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ट्रेन में अंडरवियर-गंजी में घूम रहे थे नीतीश के MLA, टोका तो गाली-गलौज: MP में बीच सड़क पिटे कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष, कपड़े भी फाड़े

नाम: गोपाल मंडल। परिचय: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश की पार्टी जदयू से विधायक। कारनामा: तेजस ट्रेन में अंडरवियर में घूम रहे थे। यात्रियों ने टोका तो गाली-गलौज पर उतर आए। दूसरे सुरेश कुमार झा। मध्य प्रदेश के दतिया में कॉन्ग्रेस के शहर अध्यक्ष रहे हैं। ठगी के आरोप में बीच सड़क पर पीटे गए हैं। कपड़े भी फाड़ दिए गए।

भागलपुर के गोपालपुर से JDU विधायक गोपाल मंडल की ट्रेन में यात्रा के दौरान चड्डी में घूमने की तस्वीर वायरल हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेडीयू विधायक गोपाल मंडल गुरुवार (2 सितंबर 2021) की रात को पटना-नई दिल्ली तेजस राजधानी एक्सप्रेस के A-1 कोच से सफर कर रहे थे। पटना से ट्रेन के चलने तक तो सबकुछ ठीक था, लेकिन कोलईवर पार करने के बाद उन्होंने शर्मनाक हरकत शुरू कर दी। चलती ट्रेन में गंजी और चड्डी में ही घूमने लगे।

ट्रेन में महिलाएँ भी थीं। जब यात्रियों ने उनकी इस हरकत का विरोध किया तो वो भड़क गए। विधायक ने उनका विरोध कर रहे यात्रियों के साथ गाली-गलौच की। उन्होंने लोगों को गोली मारने की धमकी दी। हंगामा बढ़ने पर ट्रेन में एस्कॉर्ट कर रही आरपीएफ की टीम औऱ टीटीई मौके पर पहुँचे और किसी तरह मामले को शांत कराया। इस मामले में जीआरपी के इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे और आरपीएफ इस्पेक्टर संजीव कुमार के मुताबिक, दोनों ओर से किसी तरह की कोई शिकायत नहीं की गई है।

यौन शोषण के भी आरोपित हैं कॉन्ग्रेस नेता

एक अन्य घटना में मध्य प्रदेश के दतिया जिले में कॉन्ग्रेस के पूर्व शहर अध्यक्ष सुरेश झा पर एक व्यापारी ने सरकारी ठेका दिलाने के नाम पर 2 लाख रुपए ठगने का आरोप लगाया है। इस मामले में लक्ष्मण ताल के रहने वाले विनीत विश्वकर्मा ने पुलिस में शिकायत की थी कि कॉन्ग्रेस नेता ने उससे वर्ष 2019 में कमलनाथ सरकार के दौरान सरकारी ठेका दिलाने के नाम पर पैसे लिए थे। लेकिन उसे न ठेका मिला और न ही रुपए वापस मिले। पैसे माँगने पर झूठे केस में फँसाने की धमकी दी गई।

इसी कड़ी में जब पुलिस ने आरोपित कॉन्ग्रेस नेता पर कोई कार्रवाई नहीं की तो गुरुवार को कुछ लोगों ने कॉन्ग्रेस नेता को जमकर पीटा। उनके कपड़े भी फाड़ दिए। अक्टूबर 2019 में सुरेश झा पर कॉन्ग्रेस की महिला पदाधिकारी ने 17 लाख रुपए ठगने औऱ झाँसा देकर उसका रेप करने का केस भी दर्ज कराया था। इस मामले में वो जेल की हवा भी खा चुके हैं।

कभी मंदिर-कभी अजमल, कभी उलेमा-कभी गंगा स्नान: कॉन्ग्रेस के इस रोलिंग प्लान से ‘हाथ’ का नहीं भला

असम में कॉन्ग्रेस ने अपने साथी बदरुद्दीन अज़मल और उनकी पार्टी AIUDF से अलग होने (या अलग दिखने) का फैसला किया है। अपने इस फैसले के पीछे पार्टी ने अज़मल द्वारा भाजपा और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सराहना किए जाने को मुख्य कारण बताया है। उधर अज़मल का कहना है कि कॉन्ग्रेस के इस फैसले में दूरदर्शिता नहीं है और इससे भारतीय जनता पार्टी को फायदा होगा। अज़मल ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस के इस फैसले से ‘सेकुलरिज्म’ को धक्का लगेगा। असम विधानसभा चुनाव के समय बने महाजोट से केवल कॉन्ग्रेस पार्टी ही नहीं निकली है, बल्कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट ने भी अलग होने की घोषणा कर दी है। 

इस कदम का नुकसान किसे होगा यह तो समय बताएगा। लेकिन कॉन्ग्रेस के इस फैसले से कई प्रश्न उठते हैं। एक प्रश्न यह उठता है कि क्या अज़मल द्वारा भाजपा और मुख्यमंत्री सरमा की सराहना ही कॉन्ग्रेस के फैसले के पीछे एकमात्र कारण है? प्रश्न यह भी उठता है कि अज़मल द्वारा अचानक भाजपा या उसके मुख्यमंत्री की सराहना के पीछे की राजनीति क्या है? इन प्रश्नों के बीच कॉन्ग्रेस के महाजोट से अलग होने के फैसले के पीछे और कारण जान पड़ते हैं। एक कारण यह है कि अज़मल के साथ गठबंधन से प्रदेश के कई कॉन्ग्रेसी खुश नहीं थे और इसकी वजह से पार्टी के अंदर असंतोष था। इन नेताओं का यह मानना है कि अज़मल के साथ गठबंधन को बहुसंख्यक शंका की दृष्टि से देखते हैं, क्योंकि अज़मल को मूलतः असम में बांग्लादेशी मुसलमानों के नेता के रूप में देखा जाता है। इसके कारण कॉन्ग्रेस की छवि काफी हद तक बहुसंख्यक विरोधी दल की बनती रही है। 

यह स्थिति पार्टी को केवल असम में असहज नहीं बनाती। हिंदुओं का समर्थन लेने के लिए राहुल गाँधी ने गुजरात चुनाव के समय जो मंदिर यात्राएँ की थीं, उनका फायदा आना लगभग बंद चुका है। ऐसे में समय की माँग है कि पार्टी राजनीति की अपनी झोली से कोई नया ट्रिक निकाले ताकि हिंदू वोट पर एक बार फिर से दावा पेश कर पाए। दूसरी बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी को अगले वर्ष कई राज्यों में चुनाव लड़ना है और बहुसंख्यकों के वोट की दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में दल को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी करना है। पार्टी के प्रयास चाहे जैसे रहे पर ये तब तक फल नहीं दे सकते जब तक पार्टी अज़मल जैसे नेताओं और उनकी पार्टी के साथ गठबंधन में रहेगी। वैसे भी असम में कॉन्ग्रेस के 29 विधायकों में से 16 मुस्लिम हैं। ऐसे में बहुत संभावना है कि प्रदेश का हिंदू वोटर पार्टी को अविश्वास की दृष्टि से देखेगा और उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में हिंदू वोट की तलाश में उतरने वाली पार्टी के लिए यह स्थिति सुखद नहीं होगी। 

असम में कॉन्ग्रेस को मुस्लिम वोट मिलने के बावजूद यह आम धारणा है कि दीर्घकालीन राजनीति की दृष्टि से ये वोट अज़मल के ही हैं। वैसे भी असम में अब चुनाव पाँच वर्ष बाद होने हैं। जब होंगे तब पार्टी फिर से अज़मल के साथ गठबंधन कर सकती है। पिछले कई वर्षों में इस तरह के शॉर्टकट ही कॉन्ग्रेस की वर्तमान राजनीतिक सोच को परिभाषित करते रहे हैं। राहुल गाँधी इसी सोच के तहत कंठी माला पहन कर मंदिर भी जाते हैं और इसी के तहत केरल के अपने समर्थकों द्वारा सार्वजनिक तौर पर गाय काटने को लेकर ‘कूल’ भी रहते हैं। ऐसी राजनीतिक सोच का पार्टी को कितना फायदा हो रहा है, वह सबके सामने है। पार्टी अपनी इस शॉर्टकट वाली राजनीतिक सोच के कब्ज़े में कब तक रहेगी यह तो अनुमान की बात होगी पर असम में बदरुद्दीन अज़मल की पार्टी के साथ गठबंधन जोड़ने और तोड़ने के फैसले के पीछे एक अस्त-व्यस्त राजनीतिक सोच साफ़ दिखाई देती है। 

यह इसी सोच का परिणाम है कि दो महीने पहले उत्तर प्रदेश में अपने परंपरागत मुस्लिम वोट को फिर से पाने की कोशिश में पार्टी ने प्रियंका वाड्रा के नेतृत्व में उलेमाओं के साथ जिस जोश के साथ बैठकें शुरू की थी, वह जोश अब ढीला पड़ता नजर आ रहा है। यह इसी राजनीतिक सोच का परिणाम है कि प्रियंका वाड्रा चंदन लगाकर मंदिर तो जाती हैं पर जब मुस्लिम वोट के लिए उनके बीच जाती हैं तब काला लिबास पहनती हैं। कॉन्ग्रेस के लिए मुस्लिम वोट का पुराना मोह और हिंदू वोट की नई चाहत एक अस्पष्ट पार्टी और उसके नेतृत्व का ऐसा रोलिंग प्लान है, जिसे लगातार चलाया जा रहा है पर उसके अनुकूल राजनीतिक परिणाम आने की संभावना दिखाई नहीं देती।

‘बहुत ही नीच और घटिया है… मरता रहेगा तो साइड से निकल लूँगी’: सिद्धार्थ शुक्ला की मौत के बाद ‘टूटा दिल’, उनके घर भी पहुँची

सिद्धार्थ शुक्ला के असामयिक निधन के बाद टीवी इंडस्ट्री में शोक की लहर है। हर दूसरा कलाकार उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। वहीं वरुण धवन, आसिम रियाज जैसे जाने-माने चेहरे उनके घर भी पहुँचे हैं। इन्हीं लोगों की लिस्ट में रश्मि देसाई का भी नाम है। रश्मि को कल शाम सिद्धार्थ के घर जाते देखा गया। इसके बाद से ही उनका और सिद्धार्थ के बीच हुआ वाकया याद किया जा रहा है।

रश्मि देसाई किसी समय में सिद्धार्थ के साथ टीवी सीरियल्स में काम करती थीं। इस बीच इनके रिश्ते की बातें भी मीडिया में सामने आईं। लेकिन बाद में पता चला कि इस रिश्ते में खटास आ गई है। 2019 में जब बिग बॉस-13 में दोनों का एक दूसरे से आमना-सामना हुआ तो इस खटास का बुरा रूप दुनिया को देखने को मिला। दोनों के झगड़ों ने बिग-बॉस को खूब टीआरपी दिलाई।

उसी दौरान एक टास्क हुआ जिसमें एक्ट्रेस देवोलीना भट्टाचार्जी को अपने शो में अन्य प्रतिभागियों से बात करनी थी। ऐसे में जब देवोलीना ने रश्मि से पूछा कि उनके और शुक्ला के बीच क्या हुआ है, तो रश्मि ने जवाब दिया, “वो इंसान बहुत ही नीच और घटिया है। वो ऐसा एक्टर है … मरता पड़ा रहेगा ना, पानी का ग्लास रख के साइड से निकल लूँगी। मैं देखूँ भी नहीं। इतना उस लेवल पर कर दिया था।”

गौरतलब है कि 2 सितंबर को सुबह 10:30 बजे सिद्धार्थ शुक्ला के निधन की खबर आई थी। इसके बाद उनका कूपर अस्पताल में पोस्टमार्टम हुआ और आज 11 बजे उनका शव परिजनों को सौंपा जाएगा। इसके बाद आज ही उनका अंतिम संस्कार ब्रह्मकुमारी समाज की विधि के अनुसार होगा। मुंबई पुलिस ने अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला के निधन के बाद उनकी माता, बहन और जीजा का बयान दर्ज किया है। कल सुबह वही लोग सिद्धार्थ को बेहोशी की हालत में लेकर कूपर हॉस्पिटल आए थे।

बताया जा रहा है कि सिद्धार्थ ने एक रात पहले कोई दवाई खाई थी। ये दवाई किस चीज की थी, इसका पता नहीं चल सका है। पुलिस ने कहा है कि पोस्टमार्टम के बाद ही सिद्धार्थ की मौत की वजह पता चलेगी। शरीर पर अभी तक कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं। 

पंजाब का मोगा, अकाली दल वाले बादल की रैली: किसानों ने फेंके पत्थर, पुलिस ने बरसाई लाठियाँ

पंजाब के मोगा जिले में गुरुवार (2 सितंबर 2021) को एक जनसभा कर रहे शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल का विरोध करने पहुँचे कुछ किसान संगठनों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज किया। इस घटना में कई किसान और पुलिसवाले घायल हो गए।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुखबीर बादल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर 100 दिनों के पंजाब यात्रा पर निकले हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को वे मोगा जिले पहुँचे थे। यहाँ के धर्मकोट स्थित नई अनाज मंडी में उनकी जनसभा हो रही थी। इस दौरान दोपहर के करीब 12 बजे कुछ किसान वहाँ पहुँचे और उनका विरोध करना शुरू कर दिया। ये सभी केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की माँग कर रहे थे। ज्ञात हो कि शिअद ने मोगा से पूर्व मंत्री जत्थेदार तोता सिंह के बेटे बृजेंद्र सिंह मक्खन बराड़ को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

पुलिस ने किसानों को रोक वहाँ से हटाने की कोशिश की, जिससे वे भड़क गए। किसानों पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस और किसानों में तीखी झड़प हुई। इसमें 24 किसान और 6 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घायलों में डीएसपी (सिक्योरिटी ब्रांच) गुरुदीप सिंह और 2 इंस्पेक्टर भी शामिल हैं। इसके अलावा एक होमगार्ड के जवान औऱ एक मीडियाकर्मी का सिर फट गया है। इतना ही नहीं किसानों के साथ झड़प में एक दर्जन से अधिक गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त हो गईं।

एकबारगी तो प्रदर्शनकारियों के आक्रोश से डरकर पुलिस पीछे हट गई थी। लेकिन बाद में मोर्चा सँभालते हुए लाठीचार्ज औऱ वाटर कैनन से भीड़ को तितर-बितर किया गया। इसके बाद किसानों ने तलवंडी-लुधियाना हाईवे को जाम कर दिया। मोगा के एसपी ध्रुमन निंबाले ने कहा, “हमने प्रदर्शनकारियों को कई बार आगाह किया, लेकिन कुछ ने पथराव शुरू कर दिया, जिसके बाद हमें उन्हें तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का प्रयोग करना पड़ा। उन्होंने घटनास्थल के पास एक राष्ट्रीय राजमार्ग भी जाम कर दिया था, जिसे बाद में खाली कराया गया।”

‘भारत में कश्मीर के मुसलमानों के लिए आवाज उठाने का हमें हक’: तालिबान ने दिखाया रंग, सुहैल शाहीन ने कही ये बात, देखें वीडियो

अफगानिस्तान में शासन स्थापित करने के बाद तालिबान अब दूसरे मुल्कों के साथ मित्रता का हाथ बढ़ा रहा है। तालिबान चाहता है कि उसकी सत्ता को दुनिया के देश मान्यता दें। लेकिन इस बीच तालिबान ने भारत के कश्मीर पर एक बार फिर बयान दिया है। तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कश्मीर के संबंध में कहा है, “भारत में कश्मीर के मुसलमानों के लिए आवाज उठाने का हक हमें है।”

बीबीसी के साथ बातचीत में तालिबान के दोहा कार्यालय के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने यह बातें कही। सुहैल दोहा से लाइव हुए थें। उन्होंने अमेरिका के साथ दोहा समझौते में बात करते हुए कहा कि किसी भी देश के खिलाफ सशस्त्र अभियान चलाना तालिबान का हिस्सा और रणनीति नहीं है।

दोहा से बात करते हुए शाहीन ने कहा, “एक मुसलमान के तौर पर, भारत के कश्मीर में या किसी और देश में मुस्लिमों के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार हमारे पास है। हम आवाज उठाएँगे और और कहेंगे की मुसलमान आपके साथ हैं। आपके कानून के मुताबिक वो समान हैं।”

इसके पहले तालिबान कई बार कह चुका है कि वह भारत और पकिस्तान के विवाद के बीच किसी भी तरह का दखल नहीं देगा, कश्मीर भी उसकी रणनीति का हिस्सा नहीं है और न ही वह कश्मीर में किसी भी तरह की दखलंदाजी करेगा।

बता दें कि भारत की मोदी सरकार ने 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को ख़त्म कर दिया था। इसके बाद से पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पूरे जोर-शोर से दुनिया में कश्मीरी मुसलमानों को लेकर प्रोपेगेंडा फैला रहा है। वह लगातार भारत को किसी न किसी मुद्दे में घेरने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय पटल पर पाकिस्तान को सिर्फ मायूसी ही हाथ लग रही है।

अब पाकिस्तान समर्थित तालिबान का शासन अफगानिस्तान में होने के बाद पाक उम्मीद लगाकर बैठा हुआ है कि कश्मीर पर उसकी जीत होगी। इसलिए अफगान में तालिबान का कब्जा होने के बाद लगातार अनाप शनाप बयानबाजी कर रहा है। 

हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पार्टी पीटीआई के नेता नीलम इरशाद शेख ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान ने तालिबान की हमेशा मदद की है, अफगानिस्तान की सत्ता उसे सौंपने में भी भरपूर मदद हमने की है। अब तालिबान हमारी मदद करेगा और कश्मीर जीतकर पाकिस्तान को सौंपेगा। 

वहीं इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री शेख राशिद ने कबूला है कि पाकिस्तान तालिबान का संरक्षक है। हम न्यूज चैनल के कार्यक्रम ‘ब्रेकिंग प्वाइंट विद मलिक’ में राशिद ने कहा, “हम तालिबान नेताओं के संरक्षक हैं। हमने लंबे समय तक उनकी देखभाल की है। उन्हें पाकिस्तान में पनाह दी, शिक्षा दी और आशियाना दिया। हमने उनके लिए सब कुछ किया है।”

अफगानिस्तान में कब्जा के बाद पहली बार भारत और तालिबान के बीच दोहा में आधिकारिक बैठक हुई। बैठक की जानकारी देते हुए शेर मोहम्मद अब्बास स्तनिकज़ई ने बताया कि भारत ने कहा है, “अफगानिस्तान की मिट्टी का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों या किसी तरह से आतंकवाद के लिए नहीं होना चाहिए।”

ममता बनर्जी के रूप में ‘माँ दुर्गा’ की बन रही मूर्ति: बंगाल हिंसा को देखते हुए भड़के लोग, सोशल मीडिया पर सुनाई खरी-खोटी

दुर्गा पूजा को आने में अब बस कुछ ही समय बचा है और इस बार कोलकाता के लोग दुर्गा माता को नए और अनोखे रूप में देखेंगे। कोलकाता के कुमारतुली में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मूर्ति बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसी माँ दुर्गा की मूर्ति बनाने के लिए 3 समितियों ने सहयोग किया है। हालिया बंगाल हुई हिंसा को देखते हुए सोशल मीडिया पर लोग तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

नज़रूल पार्क उन्नयन समिति के उपाध्यक्ष पार्थ सरकार ने कहा, “बंगाल में हर व्यक्ति उन्हें देवी दुर्गा के रूप में मानता है। उन्होंने लोगों को जो लाभ प्रदान किया, वह दुनिया में नहीं देखा गया।”

सोशल मीडिया यूजर्स इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “माँ का अपमान नहीं चलेगा।”

वहीं एक अन्य ने लिखा, “भूतनी जैसी शक्ल है तो क्या हुआ, मेरी मूर्ति नहीं बन सकती।” एक यूजर ने पश्चिम बंगाल को नया तालिबान बताया।

एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “देवी की मुख्यमंत्री से तुलना करना बिलकुल मूर्खतापूर्ण है? यहाँ तक कि उन्हें किसी को ऐसा नहीं करने देना चाहिए।”

एक अन्य नेटिजन ने लिखा, “कृपया कोई उन जोकरों पर ईशनिंदा का मामला दर्ज करे, यह मेरे भगवान को बंगाल का कसाई बताकर धार्मिक भावनाओं को आहत करने से कम नहीं है।”

एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा, “कृपया इस तरह हिंदू देवी-देवताओं और त्योहारों का अपमान करना बंद करें। यह बहुत ज्यादा है। कृपया इसे बंद करें। राक्षसों की मूर्तियाँ ममता बनर्जी जैसी बनानी चाहिए, देवी की नहीं।”

मनोज नाथ नाम के यूजर ने लिखा, “भगवान से डरो बेइमानों…माँ दुर्गा का अपमान करने में भी नहीं झुके तुमलोग।”

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आने के कुछ समय बाद ही दो मई को कथित तौर पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सरकार की गला दबाकर हत्या कर दी थी। पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के कुछ घंटे बाद राज्य के कई इलाकों में राजनीतिक हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में खासकर बीजेपी समर्थक निशाने पर थे। तब से लेकर अब तक ये संख्या सैकड़ों में बताई जाती है।

अभिजीत सरकार की दो मई को उनके घर से बाहर घसीट कर हत्या कर दी गई थी। हमले से ठीक पहले वे दो बार फेसबुक पर लाइव हुए थे और टीएमसी गुंडों के हमले को लेकर बताया था। अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी थी। उन्हें पता भी नहीं था कि फेसबुक पर लाइव कैसे आते हैं, लेकिन उन्होंने किसी तरह वीडियो बनाया और बताया कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे हैं और उन्होंने उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला।

मई में अभिजीत सरकार की पत्नी, जो उनकी हत्या की चश्मदीद भी हैं, ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था, “भीड़ ने उनके गले में सीसीटीवी कैमरे का तार बाँध दिया। गला दबाया। ईंट और डंडों से पीटा। सिर फाड़ दिया और माँ के सामने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी। आँखों के सामने बेटे की हत्या होते देख उनकी माँ बेहोश होकर मौके पर ही गिर गईं।”

हिंसा के मामले में कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मंगलवार (1 सितंबर, 2021) को 10 नए केस दर्ज किए। इसके साथ ही सीबीआई द्वारा दर्ज मामलों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

मोदी सरकार से टकराने के लिए कॉन्ग्रेस ने बनाई ‘आंदोलन समिति’: प्रियंका गाँधी, उदित राज, दिग्विजय के साथ ये नेता लेंगे लोहा

कई राज्यों में अंदरूनी कलह झेल रही कॉन्ग्रेस पार्टी ने मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाने के लिए ‘आंदोलन समिति’ (agitation committee) का गठन किया है। अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमेटी (AICC) ने आज (सितंबर 2, 2021) जानकारी दी कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने राष्ट्रीय स्तर पर निरंतर आंदोलन की योजना बनाने के लिए दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया है।

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के अलावा, इस ‘आंदोलन समिति’ में पार्टी महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा, तेलंगाना के सांसद उत्तम कुमार रेड्डी, और कॉन्ग्रेस नेता मनीष चतरथ, बीके हरिप्रसाद, रिपुन बोरा, उदित राज, रागिनी नायक और जुबेर खान शामिल हैं।

दिलचस्प बात यह है कि सोनिया गाँधी की बेटी प्रियंका गाँधी वाड्रा समिति की सदस्य हैं, जबकि उनके बेटे राहुल गाँधी इसके सदस्य नहीं हैं। गौरतलब है कि ज्यादातर झूठे और निराधार दावों पर मोदी सरकार पर हमले शुरू करने में राहुल गाँधी सबसे आगे रहे हैं।

समिति पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव से पहले मूल्य वृद्धि, कृषि कानून आदि जैसे विभिन्न मुद्दों पर मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए रणनीति तैयार करेगी। कॉन्ग्रेस नेता उदित राज भी इस नवगठित समिति के सदस्य हैं, उन्होंने कहा, “अब तक कोई बैठक नहीं हुई है, लेकिन मूल्य वृद्धि, कृषि कानूनों और अन्य मुद्दों पर निरंतर आंदोलन की आवश्यकता है। यह समय की माँग है, देश की जरूरत है, लोगों की जरूरत है। राहुल जी लड़ रहे हैं, किसान भी लड़ रहे हैं, लेकिन इसे और अधिक मजबूत बनाए रखना चाहिए।”

इस 9 सदस्यीय आंदोलन समिति का गठन कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष के लिए समारोह की योजना बनाने के लिए 11 सदस्यीय समिति के गठन के बाद किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस नेता मुकुल वासनिक को उस समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, मीरा कुमार, अंबिका सोनी, गुलाम नबी आजाद, भूपिंदर सिंह हुड्डा, प्रमोद तिवारी, मुल्लापल्ली रामचंद्रन, केआर रमेश कुमार और प्रद्युत बोरदोलोई समिति के अन्य सदस्य हैं।

यह समिति कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के वार्षिक समारोह की देखरेख करेगी, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के समानांतर चलेगी। कथित तौर पर, उस समिति की संरचना को लेकर कई कॉन्ग्रेस नेताओं में असंतोष था, जिसमें गुलाम नबी आजाद, भूपिंदर सिंह हुड्डा और मुकुल वासनिक जैसे जी-23 गुट के कई नेता शामिल थे।

गुरुद्वारे में ‘कथावाचक’ दविंदर सिंह ने किया तालिबान का गुणगान, मोदी सरकार के खिलाफ सिखों को उकसाया: देखें वीडियो

पंजाब के गोइंदवाल के रहने वाले कथावाचक भाई दविंदर सिंह (सोनू वीर जी) ने 30 अगस्त 2021 को उत्तर प्रदेश में खीरी, महिंगापुर स्थित गुरुद्वारा नानक पियाओ में उपदेश दिया। इस दौरान उन्होंने तालिबान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “कुछ गोरे लोग अफगानिस्तान में सेना लाए। उस समय तालिबान के 52 सिंह थे। अब आप पूछेंगे कि मैं उन्हें सिख क्यों कह रहा हूँ। मैं उन्हें सिख इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि अगर कोई इंसान मर्दानगी दिखाने वाले अपने हक के लिए लड़ रहा है, जो किसी का गुलाम बनने को राजी नहीं है? कौन हैं ये?”

उन्होंने आगे कहा, “जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया, तो बुद्धिमान लोग जो अपने अधिकारों को बचाने के लिए लड़ रहे थे, संख्या में केवल 52 थे। यह हमारा दुर्भाग्य है कि हमारे 11 साल के बच्चों की माँ अपने बच्चों के बाल कटवा रही हैं। यहाँ तक ​​कि न केवल लड़के, बल्कि लड़कियाँ भी अपने बाल काट रही हैं। वहीं तालिबान ने अपने 11 साल के बच्चों के हाथ में लोडेड पिस्टल दे दी और जब बच्चों ने उनसे पूछा कि जब कोई उनके घर में घुसे तो वे क्या करें, उनके अम्मी-अब्बू ने उन्हें घुसपैठियों को गोली मारने के लिए कहा। उन्होंने 52 के समूह के साथ शुरुआत की और अब उन्होंने 75,000 पुरुषों के साथ 2,75,000 अमेरिकी सैनिकों को हराया। यह हथियारों की ताकत है।”

पंजाबी उपदेशक ने कहा कि यह सिखों का दुर्भाग्य है कि वे जीत का स्वागत फूलों से करते हैं। दूसरी ओर तालिबान ने अपने हथियार उठा लिए। उन्होंने कहा कि एक वीडियो लीक हो गया, जिसमें अफगान संसद में प्रवेश करने से पहले तालिब अपने हथियारों की पूजा करते नजर आए।

तालिबान का उदाहरण देते हुए दविंदर सिंह ने कहा कि सिख मोदी सरकार से गुजारिश कर रहे हैं कि उन्हें प्रताड़ित न किया जाए। सिख उपदेशक ने कहा, “लेकिन कब तक? मैं आपको पहले भी बता चुका हूँ कि अगर कोई कुत्ता पागल हो जाए तो उसे मारने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। यह आप पर निर्भर करता है कि आप कुत्ते को वोट की ताकत से मारते हैं या आंदोलन की ताकत से, लेकिन आपको कुत्ते को मारना है।”

दविंदर सिंह ने आगे कहा, “मेरे सिख भाइयों, अगर आप कुत्ते को नहीं मारेंगे, तो वह आपकी गर्दन पर अपना घुटना रख देगा। मैं आपको एक उदाहरण दे रहा हूँ। अडानी और अंबानी के बेटों को केवल आधा लीटर दूध चाहिए, लेकिन मोदी सरकार उन्हें 5 लीटर परोस रही है और किसी को कुछ नहीं दे रही है। यह उचित नहीं है। होना तो इसका उलटा चाहिए। आपको 5 लीटर मिलना चाहिए और जो कुछ बचा है उसे दे दें। अगर आप अपना हिस्सा लेना चाहते हैं, तो एक्शन लेना होगा। खालसा याद रखना बचा हुआ नहीं खाना है।”

भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

उपदेश के दौरान दविंदर सिंह ने भाजपा नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “अगर कोई बीजेपी का समर्थन करता है, तो उनसे 13 बीजेपी कार्यकर्ताओं के हाथों एक युवती के सामूहिक बलात्कार के बारे में पूछें, जिन्होंने न केवल उसके साथ बलात्कार किया, बल्कि उसके गुप्तांगों में रॉड भी डाल दी। उनसे पूछें कि वे ऐसे लोगों का समर्थन कैसे कर सकते हैं? अगर आप यह सवाल पूछेंगे तो वे पीछे हट जाएँगे।” इस बीच दविंदर सिंह ने किसान आंदोलन को जिंदा रखने की अपील अपने फॉलोवर्स से करते हुए किसी भी तरह से मोदी सरकार को सत्ता से हटाने का आग्रह किया।

गुरुद्वारों से फर्जी सूचनाएँ फैलाई जा रहीं

ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी गुरुद्वारे का इस्तेमाल सिख युवाओं को कट्टरपंथी बनाने या केंद्र सरकार या कृषि कानूनों के बारे में गलत सूचना फैलाने के लिए किया गया हो। इससे पहले दिसंबर 2020 में दिल्ली स्थित गुरुद्वारा बंगला साहिब के उपदेशक कथा वाचक बाबा बंता सिंह ने कृषि कानूनों के बारे में गलत सूचना फैलाई थी। उन्होंने कई ऐसे झूठे दावे किए थे, जो कि कानूनों के बिल्कुल उल्टे थे।

कश्मीरी अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी से जब एक पत्रकार ने पूछे तीखे सवाल तो मिली थी धमकी: देखें वीडियो

जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता व ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी का बुधवार (सितंबर 1, 2021) देर रात निधन हो गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनके अतीत से जुड़ी कई घटनाओं को शेयर किया है।

इसी कड़ी में पत्रकार और कश्मीरी पंडित आदित्य राज कौल ने 2011 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अलगाववादी नेता से तीखे सवाल पूछते हुए उनका एक वीडियो साझा किया, जिसके कारण उन्हें डराया-धमकाया गया।

कौल ने वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, “मैं सैयद अली शाह गिलानी से जीवन में दो बार मिला। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जब इंडिया टुडे ने मुझे नई दिल्ली में 2011 के कॉन्क्लेव में बोलने के लिए आमंत्रित किया, तो वहाँ मैंने पाकिस्तान में सीमा पार के आकाओं के साथ उनके संबंधों और इस बात का खुलासा किया कि किस तरह से वो आतंकवाद का समर्थन करते हैं। जब उन्होंने जवाब देने की कोशिश की तो भीड़ ने हंगामा करना शुरू कर दिया।”

हुर्रियत नेता के सामने बेबाकी से खड़े कौल ने कभी उन्हें खूँखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन के प्रतिबिंब के रूप में परिभाषित किया था। 1990 के दशक में घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन का एक किस्सा साझा करते हुए, कौल ने बताया, “मैं सिर्फ नौ महीने का था जब मेरी माँ को मुझे एक कपड़े में लपेटकर भागना पड़ा ताकि गिलानी जैसे लोग मुझे और मेरे जैसे सौ अन्य बच्चों को न मार सके।”

कौल ने कहा, “सैकड़ों बच्चे मारे गए और सैकड़ों महिलाओं का बलात्कार किया गया।” इस दौरान उन्होंने कहा कि वह गिलानी से एक आम कश्मीरी के रूप में बात कर रहे थे, न कि एक हिंदू पंडित के रूप में। आगे उन्होंने अपना सवाल पूछते हुए कहा, “उन कश्मीरी पंडितों, लद्दाखियों और जम्मू के लोगों के बारे में उनका (गिलानी) क्या कहना है, जो इतने सालों से पीड़ित हैं।” कौल के इस सवाल पर खूब तालियाँ बजी। 

कौल ने तब जोर देकर कहा कि वह गिलानी से किसी जवाब की उम्मीद नहीं करते हैं, क्योंकि वह उनकी विचारधारा और झुकाव को जानते हैं। फिर उन्होंने पूछा कि हुर्रियत नेता ने अपने ही लोगों को क्यों मार डाला, क्योंकि वे भारत के पक्ष में बोलते थे। कौल ने गिलानी पर घाटी में गन कल्चर स्थापित करने का आरोप लगाते हुए कहा, “आप केवल सीमा पार अपने आकाओं के प्रति वफादार हैं।”

इस पर गिलानी ने शर्मनाक जवाब देते हुए कहा कि कश्मीरी पंडितों के पलायन में हुर्रियत की कोई भूमिका नहीं थी और यह सब तत्कालीन गवर्नर जगमोहन मल्होत्रा की साजिश थी। गिलानी की प्रतिक्रिया पर दर्शकों की हँसी छूट गई और उन्होंने इसके लिए उनकी निंदा भी की।

उल्लेखनीय है कि गिलानी जिनका 92 साल की उम्र में बुधवार को श्रीनगर में निधन हो गया, उन्होंने अपना पूरा जीवन जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ाने में बिताया। गिलानी कश्मीर में एक प्रमुख कट्टरपंथी अलगाववादी नेता थे, जिन्होंने इस क्षेत्र में अलगाववादी कार्यकर्ताओं की वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभाई थी। उनकी मृत्यु पर शोक व्यक्त करने वालों में महबूबा मुफ्ती भी थीं। गिलानी पर अक्सर पाकिस्तान की फंडिंग के सहारे कश्मीर में अलगाववाद भड़काने के आरोप लगे। उनके विरुद्ध कई केस भी हुए। NIA और ED ने टेरर फंडिंग के मामले में जाँच की थी, जिसमें उनके दामाद समेत कई रिश्तेदारों से पूछताछ हुई थी।

‘यह आत्महत्या जैसा’: कोहली ने अश्विन को इंग्लैंड के ओवल टेस्ट में भी नहीं दिया मौका, सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई हैरानी

इंग्लैंड को ओवल में हो रहे भारत-इंग्लैड टेस्ट मैच के चौथे मैच से कप्तान विराट कोहली द्वारा ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को बाहर करने के फैसले का जमकर विरोध किया जा रहा है। इस मैच में भारत टॉस हार गया और दो बदलाव किए, उमेश यादव और शार्दुल ठाकुर को मोहम्मद शमी और इशांत शर्मा की जगह टीम में शामिल कर विराट कोहली ने उनपर भरोसा जताया है।

इससे पहले तक माना जा रहा था कि विश्व के दूसरे नंबर के टेस्ट गेंदबाज आर अश्विन को भारतीय एकादश में शामिल किया जाएगा, क्योंकि इंग्लैंड के ओवल क्रिकेट ग्राउंड की पिच सबसे अधिक स्पिन गेदबाजी के प्रति अनुकूल है। खास बात ये है कि रविचंद्रन अश्विन ने 5-टेस्ट मैचों की शुरुआत से पहले आयोजन स्थल पर काउंटी क्रिकेट खेला और समरसेट के खिलाफ सरे के लिए दूसरी पारी में 6 विकेट लिए थे।

हालाँकि, इसको लेकर विराट कोहली का मानना था कि भारत ने अश्विन को खिलाने के बारे में सोचा था। उन्होंने तर्क दिया कि इंग्लैंड के पास चार बाएँ हाथ के खिलाड़ी हैं और यह रवींद्र जडेजा के लिए एक अच्छा मैच साबित हो सकता है।

कोहली ने टॉस के बाद कहा, “इंग्लैंड के पास चार बाएँ हाथ के बल्लेबाज हैं, इसलिए जडेजा के लिए अच्छा मैच है, हमारे तेज गेंदबाजों ने विकेट पर अच्छी गेंदबाजी की।”

बहरहाल कोहली के फैसले पर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपना गुस्सा और हैरानी दोनों जाहिर की।

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारतीय टीम के फैसले पर हैरानी जताते हुए कहा, “यह टीम पूरी तरह से अविश्वसनीय है। इंग्लैंड में स्पिन के लिए सबसे अनुकूल पिच पर खिलाने के बजाय अस्विन को बाहर कर दिया गया। आप अपने पाँच सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों को चुनें, @ashwinravi99 पहला या दूसरा नाम होना चाहिए। उन्हें छोड़कर @MdShami11 ओवल में एक मृत्यु-इच्छा की तरह है – मानो आप हारना चाहते हैं!”

पूर्व ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर लिजा स्थलेकर ने भी टेस्ट मैच में अश्विन को शामिल नहीं करने पर हैरानी जताई।

जॉय भट्टाचार्य ने कहा ने कहा कि वो विराट कोहली और सेलेक्टर्स के फैसले से सहमत नहीं हैं, लेकिन वो उनके इस साहस और विश्वास की सराहना करते हैं।

एक अन्य यूजर ने कहा कि इस टेस्ट मैच के लिए जिन पाँच लोगों को चुना गया है, उनकी तुलना अश्विन, इशांत और शमी के काफी अधिक टेस्ट विकेट हैं।

पत्रकार विक्रांत गुप्ता ने इस पर हैरानी जताते हुए कहा, “रविचंद्रन अश्विन अभी भी प्लेइंग इलेवन में नहीं हैं क्योंकि भारत जडेजा के साथ 4 सीमर बुमराह, सिराज, शार्दुल और उमेश के साथ बना हुआ है। अभी तक समझ नहीं आया कि अश्विन इसमें जगह क्यों नहीं बना सके।”