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त्रिशूल, वज्र, दंड… से जवाब देगी भारतीय सेना: UP की फर्म ने किए तैयार, गलवान संघर्ष के बाद बनाने को कहा था

गलवान घाटी में संघर्ष के दौरान चीनी सैनिकों ने तार वाली लाठी, टेसर वगैरह का इस्तेमाल किया था। इसके बाद भारतीय सेना ने उत्तर प्रदेश की एक कंपनी को गैर घातक हथियार बनाने को कहा था। नोएडा के स्टार्टअप फर्म एपेस्ट्रॉन प्राइवेट लिमिटेड ने यह जानकारी देते हुए ऐसे हथियार तैयार कर लेने की बात कही है। पारंपरिक भारतीय अस्त्रों से प्रेरित इन हथियारों का इस्तेमाल न केवल दुश्मन देश की सेना के खिलाफ संघर्ष में किया जा सकता है, बल्कि हिंसा, उपद्रव जैसी स्थिति पर काबू पाने में भी ये कारगर साबित हो सकते हैं।

एपेस्ट्रॉन के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी मोहित कुमार ने ANI को बताया, “जब चीनी ने हमारे सैनिकों के खिलाफ गलवान संघर्ष में तार की छड़ें और टेसर का इस्तेमाल किया था तब हमें भारतीय सुरक्षा बलों के लिए गैर-घातक उपकरण विकसित करने के लिए कहा गया था।” कुमार ने कहा, “हमने भारतीय सुरक्षा बलों के लिए अपने पारंपरिक हथियारों से प्रेरित ऐसे ही टेसर और गैर-घातक उपकरण विकसित किए हैं।”

वज्र नाम से मेटल रोड टेजर

विभिन्न हथियारों का प्रदर्शन करते हुए कुमार ने कहा कि वज्र नाम से स्पाइक्स के साथ एक मेटल रोड टेसर विकसित किया गया है। इसका इस्तेमाल दुश्मन सैनिकों पर आक्रामक रूप से हमला करने के लिए हाथ से मुकाबला करने के साथ-साथ उनके बुलेट प्रूफ वाहनों को पंचर करने के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वज्र में स्पाइक्स भी होते हैं जो करंट को डिस्चार्ज करते हैं और दुश्मन के सैनिक को आमने-सामने की लड़ाई के दौरान अप्रभावी बना सकते हैं।

त्रिशूल का प्रदर्शन

कुमार ने त्रिशूल का भी प्रदर्शन किया। इसका उपयोग वाहनों को रोकने के साथ-साथ रिस्ट्रिक्टेड एरिया में घुसपैठ को रोकने के लिए किया जा सकता है। 

सैपर पंच 

सुरक्षा बलों को ‘सैपर पंच’ नामक एक और टेसिंग उपकरण प्रदान किया गया है, जिसे सर्दियों के सुरक्षा दस्ताने की तरह पहना जा सकता है। इसका इस्तेमाल हमलावर दुश्मन सैनिकों को झटका देने के लिए किया जा सकता है। यह वाटरप्रूफ या शून्य से 30 डिग्री कम तापमान में भी काम कर सकता है। ये करीब 8 घंटे तक बिजली से चार्ज रह सकता है।

दंड

दंड यानी बिजली से चलने वाला डंडा। ये 8 घंटे तक बिजली से चार्ज रह सकता है। ये वाटरप्रूफ भी है। इस बिजली वाले डंडे की मार जिस पर पड़ेगी वो फिर मुड़कर नहीं आएगा।

भद्र

भद्र एक ख़ास तरह की ढाल है, जो जवान को पत्थर के हमले से बचाती है। इसमें बहने वाला करंट दुश्मन को ज़ोर का झटका धीरे से देता है।

कुमार ने कहा कि इनमें से कोई भी हथियार मौत या किसी भी गंभीर चोट का कारण नहीं बन सकता है, लेकिन दुश्मन सैनिकों को शारीरिक संघर्ष के दौरान अस्थायी रूप से अप्रभावी बना सकता है। उन्होंने कहा कि ये हथियार किसी भी आम नागरिक को नहीं बेचे जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों ने लोहे की रॉड पर लिपटे कंटील तारों और टेजर्स के जरिए भारतीय सेना के जवानों पर हमला कर दिया था। जिसके बाद हुई झड़प में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे जबकि चीन के करीब 40 सैनिक मारे गए थे।

फैबइंडिया ने ‘जश्न-ए-रिवाज’ वाला कलेक्शन वापस लिया, हिंदू त्योहार के ‘इस्लामीकरण’ पर नेटिजन्स ने लगाई थी लताड़

पारंपरिक परिधानों का कारोबार करने वाले फैबइंडिया (Fabindia) ने दिवाली के मौके पर जारी किए गए कलेक्शन को ‘जश्न-ए-रिवाज’ का नाम दिया है। हिंदुओं के त्योहार को इस तरह से उर्दू में पेश फैबइंडिया ने अपने ट्वीट में भी किया था जिसे अब वह डिलीट कर चुके हैं। नेटीजन्स के भारी विरोध के बाद इस ट्वीट को हटाया गया। वहीं अब खबर आ रही है कि फैबइंडिया ने लोगों के भारी विरोध को देखते हुए यह विज्ञापन हटा लिया है।

फैबइंडिया ने लिखा था, “जैसा कि हम प्यार और प्रकाश के त्योहार का स्वागत कर रहे हैं। जश्न-ए-रिवाज फैबइंडिया का कलेक्शन है जो बेहद खूबसूरती से अपना सम्मान भारतीय परंपरा को देता है।”

इस ट्वीट में जश्न-ए-रिवाज शब्द को देख यूजर्स भड़क गए। भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने मामले को उठाते हुए लिखा दीपावली कोई जश्न-ए-रिवाज नहीं है। हिंदू त्योहार का इब्राहिमीकरण, ऐसी मॉडलों का प्रदर्शन जिन्होंने हिंदू परिधान न पहने हों, सबका बहिष्कार होना चाहिए और फैबइंडिया न्यूज जैसे ब्रांड को ऐसी हरकत के लिए आर्थिक हर्जाना चुकाना चाहिए।

पत्रकार शेफाली वैद्य लिखती हैं, “वाह फैबइंडिया न्यूज बहुत बढ़िया काम कर रहे हो दिवाली में से हिंदुत्व निकालने के लिए। इसे प्रेम और प्रकाश का त्योहार कहते हैं, टाइटल देते हो- जश्न ए रिवाज, मॉडल्स बिंदी नहीं पहनतीं लेकिन चाहते हो कि इतने मंहगे प्रोडक्ट खरीदें वो भी हिंदू परंपरा के सम्मान के नाम पर।”

नागेश अडप्पा कहते हैं, “फैब इंडिया मैं तुम्हारा ईमानदार ग्राहक था, लेकिन आज तुमने एक ग्राहक को खो दिया। ये गिनती यही नहीं रुकेगी, दिन पर दिन बढ़ेगी। आखिर जश्न-ए-रिवाज हिंदू त्योहार में आया कैसे। इसे या तो बदलो वरना मार्केट शेयर गिराने के लिए तैयार रहो।”

फैब इंडिया की इस हरकत पर तंज कसते हुए विवेक कहते हैं कि फैब इंडिया ने मिलाद उन नबी को जश्न-ए-रिवाज का नाम दिया है…उन्हें अच्छी बिक्री के लिए शुभकामनाएँ लेकिन मुझे लगता है कि रंग बहुत भड़कीले हैं….हरा रंग शायद ठीक रहेगा।

जेएनयू प्रोफेसर आनंद रंगनाथन लिखते हैं, “बड़ी अच्छी बात है। लेकिन क्या आप इस बात को बता सकते हैं कि कौन से त्योहार के बारे में बात हो रही है और कौन से धर्म से ये संबंध रखता है, यह देखते हुए कि सभी त्योहार प्रेम और प्रकाश का उत्सव हैं, न कि घृणा और अंधकार के? अगर आप बहुत भयभीत हैं तो आप मुझे त्योहार का नाम सीधे मैसेज कर सकते हैं। धन्यवाद। ” इसके बाद एक यूजर ने इस तरह की हरकत को हिंदू त्योहारों का इस्लामीकरण कहा। कई यूजर्स ने प्रण लिया कि वो दोबारा इस ब्रांड की चीजें नहीं खरीदेंगे।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर फैबइंडिया का विरोध बेबुनियाद नहीं है। उन्होंने दिवाली जैसे पावन पर्व के मौके पर एक कलेक्शन निकाला जिसका नाम उर्दू में है। ऐसे में यूजर्स का पूछना बस यही है कि इसकी जरूरत क्या थी। मालूम हो कि फैबइंडिया की शुरुआत 1960 में जॉन बिस्सेल ने की थी। वह फोर्ड फाउंडेशन ग्रांट पर कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम के सलाहकार के रूप में भारत आए थे।

‘बाइबल को हमारे पवित्र ग्रंथों से बड़ा बताना बेअदबी नहीं?’ VHP का सवाल, कहा- पंजाब सरकार बनाए धर्मांतरण विरोधी कानून

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने 18 अक्टूबर 2021 (सोमवार) को पंजाब में हो रहे सामूहिक धर्मांतरण को बंद करने का आह्वान किया। संगठन ने पंजाब सरकार से राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून लाने की माँग की है। विश्व हिन्दू परिषद ने कहा है कि ईसाई मिशनरियाँ लोगों को पैसे और अन्य सुविधाओं के बदले धर्मांतरण का लालच दे रही हैं। विहिप ने पंजाब को गुरुओं की पवित्र भूमि बताते हुए इसे धर्मान्तरण से मुक्ति दिलाने का आह्वान किया है।

जारी किए गए प्रेस नोट में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की अध्यक्षा बीबी जागीर कौर और अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा राज्य में चर्चों द्वारा कराए जा रहे अवैध धर्मांतरण के खिलाफ उठाई गई आवाज का स्वागत किया। इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में सामूहिक धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने के लिए VHP हरसंभव मदद करेगी।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से बात करते हुए डॉ. जैन ने कहा कि पंजाब का धर्मरक्षा के लिए संघर्ष और बलिदान का एक लंबा इतिहास है। उन्होंने बताया कि धर्मांतरण करने वाली मिशनरियाँ इन बलिदानों को ही नहीं, बल्कि गुरुओं की शिक्षाओं को भी अपमानित करने का दुस्साहस कर रही हैं। डॉ. जैन ने यह भी कहा कि पंजाब में सक्रिय ईसाई मिशनरियाँ वहाँ के लोगों का धर्म परिवर्तन करने के लिए बल, धोखाधड़ी और लालच का इस्तेमाल कर रही हैं।

प्रेस नोट में कहा गया है कि, “यदि सच में चंगाई सभा (Abracadabra Healing Congregations) लोगों को चंगा (निरोगी) करती तो उनके पादरी बीमार होने पर अस्पताल में क्यों भर्ती होते हैं? कई ईसाई धर्मगुरुओं/पादरियों ने COVID-19 महामारी से ग्रसित हो कर अपनी जान गवाँ दी। मदर टेरेसा का कई माह तक इलाज करवाने के बाद भी वो उन्हें बचा नहीं पाए।” प्रेस नोट में सवाल किया गया है कि जब चंगाई सभाएँ अपनों को ही नहीं ठीक कर पाईं, तो ये पंजाब के भोले-भाले लोगों को मूर्ख क्यों बना रही हैं? साथ ही मिशनरियों को चुनौती दी गई है कि वे पंजाब के अस्पतालों में भर्ती गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को स्वस्थ करके अपनी शक्ति को साबित करें।

ताजा खुलासों का जिक्र करते हुए कहा है, “आज चर्च पूरी दुनिया में बदनाम हो चुके हैं। कुछ समय पहले एक फ्रांसीसी संस्था ने रिसर्च के बाद भयावह रिपोर्ट जारी की थी जिसमें बताया गया था कि पादरियों ने 3,30,000 से अधिक बच्चों का यौन शोषण किया है। यहाँ तक ​​कि वेटिकन सिटी की नन भी यौन शोषण का शिकार हो चुकी हैं। भारत में कई ननों ने इसी के चलते आत्महत्या तक कर ली है। जालंधर के बिशप फ्रेंको पर नन के यौन उत्पीड़न का आरोप है जिसका मुकदमा केरल की एक अदालत में चल रहा है। इसी के साथ दुनिया भर के चर्च अपने पादरियों के पापों की क्षमा माँग रहे हैं।”

विहिप ने पंजाब सरकार से धर्मान्तरण विरोधी क़ानून लागू करने की भी माँग की है। मिशनरियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि वे धर्मांतरण की हरकतों को तुरंत बंद करें। साथ ही पूछा है कि बाइबल को हमारे पवित्र ग्रंथों से बड़ा बताकर क्या मिशनरियाँ सिखों और हिंदुओं के धर्मग्रंथों की बेअदबी नहीं कर रहे?

SGPC ने धर्मान्तरण के खिलाफ शुरू किया है अभियान

विहिप का यह यह बयान एसजीपीसी द्वारा पंजाब में धर्मांतरण की व्यापक घटनाओं को रोकने के लिए शुरू किए गए जनजागरण अभियान के संदर्भ में आया है। 11 अक्टूबर 2021 (सोमवार) को यह बताया गया था कि SGPC ने ‘घर घर अंदर धर्मशाला’ नाम से अभियान चला कर ईसाई मिशनरियों की तर्ज पर घर-घर पहुँच कर सिख धर्म की शिक्षाओं का प्रचार करना शुरू कर दिया है। जिस तरह ईसाई मत प्रचारक कथित ‘ईश्वर के वचन’ का प्रचार करने के लिए गाँव-गाँव जाते हैं, उसी तरह 150 टीमें सिख धर्म के साहित्य बाँटने और जनता के बीच जागरूकता फैलाने के लिए पंजाब के तमाम गाँवों का दौरा करेंगी। प्रत्येक टीम में 7 सदस्य होंगे।

‘सरकारी एजेंट हो या मंत्री, ग्रन्थ की बेअदबी की सज़ा यही मिलेगी’: दलित लखबीर के परिवार को सत्कार कमिटी की दो टूक

हाल ही में ‘किसान आंदोलन’ में सिंघु बॉर्डर पर दलित लखबीर सिंह की निहंगों ने बेरहमी से हत्या कर के गला रेते हुए शव को लटका दिया था। उनके दाहिने हाथ को भी बगल में टाँग दिया गया था। निहंगों ने मृतक को ‘दुष्ट’ बताते हुए कहा कि गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी करने वालों को यही सज़ा मिलेगी। अब ‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार कमिटी’ ने लखबीर सिंह के परिजनों से मुलाकात की है। उनकी 35 वर्षीय पत्नी का कहना है कि ‘बाबाजी’ (गुरु गोविंद सिंह) को इतना मानने वाला लखबीर कभी इस तरह का काम नहीं कर सकता।

पंजाब के तरनतारन जिले के चीमा कलाँ गाँव में रहने वाले लखबीर सिंह के परिवर ने ‘द प्रिंट’ की तनुश्री पांडेय से बात करते हुए कहा कि वो एक पक्का सिख था, जो दिन में दो बार गुरुद्वारा में प्रार्थना करता था। पत्नी बार-बार उन तस्वीरों और वीडियो को याद कर रोने लगती हैं, जो लखबीर की मौत को एकर वायरल हुए। परिवार को विश्वास नहीं हो रहा कि वो दिल्ली गया क्यों और इस मामले में जाँच की माँग की है।

‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार कमिटी’ का कहना है कि ‘किसान आंदोलन’ को ख़त्म करने के लिए और सिख पंथ को बदनाम करने के लिए सरकार ने लखबीर को ‘बलि का बकरा’ बनाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जब कुछ भी कर के ‘किसान आंदोलन’ को बंद नहीं करा पाई, तो उसने ये तरीका अपनाया। उन्होंने कहा कि लखबीर का पूरा परिवार धार्मिक है, लेकिन उसे पैसे या ड्रग्स की लालच या धमकी में ऐसा करने को कहा गया हो सकता है।

‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार कमिटी’ के मुखिया तरलोचन सिंह ने कहा कि लखबीर सिंह के गाँव के कई लोग ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन करने दिल्ली की सीमाओं पर गए, लेकिन वो उनके साथ नहीं गया था। उन्होंने कहा कि अचानक वो वहाँ गया, तो इसकी जाँच होनी चाहिए। इस हत्याकांड को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि निहंग उसे मारना नहीं चाहते थे। उन्होंने कहा कि ये निहंग हमारे भाई हैं और उन्होंने अपना कर्तव्य निभाया, जिसका दुःख न उन्हें है और न हमें।

उन्होंने कहा कि वो कोई सरकारी एजेंट या कोई मंत्री ही क्यों न हो, हमारे ग्रन्थ को हाथ लगाने वालों का हम यही हाल करेंगे और हम ऐसा दोबारा करेंगे। उन्होंने कहा कि ये सरकार के लिए स्पष्ट सन्देश है कि हमने हमारे साथ हुए अन्याय पर एक शब्द नहीं बोला, लेकिन अब नहीं। उन्होंने कहा कि सिखों को खालिस्तानी और आतंकी कहा गया, लेकिन हम अपने धर्म के लिए किसी को मार भी सकते हैं।

‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार कमिटी’ ने कहा, “हम लखबीर सिंह को जाने देते, लेकिन फिर उसे सज़ा नहीं मिलती। हम नहीं छिपा रहे कि हमने उसे नहीं मारा। हमें इसका कोई दुःख नहीं। हम सरकार पर विश्वास खो चुके हैं, इसीलिए हमें कानून अपने हाथ में लेना पड़ा। हमने न्याय किया। हम इसके लिए माफ़ी नहीं माँगते। किसी सरकारी एजेंसी पर हमें भरोसा नहीं।” कमिटी ने परिवार के सामने माफ़ी माँगने से मना कर दिया।

‘तथ्यों से नहीं, व्यक्तिगत हमले हो रहे’: कोरोना पर ‘योगी मॉडल’ को सफल बताने से चिढ़े ‘बुद्धिजीवियों’ को IIT प्रोफेसर ने धोया

IIT कानपुर के प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल (Prof Manindra Aggarwal) के नेतृत्व में प्रोफेसरों की एक टीम ने 11 अक्टूबर, 2021 को कोविड-19 के प्रबंधन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के सफल मॉडल पर एक स्टडी रिपोर्ट जारी किया था। इसमें कोरोना वायरस से निपटने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मॉडल को सफल पाया गया था। इसके बाद से ही इस रिसर्च और IIT प्रोफेसर मनिन्द्र अग्रवाल की आलोचना शुरू कर दी गई।

अब प्रोफेसर अग्रवाल ने इस मामले में प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दिलचस्प ये है कि अधिकतर आलोचनाएँ रिसर्च के तथ्यों पर केंद्रित न होकर व्यक्तिगत हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कह रहे हैं कि हमने लिवरमेक्टिन के प्रयोग को बढ़ावा दिया है, लेकिन ऐसा हमने नहीं किया है। उन्होंने कहा कि रिसर्च में सरकारी डेटा पर ही केवल निर्भर नहीं रहा गया है, जैसा कहा जा रहा है। कुछ ने उनसे ‘गंगा में बहती लाशों’ पर सवाल पूछ दिया।

इस बारे में प्रोफेसर मनिन्द्र अग्रवाल ने कहा कि ये पुरानी परंपरा है और इस तरह से दाह-संस्कार कुछ इलाकों में पहले से होता आ रहा है। उन्होंने कहा कि अपनी आलोचना में कुछ लोग दो सप्ताह की सबसे बुरी स्थिति की बात कर रहे हैं, जब अधिकतर लोगों की हॉस्पिटल बेड और ऑक्सीजन की कमी से मौत हुई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़ी जनसंख्या को देखते हुए, ये आश्चर्यचकित करने वाली बात नहीं है कि एक छोटी सी अवधि के लिए स्थिति हाथ से निकल गई थी।

IIT कानपुर में कम्प्यूटर साइंस विभाग में कार्यरत प्रोफेसर ने कहा कि चकित करने वाली बात ये है कि इतनी जल्दी स्थिति को नियंत्रण में लाया गया। उन्होंने कहा कि उनकी रिपोर्ट इसका वर्णन करती है कि ये कैसे संभव हुआ। प्रोफेसर मनिन्द्र अग्रवाल ने कहा, “मैं समझता हूँ कि कई लोग अपनी विचारधारा के आधार पर समर्थन/विरोध करते हैं, लेकिन ये रिपोर्ट ऐसे लोगों के लिए नहीं है। इसीलिए, नज़रअंदाज़ करें।”

रिसर्च की आलोचना पर प्रोफेसर मनिन्द्र अग्रवाल ने दी प्रतिक्रया

बता दें कि रिसर्च में बताया गया था कि कैसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली यूपी सरकार ने आर्थिक गतिविधियों को सुनिश्चित किया और टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट एंड टैकल (TTTT) के रणनीति के साथ संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया। देश में सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के बावजूद, यूपी मार्च 2020 से जुलाई 2021 तक महामारी के दौरान भी बेरोजगारी दर को 11% से 4% तक कम करने में कामयाब रहा।

बंगाल में घर के बाहर खड़े बीजेपी कार्यकर्ता मिथुन घोष को हमलावरों ने मारी गोली, पार्टी ने कहा- ‘TMC के कासिम अली ने की हत्या’

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा कोई नई बात नहीं है। राज्य लंबे समय से इस तरह की हिंसा का शिकार रहा है। इसी क्रम में 17 अक्टूबर रविवार को पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिले के इटहार के रहने वाले युवा भाजपा नेता मिथुन घोष की उनके गाँव राजग्राम में उनके घर के बाहर ही उनकी हत्या कर दी गई। घोष जब अपने घर के बाहर खड़े थे तो मोटरसाइकिल सवार दो हत्यारों ने उन्हें गोली मार दी थी। बीजेपी ने हमले के पीछे टीएमसी के गुंडों का हाथ होने का आरोप लगाया है।

इस हत्या की निंदा करते हुए पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पार्टी मिथुन घोष की हत्या को नहीं भूलेगी। उन्होंने ट्वीट किया, “उत्तर दिनाजपुर जिला भाजयुमो के वीपी। मिथुन घोष की इटहार में हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह टीएमसी की करतूत है। खून के प्यासे असामाजिक शिकारी कुत्तों ने अपने मालिक के आदेश को अंजाम दिया है। वक्त आने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार रात करीब 11 बजे जब यह घटना हुई तो उस दौरान घोष राजग्राम गाँव में अपने घर के सामने खड़े थे। दो बाइक सवार हमलावरों ने उनकी बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी। घोष को गंभीर हालत में रायगंज मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने खुलासा किया कि उसके पेट में कई गोलियाँ मारी गई थीं।

मृतक के भाई अजीत घोष ने कथित तौर पर सुकुमार घोष और संतोष महतो को अपने भाई का हत्यारा बताया है। उसने पुलिस को बताया था कि मिथुन घोष ने उसे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में इनके नाम बताए थे।

मिथुन घोष को गोली मारे जाने की जानकारी मिलते ही पहुँचे भाजपा राज्य समिति के सदस्य प्रदीप सरकार ने कहा कि टीएमसी समर्थित गुंडे कासिम अली ने भाजपा युवा सदस्य को गोली मार दी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि घोष पर पहले भी एक बार हमला किया गया था।

हालाँकि, पश्चिम बंगाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू किए जाने की बात कही है। लेकिन मामले में अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

उल्लेखनीय है कि किस तरह से टीएमसी के गुंडों ने राज्य में राजनीतिक हिंसाएँ की थीं। ये हिंसाएँ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में परिणाम घोषित होने के बाद आश्चर्यजनक रूप से कई गुना बढ़ गई थीं। भाजपा कार्यकर्ताओं की बेरहमी से हत्या के अलावा टीएमसी के गुंडों ने कथित तौर पर विभिन्न स्थानों पर भाजपा के पार्टी कार्यालयों को भी जलाकर राख कर दिया। इन हमलों के कारण राज्य के कई भाजपा का समर्थन करने वाले परिवारों को राज्य छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। भाजपा ने आरोप लगाया है कि 2 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से मारे गए पार्टी कार्यकर्ताओं की संख्या दो दर्जन से अधिक है।

बाइक पर प्रेमिका संग ‘मस्ती’ कर रहा था शमीम, बीवी ने जूती से पीटा: Video वायरल, कोर्ट में चल रहा तीन तलाक का केस

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बीवी ने अपने शौहर और उसकी कथित प्रेमिका को जमकर पीट दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि उरबा शाही (26) नाम की महिला जिम सेंटर में अपने शौहर तलहा शमीम और उसकी कथित प्रेमिका को जूती से पीट रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कथित तौर पर शाही अपनी बहन के साथ सूजा फिटनेस सेंटर गई थी, जहाँ उसने देखा कि उसका शौहर एक अन्य लड़की के साथ बाइक पर बैठा है। उसने आरोप लगाया कि वह उसके पति की प्रेमिका है।

इसके बाद उसने हंगामा शुरू कर दिया। उसने शमीम पर लड़की के साथ अफेयर का आरोप लगाया। गुस्साए शमीम ने इससे इनकार करते हुए खुलेआम अपनी बीवी को गालियाँ देनी शुरू कर दी। दोनों के बीच की तू-तू, मैं-मैं तब शारीरिक हमले में बदल गई जब शाही ने पति के साथ दिखी महिला को जूती से मारना शुरू कर दिया।

इसके बाद लड़की को बचाने की कोशिश करते हुए उसके शौहर ने बीच-बचाव किया और कहा कि वे दोनों केवल दोस्त हैं। इसके बाद तो शाही ने शौहर को भी पीट दिया। वायरल वीडियो में वह अपने शौहर के बालों को खींचकर उसे जूती से मारते हुए देखी जा सकती है। शाही को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है, “अपने बच्चों को अकेला छोड़कर, तुम्हारा अफेयर चल रहा है।” वह यह भी कहती हैं कि उनका तीन तलाक का मामला अभी भी अदालत में चल रहा है।

जब इनकी लड़ाई चल रही थी तभी जिम के कुछ लोगों ने इस घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। घटना के बाद दोनों पक्षों ने पुलिस में मामला दर्ज कराया। रिपोर्ट के मुताबिक, शाही ने 15 अक्टूबर को शमीम के खिलाफ शाहजहाँनाबाद थाने में दहेज प्रताड़ना का केस भी दर्ज कराया था।

‘दिन में 2 बार गुरुद्वारा जाते थे लखबीर’: परिवार से सिख संस्था ने कहा – वो सरकारी एजेंट था, हत्या का अफ़सोस नहीं, माफी भी नहीं माँगेंगे

हाल ही में ‘किसान आंदोलन’ में सिंघु बॉर्डर पर दलित लखबीर सिंह की निहंगों ने बेरहमी से हत्या कर के गला रेते हुए शव को लटका दिया था। उनके दाहिने हाथ को भी बगल में टाँग दिया गया था। निहंगों ने मृतक को ‘दुष्ट’ बताते हुए कहा कि गुरु ग्रन्थ साहिब की बेअदबी करने वालों को यही सज़ा मिलेगी। अब ‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार कमिटी’ ने लखबीर सिंह के परिजनों से मुलाकात की है। उनकी 35 वर्षीय पत्नी का कहना है कि ‘बाबाजी’ (गुरु गोविंद सिंह) को इतना मानने वाला लखबीर कभी इस तरह का काम नहीं कर सकता।

पंजाब के तरनतारन जिले के चीमा कलाँ गाँव में रहने वाले लखबीर सिंह के परिवर ने ‘द प्रिंट’ की तनुश्री पांडेय से बात करते हुए कहा कि वो एक पक्का सिख था, जो दिन में दो बार गुरुद्वारा में प्रार्थना करता था। पत्नी बार-बार उन तस्वीरों और वीडियो को याद कर रोने लगती हैं, जो लखबीर की मौत को लेकर वायरल हुए। परिवार को विश्वास नहीं हो रहा कि वो दिल्ली गया क्यों और इस मामले में जाँच की माँग की है।

उनके चाचा हरनाम सिंह का कहना है कि निहंगों ने लखबीर की हत्या करते हुए वीडियो बनाया, लेकिन जिस आरोप को लेकर उसे मारा गया उसका कोई वीडियो साक्ष्य नहीं है। लखबीर के माता-पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी, जिसके बाद चाचा ने ही उन्हें गोद लेकर उनका पालन-पोषा किया था। उन्होंने कहा कि लखबीर ग्रन्थ लेकर भागा तो CCTV फुटेज या लोगों के फोन कैमरों में कुछ क्यों नहीं आया, क्योंकि सिंघु सीमा पर तो हमेशा भीड़ रहती है।

‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार कमिटी’ के लगभग आधा दर्जन सदस्यों ने लखबीर सिंह के परिवार से मुलाकात की, लेकिन इस मॉब लिंचिंग पर माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया। कमिटी ने कहा कि लखबीर सिंह एक बड़ी सरकारी साजिश के तहत केंद्र का एजेंट था और ‘किसान आंदोलन’ को बदनाम करने के लिए उसे भेजा गया था। कमिटी ने कहा कि नेताओं ने गैर-जरूरी रूप से इसे दलितों का मुद्दा बना दिया है, जबकि मरने और मारने वाला – दोनों ‘मज़हबी सिख (दलित)’ थे।

कमिटी के अध्यक्ष तरलोचन सिंह ने कहा कि सिख कभी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करते और हम अपनी आस्था से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रन्थ साहिब का अनुसरण और इसकी रक्षा करना हमारे जिम्मेदारी है, जिसके लिए हम जा ले भी सकते हैं और दे भी सकते हैं। लखबीर सिंह की तीन बेटियाँ हैं। एक बेटा जन्म के दो सालों बाद ही चल बसा था। पत्नी का कहना है कि लखबीर उन्हें प्यार करते थे लेकिन शादी के कुछ वर्षों बाद उन्हें शराब की लत लग गई थी।

लेकिन, बच्चों के जन्म के बाद उन्होंने शराब को हाथ न लगाने और घर की जिम्मेदारियाँ उठाने का वादा किया था। बतौर मजदूर काम कर के वो रोज का 50-100 रुपए कमाते थे, लेकिन घर पर एक रुपया न देने के कारण पत्नी उनसे अलग रहने लगी थीं। पत्नी का कहना है कि नशे में कभी उन्होंने हाथ नहीं उठाया। परिवार का कहना है कि 100 रुपयों के साथ लखबीर दिल्ली कैसे गए, जबकि इससे पहले वो कभी वहाँ नहीं गए थे।

‘श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सत्कार कमिटी’ का कहना है कि ‘किसान आंदोलन’ को ख़त्म करने के लिए और सिख पंथ को बदनाम करने के लिए सरकार ने लखबीर को ‘बलि का बकरा’ बनाया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जब कुछ भी कर के ‘किसान आंदोलन’ को बंद नहीं करा पाई, तो उसने ये तरीका अपनाया। उन्होंने कहा कि लखबीर का पूरा परिवार धार्मिक है, लेकिन उसे पैसे या ड्रग्स की लालच या धमकी में ऐसा करने को कहा गया हो सकता है।

लखबीर सिंह हत्या मामले में 21 दलित संगठन पहुँचे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, लगाई न्याय की गुहार

दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर स्थित सिंघू बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन स्थल के नजदीक दलित व्यक्ति लखबीर सिंह की पीट-पीट कर हत्या किए जाने के मामले में देश भर के करीब 21 दलित संगठनों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (National Commission for Scheduled Castes) का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आयोग से हत्या की व्यापक जाँच करने का आग्रह किया है। हालाँकि, सिख धार्मिक निकायों ने इस मुद्दे को दलित बनाम सिख होने से इनकार किया है, क्योंकि निहंग समूह में दलितों की एक बड़ी संख्या है।

पत्रों में मामले की समयबद्ध जाँच और बर्बरता में शामिल सभी लोगों के लिए सजा की माँग की गई है। आयोग के अध्यक्ष विजय सांपला ने कहा कि सिखों के बीच बेअदबी एक गंभीर अपराध है, लेकिन किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। सांपला ने कहा, “हमने पहले ही डीजीपी हरियाणा और मुख्य सचिव को इस पर सख्त कार्रवाई करने के लिए नोटिस भेजा है और फैक्स के माध्यम से वापसी की रिपोर्ट माँगी है।”

उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर आरोपितों ने उसे फाँसी दी, वह किसानों के मंच के पास है। वहाँ जो भी घटना होती है उसके लिए वे (किसान) ही जिम्मेदार होते हैं। उनकी भूमिका अपराधियों की तरह ही है। सांपला ने कहा कि किसान नेताओं ने पूरी घटना से पल्ला झाड़ दिया है। अगर वे (आरोपित) 10 महीने से उनके साथ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके साथ रह रहे हैं, तो वे उसी विरोध का हिस्सा हैं।

यूपी, दिल्ली और पंजाब के कई संगठनों ने आयोग से संपर्क किया है। अनुसूचित जाति संगठनों में भारतीय बौद्ध संघ, राष्ट्रीय भंटू सांसी समाज विकास संघ, श्री गुरु रविदास विश्व महापीठ (दिल्ली प्रांत), जय बाबा राम पीर जन्मोत्सव समिति, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति गठबंधन, दिल्ली प्रांत रायगर पंचायत, वाल्मीकि महापंचायत, श्री संत कबीर जन्मोत्सव समिति, अखिल भारतीय बैरवा विकास संघ, एससी / एसटी / ओबीसी और अल्पसंख्यक कर्मचारी कल्याण संघ और जंगपुरा भोगल एससी / एसटी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और अन्य शामिल थे।

अकाल तख्त के प्रमुख ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने लखबीर सिंह की हत्या को कानून के शासन की विफलता करार दिया है और जाँच की माँग की है जो घटना के सभी पहलुओं को सामने लाए। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला नहीं था जिसमें न्याय प्रणाली आरोपितों को उचित सजा दे सके जो सिखों की आहत भावनाओं को कुछ दिलासा दे। एसजीपीसी की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं होती अगर केंद्र किसानों के मुद्दे को सुलझाने के लिए गंभीर होता।

बता दें कि किसान आंदोलन के मंच के पास से दलित शख्स लखबीर सिंह का शव बरामद किया गया था। मृतक पंजाब के तरन-तारन जिले का रहने वाला था। उसकी तीन बेटियाँ भी हैं, जोकि अपनी माँ के साथ रहती हैं। इस मामले के तीन आरोपित निहंगों नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह को रविवार (17 अक्टूबर 2021) को सोनीपत कोर्ट ने 6 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया। रिपोर्ट के अनुसार आरोपितों ने जज के सामने लखबीर की हत्या की बात कबूली। हालाँकि उनके वकील ने इससे इनकार किया है। इस मामले का चौथा आरोपित सरबजीत सिंह पहले ही 7 दिन की रिमांड में भेजा जा चुका है।

‘बिहारियों पर छोड़ दीजिए, सुधार नहीं दिया तो कहिएगा’: कश्मीर में जिस मजदूर को आतंकियों ने मारा, उसे 4 महीने से ठेकेदार ने नहीं दिया था पैसा

जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरियों को मारने के नाम पर यूपी-बिहार के प्रवासियों को लगातार निशाना बनाने का काम हो रहा है। ऐसे में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से अपील की है कि अगर हालात में बदलाव न हो पा रहा हो तो सब ठीक करने की जिम्मेदारी बिहारियों को दे दी जाए और फिर सुधार नहीं हुआ तो बोलें।

जीतन राम मांझी कहते हैं, “कश्मीर में लगातार हमारे निहत्थे बिहारी भाइयों की हत्या की जा रही है जिससे मन व्यथित है। अगर हालात में बदलाव नहीं हो पा रहे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह से आग्रह है कि वो कश्मीर को सुधारने की जिम्मेदारी हम बिहारियों पर छोड़ दीजिए 15 दिन में सुधार नहीं दिया तो कहिएगा।”

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में बीते 2 दिन में 4 गैर-कश्मीरियों पर हमला हुआ है। इनमें 3 की मौत हो गई और 1 घायल है। 17 अक्टूबर को राजा ऋषि देव और जोगिंदर ऋषिदेव को गोली मारी गई थी। अब इन्हीं की दादी दुलारी देवी ने टाइम्स नाऊ से बात की है। 

राजा ऋषिदेव की दादी ने बताया कि राजा का चचेरा भाई अरविंद भी कश्मीर में उसी जगह काम करता था। जो कुछ दिन पहले अपने घर लौट आया था जबकि राजा वहीं रुका था क्योंकि उसे अपने ठेकेदार से कुछ पैसे क्लियर करने थे। राजा और अरविंद दोनों एक ही ठेकेदार के पास काम करते थे।

वहीं जोगिंदर की पत्नी कहती हैं कि जोगिंदर जिस कॉन्ट्रैक्टर के पास रहते थे उसने उन्हें 4 महीने से पैसे नहीं दिए हुए थे। इसीलिए उनके पति जोगिंदर कश्मीर की जगह दिल्ली जाकर मजदूरी करने की योजना बना रहे थे। लेकिन 17 अक्टूबर को यूएलएफ के आतंकियों ने उनकी गोली मार हत्या कर दी।

यहाँ बता दें कि बिहार से आए दोनों मजदूरों की हत्या 17 अक्टूबर को हुई थी। इसकी जिम्मेदारी यूएलएफ ने ली। उनका कहना था कि बाकी सभी गैर-कश्मीरी अब कश्मीर की जमीन को छोड़ें वरना उनकी जान ले ली जाएगी। यूएलएफ ने धमकी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं किया तो आगे आने वाले समय में वह राजनेताओं और पुलिस के परिजनों को निशाना बनाएँगे।