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बालों का गुच्छा, हॉकी स्टिक और लिक्विड… कोलकाता गैंगरेप मामले में पुलिस ने क्राइम सीन रीक्रिएट करवाया, 7 घंटों का CCTV खंगालकर जुटाए सबूत: मेडिकल रिपोर्ट में आई नोंचने, खरोंचने और काटने की बात

कोलकाता के लॉ कॉलेज में 24 साल की छात्रा से गैंगरेप मामले में सामने आई मेडिकल रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया। रिपोर्ट में पीड़िता के साथ हुए बलात्कार के सबूत मिले हैं और ये भी पता चला है कि उसके साथ कितनी दरिंदगी की गई। पुलिस ने पीड़िता के बयान और रिपोर्ट आने के बाद अब सीन रीक्रिएट कराया है। साथ ही घटनास्थल से बालों के गुच्छों से लेकर लिक्विड की बोतल तक बरामद की है।

मेडिकल रिपोर्ट में क्या

दरअसल, शुक्रवार (27 जून 2025) को पीड़िता की मेडिकल जाँच कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेड एंड हॉस्पिटल (CNMC) में कराई गई थी। मेडिकल रिपोर्ट से ही गैंगरेप की पुष्टि हुई है। पीड़िता के साथ जबरन रेप किया गया। इससे शरीर पर काटने और नाखून से खरोंचने के निशान मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की गर्दन पर खरोंच के निशान हैं। वहीं सीने और जांघों के भीतरी हिस्सों में चोटें मिली हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पीड़िता की ब्लड प्रेशर रीडिंग 120/82 और पल्स रेट 72 थी। प्रेग्नेंट रिपोर्ट नैगेटिव सामने आई है। वहीं, एलएमपी (अंतिम मासिक धर्म) 18 जून 2025 को दर्ज किया गया है। साथ ही फोरेंसिक टीम ने तीन स्वाब नमूने लिए है, जिनसे डीएनए और बाकी जैविक साक्ष्य जुटाए जाएँगे।

क्राइम सीन रीक्रिएट किया

गैंगरेप की शिकायत पर पुलिस ने लॉ कॉलेज में क्राइम सीन रीक्रिएट किया। साउथ सबअर्बन डिवीजन की डीसी बिदिशा कलिता ने बताया कि वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। इसीलिए करीब 7 घंटे की सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया है। यह फुटेज दोपहर 3.30 जे से रात 10.50 बजे तक का है।

पुलिस ने घटनास्थल यानी स्टूडेंट यूनियन रूम को ठीक तरह से खँगाला। इसके अलावा वॉशरूम और गार्डरूम की भी तलाशी ली गई। पुलिस ने इन तीनों जगह से वारदात से संबंधित अहम सुराग जुटाए हैं। इनमें बालों के गुच्छे, हॉकी स्टिक और कुछ लिक्विड से भरी बोतलें शामिल हैं।

पीड़िता का बयान दर्ज

पुलिस ने पीड़िता का बयान भी दर्ज कर लिया है। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि 25 जून 2025 की शाम 7.30 बजे से रात 10.50 बजे तक उसके साथ रेप किया गया। इसके साथ बेरहमी से भी पीटा। पीड़िता के अनुसार, घटना के वक्त वह ठीक से सांस भी नहीं ले पा रही थी। पीड़िता ने आरोपितों से अस्पताल ले जाने की भी भीख माँगी, लेकिन हैवानों ने उसकी एक न सुनी।

पीड़िता ने बताया कि मुख्य आरोपित मनोजीत ने उसे शादी करने के लिए प्रपोज किया। लेकिन पीड़िता ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जिसके चलते पीड़िता से गैंगरेप किया गया। आरोपितों ने गैंगरेप का वीडियो भी बनाया। धमकी दी कि अगर किसी से कुछ भी कहा तो वीडियो वायरल कर देंगे।

क्या है मामला ?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में 25 जून 2025 को लॉ कॉलेज में गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया गया। यहाँ कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर के एक रूप में 24 वर्षीय छात्रा को बुलाया। वहाँ तीन लोग पहले से मौजूद थे, जिन्होंने छात्रा को बंधक बना लिया। इसके बाद तीन घंटे तक छात्रा का बलात्कार किया।

मामले में मुख्य आरोपित तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) छात्र नेता और कॉलेज का पूर्व छात्र मनोजीत मिश्रा है। इसके अलावा कॉलेज की ही छात्र प्रोमित मुखर्जी और जैद अहमद का भी नाम सामने आया है। पुलिस ने मामले की जाँच के बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, लॉ कॉलेज के गार्ड पिनाकी बनर्जी को भी अरेस्ट किया गया है। गार्ड पर वारदात के दौरान बाहर खड़े रहकर पहरेदारी करने का आरोप है।

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ISS पर मौजूद IAF के ग्रुप कैप्टन शुधांशु शुक्ला से पीएम मोदी ने की बात, कहा – यह गगनयान की सफलता का पहला अध्याय: जानें – ध्यान से लेकर ग्रैविटी तक पर पूछे सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station) पर मौजूद भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की है। शुभांशु पहले भारतीय हैं, जो इस मिशन के पायलट बनकर अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुँचे हैं।

इस बातचीत में पीएम मोदी ने 140 करोड़ भारतीयों की ओर से उन्हें बधाई दी और कहा, “आप मातृभूमि से सबसे दूर हैं, लेकिन भारतीय दिलों के सबसे करीब हैं। आपके नाम में शुभ है और आपकी यात्रा नए युग का शुभारंभ (auspicious beginning) है।” शुभांशु ने जवाब में कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व ने उनके सपनों को सच करने का मौका दिया। उन्होंने देशवासियों के प्यार और आशीर्वाद का शुक्रिया अदा किया।

अंतरिक्ष से दिखा भव्य भारत का नजारा

शुभांशु ने बताया कि जब वे पहली बार अंतरिक्ष में पहुँचे और पृथ्वी को देखा, तो वह नजारा बेहद भव्य (Magnificent) था। उन्होंने कहा, “पृथ्वी पूरी तरह एक दिखती है, कोई बॉर्डर या सीमा रेखा नहीं दिखती।” खास तौर पर भारत को अंतरिक्ष से देखने का अनुभव उनके लिए भावुक करने वाला था। उन्होंने कहा, “हम नक्शे में भारत को जितना बड़ा देखते हैं, असल में वह उससे कहीं ज्यादा विशाल और गौरवशाली (Glorious) लगता है।”

शुभांशु ने यह भी बताया कि अंतरिक्ष से देखने पर यह अहसास होता है कि कोई देश, राज्य या सीमा नहीं है, सिर्फ मानवता (Humanity) है और पृथ्वी हमारा एकमात्र घर है।

जीरो ग्रैविटी के अनुभव पर कही ये बात

पीएम मोदी ने शुभांशु से पूछा कि जीरो ग्रैविटी (Zero Gravity) में जीवन कैसा है और वे वहाँ कैसे ढल रहे हैं। शुभांशु ने हँसते हुए बताया कि अंतरिक्ष में सब कुछ अलग है।

उन्होंने कहा, “पिछले एक साल की ट्रेनिंग में मुझे सारे सिस्टम्स (Systems) और प्रक्रियाओं (processes) की जानकारी थी, लेकिन यहाँ आकर सब बदल गया। हमारे शरीर को ग्रैविटी की आदत होती है, लेकिन यहाँ माइक्रो ग्रैविटी (microgravity) में छोटी-छोटी चीजें भी मुश्किल हो जाती हैं। मैं अभी बात करते वक्त अपने पैर बाँध रखा हूँ, वरना ऊपर उड़ जाऊँगा। माइक छोड़ दूँ तो वो तैरने लगेगा।” उन्होंने बताया कि पानी पीना, चलना और सोना भी चुनौतीपूर्ण है।

पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में हलवा के बारे में भी पूछा

पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि शुभांशु जो गाजर का हलवा लेकर गए थे, उसे अपने साथियों को खिलाया या नहीं। शुभांशु ने जवाब दिया, “मैं गाजर का हलवा, मूँग दाल का हलवा और आमरस लेकर आया था। मेरे साथी अंतरिक्ष यात्रियों ने इसका स्वाद लिया और सबको बहुत पसंद आया। कुछ साथियों ने कहा कि वे भारत आएँगे तो फिर से इसका स्वाद लेंगे।”

उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात थी कि भारत की समृद्ध खानपान परंपरा (Culinary Heritage) को दुनिया के सामने पेश कर सके।

पीएम मोदी ने ध्यान के बारे में भी पूछा सवाल

पीएम मोदी ने पूछा कि क्या अंतरिक्ष में माइंडफुलनेस (Mindfulness) और ध्यान (Meditation) का कोई लाभ मिलता है। शुभांशु ने कहा, “यहाँ सब कुछ उल्टा-पुल्टा है। माइंडफुलनेस बहुत मदद करती है। लॉन्च के दौरान या तनावपूर्ण (Stressful) परिस्थितियों में दिमाग को शांत रखने से बेहतर फैसले लिए जा सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विज्ञान (Science) और आध्यात्मिकता (Spirituality) दोनों में है। शुक्ला ने कहा, “यह मिशन भारत की प्रगति की पहली सीढ़ी है। हमारा देश तेजी से आगे बढ़ रहा है।”

पीएम मोदी ने शुभांशु को दिया होमवर्क

पीएम मोदी ने शुभांशु को गगनयान मिशन (Gaganyaan Mission), भारतीय स्पेस स्टेशन, और चंद्रमा पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री की लैंडिंग जैसे भविष्य के मिशनों के लिए होमवर्क दिया। उन्होंने कहा, “आपके अनुभव इन मिशनों के लिए बहुत कीमती होंगे।” शुभांशु ने जवाब दिया, “मैं हर अनुभव को स्पंज (Sponge) की तरह सोख रहा हूँ। ये अनुभव गगनयान और अन्य मिशनों के लिए बहुत काम आएंगे। मेरे साथी भी पूछते हैं कि वे कब गगनयान पर जा सकते हैं। मुझे यकीन है कि ये सपना जल्द पूरा होगा।”

युवाओं के लिए खास संदेश

शुभांशु ने देश के युवाओं को संदेश दिया, “सपने बड़े देखो और कभी हार मत मानो। सफलता का कोई एक रास्ता नहीं होता, लेकिन मेहनत और लगन से आप जरूर कामयाब होंगे। स्काई इज नेवर द लिमिट (Sky is never the limit)।” उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अंतरिक्ष स्टेशन पर तिरंगा लगाया, जो उनके लिए गर्व का पल था। “यह देखकर गर्व होता है कि भारत आज इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर पहुँच चुका है।”

गगनयान मिशन के लिए पहला स्टेप

पीएम मोदी ने कहा कि शुभांशु की यह यात्रा गगनयान मिशन की सफलता का पहला अध्याय है। पीएम मोदी ने कहा, “यह यात्रा सिर्फ अंतरिक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत की यात्रा को गति देगी। भारत अब सिर्फ उड़ान नहीं भरेगा, बल्कि भविष्य में नई उड़ानों के लिए मंच तैयार करेगा।” उन्होंने शुभांशु और उनके साथियों को मिशन की सफलता के लिए शुभकामनाएँ दीं और कहा, “हम सबको आपकी वापसी का इंतजार है। माँ भारती का सम्मान बढ़ाते रहिए।”

बातचीत के अंत में शुभांशु ने कहा, “यह मेरे लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा देश का सामूहिक गौरव है।” उन्होंने अंतरिक्ष से तिरंगे को दिखाते हुए कहा, “यह तिरंगा मैंने कल ही यहाँ लगाया। यह मुझे बहुत भावुक करता है।” अंत में उन्होंने जोर से कहा, “भारत माता की जय!” इस पल ने पूरे देश को गर्व और खुशी से भर दिया।

राजदीप सरदेसाई ने रथ यात्रा पर फैलाया TMC का प्रोपेगेंडा तो इंडियन एक्सप्रेस निकला एक कदम आगे: ममता सरकार के बनाए मंदिर को बता दिया पुरी जगन्नाथ धाम के बराबर

खुद को ‘पत्रकार’ कहलाना पसंद करने वाले ‘प्रोपेगेंडा बाज’ राजदीप सरदेसाई ने ममता बनर्जी की चरणवंदना की सभी हदें पार कर दी हैं। इसी कड़ी में राजदीप सरदेसाई ने नए विवाद को जन्म दे दिया है। दरअसल, इस बार उन्होंने ओडिशा के पुरी में बने 900 साल पुराने जगन्नाथ धाम की तुलना पश्चिम बंगाल के दीघा में ममता बनर्जी सरकार द्वारा बनाए गए नए जगन्नाथ मंदिर से कर दी है।

मौजूदा समय में पुरी जगन्नाथ की रथ यात्रा चल रही है। इस पवित्र मौके को भी उन्होंने ममता सरकार के लिए प्रोपेगेंडा फैलाने में इस्तेमाल किया। ऐसे में शुक्रवार (27 जून 2025) को राजदीप ने ट्वीट किया, “जगन्नाथ यात्रा के अब दो ठिकाने हैं: एक असली पुरी में, दूसरा नया दीघा में।”

राजदीप सरदेसाई के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ये ट्वीट एक सोची-समझी चाल का हिस्सा लगता है, जिसमें पुरी के ऐतिहासिक जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। बता दें, दीघा का मंदिर अभी दो महीने पहले ही (30 अप्रैल 2025) को खुला है।

माना जा रहा है कि यह ममता बनर्जी की सरकार की एक रणनीति है, जो हिंदू भावनाओं को भुनाकर आगामी विधानसभा चुनावों में लाभ लेना चाहती है। टीएमसी सरकार द्वारा बनाए गए दीघा मंदिर को पुरी के पौराणिक मंदिर के समकक्ष दिखाने की यह कोशिश न केवल धार्मिक परंपराओं का अपमान है, बल्कि जनता की आस्था से भी सीधा खिलवाड़ है। इस बयान को लेकर सोशल मीडिया से लेकर धार्मिक संस्थानों तक विरोध हो रहा है।

कौन हैं राजदीप सरदेसाई?

राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष पहले पत्रकार थीं और अब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में राजदीप का ये ट्वीट TMC के लिए प्रचार करने की कोशिश माना जा रहा है। रथ यात्रा जैसे पवित्र मौके पर उन्होंने ऐसा दिखाने की कोशिश की जैसे ममता सरकार ने दीघा में भगवान जगन्नाथ के लिए कोई नया और खास ठिकाना बना दिया हो।

दरअसल, यह टीएमसी सरकार की चुनाव से पहले हिंदू वोटरों को लुभाने की कोशिश मानी जा रही है। सालों तक मुस्लिम तुष्टिकरण और ‘बाहरी बनाम बंगाली’ जैसे नैरेटिव पर चलने वाली पार्टी को अब समझ आ गया है कि सिर्फ इन्हीं बातों से चुनाव नहीं जीता जा सकता।

इसलिए अब पार्टी दीघा में बने जगन्नाथ मंदिर जैसे धार्मिक प्रयासों को दिखाकर हिंदुओं को अपनी तरफ करने की कोशिश कर रही है। राजदीप सरदेसाई के इस पोस्ट इसी एजेंडा को बढ़ावा देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।

इंडियन एक्सप्रेस ने भी फैलाया ऐसा ही झूठ

नेशनल अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस‘ ने भी शनिवार (28 मार्च 2025) को एक लेख छापा, जिसमें पुरी के जगन्नाथ धाम को दीघा के नए मंदिर के बराबर दिखाने की कोशिश की गई। लेख का शीर्षक था, “दीघा में नए जगन्नाथ मंदिर के उभरने के बीच ओडिशा ने पुरी में रथ यात्रा के लिए पूरी ताकत झोंक दी।” इस लेख में ऐसा दिखाया गया जैसे दोनों मंदिरों के बीच कोई तुलना हो सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस की समाचार रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

पुरी जगन्नाथ धाम और दीघा के मंदिर की कोई तुलना नहीं

बता दें कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर और पश्चिम बंगाल के दीघा में बने नए जगन्नाथ मंदिर दोनों की आपस में न तो कोई तुलना हैं और न ही इनमें कोई प्रतिस्पर्धा है। पुरी का मंदिर 12वीं शताब्दी में राजा अनंतवर्मन चोडगंगा देव ने बनवाया था।

यह 900 साल पुराना है और हिंदू आस्था परंपरा और कलिंग शैली की वास्तुकला का केंद्र माना जाता है। इसका संचालन गजपति महाराजा की अध्यक्षता में एक समिति करती है। वहीं दीघा का मंदिर हाल ही में करीब दो महीने पहले खुला है और इसे पश्चिम बंगाल सरकार ने बनवाया है।

यह पुरी मंदिर की एक प्रतिकृति (रेप्लिका) मात्र भर है। इस मंदिर के उद्घाटन के समय ये विवादों में भी घिर गया था, खासकर ‘हलाल प्रसाद‘ और मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोपों को लेकर। ममता सरकार अब इस नए मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम‘ कहकर राजनीतिक रूप से इस्तेमाल कर रही है, जिससे लोगों को यह भ्रम हो कि यह पुरी के प्राचीन मंदिर जितना ही महत्वपूर्ण है। इससे यह भी आरोप लग रहा है कि सरकार जानबूझकर असली जगन्नाथ धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

TMC का दोहरा चरित्र हो चुका है बेनकाब

ममता सरकार ने जहाँ दीघा में नया मंदिर बनाकर हिंदुओं को लुभाने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर पश्चिम बंगाल के मुस्लिम-बहुल मालदा जिले में 629 साल पुरानी ‘रथ मेला‘ पर रोक लगा दी। ये दिखाता है कि TMC की हिंदू-समर्थक छवि सिर्फ दिखावा है।

पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती ने साफ कहा है कि दीघा का मंदिर ‘भगवान जगन्नाथ के प्रति भक्ति से कोई लेना-देना नहीं रखता।’ फिर भी राजदीप सरदेसाई और इंडियन एक्सप्रेस जैसे मीडिया हाउस दीघा के मंदिर को पुरी के जगन्नाथ धाम के बराबर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी वजह से लोगों में गलतफहमी और नाराजगी दोनों ही बढ़ती जा रही है।

ममता सरकार कर रही हिंदुओं की आस्था से खिलवाड़

ममता बनर्जी की TMC सरकार ने दीघा में मंदिर बनाकर और उसे ‘जगन्नाथ धाम’ कहकर हिंदू धर्म की परंपराओं और शास्त्रों का अपमान किया है। राजदीप सरदेसाई जैसे पत्रकार और इंडियन एक्सप्रेस जैसे अखबार इस प्रचार में शामिल होकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं। पुरी का जगन्नाथ धाम 900 साल की आस्था और संस्कृति का प्रतीक है, जबकि दीघा का मंदिर सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए बनाया गया नया मंदिर है, जो दिखने में जगन्नाथ धाम की तरह हो सकता है। ऐसे में इस तरह का प्रचार न सिर्फ गलत है, बल्कि हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है।

न अस्थियाँ बहाईं, न पाँव में पहनी चप्पल: 3 साल से इंतजार कर रहा कन्हैया लाल का बेटा, अब तक नहीं मिला न्याय

उदयपुर में 25 जून 2025 को हुए चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड को तीन साल बीतने वाले हैं। लेकिन अब तक उन्हें इंसाफ नहीं मिल सका है। 28 जून 2022 को हुए इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया था। कन्हैयालाल तेली पेशे से दर्जी थे। उनकी दुकान पर दिनदहाड़े गला रेतकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया था।

कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश तेली पिता के निधन के तीन साल बाद आज भी न्याय और इंसाफ की उम्मीद लिए बैठे हुए हैं। पिता की हत्या के बाद यश ने तीन प्रण लिये थे। इसी प्रण के तहत उन्होंने अब तक न पिता की अस्थियों का विसर्जन किया है। न ही अपने बाल कटवाए हैं और न ही पैरों में चप्पल पहनी है।

बीते तीन साल से यश बिना जूते-चप्पल के नंगे पैर रहते हैं। यश का कहना है कि जब तक पिता के हत्यारों को फाँसी की सजा नहीं मिल जाती। वह अपना कोई भी प्रण नही तोड़ेंगे।

क्या था मामला?

28 जून 2022 को उदयपुर के हथीपोल क्षेत्र में कन्हैयालाल की सिलाई की दुकान पर आरोपित मोहम्मद रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद ग्राहक बनकर आए थे। कन्हैयालाल जब उनकी नाप ले रहे थे उसी समय दोनों ने उन पर पर धारदार हथियार से हमला किया और उनकी हत्या कर दी।

इतना ही नहीं, इस घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया। वायरल वीडियो में दोनों आरोपितों ने हत्या करने की बात भी स्वीकार की थी। हत्या करने के पीछे दोनों ने कन्हैयालाल द्वारा इस्लाम का अपमान करने का हवाला दिया था।

दरअसल कन्हैयालाल ने पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर विवादित बयान का समर्थन करने वाली पोस्ट शेयर की थी। दोनों ने इसे ही हत्या का कारण बताया। मनबढ़ हत्यारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धमकी दी थी। इस घटना के बाद उदयपुर में इंटरनेट सेवा सस्पेंड कर कर्फ्यू लगा दिया गया था।

मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? बेटे यश ने नेताओं पर लगाया झूठे वादे करने का आरोप

घटना के बाद राजस्थान पुलिस ने रियाज अत्तारी और गौस मोहम्मद को राजसमंद जिले से गिरफ्तार कर लिया था। बाद में 29 जून 2022 को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मामले की जाँच शुरू की।

NIA ने इसे आतंकी घटना करार देते हुए गैरकानूनी गतिविधियाँ (निवारण) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया। और मुख्य आरोपितों सहित कुल 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया। इन आरोपितों में मोहम्मद जावेद, फरहाद मोहम्मद, मोहसिन,आसिफ, मोहम्मद मोहसिन, वसीम अली और मुस्लिम मोहम्मद शामिल रहे। वहीं दो अन्य आरोपितों में पाकिस्तान के कराची के रहने वाले सलमान और अबू इब्राहिम आज भी फरार हैं।

गिरफ्तार हुए 9 आरोपितों में से दो आरोपितों को NIA की विशेष अदालत ने जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि आरोपित फरहाद मोहम्मद उर्फ बबला को जमानत इसलिए दी गई, क्योंकि उस पर केवल आर्म्स एक्ट के तहत मामला था और कोई हथियार बरामद नहीं हुआ था। वहीं, 5 सितंबर 2024 को राजस्थान हाईकोर्ट ने मोहम्मद जावेद को जमानत दी, क्योंकि NIA उसकी लोकेशन या उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी।

कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश का कहना है कि अभी तक इस मामले को फास्ट ट्रैक में नहीं लिया गया है। 6 महीने से कोई पेशी भी नहीं हुई है। उनका कहना है कि घटना के बाद राजनेताओं ने बड़े-बड़े वादे किए थे और आरोपितों को फाँसी की सजा दिलाने का भरोसा दिया था। लेकिन आज भी आरोपितों को सजा नहीं मिल पाई है और वे न्याय के इंतजार में बैठे हुए हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में जिस अधिकारी ने संभाला ‘जासूसी का मोर्चा’, मोदी सरकार ने उसे सौंपी खुफिया एजेंसी की कमान: जानें – R&AW के नए चीफ IPS पराग जैन के बारे में सबकुछ

भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) को 1 जुलाई 2025 से एक नया ‘सुपर जासूस’ मिलने जा रहा है। मोदी सरकार ने शनिवार (28 जून 2025) को पंजाब कैडर के 1989 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पराग जैन को RAW का नया प्रमुख नियुक्त किया। वे मौजूदा प्रमुख रवि सिन्हा की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 जून को खत्म हो रहा है।

पराग जैन का नाम खुफिया हलकों में ‘सुपर जासूस’ के तौर पर गूँजता है। चाहे वह ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ में आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करना हो, जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क बनाना हो या फिर कनाडा और श्रीलंका में भारत-विरोधी साजिशों को नाकाम करना हो। आईपीएस पराग जैन ने हर मोर्चे पर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। वो हमेशा पर्दे के पीछे रहकर भारत की सुरक्षा की ढाल बने रहे हैं। इस लेख में आगे हम R&AW की जगह RAW लिख रहे हैं।

आज जब भारत को पाकिस्तान, चीन, खालिस्तानी नेटवर्क और साइबर हमलों जैसे कई बाहरी खतरों का सामना करना पड़ रहा है। तब पराग जैन की नियुक्ति एक मजबूत संदेश देती है – भारत अब अपनी खुफिया रणनीति को और सशक्त करने जा रहा है।

पराग जैन – ग्राउंड इंटेलीजेंस में महारत रखने वाला सुपर जासूस

पराग जैन कोई साधारण पुलिस अधिकारी नहीं हैं। 1989 बैच के पंजाब कैडर के इस आईपीएस अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत तब की, जब पंजाब आतंकवाद (Terrorism) के आग में जल रहा था। भटिंडा, मानसा और होशियारपुर जैसे संवेदनशील जिलों में उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा संभाला। उस दौर में जैन ने जमीनी स्तर पर खतरनाक ऑपरेशनों को अंजाम दिया। बाद में वे चंडीगढ़ के एसएसपी और लुधियाना के डीआईजी बने, जहाँ उन्होंने आतंकवाद-विरोधी अभियानों में अहम भूमिका निभाई।

लेकिन पराग जैन की असली ताकत तब सामने आई, जब वे RAW से जुड़े। वर्तमान में वे RAW के विशेष निदेशक हैं और एविएशन रिसर्च सेंटर (ARC) का नेतृत्व कर रहे हैं। ARC वो इकाई है, जो हवाई निगरानी और तकनीकी खुफिया जानकारी (TECHINT) जुटाने में माहिर है। जैन ने इसे और मजबूत किया। उनकी खासियत है कि वे इंसानों से मिली खुफिया जानकारी (HUMINT) और तकनीकी जानकारी को मिलाकर ऐसी रणनीति बनाते हैं, जो दुश्मनों के लिए पहेली बन जाती है।

उनका करियर सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। कनाडा और श्रीलंका में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने खालिस्तानी नेटवर्क और भारत-विरोधी साजिशों पर गहरी नजर रखी। 1 जनवरी 2021 को उन्हें पंजाब में पुलिस महानिदेशक (DGP) का प्रमोशन मिला, लेकिन तब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर थे, इसलिए सिर्फ नाममात्र का लाभ मिला। फिर भी उन्हें केंद्रीय DGP के समकक्ष पद पर रखा गया, जो उनकी साख को दर्शाता है।

जैन चुपचाप काम करते हैं, लेकिन उनके काम का असर इतना बड़ा होता है कि दुश्मन के होश उड़ जाते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर में RAW का मास्टरस्ट्रोक

पराग जैन का नाम हाल के समय में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के लिए सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। ये ऑपरेशन भारत की खुफिया और सैन्य ताकत का एक शानदार नमूना है। इस ऑपरेशन में जैन की अगुआई में RAW और ARC ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों की सटीक जानकारी जुटाई, जिसके आधार पर मिसाइल हमले किए गए।

बाहर से देखने में ये हमले कुछ मिनटों की कार्रवाई लगते हैं, लेकिन इसके पीछे सालों की मेहनत थी। जैन और उनकी टीम ने जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क (Spy Network) बनाया, लोगों से सूचनाएँ जुटाईं, सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य तकनीकों से जानकारी को सत्यापित (Verify) किया। ये काम इतना आसान नहीं था। पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश में खुफिया जानकारी जुटाने के लिए साहस, रणनीति और धैर्य चाहिए। जैन ने अपने अनुभव और तकनीकी दक्षता के दम पर इसे मुमकिन बनाया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के साथ-साथ ये संदेश भी दिया कि भारत अपनी सीमाओं से बाहर भी दुश्मनों को जवाब दे सकता है। ये ऑपरेशन भारत की रणनीतिक ताकत का प्रतीक बन गया, और इसके पीछे पराग जैन जैसे सिपाही थे, जो पर्दे के पीछे काम करते हैं।

भारत-पाक तनाव में RAW की भूमिका अहम

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा से एक गंभीर मुद्दा रहा है। हाल के वर्षों में ये तनाव और बढ़ा है, खासकर जब से भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित (Suspend) किया है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा मिला है और उनके भारत-विरोधी बयान इस तनाव को और भड़का रहे हैं। उन्होंने कश्मीर को ‘पाकिस्तान की गले की नस’ कहा और आतंकवाद को फिर से प्राथमिकता दी। ऐसे में RAW की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

जैन का जम्मू-कश्मीर में गहरा अनुभव और पाकिस्तान से जुड़े मामलों की उनकी समझ उन्हें इस चुनौती से निपटने के लिए सबसे मुफीद बनाती है। अनुच्छेद 370 (Article 370) के निरस्तीकरण और बालाकोट एयर स्ट्राइक (Balakot Airstrike) जैसे मौकों पर उन्होंने जमीनी खुफिया जानकारी जुटाने में अहम भूमिका निभाई। पाकिस्तान में खुफिया नेटवर्क बनाना आसान नहीं है, क्योंकि वहाँ की खुफिया एजेंसी ISI हर कदम पर नजर रखती है। फिर भी जैन ने अपने नेटवर्क और रणनीति से कई बार पाकिस्तान को चौंका दिया है।

विदेशों में RAW के ऑपरेशन्स बेहद जटिलता और चुनौतीपूर्ण

RAW का काम भारत की सीमाओं के बाहर खुफिया जानकारी जुटाना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। लेकिन विदेशों में ऑपरेशन्स चलाना बच्चों का खेल नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती है गुप्त रूप से काम करना। अगर किसी एजेंट की पहचान उजागर (Expose) हो जाए, तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसके अलावा, दुश्मन देशों में तकनीकी निगरानी (Surveillance), साइबर हमले (Cyber attacks) और ड्रोन जैसे खतरे बढ़ गए हैं।

पाकिस्तान और चीन जैसे देशों में खुफिया नेटवर्क बनाना बेहद जटिल है। वहाँ की सरकारें और उनकी खुफिया एजेंसियाँ भारत के हर कदम पर नजर रखती हैं। फिर भी जैन ने कनाडा में खालिस्तानी नेटवर्क पर नजर रखकर और श्रीलंका में भारत के हितों को बढ़ावा देकर दिखाया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी माहिर हैं। कनाडा में उन्होंने खालिस्तानी नेटवर्क की साजिशों को समय रहते उजागर किया और दिल्ली को चेतावनी दी कि ये नेटवर्क बड़ा खतरा बन सकता है। श्रीलंका में उन्होंने तमिल संगठनों और चीन की बढ़ती मौजूदगी पर नजर रखी।

लेकिन अब चुनौतियाँ और बड़ी हैं। हाल के वर्षों में RAW को कुछ नाकामियों का सामना करना पड़ा। मालदीव और बांग्लादेश में संकटों को समय रहते नहीं भाँप पाने की आलोचना हुई। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले को रोकने में RAW नाकाम रहा, जिससे सवाल उठे। जैन को अब जमीनी और तकनीकी खुफिया जानकारी को और मजबूत करना होगा। साइबर खुफिया (Cyber Intelligence), ड्रोन हमले और सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) जैसे नए खतरे उनकी सबसे बड़ी चुनौती होंगे।

भारत सरकार को RAW पर इतना भरोसा क्यों?

RAW भारत की बाहरी सुरक्षा की रीढ़ है। सरकार को इस एजेंसी पर भरोसा इसलिए है, क्योंकि ये बार-बार अपनी काबिलियत साबित कर चुकी है। चाहे वह बालाकोट एयर स्ट्राइक हो, ऑपरेशन सिंदूर हो या फिर अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू-कश्मीर में स्थिरता बनाए रखना – RAW ने हमेशा सटीक और समय पर जानकारी दी। इस एजेंसी की खासियत है कि ये गुप्त रूप से काम करती है और इसके ऑपरेशन्स की जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुँचती।

RAW के पास अनुभवी अधिकारी, आधुनिक तकनीक और वैश्विक नेटवर्क हैं। ये न केवल दुश्मन देशों पर नजर रखती है, बल्कि दोस्त देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnerships) भी बनाए रखती है। पराग जैन जैसे अनुभवी नेतृत्व के साथ सरकार को उम्मीद है कि RAW और प्रभावी होगी।

पराग जैन का कार्यकाल और उनसे उम्मीदें

पराग जैन 1 जुलाई 2025 से दो साल के लिए RAW प्रमुख का कार्यभार संभालेंगे, यानी उनका कार्यकाल जून 2027 तक रहेगा। इस दौरान उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी भारत की बाहरी सुरक्षा को मजबूत करना। पाकिस्तान और चीन के अलावा, खालिस्तानी गतिविधियां, साइबर हमले और दक्षिण एशियाई देशों में अस्थिरता (Instability) जैसे मुद्दों पर उनकी नजर रहेगी

जैन से उम्मीद है कि वे RAW को और आधुनिक बनाएँगे। ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और साइबर खुफिया जानकारी जैसे क्षेत्रों में RAW को और भी मजबूत करना उनकी प्राथमिकता होगी। साथ ही जमीनी नेटवर्क को और गहरा करना भी जरूरी है, ताकि भविष्य में पहलगाम जैसे हमले रोके जा सकें।

जैन की नियुक्ति क्यों खास?

पराग जैन की नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि भारत की खुफिया रणनीति में एक बड़ा कदम है। RAW प्रमुख की दौड़ में सुनील अचैया जैसे नाम भी चर्चा में थे, लेकिन सरकार ने जैन पर भरोसा जताया। इसका कारण है उनकी संतुलित सोच, जमीनी अनुभव और तकनीकी समझ।

जैन चुपचाप लेकिन असरदार ढंग से काम करते हैं। वे टीम के साथ मिलकर काम करने में यकीन रखते हैं और सिस्टम में बदलाव लाने की कला जानते हैं। उनकी नियुक्ति ये बताती है कि सरकार RAW को सिर्फ एक जासूसी संस्था नहीं, बल्कि एक रणनीतिक सुरक्षा स्तंभ (Pillar) के रूप में देख रही है।

पराग जैन क्या बदलाव लाएँगे?

जैन की सबसे बड़ी खासियत है कि वे फाइलों और कागजी काम तक सीमित नहीं रहते। वे ग्राउंड लेवल पर मजबूत नेटवर्क बनाते हैं। चाहे वो कनाडा हो, कश्मीर हो या खाड़ी देश, जैन हर जगह भारत की खुफिया मौजूदगी को और मजबूत कर सकते हैं।

उम्मीद है कि वे RAW को ड्रोन तकनीक, साइबर खुफिया, और AI जैसे क्षेत्रों में और सशक्त करेंगे। साथ ही, वे जमीनी नेटवर्क को और गहरा करेंगे, ताकि भारत को हर खतरे की समय रहते जानकारी मिल सके।

भारत की खुफिया एजेंसी का एक नया अध्याय, एक नया संदेश

पराग जैन का RAW प्रमुख बनना सिर्फ एक नियुक्ति नहीं, बल्कि भारत की खुफिया रणनीति में एक नया अध्याय है। ऑपरेशन सिंदूर, बालाकोट, और जम्मू-कश्मीर जैसे उनके पिछले कारनामों ने उनकी काबिलियत को साबित किया है। लेकिन चुनौतियाँ कम नहीं हैं। पाकिस्तान, चीन, खालिस्तानी नेटवर्क और साइबर हमले जैसे खतरे उनके सामने हैं।

जैन का अनुभव, उनकी HUMINT और TECHINT को मिलाने की कला और उनकी रणनीतिक सोच RAW को और मजबूत कर सकती है। आने वाले दो साल भारत की खुफिया और सुरक्षा नीतियों के लिए बेहद अहम होंगे। जैन की अगुआई में RAW न केवल भारत की सुरक्षा को और सशक्त करेगी, बल्कि वैश्विक खुफिया मंच पर भारत को और मजबूत बनाएगी।

अब सवाल ये है – क्या पराग जैन भारत को वैश्विक खुफिया मंच पर एक और बड़ा खिलाड़ी बनाएँगे? उनकी शुरुआत तो शानदार रही है। ऐसे में भारत के दुश्मनों को अब सावधान हो जाना चाहिए, क्योंकि अब परदे के पीछे से पराग जैन देख रहे हैं!

स्कूलों में जुम्बा डांस के विरोध में उतरे इस्लामी संगठन, बताया दीन के खिलाफ: बैकफुट पर केरल की वामपंथी सरकार

केरल में शिक्षा विभाग के जुम्बा डांस शुरू करने पर इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए हैं। इस्लामी कट्टरपंथी इसे ‘नैतिक मूल्यों के खिलाफ’ बता रहे हैं। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि लड़के-लड़कियों का एक साथ नाचना, घुलना-मिलना और कम कपड़े पहनना बिल्कुल गलत है।

वहीं वामपंथी सरकार ने दावा किया है कि यह फैसला छात्रों में तनाव कम करने और नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान का हिस्सा है।

इस्लामी कट्टरपंथी जुम्बा को लेकर आक्रोश में

रिपोर्ट के अनुसार, विजडम इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन के महासचिव टीके अशरफ ने साफ कहा, “मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकता, और मेरा बेटा इसमें शामिल नहीं होगा।” अशरफ ने जोर देकर कहा कि बच्चों को स्कूल में ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ मिलनी चाहिए, न कि ‘लड़के-लड़कियाँ कम कपड़ों में एक साथ नाचें’ वाली संस्कृति। अशरफ ने कहा कि मैं एक शिक्षक हूँ इसलिए इसे लागू नहीं करने दूँगा।

अपनी एक फेसबुक पोस्ट में टीके अशरफ कहते हैं कि नशे जैसी गंभीर समस्याओं का हल सिर्फ डांस नहीं हो सकता। अशरफ ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कोई वैज्ञानिक रिसर्च यह साबित कर सकता है कि जुम्बा नशे के इस्तेमाल को कम करता है। इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि यह पहल डीजे पार्टियों और पश्चिमी नाइटलाइफ को बढ़ावा देगी।

समस्त केरल जामियातुल उलमा के नेता नस्सर फैजी कूड़ाथई ने जुम्बा को ‘अनुचित’ और ‘छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन’ बताया। उन्होंने कहा, “जुम्बा कम से कम कपड़ों में एक साथ नाचने का तरीका है।”

समस्त केरल सुन्नी युवाजना संगम (SYS) के राज्य सचिव अब्दुस्समद पूकोटूर ने इसे सीधे तौर पर ‘नैतिक मूल्यों के खिलाफ’ बताया।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की छात्र शाखा मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन (MSF) ने भी विरोध किया। MSF के राज्य अध्यक्ष पीके नवास ने सवाल किया कि क्या सरकार ने इसे लागू करने से पहले कोई अध्ययन किया था।

सरकार का पलटवार

केरल की उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदु ने जुम्बा का बचाव किया। बिंदु ने कहा, “हम 21वीं सदी में हैं, यह 2025 है। हम 19वीं सदी या आदिम मध्ययुगीन काल में नहीं रह रहे हैं। सभी को समय के अनुसार सोचना चाहिए।” सामान्य शिक्षा विभाग ने भी जुम्बा का समर्थन किया है।

बयानबाजी और टकराव

जुम्बा विवाद पर इस्लामी कट्टरपंथी और CPM के बीच शब्दों का युद्ध छिड़ गया है। KNM नेता हुसैन मादावूर ने मंत्री आर बिंदु के बयान की आलोचना की। हुसैन ने कहा कि जुम्बा को स्कूलों में बिना किसी वैज्ञानिक आधार के थोपा जा रहा है।

हुसैन ने SFI सहित वामपंथी संगठनों को चेतावनी दी कि अगर वे अपना रुख नहीं बदलते, तो जनता उन्हें बदल देगी। हुसैन ने कहा, “प्रयास आदिम युग में लौटने का है, जब हम बिना कपड़ों के रहते थे।” हुसैन ने ‘कम कपड़े पहनकर अश्लील तरीके से नाचने’ को गलत बताया।

मंत्री बिंदु ने कहा था, “जुम्बा बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है। स्कूलों में जुम्बा कराने में क्या गलत है?”

वॉशिंगटन पोस्ट ने जोहरान ममदानी के हिंदू विरोधी जहर को ‘मोदी की आलोचना’ कह कर किया डाउलप्ले: माहौल बनाने में दोनों ‘मौसेरे भाई’, जानें – कैसे ‘दोगलई’ पर उतारू है ये अमेरिकी आउटलेट

न्यूयॉर्क सिटी के मेयर उम्मीदवार जोहरान ममदानी के हिंदू विरोधी बयानों को वॉशिंगटन पोस्ट ने बेशर्मी से ‘मोदी की कड़ी आलोचना’ बताकर पर्दा डालने की कोशिश की। गुरुवार (26 अप्रैल) को छपे एक लेख में इस अमेरिकी अखबार ने ममदानी के नफरत भरे बयानों को हल्का दिखाने की साजिश रची, ताकि उनके हिंदू विरोधी प्रचार को ‘राजनीतिक असहमति’ का जामा पहनाकर लोगों का ब्रेनवॉश किया जा सके।

ये कोई पहली बार नहीं है कि वॉशिंगटन पोस्ट ने हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले बयानों को नरम करके पेश किया हो। आइए, इस पूरी साजिश को बेनकाब करते हैं।

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलने वाला चेहरा है जोहरान ममदानी

भारतीय-युगांडा मूल का जोहरान ममदानी न्यूयॉर्क स्टेट असेंबली का सदस्य है और अब मेयर पद की रेस में है। प्रोग्रेसिव और सत्ता-विरोधी हलकों में उसकी तारीफ होती है, लेकिन भारत में उसके बयान आग की तरह सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। एक बयान में ममदानी ने पीएम नरेंद्र मोदी को ‘युद्ध अपराधी’ और ‘मुसलमानों के नरसंहार’ का जिम्मेदार ठहराया। ये सिर्फ मोदी पर हमला नहीं, बल्कि हिंदू धर्म और संस्कृति को निशाना बनाने की साफ कोशिश है। लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट ने इसे ‘मोदी की आलोचना’ का लेबल चिपकाकर ममदानी को बचाने की कोशिश की।

बीते माह एक फोरम में ममदानी ने मोदी की तुलना इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से की और दोनों को ‘युद्ध अपराधी’ करार दिया था। उसने 2002 के गुजरात दंगों का जिक्र करते हुए, उस वक्त के सीएम रहे मोदी को मुसलमानों की मौतों का जिम्मेदार ठहराया। ये बयान सिर्फ सियासी नहीं, बल्कि हिंदुओं के खिलाफ गहरी नफरत से भरे हैं। ममदानी की ये नफरत सिर्फ मोदी तक सीमित नहीं है; वो हिंदू धर्म को ही निशाना बनाता है।

राम मंदिर पर जहर और हिंदुओं का अपमान

जोहरान ममदानी ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को ‘मस्जिद के विध्वंस का उत्सव’ और ‘उत्पीड़न का हथियार’ कहा था। न्यूयॉर्क में दिया उसका ये बयान भारत के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पूरी तरह नजरअंदाज करता है, जो दशकों की कानूनी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बाद आया। राम मंदिर हिंदुओं के लिए आस्था का प्रतीक है, न कि कोई सियासी हथियार। ममदानी का ये बयान दुनिया भर के लाखों हिंदुओं का अपमान करता है, जो इसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर की बहाली मानते हैं। लेकिन वॉशिंगटन पोस्ट ने इस गंभीर हमले को भी ‘मोदी विरोध’ का रंग देकर हल्का कर दिया।

जनवरी 2024 में ममदानी ने न्यूयॉर्क में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन किया और इसे ‘हिंदुत्व उग्रवाद’ करार दिया। उसने मंदिर को ‘फासीवाद’ और हिंदू आकांक्षाओं को ‘हिंसक बहुसंख्यकवाद’ से जोड़ा। ये सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को कुचलने की कोशिश है। अगस्त 2022 में टाइम्स स्क्वायर पर ममदानी को एक नफरत भरी भीड़ का नेतृत्व करते देखा गया, जो ‘हिंदू कौन हैं… ह@$#मी’ जैसे अपमानजनक नारे लगा रही थी। ममदानी ने इस अमानवीय बर्ताव पर चुप्पी साधी और राम मंदिर के खिलाफ जहर उगलता रहा।

वॉशिंगटन पोस्ट ने हिंदू विरोध को पहनाया ‘मोदी विरोध’ का जामा

वॉशिंगटन पोस्ट ने ममदानी के इन खतरनाक बयानों को ‘मोदी की कड़ी आलोचना’ बताकर हिंदू समुदाय की चिंताओं को पूरी तरह अनदेखा किया। अखबार ने अभिषेक मनु सिंघवी के हवाले से ट्वीट किया कि ‘हिंदू-बहुल भारत और मुस्लिम-बहुल पाकिस्तान के बीच दशकों की दुश्मनी’ है। ये दावा न सिर्फ गलत है, बल्कि भारत के आंतरिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाने वाला है। ये साफ दिखाता है कि वॉशिंगटन पोस्ट का मकसद सिर्फ मोदी को निशाना बनाना नहीं, बल्कि हिंदू विरोधी प्रचार को धर्मनिरपेक्षता की आड़ में बढ़ावा देना है।

2008 में महाराष्ट्र के मालेगाँव बम धमाके की खबर में वॉशिंगटन पोस्ट ने ‘हिंदू आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल किया था। इस हमले में दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और अखबार ने इसे हिंदू समुदाय को बदनाम करने का मौका बनाया। ममदानी का इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) जैसे संगठनों से भी कनेक्शन है, जो बिना सबूत हिंदू समूहों पर ‘हिंदुत्व आतंक’ का आरोप लगाकर भारतीय-अमेरिकी हिंदुओं के खिलाफ डर और अविश्वास का माहौल बनाते हैं।

ममदानी की सच्चाई आ चुकी है सामने

एक्स पर एक भारतीय ने लिखा, “ममदानी की मेयर प्राइमरी जीत गर्व का पल हो सकती थी, लेकिन भारत के बारे में झूठ फैलाने, जैसे ‘गुजरात में कोई मुस्लिम नहीं बचा’ कहकर वो समर्थन नहीं पा सकता।”

फर्स्टपोस्ट के संपादक श्रीमॉय तालुकदार ने ममदानी को ‘आतंक समर्थक’ और ‘हिंदुओं से नफरत करने वाला कट्टरपंथी’ बताया। ये प्रतिक्रियाएँ दिखाती हैं कि ममदानी के बयान सिर्फ सियासी आलोचना नहीं, बल्कि हिंदू धर्म को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश हैं।

वॉशिंगटन पोस्ट का दोगलापन उजागर

वॉशिंगटन पोस्ट जैसे पश्चिमी मीडिया हाउस भारत की सामाजिक-धार्मिक जटिलताओं को अपनी वैचारिक सुविधा के लिए तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं। ममदानी के हिंदू विरोधी बयानों को ‘मोदी विरोध’ बताकर वो हिंदुओं की चिंताओं को खारिज करते हैं और नफरत को ‘राजनीतिक असहमति’ का लेबल देकर जायज ठहराते हैं। ये न सिर्फ हिंदुओं के जीवित अनुभवों का अपमान है, बल्कि ऐसी आवाजों को बढ़ावा देता है जो हिंदू पहचान को चरमपंथ से जोड़ती हैं।

लोकतंत्र में आलोचना की जगह है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को कुचला जाए। वॉशिंगटन पोस्ट की ये कवरेज हिंदुओं के खिलाफ पक्षपात और उनकी चिंताओं को दबाने की कोशिश है। जिम्मेदार पत्रकारिता का काम सच को साफ और निष्पक्ष तरीके से दिखाना है, न कि किसी समुदाय को बदनाम करने या नफरत फैलाने वालों का बचाव करना। ममदानी जैसे लोग और वॉशिंगटन पोस्ट जैसे मीडिया हाउस मिलकर हिंदू विरोधी प्रचार को हवा दे रहे हैं, और इसे ‘मोदी विरोध’ का नाम देकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘दोस्त ही दोस्त का रेप करे तो क्या करें’: कोलकाता गैंगरेप पर TMC सांसद कल्याण बनर्जी, ममता की पार्टी के दरिंदे को ‘दादा’ कहती थी पीड़िता फिर भी नहीं छोड़ा; FIR की डिटेल

कोलकाता लॉ कॉलेज में एक 24 वर्षीय छात्रा के साथ गैंगरेप में पीड़िता की शिकायत की कॉपी सामने आई है। पीड़िता ने बताया TMC छात्र नेता मोनोजीत मिश्रा और उसके साथियों ने बलात्कार किया। इस घटना पर TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने विवादित बयान देकर कहा कि ‘अगर दोस्त ही दोस्त का रेप करे तो पुलिस क्या करेगी।’

चुप रहने की दी धमकी- पीड़िता

पीड़िता के साथ घटना 25 जून 2025 को साउथ कलकत्ता लॉ कॉलेज में घटी थी। पीड़िता की शिकायत के मुताबित, वह कॉलेज में परीक्षा संबंधी फॉर्म भरने आई थी और उसे छात्र संघ कक्ष में बुलाया गया। पीड़िता ने शिकायत में बताया कि TMC छात्र परिषद के महासचिव मोनोजीत मिश्रा ने शादी का दवाब डाला जिसको मैंने ठुकरा दिया।

पीड़िता की शिकायत में मोनोजीत ने उसके प्रेमी को नुकसान पहुँचाने और माता-पिता को झूठे आरोपों में फँसाने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता को कॉलेज के अंदर बंधक बनाया। मोनोजीत मिश्रा ने अपने दो साथियों जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी के साथ मिलकर बलात्कार किया।

पीड़िता ने आगे बताया कि मोनोजीत के पैर भी पकड़े लेकिन उसने नहीं छोड़ा। जबरन गार्ड रूम ले जाया गया, जहाँ मोनोजीत ने उसे निर्वस्त्र कर जबरदस्ती रेप किया और अन्य दो साथी खड़े होकर वीडियो बना रहे थे।

पीड़िता ने बताया कि मुझे पैनिक अटैक आया और साँस लेने में दिक्कत हुई, लेकिन तब भी किसी ने मदद नहीं की। पीड़िता ने आरोपितों को अस्पताल ले जाने को भी कहा। पीड़िता के मुताबिक कॉलेज का मुख्य गेट बंद था और गार्ड भी असहाय था।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि घटना का वीडियो बनाया और उसे चुप रहने के लिए ब्लैकमेल किया गया। पीड़िता ने कहा कि जब मैं जाने लगी तो मोनोजीत ने हॉकी स्टिक से मारने की कोशिश की भी।

संगठन से वफादारी का दबाव

पीड़िता का आरोप है कि गैंगरेप से पहले उसे टीएमसी छात्र संगठन के प्रति वफादारी साबित करने को कहा गया। उसे और 7 लोगों को यूनियन रूम बुलाया गया। वहाँ मोनोजीत मिश्रा ने संगठन और अपनी ताकत की बात की।

फिर प्रमित मुखर्जी ने उसे बाहर बुलाकर मोनोजीत और संगठन के प्रति उसकी वफादारी पूछी। पीड़िता ने विश्वास दिलाया कि वह हमेशा संगठन का समर्थन करेगी, क्योंकि वह लड़कियों की सचिव थी।

वापस आने पर मोनोजीत ने पूछा कि क्या प्रमित ने सब समझा दिया। छात्रा ने जवाब दिया, “हाँ दादा, मैं हमेशा यूनिट के साथ रहूँगी। चिंता मत करो।”

TMC सासंद के बिगड़े बोल

भाजपा ने तस्वीरें जारी कर इसे ‘बलात्कारियों को राजनीतिक संरक्षण’ कहा है।

TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने बलात्कार को लेकर कई आपत्तिजनक बातें कहीं। कल्याण बनर्जी ने कहा, “अगर कोई दोस्त अपने दोस्त का रेप करता है, तो क्या कर सकते हैं? क्या स्कूलों में पुलिस तैनात होगी?”

पुलिस ने की कार्रवाई

पुलिस ने FIR दर्ज की है। तीन लोग गिरफ्तार हुए हैं। मुख्य आरोपित मोनोजीत मिश्रा (TMC छात्र नेता) है। अन्य दोस्त जैब अहमद और प्रमित मुखर्जी हैं।

पुलिस ने मेडिकल जाँच करवाई है। गवाहों के बयान दर्ज किए गए। आरोपितों के फोन जब्त हुए। वीडियो रिकॉर्डिंग की तलाश जारी है। डॉक्टरों को शारीरिक हमले के सबूत मिले हैं।

स्कूटी टच होने पर यश को चाकुओं से गोदा या मुस्लिम लड़की से दोस्ती में हत्या? पीड़ित माँ बोली- मेरे बच्चे को साजिश के तहत मारा, गफ्फार के पूरे परिवार से हम लोगों को खतरा

दिल्ली के शाहदरा जिले में शुक्रवार (27 जून 2025) सुबह गीता कॉलोनी के रानी गार्डन इलाके में 19 वर्षीय यश की अमान, रहमान और लकी ने चाकू मारकर हत्या की। इस मामले में मृतक की माँ ने बताया कि हमला मुस्लिम लड़की से दोस्ती के चक्कर में हुआ है।

शुरुआती जाँच में सामने आया था कि स्कूटी टच हो जाने के चलते अमान और रहमान ने यश पर धारदार चाकू से हमला किया। अब पुलिस ने तीनों आरोपितों (अमान, रहमान, लकी) को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना के दौरान यश के साथ अमन शर्मा था। अमन ने बताया कि अंबेडकर पार्क शिव मंदिर के पास स्कूटर का शीशा दो लड़कों से टकराया। उन्होंने यश पर बंदूक तान दी फिर उसे चाकू मार दिया। यश को अस्पताल ले गए जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया। अमन ने कहा दोषियों को सज़ा मिलनी चाहिए।

रोड रेज नहीं, प्रेम प्रसंग में मारा- मृतक की माँ

मृतक की माँ ने पुलिस की रोड रेज की थ्योरी को नकारकर कहा, “छोटी सी टक्कर पर कोई बेटे को नहीं मारेगा।” माँ ने दावा किया कि उनके बेटे को प्रेम प्रसंग के कारण मारा गया है।

माँ ने बताया कि यश की एक मुस्लिम दोस्त गुल्लो थी। परिवार को शक है कि इसी दोस्ती के कारण यश की हत्या हुई। माँ ने यह भी कहा कि आरोपित का पहले भी आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। माँ ने लकी नाम के एक और लड़के का नाम लिया। लकी गुल्लो का दोस्त है और उसने पहले यश को जान से मारने की धमकी दी थी।

माँ ने कहा कि पुलिस अपराधियों के घर को सुरक्षा दे रही है। जबकि उनके भतीजे की जान खतरे में है, जो इस घटना का गवाह है। माँ ने पुलिस से गुल्लो और उसके परिवार से पूछताछ करने को कहा है।

माँ के अनुसार, गुल्लो के पास मामले से जुड़ी और जानकारी हो सकती है। माँ को डर है कि गुल्लो के पिता ‘गफ्फार’ के बेटे हथियारों के साथ घूमते हैं, जिससे उनके परिवार को खतरा है।

पुलिस का बयान

मामले में डीसीपी ने बताया कि लक्ष्मी नगर के आरएस ग्रोवर अस्पताल से कॉल आई। जाँच में पता चला यश अपने चचेरे भाई अमन शर्मा के साथ गीता कॉलोनी में था। वहाँ झगड़ा हुआ। झगड़े के दौरान अमान ने यश की पीठ के निचले हिस्से में चाकू मारा।

अस्पताल ले जाने पर यश को मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में तीन लोग शामिल हैं। इनमें अमान, लकी और एक नाबालिग हैं। उन्हें पूर्वी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया अमान का आपराधिक इतिहास है, लकी का नहीं।

12 पत्रकारों को मिला 2025 का देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान, ऑपइंडिया के अनुपम कुमार सिंह को मिला ‘उत्कृष्ट डिजिटल पत्रकार’ का पुरस्कार: दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संपादक आशुतोष झा की जूरी ने किया चयन

साहस और निर्भीकता के साथ पत्रकारिता करने वाले 12 पत्रकारों को शुक्रवार (27 जून 2025) को 12 श्रेणियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2025 से नवाजा गया। इस कड़ी में ऑपइंडिया के एसोसिएट एडिटर अनुपम कुमार सिंह को उत्कृष्ट डिजिटल पत्रकार के सम्मान से पुरस्कृत किया गया है।

शुक्रवार को इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र की ओर से दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब के स्पीकर हॉल एनेक्सी में यह सम्मान समारोह आयोजित किया गया था जिसमें अलग-अलग विधाओं में पत्रकारिता की नींव को मजबूत कर रहे पत्रकारों को सम्मानित किया गया।

देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान 2025 में सम्मानित हुए पत्रकारों का चयन प्रक्रिया में शामिल निर्णायक मंडल के अध्यक्ष और दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संपादक आशुतोष झा समेत कई अन्य वरिष्ठ मीडिया कर्मी और पत्रकार भी कार्यक्रम का हिस्सा बने।

इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत कुमार सहगल रहे तो वहीं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी मुख्य वक्ता रहे।

नवनीत सहगल ने इस अवसर पर कहा कि पत्रकारों को फेक न्यूज से बचना चाहिए। उन्हें चाहिए कि सटीक और तथ्यों के आधार पर खबरों को सबके सामने लाएँ जिससे समाज का भरोसा उन पर बना रहे।

वहीं, मुख्य वक्ता रहे प्रदीप जोशी ने कहा कि पत्रकार नारद कुल के वंशज हैं। उन्हें लोगों के हित की बात करनी चाहिए। समाज निर्माण के लिए जागरूकता से भरी खबरें पत्रकार ही देश-दुनिया के सामने ला सकते हैं। भारत 2047 तक विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर है जिसमें कई सार्थक खबरों को समाज में पहुँचाने की हमें जरूरत है।

इन पत्रकारों को मिला सम्मान

  • ऑर्गेनाइजर की वरिष्ठ संवाददाता शुभी विश्वकर्मा को उत्कृष्ट युवा पत्रकार
  • दैनिक जागरण डिजिटल की राजनीतिक संपादक स्मृति रस्तोगी को उत्कृष्ट स्त्री सरोकार/ महिला संवेदना पत्रकारिता
  • पंजाब केसरी के संवाददाता अमित कुमार को उत्कृष्ट अभिनव पत्रकार
  • दैनिक जागरण के प्रमुख संवाददाता संजीव गुप्ता को उत्कृष्ट ग्रामीण/पर्यावरण पत्रकारिता
  • एनएमएफ न्यूज के संपादक परमानंद खेतान को उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर (यूट्यूब)
  • NECU की सहायक प्रोफेसर डॉ मोनिका वर्मा को उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर (एक्स)
  • किरण यादव को इंस्टाग्राम पर उत्कृष्ट कंटेंट क्रिएटर
  • रिपब्लिक शंखनाद की श्वेता सिंह को उत्कृष्ट साहसिक पत्रकार
  • दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन प्लानिंग के प्रोफेसर निरंजन कुमार को उत्कृष्ट स्तंभकार
  • द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के सीनियर एसोसिएट एडिटर राजेश कुमार ठाकुर को उत्कृष्ट पत्रकार (प्रिंट)
  • डीडी न्यूज़ के वरिष्ठ संवाददाता अमरेंद्र गुप्ता को उत्कृष्ट पत्रकार टीवी देवऋषि नारद सम्मान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली का प्रांत कार्यवाहक अनिल गुप्ता भी कार्यक्रम में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि संघ के शताब्दी वर्ष में पत्रकारों को सम्मानित करते हुए गर्व हो रहा है। 2 अक्टूबर 2025 को विजयादशमी के दिन संघ 100 वर्षों का हो जाएगा।