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खुले में नमाज का गुरुग्राम के सेक्टर-47 के बाद 12 के निवासियों ने भी किया विरोध, लगे ‘जय श्री राम’ के नारे: देखें वीडियो

गुरुग्राम सेक्टर 47 के निवासियों का खुले में नमाज पढ़ने को लेकर राज्य के विजिलेंस ब्यूरो ऑफिस के सामने विरोध प्रदर्शन जारी है। मामले में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें सेक्टर 12 के लोग भी खुले में नमाज का विरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र के स्थानीय लोगों के अलावा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि जैसे हिंदू समूहों ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नमाज के वक्त खुले इलाके में भारी भीड़ जमा हो जाती है, जिससे मुख्य मार्ग जाम हो जाता और यातायात बाधित होता है। इसके अलावा, सार्वजनिक स्थान पर नमाज अदा करने पर इलाके में रहने वाले लोगों की आवाजाही भी बाधित हो जाती है।

नमाज के विरोध में भारी भीड़ जमा होने के बाद पुलिस की टीमें कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए मौके पर पहुँचीं। वीडियो में कुछ स्थानीय मुस्लिम खुले में नमाज अदा करते नजर आ रहे हैं, जबकि विरोधी इसके विरोध में ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है।

खुले में नमाज का विरोध कर रहे हिंदू समूहों के अनुसार यह जगह सरकारी संपत्ति है और इसका इस्तेमाल प्रशासन की अनुमति के बिना नमाज अदा करने के लिए किया जाता रहा है।

शुक्रवार (15 अक्टूबर 2021) की दोपहर में भी करीब 100 लोग तख्तियाँ लिए, भजन गाते और नारे लगाते हुए मैदान में आ गए। उनके पास एक पोर्टेबल स्पीकर और एक माइक था। वे सार्वजनिक स्थानों पर नमाज रोकने में विफल रहने पर मनोहर लाल खट्टर सरकार के खिलाफ नारे भी लगा रहे थे। उनकी तख्तियों पर ‘नमाज की जगह खाली करो’ लिखा हुआ था और वे ‘भारत माता की जय’ और भजन गाते रहे

सार्वजनिक जगहों पर नमाज रोकने में सबसे आगे रहने वाले सेक्टर 47 के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील यादव बार-बार मीडिया से कह चुके हैं कि इससे ट्रैफिक जाम समेत काफी गड़बड़ी हुई है। प्रदर्शन कर रहे निवासियों ने कहा कि मुस्लिमों को मस्जिदों या वक्फ बोर्ड की जमीन पर जुमे की नमाज अदा करनी चाहिए, न कि सार्वजनिक स्थानों पर।

निवासियों का सवाल है कि क्या राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन हिंदुओं को प्रार्थना और भजन के लिए सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करने की अनुमति देगी। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि यहाँ नमाज में शामिल होने वाले ज्यादातर मुस्लिम सेक्टर 7 और 8 जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से आते हैं। उनके पास अपने क्षेत्र में नमाज अदा करने के लिए विकल्प और स्थान हैं लेकिन वे यहाँ केवल परेशानी पैदा करने और जमीन पर कब्जा करने के इरादे से आते हैं।

स्थानीय निवासियों की नाराजगी निराधार नहीं है क्योंकि समस्या सेक्टर 47 तक सीमित नहीं है। मई 2018 में, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा था कि नमाज सार्वजनिक स्थानों की बजाय मस्जिदों में पढ़ी जानी चाहिए। यह टिप्पणी सार्वजनिक स्थानों पर नमाज के लिए कब्जा किए जाने के संदर्भ में थी। 2018 में गुरुग्राम जिले के भीतर सार्वजनिक स्थानों पर 76 स्थानों पर नमाज अदा की गई और स्थानीय प्रशासन द्वारा इसकी व्यवस्था की गई।

कैप्टन अमरिंदर की पाकिस्तानी दोस्त अरूसा आलम के ISI लिंक की होगी जाँच: बीजेपी से जुड़ने की खबरों के बीच चन्नी सरकार का ऐलान

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा कॉन्ग्रेस से किनारा करने और उसके साथ उनकी तीखी सियासी नोकझोंक के बाद अब पंजाब के गृह मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की पाकिस्तानी दोस्त अरूसा आलम की पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंधों की जाँच की माँग की है। यह सब तब सामने आया है जब हाल ही में कैप्टेन के नई पार्टी बनाने और बीजेपी से जुड़ने की खबरें मीडिया में आई हैं।

रंधावा ने एक साक्षात्कार में एनडीटीवी को बताया, “चूँकि कैप्टन का दावा है कि पंजाब को आईएसआई से खतरा है, इसलिए हम उनकी दोस्त अरूसा आलम के आईएसआई के साथ संबंधों की जाँच करेंगे।” आलम एक रक्षा पत्रकार हैं और उन्हें व्यापक रूप से कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी दोस्त माना जाता है।

रंधावा ने कहा कि उन्होंने पंजाब पुलिस प्रमुख से आलम के पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों और आईएसआई के साथ संबंधों के आरोपों की जाँच करने को कहा है। रंधावा ने आगे कहा,
“कैप्टन पिछले साढ़े चार साल से पाकिस्तान से ड्रोन आने के मुद्दे पर तंज कस रहे हैं। इसलिए कैप्टन (साहब) ने पहले इस मुद्दे को उठाया और बाद में पंजाब में बीएसएफ को तैनात किया गया। इसलिए यह एक बड़ी साजिश लगती है जिसकी जाँच की जरूरत है।”

इसके साथ ही रंधावा ने अमरिंदर सिंह पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने जनवरी 2017 के मौर बम विस्फोट मामले की जाँच को रोक दिया था। उन्होंने उस जाँच को फिर से शुरू करने का वादा किया। उन्होंने कहा, “हम मामले की फिर से जाँच का आदेश देने के लिए तैयार हैं और निश्चित रूप से दोषियों को जेल भेजेंगे।”

गौरतलब है कि 2017 में हुआ वह धमाका कॉन्ग्रेस नेता हरमिंदर सिंह जस्सी की एक चुनावी सभा स्थल के पास हुआ था। घटना में दो जाँच के आदेश दिए गए थे, जिसमें डेरा सच्चा सौदा की संलिप्तता की ओर इशारा किया गया था। जस्सी की बेटी की शादी डेरा प्रमुख के बेटे से हुई है।

सिंह के खिलाफ वह हमला एक दिन बाद हुआ जब उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन करने की अपनी योजनाओं के बीच कॉन्ग्रेस पार्टी के दोहरेपन के लिए उसकी आलोचना की। सिंह ने यह कहते हुए कॉन्ग्रेस की खिंचाई की थी कि महाराष्ट्र में शिवसेना से हाथ मिलाने और नवजोत सिंह सिद्धू समेत कई भाजपा नेताओं को पार्टी में शामिल करने के बाद अब उसके पास धर्मनिरपेक्षता पर दूसरों को उपदेश देने का कोई अधिकार नहीं है।

कैप्टन ने यह टिप्पणी कॉन्ग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत के उस बयान के जबाव में दिया था, जिसमें उन्होंने अमरिंदर सिंह की की घोषणा को ‘चौंकाने वाला’ कहा था और कहा था कि ऐसा प्रतीत होता है कि उन्होंने ‘अपने भीतर के धर्मनिरपेक्ष अमरिंदर को मार डाला’। फिर भी सिंह की पाकिस्तानी दोस्त के आईएसआई के साथ संबंधों की जाँच का आदेश देने का आह्वान पूर्व कॉन्ग्रेस नेता पर अब तक का सबसे तीखा हमला है।

कौन हैं अरूसा आलम?

अरूसा आलम पेशे से पाकिस्तानी रक्षा मामलों की पूर्व पत्रकार हैं और पाकिस्तानी सेना के तंत्र में अच्छी पकड़ रखती हैं। अरूसा, अकलीन अख्तर की बेटी हैं जो कि जनरल रानी के नाम से मशहूर हैं। एक ऐसी प्रभावशाली शख्सियत जिन्हें पाकिस्तानी मीडिया, पाकिस्तानी नेता याहया खान (yahya khan) की ‘लवर और सोर्स ऑफ़ इंस्पिरेशन’ (muse and mistress) कहता था। जनरल रानी के लिए ऐसा माना जाता था कि याहया खान के पीछे सारी अभिप्रेरणा उनकी ही है। इसी क्रम में वह जनरल तक जाने का रास्ता बनीं और और पाकिस्तानी सेना के तंत्र में उनकी अहमियत को नई ऊँचाइयाँ मिली। अरूसा आलम को यह बना बनाया नेटवर्क अपनी माँ से विरासत में मिला।

अरूसा आलम को अगस्ता 90 बी सबमरीन (Agosta-90B submarine) समझौते से सम्बन्धित खोजी पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। इस रिपोर्ट की वजह से ही पाकिस्तानी नौसेना के मुखिया मनसुरुल हक़ को 1997 में गिरफ्तार किया गया था। साउथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन (SAFMA) में शामिल होने के बाद इनकी प्रसिद्धि और बढ़ी, इस संस्था का मूल काम भारत और पाकिस्तानी पत्रकारों के बीच रिश्ते सुधारना था। कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह अरूसा आलम भी शादीशुदा थीं, उनके दो बेटे थे और उनके पति व्यक्तित्व के लिहाज़ से निष्क्रिय थे इसलिए लोगों को याद भी नहीं हैं। अरूसा के मन में भारत को लेकर अलग ही रोमांच था, उनका भारत आना-जाना लगा रहता था और इस दौरान यहाँ के लोगों से भी मिलती थीं।

कैप्टन अमरिंदर सिंह की महिला मित्र अरूसा आलम

अरूसा आलम की कैप्टन अमरिंदर सिंह से पहली मुलाक़ात उनके पाकिस्तान के दौरे पर हुई थी। दोनों को 2007 से एक दूसरे से जोड़ा जाने लगा था जब वह कई बार साथ नज़र आए थे। हालाँकि, पाकिस्तानी पत्रकार ने तत्काल प्रभाव से स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा था वह ‘सिर्फ दोस्त’ हैं। बाद में उन्होंने इस भाव को दूर करने का प्रयास किया और तब से वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ अपने रिश्तों को लेकर काफी स्पष्ट हैं।

पंजाब में अरूसा आलम को पटियाला के पूर्व महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की बेहद ख़ास और करीबी दोस्त माना जाता है। चंडीगढ़ में बतौर मेहमान उनकी स्वीकार्यता उल्लेखनीय है, वह शहर के उच्च वर्ग के साथ योग और कैप्टन अमरिंदर सिंह के प्रति अपने लगाव के बहाने काफी समय बिताती हैं।

आलम 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए एक प्रमुख चेहरा थीं। उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह के लिए प्रचार करते हुए भी देखा गया था। कैप्टन अमरिंदर सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में वीवीआईपी के तौर पर वह उपस्थित थीं। हालाँकि, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री आलम के साथ अपने संबंधों के बारे में अभी भी चुप्पी साधे हुए हैं। हालाँकि, आलम ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को संबोधित करते हुए महाराज साहब के साथ अपने संबंधों पर भी बात की थी।

आलम फरवरी 2020 में कैप्टन अमरिंदर सिंह की जीवनी ‘द पीपल्स महाराजा’ के विमोचन के मौके पर भी मौजूद थीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि किताब में अरूसा के साथ सिंह के संबंधों पर एक समर्पित अध्याय है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उनकी दोस्ती खूबसूरत है और उन्हें इस पर गर्व है। कैप्टन अमरिंदर सिंह से रिश्तों की वजह से पैदा होने वाले अवरोध के बारे में अरूसा आलम की जानकारी बहुत कम है। फरवरी 2018 में चंडीगढ़ में उन्होंने कहा था, “मेरा रिश्ता मेरे घर पर भी एक संवेदनशील मसला है। मैं एक मुस्लिम महिला हूँ और आप जानते हैं कि हमारे घर पर लोग कैसे सोचते हैं।”

अब ड्रग्स केस में एजाज़ खान की बीवी एंड्रिया को NCB ने भेजा समन, पहले से जेल में बंद है शौहर

मुंबई के ड्रग केस में चल रही धरपकड़ अब और तेज हो गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने अब अभिनेता एजाज खान की बीवी एंड्रिया एजाज खान को समन भेजा। अब एनसीबी उनसे अपने मुंबई दफ्तर में पूछताछ कर रही है। उनके शौहर एजाज पहले से एनसीबी की गिरफ्त में है। जाँच एजेंसी ने एक्टर के घर से प्रतिबंधित ड्रग बरामद करने के बाद यह कार्रवाई की थी।

बता दें कि अंधेरी और लोखंडवाला इलाकों में तलाशी के दौरान एनसीबी को एजाज घर से अल्प्राजोलम (Alprazolam) की गोलियाँ मिली थीं। खान ने इस पर सफाई दी थी कि गोलियाँ उसकी बीवी की थीं, उसके मुताबिक उसकी बीवी एंड्रिया का गर्भपात हो गया था इस कारण वह डिप्रेशन में थी और नींद की गोलियाँ खाती थीं।

उस समय एनसीबी ने कहा था कि एजाज खान, गिरफ्तार हुए ड्रग तस्कर शादाब बाटा उर्फ ​​शादाब फारूक शेख के सिंडिकेट का हिस्सा था। शेख वही शख्स है जिसको मार्च में गिरफ्तार किया गया था और उसके पास से 2 किलो प्रतिबंधित मेफेड्रोन बरामद किया गया था।

उल्लेखनीय है कि अभिनेता एजाज खान को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 30 मार्च 2021 को मुंबई एयरपोर्ट से हिरासत में लिया था। मुंबई में दो ठिकानों पर हुए रेड में एजेंसी को बड़ी सफलता हाथ लगी थी। एजाज़ खान से 8 घंटे चली पूछताछ के NCB ने उसे गिरफ्तार किया था। एजाज खान ने हिरासत में लिए जाने से पहले दावा किया था कि वो खुद ही NCB अधिकारियों से मिलने के लिए एजेंसी के साउथ मुंबई स्थित दफ्तर आया।

मालूम हो कि इससे पहले जुलाई 2019 में भी उसे मानहानि और हेट स्पीच मामलों में गिरफ्तार किया गया था। वह ‘बिग बॉस’ और ‘फियर फैक्टर’ जैसे रियलिटी शो का हिस्सा रहा है। 2018 में भी एजाज खान को मुंबई की एंटी नारकोटिक्स सेल ने प्रतिबंधित ड्रग्स रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के वक्त वह नशे में धुत था।

हाजी कॉलोनी की औरत, 13 साल छोटे इमरान रिक्शावाला संग भागी: घर से ₹47 लाख और जेवर भी ले गई

मध्य प्रदेश के इंदौर में इमरान नाम का रिक्शा चालक खुद से 13 वर्ष बड़ी महिला के साथ फरार हो गया है। आरोपित इमरान की उम्र 32 वर्ष बताई जा रही है। महिला की आयु 45 वर्ष के आस पास है। घटना लगभग 8 दिन पहले की बताई जा रही है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके दोनों की तलाश शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह घटना इंदौर के खजराना थानाक्षेत्र के हाजी कॉलोनी की है। इमरान के साथ भागी महिला एक प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखती है। महिला का ससुराल और मायका पक्ष दोनों काफी सम्पन्न बताए जा रहे हैं। इनके पास करोड़ों की चल अचल सम्पत्ति बताई जा रही है।

घर से भागने के पहले महिला 47 लाख रुपए अपने साथ ले गई है। महिला पर जेवरों से भरा बैग भी साथ ले जाने का आरोप लग रहा है। परिजनों के अनुसार 47 लाख रुपए कुछ दिन पहले एक जमीन के सौदे में मिले थे। आरोप है कि तिजोरी की चाबी महिला अपने साथ ही रखती थी।

पुलिस में शिकायत दर्ज करवाते हुए पति ने बताया कि उनकी पत्नी का इमरान नाम के रिक्शा चालक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। एक दिन अचानक ही उनकी पत्नी का फोन बंद हो गया। इसी के बाद उन्हें उसके घर से भाग जाने का अंदेशा हुआ। जब इमरान की तलाश की गई तो वो भी गायब मिला।

मामले को संज्ञान में लेते हुए पुलिस ने फ़ौरन जाँच शुरू कर दी है। इमरान और महिला दोनों के फोन बंद आ रहे हैं। मिली लोकेशन के आधार पर पुलिस की एक टीम को जावरा भेज दिया गया है। इसी के साथ पुलिस टीम ने रतलाम और उज्जैन में भी छापेमारी की है।

पैसे और जेवर ले कर भागने के सवाल पर पुलिस का कहना है कि इमरान के पकड़े जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। टीआई के अनुसार आशंका इस बात की भी हो सकती है कि इमरान ने महिला को ब्लैकमेल करके पैसे लाने पर मजबूर कर दिया हो। फिलहाल घटना आस-पास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

बेटी से करना चाह रहा था रेप, माँ ने काट डाला… कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा, कहा – ‘कुल्हाड़ी से कई बार क्यों मारा?’

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के कोर्ट ने बेटी से रेप की कोशिश करने वाले आरोपित की हत्या मामले में 70 वर्षीय महिला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मामला 11 साल पुराना है। जिसकी सुनवाई करते हुए बुलंदशहर की एडीजे प्रथम कोर्ट ने महिला को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा के साथ ही 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने इस मामले को ऑनर किलिंग और प्लांड मर्डर बताया।

14 अक्टूबर को फैसला सुनाते हुए एडीजे प्रथम राजेश्वर शुक्ला ने कहा कि रेप की कोशिश को रोकने के लिए कुल्हाड़ी से कई वार करने की जरूरत नहीं थी। थोड़े से विरोध से भी उसे रोका जा सकता था। फैसले की कॉपी शनिवार (16 अक्टूबर 2021) को मीडिया में आई। 

इसके मुताबिक जब आरोपित महिला कस्तूरी देवी ने यह क्राइम किया था, उस दौरान उनकी उम्र 59 साल थी। अब 11 साल बाद उनकी आयु 70 साल हो गई है। महिला ने 31 जुलाई 2010 को प्रवीण कुमार नाम के युवक की हत्या की थी। घटना के बाद उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया था।

केस के ट्रायल को पूरा होने में 11 साल का वक्त लगा। पुलिस ने जज के सामने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट के अनुसार मृतक की गर्दन पर किसी धारदार हथियार के 5 से ज्यादा निशान थे।

कोर्ट ने कहा, “प्रवीण को उसकी गर्दन के पास 5 बार मारा गया, जिससे उसकी मौत हो गई। अगर कस्तूरी को रेप का प्रयास रोकना था तो उसके लिए मृतक को कई बार मारने की जरूरत नहीं थी, एक छोटा बल प्रयोग ही घटना को रोक सकता था। परिवार खुद ही शव को घर से बाहर लेकर आया और मदद के लिए चिल्लाया, इससे मालूम होता है कि यह सुनियोजित साजिश थी।”

कोर्ट के फैसले से उलट महिला की बेटी और बेटे ने कहा कि रेप की कोशिश हुई थी। उसी को रोकने की कोशिश में गुस्से के कारण उनकी माँ ने रेप आरोपित प्रवीण को मारा था।

11 साल पहले मृतक प्रवीण आरोपित महिला के घर में आधी रात को घुसा था। जहाँ उसने महिला की 20 साल की लड़की के साथ जबरदस्ती रेप करने की कोशिश की। पीड़िता जब चीखी तो उसकी माँ कस्तूरी उठीं और कुल्हाड़ी लेकर आईं। इसके बाद महिला ने प्रवीण पर उससे वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई।

ऊपर चन्नी…नीचे जनता: लोहे की सीढ़ी पर चढ़ पंजाब CM जोड़ रहे बिजली की तार, यूजर बोले- ‘ड्रामेबाज’

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की सोशल मीडिया पर एक तस्वीर सामने आई है। इसमें वह बिजली के खंबे पर खड़े दिख रहे हैं। वहीं नीचे कई महिलाएँ हैं जो कैमरे की ओर चेहरा करके अपनी फोटो खिंचा रही हैं।

इस तस्वीर को शेयर करते हुए पंजाब प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवादल ने कहा, “बिजली बिल बकाया होने पर विभाग ने एक किसान परिवार का कनेक्शन काट दिया था, पंजाब सीएम चन्नी साहब ने खुद अपने हाथों से पुनः कनेक्शन जोड़ा। पंजाब कॉन्ग्रेस जिंदाबाद ,चन्नी साहब जिंदाबाद।”

सोशल मीडिया पर पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की यह तस्वीर खूब शेयर हो रही है। हालाँकि यह हालिया तस्वीर है या नहीं, इसकी पुष्टि ऑपइंडिया नहीं करता। लेकिन दावा है कि कुराली में बिजली का बिल न भरने के कारण गरीबों का कनेक्शन काट दिया गया था। ऐसे में चरणजीत सिंह खुद कुराली गए और खंभे पर चढ़कर कनेक्शन को जोड़ा।

इस बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस फोटो को देख चन्नी पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि यह कोई साधारण व्यक्ति नहीं है, यह पंजाब के मौजूदा मुख्यमंत्री चन्नी साहब हैं जो लोकल जनता का परेशानी नहीं देख सकते।

वहीं कुछ का कहना है, “मुख्यमंत्री के इशारे पर तो एक नहीं सौ पम्पघरों के बिजली कनेक्शन दो मिनट में लग जाएँ। तो चन्नी मुख्यमंत्री बनो ड्रामेबाज तो पहले ही बहुत हैं।”

राहुल मेहरा कहते हैं, “पंजाब में जल्द ही इलेक्शन होने वाले हैं इसलिए चरणजीत सिंह चन्नी फोटो सेशन में व्यस्त हो रखे हैं। फोटो सेशन इसलिए क्योंकि उनके कहने भर से बिजली विभाग हर काम कर देगा! अमृतसर में डेंगू का प्रकोप इतना है के हर घर से कोई ना कोई हॉस्पिटल में है, लेकिन चन्नी जी को तो सिर्फ…।”

हिंगलाग दान कहते हैं, “चरणजीत चन्नी की पहल तो अच्छी है लेकिन पोज अच्छा नहीं है। ऊपर चढ़ना, फिर सबको बिजली पोल के पास बुलाना, एक कतार में खड़ा करना, फिर फोटो खिंचवाना। मतलब उद्देश्य फोटो खिंचवाने का ही था।”

मयंक लिखते हैं, “लोहे की सीढ़ी से बिजली कनेक्शन जोड़ते पंजाब के यशस्वी मुख्यमंत्री चन्नी साहब। ये लोहे की सीढ़ी जरूर सिद्धू ने भेजी होगी।”

दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस के अकॉउंट से जिस मुद्दे (बिजली काटने और उसे पुन: जोड़ने) पर सीएम चन्नी के लिए वाह-वाही बटोरने का काम किया जा रहा है। वो मुद्दा और उसका समाधान उनके ही अधीन है। कॉन्ग्रेस शासित प्रदेश में अगर मुख्यमंत्री नहीं चाहते कि किसी के यहाँ से बिजली जाए तो ये सोचने का विषय है कि कैसे बिजली विभाग अपने आप आम जनता के घरों में ये एक्शन ले सकता है।

बाइबिल नहीं बाँटने पर 22 लड़कियों को नौकरी से निकाला: भोपाल की चैरिटेबल संस्था CFI पर धर्मान्तरण का आरोप

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चैरिटेबल संस्था CFI पर धर्मान्तरण कराने के आरोप लगे हैं। इस संस्था से निकाले गए कर्मचारियों ने पुलिस में शिकायत की है। शिकायत में लोगों ने बाइबिल बाँटने और धर्मान्तरण कराने के आरोप लगाए गए हैं। आरोपित संस्था CFI के प्रमुख डॉक्टर सजि थॉमस हैं। इसका मुख्यालय भोपाल के अयोध्या बाईपास स्थित शंकर गार्डन में है।

दैनिक भाष्कर की खबर के अनुसार संस्था ने अपने उन कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है जिन्होंने ईसाई धर्म का प्रचार और बाइबिल बाँटने से इंकार कर दिया।। खुद पर धर्मान्तरण का आरोप लगाने वाले पूर्व कर्मचारी राजेश खन्ना के खिलाफ CFI संस्था ने अभद्र व्यवहार की शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस दोनों मामलों की जाँच कर रही है। CFI संस्था लगभग 20 वर्ष पुरानी बताई जा रही है।

अपनी पहिचान गुप्त रखने की शर्त पर CFI से निकाली गई लड़कियों ने पूरी बात बताई है। उनके अनुसार 22 लड़कियों का समूह गर्भवती महिलाओं के लिए लगभग 3 वर्ष से काम कर रहा। कुछ समय से उनको बाइबिल बाँटने के लिए कहा जाने लगा। जब उन्होने मना किया तो उनको नौकरी से निकाल दिया गया। इसी के साथ मीटिंग के लिए ऑफिस में बुला कर उन्हें अपमानित किया गया।

लड़कियों ने CFI में मदर चाइल्ड हेल्थ विंग प्रभारी डॉक्टर प्रीति नायर पर भी आरोप लगाया है। इस घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया गया है। वीडियो में दोनों पक्ष एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। इसी वीडियो में हेल्थ कंसल्टेंट फेवा थॉमस को कहते सुना जा रहा है कि हम पर धर्मान्तरण के आरोपों को साबित करके दिखाओ।

चैरिटेबल ट्रस्ट CFI की संस्था MCI की प्रभारी डॉक्टर प्रीति नायर ने इन आरोपों में किसी भी प्रकार की सच्चाई न होने की बात कही है। उन्होंने बताया कि मैंने किसी भी कर्मचारी को संस्था से नहीं निकाला है। उनके अनुसार आरोप लगाने वाली 22 लड़कियों का उनसे सीधा वास्ता ही नहीं है। वो सभी संस्था के कर्मचारी राजेश खन्ना के अधीनस्थ काम करती हैं।

डॉक्टर प्रीति ने कहा कि उन पर आरोप क्यों लग रहे हैं ये उन्हें भी नहीं समझ में आ रहा। उन सभी की जानकारी अपडेट करने के लिए उन्हें बुधवार को बुलाया गया था। हमने उन्हें कभी भी बाइबिल बाँटने के लिए भी नहीं कहा है। इसी के साथ हम पर लग रहे धर्मांतरण के आरोप भी सही नहीं हैं।

बकौल प्रीति नायर उनकी तरफ से राजेश खन्ना के खिलाफ पुलिस में अभद्र व्यवहार की शिकायत दर्ज करवाई गई है। इस मामले में आरोपित राजेश खन्ना का कहना है कि वो CFI में लगभग 5 वर्ष से नौकरी कर रहे हैं। उन्हें संस्था के मदर चाइल्ड हेल्थ विंग में महिलाओं को जागरूक बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। पिछले कुछ समय से उन्हें बाइबिल बाँटने के साथ ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिए कहा जा रहा है।

उनके अधीनस्थ काम करने वाली महिलाओं को भी यही काम करने का दबाव CFI संस्था द्वारा बनाया जा रहा था। लड़कियों ने ऐसा करने से मना किया तो उन्हें निकाल दिया गया। प्रचार करने और बाइबिल बँटवाने का दबाव बनाया जा रहा है।

बुधवार दोपहर संस्था प्रमुख डॉक्टर प्रीति नायर और फेवा ने इसी सिलसिले में सबको बातचीत के लिए बुलाया था। मुझे ऑफिस के बाहर ही रोक दिया गया। सिर्फ लड़कियों को अंदर ले जाया गया। कुछ देर बाद अंदर से चीख सुन कर मैं भी वहाँ पहुँच गया। मेरे पहुँचते ही उन्होंने मुझ पर ही आरोप लगाने शुरू कर दिए। लड़कियों ने बाइबिल बाँटने और ईसाई धर्म का प्रचार करने से मना कर दिया इसलिए उन सभी को नौकरी से निकाल दिया गया।

राजेश खन्ना के अनुसार उन्होंने इसकी लिखित शिकायत स्थानीय थाने छोला मंदिर में की है। साथ ही उन्होंने गुरुवार को नौकरी से इस्तीफा भी दे दिया। उनके अनुसार पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है।

इस घटनाक्रम पर मीडिया रिपोर्ट के अनुसार छोला मंदिर टीआई अनिल मौर्य ने बताया कि CFI संस्था के खिलाफ राजेश खन्ना ने प्रार्थना पत्र दिया है। दी गई तहरीर में उन्होंने CFI द्वारा धर्मान्तरण करवाने और उनके अधीनस्थ काम करने वाली लड़कियों से बाइबिल बँटवाने का आरोप लगाया है। संस्था ने ही राजेश खन्ना के खिलाफ अभद्रता करने का आरोप लगा कर तहरीर दी है। दोनों मामलों की जाँच करवाई जा रही है। अंत में जो भी दोषी होगा उस पर वैधानिक एक्शन लिया जाएगा।

इस प्रकरण की जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने स्थानीय छोला मंदिर थाने में फोन मिलाया। थाने के लैंडलाइन नंबर को रिसीव करने वाले स्टाफ ने कार्रवाई में किसी प्रगति की जानकारी होने से इंकार कर दिया। वहीं जब थाना प्रभारी के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन मिलाया गया तब कोई जवाब नहीं मिला।

कैथोलिक कॉलेज में सेक्स कॉम्पिटिशनः लड़कियों से सेक्स करने की लगती होड़, सेक्सुअल एक्ट भी होते थे असाइन

अब तक आपने स्कूल कॉलेजों में होने वाली तमाम प्रतिस्पर्धाओं के बारे में सुना होगा जिनका उद्देश्य छात्रों के भीतर छिपे हुनर को बाहर निकालना होता है। लेकिन अमेरिका के मिनेसोटा में स्थित एक कॉलेज से एक अजीबोगरीब कॉम्पिटिशन की खबर आई है। डेलीमेल की खबर के अनुसार वहाँ एक कैथोलिक कॉलेज में सेक्स कॉम्पिटिशन करवाया जाता था जिसका उद्देश्य दूसरे कैथोलिक कॉलेज की लड़कियों को निशाना बनाना था।

मिनेसोटा में स्थिति सेंट जॉन यूनिवर्सिटी है उसके सेंट पैट्रिक हॉल में रहने वाले छात्रों के समूह ने इस कॉम्पिटिशन को किया जिसमें नियम थे कि कौन सबसे ज्यादा सेंट बेनेडिक्ट की लड़कियों के साथ सेक्स करेगा। इस कॉम्पिटिशन में शामिल होने वालों को बकायदा अलग-अलग सेक्स एक्ट करने को कहा जाता था। जिसके लिए प्वाइंट वैल्यू भी असाइन होते थे।

शैक्षणिक संस्थान में हो रहे ऐसे घिनौने कॉम्पिटिशन से वाकिफ दो छात्रों ने इस बाबत अपना नाम न बताने की शर्त पर द रिकॉर्ड को बयान दिया। उन्होंने बताया ये प्रतियोगिता एक ग्रुप चैट से चलती है। जहाँ बेनेडिक्ट की महिलाओं के नाम दिए जाते हैं और सेंट जॉन के लड़कों को उन्हें अपनी ओर आकर्षित करना होता है।

कॉम्पिटिशन में शामिल होने वाले को न केवल विभिन्न सेक्स एक्ट असाइन होते बल्कि उनकी बारिकियाँ भी बताई जातीं। लेकिन ये कॉम्पिटिशन कैसे होता है ये आज तक रहस्य बना हुआ है। ये बात भी अज्ञात है कि कितने छात्रों ने प्रतियोगिता में भाग लिया और कैसे इसका इतना विस्तार हुआ।

अजीब बात ये है कि ये सेंट जॉन और सेंट बेनेडिक्ट दोनों पार्टनर कॉलेज हैं। ऐसे में इस कॉम्पिटिशन का पता चलते ही यूनिवर्सिटी ने जाँच करनी शुरू कर दी है। प्रवक्ता का कहना है कि पहली बार इस संबंध में उनको सितंबर में मालूम चला था। स्कूल के अनुसार, चूँकि अभी जाँच चल ही रही है इसलिए वह आरोपों के बारे में या आरोपितों और सेक्सुअल एक्ट्स के बारे में नहीं बता सकते।

उन्होंने कहा, “हम किसी तरह के यौन दुराचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे…हमने आरोपितों को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित, निष्पक्ष और तीसरी पार्टी के जाँचकर्ताओं को बुलाया है।” इस बीच कई सेंट बेनेडिक्ट के छात्रों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि जाँच कैसे हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें डर है कि उनके साथी (पुरुष) सहपाठी इस स्थिति की गंभीरता को नहीं समझते हैं।

एक महिला ने बताया, “हमने इसके बारे में अपने बहुत से पुरुष मित्रों के साथ बहुत बात की और उनमें से कई बोले कि लड़कियाँ इसे बहुत बड़ी बात बना रही हैं। हमें कहा जा रहा है कि हम ज्यादा नाटक करते हैं और हम ही लोगों के जीवन को बर्बाद करने पर तुले हैं।” वह कहती हैं कि ये बातें सबूत हैं कि उन्हें नहीं लगता कि ये खेल गलत था और उनके मुताबिक ये सिर्फ उनके जीवन से जुड़ा सवाल हैं।

एक अन्य लड़की कहती, “मैं जिन लड़कों को जानती हूँ वो मुझसे कहते हैं ‘जिन्होंने ये सब किया वो उनकी दिक्कत हैं, हम तो ऐसा कभी नहीं करेंगे’…लेकिन फिर वो टिप्पणी करते हैं…भले ही उनकी हरकत छोटे लेवल पर होती हैं लेकिन तब भी वो उसी साइकिल का पार्ट हैं। मुझको नहीं लगता कि उन्हें इस बात का एहसास है कि वो भी इन सबमें छोटे ही सही लेकिन भागीदार हैं।”

उल्लेखनीय है कि कैथोलिक कॉलेज में होने वाले ऐसे कॉम्पिटिशन का खुलासा होने के बाद सेंट बेनेडिक्ट्स इंस्टीट्यूट फॉर विमेन लीडरशिप के कॉलेज द्वारा प्रदर्शन किया गया जिसमें सैंकड़ों छात्राओं ने भाग लिया। कॉलेज में संचार और जेंडर अध्ययन के प्रोफेसर एमिली बर्ग पॉप ने आरोपों को ‘तंग करने वाला’ कहा। उन्होंने इस कार्यक्रम में भाग लिया और कथित प्रतियोगिता की निंदा करने के लिए एकजुट होने के लिए छात्रों की प्रशंसा की।

वहीं बेनेडिक्ट में पढ़ने वाली एक छात्रा ने ये याद किया कि कैसे कॉलेज में पहले भी पुरुष छात्रों ने अपमानजनक व्यवहार किया लेकिन हमेशा उनकी अनदेखी होती रही। छात्रा ने उम्मीद जताई कि शायद अब इतनी बड़ी बात खुलने के बाद सेंट जॉन के लड़कों से जवाब माँगा जाएगा। पहले के कृत्यों को तो धो-पोंछ बरामबर कर दिया गया।

यूपी में जीतने पर कॉन्ग्रेस का स्कूटी और स्मार्टफोन देने का ऐलान, मायावती ने लगाई लताड़, पूछा- पंजाब, राजस्थान में सरकार वहाँ क्या किया?

कॉन्ग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश इकाई की प्रभारी प्रियंका गाँधी वाड्रा ने यूपी चुनाव से पहले बड़ी घोषणा कर दी है। उन्होंने राज्य में पार्टी के सत्ता में आने पर लड़कियों को स्मार्टफोन और इलेक्ट्रिक स्कूटी देने का वादा किया

गुरुवार (21 अक्टूबर 2021) को एक ट्वीट में उन्होंने कहा, “मैं कुछ छात्राओं से मिली, उन्होंने कहा कि उन्हें पढ़ाई और सुरक्षा के लिए स्मार्टफोन की जरूरत है। मुझे खुशी है कि घोषणा पत्र समिति की सहमति से, इंटरमीडिएट पास करने वाली छात्राओं को स्मार्टफोन और स्नातक पास करने वाली छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी देने का यूपी कॉन्ग्रेस ने आज फैसला किया।”

प्रियंका गाँधी का ट्वीट

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती ने कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा के चुनावी घोषणाओं पर तंज कसा है। मायावती ने शुक्रवार (22 अक्टूबर 2021) को तीन ट्वीट से कॉन्ग्रेस पर हमला बोला।

मायावती ने ट्वीट करते हुए कहा, “कॉन्ग्रेस ने चुनावी छलावे के तहत भाजपा व सपा की तरह ही अनेकों प्रकार के लोक लुभावन वादे आदि करने शुरू कर दिए हैं, जिसके तहत इस पार्टी ने यूपी में सरकार बनने पर उत्तीर्ण छात्राओं को स्मार्टफोन व स्कूटी देने की बात कही है, लेकिन मूल प्रश्न यह है कि इन पर विश्वास कौन व कैसे करे?”

मायावती ने कॉन्ग्रेस पर कसा तंज

मायावती ने दूसरे ट्वीट में पूछा, “कॉन्ग्रेस की राजस्थान व पंजाब में सरकार है तो क्या इन्होंने ऐसा कुछ वहाँ करके दिखाया है जो लोग उनकी बातों पर यकीन कर लें? नहीं किया है तो फिर लोग उन पर विश्वास कैसे करें? यही वजह है कि कॉन्ग्रेस व भाजपा आदि पार्टियों के दावों व वादों के प्रति जन विश्वास की घोर कमी है।”

एक अन्य ट्वीट में मायावती ने कहा, “जनता से छल व वादाखिलाफी आदि के कारण कॉन्ग्रेस के बुरे दिन चल रहे हैं तथा इन्हीं कुछ खास कारणों से भाजपा के भी बुरे दिन शुरू हो चुके हैं। ’अच्छे दिन’ का सपना दिखाकर लोगों पर महँगाई, गरीबी व बेरोजगारी आदि का पहाड़ तोड़ने का खामियाजा तो भाजपा को भी भुगतना पड़ेगा।”

बता दें कि तीन दशक से सत्ता का वनवास काट रही कॉन्ग्रेस ने इससे पहले 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने का बड़ा ऐलान किया था। प्रियंका ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी आगामी विधान सभा चुनाव में महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट देगी। उन्होंने कहा था कि सभी महिलाएँ जो व्यवस्था में बदलाव लाना चाहती हैं, उनको आगे आने और चुनाव लड़ने का स्वागत है। उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में घोषणा की कि कोई भी महिला जो चुनाव लड़ना चाहती है वह 15 नवंबर तक आवेदन दे सकती है। मायावती ने कॉन्ग्रेस की महिलाओं को 40 प्रशित टिकट देने की घोषणा को कोरी चुनावी नाटकबाजी बताया था।

दुर्गा पूजा मंडप में कुरान रखने से पहले दरगाह के केयरटेकर से मिला था इकबाल हुसैन, बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ ऐसे रची गई साजिश

बांग्लादेश में दुर्गा पूजा पंडाल में कुरान रखकर साम्प्रदायिक दंगा भड़काने के आरोपित इकबाल हुसैन को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस जाँच से यह पता चला था कि उसने जानबूझकर ऐसा किया था। ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार नए सीसीटीवी फुटेज में वह स्थानीय दरगाबाड़ी मजार के एक केयरटेकर से मिलते नजर आया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, हुसैन ने स्थानीय दरगाह से कुरान की एक प्रति ली और उसे दुर्गा मंडप में हनुमान जी की मूर्ति के चरणों में रख दिया। बाद में उसकी तस्वीरें फेसबुक पर अपलोड की गई। इससे भड़के कट्टरपंथी मुस्लिमों ने हिंदुओं को निशाना बनाकर हमले किए और उनके घरों को जला दिया।

ढाका ट्रिब्यून ने बताया है कि मजार के चीफ कस्टोडियन अहमदुन्नाबी माशुक ने केयरटेकर की पहचान हाफिज हुमायूँ और फैसल के रूप में की है। 12 अक्टूबर को रात 11 बजे इकबाल हुसैन के साथ दोनों की मुलाकात के बाद हाफिज ने क़ुरान की एक प्रति उसके लिए बगल की मस्जिद की एक कोठरी में छोड़ दी।

13 अक्टूबर को मुख्य आरोपित इकबाल हुसैन को मस्जिद से लगभग 2:12 बजे कुरान को उठाते देखा गया। उसे लेकर वो नानुआ दिरघी दुर्गा पूजा मंडप में गया और हिंदुओं को फँसाने के इरादे से ‘ईशनिंदा’ का काम किया।

आरोपित इकबाल से मिलते मस्जिद के कार्यवाहक। साभार: सीसीटीवी फुटेज

पत्रकार पूजा मेहता द्वारा 21 अक्टूबर को साझा किए गए सीसीटीवी फुटेज के एक वीडियो में इकबाल को कुरान की प्रति के साथ मस्जिद से निकलते हुए दिखाया गया है। उन्होंने लिखा, “बांग्लादेश पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि इकबाल हुसैन को मुख्य संदिग्ध के रूप में पहचाना गया है। उसी ने कोमिला में दुर्गा पूजा मंडप में पवित्र कुरान रखी जिसके बाद बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।”

कोमिला के सुजानगर इलाके के नूर अहमद आलम के बेटे 35 वर्षीय इकबाल हुसैन ने 13 अक्टूबर को कोमिला के नानुआ दिघिर पार में एक दुर्गा पूजा मंडप में कुरान रखा था। इसके बाद कट्टरपंथी इस्लामियों ने अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ साम्प्रदायिक हिंसा का सिलसिला शुरू कर दिया था। कोमिला के पुलिस अधीक्षक फारूक अहमद ने बताया कि पुलिस ने पूजा स्थल पर वीडियो फुटेज का विश्लेषण करने के बाद इकबाल की पहचान की है। वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा है या नहीं इस बात का पता नहीं चल सका है।

इकबाल हुसैन की गिरफ्तारी

हिंदू विरोधी दंगा भड़काने के मुख्य आरोपित इकबाल हुसैन को गुरुवार (21 अक्टूबर) की रात कॉक्स बाजार पुलिस ने रात करीब 11 बजे गिरफ्तार कर लिया। डेली स्टार से बातचीत में चटोग्राम रेंज के अतिरिक्त डीआईजी (क्राइम एँड ऑपरेशन) जाकिर हुसैन खान ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आगे की जाँच के लिए आरोपित को कोमिला पुलिस को सौंप दिया गया है।

सीसीटीवी फुटेज का प्रॉपर एनालिसिस करने से इस बात का पता चलता है कि आरोपित ने ही भड़काऊ भाषण दिए और लोगों को हिंदुओं के खिलाफ उकसाया। कोमिला जिले के एसपी फारूक अहमद ने कहा कि 12 सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए गए हैं, जिनमें से 10 में इकबाल को 2:10 से 3:10 बजे के बीच कुरान की प्रति के साथ जाते देखा गया है।

बांग्लादेश की घटना

नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा स्थल में कुरान का अपमान करने की कथित इमेज सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी, जिसके चलते हिंसा हुई। पुलिस ने पाया कि दुर्गा पूजा स्थल पर कुरान रखकर हिंदुओं के खिलाफ साम्प्रदायिक हिंसा भड़काने वाला व्यक्ति इकबाल हुसैन था, जो एक मुस्लिम है। इस घटना को लेकर हिंदू समुदाय ने जोर देकर कहा था कि उनमें से किसी ने भी पूजा पंडाल में कुरान नहीं रखा था और यह घटना हिंदू समुदाय पर हमला करने की एक सोची-समझी साजिश थी।

इसके बाद बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के घरों और मंदिरों पर कट्टरपंथी इस्लामवादियों का हमला हुआ । यह 12 अक्टूबर को शुरू हुआ। बांग्लादेश के चटगाँव के फिरिंगीबाजार इलाके में रविवार को इस्लामिक चरमपंथियों ने श्री शमशानेश्वर शिव विग्रह मंदिर की दुर्गा प्रतिमा में तोड़फोड़ की। 14 अक्टूबर को कई पूजा पंडालों में तोड़फोड़ की गई। हिंदुओं पर हमले के अन्य वीडियो के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर टूटी हुई मूर्तियों, पंडालों और माँ दुर्गा की मूर्ति को तालाब में फेंकने के वीडियो भी सामने आए थे।

16 अक्टूबर को इस्कॉन मंदिर पर 400-500 की भारी मुस्लिम भीड़ ने हमला किया था। 17 अक्टूबर और 18 अक्टूबर को हिंदुओं के घरों में तोड़फोड़ की गई। हिंसा में कई लोगों के घायल और कुछ के मारे जाने की भी खबरें आ चुकी है।