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पाक की नाक के नीचे राजनाथ-गडकरी को लेकर उतरा हरक्युलिस, जगुआर-सुखोई की भी लैंडिंग: बाड़मेर में ELF रेडी

राजस्थान के बाड़मेर में गुरुवार (9 सितंबर 2021) को भारतीय वायुसेना ने शक्ति का प्रदर्शन किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को लेकर इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड (ELF) पर सुपर हरक्युलिस उतरा। लड़ाकू विमान सुखोई-30 और जगुआर ने भी लैंडिंग की। इस दौरान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत और एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया भी मौजूद थे। जिस जगह वायुसेना ने अपनी ताकत दिखाई वह पाकिस्तान की सीमा से महज 40 किलोमीटर दूर है।

सााभार: ANI

एनएच 925 ए पर बनी यह हवाई पट्टी 3 किलोमीटर लंबी है। वायुसेना के लड़ाकू विमान सीधे हाइवे पर उतरे। सुखोई, जगुआर और हरक्युलिस ने आसमान में अपना दम दिखाने के बाद हाइवे पर लैंडिंग की। एनएचआईए ने एयरफोर्स के साथ मिल बाड़मेर-जालौर बॉर्डर स्थित बाखासर-साता के पास बने खास हवाई पट्टी को तैयार किया है। यहाँ लड़ाकू विमानों की आपात लैडिंग करवाई जा सकेगी।

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भारत-पाक सीमा से महज 40 किमी दूरी पर बाड़मेर-जालौर के अड़गावा में बनी इमरजेंसी हाइवे हवाई पट्टी का उद्घाटन करने के लिए दोनों केंद्रीय मंत्री एक साथ दिल्ली से हरक्युलिस विमान में सवार होकर बाड़मेर पहुँचे थे।

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गुरुवार को रनवे पर सुखोई लड़ाकू विमान ने फ्लाइपास किया, साथ ही जगुआर और एयरफोर्स के अन्य विमान भी इस दौरान यहाँ पर दिखाई दिए। ये एयरस्ट्रिप भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास ही है, ऐसे में किसी विपरीत परिस्थिति में इसकी अहमियत सबसे अधिक होगी। 

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वायुसेना ने इस हवाई पट्टी पर अपनी पहली रिहर्सल की। इस दौरान तीन फाइटर विमान उतारे। सबसे पहले हरक्युलिस को लैंड कराया गया। इसके बाद सुखोई, मिग और अगस्ता हेलिकॉप्टर की लैंडिंग कराई गई।

इस दौरान एसयू-30 एमकेआई, सुपर हरक्यूलिस एंड जगुआर फाइटर विमानों का फ्लाईपास्ट हुआ। इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए 24 महीने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इमरजेंसी लैंडिंग फील्ड का निर्माण 19 महीनों के भीतर ही कर लिया गया। जुलाई 2019 में इसकी शुरुआत की गई थी और इसी साल जनवरी में पूरा कर लिया गया था। 

इस दौरान राजनाथ सिंह ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर से कुछ ही कदम दूर इस प्रकार की इमर्जेंसी लैंडिंग फील्ड का तैयार होना सिद्ध करता है कि भारत अपनी एकता, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए सदैव तैयार है। भारत के अंदर किसी भी चुनौती का सामना करने की क्षमता है।”

रक्षा मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। सरकार इंडियन एयर फोर्स (IAF) के लिए 56 परिवहन हवाई जहाज खरीदेगी। इस पर करीब 22,000 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

वहीं नितिन गड़की ने इस मौके पर कहा, “हमने भारतमाला परियोजना के तहत करीब 45 करोड़ की लागत से 3 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप तैयार की है। इसकी क्वालिटी बहुत अच्छी है। इसका उपयोग भारतीय वायुसेना की आपातकालीन लैंडिंग के लिए होगा।”

एंटीलिया के बाहर विस्फोटक रखने से पहले अनिल देशमुख से मिला था सचिन वाजे, परमबीर सिंह ने रिपोर्ट बदलने को दिए ₹5 लाख: NIA के हवाले से दावा

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार रखने से पहले सचिन वाजे महाराष्ट्र के तत्कालीन गृहमंत्री अनिल देशमुख से मिला था। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिह ने इस मामले में रिपोर्ट बदलने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के ह​वाले से मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया है।

एजेंसी ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल किया है। इसमें विस्तार से बताया गया है कि मुंबई पुलिस के बर्खास्त सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे ने क्यों और कैसे पूरी प्लानिंग रची। किस तरह से मनुसख हि​रेन की हत्या की गई और इसमें अन्य कौन-कौन लोग उसके साथ थे। 2021 की 25 फरवरी एंटीलिया के बाहर विस्फोटक लदी कार मिली थी और 5 मार्च को हिरेन का शव मुंब्रा की खाड़ी से बरामद किया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, NIA ने अपनी चार्जशीट में खुलासा किया है कि घटना वाले दिन सचिन वाजे क्राइम इंटेलीजेंस यूनिट के अधिकारियों को अपने साथ शाम के करीब 7 बजे मालाबार हिल स्थित अनिल देशमुख के आवास पर ले गया था। वहाँ पहुँचने के बाद वाजे ने बाकी पुलिसवालों को लॉबी में इंतजार करने के लिए कहा और खुद अंदर चला गया। करीब 50 मिनट बाद वह बाहर निकला और कहा कि सीक्रेट ऑपरेशन जल्द ही शुरू होगा। साथ आए स्टाफ को सीआईयू मुख्यालय जाने का आदेश दिया।

अनिल देशमुख के सेक्रेटरी संजीव पलांडे ने सीबीआई को बताया था कि सचिन वाजे ने NCP नेता से मुलाकात की थी। इसके अलावा कुछ मौकों पर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह भी देशमुख के घर पर केस की प्रोग्रेस के बारे में बात करने के लिए जाते थे।

NIA द्वारा दायर 10,000 पन्नों की चार्जशीट से पता चलता है कि पूर्व पुलिस प्रमुख परमबीर सिंह ने इस मामले में आतंकी समूह जैश-उल-हिंद की संलिप्तता का हवाला देकर जाँच को गुमराह किया था। एक साइबर एक्सपर्ट के बयान के मुताबिक सिंह ने रिपोर्ट में आतंकी संगठन की भूमिका का जिक्र करने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे।

साइबर एक्सपर्ट ने 5 अगस्त को एनआईए के समक्ष परमबीर सिंह के कहने पर रिपोर्ट में बदलाव की बात कबूली थी। उसने बताया, “सीपी मुंबई के आग्रह पर मैंने सीपी मुंबई के कार्यालय में बैठकर अपने लैपटॉप पर एक रिपोर्ट तैयार की, जो एक पैराग्राफ में थी और मैंने इसे सीपी मुंबई को दिखाया। रिपोर्ट पढ़ने के बाद परमबीर सिंह सर ने मुझसे एंटीलिया मामले में जिम्मेदारी लेते हुए टेलीग्राम चैनल पर ‘जैश-उल-हिंद’ के पोस्टर डालने के लिए कहा।”

चार्जशीट के मुताबिक 16 साल बाद वाजे की मुंबई पुलिस में दोबारा बहाली हुई तो उसने ‘सुपर कॉप’ के तौर पर अपनी पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए पूरी साजिश रची। इसके लिए उसने उगाही से इकट्ठा रकम का इस्तेमाल किया। जब उसे एहसास हुआ कि हिरेन की वजह से उसकी पूरी साजिश सामने आ सकती है तो उसकी हत्या करवा दी। एनआईए ने चार्जशीट में 20 संरक्षित गवाहों सहित 178 गवाहों के बयानों का हवाला दिया है।

चार्जशीट के अनुसार वाजे को जब लगा कि हिरेन से पूछताछ में उसका सच सामने आ सकता है तो उसने प्रदीप कर उसे पैसे दिए। शर्मा ने यह पैसा संतोष आत्माराम शेलार को दिया। शेलार को हिरेन की हत्या की जिम्मेदारी दी गई थी। चार्जशीट में जो लोग आरोपी बनाए गए हैं उनमें वाजे के अलावा एनकाउंटर स्पेशलिस्ट रहे प्रदीप शर्मा का भी नाम है। शर्मा मुंबई पुलिस का चर्चित अफसर रहा है। वाजे उसे अपना ‘गुरु’ मानता है। अपने 36 साल के करियर में शर्मा ने करीब 312 एनकाउंटर किए। उसने शिवसेना के टिकट पर पिछला विधानसभा चुनाव पालघर की नालासोपारा सीट से लड़ा था। अन्य आरोपितों में नरेश रमणीकलाल गोर, विनायक बालासाहेब शिंदे, रियाज़ुद्दीन हिसामुद्दीन काज़ी, सुनील धर्म माने, आनंद पांडुरंग जाधव, सतीश तिरुपति मोथकुरी और मनीष वसंतभाई सोनी शामिल है।

रिपोर्ट के अनुसार हिरेन की हत्या महज 11 मिनट के भीतर अंजाम दी गई थी। सुनील माने ने 4 मार्च को क्राइम ब्रॉन्च इंस्पेक्टर तावड़े बनकर हिरेन को कॉल किया और ठाणे के घोड़बंदर रोड स्थित सूरज वॉटर पार्क के पास मिलने के लिए बुलाया। यहाँ से माने उसे सफेद रंग की कार में लेकर सुरेखा होटल पहुँचा। फिर उसे लाल रंग की टवेरा में बिठाकर उसका मोबाइल फोन ले लिया गया। टवेरा कार में हिरेन को ड्राइवर के पीछे वाली सीट पर योजना के तहत बीच में बैठाया गया। हिरेन के बैठते ही उसके एक तरफ संतोष शेलार और दूसरी ओर आनंद जाधव बैठ गया। इस सीट के पीछे पहले से ही सतीश बैठा हुआ था।

सतीश ने पीछे से हिरेन का सिर पूरी ताकत से जकड़ लिया और रूमाल से उसका मुँह और नाक दबा दिया। जब हिरेन ने बचाव में विरोध शुरू किया तो शेलार और जाधव ने उसके हाथ पकड़ लिए। हत्या के बाद उसका शव खाड़ी में फेंक दिया।

यह बात भी सामने आई है कि वाजे ने 2 मार्च को हिरेन को पुलिस हेडक्वार्टर में बुलाया था। तब प्रदीप शर्मा और संदीप माने भी मौजूद थे। ऐसा इसलिए किया गया ताकि शर्मा और माने भी हिरेन को पहचान लें। जिस दिन हिरेन की हत्या की गई उस दिन वाजे ने एक बार पर छापा मारा ताकि किसी को उस पर शक न हो। एंटीलिया के बाहर गाड़ी पार्क करने के बाद उसने अपने कपड़े जला दिए थे। अपना मोबाइल फोन भी नष्ट कर दिया था।

गौरतलब है कि इस मामले ने पूरी मुंबई पुलिस को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने दावा किया था कि अनिल देशमुख ने गृह मंत्री रहते वाजे को वसूली का टारगेट दे रखा था। इसके बाद देशमुख को भी पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

14 साल की बच्ची, 48 घंटे तक 13 दरिंदों ने नोंचा: खाने और कपड़े को बिलखती रही, अकबर सहित कई गिरफ्तार

महाराष्ट्र के पुणे में 14 साल की लड़की के साथ हुए गैंगरेप ने सबको झकझोर दिया है। मामले में अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। इन सबने पीड़िता के साथ 5 अलग-अलग ठिकानों पर 48 घंटे तक कई दफा रेप किया। आरोपितों में लड़की का दोस्त, क्लास 4 के 2 रेलवे कर्मचारी और 11 ऑटोरिक्शा वाले शामिल हैं।

पीड़िता के परिजनों का कहना है कि उनकी बच्ची अफसर बनने के सपने देखती थी मगर अब सब खत्म होता नजर आ रहा है। वह बस कोने में बैठ कर रोती रहती है। पुरुषों की आवज सुनते ही उसे डर लगता है। हालत ऐसी है कि पुलिस को बयान देने में भी घबरा रही है।

पुलिस के मुताबिक इस मामले को 14 लोगों के विरुद्ध IPC धारा 34, 363, 376, 377 के अलावा पॉक्सो की धारा 4(2),5 (g), 12, 8,6 के तहत दर्ज किया है। जिसमें अब तक मशक कन्याल (27), अकबर शेख (32), अजरुद्दीन अंसारी (27), नोएल खान (24), आसिफ पठान (36), प्रशांत गायकवाड़ (29), रफीक शेख (32), राजकुमार प्रसाद (29), गोलू (19) और 4 अन्य की गिरफ्तारी हुई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक डीसीपी नम्रता पाटिल ने बताया, 31 अगस्त को नाबालिग अपने 19 साल के दोस्त से मिलने चुपचाप निकली। वो ऑटो रिक्शा करके पुणे स्टेशन पहुँची लेकिन जब दोस्त नहीं आया तो वह वहीं रोने लगी। इसके बाद एक ऑटो ड्राइवर ने उसे कहा कि वो स्टेशन से बाहर चले उसका दोस्त बुला रहा है। लड़की बाहर आई तो उसे पीने को पानी दिया गया लेकिन पानी पीते ही उसे चक्कर आ गए।

लड़की के बेहोश होने के बाद ड्राइवर ने सुनसान जगह ले जाकर उसका रेप किया और फिर ठिकाना बदल कर उसके बाकी साथी भी बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म करते रहे। पीड़िता को बिन कपड़े के एक कमरे में बंद किया गया था। कुछ-कुछ घंटे में ये आरोपित उसके पास जाते और उसका रेप करते। वो रो रोकर खाने को खाना और पहनने को कपड़े माँगती लेकिन कोई उसकी बात नहीं सुनता। इसके बजाय वह उसे धमकाते कि बाहर जाकर यदि किसी को कुछ कहा तो उसे जान से मार देंगे। जब लड़की की तबीयत बिगड़ी तो उसे एक आरोपित मुंबई के दादर स्टेशन छोड़ आया जहाँ रेलकर्मी ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसके दोस्त को उसे सौंप दिया। 

7 सितंबर 2021 को जब दोनों चंडीगढ़ पहुँचे तो लड़की की गंभीर हालत देख GRP को शक हुआ और पूछताछ के बाद उसे प्रोजेक्ट डारेक्टर चाइल्ड लाईन को सौंप दिया गया। यहाँ लड़की ने आपबीती सुनाते हुए सारा खुलासा किया। क्रॉस चेक करने पर पता चला लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट वाकई दर्ज है। फिर पुलिस ने रेलवे स्टेशन के बाहर 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज को खँगाला और एक ऑटोरिक्शा वाले को पकड़ कर बाकी सब आरोपितों की भी जानकारी ले ली। गुनाह कबूलने के बाद इन्हें पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

‘जो पूर्वजों के न हुए, वे देश के क्या होंगे’: फिर गुपचुप गुजर गए फिरोज गाँधी, कॉन्ग्रेस तो छोड़िए पोता-पोती ने भी नहीं किया याद

एक और 8 सितंबर बीत गया और बीत गई फिरोज गाँधी की एक और पुण्यतिथि। इस बार भी वही हुआ जो हर साल देखने को मिलता है। कॉन्ग्रेस तो छोड़िए उन्हें पोते राहुल गाँधी और पोती प्रियंका गाँधी वाड्रा तक ने याद नहीं किया।

राहुल-प्रियंका ने फिरोज गाँधी की समाधि पर जाना तो दूर अपने ट्विटर हैंडल पर भी इस विषय पर कुछ नहीं लिखा। राहुल ने जहाँ 8 सितंबर को पूरे दिन ट्विटर से दूरी बनाए रखी। वहीं प्रियंका ने ट्विटर पर संगीत सम्राट भूपेन हजारिका को उनकी जयंती पर याद किया, लेकिन अपने दादा को याद करना उन्हें सही नहीं लगा। ऐसे ही राहुल ने भी फेसबुक पर भूपेन हजारिका को याद किया है मगर फिरोज गाँधी के लिए कोई पोस्ट नहीं है।

प्रियंका गाँधी के ट्वीट

इस बीच तमाम सोशल मीडिया यूजर्स दोनों भाई-बहन को याद दिलाते रहे कि उनके दादा की पुण्यतिथि है, वो लोग उन्हें भी याद कर लें। लोगों ने फिरोज गाँधी का यह तिरस्कार देख कहा कि जो लोग अपने पूर्वजों के नहीं हुए वो देश के क्या होंगे।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव इरशाद उल्लाह बताते हैं कि तकरीबन साल 2007 और उसके बाद 2009 में राहुल और सोनिया गाँधी समाधि पर आए थे, लेकिन कई दशक बीत जाने के बाद भी अब फिरोज गाँधी के समाधि स्थल पर उनके परिवार के कोई लोग नहीं आए। इसी तरह कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबा अवस्थी कहते हैं कि यह बहुत दुख की बात है जो आदमी कॉन्ग्रेस को ऊँचाइयों पर ले गए उनकी समाधि पर कुछ ही कार्यकर्ता आते हैं।

हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब राहुल-प्रियंका अपने दादा फिरोज गाँधी को भूल गए हों। लंबे समय से ऐसा चला आ रहा है। राहुल, प्रियंका और सोनिया अक्सर इंदिरा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और राजीव गाँधी को याद करते रहते हैं, उनके जन्मदिवस और पुण्यतिथि पर उनकी समाधि पर जाते रहे हैं। मगर, फिरोज गाँधी की समाधि पर कोई नहीं जाता। साल 2019 में प्रियंका फिरोज गाँधी की समाधि से कुछ दूर ही थीं, लेकिन तब भी उन्होंने वहाँ जाना मुनासिब नहीं समझा।

फिरोज गाँधी की समाधि न तो इंदिरा के ‘शक्ति स्थल’ जितनी हाई प्रोफाइल है और न ही राजीव गाँधी की ‘वीर भूमि’ की तरह भव्य। कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार के भाषणों में भी फ़िरोज़ गाँधी का नाम कहीं नहीं आता। उनका समाधि-स्थल लखनऊ-इलाहबाद हाइवे पर एक कोने में धूल फाँक रहा है। सोनिया गाँधी 2001 के बाद से वहाँ नहीं गईं। राहुल अंतिम बार 2011 में वहाँ गए थे। प्रियंका 2009 में वहाँ गई थीं। कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार का ऐसा हाल तब है जब उनके नाम के पीछे लगने वाला ‘गाँधी’ फिरोज गाँधी की ही देन है।

राष्ट्र कैसे बनते हैं महान: जाते-जाते अमेरिकी दूत ले गए ‘भागवत’ ज्ञान, RSS प्रमुख को पहले सुना फिर दुनिया को बताया

भारत में अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत अतुल केशप ने बुधवार (8 सितंबर 2021) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। बुधवार को भारत में केशप के कार्यकाल का आखिरी दिन था। भागवत के साथ उन्होंने लंबी चर्चा की। रिपोर्ट के मुताबिक, केशप आरएसएस प्रमुख के विचारों से काफी प्रभावित हुए। संघ के एक पदाधिकारी के अनुसार बैठक एक ‘शिष्टाचार भेंट’ थी।

अमेरिकी राजदूत ने ट्वीट कर बताया कि मोहन भागवत से भारतीय लोकतंत्र, बहुलतावादी परंपरा और विविधता को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। इस इस दौरान आरएसएस प्रमुख ने बताया कि कैसे पारंपरिक मूल्‍य एक राष्ट्र को महान और ताकतवर बनाते हैं।केशप ने एक तस्वीर भी साझा की है जिसमें वे भागवत की बातों को बेहद गौर से सुनते नजर आ रहे हैं।केशप ने ये भी कहा कि किस तरह से ये पारंपरिक मूल्य किसी भी राष्ट्र को महान बनाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने मोहन भागवत के साथ बातचीत की एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें सर संघचालक उन्हें कुछ समझाते दिख रहे हैं।

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने बताया कि वे वाशिंगटन वापस जा रहे हैं। उन्होंने भारत में अपने कार्यकाल को काफी महत्वपूर्ण बताया है। अमेरिकी राजदूत ने लिखा, “आज रात में अपने घर वाशिंगटन निकल रहा हूँ। भारत में काम करना मेरे लिए सम्मान की बात है। दोनों देशों के बीच मजबूत संबंध हैं।”

आरएसएस प्रमुख की अमेरिकी राजदूत के साथ मुलाकात इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में उन्होंने कहा था कि समझदार मुस्लिमों को कट्टरपंथियों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए, क्योंकि हिंदुओं और मुस्लिमों के पुरखे एक ही थे।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई राजदूत आरएसएस प्रमुख से मुलाकात कर चुके हैं। साल 2019 में जर्मन राजदूत वाल्टर जे लिंडनर ने भी नागपुर में संगठन के मुख्यालय में भागवत से मुलाकात की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, संघ के आउटरीच कार्यक्रम के तहत मोहन भागवत मिशन के प्रमुखों और राजदूतों से मिलते हैं। इसके तहत उन्होंने विदेशी प्रेस कोर के सदस्यों के साथ भी बातचीत की है।

सवाल- बच्चे की झलक कब, जवाब- उनके पिता से पूछिए: नुसरत जहाँ ने बहुत कुछ बताया, पर नहीं खोला बच्चे के पिता का नाम

बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री और पश्चिम बंगाल के बशीरहाट से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद नुसरत जहाँ ने हाल ही में एक बच्चे को जन्म दिया है। उन्होंने बेटे का नाम ‘Yishaan’ रखा है, जिसे हिंदी में कई जगह ‘ईशान’ भी पढ़ा जा रहा है। माँ बनने के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर नजर आईं नुसरत ने बच्चे, अभिनेता और बीजेपी नेता यश दासगुप्ता को लेकर बात की। लेकिन उस सवाल का जवाब नहीं दिया जिसके बारे में उनके प्रशंसक जानना चाहते हैं।

यह सवाल है कि उनके बच्चे के पिता कौन हैं। बताया जाता है कि पति निखिल जैन से अलगाव के बाद से नुसरत लिव इन में यश के साथ रह रहीं हैं। वहीं निखिल बता चुके हैं कि यह बच्चा उनका नहीं है। इसके बाद से ही बच्चे के पिता को लेकर अटकलें लगती रही है।

नुसरत जहाँ ने बुधवार (8 सितंबर 2021) को यश दासगुप्ता को अपने बच्चे का अभिभावक बताया। उन्होंने कहा कि यश के अभिभावकत्व में अच्छा समय बीत रहा है। नुसरत से जब उनके बेटे की झलक दिखाने को लेकर सवाल किया गया तो अभिनेत्री ने कहा, “यह सवाल आपको उसके पिता से पूछना चाहिए। वह इस समय उसे किसी को देखने नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे के पिता के चाहने पर ही उसे देखा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री नुसरत जहाँ ने 26 अगस्त को अपने बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे के जन्म के बाद निखिल जैन ने शुभकामनाएँ देते हुए कहा था, “हमारे बीच आपसी मतभेद हो सकते हैं, फिर भी मैं नवजात बच्चे और उसकी माँ को शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए कामना करता हूँ।” उससे पहले जब नुसरत जहाँ के गर्भवती होने की खबरें सामने आई थीं तो उन्होंने कहा था कि वे बीते 6 महीने से भी अधिक समय से नुसरत के साथ रिलेशन में नहीं थे। ऐसे में यह बच्चा उनका नहीं है।

नुसरत जहाँ और निखिल जैन ने कुछ समय तक डेटिंग करने के बाद 19 जून 2019 को तुर्की में एक निजी शादी समारोह में शादी कर ली थी। इसके बाद जून 2021 में इस शादी को अमान्य बताते हुए कहा था यह तुर्की में हुई थी, इसलिए यह भारतीय कानूनों के मुताबिक, अमान्य है।

शाहरुख-कबीर खान को पटाया, रॉकस्टार से ‘फ्री तिब्बत’ का झंडा हटवाया: बॉलीवुड में चीन की घुसपैठ, अपने मन की करवा रहा

विस्तारवादी नीति के साथ अपना हर कदम आगे बढ़ाने वाला चीन भारत के कई क्षेत्रों में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से घुसपैठ करके देश के लिए खतरा बन रहा है। भारतीय थिंक टैंक ‘Law and Society Alliance’ ने अपने एक अध्ययन में दावा किया है कि चीन अपने गुप्त एजेंडे के तहत भारत में कई क्षेत्रों में दखल बढ़ा रहा है। उनके निशाने पर भारत की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से लेकर विश्वविद्यालय, सामाजिक संस्थान, सोशल मीडिया, थिंक टैंक एवं तकनीकी उद्योग हैं। रिपोर्ट में तमाम उदाहरण देकर समझाया गया है कि कैसे चीन विभिन्न क्षेत्रों में घुसपैठ कर रहा है।

लॉ एंड सोसायटी एलायंस की तरफ से 3 सितंबर को जारी की गई 76 पृष्ठ की एक रिपोर्ट ‘मैपिंग चाइनीज फुटप्रिंट एंड इंफ्लूएंस ऑपरेशन इन इंडिया’ में दावा किया गया है कि रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के पीछे बीजिंग का गुप्त एजेंडा है। बॉलीवुड सेक्टर की बात करें तो चीनी कंपनियाँ ‘को-प्रोडक्शन’ के रूप में कार्य करके क्षेत्र में घुसी हुई हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2019 में देखने को मिला था जब बीजिंग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टविल आयोजित हुआ था। उस दौरान चीन ने कार्यक्रम में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता शाहरुख खान और निर्देशक कबीर खान की भागीदारी को भी सफलतापूर्वक प्रबंधित कर लिया था।

रिपोर्ट बताती है कि भारत की फिल्म इंडस्ट्री में बीजिंग का प्रभाव बढ़ाने के लिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक लॉबी ग्रुप बनाया है। इसका प्रमुख भारतीय लाबियिस्ट है जो कि काम ही फिल्म क्षेत्र के लिए कर रहा है। रिपोर्ट बताती है बीजिंग के ऐसे प्रभाव बेहद सूक्ष्म हैं लेकिन साथ ही व्यवस्थित भी है। इसके अलावा इस अध्य्यन के जरिए ये भी दावा किया गया है कि चीन अपने हितों को बखूबी साधने के लिए फिल्म रेगुलेटरीज बॉडी में प्रमुख लोगों को अपने पक्ष में करने में कामयाब रहा है।

चीन का फिल्म इंडस्ट्री पर कितना गहरा प्रभाव है इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि 2011 में रिलीज हुई रॉकस्टार फिल्म में जहाँ फ्री तिब्बत का झंडा था, उसके निर्माताओं को उसे सेंसर करना पड़ा। ऐसा क्यों हुआ? इसका जवाब चीन-तिब्बत विवाद है। तिब्बत लंबे समय से अपनी आजादी की माँग कर रहा है मगर चीन उस पर अपना अधिकार जमाता है। चीन का कहना है कि 13वीं शताब्दी में तिब्बत चीन का हिस्सा था तो आज भी उस पर उन्हीं का हक है। हालाँकि तिब्बती इस दावे को नहीं मानते इसलिए फ्री तिब्बत की आवाज वहाँ से अक्सर सुनने को मिलती है।

वीडियो साभार: tseries

साल 2011 में जब यही दृश्य फिल्म के गाने में दिखाया गया तो फिल्म रिलीज के लिए पास नहीं हुई। बाद में जानकारी आई कि विवादित सीन को काट दिया गया है। इसलिए फिल्म को यू/ए सर्टिफिकेट मिलता है। सेंसर बोर्ड की इस हस हरकत से कई तिब्बती नाराज हुए थे और सीन रिस्टोर करने की माँग की गई थी।

राणा अयूब के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी को लेकर यूपी में FIR, ‘सोशल वर्क’ के नाम पर वसूला था चंदा

विवादित पत्रकार राणा अय्यूब के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। 7 सितंबर 2021 को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में एफआईआर दर्ज की गई। मामला फंड इकट्ठा करने के कैंपेन से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में हिंदू आईटी सेल के विकास शाकृत्यायन ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में राणा अय्यूब पर मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी, संपत्ति में हेराफेरी, आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया है। अवैध रूप से चैरिटी के नाम पर आम जनता से धन की वसूली का आरोप है। इसमें कहा गया है कि राणा अय्यूब पेशे से पत्रकार हैं और सरकार से किसी भी प्रकार की अनुमति या रजिस्ट्रेशन के बिना ही वो विदेशी धन प्राप्त कर रही थीं। जबकि, ऐसा करने के लिए विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम 2010 के तहत सरकार की अनुमति या रजिस्ट्रेशन आवश्यक है। लिहाजा, वह एफसीआरए के नियमों का उल्लंघन करने के मामले में उत्तरदायी हैं।

शिकायत के आधार पर राणा के खिलाफ आईपीसी की धारा 403, 406, 418, 420, आईटी अधिनियम की धारा 66 डी और मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट-2002 की धारा 4 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

राणा के खिलाफ यह केस फंड इकट्ठा करने वाले प्लेटफॉर्म केटो (ketto) पर चलाए गए तीन अभियानों से संबंधित है। ये कैंपेन झुग्गीवासियों और किसानों, असम, बिहार और महाराष्ट्र में राहत कार्य तथा भारत में कोविड -19 से प्रभावित लोगों की मदद के नाम पर चलाया गया था। शुरू से ही राणा का यह कैंपेन शक के घेरे में था, क्योंकि उन्होंने एफसीआरए के अनिवार्य अप्रूवल के बिना ही विदेशों से चंदे की वसूली की थी।

केटो ने किया खुलासा

इस मामले में पिछले महीने केटो ने इन अभियानों के लिए दान करने वालों को इस बात की जानकारी दी थी कि राणा अय्यूब द्वारा जुटाए गए धन की जाँच चल रही है। बताया था कि फंड रेज होने के बाद उसका सही इस्तेमाल नहीं हुआ और इस फंड का बहुत हिस्सा अब भी अकाउंट में ही है।

केटो के मुताबिक, राणा अय्यूब ने उन्हें सूचित किया था कि उन्हें अभियानों में लगभग ₹2.69 करोड़ मिले थे, जिसमें भारतीय दानदाताओं से ₹1.90 करोड़ और विदेशी दान में $ 1.09 लाख (80,37,387.50 रुपए) शामिल थे। इस तरह के कुल ₹2.69 करोड़ का चंदा इकट्ठा हुआ था, जिसमें से उसने लगभग ₹1.25 करोड़ खर्च किए हैं। इसके अलावा राणा को अभी भी टैक्स के तौर पर 90 लाख रुपए देना बाकी है। लिहाजा अभी भी लगभग ₹1.44 करोड़ अभी भी खातों में पड़े होने चाहिए। इसमें से 90 लाख रुपए का टैक्स देना है औऱ बाकी का 54 लाख रुपए अभी तक लाभार्थियों तक नहीं पहुँचा है।

फंड रेजिंग में सामने आई हेरफेर के बाद राणा अय्यूब ने कैंपेन बंद कर दिया था। साथ ही दावा किया था कि वह विदेशी चंदा वापस कर रही हैं। लेकिन पिछले महीने केटो की तरफ से दी गई जानकारी से पता चला कि उन्होंने विदेशों से लिए गए इस तरह के किसी भी दान वापस नहीं किया। उन्होंने विदेशी चंदे में $1.09 लाख एकत्र किए थे और केटो मेल में किसी भी धनवापसी का उल्लेख नहीं है, जिसका अर्थ है कि उन्होंने दान वापस करने के बारे में झूठ बोला था।

अफगानी महिलाओं का प्रोटेस्ट कवर करने गए 2 पत्रकारों के साथ तालिबान की बर्बरता, 4 घंटे में किया ऐसा हाल: क्या यही है शरिया?

अफगानिस्तान में तालिबान की बर्बरता पत्रकारों पर भी कम नहीं है। खबर है कि एतिलात्रोज़ (Etilaatroz) से जुड़े दो पत्रकार- तकी दरयाबी (Taqi Daryabi) और नेमातुल्लाह नक़दी (Nematullah Naqdi) को तालिबान ने बेरहमी से मारा है। दोनों पत्रकार महिलाओं का प्रदर्शन कवर करने मौके पर पहुँचे थे। इसी बीच तालिबानियों ने दोनों को पकड़ा और अंधाधुंध पीटा। पत्रकारों की पीठ पर केबल की तार और डंडों के निशान पाए गए हैं। दोनों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पत्रकार पश्चिमी काबुल के कार्ट-ए-चार (Kart-e-Char) इलाके में महिलाओं के उस प्रदर्शन को कवर करने पहुँचे थे जिसका मुद्दा नई सरकार में महिलाओं की भागीदारी न होने को लेकर था। इसी दौरान तालिबानियों ने पत्रकारों को पकड़ा और बंधक बनाकर उनसे मारपीट की। दोनों को 4 घंटे बाद छोड़ा गया। वहीं बाकी भी पत्रकार पकड़े गए थे उनको भी तालिबान ने बाद में रिहा कर दिया।

बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान की एंट्री के बाद मानवाधिकारों का उल्लंघन धड़ल्ले से हो रहा है। कई पत्रकार अब तक उनका निशाना बन चुके हैं। डीडब्ल्यू से जुड़ी एक पत्रकार की रिश्तेदार को कुछ समय पहले गोली मार दी गई थी। वजह यही थी कि तालिबानी उस पत्रकार को ढूँढ रहे थे। लेकिन न मिलने पर रिश्तेदार को मौत के घाट उतार दिया। जानकारी के मुताबिक, अब तक 3 DW पत्रकारों के घरों पर छापेमारी हो चुकी है। इसके अलावा जलालाबाद के प्रदर्शन में भी पत्रकार तालिबान के निशाने पर आए थे। फिर सीएनएन पत्रकारों पर भी तालिबान ने हमला किया था।

रबी फसलों की MSP में ₹40-400 तक की बढ़ोतरी: PM मोदी ने कहा- किसानों को मिलता रहेगा फसलों का अधिकतम लाभकारी मूल्‍य

नए कृषि कानूनों के विरुद्ध चल रहे किसान आंदोलन के बीच मोदी सरकार ने किसानों को तोहफा दिया है। सरकार ने फैसला लिया है कि 2022-23 के लिए रबी की फसल में MSP (न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य) में बढ़ोतरी होगी। मोदी सरकार ने गेहूँ, बार्ले, चना, मसूर, सरसों और सैफलॉवर का MSP बढ़ाया है।

पीएम मोदी ने इस बात की जानकारी देते हुए ट्वीट किया। उन्होंने कहा, “किसान भाइयों और बहनों के हित में सरकार ने आज एक और बड़ा निर्णय लेते हुए सभी रबी फसलों की MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। इससे जहाँ अन्नदाताओं के लिए अधिकतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित होंगे, वहीं कई प्रकार की फसलों की बुआई के लिए भी उन्हें प्रोत्साहन मिलेगा।”

इसके बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “कुछ लोग यह गलत सूचना फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि MSP (मिनिमम सपोर्ट प्राइस) बंद कर दिया जाएगा। इसके विपरीत कृषि कानूनों के लागू होने के बाद MSP पर फसलों की खरीद और MSP की दर लगातार बढ़ रही है।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आज गेहूँ समेत रबी की कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 40 रुपए से लेकर 400 रुपए तक की वृद्धि की गई है। यह निर्णय प्रमाण है कि एमएसपी की व्यवस्था पर कोई आँच नहीं आने वाली बल्कि उसमें वृद्धि भी जारी रहेगी।

उन्होंने लिखा, “कृषि और किसान के कल्याण के प्रति प्रधानमंत्री मोदीजी की प्रतिबद्धता पूरी तरह स्पष्ट है। रबी की फसलों का MSP बढ़ाने का आज का निर्णय, किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा। इस कल्याणकारी निर्णय के लिए मैं प्रधानमंत्रीजी को बधाई और हार्दिक धन्यवाद देता हूँ।”

बता दें कि इस संबंध में जारी की गई प्रेस रिलीज के मुताबिक गेहूँ का एमएसपी 1975 रुपए से बढ़कर 2015 रुपए हो गया है, बार्ले का 1600 रुपए से बढ़कर 1635 रुपए, चना की 5100 रुपए से 5230 रुपए, सरसों की 4650 रुपए से 5050 रुपए, सैफलॉवर का 5327 रुपए से 5441 रुपए और मसूर की 5100 रुपए है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में केंद्र सरकार ने 2022-23 मार्केटिंग सीजन के लिए रबी फसलों का MSP बढ़ाने का फैसला लिया। प्रेस रिलीज के मुताबिक सबसे ज्यादा मसूर और सरसों के MSP में बढ़ोतरी हुई है। इसमें 400 रुपए का इजाफा किया गया है। इसके बाद चने के MSP में सबसे अधिक यानी 130 रुपए की बढ़ोतरी हुई, सैफलॉवर का MSP 114 रुपए बढ़ा है, वहीं गेहूँ और बार्ले का MSP क्रमश: 40 और 35 रुपए बढ़ा है।