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JNU प्रोफेसर के शौहर सैयद फैजुल्ला ने बच्चे से लगवाया ‘हिन्दुस्तान मुर्दाबाद, पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे: वायरल वीडियो पर FIR दर्ज

हरियाणा के गुरुग्राम के इंपीरियल गार्डन सोसाइटी में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने वाले अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत सोसाइटी के निवासियों द्वारा 28 अगस्त को दर्ज कराई गई। दरअसल, पिछले दिनों सोसाइटी में कुछ लोगों ने ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाया था, जिसमें से एक की पहचान अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी के रूप में हुई है। वह जेएनयू की प्रोफेसर रोसिना नासिर के शौहर हैं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाते हुए सुना जा सकता है, हालाँकि यह वीडियो कब की है, इसका इसमें कोई जिक्र नहीं है।

Complaint filed by the residents of Imperial Gardens Society against Anwar Syed Faizullah Hashmi (courtesy: @iAnkurSingh on Twitter)

शिकायत में निवासियों ने लिखा, “हम, इंपीरियल गार्डन सोसाइटी, सेक्टर 102, गुरुग्राम के निवासी, आपको एक गंभीर मुद्दे से अवगत कराना चाहते हैं, जहाँ अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी निवासी फ्लैट आईजी-01-1501 ने अपने अपार्टमेंट की बालकनी से पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए। यह भारतीय दंड संहिता के तहत विभिन्न धाराओं के तहत एक गंभीर अपराध है। यह हरकत वीडियो कैमरे में कैद हो गई। इस पत्र के साथ उस समय का वीडियो सबूत के तौर पर एक पेन ड्राइव में दिया जा रहा है।”

इसमें आगे लिखा गया, “इंपीरियल गार्डन सोसाइटी के भीतर कुल 580 फ्लैट और 265+ परिवार रहते हैं और संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इस कृत्य ने समाज के लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। इस तरह का कारनामा सौहार्दपूर्ण जीवन और साथी निवासियों की सुरक्षा को प्रभावित करेगा। आपसे विनम्रतापूर्वक अनुरोध है कि मामले की जाँच करें और अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी और उनके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज करें।”

उन्होंने पुलिस के साथ वीडियो भी साझा किया जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर किया गया था।

वीडियो में एक व्यक्ति (जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वह रोसिना नासिर का शौहर अनवर सैयद फैजुल्ला हाशमी है) को एक बच्चे को ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ चिल्लाना सिखाने की कोशिश करते हुए सुना जा सकता है।

हाशमी की बीबी ने जेएनयू प्रशासन पर लगाया था भेदभाव का आरोप

रोसिना नासिर ने इससे पहले जेएनयू प्रशासन पर कुलपति ममीडाला जगदीश कुमार और CSSEIP की चेयरपर्सन यागती चिन्ना राव पर 2019 में उनकी मजहबी पहचान के कारण उत्पीड़न, शोषण और भेदभाव का आरोप लगाया था। डीएमसी के अध्यक्ष को लिखे अपने पत्र में उन्होंने दावा किया था, “मुझे ऐसा लगता है कि अगर मैं CSSEIP में फैकल्टी का पद नहीं छोड़ूँगी, तो मैं भी नजीब (जेएनयू छात्र जो तीन साल पहले अपने छात्रावास से लापता हो गया था और अभी भी पता नहीं चल पाया है) की तरह गायब हो जाऊँगी।”

उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें जेएनयू में नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है, इसलिए उसे महीनों से भुगतान नहीं किया जा रहा। रोसिना फिलहाल जेएनयू में स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज में सहायक प्रोफेसर हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में रोसिना नासिर और जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के बीच कई महीनों से वेतन न मिलने का मामला भी चल रहा है, जिसकी अगली सुनवाई सितंबर में होनी है।

‘राम के बिना अयोध्या की कल्पना असंभव’: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रामायण कॉन्क्लेव का किया शुभारंभ, जानें खास बातें

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार (29 अगस्त) को अयोध्या के रामकथा पार्क में दीप जलाकर रामायण कॉन्क्लेव का और पर्यटन विकास की विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। इस दौरान उनके साथ राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे।

इस दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए रामकथा के महत्व बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है, ”रामकथा सुंदर करतारी, संसय बिहग उड़ावनि-हारी। अर्थात राम की कथा हाथ की वह मधुर ताली है, जो संदेहरूपी पक्षियों को उड़ा देती है।”

राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि रामायण और महाभारत, इन दोनों ग्रन्थों में, भारत की आत्मा के दर्शन होते हैं। यह कहा जा सकता है कि भारतीय जीवन मूल्यों के आदर्श, उनकी कहानियाँ और उपदेश, रामायण में समाहित हैं।

उन्होंने अपने संबोधन में अयोध्या का शाब्दिक अर्थ भी बताया। उन्होंने कहा, “अयोध्या का शाब्दिक अर्थ है- जिसके साथ युद्ध करना असंभव हो। रघु, दिलीप, अज, दशरथ और राम जैसे रघुवंशी राजाओं के पराक्रम व शक्ति के कारण उनकी राजधानी को अपराजेय माना जाता था। इसलिए इस नगरी का ‘अयोध्या’ नाम सर्वदा सार्थक रहेगा।” उन्होंने कहा कि राम के बिना अयोध्या, अयोध्या है ही नहीं। अयोध्या तो वही है, जहाँ राम हैं। इस नगरी में प्रभु राम सदा के लिए विराजमान हैं। इसलिए यह स्थान सही अर्थों में अयोध्या है।

राष्ट्रपति ने कहा कि विश्व के अनेक देशों में रामकथा की प्रस्तुति की जाती है। इन्डोनेशिया के बाली द्वीप की रामलीला विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मालदीव, मारिशस, त्रिनिदाद व टोबेगो, नेपाल, कंबोडिया और सूरीनाम सहित अनेक देशों में प्रवासी भारतीयों ने रामकथा व रामलीला को जीवंत बनाए रखा है। मैं कामना करता हूँ कि जिस प्रकार रामराज्य में सभी लोग दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों से मुक्त थे उसी प्रकार हमारे सभी देशवासी सुखमय जीवन व्यतीत करेंगे।

राष्ट्रपति आज अयोध्या के एक दिवसीय दौरे पर हैं। बताया जा रहा है कि वह रामलला के दर्शन करने बाद हनुमान गढ़ी मंदिर और कनक भवन जाकर पूजा अर्चना करेंगे। इसके बाद दोपहर 3:50 पर प्रेसिडेंशियल स्पेशल ट्रेन से लखनऊ के लिए रवाना होंगे।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आतंकवाद को लेकर बयान से हटाया तालिबान का नाम: जानिए एक पखवाड़े में क्यों बदली डिप्लोमेसी

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर कब्जा करने के दो सप्ताह बाद ही तालिबान को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्टैंड बदलता दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफगानिस्तान मसले पर अपने ताजा बयान में आतंकी गतविधियों से तालिबान का नाम हटा दिया है। दरअसल काबुल पर कब्जे के एक दिन बाद यानी 16 अगस्त को यूएनएससी की तरफ से अफगानिस्तान को लेकर एक बयान जारी किया गया था, जिसमें तालिबान से अपील की गई थी कि वह अपने क्षेत्र में आतंकवाद का समर्थन न करे, मगर अब इसी बयान से तालिबान का नाम हटा दिया गया है। 

बता दें कि इस महीने का अध्यक्ष भारत है, जो पहली बार पूरे सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर रहा है और इस बयान पर भारत के भी हस्ताक्षर हैं। यूएनएससी की ओर से जारी ताजा बयान में भारत ने 26 अगस्त को काबुल एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले की निंदा की है। इस आतंकी हमले में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें अमेरिका के 13 जवान भी शामिल थे। इस आतंकी हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खुरासान ने ली थी। 

27 अगस्त के बयान में क्या है

काबुल हमले के एक दिन बाद 27 अगस्त को भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने बतौर यूएनएससी अध्यक्ष परिषद की ओर से एक बयान जारी किया, जिसमें 16 अगस्त को लिखे गए एक पैराग्राफ को फिर से दोहराया गया। लेकिन इसमें एक बदलाव करते हुए तालिबान का नाम हटा दिया गया। इस बयान वाले पैराग्राफ में लिखा था, “सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने अफगानिस्तान में आतंकवाद का मुकाबला करने के महत्व को दोहराया ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल किसी भी देश को धमकी देने या हमला करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए और किसी भी अफगान समूह या व्यक्ति को किसी भी देश के क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों का समर्थन नहीं करना चाहिए।”

16 अगस्त के बयान में क्या था

काबुल पर तालिबान राज होने के बाद 16 अगस्त को यूएनएससी ने जो बयान जारी किया था, उसके पैराग्राफ में तालिबान का नाम था। 16 अगस्त का बयान कहता है, “सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने अफगानिस्तान में आंतकवाद का मुकाबला करने के महत्व का जिक्र किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जाए कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का इस्तेमाल किसी देश को धमकी देने या हमला करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए और न ही तालिबान और न ही किसी अन्य अफगान समूह या व्यक्ति को किसी अन्य देश के क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादियों का समर्थन करना चाहिए।”

अकबरुद्दीन ने किया बदलाव का ज़िक्र

संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिध सैयद अकबरुद्दीन ने इस बदलाव का जिक्र करते हुए ट्विटर पर UNSC के स्टेटमेंट की कॉपी को शेयर की। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि सिर्फ 15 दिनों में ‘T’ शब्द को हटा दिया गया है।

क्या बदल रहे हैं हालात?

अधिकारियों ने कहा कि बयान पर हस्ताक्षर करने का निर्णय ‘जमीनी वास्तविकताओं’ को बदलने के मद्देनजर लिया गया है। दरअसल तालिबान विदेशियों को फिलहाल वहाँ से निकालने में मदद कर रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसने 15 अगस्त से अब तक 1 लाख से अधिक लोगों को निकाला है। भारतीय दूतावास को 17 अगस्त को खाली कराया गया था। इसके बाद यूएनएससी की तरफ से पहला बयान जारी किया गया था। 27 अगस्त को UNSC की तरफ से जो बयान जारी किया गया उसमें तालिबान को इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया।

मोपला हिन्दू नरसंहार को CM विजयन ने बताया कृषि विद्रोह, 27% के तुष्टिकरण में जुटी CPI(M): जानिए इतिहास

सन् 1921 में मालाबार में हुए हिन्दुओं के नरसंहार को किस तरह ‘मोपला कृषि विद्रोह’ का नाम देकर इतिहास में पढ़ाया जाता रहा, इसका अब खुलासा हो चुका है। अब केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस बात को दोहराया है कि ‘मालाबार विद्रोह’ एक ‘कृषि विद्रोह’ था और वरियमकुन्नथु कुंजाहम्मद हाजी इसका नेता था। उन्होंने इस झूठे नैरेटिव को आगे बढ़ाया है कि मोपला अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई थी।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने शनिवार (28 अगस्त, 2021) को मोपला नरसंहार को लेकर अपनी पार्टी CPI(M) के स्टैंड को स्पष्ट किया। केरल विधानसभा के अध्यक्ष एमबी राजेश पहले ही जिहादी वरियमकुन्नथु कुंजाहम्मद की तुलना क्रांतिकारी भगत सिंह से कर चुके हैं। पिछले कई सप्ताह में पहली बार सार्वजनिक रूप से दिखे पिनाराई विजयन जब मीडिया के सामने आए तो उन्होंने इसी स्टैंड को दोहराया।

एमबी राजेश की टिप्पणी पर राज्य के भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। विजयन ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम व्यक्तिगत बलिदानों, सशस्त्र क्रांतियों और कृषि विद्रोहों से बना है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों को भगाने में इन सबका योगदान था और किसी को भी नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने मोपला नरसंहार को ‘अंग्रेजों के साथी जमींदारों के खिलाफ संघर्ष’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि कुछ जगह ये भटका, लेकिन हाजी ने सभी को साथ रखा।

इस दौरान उन्होंने कुछ पुस्तकों का उदाहरण दिया, जिसमें हाजी का महिमामंडन किया गया है। लेकिन, इस दौरान वो ये बताना भूल गए कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में धर्मांतरण का क्या काम? मुख्यमंत्री और उनकी वामपंथी पार्टी को इस बात का जवाब देना चाहिए कि मोपला मुस्लिमों ने इस तथाकथित ‘कृषि विद्रोह’ में हिन्दुओं को ही क्यों निशाना बनाया? हिन्दू महिलाओं के बलात्कार क्यों हुए? क्या ये भी ‘अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध क्रांति’ थी?

असल में उनका ये बयान मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए है, क्योंकि केरल में मुस्लिमों की जनसंख्या 27% के करीब है। राज्य में ‘मुस्लिम लीग (IUML)’ नामक पार्टी भी सक्रिय है, जिसकी जड़ें भारत का विभाजन कराने वाले मुस्लिम लीग में हैं। पार्टी के पास 15 विधायक और 4 सांसद भी हैं। ISIS ने केरल को आतंकी भर्ती का अड्डा बना दिया है। तालिबान में भी यहाँ के कुछ लोग शामिल हैं। ऐसे में मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए हिन्दुओं के नरसंहार को भी जायज ठहराया जा रहा है।

मोपला मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं का नरसंहार: ‘मालाबार विद्रोह’ की सच्चाई

इस नरसंहार में इसमें सबसे विवादित नाम वरियामकुननाथ कुंजाहमद हाजी का ही आता है। वो मालाबार में ‘मलयाला राज्यम’ नाम से एक इस्लामी सामानांतर सरकार चला रहा था। ‘इस्लामिक स्टेट’ की स्थापना करने वाला कोई व्यक्ति स्वतंत्रता सेनानी कैसे हो सकता है? ‘द हिन्दू’ अख़बार को पत्र लिख कर उसने हिन्दुओं को भला-बुरा कहा था। अंग्रेजों ने उसे मौत की सज़ा दी थी। अब उस पर फिल्म बना कर उसके महिमामंडन की तैयारी हो रही है।

डॉक्टर आंबेडकर लिखते हैं, “अंग्रेजों के खिलाफ को तो जायज ठहराया जा सकता है, लेकिन मोपला मुस्लिमों ने मालाबार के हिन्दुओं के साथ जो किया वो विस्मित कर देने वाला है। मोपला के हाथों मालाबार के हिन्दुओं का भयानक अंजाम हुआ। नरसंहार, जबरन धर्मांतरण, मंदिरों को ध्वस्त करना, महिलाओं के साथ अपराध, गर्भवती महिलाओं के पेट फाड़े जाने की घटना, ये सब हुआ। हिन्दुओं के साथ सारी क्रूर और असंयमित बर्बरता हुई। मोपला ने हिन्दुओं के साथ ये सब खुलेआम किया, जब तक वहाँ सेना न पहुँच गई।”

हाल ही में भारत सरकार ने ‘मालाबार विद्रोह’ में शामिल लोगों के नाम ‘भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों’ की सूची से हटाने का फैसला लिया। विद्रोह के नाम पर उस समय 10,000 से भी अधिक हिन्दुओं का नरसंहार किया गया था। 1921 में लगभग 6 महीनों तक ये कत्लेआम चलता रहा था। इतिहास की समीक्षा के लिए बनी समिति ने पाया कि इस पूरे ‘विद्रोह’ के दौरान ऐसे कोई भी नारे नहीं लगाए गए, जो राष्ट्रवादी हों या फिर अंग्रेज विरोधी हों।

‘SC से प्रेम है तो अनुसूचित समुदाय में अपनी बेटी की शादी क्यों नहीं की’: पिनराई विजयन को कॉन्ग्रेस MP ने कहा झूठा

केरल में कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष कोडिकुन्निल सुरेश ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ विवादित टिप्पणी की है। कॉन्ग्रेस सांसद ने शनिवार (28 अगस्त) को कहा कि मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का अनुसूचित जाति से कोई सरोकार नहीं है, उनके प्रति सीएम का प्रेम झूठा है। उन्होंने कहा कि अगर विजयन वास्तव में सबको साथ लेकर चलने वाले नेता हैं, तो उन्हें अपनी बेटी की शादी अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति से करनी चाहिए थी।

कोडिकुन्निल सुरेश ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अनुसूचित जाति के एक मंत्री को नियंत्रित करने के लिए अपने वफादार सहयोगी को नियुक्त किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुता​बिक, सांसद ने ये विवादित टिप्पणी एससी/एसटी फंड घोटाले की सीबीआई जाँच की माँग को लेकर धरने के दौरान की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पिछड़े समुदाय के साथ भेदभाव कर रहे हैं। उन्होंने अपनी आरोपों की पुष्टि के लिए कुछ मामलों का जिक्र भी किया।

कोडिकुन्निल सुरेश ने विजयन पर दलित समुदाय की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के लोगों को कैबिनेट और पीएससी नियुक्तियों से दूर रखा जा रहा है। उन्होंने देवास्वोम मंत्री के. राधाकृष्णन के निजी सचिव के रूप में ए संपत की नियुक्ति का भी उल्लेख किया। कॉन्ग्रेस नेता ने बताया कि जब एक दलित को देवास्वोम (मंदिर मामलों) का मंत्री बनाने का जश्न मनाया जा रहा था। उसी समय, विजयन ने उस दलित मंत्री पर लगाम लगाने के लिए अपने एक व्यक्ति को उसके ऊपर नियुक्त कर दिया था।

सुरेश ने आगे कहा कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देकर विजयन ने बेहतरीन नेता होने का तमगा हासिल किया था। अगर विजयन एक सच्चे नेता होते, तो वह अपनी बेटी की शादी अनुसूचित जाति के व्यक्ति से कर देते। माकपा के पास एससी समुदाय के कई अच्छे युवा हैं।

‘पोर्न देखो और मेरे साथ सेक्स करो’ – 13 साल के भाई को 16 साल की बहन की धमकी, हो गई गर्भवती, घटना मुंबई की

मुंबई के कुरार इलाके से भाई-बहन के रिश्ते को कलंकित करने का मामला सामने आया है। यहाँ 16 साल की बहन ने अपने 13 वर्षीय भाई को पोर्न वीडियो दिखाकर उसे जबरन सेक्स करने के लिए मजबूर किया। इसका खुलासा तब हुआ, जब लड़की 5 महीने की गर्भवती पाई गई। लड़की ने बताया कि उसने अपने छोटे भाई पर यौन संबंध बनाने के लिए दबाव डाला था, जिसकी वजह से वो गर्भवती हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किशोरी को पोर्न वीडियो देखने की लत थी। वह अपने छोटे भाई के साथ सोफे पर सोती थी। इस बीच वह 13 साल के भाई को अपने मोबाइल पर पोर्न वीडियो दिखाती थी। इसके बाद वह अपने भाई से उसके साथ सेक्स करने को कहती थी। दोनों पिछले कई महीनों से ऐसा कर रहे थे। 16 वर्षीय किशोरी अब 5 महीने की गर्भवती है। उसके प्रेग्नेंट होने के बाद ये हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है।

लड़की के बयान के मुताबिक, वह अक्सर अपने छोटे भाई को अश्लील वीडियो दिखाती थी। उसने यह भी बताया कि वो अपने भाई के साथ जबरदस्ती करती थी और उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ यौन संबंध बनाने लगी थी। पुलिस अधिकारियों का कहना ​है कि ऐसा करने की वजह से लड़की गर्भवती हो गई।

पुलिस ने इस मामले में नाबालिग भाई से भी पूछताछ की है। भाई ने इसकी पुष्टि करते हुए पुलिस को बताया कि उसकी बहन सही कह रही है। भाई ने यह भी बताया कि जब उसने अपनी बहन के साथ सेक्स करने से मना किया था तो उसकी बहन ने उसे पीटने और इस बारे में सबको बताने की धमकी दी थी। इस डर से वह अपनी बहन के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हुआ था।

पुलिस ने बहन-भाई के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। लड़की के छोटे भाई को बाल सुधार गृह भेजा गया है। वहीं, लड़की का अस्पताल में इलाज चल रहा है। फिलहाल पुलिस गर्भ में पल रहे बच्चे के माता-पिता का डीएनए टेस्ट करवा रही है।

पुलिस ने कहा कि डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट के आने के बाद घटना के बारे में और जानकारी सामने आएगी। mensdayout द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रकाश बेले के हवाले से कहा गया है कि सभी एंगल से मामले की जाँच की जा रही है।

ऑक्सीजन की कमी का नैरेटिव फैलाने वालों को AAP सरकार का इनाम: जानिए कौन हैं पद्म अवॉर्ड के लिए भेजे गए 3 नाम

दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने पद्म अवॉर्ड्स के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी है। लेकिन, जिन नामों को पद्म सम्मान के लिए भेजा गया है, उससे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार पर संदेह पैदा होता है, क्योंकि ये वही लोग हैं जिन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी और केंद्र द्वारा सौतेले व्यवहार का नैरेटिव फैलाने में मदद की थी।

दिल्ली सरकार ने पद्म अवॉर्ड के लिए जो तीन नाम भेजे हैं, उनमें से एक है डॉक्टर एसके सरीन का। वो ‘इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (ILBS)’ के निदेशक हैं। उन्होंने 20 अप्रैल, 2021 को एक बयान देते हुए दावा किया था कि दिल्ली के अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी कमी है। उन्होंने दावा किया था कि 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की डिमांड के बदले सिर्फ 300 मीट्रिक टन ही मिल रहा है, जिससे एक बड़ा गैप पैदा हो गया।

दिल्ली सरकार की सिफारिश में दूसरा नाम है डॉक्टर सुरेश कुमार का। वो ‘लोक नायक जयप्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल’ का प्रबंध निदेशक (MD) हैं। 24 अप्रैल, 2021 को उनका बयान आया था कि पिछले 4-5 दिनों से उनके अस्पतालों में सारे बेड्स भरे हुए हैं। उनका कहना था कि कुछ मरीजों को ऑक्सीजन सैचुरेशन लेवल बनाए रखने के लिए प्रति मिनट 40-50 लीटर ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ रही है।

साथ ही उन्होंने ऑक्सीजन सप्लाई चेन के ठीक न होने का दावा भी किया था। दिल्ली सरकार जिस तीसरे डॉक्टर को पद्म अवॉर्ड दिलाना चाहती है, उनका नाम है संदीप बुद्धिराजा। वो मैक्स हॉस्पिटल के क्लिनिकल डायरेक्टर हैं। उन्होंने दिल्ली के अधिकारियों द्वारा ऑक्सीजन की ज़रूरत को बढ़ा-चढ़ा कर दिखाने वाली रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इस रिपोर्ट में बदलाव करने की सलाह दी थी।

इन तीनों डॉक्टरों के नाम दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता वाली कमिटी ने सुझाए हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इसके लिए उनके पास 9427 सुझाव आए थे। एक और बात जानने लायक है कि डॉक्टर शिव कुमार (SK) सरीन को पहले भी पद्म अवॉर्ड मिल चुके हैं। उन्हें 2007 में यूपीए सरकार ने पद्म भूषण के सम्मान से नवाजा था। अब सोशल मीडिया में आरोप लग रहे हैं कि कोरोना काल में केंद्र सरकार विरोधी माहौल बनाने वालों को केजरीवाल सरकार सम्मानित करना चाहती है

सुप्रीम कोर्ट की ऑक्सीजन ऑडिट टीम से निकले आँकड़े से पता चला था कि दिल्ली सरकार ने 25 अप्रैल से 10 मई तक दूसरे कोविड लहर के चरम के दौरान दिल्ली को ऑक्सीजन की जितनी आवश्यकता थी, उससे चार गुना से अधिक बढ़ा कर दिखाया। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा था कि दिल्ली और देश के अन्य जगहों पर ऑक्सीजन की कमी से मौतें हुई हैं। जबकि इसके उल्ट AAP सरकार ने हाईकोर्ट को बताया था कि ऑक्सीजन से कोई मौत नहीं हुई है।

ये भी याद कीजिए कि ये वही दिल्ली सरकार है, जिसने कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मरीजों को डॉक्टरों-नर्सों के सहारे और डॉक्टर-नर्सों को भगवान के सहारे छोड़ दिया था। GTB अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों ने वीडियो बना कर बताया था कि कैसे घर छोड़ कर ड्यूटी करने वाले मेडिकल कर्मियों को खराब खान परोसा जा रहा था। उन्हें सिर्फ दाल-चावल मिलते थे, वो भी ठंडे। अब यही केजरीवाल सरकार बड़े-बड़े अस्पतालों में बड़े-बड़े [पदों पर तैनात डॉक्टरों को पद्म अवॉर्ड्स दिलाना चाहती है।

जो बायडेन देशद्रोही, बेकार और पागलपन से ग्रस्त है… मेरे बेटे को मरने के लिए भेज दिया: बलिदानी अमेरिकी सैनिक की माँ

काबुल हवाई अड्डे के पास गुरुवार (26 अगस्त 2021) को हुए लगातार दो इस्लामी आतंकी हमलों में 13 अमेरिकी नौसैनिकों समेत अब तक 200+ लोगों की मौत हो गई है। इस आतंकी हमले के दौरान मारे गए एक अमेरिकी नौसैनिक की माँ का गुस्सा अब यूएस के राष्ट्रपति पर निकला है। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान राष्ट्रपति जो बायडेन को जमकर सुनाया और उन्हें पद से हटाने की माँग की।

द डेली वायर की रिपोर्ट के मुताबिक हमले के दौरान जान गँवाने वाले 20 वर्षीय लांस राइली मैक्कलम की माँ कैथी मैक्कलम को सीरियस एक्सएम पैट्रियट रेडियो पर ‘विल्को मेजोरिटी’ (Wilkow Majority) शो में बुलाया गया था। यहाँ पर कैथी ने खुलासा किया कि उन्हें उनके घर पर सूचित किया गया था कि उनका बेटा उस बमबारी में मारा गया, जिसमें कम से कम 13 अमेरिकी सैनिकों की जान गई।

बायडेन के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा, “उस बेकार, पागलपन से ग्रस्त, मूर्ख ने मेरे बेटे को मरने के लिए भेज दिया। मैं आज सुबह चार बजे उठी, तभी मेरे दरवाजे पर दो मरीन आए और उन्होंने मुझे बताया कि मेरा बेटा मर चुका है। वो मेरे सामने उस पागल और सनकी तालिबान आतंकवादियों के साथ हुए राजनयिक बकवास को सुनाने आए थे, जिन्होंने मेरे बेटे को उड़ा दिया। मैं अपने परिवार के लिए काफी दुखी हूँ। मेरा बेटा चला गया।”

बायडेन को वोट देने वाले सभी डेमोक्रेट्स को निशाने पर लेते हुए उन्होंने कहा, “आपने मेरे बेटे को पागलपन से ग्रस्त मूर्ख शख्स के साथ मिल कर मार डाला, जो यह भी नहीं जानता कि वह व्हाइट हाउस में है और वह अभी भी सोचता है कि वह एक सीनेटर है।” उन्होंने कहा कि वह अपने प्रतिनिधि रेप लॉरेन बोएबर्ट (R-CO) से उनके घर पर मिलने जा रही हैं।

कैथी मैक्कलम ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा बिना कुछ किए मर जाएगा। उन्होंने आगे कहा:

“यही मुझे मारता है। मैं चाहती थी कि मेरा बेटा हमारे देश का प्रतिनिधित्व करे, मेरे देश के लिए लड़े। लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि ये पागलपन से ग्रस्त मूर्ख व्यक्ति उसे उसकी मौत के लिए भेज देगा और टेलीविजन पर मुस्कुराएगा, वो भी तब जब वह मरने वाले लोगों की बात कर रहा है। इस शख्स को कार्यालय से हटाने की जरूरत है। यह ट्रम्प के शासनकाल में कभी नहीं हुआ। यह देशद्रोही है।”

गौरतलब है कि अफगानिस्तान के काबुल एयरपोर्ट पर गुरुवार को हुए आत्मघाती हमले में 13 अमेरिकी सैनिकों समेत कुल 100 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। इसके अलावा करीब 150 लोग घायल भी हुए हैं। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत ने ली है। आतंकी संगठन ने इस हमले को अंजाम देने वाले आतंकी की तस्वीर भी जारी की थी।

तालाब से निकाली गई हिंदू नाबालिग लड़की की लाश: शाकिब, सलामुद्दीन, इक़बाल पर रेप, अपहरण और हत्या का आरोप

मध्य प्रदेश में एक लड़की के अपहरण, बलात्कार व हत्या का मामला सामने आया है। परिवार का कहना है कि पीड़िता नाबालिग थी। वो पिछले सप्ताह ही अचानक से गायब हो गई थी। पिता गजराज सिंह ने इस मामले में गाँव के ही शाकिब, सलामुद्दीन और इक़बाल का नाम आरोपितों के रूप में FIR में दर्ज कराया था। 3 दिन पहले इस मामले की FIR दर्ज की गई थी। मामला दर्ज होने के बाद पीड़िता की लाश एक तालाब से बरामद हुई।

हिन्दू संगठनों ने इस मामले में न्याय के लिए विरोध प्रदर्शन भी किया है। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं। पीड़ित परिवार माली समुदाय से आता है। ये घटना शुजालपुर के नरोला हीरापुर गाँव की है। पीड़ित पिता ने बताया कि 22 अगस्त, 2021 को वो गाँव के ही मंदिर में भजन-कीर्तन कर जब रात 12 बजे घर लौटे तो उन्होंने पाया कि उनकी बेटी व बेटे, दोनों कमरे में सो रहे थे।

इसके बाद पिता भी उसी कमरे में सो गए। FIR के अनुसार, तड़के 3 बजे जब उनकी नींद खुली तो उन्होंने पाया कि उनकी बेटी कमरे से गायब है। इसके बाद आस-पड़ोस से लेकर रिश्तेदारों तक में खोज करवाई गई, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। उन्होंने बताया कि रात 12 बजे जब वो घर लौटे थे तो उन्होंने पाया था कि शाकिब खान, सलामुद्दीन और इक़बाल बेग उनके घर के पास स्थित नीम के पेड़ के नीचे बैठे हुए थे।

FIR में पीड़ित पिता ने लिखा है, “ये तीनों आरोपित मुझे देख कर कुछ बातें कर रहे थे। मुझे आशंका है कि ये तीनों मेरी नाबालिग बेटी को बहला-फुसला कर भगा के ले गए। अभी तक इसका कोई पता नहीं चलने पर मैं थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने आया हूँ। कक्षा 12वीं तक पढ़ी मेरी बेटी मानसिक रूप से स्वस्थ है।” इस अपहरण के रिपोर्ट के दर्ज कराए जाने के बाद पीड़िता की लाश मिली व बलात्कार के आरोप लगे।

इस मामले को लेकर विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) और बजरंग दल के अलावा फूल माली समाज भी आक्रोशित है। माली मोहल्ला स्थित श्रीराम मंदिर से एक रैली भी निकाली गई और लोगों ने पड़ाना चौकी पहुँच कर ज्ञापन दिया। इस घटना को लेकर विधायक प्रतिनिधि एवं ग्राम प्रधान प्रतिनिधि यशवंत सिंह माली के नेतृत्व में देश के राष्ट्रपति एवं प्रदेश के राज्यपाल के नाम का ज्ञापन सारंगपुर थाना प्रभारी वीरेंद्र धाकड़ को सौंपा गया।

यशवंतसिंह माली ने कहा “शुजालपुर तहसील के नारोला गाँव में समाज की नाबालिग बेटी के साथ समुदाय विशेष के लोगों ने ‘लव जिहाद’ के माध्यम से सामूहिक दुष्कर्म किया। फिर हत्या करके शव को तालाब में फेंक दिया। इससे माली समाज समाज में आक्रोश व्याप्त है। घटना को अंजाम देने वाले सभी आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए। उन्हें फाँसी की सज़ा होनी चाहिए। यदि उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन समाज के साथ-साथ सभी हिंदू समाज द्वारा पूरे प्रदेश भर में किया जाएगा। इसका जिम्मेदार प्रशासन होगा।”

UP सरकार से सैलरी लेने वाला क्लर्क निजामुद्दीन गिरफ्तार, CM योगी पर की थी अभद्र टिप्पणी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अभद्र टिप्पणी करने वाले PWD क्लर्क को पुलिस ने ​गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाँदा जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) में क्लर्क के पद पर तैनात निजामुद्दीन सिद्दीकी ने फेसबुक पर सीएम योगी पर कथित रूप से अभद्र टिप्पणी की थी।

जिस राज्य में नौकरी, वहीं के मुख्यमंत्री के खिलाफ अपशब्द! इसे लेकर क्लर्क निजामुद्दीन सिद्दीकी को लेकर लोगों में खासा रोष देखने को मिला था। उन्होंने सोशल मीडिया पर सीएम योगी को अपमानित करने वाले निजामुद्दीन सिद्दीकी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की माँग की थी।

जब पुलिस की नजर इस पर पड़ी, तब वे आरोपित का पता लगाने में जुट गए। छानबीन के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर निजामुद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि 28 अगस्त को पुलिस द्वारा सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री के खिलाफ अपनी फेसबुक आईडी से अभद्र टिप्पणी करने वाले अभियुक्त निजामुद्दीन सिद्दीकी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

आरोपित निजामुद्दीन सिद्दीकी लोक निर्माण विभाग (PWD) में क्लर्क के पद पर कार्यरत है। उसके खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

बता दें कि दो दिन पहले (27 अगस्त) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोबाइल पर कथित रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने पर यूपी पुलिस ने बलिया के रहने वाले अंकित यादव नाम के एक युवक को भी गिरफ्तार किया था।

इस मामले में बलिया पुलिस अधीक्षक रामकरन नैय्यर ने बताया था कि नगरा थाना में गुरुवार (26 अगस्त) रात को हिंदू युवा वाहिनी के जिला मंत्री राजीव सिंह चंदेल की शिकायत पर एक अज्ञात के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्यागिकी अधिनियम से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। छानबीन के बाद आरोपित अंकित यादव को शुक्रवार (27 अगस्त) को गिरफ्तार कर लिया गया।