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कौन हैं देबाशीष, जो हैं नुसरत जहाँ के बेटे के पिता: TMC सांसद के बच्चे के बर्थ सर्टिफिकेट में दर्ज है नाम

बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री और बशीरहाट से तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद नुसरत जहाँ इसी साल 26 अगस्त को माँ बनी थीं। उन्होंने बेटे का नाम ‘Yishaan’, जिसे हिंदी में कई जगह ‘ईशान’ भी पढ़ा जा रहा है रखा। बच्चे के पिता को लेकर तब से ही कयास लग रहे हैं, जब नुसरत गर्भवती थीं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चे के पिता का नाम देबाशीष दासगुप्ता बताया गया है। इसमें बच्चे का पूरा नाम ‘यिशान जे दासगुप्ता’ दर्ज है।

अभिनेता यश दासगुप्ता को देबाशीष नाम से भी जाना जाता है। बच्चे के जन्म के वक्त भी वे अस्पताल में दिखे थे। पिछले दिनों नुसरत ने उन्हें बच्चे का अभिभावक भी बताया था। लेकिन पिता के नाम को लेकर कुछ नहीं कहा था, जिसकी वजह से कयासबाजी का दौर जारी था। यश दासगुप्ता भाजपा से जुड़े हैं। चंडीताला विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़े थे, लेकिन हार गए थे।

उल्लेखनीय है कि नुसरत जहाँ ने कोलकाता के भागीरथी नियोतिया अस्पताल में 26 अगस्त 2021 को बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद जब वह छुट्टी मिलने के बाद बाहर निकली थीं तो उस दौरान यश नवजात को गोद में लिए हुए दिखे थे। जब उनसे बच्चे के पिता को लेकर सवाल किया गया तो सांसद ने कहा था, “मुझे लगता है कि किसी महिला से यह पूछना कि उसके बच्चे का पिता कौन, यह बहुत ही ओछा है। इससे एक महिला के चरित्र पर काला धब्बा लगता है। पिता को पता है कि बच्चे का पिता कौन है और हम इस समय पितृत्व कर रहे हैं। मैं और यश एक साथ अच्छा समय बिता रहे हैं।”

इसके बाद 8 सितंबर को जब नुसरत जहाँ मीडिया के सामने आई थीं तो उन्होंने यश दासगुप्ता को ही अपने बच्चे का अभिभावक बताया था। हालाँकि, बच्चे की झलक दिखाने के सवाल पर उन्होंने कहा था, “यह सवाल आपको उसके पिता से पूछना चाहिए। वह इस समय उसे किसी को देखने नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा था कि बच्चे के पिता के चाहने पर ही उसे देखा जा सकता है।

गौरतलब है कि टीएमसी सांसद नुसरत जहाँ और निखिल जैन ने कुछ समय तक डेटिंग करने के बाद 19 जून 2019 को तुर्की में एक निजी शादी समारोह में शादी कर ली थी। इसके बाद जून 2021 में इस शादी को अमान्य बताते हुए नुसरत ने कहा था कि शादी तुर्की में हुई थी और यह भारतीय कानूनों के मुताबिक अमान्य है। उसी समय निखिल ने कहा था कि वे और नुसरत छह महीने से अलग रह रहे हैं और उनके पेट में पल रहा बच्चा उनका नहीं है।

कोरोना से देश में गई जो जान उनमें से 30% अकेले महाराष्ट्र से, मौत के मामले में यूपी से आगे निकल गया केरल

कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से भारत में अब तक 4,43,960 मौतें हुई हैं। इनमें से 30 फीसदी से ज्यादा लोगों की जान अकेले महाराष्ट्र्र में गई है। इस महामारी की वजह से महाराष्ट्र में 1,38,277 लोगों की मौत हो चुकी है।

कोरोना संक्रमण से जुड़े आँकड़े

आँकड़ों से पता चलता है कि कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली और केरल भी उन राज्यों में हैं जहाँ संक्रमण से ज्यादा मौतें हुई हैं। देश के ज्यादातर हिस्सों में अब महामारी पर काफी हद तक नियंत्रण दिख रहा है। लेकिन, केरल में लगातार मामले बढ़े रहे हैं जो बेहद चिंताजनक है।

केरल में मामले

फिलहाल केरल में नए मामले सामने आने की रफ्तार में कमी आई है। बावजूद इसके संक्रमण के नए मामलों में सबसे ज्यादा योगदान उसका ही है। केरल में वर्तमान में टेस्ट की पॉजिटिविटी रेट 16.5% है। इसका मतलब है कि केरल में प्रत्येक 100 जाँच में 17 लोगों में संक्रमण मिल रहा है।

यदि कोरोना वायरस के कुल केस को देखें तो महाराष्ट्र में 66 लाख से अधिक मामले सामने आए हैं। यह देश में सबसे अधिक है। इसके बाद केरल में 44 लाख से अधिक मामले हैं। इससे पहले अगस्त में केरल ने केवल पाँच दिनों में रिकॉर्ड 1.5 लाख नए मामले दर्ज किए थे। आँकड़े बताते हैं कि केरल में कोरोना के मामले बढ़े हैं, बावजूद इसके केरल के COVID-19 ‘प्रबंधन’ की राष्ट्रीय मुख्यधारा के मीडिया के साथ-साथ कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा लगातार सराहना की जा रही है। अब तक भारत में कुल सक्रिय कोरोना वायरस मामलों में से 56% से अधिक केरल से हैं।

सोमवार (13 सितंबर 2021) को कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ते हुए केरल सबसे अधिक मौतों वाला पाँचवाँ राज्य बन गया। बुधवार (15 सितंबर 2021) को केरल में 25,588 मरीज स्वस्थ हुए, जबकि 17,681 नए मामले सामने आए। केरल में बुधवार को ही कोरोना के चलते 208 लोगों की मौत हुई, जो कि भारत में सबसे अधिक है। पूरे देश में में कोरोना के 3,36,007 सक्रिय मामले हैं, जिनमें से अकेले 1,90,790 सक्रिय मामले केरल के हैं।

मस्जिद में मिले बम और हथियार… फ्रांस ने उसी बम से मस्जिद उड़ा दी: वायरल दावे की हकीकत क्या

सोशल मीडिया पर फ्रांस के बारे में एक पोस्ट वायरल हो रहा है। इस पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि फ्रांस की एक मस्जिद में बम और हथियार मिले थे, जिसके बाद वहाँ की सरकार ने उसी बम से मस्जिद को उड़ा दिया। कुछ लोग इसे सादे पोस्ट की तरह शेयर कर रहे हैं। वहीं कुछ ने इसके साथ एक फोटो भी जोड़ी हुई है।

वायरल दावा
वायरल पोस्ट

अब वायरल दावे की सच्चाई क्या है इसकी तहकीकात में हमने कुछ विदेशी मीडिया साइट्स को चेक किया और कुछ आधिकारिक ट्विटर हैंडल भी खँगाले। लेकिन, कहीं ऐसी कोई जानकारी सामने नहीं आई। कुछ रिपोर्ट्स जो मिलीं वो 5-6 साल पुरानी थीं। यानी ये स्पष्ट था कि ये घटना या दावा हालिया नहीं है।

फ्रांस में मस्जिदों पर हुई कार्रवाई संबंधी न्यूज।
फ्रांस में मस्जिदों पर हुई कार्रवाई संबंधी न्यूज।

इंटरनेट पर मौजूद जानकारी से यह पता चला है कि 13 नवंबर 2015 को पेरिस हमले के बाद फ्रांस सरकार ने इस्लामी कट्टरवाद के ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए 100 से ज्यादा मस्जिदों को बंद किया था और इसी क्रम में एक मस्जिद से उन्होंने 24 सैन्य हथियार और 334 हथियार जब्त किए थे।

अलजजीरा में प्रकाशित एक रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

वायरल पोस्ट के दावे के हिसाब से हमने कोई तथ्यपरक जानकारी न मिलने पर शेयर की जा रही तस्वीर के जरिए इसे खोजा। हालाँकि तस्वीर और उसके इर्द-गिर्द का इलाका दर्शा ही रहा है कि ये तस्वीर फ्रांस की नहीं हो सकती। लेकिन फोटो को खोजने पर और पुख्ता हो जाता है कि ये तस्वीर बिहार के बांका की है। वहाँ 8 जून 2021 को एक विस्फोट हुआ था, जिस पर पुलिस ने कार्रवाई भी की थी।

शेयर की जा रही तस्वीर बांका के मदरसे में हुए विस्फोट की है। फोटो के जरिए गूगल सर्च करने पर ये नतीजे सामने आते हैं।
बाँका में हुए विस्फोट पर खबर

अंतत: ऑपइंडिया की तहकीकात में यह साफ होता है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाला पोस्ट गलत है और भ्रामक है। इसमें किए गए दावों का वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।

‘ड्रग्स एडिक्ट कहाँ रहते हैं’: इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा ‘पागलखाने’ पहुँचीं, सरकारी TV ने लाइव दिखाया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की तीसरी बीवी बुशरा पिछली बार 2019 में तब चर्चा में आईं थी, जब एक टीवी चैनल ने दावा कर दिया था कि उनका अक्स आईने में नहीं दिखता। साथ ही यह भी कहा था कि वे जिन्नों को गोश्त खिलाती हैं। बाद में पाकिस्तानी मीडिया ने इसे फेक न्यूज बताया। बावजूद बुशरा बीवी की रहस्यमयी जिंदगी को लेकर कयास लगते रहते हैं। अब वे पाकिस्तान के पंजाब मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (PIMH) का दौरा करने को लेकर चर्चा में हैं।

बुशरा बीवी बुधवार (15 सितंबर 2021) को यहाँ पहुँचीं थी। उन्होंने मरीजों से बात की। ड्रग्स एडिक्ट कहाँ रखे जाते हैं, इसके बारे में पूछा। सुविधाओं और बुनियादी ढाँचे में सुधार को लेकर रिपोर्ट तलब की। उल्लेखनीय है कि इस संस्थान को स्थानीय लोग बोलचाल की भाषा में पागलखाना कहते हैं। बुशरा का यह दौरा पाकिस्तान के सरकारी टीवी चैनल पीटीवी पर लाइव दिखाया गया।

पीटीवीके अनुसार बुशरा बीवी ने संस्थान के विभिन्न विभागों का दौरा किया। उन्हें वहाँ पर उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताया गया। इस दौरान उन्होंने मरीजो से भी बातचीत कर उनका हाल जाना। उन्होंने नशा करने वालों मानसिक रूप से बीमार बुजुर्गों के पुनर्वास पर अधिक ध्यान देने पर जोर दिया। कर्मचारियों को मरीजों की अधिक से अधिक मदद करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा बुशरा बीवी ने अस्पताल के किचेन में जाकर वहाँ पर खानपान की सुविधाओं का जायजा लिया। सामान्यतया बुशरा बीबी आमतौर बिना किसी सुरक्षा प्रोटोकॉल के सार्वजनिक स्थानों पर जाती रहती हैं। बहरहाल पंजाब मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (PIMH) के उनके दौरे के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था को कड़ा करते हुए प्रशासन ने वहाँ लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगा दिया था।

इससे पहले मार्च में उन्होंने लाहौर के दाता दरबार के पास एक सरायखाने का दौरा किया था। वहाँ उन्होंने लोगों के साथ रोटियाँ भी खाई थी। वह पिछले साल इस्लामाबाद सरायखानों का दौरा कर लोगों से बातचीत करते हुए पति की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ की तारीफ की थी। वहाँ परोसे जा रहे खाने का स्वाद चखा था। साथ ही सरायखानों में सुविधाओं के सुधार की बात की थी। तहरीक-ए-इंसाफ की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए बुशरा बीवी ने कहा था कि लोगों की देखभाल करना उनकी सरकार की जिम्मेदारी है।

40 दिन-4 टेरर मॉड्यूल: टिफिन बम से ब्लास्ट करने वाले 4 आतंकी पकड़े गए, पंजाब पुलिस हाई अलर्ट पर

पंजाब पुलिस ने राज्य में एक और आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इसका संचालन कर रही थी। राज्य में 40 दिनों के भीतर यह चौथा टेरर मॉड्यूल है जो सामने आया है। साथ ही ऑयल टैंकर ब्लास्ट में शामिल 4 आतंकवादियों को भी पकड़ा गया है। ब्लास्ट अमृतसर में बीते 8 अगस्त को टिफिन बम के जरिए किया गया था। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पुलिस को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

इस मामले को लेकर डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बुधवार (15 सितंबर 2021) को चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। मामले में पाकिस्तानी सिख आतंकी समेत पाकिस्तानी के इंटेलीजेंस ऑफिसर के खिलाफ अजलाना पुलिस स्टेशन में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद पता चला है कि ऑयल टैंकर को टिफिन आईईडी से उड़ाने की साजिश थी।

डीजीपी गुप्ता ने कहा, “तेल टैंकर में हुए ब्लास्ट के पीछे पाकिस्तान स्थित इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के प्रमुख लखबीर सिंह रोड़े और पाकिस्तान के ही रहने वाले कासिम का हाथ था। लखबीर सिंह रोड़े उर्फ ​​बाबा मोगा जिले के रोडे गाँव का है। आतंकी मॉड्यूल के पीछे उसी का हाथ था।”

जिन आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है उनमें रूबल सिंह, विक्की भुट्टी, मलकीत सिंह और गुरप्रीत सिंह उर्फ ​​गोपी हैं। हत्या के मामले में वांटेड रूबल सिंह को हरियाणा के अंबाला से गिरफ्तार किया गया, जबकि अन्य को अमृतसर के अजनाला गाँव से पुलिस ने गिरफ्तार किया। इनके एक साथी को पुलिस 20 अगस्त को ही गिरफ्तार कर चुकी है।

डीजीपी ने कहा, “पाकिस्तानी इंटेलीजेंस ऑफिसर कासिम और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (आईएसवाईएफ) के प्रमुख रोडे ने धमाके करने के लिए आतंकवादी मॉड्यूल को 2 लाख रुपए देने का वादा किया था। लेन-देन का पता लगाया जा रहा है। रुबल और विक्की भुट्टी कासिम के संपर्क में थे जो रोडे के साथ मिलकर काम कर रहा था। रोडे और कासिम ने ही अधिकतम नुकसान पहुँचाने के लिए तेल टैंकर में विस्फोट करने को कहा था।” गिरफ्तार किए गए आतंकियों के खिलाफ 11 अगस्त को आईपीसी की धारा यू/एस 436, 427, 13, 16, 18, 18 बी, UAPA एक्ट 1967 के 20 और विस्फोटक पदार्थ (संशोधन) अधिनियम 2001 की धारा 3, 4, 5 के तहत केस दर्ज किया गया था।

गौरतलब है कि एनआईए ने 20 अगस्त 2021 को खालिस्तानी आतंकवादी जरनैल सिंह भिंडरावाले के भतीजे जसबीर सिंह रोड़े के बेटे को गिरफ्तार किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक जसबीर का बेटा गुरमुख सिंह इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन के प्रमुख लखबीर सिंह रोड़े का भतीजा है। रोड़े ने ही उसे विस्फोटकों से भरे टिफिन बॉक्स दिए थे, जिन्हें वह भारत में बाँट रहा था।

‘मैं आऊँगा न’: CM योगी ने यूँ किया वापसी का ऐलान, सीटें बता बोले- हम रिकॉर्ड तोड़ने आए हैं… कुछ जीवन भर पप्पू-बबुआ ही रहते हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अगले साल होने वाले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी की जीत को लेकर आश्वस्त हैं। उन्हें यकीन है कि प्रदेश की जनता पिछले 35 सालों का रिकॉर्ड तोड़ कर उनको मुख्यमंत्री दोबारा बनाएगी। उनका यही विश्वास कल टाइम्स नाऊ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देखने को मिला जहाँ होस्ट नविका ने उनसे बस यही कहा कि पिछले 35 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई सीएम दोबारा चुन कर आया हो। इस पर योगी आदित्यनाथ ने दो टूक कहा- “मैं आऊँगा न।”

अपने इसी विश्वास की झलक उन्होंने अपने ट्वीट पर भी शेयर की है। इस वीडियो में नविका सीएम से पूछती हैं कि क्या आप ये रिकॉर्ड तोड़ सकते हैं। इस पर योगी कहते हैं, “हम रिकॉर्ड तोड़ने के लिए ही आए हैं…मेरा जो ट्रेंड चल रहा है न 350 से कम सीट बीजेपी लेकर नहीं आने वाली।”

टाइम्स नाऊ नवभारत के 45 दिन पूरे होने पर नव-निर्माण मंच से योगी आदित्यनाथ ने अपने बातें कहीं। उन्होंने नए चैनल की नई शुरुआत पर बधाइयों से सारी बात शुरू की और इस बात का जवाब दिया कि कैसे 9 करोड़ वैक्सीनेशन उनके प्रदेश के लिए माइलस्टोन है। उन्होंने बताया कि लोगों को 9 करोड़ कोरोना वैक्सीन की डोज देने वाला उत्तर प्रदेश पहला राज्य है।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मीडिया रिपोर्टिंग पर अपनी निराशा जाहिर करते हुए उन्होंने स्पेनिश फ्लू व अन्य गंभीर बीमारियों का समय याद दिलाया और सदी की सबसे बड़े महामारी में जनता को वैक्सीन देने के लिए प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त किया। अपनी बातचीत में सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी को जम कर घेरा। वह बोले, “कॉमन मैन से पूछें तो पता चलता है कि सपा का मतलब भय, दंगा, गुंडागर्दी, अराजकता, लूटपाट, किसी भी सज्जन एवं संभ्रांत व्यक्ति की प्रॉपर्टी व मकान पर कब्जा करना है।”

बीजेपी को एक लोकतांत्रिक पार्टी बताते हुए सीएम योगी ने इस बात का जवाब भी दिया कि आखिर कैसे बीजेपी में इतने उलट फेर के बाद भी वह सीएम पद पर हैं। उन्होंने कहा, “व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश’ यह भाजपा का संस्कार है। यह खानदानी व परिवार की पार्टी नहीं है। यहाँ पद नहीं, व्यक्ति का कार्य महत्वपूर्ण है।”

आगामी चुनावों में अपना मुद्दा विकास और राष्ट्रवाद को बताते हुए मुख्यमंत्री ने कॉन्ग्रेस, सपा, बसपा से कहा कि पिछले साढ़े चार साल में जितना विकास हुआ है बाकी पार्टियाँ अपने काम की उससे तुलना कर लें। राहुल गाँधी और अखिलेश यादव पर ‘पप्पू-बबुआ’ टिप्पणी करते हुए आगे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अखिलेश यादव खुद भी जानते हैं कि इस बार किसकी सरकार बन रही है। वह जिस तरह से अधिकारियों और कर्मचारियों को धमकी दे रहे हैं, उससे उनकी बौखलाहट स्पष्ट झलक रही है।

उन्होंने कहा, “समाजवादी पार्टी ने बुंदेलखंड को शोषण का अड्डा बना दिया था। वहाँ की प्राकृतिक संपदा का दोहन होता था, परंतु विकास नहीं होता था।” उनके मुताबिक, “विपक्ष के एजेंडे में अगर कभी विकास होता, तो वह प्रदेश में दिखता। 1947-2017 तक 7 दशकों में केवल दो एक्सप्रेस वे बने थे।” अपराधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, “जिन्होंने गरीबों का उत्पीड़न किया था, सामान्य नागरिकों को खूब रौंदा था, उनके संपत्ति पर कब्जा किया था, उस अवैध व अनैतिक कमाई पर ही सरकार का बुलडोजर चला है और चलता रहेगा।”

मुजफ्फरनगर दंगों में 77 केसों की वापसी पर सीएम ने कहा, “मुजफ्फरनगर दंगा सत्ता द्वारा प्रायोजित था। अपने निकम्मेपन व नाकामयाबियों को छुपाने के लिए पिछली सरकार द्वारा निर्दोष लोगों पर जो मुकदमे दर्ज किए गए थे, उन्हें वापस होना ही था।” इसके अलावा ‘अब्बा जान’ शब्द पर अपनी बात रखते हुए सीएम ने कहा, “मैंने किसी का नाम नहीं लिया… क्या अब्बा जान कोई असंसदीय शब्द है। किसी को इससे क्या परेशानी होगी।”

बता दें कि आत्मविश्वास से भरे योगी आदित्यनाथ और इस इंटरव्यू में कही गई उनकी बातों की काफी तारीफ हो रही है। लोग उनकी वीडियोज की छोटी-छोटी क्लिप शेयर कर रहे हैं।

कितने सेल्फ गोल करेगी कॉन्ग्रेस, नया वाला है प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन ‘अपशकुन दिवस’

कॉन्ग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन को ‘अपशकुन दिवस (Bad Omen Day)’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। वैसे तो हाल के दिनों में घोषणाएँ करना कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं का बड़ा प्रिय राजनीतिक शगल रहा है, पर ऐसी बचकानी घोषणा सुनकर यही लगा जैसे यदि नरेंद्र मोदी कॉन्ग्रेस मुक्त भारत देखना चाहते हैं तो कॉन्ग्रेस के भीतर भी कोई है जो भारत मुक्त कॉन्ग्रेस देखना चाहता है।

हाल ही में ऐसी ही एक घोषणा में पार्टी ने दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में एक कमेटी की घोषणा की थी जो मोदी विरोधी एनजीओ और बुद्धिजीवियों के साथ गठबंधन कर भारत भर में मोदी सरकार के खिलाफ धरने और प्रदर्शन करेगी। ठोस राजनीति के लिहाज से देखें तो ऐसी घोषणाएँ उन ईमानदार प्रयासों का हिस्सा नहीं लगती जिनके दम पर सत्ता से बाहर बैठा भारत का सबसे पुराना राजनीतिक दल पुनः सत्ता में आ पाए।

पिछले लगभग दो दशक से कॉन्ग्रेस पार्टी नरेंद्र मोदी का विरोध कर रही है। मोदी विरोध की अपनी इस मुहिम में दल ने लगातार ‘अराजनीतिक’ व्यक्तियों, स्वघोषित बुद्धिजीवियों और संस्थाओं के साथ न केवल गठबंधन किया, बल्कि लगातार ऐसे लोगों की सेवाएँ ली। गुजरात दंगों के समय से ही एनजीओ चलाने वाले एक्टिविस्ट, पत्रकार, संपादक, कलाकार वगैरह दल की इस मुहिम अपना योगदान देते हुए पाए गए। नतीजा क्या निकला? नरेंद्र मोदी के इस विवेकहीन विरोध ने कॉन्ग्रेस पार्टी को ऐसा कोई परिणाम नहीं दिया जो उनके प्रयासों की भरपाई कर सके। देखा जाए तो दल की इस नीति ने उसे लगातार नुकसान पहुँचाया और आज हाल यह है कि पूरी पार्टी का राजनीतिक दर्शन, प्रयास और रणनीति मोदी विरोध तक सिमट कर रह गए हैं। ऐसा क्यों है, उसकी विवेचना तो राजनीतिक पंडित करेंगे पर इसका परिणाम क्या है, वह सबके सामने है। 

नरेंद्र मोदी के मामले में एक विश्लेषण यह भी है कि उनकी लोकप्रियता और बढ़ते कद का श्रेय कॉन्ग्रेस पार्टी के इस विवेकहीन विरोध को जाता है पर मुझे लगता है यह निहायत ही औसत विश्लेषण है। मोदी आज जो भी हैं, अपनी नेतृत्व क्षमता, अपने काम और अपने राजनीतरिक दर्शन के कारण हैं। हाँ, यह बात सच जरूर लगती है कि जब उनका कद इतना बड़ा हो गया है, उनके प्रति कॉन्ग्रेस के ऐसे विरोध पार्टी को और तेजी से नुकसान पहुँचाएँगे। ऐसी रणनीति राजनीतिक समझ रखने वाला कोई नेतृत्व एक समय के बाद तज देगा। लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी का औसत नेतृत्व ऐसी सामान्य समझ भी नहीं रखता और यह बात सब जानते हैं कि नेतृत्व किनके के हाथ में है और उनके सलाहकार कैसे रहे हैं। यहाँ राजनीतिक सलाहकारों का भी दोष नहीं है।

कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व की ऐसी रणनीति के पीछे एक कारण यह भी है कि वह सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के बीच आक्रामक दिखना चाहती है। पर आक्रामकता दिखाने की अपनी कोशिशों में पार्टी का आचरण ऐसा रहा है जिसे देखकर लगता है कि उसे जमीनी राजनीतिक वातावरण का भान नहीं है। भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दल के लिए संवाद की ऐसी रणनीति बनाने वाले लोग वर्तमान भारतीय राजनीतिक की जमीनी सच्चाई से कटे हुए हैं। ऐसे में वे जो कुछ भी कर रहे हैं उससे अपेक्षित परिणाम न मिलना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। कॉन्ग्रेस की रणनीति का दूसरा पहलू यह है कि पार्टी हमेशा एक विवेकहीन विरोध के मोड दिख रही है और यह रणनीति उस लोकतांत्रिक व्यवस्था में कारगर साबित नहीं होती जिसमें बड़े-बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव हो रहे हैं। 

एक संगठन के रूप में भारतीय जनता पार्टी, उसके नेतृत्व और उसकी राजनीतिक समझ को इस बात का क्रेडिट मिलना चाहिए कि उसने लोकतांत्रिक राजनीति में संवाद माध्यम के रूप में सोशल मीडिया का महत्व बाकी राजनीतिक दलों से न केवल पहले समझा बल्कि उसका समग्र इस्तेमाल भी किया। ऐसी रणनीति के पीछे तमाम कारणों में एक महत्वपूर्ण कारण शायद यह था कि पार्टी को परंपरागत मीडिया से खुद के लिए बहुत आशा नहीं थी। ऐसी सोच के पीछे परंपरागत प्रिंट और विज़ुअल मीडिया का एक पूरा इतिहास है। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी निश्चित तौर पर सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर और दलों से अच्छी समझ रखती है। महत्वपूर्ण बात यह कि जिन दलों ने सोशल मीडिया का प्रयोग बाद में करना शुरू किया वे अभी तक बनावटी आक्रामकता के सहारे विरोध-प्रदर्शन वाले मोड से आगे नहीं जा सके। 

प्रधानमंत्री के जन्मदिन को अपशकुन दिवस के रूप में मनाए जाने की कॉन्ग्रेस पार्टी की यह घोषणा सोशल मीडिया पर लगातार विरोध कर रहे उसके समर्थकों का उत्साह बनाए रखने की एक कवायद से अधिक कुछ और जान नहीं पड़ती। मेरे विचार से इस घोषणा के पीछे एक कारण और हो सकता है। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की प्रधानमंत्री की घोषणा का जवाब देने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी ने ऐसी घोषणा की हो। यदि ऐसा है तो साफ़ है कि पार्टी प्रधानमंत्री की घोषणा से खुश नहीं है और नहले पर दहला मारने वाली बचकानी मानसिकता से उन्हें मात देना चाहती है। प्रश्न यह है कि भारी मतों से चुने गए एक लोकप्रिय प्रधानमंत्री के जन्मदिन को अपशकुन दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा क्या शासन की उस वैकल्पिक व्यवस्था की भरपाई कर सकती है, जिसकी अपेक्षा लोकतांत्रिक राजनीति में प्रमुख विपक्षी दल से रहती है?

ISIS की ‘जिहादी दुल्हन’ बिना बुर्के के आई नजर, ब्रिटेन के लोगों से माँगी माफी, कहा- आतंकी मामलों का करुँगी सामना

दुनिया भर में ‘जिहादी दुल्हन’ के नाम से मशहूर हुई शमीमा बेगम ने अब ISIS से तौबा कर ली है। ISIS ‘दुल्हन’ शमीमा बेगम को अब अपने किए ​गए कामों पर पछतावा हो रहा है। उसने ‘गुड मार्निंग ब्रिटेन’ शो के लाइव इंटरव्यू में कहा कि वह दहशतगर्दों के पास जाने की बजाए मरना पसंद करेगी। शमीमा ने ब्रिटेन के लोगों से माफी माँगते हुए कहा कि वह अपने देश आकर आतंकवाद के सभी मामलों का सामना करने को तैयार है।

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन से भागकर वर्ष 2014 में आतंकी संगठन आईएसआईएस में शामिल हुई शमीमा बेगम की उम्र उस वक्त केवल 15 साल थी। उसने वहाँ पर ISIS के एक आतंकी से शादी कर ली थी और उसके साथ जिहाद में शामिल हो गई। इस शादी से उसे 2 बच्चे पैदा हुए थे।

रिपोर्ट के अनुसार एक विशेषज्ञ ने कहा कि शमीमा बेगम ‘वेस्टर्नाइज्ड’ दिखने की कोशिश कर रही हैं। शमीमा बेगम ने आईटीवी प्रसारक के ‘गुड मार्निंग ब्रिटेन’ शो में कहा, ”मैं ब्रिटेन के लोगों से माफी माँगती हूँ। मैंने बहुत ही कम उम्र में एक बड़ी गलती की थी और उस उम्र के अधिकतर बच्चों को पता भी नहीं होता है कि उन्हें अपने जीवन में क्या करना है। इस उम्र में अधिकतर बच्चे भ्रमित हो जाते हैं और वे आसानी से इस तरह की चीजों के झाँसे में आकर आसानी से बेवकूफ बन जाते हैं।”

इस दौरान ‘गुड मॉर्निंग ब्रिटेन’ शो में 22 साल की पूर्व आईएसआईएस दुल्हन काले रंग की नाइके बेसबॉल टोपी, ग्रे वेस्ट टॉप और लिपस्टिक लगाए हुए खुले बालों में बात करते हुए दिखाई दी। उसका लुक इस बार पिछले इंटरव्यू की तुलना में बिल्कुल अलग था, जिसमें वह हिजाब और बिना मेकअप के दिखाई देती थी।

बता दें कि शमीमा बेगम को मार्च 2021 में बांग्लादेश और नीदरलैंड्स ने बड़ा झटका दिया था। दोनों ही देशों ने उसे अपने यहाँ शरण देने से मना कर दिया था। इसके पहले 2019 में उससे ब्रिटिश सरकार ने उसकी नागरिकता छीन ली थी।

‘…ये हैं राजनीति के पप्पू’: राहुल ने कहा- महात्मा गाँधी की तरह मोहन भागवत के पास नहीं होती औरतें, लोगों ने याद दिलाए ‘गाँधी के प्रयोग’

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बुधवार (सितंबर 15, 2021) को राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का नाम गलत संदर्भ के साथ लेकर एक और विवाद खड़ा कर दिया। मंशा तो उनकी संघ प्रमुख मोहन भागवत को घेरने की थी, लेकिन सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें ही लताड़ने लगे।

ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस द्वारा आयोजित एक मीट में राहुल गाँधी ने कहा, “जब आप महात्मा गाँधी को देखते हैं तो आपको इर्द-गिर्द 2-3 महिलाएँ दिखती हैं। क्या आपने मोहन भागवत के आसपास किसी महिला को देखा? ऐसा इसलिए है क्योंकि वो महिलाओं को दबाते हैं और हमारा संगठन उन्हें मंच देता है।”

राहुल गाँधी अपनी ऐसी टिप्पणियों से चाहते थे कि वो दिखा सकें कि उनकी पार्टी महिलाओं के सशक्तिकरण पर कितना काम करती है जबकि आरएसएस में ये स्थिति उलट है। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे गलत समझ लिया और राष्ट्रपिता के लिए ऐसी टिप्पणी करने पर हैरानी जताने लगे कि महात्मा गाँधी दो-तीन महिलाओं की कंपनी में रहते थे।

एक ट्विटर यूजर पूछता है कि आखिर राहुल गाँधी ऐसी बातें कहकर महात्मा गाँधी की सराहना कर रहे हैं या फिर मोहन भागवत की?

दूसरे यूजर ने राहुल गाँधी की टिप्पणी पर पूछा कि क्या गाँधी व्यभिचारी थे जो हमेशा महिलाओं से घिरे रहते थे।

संघ से जुड़े रतन शारदा कहते हैं,”भगवान का शुक्र है कि मोहन भागवत ऐसे नहीं दिखे।”

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव विजय राहतकर इस पर प्रतिक्रिया देते हैं। वह कहते हैं, “आरएसएस का अंधा विरोध करने में ये आदमी राष्ट्रपिता पर सेक्सिस्ट टिप्पणी कर रहा है। ये भूल रहा है कि मोदी सरकार में 11 महिला मंत्री, 4 महिला राज्यपाल, 50+ सांसद और 100 से ज्यादा विधायाक हैं। इसके अलावा मोदी सरकार की नीतियाँ नारी शक्ति के इर्द-गिर्द होती हैं।”

कुछ अज्ञात यूजर्स सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी की ऐसी बातों को सुन कर कह रहे हैं, “इसीलिए इनको राजनीति का पप्पू कहा जाता है।”

दिलचस्प बात यह है कि महात्मा गाँधी के बारे में राहुल गाँधी की ऐसी टिप्पणी ने उस चर्चा को केंद्र में ला दिया है जिस पर बहुत कम दफा बात हुई है। ये मुद्दा ‘गाँधी का जीवन: ब्रह्मचर्य के साथ उनके प्रयोग’ से जुड़ा है। दरअसल, गाँधी की शादी 13 साल की उम्र में कस्तूरबा गाँधी से हुई और दोनों ने सामान्य जीवन जिया। दोनों के 4 बच्चे भी हुए। अपनी जीवनी में गाँधी ने बताया कि कैसे वह स्कूल में भी कस्तूरबा गाँधी के बारे में सोचते थे और रात होने का ख्याल और दोनों की मुलाकात उन्हें सताती थी। वह अपनी पत्नी को पढ़ाना चाहते थे लेकिन प्रेम करने में उनको समय नहीं मिला। कुछ समय बाद उनकी सेक्स को लेकर धारणा बदल गई। वह अपनी पत्नी के साथ बिताए उन पलों पर खेद प्रकट करने लगे।

उन्होंने कई प्रयोग किए जो आज स्वीकारे भी न जाएँ। उन्होंने सत्य के प्रयोग के आश्रम बनाए और शुद्धता बनाए रखने पर जोर दिया। अगर ऐसा नहीं होता या वह कुछ यौन संबंधी बातें करते तो उन्हें सजा होती। आश्रम के इन नियमों ने शादीशुदा लोगों को भी एक साथ सोने की अनुमति नहीं थी। गाँधी की सलाह थी कि पतियों को अपनी पत्नियों के साथ अकेला नहीं रहना चाहिए। जब भी वह उत्तेजित महसूस करें तो ठंडे पानी से नहा लें।

एक ओर जहाँ सबके लिए नियम कुछ अलग थे वहीं गाँधी ने खुद को चुनौती देने के लिए अपने इर्द-गिर्द महिलाओं को इकट्ठा किया हुआ था। 1920 में वह युवा महिलाओं की कंधे पर हाथ रखकर सैर पर जाते और उन लड़कियों को अपनी छड़ी बताते। आभा और मनु उनकी छड़ी थीं। इसके बाद हर रोज नहाने के समय मसाज का चलन शुरू हो गया और धीरे-धीरे समय के साथ गाँधी के प्रयोगों में भी विस्तार हुआ। इसमें महिलाएँ उनके साथ सोतीं। ये सब उनके प्रयोग का हिस्सा था। जिसमें संयम आँका जाता था।

अब इन प्रयोगों के बारे में जानने के बाद ये असंभव है कि कोई राहुल गाँधी की बातों में आकर वैसे ही महिलाओं से इर्द-गिर्द होना चाहे लेकिन अब का दौर इसकी स्वीकृति नहीं देता।

CM योगी ने मथुरा में पेप्सिको इंडिया के प्लांट का किया उद्घाटन: 5,000 किसानों को होगा लाभ और 1,500 से अधिक को रोजगार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (15 सितंबर) को प्रदेशवासियों को बड़ी सौगात दी है। उन्होंने मथुरा के कोसीकलां में 814 करोड़ की लागत से बने पेप्सिको इंडिया के सबसे बड़े ‘ग्रीनफिल्ड फूड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट’ का वर्चुअल उद्घाटन किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में पेप्सिको का यह सबसे बड़ा निवेश है, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। साथ ही इससे 5,000 से अधिक किसानों को फायदा मिलेगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने फूड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के उद्घाटन अवसर पर कहा कि इस इकाई का उद्घाटन करते हुए मुझे बेहद खुशी हो रही है। मुझे विश्वास है कि इस निवेश से न केवल पेप्सिको को लाभ होगा, बल्कि युवाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे। इससे आत्मनिर्भरता और स्वावलम्बन के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। कोसीकलां आज अपनी छवि से उबर कर नए युग में प्रवेश कर रहा है।

सीएम ने कहा, ”यह वही कोसीकलां है, जहाँ वर्ष 2012 में दंगे हुए थे। उस वक्त यहाँ व्यापक जन-धन की हानि हुई थी। जब सोच नकारात्मक होती है तो दंगे, अराजकता और अव्यवस्था फैलती है। जब सरकार की सोच सकारात्मक होती है तो निवेश बढ़ता है। यह निवेश रोजगार के अवसर पैदा करता है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा कि फूड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से रोजगार के साथ-साथ लाखों किसानों के जीवन में भी परिवर्तन आएगा। जो किसान अपने उत्पाद को लेकर भटकते थे उन्हें पेप्सिको इंडिया उत्पाद का उचित दाम देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। यहाँ का जो भी उत्पाद जहाँ पहुँचेगा ब्रज भूमि की अपनी याद को भी वहाँ तक पहुँचाने में योगदान देगा। कोसीकलां में इतना बड़ा प्लांट आलू उत्पादक किसानों के लिए नया मील का पत्थर होने जा रहा है।

बता दें कि पेप्सिकों प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लखनऊ आवास पर किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, श्रीकांत शर्मा प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी, इंडस्ट्री विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ पेप्सिकों के बड़े अधिकारी भी मौजूद रहे।