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4 बिहारी छात्रों पर कार्रवाई से पीछे हटा कॉलेज, पाकिस्तान की जीत का जश्न मनाने वाले कश्मीरी छात्रों का किया था विरोध

पंजाब के बाबा फरीद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस द्वारा हाल ही में बिहार के चार छात्रों को हॉस्टल खाली करने का नोटिस देने का मामला तूल पकड़ने के बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस कार्रवाई का विरोध किया था। कॉलेज ने दो दिन बाद अपने नोटिस पर खेद जताया है। कपिल मिश्रा ने सोमवार (1 नवंबर 2021) को ट्वीट किया, “गुड न्यूज, बहादुर बिहारी छात्रों का निलंबन आदेश निरस्त कर दिया गया है। वे अब हॉस्टल में ही रहेंगे। भारत माता की जय।”

इसके बाद उन्होंने ट्विटर पर बाबा फरीद ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस का खेद जताने वाला नोटिस भी शेयर किया। इसमें लिखा है, ”यह पाया गया है कि छात्रों का कोई विवाद और उनसे जुड़ी कोई भी घटना नहीं हुई थी। जाँच समिति के निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए इंस्टीट्यूशंस ने इस संबंध में पूर्व में जारी आदेश बीएफजीआई/684 से 687/बीएच/2021, दिनांक 30.10.2021 को निरस्त कर दिया है। इसलिए अब इन छात्रों को छात्रावास में रहने की अनुमति है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन छात्रों का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने उन कश्मीरी छात्रों का विरोध किया था जो ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। इसको लेकर कपिल मिश्रा ने छात्रों को भरोसा दिलाया था कि वह उनके साथ अन्याय नहीं होने देंगे, उन्हें इंसाफ दिलाकर रहेंगे। मिश्रा ने कहा था कि पंजाब सरकार व कालेज मैनेजमेंट ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वालों पर कार्रवाई करने की बजाए, देश विरोधी गतिविधियों का विरोध करने वालों पर ही कार्रवाई कर दी।

गौरतलब है कि इस मामले को लेकर ऑपइंडिया ने छात्रावास के वार्डन लखबीर सिंह से भी संपर्क किया था, जिन्होंने नोटिस पर हस्ताक्षर किए थे। जब उनसे पूछा गया कि नोटिस क्यों जारी किया गया है, तो सिंह ने इस मामले पर बात करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था, ”हम इस बारे में बात नहीं कर सकते। मुझे उनका नंबर दीजिए जिसने आपको नोटिस दिया है।” हमने वार्डन को बताया कि यह नोटिस ट्विटर पर वायरल हो रहा है और यदि वह चाहें तो हम उन्हें नोटिस की एक कॉपी भेज सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा, “नहीं, मुझे कॉपी की जरूरत नहीं है।” वार्डन ने इस तरह के किसी भी नोटिस के बारे में जानकारी से देने से इनकार किया और कहा, ”ऐसा कोई नोटिस जारी नहीं किया गया है। मैं इसके बारे में बात नहीं करना चाहता।”

‘370 हटाने का समर्थन क्यों किया? ये किसानों का मुद्दा है’: किसान नेताओं के सवाल पर बैठक छोड़ निकले CM केजरीवाल

पंजाब में किसानों के साथ मिलने गए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बैठक बीच में छोड़ कर निकलना पड़ा। अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के समर्थन पर किसानों ने उन्हें घेरा। ‘आम आदमी पार्टी (AAP)’ सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल फ़िलहाल गोवा के दौरे पर हैं। इससे पहले वो पंजाब गए थे। दोनों ही राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और AAP वहाँ पाँव पसारने की जुगत कर रही है। दोनों ही राज्यों में भाजपा और कॉन्ग्रेस से उसकी टक्कर है।

पंजाब में अरविंद केजरीवाल ने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की, लेकिन इस बैठक में जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के भाजपा सरकार के फैसले का मुद्दा उठा। किसान नेताओं ने अरविंद केजरीवाल से पूछा कि उन्होंने आउछेद-370 को निरस्त किए जाने के मोदी सरकार के फैसले का समर्थन क्यों किया था? दिल्ली के मुख्यमंत्री ने इसे ‘राजनीतिक सवाल’ करार दिया और कहा कि इन सवालों पर वो बाहर जवाब देंगे।

अरविंद केजरीवाल ने बैठक में कहा, “दिल्ली की सारी शक्तियाँ तो इन्होंने पहले से ही छीन रखी है। मैं किसी राज्य के अधिकार छीनने का समर्थन क्यों करूँगा? मैं रोज लड़ रहा हूँ दिल्ली के लिए और हमने सुप्रीम कोर्ट में केस कर रखा है। किसानों के सम्बन्ध में आपके पास प्रश्न हैं तो पूछ सकते हैं, राजनीतिक प्रश्नों का जवाब बाहर दूँगा। अगर मैं किसानों के हक़ में नहीं हूँ तो देश का कोई नेता नहीं है। बड़ी से बड़ी क़ुरबानी देने के लिए तैयार हूँ। हमारी सरकार ने 7 वर्षों में दिल्ली के लिए जितना किया है, मुझे नहीं लगता किसी अन्य सरकार ने किया होगा।”

इस दौरान सांसद भगवंत मान भी उनके साथ मौजूद थे। केजरीवाल अपनी व्यस्तता का हवाला देकर बैठक से निकल गए, जिसके बाद भगवंत मान किसान नेताओं का माँ-मनव्वल करते नजर आए। ‘पंजाब किसान यूनियन’ के जिला उपाध्यक्ष गुरजंत सिंह मनसा ने केजरीवाल से ये सवाल पूछा था। केजरीवाल ने पूछा कि ये किसानों का मसला कैसे हैं? इस पर किसान नेताओं ने कहा कि ये किसानों और राज्यों के अधिकार का मसला है, इसे लागू करने वाले वही लोग हैं जो तीनों कृषि कानून लेकर आए।

Video बांग्लादेश का, दावा- भारत में मुस्लिमों का हो रहा नरसंहार: कुवैत के मुस्लिम एक्टिविस्ट की कारस्तानी

कुवैत के एक मुस्लिम कार्यकर्ता मुजील अलशिर्का ने 30 अक्टूबर को ट्विटर पर भारत को बदनाम करने के लिए एक वीडियो शेयर करके झूठा दावा किया है। अपने ट्वीट में उसने दुनिया भर के मुस्लिमों से पूछा कि क्या भारत के हिंदू राष्ट्र में ऐसे नरसंहार होते रहेंगे। क्या मुस्लिम कौम इस बात की इजाजत उन्हें (भारत के हिंदुओं को) देती है कि वो मुस्लिम भाई और बहनों को मारें।

लाखों फॉलोवर्स वाले मुजील अलशिर्का ने 30 सेकेंड की क्लिप शेयर की। इसमें दो लोग एक पीड़ित को तलवार से मारते दिख रहे हैं। वहीं पीड़ित जमीन पर बेजान पड़ा है। इर्द-गिर्द केवल खून की धार है। अब मुजील ने इस वीडियो को भारत की बताया है और ऐसे दर्शाया जैसे हिंदुओं के देश में मुस्लिमों का नरसंहार हो रहा है।

मुजील अलशिर्का कुवैत का है। उसने अपने बायो में बताया है कि वो सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स एंड इंटरनेशनल ह्यूमैनिटेरियन लॉ का निदेशक, कुवैत इंस्टीट्यूट फॉर लॉयर्स एंड लीगल स्टडीज में प्रशिक्षण निकाय का सदस्य है।

अब वायरल वीडियो का सच क्या है आइए बताएँ:

दरअसल, सोशल मीडिया पर जो तस्वीर शेयर की गई है वो न तो अभी की है और न ही भारत की है। ये घटना बांग्लादेश के ढाका डिविजन के पल्लबी इलाके में शगुफ्ता हाउसिंग इलाके में 16 मई को हुई थी। मरने वाले की पहचान शाहिनुद्दीन के तौर पर हुई और मारने वाले मणिक और मुनीर थे। इनमें से मुनीर को पुलिस कार्रवाई में मार दिया गया था। वहीं पूरे हत्याकांड में वहाँ के विधायक एमए अव्वल का नाम उछला था। पुलिस सुमोन बेपारी और रोनी तालुकदार नामक दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था।

अब मालूम हो कि भारत को लेकर झूठ फैलाने वाला मुस्लिम कार्यकर्ता पहली दफा भारत विरोधी बयान देने के कारण चर्चा में नहीं आया। इससे पहले वो जामिया दंगों के आरोपित शरजील इमाम और दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के आरोपित उमर खालिद व पत्रकार सिद्दीकी कप्पन का समर्थन कर चुका है। उसने कहा था कि आरएसएस और बीजेपी शासन में हिंदुओं के कट्टरपंथ ने भारत के संस्थानों की नसों में पकड़ बना ली हैं। इसलिए उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे निर्दोष मुस्लिम कार्यकर्ता और सिद्दीकी कप्पन जैसे पत्रकार जेल में बंद हैं।

उसने आरएसएस को चरमपंथी गैंग कहते हुए कहा था, “जिसे बोला भी न जा सके ऐसी बर्बरता हमारे मुस्लिम भाइयों के साथ भारत में हो रही है। ये आतंकी समूह और इसके फॉलोवर्स कुवैत में और खाड़ी में इस्लाम का नाश करना चाहते हैं। हमें ऐसे लोगों को वीजा देना बंद करना चाहिए क्योंकि ये हमें धमकाते हैं।”

इसके अलावा मुजील अलशिर्का भारत की इस्लामी पत्रकारण राणा अयूब की तरफदारी भी खूब करता है जिसकी विश्वसनीयता पर सुप्रीम कोर्ट भी प्रश्नचिह्न लगा चुकी है। सर्वोच्च अदालत ने अयूब की नॉन-फिक्शन किताब को ये कहते हुए खारिज किया था कि यह अनुमानों, अनुमानों और अनुमानों पर आधारित है और इसका कोई प्रमाणिक मूल्य नहीं है। किसी व्यक्ति की राय साक्ष्य के दायरे में नहीं होती है। इसके राजनीति से प्रेरित होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

मुजील की हिंदुओं और आरएएस के प्रति नफरत और इस प्रकार इस्लामी कट्टरपंथियों का समर्थन साफ दर्शाता है कि उसने बांग्लादेश की यह वीडियो जानबूझकर भारत से जोड़कर शेयर की ताकि देश में साम्प्रदायिक तनाव पैदा हो।

‘अफगानिस्तान से मैच में भी भारत का होगा बुरा हाल’: न्यूजीलैंड से हार के बाद शोएब अख्तर बोले- हिंदुस्तान की शामत आ गई है

T20 विश्व कप में भारत को लगातार दूसरे मैच में हार झेलनी पड़ी। पहले पाकिस्तान ने 10 विकेट से हराया, अब न्यूजीलैंड ने 8 विकेट से मात दे दी। बल्ले और गेंद, दोनों से भारत का प्रदर्शन इन दोनों ही मैचों में निराशानजक रहा। अब ‘रावलपिंडी एक्सप्रेस’ कहे जाने वाले पाकिस्तान के तेज़ गेंदबाज शोएब अख्तर ने भारतीय क्रिकेट टीम के इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हिंदुस्तान की शामत आ चुकी है और उन्हें देख कर लगा भी नहीं कि वो मैच खेलने आए भी हैं या नहीं।

उन्होंने कहा कि मीडिया जितनी बातें कर रही थीं, उन्हें पूरा यकीन था कि ये फँसेंगे। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम की बॉलिंग को कमजोर बताया। उन्होंने कहा कि टॉस न जीतने के कारण भारतीय टीम हतोत्साहित हो गई और दूसरी पारी में बॉलिंग के दौरान स्विंग-सीम नहीं मिली। उन्होंने रोहित शर्मा को ओपनिंग कराने और ‘बच्चे’ ईशान किशन को पहले न भेजने की सलाह दी। हार्दिक पंड्या को बॉलिंग में देर से लाए जाने को भी उन्होंने गलत निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय टीम की ‘गेम पॉलिसी’ ही समझ नहीं आई।

उन्होंने कहा कि ये हिंदुस्तान की एक ‘हारी हुई टीम’ है, जिसके पास कोई प्लानिंग नहीं है और विराट कोहली-रोहित शर्मा अपने नम्बरों पर बल्लेबाजी के लिए नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि 20 ओवर भी ये टीम नहीं खेल पा रही है। उन्होंने जसप्रीत बुमराह के अलावा बाकि बॉलरों को औसत बताया और कहा कि हिंदुस्तान कभी खेल में था ही नहीं। उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान की शांत एक चीज से आ सकती है और वो है अफगानिस्तान से मैच। इज्जत बचाने के लिए उन्हें ये मैच जीतना होगा।”

शोएब अख्तर ने कहा कि अगर अफगानिस्तान टॉस जीत कर पहले बॉलिंग करने का निर्णय लेता है तो भारत के लिए सख्त समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने बताया कि अबुधाबी में बॉल फँस कर आता है और उन्हें भारत का और बुरा हाल होता नजर आ रहा है। उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को अपनी बॉलिंग यूनिट के पुनर्गठन की सलाह देते हुए कहा कि आप लोग इंस्टाग्राम पर क्रिकेट खेलना छोड़ दीजिए और ग्राउंड पर खेलना शुरू कर दीजिए। उन्होंने समझाया कि क्रिकेट पैशन है, फैशन नहीं।

शोएब अख्तर ने कहा, “जब आप पैशन और तवज्जोह के साथ खेलोगे और अपना ध्यान केंद्रित रखोगे, तभी अन्य टीमों को हरा सकते हो। लेकिन, हिंदुस्तान जिस तरह से खेला है.. बातें इतनी बड़ी-बड़ी की गईं। ये ‘बात करोड़ों की और दुकान पकौड़ों की’ वाला हाल हो गया है। कप्तान के रूप में विराट कोहली का ये आखिरी विश्व कप है। मैंने भारतीय मीडिया को मना किया था कि इतनी बड़ी-बड़ी बातें न करें, लेकिन उन्होंने सुना ही नहीं। अभी भी 3 मैच जीतने का चांस है, बेस्ट ऑफ लक।”

बता दें कि शोएब अख्तर हाल के दिनों में विवादों में रहे हैं। कुछ ही दिनों पहले शोएब अख्तर को पीटीवी (PTV) ने बैन कर दिया है। उन्हें ‘असभ्य’ बता लाइव शो से बाहर करने वाले एंकर नोमान नियाज पर भी पाकिस्तान के सरकारी टीवी ने एक्शन लिया है। चैनल ने जाँच पूरी होने तक दोनों को ऑफ एयर करने का फैसला किया है। लाइव शो से निकाले जाने के बाद शोएब अख्तर ने इस्तीफा दे दिया था। पीटीवी ने फैसला लिया है कि इस मामले की जाँच पूरी होने तक दोनों किसी भी शो में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

2022 का यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे अखिलेश यादव, सपा प्रमुख ने चाचा शिवपाल से गठबंधन के भी दिए संकेत

उत्तर प्रदेश में अगले साल 2022 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इसको लेकर तमाम राजनीतिक दल तैयारियों में जुट गए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कभी राज करने वाली समाजवादी पार्टी ने गठबंधन का ऐलान कर दिया है। दरअसल, सोमवार (1 नवंबर 2021) को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पीटीआई से बातचीत में कहा कि वो इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे।

आजमगढ़ से सांसद अखिलेश यादव ने अपने इंटरव्यू में कहा, ”2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सपा और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के बीच गठबंधन को लेकर बात बन गई है। रालोद के साथ सीट के बँटवारे को लेकर बात होनी अभी बाकी है।” रिपोर्ट्स के मुताबिक, अखिलेश का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब रविवार को RLD के जयंत चौधरी कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी से मिले थे।

अखिलेश से जब पूछा गया कि क्या चाचा शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया (PSPL) सपा के साथ विधानसभा चुनाव में आ सकती है? इस पर उन्होंने कहा, ”मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है। उन्हें और उनके साथियों को उचित सम्मान दिया जाएगा।”

बता दें कि इससे पहले यूपी के हरदोई में एक जनसभा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मोहम्मद अली जिन्ना की तुलना महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के साथ करते नजर आए।

अखिलेश के बयान पर बीजेपी ने हमला करते हुए कहा कि जाति और मजहब की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव ऑस्ट्रेलिया से पढ़कर आए हैं। उनके इस ज्ञान को सुनकर मुलायम सिंह भी माथा पकड़ लेंगे। देश मुहम्मद अली जिन्ना को विभाजन का खलनायक मानता है। जिन्ना को आजादी का नायक कहना मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति है।

अखिलेश यादव को ‘जिन्ना प्रेम’ पर CM योगी ने घेरा: कहा- ये तालिबानी मानसिकता, सरदार का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (1 नवंबर 2021) को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को जिन्ना वाले बयान पर घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश ने ​पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना की तुलना महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ की थी। इस बयान को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘शर्मनाक’ और ‘तालिबानी मानसिकता’ वाला बताया है। साथ ही कहा है कि इसके लिए अखिलेश यादव को माफी माँगनी चाहिए।

सीएम योगी ने कहा, “कल मैं समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का वक्तव्य सुन रहा था। वह देश तोड़ने वाले जिन्ना की तुलना इस राष्ट्र को जोड़ने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल से कर रहे थे। यह अत्यंत शर्मनाक है। सरदार पटेल भारत की एकता और अखंडता के शिल्पी हैं और वर्तमान में पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया जा रहा है। आजाद भारत को एक भारत के रूप में रखने का श्रेय अगर किसी को जाता है तो वह सरदार वल्लभ भाई पटेल को जाता है। जिन्हें पूरा देश लौह पुरुष के तौर पर जानता है।”

अखिलेश पर निशाना साधते हुए सीएम ने कहा, “कल उनकी विभाजनकारी मानसिकता एक बार फिर से सामने आ गई जब उन्होंने सरदार पटेल को जिन्ना के समकक्ष रखकर देश तोड़ने वाले जिन्ना को महिमामंडित करने का प्रयास किया है। मुझे लगता भारत की जनता इस विभाजनकारी मानसिकता को कभी स्वीकार नहीं करेगी और उत्तर प्रदेश की जनता तो हरगिज स्वीकार नहीं करेगी।”

उन्होंने आगे कहा, “ये तालिबानी मानसिकता है जो हमेशा तोड़ने में विश्वास करता है। पहले सामाजिक तानेबानों को जाति के नाम पर तोड़ने की प्रवृति और जब अपने मंसूबों में सफल नहीं हो रहे हैं तो महान पुरुषों पर लाँछन लगाकर पूरे के पूरे समाज को अपमानित करने का प्रयास हो रहा है। इस दुष्प्रवृत्ति को कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। पूरे समाज और पूरे प्रदेश को इसकी निंदा करनी चाहिए। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को प्रदेश और देश की जनता से माफी माँगनी चाहिए कि भारत की अखंडता के शिल्पी सरदार वल्लभ भाई पटेल का यह अपमान यह देश कभी स्वीकार नहीं कर सकता। उनका यह वक्तव्य इसलिए आया है, क्योंकि विभाजन की उनकी प्रवृति हमेशा रही है।”

बता दें कि रविवार (31 अक्टूबर 2021) को हरदोई की एक जनसभा में अखिलेश यादव ने कहा था, “सरदार पटेल जमीन को पहचानते थे और जमीन को देखकर फैसले लेते थे, वह जमीन को समझ लेते थे तभी फैसला लेते थे, इसीलिए आयरन मैन के नाम से जाने जाते थे। सरदार पटेल जी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और जिन्ना एक ही संस्था में पढ़ कर बैरिस्टर बन कर आए थे। एक ही जगह पर पढ़ाई लिखाई की। वह बैरिस्टर बने उन्होंने आजादी दिलाई अगर उन्हें किसी भी तरह का संघर्ष करना पड़ा होगा तो वह पीछे नहीं हटे।”

अठावले के बाद समीर वानखेड़े का राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने किया समर्थन, व्यक्तिगत हमलों के लिए नवाब मलिक निशाने पर

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारी समीर वानखेड़े बीते कुछ दिनों से जाति-धर्म के चक्रव्यूह में फँसे हुए हैं। इसी बीच खबर है कि केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले के बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के उपाध्यक्ष अरुण हलदर ने उनका समर्थन किया है। एनसीएससी के उपाध्यक्ष अरुण हलदर ने रविवार (31 अक्टूबर 2021) को कहा कि एनसीबी के अधिकारी समीर वानखेड़े को अच्छा काम करने के बावजूद निशाना बनाया जा रहा है।

अरुण हलदर ने वानखेड़े के घर का दौरा करने के बाद कहा, ”एक अधिकारी अपनी ड्यूटी कर रहा है और अपनी ईमानदारी से विभाग को गौरवान्वित कर रहा है। ऐसे में कोई मंत्री उन पर और उनके परिवार व्यक्तिगत हमला कैसे कर सकता है? सरकार को जाँच करनी चाहिए कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं।”

एनसीबी अधिकारी का बचाव करते हुए हलदर ने कहा, “मुझे लगता है कि वह एससी समुदाय से हैं और महार जाति से हैं। एक गरीब परिवार से होने के बावजूद वह इस पद तक पहुँचे हैं।”

हालाँकि, उपाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य किसी भी व्यक्ति के जाति प्रमाण पत्र के बारे में संदेह होने पर जाँच शुरू कर सकता है। हलदर ने बताया, ”केंद्र सरकार में जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन अनिवार्य नहीं है, लेकिन राज्य सरकार को महाराष्ट्र के किसी भी निवासी के जाति प्रमाण पत्र की जाँच करने का अधिकार है।” सामाजिक न्याय मंत्री धनंजय मुंडे ने भी पुष्टि की है कि अगर सक्षम प्राधिकारी को कोई शिकायत मिलती है, तो उसकी नियमानुसार जाँच की जाएगी।

वहीं, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने कहा, ”समीर वानखेड़े द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों का महाराष्ट्र सरकार से सत्यापन किया जाएगा। यदि दस्तावेज वैध पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकता।”

मामले की जाँच करेगी कमेटी

अधिकारियों द्वारा सूचित करने के बाद ही अनुमंडल पदाधिकारी/उप कलेक्टर द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। संयुक्त सचिव या अपर कलेक्टर रैंक के अधिकारी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति जाति प्रमाण पत्र का सत्यापन करती है।

इसके बाद यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार जाति जाँच समिति के पास सत्यापन के लिए जाता है। जाली या झूठे प्रमाण पत्र की शिकायत प्राप्त होने की स्थिति में प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए अधिकारी ने कहा, “समिति सभी पक्षों को सुनती है। वो सभी प्रासंगिक प्रमाण पत्र माँगती है और यदि आवश्यक हो, तो उस आवास का दौरा करती है जिसके खिलाफ शिकायत की गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “सामाजिक न्याय विभाग ने पूरी प्रक्रिया को बहुत सख्त कर दिया है और सभी मामलों का समयबद्ध अवधि में निपटारा किया जाता है।” नियमों के अनुसार, यदि प्रमाण पत्र जाली या गलत पाया जाता है, तो इसके लिए छह महीने की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

‘हमारे पास सारे दस्तावेज हैं’

एनसीबी द्वारा आर्यन खान की गिरफ्तारी से नाराज महाराष्ट्र के मंत्री और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता नवाब मलिक ने वानखेड़े पर एससी कोटे के तहत नौकरी हासिल करने के लिए जाली जाति प्रमाण पत्र बनाने का आरोप लगाया था।

उन्होंने कहा था कि वो एससी सर्टिफिकेट में फर्जीवाड़ा करके सिविल सेवा परीक्षा में बैठे और उस पद को हासिल किया। उन्होंने एक गरीब एससी का अधिकार छीना है। यह बात भी बिल्कुल सच है कि समीर वानखेड़े ने धर्म परिवर्तन नहीं किया, क्योंकि वे जन्म से मुसलमान हैं।

दरअसल, एनसीबी-मुंबई के क्षेत्रीय निदेशक समीर वानखेड़े रविवार​ को दिल्ली में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के दफ्तर पहुँचे थे। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य सुभाष रामनाथ पारधी ने बताया कि वह यहाँ आयोग के समक्ष जाति प्रमाण पत्र से जुड़े मामले को लेकर आए थे। हम उनके दस्तावेजों को देखेंगे और सत्यापित करेंगे।

गौरतलब है कि रविवार को समीर वानखेड़े का परिवार केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले से मिला। केंद्रीय मंत्री ने समीर वानखेड़े के खिलाफ मलिक के आरोपों को निराधार करार दिया। समीर वानखेड़े के पिता ध्यानदेव वानखेड़े और उनकी पत्नी क्रांति ने रामदास अठावले से मुलाकात की। अठावले ने समीर वानखेड़े को दलित बताते हुए कहा था कि उन पर जानबूझकर आरोप लगाकर पूरे दलित समाज को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी वानखेड़े का समर्थन करेगी। हम उन्हें कुछ नहीं होने देंगे।

‘पूरी भूतनी लग रही है, मेकअप क्यों उतारा’: शिल्पा शेट्टी ने बनाया ऐसा लुक कि यूजर पूछने लगे राज कुंद्रा का हाल

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी का डरावना चेहरा सोशल मीडिया पर सामने आया है। उन्होंने हैलोईन के मौके पर अपना जॉम्बी लुक शेयर किया है। उन्होंने इंस्टाग्राम पर रील वीडियो अपलोड करते हुए सबको हैलोईन विश किया।

तस्वीरों को देख कोई नहीं कह सकता कि ये जॉम्बी ब्राइड के लुक में नजर आने वाली बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी हैं। रील पर अब तक सैंकड़ों लाइक आ चुके हैं। शिल्पा के तमाम फैन्स इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कुछ लोग इसे खास बता रहे हैं और कई शिल्पा की तारीफ कर रहे हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने शिल्पा के लुक को देख कर उम्मीद से हटके रिप्लाई दिया।

एक यूजर ने कहा, “सबको अंग्रेजों का बुखार चढ़ा है।”

मेहता नाम की यूजर कहती हैं- “पूरी भूतनी लग रही है।”

एक यूजर ने उन पर तंज कसते हुए कहा, “आखिर तुमने अपना मेक अप उतारा क्यों?”

करम इलाही ने कहा, “ये तुम्हारा असली चेहरा है बिन मेक अप वाला।”

कुछ यूजर शिल्पा की इन तस्वीरों पर राज कुंद्रा का हाल पूछते दिखाई दिए।

एक यूजर ने तो शिल्पा की इन तस्वीरों पर लिखा, “लिंक भेज xxx मूवी के जो तेरे पति ने बनाई थी।”

गौरतलब है कि पोर्नोग्राफी केस में जुलाई में गिरफ्तार हुए शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा दो महीने जेल में बिताने के बाद 21 सितंबर 2021 को घर लौटे थे। उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत दी थी। घर पहुँचने पर कुंद्रा इमोशनल दिखे थे। उनकी आँखों में आँसू थे। पुलिस ने बताया था कि कुंद्रा के पास 119 पोर्न फिल्मों का कलेक्शन था। इसका सौदा वे 9 करोड़ रुपए में करना चाहते थे। उनकी योजना दो साल में अपने ऐप के यूजर्स 3 गुना और मुनाफा 8 गुना करने की थी। जाँच के दौरान पुलिस को ये वीडियो कुंद्रा के मोबाइल, लैपटॉप और हार्ड डिस्क से मिले थे।

हनीमून के दौरान डॉक्टर ने कैंची से कर दिया पत्नी का खतना, तड़पती रही महिला, बहा काफी खून: जर्मनी में ऐसी 68000 पीड़िताएँ

जर्मनी में एक डॉक्टर ने सामान्य कैंची से हनीमून के दौरान ही अपनी पत्नी का खतना कर डाला। एक आँकड़ा कहना है कि जर्मनी में ऐसी 68,000 पीड़िताएँ हैं, जिनके जननांगों का खतना कर दिया गया। ताज़ा घटना हेल्मश्टेट शहर से आई है, जहाँ जहाँ आरोपित डॉक्टर पर जोर-जबरदस्ती करने और मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि होटल के कमरे में ही डॉक्टर ने ये ‘सर्जरी’ कर डाली। अनस्थीसिया तक का इस्तेमाल भी नहीं किया गया।

इससे महिला को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा और काफी खून भी बह गया। उस समय 31 वर्षीय महिला को डॉक्टर पति ने ये कह कर इसके लिए राज़ी किया था कि अगर उसने बात नहीं मानी तो वो तलाक दे देगा। इसके बाद उसे समाज से बहिष्कृत करने की धमकी भी दी गई थी। दोनों मुस्लिम समुदाय से हैं। जर्मनी में किसी महिला का खतना कराने पर 1 वर्ष तक की सज़ा का प्रावधान है। इसे ‘फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM)’ कहा जाता है, जिसके खिलाफ ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)’ भी अभियान चलाता रहा है।

एक आँकड़े की मानें तो दुनिया भर में 30 करोड़ महिलाओं का खतना हुआ है और अफ्रीका में तो हर साल 30 लाख लड़कियों पर खतना का खतरा मँडराता रहता है। यूरोप में प्रवासी समस्या को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। बाहर से आने वाले मुस्लिम प्रवासी समाज में इस तरह की विसंगतियाँ देखने को मिल रही हैं। खतना के दौरान आम तौर पर क्लिटोरिस समेत महिला के जननांग के बाहरी हिस्से को आंशिक या पूरी तरह हटाया जाता है, या फिर जननांगों को सिल दिया जाता है।

मुख्यतः शिशु अवस्था से लेकर 15 वर्ष तक की उम्र तक लड़कियों का खतना कर दिया जाता है। लड़कों के मामले में तो ये आँकड़े कई गुना ज्यादा हैं। साधारण ब्लेड या किसी औजार का इस्तेमाल कर के ऐसा किया जाता है। आजकल मेडिकल स्टाफ की मदद भी ली जाती है। मुस्लिम समाज के कई हिस्सों में माना जाता है कि महिलाओं की कामेच्छा को नियंत्रण में रखने के लिए खतना आवश्यक है। इससे दर्द, पेशाब में संक्रमण, बाँझपन या मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं।

2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने महिला खतने को खत्म करने के लिए एक प्रस्ताव स्वीकार किया था। जर्मन मीडिया एजेंसी DW के अनुसार, देश में 15,000 लड़कियाँ ऐसी हैं जिनका खतना कराए जाने की आशंका है। 2017 के मुकाबले खतना के आँकड़े में 44% की वृद्धि को प्रवासियों के बड़ी संख्या में आने को कारण बताया जा रहा है। जर्मनी की परिवार कल्याण मंत्री फ़्रांजिसका जिफ्फी ने कहा कि ये मानवाधिकार का उल्लंघन है और एक महिला के अधिकारों का हनन है।

सीलमपुर में 2 महीने के बच्चे और उसके पिता पर मुस्लिम भीड़ के हमले में KRF ने माँगा न्याय, NCPCR से भी की शिकायत

दिल्ली के सीलमपुर में 2 महीने के हिन्दू बच्चे पर हुए हमले पर हिन्दू संगठन कलिंग राइट ग्रुप ने विरोध दर्ज करवाया है। संगठन ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) से हमलावर मुस्लिमों के समूह पर कार्रवाई की माँग की है। यह हमला 24 अक्टूबर 2021 (रविवार) को हुआ था। हमले की वजह टी-20 क्रिकेट में पाकिस्तान की जीत का जश्न अपने घर के आगे मनाने वालों को रोकना बताया जा रहा है। पीड़ित बच्चे के साथ उसके पिता पर भी हमला किया गया था। हमले के दौरान फायरिंग का भी आरोप है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को कलिंग राइट फोरम ने ट्वीट भी किया है। अपने ट्वीट में संगठन ने हमलावरों पर बाल संरक्षण एक्ट 2015, UAPA एक्ट, विस्फोटक अधिनियम, 307, 505, 124 A व अन्य धाराओं में कार्रवाई करने की माँग की है।

हमले के शिकार हुए परिवार दलित समुदाय से है। पीड़ित परिवार की शिकायत के अनुसार टी 20 क्रिकेट के दौरान मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग उनके घर के आगे पाकिस्तान की जीत का जश्न मना रहे थे। इसी जश्न में उन्होंने पटाखे भी फोड़ने शुरू कर दिए। उस समय 2 माह का बच्चा छत पर सो रहा था। पीड़ित बच्चे के पिता ने जश्न मनाने वालों को रोका। उन्होंने बताया कि उनका बच्चा जाग जाएगा।

पीड़ित के अनुसार इसी वजह से उनके घर पर हमला किया गया। हमले में लाठी-डंडों के साथ ईंट पत्थर फेंके गए। इसी के साथ हमलावरों पर फायरिंग करने के भी आरोप लगे हैं। फायरिंग बच्चे को जान से मारने की नियति से करना बताया गया है। इसके बाद धारदार हथियार से बच्चे के पिता पर हमला किया गया। पीड़ित को बचाने आए एक अन्य व्यक्ति पर भी हमला हुआ।

इस हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। अपनी जान बचाने के लिए दलित परिवार ने पुलिस को फोन मिलाया। पीड़ितों का आरोप है कि फोन मिलाने के बाद भी उनको बचाने कोई नहीं आया। इस वजह से उन्हें प्राथमिक उपचार भी नहीं मिल पाया। अपनी व्यथा बताते हुए पीड़ित ने बताया कि जैसे तैसे वो वहाँ से जान बचा कर निकल पाए।

कलिंग राइट फोरम (KRF) के अनुसार पीड़ितों को सिर्फ हिन्दू होने की सजा दी गई है। उनका कहना है कि यह हमला पुलिस की लापरवाही को दिखाता है। पुलिस न समय से पीड़ितों को बचाने पहुँची और न ही अब मुस्लिम समुदाय के आरोपितों के खिलाफ एक्शन ले रही है।

कलिंग राइट फोरम ने पुलिस की ऐसी ढिलाई को मुस्लिम हमलावरों को खुली छूट देना बताया। संगठन ने फरवरी 2020 में हुए दिल्ली दंगो की याद दिलाते हुए तब की पुलिसिया कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। पुलिस कार्रवाई से असंतोष जताते हुए KRF ने DOPT (Department of Personnel & Training) से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के आदेश से पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। यह आदेश 1 जनवरी 2022 तक प्रभावी रहेगा। यह आदेश मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल सरकार के अंडर में आने वाली दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने 25 अक्टूबर 2021 (सोमवार) को लिया था। इसकी जानकारी दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने देते हुए पटाखे फोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई का ऐलान किया था।

पटाखों पर बैन की पहली घोषणा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने 15 सितम्बर 2021 (बुधवार) को कर दी थी। अरविन्द केजरीवाल ने इस कदम को जीवन रक्षा के लिए जरूरी बताया। सीलमपुर के हमलावरों ने दिल्ली सरकार के इस आदेश का उल्लंघन पाकिस्तान की जीत पर किया था।

इस घटना के अलावा भी पाकिस्तान की टी-20 विश्वकप में भारत पर जीत के बाद देश के कई हिस्सों में पटाखें फोड़ कर जश्न मनाने की खबरें आई थीं। कश्मीरी छात्रों के तो वीडियो भी वायरल हुए थे। आरोपितों के विरुद्ध कई स्थानों पर UAPA के तहत केस भी दर्ज हुए हैं।