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10 मिनट में घर पहुँचेगा किराने का सामान, 19 साल के दो युवकों के स्टार्टअप को मिले ₹449 करोड़

क्विक कॉमर्स ग्रॉसरी डिलीवरी ऐप Zepto ने नई ऊँचाई हासिल करते हुए $60 मिलियन जुटाया है। इस डिलीवरी ऐप को यूएस Y Combinator और Glade Brook Capital जैसे निवेशकों से फंडिंग में $60 मिलियन (तकरीबन 449 करोड़ रुपए) मिला है। 10 मिनट में ग्रॉसरी डिलीवरी करने वाली स्टार्टअप Zepto की शुरुआत मुंबई के 19 वर्षीय आदित पालिचा और कैवल्या वोहरा ने की है।

इस ऐप के जरिए घर के जरूरी सामानों को ऑनलाइन मँगाने के लिए आपको काफी पहले से बुकिंग करने की जरूरत नहीं होगी। महज 10 मिनटों में सामान आपके दरवाजे पर होगा। भारत में कोरोना महामारी को लेकर लगाए गए लॉकडाउन के बीच इसे काफी बढ़ावा मिला। 

मुंबई स्थित स्टार्टअप ने रविवार (31 अक्टूब, 2021) को एक बयान में कहा कि उसे पहले से ही नेक्सस वेंचर, ग्लोबल फाउंडर्स और सिलिकॉन वैली के एंजेल निवेशक लैची ग्रूम और नीरज अरोड़ा का समर्थन प्राप्त है। सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, पलिचा ने सटीक मूल्यांकन का खुलासा किए बिना कहा कि फर्म का वैल्यू ‘$200 मिलियन से $ 300 मिलियन के बीच’ है। वहीं रिसर्च फर्म रेडसीर के मुताबिक, इस साल के अंत तक क्विक कॉमर्स के 30 करोड़ डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और 2025 तक बढ़कर $24 बिलियन होने की उम्मीद है। 

जानकारी के मुताबिक पालिचा और वोहरा ने पिछले साल स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग प्रोग्राम में एडमिशन लिया था, लेकिन स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने इसे छोड़ने का फैसला किया। मुंबई स्थित स्टार्टअप अपने ग्राहकों की संख्या का विस्तार करने, अधिक कर्मचारियों को नियुक्त करने और नए शहरों में डार्क स्टोर्स की संख्या का विस्तार करने के लिए धन का इस्तेमाल करेगा। 

यह फिलहाल बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली में उपलब्ध है और अगले 30 दिनों में हैदराबाद, चेन्नई, पुणे और कोलकाता में लॉन्च होगा। इस साल के अंत तक इसकी 100 डार्क स्टोर्स तक विस्तार करने की योजना है, जिससे लगभग 100 पिन कोड की सर्विसिंग होगी। इसका उद्देश्य 10 मिनट के अंदर सामान की डिलीवरी करना है।

कोफाउंडर पलिचा ने इकॉनॉमिक्स टाइम्स को बताया, “कोई भी भारत में व्यापक रूप से कॉमर्स में परफेक्ट नहीं है। यदि इस मॉडल पर अमल करने वाली कुछ पुरानी कंपनियों को देखें तो उनमें से अधिकतर फोकस्ड नहीं हैं। वे एक साथ कई अलग-अलग चीजों में शामिल हो जाते हैं, जो किसी भी कंपनी के लिए गिरावट का सबसे बड़ा कारण है।”

फिलहाल कंपनी में वेयरहाउसिंग स्टाफ को छोड़कर 300 कॉर्पोरेट कर्मचारी हैं और अगले कुछ महीनों में इसे चौगुना करने की योजना है। पालिचा ने कहा कि राजस्व के मामले महीने दर महीने 200% बढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक, Zepto की डिलीवरी का औसत समय करीब आठ मिनट है।

‘दिल्ली की सीमाओं पर अब पक्की किलेबंदी’: राकेश टिकैत ने केंद्र को दिया 26 नवंबर तक का ‘अल्टीमेटम’, अगले 6 महीने की तैयारी

‘किसान नेता’ राकेश टिकैत ने एक बार फिर से केंद्र सरकार को धमकी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से धमकाया, “केंद्र सरकार के पास 26 नवंबर, 2021 तक का समय है। उसके बाद 27 नवंबर से किसान गाँवों से ट्रैक्टरों से दिल्ली के चारों तरफ आंदोलन स्थलों पर बॉर्डर पर पहुँचेगा और पक्की किलेबंदी के साथ आंदोलन स्थल पर तम्बुओं को मजबूत करेगा।” बता दें कि दिल्ली पुलिस ने किसान प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क पर अवैध रूप से बनाए गए अस्थायी ढाँचों को हटाना शुरू कर दिया है।

इससे पहले राकेश टिकैत ने धमकाते हुए कहा था कि किसानों को अगर बॉर्डरो से जबरन हटाने की कोशिश हुई तो वे देश भर में सरकारी दफ्तरों को गल्ला मंडी बना देंगे। उन्होंने कहा था कि हमारी लड़ाई ‘तीन काले कृषि कानूनों’ के खिलाफ और MSP पर गारंटी कानून को लेकर है। राकेश टिकैत ने धमकी दी थी कि जिन किसानों की फसल कहीं नहीं बिक रही है, वो दिल्ली में फसल बेचने जाएँगे। उन्होंने संसद भवन में जाकर फसल बेचने तक की धमकी दी थी।

आगामी उत्तर प्रदेश चुनावों को लेकर भी उन्होंने दावा किया है कि भाजपा कभी निष्पक्ष चुनाव नहीं होने देगी और जनता द्वारा उसे वोट न दिए जाने के बावजूद भी जीत उसी की होगी। राज्य में हुए हलिया पंचायत चुनावों की ओर करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा में भी ऐसा ही होगा। उन्होंने ये तक दावा कर दिया कि ‘बगैर वोट के चुनाव’ होगा। उन्होंने अपनी योजना बताते हुए कहा कि ‘संयुक्त किसान मोर्चा’ फसल बेचने दिल्ली जाएगी, जहाँ सुप्रीम कोर्ट और संसद भवन नजदीक ही है।

राकेश टिकैत ने पूछा कि किसान वापस जाकर क्या करेंगे? उन्होंने अगले 6 महीने की तैयारी और आंदोलन को लंबा खींचने की भी बात की। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार अड़ी हुई है तो किसान भी पीछे नहीं हटेंगे और दीवाली क्या, होली भी सड़कों पर ही मनाएँगे। उन्होंने केंद्र सरकार पर पूँजीपतियों और उद्योगपतियों के लिए काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ‘जिद्दी सरकार’ के सामने किसान भी अपनी जिद से नहीं हटेंगे। बता दें कि इस आंदोलन को अब लगभग एक साल हो गए हैं।

पंजाब को भारत से अलग करने के लिए खालिस्तानी संगठन SFJ ने करवाई वोटिंग: लंदन में लगे ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे

खालिस्तानी आतंकी संगठनों ने अलग देश की माँग को लेकर ‘जनमत संग्रह’ का काम शुरू कर दिया है। खबर है कि 31 अक्टूबर को अमेरिका के खालिस्तानी संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस (SFJ)’ ने जनमत संग्रह का पहला राउंड आयोजित किया था। इसके लिए ब्रिटिश सिखों को लंदन जाकर वोट देना था कि क्या पंजाब एक अलग देश बनना चाहिए या नहीं। लंदन में वोटिंग के बाद अब आगे ये सिलसिला यूरोप, यूएस और कनाडा में भी चलेगा। इसके बाद भारत में राय ली जाएगी।

सिख फॉर जस्टिस ने भारतीय मूल वाले सभी 18 वर्ष के ऊपर वाले लोगों से वोट देने को कहा था। ये वोटिंग वेस्टमिंनस्टर के एलिजाबेथ 2 सेंटर में हुई। इस दौरान लोगों ने न केवल भारत विरोधी नारे लगाए, खालिस्तान जिंदाबाद कहा बल्कि इन लोगों के हाथों मे खालिस्तानी झंडे भी जगह-जगह दिखाई दिए। रिपोर्ट बताती है कि बैलट पेपर पर लिखा था कि क्या भारत शासित पंजाब को एक स्वतंत्र देश बनना चाहिए? संगठन के संस्थापक खालिस्तानी पन्नू ने कहा कि 30 हजार सिखों ने रविवार को जनमत संग्रह पर अपना वोट दिया।

गौरतलब हो कि SFJ ने हाल में खालिस्तान का मैप भी जारी किया था जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के पंजाब को छोड़ दिया था। अपने अभियान में बड़ी चालाकी से संगठन ने उन इलाकों के बारे में बताया भी नहीं जो बँटवारे के समय पाकिस्तान के हिस्से में गए थे। शायद इसकी एक मुख्य वजह यह है कि पाकिस्तान हमेशा से खालिस्तान का समर्थन करता आया है और उसने तमाम खालिस्तानी आतंकियों को पनाह भी दी है।

बता दें कि ‘सिख फॉर जस्टिस‘ भारत में एक प्रतिबंधित संगठन है। इसका संस्थापक गुरपतवंत पन्नू है। जिसे भारत सरकार ने यूएपीए के तहत साल 2020 से आतंकी घोषित किया हुआ है। इस संगठन का इतिहास तमाम ऐसी वीडियोज और बयान जारी करने का है जो सिखों को भड़काने वाले होते हैं। इसी संगठन ने स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस से पहले सिखों को सरकारी इमारतों पर खालिस्तानी झंडे लहराने को कहा था। इसके अलावा जनवरी 2021 में सिख फॉर जस्टिस ने ये ऐलान भी किया था कि 26 जनवरी को जो भी कोई लाल किले पर खालिस्तानी झंडा लहराएगा उसे वो इनाम देंगे। इसके बाद ही ट्रैक्टर रैली में शामिल लोगों ने सिखों के दो झंडे लाल किले पर फहराए थे।

बबल थकान, परिवार से दूरी… न्यूजीलैंड से हार के बाद बोले बुमराह- वर्ल्ड कप से पहले IPLखेल रहे थे, खिलाड़ियों को अब ब्रेक चाहिए

पहले पाकिस्तान और फिर न्यूजीलैंड से टी 20 विश्वकप 2021 में हार के बाद भारतीय प्रशंसक निराश हैं। भारतीय टीम की सेमीफाइनल में पहुँचने की राह मुश्किल हो गई है। इस हार के बाद टीम के गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने बॉयो बबल थकान और परिवार से खिलाड़ियों की दूरी का जिक्र किया है। साथ ही कहा है कि खिलाड़ियों को ब्रेक की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमण की वजह से टीम को बॉयो बबल में रहना पड़ता है। ऐसा संक्रमण से बचाव के लिए एहतियातन किया जाता है।

बुमराह ने घर से काफी दिन दूर रहना भी खराब प्रदर्शन की एक वजह बताया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी 6 माह से परिवार से दूर हैं। टी 20 विश्वकप से पहले खिलाडियों ने आईपीएल में भाग लिया था। ऐसे में खिलाड़ियों को अब ब्रेक चाहिए। बुमराह ने यह बात रविवार (31 अक्टूबर 2021) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जसप्रीत बुमराह ने कहा कि यदि आप लंबे समय तक परिवार से दूर रहते हो तो ये आपके प्रदर्शन पर बुरा असर डालता है। हर चीज आपके कंट्रोल में नहीं होती है। हालाँकि बीसीसीआई ने इस बात का काफी प्रयास किया कि खिलाड़ी सहज रहें। वर्तमान समय की बात करते हुए बुमराह ने महामारी काल को मुश्किल बताया। साथ ही ये भी कहा कि खिलाडी नए माहौल में ढलने की कोशिश कर रहे हैं।

तेज गेंदबाज़ बुमराह ने मैच की शेड्यूलिंग पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कब, किस से और कहाँ खेलना है ये सब हमारे नियंत्रण में नहीं होता। ऐसे में कभी-कभी एक ब्रेक की भी जरूरत पड़ती है। न्यूजीलैंड से हार पर उन्होंने कहा कि टॉस हारने के बाद दूसरी पारी में विकेट बदल गई थी। हमारी आक्रामकता का दूसरी टीम ने फायदा उठाया और धीमी गेंदे फेंकी। बुमराह ने मैच के दौरान बाउंड्री बड़ी होने की भी बात कही।

गौरतलब है कि टी 20 विश्वकप 2021 में भारत को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा है। रविवार (31 अक्टूबर 2021) को न्यूजीलैंड ने भारत के दिए कुल 111 रन के लक्ष्य को मात्र 2 विकेट खो कर हासिल कर लिया था। अब भारत को सेमीफाइनल में पहुँचने की संभावना को बचाए रखने के लिए अपने अंतिम तीनों मैच जीतने होंगे।

‘अब्बू और अम्मी को अल्लाह के पास जन्नत भेज दिया, अगला नंबर भाभी का था’: कुतुबुद्दीन गिरफ्तार, कहा – अल्लाह का आदेश मेरी ड्यूटी

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले में कुतुबुद्दीन ने अपने पिता की हत्या कर दी। मृतक का नाम इब्राहिम खान है, जिनकी उम्र 68 वर्ष थी। हत्यारोपित ने अपना अपराध कबूल लिया है। उसके अनुसार उसने अपने अब्बू को जन्नत भेजा है। आरोपित ने बताया कि उसके अब्बू इस दुनिया में खुश नहीं थे। साथ ही उसने इस काम का फरमान अल्लाह की तरफ से आया बताया। यह हत्या 29 अक्टूबर 2021 (शुक्रवार) जुमे के दिन की गई थी।

यह घटना खंडार थाना क्षेत्र की बहरावण्डा खुर्द चौकी इलाके के गाँव छान की है। रिपोर्ट के अनुसार आरोपित ने पुलिस के आगे और सनसनीखेज खुलासे किए। उसके अनुसार रमजान के महीने में वो अपनी 68 वर्षीया माँ हमीदन बानो को भी मार चुका है।

माँ की हत्या के पीछे भी उसने अल्लाह के फरमान पर जन्नत भेजने वाली थ्योरी बताई। माता-पिता दोनों की हत्या के लिए कुतुबुद्दीन ने एक डंडे का प्रयोग किया था। दोनों के सिर पर वार किए गए थे। परिवार के बाकी सदस्यों ने इस घटना को छिपा लिया था और पुलिस को सूचना नहीं दी गई थी।

पुलिस द्वारा कुतुबुद्दीन की गिरफ्तारी के कारण परिवार में इसी प्रकार से तीसरी संभावित हत्या को टाल दिया। आरोपित के अनुसार अब वह अपनी भाभी को भी जन्नत पहुँचाना चाहता था। उसने पुलिस को बताया कि उसकी भाभी को अब दुनिया में रहने की कोई जरूरत नहीं है। अल्लाह ने उन्हें भी बुलावा भेजा है। कुतुबुद्दीन ने अल्लाह के आदेश को मानना अपनी ड्यूटी बताया।

अपने माँ-बाप की हत्या कर चुके कुतुबुद्दीन का निकाह कुछ ही साल पहले हुआ था। थोड़े समय के बाद पत्नी ने उसके साथ रहने से मना कर दिया था। बाद में दोनों में तलाक हो गया था। हत्यारोपित की उम्र लगभग 40 वर्ष है। आरोपित का मानसिक बीमारी का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

कुतुबुद्दीन पाँच वक्त का नमाज़ी बताया जा रहा है। अपने अब्बू की हत्या से पहले भी उसने नमाज़ पढ़ी थी। पुलिस के अनुसार यह हत्या दोपहर में तब की गई, जब मृतक इब्राहिम खान सो रहे थे। घटना के समय कुतुबुद्दीन का भाई अमीनुद्दीन बाजार गया था। हत्या के बाद आरोपित पिता की लाश के पास ही बैठा रहा। जब लोगों ने सवाल किए तब उसने अपने पिता को मार डालने की बात स्वयं कबूली।

कुतुबुद्दीन ने कहा कि उनके अब्बू काफी परेशान रहते थे। उनको अल्लाह के फरमान पर जन्नत भेज दिया हूँ। इस मामले की शिकायत पुलिस में हुई तो पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमॉर्टम के बाद परिवार वालों को सौंप दिया गया है। आरोपित को जेल भेज दिया गया है।

‘सरदार की जयंती पर जिन्ना का गुणगान क्यों’: अखिलेश यादव ने गाँधी-पटेल से की तुलना, स्वतंत्रता संग्राम का बताया नायक

यूपी के हरदोई में एक जनसभा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोहम्मद अली जिन्ना की तुलना महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के साथ की। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें किसी भी तरह का संघर्ष करना पड़ा होगा तो वह पीछे नहीं हटे। अखिलेश के बयान पर बीजेपी ने हमला करते हुए कहा कि जाति और मजहब की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव ऑस्ट्रेलिया से पढ़कर आए हैं। उनके इस ज्ञान को सुनकर मुलायम सिंह भी माथा पकड़ लेंगे। देश मुहम्मद अली जिन्ना को विभाजन का खलनायक मानता है। जिन्ना को आजादी का नायक कहना मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति है।

जनसभा को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “सरदार पटेल जमीन को पहचानते थे और जमीन को देखकर फैसले लेते थे। वह जमीन को समझ लेते थे तभी फैसला लेते थे, इसीलिए आयरन मैन के नाम से जाने जाते थे। सरदार पटेल जी, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना एक ही संस्था में पढ़ कर बैरिस्टर बन कर आए थे। एक ही जगह पर पढ़ाई-लिखाई की। वह बैरिस्टर बने। उन्होंने आजादी दिलाई अगर उन्हें किसी भी तरह का संघर्ष करना पड़ा होगा तो वह पीछे नहीं हटे।”

यादव ने आगे कहा, “एक विचारधारा जिस पर पाबंदी लगाई, अगर किसी ने पाबंदी लगाई थी तो लौह पुरुष सरदार पटेल जी ने उस विचारधारा पर पाबंदी लगाने का काम किया था। आज जो देश की बात कर रहे हैं वह हमें और आपको जाति और धर्म में बाँटने की बात कर रहे हैं। अगर हम जाति और धर्म में बँट जाएँगे तो हमारा, देश क्या होगा, दुनिया में हमारे देश की सबसे बड़ी पहचान यही है। हम अलग-अलग जाति और धर्म के लोग एक साथ रहने का काम करते हैं।”

सरदार वल्लभ भाई पटेल के 146वें जन्मदिवस के अवसर पर हरदोई जिले के माधौगंज कस्बे के एलपीएस स्कूल में समाजवादी विजय रथ यात्रा लेकर पहुँचे पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बीजेपी और योगी सरकार पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने कहा कि सपा नेताओं के खिलाफ जो ईडी और सीबीआई की जाँच चल रही है, वह कॉन्ग्रेस और भाजपा की देन है। कॉन्ग्रेस और भाजपा में कोई अंतर नहीं है। इस दौरान अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस को भाजपा और भाजपा को कॉन्ग्रेस बताया। 

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने रविवार को ट्वीट किया “सरदार पटेल की जयंती पर अखिलेश यादव मोहम्‍मद अली जिन्ना का गुणगान क्यों कर रहे हैं?”

मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के जल शक्ति मंत्री डॉक्टर महेंद्र सिंह ने रविवार को अखिलेश यादव का वीडियो साझा करते हुए ट्वीट किया “सरदार वल्लभ भाई पटेल जी की जयंती के अवसर पर भी इनको अपने आदर्श ‘जिन्‍ना’ याद आ ही गए।” 

भारतीय जनता पार्टी के राज्‍यसभा सदस्‍य और उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक बृजलाल ने एक वीडियो जारी कर कहा “अखिलेश यादव जी ने सरदार पटेल की तुलना जिन्ना से की है, नेहरू से की है और कहा है कि उनका भी आजादी में योगदान रहा है। अखिलेश यादव जी, सरदार पटेल की जयंती के एक दिन पहले 30 अक्टूबर, 1990 को आपके पिता श्री (मुलायम सिंह यादव) ने रामभक्तों पर अयोध्या में गोली चलवाई थी, माँ सरयू का आँचल लाल हो गया था। अब नवंबर आने वाला है। आज 31 अक्टूबर है। इतिहास पढ़ लेना उस दिन कनक भवन और हनुमानगढ़ी के बीच रामभक्तों का कत्लेआम किया गया था। 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे, तो ऐसे अखिलेश यादव तुम जिन्ना की तारीफ तो करोगे ही लेकिन इस प्रदेश के लोग, यहाँ के राष्ट्रवादी, चाहे यहाँ के राष्ट्रवादी मुसलमान तुमको कभी माफ नहीं करेंगे।” ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण में इतना नीचे मत गिरो।

मंगलसूत्र का सेक्स के साथ प्रचार: अल्टीमेटम के बाद सब्यसाची को वापस लेना पड़ा अभियान, बोले- बड़ी दुख की बात है

फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी ने मंगलसूत्र पर बनाया अपना विवादित विज्ञापन वापस ले लिया है। उन्हें मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इसमें कहा गया था कि अगर 24 घंटे में आपत्तिजनक विज्ञापन नहीं हटाया तो सब्यसाची के खिलाफ केस रजिस्टर कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

सब्यसाची की कंपनी ने अपने इंस्टाग्राम पर विज्ञापन वापस लेने की सूचना दी। इसमें कहा गया, “मंगलसूत्र अभियान का उद्देश्य समावेशिता और सशक्तिकरण के बारे में बात करना था। अभियान का उद्देश्य एक उत्सव के रूप में था और हमें गहरा दुख है कि इसने हमारे समाज के एक वर्ग को आहत किया है। इसलिए सब्यसाची ने इस अभियान को वापस लेने का फैसला किया है।”

गौरतलब है कि हाल ही में सब्यसाची ने अपना एक नया ज्वेलरी कलेक्शन लॉन्च किया था। उसके बाद उसके विज्ञापन की कुछ फोटोज इंस्टाग्राम पर शेयर की थी। इन ज्वेलरी के विज्ञापनों में जो मॉडल्स दिखाई दे रही थीं, उन्होंने इंटीमेट/सेक्स सीन्स के साथ फोटोशूट करवाया हुआ था। तस्वीरों में मॉडल्स ने ब्रा के साथ मंगलसूत्र पहना था। फोटो ऐसी थी कि यदि उनके ऊपर सब्यसाची फाइन ज्वेलरी न लिखा होता तो शायद ही किसी को पता चलता कि दिए गए विज्ञापन मंगलसूत्र या ज्वेलरी के हैं।

इस विज्ञापन को देखने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, “मैंने फैशन डिजाइनर सब्यसाची मुखर्जी का मंगलसूत्र का विज्ञापन देखा। बेहद आपत्तिजनक है। मन आहत भी हुआ है। आभूषणों में सर्वाधिक महत्व का आभूषण मंगलसूत्र होता है। हम मानते हैं कि मंगलसूत्र का पीला हिस्सा माता पार्वती का प्रतीक है और काला हिस्सा भगवान शिव जी का, इसकी कृपा से महिला और उसके पति की रक्षा होती है। मां पार्वती की कृपा से दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है।” उन्होंने कहा, “मैं पहले भी चेतावनी दे चुका हूँ और ये जो डिजाइनर हैं, सब्यसाची मुखर्जी, इनको व्यक्तिगत रूप से मैं चेतावनी दे रहा हूँ और 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दे रहा हूँ। अगर 24 घंटे में उन्होंने यह आपत्तिजनक एवं अश्लील विज्ञापन नहीं हटाया तो उनके खिलाफ मामला दर्ज होगा। कानूनी कार्रवाई होगी।”

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ नसीम खान कर रहे थे छेड़छाड़, महिला ने कराया केस दर्ज, कुल 5 लोगों पर FIR

महाराष्ट्र में सत्ताधारी महाविकास अघाड़ी गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष आरिफ नसीम खान पर एक महिला के बयान के आधार पर केस दर्ज किया गया है। मुंबई पुलिस ने बताया कि आरिफ नसीम खान के अलावा 4 अन्य लोगों पर भी केस दर्ज हुआ है।

यह मामला मुंबई के अंधेरी पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। पुलिस ने इन पाँच लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 509, 506, 323, 504 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है। इस संबंध में आरिफ नसीम खान की तरफ से भी अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है।

जानकारी के मुताबिक पहले साकी नाका पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी, लेकिन बाद में अधिकार क्षेत्र के मुद्दे को देखते हुए इसे अंधेरी पुलिस स्टेशन ट्रांसफर कर दिया गया। हालाँकि, इस मामले में अभी किसी भी शख्स की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बता दें कि महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के छह कार्यकारी अध्यक्षों में से एक नसीम खान हैं। उन छह कार्यकारी अध्यक्ष में मोहम्मद आरिफ नसीम खान के अलावा शिवाजी राव मोगे, बसवराज पाटिल, कुनाल रोहिदास पाटिल, चंद्रकांत और प्रनति सुशील कुमार शिंदे हैं। 

2019 में विधानसभा चुनाव में हार गए थे नसीम खान

अक्टूबर 2019 में हुए राज्य विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस प्रत्याशी के रूप में नसीम खान, शिवसेना के उम्मीदवार दिलीप लांडे के खिलाफ 409 वोटों के अंतर से चांदीवली सीट से चुनाव हार गए थे। शिवसेना उम्मीदवार दिलीप लांडे को 85816 जबकि कॉन्ग्रेस उम्मीदवार आरिफ खान को 85436 वोट मिले थे। वहीं, चांदीवली विधानसभा सीट पर 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस के आरिफ खान ने शिवसेना के प्रत्याशी को 29469 वोटों से हराया था।

‘जो तेरे साथ किया, वही तेरी माँ के साथ करूँगा’: 14 साल के बच्चे का यौन शोषण करता था जज, अब हाथ जोड़ माँग रहा माफ़ी

राजस्थान के भरतपुर से एक 14 साल के बच्चे के यौन शोषण का मामला सामने आया है। जिले में तैनात जज जितेंद्र गोलिया पर उसके यौन शोषण का आरोप लगा है। जज ने दो कर्मचारियों ने भी बच्चे के साथ रेप किया था। आरोपितों के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मामला सामने आने के बाद जोधपुर हाई कोर्ट ने आरोपित जज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। केस भरतपुर के मथुरा गेट थाने में दर्ज की गई है। थाना प्रभारी रामनाथ ने बताया कि पीड़ित बच्चे की माँ ने शिकायत दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जितेंद्र गोलिया भरतपुर में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विशेष अदालत में विशेष न्यायाधीश के पद पर तैनात थे। उन पर लगे आरोप में बताया गया है कि वह पिछले 1 महीने से पीड़ित के साथ दुष्कर्म कर रहे थे। उन पर बच्चे को नशीला पदार्थ खिलाने का भी आरोप है। पीड़ित कक्षा 8 का छात्र है।

पुलिस को दी गई शिकायत में यह भी बताया गया है कि आरोपित जज द्वारा न सिर्फ बच्चे को बल्कि उनकी माँ को भी धमकाया गया है। इस कृत्य में जज ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में तैनात डीएसपी परमेश्वर लाल की भी मदद ली। उनके कहने पर DSP परमेश्वर लाल ने भी पीड़ित परिवार को मुँह बंद रखने की धमकी दी थी। भरतपुर के मथुरा गेट थाना क्षेत्र में 14 वर्षीय कक्षा आठवीं का यह छात्र डिस्ट्रिक्ट क्लब में टेनिस खेलने जाता था। इस स्टेडियम में कई अधिकारियों के साथ आरोपित जज भी आते थे।

इस बीच में जज जितेंद्र गुलिया ने बच्चे को अपनी बातों में फँसा लिया। फिर वो अक्सर उसे लेकर अपने घर जाने लगे और उसक साथ दुष्कर्म करने लगे। कुछ समय बाद पीड़ित के शरीर में दर्द हुआ। आखिरकार उसने पूरी बात अपनी माँ को बता दी। पीड़ित के अनुसार इसके बाद उनकी प्रताड़ना और धमकियों का दौर शुरू हो गया। आरोप है कि जज ने कहा कि जो तेरे साथ किया वही तेरी माँ के साथ भी करूँगा। सबको जेल भेजने की भी धमकी दी। पीड़ित परिवार का कहना है कि वो इतने डरे हैं कि घर से कहीं बाहर भी नहीं जा पा रहे हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के कुछ वीडियो भी सामने आए हैं। इन वीडियो में आरोपित जज हाथ जोड़ कर पीड़ित के परिजनों से माफ़ी माँग रहा है। साथ ही वो ये कहता सुनाई दे रहा है कि जो हुआ उसे भूल जाओ। इस केस के 2 अन्य आरोपितों के नाम अंशुल सोनी और राहुल कटारा है। अंशुल सोनी आरोपित जज का स्टेनो है जबकि राहुल कटारा एक अन्य कर्मचारी है। पुलिस ने इन दोनों के भी विरुद्ध केस दर्ज किया है।

घटना की जानकारी होते ही राजस्थान बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्षा संगीता बेनीवाल ने इस पर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से बात करने की बात कही है। साथ ही बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गंगाराम पाराशर ने भी इस मामले पर कार्रवाई की बात कही है।

भरतपुर पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार दोनों पक्षों की तरफ से केस दर्ज करवाया गया है। आरोपित जज के विरुद्ध FIR संख्या 873/21 में धारा 377,34 ipc & 5/6 pocso act में मुकदमा दर्ज हुआ है। वहीँ जज द्वारा पीड़ित परिवार के खिलाफ की गई शिकयत में FIR संख्या 872/21 में धारा 384,388,389 ipc में केस दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार दोनों केसों में जाँच जारी है।

इटली में PM मोदी की घनघोर बेइज्जती…टैक्सी से करना पड़ा सफर: जानें वायरल तस्वीर का सच

जी20 शिखर सम्मेलन में भाग लेने इटली के दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर सोशल मीडिया पर एक दावा हो रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को इटली में टैक्सी में सफर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। दावे के साथ एक कार की फोटो है जिसपर टैक्सी लिखा है।

कॉन्ग्रेस समर्थक तो इसे शेयर करके लिख रहे हैं, “पीएम को इटली में टैक्सी से चलना पड़ रहा है। जब विपक्षी होकर हमें यह अच्छा नहीं लग रहा तो सोच सकते हैं कि बेचारे भक्त अपने भगवान की विदेश में हो रही इस घनघोर बेइज्जती को कैसे बर्दाश्त कर रहे होंगे।”

कॉन्ग्रेस समर्थकों का झूठा दावा

अन्य यूजर भी इस तस्वीर को यह कहते हुए आगे बढ़ा रहे हैं कि इटली में प्रधानमंत्री का स्वागत टैक्सी से किया गया है। अब सच्चाई क्या है? क्या वाकई पीएम मोदी के साथ इटली में इतना अपमानजनक व्यवहार हुआ कि उनके विपक्षियों को उनका मजाक उड़ाने का मौका मिल गया? या फिर इस बार भी फेक न्यूज फैलाते हुए प्रोपगेंडा चलाया जा रहा है।

दरअसल, हकीकत में जो तस्वीर शेयर हो रही है उसे समाचार एजेंसी एएनआई ने भी 30 अक्टूबर को शेयर किया था। इस तस्वीर पर उन्होंने सूत्रों के हवाले से लिखा था, “प्रधानमंत्री मोदी की पोप फ्रांसिस के साथ वेटिकन में बहुत खास भेंट हुई। मीटिंग का समय 20 मिनट निर्धारित था लेकिन ये घंटे भर चली। इस दौरान पीएम मोदी और पोप ने तमाम मुद्दों पर चर्चा की जिससे हमारी धरती पर सुधार हो, जैसे मौसम परिवर्तन और गरीबी हटाना आदि।”

अब 30 अक्टूबर को एएनआई द्वारा शेयर की गई इस तस्वीर को और वायरल तस्वीर को मिलाकर देख सकते हैं कि ये वही फोटो है जिसे सोशल मीडिया पर ये कहकर फैलाया जा रहा है कि इटली में पीएम को कार तक नहीं मिली और उन्हें टैक्सी में सफर करना पड़ा। किसी प्रोपगेंडाबाज ने अपना प्रोपगेंडा चलाने के लिए इसे एडिट किया हुआ है और बाकी लोग बस इसे शेयर करके फेक न्यूज को आगे बढ़ा रहे हैं।

असली तस्वीर में देख सकते हैं कि पीएम कार से बाहर आ तो रहे हैं लेकिन उनकी गाड़ी पर कहीं भी टैक्सी नहीं लिखा। इसके अलावा  उनके इर्द-गिर्द सुरक्षाकर्मी भी तैनात हैं। वहीं उनके स्वागत में अन्य लोग भी खड़े दिखाई दे रहे हैं। खुद पोप फ्रांसिस ने भी इस मुलाकात पर कहा था, कि इससे बढ़िया तोहफा भारतीय नेता उनको नहीं दे सकते थे।

बता दें कि पीएम मोदी 29 से 31 अक्टूबर तक रोम, इटली और वेटिकन सिटी दौरे पर थे। उन्हें शुक्रवार को इटली पहुँचने के बाद गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने इटली के प्रधामंत्री मारिया द्राघी से मुलाकात की थी और बाद में कई विश्व नेताओं से भी उनकी मुलाकात हुई थी।