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कभी भी गिरफ्तार हो सकते हैं मुनव्वर राना, फिलहाल अस्पताल में: SC/ST एक्ट का है मामला, याचिका खारिज

मुनव्वर राना द्वारा महर्षि वाल्मीकि को लेकर की गई विवादित टिप्पणी के मामले में वो बुरे फँसे हैं। इस मामले में शायर (विवादित, चोरी का इल्जाम भी) को बड़ा झटका देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने और एफआईआर को रद्द करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

लखनऊ खंडपीठ की 2 सदस्यीय पीठ ने मामले में अपना फैसला सुना दिया है। इसके बाद अब राना पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी है। इस बीच गुरुवार (2 अगस्त 2021) की रात को खंडपीठ के फैसले के बाद शायर की अचानक से तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद उन्हें एसजीपीजीआई में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

इस मामले में मुनव्वर राना के खिलाफ अखिल भारतीय हिंदू महासभा और सामाजिक सरोकार फाउंडेशन ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। राना के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत आईपीसी की धारा 153-ए, 501 (1) और 295-ए के अंतर्गत केस दर्ज किया गया था। इसके अलावा उनके खिलाफ पिछले महीने मध्य प्रदेश के गुना जिले में भी महर्षि वाल्मीकि को लेकर विवादित टिप्पणी करने के मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी।

तालिबान से की थी महर्षि वाल्मीकि की तुलना

गौरतलब है कि बीते दिनों न्यूज नेशन चैनल पर दीपक चौरसिया के साथ बात करते हुए मुनव्वर राना ने महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से की थी। उन्होंने कहा था कि जो जिंदगी भर रूस और अमेरिका से लड़े हों तो सोचो उन पर कितने जुल्म हुए होंगे।

इसके साथ ही राना ने महर्षि वाल्मीकि को लेकर कहा था, “वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है। इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है। वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। हमें तो अफगानी अच्छे लगते हैं। वाल्मीकि को आप भगवान कह रहे हैं, लेकिन आपके मजहब में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है। वो लेखक थे। उनका काम था रामायण लिखना, जो उन्होंने किया।”

मृत्यु बालिका वधू वाले सिद्धार्थ शुक्ला की, पढ़ा जा रहा रंग दे बसंती वाले सिद्धार्थ का शोक संदेश; एक्टर ने पूछा- हम कितना नीचे गिरेंगे

टेलीविजन एक्टर सिद्धार्थ शुक्ला के निधन के बाद से ही उन्हें सोशल मीडिया पर लाखों यूजर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। लोगों को अब भी यकीन नहीं है कि उनके पसंदीदा कलाकारों में से एक सिद्धार्थ अब इस दुनिया में नहीं हैं। लेकिन कुछ लोग सोशल मीडिया में उनकी जगह दूसरे सिद्धार्थ नामक एक्टर की तस्वीर शेयर करके श्रद्धांजलि दे रहे हैं। ये रंग दे बसंती वाले सिद्धार्थ हैं।

सिद्धार्थ की मौत की खबर आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर हिंदी फिल्म एक्टर और रंग दे बसंती फिल्म में नजर आए सिद्धार्थ की तस्वीर को शेयर कर उस पर कुछ लोग श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कुछ ऐसा अनजाने में कर रह हैं तो कई जान-बूझकर। ऐसे लोगों पर सिद्धार्थ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “जान-बूझकर की गई घृणा और प्रताड़ना। हम और कितना नीचे गिरेंगे?”

एक्टर सिद्धार्थ ने इस बाबत एक और ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा, “मुझे लगता है कि आज कल कुछ भी हैरान नहीं करता है। मैं मूक हो गया हूँ।”

गौरतलब है कि बालिका वधू सीरियल से फेमस हुए सिद्धार्थ शुक्ला का 2 सितंबर को 40 साल की उम्र में निधन हो गया था। इसके बाद आज उनका अंतिम संस्कार होना है। उन्हें अस्पताल से सीधे ओशिवारा श्मशाम घाट ले जाया गया। उनकी मृत्यु हुए 24 घंटे बीत चुके हैं। इस बीच शहनाज गिल की एक तस्वीर सामने आई हैं जिसमें वह बदहवास अवस्था में नजर आ रही हैं। उनके साथ उनके भाई बैठे हैं।

मालूम हो कि रंग दे बसंती फेम सिद्धार्थ अकेले नहीं है जिन्हें लेकर सोशल मीडिया पर ऐसी बातें हो रही हैं। कुछ स्क्रीनशॉट ऐसे भी देखने को मिले हैं जिसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा को सिद्धार्थ शुक्ला समझ कर तस्वीर साझा कर दी गई है। एक यूजर लिखती है, “मैं विश्वास नहीं कर पा रही। कल रात ही मैं शेरशाह देख रही थी और कभी सोचा भी नहीं था कि अगली सुबह उनकी मृत्यु हो जाएगी। RIP सिद्धार्थ।”

सिद्धार्थ शुक्ला की ‘मौत’ कैसे, डॉक्टर नहीं बता पाए: श्मशान घाट पर फूट-फूटकर रोईं शहनाज गिल

अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है। अभिनेता की बॉडी पर बाहरी चोट के कोई निशान आदि नहीं मिले हैं। बता दें कि 40 वर्षीय अभिनेता का 2 सितंबर को हार्टअटैक के चलते निधन हो गया था। आज (सितंबर 3, 2021) अंतिम संस्कार किया जाएगा। सिद्धार्थ का पार्थिव शरीर ओशिवारा श्मशान घाट पहुँच चुका है।

सिद्धार्थ शुक्ला की मौत से शहनाज गिल को गहरा धक्का लगा है। वो सिद्धार्थ शुक्ला के अंतिम दर्शन के लिए ओशिवारा श्मशान घाट आईं। उनका रो-रो कर बुरा हाल था।

सिद्धार्थ शुक्ला का पोस्टमॉर्टम मुंबई के कूपर हॉस्पिटल में किया गया। पोस्टमॉर्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई। रिपोर्ट पुलिस को सौंप दी गई है। 3 डॉक्टरों के एक्सपर्ट पैनल ने अभिनेता का पोस्टमॉर्टम किया। शरीर पर किसी चोट आदि का निशान नहीं मिला है, लेकिन डॉक्टरों ने मौत की वजह नहीं बताई है। डॉक्टरों का कहना है कि अभिनेता की मौत के पीछे कुछ संदिग्ध नजर नहीं आया है, लेकिन विसरा सुरक्षित कर लिया गया है और इसे फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जा रहा है। 

फॉरेंसिक जाँच की रिपोर्ट आने में 20 से 25 दिन का समय लगने की संभावना है, इसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अभिनेता की मौत की वजह हार्टअटैक ही है या कुछ और। वहीं पुलिस का कहना है कि वे अभी केमिकल और एनालिसिस रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। जाँच कर रही पुलिस जल्दबाजी में किसी निर्णय पर नहीं पहुँचना चाहती। रिपोर्ट पर 5 डॉक्टरों के हस्ताक्षर हैं।

मुंबई पुलिस ने अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला के निधन के बाद उनकी माता, बहन और जीजा का बयान दर्ज किया है। कल सुबह वही लोग सिद्धार्थ को बेहोशी की हालत में लेकर कूपर हॉस्पिटल आए थे।

टीवी का चर्चित सीरियल ‘बिग बॉस’ जीतकर चर्चा में आए सिद्धार्थ ने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी। फिर वह अभिनय की दुनिया में आए। ‘बाबुल का आँगन छूटे ना’, ‘बालिका वधू’ जैसे सीरियल में अपने अभिनय से लोगों का ध्यान खींचा था। सिद्धार्थ के असमय निधन से पूरी इंडस्ट्री सदमे में है। 

उल्लेखनीय है कि सिद्धार्थ की मृत्यु की खबर सुनकर एक तरफ जहाँ लोग सदमे में हैं, उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर एक नई बहस भी शुरू हो गई है। ये बहस कूपर अस्पताल को लेकर है, जहाँ उन्हें आखिरी समय ले जाया गया। इस केस को सुशांत सिंह से जोड़कर कहा जा रहा है कि पहले सुशांत और अब सिद्धार्थ शुक्ला… वही कूपर अस्पताल। लोग मर्डर तक भी कयास लगा रहे हैं।

बता दें कि कूपर अस्पताल सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद चर्चा में आया था। सुशांत की मौत के बाद उनका पोस्टमॉर्टम मुंबई के कूपर अस्पताल में ही किया गया था। पोस्टमॉर्टम के अगले दिन रिया सुशांत के शव को देखने के लिए अस्पताल पहुँची थी। अस्पताल की ओर से रिया को शव को देखने की इजाजत दी गई थी। इसी पर महाराष्ट्र राज्य मानवाधिकार आयोग ने कूपर अस्पताल और मुंबई पुलिस से जवाब माँगा था।

दाँतों से लाल रिबन काट किया उद्घाटन, कंगाल पाकिस्तान के ‘गरीब’ मंत्री का वीडियो वायरल

पाकिस्तान में एक मंत्री हैं, वहाँ की पंजाब सरकार में। फयाज अल हसन चौहान। जेल मंत्री हैं और पंजाब सरकार के प्रवक्ता भी। ट्विटर पर आप इन्हें @Fayazchohanpti के हैंडल पर देख सकते हैं। फिलहाल अपने दाँतों को लेकर चर्चा में हैं।

चूहों से भी तेज दाँत हैं फयाज अल हसन चौहान के। वैसे हैं इंसान ही, यह पक्का है। दरअसल मंत्री साहब बेचारे एक शोरूम का उद्घाटन करने आए थे। कंगाल और चीन के टुकड़ों पर पलने वाले देश पाकिस्तान में ढंग की एक कैंची भी नहीं है, यह शोरूम वालों ने साक्षात दिखा दिया।

पाकिस्तानी मंत्री फयाज अल हसन चौहान ने लेकिन ड्रामा नहीं किया। देश की कंगाली को वीडियो के सामने उजागर होता देख भी संयम में रहे। कैंची की जगह शोरूम का उद्घाटन दाँत से लाल वाला रिबन काट कर किया।

सोशल मीडिया पर इसके लिए उनका मजाक उड़ाया जा रहा है। ऐसा लेकिन किया नहीं जाना चाहिए। देश के लिए अपने दाँत तक को कैंची बना देने की इस कला पर उनकी तारीफ होनी चाहिए। क्यों? क्योंकि कुछ मंत्री/विधायक तो देश के लिए पैंट-शर्ट तक नहीं पहन पाते। अंडरवियर में घूमने लगते हैं।

मंत्री ने अगर कभी ट्वीट डिलीट कर दिया तो मजा अधूरा न रह जाए, इसके लिए YouTube वीडियो भी

पाकिस्तानी मंत्री फयाज अल हसन चौहान की तरह एक और देशभक्त मंत्री वहाँ हैं। ये जेल मंत्री (एक राज्य के) हैं, वो रेल मंत्री। शेख राशिद। वो इतने बड़े देशभक्त हैं कि उन्होंने सभी वैज्ञानिकों को थूक चटाते हुए बम तक बना लिया था। ऐसा बम, जो सिर्फ और सिर्फ काफिरों को नुकसान पहुँचाता है।

शिक्षक ने पूछा- जन्माष्टमी पर किसने उपवास रखा और पूजा की, हाथ उठाने वाले छात्रों को पीटा: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूल का मामला

छत्तीसगढ़ के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को लेकर अश्लील बातें करने और उपवास रखने वाले छात्रों को पीटने को मामला सामने आया है। मामला राजधानी रायपुर से करीब 200 किलोमीटर दूर कोंडागाँव जिले के बुंदापारा गाँव स्थित मिडिल स्कूल का है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार प्रारंभिक जाँच के बाद आरोपित शिक्षक चरण मरकम को निलंबित कर दिया गया है।

रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि ​यह घटना मंगलवार 31 अगस्त 2021 की है। कक्षा सात और आठ के छात्रों की पिटाई को लेकर ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने शिकायत की थी। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षक ने छात्रों से पूछा था कि उनमें से किन किन ने व्रत रखा है और पूजा अर्चना की है। जिन छात्रों ने हॉं कहते हुए हाथ उठाया उनकी कथित तौर मरकम ने पिटाई की।

कोंडागाँव के कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने बताया कि गिरोला ग्राम पंचायत के सरकारी मिडिल स्कूल में तैनात शिक्षक चरण मरकम का निलंबन आदेश बुधवार (सितंबर 1, 2021) को उनके खिलाफ की गई शिकायत की प्रारंभिक जाँच के आधार पर जारी किया गया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत और स्थानीय ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि मरकम ने मंगलवार को जन्माष्टमी पर उपवास रखने के कुछ छात्रों की कथित तौर पर पिटाई की और भगवान कृष्ण के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी भी की।

जानकारी के मुताबिक शिक्षक ने पहले बच्चों से पूछा किसने उपवास रखा है। जिस-जिस बच्चे ने उपवास रखा था उनकी पिटाई की। इसके अलावा क्लास में ही बच्चों को देवी-देवताओं के बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी गई। इसका वीडियो वायरल होने पर बवाल मच गया।

कलेक्टर पुष्पेंद्र कुमार मीणा ने कहा कि ग्रामीणों ने अपने आरोपों की पुष्टि के लिए ऑडियो और वीडियो सबूत भी सौंपा। इसके बाद एक सरकारी अधिकारी को जाँच के लिए भेजा गया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि इस संबंध में एक रिपोर्ट मामले पर आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस को भेज दी गई है। निलंबन आदेश में कहा गया है कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना और समाज में नफरत फैलाना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। अधिकारियों ने बताया कि शिक्षक मरकम का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के प्रावधानों के विपरीत है, इसलिए शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

वहीं कोंडागाँव के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि पुलिस ने अभी तक शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया है। उन्होंने कहा, “हमें जिला प्रशासन से एक रिपोर्ट मिली है। अभी तक मामला दर्ज नहीं किया गया है। लेकिन रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।”

न्यूजीलैंड में ISIS का हमला: सुपरमार्केट में आतंकी ने 6 लोगों को मारा चाकू, पुलिस की गोलीबारी में हुआ ढेर

न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में स्थित एक सुपरमार्केट में शुक्रवार (सितंबर 3, 2021) को आतंकी हमले की घटना सामने आई है। स्वयं देश की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ISIS से प्रेरित एक आतंकी ने शुक्रवार को ऑकलैंड के सुपरमार्केट में 6 लोगों को चाकू मारा। घटना के बाद पुलिस ने उसे गोली मार कर ढेर कर दिया।

प्रधानमंत्री ने घटना में ISIS एंगल को लेकर कहा, “आज जो हुआ वह निंदनीय था, नफरत से भरा हुआ और गलत था। यह हमला किसी मजहब या जातीयता द्वारा नहीं किया गया बल्कि एक अकेले व्यक्ति द्वारा किया गया, जो ऐसी विचारधारा से प्रभावित था जिसका समर्थन यहाँ कोई नहीं करता।”

हमलावर की जानकारी साझा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आतंकी एक श्रीलंकाई था जो अक्टूबर 2011 में न्यूजीलैंड आया था। साल 2016 से राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में उस पर निगरानी की जा रही थी।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस आयुक्त ने बताया कि हमलावर की निगरानी लंबे समय से की जा रही थी और हाल में उसे अपने घर से न्यू लिन सुपरमार्केट जाते हुए देखा गया, ऐसा वह पहले भी कर चुका था। लेकिन, इस बार उसने दुकान में प्रवेश किया, वहाँ से चाकू खरीदा और हमला करने लगा।

पुलिस आयुक्त ने बताया कि हमले के कुछ सेकेंड में उस व्यक्ति को गोली मार दी गई थी। मगर, इस बीच वह 6 लोगों पर हमला कर चुका था। ये एक हिंसक हमला था। हमलावर बेसुधों की तरह अटैक कर रहा था। मामले की जानकारी देते हुए पुलिस आयुक्त एंड्रयू कॉस्टर ने इसके लिए माफी माँगी है। वहीं सेंट जॉन एंबुलेंस सर्विस ने बताया कि 6 घायल लोगों को चाकू लगने के बाद अस्पताल ले जाया गया। इनमें से 3 लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है।

उल्लेखनीय है कि न्यूजीलैंड के डुनेडिन में मई में भी इस तरह की घटना हुई थी। उस समय हमलावर ने चाकू मार कर सुपरमार्केट के भीतर चार लोगों को घायल कर दिया था।

जिस ‘बनियान’ को पहन फटते हैं इस्लामी फिदायीन, उसे तालिबान ने टीवी पर दिखाया: हथियारों की भी नुमाइश

अफगानिस्तान में शासन मिलते ही तालिबान दुनिया को अपनी ताकत दिखाने को बेताब है। अपने गढ़ कंधार की सड़कों पर ‘विक्ट्री लैप’ के दौरान ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों की नुमाइश के बाद उसने सैन्य ताकत दिखाने के लिए एक और परेड आयोजित की है।

बुधवार ( 1 सितंबर 2021) को तालिबान ने अमेरिका समर्थित अफगानिस्तान की राष्ट्रीय सरकार के पतन के बाद लूटे गए हथियारों का प्रदर्शन करने के लिए विजय परेड निकाली। इस दौरान उसने अपने आत्मघाती बेल्ट, कार बम, बैरल बम व अन्य विस्फोटकों सहित हथियारों का प्रदर्शन किया। अफगानिस्तान के सरकारी चैनल रेडियो टेलीविजन अफगानिस्तान (आरटीए) पर इसका प्रसारण किया गया।

परेड के दौरान तालिबान ने हल्के हथियार, भारी हथियार, पीले बैरल और कार बम भी प्रदर्शित किए। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि इन हथियारों का इस्तेमाल अपनी आजादी और देश के खतरों से निपटने के लिए किया जाएगा।

ईरानी पत्रकार तजुदेन सोरौश द्वारा साझा किए गए एक अन्य वीडियो में तालिबान लड़ाके अपने कराटे कौशल से तालिबान के बुजुर्ग मुजाहिदीन नेताओं को प्रभावित करते देखे गए।

तालिबान जिन हथियारों की नुमाइश कर रहा वे अफगान बलों से लूटे गए थे। अफगान सरकार के पतन के बाद अधिकतर फौजियों ने या तो सरेंडर कर दिया था या फिर वे जान बचाकर भाग गए थे। इसके बाद उनके हथियारों पर तालिबान ने कब्जा कर लिया था।

31 अगस्त को जब अमेरिका ने अफगानिस्तान छोड़ा था तो उसने करीब 80 बिलियन डॉलर (58,45,56,00,00,00 रपए) का सामान यहाँ छोड़ दिया था। इसके अलावा अमेरिका ने 2003 से अफगान बलों को 16,000 से अधिक नाइट-विज़न गॉगल डिवाइस, 600,000 पैदल सेना के हथियार, जिनमें M16 असॉल्ट राइफल और 162,000 संचार उपकरण प्रदान किए थे।

अमेरिकी बलों के जाने के बाद राइफल, मशीनगन, पिस्तौल, ग्रेनेड लाँचर और आरपीजी जैसे 6 लाख से अधिक छोटे हथियार तालिबान लड़ाकों के हाथों में पड़ गए हैं। इसके अलावा, तालिबान ने सर्विलांस सिस्टम, रेडियो सिस्टम, ड्रोन आदि सुरक्षित कर लिया है, जिससे यह दुनिया में भारी हथियारों से लड़ने वाली इकाइयों में से एक बन गया है।

JDU के अंडरवियर वाले MLA बोले- पेट खराब था, यूजर्स ने पूछा- बवासीर होगी तो क्या नंगे घूमोगे?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश यादव की पार्टी से विधायक गोपाल मंडल की एक तस्वीर तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में वह तेजस ट्रेन में केवल बनियान और अंडरवियर में घूमते नजर आ रहे हैं। तस्वीर के वायरल होने के बाद और मामले में हुई शिकायत को लेकर अब उनका बयान भी सामने आ गया है। अपने इस व्यवहार का कारण उन्होंने पेट की खराबी को बताया है।

जेडीयू विधायक गोपाल मंडल ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “वास्तव में मैं अंडरवियर और बनियान में था, क्योंकि जैसे ही मैं ट्रेन चढ़ा और कुछ दूर गया तो मेरा पेट खराब था। मैं जो बोलता हूँ सत्य बोलता हूँ। झूठ मैं बोलता नहीं हूँ।”

इस बीच गोपाल के दोस्त कुणाल सिंह भी उनके बचाव में आए और कहा कि गोपाल डायबेटिक हैं और दिल्ली किसी काम से जा रहे थे। उनके मुताबिक गोपाल अपने वजन के कारण अपने कपड़ों के साथ वॉशरूम नहीं जा सकते थे तो उन्होंने लुंगी और गमछा पहना। ट्रेन के आने के बाद वह जल्दी में थे तो अंडरवियर में चले गए। तभी एक यात्री ने उनके रूखे ढंग से बात की। लेकिन उन्होंने उसे कुछ नहीं कहा। वॉशरूम से लौटते हुए उससे बात की।

मालूम हो कि जेडीयू विधायक की तस्वीर सामने आने के बाद कई लोग उनका मजाक उड़ा रहे हैं। एक यूजर उन्हें कहता है, “अगली बार बनियान मत पहनना, नीचे कुछ पहना है या नहीं, ये तो पता चलना चाहिए।”

मनीष नामक यूजर गोपाल मंडल के तर्क से सहमत नहीं होते और पूछते हैं, “पैंट पहन लेते तो क्या पेट बुरा मान जाता।”

एक यूजर इस बयान का मजाक बनाते हुए बताता है कि शायद गोपाल को डॉक्टर ने कहा होगा, “ट्रेन में कच्छा पहन कर रात भर राउंड मारो, ठीक हो जाओगे।”

दुग्गू सेठ पूछते हैं, “बवासीर हो जाएगी तो क्या नंगा घूमोगे?”

एक यूजर लिखता है, “कभी पता ही नहीं था कि अंडरगार्मेंट में घूमना सफर में गड़बड़ाए पेटे के लिए सबसे अच्छी दवा है। आखिर एमबीबीएस की जरूरत ही क्या है जब गोपाल मंडल जैसे गजब के स्वास्थ्य सलाहकार हों?”

दिल्ली में मिली अंग्रेजों के जमाने की रहस्यमयी सुरंग, विधानसभा को लाल किले से जोड़ती है: जानिए, इसके बारे में सबकुछ

दिल्ली में एक रहस्यमयी सुरंग मिली है। यह अंग्रेजों के जमाने का बताया जा रहा है। यह विधानसभा भवन को लाल किले से जोड़ती है। इस सुरंग के पता लगाने की पुष्टि खुद विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने की है।

गोयल ने बताया कि सुरंग के मुँह की अधिकारियों ने पहचान कर ली है। लेकिन इसे अब आगे नहीं खोदा जाएगा। दिल्ली विधानसभा से लाल किले की दूरी करीब 5 किलोमीटर है।

गोयल के अनुसार बाद में हुए निर्माण कार्यों की वजह से इस सुरंग के रास्ते भी कई जगह नष्ट हो चुके हैं। अधिकारियों ने इस सुरंग का नवीनीकरण कर इसे सार्वजनिक करने की योजना बनाई है। इस सुरंग का इस्तेमाल अंग्रेज स्वतंत्रता सेनानियों को कोर्ट ले जाते समय विरोध से बचने के लिए करते थे।

विधानसभा अध्यक्ष ने इस सुरंग का नवीनीकरण अगले साल 15 अगस्त तक पूरा कर लिए जाने की उम्मीद जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस रहस्यमयी सुरंग को अब एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा भवन का निर्माण 1912 में ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था।

ऐसा पहली बार नहीं है जब दिल्ली विधानसभा के नीचे खुफिया सुरंग मिली हो। इससे पहले 5 मार्च 2016 को भी ऐसी सुरंग मिली थी। उसकी लंबाई भी करीब सात किलोमीटर थी और वो भी विधानसभा से लाल किले तक जाती थी। गोयल के मुताबिक जब वे पहली बार 1993 विधायक बने थे तो लोगों ने उन्हें इसके बारे में बताया था। हालाँकि उस वक्त सुरंग को लेकर कुछ स्पष्ट पता नहीं चल पाया था।

याद है AAP का पार्षद रहा ताहिर हुसैन, दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उसका भाई शाह आलम और राशिद-शादाब बरी: जानिए अदालत ने क्या कहते छोड़ा

साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षद रहे ताहिर हुसैन की भूमिका मुख्य रूप से सामने आई थी। अब दिल्ली की एक अदालत ने दंगों से जुड़े एक मामले में तीन लोगों को बरी कर दिया है। इनमें ताहिर हुसैन का भाई शाह आलम भी है। साथ ही राशिद सैफी और शादाब को भी आरोप मुक्त किया गया है।

तीनों को मुकदमा नंबर 93/2020 से बरी किया गया है। विशेष अदालत में मामले की सुनवाई कर रहे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने दंगों को लेकर पुलिस की जाँच पर भी नाराजगी व्यक्त की। सबूतों के अभाव में तीन आरोपितों को बरी करते हुए कहा कि ये विफलता निश्चित रूप से लोकतंत्र के रखवालों को पीड़ा देगी।

अदालत ने कहा, “जब इतिहास दिल्ली में विभाजन के बाद के सबसे भीषण सांप्रदायिक दंगों को देखेगा, तो नए वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके सही जाँच करने में जाँच एजेंसी की विफलता निश्चित रूप से लोकतंत्र के रखवालों को पीड़ा देगी।”

कोर्ट ने पुलिस को फटकारते हुए कहा, मामले में जिस तरह की जाँच की गई, वो वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से उनकी निगरानी की कमी साफ तौर पर दर्शाती है। जाँच एजेंसी ने केवल अदालत की आँखों पर पट्टी बाँधने की कोशिश की है और कुछ नहीं। कोर्ट ने कहा कि बिना चश्मदीदों, असली आरोपित और तकनीकी सबूत के पुलिस चार्जशीट दायर करके केस सुलझाने में लगी रही।

कोर्ट ने कहा, “न्यायालय ऐसे मामलों में न्यायिक प्रणाली के गलियारे में बिन सोचे समझे चक्कर लगाने की अनुमति नहीं देता है। जब मामला ओपन एंड शट केस है तो ये केवल कोर्ट का कीमती समय जाया कर रहा है।” मालूम हो बरी किए गए आरोपितों में से आलम बढ़ई का काम करता है, सैफी प्राइवेट जॉब में और शादाब अकाउंटेंट है। शाह आलम अभी 9 मामलों में आरोपित है। राशिद और शादाब पर 7-7 केस चल रहे हैं।

तीनों से जुड़ा केस पिछले साल 3 मार्च को, 2 शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। दोनों शिकायतें हरप्रीत सिंह आनंद की थीं। वह चांद बाग इलाके में फर्नीचर का काम करते हैं। उन्होंने दंगों के दौरान अपनी दुकान को आग लगाने और उसमें लूटपाट का आरोप लगाया था। कोर्ट ने जाँच में पाया कि उक्त आरोपितों का नाम इस एफआईआर में अलग से नहीं जुड़ा था न ही इनकी भूमिका को लेकर बात थी।

बता दें कि नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली दंगों को लेकर लगभग 750 मामले दर्ज किए गए। इनमें से ज्यादातर मामले इसी अदालत के पास हैं। सेशन कोर्ट को उनमें से अब लगभग 150 मामले सौंपे जा चुके हैं। अभी तक लगभग 35 मामलों में ही आरोप तय किए गए हैं। उल्लेखनीय है कि AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन पर अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है। इसके अलावा उस पर भीड़ को साम्प्रदायिक रूप से भड़काने का भी इल्जाम है।