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टी 20 वर्ल्ड कप में भारत-पाक मैच से पहले विराट कोहली पेड पोस्ट में बिजी, ‘दीवाली ज्ञान’ पर पहले ही लताड़ चुके हैं यूजर्स

भारत और पाकिस्तान की टीम T-20 विश्व कप 2021 के लिए रविवार (24 अक्टूबर 2021) को आमने-सामने होगी। ऐसे में हर कोई इस मैच के इंतजार में हैं। लेकिन भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली मैच से 2-3 दिन पहले प्रमोशनल ट्वीट करके WROGN ब्रांड का प्रचार कर रहे हैं। ये देख सोशल मीडिया यूजर्स भड़क गए और उन्हें उनकी पुरानी पफॉर्मेंस याद दिलाने लगे

यहाँ बता दें कि कथिततौर पर विराट कोहली की क्लॉथिंग एंड एक्सेसरीज़ ब्रांड, Wrogn में हिस्सेदारी है, जो ग्राफिक टी-शर्ट, शर्ट, लाइटवेट डेनिम जैकेट और बहुत चीजों का कारोबार करता है। ऐसे में उन्होंने 21 अक्टूबर को इसका प्रचार किया और टीशर्ट पहन ये दिखाया कि लोग उनसे पूछ रहे हैं कि ‘रविवार को बड़ा मैच है, क्या वह नर्वस हैं, हाँ?’ इस पर कोहली टीशर्ट पर उंगली दिखाते हैं और ब्रांड का हाईलाइट करते हुए WROGN कहते हैं।

अब इसी ट्वीट को देख क्रिकेट फैन भड़क रखे हैं। कुछ यूजर उन्हें घमंडी कह रहे हैं तो कुछ उन्हें कह रहे हैं कि वो ध्यान रखें कि अगर 24 को गलती से भी भारत हारा तो उनका कितना विरोध किया जाएगा।

भारतीय कप्तान पर गुस्सा निकालते हुए एक यूजर ने कहा, “मुझे ये सोचकर नफरत होती है कि अब सब कुछ स्पॉन्सर्ड हैं। मुझे ध्यान ही नहीं है कि आखिर मैंने कब कोई वास्तविक पोस्ट अपने ज्यादातर प्लेयर्स की ओर से देखा हो। ये लोग सिर्फ सोशल मीडिया पर अपनी पकड़ का फायदा उठाना चाहते हैं। बस और कुछ नहीं।”

एक यूजर ने लिखा, “मुझे रविवार को लेकर अच्छी फीलिंग नहीं आ रही। उम्मीद कर रहा हूँ कि बाकी 10 (खिलाड़ी) सामान्य होंगे।”

एक ट्विटर यूजर क्रिकेटर की परफॉर्मेंस का मजाक उड़ाते हुए कहता है, “वे (लोग) मुझे (कोहली को) 007 कहते हैं यानी 700 दिन में 0 शतक। 0 आईपीएल ट्रॉफी और 7 प्रायोजित मजाक हर दिन।”

अब ये बात गौरतलब है कि कोहली का ये ट्वीट और इस पर नजर आने वाली प्रतिक्रिया साफ दर्शाती है कि यदि किसी भी कारण से कोहली और भारत की टीम 24 अक्टूबर के मैच में अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं तो ये नाराजगी और बढ़ सकती है। लोग सोच सकते हैं कि कहीं इंडिया का प्रदर्शन इसलिए तो इतना गड़बड़ हुआ क्योंकि कप्तान किसी ब्रांड का प्रमोशन करने में व्यस्त था।

बता दें कि मैच से पूर्व ये पहली बार नहीं है कि कोहली इस प्रकार ट्रोल हुए हों। इससे पहले जहाँ उन्होंने कहा था कि वो अगले कुछ दिनों में वीडियो के जरिए लोगों को ‘अर्थपूर्ण’ दीवाली मनाने के टिप्स देंगे। उस समय भी सोशल मीडिया यूजर्स को उनकी बात पसंद नहीं आई थी। यूजर्स ने कहा था कि अब फिर से हिंदुओं को सलाह दी जाएगी कि वो पटाखे न चलाएँ। लोगों ने कहा था कि ये हिन्दू त्योहार है और इसे हिन्दू रीति-रिवाज से ही मनाया जाना चाहिए, न कि कसी सेलब्स के टिप्स से। लोगों ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि दीवाली के दौरान हिन्दू विधि-विधान से पूजा-पाठ करना चाहिए, क्योंकि ये एक हिन्दू त्योहार है।

3 अक्टूबर को गिरफ्तारी, 4 को FIR: कवर्धा में छत्तीसगढ़ पुलिस का कमाल, 18 हिंदू आरोपितों को मिली जमानत

छत्तीसगढ़ के कवर्धा में 3 अक्टूबर 2021 (रविवार) को हिंदू ध्वज उखाड़े जाने के बाद भड़की हिंसा को लेकर 18 आरोपितों को अदालत ने जमानत दे दी है। जमानत का आधार कबीरधाम पुलिस की कार्रवाई बनी। पुलिस ने इन सभी आरोपितों को 3 अक्टूबर को ही पकड़ लिया था। लेकिन FIR एक दिन बाद अर्थात 4 अक्टूबर को दर्ज पाई गई। इस हिंसा में एक पक्ष के 29 और दूसरे पक्ष के 79 आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जिन 18 आरोपितों को जमानत मिली है उसमें पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। यह जमानत स्थानीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से बुधवार (20 अक्टूबर 2021) को स्वीकृत की गई। सभी आरोपितों को जमानत देते हुए अदालत ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं।

जमानत की शर्तों में सभी को हर महीने थाने में हाजिरी देना, हर सुनवाई में उपस्थित रहना, दुबारा अपराध न करना, जाँच में पूरा सहयोग करना और सबूतों को प्रभावित न करना शामिल है। जमानत पाए आरोपितों के नाम हैं- आयुष शर्मा, ऋषभ चौरसिया, बसंत ध्रुव, नवदीप चंद्रवंशी, दीनू झारिया, आकाश तिवारी, तोरण दिवाकर, विष्णु कौशिक, सागर नामदेव, अंशु ठाकुर, मोंटी उर्फ भास्कर उज्ज्वल पांडे, तुकाराम, गजेंद्र पिता, शूरवीर, अमीर, गोलू और रिंकू।

जमानत पाए सभी 18 आरोपित दुर्ग जेल से रिहा कर दिए गए हैं। उनका स्वागत जोरदार तरीके से जेल के बाहर किया गया। मौके पर भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिन्दू परिषद और कई अन्य हिन्दू संगठन के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इससे पहले इस घटना के बाद से लापता बताए जा रहे दुर्गेश देवांगन को प्रह्लाद साहू के साथ मंगलवार (19 अक्टूबर 2021) को पुलिस ने रायपुर के माना से गिरफ्तार किया था। दुर्गेश के परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उसके साथ मारपीट की है।

इस पूरे मामले में विश्व हिन्दू परिषद ने पुलिस कार्रवाई को एकतरफा बताया है। VHP ने मामले की न्यायिक जाँच की माँग की है। विहिप के अनुसार कवर्धा SHO और अन्य जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत सस्पेंड किया जाए। विश्व हिन्दू परिषद ने कहा है कि थाना प्रभारी और दुर्गेश के बीच की कॉल डिटेल सार्वजानिक की जाए। दुर्गेश को खुद थाना प्रभारी ने लोहारा नाका चौक बुलाया था तो सुरक्षा भी उन्हीं की बनती थी। इसी के साथ वहाँ लगे CCTV कैमरे की फुटेज भी चेक करवाने की माँग की गई है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दुर्गेश देवांगन की माँ लक्ष्मी देवांगन, उसकी बहन व पिता भी मौजूद थे।

‘गंगा-जमुना महोत्सव’ के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा: 101 मंदिर-पंडाल, 181+ घर-दुकान में तोड़फोड़ और आगजनी

बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार व हिंसक हमलों की सरकार से लेकर मीडिया तक ने निंदा की है। वहीं, मुस्लिमों द्वारा हिंदू मंदिरों और उनके घरों में आग लगाने की खबर ने आध्यात्मिक नेताओं तक को व्यथित कर दिया है। हालाँकि, बांग्लादेश के हिंदुओं के बेघर होने से ठीक पहले ढाका में ‘बांग्लादेश शिल्पकला अकादमी’ ने ‘गंगा-जमुना सांस्कृतिक महोत्सव 2021’ का समापन किया था।

गंगा-जमुना सांस्कृतिक महोत्सव क्या है?

बांग्लादेश और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए दोनों देशों के रिश्ते को मजबूत करने के उद्देश्य से गंगा-जमुना सांस्कृतिक उत्सव परिषद की भारतीय और बांग्लादेश समिति संयुक्त रूप से हर साल 10-दिवसीय उत्सव का आयोजन करती है। गंगा-जमुना सांस्कृतिक महोत्सव पर 2019 की एक रिपोर्ट पढ़ें।

कोरोना महामारी के कारण एक साल के बाद यानी 2021 में यह उत्सव 1 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक आयोजित किया गया था। ‘भारतीय सांस्कृतिक संगठन’ इस साल कोविड-19 यात्रा प्रतिबंधों के कारण भाग नहीं ले सका, लेकिन 140 स्थानीय सांस्कृतिक संगठनों के 3,500 से अधिक कलाकारों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया था।

गंगा-जमुना सांस्कृतिक महोत्सव 2021 साभार: द डेली स्टार

गंगा-जमुना सांस्कृतिक उत्सव परिषद के संयोजक गुलाम कुद्दुस (Ghulam Quddus) ने भी यही कहा, “हमने बांग्लादेश और भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए आठ साल के लिए सांस्कृतिक उत्सव का आयोजन किया है।”

दिलचस्प बात यह है कि इस साल गंगा-जमुना उत्सव की थीम ‘बांग्लादेश की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती और देश के संस्थापक राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रहमान की जयंती’ पर आधारित थी। इस दौरान दिवंगत रंगमंच से जुड़े अमलेश चक्रवर्ती को भी श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने कोलकाता में गंगा-जमुना सांस्कृतिक महोत्सव की नींव रखी थी।

सांस्कृतिक मामलों के राज्य मंत्री केएम खालिद ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा था, “हमारे सांस्कृतिक मामलों के मंत्रालय से हम इन सांस्कृतिक संगठनों को प्रायोजित करना चाहते हैं। इन संगठनों को पर्याप्त समर्थन सुनिश्चित करने के लिए हम एक सूची तैयार करेंगे और उचित मूल्यांकन के बाद इसे सांस्कृतिक प्रतीकों को सौंपेंगे।”

’13 अक्टूबर को हिंसा’

गौरतलब है कि 13 अक्टूबर को बांग्लादेश के कॉमिला जिले ननुआ दिघी में दुर्गा पूजा के पंडाल में मुस्लिम भीड़ द्वारा जम कर तोड़फोड़ मचाई गई थी। देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था। किसी असामाजिक तत्व ने वहाँ चल रही दुर्गा पूजा को बदनाम करने के लिए कुरान के अपमान की अफवाह फैला दी, जिसके बाद मुस्लिमों द्वारा वहाँ हिंसा की घटना को अंजाम दिया गया था। लेखिका तस्लीमा नसरीन ने बताया था कि किसी हिन्दू विरोधी ने माँ दुर्गा के चरणों में चुपचाप कुरान रखकर इस तस्वीर को वायरल कर दिया था।

जिले के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की थी। उसने कहा था, ”बदमाशों ने इसकी कुछ तस्वीरें खींच लीं और भाग गए। कुछ ही घंटों में इसे फेसबुक पर शेयर कर दिया गया, जिससे यह तस्वीरें वायरल हो गई थीं।”

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा

मालूम हो कि मुस्लिम भीड़ ने 101 हिंदू मंदिरों, पंडालों, 181 से ज्यादा घरों और दुकानों में आग लगा दी थी। यह हिंसा 10 दिनों तक चली, जिसमें कई लोग मारे गए थे। हिंसा को फेसबुक पर एक झूठी पोस्ट के आधार पर अंजाम दिया गया और उचित ठहराया गया था।

अब पता चला है कि दुर्गा पूजा के मंडप में कुरान रखने वाला कोई हिन्दू नहीं, बल्कि इक़बाल हुसैन था। 35 साल का इक़बाल हुसैन कॉमिला के सुजनगर क्षेत्र का रहने वाला है। उसके अब्बा का नाम नूर मोहम्मद आलम है। उसने ही ननुआ दीघिर पर दुर्गा पूजा के पंडाल में कुरान रख दिया, जिसके बाद उसकी तस्वीर को कुरान का अपमान बता कर फैलाया गया और हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा शुरू हो गई

महापंचायत की तैयारी कर रहे सिंघु बॉर्डर पर जमे निहंग: हरियाणा पुलिस को धमकाया, कहा- बेअदबी हुई तो फिर करेंगे वही हाल

कुंडली बॉर्डर पर हुई दलित मजदूर लखबीर सिंह की हत्या किसान प्रदर्शन में हुआ अब तक का सबसे घृणित अपराध है। एक ओर जहाँ इस घटना के बाद हर कोई आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग कर रहा है। वहीं दूसरी ओर निहंग सिखों ने खुलेमाम उनके समुदाय के लोगों की गिरफ्तारी पर हरियाणा पुलिस को चेतावनी जारी कर दी है।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, निहंगों ने अपने चार लोगों की रिहाई के लिए पुलिस को धमकी दी है। इन चारों ने लखबीर की हत्या मामले में पुलिस के सामने सरेंडर किया था। उनकी माँग है कि गुरु ग्रंथ साहिब का अपनाम करने के आरोप में मृतक लखबीर सिंह के ख़िलाफ़ केस लिखा जाए।

उन्होंने धमकी दी है कि वो अब अपने किसी साथी को सरेंडर नहीं करने देंगे। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि आगे मामले में गिरफ्तारी की कोशिश होती है तो वे सुनिश्चित करेंगे कि जो गिरफ्तार हुए हैं उन्हें रिहा करवा लिया जाए।

निहंगों के नेता बाबा राम सिंह ने कहा, “हमने अब पुलिस को बेअदबी के बारे में बताया। उनसे लखबीर सिंह के खिलाफ़ मामला दर्ज करने को कहा गया। अब पुलिस इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कोशिश करती है तो हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हम अपने चारों बंदे भी पुलिस की हिरासत से वापस ले लें। अभी हम पुलिस का सहयोग कर रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम उनसे किसी भी तरह की ज्यादती बर्दाश्त करेंगे।”

सिंह ने धमकी दी कि जो भी कोई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी में शामिल होगा उसे लखबीर सिंह की तरह ही दंडित किया जाएगा। बाबा राम सिंह ने कहा, “2015 में पंजाब में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदमी हुए 6 साल हो चुके हैं। हालाँकि आज तक किसी भी आरोपित को गिरफ्तार नहीं किया गया है और न ही किसी के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई की गई है। अगर कोई अब फिर से ऐसा करने की कोशिश करता है तो हम उसे सजा देंगे जैसे लखबीर सिंह को सजा दी गई थी।”

निहंगों ने बुलाई महापंचायत

बता दें कि निहंग सिख दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर अब भी प्रदर्शन कर रहे हैं और अब तो उन्होंने खुलेआम 27 अक्टूबर को महापंचायत भी बुलाई है। इसमें वो आगे की रणनीति डिसाइड करेंगे। निहंगों ने सिंघू सीमा पर अपने प्रवास पर जनता की राय जानने के लिए ‘महापंचायत’ आयोजित करने का विकल्प चुना है।

कई प्रदर्शनकारी मान रहे हैं कि लखबीर की हत्या ने किसानों के विरोध को बदनाम करने का काम किया है। पिछले कुछ हफ्तों में विरोध प्रदर्शन पर इकट्ठा होने वाली भीड़ भी कम देखी गई। लेकिन निंहग इतनी जल्दी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वह गुरुद्वारे के सामने शनिवार को अरदास के लिए इकट्ठा हुए थे, जहाँ लखबीर की हत्या हुई।

निहंग नेता ने कहा, “हम संयुक्त किसान मोर्चा का सम्मान करते हैं, भले ही वे कहें कि उनका हमसे कोई लेना-देना नहीं है। हम सब सरकार के खिलाफ एक ही लड़ाई लड़ रहे हैं। यह एक बड़ी लड़ाई है, और हम हर कीमत पर किसानों के हितों की रक्षा करेंगे।”

26 जनवरी के बाद सीमा पर पहुँचे थे लखबीर को मारने वाले निहंग

उल्लेखनीय है कि दलित सिख मजदूर लखबीर सिंह की 15 अक्टूबर को निहंग सिखों द्वारा हत्या की गई थी। उनका एक हाथ और पैरा काट दिया गया था और बाद में उनके पैर भी काटे गए थे। हत्या के मामले में अब तक 4 निहंगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। दो लोग शनिवार को भी पकड़े गए हैं। एक भगवंत सिंह (20) है और दूसरा गोविंद सिंह (25) है…ये दोनों निहंगों के समूह के साथ 26 जनवरी को दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर आए थे।

मीडिया से एक बलविंदर सिंह ने बात करते हुए कहा, “हमारा समूह 26 जनवरी के बाद सिंघू बॉर्डर आया था। हमने 26 जनवरी के बाद सिंघू सीमा पर किसान प्रदर्शनकारियों पर भीड़ के हमले के वीडियो देखे। हमने देखा था कि कैसे दिल्ली पुलिस सिखों को मार रही है। इसलिए, हमने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए यहाँ आने का फैसला किया। हम 2 फरवरी को सिंघू बॉर्डर पर यहाँ पहुँचे थे।” दिलचस्प बात ये है कि यही बलविंदर सिंह मानते हैं कि गणतंत्र दिवस पर हुआ बवाल किसान नेताओं द्वारा सुनियोजित था।

अटल बिहारी के नाम परियोजना, कॉन्ग्रेस सरकार में दो बार रद्द हुई; चुनाव से पहले साहिर लुधियानवी का नाम देने पर विवाद

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे पहले आंतरिक कलह से जूझ रही राज्य की सत्ताधारी पार्टी कॉन्ग्रेस के एक फैसले से नाम पर सियासी जंग शुरू हो गई है। असल में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर शुरू की गई एक आवासीय परियोजना का नाम बदलकर साहिर लुधियानवी के नाम पर रखने का फैसला किया गया है। दिलचस्प यह है कि 2010 में लॉन्च की गई यह परियोजना अभी तक अधर में है। इतना ही नहीं कॉन्ग्रेस की सरकार में यह परियोजना पूर्व में रद्द भी हो चुकी है जिसकी वजह से आवेदकों के पैसे भी फँसे हैं। अब चुनाव से पहले नाम बदलकर इसे फिर से शुरू करने का फैसला किया गया है।

राजनीतिक विवाद पर बात करने से पहले इस योजना के विभिन्न पहलू पर गौर कर लेते हैं। लुधियाना में बनने वाली इस आवासीय परियोजना की शुरुआत 2011 में की गई थी। नाम रखा गया अटल अपार्टमेंट। जिम्मेदारी लुधियाना इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (एलआईटी) को दी गई। शहीद करनैल सिंह नगर में 8.80 एकड़ जमीन पर 12 मंजिल की इस आवासीय योजना को विकसित करना था।

जब इसकी शुरुआत हुई तो राज्य में शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सरकार थी। बीजेपी भी इसमें साझीदार थी। योजना को जब लॉन्च किया गया तब भाजपा नेता मनोरंजन कालिया पंजाब सरकार में स्थानीय निकाय मंत्री हुआ करते थे।

लॉन्चिंग के बाद से यह परियोजना दो बार रद्द हो चुकी है। पहली बार दिसंबर 2017 में। वजह बताई गई खरीदारों का उम्मीद से कम आवेदन मिलना। इसके बाद जनवरी 2019 में एलआईटी ने 636 फ्लैटों के लिए नया सर्वे किया। नए सिरे से आवेदन माँगे। करीब 800 लोगों ने फ्लैट खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हुए 10000 रुपए जमा किए। भी कर दिए। लेकिन जनवरी 2020 में फिर से इसे रद्द कर दिया गया। आवेदकों को आज भी पैसा वापस मिलने का इंतजार है।

अक्टूबर की शुरुआत में एलआईटी के चेयरमैन और कॉन्ग्रेस नेता रमन बालासुब्रमण्यम ने इसका नाम बदलकर ‘साहिर लुधियानवी अपार्टमेंट्स’ करने और दोबारा शुरू करने का प्रस्‍ताव दिया। इसका विरोध हो रहा है। बीजेपी नेता मनोरंजन कालिया ने कहा है कि कॉन्ग्रेस एक गलत मिसाल कायम कर रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी साहिर लुधियानवी की विरोधी नहीं है। उनके नाम पर कोई और योजना शुरू की जा सकती है। लेकिन वाजपेयी के नाम को एक परियोजना से हटाना पूरी तरह से अस्वीकार्य है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भले शिअद आज बीजेपी के साथ नहीं है, पर वह भी इस फैसले का विरोध कर रही है। 2022 के चुनाव के लिए लुधियाना पश्चिम से अकाली दल उम्मीदवार महेश इंदर सिंह ग्रेवाल ने कहा है कि एक परियोजना से अटल बिहारी का नाम बदलना पूरी तरह से अनुचित है। उन्होंने कहा कि इसका शिअद-भाजपा गठबंधन से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन वाजपेयी के नाम पर एक परियोजना का नाम रखना सामाजिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ उनके बारे में जान सकें।

दूसरी तरफ इन आरोपों को खारिज करते हुए कॉन्ग्रेस तुच्छ राजनीति का आरोप बीजेपी पर लगा रही है। बालासुब्रमण्यम का कहना है कि इस परियोजना को नया रूप दिया गया है और हम चाहते थे कि इससे किसी ऐसे व्यक्ति का नाम जुड़ा हो जो स्थानीय और गैर विवादास्पद हो। शहर में साहिर लुधियानवी के नाम पर कोई इमारत या स्मारक नहीं है, इसलिए ऐसा किया गया। हमारा मकसद वाजपेयी का अनादर करना नहीं है।

जिस प्रदेश में चुनाव निकट हो वहाँ राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप नई बात नहीं है। लेकिन जो परियोजना 10 साल से अधर में हो, दो बार रद्द की जा चुकी हो, उसे चुनाव से ठीक पहले शुरू करना बताता है कि इसका मकसद परियोजना को मंजिल तक पहुँचाने से कहीं ज्यादा सियासी है। लिहाजा इसका विरोध पंजाब में शुरू हो गया है। चूँकि पूरे विवाद से वाजपेयी का नाम जुड़ा है तो इसकी सियासी तपिश पंजाब से बाहर भी आने वाले दिनों में महसूस की जा सकती है।

मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ‘लापता’, नहीं खोज पा रही महाराष्ट्र सरकार: बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल किया जवाब

महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार (20 अक्टूबर 2021) को मुंबई हाईकोर्ट में परमबीर सिंह केस में जवाब दाखिल किया है। दाखिल जवाब में कहा गया है कि अभी तक मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह का कोई पता नहीं चला है। उधर बचाव पक्ष में परमबीर सिंह की तरफ से पेश हुए वकील ने बताया कि उन्हें अभी भगोड़ा घोषित नहीं किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह सुनवाई जस्टिस नितिन जामदार और जस्टिस सारंग कोतवाल की खंडपीठ में हुई। इसमें महाराष्ट्र सरकार की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता डेरियस खंबाटा पेश हुए थे। परमबीर सिंह की तरफ से अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने बहस की। IPS परमबीर सिंह फिलहाल महाराष्ट्र के DG होमगार्ड हैं।

परमबीर सिंह के वकील के अनुसार उन्हें 2 बार समन जारी हुआ और दोनों बार उन्होंने समन का जवाब दिया है। इस आधार पर उन्हें भगोड़ा घोषित नहीं किया गया है। जबकि सरकार के पक्ष का कहना था कि सरकार अब अपने इस आश्वासन पर कायम नहीं रहना चाहती कि उनके विरुद्ध दर्ज मामले में उन पर कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा। सरकार के अनुसार अन्य मामलों की जाँच में प्रगति हुई है। इसी के चलते हालात में बदलाव हुआ है।

हाईकोर्ट में यह सुनवाई परमबीर सिंह पर पुलिस इंस्पेक्टर भीमराव घाडगे द्वारा लगाए गए आरोपों पर चल रही थी। IPS परमबीर सिंह पर इंस्पेक्टर भीमराव घाडगे ने आरोप लगाया था कि साल 2015 में एक केस की जाँच के दौरान उन्हें जातिसूचक शब्द बोल कर अपमानित किया गया था। इंस्पेक्टर घाडगे के अनुसार यह गालियाँ उन्हें एक केस से कुछ लोगों का नाम न निकालने के जवाब पर दी गई थीं।

इसी के साथ भीमराव घाडगे ने अपनी शिकायत में IPS परमबीर पर SC / ST एक्ट के तहत FIR दर्ज करने की माँग की थी। परमबीर सिंह ने हाईकोर्ट से इसी प्राथमिकी को रद्द करने की माँग के साथ याचिका डाली है। फिलहाल मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी गई है।

इस से पहले महाराष्ट्र के गृहमंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने गुरुवार 30 सितंबर 2021 को कहा था कि सरकार उनका पता लगाने की कोशिश कर रही है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री का कहना था कि जाँच एजेंसियों को इस बात का शक है कि सिंह देश छोड़कर भाग गए हैं और एजेंसियों को उनके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है।

आगे उन्होंने कहा था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ उनका मंत्रालय भी उनका पता लगाने की कोशिश कर रहा है। परमबीर सिंह के रूस भागने की खबरों पर पाटिल ने कहा था, “मैंने कुछ ऐसा सुना है, लेकिन एक सरकारी अधिकारी होने के कारण वह सरकार की इजाजत के बिना विदेश नहीं जा सकते। अगर वह चले गए हैं, तो ये अच्छा नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि परमबीर सिंह एंटीलिया बम कांड, मनसुख हिरेन हत्याकांड और मुंबई पुलिस द्वारा जबरन वसूली समेत कई मामलों में घिरे हैं। एनआईए ने उन्हें एंटीलिया और मनसुख हिरेन मामले में जाँच के लिए कई नोटिस भेज चुकी है। राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक आयोग पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख सहित महाराष्ट्र के मंत्रियों की ओर से मुंबई पुलिस द्वारा जबरन वसूली के आरोपों की जाँच कर रहा है।

दुर्गेश देवांगन रायपुर से गिरफ्तार: कवर्धा में ‘हिन्दू ध्वज’ उखाड़ने का सबसे पहले किया था विरोध, मुस्लिम भीड़ की पिटाई के बाद से थे लापता

छत्तीसगढ़ के कवर्धा में 3 अक्टूबर 2021 में हुई हिंसा के बाद से लापता बताए जा रहे दुर्गेश देवांगन को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तारी रायपुर के माना क्षेत्र से की गई है। दुर्गेश के साथ उनके साथी प्रमोद साहू को भी गिरफ्तार किया गया है। इन्हें कवर्धा ले जाए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है।

कबीरधाम जिले के पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग ने बताया है कि दुर्गेश और प्रह्लाद कवर्धा में 3 अक्टूबर से 5 अक्टूबर तक चली हिंसा में आरोपित हैं। दोनों को शहनाई मैरिज हाल, सदाणी दरबार चौक सेजबहार थानाक्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें पिछले 3 दिनों से लगातार छापेमारी कर रही थी। इनकी लोकेशन रायपुर मिली थी जिसके आधार पर वहाँ पुलिस बल को विशेष रूप से लगाया गया था। दोनों की पहचान करने में रायपुर के माना थाने ने भी सहयोग किया है।

राजनांदगांव के भाजपा सांसद संतोष पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्हें थाने में दुर्गेश देवांगन के साथ पुलिस द्वारा मारपीट करने की जानकारी मिली थी। इस सूचना पर वे 19 तारीख की रात में ही थाने पहुँच गए थे। लेकिन उन्हें दुर्गेश से मिलने नहीं दिया गया।

सांसद संतोष पांडेय ने कवर्धा हिंसा में गिरफ्तार राम प्रसाद पाली, मुकेश पाली और दिगपाल राजपूत के घर जा कर उनके परिवार वालों से मुलाकात भी की है। इसकी जानकारी उन्होंने ट्विटर पर दी है।

दुर्गेश देवांगन कवर्धा के ही रहने वाले हैं। बाजार में उनकी सब्ज़ियों और मसालों की दुकान है। घटना वाले दिन रविवार (3 अक्टूबर 2021) को उन्होंने ही सबसे पहले हिंदू ध्वज हटाने और उसे पैरों तले रौंदने का विरोध किया था। इसके बाद समुदाय विशेष के लोगों ने उसे जमकर पीटा था। इसी मामले में आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 5 अक्टूबर को प्रदर्शन किया था। जिसके बाद प्रशासन ने हिंदू संगठनों को हिंसा का कसूरवार ठहराया था।

3 अक्टूबर के बाद से दुर्गेश देवांगन का कोई अता पता नहीं था। दुर्गेश के घर वाले पुलिस पर दुर्गेश को पकड़ कर ले जाने के आरोप लगा रहे थे। जबकि पुलिस ने दुर्गेश के अपने कस्टडी में होने से इनकार किया था।

‘उसने मुझे पीछे से जकड़ा और अपनी ओर खींच लिया’: एक्ट्रेस के साथ फ्लाइट में बदसलूकी, 11 दिन बाद बिजनेसमैन गिरफ्तार

कई टीवी शो और फिल्मों में काम कर चुकीं एक अभिनेत्री के साथ छेड़छाड़ मामले में मुंबई पुलिस ने एक नितिन नाम के बिजनेसमैन को गिरफ्तार किया है। नितिन ने एक्ट्रेस के साथ छेड़छाड़ फ्लाइट में की थी। जिसके बाद उन्होंने केबिन क्रू को इस घटना की शिकायत दी। साथ में मामला पुलिस तक पहुँचाया। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए आरोपित को 11 दिन के बाद गिरफ्तार किया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, महिला 1 अक्टूबर को दिल्ली गई थीं। 3 अक्टूबर को उन्होंने दिल्ली से मुंबई की वापसी के लिए फ्लाइट ली। जिसने 11 बजे छत्रपति शिवाजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड किया। इसी बीच जब एक्ट्रेस अपने बैग को लगेज रैक से उतारने लगीं तो एक आदमी ने उन्हें पीछे से जकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा। इस हरकत से एक्ट्रेस एकदम चौंक गई। उन्हें बहुत गुस्सा भी आया।

उनके मुताबिक “ये आदमी मेरी पंक्ति (रो) में भी नहीं था। बहुत पीछे था। लेकिन कुछ देर बाद मुझे लगा कि किसी ने मुझे कमर से पकड़ कर खींचा है। जब मैं गुस्सा हुई तो उसने कहा ‘ओह! मुझको नहीं पता था कोई महिला है। मुझे लगा कोई आदमी होगा। इसके बाद वो माफी माँगता रहा और फिर कहा ‘सॉरी तो बोला न।’ आखिर कैसे कोई किसी महिला को ऐसे जकड़ सकता है और फिर ये कहकर खुद का बचाव करता है कि मुझे लगा कोई पुरुष यात्री है। ये बेहद घटिया है।”

एक्ट्रेस के मुताबिक वो मदद के लिए चिल्लाईं जिसके बाद केबिन क्रू आया और केबिन क्रू ने आदमी को महिला से दूर करते हुए इस मामले की शिकायत कस्टमर रिलेशन टीम से करने को कहा। व्यक्ति से जब उसका नाम पूछा गया तो उसने खुद को राजीव बताया। इसके बाद महिला ने वर्सोवा थाने में मामला दर्ज करने के लिए संपर्क किया। हालाँकि वहाँ से जवाब आया कि ये केस सहार पुलिस में दर्ज होगा। महिला ने सलाह मानते हुए सहार पुलिस को संपर्क किया और बताया कि कैसे वो इस घटना से सदमे में हैं। पुलिस ने उनसे आदमी की डिटेल माँगी और अपना काम शुरू किया।

एयरलाइन ने पुलिस को राजीव और उसके साथ सफर में मौजूद सभी लोगों की जानकारी दी। लेकिन जब पुलिस ने राजीव से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ किया ही नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने साथ उस दिन फ्लाइट में मौजूद सभी लोगों की जानकारी और फोटो पुलिस को दी। पुलिस ने वो तस्वीर एक्ट्रेस को दिखाई और उन्होंने भी उसमें राजीव पर उंगली न रख कर किसी और को आरोपित बताया। पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला महिला से बदसलूकी करने वाला तो नितिन था।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कैबिन क्रू को इस बात का नहीं पता था जिसे उन्होंने महिला से दूर होने को कहा वह राजीव था या नितिन। पुलिस ने एयरलाइन से सभी पैसेंजर्स की डिटेल माँगी और फिर नितिन की सीट को वेरीफाई किया गया। पुख्ता जानकारी इकट्ठा करने के बाद एफआईआर में नितिन का नाम दर्ज किया गया।आगे की छानबीन में पता चला कि 36 साल का नितिन उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद में बिजनेस करता है। 14 अक्टूबर को पुलिस ने इस मामले में आरोपित को हिरासत में लिया। उसके विरुद्ध यौन उत्पीड़न की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है।

एक्ट्रेस का कहना है कि इस पूरी घटना पर केस दर्ज होने के बाद व्यक्ति के घरवाले उनके पास पहुँचे थे और उनसे केस वापस लेने को कहा था। एक्ट्रेस ने कहा, “उसकी पत्नी और एक उसके घर का कोई आदमी मेरे घर आए थे और मुझसे शिकायत वापस लेने को बोल रहे थे। उन्हें मेरे घर का एड्रेस पता है और मुझे डर है कि कोई दोबारा आएगा।”

शाहरुख के ‘मन्नत’ से आर्यन से जुड़े दस्तावेज ले गई NCB, पूछताछ के लिए एजेंसी दफ्तर पहुँची अनन्या पांडेय

शाहरुख खान की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं। एक तरफ शाहरुख का बेटा आर्यन ड्रग्स केस में 2 अक्टूबर से ही नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रडार पर है, वहीं आज एनसीबी ने शाहरुख के घर ‘मन्नत’ पहुँची है। तो वहीं NCB की एक टीम ने बॉलीवुड अभिनेत्री अनन्या पांडे के घर भी छापा मारा है। एनसीबी के अधिकारी गुरुवार (21 अक्टूबर, 2021) को अनन्या पांडे के घर ड्रग्स मामले की पूछताछ के लिए पहुँचे थे। इस दौरान अधिकारियों ने अनन्या पांडे के घर की तलाशी भी ली। दरअसल, पिछले दिनों एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आर्यन खान बॉलीवुड हीरोइन से नशे की बात करता था।

शाहरुख खान के घर मीडिया में छापेमारी की खबरों को लेकर एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने कहा, “आर्यन खान से जुड़े कुछ दस्तावेज लेने शाहरुख खान के घर गई थी। ‘मन्नत’ पर कोई छापेमारी नहीं की गई।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह माना जा रहा है कि आर्यन खान की ड्रग्स चैट में जिस बॉलीवुड अभिनेत्री के बारे में खबर आई थी, वह अनन्या पांडे ही थीं। बताया जा रहा है कि एनसीबी ने अनन्या पांडे को आज दोपहर दो बजे ड्रग्स केस में पूछताछ के लिए बुलाया है। और वो NCB दफ्तर पहुँच चुकीं है।

जिसे लेकर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो(NCB) के डीडीजी अशोक मुथा जैन ने मीडिया को बताया, “उनके(अनन्या पांडे) घर पर आज सुबह सर्च हुआ था, उनको तलब किया गया है।”

वहीं अब शाहरुख खान के बेटे आर्यन की जमानत पर बॉम्बे हाईकोर्ट में 26 अक्टूबर (मंगलवार) को सुनवाई होगी। यानी ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आर्यन को अभी कम से कम 5 दिन और आर्थर रोड जेल में बिताने होंगे। दरअसल, इससे पहले एनडीपीएस के जज वीवी पाटील ने बताया था कि आखिर क्यों यह केस जमानत के लिए सही नहीं है। अपने 21 पेज के आर्डर में वीवी पाटिल ने कहा है, ”मटेरियल ऑन रिकॉर्ड दर्शाता है कि आर्यन खान, अरबाज मर्चेंट और मुनमुन धामेचा प्राइमा फेसी मामले में संलिप्त है, जो कि ग्रेव और सीरियस ऑफेंस है। इसके चलते उनको बेल नहीं दी जा सकती।”

पाटिल ने साथ ही यह भी कहा कि एविडेंस को देखते हुए ऐसा नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने क्राइम नहीं किया है और यह भी नहीं कहा जा सकता कि जमानत देने के बाद वह दोबारा इसे नहीं करेंगे। एनडीपीएस कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद आर्यन खान के वकीलों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दी है।

गुरुवार 21 अक्टूबर 2021 सुबह अभिनेता शाहरुख खान बेटे आर्यन खान से मिलने आर्थर जेल भी पहुँचे थे। इंस्टाग्राम पर मशहूर फोटोग्राफर विरल भयानी ने उनका वीडियो भी शेयर किया है। इस दौरान वह पत्रकारों के सवालों का जबाव देने से बचते नजर आए।

हिंदुत्व, गो मूत्र का मजाक, मोदी, RSS से घृणा, ‘जश्न-ए-‘ कार्यक्रम और बहुत कुछ: फैबइंडिया के डिजिटल पार्टनर का काला चिठ्ठा

फैबइंडिया ने दीपावली पर ‘जश्न-ए-रिवाज’ कैंपेन शुरू कर ‘जश्न-ए-पैर पे कुल्हारी’ मारने का काम किया है। हिंदुओं के त्योहार को इस तरह से उर्दू में पेश करने वाले फैबइंडिया से नेटिजन्स खासा आक्रोशित हैं। यही कारण है कि वह कंपनी का इतिहास और भूगोल जानने के लिए उसकी तह तक जा रहे हैं कि ‘नॉट सो सनातनी’ कैंपेन के पीछे का मास्टरमाइंड कौन है? दीपावली 100% सनातनी पर्व है। इसको लेकर ट्विटर यूजर हर्षिल मेहता का धन्यवाद किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने इसे गलत रूप से पेश करने वाले ज़ेनो ग्रुप इंडिया को आड़े हाथों लिया है। दरअसल, इसे फैबइंडिया ने साल 2019 में डिजिटल पार्टनर्स के रूप में हायर किया था।

हर्षिल ने सिलसिलेवार कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने लिखा, ”फैबइंडिया (FabIndia) के डिजिटल पार्टनर का नेतृत्व कॉन्ग्रेसी नेता कर रहे हैं। उन्हें और उनके पति को उर्दू का बहुत शौक है। वह हिंदूफोबिक हैं और गो मूत्र का मज़ाक उड़ाने वाले हैं।” अपने ट्वीट थेड में उन्होंने कई विस्फोटक खुलासे भी किए हैं। जनवरी 2020 में, रेखा राव को भारत के संचालन के लिए कंपनी में प्रबंध निदेशक के रूप में शामिल किया गया था।

साभार: LinkedIn

यह जानकारी क्यों महत्वपूर्ण है? इसकी प्रासंगिकता को समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि ज़ेनो ग्रुप फैबइंडिया के लिए क्या करने वाला था? एक्सचेंज4मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, ज़ेनो ग्रुप को ब्रांड स्ट्रेटजी, कंटेंट डेवलेपमेंट को लीड करना था और फैबइंडिया के लिए डिजिटल मीडिया के मैनेजमेंट और एक्जीक्यूशन (execution) की देखरेख करना था।

फैबइंडिया को डिजिटल मॉर्केट में आगे ले जाने और इसके मैनेजमेंट के लिए कई अन्य एजेंसियों को भी कॉन्ट्रैक्ट मिला है। हालाँकि, अभी तक अन्य एजेंसियों की जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है। ऐसे में हम यह मान सकते हैं कि ज़ेनो ग्रुप अभी भी इसका प्रबंधन कर रहा है। खासतौर पर, ऐसे ज्यादातर मामलों में फैबइंडिया जैसे बड़े कॉरपोरेट के पास एक से अधिक विज्ञापन एजेंसियाँ, पीआर एजेंसियाँ और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसियाँ ​​काम करती हैं। यह फैबइंडिया के मामले में भी हो सकता है, लेकिन अभी तक इंटरनेट पर कोई अन्य प्रमुख नाम सामने नहीं आया है।

अब ज़ेनो ग्रुप की रेखा राव पर वापस आते हैं। वह ‘कथा कथन’ की सह-संस्थापक भी हैं, जो उर्दू साहित्य को बढ़ावा देती है। ‘कथा कथन’ ने जश्न-ए-साहिर, जश्न-ए-प्रेमचंद, जश्न-ए-मंटो, जश्न-ए-गालिब और अन्य सहित कई कार्यक्रमों का आयोजन किया है। वैसे भी जश्न-ए-रिवाज कैंपेन और रेखा के ‘Jashn-e-XYZ’ शब्द के प्यार के बीच कोई संबंध नहीं हो सकता है, लेकिन यह एक अजीब संयोग है।

इसके अलावा, रेखा राव ने अपने कई ट्वीट्स में हिंदूफोबिया प्रदर्शित की है। उन्होंने ‘गोमूत्र’ का मजाक उड़ाया और पीएम मोदी और हिंदू संस्कृति को तुच्छ दिखाने का प्रयास किया है। वह अपने ट्वीट में पीएम मोदी, आरएसएस से घृणा और हिन्दुत्व की आलोचना भी करती हैं।

इसके अलावा वह कई मौकों पर गोरक्षकों पर सवाल उठा चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी टाइमलाइन पर हिंदुओं के खिलाफ कई व्यंग्यात्मक ट्वीट देखे जा सकते हैं। एक मुस्लिम से निकाह करने के बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि वह अपने पति के धर्म के कारण फ्लैट नहीं ढूंढ पा रही थी।

साभार: ट्विटर

ट्विटर पर उनके पति अपने बायो में खुद को ‘उर्दू का प्रबल समर्थक‘ कहते हैं, जो अंग्रेजी भाषा में लिखा गया है।

फैबइंडिया के दिवाली कैंपेन को लेकर विवाद

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर फैबइंडिया का विरोध बेबुनियाद नहीं है। उन्होंने दिवाली जैसे पावन पर्व के मौके पर एक कलेक्शन निकाला जिसका नाम उर्दू में था। अपने विज्ञापन के जरिए फैबइंडिया ने हिंदुओं को उकसाने का काम किया। कंपनी ने कपड़ों के एक कलेक्शन के विज्ञापन में दीपावली को जश्न-ए-रिवाज बताया था। लेकिन सोशल मीडिया पर इसका लगातार विरोध होने के बाद उन्होंने इस हिंदू विरोधी विज्ञापन को हटा लिया। मालूम हो कि फैबइंडिया की शुरुआत 1960 में जॉन बिस्सेल ने की थी। वह फोर्ड फाउंडेशन ग्रांट पर कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम के सलाहकार के रूप में भारत आए थे।