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‘बच्चे के गाल छूना यौन अपराध नहीं’: बॉम्बे HC ने 46 वर्षीय मुर्गी विक्रेता को दी जमानत, दुकान का शटर गिरा बच्ची को अंदर ले गया था

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी बच्चे के गाल छूना यौन अपराध नहीं है। उच्च-न्यायालय ने कहा कि बिना किसी यौन इच्छा के बच्चे के गाल छूना यौन अपराध नहीं है। साथ ही ये भी कहा कि इस मामले में ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम (POCSO Act)’ के तहत कार्रवाई नहीं की जा सकती। शुक्रवार (27 अगस्त, 2021) को सुनाए गए फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस मामले में 46 वर्षीय मुर्गी विक्रेता को जमानत दे दी।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में शामिल साक्ष्यों की शुरुआती जाँच से ये पता नहीं चलता है कि आरोपित ने बच्ची के गाल को यौन अपराध की मंशा से छुआ था। हाईकोर्ट ने कहा कि सभी पहलुओं को देखने के बाद लगता है कि इस मामले में जमानत मिलनी ही चाहिए। हालाँकि, उच्च-न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसकी ये राय सिर्फ जमानत को लेकर है और इसका सुनवाई व जाँच पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।

TOI की खबर के अनुसार, आरोपित को जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया था। 8 वर्षीय बच्ची की माँ ने इस मामले में FIR दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि जब उनकी बेटी आरोपित की दुकान पर गई थी तो उसने अनुचित तरीके से बच्ची के गाल को छुआ था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपित की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी। अधिवक्ता राम प्रसाद गुप्ता ने आरोपित की तरफ से पेश होते हुए आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल को व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता में झूठा फँसाया गया है।

उन्होंने कहा कि आरोपित एक कारोबार करता है, समाज में ही रहता है और उसे अपने परिवार की देखभाल भी करनी होती है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई आशंका नहीं है कि वो सुनवाई के लिए अनुपस्थित हो जाएगा या फिर कहीं भाग जाएगा। उन्होंने कहा कि ये आरोप उम्रकैद या फाँसी की सज़ा के अंतर्गत नहीं आते हैं। अगर अपराध साबित होता है तो अधिकतम 7 वर्षों का कारावास दिया जा सकता है।

आरोपित पहले ही 13 महीने जेल में बिता चुका है। 29 जुलाई, 2020 को दर्ज कराई गई FIR में कहा गया था कि महिला ने आरोपित को देखा कि वो बच्ची को इशारे कर के अपनी दुकान पर बुला रहा था। आरोप है कि जब बच्ची दुकान के भीतर गई तो आरोपित बाहर निकला, उसने इधर-उधर देखा और फिर अंदर जाकर शटर गिरा दिया। आरोप है कि शटर उठाने पर वो बच्ची के गाल छूता हुआ दिखा।

जनवरी 2021 के एक फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि किसी नाबालिग के सामने कोई पैंट की जिप खोल दे, तो वो पॉक्सो एक्ट के तहत यौन शोषण की श्रेणी में नहीं आएगा। जस्टिस पुष्पा गनेदीवाला की एकल पीठ ने 50 वर्षीय एक व्यक्ति द्वारा 5 साल की लड़की से यौन शोषण मामले में ये फैसला दिया था। इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने एक फैसला सुनाया था, जिसके मुताबिक़ सिर्फ ग्रोपिंग (Groping, किसी की इच्‍छा के विरुद्ध कामुकता से स्‍पर्श करना) को यौन शोषण नहीं माना जा सकता। 

नवीन की लाश ट्रॉली बैग में, बीवी मुस्कान ने प्रेमी जमालुद्दीन के साथ मिल मार डाला: Tattoo की मदद से सास सहित 7 गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने टैटू की मदद से एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा किया है। न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित सुखदेव विहार के नाले में 10 अगस्त 2021 को एक ट्रॉली बैग में मिले शव की मिस्ट्री को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस ने इस वारदात को अंजाम देने वाली मृतक की पत्नी मुस्कान (22 वर्ष), उसके प्रेमी मो. जमालुद्दीन उर्फ जमाल (19 वर्ष), सास त्रिजा उर्फ मीनू (48 वर्ष), कौशलेंद्र उर्फ अमन (18 वर्ष), विशाल उर्फ कल्लू (22 वर्ष), विवेक उर्फ बागड़ी (21 वर्ष) और राजकुमार कुमार उर्फ राजपाल उर्फ हेतल (22 वर्ष) को गिरफ्तार कर लिया है।

एक पुलिस अधिकारी ने ऑपइंडिया को बताया कि प्रेम-प्रसंग के चलते पत्नी और उसके प्रेमी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया। हत्याकांड में शामिल सात लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

डीसीपी साउथ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट डीसीपी आरपी मीणा ने बताया 10 अगस्त को न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में सुखदेव विहार के पास नाले में पड़े सूटकेस में शव होने की सूचना मिली। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुँची, वहाँ उन्हें काले रंग के ट्रॉली बैग में एक लाश मिली। चेहरा सड़ने के कारण उसे पहचान पाना मुश्किल था। पुलिस के पास कोई सुराग नहीं था सिवाय एक टैटू के।

मृतक के शरीर के दाहिने हाथ पर नवीन नाम का टैटू गुदा हुआ था। इससे पुलिस को गुत्थी को सुलझाने में मदद मिली। इसके अलावा उसने दूसरे हाथ में एक कड़ा भी पहना हुआ था। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू की।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक की शिनाख्त नवीन (निवासी देवली गाँव, उम्र 24 वर्ष) के तौर पर हुई है। 12 अगस्त को पुलिस स्टेशन नेब सराय में इसके लापता होने की सूचना मिली थी। जाँच में पता चला कि नवीन के लापता होने की रिपोर्ट उसकी पत्नी मुस्कान ने दर्ज कराई गई थी। उसने बताया था कि उसका पति 8 अगस्त से लापता है। लेकिन आश्चर्य यह कि नवीन की पत्नी कुछ दिन पहले ही किराए के कमरे को खाली कर कहीं और चली गई थी।

पुलिस जब उस पते पर पहुँची तो मकान मालिक प्रदीप ने बताया कि मुस्कान अपनी माँ और 2 साल की बेटी के साथ किराए पर रहती थी, लेकिन 11 अगस्त को वह अचानक से कमरा खाली करके चली गई। उससे मिलने के लिए अक्सर एक लड़का भी आता था, जो चश्मा लगाता था। पुलिस ने मुस्कान के मोबाइल नंबर की मदद से उसे तलाश लिया। उसका नाम जमाल था।

इस केस में सबसे पहले पुलिस ने मुस्कान को गिरफ्तार किया। मुस्कान ने बताया 7 अगस्त की रात में वो जमाल के साथ थी। तभी अचानक से नवीन आ गया था। जमाल को अपनी बीवी के साथ देख वो गुस्से में मारपीट करने लगा। इसके बाद जमाल और उसके दोस्तों ने नवीन पर हमला कर उसे मार डाला।

नवीन की हत्या के बाद जमाल ने शव को वॉशरूम में धोया और कमरे से खून साफ किया। सुबह जमाल ने अपने दोस्त राजपाल को शव फेंकने के लिए बुलाया। नवीन, जमाल और उसके साथियों के खून से सने कपड़े दिल्ली के नाले में फेंक दिए। फिर जमाल ही अपने घर से एक ट्रॉली बैग लेकर आया था। उसने शव बैग में पैक कर सुखदेव विहार के नाले में ऑटो से फेंका।

मुस्कान से मिली जानकारी के के बाद पुलिस ने एक एक कर सभी आरोपितों को पकड़ लिया।

महिला नेताओं को बताया ‘रखैल’: यति नरसिंहानंद के वायरल वीडियो पर बवाल, NCW से कार्रवाई की माँग

सोशल मीडिया में यति नरसिंहानंद सरस्वती के एक वीडियो को लेकर उनका विरोध हो रहा है, जिसमें वो महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक बातें कहते हुए सुने जा सकते हैं। वो गाजियाबाद में स्थित डासना शिव-शक्ति मंदिर के महंत हैं। इस वीडियो के वायरल होने के बाद भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने ‘राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW)’ व इस संस्था की अध्यक्ष रेखा शर्मा से उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। हालाँकि, ये वीडियो कब का है ये साफ़ नहीं है।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में महंत यति नरसिंहाननद सरस्वती कहते हैं, “अब सरकारी ठेकों का रेट 10% हो गया है। जितनी भी भाजपा की महिला नेताएँ आपको दिखाई दे रही हैं, वो एक नेता के पास गईं और दूसरे के पास नहीं गईं तो दूसरा उनका काम नहीं करेगा। तीसरे से काम है तो तीसरे के पास जाना है। ये है राजनीति। पूरा मजा आ रहा है। इतनी महिलाएँ राजनीति में घूम रही हैं, पूरा मजा आ रहा है।”

वीडियो में यति नरसिंहानंद सरस्वती ये भी कहते हैं कि वो मातृशक्ति को प्रणाम करते हैं और सरकार चलाने वाले लोग सबके बाप हैं, इसीलिए वो पितृशक्ति को भी प्रणाम करते हैं। इसके बाद वो भारत माता को भी प्रणाम करने की बात कहते हैं। इससे पहले वो वीडियो में वो कहते हैं, “किसी एक नेता की रखैल कोई औरत दिखाई देगी। जितनी औरतें राजनीति में दिखाई देती थी, वो या तो किसी न किसी नेता की रखैल थी, या फिर किसी राजनेता की बेटी या बड़े परिवार से थी।”

वीडियो में वो आगे कहते हैं, “उसके बाद आई चोर और डकैतों की सरकार। समाजवादी पार्टी की सरकार। उस समय औरतें किसी एक की होती थीं, भले ही उस एक के पास कितनी भी औरतें हों। लेकिन जो एक की है, वो एक की है। वो डकैत थे तो सरकारी ठेकों का रेट 1.5% हो गया था। फिर मायावती बहनजी की सरकार आई। वहाँ किसी औरत को कोई नेता टिकट दिलाने की सिफारिश नहीं कर सकता था।”

नरसिंहानंद आगे कहते हुए सुने जा सकते हैं, “अगर बसपा सरकार में किसी नेता ने किसी महिला को टिकट दिलाने का वादा कर दिया, बाद में पता चला कि बहनजी ने उसका भी टिकट काट दिया। उसके बाद आई बेहद चरित्रवान और ईमानदार लोगों की सरकार।” इसी के बाद उन्होंने भाजपा की महिला नेताओं पर टिप्पणी की। लेखिका शेफाली वैद्य ने नरसिंहानंद के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनका समर्थन करना उनकी भूल थी।

दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि यति नरसिंहानंद सरस्वती की महिलाओं के प्रति सोच किसी भगवाधारी की हो ही नहीं सकती। उन्होंने नरसिंहानंद को ‘जिहादी सोच से बीमार कोई कुंठित आदमी’ बताते हुए NCW व उत्तर प्रदेश पुलिस से उनकी गिरफ़्तारी की माँग की। उन्होंने कहा कि ये व्यक्ति माँ जगदम्बा के मंदिर में बैठने योग्य नहीं है। कई अन्य महिलाओं ने भी उनके बयान की आलोचना की।

यति नरसिंहानंद सरस्वती तब चर्चा में आए थे, जब डासना के मंदिर में चोरी करने गए आसिफ नाम के लड़के की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ था। मुस्लिमों के खिलाफ बयान देने का आरोप लगाते हुए देश भर में कट्टरपंथियों ने उनका विरोध किया था। 10 अगस्त, 2021 को डासना के मंदिर मेंदो साधुओं पर चाकुओं से हमले की घटना सामने आई थी। नरसिंहानंद इससे पहले भी अपने कई बयानों से विवादों में रहे हैं।

सीएम खट्टर के आगमन का विरोध कर रहे ‘किसानों’ ने रोड जाम कर पुलिस पर किया ‘जानलेवा हमला’, लाठी चार्ज: देखें वीडियो

नए कृषि कानूनों को लेकर करीब एक साल से तथाकथित किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हरियाणा में शनिवार को (28 अगस्त) कृषि कानूनों के साथ भाजपा नेताओं के कार्यक्रमों का विरोध कर रहे किसानों ने हर जिले की तरह भिवानी में भी दो जगह रोड को जाम कर दिया। यही नहीं उन्होंने पुलिस पर जान लेवा हमला भी किया।

बताया जा रहा है कि करनाल में आज निकाय एवं पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर भाजपा की प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में सीएम मनोहर लाल खट्टर समेत भाजपा के 6 सांसद, छह राज्य सभा सांसद, 12 विधायक, पूर्व विधायक और लोकसभा व विधानसभा चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों के अलावा संगठन के पदाधिकारी पहुँचे।

वहीं, सीएम के आगमन का विरोध कर रहे किसानों ने बस्तारा टोल प्लाजा पर जाम लगा दिया और पुलिस को पीटने लगे। इसके बाद पुलिस ने किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया। किसानों के अन्य साथियों को जैसे ही लाठीचार्ज की सूचना मिली उन्होंने पूरे प्रदेश में रोड और टोल जाम कर दिए। कालका शिमला हाईवे स्थित चंडीमंदिर टोल प्लाजा पर आज दोपहर करीब सवा तीन बजे किसानों ने जाम लगा दिया। इससे वहाँ के स्थानीय लोगों का जीवन प्रभावित हुआ।

बीजेपी कार्यकर्ता जवाहर यादव ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है। उन्होंने लिखा, ”कस्सी से पुलिस के जवानों पर जानलेवा हमला करता, मासूम और लूटापिटा किसान।”

इससे पहले भी यादव ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने लिखा था, ”देखो किसान पहले पुलिस को पीट रहा है या पहले पुलिस को किसान।”

हरियाणा के एडीजीपी नवदीप सिंह विर्क ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि करनाल में बस्तारा टोल प्लाजा के पास आज दोपहर 12 बजे कुछ किसान प्रदर्शनकारियों ने जबरदस्ती राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर करनाल शहर की तरफ जाने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें जाने से रोका तो कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बल पर पथराव किया।

उन्होंने बताया कि उसके बाद नियमानुसार पुलिस ने हलका बल प्रयोग किया और उन्हें वहाँ से हटाया। इसमें 4 किसान और 10 पुलिसकर्मियों को चोट आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसानों ने भिवानी में कितलान टोल पर भिवानी-दादरी हाइवे और प्रेमनगर गाँव में भिवानी-हिसार हाइवे जाम कर रोष जताया। इससे स्थानीय लोगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

करनाल एसडीएम आयुष सिन्हा ने वायरल वीडियो पर कहा कि पुलिसकर्मियों का विरोध करने वाले किसानों ने उन पर हमला किया। जगह-जगह पर उन्होंने पथराव करना शुरू कर दिया। इस दौरान पुलिस बल का प्रयोग करना पड़ा।

पंजाब की वीर भूमि और जलियाँवाला बाग की पवित्र मिट्टी को नमन: PM मोदी ने किया नए परिसर का उद्घाटन, कही ये बात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शनिवार (28 अगस्त) को जलियाँवाला बाग के पुनर्निर्मित परिसर का उद्घाटन किया। पंजाब के अमृतसर में जलियाँवाला बाग के नए परिसर का उद्घाटन करने के बाद पीएम मोदी ने वहाँ पर मौजूद सभी लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ”पंजाब की वीर भूमि और जलियाँवाला बाग की पवित्र मिट्टी को मेरा नमन। माँ भारती की उन संतानों को भी नमन, जिनके भीतर जलती आजादी की लौ को बुझाने के लिए अमानवीयता की सारी हदें पार कर दी गई।”

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पंजाब में शायद ही कोई ऐसा गाँव होगा, जहाँ वीरता और वीरता की गाथा का अभाव हो। कुटिल निगाहों से भारत माता को देखने वालों की राह में पंजाब के बेटे-बेटियाँ चट्टान की तरह खड़े हैं।

पीएम ने कहा कि जलियाँवाला बाग वह स्थान है, जहाँ सरदार उधम सिंह, सरदार भगत सिंह सहित हजारों बलिदानियों ने आजादी की लड़ाई लड़ने वालों को हौसला दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में विरासत व विकास को साथ लेकर चलना होगा। देश के लिए अपने अतीत की ऐसी विभीषिकाओं को नजरअंदाज करना गलत होगा। ऐसे में भारत ने 14 अगस्त को हर वर्ष ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि जलियाँवाला बाग की तरह हमारे स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े अन्य स्मारकों के सौंदर्यीकरण का कार्य भी हो रहा है। चंद्रशेखर आजाद को समर्पित भारत की पहली इंटरेक्टिव गैलरी का निर्माण यूपी के इलाहाबाद में किया जा रहा है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने आदिवासी समाज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”आज़ादी के महायज्ञ में हमारे आदिवासी समाज का बहुत बड़ा योगदान है। इतिहास की किताबों में इसको भी उतना स्थान नहीं मिला जितना मिलना चाहिए था।”

13 अप्रैल 1919 के जलियाँवाला बाग नरसंहार को भला कौन भूल सकता है? 100 साल बाद भी कोई व्यक्ति शायद ही ऐसा हो जिसे ना मालूम हो कि उस दिन जनरल डायर के इशारे पर 1000 से ज्यादा बेगुनाह लोग गोलियों से भून दिए गए। 2000 से अधिक घायल हुए। इस खूनी दिन जैसा ब्रिटिशों का बर्बर रूप शायद ही कभी दिखा हो।

उस दिन जो कुछ भी हुआ उसने सबको झकझोर दिया। घरों से आती सिसकियों की आवाजें और परिजनों के सूखे आँसुओं ने जैसे कइयों के मन में बदले की आग जला दी थी। लेकिन उधम सिंह एक ऐसे नौजवान थे। जिन्होंने इस घटना के बाद अपने जीवन का मकसद ही जनरल डायर की मौत को बना लिया था। उन्होंने अपने इस मकसद को पूरा करने के लिए पूरे 21 वर्षों तक इंतजार किया।

12+ हिंदू लड़कियों का रेप, धर्मांतरण, ब्लैकमेल कर ₹25 लाख से अधिक की लूट: सैय्यद निजाम गिरोह का यूपी पुलिस ने किया भंडाफोड़

उत्तर प्रदेश पुलिस ने बदायूँ जिले से एक ग्रूमिंग जिहाद गिरोह के मास्टरमाइंड सैय्यद निजाम को गिरफ्तार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने बरेली जिले के जगतपुर निवासी सैय्यद निजाम को पकड़ा है, जो खुद को तांत्रिक बताकर हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण करवाता था।

सैय्यद निजाम पर आरोप है कि उसने इस्लाम मजहब कबूल करवाने के लिए हिंदू लड़कियों को अपने जाल में फँसाया। वह जादू-टोना का इस्तेमाल करके एक चुटकी में उनकी समस्याओं का समाधान करने का दावा ​करता था। बाद में वह उन युवतियों को अपने घर पर बुलाता और उनके साथ दुष्कर्म करता। फिर वह जबरन उनका धर्म परिवर्तन करा देता।

जाँच के दौरान पता चला कि आरोपित ने एक दर्जन से अधिक लड़कियों को हिंदू से मुस्लिम बना दिया है। साथ ही निजाम ने यह भी कबूल किया है कि उसने पीड़ितों को झूठ बोलकर और धमकाकर उनसे कम से कम 25 लाख रुपए लूटे हैं। निजाम का अपना जुर्म कबूल करने का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वह कबूल करता दिख रहा है कि उसने युवतियों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया है।

गिरोह के मास्टरमाइंड सैय्यद निजाम ने यह भी कबूल किया है कि वो महिलाओं और लड़कियों के साथ शारीरिक संबंध बनाता था। ग्रूमिंग जिहाद गिरोह में निजाम के अलावा 12 और आरोपित शामिल हैं।

आरोपित ने बताया कि उसे प्रधान और अवधेश नाम के दो युवकों से 25 लाख रुपए मिले थे। अन्य आरोपितों की पहचान सलीम, सलीम मफुरीदी, सैयद रजब और आलोक के रूप में हुई है। आरोपितों को पैसे का लालच देकर हिंदू लड़कियों को इस्लाम मजहब में परिवर्तित करने के लिए फँसाने को कहा था।

इस गिरोह ने अब तक कम से कम 12 से 15 लड़कियों को इस्लाम में परिवर्तित कर दिया है। पुलिस ने निजाम को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही पुलिस ने गिरोह के अन्य सभी आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।

बम धमाकों के 2 दिन के बाद काबुल एयरपोर्ट पर फायरिंग से दहशत, बैंक हुए खाली; भूख-प्यास से तड़प रहे अफगान नागरिक

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद वहाँ हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं। काबुल एयरपोर्ट के एंट्री गेट के पास शनिवार (28 अगस्त) को फायरिंग के बाद एक बार फिर लोगों में अफरा-तफरी मच गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, काबुल एयरपोर्ट के पास डबल ब्लास्ट के 2 दिन बाद आज एयरपोर्ट के एंट्री गेट के पास फायरिंग की गई। कई राउंड की फायरिंग के बाद लोगों में व्यापक दहशत देखी जा सकती है। इस दौरान, यहाँ आँसू गैल के गोले भी छोड़े गए हैं।

अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद से स्थानीय लोग पैसे-पैसे को मोहताज हैं। काबुल सहित अफगानिस्तान के कई प्रमुख शहरों के बैंकों में नकदी लगभग खत्म हो चुकी है। लोगों को भूखा रहना पड़ रहा है। उन्हें गुजर-बसर करने के लिए लोगों से उधार पैसा माँगना पड़ रहा है। तालिबानी अफगानिस्तान के लोगों को देश छोड़कर बाहर भी नहीं जाने दे रहे हैं। बताया जा रहा है ​कि काबुल के कुछ एटीएम से अब भी एक निश्चित सीमा में पैसा निकल रहा है, लेकिन उसके लिए भी लोगों को लंबी-लंबी कतारें लगानी पड़ रही हैं।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान अब भुखमरी की चपेट में आ रहा है। अगर जल्द कुछ नहीं किया गया तो स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की मुताबिक, एयरपोर्ट के बाहर पानी की एक बोतल लेने के लिए 40 अमेरिकी डॉलर खर्च करने होंगे यानी करीब 3000 रुपए। वहीं, एक प्लेट चावल के लिए 100 डॉलर यानी करीब 7500 रुपए खर्च करने होंगे।

यह सभी जानते हैं कि अफगानिस्तान दुनिया के गरीब देशों में से एक है, जो विदेशों से मिलने वाले फंड पर चलता है। काबुल के अर्थशास्त्री मोहम्मद दाउद नियाजी ने हाल ही में कहा कि भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि तालिबान देश को कैसे चलाएगा? वर्ल्ड बैंक ने तालिबान की वापसी के बाद अफगानिस्तान में करीब 30 फीसद प्रोजेक्ट की फंडिंग पर रोक लगा दी है।

अफगान अर्थव्यवस्था की स्थिति के जानकार एक शख्स ने सीएनएन को बताया, “तालिबान के पास ताश के पत्तों का ढेर है, जो गिरने वाला है। जैसे ही आप बैंक खोलेंगे आपको पता चल जाएगा कि सिस्टम कितना नाजुक है।” 

वहीं, अफगान-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की तरफ से 23 अगस्त को एक मेमो भेजा गया था। यह मेमो एक बैंकिंग और फाइनेंस वर्किंग ग्रुप ने तैयार किया था, जिसमें प्रमुख अफगान वाणिज्यिक बैंक, ग्राहक और निवेशक शामिल हैं। इसमें लिखा है, “अफगानिस्तान और उसका बैंकिंग सिस्टम लुढ़कने की कगार पर है। बैंकिंग क्षेत्र धराशायी होने के करीब है।”

‘BSP सांसद अतुल राय को मिले मृत्‍युदंड’: SC के सामने आत्मदाह करने वाली युवती की बेबस माँ ने की माँग

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सांसद अतुल राय पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली युवती की माँ ने सांसद को मृत्युदंड दिए जाने की माँग की है। बता दें कि अतुल राय पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली युवती ने अपने मित्र के साथ 16 अगस्त को देश की राजधानी में उच्चतम न्यायालय के सामने आत्मदाह कर लिया था। गंभीर रूप से झुलसी युवती की 24 अगस्त को और उसके साथी की उससे पहले 21 अगस्त को मौत हो गई थी। आत्‍मदाह करने से पहले दोनों ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा लोगों के साथ साझा की थी।

युवती की माँ ने बलिया जिले में अपने गाँव में शुक्रवार (अगस्त 27, 2021) शाम संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि वह चाहती हैं कि उनकी बेटी की मौत के जिम्मेदार सांसद अतुल राय को फाँसी की सजा मिले। 

उन्होंने कहा, ”मेरी बेटी बेहद प्रतिभावान थी और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही थी। वह जरूर कुछ न कुछ बनती लेकिन उसने तड़प-तड़प कर जान दी है। मैं चाहती हूँ कि मेरी बेटी की मौत के जिम्मेदार सांसद अतुल राय को भी फाँसी की सजा हो।”

उन्होंने कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है, फिर भी परिवार अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई पूरी शिद्दत से लड़ेगा। युवती की माँ ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि इंसाफ की लड़ाई में परिवार को प्रदेश सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा।

मई 2019 में दर्ज कराया गया था मुकदमा

गौरतलब है कि बलिया की रहने वाली पीड़िता वाराणसी के एक कॉलेज की छात्रा थी। उसने लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान वाराणसी के लंका थाने में बसपा सांसद अतुल राय के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद राय अंडरग्राउंड हो गए थे। चुनाव में जीत हासिल करने के बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया था। इसके बाद से वह नैनी जेल में बंद हैं।

इस मामले में पीड़िता ने फेसबुक लाइव में वाराणसी के तत्कालीन एसएसपी रहे अमित पाठक, तत्कालीन सीओ भेलुपुर अमरेश सिंह बघेल, दरोगा संजय राय समेत अन्य पर सांसद को बचाने और उसे परेशान करने का आरोप लगाया था।

मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को लखनऊ की हजरतगंज पुलिस ने शुक्रवार (27 अगस्त 2021) को गिरफ्तार कर लिया। उन पर सुप्रीम कोर्ट के बाहर आत्मदाह करने वाली रेप पीड़िता को उकसाने तथा इस मामले में आरोपित बसपा सांसद अतुल राय का साथ देने का आरोप है। एसआईटी जाँच के आधार पर उनके खिलाफ यह कार्रवाई हुई ।

ठाकुर की गिरफ्तारी का एक वीडियो भी वायरल हुआ। इसमें दिख रहा पुलिसकर्मी उन्हें गाड़ी में बिठाने की कोशिश कर रहे हैं पर वे इसके लिए तैयार नहीं हो रहे। वीडियो में वे एक अधिकारी को थप्पड़ मारते भी दिखे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में पूर्व आईपीएस के खिलाफ एएसआई दयाशंकर द्विवेदी की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया था। 

बंगाल हिंसा में CBI ने दर्ज किया 10 नए FIR, अभिषेक और उनकी पत्नी को ED का समन: भड़कीं ममता बनर्जी, साधा BJP पर निशाना

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार (28 अगस्त) को कालीघाट में टीएमसी छात्र परिषद स्थापना दिवस पर छात्रों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सीबीआई और बीजेपी पर कई गंभीर आरोप लगाए। वहीं, कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी को समन भेजा है।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, ममता ने कहा कि चुनाव के बाद हुई हिंसा में भाजपा के 5 कार्यकर्ताओं और टीएमसी के 16 कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी। हमें सीबीआई से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वे बीजेपी नेताओं को अपने साथ गाँव में क्यों ले जा रहे हैं? NHRC समेत अन्य सभी आयोग राजनीतिक हो गए हैं, उनके सभी सदस्य भाजपा से हैं।

ममता बनर्जी ने आगे कहा कि बीजेपी छात्रों, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और सोशल मीडिया की आवाज दबा रही है। मैं चाहती हूँ कि पश्चिम बंगाल के छात्र नेतृत्व करें। भाजपा सरकार अमानवीय है। यह सरकार लोगों से प्यार नहीं करती और देश को बेच रही है।

टीएमसी छात्र परिषद स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, ”हम जय हिंद, वंदे मातरम और खेला होबे क्यों कहते हैं? हमारा मानना है कि छात्र वही हैं जो असहाय लोगों के साथ आगे बढ़ना शुरू करते हैं। वे हमारा भविष्य हैं। मैं चाहती हूँ कि वे राजनीति के नए समीकरण बनें।”

उन्होंने कहा कि लोगों के लिए काम करना हमारी प्राथमिकता है। जब दिल्ली की भाजपा सरकार राजनीति में हमारा मुकाबला नहीं कर सकती, तो वे एजेंसियों का इस्तेमाल करती है। कुछ लोग हमें छोड़कर चले गए थे, लेकिन अब वे लौट आए हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनका घर यहाँ (टीएमसी) है।

समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक, केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हिंसा के सिलसिले में नादिया से दो लोगों को हिरासत लिया है। साथ ही 10 और प्राथमिकी दर्ज की हैं। यानी चुनाव बाद हिंसा मामले में सीबीआई ने अब तक कुल 21 FIR दर्ज की हैं।

वहीं, कोयला तस्करी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी को समन भेजा है। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को जाँच में शामिल होने के लिए 3 सितंबर को बुलाया गया है, जबकि उनकी पत्नी रूजीरा को ईडी ने 1 सितंबर को हाजिर होने के लिए कहा है।

1947 ही नहीं, पहले भी कई बार हुआ था भारत का विभाजन: 9 देश, जो कभी हुआ करते थे ‘अखंड भारत’ का हिस्सा

जब बात विभाजन की होती है तो हम हमेशा 1947 याद करते हैं। भारत-पाकिस्तान विभाजन की विभीषिका का दर्द तो आज भी करोड़ों लोगों के मन में बसा हुआ है। 1947 में जिस तरह से हिन्दुओं व सिखों का कत्लेआम हुआ और उन्हें अपने-अपने घर व संपत्तियाँ छोड़ कर भागना पड़ा, अब हर 14 अगस्त को भारत इस घटना के बलिदानियों को याद करेगा। लेकिन, क्या आपको पता है कि पाकिस्तान के अलावा कई अन्य देश भी हैं जो कभी भारत का हिस्सा हुआ करते थे?

नेपाल

भले ही आज नेपाल के नेता अपने लोगों को खुश करने के लिए कहते हैं कि उनका देश कभी भी भारत का हिस्सा नहीं था, लेकिन लिच्छवि गणराज्य (400-750 CE) के अंतर्गत जो भी क्षेत्र आते थे, उनमें नेपाल भी शामिल था। उससे पहले वहाँ किरात वंश का शासन हुआ करता था। नेपाल में राजा जनक के महल के साथ-साथ वाल्मीकि आश्रम होना भी यह बताता है कि ये क्षेत्र कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था।

लिच्छिवि राजयों ने वैशाली को अपनी राजधानी बनाया था। अंग्रेजों का नेपाल के साथ 1816 में युद्ध भी हुआ था। नेपाली सैनिकों ने बहादुरी से लड़ाई की, लेकिन अंग्रेजों की जीत हुई। नेपाल ने खुद ही समर्पण करते हुए अपने कई क्षेत्र अंग्रेजों को दे दिए, जिसके बाद उनमें समझौता हुआ। इसके बाद अंग्रेजों ने बड़ी संख्या में नेपालियों को अपनी सेना में भर्ती किया। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में कई बार आग्रह के बावजूद नेपाल के नेताओं ने भारत की मदद नहीं की।

पाकिस्तान और बांग्लादेश

बांग्लादेश ही सबसे ताज़ा देश है, जो कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था। इंदिरा गाँधी के समय में भारत-पाकिस्तान में युद्ध हुआ, जिसके बाद बांग्लादेश को आज़ादी मिली। इससे पहले ये पूर्वी पाकिस्तान हुआ करता था। पाकिस्तान की फ़ौज ने यहाँ के विद्रोह को दबाने के लिए क्रूरता अपनाई। कई महिलाओं का बलात्कार किया गया और कइयों की हत्या की गई। अंत में पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया, जिसके बाद बांग्लादेश आज़ाद हुआ।

ठीक इसी तरह, 1947 में भारत की स्वतंत्रता से ठीक 1 दिन पहले पाकिस्तान को भी कथित आज़ादी मिली। आज का पाकिस्तान कभी भारत का एक बड़ा हिस्सा हुआ करता था, लेकिन इस्लामी शासकों ने लाहौर जैसे शहरों को अपना अड्डा बनाया था और यहाँ मुस्लिम जनसंख्या अच्छी-खासी बढ़ गई। मोहम्मद अली जिन्ना जैसों ने इसका फायदा उठाया और कॉन्ग्रेस ने भी देश के विभाजन के लिए हामी भर दी।

अफगानिस्तान

वो अंग्रेज ही थे, जिन्होंने ‘ब्रिटिश इंडिया’ और अफगानिस्तान के बीच डुरंड रेखा खींच दी थी। इस फैसले पर 12 नवंबर, 1893 को ब्रिटिश अधिकारी सर मोर्टिमर डुरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान ने हस्ताक्षर किए थे। इस क्षेत्र के आसपास पंजाबी और पश्तून समुदाय की अच्छी-खासी जनसंख्या थी। इस्लामी धर्मांतरण का सबसे ज्यादा प्रभाव अफगानिस्तान में हुआ था, लयोंकी अरब यहीं से भारत में घुसे थे।

अफगानिस्तान में मुस्लिम शासकों ने कंधार और काबुल जैसे शहरों का नामकरण कर के इन्हें अपना अड्डा बनाया। अगर हम महाभारत काल तक भी पीछे जाएँ तो उसमें अफगानिस्तान में स्थित गांधार साम्राज्य का जिक्र मिलता है। इसीलिए, शकुनि को ‘गांधार नरेश’ व धृतराष्ट्र की पत्नी को गांधारी कहा जाता था। 1750 तक अफगानिस्तान को भारत का हिस्सा ही माना जाता था। अफगानिस्तान पर कभी कुषाण वंश का शासन हुआ करता था और कनिष्क के काल में बौद्ध धर्म वहाँ फैला।

श्रीलंका

भले ही भारत और श्रीलंका को समुद्र अलग कर देता हो, लेकिन इसके बावजूद भी ये कभी भारतवर्ष का ही हिस्सा हुआ करता था। श्रीलंका का नाम पहले सीलोन या फिर सिंहलद्वीप हुआ करता था। वहीं सम्राट अशोक के समय इस क्षेत्र का नाम ताम्रपर्णी हुआ करता था। सम्राट अशोक ने अपने बेटे महेंद्र और बेटी संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए वहाँ भेजा था। इस तरह ‘अखंड भारत’ की परिकल्पना में श्रीलंका भी शामिल है।

सन् 933 में राजराज चोल के समय में श्रीलंका चोल साम्राज्य का हिस्सा हुआ करता था। उनके बेटे राजेंद्र चोल के कार्यकाल में भारत की नौसेना और मजबूत हुई, जिसके बाद श्रीलंका के कई हिस्से इस साम्राज्य का हिस्सा बन गए। उस समय सिंहला लोग पंड्या साम्राज्य के करीबी हुआ करता थे, इसीलिए उनसे चोल साम्राज्य को कई युद्ध करने पड़े। रामायण काल में श्रीलंका को लंका कहा गया है, ये सभी को पता है।

म्यांमार

म्यांमार भी कभी भारत का हिस्सा हुआ करता था। इसका नाम पहले बर्मा था। भारत के स्वतंत्र होने से मात्र 10 वर्ष पहले, 1937 में अंग्रेजों ने इसे भारत से काट कर अलग कर दिया। 1921 में बर्मा की राजनीतिक स्थिति के अध्ययन के लिए साइमन कमीशन को वहाँ भेजा गया था। 1930 में साइमन कमीशन ने इसे भारत से काट कर अलग करने की सिफारिश की। उस समय बर्मा दो गुटों में बँट गया था, जिसमें एक हिस्सा भारत के साथ रहना चाहता था।

बर्मा में कुछ कट्टरवादियों ने एक अलगाववादी समूह बना लिया था, जो भारतीयों के खिलाफ वहाँ अभियान चला रहा था। भारत के लोगों के प्रति घृणा फैलाई जा रही थी। अंग्रेजों का कहना था कि बर्मा एक अलग देश रहा है और ‘अक्समात रूप से प्रशासनिक सुविधा के लिए’ इसे भारत के साथ जोड़ दिया गया था। बर्मा में भारतीयों को प्रवासी बताया जाने लगा और उनके खिलाफ माहौल बनाया गया।

भूटान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक वीडियो वायरल होने के बाद उनकी खूब खिल्ली उड़ाई गई थी, जिसमें उन्होंने भूटान को भारत का हिस्सा बता दिया था। प्राचीन काल में पूरे के पूरे हिमालय को भारत का ही हिस्सा माना जाता था। लेकिन, अगर मौर्य काल में उन्होंने ये बात कही होती तो उन पर कोई नहीं हँसता, क्योंकि तब भूटान भारत का ही हिस्सा हुआ करता था। यहाँ भी साम्राज्य अशोक के समय बौद्ध धर्म फैला।

आज भी भारत व भूटान के रिश्ते काफी मधुर हैं और भारत अपने इस छोटे से पड़ोसी देश के रक्षक के रूप में काम करता है। चीन के साथ दोकलाम विवाद में भारत मजबूती से भूटान के साथ खड़ा रहा था। असम में जब कामरूप साम्राज्य फला-फूला तो भूटान भी इसका एक हिस्सा हुआ करता था। अहोम साम्राज्य का ये एक भाग था। भूटान अर्ध गणराज्य है, जहाँ अब भी देश का सुप्रीम लीडर राजा ही होता है।

ग्रेटर इंडिया

अगर हम ‘अखंड भारत’ की परिकल्पना करते हैं तो मलेशिया और थाईलैंड भी इसमें आएँगे ही आएँगे, क्योंकि इन दोनों जगह कभी भारत से प्रभावित साम्राज्यों का राज हुआ करता था। श्रीविजय, केदारम और मजापाहित जैसे साम्राज्य एक तरह से भारतीय ही थे। चोल साम्राज्य के बारे में भी कहा जाता है कि उसने मलेशिया में विजय हासिल की थी। बाद में पुर्तगालियों ने यहाँ कब्ज़ा जमाया, जैसा उन्होंने गोवा और दमन एवं दीव में किया था।

इंडोनेशिया में भी भारत के प्रभावित ऐसे ही साम्राज्य थे। तभी जावा में आज भी आपको इसकी झलक मिल जाती है। जैसे, उदाहरण के लिए कलिंग्गा साम्राज्य को ले लीजिए, जो बौद्ध धर्म से प्रभावित था। इसी तरह कादिरी साम्राज्य ने भी इंडोनेशिया पर राज किया। जावा में सुंडा साम्राज्य भी था, जिसकी संस्कृति भारतीय ही थी। इस तरह आज जो भारत हम देश रहे हैं, वो अखंड भारत का एक तिहाई भी नहीं है। हमारा अस्तित्व व हमारी पहचान इससे काफी बड़ी है।