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क्या इजरायल के PM के साथ बैठक में जो बायडेन सो रहे थे? लोगों ने जमकर की खिंचाई, पढ़िए मजेदार प्रतिक्रिया

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडेन का इजरायल के प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के साथ एक बैठक के दौरान कथित तौर पर ‘सोने’ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। बता दें कि दोनों देश के नेताओं के बीच शुक्रवार (27 अगस्त, 2021) को व्हाइट हाउस में बैठक हुई थी।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद रिपब्लिकन नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने अटकलें लगाना शुरू कर दिया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन बैठक के दौरान वाकई में सो रहे थे। EHA न्यूज ने ट्वीट किया, “अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन नफ्ताली बेनेट के साथ आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सो गए। जब बायडेन सो रहे थे तब भी बेनेट ने बात करना जारी रखा।”

राजनीतिक रणनीतिकार चक कैलेस्टो ने जोर दिया, “जो बायडेन इजरायल के नए प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के साथ उच्च-स्तरीय बैठक के दौरान सोते हुए पकड़े गए।”

एक ट्विटर यूजर, जेडी शार्प ने संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे बड़े सहयोगी यानी इज़राइल के साथ मुलाकात के दौरान कथित तौर पर सोने के लिए जो बायडेन की आलोचना की। उसने लिखा, “25वाँ संशोधन कमला हैरिस द्वारा शुरू किया जाना चाहिए और कॉन्ग्रेस द्वारा तुरंत पुष्टि की जानी चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि 25 वाँ संशोधन उपराष्ट्रपति को उनकी मृत्यु, इस्तीफे या पद से हटाने के मामले में राष्ट्रपति की भूमिका निभाने की अनुमति देता है। इस तरह के निर्णय को सीनेट और प्रतिनिधि सभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त होता है।

एरिज़ोना राज्य के रिपब्लिकन सीनेटर वेंडी रोजर्स ने अमेरिकी राष्ट्रपति का मज़ाक उड़ाया और टिप्पणी की, “जब हम रोए, जो बायडेन सो गए।”

रिपब्लिकन कार्यकर्ता जेटी लुईस ने आश्चर्य जताया कि क्या जो बायडेन इजरायल के प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान सो गए थे।

हालाँकि, सीएनएन के रिपोर्टर डेनियल डेल के मुताबिक, जो बायडेन का इजरायली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के साथ मुलाकात के दौरान सोने वाला वीडियो ‘बकवास’ है। उन्होंने उस वीडियो का लिंक साझा किया था जिसमें देखा जा सकता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बैठक में सक्रिय रूप से भाग ले रहे थे।

इसके मुताबिक जब बेनेट ने बात करना शुरू किया तो बायडेन उनकी बात सुन रहे थे, उन्होंने बस अपना सिर नीचे झुका रखा था। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी इस्राइली प्रधानमंत्री को जवाब देने में तत्परता दिखाई।

नेटिजन्स ने जो बायडेन की खिंचाई की


गुरुवार (26 अगस्त) को, संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति जो बायडेन काबुल में हामिद करजई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक घातक आतंकी हमले में 13 अमेरिकी मरीन की मौत के बारे में पूछे जाने पर निराश दिखाई दिए। बिना कुछ बोले, फॉक्स न्यूज व्हाइट हाउस के संवाददाता पीटर डूसी ने बायडेन से पूछा कि क्या वह अफगानिस्तान संकट के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं।

दैनिक भास्कर ने अफगानिस्तान छोड़ने वाले हिंदुओं-सिखों के व्यापार, संपत्ति पर कब्जा करने वाले मुस्लिमों को बताया ‘मसीहा’

भारत में मेनस्ट्रीम मीडिया ने हमेशा से इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए नरम रुख अख्तियार किया है। दैनिक भास्कर भी उन्ही में से ए​क है। रविवार (29 अगस्त) को इसने चौंकाने वाला दावा करते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में कहा गया है कि अफगानिस्तान के जलालाबाद में अब कोई हिंदू-सिख नहीं है। वे अपना घर, कारोबार छोड़कर वहाँ से चले गए हैं, लेकिन उनके और मुस्लिम समुदाय के बीच संबंध इतने मजबूत हैं कि उनके लौटने तक वे उनका कारोबार संभाल रहे हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट

हम यहाँ अफगानिस्तान और तालिबान के मामले पर गंभीर हैं। वहीं, भास्कर चाहता है कि हम उसकी इस रिपोर्ट पर विश्वास करें। उन्होंने एक मुस्लिम व्यक्ति को यह कहते हुए भी कोट किया है, ”मैं क्लीनिक के मालिक को रोज यहाँ के हालात की अपडेट देता हूँ। हमें यकीन है कि हालात सुधरेंगे तो वे लौट आएँगे। तब तक हम उनका कारोबार बंद नहीं होने देंगे।”

इस रिपोर्ट के बाद मानो भारतीय हिंदी अखबार इस कोरी कल्पना में पूरी तरह से डूब गया हो। भास्कर के इस रवैये को लेकर यहाँ मीम का उल्लेख करना आवश्यक है।

मीम एक शोटाइम डॉक्यूमेंट्री का स्क्रीनशॉट है

बेशक, मीम एक शोटाइम डॉक्यूमेंट्री का स्क्रीनशॉट है, जहाँ पत्रकार तालिबान से पूछता है कि क्या उनके शासन में अफगानिस्तान में लोकतंत्र होगा और महिलाओं को वोट देने की अनुमति होगी। लेकिन यह बात दैनिक भास्कर की रिपोर्ट पर काफी हद तक लागू होती है।

यह सभी जानते हैं कि अफगानिस्तान में अफगान हिंदुओं और सिखों की संपत्ति के साथ क्या हो रहा है। स्थानीय निवासियों द्वारा उनकी ‘देखभाल’ के नाम पर उन पर कब्जा कर लिया जा रहा है। जो हमें दिखाया जा रहा है वह वास्तविकता के उलट है। मीडिया अफगान हिंदुओं-सिखों पर किए गए जुल्मों पर मरहम लगाने की बजाय उस पर नमक छिड़कने का काम कर रहा है।

क्या किसी को सच में विश्वास है कि एक बार फिर से अफगानिस्तान में जीवन सामान्य हो सकेगा? क्या अफगान हिंदू और सिख अफगानिस्तान लौट पाएँगे? और अफगानिस्तान के संदर्भ में ‘calm down‘ का क्या अर्थ है? देश में पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से यहाँ पर गृहयुद्ध चल रहा है। क्या भारत आया कोई सिख या हिंदू कभी वापस जा पाया है? वे भी क्यों चाहेंगे? दीवार पर स्पष्ट लिखा हुआ है और फिर भी, मीडिया हमें मूर्ख बनाने पर तुला है।

यहाँ जो हो रहा है वह कोई नई बात भी नहीं है। जब-जब इस्लामी आक्रमण हुए हैं, तब-तब हिंदुओं को पलायन करने के लिए मजबूर किया गया है। उनकी संपत्तियों पर उनके पड़ोसियों और उन लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिनके बारे में वे सोचते थे कि उनके साथ अच्छे संबंध हैं। कश्मीर में हुआ, बांग्लादेश में हुआ और अब अफगानिस्तान में ये सब हो रहा है।

मीडिया निश्चित रूप से यह सब जानता है, इसके बावजूद उसका इस तरह से दावे करना विश्वासघात है। वे इस तरह के हास्यास्पद लेखन से बच सकते हैं। ध्यान दें जब भी इस्लामिक चरमपंथी दुनिया में कहीं भी हिंसा और नफरत फैलाते हैं, तब ही मीडिया किसी न किसी तरह से उन्हें दुनिया वालों की नफरत से बचाने के लिए हास्यास्पद बकवास करने पर अमादा रहता है।

यह अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के दौरान ज्यादा देखने को मिला है। भारतीय मीडिया इसे अपने नजरिये से लोगों को दिखाने का प्रयास कर रही है। उदाहरण के लिए, NDTV ने तालिबान के प्रवक्ता को अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मंच प्रदान किया। उसी समय, भारतीय लिबरल ने एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित करने के लिए जिहादी संगठन की सराहना की।

इस प्रकार, यह बिल्कुल भी आश्चर्य की बात नहीं है कि तालिबान पर प्रोपेगेंडा को फैलाने वाला उद्योग यह भी मानता है कि अफगानिस्तान में कैसे स्थानीय मुसलमान अफगान सिखों और हिंदुओं की संपत्तियों की देखभाल कर रहे हैं।

3AC में साइड में 3 बर्थ, 72 की जगह 83 सीट से खूब पैसे कमाएगी मोदी सरकार? – Fact Check

भारतीय रेलवे यात्रियों की सुविधा को देखते हुए अपने यात्री ट्रेनों के लिए नए कैटेगरी के कोचों की शुरुआत करने जा रहा है। शनिवार (28 अगस्त 2021) को रेलवे ने जानकारी दी थी कि इकोनॉमी 3AC कोचों की टिकट की कीमत अब नियमित 3AC कोचों की तुलना में 8% तक सस्ती होगी। इन नए कोचों में 83 बर्थ होंगे, जबकि नियमित थ्री टियर एसी कोचों में 72 बर्थ मौजूद हैं। नई सुविधा से रेलवे को किराए में कमी करने में मदद मिलेगी।

हालाँकि, रेलवे ने कोचों की संख्या कैसे बढ़ाई है, इस पर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। रविवार (29 अगस्त 2021) को पीटीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि नए कोच सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए साइड मिडिल बर्थ की वापसी होने वाली है। इसमें कहा गया है, “नियमित 3AC कोचों में दो साइड बर्थ होते हैं, जिन्हें नए कोचों में बढ़ाकर तीन कर दिया जाएगा।” इस रिपोर्ट को कई मीडिया हाउसों ने पब्लिश किया। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट ने भी यही दावा किया है।

इन रिपोर्ट के कारण पाठकों के बीच भ्रम पैदा हुआ। उन्हें लगा कि आखिरकार जिसे पहले भारी विरोध के कारण हटा दिया गया था, उसे रेलवे फिर से वापस क्यों ला रहा है? दरअसल, साइड मिडिल बर्थ की शुरुआत साल 2006 में हुई थी। उस दौरान लालू प्रसाद यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे।

ऐसी होती है 3 सीटों वाली साइड बर्थ

अतिरिक्त साइड बर्थ वाले डिब्बों को गरीब रथ ट्रेनों में जोड़ा गया था। इससे स्लीपर और 3एसी कोचों में बर्थ की संख्या 72 से बढ़कर 78 हो गई थी, जिससे राजस्व में वृद्धि हुई थी। हालाँकि, यह एक बेहद अलोकप्रिय कदम था, क्योंकि, इसने साइड बर्थ में यात्रा करना बहुत असुविधाजनक बना दिया था, खासकर साइड मिडिल और अपर बर्थ पर।

दरअसल, साइड वाली सीट में तीसरी बर्थ को समायोजित करने के लिए साइड अपर बर्थ को ऊपर ले जाया गया था। इसके कारण साइड बर्थ पर चढ़ना-बैठना बहुत मुश्किल हो गया था। इसके बाद यात्रियों के भारी विरोध के चलते मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों से साइड मिडिल बर्थ को हटा दिया गया। लेकिन उन्हें गरीब रथ ट्रेनों में रखा गया, क्योंकि गरीब रथ ट्रेनों का किराया काफी कम है।

इसलिए, भारतीय रेलवे द्वारा विरोध का कारण बनी साइड मिडिल बर्थ को वापस लाने की संभावना नहीं है। इस साल की शुरुआत में रेलवे ने नए विकसित 3AC इकोनॉमी कोच की तस्वीरें जारी की थीं। तस्वीरों से ये स्पष्ट होता है कि उसमें साइड में तीन बर्थ नहीं हैं।

नए डिज़ाइन किए गए कोचों में कई सुविधाएँ दी गई हैं। प्रत्येक बर्थ में अलग-अलग एसी वेंट, प्रत्येक बर्थ के लिए रीडिंग लाइट, ऊपरी बर्थ तक चढ़ने के लिए बेहतर सीढ़ी डिज़ाइन, बेहतर डिज़ाइन किए गए फोल्डेबल टेबल आदि।

रेलवे के नए 3AC वाले कोच

भले ही रेलवे ने डिब्बों में सीटों की संख्या बढ़ा दी है, लेकिन इसके लिए उसने साइड मिडिल बर्थ को नहीं जोड़ा है। रेलवे ने पहले बताया था कि नए डिब्बों में दरवाजों के पास लगे हाई वोल्टेज इलेक्ट्रिक स्विचगियर को हटा दिया गया है। इस उपकरण को कोचों के अंडरफ्रेम के नीचे ले जाया गया है। इसके अलावा, बेड व लिनन के भंडारण के लिए दरवाजों के पास भंडारण स्थान को भी डिब्बों से हटा दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोचों के डिजाइनरों ने डिब्बों के बीच जगह बनाने के लिए पतली मिश्रित सामग्री का भी उपयोग किया है। इन उपायों से एलएचबी कोचों में अतिरिक्त जगह बनाई गई है, जिससे भारतीय रेलवे को 11 और बर्थ जोड़ने में मदद मिली है। इसलिए यात्रियों की सुविधा से समझौता किए बिना बर्थ की संख्या बढ़ी है।

टोक्यो पैरालंपिक में भारत की चाँदी: भाविना पटेल ने पैरा टेबल टेनिस में तो निषाद ने हाई जम्प टी-47 में सिल्वर मेडल जीतकर रचा इतिहास

पैरालंपिक के फाइनल में जगह बनाने वाली देश की पहली खिलाड़ी भाविना पटेल ने टोक्यो पैरालंपिक की महिला सिंगल्स की टेबल टेनिस में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीत लिया है। इसी के साथ भाविना टेबल टेनिस में भारत के लिए पैरालंपिक में पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी भी बन गई हैं। टेबल टेनिस की मैच में भाविना चीन की यिंग झोउ को मात नहीं दे पाई और गोल्ड से चूक गईं। वह चीन की यिंग झोउ से 7-11, 5-11, 6-11 से हार गईं।

भाविना इससे पहले ग्रुप स्टेज में भी टोक्यो पैरालिंपिक में अपने पहले मैच में यिंग झोउ से हार गईं थी। झोउ एकमात्र ऐसी प्रतिद्वंद्वी रही है जिसे वह हरा नहीं सकी। गुजरात के मेहसाणा में उनका परिवार उनके लौटने पर भव्य स्वागत की प्लानिंग कर रहा है।

वहीं भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार ने हाई जंप टी-47 में रजत पदक जीता। शानदार प्रतिभा के धनी निषाद कुमार शानदार प्रदर्शन करते हुए टॉप 3 में पहुँचे थे। उनका मुकाबला अमेरिका के 2 एथलीट से था। 20 साल के निषाद 2009 से पैरा स्पोर्ट्स में हिस्सा ले रहे हैं। 8 साल की उम्र में उनका एक एक्सीडेंट हो गया, जिसमें उनका दाहिना हाथ कट गया।

कुमार हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के रहने वाले हैं और उन्होंने 10 साल की उम्र में पैरा स्पोर्ट्स को आगे बढ़ाने का फैसला किया। दुबई में विश्व चैंपियनशिप में, उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, जहाँ उन्होंने कांस्य जीता। COVID-19 के कारण, टोक्यो पैरालिंपिक के लिए उनकी तैयारी थोड़ी धीमी हो गई। हालाँकि, जैसे ही स्थिति में सुधार हुआ, उन्होंने फिर से प्रयास करना शुरू कर दिया। यह आज (29 अगस्त 2021) के लिए भारत का दूसरा रजत पदक है।

‘TTP तुम्हारी समस्या, हमारी नहीं, खुद ही सुलझाओ’: पाकिस्तान को तालिबान ने दिखाया ठेंगा, मुश्किल में इमरान खान

अफगानिस्तान में तालिबान ने कब्जा करने के बाद पाकिस्तान को धोखा दे दिया है। तहरीक-ए-तालिबान के मुद्दे पर अफगान तालिबान ने स्पष्ट कहा है कि टीटीपी खुद पाकिस्तान की समस्या है, उसकी नहीं। इसलिए वो खुद ही उससे (टीटीपी) निपटे। तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने स्पष्ट कर दिया है कि तालिबान पाकिस्तान की कठपुतली बनकर नहीं रहने वाला है।

जबीउल्लाह मुजाहिद ने जियो न्यूज को दिए साक्षात्कार में दो टूक कहा कि उसका तहरीक ए तालिबान से कोई लेना देना नहीं है। इस समस्या को पाकिस्तान, उसके उलेमा या धार्मिक नेता देखें। तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान टीटीपी से निपटने को लेकर क्या रणनीति अपनाता है उससे हमारा कोई मतलब नहीं है। इस बीच तालिबान प्रवक्ता ने कहा है कि तालिबान किसी भी तरह से अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल आतंकी घटनाओं के लिए नहीं होने देगा।

तालिबानी प्रवक्ता के मुताबिक, अगर अफगानिस्तान के तालिबान को टीटीपी अपना नेता मानता है तो उसे उसकी बात भी माननी होगी। इस बीच तालिबान ने अफगानिस्तान में सरकार बनाने की कवायद को लेकर भी स्पष्ट किया है कि जल्दी ही अफगानिस्तान में सरकार का गठन किया जाएगा। इसको लेकर सभी पहलुओं पर चर्चाएँ हो रही हैं।

उल्लेखनीय है कि तालिबान का ये बयान पाकिस्तान के मुँह पर करारे तमाचे के समान है जो ये तालिबान की जीत को अपनी जीत समझ रहा था। हाल ही में अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे को भारत के साथ जोड़ते हुए पाकिस्तान के बड़बोले गृह मंत्री शेख राशिद ने कहा था कि पूरी दुनिया देख रही है कि भारत शोक में है। भारत अफगानिस्तान से अपने नागरिकों को निकाल रहा है और यह उसकी हार को दिखाता है।

गौरतलब है कि इसी महीने तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद से सभी देश वहाँ से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकाल रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ चला रही है।

‘मेरा यशु यशु’ के वायरल मीम पर NCPCR का एक्शन: मुश्किल में पादरी बजिंदर सिंह, 7 दिन के अंदर रिपोर्ट का आदेश

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक मीम वायरल हुआ। इस मीम में एक वीडियो था, जो किसी ईसाई मिशनरी के कार्यक्रम का लग रहा था। इस वीडियो में एक लड़के को रोते हुए देखा जा सकता है। फिर एक आदमी (जो कि शायद पादरी होता है) उससे पूछता है कि क्या उसकी बहन पहले बोल सकती थी। लड़का ‘नहीं’ में जवाब देता है। फिर उससे पूछा जाता है कि क्या वह अब बोल सकती है, और इस बार वह ‘हाँ’ में जवाब देता है। तभी बैकग्राउंड में गाना बजता है, “मेरा यशु यशु।”

अब इस वीडियो पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने संज्ञान लिया है। NCPCR ने कहा कि उन्हें एक वीडियो का ट्विटर लिंक मिला है, जिसमें पादरी बजिंदर सिंह को एक नाबालिग लड़के के साथ विचित्र अंधविश्वास का कारनामा करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में बच्चे को रोते हुए देखा जा सकता है। इसमें बच्चे और पादरी दोनों की बॉडी लैंग्वेज काफी असामान्य लग रही है।

शिकायत पाने के बाद NCPCR ने अपनी जाँच में पाया कि यह वीडियो सोशल मीडिया में पादरी बजिंदर सिंह के नाम से उपलब्ध है। बजिंदर सिंह THE CHURCH OF GLORY AND WISDOM में पादरी है। यह चर्च चंडीगढ़ में स्थित है।

NCPCR ने अपने बयान में कहा है कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि यह वीडियो अंधविश्वास को बढ़ावा देने के लिए फैलाया जा रहा है और इसके लिए नाबालिग बच्चे का इस्तेमाल करना किशोर न्याय अधिनियम 2015 का उल्लंघन है। इसके अलावा वीडियो में कार्यक्रम के दौरान किसी ने मास्क भी नहीं पहना है, जो कि भारत सरकार द्वारा जारी किए गए कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।

आयोग ने CPCR एक्ट, 2005 की धारा 13 (1) (j) के तहत संज्ञान लिया है। आयोग ने इस संबंध में चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर को मामले की जाँच कर 7 दिनों के भीतर इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने करना अनुरोध किया है।

उल्लेखनीय है कि ‘मेरा यशु यशु’ गाना स्पष्ट रूप से ईसाई धर्मांतरण के लिए एक ‘औजार’ जैसा लगता है। वीडियो ईसाई कार्यक्रम का लगता है, जहाँ पर इस तरह के दृश्य अक्सर ‘चमत्कार’ के नाम पर देखे जाते हैं।

बता दें कि ‘मेरा यशु यशु’ 2014 का एक गाना है, जिसे पहली बार YouTube पर जो मैथ्यू द्वारा अपलोड किया गया था। इस गाने में अरबी फील के साथ बॉलीवुड आइटम सॉन्ग नंबर्स के कुछ हिस्से भी डाले गए हैं। यह गाना पूरे 8 मिनट का है और गायक हिमेश रेशमिया से प्रेरित मालूम पड़ता है, जिसने ‘ओओओओओओओ’ पर विशेष जोर दिया है।

‘मेरे साथ चाय पर चलोगी?’: IAS ने महिला को किया मैसेज, शराब खरीद में ठगी के शिकार अफसर की सोशल मीडिया पर लग रही क्लास

मध्य प्रदेश IAS लोकेश जांगिड़ विवादों में आ गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से एक महिला से संपर्क किया और चाय पर कहीं बाहर चलने को कहा। महिला ने उनके मैसेजों का स्क्रीनशॉट वायरल कर दिया, जिसके बाद वो विवाद में आ गए। हालाँकि, उनके मैसेज में कुछ आपत्तिजनक चीजें नहीं थीं, लेकिन इस प्राइवेट मैसेजों के ट्विटर पर आने के बाद कई लोगों ने अपनी-अपनी राय दी।

लोकेश जांगिड़ ने प्रीति नाम की महिला को लिखा, “हाय प्रीति, मैं मध्य प्रदेश में कार्यरत एक सिविल सर्वेंट हूँ। स्वरा भास्कर की घरवास की तस्वीरों में रिप्लाई देखते समय मेरी नजर आपकी प्रोफ़ाइल पर पड़ी। संयोग से मैं आज और कल दिल्ली में हूँ। आप जब भी फ्री हों और अगर आपकी इच्छा हो तो मैं एक कप चाय पर आपके साथ कहीं चलना चाहूँगा। मुझे बता दीजिए। बैकग्राउंड के लिए आ गूगल पर मेरा नाम सर्च कर सकती हैं।”

जहाँ कुछ लोगों ने कहा कि ट्विटर कोई टिंडर नहीं है, जहाँ मैच ढूँढे जाते हों, वहीं कुछ लोगों की राय है कि महिला सीधा ‘ना’ में जवाब देकर आगे बढ़ सकती थी, बजाए एक प्राइवेट कन्वर्सेशन के स्क्रीनशॉट वायरल करने के, क्योंकि IAS लोकेश जांगिड़ ने कुछ आपत्तिजनक नहीं कहा था। कई महिलाओं ने भी मैसेज वायरल किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि स्क्रीनशॉट पोस्ट करने से आप ‘कूल’ नहीं बन जाएँगी, IAS अधिकारी का भी जीवन होता है।

महिला ने IAS अधिकारी का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए पूछा, ‘ये सब क्या है?’ जब लोगों ने इस पर आपत्ति जताई तो महिला ने कहा, “अगर मैं मना कर दूँ तो भी उनके इस तुच्छ व्यवहार में बदलाव नहीं आ जाएगा। इससे उन्हें आगे कंवर्शेशन करने का मौका मिल जाता है। इसलिए हाँ, लोगों को अपनी सीमाएँ बताने के लिए मुझे स्क्रीनशॉट डालना ज़रूरी है। किसी के मैसेज में बिना उसे जाने घुस जाना ‘कूल’ नहीं है।”

लोकेश जांगिड़ ने अपने मैसेज में स्पष्ट कहा है कि ‘अगर महिला की इच्छा है’ और ‘अगर वो फ्री हैं’, तभी वो उनके साथ चाय पर चल सकती हैं। उन्होंने किसी ऐसी शब्दावली का भी प्रयोग नहीं किया, जिससे किसी को बुरा लगे। लेकिन, इंटरनेट पर इन चीजों के लिए कोई नियम-कानून नहीं हैं, इसीलिए सबकी अलग-अलग राय होती है। ये रिस्क तो रहता ही है कि इन टेक्स्ट्स का इस्तेमाल कर के कोई शातिर दिमाग गड़बड़ी कर सकता है।

अपनी 4 साल की नौकरी में 8 बार तबादले का सामना कर चुके लोकेश जांगिड़ हाल ही में तब भी विवादों में आए थे, जब ऑनलाइन शराब खरीदने के क्रम में उनसे 34,000 रुपए की ठगी हुई थी। साइबर सेल ने गुपचुप तरीके से इस मामले की जाँच की। ऑनलाइन शराब खरीदने के क्रम में उनसे दो बार 8500-8500 रुपए ले लिए गए और एक क्यूआर कोड स्कैन करने पर 17,000 रुपए अलग से उनके अकाउंट से कट गए।

तमिलनाडु CM के पोते को फुटबॉल क्लब नेरोका ने चुना, मुख्यमंत्री परिवार के तेजस्वी यादव भी थे IPL में

राजनीति और खेल का अनोखा संगम होने जा रहा है। भारतीय फुटबॉल क्लब नेरोका ने तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के पोते इनबान उदयनिधि को साइन किया है। डिफेंडर के रूप में खेलने वाले इनबान ने इस महीने की शुरुआत में चेन्नई में 10 दिवसीय ट्रायल के बाद नेरोका एफसी में जगह बनाई। वो DMK विधायक उदयनिधि स्टालिन और कॉलीवुड फिल्म निर्माता किरुथिगा उदयनिधि के बेटे हैं।

इनबान ने नेरोका में जगह बनाने के बाद इसको लेकर उत्साह व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “मैं ऐसा मौका मिलने पर नर्वस और उत्साहित हूँ। जब नेरोका ने मुझे चुना तो मेरे माता-पिता ने मुझे प्रीसीजन के लिए पाँच महीने के लिए इंफाल जाने के लिए फैसला लेने दिया। मुझे पाँच महीने तक घर से दूर रहना है।”

इस मामले में इनबान से यह पूछा गया कि क्या वो अपने दादा और राज्य के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से अपनी फुटबॉल की आकांक्षाओं के बारे में बातचीत करते हैं? इस पर इनबान ने कहा, “मैं उनसे (एमके स्टालिन) सप्ताह में केवल एक या दो बार उनके व्यस्त कार्यक्रम के कारण मिलता हूँ। हम खेल के बारे में अधिक बात नहीं करते हैं, लेकिन मुझे यकीन है कि वह फुटबॉलर बनने के मेरे फैसले का समर्थन कर रहे हैं।”

12वीं कक्षा के छात्र इनबान का कहना है कि जब वो कक्षा 5 में थे, तभी से वो फुटबॉल के प्रति दीवाने हैं। इनबान के मुताबिक, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और रियल मैड्रिड को देख कर उन्होंने फुटबॉल को गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, “मैं रोनाल्डो की आक्रामकता और समर्पण की प्रशंसा करता हूँ। मुझे बहुत अच्छा लगता है कि कैसे रियल मैड्रिड के मिडफील्डर लुका मोड्रिक और कैसीमिरो कड़ी मेहनत करते हैं। मैं रियल मैड्रिड के सभी मैच देखूँगा और अंत में उनके प्रतिद्वंद्वियों के मैच भी देखूँगा।”

इनबान उदयनिधि (16) मौजूदा समय में नेरोका एफसी पर अपना प्रभाव स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर वो क्लब में अच्छा प्रदर्शन करेंगे तो अंडर-17 भारतीय फुटबॉल टीम के लिए खेल सकते हैं। इनबान ने कहा, “मैं वैश्विक स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करना चाहता हूँ। यह मेरे परिवार को खुश और गौरवान्वित करेगा।”

तेजस्वी यादव का IPL सेलेक्शन

बिहार की राजनीति में बड़ा चेहरा बन चुके आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव भी आईपीएल खेल चुके हैं। वह 2008, 2009, 2011 और वर्ष 2012 में दिल्ली डेयरडेविल्स की ओर से आईपीएल का हिस्सा रहे थे। हालाँकि, वो एक भी मैच नहीं खेल पाए थे।

आईपीएल घोटाले पर बोलते हुए साल 2012 में लालू प्रसाद यादव ने संसद में कहा था, “मेरा बेटा तेजस्वी यादव भी आईपीएल की टीम में है, लेकिन उसने अब तक मैदान में केवल खिलाड़ियों को पानी की बोतलें ही पहुँचाई हैं। वो उसे खेलने का मौका ही नहीं देते हैं।”

मुस्लिम होकर दुकान का नाम श्रीनाथ डोसा भंडार! वीडियो वायरल होने पर इरफान ने दर्ज कराई FIR, मथुरा पुलिस कर रही छानबीन

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में डोसा दुकान के बैनर पोस्टर फाड़ने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सड़क किनारे रेहड़ी से श्रीनाथ डोसा के नाम के बैनर और पोस्टर जबरन निकाले जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ लोगों को इस बात पर ऐतराज था कि एक मुस्लिम दुकानदार इरफ़ान हिंदू नाम के साथ अपनी दुकान क्यों चला रहा है। वीडियो में नजर आ रही दुकान का नाम ‘श्रीनाथ डोसा भंडार’ लिखा हुआ दिखाई दे रहा है। मामला शहर कोतवाली इलाके के विकास बाजार का बताया जा रहा है।

वीडियो के अनुसार कुछ लोग दुकान के पास पहुँचे, उस वक्त एक शख्स दुकान पर डोसा बना रहा था। वहाँ पहुँचते ही उन्होंने दुकानदार का नाम पूछा, काम कर रहे कर्मचारी ने अपना नाम इरफान निवासी मोहल्ला तकिया बताते हुए मालिक को इसकी जानकारी दी। दुकानदार पहुँचा तो लोगों ने उससे इस बात का कारण जानना चाहा कि मुस्लिम होकर भी हिंदू नाम से दुकान क्यों लगाते हो। 

वहाँ हंगामा कर रहे लोगों ने फिर से पूछा, “आप अपना इस्लामिक नाम का इस्तेमाल क्यों नहीं करते हैं। आप यहाँ हिंदू धर्म का नाम लगाकर बिजनेस कर रहे हो, अगर कोई हिंदू तुम्हारे यहाँ नहीं खाना चाहेगा तो नाम देखकर वह भी खाने आएगा। इसे हटाकर अल्लाह, मोहम्मद साहब लिख कर बेचो।” इतने में पोस्टर उतारे जाने की बात कही जाती है। पोस्टर को उतार दिया जाता है और साथ ही दुकान लगाने को चेतावनी दी जाती है कि दोबारा ऐसा किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की प्रतिक्रिया

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। मथुरा पुलिस ने ट्विटर पर एक वीडियो ट्वीट करके अपनी प्रतिक्रिया दी। पुलिस का कहना है, “थाना कोतवाली नगर जनपद मथुरा के विकास मार्केट से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहा है, जिसमें विकास मार्केट स्थित ‘श्रीनाथ डोसा कॉर्नर’ नाम की दुकान पर उसके नामकरण को लेकर कुछ अज्ञात व्यक्तियों द्वारा आपत्तिजनक शब्दों का उपयोग किया गया। इसकी सूचना प्राप्त होने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची। संबंधित दुकान के मालिक एवं वहाँ काम करने वाले लोगों से अज्ञात व्यक्तियों के बारे में पुलिस द्वारा पूछताछ की जा रही है। इस संबंध में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। संबंधित व्यक्ति के खिलाफ जानकारी मिलते ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।”

पुलिस ने एक और ट्वीट के जवाव देते हुए कहा कि इस प्रकरण के संबंध में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली को तत्काल आवश्यक कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया है।

Yash से बना है ‘Yishaan’? सामने आया नुसरत जहाँ के बेटे का नाम, पूर्व पति निखिल जैन ने कहा – ‘हमारे बीच आपसी मतभेद…’

बंगाली फिल्मों की अभिनेत्री और पश्चिम बंगाल के बशीरहाट से सांसद नुसरत जहाँ ने गुरुवार (26 अगस्त, 2021) की दोपहर को अपने बच्चे को जन्म दिया। उन्होंने फैसला लिया है कि वो अपने बेटे के पिता के नाम का खुलासा नहीं करेंगे। अपने पूर्व पति निखिल जैन से वो अलग हो चुकी हैं और अभिनेता व भाजपा नेता यश दासगुप्ता के साथ कई बार उन्हें देखा गया है। अब पता चला है कि नुसरत जहाँ ने अपने बेटे का नाम ‘Yishaan’ रखा है

कई जगह हिंदी में इस नाम को ‘ईशान’ पढ़ा जा रहा है। नुसरत जहाँ को आज अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है, जिसके बाद वो अपने बच्चे के साथ घर जा सकती हैं। फ़िलहाल दोनों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। कोलकाता के पार्क स्ट्रीट के एक अस्पताल में नुसरत जहाँ ने दोपहर 12:20 में अपने बच्चे को जन्म दिया था। उनके पूर्व पति निखिल जैन ने भी उन्हें बच्चे के जन्म की शुभकामनाएँ दी हैं।

उन्होंने कहा, “हमारे बीच आपसी मतभेद हो सकते हैं, फिर भी मैं नवजात बच्चे और उसकी माँ को शुभकामनाएँ देता हूँ। मैं बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए कामना करता हूँ।” TMC सांसद नुसरत जहाँ के बेटे के नाम सामने आते ही लोगों ने उनसे सवालों की झड़ी लगा दी है। लोगों का कहना है कि Yash से ही ‘Yishaan’ बना है और ये नाम यश दासगुप्ता के नाम से मिलता-जुलता है। यश ही नुसरत को अस्पताल में भर्ती कराने गए और माँ-बच्चे के स्वस्थ होने की जानकारी दी थी।

मीडिया रिपोर्ट्स में भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यश दासगुप्ता ही नुसरत जहाँ के बच्चे के पिता हैं, इसीलिए उन्होंने अपने बेटे का नाम ‘Yisaan’ रखा है? बता दें कि नुसरत जहाँ ने अपने बच्चे के पिता का नाम बताने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद कोलकाता की ‘सिंगल मदर्स’ उनके समर्थन में उतरी हैं। नुसरत के पूर्व पति निखिल ने कहा था कि उनकी और नुसरत की शादी टूट गई है और वे छह महीने से ज्यादा समय से साथ नहीं रह रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह से ये बच्चा उनका नहीं है।

सांसद व अभिनेत्री मिमी चक्रवर्ती, फिल्म निर्माता व विधायक राज चक्रवर्ती, अभिनेत्री तनुश्री, वरिष्ठ बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी और अभिनेत्री प्रियंका सरकार समेत कई हस्तियों ने नुसरत जहाँ को माँ बनने की बधाई दी है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नुसरत जहाँ 2020 से ही अभिनेता यश दासगुप्ता के साथ लाइव-इन में रह रही हैं। यश दासगुप्ता भाजपा के नेता भी हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी नुसरत को बधाई दी है।