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ईसाई बन, हर महीने ₹20 हजार मिलेंगे, पत्नी को भी घर भेज दूँगा: अभिषेक पर ऐसे डाला जा रहा धर्मांतरण का दबाव

मध्य प्रदेश के जिला सागर में धर्मान्तरण के लिए दबाव बनाने का मामला चर्चा में आया है। यह दबाव कैंट थानाक्षेत्र के भैंसा गाँव निवासी अभिषेक अहिरवार पर बनाया जा रहा है। अभिषेक का आरोप है कि ईसाई बन चुके उसके फूफा ससुर इस मामले के सूत्रधार हैं। अभिषेक ने अपनी पत्नी को बहला-फुसलाकर मायके में ही रोक लेने की शिकायत पुलिस से की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अभिषेक की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित फूफा ससुर रमेश मसीह पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह केस मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021, 506 व धारा 34 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने इस प्रकरण में 2 अन्य लोगों को भी आरोपित किया है। ये दोनों मुख्य आरोपित रमेश मसीह के सहयोगी बताए जा रहे हैं।

अभिषेक के अनुसार 8 दिसंबर 2020 में को उसका विवाह सागर जिले के खुरई की रहने वाली सपना के साथ हुआ। पूरा विवाह हिन्दू विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ था। कुछ दिन सब सही चलने के बाद अचानक 4 माह बाद अभिषेक की पत्नी का फूफा धर्मान्तरण का दबाव बनाने लगा। इसके साथ ही उसने सपना को भी अभिषेक के विरुद्ध भड़काना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे सपना को उसकी ससुराल भेजने में भी आनाकानी की जाने लगे। अगस्त 2021 में सपना रक्षाबंधन के लिए अपने मायके खुरई गई थी। कुछ समय बाद उसके फूफा रमेश मसीह ने उसको अपने घर बुला लिया। उसके बाद से सपना को वापस नहीं भेजा गया है।

अभिषेक के अनुसार उसकी पत्नी सपना भी आरोपितों के बहकावे में आ गई है। उसका कहना है कि साथ रहना है तो धर्म बदल लो। फूफा ससुर रमेश मसीह ने इसी के साथ चेतावनी दी है कि अगर वह ईसाई नहीं बना तो सपना की दूसरी जगह शादी वे कर देंगे।

अभिषेक ने पत्नी को वापस लाने के अपने स्तर से तमाम प्रयास किए। लेकिन उनका फूफा ससुर धर्म परिवर्तन की जिद पर अड़ा रहा। अभिषेक के अनुसार आरोपित फूफा ससुर रमेश मसीह लगभग 20 वर्ष पहले ईसाई बना था। अभिषेक किसी भी हाल में अपना धर्म बदलने के लिए तैयार नहीं है। थक हार कर उसने मामले की शिकायत पुलिस में की।

पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में 19 वर्षीय अभिषेक ने बताया है कि उसकी पत्नी को उसके फूफा ससुर रमेश मसीह ने बहला-फुसलाकर अपने घर में रख लिया है। पत्नी को विदा करने के बदले में उस पर धर्म बदल कर ईसाई बनने का दबाव बनाया जा रहा है। धर्म परिवर्तन के बाद उसको प्रतिमाह 20 हजार रुपए मिलने का भी लालच दिया जा रहा।

इस मामले में एडिशनल एसपी विक्रम सिंह कुशवाहा ने कहा है कि मामला दर्ज कर लिया गया है। प्रत्येक बिंदु पर गहन जाँच करवाई जा रही है। इस प्रकरण में जब ऑपइंडिया ने कैंट थाना प्रभारी को सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि मामले से जुड़े आरोपितों व अन्य लोगों को बुलाकर पूछताछ की जा रही है। आरोपित रमेश मसीह ने इस से पहले किसी पर दबाव आदि बनाया या नहीं इसकी भी जाँच चल रही है। मामले से जुड़े लोगों की कॉल डिटेल आदि पर भी पड़ताल हो रही है। जाँच के हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

‘सर्वे सन्तु निरामयाः’: कोरोना टीकाकरण में भारत ने ऐसे हासिल किया 100 करोड़ का मुकाम, 95 देशों की भी की मदद

भारत ने कोरोना टीकाकरण के क्षेत्र में नया झंडा गाड़ दिया है। देश 21 अक्टूबर 2021 को कोरोना वैक्सीन की 100 करोड़ डोज लगाने का आँकड़ा छू लिया। लगभग 278 दिनों में भारत ने ये उपलब्धि हासिल की। इस हिसाब से देखें तो प्रतिदिन औसतन 27 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन की डोज दी गई। हमारे देश की तीन चौथाई जनसंख्या ने कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक डोज ले ली है। लगभग 30% नागरिक ऐसे हैं, जिन्होंने दोनों डोज ले ली है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी बीच सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के साथ कोरोना वैक्सीनेशन की गति पर समीक्षा भी की है। निर्देश दिए गए हैं कि अब लोगों को दूसरा डोज दिए जाने पर जोर दिया जाए। साथ ही अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को लेकर केंद्र ने सभी प्रदेशों से सलाह माँगी है। कई राज्यों के पास पर्याप्त मात्र में कोरोना वैक्सीन की डोज है, ताकि वो लोगों को दूसरा डोज दे सकें। जिन जिलों में टीकाकरण की रफ्तार कम है, वहाँ विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

भारत में कोरोना वैक्सीन की पहली डोज 16 जनवरी, 2021 को डी गई थी। इस हिसाब से अभी 10 महीने भी नहीं हुए हैं। सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, गोवा और उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों का प्रदर्शन शानदार रहा। उत्तर प्रदेश ने भी टीकाकरण में नई उपलब्धियाँ हासिल की। गुजरात, केरल, दिल्ली, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तो लगभग 90% जनसंख्या को कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक डोज दे दी गई है।

ये एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि ‘सर्वे सन्तु निरामयाः’ वाले देश में मोदी सरकार से सवाल पूछे जा रहे थे कि भारत को कौन देश वैक्सीन देगा? भारत में एक नहीं, बल्कि दो-दो वैक्सीन का निर्माण कार्य सम्पन्न हुआ और हर एक गाँव व शहर तक टीकाकरण के लिए जाल बिछाया गया। मुस्लिम बहुल इलाकों में जागरूकता फैलाने के लिए मस्जिदों तक की मदद ली गई। विपक्ष आलोचना करता रहा, लेकिन मोदी सरकार ने टीके की कमी नहीं होने दी।

दुनिया में भारत और चीन के अलावा किसी देश की जनसंख्या ही 100 करोड़ नहीं है, ऐसे में सबसे ज्यादा जनसंख्या को कोरोना वैक्सीन डोज देने के मामले में यही दोनों देश शीर्ष पर रहेंगे। भारत ने इस मिथक को तोड़ दिया है कि अमीर देश पहले अपने लोगों को वैक्सीनेट कर देंगे, फिर अन्य देशों को इंतजार करना होगा कि वो वैक्सीन की डोज दें। ‘वैक्सीन मैत्री’ के रूप में भारत ने 95 देशों की मदद भी की है। उन्हें 6.64 करोड़ डोज दी गई।

बांग्लादेश में जो हुआ, जैसे हुआ… हिंदू क्यों न माने कि पूरी दुनिया ही उसके विरुद्ध: इकबाल कुरान रखेगा, फिर उसके मजहबी बंधु कत्लेआम करेंगे

बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ पिछले लगभग दस दिनों में जो कुछ हुआ वह पूरी दुनिया ने देखा। वैसे भारतीय परंपरागत मीडिया में इसकी बहुत कम चर्चा हुई, पर सोशल मीडिया के भारतीय यूजर्स ने लूटपाट, हत्याओं, बलात्कार और आगजनी की यथोचित भर्त्सना की। सेक्युलर-लिबरल इकोसिस्टम के सदस्यों ने हमेशा की तरह किंतु-परंतु के सहारे हिंदुओं पर हुए भीषण अत्याचार की आलोचना की। कुछ सदस्यों ने वीडियो ट्वीट कर यह साबित करने की असफल कोशिश की कि बांग्लादेश के मुसलमानों ने भारी संख्या में एकत्र होकर हिंदुओं के पक्ष में नारे लगाए और उन्हें बचाने का उपक्रम किया। हमेशा की तरह ही ऐसे प्रयासों के विरोध में तथ्य सामने आए और फेक न्यूज़ फैलाने वालों ने हमेशा की तरह ऐसे तथ्यों को अपनी मोटी चमड़ी पर झेल लिया। 

बाइडन सरकार के होम डिपार्टमेंट ने भी इन अपराधों का संज्ञान लिया। डिपार्टमेंट के आधिकारिक प्रवक्ता ने हिंदुओं के विरुद्ध योजनाबद्ध तरीके से किए गए इन अपराधों की आलोचना की। बांग्लादेश में पीड़ित हिंदुओं के भारत में रहने वाले रिश्तेदारों और इस्कॉन के लोगों ने कोलकाता में बांग्लादेशी कंसुलेट के बाहर प्रदर्शन किया। तस्लीमा नसरीन से लेकर दक्षिण अफ्रीका के हिंदू संगठन की ओर से विरोध हुआ। इन सबके बीच इसी वर्ष संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी और वाम मोर्चे के साथ गठबंधन करने वाले एक राजनीतिक दल के मुखिया अब्बास सिद्दीक़ी ने वीडियो जारी कर हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को सही ठहराने की कोशिश की। अपनी गला फाड़ू तकरीर में सिद्दीक़ी ने हिंदुओं को भविष्य में और भीषण परिणाम के लिए तैयार रहने की धमकी भी दी।  

कुछ बुद्धिजीवीनुमा बंगाली सिनेमा कलाकारों ने चिंता प्रकट करते हुए यह कहा कि बांग्लादेश के मुसलमानों को ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए कि उसका फायदा सांप्रदायिक शक्तियाँ उठा लें। मानो बांग्लादेश में जो कुछ किया गया वह सांप्रदायिक नहीं था। एक शुतुरमुर्ग अपना सिर रेत में बार-बार घुसाकर रखना चाहे तो रखे, पर दूसरों से भी वही अपेक्षा रखना अटपटा लगता है। 

हिंदुओं के विरुद्ध इतने बड़े स्तर पर हुई हिंसा के बाद जब तथाकथित तौर पर कुरान का अपमान करने वाले की पहचान इक़बाल हुसैन के तौर पर हुई है तो अब उन लोगों की प्रतिक्रिया का क्या होगा जो हिंदुओं द्वारा बार-बार यह कहने को मान ही नहीं रहे थे कि हिंदुओं के साथ हुआ अत्याचार एक साजिश का नतीजा है? अब भी क्या किसी को इस बात में संदेह है कि जो भी हुआ वह बिना किसी योजना के नहीं हो सकता था? जिस देश में हिंदू दशकों से हमले झेल रहे हैं और लगातार कम होते जा रहे हैं, उस देश में क्या वही हिंदू अचानक इतने वीर हो जाएँगे कि कुरान को अपने देवता के चरणों में रख देंगे? एक जगह होने वाले कुरान के तथाकथित अपमान के विरोध में कुछ ही समय में इतने अधिक स्थानों पर हिंदुओं पर इतने बड़े और इतने तरह के अपराध सामान्य बात हैं? 

दुर्गा पूजा पंडालों पर आक्रमण, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को खंडित करना, मंदिरों का जलाया जाना, लोगों की हत्या और महिलाओं का बलात्कार, कुरान के तथाकथित अपमान के खिलाफ यह सब मुसलमानों के लिए सामान्य व्यवहार हो सकता है, हिंदुओं के लिए नहीं। कोई हिंदू अपने समुदाय की किसी धार्मिक पुस्तक के किसी अपमान के विरोध में ऐसा कुछ करने की कल्पना भी नहीं कर सकता। वह तो आज के भारत में भी अपने मंदिरों की रक्षा नहीं कर पा रहा है, क्योंकि इसे वह आज भी संविधान सम्मत प्रशासन की जिम्मेदारी मानता है। प्रशासन ने उसके विश्वास को कितना फलीभूत किया है, यह जानने के बावजूद हिंदू आज भी उसी प्रशासन पर भरोसा करता है।

बांग्लादेश के विभिन्न भागों में हिंदुओं के जिन संस्थानों और मंदिरों पर आक्रमण हुआ उनमें नोआखाली में इस्कॉन मंदिर प्रमुख था।इन सबके ऊपर त्रासदी यह कि इस्कॉन के बांग्लादेश चैप्टर का अकाउंट ट्विटर द्वारा इसलिए हटा दिया गया क्योंकि उस अकाउंट से बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में हिंदुओं के विरुद्ध किए जा रहे अपराधों की रिपोर्टिंग हो रही थी। 

किसी देश के अल्पसंख्यकों के विरुद्ध होने वाली इस स्तर की हिंसा की रिपोर्टिंग यदि उस देश की परंपरागत मीडिया न करे और पीड़ित खुद उसे रिपोर्ट करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लें तो उसका सोशल मीडिया अकाउंट डिएक्टिवेट/डिलीट कर देना जायज है? किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नियम अपनी जगह, पर क्या सच को रिपोर्ट करने की आवश्यकता हर नियम से ऊपर नहीं है? ऐसे कठिन समय में किसी देश के अल्पसंख्यकों से उनके विरुद्ध हो रहे अपराध की रिपोर्टिंग का अधिकार छीन लिए जाने से शर्मनाक और क्या हो सकता है? भारत में हिंदुओं को लेकर ट्विटर की नीतियों को सबने देखा है। ऐसे में बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ किए गए ट्विटर के व्यवहार को भारत में उसकी नीतियों का विस्तार क्यों न माना जाए? ट्विटर अपने इस व्यवहार को किसी भी तरीके या तर्क से उचित ठहरा सकता है ? 

यह सब देखते हुए यदि हिंदू यह सोचने लगे कि पूरी दुनिया ही उसके विरुद्ध है तो इसमें आश्चर्य कैसा? 

आधुनिक वैश्विक परिवेश में पवित्र धार्मिक पुस्तकों के अपमान पर क्या प्रतिक्रिया हो, इस पर बहस की आवश्यकता है। यदि एक समुदाय अपनी धार्मिक पुस्तकों, देवताओं के अपमान के खिलाफ कानून के पास जाए और बाकी समुदाय उस अपमान के विरोध में हत्या, बलात्कार और हिंसा करें तो यह हर काल की सबसे बड़ी त्रासदी है। यह किसी भी वैश्विक व्यवस्था के लिए सबके बड़ी चुनौती है। मजहबों की यह सोच कि आधुनिक विश्व में भी सैकड़ों वर्ष पुरानी पुस्तकों की रक्षा के लिए ऐसे घिनौने अपराध जायज हैं, विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरा है। आधुनिक वैश्विक व्यवस्था में इन पुस्तकों, उन्हें पढ़ने वालों और तदानुसार आचरण करने वालों का बढ़ता वर्चस्व इस विश्व को लगातार खतरनाक बना रहा है। 

नोएडा में ईद-ए-मिलाद जुलूस में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे: हिंदू संगठनों का प्रदर्शन, 3 गिरफ्तार

नोएडा में ईद-ए-मिलाद जुलूस में पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वायरल हुए इस वीडियो के बाद हिंदूवादी संगठनों ने नोएडा सेक्टर-20 थाने पर आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए प्रदर्शन किया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इस घटना से जुड़े 3 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। यह घटना 19 अक्टूबर 2021 (मंगलवार) की बताई जा रही है।

नोएडा पुलिस के DCP राजेश एस ने इन गिरफ्तारियों की पुष्टि की है। उन्होंने बताया, “थाना सेक्टर-20 नोएडा क्षेत्रांतर्गत आयोजित जुलूस के दौरान आपत्तिजनक नारे की वायरल वीडियो के संबंध में एफआईआर पंजीकृत की गई है। 3 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।” पुलिस ने यह भी बताया है कि वीडियो का पुलिस द्वारा विश्लेषण किया गया है।

DCP के अनुसार वीडियो की एक्सपर्ट द्वारा भी जाँच करवाई गई है। एक्सपर्ट की सलाह के बाद यह प्रथम दृष्टया साबित हुआ है कि वीडियो में पाकिस्तान ज़िंदाबाद का नारा लगाया गया है। पुलिस ने बताया है कि वीडियो में कई बार हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद का नारा लगाया गया पर बीच में पाकिस्तान ज़िंदाबाद भी बोला गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह नारेबाज़ी पुलिस की मौजूदगी में हुई थी। जुलूस में ही मौजूद किसी ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर डाल दिया था। वीडियो थोड़ी ही देर में वायरल हो गया। वीडियो के आधार पर कार्रवाई की माँग उठने लगी।

यह नारेबाजी नोएडा के सेक्टर-8 क्षेत्र में की गई थी। वीडियो में दिख रहे फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपितों की तलाश शुरू की है। अब तक इस घटना में मोहम्मद जफर, समीर अली और अली रजा पकड़े जा चुके हैं। घटना के बाद से बाकी आरोपित फरार हैं जिनकी तलाश की जा रही है।

‘कॉन्ग्रेस विधायक के बेटे ने 2 दिनों में नहीं किया सरेंडर तो ऐसी कार्रवाई करेंगे जो नजीर बन जाएगी’: नरोत्तम मिश्रा की कड़ी चेतावनी

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने बुधवार (20 अक्टूबर 2021) को प्रदेश का माहौल बिगाड़ने वालों को कड़ी चेतावनी दी। इसके साथ ही उन्होंने रेप के मामले में फरार आरोपित कॉन्ग्रेस विधायक के बेटे करण मोरवाल पर इनाम की राशि 15 से बढ़ाकर 25 हजार कर दी। नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ”करण मोरवाल ने अगर 2 दिनों में सरेंडर नहीं किया तो ऐसी कार्रवाई करेंगे जो प्रदेश में नजीर बन जाएगी।”

मिश्रा ने मीडिया को बताया कि मैंने आईजी को निर्देश दिया​ है कि जो 15 हजार का इनाम है उसे बढ़ाकर 25 हजार कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि मोरवाल जी से भी प्रार्थना है कि वह अपने बेटे को एक दो दिन में हाजिर कर दें। बच्चा दो दिन में आ जाता है तो ठीक है, नहीं तो ऐसी कार्रवाई करेंगे जो मध्य प्रदेश में नजीर बन जाएगी। बेटियों और महिलाओं के साथ सरकार किसी भी तरह की वारदात को बर्दाश्त नहीं करेगी।

दरअसल, मध्य प्रदेश पुलिस उज्जैन के बड़नगर से कॉन्ग्रेस विधायक मुरली मोरवाल के बेटे करण मोरवाल की कई महीनों से तलाश कर रही है। करण मोरवाल कथित रेप केस में पिछले छह महीने से फरार है।

इसी साल अप्रैल में इंदौर से यूथ कॉन्ग्रेस की एक पदाधिकारी ने करण मोरवाल पर रेप का आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में केस दर्ज कराया था। महिला ने अपनी शिकायत में खुलासा किया कि था कि मोरवाल उसे इस साल वैलेंटाइन डे पर इंदौर के होटल प्राइड ले गया था। होटल पहुँचने पर कॉन्ग्रेस नेता के बेटे ने शराब में नशीला पदार्थ डालकर कथित तौर पर उसका बलात्कार किया था।

पीड़िता ने अपनी शिकायत में आगे कहा था कि पिछले साल इंदौर में एक राजनीतिक कार्यक्रम में करण से मिलने के बाद उसकी उससे अच्छी दोस्ती हो गई थी। इसके बाद दोनों कई मौकों पर मिले। जब दोनों में नजदीकियाँ बढ़ गई तो वे मोरवाल आए थे। रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता ने उससे पूछा कि क्या तुम्हे कमलनाथ (पूर्व मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता) ने भेजा है, इस पर युवक कहता है कि कमलनाथ से ऊपर भी कई लोग हैं। उन्होंने ही उसको इंदौर में पूरा मामला सुलझाने को भेजा है, वरना उसका इंदौर में कोई काम नहीं था। युवक इस बातचीत में पीड़िता को राजनीति में आगे बढ़ाने का लालच देकर कहता है कि वह उसे आगे बढ़ा सकता है।

गौरतलब है कि इस मामले में युवती की शिकायत पर विधायक के बेटे के खिलाफ धारा-376 के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद से ही आरोपित फरार है, वहीं दूसरी तरफ पीड़िता को तरह-तरह से केस वापस लेने के लिए धमकाया भी जा रहा है। जिसकी शिकायत भी पीड़िता की ओर से पुलिस में की गई थी।

बांग्लादेश के दुर्गा पूजा मंडप में कुरान रखने वाला निकला इकबाल हुसैन, इसके बाद ही शुरू हुआ हिन्दुओं पर हमलों का सिलसिला

बांग्लादेश में 33 जिलों में 335 मंदिरों पर हमले हुए हैं। ये पहले 4 दिन, ये 13-17 अक्टूबर, 2021 तक के ही आँकड़े हैं। ऐसी घटनाएँ अब भी बदस्तूर जारी हैं। मंदिरों से सभी चीजें न सिर्फ लूट ली गईं, बल्कि प्रतिमाओं को भी खंडित कर दिया गया। WHF ने बताया है कि कुल 1800 हिन्दुओं की दुकानों अथवा प्रतिष्ठानों को आग के हवाले किया गया है। ये सब शुरू हुआ दुर्गा पूजा में कुरान की पुस्तक रखे जाने और उसके अपमान की अफवाह से।

अब पता चला है कि दुर्गा पूजा के मंडप में कुरान रखने वाला कोई हिन्दू नहीं, बल्कि इक़बाल हुसैन था। 35 साल का इक़बाल हुसैन कॉमिला के सुजनगर क्षेत्र का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम नूर मोहम्मद आलम है। उसने ही ननुआ दीघिर पर दुर्गा पूजा के पंडाल में कुरान रख दिया, जिसके बाद उसकी तस्वीर को कुरान का अपमान बता कर फैलाया गया और हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा शुरू हो गई।

इक़बाल हुसैन आवारागर्द है और पता नहीं चल पाया है कि वो किसी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ है या नहीं। कॉमिला के एसपी फारूक अहमद ने कहा कि गुरुवार (21 अक्टूबर, 2021) को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस सम्बन्ध में और विवरण साझा किए जाएँगे। कुरान वाली अफवाह के बाद न सिर्फ कॉमिला, बल्कि पूरे बांग्लादेश में हिन्दुओं, हिन्दू मंदिरों और दुर्गा पूजा के पंडालों पर मुस्लिम भीड़ ने हमले किए।

उधर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए पूर्व अमेरिकी महिला कॉन्ग्रेस की तुलसी गबार्ड ने बुधवार (20 अक्टूबर 2021) को हसीना सरकार से जिहादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। तुलसी गबार्ड ने कहा, “यह बांग्लादेश की ‘कथित धर्मनिरपेक्ष’ सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के अल्पसंख्यकों, जिनमें हिंदू, ईसाई और बौद्ध शामिल हैं, को जिहादी ताकतों से बचाए।

डॉक्टर जुनैद ने किया कई हिन्दू महिलाओं का यौन शोषण, इस्लामी धर्मांतरण: अश्लील वीडियो बना करता था ब्लैकमेल, एक नाबालिग का भी रेप

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर सदर कोतवाली क्षेत्र में स्थित है बाकरगंज इलाका। यहाँ एक नर्सिंग होम की आड़ में कई वर्षों से अवैध कार्यों को अंजाम दिया जा रहा था। नर्सिंग होम के डॉक्टर ने कई युवतियों के अश्लील वीडियोज धोखे से शूट कर लिए। डॉक्टर जुनैद इलाज के दौरान ये वीडियोज बना लेता था और बाद में इन्हीं के सहारे उन्हें ब्लैकमेल करता था। कई महिलाओं का तो उसने इस्लामी धर्मांतरण भी कराया है।

एक पीड़ित महिला ने थाने पहुँच कर सच्चाई बताई है। इटावा के पुरबिया टोला की रहने वाले महिला ने बताया कि नर्सिंग होम में उसे नौकरी के बहाने बुलाया गया था, लेकिन नशीला पदार्थ खिला कर डॉक्टर जुनैद ने उसका वीडियो बना लिया। इसके बाद ‘आकांक्षा नर्सिंग होम’ के डॉक्टर जुनैद ने उस वीडियो को इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी दी और महिला से अपनी बात मनवाता रहा। इस दौरान उसका इस्लामी धर्मांतरण करा के डॉक्टर ने उससे निकाह कर लिया।

महिला ने लिखित में पुलिस को शिकायत दे दी है। पुलिस ने मुन्ने खान के बेटे जुनैद के विरुद्ध FIR भी दर्ज कर ली है। उसे गिरफ्तार कर के जेल भेजा जा चुका है। सदर कोतवाल अनूप सिंह ने जानकारी दी कि वीडियो के आधार पर ब्लैकमेल कर के उसने महिला का इस्लामी धर्मांतरण और उससे निकाह कर लिया था। 2 महीने से उक्त महिला का यौन शोषण किया जा रहा है। डॉक्टर जुनैद ने नर्सिंग होम में आने वाली कई महिलाओं का वीडियो बनाया है।

पुलिस को शक है कि इसमें पूरा का पूरा नेटवर्क काम कर रहा हो सकता है, इसीलिए डॉक्टर के मोबाइल की सीडीआर निकाल कर अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। डॉक्टर जुनैद ने 2011 में भी एक महिला को अपने चंगुल में फँसाया था और उसे दिल्ली से लेकर फतेहपुर आया था। धर्मांतरण के बाद उसका नाम जेबा खान रख दिया गया था। दो बच्चे भी हुए। महिला पढ़ी-लिखी और संपन्न परिवार की थी।

हालाँकि, जब तीन साल साथ रहने के बाद उसे डॉक्टर जुनैद की असलियत पता चली तो वो बच्चों को लेकर लखनऊ चली गई। 2013-14 में भी शहर कोतवाली की दो लड़कियाँ उक्त नर्सिंग होम में काम करती थीं। उनका भी यौन शोषण हुआ। जहानाबाद की एक युवती का भी उसने यौन शोषण किया। एक युवती ने 2014 में ही उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस-प्रशासन में पैठ के कारण वो बच गया था।

डॉक्टर जुनैद शहर के शांति नगर स्टेडियम के सामने और पक्का तालाब के पास भी नर्सिंग होम चलाता रहा है। एक अन्य महिला को मुस्लिम बना कर उसने व्यापार में उसे अपने साथ रखा हुआ है। हाल ही में जिस युवती ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कराया है, उसकी उम्र मात्र 17 साल है। इसीलिए, पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। डॉक्टर जुनैद के एक सहयोगी का भी नाम सामने आया है, जो फोटो-वीडियो बनाने में उसका साथ देता था। उसकी तलाश जारी है।

काजोल ने DDLJ के 26 साल पूरे होने पर मनाया जश्न: भड़के SRK के फैंस, कहा- ‘शाहरुख खान की ​सो कॉल्ड फ्रेंड कुछ तो शर्म करो’

बॉलीवुड फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे’ के आज 26 साल पूरे होने पर एक्ट्रेस काजोल ने सोशल मीडिया एक वीडियो शेयर किया है। काजोल ने इंस्टाग्राम और ट्विटर पर इस मौके का जश्न मनाते हुए लिखा, “सिमरन ने 26 साल पहले ट्रेन पकड़ी थी और हम आज भी आपके इस प्यार का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। DDLJ के 26 साल पूरे हुए।” काजोल इस पोस्ट को लेकर नेटिजन्स के निशाने पर आ गई हैं।

उनका कहना है कि एक्ट्रेस को इस समय अपने बेस्टफ्रेंड शाहरुख खान का सपोर्ट करना चाहिए। वह भी इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थे, लेकिन इन दिनों ड्रग्स मामले में गिरफ्तार अपने बेटे आर्यन खान को लेकर बेहद परेशान हैं। आज वह जिस मुश्किल घड़ी से गुजर रहे हैं, इस बात का तो उन्हें कम से कम ख्याल रखना चाहिए था। वहीं एक और यूजर ने लिखा, “आर्यन खान को बेल नहीं मिल रही है, उसके पास से कुछ नहीं मिला है, पता है कि नहीं? शर्म है? दोस्ती है?”

लिंकू नाम की यूजर ने लिखा, ”शाहरुख खान की ​सो कॉल्ड फ्रेंड कुछ तो शर्म करो। यहाँ दोस्त के बेटे के साथ नाइंसाफी हो रही है। उसके लिए एक ट्वीट नहीं कर सकती और तुम्हें DDLJ सेलिब्रेट करना है। सच में ये बॉलीवुड वाले बहुत ही ज्यादा बुरे होते हैं सब के सब।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, ”थोड़ी सी भी शर्म है। ऐसा दिखता है कि तुम फेक फ्रेंड हो। शाहरुख ने आपको 90 के दशक की सबसे बड़ी एक्ट्रेस में से एक बना दिया और इस मुश्किल घड़ी में भी आप उनके साथ नहीं हैं। तुम्हे शर्म आनी चाहिए।”

बता दें कि आदित्य चोपड़ा के निर्देशन में बनने वाली ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएँगे’ फिल्म साल 1995 में रिलीज हुई थी। इसमें शाहरुख खान और काजोल के अलावा फरीदा जलाल, अमरीश पुरी, अनुपम खेर और मंदिरा बेदी ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

पाकिस्तान में ‘गिफ्ट घोटाला’ : इमरान ने बेच दी सऊदी से मिली ₹7.50 करोड़ की घड़ी, जानिए कौन है ‘पिंकी’ जिसके कहने पर लेते हैं फैसले

पाकिस्तान में अब ‘गिफ्ट घोटाला’ सामने आया है। वहाँ के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सऊदी से गिफ्ट में मिली घड़ी समेत कई राजनयिकों द्वारा दिए गए गिफ्ट्स बेच डाले। विपक्षी नेता और PDM (पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट) के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान ने उन पर अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया है। पाकिस्तान में तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि लाखों लोग अपनी नौकरी गँवा बैठे हैं।

वहीं PML-N की उपाध्यक्ष मरयम नवाज शरीफ ने कहा है कि जहाँ दुनिया अब कोरोना वायरस आपदा से बाहर निकल रही है, पाकिस्तान में लोग डेंगू से मर रहे हैं। उन्होंने बताया कि चीनी के दाम जहाँ पहले 50 रुपए प्रति किलो हुआ करते थे, वहीं अब ये 120 रुपए पर पहुँच गया है। बिजली के लिए अब 10-11 की जगह 25 रुपए प्रति यूनिट देना पड़ता है। जिस घड़ी के बेच दिए जाने की बात कही जा रही है, वो इमरान खान को सऊदी अरब के उप-प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने दी थी।

बताया जा रहा है कि ये 10 लाख डॉलर (7.48 करोड़ रुपए) की महँगी घड़ी थी। उन पर तोहफों को गैर-कानूनी ढंग से बेचने के आरोप लगे हैं। पाकिस्तान में नियम कहता है कि अधिकारी 10,000 रुपए तक के तोहफे अपने पास रख सकते हैं, वरना वो सरकारी संपत्ति के अंतर्गत आते हैं और उनकी नीलामी का रुपया सरकार को मिलना चाहिए। इमरान खान ने उक्त घड़ी को दुबई में ही बेच डाला और रुपए रख लिए।

उधर ISI प्रमुख की नियुक्ति को लेकर पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल बाजवा और इमरान खान के बीच विवाद में पिंकी पीरनी का नाम सामने आ रहा है। विपक्षी नेता कह रहे हैं कि इमरान खान पिंकी के कहने पर काम कर रहे हैं। उन पर जादू-टोना के आरोप लगे हैं। इमरान खान की पत्नी बुशरा को ही इस नाम से बुलाया जाता है, जिन्होंने उन्हें जनरल फैज हमीद को ISI प्रमुख बनाने को कहा था।

पाकिस्तान में लोग दबी जुबान से कहते हैं कि इमरान खान सभी फैसले अपनी बीवी से पूछ कर ही लेते हैं। इससे पहले जैमिमा गोल्डस्मिथ और रेहम खान से शादी कर चुके इमरान की तीसरी बीवी ही पिंकी हैं। वो हमेशा बुर्के में ही रहती हैं। कहा जाता है कि उनका टोने-टोटके में काफी विश्वास है। 6 लोगों की जंगल से गिरफ़्तारी का मुद्दा भी उछला है, जो एक गुड़िया में पिन चुभो रहे थे। आरोप है कि पिंकी के कहने पर ये सब हो रहा था।

‘कथित धर्मनिरपेक्ष’ हसीना सरकार जिहादियों के खिलाफ करे कार्रवाई: तुलसी गबार्ड ने की बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की निंदा

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए पूर्व अमेरिकी महिला कॉन्ग्रेस की तुलसी गबार्ड ने बुधवार (20 अक्टूबर 2021) को हसीना सरकार से जिहादी ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। तुलसी गबार्ड ने कहा, “यह बांग्लादेश की ‘कथित धर्मनिरपेक्ष’ सरकार का कर्तव्य है कि वह अपने देश के अल्पसंख्यकों, जिनमें हिंदू, ईसाई और बौद्ध शामिल हैं, को जिहादी ताकतों से बचाए।”

गबार्ड ने कहा कि बांग्लादेश में मंदिरों में भगवान के भक्तों के प्रति इस तरह की नफरत और हिंसा देखकर मेरा दिल टूट गया। उन्होंने कहा कि जिहादियों को लगता है कि मंदिरों को जलाने और नष्ट करने से अल्लाह खुश होगा। ए सी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की मूर्ति को अपवित्र करना दर्शाता है कि वे वास्तव में भगवान से कितने दूर हैं। उन्होंने आगे कहा, “ईश्वर प्रेम है और उसके सच्चे सेवक संसार में उस प्रेम को मूर्त रूप देते हैं।”

12 से 17 अक्टूबर के बीच, बांग्लादेश में कई मंदिरों, हिंदू घरों पर हमला किया गया था। दुर्गा पूजा के दौरान बांग्लादेश में नवरात्री पंडालों पर हमले का दौर शुरू हुआ और हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को तबाह किया जाने लगा। पंडाल ध्वस्त कर डाले गए। फिर मंदिरों को निशाना बनाया गया। कई इलाकों में एकतरफा दंगा फैल गया। मुस्लिम भीड़ ने फिर हत्याओं और बलात्कार का दौर शुरू कर दिया, जिसके पीड़ित हिन्दू रहे। बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज़्ज़मान ने कहा कि दुर्गा पूजा पंडालों पर हमले पूर्व नियोजित थे।

बताया गया था कट्टरपंथी इस्लामी समूह से जुड़े कुछ बदमाशों ने जब पंडाल में गार्ड सो रहा था, उस वक्त भगवान हनुमान की मूर्ति पर कुरान रखा था। इससे व्यापक हिंसा भड़क गई थी। 15 अक्टूबर को कट्टरपंथी मुस्लिमों की एक उन्मादी भीड़ ने बांग्लादेश के चटगाँव डिवीजन के नोआखली जिले में इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) मंदिर पर हमला किया था। यह नृशंस हमला कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा ईशनिंदा के बहाने दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़ करने के कुछ दिनों बाद हुआ है।