लामी कट्टरपंथी जुम्बा को लेकर आक्रोश में

रिपोर्ट के अनुसार, विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन के महासचिव टीके अशरफ ने साफ कहा, “मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता, और मेरा बेटा इसमें शामिल नहीं होगा।” अशरफ ने जोर देकर कहा कि बच्चों को स्कूल में ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ मिलनी चाहिए, न कि ‘लड़के-लड़कियाँ कम कपड़ों में एक साथ नाचें’ वाली संस्कृति। अशरफ ने कहा कि मैं एक शिक्षक हूँ इसलिए इसे लागू नहीं करने दूँगा।

अपनी एक फेसबुक पोस्ट में टीके अशरफ कहते हैं कि नशे जैसी गंभीर समस्याओं का हल सिर्फ डांस नहीं हो सकता। अशरफ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कोई वैज्ञानिक रिसर्च यह साबित कर सकता है कि जुम्बा नशे के इस्तेमाल को कम करता है। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि यह पहल डीजे पार्टियों और पश्चिमी नाइटलाइफ को बढ़ावा देगी।

समस्त केरल जामियातुल उलमा के नेता नस्सर फैजी कूड़ाथई ने जुम्बा को ‘अनुचित’ और ‘छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन’ बताया। उन्होंने कहा, “जुम्बा कम से कम कपड़ों में एक साथ नाचने का तरीका है।”

समस्त केरल सुन्नी युवाजना संगम (SYS) के राज्य सचिव अब्दुस्समद पूकोटूर ने इसे सीधे तौर पर ‘नैतिक मूल्यों के खिलाफ’ बताया।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की छात्र शाखा मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) ने भी विरोध किया। MSF के राज्य अध्यक्ष पीके नवास ने सवाल किया कि क्या सरकार ने इसे लागू करने से पहले कोई अध्ययन किया था।

सरकार का पलटवार

केरल की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु ने जुम्बा का बचाव किया। बिंदु ने कहा, “हम 21वीं सदी में हैं, यह 2025 है। हम 19वीं सदी या आदिम मध्ययुगीन काल में नहीं रह रहे हैं। सभी को समय के अनुसार सोचना चाहिए।” सामान्य शिक्षा विभाग ने भी जुम्बा का समर्थन किया है।

बयानबाजी और टकराव

जुम्बा विवाद पर इस्लामी कट्टरपंथी और CPM के बीच शब्दों का युद्ध छिड़ गया है। KNM नेता हुसैन मादावूर ने मंत्री आर बिंदु के बयान की आलोचना की। हुसैन ने कहा कि जुम्बा को स्कूलों में बिना किसी वैज्ञानिक आधार के थोपा जा रहा है।

हुसैन ने SFI सहित वामपंथी संगठनों को चेतावनी दी कि अगर वे अपना रुख नहीं बदलते, तो जनता उन्हें बदल देगी। हुसैन ने कहा, “प्रयास आदिम युग में लौटने का है, जब हम बिना कपड़ों के रहते थे।” हुसैन ने ‘कम कपड़े पहनकर अश्लील तरीके से नाचने’ को गलत बताया।

मंत्री बिंदु ने कहा था, “जुम्बा बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है। स्कूलों में जुम्बा कराने में क्या गलत है?”

वॉशिंगटन पोस्ट ने जोहरान ममदानी के हिंदू विरोधी जहर को ‘मोदी की आलोचना’ कह कर किया डाउलप्ले: माहौल बनाने में दोनों ‘मौसेरे भाई’, जानें – कैसे ‘दोगलई’ पर उतारू है ये अमेरिकी आउटलेट

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर उम्मीदवार जोहरान ममदानी के हिंदू विरोधी बयानों को वॉशिंगटन पोस्ट ने बेशर्मी से ‘मोदी की कड़ी आलोचना’ बताकर पर्दा डालने की कोशिश की। गुरुवार (26 अप्रैल) को छपे एक लेख में इस अमेरिकी अखबार ने ममदानी के नफरत भरे बयानों को हल्का दिखाने की साजिश रची, ताकि उनके हिंदू विरोधी प्रचार को ‘राजनीतिक असहमति’ का जामा पहनाकर लोगों का ब्रेनवॉश किया जा सके।

ये कोई पहली बार नहीं है कि वॉशिंगटन पोस्ट ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले बयानों को नरम करके पेश किया हो। आइए, इस पूरी साजिश को बेनकाब करते हैं।

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वाला चेहरा है जोहरान ममदानी

भारतीय-युगांडा मूल का जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली का सदस्य है और अब मेयर पद की रेस में है। प्रोग्रेसिव और सत्ता-विरोधी हलकों में उसकी तारीफ होती है, लेकिन भारत में उसके बयान आग की तरह सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। एक बयान में ममदानी ने पीएम नरेंद्र मोदी को ‘युद्ध अपराधी’ और ‘मुसलमानों के नरसंहार’ का जिम्मेदार ठहराया। ये सिर्फ मोदी पर हमला नहीं, बल्कि हिंदू धर्म और संस्कृति को निशाना बनाने की साफ कोशिश है। लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट ने इसे ‘मोदी की आलोचना’ का लेबल चिपकाकर ममदानी को बचाने की कोशिश की।

बीते माह एक फोरम में ममदानी ने मोदी की तुलना इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से की और दोनों को ‘युद्ध अपराधी’ करार दिया था। उसने 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए, उस वक्त के सीएम रहे मोदी को मुसलमानों की मौतों का जिम्मेदार ठहराया। ये बयान सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि हिंदुओं के खिलाफ गहरी नफरत से भरे हैं। ममदानी की ये नफरत सिर्फ मोदी तक सीमित नहीं है; वो हिंदू धर्म को ही निशाना बनाता है।

राम मंदिर पर जहर और हिंदुओं का अपमान

जोहरान ममदानी ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को ‘मस्जिद के विध्वंस का उत्सव’ और ‘उत्पीड़न का हथियार’ कहा था। न्यूयॉर्क में दिया उसका ये बयान भारत के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह नजरअंदाज करता है, जो दशकों की कानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बाद आया। राम मंदिर हिंदुओं के लिए आस्था का प्रतीक है, न कि कोई सियासी हथियार। ममदानी का ये बयान दुनिया भर के लाखों हिंदुओं का अपमान करता है, जो इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर की बहाली मानते हैं। लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट ने इस गंभीर हमले को भी ‘मोदी विरोध’ का रंग देकर हल्का कर दिया।

जनवरी 2024 में ममदानी ने न्यूयॉर्क में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन किया और इसे ‘हिंदुत्व उग्रवाद’ करार दिया। उसने मंदिर को ‘फासीवाद’ और हिंदू आकांक्षाओं को ‘हिंसक बहुसंख्यकवाद’ से जोड़ा। ये सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को कुचलने की कोशिश है। अगस्त 2022 में टाइम्स स्क्वायर पर ममदानी को एक नफरत भरी भीड़ का नेतृत्व करते देखा गया, जो ‘हिंदू कौन हैं… ह@$#मी’ जैसे अपमानजनक नारे लगा रही थी। ममदानी ने इस अमानवीय बर्ताव पर चुप्पी साधी और राम मंदिर के खिलाफ जहर उगलता रहा।

वॉशिंगटन पोस्ट ने हिंदू विरोध को पहनाया ‘मोदी विरोध’ का जामा

वॉशिंगटन पोस्ट ने ममदानी के इन खतरनाक बयानों को ‘मोदी की कड़ी आलोचना’ बताकर हिंदू समुदाय की चिंताओं को पूरी तरह अनदेखा किया। अखबार ने अभिषेक मनु सिंघवी के हवाले से ट्वीट किया कि ‘हिंदू-बहुल भारत और मुस्लिम-बहुल पाकिस्तान के बीच दशकों की दुश्मनी’ है। ये दावा न सिर्फ गलत है, बल्कि भारत के आंतरिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाने वाला है। ये साफ दिखाता है कि वॉशिंगटन पोस्ट का मकसद सिर्फ मोदी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि हिंदू विरोधी प्रचार को धर्मनिरपेक्षता की आड़ में बढ़ावा देना है।

2008 में महाराष्ट्र के मालेगाँव बम धमाके की खबर में वॉशिंगटन पोस्ट ने ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस हमले में दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और अखबार ने इसे हिंदू समुदाय को बदनाम करने का मौका बनाया। ममदानी का इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) जैसे संगठनों से भी कनेक्शन है, जो बिना सबूत हिंदू समूहों पर ‘हिंदुत्व आतंक’ का आरोप लगाकर भारतीय-अमेरिकी हिंदुओं के खिलाफ डर और अविश्वास का माहौल बनाते हैं।

ममदानी की सच्चाई आ चुकी है सामने

एक्स पर एक भारतीय ने लिखा, “ममदानी की मेयर प्राइमरी जीत गर्व का पल हो सकती थी, लेकिन भारत के बारे में झूठ फैलाने, जैसे ‘गुजरात में कोई मुस्लिम नहीं बचा’ कहकर वो समर्थन नहीं पा सकता।”

फर्स्टपोस्ट के संपादक श्रीमॉय तालुकदार ने ममदानी को ‘आतंक समर्थक’ और ‘हिंदुओं से नफरत करने वाला कट्टरपंथी’ बताया। ये प्रतिक्रियाएँ दिखाती हैं कि ममदानी के बयान सिर्फ सियासी आलोचना नहीं, बल्कि हिंदू धर्म को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट का दोगलापन उजागर

वॉशिंगटन पोस्ट जैसे पश्चिमी मीडिया हाउस भारत की सामाजिक-धार्मिक जटिलताओं को अपनी वैचारिक सुविधा के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं। ममदानी के हिंदू विरोधी बयानों को ‘मोदी विरोध’ बताकर वो हिंदुओं की चिंताओं को खारिज करते हैं और नफरत को ‘राजनीतिक असहमति’ का लेबल देकर जायज ठहराते हैं। ये न सिर्फ हिंदुओं के जीवित अनुभवों का अपमान है, बल्कि ऐसी आवाजों को बढ़ावा देता है जो हिंदू पहचान को चरमपंथ से जोड़ती हैं।

लोकतंत्र में आलोचना की जगह है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को कुचला जाए। वॉशिंगटन पोस्ट की ये कवरेज हिंदुओं के खिलाफ पक्षपात और उनकी चिंताओं को दबाने की कोशिश है। जिम्मेदार पत्रकारिता का काम सच को साफ और निष्पक्ष तरीके से दिखाना है, न कि किसी समुदाय को बदनाम करने या नफरत फैलाने वालों का बचाव करना। ममदानी जैसे लोग और वॉशिंगटन पोस्ट जैसे मीडिया हाउस मिलकर हिंदू विरोधी प्रचार को हवा दे रहे हैं, और इसे ‘मोदी विरोध’ का नाम देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘दोस्त ही दोस्त का रेप करे तो क्या करें’: कोलकाता गैंगरेप पर TMC सांसद कल्याण बनर्जी, ममता की पार्टी के दरिंदे को ‘दादा’ कहती थी पीड़िता फिर भी नहीं छोड़ा; FIR की डिटेल

कोलकाता लॉ कॉलेज में एक 24 वर्षीय छात्रा के साथ गैंगरेप में पीड़िता की शिकायत की कॉपी सामने आई है। पीड़िता ने बताया TMC छात्र नेता मोनोजीत मिश्रा और उसके साथियों ने बलात्कार किया। इस घटना पर TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने विवादित बयान देकर कहा कि ‘अगर दोस्त ही दोस्त का रेप करे तो पुलिस क्या करेगी।’

चुप रहने की दी धमकी- पीड़िता

पीड़िता के साथ घटना 25 जून 2025 को साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में घटी थी। पीड़िता की शिकायत के मुताबित, वह कॉलेज में परीक्षा संबंधी फॉर्म भरने आई थी और उसे छात्र संघ कक्ष में बुलाया गया। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि TMC छात्र परिषद के महासचिव मोनोजीत मिश्रा ने शादी का दवाब डाला जिसको मैंने ठुकरा दिया।

पीड़िता की शिकायत में मोनोजीत ने उसके प्रेमी को नुकसान पहुँचाने और माता-पिता को झूठे आरोपों में फँसाने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता को कॉलेज के अंदर बंधक बनाया। मोनोजीत मिश्रा ने अपने दो साथियों जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी के साथ मिलकर बलात्कार किया।

पीड़िता ने आगे बताया कि मोनोजीत के पैर भी पकड़े लेकिन उसने नहीं छोड़ा। जबरन गार्ड रूम ले जाया गया, जहाँ मोनोजीत ने उसे निर्वस्त्र कर जबरदस्ती रेप किया और अन्य दो साथी खड़े होकर वीडियो बना रहे थे।

पीड़िता ने बताया कि मुझे पैनिक अटैक आया और साँस लेने में दिक्कत हुई, लेकिन तब भी किसी ने मदद नहीं की। पीड़िता ने आरोपितों को अस्पताल ले जाने को भी कहा। पीड़िता के मुताबिक कॉलेज का मुख्य गेट बंद था और गार्ड भी असहाय था।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि घटना का वीडियो बनाया और उसे चुप रहने के लिए ब्लैकमेल किया गया। पीड़िता ने कहा कि जब मैं जाने लगी तो मोनोजीत ने हॉकी स्टिक से मारने की कोशिश की भी।

संगठन से वफादारी का दबाव

पीड़िता का आरोप है कि गैंगरेप से पहले उसे टीएमसी छात्र संगठन के प्रति वफादारी साबित करने को कहा गया। उसे और 7 लोगों को यूनियन रूम बुलाया गया। वहाँ मोनोजीत मिश्रा ने संगठन और अपनी ताकत की बात की।

फिर प्रमित मुखर्जी ने उसे बाहर बुलाकर मोनोजीत और संगठन के प्रति उसकी वफादारी पूछी। पीड़िता ने विश्वास दिलाया कि वह हमेशा संगठन का समर्थन करेगी, क्योंकि वह लड़कियों की सचिव थी।

वापस आने पर मोनोजीत ने पूछा कि क्या प्रमित ने सब समझा दिया। छात्रा ने जवाब दिया, “हाँ दादा, मैं हमेशा यूनिट के साथ रहूँगी। चिंता मत करो।”

TMC सासंद के बिगड़े बोल

भाजपा ने तस्वीरें जारी कर इसे ‘बलात्कारियों को राजनीतिक संरक्षण’ कहा है।

TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने बलात्कार को लेकर कई आपत्तिजनक बातें कहीं। कल्याण बनर्जी ने कहा, “अगर कोई दोस्त अपने दोस्त का रेप करता है, तो क्या कर सकते हैं? क्या स्कूलों में पुलिस तैनात होगी?”

पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस ने FIR दर्ज की है। तीन लोग गिरफ्तार हुए हैं। मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा (TMC छात्र नेता) है। अन्य दोस्त जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी हैं।

पुलिस ने मेडिकल जाँच करवाई है। गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आरोपितों के फोन जब्त हुए। वीडियो रिकॉर्डिंग की तलाश जारी है। डॉक्टरों को शारीरिक हमले के सबूत मिले हैं।

स्कूटी टच होने पर यश को चाकुओं से गोदा या मुस्लिम लड़की से दोस्ती में हत्या? पीड़ित माँ बोली- मेरे बच्चे को साजिश के तहत मारा, गफ्फार के पूरे परिवार से हम लोगों को खतरा

दिल्ली के शाहदरा जिले में शुक्रवार (27 जून 2025) सुबह गीता कॉलोनी के रानी गार्डन इलाके में 19 वर्षीय यश की अमान, रहमान और लकी ने चाकू मारकर हत्या की। इस मामले में मृतक की माँ ने बताया कि हमला मुस्लिम लड़की से दोस्ती के चक्कर में हुआ है।

शुरुआती जाँच में सामने आया था कि स्कूटी टच हो जाने के चलते अमान और रहमान ने यश पर धारदार चाकू से हमला किया। अब पुलिस ने तीनों आरोपितों (अमान, रहमान, लकी) को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना के दौरान यश के साथ अमन शर्मा था। अमन ने बताया कि अंबेडकर पार्क शिव मंदिर के पास स्कूटर का शीशा दो लड़कों से टकराया। उन्होंने यश पर बंदूक तान दी फिर उसे चाकू मार दिया। यश को अस्पताल ले गए जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। अमन ने कहा दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए।

रोड रेज नहीं, प्रेम प्रसंग में मारा- मृतक की माँ

मृतक की माँ ने पुलिस की रोड रेज की थ्योरी को नकारकर कहा, “छोटी सी टक्कर पर कोई बेटे को नहीं मारेगा।” माँ ने दावा किया कि उनके बेटे को प्रेम प्रसंग के कारण मारा गया है।

माँ ने बताया कि यश की एक मुस्लिम दोस्त गुल्लो थी। परिवार को शक है कि इसी दोस्ती के कारण यश की हत्या हुई। माँ ने यह भी कहा कि आरोपित का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। माँ ने लकी नाम के एक और लड़के का नाम लिया। लकी गुल्लो का दोस्त है और उसने पहले यश को जान से मारने की धमकी दी थी।

माँ ने कहा कि पुलिस अपराधियों के घर को सुरक्षा दे रही है। जबकि उनके भतीजे की जान खतरे में है, जो इस घटना का गवाह है। माँ ने पुलिस से गुल्लो और उसके परिवार से पूछताछ करने को कहा है।

माँ के अनुसार, गुल्लो के पास मामले से जुड़ी और जानकारी हो सकती है। माँ को डर है कि गुल्लो के पिता ‘गफ्फार’ के बेटे हथियारों के साथ घूमते हैं, जिससे उनके परिवार को खतरा है।

पुलिस का बयान

मामले में डीसीपी ने बताया कि लक्ष्मी नगर के आरएस ग्रोवर अस्पताल से कॉल आई। जाँच में पता चला यश अपने चचेरे भाई अमन शर्मा के साथ गीता कॉलोनी में था। वहाँ झगड़ा हुआ। झगड़े के दौरान अमान ने यश की पीठ के निचले हिस्से में चाकू मारा।

अस्पताल ले जाने पर यश को मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में तीन लोग शामिल हैं। इनमें अमान, लकी और एक नाबालिग हैं। उन्हें पूर्वी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया अमान का आपराधिक इतिहास है, लकी का नहीं।

12 पत्रकारों को मिला 2025 का देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान, ऑपइंडिया के अनुपम कुमार सिंह को मिला ‘उत्कृष्ट डिजिटल पत्रकार’ का पुरस्कार: दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संपादक आशुतोष झा की जूरी ने किया चयन

साहस और निर्भीकता के साथ पत्रकारिता करने वाले 12 पत्रकारों को शुक्रवार (27 जून 2025) को 12 श्रेणियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2025 से नवाजा गया। इस कड़ी में ऑपइंडिया के एसोसिएट एडिटर अनुपम कुमार सिंह को उत्कृष्ट डिजिटल पत्रकार के सम्मान से पुरस्कृत किया गया है।

शुक्रवार को इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र की ओर से दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हॉल एनेक्सी में यह सम्मान समारोह आयोजित किया गया था जिसमें अलग-अलग विधाओं में पत्रकारिता की नींव को मजबूत कर रहे पत्रकारों को सम्मानित किया गया।

देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2025 में सम्मानित हुए पत्रकारों का चयन प्रक्रिया में शामिल निर्णायक मंडल के अध्यक्ष और दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संपादक आशुतोष झा समेत कई अन्य वरिष्ठ मीडिया कर्मी और पत्रकार भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत कुमार सहगल रहे तो वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी मुख्य वक्ता रहे।

नवनीत सहगल ने इस अवसर पर कहा कि पत्रकारों को फेक न्यूज से बचना चाहिए। उन्हें चाहिए कि सटीक और तथ्यों के आधार पर खबरों को सबके सामने लाएँ जिससे समाज का भरोसा उन पर बना रहे।

वहीं, मुख्य वक्ता रहे प्रदीप जोशी ने कहा कि पत्रकार नारद कुल के वंशज हैं। उन्हें लोगों के हित की बात करनी चाहिए। समाज निर्माण के लिए जागरूकता से भरी खबरें पत्रकार ही देश-दुनिया के सामने ला सकते हैं। भारत 2047 तक विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है जिसमें कई सार्थक खबरों को समाज में पहुँचाने की हमें जरूरत है।

इन पत्रकारों को मिला सम्मान

  • ऑर्गेनाइजर की वरिष्ठ संवाददाता शुभी विश्वकर्मा को उत्कृष्ट युवा पत्रकार
  • दैनिक जागरण डिजिटल की राजनीतिक संपादक स्मृति रस्तोगी को उत्कृष्ट स्त्री सरोकार/ महिला संवेदना पत्रकारिता
  • पंजाब केसरी के संवाददाता अमित कुमार को उत्कृष्ट अभिनव पत्रकार
  • दैनिक जागरण के प्रमुख संवाददाता संजीव गुप्ता को उत्कृष्ट ग्रामीण/पर्यावरण पत्रकारिता
  • एनएमएफ न्यूज के संपादक परमानंद खेतान को उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर (यूट्यूब)
  • NECU की सहायक प्रोफेसर डॉ मोनिका वर्मा को उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर (एक्स)
  • किरण यादव को इंस्टाग्राम पर उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर
  • रिपब्लिक शंखनाद की श्वेता सिंह को उत्कृष्ट साहसिक पत्रकार
  • दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन प्लानिंग के प्रोफेसर निरंजन कुमार को उत्कृष्ट स्तंभकार
  • द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के सीनियर एसोसिएट एडिटर राजेश कुमार ठाकुर को उत्कृष्ट पत्रकार (प्रिंट)
  • डीडी न्यूज़ के वरिष्ठ संवाददाता अमरेंद्र गुप्ता को उत्कृष्ट पत्रकार टीवी देवऋषि नारद सम्मान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली का प्रांत कार्यवाहक अनिल गुप्ता भी कार्यक्रम में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में पत्रकारों को सम्मानित करते हुए गर्व हो रहा है। 2 अक्टूबर 2025 को विजयादशमी के दिन संघ 100 वर्षों का हो जाएगा।

मोड़ पर फँसा बलभद्र का रथ तो जमा हो गए लोग… भगदड़ मचने से 500+ श्रद्धालु घायल: भीड़ और नमी ने भी बिगाड़ी तबियत, 8 की हालत गंभीर

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की शुक्रवार (27 जून 2025) को रथयात्रा थी। रथ यात्रा के दौरान बहुत भीड़ जमा हो गई। भीड़ ज़्यादा होने से 500 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।

भगवान बलभद्र का रथ खींचते समय बहुत लोग एक साथ एक ही जगह जमा हो गए। रथ रास्ते में एक मोड़ पर अटक गया था, जिससे लोग वहीं इकट्ठा होते गए। इससे भीड़ और बढ़ गई।

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि लोग उन जगहों पर भी चले गए जहाँ जाने की मनाही थी। इससे रास्ते में रुकावट आ गई। भीषण गर्मी और ज़्यादा भीड़ के कारण कई श्रद्धालुओं की तबियत बिगड़ने लगी। उन्हें तुरंत पुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। लगभग 8 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

ओडिशा के मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि ज़्यादा नमी (humidity) के कारण लोग बेहोश हुए। मंत्री ने बताया कि मंदिर के पास प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। महालिंग ने यह भी बताया कि ग्लूकोज और पानी की पूरी व्यवस्था की जा रही है।

सूर्यास्त के बाद रोकी गई रथयात्रा शनिवार (28 जून 2025) को जगन्नाथ मंदिर से 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर पहुँचेंगी। गुंडिचा भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। यहाँ 9 दिन तक निवास करने के बाद भगवान जगन्नाथ अपने भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ 5 जुलाई 2025 को जगन्नाथ मंदिर लौटेंगे।

शरीर पर चोट, खरोंच और दांत काटने के निशान… कोलकाता गैंगरेप केस में मेडिकल रिपोर्ट से हुआ खुलासा: ‘ममता’ की छाँव में रहा है मोनोजीत, पीड़िता के गिड़गिड़ाने पर भी नहीं पसीजा

कोलकाता में लॉ छात्रा से गैंगरेप के मामले में नया मोड़ आया है। मेडिकल रिपोर्ट में गैंगरेप की पुष्टि हो गई है। रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर काटने के निशान और खरोंच के सबूत मिले हैं। मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा टीएमसी का नेता है और उसके दो साथी पुलिस हिरासत में हैं।

तीनों आरोपितों को 4 दिन की रिमांड पर भेजा गया है। पहले टीएमसी ने आरोपित से संबंध होने से मना किया था, लेकिन अब उसने मान लिया है कि मोनोजीत मिश्रा उसकी छात्र शाखा से जुड़ा है। मोनोजित मिश्रा की सोशल मीडिया पर टीएमसी के बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आई हैं।

TMC नेता की दरिंदगी

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि मोनोजीत मिश्रा उस पर शादी का दबाव बना रहा था। जब पीड़िता ने मना किया तो आरोपित ने उसे और उसके परिवार को धमकी दी। मोनोजित मिश्रा ने पीड़िता के बॉयफ्रेंड को भी कॉलेज में बंद करके पीटा था।

पीड़िता ने बताया कि आरोपित ने उसे जबरदस्ती गार्ड रूम में ले जाकर गैंगरेप किया। इस दौरान आरोपितों ने वीडियो भी बनाया और धमकी दी कि अगर उसने शिकायत की तो वीडियो वायरल कर देंगे। पीड़िता ने बताया कि आरोपितों ने उसे हॉकी स्टिक से भी मारने की कोशिश की।

पीड़िता ने बताया, “मोनोजीत ने जबरदस्ती यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। मैंने मना किया और उसे धक्का दिया। मैं रोने लगी और बोली, मुझे जाने दो। मैंने उनके पैर भी पकड़े, पर वे नहीं माने। मुझे घबराहट हुई और सांस लेने में दिक्कत होने लगी। मैंने अस्पताल जाने के लिए कहा, फिर भी उन्होंने नहीं सुना। वे मुझे जबरदस्ती गार्ड रूम ले गए और मेरा गैंगरेप किया।”

बंगाल में महिला सुरक्षा पर सवाल

यह घटना पश्चिम बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। पिछले साल 2024 में भी कोलकाता में ऐसी ही एक घटना हुई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहाँ महिला सुरक्षा के दावे करती हैं, वहीं उनकी पार्टी के नेता ऐसे अपराधों में शामिल पाए जा रहे हैं।

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने एक विवादित बयान दिया है। कल्याण बर्नजी ने महिलाओं को ही ऐसी घटनाओं के लिए दोषी ठहरा दिया। कल्याण बनर्जी ने कहा कि महिलाओं क्यों ऐसे पुरुषों के पास जाती है जिनकी सोच गंदी है।

जानें पूरा मामला

पश्चिम बंगाल में 25 जून 2025 की शाम कोलकाता के साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में एक लॉ छात्रा से गैंगरेप हुआ। यह घटना कॉलेज कैंपस में रात 7:30 बजे से 10:50 बजे के बीच हुई। मुख्य आरोपित कॉलेज का पूर्व छात्र मोनोजीत मिश्रा है।

मोनोजित मिश्रा तृणमूल कॉन्ग्रेस छात्र परिषद (TMCP) का पूर्व अध्यक्ष भी है। इस अपराध में उसके दो साथी जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी भी शामिल थे। वे कॉलेज के ही छात्र हैं।

हैंडपंप के साथ बाइबिल का संदेश… नए-नए हथकंडे अपना ईसाइयत का प्रचार कर रहे मिशनरी, MP-छत्तीसगढ़-राजस्थान के कई जिलों में 41% लोगों को बनाया ईसाई

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में पिछले कुछ दशकों से धर्मांतरण के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे है। पैसे, शिक्षा और चिकित्सा जैसे लालच में पड़कर लोग मतांतरण जैसा कदम उठा रहे हैं और ईसाई मिशनरी इस हथियार का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

मिशनरियों के निशाने पर गरीब, कम पढ़े लिखे लोग खासकर जनजातीय लोग हैं, जिसकी वजह से इन राज्यों के जनजातीय इलाकों में ईसाई परिवारों की संख्या में काफी उछाल आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, इन राज्यों के धार्मिक अनुपात में काफी अंतर देखने को मिला है।

छत्तीसगढ़ के गाँवों में 75% तक ईसाई कनवर्जन

रिपोर्ट के अनुसार, जशपुर जिले के सितोंगा गाँव में पहले सिर्फ एक चर्च था, लेकिन पिछले 20 सालों में करीब 200 परिवारों ने ईसाई मजहब अपना लिया है। गाँव में कुल 400 परिवार रहते हैं, जिनमें से करीब  270 अब ईसाई बन चुके हैं। कई घरों पर ईसाई प्रतीकों वाले झंडे लहरा रहे हैं।

इसके अलावा बस्तर और नारायणपुर जिले के कई गाँवों में ईसाई परिवारों की बढ़ती संख्या की वजह से मृतकों के दफन को लेकर विवाद हो रहा है। स्थानीय हिंदू संगठन ईसाई मजहब अपनाने वालों के शवों को गाँव के श्मशान घाट में दफनाने का विरोध कर रहे हैं, इसलिए चर्च के यार्ड में दफन किया जा रहा है।

पूर्व विधायक और जनजातीय नेता राजाराम तोड़ेम ने बताया कि बस्तर की कई समुदायों में 50% से ज्यादा लोग ईसाई बन चुके हैं। अंबिकापुर के बेहरापारा में 25 घर हैं और पिछले एक दशक में 19 परिवारों ने ईसाई मजहब अपना लिया है। हालाँकि छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने स्थानीय हिंदू संगठनों के विरोध के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

एमपी में मिशनरियों ने पैसों और स्वास्थ्य को बनाया हथियार

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर और रायपुर जिलों में धर्म परिवर्तन के आरोप में करीब 10 एफआईआर दर्ज हुए  हैं। लेकिन धर्म परिवर्तन के मामले सिर्फ इन जिलों तक सीमित नहीं हैं। लोगों को पैसे और मेडिकल सुविधाएँ देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए लालच दिया जाता है।

झाबुआ जिले के डुंगरा धन्ना गाँव में कई लोगों के नाम ईसाई हैं, लेकिन उनके उपनाम और पिता के नाम हिंदू हैं। मिसाल के तौर पर डुंगरा गाँव के थॉमस पहले सनातनी थे। उनके पिता का नाम जयराम सिंगारिया है। उन्होंने बताया कि वो कुछ साल पहले बीमार पड़ गए थे। मिशनरी का काम करने वाले लोगों ने उन्हें चर्च में प्रार्थना करने की सलाह दी थी, जिसे मानकर वो चर्च जाने लगे। ऐसे में ठीक होने के बाद उन्होंने ईसाइयत को अपना लिया।

जेवियर निनामा नाम का व्यक्ति ईसाइयों के मिशनरी स्कूल में काम करता है। हालाँकि निनामा का दावा है कि वो जनजातीय है। पर लोगों का कहना है कि कमाई के चक्कर में उसने ईसाईयत को अपना लिया। मौजूदा समय में डुंगरा धन्ना गाँव की करीब 25% आबादी ईसाई मजहब को अपना चुकी है। अलीराजपुर, धार, रतलाम और छतरपुर में भी हालात कुछ ऐसे ही है।

राजस्थान में भी पैसों के दम पर मतांतरण

राजस्थान के कई भी कई जिलों धर्म परिवर्तन का ऐसा ही पैटर्न देखने को मिल रहा है। मिशनरी संगठन लोगों को पैसे दे रहे हैं और बाइबल के संदेशों के साथ हैंडपंप जैसी सुविधाएँ दे रहे हैं।

गंगानगर जिले के तीन केडी गाँव की सुमन नाम की एक महिला ने बताया कि उसे दिल्ली में बपतिस्मा के लिए ले जाया गया और कई बार 2000 से 5000 रुपये की आर्थिक मदद दी गई।

बांसवाड़ा जिले के गडोली, जंबुडी, शिवपुरा और उदयपुर जिले के जगन्नाथपुरा, मकड़ा देव और ओबरा गाँवों में भी ऐसे ही मामले देखने को मिले हैं। 8 साल पहले इन छह गाँवों में कुल 800 परिवारों में से सिर्फ 70 ईसाई थे।

अब 900 परिवारों में से करीब 450 ईसाई बन चुके हैं, यानी 41% की बढ़ोतरी। इन आँकड़ों से ये साफ है कि लोगों के धर्मांतरण 8 सालों में तेजी से हुआ है। इन गाँवों में चर्चों की संख्या भी अब चार गुना बढ़ गई है।

हालाँकि, पास्टर वेलफेयर एसोसिएशन के राज्य अध्यक्ष कुलविंदर सिंह ने धर्म परिवर्तन की बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि जिन्हें चर्च कहा जा रहा है, वे असल में ‘प्रेयर हॉल’ हैं।

बांसवाड़ा जिले के कई गाँवों में जीसस क्राइस्ट संगठन ने बाइबल के संदेशों के साथ हैंडपंप और पत्थर की शिलाएँ लगवाई हैं। बडी सेंड गाँव में एक शिला पर लिखा है, “जो इस पानी को पीएगा, उसे फिर प्यास लगेगी, लेकिन जो उस पानी (जीसस के कुएँ) से पीएगा, उसे हमेशा के लिए प्यास नहीं लगेगी।”


रिपोर्ट में हाई कोर्ट के वकील हिमांशु निगम के हवाले से बताया गया है कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश-1950 के अनुसार, अनुसूचित जनजाति का दर्जा सिर्फ हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के लोगों को मिलता है।

अगर कोई व्यक्ति कानूनी तौर पर या शपथ पत्र के जरिए अपना धर्म नहीं बदलता, तो उसका धार्मिक दर्जा कोर्ट तय करता है। लेकिन अगर कोई अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति धर्म परिवर्तन के बाद भी जनजातीय रीति-रिवाजों का पालन करता है, तो उसका जनजातीय दर्जा बना रह सकता है।

कोलकाता लॉ कॉलेज में गैंगरेप के मुख्य आरोपित ‘क्रिमिनल लॉयर’ मोनोजीत मिश्रा को कितना जानते हैं आप? बड़े नेताओं से हैं संबंध: सोशल मीडिया पर फैली तस्वीरें दे रही TMC छात्र नेता के ताकत की गवाही

साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज की एक छात्रा के साथ गैंगरेप के आरोप में टीएमसी की छात्र इकाई टीएमसीपी के नेता मोनोजीत मिश्रा को गुरुवार (26 जून 2025) को गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में ही पढ़ा है, जहाँ उसने छात्रा को जेनरेटर रूम में खींच लिया और उसका रेप किया। इस दौरान कॉलेज के 2 अन्य छात्र बाहर उसकी रखवाली कर रहे थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोनोजीत मिश्रा साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में TMCC का पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं (यह जानकारी उनके फेसबुक प्रोफाइल से सामने आई है)। फिलहाल वो साउथ कोलकाता जिले में टीएमसीपी के महासचिव के पद पर कार्यरत है।

गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उनके राजनीतिक संपर्क और प्रभावशाली कनेक्शन्स को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतने बड़े स्तर का मामला दबाया जाएगा या पीड़िता को न्याय मिलेगा। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जाँच जारी है।

मोनोजीत मिश्रा अभिषेक बनर्जी के साथ

बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार मोनोजीत मिश्रा को कई बड़े टीएमसी नेताओं के साथ देखा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में वह टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ भी नजर आ रहा हैं, जो पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के भतीजे हैं।

मोनोजीत मिश्रा को टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ ही ममता बनर्जी की भाभी कजरी बनर्जी के साथ भी देखा गया है। कजरी बनर्जी कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 73 की पार्षद हैं।

कजरी बनर्जी के साथ मोनोजीत मिश्रा

एक तस्वीर में मोनोजीत मिश्रा पश्चिम बंगाल की सीएम के विश्वासपात्र फिरहाद हकीम से मिलते नजर आए।

मोनोजीत मिश्रा के साथ चंद्रिमा भट्टाचार्य को भी देखा गया है, जो पश्चिम बंगाल सरकार में शहरी विकास और नगरपालिका मामलों की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं। इसके अलावा वह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग की राज्य मंत्री भी हैं।

चंद्रिमा भट्टाचार्य के साथ मोनोजीत मिश्रा

बलात्कार के आरोपित की कोलकाता दक्षिण की टीएमसी सांसद माला रॉय के भी तस्वीरे हैं।

मोनोजीत मिश्रा, माला रॉय के साथ

तृणमूल युवा कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष (दक्षिण कोलकाता जिला) सार्थक बनर्जी के साथ भी देखा गया।

बलात्कार के आरोपित को तृणमूल कॉन्ग्रेस छात्र परिषद (टीएमसीपी) के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष त्रिनंकुर भट्टाचार्य के साथ भी देखा गया।

त्रिनानकुर भट्टाचार्य के साथ मोनोजीत मिश्रा

कई तस्वीरों में मोनोजीत मिश्रा टीएमसीपी कार्यालय में कार्यक्रम आयोजित करते और सत्तारूढ़ टीएमसी पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेते हुए भी नजर आया।

बलात्कार के आरोपित की फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, उसकी उम्र करीब 30 साल है और उसके 6.2K फॉलोअर्स हैं। मोनोजीत मिश्रा खुद को एक ‘क्रिमिनल लॉयर’ बताता है जो अलीपुर कोर्ट में प्रैक्टिस करता है।

क्या है पूरा मामला?

मोनोजीत मिश्रा ने अपने दो साथियों, जैब अहमद (19) और प्रमित मुखर्जी (30) के साथ मिलकर एक महिला के साथ बलात्कार किया। यह घटना बुधवार (25 जून 2025) को शाम 7:30 बजे से रात 10:50 बजे के बीच साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज के अंदर हुई। महिला की शिकायत पर पुलिस ने गुरुवार (26 जून 2025) को मोनोजीत मिश्रा और जैब अहमद को गिरफ्तार कर लिया, जबकि प्रमित मुखर्जी को शुक्रवार (27 जून 2025) को पकड़ा गया।

पुलिस ने आरोपितों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। तीनों आरोपितों को शुक्रवार (27 मार्च 2025) को अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 4 दिन की हिरासत में भेज दिया गया। इस बीच पीड़िता की मेडिकल जाँच कराई गई है और उसका बयान भी दर्ज किया गया है।

बहरहाल, गैंगरेप की जानकारी सामने आने के बाद जब बीजेपी ने आरोपित के टीएमसी से संबंधों के आरोप लगाए तो इन आरोपों को खारिज कर दिया गया। लेकिन जब सोशल मीडिया पर फैली आरोपित मोनोजीत मिश्रा की तस्वीरें उसी की प्रोफाइल से सामने आने लगी, तब टीएमसी के पास भी बचाव का कोई रास्ता नहीं रह गया। ऐसे में उसकी गिरफ्तारी हो गई। हालाँकि गैंगरेप के आरोपित मोनोजीत मिश्रा जैसे ‘पॉवरफुल’ स्टूडेंट लीडर, जो खुद एक ‘क्रिमिनल लॉयर’ यानी वकील है, उसके खिलाफ मामला कहाँ तक पहुँचता है, ये देखने वाली बात होगी।

‘नॉर्वे-स्वीडन में इंडस्ट्री नहीं’ से ‘इंडस्ट्री से थोड़े रुकता है पलायन’ तक, CM बनने का ‘रोडमैप’ ही चोरी: बिहारियों को ‘सपना’ दिखा रहे PK खुद कितने समझदार?

नाम – प्रशांत किशोर, दावा – किसी को भी जिता सकते हैं चुनाव, काम – बिहारियों को सपने दिखाना, खुद का सपना – बिहार का मुख्यमंत्री बनना। कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाने का दावा, तो कभी दुनिया के सबसे बेहतरीन चुनावी रणनीतिकार होने का दंभ। बीते कुछ सालों से बिहार की गलियों की खाक छान रहे हैं, जनता को बरगला रहे हैं, कभी छात्र आंदोलन में शामिल होने लगते हैं, तो कभी किसी राजनीतिक पार्टी का ठेका ले लेते हैं.. ताकि बिहार की राजनीति में खुद को चर्चा में बनाए रख सकें।

हालाँकि उनकी पार्टी उप-चुनाव में हिस्सा ले चुकी है। अब वो दावा करते हैं कि पैसा बहुत कमा लिया, अब बिहार को विकसित बनाएँगे। वैसे, इस दावे की हकीकत हर कोई जानना चाहता है। इसके लिए वो तमाम मंचों पर भी जाते हैं। कुछ नया दावा कर देते हैं और अपनी दुकानदारी बनाए रखते हैं। इस बीच, प्रशांत किशोर उर्फ पीके ने ANI नाम की न्यूज एजेंसी से 1 घंटे से भी ज्यादा समय तक बातचीत की, जिसमें उन्होंने बिहार के विकास और लोगों के काम धंधों से लेकर पलायन तक पर अपने विचार रखे हैं। कई मुद्दों में से कुछ ‘अराजनीतिक मुद्दों’ पर उनकी बातों पर हम भी चर्चा करने वाले हैं।

इस इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने तमाम बातें की हैं। जिसमें ‘पलायन’, ‘बिहार का विकास’ और ‘विदेशों का विकास’ जैसी बातें आम जनता के काम की है। उन्हें जानना सबके लिए जरूरी हैं। दरअसल, प्रशांत किशोर ने कहा, “बिहार को बड़े उद्योग धंधों की जरूरत नहीं है और न ही यहाँ बड़े इंडस्ट्रियल पार्क बन सकते हैं। हम चारों ओर से जमीन से घिरे हुए हैं और हमारे यहाँ जनसंख्या का घनत्व अधिक है। हमें अपनी शिक्षा और सेवा क्षेत्रों को बढ़ावा देना होगा, हमें बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करनी होगी और हमें लोगों के हाथों में अधिक संसाधन उपलब्ध कराने होंगे ताकि लोग अपने दम पर कुछ कर सकें। बिहार में लोग मेहनती और परिश्रमी हैं,”

उन्होंने ये भी तर्क दिया कि उद्योग केवल तटीय राज्यों में ही स्थापित किए जा सकते हैं।

अब बात ये समझ में नहीं आती कि प्रशांत किशोर को एक बड़े उद्योग के असर का अंदाज है या नहीं। एक बड़ा उद्योग लगने का असर सिर्फ वहाँ काम करने वाले लोगों के जीवन में ही बदलाव नहीं लाता, बल्कि उस पर निर्भर कई छोटे उद्योग खुद ब खुद विकसित हो जाते हैं क्योंकि ये उस उद्योग की जरूरत को पूरी करता है। इतना ही नहीं एक व्यक्ति की नौकरी पूरे परिवार का संबल होता है।

खुद बिहार में जब 1907 में जमशेदपुर में टाटा स्टील का कारखाना लगाया गया था तो वहाँ खनिज तो मौजूद था लेकिन बाकी जरूरतों को टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी ने अपने हिसाब से पैदा किया। इस पर निर्भर सैकड़ों उद्योग आज भी आदित्यपुर जैसे इलाकों में चल रहे हैं। इन उद्योगों ने हजारों लोगों को रोजगार दिया है। इतना ही नहीं इसकी वजह से बने बाजार और रिहायशी इलाके अपने आप रोजगार पैदा कर रहे हैं। तो कहने का मतलब ये है कि जब आप माहौल देंगे और नई कंपनियाँ लगेंगी तो रोजगार सृजन होगा।

कभी विकसित राज्यों में से एक था बिहार

झारखंड को छोड़ भी दें तो बिहार में भी कई कंपनियाँ थी। भागलपुर की सिल्क इंडस्ट्री, मुजफ्फरपुर, दरभंगा की चीनी मिलें, बक्सर और बिहटा की पेपर मिलें, बरौनी का ऑयल रिफाइनरी, खाद कारखाना बिहार की शान हुआ करती थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 1951 में पूरे देश मे 6982 रजिस्टर्ड फैक्ट्री थी। इनमें से 455 अकेले बि​हार में थी यानी कुल रजिस्टर्ड फैक्ट्री का 6.51% अकेले बिहार में थी। आजादी के बाद पूरे देश में 56 चीनी मिलें थी। इनमें से 33 बिहार में थी जो रोजगार का 29.50% उपलब्ध कराता था। चीनी मिलों में सकरी,रैयाम, लोहट काफी मशहूर थे। इसी तरह मधुबनी का मलमल, किशनगंज का कागज उद्योग, दरभंगा के हाथी दाँत के सामान प्रसिद्ध थे। खगड़िया, किशनगंज, मुंगेर, पूर्णिया भी कई कृषि आधारित उद्योगों के लिए मशहूर थे। कुछ के नाम आप भी जान लीजिए…

  1. गया और पूर्णिया का लाख उद्योग
  2. पटना, मुंगेर, शाहाबाद का तेल मिल
  3. डालमिया नगर, समस्तीपुर, दरभंगा, पटना, बरौनी का कागज उद्योग
  4. हाजीपुर का प्लाईवुड
  5. गया, दीघा, मोकामा का चमड़ा उद्योग
  6. डालमिया नगर, खेलारी का सीमेंट उद्योग
  7. मुंगेर, बक्सर, गया, आरा का तंबाकू उद्योग
  8. मुंगेर, पटना, मानपुर, पंचरूखी का शराब उद्योग
  9. पटना का शीशा उद्योग
  10. मुंगेर का बंदूक उद्योग मशहूर था, लेकिन अब ये पुरानी बात हो गयी है।

इनमें से अधिकतर उद्योग धंधे 1985-2005 के बीच गलत नीतियों और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। यही वजह है कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय प्रतिशत 2012 में वही था जो 60 साल पहले 1951 में था।

इन कंपनियों में नई जान फूँकने के लिए मोदी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। राज्य सरकार चाहे तो इनमें गति ला सकती है। अगर प्रशांत किशोर इन उद्योग धँधों के विकास के लिए कोई प्लान बताएँ, तो बिहार का भला हो सकता है।

पलायन रोकने के लिए PK के पास नहीं कोई रणनीति

इस इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार से लोग पलायन कर रहे हैं क्योंकि लोगों के पास रोजगार नहीं है। साथ ही ये भी कहते हैं कि बड़े उद्योगों से रोजगार की समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने यह नहीं बताया कि अगर उद्योगों से नहीं तो नौकरियाँ कहाँ से आएँगी?

इंटरव्यू के दौरान अजीब तर्क देते हुए उन्होंने कहा, “दिल्ली में निर्माण कार्य करने वाले अधिकांश श्रमिक बिहार से हैं। जब बिहार के पास पैसा होगा, तो इन लोगों को दिल्ली आने की जरूरत नहीं होगी, वे बिहार में ही बिल्डिंग फिटिंग, प्लास्टरिंग और अन्य काम कर लेंगे।” बिहार की दुर्गति की शायद यही वजह है कि नेता उद्योग धंधों की महत्ता को कमतर आँकते रहे हैं।

दरअसल बिहार में कॉन्ग्रेस और आरजेडी के जमाने में उद्योग धंधों की उपेक्षा की गई। ऐसे कानून बनाए गए जिससे बिहार के खनिज संसाधन राज्य के बाहर इस्तेमाल होने लगे। रेल भाड़ा सामान्यीकरण कानून ऐसा ही कानून था। स्वतंत्रता के बाद केंद्र सरकार का बनाया यह कानून 90 के दशक में खत्म हुआ था।

इस कानून के तहत धनबाद से राँची कोयला की ढुलाई में जितना रेल किराया लगता था, उतने ही भाड़े में यह धनबाद से मद्रास (अब चेन्नई) भी पहुँच जाता था। इसने उद्योगपतियों को समुद्र किनारे कोयला आधारित उद्योग लगाने को प्रोत्साहित किया। इसका असर बिहार पर अर्थव्यवस्था पर दिखा।

कॉन्ग्रेस के बाद 90 के दशक में लालू प्रसाद यादव का राज रहा. इस वक्त उद्योगों के बजाए सोशल जस्टिस पर जोर रहा। जातीय हिंसा का लोग शिकार हुए। उद्योग धंधे एक के बाद एक ढहते चले गए। जातिवादी राजनीति, गुंडागर्दी ने बिहार से लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर किया। किसानी से घर चलाना मुश्किल हुआ तो लोग दूसरे राज्यों की ओर चल पड़े और अब ये हाल है कि छोटे-छोटे किसान अब दूसरे राज्यों में मजदूर बन गए हैं।

फिनलैंड, नार्वे का नाम लेकर किया गुमराह

बिहार में रोजगार सृजन के लिए औद्योगीकरण की आवश्यकता नहीं है, इस तर्क के समर्थन में उन्होने छोटे-छोटे विकसित देशों न्यूजीलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और अन्य देशों का उदाहरण दिया। उन्होंने दावा किया, “इन देशों से किसी भी देश में कोई बड़ा उद्योग धंधा नहीं है और फिर भी ये देश अत्यधिक विकसित हैं।”

वैसे प्रशांत किशोर दुनिया के कई देशों में घूमने का दावा करते हैं। वो कहते हैं कि भारत में सोशल मीडिया क्रांति ही वो लेकर आए। खुद को पॉलिटिकल ‘ठेकेदारी’ का भी अगुवा बताते हैं। लेकिन इस इंटरव्यू में वो इतना बढ़-चढ़कर बोलने लग जाते हैं कि उन्हें ध्यान ही नहीं रहता कि रुकना कहाँ है। दरअसल, जिन देशों का नाम प्रशांत किशोर ने लिया, सिर्फ माहौल बनाने के लिए, उन देशों के बारे में सही जानकारी इन्हें है ही नहीं।

ऐसा इसलिए, क्योंकि बाल्टिक देशों (नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड) और न्यूजीलैंड जैसे जिन देशों का नाम वो ले रहे हैं, पहली बात वो बेहद विकसित देश हैं। विकास एक दिन की प्रक्रिया नहीं होती। हालाँकि ये सभी देश महज 200-300 सालों में आगे बढ़े हैं। अब अगर इन देशों की अर्थव्यवस्था, उद्योग धंधों की बात करें तो प्रशांत किशोर का दावा है कि इन देशों के पास कोई इंडस्ट्री नहीं है। जबकि उनका दावा बिल्कुल बकवास है।

दरअसल, इन देशों में ऐसे उद्योग हैं जो उनके सकल घरेलू उत्पाद में काफी योगदान देते हैं। फिनलैंड की बात करें तो यहाँ उद्योग दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। सर्विस सेक्टर के बाद इसका नंबर आता है। यहाँ मेटल इंडस्ट्री, कैमिकल इंडस्ट्री, फॉरेस्ट इंडस्ट्री, फूड अल्कोहल और तंबाकू इंडस्ट्री के अलावा टैक्सटाइल और लेदर इंडस्ट्री भी है।

प्रशांत किशोर ने दुनिया में सबसे ज्यादा प्रति व्यक्ति आय वाले देश नॉर्वे का भी नाम लिया। नॉर्वे में तेल और गैस पर आधारित पेट्रोलियम उद्योग अर्थव्यवस्था में काफी अहम योगदान देते हैं। इस देश में विनिर्माण उद्योग भी काफी आगे है। सर्विस सेक्टर यहाँ तीसरे स्थान पर है। मछली पकड़ना, खेती-बाड़ी और हाइड्रो पावर सेक्टर भी यहाँ काफी विकसित है।

न्यूजीलैंड में कृषि, डेयरी, माँस और ऊन उद्योग काफी विकसित हैं। इसके अलावा एल्यूमिनियम जैसे धातु आधारित उद्योग, लकड़ी और पेपर आधारित उद्योग, कैमिकल आधारित उद्योग भी काफी हैं। इसके अलावा खनन और सेवा उद्योग जैसे स्वास्थ्य सेवा, वित्त और आईटी शामिल हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर का सिर्फ उद्योग धंधों के बिना इन देशों के विकसित होने का दावा करना महज फिजूल की बात है, क्योंकि वो ये नहीं बताते कि इन देशों का विकास कैसे हुआ। सबसे अहम बात, ये देश उपनिवेशीकरण के दौर में आगे बढ़े-जिसकी चर्चा फिर कभी।

प्रशांत किशोर के पास बिहार को आगे ले जाने का कोई रोडमैप नहीं

वैसे, प्रशांत किशोर ने बिहार में जॉब यानी नौकरी पैदा करने की जरूरत पर भी बात की। उन्होंने कहा, “जब लोगों को शिक्षा के साथ-साथ संसाधन और काम करने के लिए अनुकूल माहौल मिलेगा, तो बिहार से पलायन रुक जाएगा। इंडस्ट्री से पलायन नहीं रुकता है। पलायन रोकना है तो लोगों के लिए जॉब जेनरेट करनी होगी। “

चलिए, ये बात तो है कि प्रशांत किशोर बिहार में नौकरी पैदा करने की जरूरत को मानते हैं, लेकिन ये होगा कैसे? बस, इसी सवाल का जवाब उनके पास नहीं मिलता। प्रशांत किशोर आरजेडी, कॉन्ग्रेस, जेडीयू और बीजेपी को भला- बुरा कह रहे हैं। पीएम मोदी से लेकर लालू यादव, तेजस्वी यादव, राहुल गाँधी सबका नाम ले रहे हैं और उनकी कमियाँ गिना रहे। राज्य में क्या है, क्या नहीं? सबकी बात करते हैं लेकिन विकास का विजन गायब है। दूसरे नेताओं की तरह शब्दों को चासनी में डाल कर बस जनता को बरगलाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में जनता प्रशांत किशोर की बात से कितना ‘कन्विंस’ हो पाएगी, ये तो समय ही बताएगा।