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इस्लाम नगर में स्कूटी पर हिंदू के साथ थी लड़की, जबरन बुर्का उतरवा लिया: Video वायरल होने के बाद शोएब और अब्दुल गिरफ्तार

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। इसमें स्कूटी से इस्लाम नगर आई एक लड़की को कुछ लोग रोक कर उसे बुर्का उतारने को मजबूर कर रहे हैं। वीडियो में लड़की के साथ एक युवक भी दिख रहा है और स्कूटी पर फूल-माला लगी है।

वीडियो में मुस्लिम भीड़ स्कूटी रुकवाती है क्योंकि लड़की एक हिंदू लड़के के साथ थी। इसमें भीड़ को उस पर इस्लाम को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है। लड़की और उसके साथ का लड़का भीड़ से लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन भीड़ लड़की पर बुर्का उतारने का दबाव डाल रही है।

इस मामले में पुलिस ने एक्शन लेते हुए 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। भोपाल पुलिस ने यह कार्रवाई वीडियो का स्वतः संज्ञान लेकर की है। भोपाल के DIG इरशाद वली ने गिरफ्तारी की पुष्टि 18 अक्टूबर 2021 (सोमवार) को की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मामले में भोपाल के डीआईजी इरशाद वली ने के मुताबिक किसी पर भी बेवजह दबाव नहीं बनाया जा सकता है। किसी से कोई आवश्यक बात नहीं कर सकता, इसलिए हम आरोपितों को गिरफ्तार कर रहे हैं। उन्होंने पीड़िता की जानकारी सार्वजानिक करने से इनकार किया है।

घंटना शनिवार की है। भीड़ ने वीडियो बनाते हुए लड़की की गुहार की अनदेखी कर उसे बुर्का उतारने को मजबूर किया। रिपोर्ट के अनुसार वीडियो के आधार पर शोएब और अब्दुल माजिद नाम के युवकों को गिरफ्तार किया गया है।

वीडियो वायरल होने के बाद लोग इस मामले में कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

अब कॉन्ग्रेस के ‘चुनावी हिंदू’ CM योगी को सिखाएँगे पूजा-पाठ, महंत का उड़ाया मजाक तो लोगों ने गिरोह को समझाया ‘हिन्दू धर्म’

उत्तर प्रदेश में साल 2022 में होने वाला विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आता जा रहा है, विपक्षी दल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लगातार घेरने की कोशिशों में लगा हुआ है। इसी कड़ी में अनावश्यक रूप से सीएम योगी को लेकर शोर मचाया जा रहा है। इसी क्रम में अब विपक्षी दल सीएम योगी को यह सिखाने की कोशिश कर रहा है कि वास्तव में पूजा कैसे की जाती है।

सीएम योगी आदित्यनाथ गोरखपीठ के महंत और नाथ संप्रदाय के वर्तमान नेता हैं। वह हर साल दशहरे के दौरान गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में नवरात्रि का समय बिताते हैं और वहाँ धार्मिक गतिविधियों की अध्यक्षता करते हैं।

इसी क्रम में देशभर में अपमान और शर्मिंदगी झेल रही कॉन्ग्रेस के लिए काफी साबित नहीं हुई तो उसके कुछ राजनीतिक वफादार अब एक योगी और गोरखपीठ के महंत को हिंदू धार्मिक गतिविधियों को करने का तरीका सिखाने का फैसला किया है।

कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया विभाग के अध्यक्ष रोहन गुप्ता ने एक क्रॉप वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि यूपी के सीएम ‘कैमरे के लिए’ आरती कर रहे थे।

गुप्ता ने ट्वीट किया, “भाई, भगवान आपके पीछे है!” वीडियो में योगी आदित्यनाथ को मंदिर के गर्भगृह की विपरीत दिशा में आरती करते देखा जा सकता है।

गुप्ता के इस ट्वीट के बाद नेटिजन्स ‘चुनावी हिंदू’ पार्टी के आईटी सेल प्रमुख की क्लास लगा दी। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने गुप्ता को सभी दस दिशाओं में आरती करने के हिंदू अनुष्ठान के बारे में बताया।

अंकुर सिंह नाम के एक यूजर ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ को सभी दिशाओं में आरती करते देखा जा सकता है।

इस बीच एक अन्य यूजर ने जगन्नाथ पुरी मंदिर के आधिकारिक हैंडल द्वारा पोस्ट किया गया एक वीडियो साझा किया, जिसमें पुजारी को मंदिर के मुख्य द्वार की ओर गर्भगृह के सामने की ओर सुबह की आरती करते देखा जा सकता है।

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने मौसमी हिंदुओं को मंदिरों में जाने की सलाह देते हुए कहा कि सभी दिशाओं में आरती करना एक आम दृश्य और पुरानी परंपरा है।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को यह सब एक टूलकिट की तरह लग रहा था। पुडुचेरी कॉन्ग्रेस के पार्टी सचिव ने ट्वीट किया, “मोमबत्ती से आरती योगी आदित्यनाथ की क्या अद्भुत पूजा है। आरती भगवान के लिए नहीं बल्कि कैमरे के लिए होती है। लोग कह रहे हैं- कैमरा लाइव।”

भारतीय युवा कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बी.वी. ने भी हिंदू रीति-रिवाजों से अनजान होते हुए कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं की हाँ में हाँ मिलाया।

श्रीनिवास ने हिंदी में ट्वीट किया, “क्या वह कैमरे की आरती कर रहे हैं।”

यही है सीएम योगी की स्कूली शिक्षा

कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक गौरव पांधी ने सीएम योगी आदित्यनाथ का मजाक उड़ाते हुए आरोप लगाया कि महंत ने आरती करने के लिए ‘मोमबत्तियों’ का इस्तेमाल किया।

पांधी ने ट्वीट किया, “मंदिर में चर्च के पादरी की तरह मोमबत्तियों का उपयोग करके और कैमरा-पर्सन की आरती क्यों कर रहे हैं? देवी-देवताओं की नहीं करते? धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले नकली हिंदुओं की यही हकीकत है। हमने कब से मंदिरों में पूजा और आरती के लिए मोमबत्तियों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।”

बस फिर क्या था इस बार नेटिजन्स ने पांधी को मंदिर जाने और वीडियो को करीब से देखने की सलाह दी। साथ ही यह भी बताया कि सूती के धागों की मोटी बत्ती को घी में भिगोया गया है, जिससे आरती की जा रही है, न कि मोमबत्ती से।

एक यूजर ने लिखा, “ये वही लोग हैं जो आज तक मंदिर नहीं गए और न ही देखा कि आरती कैसे होती है? पहली बात यह कि ये घी की बाती है कोई मोमबत्ती नहीं और दूसरी बता ये है कि श्री गोरक्षनाथ जी की मूर्ति के सामने किसी भगवान की मूर्ति ही होगी जिसे महाराज जी आरती दिखा रहे हैं, मूर्खों।”

कौन हैं ये चुनावी हिंदू

उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस द्वारा अपनाए गए धार्मिक हथकंडे पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उसे ‘चुनावी हिंदू‘ कहना शुरू कर दिया है। गाँधी परिवार को हिंदू मतदाताओं को लुभाने के लिए केवल चुनाव के समय तिलक, जनेऊ पहनकर और नारियल तोड़ने के लिए मंदिर की जाने को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल, यह सब इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि उत्तर प्रदेश और चार अन्य राज्यों के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, AICC की राष्ट्रीय सचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने एक बार फिर मंदिरों में जाकर और खुद को माला पहनाकर खुद को एक धर्मनिष्ठ हिंदू घोषित करने की कोशिश की है।

वाड्रा पहले ही वाराणसी में काशी विश्वनाथ और दुर्गाकुंड जैसे मंदिरों का दौरा कर चुकी हैं और उन्होंने नवरात्रि के त्योहार के दौरान उपवास रखने का भी दावा किया है। दिलचस्प बात यह है कि गाँधी भाई-बहनों में मंदिर की यात्रा के लिए ये प्यार नया है। हाल के वर्षों में भाजपा के हाथों बार-बार चुनाव हारने के बाद यह एक मनोरंजन जैसा हो गया है।

’10 की हत्या, 17 लापता, 23 से रेप, 160 पूजा पंडाल-मंदिरों पर हमला’: बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हिंसा की डिटेल्स

दुर्गा पूजा के दौरान बांग्लादेश में नवरात्री पंडालों पर हमले का दौर शुरू हुआ और हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को तबाह किया जाने लगा। पंडाल ध्वस्त कर डाले गए। फिर मंदिरों को निशाना बनाया गया। कई इलाकों में ये एकतरफा दंगा फ़ैल गया। मुस्लिम भीड़ ने फिर हत्याओं और बलात्कार का दौर शुरू कर दिया, जिसके पीड़ित हिन्दू रहे। अब बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज़्ज़मान ने कहा है कि दुर्गा पूजा पंडालों पर हमले पूर्व नियोजित थे।

उनका कहना है कि पहले से ही इन हमलों की साजिश रच ली गई थी, ताकि मुल्क की सांप्रदायिक शांति को भंग किया जा सके। पिछले एक सप्ताह से चल रही हिंसा के सम्बन्ध में वहाँ की पुलिस ने 4000 आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बांग्लादेश के गृह मंत्री ने कहा कि कॉमिला, रामु और नसीरनगर में सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश हुई है। उन्होंने दावा किया कि शनिवार (16 अक्टूबर, 2021) की रात के बाद से कोई हमला नहीं हुआ।

हालाँकि, हमलों का दौर अब भी बदस्तूर जारी है। भाजपा ने भी कहा है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ इस तरह व्यवस्थित तरीके से हिंसा व क्रूरता दिखाती है कि पश्चिम बंगाल में CAA और NRC लागू करना कितना आवश्यक है। बांग्लादेश के गृह मंत्री ने सबूतों के आधार पर कड़ी सज़ा देने का वादा किया है। बांग्लादेश में कई हिन्दुओं को बेघर होना पड़ा है। गाँव के गाँव जला डाले गए। इस्कॉन के मंदिर पर हमला हुआ।

कहा जा रहा है कि ताज़ा हिंसा में लगभग एक दर्जन लोग मारे गए हैं। चाँदपुर के हाजीगंज में माणिक साहा की हत्या कर दी गई। नोआखली के चौमोहनी में पुजारी जतन साहा, वहीं के इस्कॉन मंदिर में निमाई कृष्ण के अलावा एक अन्य पुजारी, राम ठाकुर आश्रम के 3 पुजारी, कॉमिला में 26 साल के प्रशांत दास और कॉक्स बाजार के रामु दुर्गा मंदिर में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। ‘वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन’ के बांग्लादेश चैप्टर के अनुसार, अब तक 17 हिन्दू गायब हैं।

बांग्लादेश में हिन्दू के खिलाफ ताज़ा हिंसा: कहाँ क्या-क्या हुआ (जगह के साथ)

WHF के बांग्लादेश चैप्टर ने ये भी जानकारी दी है कि कुल 23 हिन्दू महिलाओं/लड़कियों के साथ अब तक बलात्कार की घटना सामने आ चुकी है। यहाँ हम संस्था के हवाले से आपको जिलावार बताएँगे कि कहाँ-कहाँ कब इस्लामी भीड़ ने हमला किया और इसमें क्या क्षति हुई। वहाँ की सरकार कार्रवाई करे न करे, हिन्दुओं को याद रहना चाहिए कि उनके साथ कब-कब अत्याचार हुआ और ऐसा करने वाले कौन लोग थे।

कॉमिला:

  • यहाँ ‘ननौर दिघी पर’ दुर्गा पूजा पंडाल को क्षतिग्रस्त कर दिया गया, मंदिर में भी तोड़फोड़ मचाई गई
  • नृसिंह देव मंदिर पर हमला, चातीपट्टी क्षेत्र में दशभुजा काली मंदिर पर हमला
  • ऋषिपरा मंदिर को न सिर्फ ध्वस्त किया गया, बल्कि उसे आग के हवाले भी कर दिया गया
  • मनोहरपुर में राजेश्वरी काली मंदिर में जम कर तोड़फोड़ मचाई गई
  • कॉमिला जिले में इन सबके अलावा 14 अन्य मंदिरों व दुर्गा पूजा पंडालों पर हमले हुए

चटगाँव:

  • बंसखली में शांतिपूर्ण तरीके से दुर्गा पूजा मना रहे हिंदुओं पर हमला, ऐसे 15 पंडालों को ध्वस्त कर दिया गया
  • शहर में जेएन सेन पूजा पंडाल को ध्वस्त कर दिया गया
  • चाकबाजार में करुणामयी काली मंदिर पर हमला
  • पटिया के मेलाघार में तीन पूजा पंडालों को ध्वस्त कर दिया गया
  • सरकारहाट और हाथाजारी में 5 पूजा पंडालों पर हमला

नोआखली:

  • नोआखली के इस्कॉन मंदिर पर हमला, प्रतिमाएँ जला डाली गईं और भक्तों के साथ मारपीट
  • राम ठाकुर आश्रम पर हमला
  • त्रिशूल, मंगोला, नवदुर्गा, विजया और कोतबारी दुर्गा पूजा पंडालों में तोड़फोड़, 10 मंदिर जलाए गए
  • चौमोहनी में 9 मंदिरों पर हमला किया गया
  • हटिया के नलचिरा में 5 मंदिरों पर हमले
  • नलचिरा में 20 हिन्दू परिवारों के घरों को आग के हवाले किया गया
  • चयनिबाजार, बेगमगंज, चौमोहनी और सोनैमुरि में लगभग सभी हिन्दुओं के घरों में तोड़फोड़ कर के उन्हें जला डाला गया, कई हिन्दू बेघर

गाजीपुर:

  • काशिमपुर क्षेत्र में 4 पूजा पंडाल ध्वस्त किए गए
  • गाजीपुर शहर में इसके अलावा 3 अन्य पूजा पंडालों पर मुस्लिम भीड़ का हमला

इन सबके अलावा लक्ष्मीपुर जिले में पाट रामघाटी और चारसीता में 7 मंदिरों और पूजा पंडालों को निशाणा बनाया गया। करीमगंज के कुलडांगा और उलीपुर में 7 मंदिरों और पूजा पंडालों पर हमले हुए। कॉक्स बाजार में चकारिया और पेकुआ में 200 हिंदू परिवारों के साथ लूटपाट व मारपीट की गई। 7 मंदिरों व पूजा पंडालों पर भी हमले हुए। बंदरम में लामा हरि मंदिर सहित 4 मंदिरों पर हमले किए गए और सारे आभूषण लूट लिए गए।

जाकीगंज और सिल्हट में 6 पूजा पंडालों को निशाना बनाया गया। इसी तरह मुस्लिम भीड़ ने चाँदपुर के हाजीगंज में 7 मंदिरों व पूजा पंडालों को ध्वस्त कर दिया। हाजीगंज में 70 हिंदू परिवारों से लूटपाट हुई। चाँदपुर में रामकृष्ण मिशन पर हमला हुआ। 150 हिंदू परिवारों पर हमला कर मारपीट की गई और उनकी सारी कीमती चीजें लूट ली गईं। खुलना के रुपसा स्थित महाशमशान घाट के दरवाजे से 20 बम बरामद किए गए।

वहाँ भी 3 मंदिर मुस्लिम भीड़ के हमले का शिकार बने। जैसोर के आवेनगर और शरसा में 5 मंदिर हमले का शिकार बने। चपाई नवाबगंज के मनकसा, बिंदापारा और शिबगंज में 8 मंदिरों पर हमले किए गए। फेनी में कई हिंदुओं को बेघर कर दिया गया। उनके घर जला डाले गए। मौलवीबाजार में 5, भोला में 6, रंगपुर में 2, निलफमारी में 3, नाराली में 7 और पिरोजपुर में 5 मंदिरों पर हमला हुआ।

बोगरा में रक्षा काली मंदिर और माँ शीतला मंदिर को निशाना बनाया गया। नरसिंघड़ी में एक काली मंदिर और एक पूजा पंडाल पर हमला किया गया। नाराली के शुकताग्राम में 20 हिंदुओं के घरों पर भी हमला हुआ। भोला में हिंदुओं के मालिकाना हक वाले जीतने भी प्रतिष्ठान और संपत्ति थे, उन सब पर हमले हुए। WFH के सेक्रेटरी दीपन मित्रा ने पूछा है कि क्या बांग्लादेश सेक्युलर रहेगा या उसने पाकिस्तान की विचारधारा को अपना लिया है?

14 साल के 2 भाई, साथ पैदा हुए-25वीं मंजिल से गिर साथ दम तोड़ा: मॉं की आँख खुली तो… कलेजा कँपाने वाली कहानी

गाजियाबाद की सिद्धार्थ विहार की प्रतीक ग्रैंड कारनेसिया सोसायटी में रहने वाले सत्य नारायण और सूर्य नारायण ने एक साथ ही जन्म लिया और एक साथ ही दोनों दुनिया से विदा हो गए। दोनों अधिकतर एक साथ ही रहते थे। खाने-पीने से लेकर खेलने-कूदने तक का सारा समय साथ बिताते थे। शनिवार (16 अक्टूर 2021) रात करीब एक बजे 25वीं (225 फीट की ऊँचाई) मंजिल से गिरकर जुड़वाँ भाइयों की मौत हो गई। रात 1 बजे माँ की नींद खुली तो दोनों खून से लथपथ थे।

दोनों भाइयों में काफी प्रेम था। दोनों एक दूसरे का ख्याल रखते थे। सत्य नारायण केवल एक मिनट सूर्य नारायण से बड़ा था। सत्य सूर्य का ध्यान रखता था। बिना उसके खाना नहीं खाता था। दोनों के अंदर दोस्ती थी और कभी लड़ाई भी नहीं करते थे। मूल रूप से चेन्नै के रहने वाले परली नारायण अपने परिवार के साथ प्रतीक ग्रैंड सोसायटी में 25वें फ्लोर पर रहते हैं, उनके परिवार में पत्नी और बेटी के साथ दो जुड़वा बेटे सूर्य नारायण व सत्य नारायण थे। वे नौंवी क्लास में थे, पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

बेडरूम की बालकनी से बच्चों की गिरकर मौत हुई है। हालाँकि, बालकनी की हाइट ठीक है और बच्चे भी काफी छोटे नहीं बल्कि 14 साल के हैं, ऐसे में दोनों कैसे अचानक नीचे गिर गए, रात एक बजे के आसपास क्या बच्चे खेल रहे थे और अगर ये हादसा भी है तो दोनों किस तरह एक साथ इस हादसे का शिकार हो गए, ये तमाम सवाल हैं जिनकी जाँच गाजियाबाद की विजय नगर थाने की पुलिस कर रही है। 

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों बच्‍चों के गिरने की वजह छिपकली से बचने की कोशिश बताया जा रहा है, तो कुछ बच्‍चों के चाँद देखने के चक्‍कर में बालकनी से गिरने की बात कह रहे हैं। परिजनों के मुताबिक दोनों भाइयों को चाँद देखना बहुत पसंद था। आए दिन वह बालकनी में चाँद देखने के लिए घंटों खड़े रहते थे। शनिवार रात भी मोबाइल पर गेम खेलने से पहले दोनों ने माँ से चाँद देखने की बात की थी। पुलिस को बालकनी में कुर्सी पर प्लास्टिक का स्टूल रखा मिला है। आशंका है कि दोनों भाई स्टूल पर चढ़कर चाँद देख रहे होंगे, तभी हादसा हो गया।

इस घटना के वक्त बच्चों की माँ व बड़ी बहन घर पर थी जबकि पिता ऑफिस के काम से मुंबई गए हुए थे। इस घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है वहीं दो बच्चों की मौत से सोसायटी में भी सन्नाटा फैला है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसे को लेकर मृतक बच्चों की माँ से पूछताछ की जा रही है। उनकी बहन से भी पूछताछ होगी। कॉल डिटेल निकाली जा रही है। हत्या के एंगल से भी मामले की जाँच की जा रही है।

टेस्ट के बहाने क्या देखता था डॉक्टर, माप लेने के बहाने क्या करता था टेलर: बचपन में हुआ शोषण, नीना गुप्ता ने बताया

बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता की ऑटोबायोग्राफी ‘सच कहूँ तो’ से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अपनी किताब में उन्होंने बताया कि जब वो छोटी थीं तो उनके साथ एक डॉक्टर और टेलर ने छेड़छाड़ की थी। इससे पहले नीना गुप्ता को लेकर ये सामने आया था कि कैसे एक डायरेक्टर के कारण उन्हें हैविली पैडेड ब्रा पहननी पड़ी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक नीना गुप्ता ने बताया है कि जिस समय उनके साथ छेड़छाड़ हुई उस समय उन्होंने अपनी माँ को कुछ नहीं बताया क्योंकि उन्हें लगा कि गलती उनकी ही निकाली जाएगी। नीना गुप्ता ने अपने साथ हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए लिखा कि एक डॉक्टर ने उनसे उस समय छेड़छाड़ की थी जब वह एक आँखों को चेक कराने गई थीं और उनके भाई को बाहर प्रतीक्षा कक्ष में बैठने के लिए कहा गया था।

किताब में वह लिखती हैं, “डॉक्टर ने मेरी आँख का टेस्ट करना शुरू किया और कुछ देर बाद डॉक्टर मेरी आँख से जुड़ी अन्य चीजों का टेस्ट करने के बहाने नीचे अन्य जगहों का टेस्ट करने लगा। ये सब होता देख मैं बहुत डर गई थी। घर में जब कोई नहीं देख रहा था तो मैं एक कोने में बैठ कर रोई, लेकिन मैंने अपनी माँ को इस बारे में बताने की हिम्मत नहीं की क्योंकि मैं इतना डर गई थी कि मुझे लगा वह कहेंगी कि यह मेरी गलती थी। मेरे साथ ऐसा कई बार डॉक्टर ने किया था।”

नीना गुप्ता बताती हैं कि डॉक्टर की तरह उनके साथ एक टेलर ने भी ऐसे ही किया था। उस दर्जी ने शरीर का माप लेने के बहाने नीना के साथ ऐसी हरकत की थी। उनके साथ जब दर्जी ने छेड़छाड़ की उसके बाद उन्हें बार-बार वहाँ जाने को कहा गया। वह कहती हैं, “चूँकि मुझे लगा जैसे मेरे पास कोई विकल्प नहीं था। अगर मैंने अपनी माँ से कहा कि मैं उनके पास नहीं जाना चाहती, तो वह मुझसे पूछेंगी कि क्यों और मुझे उन्हें बताना होगा।”

यहाँ बता दें कि अपनी आत्मकथा में नीना गुप्ता ने संजय दत्त और माधुरी दीक्षित की फिल्म ‘खलनायक’ के गाने ‘चोली के पीछे क्या है’ की शूटिंग के दौरान हुए अनुभव को भी साझा किया था। उन्होंने लिखा है कि गाने से पहले निर्देशक सुभाष घई ने कहा था ‘कुछ भरो’, जिसके बाद उन्हें ‘हैविली पैडेड ब्रा’ पहनने पड़े थे

इस गाने में उनके हिस्से का गाना इला अरुण और माधुरी दीक्षित के हिस्से का अलका याग्निक ने गया था। इला अरुण और नीना गुप्ता पहले से ही दोस्त थे। नीना ने लिखा है, “मुझे एक गुजरती जनजातीय ड्रेस पहना कर सुभाष घई के पास अप्रूवल के लिए भेजा गया। उन्होंने कहा नहीं, नहीं, नहीं कुछ भरो!’ मैं परेशान हो गईं क्योंकि मुझे लगा कि वो कह रहे हैं कि मेरी चोली खाली है और इसमें कुछ भरो।”

बकौल नीना गुप्ता, उन्हें पता था कि इसमें कुछ व्यक्तिगत नहीं है और उनका इशारा मेरी चोली की तरफ था। अगले दिन नीना गुप्ता को भारी पैड वाले ब्रा के साथ एक ड्रेस पहना कर शूटिंग के लिए तैयार किया गया, जिसके बाद सुभाष घई संतुष्ट हुए। उन्होंने लिखा है कि सुभाष घई जो चीज भी चाहते थे उसे लेकर सजग रहते थे, इसीलिए वो एक अच्छे फिल्म निर्देशक थे।

याद हैं कमलेश तिवारी, जिन्हें हिंदू बनकर आए अशफाक और मोइनुद्दीन ने रेत दिया था: जानिए सुनवाई में पत्नी को क्या हो रही परेशानी

18 अक्टूबर 2019 में कमलेश तिवारी की लखनऊ में हत्या कर दी गई थी। इस घटना के 2 वर्ष पूरे हो गए हैं। सोशल मीडिया पर हिन्दू संगठनों से जुड़े लोग उनको याद कर रहे हैं।

मूल रूप से कमलेश तिवारी UP सीतापुर जिले में आने वाले महमूदाबाद के निवासी थे। उनका जन्म 16 जनवरी 1969 में हुआ था। कमलेश तिवारी एक हिन्दू नेता के तौर पर चर्चित थे। वो लम्बे समय तक हिन्दू महासभा के सदस्य रहे। कुछ समय बाद उन्होंने अपनी खुद की हिन्दू समाज पार्टी बना ली थी। हत्या के समय वो इसी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। वो लखनऊ के थाना नाका क्षेत्र में आने वाले खुर्शीदबाग़ कॉलोनी में रहते थे। यहीं उनकी हिन्दू समाज पार्टी का मुख्यालय भी था।

कमलेश तिवारी ने दिसम्बर 2014 में अपने पैतृक स्थान सीतापुर जिले में नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाने का एलान किया था। इस एलान के बाद काफी विवाद हुआ था और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था। उसी समय ऐसा ही मंदिर मेरठ में भी बनाने की बात कही गई थी।

वर्ष 2015 में कमलेश तिवारी द्वारा की गई एक टिप्पणी के खिलाफ मुस्लिम समुदाय के तमाम लोग सड़कों पर उतर आए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कमलेश तिवारी ने उनकी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाई थी। कमलेश तिवारी की टिप्पणी को मुस्लिम संगठनों ने अपने पैगम्बर का अपमान बताया था। कई जगहों पर जुलूस निकाल कर कमलेश तिवारी की फाँसी की माँग भी की गई थी। कमलेश तिवारी का सर काटने की धमकी दी गई थी और उनके सिर पर इनाम भी घोषित किया गया था।

इसी केस में उत्तर प्रदेश की तत्कालीन अखिलेश यादव सरकार ने कमलेश तिवारी को जेल भेजा था। कमलेश तिवारी पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई थी। बाद में कमलेश तिवारी जमानत पर बाहर आए थे।

18 अक्टूबर 2019, घटना के दिन रोज की तरह कमलेश तिवारी पार्टी मुख्यालय पहुँचे थे। इसी दौरान भगवा वस्त्र में दो साजिशकर्ता हाथ में मिठाई का डिब्बा लेकर नेता उनसे मिलने पहुँचे। बातचीत कर साथ में चाय पी और उसके बाद मिठाई के डिब्बे में छिपाकर लाए रिवॉल्वर व चाकू निकाल लिया। चाकू से ताबड़तोड़ 15 से ज्यादा वार उनके गले पर किए। इसके बाद वे गोली मारकर भाग निकले। कमलेश तिवारी को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। हत्यारोपितों का कमलेश तिवारी से मिलने के लिए जाने का CCTV फुटेज भी वायरल हुआ था।

एक अन्य CCTV फुटेज में हत्या के बाद दोनों आरोपितों के भागने का भी दावा दिया गया था।

कमलेश तिवारी की हत्या की खबर फैलते ही पूरे उत्तर प्रदेश में तनाव फ़ैल गया था। जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए थे। आक्रोशित हिन्दू संगठनों ने कई जगहों पर धरना प्रदर्शन किया था। घटनास्थल पर तनाव के चलते आसपास की दुकानें बंद कर दी गई थीं।

कमलेश तिवारी की हत्या के बाद पुलिस के बड़े अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए थे। उन्होंने तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी थी। तत्कालीन ADG का बयान सुनिए;

जाँच के दौरान पुलिस को इस हत्या में शेख अशफाक हुसैन और मोइनुद्दीन खुर्शीद पठान शामिल मिले। इन दोनों आरोपितों को गुजरात एटीएस ने अक्टूबर 2019 में गिरफ्तार किया था। ये दोनों आरोपित राजस्थान-गुजरात सीमा पर शामलाजी के पास से गिरफ्तार किए गए थे। उत्तर प्रदेश पुलिस की लगातार छापेमारी के चलते ये दोनों बार-बार अपने स्थान को बदल रहे थे। पकड़े गए दोनों आरोपितों की निशानदेही पर बाद में साजिश में शामिल अन्य लोग भी पकड़े गए।

हत्यारोपितों में पहला शेख अशफाक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) था। अशफाक गुजरात के सूरत में लिंबायत स्थित ग्रीन व्यू अपार्टमेंट पद्मावती सोसाइटी का निवासी था। दूसरा आरोपित पठान मोइनुद्दीन फूड डिलीवरी का काम करता था। मोइनुद्दीन सूरत के ही उमरवाड़ा में एक कॉलोनी का रहने था। अशफाक पर ही कमलेश तिवारी का गला रेतने का आरोप है। हमले के दौरान उसके हाथ में अपने ही चाकू से घाव हो गया था। पकड़े गए आरोपितों ने बताया कि वो कमलेश तिवारी के वर्ष 2015 के दिए गए बयान से नाराज थे।

इस हत्याकांड में बरेली दरगाह आला हजरत के मुफ्ती कैफी से भी पूछताछ हुई थी। मुफ़्ती पर इन दोनों हत्यारोपितों की मदद के आरोप लगे थे। हालाँकि मुफ़्ती ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार किया था। इस हत्याकांड की जाँच लखनऊ पुलिस, SIT और UP ATS ने सामूहिक रूप से किया था।

हत्या को अंजाम देने के लिए फर्जी फेसबुक प्रोफ़ाइल का सहारा लिया गया था। अशफाक ने रोहित सोलंकी के नाम से फर्जी फेसबुक प्रोफ़ाइल बनाई थी। काफी दिन तक उसने हिन्दू बन कर कमलेश तिवारी से फेसबुक पर चैट किया था। पूरी तरह से विश्वास में लेने के बाद आखिरकार कमलेश तिवारी ने उसे मिलने के लिए बुलाया था। हत्या से पूर्व दोनों लखनऊ स्थित एक होटल में रुके थे जिसकी CCTV फुटेज भी वायरल हुई थी।

हत्या के बाद दोनों ने होटल छोड़ दिया था और लगातार जगह बदलते रहे। पुलिस को गुमराह करने के लिए दोनों ने अपने मोबाइल एक अलग दिशा में जा रही गाड़ी में रख दिए थे । काफी समय तक पुलिस उसी मोबाइल को ही आरोपितों की असली लोकेशन समझ कर पीछा करती रही थी।

हत्या से पूर्व सूरत में मिठाई की दूकान से खरीदारी करते दोनों आरोपित CCTV में नजर आए थे। इसी मिठाई के डिब्बे में दोनों ने हथियार छिपाए थे। यह CCTV पुलिस को कत्ल की कड़ियाँ जोड़ने में काफी मददगार साबित हुई थी।

ऑपइंडिया ने आज जब कमलेश तिवारी की पत्नी किरन तिवारी से बात की तो उन्होंने बताया कि कुल 13 आरोपितों में से 5 की जमानत हो चुकी है। फिलहाल 8 आरोपित जेल में हैं। किरन तिवारी ने ये भी बताया कि आरोपितों ने मुकदमे को लखनऊ से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर करवा दिया है। लखनऊ से प्रयागराज की दूरी लगभग 200 किलोमीटर है। उन्होंने बताया कि हर तारीख पर आने-जाने के दौरान उनकी जान को खतरा बना रहता है। साथ ही इतनी दूर भागदौड़ में उनका अतिरिक्त पैसा भी खर्च हो रहा है।

‘फादर और चादर से दूर रहो, जय श्री राम कहो’: BJP विधायक की हिन्दुओं को सलाह, कॉन्ग्रेस ने बताया अल्पसंख्यकों का अपमान

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक कार्यक्रम में बोलते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने लोगों को ‘फादर और चादर वालों’ से दूर रहने की सलाह दी है। उनका इशारा ईसाई और इस्लामी धर्मांतरण की तरफ था। उन्होंने कहा कि ये दोनों तुम्हें बर्बाद कर देंगे, पीर बाबाओं से दूर रहो क्योंकि वो तुम्हारे हनुमान मंदिर जाने में बाधा हैं। उन्होंने कहा कि ये पीर बाबा जमीन में दफ़न करने वालों पर भरोसा करते हैं, हम लंका को जलाने वाले बजरंग बली पर भरोसा करते हैं।

रामेश्वर शर्मा ने भोपाल के नदीमपुर रोड में आयोजित दशहरा कार्यक्रम में बोलते हुए कहा, “अपनी संस्कृति को याद रखो। सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ भूल जाओ। उसके बदले सुबह उठ कर हाथ देखते हुए ये श्लोक पढ़ो – प्रात: कर-दर्शनम् कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती। करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम्॥ पलंग छोड़ने से पहले धरती को प्रणाम करो- ऐ कोख में पैदा करने वाली माँ, तुम्हें प्रणाम है।”

हुजूर विधानसभा बात से लगातार दूसरी बार विधायक बने रामेश्वर शर्मा ने लोगों को सलाह दी कि सूबा-सुबह भारत माँ को प्रणाम कीजिए, क्योंकि ये भारत भूमि है जिसे कान्हा ने जीभ से चाटा था, जब यशोदा ने चाँटा मारा था। उन्होंने आगे कहा कि ये वही भारत भूमि है, जिसे श्रीराम ने माथे पर लगा कर कहा था कि उन्हें सोने की लंका नहीं, अवध की धूल चाहिए। विधायक ने कहा कि ये वही भूमि है, जो केवल जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि परमात्मा है, साक्षात् देवी है।

दशहरा के मौके पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का सम्बोधन

विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि नवरात्री के मौके पर हमने इसी भूमि को पूजा है और हमेशा पूजते रहेंगे। उन्होंने कहा, “आज राम जय-जयकार कीजिए। मैं जब आपसे मिलूँ, तो क्या होना चाहिए?” इसके बाद भीड़ ने ‘जय श्री राम’ का नारा लगवाया। उन्होंने बार-बार ‘जय श्री राम’ का नारा लगवाते हुए कहा कि हमें अड़ोस-पड़ोस में भी मिलने पर यही बोलना चाहिए। रामेश्वर शर्मा 2013 और 2018 में हुजूर क्षेत्र से जीत दर्ज कर चुके हैं।

वहीं अब विधायक के इस भाषण पर विवाद भी खड़ा हो गया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनके बयान को अल्पसंख्यकों का अपमान बताते हुए माफ़ी माँगने की माँग की है। कॉन्ग्रेस ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता स्पष्ट करें कि क्या वो भी ऐसा ही सोचते हैं। कार्रवाई की माँग करते हुए कॉन्ग्रेस ने कहा कि विधायक राजनीतिक लाभ के लिए विभिन्न समुदायों में वैमनस्य पैदा कर रहे हैं। पार्टी ने माहौल बिगाड़ने का आरोप भाजपा पर मढ़ा।

बांग्लादेश के रंगपुर में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने जलाए 20 हिन्दू घर: तोड़फोड़, आगजनी और हिंसा अब भी जारी

बांग्लादेश में कट्टरपंथी मुस्लिमों ने अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ लगातार 5 दिनों तक हिंसा किया। रविवार (17 अक्टूबर 2020) को एक ताजा हमले में, उन्होंने बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन के पीरगंज उपजिला में एक गाँव में आगजनी की और 20 हिंदू घरों को जला दिया।

बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद (BHUC) ने एक ट्वीट में जानकारी देते हुए बताया, “वर्तमान में रंगपुर के पीरगंज में हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं। देश भर में हिंदुओं पर हमले जारी हैं। अगर ऐसा ही चलता रहा तो बांग्लादेश में हिंदुओं का जिंदा रहना मुश्किल हो जाएगा।”

BHUC द्वारा शेयर किए गए एक वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि इस्लामी भीड़ ने एक मंदिर में आग लगा दी, दमकलकर्मियों ने उसे बुझाने की कोशिश की। इस आगजनी में मंदिर परिसर के भीतर रखी मूर्तियाँ भी जल गईं। इसमें आगे कहा गया, “रंगपुर में इस समय स्थिति विकट है। हिंदुओं के घर और मंदिर जला दिए गए हैं। रंगपुर जिले के पीरगंज उपजिला के एक हिंदू गाँव में मुस्लिम भीड़ ने आग लगा दी है।”

BDNews24 ने बताया कि माजीपारा के जेलेपोली में मुस्लिमों ने आरोप लगाया था कि एक हिंदू व्यक्ति ने फेसबुक पर ‘मजहब का अपमान करने वाली सामग्री’ पोस्ट की थी। जिला अधीक्षक मोहम्मद कमरुज्जमाँ ने कहा, “पुलिस उनके घर के आसपास पहरा दे रही थी। वह घर तो बच गया, लेकिन हमलावरों ने उससे कुछ ही दूरी पर अन्य घरों में आग लगा दी। चरमपंथी इस्लामवादियों की उन्मादी भीड़ ने पीरगंज उपजिला के तीन गाँवों मझीपारा, बोटोला और हातीबंधा गाँवों को निशाना बनाया।”

BDNews24 ने कहा कि फायर सर्विस डिपार्टमेंट को आगजनी के हमले की सूचना रात करीब 9:50 बजे मिली। सोमवार (18 अक्टूबर 2021) की सुबह तीन बजे के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया जा सका। हालाँकि कोई हताहत या नुकसान का अनुमान नहीं है। ऐसा माना जाता है कि हमले के दौरान 15-20 घर जल गए थे।

डेली स्टार ने बताया कि एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से ईशनिंदा के आरोप सामने आने के बाद उपायुक्त (रंगपुर) आसिफ अहसन पुलिस के साथ करीमगंज गाँव पहुँचे। हालाँकि तब तक उपद्रवियों ने पीरगंज के अन्य गाँवों में कुछ हिंदू घरों में आग लगा दी थी।

बांग्लादेश के गृहमंत्री ने जाँच में निष्पक्षता का आश्वासन दिया

इस बीच, बांग्लादेश के गृहमंत्री असदुज्जमाँ खान कमाल ने मामले की निष्पक्ष जाँच का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, “हम बहुत सी चीजें देख रहे हैं और मान रहे हैं। हम सबूत का इंतजार कर रहे हैं। एक बार सबूत मिलने के बाद, हम इसे आपके सामने पेश करेंगे। हमने कमिला घटना को बहुत गंभीरता से लिया है। उचित जाँच के बाद हम आपको बताएँगे। हमें उम्मीद है कि हम आपको बहुत जल्द बताएँगे।

निष्पक्ष जाँच का आश्वासन देते हुए अससुज्जमाँ ने कहा, ”देश के अंदर भड़काने वालों की कोई कमी नहीं है। हमने कमिला घटना में दो-तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इसमें शामिल लोगों की जल्द ही पहचान कर ली जाएगी। अत्यंत धैर्य के साथ सुरक्षा बल स्थिति को सँभाल रहे हैं।”

फेनी जिले में और हिंदू मंदिरों पर हमला, पेट्रोल बम फेंके गए

बांग्लादेश हिंदू एकता परिषद (BHUC) ने शनिवार (16 अक्टूबर) रात एक ट्वीट में जानकारी दी कि कट्टरपंथी इस्लामियों ने बंगाल के चटगाँव डिवीजन के फेनी जिले में हिंदुओं पर हमला किया। इसने 14 सेकंड का एक वीडियो क्लिप भी साझा किया था, जिसमें कट्टरपंथी इस्लामियों को सड़कों पर तबाही मचाते हुए देखा जा सकता है। लाठियों से लैस उन्मादी भीड़ बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गई और फिर फेनी जिले में हिंदू मंदिरों पर एक साथ हमला किया।

हमलावरों ने कालीपाल में एक यात्री वाहन को आग लगा दी, कच्चे बम फेंके, एक दमकल ट्रक में तोड़फोड़ की और जोयकाली, जगन्नाथबाड़ी, कालीबाड़ी मंदिर और गाजीगंज आश्रम जैसे हिंदू मंदिरों पर हमला किया। कथित तौर पर इसी इस्लामी भीड़ ने जोयकली मंदिर के पास बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अध्यक्ष शुकदेब नाथ तपन पर हमला किया था।

प्रभारी अधिकारी (फेनी मॉडल पुलिस स्टेशन) निज़ामुद्दीन के अनुसार, झड़पों के दौरान 40 से अधिक लोग घायल हो गए। इसके बाद उन्हें फेनी जनरल अस्पताल ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जमात-ए-इस्लामी की इस्लामिक छात्र शिबिर नामक छात्र शाखा अपराधियों में शामिल थी। अवामी लीग और उसकी छात्र शाखा बांग्लादेश छात्र लीग के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने हमलावरों का विरोध करने की कोशिश की।

इस्लामी आतंकियों से ये कैसी मोहब्बत: रेडियो मिर्ची वाली सायमा, ‘पत्रकार’ सबा नकवी… कश्मीर में हत्याओं पर शब्दों से ‘खेल’

जम्मू-कश्मीर में गैर-कश्मीरियों पर होते हमलों ने इस्लामी कट्टरपंथियों को मौका दिया है कि वो एक बार फिर मोदी सरकार को कोसना शुरू कर दें। उन्हें अब भी इन हत्याओं के पीछे इस्लामी आतंकी समूह दोषी नहीं नजर आ रहे। वो सिर्फ ये बताने में जुटे हैं कि 2 साल पहले जो अनुच्छेद 370 कश्मीर से खत्म किया गया, उससे स्थिति अच्छी नहीं हुई है।

सबा नकवी का ट्वीट

जैसे सबा नकवी लिखती हैं, “समस्या ने एक मोड़ लिया है और अब स्पष्ट हो गया है कि जो 2 साल पहले 5 अगस्त को हुआ था उससे हमारी कोई मदद नहीं हुई है।”

आरजे सायमा

रेडियो मिर्ची की आरजे सायमा तो कश्मीर पर ट्वीट करते हुए यूपी-बिहार प्रवासियों की हत्या को ही जस्टिफाई करती दिखीं। उनका कहना है कश्मीर के बारे में हर चीज सिर्फ और सिर्फ कश्मीरियों से समझी जानी चाहिए और किसी से नहीं। अब क्या जो आतंकी दावा ठोक रहे हैं कि कश्मीर उनका है और गैर-कश्मीरी वहाँ से जाएँ, इसका मतलब ये है कि पूरे मामले में सिर्फ आतंकियों की सुनी जाए और इन हत्याओं को दरकिनार कर दिया जाए या उनका कहने का मतलब ये है कि जो कश्मीरी पंडित निशाना बनाए जा रहे हैं वो कश्मीर के नहीं हैं!

सलमान निजामी का ट्वीट

कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी लिखते हैं, “दो और हत्याएँ हुईं। इस बार बिहार के निर्दोष मजदूर निशाना बनाए गए। मैं इस कायराना हमले की निंदा करता हूँ। 7 दिन में नागरिकों की हत्या का आँकड़ा 12 पहुँचा है। आखिर भाजपा को आर्टिकल 370 हटवाकर क्या मिला- जम्मू-कश्मीर में रक्तपात के अलावा। आओ साथ में शांति और सद्भाव स्थापित करें।”

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में गैर-मुस्लिमों पर होते हमले अब लगातार बढ़ रहे हैं। 17 अक्टूबर को भी वहाँ दो मजदूरों की हत्या हुई, जिसकी पूरी जिम्मेदारी लश्कर से जुड़े आतंकी समूह यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट (ULF) ने ली और एक पत्र जारी कर धमकाया कि गैर-कश्मीरी घाटी छोड़ दें वरना उन्हें भी मार दिया जाएगा। अब तक वहाँ कुल 11 लोगों की हत्या की जा चुकी हैं। सुरक्षाबल स्थिति संभालने की कोशिश में लगे हैं लेकिन लगातार हुई हत्याओं ने गैर मुस्लिमों और गैर कश्मीरियों के मन में डर भर दिया है। वह आतंकियों के डर से सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए अपने ठिकानों से निकल पड़े हैं।

ऐसे में आरजे सायमा, सबा नकवी जैसे इस्लामी अपनी राय देते हुए पूरे मामले को घुमाने का प्रयास कर रहे हैं। सायमा की बात सुनने के बाद एक यूजर उनसे पूछता है कि क्या कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं है, जो अन्य प्रदेश के लिए लोग उसके बारे में बात न करें। अरिजीत रॉय कहते हैं, “मुझे पक्का पता है कि इन्हें पाकिस्तान से कोई दिक्कत नहीं होगी जो कश्मीर के बारे में 24 घंटे सातों दिन बात करते हैं, यहाँ तक यूएन में भी वो यही बात करते हैं। ”

जिस निहंग ने कहा- मैंने उसकी टाँग काटी, उसकी पत्नी बोली- गर्व है: सिंघु-कुंडली बॉर्डर पर हुई थी दलित की बर्बर हत्या

सिंघु-कुंडली बॉर्डर पर दलित युवक लखबीर सिंह की नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस मामले के तीन आरोपित निहंगों नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह को रविवार (17 अक्टूबर 2021) को सोनीपत कोर्ट ने 6 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया। रिपोर्ट के अनुसार आरोपितों ने जज के सामने लखबीर की हत्या की बात कबूली। हालाँकि उनके वकील ने इससे इनकार किया है। इस मामले का चौथा आरोपित सरबजीत सिंह पहले ही 7 दिन की रिमांड में भेजा जा चुका है।

17 अक्टूबर को सोनीपत क्राइम ब्रांच और पुलिस तीनों आरोपितों को लेकर कोर्ट में पहुँची। गिरफ्तार निहंग नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह ने कोर्ट के सामने यह कबूल किया कि सिंघु बॉर्डर के पास हुए लखबीर सिंह हत्याकांड को उन्होंने ही अंजाम दिया था। नारायण सिंह ने कहा कि उसने टाँग काटी थी, सरबजीत ने हाथ का पंजा काटा था और गोविंद सिंह एवं भगवंत सिंह ने उसको बैरिकेडिंग पर टाँगा था।

वहीं इनके बचाव में पेश हुए वकील संदीप शर्मा ने कहा, “मुस्लिम कुरान की रक्षा करता है और ईसाई बाइबल की। ऐसे में इन्हें भी अपने गुरुग्रंथ की रक्षा का अधिकार है। उन्होंने जो किया है वह सही किया है। अगर फिर से गुरुग्रंथ की बेअदबी होती है तो हम पीछे नहीं हटेंगे।”

अपनी गिरफ्तारी से पहले मीडिया से बात करते हुए नारायण सिंह ने कहा था, “लखबीर सिंह को कथित तौर पर बेअदबी के लिए दंडित किया गया। पंजाब में बरगारी बेअदबी कांड के आरोपित को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है, लेकिन अब अगर कोई ऐसा जघन्य अपराध करता है, तो उसे मौके पर ही सजा दी जाएगी।”

पुलिस हिरासत में लिए जाने के दौरान नारायण सिंह की पत्नी परमजीत कौर भी मौजूद थीं। कौर ने कहा, “उसे अपने पति पर गर्व है, क्योंकि उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के लिए दोषी व्यक्ति को दंडित किया है। अगर कोई ऐसा जघन्य अपराध करता है, तो अब मैं उसे सजा दूँगी।”

इससे पहले घटना के दिन गिरफ्तार किए गए निहंग सरबजीत सिंह को सोनीपत पुलिस ने शनिवार को कोर्ट में पेश किया था, जिसको कोर्ट ने सात दिन की रिमांड भेजा है। सरबजीत के लिए सोनीपत पुलिस ने 14 दिन की रिमांड माँगी थी। आरोपित ने इस जघन्य हत्या में कुछ और लोगों के शामिल होने का संकेत दिया था।

सरबजीत सिंह ने सरेंडर के दौरान पुलिस को तलवार देते हुए कहा था कि इसी से लखबीर की हत्या की गई थी। हालाँकि सरबजीत की बात झूठी निकली। पुलिस और फॉरेंसिक टीमों ने जब उस तलवार की जाँच की तो स्पष्ट हो गया कि लखबीर काे उससे नहीं मारा गया। जिस तलवार से लखबीर की हत्या की गई, उसे छुपा दिया गया है। ऐसे में लखबीर के हाथ-पैर काटने समेत उसके शरीर पर जिन हथियारों से वार किए गए, उनकी रिकवरी होनी अभी बाकी है। इसके लिए पुलिस की टीम फिर से सिंघु बॉर्डर पर निहंगों के डेरे में जा सकती है।

गौरतलब है कि इससे पहले भगवंत सिंह और गोबिंदप्रीत सिंह के आत्मसमर्पण के बाद निहंगों ने स्पष्ट किया था कि वो अब अपने किसी साथी का सरेंडर नहीं करवाएँगे। साथ ही धमकाया था कि उनके और साथियों को पकड़ने की कोशिश की गई तो जिन्हें पकड़ा गया है, उन्हें भी छुड़ा लाएँगे।