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कन्हैया कुमार वामपंथी ऑफिस से AC निकाल कर ले गए, खुद CPI के नेता ने बताया: कॉन्ग्रेस से हाथ मिलाने के पहले की ‘हरकत’

कन्हैया कुमार के कॉन्ग्रेस में जाने की अटकलों के बीच उनसे जुड़ी एक और खबर सामने आई है। यह कोई सियासी खबर नहीं है और ना ही उनका कोई बड़ा क्रांतिकारी कदम है। दरअसल, कन्हैया पटना स्थित सीपीआई (CPI) कार्यालय के जिस कमरे में बैठते थे, उससे AC निकालकर ले जाने के कारण सुर्ख़ियों में हैं। सीपीआई के प्रदेश सचिव रामनरेश पांडेय ने लाइव हिंदुस्तान से बातचीत में कन्हैया के CPI कार्यालय से एसी ले जाने की बात कही है। पार्टी के प्रदेश सचिव ने बताया कि कन्हैया ने कहा है कि उन्होंने कहीं और कमरा ले लिया है, इसलिए वह कार्यालय से AC ले जा रहे हैं।

पांडेय ने बताया, ”जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष ने अपने और अपने लोगों के लिए प्रदेश कार्यालय के कमरे में एक एयर कंडीशनर (AC) लगवाया था। उन्होंने एसी ले जाने के लिए ​हमसे अनुमति भी माँगी थी। हमने उनसे कहा कि यह आपकी ही संपत्ति है। आप इसे ले जा सकते हैं।” बताया जा रहा है कि कन्हैया कुमार ने अपने पार्टी प्रमुख से भी यह बात कही है कि उन्होंने कहीं और कमरा ले लिया है। वह एसी लेकर जा रहे हैं, जिसे वहाँ लगाएँगे।

गौरतलब है कि जब से राहुल गाँधी की ‘युवा टीम’ का हिस्सा बन कर कन्हैया कुमार के कॉन्ग्रेस में जाने की अटकलें शुरू हुई हैं, तब से उनकी वामपंथी पार्टी CPI की नींद उड़ी हुई है। सभी मीडिया रिपोर्ट्स इसकी पुष्टि कर रहे हैं कि मंगलवार (28 सितंबर, 2021) को कन्हैया कुमार के अलावा जिग्नेश मेवानी भी कॉन्ग्रेस में शामिल होने वाले हैं।

वहीं, CPI के नेताओं और कार्यकर्ताओं के दिल की धड़कन बढ़ाते हुए कन्हैया कुमार ने चुप्पी साधी हुई है। ‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, पिछले सप्ताह दिल्ली स्थित CPI दफ्तर में नेता/कार्यकर्ता कन्हैया कुमार का इंतजार करते रह गए, लेकिन वो नहीं पहुँचे। JNU छात्र संघ के अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार को उस दिन पार्टी ने बयान देने को कहा था। कॉन्ग्रेस में जाने को लेकर उन्हें चुप्पी तोड़ने को कहा गया था।

टिहरी डैम की सरकारी जमीन पर अवैध मस्जिद: शुक्रवार को नमाज बाद छेड़छाड़ से परेशान स्थानीय, प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन

उत्तराखंड में टिहरी बाँध के पास लैंड जिहाद का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, 2000 के दशक की शुरुआत में खंड-खाला कोटि कॉलोनी में साइट पर एक अवैध मस्जिद बनाई गई थी, जो बाँध के करीब है और तब से हिंदू संगठनों ने इसे हटाने के लिए कई बार कोशिशें की है। हाल ही में, सितंबर 2021 के पहले सप्ताह में, स्थानीय हिंदुओं के एक समूह ने मस्जिद के खिलाफ नए सिरे से विरोध प्रदर्शन शुरू किया और 150 वर्ग मीटर से अधिक भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त करने के प्रयासों को तेज किया।

ऑपइंडिया ने मामले के बारे में और अधिक जानने के लिए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति अक्षत बिलजवान से संपर्क किया। 6 सितंबर को अक्षत और खंड-खाला कोटी कॉलोनी क्षेत्र के हिंदू समुदाय के अन्य सदस्यों ने पर्यटन विभाग को आवंटित भूमि का अतिक्रमण कर टिहरी बाँध के पास बनाई गई अवैध मस्जिद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बता दें कि टिहरी बाँध के निर्माण के समय कई इमारतों, खेतों और धार्मिक संरचनाओं को हटा दिया गया था। संपत्तियों के सभी कानूनी मालिकों को अन्य स्थानों पर विस्थापित कर दिया गया और अधिकारियों ने उन्हें मुआवजा दिया या फिर इसके बदले में कहीं और जमीन दिया। निर्माण के दौरान, बाँध बनाने वाली कंपनी (JP) ने मुस्लिम श्रमिकों के लिए एक अस्थाई मस्जिद का निर्माण किया। प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद, कंपनी और कर्मचारी चले गए, लेकिन अस्थाई मस्जिद को नहीं हटाया गया।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और यहाँ तक कि स्थानीय भाजपा नेताओं सहित कई हिंदू संगठनों ने मस्जिद को हटाने की कोशिश की। इसके बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अक्षत ने कहा कि मस्जिद से कुछ ही मीटर की दूरी पर CISF बेस है जो बाँध की सुरक्षा करता है, लेकिन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ किसी ने कार्रवाई नहीं की।

अक्षत ने कहा, “हर शुक्रवार को सैकड़ों मुसलमान यहाँ नमाज अदा करने आते हैं। नमाज अदा करने के बाद ज्यादातर लोग सड़क पर ही बैठ जाते हैं। पास में ही एक कॉलेज है और इस सड़क से अक्सर मोहल्ले की महिलाएँ गुजरती हैं। खासकर शुक्रवार को इलाके में उत्पीड़न के अनगिनत मामले सामने आए हैं, जहाँ सौ से ज्यादा मुस्लिम सड़क के किनारे बैठे रहते हैं। हमने कई बार शिकायत की है, लेकिन कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।”

मस्जिद का संचालन करने वाले व्यक्ति के बारे में बात करते हुए अक्षत ने कहा, “मस्जिद में आने वाले स्थानीय नहीं हैं। यह एक छोटा सा इलाका है, और हम लोगों को उनके चेहरे से पहचान सकते हैं। स्थानीय लोगों की पहचान करना मुश्किल नहीं है क्योंकि सभी के पास आईडी है। लेकिन जो लोग इस मस्जिद में जाते हैं वे स्थानीय नहीं हैं और उन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव है। मस्जिद का प्रबंधन करने वाला मौलवी (मोहम्मद उस्मान) भी मस्जिद से थोड़ी दूर पर रहता है। हालाँकि सभी जानते हैं कि यह अवैध है फिर भी यह अवैध ढाँचा अभी भी खड़ा है।”

अवैध मस्जिद के खिलाफ 6 सितंबर का विरोध प्रदर्शन

छह सितंबर को अक्षत व अन्य ने धरना पर बैठ कर अवैध रूप से अतिक्रमण की गई जमीन पर बनी मस्जिद को हटाने और बाँध की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नारेबाजी की। अक्षत द्वारा फेसबुक पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने कहा, “जब बाँध बनाया जा रहा था, तो कंपनी ने मुसलमानों को नमाज अदा करने के लिए अस्थाई जगह दी थी। अब कंपनी और कर्मचारी क्षेत्र छोड़कर जा चुके हैं। जमीन पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। मौके पर पर्यटन विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि मस्जिद अवैध है।”

वरिष्ठ अधिकारियों से बात करते हुए, अक्षत ने यह भी बताया कि लव जिहाद के भी कुछ मामले उस क्षेत्र में सामने आए, जहाँ मुस्लिम पुरुषों ने अपनी हिंदू पहचान बता कर हिंदू लड़कियों को लुभाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर स्थानीय लोगों को पता चलता है कि कोई स्थानीय लड़कियों और महिलाओं को लुभाने की कोशिश कर रहा है या उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रहा है, तो वे खुद कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा, “यह पहला मामला नहीं है। हम रोजाना ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। हम जिस पर्वतीय क्षेत्र में रहते हैं वह शांत स्थान माना जाता है। हम अब ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सकते। अगर पुलिस और प्रशासन ऐसा करने में विफल रहता है तो हमें कार्रवाई करनी होगी।”

अक्षत द्वारा ऑपइंडिया के साथ शेयर किए गए दो दस्तावेजों के अनुसार, 6 सितंबर को मस्जिद के आसपास एक संयुक्त सर्वेक्षण किया गया जिसमें प्रशासन को पता चला कि मस्जिद अवैध थी। कुछ अन्य संरचनाएँ थीं जिनमें कुछ दुकानें आदि शामिल थीं, वह भी अतिक्रमण की गई जमीन पर बनी थीं। मस्जिद का प्रबंधन करने वाले मौलवी मोहम्मद उस्मान भी मौके पर मौजूद थे। उन्हें प्रशासन द्वारा सूचित किया गया था कि मस्जिद अवैध थी और इसे हटाया जाना था। मस्जिद के आसपास बनी अस्थाई दुकानों को भी इसी तरह के निर्देश दिए गए थे।

Joint survey report. Source: Akshat Bijalwan

अक्षत ने प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के बारे में बात करते हुए कहा कि प्रशासन ने मस्जिद के आसपास की अस्थाई दुकानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की और उन्हें हटा दिया। उन्होंने कहा, “वे क्षेत्र में किसी भी अस्थाई दुकान को तेजी से हटाना सुनिश्चित करते हैं, जो एक अच्छी बात है। हालाँकि जब बात मस्जिद की आती है तो हर कोई किसी और पर आरोप मढ़ रहा है और कोई कार्रवाई करने को तैयार नहीं है।”

मस्जिद के प्रशासक ने माँग की है कि उन्हें मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए एक वैकल्पिक भूमि प्रदान की जानी चाहिए। अक्षत ने कहा, “माँग के खिलाफ हमें कड़ी आपत्ति है। जब प्रशासन द्वारा संरचना को अवैध माना गया है, तो उन्हें वैकल्पिक भूमि क्यों मिलनी चाहिए, इसका मतलब अतिक्रमण की गई भूमि को वापस लेना है। सरकार उन्हें जमीन के एक हिस्से पर कानूनी कब्जा देगी। यह अस्वीकार्य है।”

इसके बाद मस्जिद के प्रशासक ने राज्य अल्पसंख्यक आयोग में याचिका दायर की। दिलचस्प बात यह है कि अल्पसंख्यक आयोग ने मामले का तुरंत संज्ञान लिया। इसने अवैध संरचना को हटाने की प्रक्रिया में और देरी की। अक्षत ने कहा, “मैं हैरान हूँ कि अल्पसंख्यक आयोग मामले में शामिल हो गया। वे जानते हैं कि संरचना अवैध है। वे प्रशासन से मस्जिद के लिए वैकल्पिक जमीन देने के लिए कैसे कह सकते हैं? यह सिस्टम का मजाक है।”

25 सितंबर की घटना

प्रशासन ने मस्जिद के प्रशासक को ढाँचे को हटाने के लिए 15 दिन का समय दिया था। जो कि 21 सितंबर को पूरा हो गया। हालाँकि, मस्जिद अभी भी वहीं पर खड़ी है। 25 सितंबर को अक्षत और अन्य ने क्षेत्र का फिर से दौरा करने और प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया। स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुँचे। चर्चा के दौरान एक अधिकारी की अक्षत से बहस हो गई, जिसके बाद स्थिति लगभग हाथ से निकल गई। अधिकारी ने अक्षत को अपनी आवाज नीचे करने के लिए कहा जिसके बाद अक्षत बिगड़ पड़े।

उन्होंने कहा, “अधिकारी इलाके में नए थे। हम उन्हें नहीं जानते और वह नहीं जानते कि हम किन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। जब उन्होंने मुझसे आवाज नीची करने को कहा, तो मुझे समझ नहीं आया कि मैंने क्या गलत कहा।” उन्होंने स्थल पर विरोध कर रहे अपने साथियों के साथ मस्जिद की ओर मार्च करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें रोका और पीछे धकेल दिया। अक्षत और उसके साथी मौके पर मौजूद पुलिस को एसडीएम को बुलाने के लिए कहते रहे क्योंकि वे जानना चाहते थे कि प्रशासन ने क्या कार्रवाई की।

SDM ने दिया मस्जिद को हटाने का आश्वासन

अंत में जब एसडीएम अपूर्वा सिंह मौके पर पहुँची तो उन्होंने मौजूदा स्थिति से अवगत कराया। अक्षत ने ऑपइंडिया के साथ वीडियो साझा किया जिसमें एसडीएम के साथ चर्चा देखी जा सकती है। उसने कहा, “ यहाँ पर जो लोग मस्जिद का प्रबंधन कर रहे थे, उन्होंने अल्पसंख्यक आयोग से संपर्क किया है। कानून के मुताबिक हमें उनका जवाब देना होगा और आगे कदम उठाना होगा, जिसमें समय लग रहा है। उन्होंने मौके पर मौजूद सभी लोगों को आश्वासन दिया कि प्रशासन के लिए मस्जिद अतिक्रमण की जमीन पर है, उसे हटा दिया जाएगा। एसडीएम ने कहा, “मैं वादा नहीं कर सकती कि इसे एक दिन, एक सप्ताह या एक महीने में हटा दिया जाएगा, लेकिन मैं आपको आश्वस्त कर सकती हूँ कि इसे हटा दिया जाएगा।”

एसडीएम ने महिलाओं के उत्पीड़न की घटनाओं पर बात करते हुए स्थानीय लोगों से ऐसी घटनाओं को पुलिस के संज्ञान में लाने को कहा। उन्होंने पुलिस को शुक्रवार को सुरक्षा बढ़ाने के भी निर्देश दिए ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने कहा, “मैं आपसे अनुरोध कर रही हूँ कि अतिक्रमण और छेड़खानी के मुद्दे को आपस में न मिलाएँ। मैंने पुलिस से शुक्रवार को सुरक्षा बढ़ाने को कहा है ताकि ऐसी घटनाओं पर काबू पाया जा सके। हम अवैध ढाँचे को हटा देंगे, लेकिन हमें कानून का पालन करना होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि सभी को अदालतों का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें रुकना होगा। सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एसडीएम ने आगे कहा, “प्रशासन के पास दिशानिर्देश हैं, और हम संरचना को हटा सकते हैं, लेकिन हमें प्रक्रिया का पालन करना होगा। आपको हम पर भरोसा करना होगा। मैं समझती हूँ कि अविश्वास की समस्या है, लेकिन मैं आपको आश्वासन दे रही हूँ कि ढाँचा हटा दिया जाएगा।”

जनवरी में उठा था मामला

यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे को उठाया गया है। जनवरी 2021 में टिहरी के भाजपा विधायक धन सिंह नेगी ने यह मुद्दा उठाया था। ऑपइंडिया हिंदी से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कई बार टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (THDC) से संपर्क किया, लेकिन किसी ने भी उनकी याचिका पर ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र में स्थित मस्जिद को बाँध के निर्माण के दौरान हटा दिया गया था। हालाँकि, इस अवैध ढाँचे को निर्माण के दौरान अस्थाई आधार पर खड़ा किया गया था। बाँध बनाने वाली कंपनी तो चली गई, लेकिन मस्जिद वहीं रही, जिससे स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

शनिवार की क्लिप का एक हिस्सा ट्विटर पर गोपाल गोस्वामी द्वारा साझा किया गया था, जिन्होंने मस्जिद को हटाने की माँग की थी। इसके बाद कई नेटिजन्स ने इस माँग को दोहराया।

पत्रकार अभिजीत मजूमदार ने भी इस मुद्दे को उठाया और पुष्कर सिंह धामी से सवाल किया।

स्तंभकार और वकील दिव्या कुमार सोती ने लिखा, कमाल है! जिस टिहरी डैम के आस-पास इतने प्रतिबंध हैं वहाँ मस्जिद बन गई!

ऑपइंडिया ने एसडीएम से संपर्क करने की कोशिश की लेकिन मामले के बारे में विस्तार से बात नहीं हो पाई।

लैंड जिहाद की समस्या

गौरतलब है कि लैंड जिहाद का यह पहला मामला सामने नहीं आया है। हाल ही में, हमारी एक रिपोर्ट में सूरत और गुजरात के अन्य शहरों के मामलों का विवरण दिया गया था। चौंकाने वाली घटना में अशांत क्षेत्र अधिनियम की धज्जियाँ उड़ाई गई और धोखे से भवन निर्माण की अनुमति ली गई। सूरत के अदजान इलाके में एक मंदिर के बगल में रेहान हाइट्स प्रोजेक्ट निर्माण के लिए एक मुस्लिम स्वामित्व वाली एंटरप्राइजेज ने हिंदू साथी को सामने पेश कर निर्माण की अनुमति ली, जो कि कानून को धोखा देने जैसा था। अनुमति मिलने के बाद हिंदू पार्टनर को डील से बाहर कर दिया गया।

हाल के दिनों में अवैध मस्जिदों और मजारों की कई दूसरी घटनाएँ भी सामने आई हैं। जून में, यूपी सरकार ने हरदोई में एक अवैध मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था। मार्च में, यूपी पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मैनाथर जिले के इमरतपुर उधो गाँव में एक मुस्लिम व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जहाँ उसने एक हिंदू की जमीन पर मजार बनाने की कोशिश की।

‘मुझे प्रदेश अध्यक्ष बनाओ, प्रत्याशी चयन की कमान दो’- कन्हैया कुमार की माँग से CPI परेशान, जा सकते हैं कॉन्ग्रेस में: रिपोर्ट

जब से राहुल गाँधी की ‘युवा टीम’ का हिस्सा बन कर कन्हैया कुमार के कॉन्ग्रेस में जाने की अटकलें शुरू हुई हैं, तब से उनकी वामपंथी पार्टी CPI की नींद उड़ी हुई है। सभी मीडिया रिपोर्ट्स इसकी पुष्टि कर रहे हैं कि मंगलवार (28 सितंबर, 2021) को कन्हैया कुमार के अलावा जिग्नेश मेवानी भी कॉन्ग्रेस में शामिल होने वाले हैं। CPI के नेता इस मामले में मीडिया में सफाई देते-देते थक चुके हैं।

CPI के नेताओं और कार्यकर्ताओं के दिल की धड़कन बढ़ाते हुए कन्हैया कुमार ने चुप्पी साधी हुई है। ‘हिंदुस्तान’ की खबर के अनुसार, पिछले सप्ताह दिल्ली स्थित CPI दफ्तर में नेता/कार्यकर्ता कन्हैया कुमार का इंतजार करते रह गए, लेकिन वो नहीं पहुँचे। JNU छात्र संघ के अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार को उस दिन पार्टी ने बयान देने को कहा था। कॉन्ग्रेस में जाने को लेकर उन्हें चुप्पी तोड़ने को कहा गया था।

इस खबर में ये भी लिखा है कि CPI नेताओं ने एक गुट ने कन्हैया कुमार को मनाने की भी कोशिश की थी। इस बातचीत के दौरान उन्होंने शर्त रख दी कि उन्हें बिहार में पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। साथ ही उन्हें प्रत्याशियों का चयन करने वाली शीर्ष चुनावी समिति का अध्यक्ष बनाया जाए, उन्होंने ऐसी शर्त भी रख दी। 2 अक्टूबर को CPI की नैशनल काउंसिल की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं। देखना है कि इसमें कन्हैया कुमार हिस्सा लेते हैं या नहीं।

लेकिन, वो वहाँ गए ही नहीं। कन्हैया कुमार और CPI के बीच के रिश्ते वैसे भी अच्छे नहीं चल रहे हैं, क्योंकि कॉन्ग्रेस नेताओं के साथ उनकी कई बैठकें हुई हैं। पार्टी के जनरल सेक्रेटरी डी राजा ने उन्हें इन ‘अफवाहों’ को खारिज करने के लिए कहा था। डी राजा ने मीडिया में भी बयान देते हुए इन रिपोर्ट्स को आधारहीन और तथ्यों से परे बताया था। पार्टी मुख्यालय में कई नेता उनका इंतजार करते रह गए, लेकिन वो नहीं पहुँचे।

कहा जा रहा है कि इसके बाद नेताओं ने उन्हें मैसेज व फोन कॉल्स भी किए, लेकिन कन्हैया कुमार का कोई जवाब नहीं आया। उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस करना था, जिसकी तैयारियाँ धरी की धरी रह गईं। डी राजा ने कहा कि कुछ दिन पहले पार्टी मुख्यालय में हुई मुलाकात में खुद कन्हैया कुमार ने इसे अफवाह बताया है। कॉन्ग्रेस के केसी वेणुगोपाल ने इसकी पुष्टि की है कि राहुल गाँधी से कन्हैया कुमार की मुलाकात हुई है।

भारत बंद के नाम पर अराजकता, प्रदर्शनकारियों ने सेना के वाहनों को रोका, एक ने बेंगलुरु में डीसीपी के पैर पर चढ़ा दी कार: देखें वीडियो

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने सोमवार (27 सितंबर) को भारत बंद बुलाया। इस दौरान जालंधर और बेंगलुरु में प्रदर्शनकारियों की दबंगई देखने को मिली। उन्होंने न केवल सेना के वाहनों को जाने से रोका, बल्कि डीसीपी के पैर पर कार चढ़ा दी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

किसान प्रदर्शनकारियों को जवानों से यह कहते भी सुना जा सकता है कि अगर वे सेना से हैं तो उन्हें प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे वाहनों को जाने की अनुमति क्यों दें। वहीं बेंगलुरु में एक प्रदर्शनकारी ने अपनी कार को डीसीपी के पैरों पर चढ़ा दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्र सरकार पर कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए दबाव बनाने के लिए 10 घंटे के भारत बंद का आह्वान किया था। यह बंद सुबह छह बजे शुरू हुआ और शाम चार बजे तक चला। इस दौरान लोग कई घंटों तक जाम में फँसे रहे।

किसान प्रदर्शनकारी ट्रेनों के आवागमन को रोकने के लिए पटरियों पर बैठ गए। उन्होंने लोगों से जबरन दुकानें बंद करवाईं। इस बीच, कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी ने प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन दिया। साथ ही उनकी बहन प्रियंका गाँधी वाड्रा भी भारत बंद के समर्थन में सामने आईं। हालाँकि, यह बहुत अधिक प्रभाव डालने में विफल रहा है, क्योंकि लोगों ने देश को रोकने के आह्वान को नजरअंदाज करते हुए अपनी दैनिक दिनचर्या को जारी रखा है।

गौरतलब है भारत बंद के कुछ घंटों बाद किसान प्रदर्शनकारियों की भीड़ को सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते और तोड़फोड़ करते हुए देखा गया। समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया कि किसान प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स को तोड़ दिया और नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय सेक्टर-6 में पहुँच गई। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो में हरी टोपी पहने ‘किसान’ प्रदर्शनकारियों की उन्मादी भीड़ को तिरंगा लहराते हुए पुलिस की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है। ये बड़ी संख्या में हैं, जो पुलिस पर हमला करते और बैरिकेड्स को तोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस बीच, वहाँ तैनात पुलिसकर्मियों ने जब उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने उन्हें बैरिकेड्स से दबाने का प्रयास किया।

देवी-देवताओं पर भद्दे कमेंट करने वाले मुनव्वर फारुकी का पूरे गुजरात का ‘कॉमेडी’ शो रद्द: बजरंग दल के विरोध से आयोजक हटे पीछे

सूरत में विवादित स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी के ‘कॉमेडी’ शो के आयोजन से कार्यक्रम के आयोजक 2जोकर्स एंटरटेनमेंट के हटने के कुछ घंटों बाद ही, उसका पूरा गुजरात दौरा ही रद्द कर दिया गया। वहीं Bookmyshow, टिकटिंग प्लेटफॉर्म ने भी अपने ऐप पर फारूकी के पूरे गुजरात दौरे को डीलिस्ट कर दिया। बता दें कि देवी-देवताओं का अपमान करने वाले फारुकी के शो सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा में क्रमशः 1, 2 और 3 अक्टूबर को होने वाले थे।

जैसा कि Bookmyshow ऐप में देखा जा सकता है, मुनव्वर फारूकी का गुजरात दौरा, जो उसके ‘डोंगरी टू नोव्हेयर’ नाम के दौरे का एक हिस्सा था, बंद हो गया है।

कुछ घंटे पहले ही ये खबर मिली है कि सूरत में भी उनका शो रद्द कर दिया गया, क्योंकि पार्थ ब्रह्मभट्ट द्वारा संचालित इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ने शो के आयोजन से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। यह बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों द्वारा शो के संचालन के खिलाफ विरोध दर्ज कराने के बाद हुआ है। उन्होंने फारूकी पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था।

इससे पहले पार्थ ब्रह्मभट्ट ने शो को रद्द करने से इनकार कर दिया था और बजरंग दल से कहा था कि अगर वो इस शो को रद्द करवाना चाहते हैं तो कानूनी तरीके से आएँ ब्रह्मभट्ट ने यह भी कहा था कि फारूकी को एक कॉमेडी शो के दौरान हिंदू विरोधी चुटकुले बनाने के आरोपों पर उसे ‘क्लीन चिट’ मिली थी और इसलिए वह (ब्रह्मभट्ट) शो के आयोजन से पीछे नहीं हटेंगे।

हालाँकि, ऐसा लगता है कि जब हिंदू संगठनों ने जोर देकर कहा कि वे खुद इस शो का टिकट लेंगे और दर्शकों के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करके अपना ‘शो’ करेंगे, तो उसके बाद ब्रह्मभट्ट ने इसे कैंसिल करने का फैसला किया।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते सूरत में बजरंग दल के सदस्यों ने शहर में कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का शो आयोजित करने वाले आयोजकों को चेतावनी जारी की थी। उसमें ये कहा गया था कि फारूकी कुछ ‘कॉमेडी क्लिप’ 2002 के गोधरा दंगों के हिंदू पीड़ितों का कथित रूप से अपमान कर रहा है। उसने गुजरात नरसंहार में RSS की भागीदारी और कॉमेडी के नाम पर हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाया था।

मार्च 2020 में YouTube पर अपलोड किए गए एक वीडियो में मुनव्वर फारूकी ने 2002 के गोधरा नरसंहार का मज़ाक उड़ाया, जहाँ अयोध्या से लौट रहे 58 हिंदुओं को मुस्लिम भीड़ ने जिंदा जला दिया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई क्लिप में उसे विवादित बयान देते सुना जा सकता है। उसपर अपने ‘कॉमेडी’ शो के नाम पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का भी आरोप लगाया गया है। जिसे मध्य प्रदेश के इंदौर में जनवरी 2021 में 56 दुकान के पास मुनरो कैफे में आयोजित किया गया था।

43 साल पहले 3500 शेयर खरीद भूले, अब कीमत ₹1448 करोड़: केरल के बाबू जॉर्ज की किस्मत पलटी, पर पैसे दूर की कौड़ी

कहते हैं की जब किस्मत मेहरबान होती है तो एक पल में सब कुछ बदल जाता है। ऐसा ही कुछ केरल के बाबू जॉर्ज वालावी के साथ हुआ। 43 साल पहले शेयर में किया निवेश जब जॉर्ज को याद आया तो पता चला कि वे सैकड़ों करोड़ के मालिक बन चुके हैं। हालाँकि कंपनी उन्हें भुगतान करने में आनकानी कर रही है और मामला भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास है।

बाबू जॉर्ज ने 1978 में 3500 शेयर्स खरीदे थे। आज इनकी कीमत 1448 करोड़ हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब 74 वर्षीय बाबू जॉर्ज और उनका परिवार यह साबित करने में लगे हुए हैं कि कंपनी के शेयर्स के असली मालिक वे ही हैं। बताया जा रहा है कि बाबू जॉर्ज ने अपने चार रिश्तेदारों के साथ मेवाड़ ऑयल ऐंड जनरल मिल्स लिमिटेड (Mewar Oil and General Mills Ltd) के 3500 शेयर्स खरीदे थे। उस वक्त यह कंपनी उदयपुर की एक अनलिस्टेड कंपनी हुआ करती थी।

बाबू जॉर्ज ने ये शेयर तब खरीदे थे जब वे एक कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर हुआ करते थे। उस समय 3500 शेयर ख़रीद वे इस कंपनी में 2.8% के हिस्सेदार बन गए थे। कंपनी के फ़ाउंडर-चेयरमैन पीपी सिंघल और बाबू जॉर्ज दोस्त भी थे। उस वक्त कंपनी अनलिस्टेड थी और कोई Dividend नहीं दे रही थी, जिसके चलते बाबू जॉर्ज और उनका परिवार अपने निवेश को भूल गया।

2015 में बाबू जॉर्ज कुछ पुराने दस्तावेज़ देख रहे थे। तब उन्हें याद आया कि उन्होंने उदयपुर की एक कंपनी में निवेश किया था। बाबू के पास ऑरिजिनल शेयर डॉक्यूमेंट थे और उन्होंने शेयर्स के बारे में और जानकारी जुटाने की कोशिश शुरू की। उन्हें जानकारी मिली कि Mewar Oil and General Mills Ltd अब PI Industries बन गई है और यह कंपनी लिस्टेड भी हो चुकी है। पता चला कि यह कंपनी मुनाफा भी कमा रही है।

अपने शेयर्स को लेकर बाबू जॉर्ज ने कंपनी से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि वे कंपनी के हिस्सेदार नहीं हैं और उनके शेयर्स किसी और को 1989 में ही बेच दिए गए थे। उन्होंने कंपनी पर आरोप लगाया है कि गैरकानूनी ढंग से डुप्लीकेट शेयर्स का उपयोग कर उनके शेयर किसी और को बेच दिए गए हैं।

कंपनी ने भी उनके दावों की जाँच की। इसके बाद साल 2016 में पीआई इंडस्ट्रीज ने मध्यस्थता के लिए उन्हें दिल्ली बुलाया। उन्होंने इससे इनकार कर दिया। तब कंपनी ने उनके डॉक्यूमेंट्स की जाँच करने के लिए दो बड़े अफसर केरल भेजे। कंपनी ने माना कि उनके पास मौजूद डॉक्यूमेंट्स ऑरिजिनल हैं। बावजूद इसके कंपनी उन्हें पैसे देने में आनाकानी कर रही है।

इसे देखते हुए बाबू जॉर्ज ने SEBI का दरवाज़ा खटखटाया। लगभग छह साल पहले सेबी में शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उन्हें अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला है। वहीं एक अन्य मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि पीआई इंडस्ट्रीज ने SEBI की जाँच के जवाब में दावा किया कि 1989 में शेयर अन्य लोगों को ट्रांसफर कर दिया गया था।

बाबू ने कहा, “निवेशकों की आखिरी उम्मीद माने जाने वाला SEBI यदि समय पर कार्रवाई नहीं कर रहा है तो इसका क्या फायदा? इससे कई निवेशकों को गलत संदेश जाएगा कि SEBI और भारत सरकार मामले में ठीक से काम नहीं कर रहा। मुझे न्याय चाहिए और न्याय में देरी नहीं हो सकती।” वालावी चाहते हैं कि SEBI मामले की तत्परता से जाँच कर और उन्हें उनका पैसा दिलाए।

भवानीपुर में BJP उपाध्यक्ष दिलीप घोष पर हमला, TMC के गुंडों पर ‘हत्या की कोशिश’ के आरोप: चुनाव आयोग ने माँगा जवाब

पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में प्रियंका टिबरेवाल के लिए चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दिलीप घोष पर हमला हुआ है। सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों पर उनके साथ धक्का-मुक्की करने के आरोप लगे हैं। भवानीपुर में सोमवार (27 सितंबर, 2021) को चुनाव प्रचार का आखिरी दिन है, ऐसे में भाजपा ने अपने 80 नेताओं को विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में चुनाव प्रचार के लिए लगाया है।

दिलीप घोष पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। उन पर जब हमला हुआ, तब किसी तरह उनके सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहाँ से निकाला। उन्होंने पूछा कि जब राज्य में मुख्यमंत्री के ही गृह क्षेत्र में ही एक जनप्रतिनिधि पर हमला किया जाता है तो सोचिए, राज्य में आम आदमी की क्या हालत होगी? जागुबबूर बाजार में उन पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि ये हमला सत्ताधारी दल के घृणित और डरावनी प्रकृति को उजागर करता है।

उन्होंने कहा, “ये एक पूर्व-नियोजित हमला था, जो TMC के गुंडों व अपराधियों द्वारा मेरी हत्या के उद्देश्य से किया गया था। क्या इस घटना के बाद स्वच्छ तरीके से चुनाव कराए जा सकते हैं?” उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के गुंडों ने पुलिस की भी पिटाई की है। उन्होंने कहा कि ये लोगों को डराने के लिए किया गया है, ताकि वो वोट देने नहीं निकले। इस घटना के वीडियोज भी सोशल मीडिया पर शेयर किए गए हैं।

स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि TMC के गुंडों को वहाँ से हटाने के लिए दिलीप घोष के सुरक्षाकर्मियों को उन पर बंदूक ताननी पड़ी। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा कि भाजपा को भवानीपुर में चुनाव प्रचार से रोका जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार से जवाब माँगा है। आज शाम 4 बजे तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने भी कहा कि जितनी भी हिंसा हो, भाजपा की जीत पक्की है।

बता दें कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में गुरुवार (30 सितंबर, 2021) को उपचुनाव होने हैं और मुख्यमंत्री के पद पर बने रहने के लिए ममता बनर्जी के लिए ये चुनाव जीतना अनिवार्य है। नंदीग्राम से भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें हरा दिया था। राजधानी कोलकाता में भी भाजपा व TMC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई है। भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि TMC के असहिष्णु कार्यकर्ता भाजपा वालों को प्रताड़ित कर रहे हैं।

ED रेड के बाद शिवसेना नेता की तबीयत बिगड़ी: एजेंसी ने जेल में आजम से की पूछताछ, गहलोत के भाई पर भी कसा शिकंजा

महाराष्ट्र में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद शिवसेना नेता और अमरावती से पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल की तबीयत बिगड़ने की खबर सामने आई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शिवसेना नेता और उनके बेटे अभिजीत अडसुल सिटी को-ऑपरेटिव बैंक में 980 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है। इसी मामले में ईडी की टीम ने उनके घर पर दबिश दी थी।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, अडसुल को हिरासत में लेने के बाद पूछताछ के लिए ईडी ऑफिस लाया जा रहा था, तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।

ईडी ने अडसुल और उनके बेटे को समन जारी कर सोमवार (27 सितंबर 2021) से पहले हाजिर होने को कहा था। लेकिन उन्होंने दिल्ली में पूर्व निर्धारित व्यस्तताओं का हवाला दे इसमें असमर्थता जताई थी।

कथित तौर पर, यह दूसरी बार है जब शिवसेना नेता के आवास पर तलाशी ली गई है। ईडी ने उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने के बाद आवास के अलावा उनसे जुड़े छह अन्य परिसरों की तलाशी भी ली है। एजेंसी ने जाँच और तलाशी के दौरान कई दस्तावेज जुटाए।

दरअसल, सिटी को-ऑपरेटिव बैंक के पूर्व अध्यक्ष अडसुल ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में एक शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने बैंक अधिकारियों द्वारा ऋण के माध्यम से धन की हेराफेरी और अवैध हस्तांतरण का आरोप लगाया गया था। शिवसेना नेता ने बैंक अधिकारियों पर संस्थाओं और लोगों को बहुत कम या बिना जमानत के ऋण देने का आरोप लगाया था। ईडी ने अडसुल की शिकायत के आधार पर जाँच शुरू की थी और इस मामले भी उनकी भूमिका की भी पड़ताल हो रही है।

अशोक गहलोत के भाई को नोटिस

यूपीए शासनकाल में हुए करोड़ों रुपए के उर्वरक घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अग्रसेन गहलोत को पूछताछ के लिए तलब किया है। साल 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में अग्रसेन गहलोत और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। अग्रसेन राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बड़े भाई हैं। अग्रसेन गहलोत पर आरोप है कि उनकी कंपनी अनुपम कृषि ने साल 2007 एवं 2009 में सरकार की अनुमति के बिना खाद विदेश भेजा। मामले में जुलाई 2021 में ईडी ने अग्रसेन से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी भी की थी। कॉन्ग्रेस नेता के भाई पर 35000 मीट्रिक टन से अधिक पोटेशियम क्लोराइड विदेश भेजने का आरोप है, जबकि इसका निर्यात प्रतिबंधित है। इसका मूल्य 130 करोड़ रुपए था, जो वास्तव में किसानों के लिए था। ईडी ने पहले भी उन्हें बुलाया था, लेकिन वह जाँच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए थे।

अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी भी रडार पर

सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान से भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय की दो सदस्यीय टीम ने पूछताछ की। आजम खान के अलावा, ED मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में पूर्व बसपा विधायक मुख्तार अंसारी से भी जल्द पूछताछ कर स​कती है। वहीं, बसपा का पूर्व सांसद अतीक अहमद भी ईडी के निशाने पर हैं। इस समय मुख्तार अंसारी यूपी की बाँदा जेल में बंद है, जबकि अतीक अहमद गुजरात की अहमदाबाद जेल में बंद है। गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी पर गाजीपुर पुलिस ने उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। यूपी सरकार राज्य भर में फैली अंसारी की कई अवैध संपत्तियों को ध्वस्त कर रही है। साथ ही योगी सरकार ने अंसारी के सहयोगियों के अवैध व्यवसायों पर भी नकेल कसी है।

प्रयागराज से पूर्व सांसद अतीक अहमद वर्तमान में अहमदाबाद की जेल में बंद है। उसके खिलाफ हत्या, अपहरण, अवैध खनन, जबरन वसूली, डराने-धमकाने और धोखाधड़ी सहित 90 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसे साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश से अहमदाबाद की जेल में ट्रांसफर किया गया था।

किसान नेता ने ही ‘भारत बंद’ को बताया आतंकी हरकत: सिंघु बॉर्डर पर मौत, गाजीपुर बॉर्डर से कॉन्ग्रेस नेता को लौटाया

भारत बंद के चलते दिल्ली-एनसीआर में लोगों को भीषण जाम की दिक्कत तो पेश आ रही है, लेकिन इसका असर अन्य क्षेत्रों मसलन कारोबारियों-व्यापारियों पर नहीं है। देश की राजधानी दिल्ली में भारत बंद का असर बिल्कुल भी नहीं है। स्कूल, कालेज, दुकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान सब कुछ खुला है। वहीं गाजीपुर में हिरासत में लेकर किसान नेताओं को बस से पुलिस लाइन भेजा गया है। नागपुर में संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदर्शनकारियों ने जबरन लोगों की दुकानें बंद करवाईं

इधर बिहार में बंद समर्थकों ने पटना जंक्‍शन के पास वाहनों में तोड़फोड़ की और अशोक राजपथ पर आगजनी व हंगामा किया। दरभंगा में बिहार संपर्क क्रांति एक्‍सप्रेस को रोक दिया। इतना ही नहीं, हाजीपुर में आरजेडी कार्यकर्ताओं ने आगजनी तथा सड़कों पर निकले रिक्‍शा चालकों से मारपीट भी की।

इस बीच भारतीय किसान यूनियन भानु गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने संयुक्त किसान मोर्चा के भारत बंद को आतंकी हरकत बताया है। एटा में सोमवार (सितंबर 27, 2021) को प्रेसवार्ता कर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि भारत बंद का कोई सहयोग ना करें। इसका विरोध करें। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन जो आतंकी गतिविधियों में शामिल हैं उनको सरकार दबाने की कोशिश करे।

उन्होंने कहा, “इसमें किसान का क्या फायदा है? मैं ये पूछना चाहता हूँ। जो भारत बंद की घोषणा कर रहे हैं वो केवल ये बताएँ कि हम किसानों के किस फायदे के लिए ये कर रहे हैं? जैसे आतंकवादी संगठन तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया है, उस तरह की गतिविधियों को ये बढ़ाना चाहते हैं। इसलिए भारतीय किसान यूनियन भानु के समस्त पदाधिकारियों से और ब्लॉक से लेकर सभी को अह्वान करता हूँ कि भारत बंद का सहयोग न करें। भारत बंद का सब लोग विरोध करें और सरकार से भी ये निवेदन करना चाहता हूँ कि ऐसे संगठन, जो आतंकवादी गतिविधियों (26 जनवरी से हम देख रहे हैं) में लिप्त हैं, उन्हें सरकार दबाने की कोशिश करें। भानु प्रताप सिंह की ये उत्तर प्रदेश सरकार से, सभी प्रदेशों की सरकार से और केंद्र सरकार से ये माँग है।”

इधर गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि क़ानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में पहुँचे कॉन्ग्रेस नेता और डीपीसीसी अध्यक्ष अनिल चौधरी को प्रदर्शनकारियों ने गैर राजनीतिक प्रदर्शन बताते हुए उन्हें धरना स्थल से उठने को कहा।

बता दें कि कॉन्ग्रेस ने शुरू से किसान आंदोलन का सियासी फायदा लेने की कोशिश की है। भारत बंद के दौरान भी दिल्ली के अनिल चौधरी ने ऐसा ही करने की कोशिश की, लेकिन किसानों ने उल्टे पाँव लौटा दिया। गाजीपुर पर मौजूद किसानों ने अनिल चौधरी से कहा कि क्या आप इसे कॉन्ग्रेस का आंदोलन बनाना चाहते हैं।

वहीं प्रदर्शन के दौरान दिल्ली-सिंघु बॉर्डर पर एक किसान की मौत हो गई है। पुलिस का कहना है कि दिल का दौरा पड़ने से उसकी जान गई है। मृतक किसान की पहचान भगेल राम के तौर पर हुई है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि पोस्टमॉर्टम के बाद इसे लेकर ज्यादा जानकारी दी जा सकेगी।

उल्लेखनीय है कि भारत बंद से दिल्ली बेअसर है। हालाँकि दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम में भारी जाम लगा है। गाड़ियों की कई किलोमीटर लंबी कतार लगी है जिसमें लोग काफी देर से फँसे हुए हैं। आलम ये है कि कोई ऑफिस, कोई अस्पताल के लिए घर से निकला, लेकिन भारी जाम में फँस गए।

शाम चार बजे तक बंद का एलान है। ऐसे में जाम में लोग कब तक फँसे रहेंगे कह पाना मुश्किल है। कुल मिलाकर भारत बंद की कीमत आम लोग चुका रहे हैं। भारत बंद सुबह 6 बजे से शुरू हो गया है और शाम 4 बजे तक चलेगा। दिल्ली के अलग अलग बॉर्डर पर प्रदर्शन चल रहा है। स्थिति काबू में रहें, इसके लिए दिल्ली पुलिस ने भी कमर कस ली है।

किसानों के भारत बंद से मुंबई अहमदाबाद हाइवे पर भी लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस हाइवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया है। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने हाइवे पर जबरन गाड़ियों को रोका है। हजारों यात्री हाइवे पर फँसे हुए हैं। हाइवे के रास्ते मुम्बई, ठाणे, नवी मुंबई की ओर जाने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इंदिरा ने दी ‘पनाह’ और 37 से 12000 परिवार हो गए घुसपैठिए: असम में पुलिस पर हमले से पहले भी मिले थे कॉन्ग्रेसी, नेटिजन्स खोल रहे पोल

असम के सिपाझार में अवैध अतिक्रमणकारियों से 7000 बीघा जमीन खाली कराने गई पुलिस पर हमले के बाद से ही वहाँ अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा जमीन पर कब्जे का मुद्दा चर्चा में है। 1983 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने भी असम के धौलपुर का दौरा किया था। वहाँ जाकर उन्होंने इलाके में बसे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रति सहानुभूति जताई थी और उन्हें अपना समर्थन दिया था।

ये वो समय था जब असम का माहौल गर्म था और वहाँ आंदोलन व विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। वहाँ के स्थानीय लोगों में घुसपैठियों के प्रति उबाल था, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी ने आदिवासियों का साथ देने की बजाए अवैध घुसपैठियों पर अपना हाथ रखा। आज भी यही कॉन्ग्रेस बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF के साथ गठबधन करती है और वो इन्हीं अवैध घुसपैठियों के साथ खड़ी है। कॉन्ग्रेस राज में ही सारा अतिक्रमण भी हुआ।

‘वॉइस ऑफ असम’ नाम के ट्विटर हैंडल ने आरोप लगाए हैं कि काफी पहले से ही कॉन्ग्रेस ने असम में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाना शुरू कर दिया था। उन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए ऐसा किया। असम की आज जो स्थिति है, उसमें कॉन्ग्रेस का ही योगदान है। एक सरकारी समिति की रिपोर्ट में भी इसका जिक्र था कि कैसे भ्रष्ट अधिकारियों और मुस्लिम तुष्टिकरण वाले नेताओं ने वोट बैंक की राजनीति के लिए घुसपैठियों को खुला अतिक्रमण करने दिया।

कई ऐसे वीडियोज भी सामने आए हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस नेताओं को धौलपुर के अतिक्रमणकारियों के यहाँ दौरा करते हुए देखा जा सकता है। आखिर जहाँ जमीन खाली कराई जानी थी, वहाँ कॉन्ग्रेस नेताओ ने दौरा क्यों किया? क्या उन्होंने वहाँ जाकर उनसे कहा होगा कि वो सरकारी कार्य में सहयोग करें? न कॉन्ग्रेस का चरित्र ऐसा है और न ही सबूत ऐसा कहते हैं। उन्होंने वहाँ जाकर लोगों को भड़काया और विरोध प्रदर्शन करने लगे।

इस दौरान उन्होंने एक बड़ा बैनर भी लिया था। साफ़ है कि इंदिरा गाँधी के कार्यकाल और तानाशाही वाले दौर में बसाए गए इन अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के साथ कॉन्ग्रेस आज भी खड़ी है। वो अपना वोट बैंक बचा रहे हैं। 1983 में इन्हीं घुसपैठियों ने असम के 8 स्थानीय नागरिकों को मार डाला था, क्योंकि वो अपनी जमीनें इन अतिक्रमणकारियों से वापस लेने के प्रयास में लगे थे। तब वो 60 थे, आज 12,000 परिवार हैं।

अब उन्होंने असम पुलिस के जवानों पर हमला किया है। असम के स्थानीय नागरिकों का इतिहास 5000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। जहाँ तक धौलपुर अतिक्रमण की बात है, 70 के दशक में नगाँव से 37 परिवार यहाँ आए थे। 1981 के अंत तक 100 परिवार यहाँ बस गए। यहाँ के शिव मंदिर को निशाना बनाया गया। इंदिरा गाँधी के समय जब असम जल रहा था, तब कॉन्ग्रेस की मदद से मंदिर की 180 बीघा जमीन हथिया ली गई।

इसके बाद पूरे क्षेत्र में 77,000 बीघा जमीन अतिक्रमणकारियों के कब्जे में चली गई। धौलपुर का 5000 वर्ष पुराना शिव मंदिर ब्रह्मपुर नदी के बीच में स्थित धौलपुर की पहाड़ी पर विद्यमान है। इसे किरात समुदाय द्वारा बनवाया गया था। अहोम और नेपाली राजाओं ने भी इसे संरक्षण दिया। 14वीं शताब्दी में प्राकृतिक आपदाओं से इसे नुकसान पहुँचा था। दरंग जिले का ये काफी सुंदर स्थल है। 1979 तक यहाँ हिन्दुओं के ही केवल खेत थे और गौशाला हुआ करते थे।

फरवरी 1983 में असामाजिक तत्वों ने शिव मंदिर के पुजारी शिवा दास की हत्या कर दी। एक अन्य पुजारी कार्तिक दास को बगल के गाँव में भगा दिया गया। असम में हुए आंदोलन में 855 लोग बलिदान हो गए थे। ‘वॉइस ऑफ असम’ के अनुसार, 2011 में पुजारी कार्तिक दास के निधन के बाद उनकी विधवा को एक मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करने को मजबूर किया गया। उनके अलावा उनके बच्चों को भी इस्लाम में धर्मांतरित कर दिया गया।

अब पता चला है कि भारत के सबसे छोटे राज्य गोवा के क्षेत्रफल का दोगुना इलाका तो असम में सिर्फ अतिक्रमण की जद में है। कुल मिला कर 49 लाख बीघा, अर्थात 6652 स्क्वायर किलोमीटर की भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। असम के जूनियर राजस्व मंत्री पल्लव लोचन दास ने इस संबंध में 2017 में जानकारी दी थी। ये क्षेत्र सिक्किम के क्षेत्रफल से कुछ ही कम है। 3172 स्कववायर किलोमीटर के जंगल की भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है।