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2022 के चुनावों में चाहिए टिकट? ₹11 हजार के साथ टैग करें CV: UP में कॉन्ग्रेस का खुला ऑफर

2022 के विधानसभा चुनावों के लिए उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक सर्कुलर जारी किया है। ये उन लोगों के लिए है जो आगामी चुनावों में टिकट पाना चाहते हैं। सर्कुलर के मुताबिक, आवेदन करने वालों को अपने आवेदन के साथ साथ 11 हजार रुपए की डोनेशन भी देनी होगी।

14 सितंबर को ये सर्कुलर जारी हुआ था। इस पर उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू के हस्ताक्षर भी हैं। इसमें लिखा गया है कि 25 सितंबर तक डिमांड ड्राफ्ट, आरटीजीएस और मनी ऑर्डर के जरिए राशि जमा की जा सकती है। इस संबंध में जिला इकाइयों को भी बताया गया है कि ये दान कैसे जमा किया जाए।

अब इस पूरे मामले में यह स्पष्ट नहीं है कि पार्टी इस राशि को सहयोग राशि के तौर पर ले रही है या फिर अगर आवेदनकर्ता को टिकट नहीं मिली तो उसके पैसे वापस लौटाए जाएँगे।

हालाँकि, आगे यह देखना तो दिलचस्प होगा कि कितने टिकट चाहने वाले अपने सीवी के साथ नकद राशि देते हैं। लेकिन, फिलहाल इस सर्कुलर पर विवाद हो रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या इस तरह टिकट के नाम पर दान लेना उचित है।

इस सर्कुलर पर अजय कुमार लल्लू ने सफाई भी दी है। उन्होंने इस निर्णय को सही बताते हुए कहा कि यह योगदान राशि है जो किसी भी संस्था या संगठन को कार्य करने के लिए समर्थन करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस पारदर्शी तरीके से काम कर रही है। हमने इसके लिए एक सर्कुलर जारी किया है।”

बता दें कि उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस का दोबारा से आना इस बार भी कई लोगों को मुश्किल लग रहा है। मगर, अजय कुमार लल्लू लगातार दावा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में लौटेंगें और उनका इरादा आगे समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसी पार्टियों से मिलने का है। याद दिला दें 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने 403 विधानसभा सीटों में से 312 सीटें जीती थी। बसपा को 19 सीटें मिली थी और सपा-कॉन्ग्रेस को मिल कर 54 सीटें हाथ आई थीं।

UNHRC में कश्मीर का मुद्दा उठाना पाक को पड़ा भारी: भारत ने OIC को भी घेरा, कहा- ‘आतंकी देश से हमें सीखने की जरूरत नहीं’

भारत ने बुधवार (15 सितंबर 2021) को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में कश्मीर का मुद्दा उठाने पर पाकिस्तान के साथ-साथ इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) पर जमकर निशाना साधा है। मानवाधिकार परिषद के 48वें सत्र में भारत ने कहा, ”पाकिस्तान को विश्व स्तर पर एक ऐसे देश के रूप में मान्यता दी गई है जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों का खुले तौर पर समर्थन करता है। इसके साथ ही वह उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और सशस्त्र आतंकवादियों को देश की नीति के रूप में मान्यता देता है।” यह प्रतिक्रिया भारत की ओर से पवन बधे, जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव ने दी है।

कश्मीर पर पाकिस्तान और ओआईसी द्वारा की गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए बधे ने कहा कि उसे पाकिस्तान जैसे असफल देश से सीखने की आवश्यकता नहीं है, जो आतंकवाद का केंद्र है और मानवाधिकारों का सबसे अधिक दुरुपयोग करता है। उन्होंने कहा कि भारत के खिलाफ अपने झूठे और द्वेषपूर्ण प्रचार को प्रचारित करने के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग करना पाकिस्तान की आदत बन गई है।

बधे ने कहा, “परिषद पाकिस्तान की सरकार की ओर से किए जा रहे गंभीर मानवाधिकारों के उल्लंघन से उसका ध्यान हटाने के प्रयासों से अवगत है, जिसमें उसके कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं।” उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में क्या हो रहा है इससे सभी भलि-भाँति परिचित हैं। दुनिया के सबसे बड़े, मजबूत और जीवंत लोकतंत्र भारत को पाकिस्तान जैसे नाकाम देश सीखने की जरूरत नहीं है, जो आतंकवाद का केंद्र है।”

भारतीय राजनयिक ने कहा कि पाकिस्तान सिख, हिंदू, ईसाई और अहमदिया समेत अपने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रहा है। उसने हमेशा UNHRC के मंच का इस्तेमाल झूठ और दुर्भावनापूर्ण एजेंडे को फैलाने के लिए किया है।

बधे ने अपने बयान में आगे कहा, “पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदायों की हजारों महिलाओं और लड़कियों का अपहरण, जबरन निकाह और धर्म परिवर्तन हुआ है।” वह अपने यहाँ अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता है। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाएँ, जिसमें उनके पूजा स्थलों, उनकी सांस्कृतिक विरासत और साथ ही उनकी निजी संपत्ति पर हमले शामिल हैं। पाकिस्तान में ऐसा करने वालों को दंडित भी नहीं किया गया है।

बता दें कि अगस्त में पाकिस्तान में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने भगवान गणेश के मंदिर में तोड़फोड़ कर उसे आग के हवाले कर दिया था। वहीं, कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर भी हिंदूओं के साथ बर्बरता की गई थी। कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदूओं पर हमला किया, उन्हें पूजा करने से रोका और भगवान कृष्ण की मूर्तियाँ तोड़ दी थी।

आयकर के चंगुल में फँसे एक्टर सोनू सूद: अकाउंट्स बुक से छेड़छाड़ के मामले में IT विभाग ने उनसे जुड़े 6 ठिकानों पर किया सर्वे

बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद आयकर में गड़बड़ी के मामले में घिर गए हैं। उनके अकाउंट्स बुक में गड़बड़ी पाए जाने के बाद इनकम टैक्स विभाग की टीम ने एक्टर के मुंबई स्थित दफ्तर में सर्वे किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद की मुंबई और लखनऊ शहरों की छह प्रॉपर्टीज पर आयकर विभाग ने बुधवार को सर्वे किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, आईटी विभाग ने सोनू की संपत्ति का इसलिए सर्वे किया है, क्योंकि कथित तौर पर उनसे से संबंधित अकाउंट्स से छेड़छाड़ की गई थी। इसके पहले उनके रेजिडेंशियल बिल्डिंग को हॉटेल में कन्वर्ट करने पर BMC ने उनके ऊपर कार्रवाई की थी। हालाँकि रिपोर्ट में छापेमारी का जिक्र नहीं है। फिलहाल मिली जानकारी के अनुसार यह साफ नहीं हो पाया है कि आयकर विभाग के अधिकारी सोनू सूद के आवास पर भी गए थे या नहीं।  

गौरतलब है कि हाल ही सोनू सूद को दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने स्कूली छात्रों से संबंधित मेंटरशिप प्रोग्राम का ब्रांड एंबेसडर बनाया था। इसके बाद इस बात को लेकर चर्चाएँ गर्म हो गई थीं कि वो आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर सकते हैं, हालाँकि बाद में अभिनेता ने इससे इनकार कर दिया था।

एक अन्य साक्षात्कार में अभिनेता ने मीडिया पर ही निशाना साधते हुए ये आरोप लगाया कि मीडिया का एक वर्ग उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर प्रकाश डाला है। उन्होंने इन खबरों को निराधार बताया। बॉलीवुड एक्टर ने स्पष्ट किया था कि उनके परिवार और उनकी राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे किसी भी राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो रहे हैं।

गौरतलब है कि सोनू सूद कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान लोगों की मदद करने के नाम पर मशहूर हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 48 साल के अभिनेता हिंदी, तेलुगू, कन्नड़ औऱ तमिल फिल्मों में काम कर रहे हैं औऱ वो पीरियड ड्रामा फिल्म पृथ्वीराज में दिखाई देंगे। इसके अलावा सोनू तेलुगु एक्शन-ड्रामा ‘आचार्य’ में भी काम कर रहे हैं। एक्टर को साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान लोगों की मदद करने के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तहत स्पेशल ह्यूमैनिटेरियन एक्शन अवार्ड (SDG) से सम्मानित किया गया था। मौजूदा वक्त में सोनू सूद ‘सूद चैरिटी फाउंडेशन’ चला रहे हैं।

सिखों की धार्मिक भावना आहत करने के मामले में गुरदास मान को HC से मिली जमानत: ये है मामला जिसमें थी माहौल ख़राब होने की आशंका

अज्ञानतावश सिखों की धार्मिक भावनाएँ आहत करने के मामले में पंजाबी गायक गुरदास मान को आखिरकार राहत मिल गई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत की याचिका को स्वीकार कर लिया। साथ ही मामले से संबंधी जाँच में शामिल होने का आदेश दिया।

इससे पहले उनकी याचिका जालंधर कोर्ट में रिजेक्ट हुई थी। कथिततौर पर कोर्ट का कहना था कि अगर मान ने माफी माँगी है इसका मतलब है कि उन्होंने गलती की, इसलिए वह याचिका खारिज करते हैं। कोर्ट ने हवाला दिया था कि मान को जमानत देने के माहौल खराब हो सकता है (क्योंकि सिख उनके नाराज हैं और उनके विरुद्ध कार्रवाई चाहते हैं)।

जालंधर कोर्ट में याचिका खारिज होने के बाद ही मान ने हाईकोर्ट का रुख किया। जहाँ उनकी ओर से पेश वकीलों के समूह ने बताया कि गुरदास मान ने एक कलाकार के तौर पर अपना विनम्र योगदान दिया है। वह एक पंजाबी गीतकार हैं और उन्होंने सिख गुरुओं के सम्मान में कई गीत लिखे हैं जो दुनिया भर में सिखों और पंजाबियों के बीच प्रसिद्ध हुए। इसके अलावा साल 2005 में उन्हें राष्ट्रपति द्वारा जूरी पुरस्कार भी दिया गया था।

इस याचिका को पेश करते हुए आरएस चीमा, वकील अर्शदीप सिंह चीमा और तरन्नुम चीमा ने बताया कि धारा 295 (ए) जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्यों के लिए लागू किया गया है। इसका उद्देश्य केवल नाराजगी है। याचिका में मान के वकीलों ने यह भी उल्लेख किया है कि याचिकाकर्ता धर्म से सिख है और सभी सिख गुरुओं का एक भक्त भी है और सभी सिख प्रथाओं का पालन करता है।

बता दें कि जालंधर के नकोदर में डेरा बाबा मुराद शाह के डेरे पर आयोजित मेले के दौरान मान ने सिख गुरु श्री अमरदास जी और लाडी साईं जी के एक ही वंश के होने की बात कही थी। इसके बाद से वह विवादों में आ गए थे और उनके खिलाफ नकोदर में 26 अगस्त को धार्मिक भावनाओं को आहत करने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा कई जगह उनके विरुद्ध प्रदर्शन भी हुए थे। 

मामले को तूल पकड़ता देख गुरदास मान ने इस संबंध में माफी भी माँगी थी। हालाँकि उस माफी गौर नहीं दिया गया और उनके विरुद्ध एफआईआर हो गई। साथ ही जालंधर कोर्ट ने याचिका भी खारिज कर दी। अब लोग सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठा कर पूछ रहे हैं कि आखिर एक व्यक्ति जिसने ताउम्र सिख धर्म और पंजाबियों के लिए काम किया हो उस पर ईशनिंदा का आरोप कैसे लग सकता है।

मो. अमीन खान ने राजा पंडित बनकर 3 बच्चों की माँ को फँसाया: जबरन धर्मांतरण का दबाव, दहेज के लिए किया प्रताड़ित

उत्तर प्रदेश में जबरन धर्मांतरण कराने के मामले में हाल ही में पुलिस ने मोहम्मद अमीन खान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ तीन बच्चों की माँ पूजा पांडे को फँसाने और बाद में उसे दहेज, जबरन धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने के आरोप में 5 सितंबर 2021 को मामला दर्ज किया गया है।

पूजा पांडे अपने पति विशाल कुमार और तीन बच्चों के साथ तेलंगाना में रहती थीं। पिछले साल वह एक ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आई, जो उसके पति के लिए काम करता था। वह उसके झूठे प्यार के जाल में फँसकर अपने परिवार को छोड़कर उसके साथ भागकर उत्तर प्रदेश आ गई। हालाँकि, सच्चाई सामने आने के बाद पूजा ने अब अमीन खान और उसके परिवार वालों के खिलाफ शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और मारपीट करने का मामला दर्ज कराया है।

मोहम्मद अमीन ने खुद को राजा पंडित बताया

महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि उसके पति के लिए काम करने वाला मोहम्मद अमीन खान अपनी फर्जी पहचान बताकर उसके करीब आया था। उसने महिला को अपना नाम राजा पंडित बताया था। दोनों में नजदीकियाँ बढ़ने के बाद पूजा उसके साथ भागकर उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में आ गई थी।

शुरुआत में राजा उर्फ अमीन ने उसे शांति कॉलोनी में रखा। बाद में वह उसे अपने गाँव मसनाई ले गया। पूजा के बयान के अनुसार, अमीन खान के गाँव पहुँचने के बाद उसे पता चला कि वह एक मुसलमान है।

महिला ने आगे बताया कि अमीन के माता-पिता और परिवार वालों ने कुछ दिनों बाद ही उसे दहेज के लिए परेशान करना शुरू कर दिया। उन्होंने उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया। पीड़िता ने अमीन पर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने और उसे रिकॉर्ड करने का भी आरोप लगाया।

पुलिस को पीड़िता का बयान। साभार: स्वराज्य

विरोध करने पर अमीन ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। पीड़िता ने अपने बयान में अमीन पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया है।

कुछ मीडिया इंटरव्यू में पूजा ने यह भी बताया कि अमीन ने उससे कुछ दस्तावेजों पर साइन भी करवाए थे, जिन्हें वह पढ़ नहीं पाई थी। हालाँकि, उसे बाद में पता चला कि उन दस्तावेजों में साइन करवाकर उससे इस्लाम कबूल करवाया गया था। अब वह हिंदू से मुस्लिम में कन्वर्ट हो चुकी थी।

फिर अमीन ने उसे बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया, लेकिन उसने हिंदू होने के कारण पहनने से मना कर दिया। इस पर अमीन का परिवार गुस्सा हो गया। उन्होंने कहा कि अगर इसने बुर्का नहीं पहना तो गाँव वालों को पता चल जाएगा कि उनका बेटा एक हिंदू महिला को अपने घर पर ले आया है। पूजा ने यह भी आरोप लगाया कि अमीन का परिवार उसे अपना नाम बदलकर नसरीना रखने के लिए मजबूर कर रहा था।

यूपी पुलिस ने अमीन के परिवार वालों पर मामला दर्ज किया

महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अमीन खान के पिता जलालुद्दीन खान, माँ खेरुनिशन और भाइयों सलमान व अंसार पर उत्पीड़न का मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि आईपीसी की धारा 498 ए (दहेज), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुँचाना), 504 (अपमान करना), 419 (धोखाधड़ी) और दहेज निषेध अधिनियम व यूपी के गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण अध्यादेश 2020 से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

फ्रेंड्स कॉलोनी के थाना प्रभारी (एसएचओ) द्वारा स्वराज्य को दिए गए बयान के अनुसार, सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। अधिकारी ने यह भी बताया कि अमीन ने अदालत में पेश किए जाने पर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है।

हिंदू कार्यकर्ता ने केस दर्ज कराने में पीड़िता की मदद की

रिपोर्ट के मुताबिक, पूजा को नारायणी सेना के कार्यकर्ता अनुज पुरोहित ने एक स्थानीय अदालत के बाहर रोते हुए देखा था। महिला की आपबीती सुनने के बाद उसने अपनी संस्था के साथ मिलकर फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में पीड़िता की केस दर्ज कराने में मदद की थी।

पुरोहित ने पीड़िता को भरोसा दिलाया कि उसके लिए उन्होंने फ्रेंड्स कॉलोनी के पास किराए का घर उपलब्ध कराया है और जल्द ही उसका बड़ा बेटा उसे तेलंगाना वापस ले जाने के लिए आएगा। नारायणी सेना के कार्यकर्ता ने बताया, “जब तक उसका परिवार नहीं आएगा, हम उसकी देखभाल करेंगे।”

राजनीति के कालनेमि जप रहे लक्ष्मी-दुर्गा का नाम, गले में रामनामी-माथे पर चंदन: यूपी का चुनाव आया है क्या

हिंदू और मोदी घृणा से लथपथ मरहूम शायर आहत सॉरी राहत इंदौरी ने लिखा है;

सरहदों पर बहुत तनाव है क्या
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या

सरहदों का तो पता नहीं। पर राजनीति के कालनेमि पिछले कुछ समय में जिस तरीके से अपने-अपने दड़बों से निकलकर हिंदुओं की धार्मिक स्थलों की यात्रा कर रहे हैं, जिस तरह से हर मामले में हिंदुओं के देवी-देवताओं को स्मरण कर रहे हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि राजनीतिक तौर पर देश के सबसे प्रभावशाली प्रदेश, उत्तर प्रदेश में चुनाव का मौसम आ गया है।

राजनीतिक कालनेमि के करतूतों पर गौर करने से पहले असली वाले कालनेमि को याद कर लीजिए। रावण के एक मायावी राक्षस का नाम था कालनेमि। प्रसंग है कि राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से लक्ष्मण मूर्च्छित हो जाते हैं। सुषेन वैद्य उपचार के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत बताते हैं। इसे लाने की जिम्मेदारी हनुमान जी को दी जाती है। जब रावण को यह खबर मिलती है तो वह हनुमान जी को झाँसा देने के लिए कालनेमि को भेजता है। कालनेमि साधु के वेश में राम नाम के जाप और अपनी माया से हनुमान जी को रोकने की कोशिश भी करता है।

रावण के कालनेमि से अब राजनीति की ओर लौटते हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी बुधवार (15 सितंबर 2019) को ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस की स्थापना दिवस पर बोल रहे थे। इस दौरान बीजेपी को हिंदू विरोधी पार्टी बताते हुए उस पर देवी ‘लक्ष्मी’ और ‘दुर्गा’ की शक्ति को 10-15 लोगों की गिरवी बनाने का आरोप लगाया। हाल के दिनों में यह दूसरा मौका था जब राहुल की जुबान पर हिंदुओं की अराध्य देवियों का नाम था। इससे पहले जम्मू के त्रिकूटा नगर में कॉन्ग्रेसियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि बीजेपी के कारण दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती माँ की शक्तियाँ घटी हैं। अपने इस संबोधन की शुरुआत भी उन्होंने ‘जय माता दी’ से की थी। इस संबोधन से पहले वे माता वैष्णो देवी का दर्शन भी कर आए थे।

कुल मिलाकर राहुल गाँधी एक बार फिर अपनी उस राजनीति को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं जो 2017 में गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले देखने को मिली थी। तब वे न केवल मंदिर-मंदिर प्रदक्षिणा कर रहे थे, बल्कि उनके जनेऊधारी होने की बात भी सामने आई थी। बकायदा उनके गोत्र और ब्राह्मण होने का ऐलान हुआ था। उल्लेखनीय यह भी है कि गुजरात की तरह ही योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश बीजेपी के एक ऐसे गढ़ के तौर पर तब्दील होता दिख रहा है जो फिलहाल विपक्ष के लिए अभेद्य नजर आ रहा है।

लिहाजा विपक्षी दलों में खुद को हिंदू हितैषी साबित कर मतदाताओं को झाँसा देने की होड़ सी लगी है। कुछ-कुछ वैसे ही जैसे हनुमान जी को झाँसा देने में कालनेमि लगा था। यहाँ यह याद करना जरूरी है कि राहुल गाँधी जिस नेह​रू के नाम पर राजनीति करते हैं वे अयोध्या से रामलला को बेदखल करवाना चाहते थे। वे जिस कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता हैं उसके पाले-पोसे इतिहासकारों ने राम के अस्तित्व को नकारा। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार सुप्रीम कोर्ट में राम के काल्पनिक होने का हवाला तक देकर आई। उसकी सरकार के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह ने इस देश के संसाधनों पर बहुसंख्यक हिंदुओं के अधिकार को खारिज करते हुए अल्पसंख्यकों का हक बताया था। कुछ महीने पहले जब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर में निधि जुटाने का काम चल रहा था तब भी कॉन्ग्रेस नेता विष वमन से परहेज नहीं कर रहे थे। ऐसे में यह सवाल तो उठता है कि अचानक से कॉन्ग्रेस को हिंदू और उनकी आस्था इतनी प्रिय क्यों हो गई? क्या उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से इसका कोई रिश्ता है?

ऐसा नहीं है कि चोला केवल राहुल ने बदला है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया जो कभी रामजन्मभूमि स्थल पर यूनिवर्सिटी बनाने के पैरोकार थे, वे भी इस मौसम में अयोध्या हो आए हैं। उनके साथी राज्यसभा सांसद संजय सिंह कुछ समय पहले तक रामजन्मभूमि ट्रस्ट पर जमीन घोटाले का आरोप लगा रहे थे और अब गले में रामनामी तथा माथे पर चंदन लेप खुद को रामभक्त साबित करने में लगे हैं। अचानक से सुर तो उस सपा के भी बदले हैं जिसकी सरकार रहते अयोध्या को कार सेवकों के खून से रंग दिया गया था। जिसके नेता मुलायम सिंह यादव अपने इस कारनामे के लिए खुद को ‘मुल्ला मुलायम’ कहे जाने पर फूले नहीं समाते थे। जिस बसपा के कांशीराम अयोध्या में शौचालय बनवाने की बात करते थे, आज उस पार्टी की राजनीति के केंद्र में भी अयोध्या है। राम हैं।

पर राजनीति के कालनेमि शायद यह भूल गए हैं कि रावण का वह मायावी राक्षस भी तमाम छल-प्रपंच के बावजूद अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाया था। चोले बदलने वाले तब राम के हनुमान को उनके ध्येय से भटका न सके थे। लोकतंत्र के हनुमान (वोटर) भी इन मौसमी चोलों को अब खूब पहचानते हैं।

राजस्थान से हिंदुओं का पलायन: BJP सांसद ने की तालिबान से तुलना, कॉन्ग्रेसी MLA रफीक खान ने कहा – ‘मानसिक दिवालियापन’

राजस्थान से ठीक एक सप्ताह पहले एक खबर आई थी। खबर पलायन से संबंधित थी। खौफ में जीते हिंदुओं के पलायन की खबर। जिला टोंक, कस्बा मालपुरा से। आज (15 सितंबर 2021) एक और खबर आई है। जिला अलवर से। हिंदुओं के पलायन की।

अलवर के भाजपा सांसद बाबा बालकनाथ ने भिवाड़ी, बहरोड़, नीमराना और बानसूर में मुस्लिम समुदाय के अत्याचारों के मुद्दे को उठाया है। इनके अनुसार इन इलाकों से हिंदू पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। साथ ही उद्योगपति लोग परेशान होकर अपनी फैक्ट्री/इकाइयाँ बंद कर रहे हैं।

सांसद बाबा बालकनाथ ने आरोप लगाया है कि पुलिस और स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता बदमाशों को संरक्षण देते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने की माँग भी रखी। उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री के पास गृह विभाग होने के कारण यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है।

दरअसल भिवाड़ी में एक घटना घटी थी। यहाँ बदमाशों ने सरेआम एक बेकरी पर 30 राउंड फायरिंग उस समय की, जब बेकरी में 70 लोग मौजूद थे। इस घटना और भिवाड़ी, नीमराणा, बहरोड़, बानसूर आदि जगहों में गैंगरेप, लूट, फायरिंग और ठगी की घटनाओं का जिक्र करते हुए सांसद बाबा बालकनाथ ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा।

सांसद बाबा बालकनाथ ने गहलोत सरकार की तुलना तालिबान से कर दी। इसके बाद भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने भी कहा कि राजस्थान में कानून का राज नहीं है। हालाँकि कॉन्ग्रेस विधायक रफीक खान ने अपने मुख्यमंत्री गहलोत और उनकी सरकार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता लोग मानसिक दिवालियापन से गुजर रहे हैं।

₹64 हजार करोड़ की ‘आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना’ को मोदी सरकार ने दी मंजूरी: जानें क्या है पूरी योजना

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार (15 सितंबर 2021) को 64 हजार करोड़ रुपए की आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना (पीएमएएसबीवाई) योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के अंतर्गत सभी जिलों और 3,382 ब्लॉकों में एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला की स्थापना की जाएगी।

आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना का ऐलान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2021-22 के बजट भाषण के दौरान किया था। इसके तहत यह तय किया गया था कि अगले 6 सालों में यानि वित्त वर्ष 2025-26 तक में करीब 64,160 करोड़ रुपए खर्च किए जाएँगे। हालाँकि यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अतिरिक्त होगा। इस बात की जानकारी खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई है।

इस योजना के जरिए हेल्थ केयर सिस्टम की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही नई बीमारियों का पता लगाने के लिए संस्थानों को विकसित किया जाएगा।

वेलनेस सेंटरों की होगी स्थापना

रिपोर्ट के मुताबिक, आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के अंतर्गत देश के जिन राज्यों में इसकी अधिक आवश्यकता होगी, वहाँ 17878 गाँवों में वेलनेस सेंटर बनाए जाएँगे। इसके अलावा शहरों में भी 11,024 केंद्रों की स्थापना की जाएगी। 602 जिलों और 12 केंद्रीय संस्थानों में क्रिटिकल केयर अस्पतालों को खोला जाएगा। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल को और अधिक मजबूती प्रदान की जाएगी।

इसके तहत 15 आपातकालीन ऑपरेशन सेंटर, दो मोबाइल हॉस्पिटल के अलावा 10 लक्षित राज्यों के सभी जिलों में पब्लिक हेल्थ लैब खोली जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र की 5 रीजनल ब्रांच और 20 महानगरीय ब्रांच को और अधिक मजबूत किया जाएगा। सभी सरकारी रिसर्च लैबों को आपस में जोड़ने के लिए सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में एक इंटीग्रेटेड इन्फॉर्मेशन पोर्टल भी बनाया जाएगा।

आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना के अंतर्गत सरकार वर्ष 2026 तक में 17 नई सरकारी स्वास्थ्य इकाइयों का संचालन और वर्तमान की 33 सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। ये सभी 32 हवाई अड्डों, 11 बंदरगाहों औऱ 7 लैंड क्रासिंग पर स्थित हैं।

मोबाइल सिम के लिए डिजिटल केवाईसी

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले के तहत अब डिजिटल तकनीक से सिम खरीदने पर ग्राहक का वेरीफिकेशन होगा। इसके अलावा केवाईसी भी डिजिटल तरीके से हो। प्रीपेड से पोस्टपेड में सिम बदलने पर दोबारा से केवाईसी नहीं करवानी पड़ेगी। 1953 के नोटिफिकेशन के तहत सरकार ने लाइसेंस राज को खत्म कर दिया है। इसके अलावा सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को चार साल तक कर्ज चुकाने में भी छूट दे दी गई है। हालाँकि, 4 साल के बाद इस मोरेटोरियम को वापस भी करना होगा। इसके अलावा इसमें 100 फीसदी एफडीआई को भी मंजूरी दे दी गई है।

ऑटो इंडस्ट्री को दी बड़ी राहत

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को ऑटो इंडस्ट्री के लिए पीएलआई स्कीम को मंजूरी दे दी। इसके तहत इस सेक्टर को 26,058 करोड़ रुपए का राहत पैकेज दिया गया है। इससे 7.60 लाख नई नौकरियाँ पैदा होंगी। सरकार के इस फैसले से ऑटो सेक्टर में विदेशी निवेश भी बढ़ने का आशा है। ड्रोन के लिए 5000 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

‘अनिल कपूर जवान दिखने के लिए पीते हैं साँप का खून’ – अरबाज खान के शो में अभिनेता ने बताया सब कुछ सच-सच

अरबाज खान के टॉक शो ‘पिंच 2’ में पहुँचने वाले लेटेस्ट स्टार हैं बॉलीवुड अभिनेता अनिल कपूर। यह शो मशहूर हस्तियों के लिए ऑनलाइन ट्रोलिंग पर प्रतिक्रिया देने का एक मंच है। ‘मिस्टर इंडिया’ फिल्म के अभिनेता ने शो में अपनी लाइफ से जुड़े कई मजेदार सवालों के जवाब दिए। शो में उन्हें सोशल मीडिया यूजर्स को उनकी जवानी का राज, शरीर के बाल जैसे कई सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए देखा जा सकता है। साथ ही अनिल कपूर ने बेटी सोनम कपूर और खुद को ‘पैसे के लिए कुछ भी करने’ पर भी जवाब दिया। शो का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।

अनिल कपूर ने उन सोशल मीडिया यूजर्स को राज की बात बताया, जो ये कहते हैं कि वह यंग दिखने के लिए वह हमेशा प्लास्टिक सर्जन के साथ ही रहते हैं और साँप का खून पीते हैं। इस शो के एक सेगमेंट में अरबाज ने अनिल कपूर को कुछ लोगों का रिकॉर्डेड वीडियो दिखाया, जिसमें वे उनके लुक को लेकर काफी कमेंट कर रहे हैं। एक ने कहा- अनिल कपूर को ब्रह्मा जी का वरदान मिला है। एक अन्य यूजर ने कहा- मुझे लगता है कि वह अपने प्लास्टिक सर्जन के साथ ही रहते हैं। वहीं एक अन्य शख्स ने कमेंट में लिखा है- मुझे लगता है कि वह साँप का खून पीते हैं ताकि यंग दिखें।

इस पर हँसते हुए अनिल कपूर ने अरबाज से पूछा, “क्या सच में ये सवाल आपके पास आए हैं, या आप लोगों ने पैसे देकर ये सब कहने को कहा है?” अरबाज ने इस पर जवाब दिया कि सच में ऐसे सवाल आए हैं।

‘नायक’ फिल्म के अभिनेता ने इन सवालों के जवाब में कहा, ”वो कहते हैं न कि बहुत दिया देने वाले ने, आँचल में नहीं समाया। आपको बता दूँ कि मुझे ऊपर वाले ने लाइफ में बहुत कुछ दिया है। पर्सनली, प्रोफेशनली, फाइनैंशली इतना कुछ दिया है, जिससे मैं कैसा नजर आता हूँ, इसमें मदद मिलती है। हर कोई उतार-चढ़ाव से गुजरता है, लेकिन मैं खुशनसीब हूँ।” उन्होंने आगे कहा, ”मुझे आशीर्वाद मिला है। मुझे लगता है कि एक दिन में 24 घंटे होते हैं, अगर आप दिन में एक घंटा भी अपना ख्याल नहीं रख सकते हैं तो क्या बात है?”

इस दौरान अनिल कपूर ने यह भी कहा कि इस शो में वह शेव करवाकर आए हैं और इतना ट्रांसप्लांट चल रहा है, इसलिए उन्होंने लोगों से कहा कि जिनको चाहिए, वो आकर ले जाएँ। अनिल की इन बातों को सुनकर अरबाज हँस पड़ते हैं।

बता दें कि अरबाज खान ने अपने शो में अनिल कपूर से और भी कई मजेदार सवाल पूछे और फैन्स के ढेरों सवाल उनके सामने रखे। वहीं, अनिल कपूर ने भी उनके सारे सवालों का जवाब अपने खास और मजेदार अंदाज में दिया।

महीने भर में टूट रही तालिबान सरकार, 1-2 साल में US पर हमला करेगा ‘ताकतवर’ अलकायदा, बेस होगा अफगानिस्तान

अफगानिस्तान पर तालिबानी शासन को आज (15 सितंबर 2021) एक माह ही पूरा हुआ है कि अभी से खबरें आ रही हैं कि तालिबान में अंदरुनी गुटबाजी के कारण खट-पट शुरू हो गई है। सरकार में जगह पाते ही हक्कानी ग्रुप और मुल्ला बरादर आमने-सामने आ गए हैं। सत्ता के बँटवारे के अलावा विवाद का कारण ये है कि दोनों ही अपने आप को इस बात का श्रेय देना चाहते हैं कि उन्होंने अफगानिस्तान से अमेरिका को भगाया था।

दोनों गुटों के बीच झगड़ा अंतरिम सरकार के ऐलान के समय हुआ। रिपोर्ट्स बताती हैं कि तालिबान के मुल्ला बरादर और खलील-उर-रहमान हक्कानी के बीच तीखी बहस हुई थी। इसके बाद दोनों के समर्थकों में भी विवाद हुआ था। मामला इतना बिगड़ गया था कि मारपीट भी शुरू हो गई जिसमें कई तालिबानी घायल हुए।

इस दौरान मुल्ला बरादर के चोटिल होने की खबरें भी आई थीं जिसके बाद उसकी मृत्यु के अनुमान लगने लगे। हालाँकि बरादर ने बाद में ऑडियो क्लिप जारी कर जानकारी दी कि वो जिंदा है। कथित तौर पर बरादर का यह भी दावा है कि यूएस के साथ हुई सारी डील का श्रेय उसे जाता है जबकि सिराजुद्दीन हक्कानी का कहना है कि इस जीत के पीछे उसका नेटवर्क और सशस्त्र लड़ाके थे जिनके कारण यह जीत संभव हुई।

अमेरिका पर हो सकता है हमला

बता दें कि एक ओर जहाँ अफगानिस्तान पर कब्जा पाने के बाद भी तालिबान में अंदरुनी गुटबाजी के कारण विवाद चल रहा है और सरकार पर खतरा बना हुआ है। उसी समय में खबर आई है अफगानिस्तान में तालिबानियों के आ जाने से अलकायदा का खतरा यूएस पर मंडरा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार अलकायदा दोबारा से अफगानिस्तान में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है और संभव है कि वो इस जगह को बेस बना कर एक साल या दो साल में अमेरिका पर हमला बोले। डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल स्कॉट बेरियर ने मंगलवार (14 सितंबर) को एक खुफिया सम्मेलन में कहा, “मौजूदा आंकलन कहता है कि अलकायदा को हमारे होमलैंड पर हमला करने के लिए व खुद को सक्षम बनाने में एक या दो साल का वक्त लगेगा।”

उन्होंने ये भी कहा, “हम सभी प्रकार के स्रोतो और पहुँच के साथ अफगानिस्तान में वापस पहुँच प्राप्त करने के रास्ते के बारे में सोच रहे हैं… हम प्रयासों को प्राथमिकता दे रहे हैं और हमारी ये प्राथमिकता जारी रखेगी। लेकिन साथ ही ऐसे खतरनाक संसाधनों को बैलेंस रखने के लिए सतर्क रहना जरूरी है।”

अलकायदा की मंशा पर इससे पहले डिफेंस सेक्रेट्री लॉयड ऑस्टिन ने एक सीनेट कमिटी में भी कहा था कि कम से कम दो साल लगेंगे अलकायदा को इतना सक्षम होने में कि वो हमला कर सके। वहीं सीआईए के उप निदेशक डेविड कोहेन ने कहा, अमेरिका ने पहले ही अफगानिस्तान में अलकायदा की हरकतों का पता लगा लिया है। हालाँकि उन्होंने कहा कि ये बताना मुश्किल है कि वह कब तक हमला करने के लिए तैयार हो जाएगा।

इससे पहले कई खुफिया एक्सपर्ट्स भी कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि तालिबान के अल कायदा से संबंध हैं और वो यूएस पर हमला करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। मगर, नेशनल इंटेलीजेंस के डायरेक्टर एवरिल हेन्स का कहना है कि अमेरिका को सबसे ज्यादा खतरा विदेशी आतंकियों से है, जो यमन, सोमालिया, सीरिया, इराक और अफगानिस्तान से आते हैं। लेकिन अमेरिकी फौजों के दो दशक तक अफगानिस्तान में रहने से वह इस लिस्ट में सबसे नीचे है। उनका फोकस बाकी के देश होने चाहिए।