तमिलनाडु के कोयंबटूर में सेंट पॉल कॉलेज ऑफ आर्ट्स के अध्यक्ष पादरी वी डेविड को सॉम्प्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप में गुरुवार (2 अगस्त 2021) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। पादरी विनायक चतुर्थी के दिन लोगों को ‘प्रार्थना यात्रा’ या ईसाई तीर्थयात्रा करने के लिए कहते हुए पर्चे बाँटे थे।
कथित तौर पर पैम्फलेट में विभिन्न विवादास्पद टिप्पणियाँ भी थीं, जिस पर संज्ञान लेते हुए तमिलनाडु स्थित हिंदू संगठन हिंदू मुन्नानी ने पुलिस में आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।
डेविड को भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (ए) (1) (ए), 504 और 505 (2) के तहत गिरफ्तार किया गया है और उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वह फिलहाल सेंट्रल जेल में बंद हैं।
डीएमके के खिलाफ हिंदू मुन्नानी का प्रदर्शन
इस बीच, हिंदू धर्म और हिंदू धार्मिक स्मारकों की रक्षा के लिए गठित उसी धार्मिक और सांस्कृतिक संगठन ने तमिलनाडु में मंदिरों के बाहर प्रार्थना विरोध प्रदर्शन किया। हिंदू मुन्नानी ने द्रमुक सरकार द्वारा इस गणेश चतुर्थी पर गणेश प्रतिमाओं को सार्वजनिक स्थानों पर रखने या जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ भी कड़ी आपत्ति जताई है।
संगठन के महासचिव मेघनाथन ने टिप्पणी इस मामले को लेकर कहा, “किसी को भी इस बात पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए कि कोई कैसे प्रार्थना करे। हम देवताओं से प्रार्थना करके विरोध कर रहे हैं कि सरकार और नौकरशाही को हमें गणेश चतुर्थी आयोजित करने की अनुमति के लिए सद्बुद्धि दें।”
मंदिर के बाहर प्रदर्शन करते हिंदू मुन्नानी संगठन के लोग
उन्होंने सरकार के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि अगर भारी भीड़ को जुटाने के लिए शराब की दुकानें खुल सकती हैं, तो आगामी हिंदू त्योहार गणेश चतुर्थी क्यों नहीं मनाया जा सकता है। संगठन ने त्योहार की भावना को कम न होने देने के लिए इस सीजन में राज्य में 1 लाख गणेश प्रतिमाएँ स्थापित करने की भी घोषणा की है।
कोरोना महामारी को देखते हुए पिछले साल इस त्योहार को बंद रखा गया था। इससे मूर्तिकारों को काफी नुकसान हुआ था, लेकिन इस साल उन्हें अच्छा होने की उम्मीद है। हालाँकि, त्योहार पर सरकार के प्रतिबंध ने उन्हें एक बार फिर मुश्किल में डाल दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (सितंबर 3, 2021) को कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता और 1984 के सिख विरोधी दंगों के दोषी सज्जन कुमार की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि उनकी मेडिकल कंडीशन स्थिर है। सज्जन कुमार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय किशन कौल और ऋषिकेश रॉय की बेंच ने कहा कि उनका इलाज ‘सुपर वीआईपी’ की तरह नहीं हो सकता।
1984 के सिख विरोधी नरसंहार को भड़काने के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार ने मेडिकल कारणों से अंतरिम जमानत की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया। उनकी सेहत स्थिर होने और लगातार सुधार दिखने के चलते कोर्ट ने यह फैसला दिया है। पूर्व कॉन्ग्रेस नेता कथित तौर पर जेल में गिर गए थे, जिसके बाद उनका सफदरजंग अस्पताल के आपातकालीन आईसीयू में इलाज चल रहा था।
जस्टिस संजय किशन कौल की अगुवाई वाली पीठ ने सज्जन कुमार के वकील से कहा, “आपको लगता है कि जैसे वह देश में इलाज कराने वाले एकमात्र मरीज हैं। उन पर जघन्य अपराधों की एक श्रृंखला का आरोप है और आप चाहते हैं कि उसके साथ एक सुपर वीआईपी मरीज की तरह व्यवहार किया जाए, जिसकी अनुमति हम नहीं देंगे।”
यह आदेश केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा शुक्रवार को एक प्रतिक्रिया दायर करने के बाद आया है, जिसमें कहा गया कि सज्जन कुमार की चिकित्सा स्थिति स्थिर है और सुधार के संकेत दिख रहे हैं। हालाँकि अदालत ने कहा कि अगर जेल अधिकारियों और डॉक्टरों को जरूरी लगेगा तो वह उसे मेदांता अस्पताल ले जा सकते हैं।
कुमार का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने एक याचिका दायर कर कॉन्ग्रेस नेता को बेहतर इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति माँगी थी। वैसे यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस नेता ने दोषी ठहराए जाने के बाद चिकित्सा आधार पर जमानत माँगी है। कोर्ट ने पिछले साल भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी करार
सज्जन कुमार पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद 1984 के सिख विरोधी नरसंहार में शामिल कई कॉन्ग्रेस नेताओं में से एक थे। उन्हें 17 दिसंबर, 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उन्हें दिल्ली छावनी क्षेत्र में 5 सिखों (केहर सिंह, गुरप्रीत सिंह, रघुवेंद्र सिंह, नरेंद्र पाल सिंह और कुलदीप सिंह) की हत्या के लिए जिम्मेदार पाया गया था। कुमार पर आईपीसी की धारा 302, 120 बी, धारा 153 ए और आईपीसी की अन्य संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
कुछ दिनों पहले पादरी बजिंदर सिंह और एक नाबालिग लड़के का एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ। इस वीडियो के बाद सोशल मीडिया वेबसाइटों पर वीडियो से जुड़े मीम्स की बाढ़ आ गई।
वायरल वीडियो किसी ईसाई मिशनरी के कार्यक्रम का लगता है। इस वीडियो में एक लड़के को रोते हुए देखा जा सकता है। फिर पादरी उससे पूछता है कि क्या उसकी बहन पहले बोल सकती थी। लड़का ‘नहीं’ में जवाब देता है। फिर उससे पूछा जाता है कि क्या वह अब बोल सकती है, और इस बार वह ‘हाँ’ में जवाब देता है। तभी बैकग्राउंड में गाना बजता है, “मेरा यशु यशु।”
Late ….But still vibing on “Mera yeshu yeshu …Mera yeshu yeshu “?????Damn too hilarious ?? Behan bolne lagi ???? pic.twitter.com/CECearb9iv
सोशल मीडिया पर वीडियो से जुड़े मीम्स वायरल होने के साथ ही ईसाई मिशनरियों द्वारा भोले-भाले लोगों को जबरदस्ती ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के मकसद पर बहस छिड़ गई है। इंटरनेट ऐसी हरकतों के वीडियो से भरा पड़ा है, जो दिखाता है कि कैसे ईसाई मिशनरी निर्दोष लोगों को अपने धर्मांतरण चाल में फँसाने में सफल रहे हैं। विदेशी ईसाई संगठनों और ईसाई मिशनरियों ने पिछले कुछ दशकों में हिंदुओं को लुभा कर ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा है।
यहाँ ईसाई मिशनरियों के कुछ ऐसे वीडियो हैं, जिसमें वे लोगों को बेवकूफ बनाते हैं और निर्दोष लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करते हैं।
1. पादरी जीसस की शक्ति से किडनी को ठीक कर देता है
मुंबई के सांताक्रूज की रहने वाली पुष्पा दिवाडकर की रीढ़ की हड्डी खराब हो गई थी और पिछले 1 साल से दोनों किडनियाँ भी फेल हो गई थीं। वह पिछले 9 साल से बीमार थीं और बिस्तर पकड़े हुए थीं। वह बिना किसी सहारे के एक कदम भी नहीं चल सकती थीं, लेकिन पादरी ने चंद मिनटों में पुष्पा की बीमारियों का अंत कर दिया। उसने यीशु मसीह की शक्ति का उपयोग करके न केवल उसके रीढ़ की हड्डी का इलाज किया बल्कि उसके फेल हुई दोनों किडनियों को भी ठीक कर दिया। जिसके बाद पुष्पा बिना किसी सहारे के स्टेज पर दौड़ने लगीं।
2. यीशु ने अंधी लड़की को चंगा किया
वहीं पादरी बजिंदर सिंह की यह हरकत विज्ञान से परे है। चंडीगढ़ के पादरी बजिंदर सिंह ने बचपन से अंधी एक लड़की को यीशु द्वारा उन्हें दी गई चमत्कारी शक्ति से ठीक करने का दावा किया। बच्ची को डॉक्टर ने जवाब दे दिया था, लेकिन बजिंदर सिंह ने यीशु से प्रार्थना कर उसे ‘ठीक’ कर दिया, वह देखने लगी। बता दें कि पादरी बजिंदर सिंह को एक बार एक महिला के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
3. यीशु ने कपल को एड्स से ठीक किया
आधुनिक समस्याओं के लिए आधुनिक समाधान की आवश्यकता होती है। खैर, कुछ लोग कहते हैं कि विज्ञान सभी आधुनिक समस्याओं का रामबाण इलाज है। हालाँकि, कुछ चीजें विज्ञान के दायरे से बाहर हैं। एड्स की वायरल बीमारी एक ऐसी ही चीज है। दुनिया भर में कई वैज्ञानिकों ने इस यौन संचारित रोग का इलाज खोजने के लिए दशकों का शोध किया है। एचआईवी का इलाज खोजने में अब तक कुछ खास हासिल नहीं हुआ है। लेकिन, पादरी बजिंदर सिंह के पास एड्स का भी इलाज है। इस वीडियो में पादरी बजिंदर सिंह ने एचआईवी से संक्रमित लोगों को ठीक कर लोगों को मूर्ख बनाया।
एक साथ कई मरीजों का इलाज
इस वीडियो में विज्ञान को एक से अधिक तरीकों से चुनौती दी गई। सिर्फ एक बीमारी नहीं, सिर्फ एक मरीज नहीं, बल्कि चेन्नई के जेफ्री मिनिस्ट्रीज के पादरी एक झटके में कई लोगों को ठीक कर देते हैं। चेन्नई में जेफ्री मंत्रालय नियमित रूप से बड़े पैमाने पर उपचार करता है और बहुत सी बीमारियों को ठीक करने का दावा करता है।
जेफ्री मंत्रालय द्वारा आयोजित एक सामूहिक सभा के दौरान, पादरी मंच पर किडनी, लीवर की बीमारियों और अन्य पुरानी समस्याओं का इलाज करता है। इस तरह के जानलेवा रोगों के रोगी पादरी के एक साधारण स्पर्श और उसके ‘चमत्कार’ से ठीक हो जाते हैं।
5. युवा यीशु और उसके चमत्कार
केवल वयस्क पुरुष और महिलाएँ ही नहीं बल्कि बच्चे भी इसमें लिप्त होकर लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने में सबसे आगे रहे हैं। बात हो रही है कुख्यात प्रचारक राम बाबू के पुत्र अंकित राम बाबू की। अंकित बाबू काफी लंबे समय से धर्मांतरण के धंधे में हैं। नीचे दिया गया स्निपेट दिखाता है कि वह निर्दोष लोगों को यह विश्वास दिलाने में कितना कारगर है कि वह उँगलियों के एक झटके में बीमारियों का इलाज कर सकता है।
युवा प्रचारक एक मरीज को उसके कैंसर से लाइव स्टेज पर ठीक करता है। इसके बाद अंकित राम बाबू प्रार्थना करते हुए कहते हैं, “उसे और पिता को ठीक करने के लिए धन्यवाद, जो काम शुरू हो गया है, उसे पूरा करें,” आमीन, आमीन।”
6. धीमी गति से भूत भगाना
इस वीडियो में एक महिला के ऊपर से भूत उतारते हुए देखा जा सकता है। वह ‘हालेलुयाह’ के चिचियाहट के बीच अपने हाथों से अजीबोगरीब हरकतें करती है। यह सब कुछ स्लो मोशन में होता है। फिर कुछ देर बाद वह फर्श पर लेट कर रेंगने लगती है। ऐसा करते हुए उसके ‘ठीक’ हो जाने पर वहाँ पर उपस्थित दर्शक तालियाँ बजाने लगते हैं।
ये कुछ वीडियो हैं, जो ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश करते हैं। ऐसे कई वीडियो हैं जो ऐसे कई आयोजनों पर प्रकाश डालते हैं जो देश भर में हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करते हैं।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कल (सितंबर 2, 2021) अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर करते हुए उन दिनों को याद किया जब वह अपने पिता राजीव गाँधी के साथ एयरोप्लेन में बैठ कर आनंद लिया करते थे। अपनी वीडियो में उन्होंने बताया कि पायलट होने से सार्वजनिक जीवन में भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है और बड़े स्तर पर चीजों को देखने का नजरिया विकसित होता है।
भारतीय युवा कॉन्ग्रेस की ओर से आयोजित राजीव गाँधी फोटो प्रदर्शनी में राहुल गाँधी की यह 5 मिनट 48 सेकेंड की वीडियो बनाई गई। इसमें वह अपने पिता के साथ बिताए पलों को याद करते दिखाई पड़ रहे हैं। वो बताते हैं कि कैसे उनके पिता उनसे प्लेन के पार्ट्स के नाम पूछा करते थे। बाद में जब वह कॉलेज गए तो उन्होंने प्लेन चलाना सीखा भी।
साभार: राहुल गाँधी का यूट्यूब अकॉउंट
इस दौरान राहुल ने अपने चाचा संजय गाँधी के साथ हुई दुर्घटना को भी याद किया। उन्होंने बताया, “मेरे चाचा एक विशेष प्रकार का प्लेन उड़ा रहे थे- वह पिट्स था। वह बेहद अग्रेसिव प्लेन था। मेरे पिता ने उनसे कहा कि ऐसा मत करो। मेरे चाचा के पास उतना अनुभव नहीं था। मेरे चाचा के पास तीन से साढ़े तीन सौ घंटे प्लेन उड़ाने का अनुभव था, यानी उतना ही जितना मुझे है। उन्हें वह प्लेन नहीं उड़ाना चाहिए था लेकिन उन्होंने उड़ाया। और वही हुआ जो उड़ाने का अनुभव न होने पर होता है। आसानी से खुद की जान ली जा सकती है।”
बता दें कि संजय गाँधी का निधन 23 जून 1980 को सफदरजंग हवाई अड्डे के पास विमान दुर्घटना में हुआ था। राहुल आगे बताते हैं कि जब भी उनके पिता प्लेन उड़ाने जाते थे तो उनकी माँ बहुत ज्यादा चिंतित हो जाती थीं। वह कहती थीं, “वह प्लेन उड़ाने गए हैं, ये बेहद खतरनाक होगा।”
वह कहते हैं पायलटों में एक विशेष प्रकार का गुण होता है जो उन्हें ट्रेनिंग से प्राप्त होता है और वह यह है कि उन्हें 30 हजार फीट की ऊँचाई से दिखने वाले दृश्य से अपनी नजर को कॉकपिट के भीतर के दृश्य में लाना होता है। अगर उस कॉकपिट के भीतर चीजों को नहीं रख पाएँगे तो परेशानी खड़ी होगी।
वह बताते हैं कि पायलट जब विमान उड़ाता है, उसकी कल्पनाशीलता रोड, रेलवे लाइन द्वारा अवरुद्ध नहीं होती। उनकी कल्पनाशीलता 30 हजार फुट पर होती है, इसलिए उनकी भी क्षमता बड़े तंत्र को देखने की है। राहुल कहते हैं, “इसी तंत्र ने मेरे पिता की मदद की। वो जाते थे, लोगों से मिलते थे, उन्हें समझते थे और फिर 30-40 फीट ऊपर चले जाते थे। उनका काम हमेशा इन दो नजरियों में चलता था।”
पश्चिम बंगाल में हिंसा को लेकर अब कॉन्ग्रेस ने भी सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को घेरा है। लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने इस संबंध में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हिंसा के आरोप लगाए हैं। अधीर रंजन ने ‘सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा और अत्याचार’ के शिकार कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए न्याय सुनिश्चित करने की माँग की है।
पत्र के अनुसार, गुरुवार (सितंबर 2, 2021) को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मुर्शिदाबाद में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता के घरों में ‘दिन के उजाले’ में लूटपाट और तोड़फोड़ की। चौधरी ने ममता को लिखे पत्र में कहा है, “मैं आज दिन के उजाले में सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा और अत्याचारों की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के घरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई।”
Congress MP Adhir Ranjan Chowdhury writes to West Bengal CM Mamata Banerjee “to intervene and ensure justice to Congress workers who are victims of violence and atrocities committed by the ruling party’s workers” pic.twitter.com/M9V68AG4ZD
पत्र में कहा गया है, “आपको ये जानकर हैरानी होगी कि ये लूट और हिंसा स्थानीय प्रशासन की मौजूदगी में हुआ। इलाके में अनिश्चितता की स्थिति है। मैं उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग करता हूँ। आपसे मामले में हस्तक्षेप की अपील है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके।” इस पत्र की प्रति उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव और गृह सचिव के अलावा मुर्शिदाबाद के जिलाधिकारी तथा पुलिस अधीक्षक को भी भेजा है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के कुछ घंटे बाद ही राज्य के कई इलाकों में राजनीतिक हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में खासकर बीजेपी समर्थक निशाने पर थे। पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार (1 सितंबर, 2021) को 10 नए केस दर्ज किए थे।
ज़ी न्यूज़ की रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी ने नए मामलों के संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा था, “सीबीआई ने डब्ल्यूपीए (पी) के मामले में पारित माननीय कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में दस और मामले दर्ज किए हैं। केस नंबर 142, 143, 144, 145, 146, 147, 148, 149 और 167 की जाँच अपने हाथ में ले ली जो पश्चिम बंगाल के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में दर्ज थे।” पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में भाजपा कार्यकर्ता धर्म मंडल और दो अन्य की हत्या के आरोप में 28 अगस्त 2021 को बीजू और आसीमा घोष को गिरफ्तार करने के बाद सीबीआई ने यह कदम उठाया।
हजरतबल कश्मीर में है। फेमस है। 1963-64 में और फेमस हो गया था। मसला था मू-ए-मुकद्दस (पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का बाल)। यह चोरी हो गया था। बाद में रहस्यमयी ढंग से मिल भी गया था। खैर।
हजरतबल आज भी फेमस हुआ है… सोशल मीडिया पर। कारण पैगंबर मोहम्मद नहीं हैं, न ही उनकी बाल! कारण बने हैं कार्ति चिदंबरम।
कार्ति चिदंबरम कौन? सांसद हैं। कॉन्ग्रेस के चंद सांसदों में से एक। फिर भी लोग नाम भूल जाते हैं। राजनीति ऐसी ही निष्ठुर चीज है। बापों को याद किया जाता है, बेटे उस छवि को भुना कर भ्रष्टाचार से लथ-पथ (आरोप ही सही) फिर भी ले शपथ… सांसदी-मंत्री वाली कुर्सी तक पहुँच जाते हैं। खैर।
मुद्दे की बात। मुद्दा है हजरतबल और कार्ति चिदंबरम। कार्ति चिदंबरम पहुँचते हैं हजरतबल। शुक्रवार के दिन फोटो डालते हैं – एक साथ चार। चारों पर बवाल कम होता है। नेताजी को कम बवाल पसंद हो, तो समझिए नेता खत्म। लेकिन सांसद कार्ति खत्म कैसे? चार के बजाय एक फोटो डालते हैं… कैप्शन भी सौ टका शुद्ध कॉन्ग्रेसी।
पढ़ लिए। OK. अब कहानी को हजरतबल और कार्ति चिदंबरम से मोड़ कर सोशल मीडिया पर लाते हैं। यहाँ इस्लाम की जानी-मानी हस्तियाँ रहती हैं। इनमें एक बड़ा नाम प्रोफेसर हकुद्दीन शेख (Prof. Hakuddin Sheikh) का है। ओवैसी के फैन हैं, तलाक भी ले चुके हैं और विलायत मामले मंत्रालय से संबंध रखते हैं। मतलब सिर्फ मुसलमान नहीं, भौकाल भी है इनका।
Wonderful. Happy to see you on the right path. Ask the maulvi there to perform required rituals and become a part of the ummah.
प्रोफेसर हकुद्दीन शेख ने नमाज पढ़ते कार्ति चिदंबरम को देखा तो इनकी बाँछें खिल गईं। नजदीक के मौलवी से मिल कर पक्का मुसलमान कैसे बना जाए, उसके बारे में नसीहत दे दी। हालाँकि इसके आगे नहीं बताया। लेखक ने एक सलिमा देखी थी, उसी के आधार पर सलाह लिख रहा हूँ, कोई भूल-चूक हो तो अल्लाह मुआफ करे, वो नेकदिल है, कर देगा!
पक्का मुसलमान कैसे बनें?
आमिर खान का एक सलिमा देखिए। 1947: अर्थ। इसमें एक कैरेक्टर होता है हरिया। हिंदू होता है। मुसलमान बनना पड़ता है। कैसे बनता है, ये मजेदार (सिर्फ सलिमा में, असल जिंदगी में जो बने हैं, सिर्फ वो ही जानते हैं) है। YouTube पर है, फ्री में देख सकते हैं। समय कम हो तो 1 घंटे 36 मिनट के बाद से देखना शुरू कीजिए। बस 4 मिनट। पूरा मजा है।
सलिमा की एक झलक, मुसलमान बन जाने के बाद भी कैसे समाज में होती है पहचान
क्या यह सलिमा कार्ति चिदंबरम भी देखेंगे या हकुद्दीन शेख की बात मान वो अब तक मौलवी से मिल चुके होंगे, अगले चुनाव में नामांकन प्रक्रिया में पता चल जाएगा। तब तक हरी टोपी खुद भी पहनें और पहनाएँ। क्या फर्क पड़ता है!
ऑपइंडिया के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा की गई चौथी एफआईआर पर भी सुप्रीम कोर्ट ने आज (सितंबर 3, 2021) स्टे लगा दिया। अब शीर्ष अदालत नवंबर में इस मामले की सुनवाई करेगी। इस बीच अदालत ने किसी भी तरह की पड़ताल पर रोक लगा दी है। यह चौथी एफआईआर साल 2020 में हुए तेलिनिपारा दंगों से संबंधित थी, जिस पर ऑपइंडिया ने अपनी कवरेज की थी।
इस मामले में ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नुपूर जे शर्मा और सीईओ राहुल रौशन को कुछ दिन पहले पूछताछ के लिए सीआईडी ने समन भेजा था। इसके बाद दोनों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूछताछ का अनुरोध किया था। साथ ही दोनों पूछताछ में सहयोग देने को आगे भी आए।
राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को नुपूर जे शर्मा और राहुल रौशन की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी और रवि शर्मा ने पेश किया। याचिका में स्पष्ट बताया गया कि ये चौथी प्राथमिकी उन्हीं एफआईआर की श्रृंखला में सबसे नई है जो ऑपइंडिया के ख़िलाफ़ दुर्भावनापूर्ण तरीके से दर्ज की गई थी। इससे पहले तीन एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में रोक लगा दी थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि भले ही उनके ख़िलाफ़ ये एफआईआर 2020 में दर्ज हुई थी, लेकिन दोनों में से किसी को इसकी सूचना नहीं थी। उनके मुताबिक, ये एफआईआर बंगाल पुलिस और सीआईडी दोनों ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड नहीं की थी, जबकि एफआईआर को साइट पर अपलोड करना अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान महेश जेठमलानी ने तर्क दिया कि चौथी एफआईआर को भी पिछली तीन एफआईआर के साथ जोड़ा जाना चाहिए और इस पर रोक लगनी चाहिए। इसके बाद शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में नुपूर जे शर्मा और राहुल रौशन को राहत देते हुए मामले की अगली सुनवाई नवंबर में रखी।
पूर्व में हुई FIR पर भी लगाई थी रोक
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जून 2020 में बंगाल सरकार द्वारा चार लोगों के विरुद्ध की गई एफआईआर पर स्टे लगाया था। इनमें से तीन लोग ऑपइंडिया से संबंध रखते थे, जबकि चौथे व्यक्ति वैभव शर्मा थे। वैभव, ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ के पति हैं जिनका साइट से भी कोई संबंध नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय इन एफआईआर पर स्टे लगाने के साथ ही बंगाल सरकार को नोटिस भी जारी किया था।
उल्लेखनीय है कि साल 2020 में ऑपइंडिया के ख़िलाफ़ जो तीन एफआईआर हुई थीं उसका आधार भी मीडिया रिपोर्ट्स थीं। ये सारी रिपोर्ट्स अन्य पोर्टल्स पर भी प्रकाशित हुई थीं, लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने केवल ऑपइंडिया को निशाना बनाया था। आप इस संबंध में विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं।
दिल्ली के शाहीन बाग में मदरसे के नाम पर लोगों से चंदा माँगने के बहाने घरों की रेकी करने के बाद वहाँ चोरी की वारदात को अंजाम देने के मामले में पुलिस ने मोहम्मद अखलाक (43) को उत्तर प्रदेश के बिजनौर से गिरफ्तार किया है। आरोपित पहले भी चोरी की दो वारदातों में शामिल रहा है। उसके पास से पुलिस ने दो मोबाइल फोन जब्त किया है।
Police arrested Mohammad Akhlaq who did reccee of houses during the day on pretext of collecting donations for Madrassas and committed burglaries there at night. Nabbed through IMEI surveillance. pic.twitter.com/SCbM5Sl4t3
रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित मोहम्मद अखलाक मूलत: बिजनौर जिले के किरतारपुर का निवासी है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली पुलिस के डीसीपी आरपी मीणा का कहना है कि बीते 10 जुलाई 2021 को शाहीन बाग पुलिस को चोरी से संबंधित एक फोन आया था। जब पुलिस टीम घटनास्थल पर पहुँची तो वहाँ पर पीड़िता मलका ने घटना के बारे में जानकारी दी। मलका ने बताया कि सुबह के करीब 8 बज रहे थे औऱ वो सो रही थी। इसी दौरान कोई उसके कमरे में घुसा और उसके दो मोबाइल फोन और 12 हजार रुपए चुरा ले गया।
डीसीपी मीणा ने कहा कि पीड़िता की शिकायत के बाद शाहीन बाग थाने के थानाध्यक्ष के नेतृत्व में एसआई शील कुमार, एसआई नासिर, हेड कॉन्स्टेबल रविंदर, सिपाही सुरेंद्र और रोशन की एक टीम गठित कर इस मामले की जाँच में लगाया गया। चोरी किए गए मोबाइल फोन को सर्विलांस पर रखा गया था। उसकी लोकेशन ट्रेस की गई तो उसका आखिरी लोकेशन मुस्तफाबाद में पता चला। उसके बाद फोन बंद हो गया। इस बीच 29 अगस्त 2021 को मोबाइल नंबर एक्टिव मिला।
ट्रेस करने पर पता चला कि वो बिजनौर में इस्तेमाल ही रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने वहाँ से नवाब हुसैन नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसने बताया कि अखलाक ने उसे यह मोबाइल दिया था। इसके बाद पुलिस ने आऱोपित अखलाक को उसके घर करतारपुर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपित ने बताया कि वह गरीब है और अपना भरण-पोषण करने के लिए मुस्लिम आबादी वाले इलाकों में मदरसों के नाम पर चंदा इकट्ठा करता है। इसके कारण वह किसी भी घर में आसानी से घुसकर रेकी कर लेता था। इसके बाद मौका देखकर वहाँ चोरी को अंजाम देता था।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने 23 साल के एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है जो सोशल मीडिया में महिला बन नाबालिगों को फँसाता था। फिर उनसे अश्लील वीडियो और फोटो माँगता था। इस शख्स की पहचान अब्दुल समद के तौर पर हुई है और वह पेशे से एसी मैकेनिक है।
रिपोर्टों के अनुसार उसने इंस्टाग्राम पर फेक प्रोफाइल बना रखा था। उसे इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस का इस्तेमाल कर पकड़ा गया। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी दक्षिण) अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि अब्दुल समद को लखनऊ में उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसके पास से कई लड़कियों से जुड़ी जानकारियाँ और उनके अश्लील वीडियो और फोटो के साथ स्मार्टफोन बरामद किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, अब्दुल समद किशोर बच्चों के साथ इंस्टाग्राम के जरिए बातचीत करता था और उनसे अपनी अश्लील तस्वीरें और वीडियो भेजने के लिए कहता था। उसकी इस करतूत का खुलासा तब हुआ जब 15 साल की एक पीड़िता ने 27 अगस्त 2021 को शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर जाँच के दौरान, उत्तर प्रदेश पुलिस ने व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम को नोटिस भेजकर आरोपित के मोबाइल नंबर और इंस्टाग्राम आईडी की जानकारी देने को कहा। इसी ब्योरे के आधार पर पुलिस टीम ने आरोपित को लखनऊ में ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान आरोपित ने पुलिस के सामने कबूल किया है कि उसने एक किशोरी से बातचीत करने के लिए उसके सामने खुद को महिला के तौर पर पेश किया था। पुलिस ने कहा कि आरोपित को इंटरनेट आधारित सोशल मीडिया साइटों में गहरी दिलचस्पी थी और उसने यूट्यूब से उनके बारे में सीखा था। वहीं से उसने ‘टेक्स्ट नाउ’ जैसे कुछ अन्य एप्लीकेशन के बारे में जानकारी हासिल की थी। इसमें वह मैसेज भेजता था और अंतरराष्ट्रीय नंबरों से लड़कियों को वीडियो कॉल करता था।
डीसीपी अतुल कुमार ठाकुर ने कहा कि आरोपित ने खुद को कनाडा में रहने वाले एक एनआरआई के तौर पर पेश किया और अपनी प्रोफाइल पिक्चर में उसने एक गोरी लड़की की तस्वीर लगा रखी थी। इस इमेज को उसने इंटरनेट से डाउनलोड किया था। डीसीपी ने कहा, “जब लड़कियाँ उसे अपने अश्लील वीडियो और तस्वीरें भेजती थीं, तो वह उन्हें ब्लैकमेल करता था और उन्हें भी सर्कुलेट कर देता था।” पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपित के पास कई इंस्टाग्राम आईडी हैं और वह नई इंस्टाग्राम आईडी बनाता रहता था ताकि उसकी पोल न खुले।
डीसीपी ने कहा, “जब लड़कियाँ उसे अपने अश्लील वीडियो और तस्वीरें भेजती थीं, तो वह उन्हें ब्लैकमेल करता था और उन्हें भी सर्कुलेट कर देता था।” पुलिस अधिकारी ने कहा कि आरोपित के पास कई इंस्टाग्राम आईडी हैं और वह नई इंस्टाग्राम आईडी बनाता रहता था ताकि उसकी पोल न खुले।
रिपोर्ट के मुताबिक वह 9 से 15 साल की 150 से ज्यादा लड़कियों के साथ ऐसी करतूत कर चुका है। वह लड़कियों से ‘कैसी हो छोटी’, ‘कैसी हो मेरी गुड़िया’ आदि कहकर बात करता था।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान करीब 2000 सरकारी कर्मचारियों की मौत हुई थी। योगी सरकार ने इनके परिवारों को मुआवजा देने के लिए करीब 600 करोड़ रुपए जारी किए हैं। इन लोगों की इसी साल अप्रैल-मई के बीच राज्य में पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान संक्रमण से मृत्यु हुई थी।
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश सरकार के 26 अगस्त के आदेश के तहत राज्य चुनाव आयोग को 606 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। सभी जिलाधिकारियों को पंचायत चुनाव ड्यूटी के दौरान जान गँवाने वाले कर्मचारियों के परिवारों को 30 लाख रुपए हस्तांतरित करने का आदेश दिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित यूपी सरकार के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है, “जिला मजिस्ट्रेट एक सप्ताह के भीतर मृत कर्मचारियों के परिजनों के बैंक खातों में आरटीजीएस के माध्यम से धन हस्तांतरित करेंगे।” यह आदेश राज्य चुनाव आयोग और सभी डीएम को भेजा गया है। इसमें राज्य सरकार के जान गँवाने वाले सभी 2128 कर्मचारियों के नाम हैं। इनमें से 2097 की मृत्यु कोरोना संक्रमण से और 31 की अन्य वजहों से हुई थी।
रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में राज्य सरकार ने चुनाव ड्यूटी के दौरान कुछेक कर्मचारियों की मौत ही संक्रमण से होने की बात कही थी। चुनाव आयोग के मानदंड का हवाला दे यह बात कही गई थी। इसके अनुसार मौत की गिनती तभी की जाएगी जब यह ड्यूटी के दौरान घर से निकलने और वापसी के दौरान हुई हो। 26 अगस्त के आदेश में कहा गया है कि सरकार ने मानदंडों में विस्तार के बाद 2128 कर्मचारियों की सूची तैयार की गई है।
करीब 600 करोड़ रुपए जारी करने के बाद सरकार अभी 27.75 करोड़ रुपए की और व्यवस्था कर रही है, क्योंकि 2128 मृतक कर्मचारियों के परिवारों को 30 लाख रुपए का मुआवजा देने के लिए 633.75 करोड़ रुपए की जररूत होगी। गौरतलब है कि राज्य के एक प्रमुख शिक्षक संघ ने अप्रैल और मई में 2000 से अधिक शिक्षकों और अन्य सरकारी महकमों के कर्मचारियों की बात कही थी। इसके बाद सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा जारी करने का फैसला किया था।