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उत्तराखंड के रुद्रपुर में बन रही मुस्लिम कॉलोनी, यूपी में भी हो रहा प्रचार: रिपोर्ट में दावा, डेमोग्राफी चेंज पर पहले ही अलर्ट कर चुकी है एजेंसियाँ

उत्तराखंड के रुद्रपुर (लालपुर) में मुस्लिमों के लिए अलग से विशेष कॉलोनी बन रही है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस संबंध में पैम्पलेट बाँटते हुए उत्तर प्रदेश के बहेड़ी और रामपुर के बिलासपुर में भी प्रचार हो रहा है। इन पोस्टरों में लिखा है कि रुद्रपुर के ग्राम लालपुर में पहली बार मुस्लिम कॉलोनी काटी जा रही है, जिसकी बुकिंग कथित तौर पर सिर्फ मजहब विशेष के लोग कर सकेंगे। इन पोस्टरों में बताया गया है कि यहाँ 1 हजार से 2 हजार स्क्वायर फीट के प्लॉट उपलब्ध हैं। इसमें यह भी बताया गया है कि 50 वर्ग गज का प्लॉट सिर्फ ढाई लाख रुपए में मिलेगा।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बहेड़ी और बिलासपुर के साथ ही जिले में भी कॉलोनी बनने का प्रचार किया गया है। बुकिंग के लिए होटल कॉरबेट इन का पता दिया गया है जो कि जनता इंटर कॉलेज के पास है। स्थानीय इन खबरों के बाद विरोध कर रहे हैं। उनका पूछना है मजहब और जाति के नाम पर कॉलोनी कैसे बन सकती है। इस मामले पर जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष दिवाकर पांडे ने कहा लोकतंत्र में किसी को जाति, धर्म के नाम पर कॉलोनी बनाने का हक नहीं है। इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।

मालूम हो कि जब ऑपइंडिया को इस पोस्टर की जानकारी हुई तो हमने इसपे दिए नंबरों पर कॉल किया। एक नंबर मिला नहीं और दूसरे पर किसी नादिर से बात हुई। नादिर ने बताया कि वो कमीशन के आधार पर काम करते हैं। उनके बॉस ने 3 एकड़ जमीन खरीदी थी श्मशान घाट के पास कि वो उसे मुस्लिमों को बेच सकें। लेकिन ये तरीका काम नहीं आया तो उन्होंने जमीन बिजनेसमैन को दे दी ताकि वो फैक्ट्री लगा सके। पोस्टर 4 माह पुराने हैं।

गौरतलब है कि इलाके में हुए डेमोग्राफिक चेंज को लेकर प्रशासन पहले ही चेतावनी दे चुका है। सीमावर्ती इलाकों में एक मजहब विशेष की जनसंख्या बढ़ने के कारण अलर्ट भी जारी हुआ है। बताया जा रहा है कि ऊधम सिंह नगर में मुस्लिमों के बसने और जमीन खरीदने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

एसपी क्राइम मिथिलेश सिंह ने मीडिया को बताया कि ये मामला संज्ञान में आया है। जाँच कराई जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर कालोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीडीए उपाध्यक्ष हरीश चंद्र कांडपाल ने भी कहा कि संप्रदाय विशेष के नाम पर कॉलोनी व प्लाटिंग का किसी को अधिकार नहीं है। उन्होंने किसी को ऐसी अनुमति भी नहीं दी है। कालोनाइजर से सभी दस्तावेज तलब किए जाएँगे।

बता दें कि इससे पहले नैनीताल के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिमों का दखल बढ़ने की खबर मीडिया में आई थी। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता नितिन कार्की ने इस डेमोग्राफिक बदलाव के संबंध में आगाह करते हुए कुछ दिनों पहले ही जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था। घोड़ा, टैक्सी, नौका संचालन, टूरिस्ट गाइडिंग, होटलों इत्यादि को लीज में लेने में मुस्लिम समुदाय का दखल बढ़ता दिखा था। इनमें से अधिकतर खास कर के रामपुर, दडिय़ाल, स्वार, मुरादाबाद, बिजनौर और सहारनपुर के रहने वाले हैं।

सीमावर्ती इलाकों में होने वाले डेमोग्राफिक चेंज पर सुरक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नेपाल की सीमा से सटे क्षेत्रों में हो रहे ये बदलाव सामान्य नहीं है। इसी स्थिति के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसी ने साल की शुरुआत में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि कौन से इलाके संवेदनशील हैं और कौन से अतिसंवेदनशील हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन जिलों के नाम रिपोर्ट में दिए गए थे वहाँ हुआ डेमोग्राफिक चेंज कोई हाल-फिलहाल का नहीं है बल्कि साल 2011 में हुए जातिगत जनगणना में वहाँ मजहब विशेष की आबादी में 2.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई थी।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों के अलावा उत्तर प्रदेश में भी कई क्षेत्रों को लेकर अलर्ट जारी हुआ था। इसका कारण था कि पिछले 2 साल के अंदर बहराइच, बस्ती व गोरखपुर मंडल से लगी नेपाल सीमा पर वहाँ 400 से अधिक मजहबी शिक्षण संस्थान और मजहबी स्थल खुले, जिसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में दी थी।

ईद-ए-मिलाद पर जबलपुर में पुलिस पर पथराव, फेंके जलते पटाखे: एमपी के चार जिलों में हिंसा, यूपी-गुजरात के शहरों में भी बवाल

ईद-ए-मिलाद के अवसर पर जुलूस निकालने को लेकर देश के कई हिस्सों से हिंसा की खबरें हैं। मध्य प्रदेश के कम-से-कम चार जिलों में झड़प की घटनाएँ हुईँ, जिनमें 20 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों में एक छोटी बच्ची सहित पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। मध्य प्रदेश के धार, जबलपुर, खरगौन और बरवानी में हुई हिंसा में उपद्रवियों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की और पटाखे फेंके। उत्तर प्रदेश के कानपुर और बरेली से भी हिंसा की खबरें हैं।

मध्य प्रदेश के जबलपुर में मंगलवार को जुलूस के साथ डीजे लगाकर जा रही भीड़ को पुलिस ने रोका और डीजे उतारने के लिए कहा। इसके बाद भीड़ ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की और पुलिस पर पथराव किया। इस दौरान पुलिस पर जलते पटाखे भी फेंके गए। उपद्रवियों ने कपड़े बाँधकर चेहरे को छिपा रखा था, ताकि उनकी पहचान ना हो सके। इसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस के गोले फेंके।

अधिकारियों के अनुसार, घटना शहर के मछली बाजार इलाके में इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाए जाने वाले ईद-ए-मिलाद के मौके पर हुई। दरअसल, बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग निर्धारित रास्ते से अलग, संवेदनशील इलाके से होकर मस्जिद में नमाज के लिए जाने की कोशिश कर रहे थे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें निर्धारित मार्ग से जाने के लिए कहा। इस पर भीड़ भड़क उठी और विवाद करने लगी।

जबलपुर के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ बहुगुणा ने बताया, ‘‘मछली बाजार संवेदनशील इलाका होने के कारण पुलिस ने लोगों को निर्धारित मार्ग से जाने के लिए कहा। इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव किया और जलते हुए पटाखे फेंके। इसके बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले दागे।’’

जिलाधिकारी कर्मवीर शर्मा ने बताया कि पुलिस पर पटाखे और पत्थर फेंकने वाले लोगों की पहचान कर ली गई है। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना ना हो।

उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने 100 से अधिक आँसू गैस के गोले दागे। इसके अलावा, पुलिस ने एक उपद्रवी को हिरासत में भी लिया है। पुलिस पर पथराव करने वालों में 15 से 25 वर्ष के उपद्रवी सबसे आगे थे। पथराव में कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए और करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं हैं।

इसके अलावा, धार में जुलूस निकालने के लिए गुलमोहर कॉलोनी में करीब 2000 लोग जुटे थे। उसके बाद यह भीड़ प्रतिबंधित क्षेत्र से गुजरने की कोशिश करने लगी। इस दौरान जुलूस में शामिल कुछ लोगों ने बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की और जब पुलिस ने रोका तो उनके साथ धक्का-मुक्की करने लगे। भीड़ जवानों पर पत्थरबाजी करने लगी। इसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया।

वहीं, उत्तर प्रदेश के कानपुर में जुलूस निकालने की अनुमति नहीं मिलने पर जमकर हंगामा किया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ परेड चौराहे पर पहुँचकर प्रदर्शन और नारेबाजी करने लगी। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को खदेड़ दिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान मची भगदड़ में कुछ लोगों के घायल होने की भी सूचना है। दैनिक जागरण के अनुसार, इस बात को लेकर इलाके में तनाव का माहौल है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस को तैनात किया गया है।

उत्तर प्रदेश के ही बरेली में जुलूस में लाउडस्पीकर बजाने को लेकर पुलिस और लोगों के बीच नोकझोंक हो गई। इसके बाद भीड़ ने पुलिस का घेराव किया। हालाँकि, पुलिस के दबाव में लाउडस्पीकर उतारना पड़ा। दरअसल, शीशगढ़ में लोगों ने जुलूस निकालने की तैयारी करने के बाद लाउडस्पीकर लगे जुलूस को गौड़ी मुहल्ला से लेकर जाने लगे। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली और पुलिस बल मौके पर पहुँचकर लाउडस्पीकर को बंद करा दिया। इसके बाद भीड़ पुलिस से उलझ गई। पुलिस का कहना था कि अब तक जैसे जुलूस निकलते रहा है, वैसे ही निकलना चाहिए। पहले जुलूस के दौरान लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जाता था।

इसके अलावा, गुजरात के अहमदाबाद में एक ही समुदाय के दो गुटों के बीच ईद-ए-मिलाद के दौरान ड्रम बजाने को लेकर झड़प हो गया, जिसमें चार लोग घायल हो गए हैं। सोमवार की रात हुई इस घटना में तीन लोगों को पुलिस ने अस्पताल पहुँचाया है। इस मामले में पुलिस ने दोनों पक्षों के 11 लोगों के खिलाफ आईपीसी की धारा 323, 337 और 294(बी) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

‘…पूरी पार्टी ही हैक कर ली है मोटा भाई ने’: सपा कार्यकर्ता ने मंच से किया BJP का प्रचार, लोगों ने लिए मजे; वीडियो वायरल

समाजवादी पार्टी (SP) के धरना प्रदर्शन का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें समाजवादी पार्टी के एक कार्यकर्ता को अनजाने में बीजेपी के लिए प्रचार करते हुए देखा जा सकता है। बाद में गलती का एहसास होने पर वह समाजवादी पार्टी का जय जय कार करने लगता है।

वह वीडियो में कहता है, “जब वहाँ पर रोड नहीं था और मैं अपने सभी भाइयों को कहना चाहता हूँ कि ये जीत सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की जीत नहीं है, ये हमारी जीत है, और जितनी मजबूती के साथ हम भारतीय जनता पार्टी को वोट करेंगे, उतने ही हम मजबूत होंगे। समाजवादी पार्टी को हम वोट करेंगे, उतने ही हम मजबूत होंगे। धन्यवाद।”

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इनके जम कर मजे ले रहे हैं। पवन तिवारी लिखते हैं, “इनके कार्यकर्ता भी जानते है देश की भलाई मोदी और योगी को जीतने में है।”

एक यूजर ने लिखा, “EVM नहीं यहाँ तो पूरी समाजवादी पार्टी ही हैक कर ली है मोटा भाई ने।”

निलांजन सेनगुप्ता लिखते हैं, कुर्ते का कलर भी ‘भगवा’ है।

सचिन गुप्ता ने लिखा, “सा# गल्ती से मिस्टेक हो गया।”

संजय हिंदुस्तानी ने लिखा, “यही कहेंगे यह देख लेना। आखिर किस दम पर यह जीतेंगे , गुंडागर्दी, अराजकता के दम पर? अबकी बार BYE साईकल करेगी जनता।”

एक यूजर ने लिखा, “सच…सच ही होता है और मुँह पर आ ही जाता है। काम किया होता तो याद भी रहता, सब भूल जाएँगे। अपने सभी राम जी की जनता की सेवा के लिए अभी बीजेपी ही सही है। बीजेपी का हाथ छोड़ने का नहीं है, नहीं तो यह सभी लोग हम सभी का भी बँटवारा और देश के टुकड़े…जय श्री राम।”

सपा के नेता और कार्यकर्ता हाल के दिनों में इस तरह की हरकतें करते हुए देखे गए हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल को मंच पर सोते हुए पकड़ा गया, जबकि अन्य नेताओं ने जालौन में एक राजनीतिक रैली के दौरान भाषण दिया। नरेश पटेल ने भी अनजाने में अखिलेश यादव पर किसानों को बर्बाद करने का आरोप लगाया।

नरेश पटेल ने कहा था, “कॉन्ग्रेस और बीजेपी में कोई अंतर नहीं है। कॉन्ग्रेस बीजेपी है और बीजेपी कॉन्ग्रेस है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने 45 साल तक शासन किया। उन्होंने किसानों को बर्बाद कर दिया। अब वे घड़ियाल के आँसू बहा रहे हैं। हमारे नेता अखिलेश यादव ने किसानों को बर्बाद कर दिया है।”

स्मृति ईरानी ने फैबइंडिया के ट्रायल रूम से पकड़ा था हिडन कैमरा, ‘खादी’ के अवैध इस्तेमाल सहित कई मामले: ब्रांड का विवादों से है पुराना नाता

पारंपरिक परिधानों का कारोबार करने वाले फैबइंडिया का विवादों से पुराना नाता रहा है। साल 2015 में, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गोवा के कैंडोलिम में स्थित फैबइंडिया आउटलेट के ट्रायल रूम में हिडन कैमरा पकड़ा था। इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। यह फैबइंडिया का एकमात्र विवाद नहीं है। अपने 60 साल के लंबे समय में कंपनी ने हाल के वर्षों में खुद को पहले से कहीं अधिक विवादों में पाया है।

दरअसल, 3 अप्रैल, 2015 को गोवा में पॉप्युलर ब्रैंड फैबइंडिया स्टोर के ट्रायल रूम में हिडन कैमरे पाए गए थे। इन कैमरों के बारे में किसी और ने नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने पता लगाया था। जब वह ट्रायल रूम में गईं तो उन्होंने पाया कि यहाँ सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने तुरंत अपने पति को कैमरे के बारे में बताया और फिर स्थानीय भाजपा विधायक माइकल लोबो को फोन किया। बाद में उन्होंने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत भी दर्ज कराई, जिसके आधार पर चार लोगों परेश भगत, राजू पायनचे, प्रशांत नाइक और करीम लखानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस ने इस मामले में फैबइंडिया के स्टाफ से भी पूछताछ की थी। स्टाफ के मुताबिक, ये कैमरे चार महीने पहले लगाए गए थे। उस समय भाजपा विधायक लोबो ने कहा था कि ऐसी हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हम औरतों के खिलाफ ऐसी घटनाओं को सहन नहीं करेंगे। उन्होंने साथ ही यह भी कहा था कि वह गोवा के एसपी और डीजीपी से सादे कपड़ों में जाकर सभी शोरूम्स पर छापे मारें। इस मामले में पुलिस थाने में स्मृति ईरानी ने अपना बयान भी दर्ज कराया था।

चारों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत ने उन्हें जमानत दे दी थी। उन पर IPC की धारा 354C (voyeurism), 509 (गोपनीयता के साथ छेड़छाड़) और IT अधिनियम की धारा 66E (किसी भी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजी तस्वीरें कैप्चर करना, प्रकाशित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। 12 अप्रैल को, पुलिस ने बताया था कि मुख्य आरोपित भगत के पास डीवीआर का पासवर्ड था। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (क्राइम ब्रांच) कार्तिक कश्यप ने मीडिया को बताया था कि मंत्री के शोर मचाने के तुरंत बाद भगत को कैमरे की दिशा बदलते हुए पकड़ा गया था।

इसके बाद फैबइंडिया ने एक बयान जारी किया था, जिसमें उन्होंने इस घटना के लिए मंत्री से माफी माँगी थी। लेकिन साथ ही स्पष्टीकरण दिया था कि ट्रायल रूम में कोई भी कैमरा नहीं छिपाया गया था। उन्होंने कहा, “कैंडोलिम-गोवा स्टोर में कैमरा स्टोर की निगरानी का केवल एक हिस्सा था और खरीदारी वाली जगह पर ही लगाया गया था। ट्रायल रूम सहित स्टोर में कहीं भी कोई हिडन कैमरा नहीं था।”

कोल्हापुर आउटलेट में एक और मामला

इसी तरह की एक घटना 31 मार्च, 2015 को दर्ज की गई थी, जहाँ कोहलापुर आउटलेट पर एक सेल्समैन को महिला ग्राहक का वीडियो निकालने के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 25 वर्षीय प्रकाश आनंद इसपुर्ले को एक महिला ग्राहक की शिकायत के बाद 1 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। अपनी शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह कपड़े पहन रही थी, तो इसपुर्ले ने अपने मोबाइल फोन को ट्रायल रूम के दरवाजे और फर्श के बीच में वीडियो रिकॉर्डिंग मोड में रखा था।

खादी शब्द का गलत प्रयोग

फरवरी 2018 में खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग भारत सरकार ने बिना अनुमति के खादी ब्रांड का उपयोग करने के लिए फैबइंडिया पर मुकदमा दायर किया था। केवीआईसी ने ट्रेडमार्क चरखा का अवैध रूप से उपयोग करने और खादी टैग के तहत परिधान बेचने के लिए एथनिक वियर रिटेल आउटलेट से 525 करोड़ रुपए का हर्जाना माँगा था। जब कंपनी पर पहली बार केवीआईसी द्वारा मुकदमा दायर किया गया था, तो उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ किए गए दावे निराधार थे और वे उनके खिलाफ अदालत में लड़ेंगे।

KVIC और FabIndia के बीच यह विवाद साल 2015 में शुरू हुआ, जब KVIC ने कंपनी को खादी ट्रेडमार्क के इस्तेमाल के खिलाफ चेतावनी देते हुए कानूनी नोटिस भेजा था। फैबइंडिया ने जवाब दिया था कि उसने विज्ञापनों में खादी शब्द और उसके ट्रेडमार्क का इस्तेमाल बंद कर दिया है। हालाँकि, 2017 में KVIC को पता चला कि FabIndia अभी भी खादी ट्रेडमार्क और नाम का उपयोग कर रहा है। इसके बाद उसने एक नया कानूनी नोटिस भेजा था।

उल्लेखनीय है कि सरकारी निकाय केवीआईसी ने ‘खादी’ ब्रांड नाम का दुरुपयोग करने और इसका लाभ उठाने के लिए फैबइंडिया सहित 1,000 से अधिक निजी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई की है।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2021 में फैबइंडिया (Fabindia) ने दिवाली के मौके पर जारी किए गए कलेक्शन को ‘जश्न-ए-रिवाज’ का नाम देकर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। हिंदुओं के त्योहार को फैबइंडिया ने अपने ट्वीट में उर्दू में पेश किया था, जिसे अब डिलीट कर कर दिया गया है। दरअसल, यह ट्वीट नेटीजन्स के भारी विरोध के बाद हटाया गया। वहीं अब खबर आ रही है कि फैबइंडिया ने लोगों के भारी विरोध को देखते हुए यह विज्ञापन भी हटा लिया है।

ट्विटर से गायब हुए ‘इस्कॉन बांग्लादेश’ और ‘हिन्दू यूनिटी काउंसिल’ के हैंडल: दुनिया के सामने ला रहे थे हिन्दुओं पर अत्याचार की खबरें व तस्वीरें

जहाँ एक तरफ बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे हमलों को वहाँ की मीडिया छिपा रही है, वहीं अब माइक्रो ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर से ‘इस्कॉन बांग्लादेश’ और ‘बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल’ के हैंडल्स ही गायब हो गए हैं। हालाँकि अभी तक ये कन्फर्म नहीं हुआ है कि इन अकॉउंट को सस्पेंड किया गया है या डीएक्टिवेट। ये दोनों ही बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार व हिंसक हमलों की ख़बरों को दुनिया के सामने ला रहे थे और न्याय की माँग कर रहे थे।

‘इस्कॉन बांग्लादेश’ का ट्विटर हैंडल सस्पेंड किया गया
‘बांग्लादेश हिंदू यूनिटी काउंसिल’ का ट्विटर हैंडल भी सस्पेंड

यहाँ सवाल ये उठता है कि अगर इन ट्विटर हैंडल्स से कुछ गलती हुई भी थी तो इन्हें सस्पेंड क्यों किया गया? क्योंकि अगर एकाध घटनाओं में इनका वर्जन भले ही बांग्लादेश की सरकार से अलग रहा हो, लेकिन ये दोनों ही हैंडल्स तस्वीरों और विडीयोज के माध्यम से दुनिया के सामने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को सामने रख रहे थे। एक ओर मुस्लिम भीड़ हिंदू अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न कर रही है, वहीं दूसरी ओर ट्विटर उन्हें अपनी बात ऑनलाइन नहीं रखने दे रहा।

‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन (WHF)’ के बांग्लादेश चैप्टर द्वारा दिए गए आँकड़ों के अनुसार, 33 जिलों में 335 मंदिरों पर हमले हुए हैं। ये पहले 4 दिन, ये 13-17 अक्टूबर, 2021 तक के ही आँकड़े हैं। ऐसी घटनाएँ अब भी बदस्तूर जारी हैं। मंदिरों से सभी चीजें न सिर्फ लूट ली गईं, बल्कि प्रतिमाओं को भी खंडित कर दिया गया। WHF ने बताया है कि कुल 1800 हिन्दुओं की दुकानों अथवा प्रतिष्ठानों को आग के हवाले किया गया है। कॉमिला, चाँदपुर, नोआखली, चटगाँव, कोष बाजार, फेनी, चपई, नवाबगंज और रंगपुर में मामला सबसे ज्यादा हिंसक हो गया।

जिन एक दर्जन हिन्दुओं की हत्या हुई है, उनमें 7 पुजारी थे। 23 महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार की बात कही जा रही है। WHF का कहना है कि एक परिवार में तो एक साथ तीन महिलाओं का बलात्कार हुआ। अकेले रंगपुर के पीरगंज में 300 हिन्दुओं के घरों में लूटपाट हुई व कइयों को जलाया गया। ‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन’ ने कहा है कि वो उन पीड़ित हिन्दुओं के साथ खड़ा है, जिन्हें तुरंत मदद की जरूरत है।

‘सुसाइड बॉम्बर इस्लाम और तालिबान के हीरो’: सिराजुद्दीन हक्कानी ने की तारीफ, 125 डॉलर और जमीन देने का किया ऐलान

अफगानिस्तान के इस्लामिक अमीरात के आंतरिक मंत्री और हक्कानी नेटवर्क के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी ने तालिबान के आत्मघाती हमलावरों के परिवारों से मुलाकात की। काबुल के इंटरकांटिनेंटल होटल में मुलाकात के दौरान सिराजुद्दीन हक्कानी ने इन आत्मघाती हमलावरों को ‘इस्लाम और देश का हीरो’ करार दिया है। इन हमलावरों ने तालिबान के लिए अलग-अलग हमलों को अंजाम देते समय खुद को विस्फोटकों से उड़ा लिया था। 

तालिबान के आंतरिक मंत्रालय ने होटल में आत्मघाती हमलावरों के परिजनों से मिलते हुए सिराजुद्दीन हक्कानी की तस्वीरें जारी की है। सभी तस्वीरों में सिराजुद्दीन हक्कानी के चेहरे को ब्लर किया गया है। अपने भाषण के दौरान सिराजुद्दीन हक्कानी ने इन आत्मघाती हमलावरों के कथित जिहाद और बलिदान की तारीफ की।

सिराजुद्दीन हक्कानी ने फिदायीन हमलावरों को देश का और इस्लाम का हीरो करार दिया। इन हमलावरों को ‘शहीद’ बताते हुए सिराजुद्दीन ने कहा कि हमें इनकी आकांक्षाओं के साथ विश्वासघात करने से बचना चाहिए। उसने मारे गए सभी आत्मघाती हमलावरों के परिवारों को जमीन और 125 डॉलर देने का वादा किया है।

कौन है सिराजुद्दीन हक्कानी?

सिराजुद्दीन हक्कानी दुनिया के सबसे खूँखार आतंकी संगठनों में से एक हक्कानी नेटवर्क का सरगना है। उसे तालिबान के नई सरकार में अफगानिस्तान का आंतरिक मंत्री बनाया गया है। यह पद किसी दूसरे देश के गृहमंत्री के बराबर माना जाता है। सिराजुद्दीन मुजाहिदीन कमांडर जलालुद्दीन हक्कानी का बेटा है। हक्कानी समूह पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान की वित्तीय और सैन्य संपत्ति की देखरेख करता है।

अमेरिका का मोस्ट वॉन्टेड है सिराजुद्दीन हक्कानी

अमेरिका ने सिराजुद्दीन को मोस्ट वॉन्टेड घोषित कर रखा है। उसके सिर पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि हक्कानी ने ही अफगानिस्तान में आत्मघाती हमलों की शुरुआत की थी। हक्कानी नेटवर्क को अफगानिस्तान में कई हाई-प्रोफाइल हमलों के लिए जिम्मेदार माना जाता है। उसने तत्कालीन अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई की हत्या का प्रयास भी किया था। इसके अलावा हक्कानी नेटवर्क ने भारतीय दूतावास पर आत्मघाती हमला भी किया था। हक्कानी ब्रदर्स के नेतृत्व में काबुल की सड़कों पर कम से कम 6,000 भारी हथियारों से लैस आतंकी गश्त लगा रहे हैं।

नई पार्टी बनाएँगे पूर्व CM अमरिंदर सिंह, BJP के साथ हो सकता है गठबंधन, ‘किसान आंदोलन’ का समाधान भी जल्द: रिपोर्ट

अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रही अटकलबाजियों को विराम देते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने घोषणा की है कि वो एक नई पार्टी बनाएँगे। उनकी पार्टी भाजपा के अलावा अकालियों के एक गुट व अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन कर सकती है। 2022 में होने वाले चुनाव के लिए उनकी नई पार्टी किसानों तक पहुँचेगी। साथ ही उन्होंने ये भी इशारा किया कि एक साल से चल रहा ‘किसान आंदोलन’ जल्द समाधान की ओर अग्रसर हो सकता है।

कैप्टेन अमरिंदर सिंह की में तो उनकी मध्यस्थता में सरकार और किसानों के बीच बातचीत के बाद मुद्दे का समाधान हो जाएगा। उनकी अपनी नई पार्टी भाजपा को साथी बनाएगी या नहीं, ये इस पर निर्भर करेगा कि कृषि कानूनों को लेकर उसका रुख क्या रहता है। उन्होंने ‘द प्रिंट’ के कार्यक्रम ‘Off the Cuff‘ में शेखर गुप्ता से बात करते हुए ये बातें कही। वो शिरोमणि अकाली दल के ढींडसा और ब्रह्मपुरा गुट के साथ गठबंधन कर सकते हैं।

भाजपा के साथ गठबंधन पर हिचक को लेकर पूछे गए सवाल पर कैप्टेन ने कहा कि वो हमेशा पंजाब के लिए खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो चुनाव लड़ने की तरफ देख रहे हैं और उनका मुख्य ध्यान सरकार के गठन की तरफ केंद्रित होगा। कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वो कॉन्ग्रेस को छोड़ देंगे। पार्टी आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद से उनका इस्तीफा लेकर चरणजीत सिंह चन्नी को इस रोल के लिए चुना।

पंजाब में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की बगावत के कारण अमरिंदर सिंह से इस्तीफा लिया गया था। उन्होंने इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल से मुलाकात की थी। इसके बाद उनके भाजपा में जाने की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उन्होंने ऐसी संभावनाओं को नकार दिया। उन्होंने अब कहा है कि वो भाजपा को सांप्रदायिक या मुस्लिम विरोधी पार्टी नहीं मानते।

पूर्व मुख्यमंत्री ने पूछा कि क्या आप पंजाब में हिन्दुओं, सिखों और मुस्लिमों के बीच कोई विवाद देखते हैं? उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों से पहले पंजाब में मोदी सरकार के विरुद्ध कोई नकारात्मक माहौल नहीं था। उन्होंने कहा कि इसके समाधान के लिए कोशिशें जारी हैं और इसी पर निर्भर है कि भाजपा के साथ उनका गठबंधन कब होगा। सिंघु सीमा पर तरनतारन के रहने वाले दलित लखबीर सिंह की निहंगों द्वारा बेरहमी से हत्या पर उन्होंने कहा कि ये एक त्रासद और भयंकर घटना है।

उन्होंने कहा कि वहाँ ‘किसान आंदोलन’ में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, ऐसे में उन्हें यकीन नहीं है कि लखबीर सिंह ने गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी की होगी। उन्होंने कहा कि हत्यारे आपे से बाहर थे और और वो नशे में हो सकते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि निहंग अक्सर एक प्रकार का नशा करते हैं। कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब में पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI और खालिस्तानी स्लीपर सेल्स द्वारा हथियारों की सप्लाई का मुद्दा वो तीन वर्षों से उठा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि AK-47, पिस्तौल, ग्रेनेड, ड्रग्स और कैश पहुँचाने के लिए ड्रोन तकनीक का भी दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि पंजाब की 600 किलोमीटर की सीमा फ्रंटलाइन सीमा से लगती है और कुछ ऐसी साजिश चल रही है, जिससे वो चिंता में हैं। कैप्टेन ने बताया कि उन्होंने इस सम्बन्ध में अजीत डोभाल को बताया है। उन्होंने कहा कि इसीलिए वो चाहते हैं कि ‘किसान आंदोलन’ का समाधान हो, ताकि युवा गलत रास्ते न पकड़ें।

लखीमपुर खीरी हिंसा के संदिग्धों की SIT ने जारी की तस्वीरें, नाम-पता या सूचना देने वाले को मिलेगा इनाम

लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के मामले की जाँच कर रही SIT ने घटना में शामिल कुछ संदिग्ध लोगों की तस्वीरें जारी की हैं। SIT ने लोगों से इन संदिग्धों के बारे में सूचना देने की अपील की है। सूचना देने वाले लोगों को उचित पुरस्कार दिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा, ”लखीमपुर खीरी के तिकुनिया थाना क्षेत्र में दिनांक 03.10.2021 को हुई घटना की जाँच काइम ब्रान्च की SIT कर रही है। जाँच में साक्ष्य संकलन के दौरान टीम को कुछ वीडियो/फोटो प्राप्त हुए हैं, जिनमें घटना में शामिल सदिग्धों की उपस्थिति दिखाई दे रही है। पहचान के लिए उनकी तस्वीरें जारी की जा रही हैं। आम जनता से अपील की जाती है कि तस्वीरें देखकर संदिग्धों को चिन्हित कर उनका नाम, पता उपलब्ध कराएँ।”

इन संदिग्ध लोगों की सूचना देने के लिए एसआईटी के अध्यक्ष का मोबाइल नंबर 9454400454, वरिष्ठ सदस्य एसआईटी का मोबाइल नंबर 9454400394, खीरी एएसपी और एसआईटी के सदस्य का मोबाइल नंबर 9454401072, सीओ व एसआईटी के सदस्य का मोबाइल नंबर 9454401486 व विवेचनाधिकारी एसआईटी का मोबाइल नंबर 9450782977 भी जारी किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की

गौरतलब है कि ये सारे तस्वीरें तिकुनिया में बीती तीन अक्टूबर को हुई हिंसा के वक्त की हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सोमवार (18 अक्टूबर 2021) को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में चार और लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार लोगों की पहचान सुमित जायसवाल, शिशि पाल, सत्य प्रकाश त्रिपाठी उर्फ ​​सत्यम और नंदन सिंह बिष्ट के रूप में हुई है। अब मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों की कुल संख्या 10 हो गई है।

अमीन का डीजे, डीजे पर तिरंगा झंडा, झंडे पर मस्जिद का चित्र: कानपुर में राष्ट्रध्वज का अपमान, पुलिस ने दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित रावतपुर में राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला सामने आया है। यहाँ तिरंगे झंडे के ऊपर मस्जिद की आकृति बना दी गई। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक बड़े से डीजे स्पीकर के बगल में तिरंगा झंडा लगा हुआ देखा जा सकता है। ट्विटर पर यूजर्स ने इसे डाल कर लिखा कि राष्ट्रध्वज के साथ इस तरह छेड़छाड़ करने से इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

‘कानपुर पुलिस कमिश्नरेट’ ने जानकारी दी है कि इस सम्बन्ध में आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देश दे दिया गया है। ये वीडियो रावतपुर के डाकखाने के पास का है। आला अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया और तुरंत रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश जारी किए। पुलिस ने इस सम्बन्ध में FIR दर्ज कर ली है और घटना की जाँच की जा रही है। जो डीजे स्पीकर लगा हुआ था, वो अमीन नाम के एक स्थानीय युवक का है।

इस मामले में कल्याणपुर पुलिस ने डीजे संचालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। स्थानीय पत्रकार हिमांशु मिश्रा ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर डाला था। इस वीडियो को पुलिस के संज्ञान में लाने के लिए उन्हें लगातार धमकियाँ भी मिल रही हैं। निर्देश दिए गए थे कि डीजे बजाने पर कोई शोर-शराबा नहीं होगा, लेकिन फिर भी खूब हंगामा किया गया। बाकरमंडी में लगे इस झंडे को पुलिस ने हटवा दिया है।

स्थानीय हिन्दुओं का कहना है कि पुलिस ने इस मामले को दबाने की कोशिश की और हिन्दुओं से काफी मान-मनव्वल किया कि मुस्लिमों को उनका त्योहार मना लेने दिया जाए। रावतपुर से आतंकियों के पकड़े जाने की घटनाएँ भी सामने आई हैं। ‘लव जिहाद’ के मामले भी यहाँ सामने आते रहते हैं और कुछ दिनों पहले एक हिन्दू युवक की पिटाई भी हुई थी। पुलिस पर देर से कार्रवाई का आरोप है।

‘कॉन्ग्रेस का महिलाओं को 40% टिकट देने का ऐलान चुनावी नाटकबाजी’: मायावती ने प्रियंका को याद दिलाया पुराना रिकॉर्ड

उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मंगलवार (19 अक्टूबर 2021) को कॉन्ग्रेस की बड़ी घोषणा पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कॉन्ग्रेस की महिलाओं को 40 प्रशित टिकट देने की घोषणा को कोरी चुनावी नाटकबाजी बताया है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने मंगलवार को कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा की विधानसभा चुनाव में महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट की घोषणा पर ट्वीट किया है। मायावती ने कहा कि कॉन्ग्रेस जब सत्ता में होती है व इनके अच्छे दिन होते हैं तो इनको दलित, पिछड़े व महिलाएँ आदि याद नहीं आती है। अब जब इनके बुरे दिन नहीं हट रहे हैं तो पंजाब में दलित की तरह उत्तर प्रदेश में इनको महिलाएँ याद आई हैं। उन्हें 40 प्रतिशत टिकट देने की घोषणा इनकी कोरी चुनावी नाटकबाजी है।

बसपा प्रमुख मायावती का ट्वीट

मायावती ने कहा है कि महिलाओं के प्रति कॉन्ग्रेस की चिन्ता पहले इतनी ही वाजिब व ईमानदार नहीं थी। मायावती ने कहा कि महिलाओं के प्रति कॉन्ग्रेस की चिन्ता पहले अगर इतनी वाजिब तथा ईमानदार होती तो केन्द्र में इनकी सरकार ने संसद व विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून क्यों नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का स्वाभाव है ‘कहना कुछ व करना कुछ।’ जो इनकी नीयत व नीति पर प्रश्नचिन्ह खड़े करता है।

उन्होंने कहा कि यूपी व देश में महिलाओं की आधी आबादी है तथा इनका हित व कल्याण ही नहीं बल्कि इनकी सुरक्षा, आदर-सम्मान के प्रति ठोस व ईमानदार प्रयास की सतत प्रक्रिया, जिसके प्रति मजबूत इच्छाशक्ति जरूरी है, जो कॉन्ग्रेस व भाजपा आदि में देखने को नहीं मिलती है। बीएसपी ने ऐसा करके दिखा दिया है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने यूपी विधानसभा चुनाव में 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी अपने 40 फीसदी टिकट महिलाओं को देगी। महिला सशक्तिकरण के लिए यह फैसला लिया गया है। यह निर्णय उन महिलाओं के लिए है, जो बदलाव और प्रदेश को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि इसके लिए उन्होंने आवेदन पत्र माँगे हुए हैं। अगले महीने की 15 तारीख तक आवेदन खुला रहेगा। प्रियंका ने कहा कि उनका बस चलता तो वो 50 प्रतिशत टिकट दे देती। यूपी में आरक्षण बढ़ेगा तो देश भी बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस का नारा है, “लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ।”

उन्होंने कहा कि 40 फीसदी टिकट का फैसला उन्नाव की उस लड़की के लिए यह निर्णय है, जिसको जलाकर मारा गया। यह निर्णय हाथरस की उस लड़की के लिए है, जिसे न्याय नहीं मिला। लखीमपुर में एक लड़की मिली उसने बोला प्रधानमंत्री बनना चाहती है, उसके लिए है ये निर्णय। यह निर्णय सोनभद्र में उस महिला के लिए है जिसका नाम किस्मत है, जिसने अपने लोगों के लिए आवाज उठाई। ये यूपी की हर एक महिला के लिए है जो यूपी को आगे बढ़ाना चाहती हैं।