कर्नाटक में मैसूर शहर के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में ऐतिहासिक रूप से पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। इसी के साथ शहर की नई मेयर बीजेपी की सुनंदा पलनेत्रा बन गई हैं। 65 सदस्यों वाले मैसूर सिटी कार्पोरेशन (एमसीसी) में बीजेपी की सुनंदा को 26 वोट मिले। इसके बाद कॉन्ग्रेस के 19 और जेडीएस के 17 सदस्य हैं।
मैसूर में पाँच निर्दलीय और बीएसपी का एक सदस्य है। रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी मिनट तक ऐसी अटकलें थीं कि जेडी (एस) और कॉन्ग्रेस एमसीसी में अपना गठबंधन जारी रखेंगे। इस समीकरण के लिए कॉन्ग्रेस ने छह महीने के लिए मेयर पद की माँग की थी, जबकि शेष दो साल के लिए जेडी (एस) को यह पद दिया जाना था।
हालाँकि, भाजपा नेताओं ने जेडी (एस) नेता और पूर्व मंत्री एसआर महेश से चुनाव में अपने लिए समर्थन माँगा था। इससे सियासी माहौल बीजेपी के पाले में चला गया और पिछली बार मेयर बनने से चूँकी सुनंदा पलनेत्रा ने इस बार मेयर का पद हासिल कर लिया।
बीजेपी नेता और मैसूर के प्रभारी मंत्री एसटी सोमशेखर ने किसी भी तरह के गुप्त समझौते से इनकार किया है। उन्होने कहा, “भाजपा के उम्मीदवार ने अपना नामाँकन दाखिल किया और सबसे अधिक वोट हासिल कर जीत दर्ज की।”
उन्होंने आगे कहा, “जब से एमसीसी अस्तित्व में आया है, तब से कोई भी भाजपा सदस्य मेयर नहीं बना था। मैं सुश्री पलनेत्रा को उनके चुनाव के लिए बधाई देता हूँ और अपनी पार्टी के नेताओं को पहली बार ऐसा करने में उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद देता हूँ।”
पिछले चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले केपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष आर ध्रुवनारायण और विधायक तनवीर सैत सहित कॉन्ग्रेस नेताओं ने चुनाव की योजना बनाने के लिए एक बैठक में हिस्सा लिया था। भाजपा के मेयर की जीत को रोकने के लिए पार्टी जेडी (एस) के साथ गठबंधन में थी।
गौरतलब है कि इससे पहले जेडी (एस) की रुक्मिणी मेड गौड़ा शहर की मेयर थीं। उन्हें कर्नाटक हाई कोर्ट ने झूठा संपत्ति हलफनामा पेश करने पर अयोग्य घोषित कर दिया था, जिससे मेयर पद खाली हो गया था।
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में मुस्लिम समुदाय के कुछ युवकों की छेड़खानी से तंग आकर नाबालिग हिंदू युवती ने फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले पीड़िता ने एक सुसाइड नोट लिखकर अपनी व्यथा अपने पिता से बताई थी। उसने अपने पिता को आरोपितों से बदला लेने का अनुरोध किया। साथ ही लिखा कि उन लोगों (आरोपितों) ने उसके साथ बहुत ही गलत काम किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, घटना सुरेरी थाना क्षेत्र के कमरुद्दीनपुर गाँव की है। यहाँ के निवासी सूरज (बदला हुआ नाम) की 15 साल की बेटी ने मंगलवार (24 अगस्त 2021) की देर रात अपने कमरे में साड़ी से फाँसी लगा ली। बुधवार की सुबह जब उसकी माँ उसके कमरे में गईं, तो उन्होंने देखा कि बेटी फाँसी लगा चुकी है। वो दृश्य देखकर वो चीख उठीं। उनकी चीखें सुनकर बाकी के लोग भी वहाँ पहुँचे तो देखा कि छात्र की मृत्यु हो चुकी थी।
मौका ए वारदात से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें पीड़िता ने गाँव के मुस्लिम समुदाय के आरोपितों को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पीड़िता ने अपने पिता से आरोपितों से बदला जरूर लेने को कहा है। सुसाइड नोट में पीड़िता ने लिखा, “पिताजी मेरी मौत का कारण रुस्तम अली है, आप उससे बदला जरूर लेना। उसने मेरे साथ बहुत गलत किया है और मेरी मौत का जिम्मेदार भी वही है।”
दो समुदायों के बीच का मामला देख मणियाहूँ के क्षेत्राधिकारी एसपी उपाध्याय, रामपुर, नेवढ़िया थाने की पुलिस के साथ ही पीएसी बल भी वहाँ पहुँच गया। पुलिस ने पीड़िता के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।
इस मामले को लेकर सुरेरी थानाध्यक्ष देवीवर शुक्ला के मुताबिक, मृतक नाबालिग युवती के पिता की शिकायत पर रुस्तम अली, उसके दादा अलीरजा और चाचा वारिफ उर्फ गोरख के खिलाफ इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 534 (स्त्री की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला) और 306 (आत्महत्या के लिए मजबूर करना) के तहत केस दर्ज किया गया है।
केरल के पूर्व मंत्री और मुस्लिम लीग के वरिष्ठ विधायक एमके मुनीर को तालिबान की तरफ से जान से मारने की धमकी दी गई है। एम के मुनीर ने दावा किया है कि तालिबान के नाम पर एक चिट्ठी भेज कर उन्हें धमकी दी गई है कि वो उन्हें और उनके पूरे परिवार को मार डालेगा।
उनका दावा है कि उन्हें यह धमकी तालिबान की ओर से अफगानिस्तान के लोगों के साथ बर्बर सलूक करने के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखने की वजह से मिली है। दरअसल हाल ही में विधायक ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा था। इस पोस्ट में एमके मुनीर ने इस बात का जिक्र किया था कि तालिबान ने अफगानिस्तान के लोगों पर क्रूरतापूर्वक कार्रवाई की है।
एमके मुनीर का कहना है कि बुधवार (अगस्त 25, 2021) की सुबह उन्हें यह खत मिला। इस खत में कहा गया था कि अगर उन्होंने 24 घंटे में अपना सोशल मीडिया पोस्ट नहीं हटाया तो उनकी और उनके पूरे परिवार की हत्या कर दी जाएगी। यह खत ‘Taliban Oru Vismayam’ (तालिबान, एक विस्मय) शीर्षक से लिखी गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि मुनीर का यह फेसबुक पोस्ट उनके ‘मुस्लिम विरोधी’ विचारों पर आधारित है। यह खत सरकारी मेडिकल कॉलेज इलाके से पोस्ट की गई थी।
इसमें प्रोफेसर टीजे जोसेफ का भी जिक्र किया गया है और कहा गया कि उन पर भी प्रोफेसर जैसा ही हमला किया जाएगा। बता दें कि जोसेफ पर ईशनिंदा का आरोप लगा था और साल 2010 में उनके हाथ काट दिए गए थे।
4 जुलाई 2010 को ईशनिंदा के आरोप में मुस्लिम कट्टरपंथियों ने उनका दाहिना हाथ काट दिया था। कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन के 7 युवकों ने उन पर तब हमला किया था, जब वे अपने परिवार के साथ चर्च से प्रार्थना कर लौट रहे थे। कट्टरपंथियों का आरोप था कि जोसेफ ने परीक्षा के लिए जो प्रश्न तैयार किए थे, उसमें ईशनिंदा वाले सवाल पूछे गए थे।
एम के मुनीर ने कहा है कि इस मामले में वो थाने में शिकायत दर्ज कराएँगे और जाँच की माँग करेंगे। आपको बता दें कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के नेता ने कई एंटी-तालिबान पोस्ट किए थे जिसके बाद सोशल मीडिया के जरिए पर उन पर हमले जारी हैं।
तमाल भट्टाचार्य के खिलाफ याचिका दायर
वहीं ‘अच्छा खाना’ और ‘क्रिकेट खेलने’ के लिए तालिबान की तारीफो के पुल बाँध चुके कोलकाता के तमाल भट्टाचार्य के खिलाफ याचिका दायर की गई है। गृह मंत्रालय के शिकायत प्रकोष्ठ को याचिका मिली है। कोलकाता के एक व्यक्ति ने यह याचिका गृह मंत्रालय को सौंपी है।
तमाल ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठन को ‘भरोसेमंद’ भी बताया था। बता दें कि तमाल उन 10 बंगालियों में से एक हैं, जिन्हें 21 अगस्त की रात भारत सरकार अफगानिस्तान के हामिद करजई इंटरनेशल एयरपोर्ट से सुरक्षित बचाकर लाई थी। टीवी9 को दिए इंटरव्यू में तमाल ने तालिबान की भरोसेमंद होने के लिए की सराहना की थी।
गौरतलब है कि उत्तरी दमदम इलाके के निमटा में रहने वाले 34 वर्षीय तमाल अफगानिस्तान में तब से फँसे हुए थे, जब से तालिबान ने काबुल पर कब्जा जमा लिया था। मैकेनिकल इंजीनियर तमाल काबुल के कर्दन इंटरनेशनल स्कूल में फिजिक्स और केमिस्ट्री पढ़ाते थे। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग के वक्त से तमाल अपने स्कूल के स्टाफ क्वार्टर में रह रहे थे। हालाँकि, तालिबान के काबुल शहर पर कब्जा करने के बाद उन्हें खुद को प्रिंसिपल के आवास के अंदर बंद होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। बाद में तमाल को 10 अन्य बंगाल निवासियों के साथ भारतीय वायु सेना (IAF) के कर्मियों ने वहाँ से बाहर निकाला था।
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में भगवान जगन्नाथ का एक ऐसा मंदिर स्थित है जो मानसून की भविष्यवाणी करता है। जिले के एक छोटे से गाँव में स्थित यह मंदिर अनेकों रहस्यों से भरा हुआ है क्योंकि न तो किसी को यह पता है कि मानसून की भविष्यवाणी करती हुई पत्थर से टपकती जल की बूँदें कहाँ से आती हैं और न ही किसी को यह ज्ञात है कि इस मंदिर का निर्माण कब और किसने कराया। ज्ञात है तो सिर्फ इतना कि भगवान जगन्नाथ का यह मानसून मंदिर हजारों ग्रामीणों को अपने कृषि कार्य को समय पर शुरू करने की सहूलियत प्रदान करता है।
मंदिर के इतिहास पर विवाद
कानपुर के भीतरगाँव विकासखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर (किमी) पर बेंहटा गाँव में स्थित भगवान जगन्नाथ के इस मंदिर के निर्माण काल के विषय में इतिहासकारों और पुरातत्वविदों में मतभेद है। गर्भगृह के भीतर और बाहर जो चित्रांकन किए गए हैं, उनके अनुसार इस मंदिर को दूसरी से चौथी शताब्दी का माना जाता है। मंदिर में कुछ ऐसे निशान मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि यह मंदिर सम्राट हर्षवर्धन के समय का है। हालाँकि इसके अलावा मंदिर में उपस्थित अयागपट्ट के आधार पर कई इतिहासकार इस मंदिर को लगभग 4,000 साल पुराना बताते हैं। हालाँकि मंदिर में आखिरी बार 11वीं शताब्दी में जीर्णोद्धार कराए जाने की जानकारी मिलती है।
कानपुर के इस मानसून मंदिर के निर्माण के विषय में ग्रामीणों का मत है कि इसका निर्माण कई सहस्त्राब्दियों पहले महाराजा दधीचि ने कराया था और इस मंदिर के सरोवर के किनारे में भगवान राम ने अपने पिता महाराजा दशरथ का पिंडदान भी किया था, जिसके बाद से यह सरोवर रामकुंड कहा जाने लगा।
मंदिर की संरचना
ओडिशा और देश के अन्य हिस्सों में स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिरों से अलग कानपुर का यह जगन्नाथ मंदिर गोल गुंबद वाला एक मंदिर है। किसी भी दिशा से देखने पर यह मंदिर गुंबदाकार ही दिखाई देता है। हालाँकि देश के दूसरे जगन्नाथ मंदिरों की तरह ही इस मंदिर में भी भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा मौजूद हैं। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमाएँ काले पत्थरों पर तराश कर बनाई गई हैं। हर साल देश एवं विदेश में आयोजित की जाने वाली रथयात्रा का उत्सव कानपुर के इस मंदिर में भी धूमधाम से मनाया जाता है।
मॉनसून की भविष्यवाणी
कानपुर का यह अतिप्राचीन जगन्नाथ मंदिर मानसून की भविष्यवाणी के लिए देशभर में जाना जाता है। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा के एक ऊपर एक ऐसा चमत्कारी पत्थर लगा हुआ है, जहाँ से जल की बूँदें टपकती हैं। पूरे साल सूखे रहने वाले इस पत्थर से मानसून आगमन के 7-15 दिन पहले बूँदों का रिसाव शुरू हो जाता है। आश्चर्य की बात है कि जब पूरा इलाका गर्मी से जूझ रहा होता है, तब मंदिर के इस पत्थर से जल की बूँदों का टपकना किसी रहस्य से कम नहीं है। हालाँकि मानसून शुरू होते ही बूँदों का रिसाव बंद हो जाता है।
इन बूँदों का आकार मानसून की तीव्रता के बारे में बताता है। अगर जल की बूँदे आकार में बड़ी रहीं तो मानसून के बेहतर रहने का अनुमान लगाया जाता है और छोटी बूँदें मानसून में कमी को बताती हैं। आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि मानसून के विषय में इस मंदिर द्वारा की गई भविष्यवाणी कभी गलत हुई हो। प्रदेश के लाखों किसानों को मौसम विभाग से ज्यादा इस मंदिर पर भरोसा है।
कैसे पहुँचें?
कानपुर, उत्तर प्रदेश के प्रमुख नगरों में से एक है। ऐसे में यहाँ तक पहुँचने के लिए यातायात के साधन देश के सभी हिस्सों से उपलब्ध हैं। जगन्नाथ मानसून मंदिर से कानपुर हवाईअड्डा लगभग 44 किमी की दूरी पर है।
देश के सभी हिस्सों से रेलमार्ग के द्वारा जुड़ा हुआ कानपुर सेन्ट्रल, मंदिर से लगभग 50 किमी की दूरी पर है। इसके अलावा कानपुर का मुख्य बस स्टैंड की मंदिर से दूरी 40 किमी ही है। इन तीनों स्थानों से जगन्नाथ मंदिर तक पहुँचने के लिए अनेकों स्थानीय साधन उपलब्ध हैं।
वामपंथी प्रोपेगेंडा आउटलेट द वायर की पत्रकार रोहिणी सिंह ने हाल ही में ट्विटर पर पीआईएफ (पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड) सऊदी अरामको के गवर्नर यासिर अल-रुमायन के साथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के सौदे पर सवाल उठाया, जिससे भारतीय व्यापारिक समूह के खिलाफ इस्लामी हमला शुरू हो गया।
अपने ट्वीट में रोहिणी सिंह ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में हिस्सेदारी खरीदने के लिए सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको पर सवाल उठाया। साथ ही उसने रिलायंस पर मीडिया नेटवर्क न्यूज़ 18 के माध्यम से भारत में मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया। सिंह ने अपने ट्वीट में यासिर अल-रुमायन को भी टैग किया है।
रोहिणी ने ट्वीट किया, ”अंबानी परिवार खुशी-खुशी मुस्लिम देशों के साथ व्यापार करते हैं। अरामको रिलायंस इंडस्ट्रीज में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। वहीं, भारत में रिलायंस का मीडिया नेटवर्क मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने में व्यस्त है। यासिर अल-रुमायन क्या आप इसका समर्थन करते हैं?”
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जैसे ही सिंह ने अपने ट्वीट में सऊदी अरब से रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ अपने व्यापारिक सौदे पर विचार करने की अपील की, उसके कुछ मिनट बाद ही द वायर की पत्रकार की पोस्ट पर अंबानी ग्रुप के खिलाफ मुस्लिमों ने जहर उगलना शुरू कर दिया। उन्होंने सऊदी अरब से रिलायंस ग्रुप के साथ अपने संबंध तोड़ने को कहा।
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एक ट्विटर यूजर ने रिलायंस के खिलाफ सिंह के ट्वीट का हवाला दिया और अरामको को टैग करते हुए सऊदी ऑयल कंपनी से टेरर फंडिंग को रोकने के लिए कहा।
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एक अन्य इस्लामवादी ने आमिर अज़ीज द्वारा लिखी गई ‘सब याद रखा जाएगा’ कविता का हवाला दिया, जिसने इसे सीएए के विरोध के दौरान यह बताने के लिए लिखा था कि भारत में मुसलमान यह नहीं भूलेंगे कि भारत सरकार सताए गए धार्मिक अल्पसंख्यकों को नागरिकता देना चाहती है। उन्होंने पड़ोसी इस्लामिक देशों और सऊदी तेल कंपनी अरामको से एक ऐसी कंपनी से संबंध तोड़ने का आह्वान किया गया है, जिसके मीडिया चैनल ने ‘मुसलमानों के नरसंहार’ का समर्थन किया था।
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ध्यान दें कि सीएए ने मुसलमानों सहित किसी भी भारतीय की नागरिकता को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं किया। CAA कानून के जरिए नरेंद्र मोदी सरकार ने केवल अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया है।
हालाँकि, सिंह ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर मुसलमानों से नफरत करने वाला एक मीडिया चैनल चलाने का निराधार आरोप लगाया, लेकिन उनके इस्लामवादी फॉलोअर्स ने कंपनी को आतंकवादी संगठन और मुसलमानों का नरसंहार करने वाला बताया है। दरअसल, इसी तरह से सोशल मीडिया पर नफरत फैलती है। एक सोशल मीडिया यूजर जिसके बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं, अगर वह जानबूझ कर इस तरह के भ्रामक पोस्ट शेयर करता है, तो उससे सांप्रदायिक उन्माद फैलाता है। साथ ही सांप्रदायिक दंगे होने की संभावना भी होती है।
रोहिणी सिंह ने भी ट्विटर पर यही काम किया है। इस मामले में सऊदी अरब एक इस्लामी देश है, जहाँ अल्पसंख्यकों के पास सीमित अधिकार हैं। पाकिस्तान जैसे अन्य इस्लामिक देशों में अक्सर गैर-मुसलमानों को निशाना बनाया जाता है, क्योंकि उनकी आस्था इस्लाम में नहीं है। इनमें से कई देशों में मानवाधिकारों के उल्लंघन और प्रेस की स्वतंत्रता का संदिग्ध रिकॉर्ड भी है।
बता दें कि 2010 में, कॉन्ग्रेस के शासनकाल के दौरान, एक घोटाला सामने आया था जिसमें पत्रकार बरखा दत्त और एमके वेणु (जो द वायर के संस्थापक संपादक हैं, जहाँ अब रोहिणी सिंह काम करती हैं) कॉर्पोरेट लॉबिइंग नीरा राडिया के साथ सम्पर्क थे। एमके वेणु को कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया से अनुरोध करते हुए सुना गया था कि वो रोहिणी सिंह को अपने (लॉबीस्ट के) सर्कल (राजनेताओं, व्यापारियों, लॉबिस्टों आदि) में इंट्रोड्यूज़ करें। राडिया के बारे में पता चला था कि वो यूपीए सरकार से अपने कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए अनुकूल सौदे करने के लिए दलालों के रूप में पत्रकारों का इस्तेमाल कर रही थीं। फ़िलहाल, रोहिणी सिंह वर्तमान में द वायर के साथ ही काम कर रही हैं।
पूरे अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद वहाँ से सैंकड़ों की तादाद में लोगों ने देश छोड़ा और भारत में आकर शरण ली। इन्हीं शर्णार्थियों में से एक 32 वर्षीय अफगानी ने भारत में आकर तालिबान की बर्बरता बयां करते हुए कहा कि उनकी बिटिया ने खुद चार लोगों को अपनी आँख के आगे मरते देखा। वहीं एक भारतीय ने बताया कि कैसे वह बिस्कुट पर जिंदा रहे।
32 साल के मोहम्मद खान, जो बंगाल के हावड़ा जिले में अपनी पत्नी और बच्चियों के साथ हैं, वह बताते हैं, “मेरी बेटी इस घटना से इतना आहत है कि वह रातों में रोती है। मैं उसे वापस से सोने के लिए कहता रहता हूँ और समझाता हूँ कि हम भारत में हैं, यहाँ तालिबान नहीं है।”
वह उम्मीद करते हैं कि अफगानिस्तान में बाकी फँसे लोग भी जल्द से जल्द निकाल लिए जाएँ। वह कहते हैं, उनके माता-पिता समेत कई अफगानी इस समय परेशानी में हैं। उनके अम्मी-अब्बा पूछते हैं, “तुम हमें छोड़कर कैसे चले गए।” इस पर खान कहते हैं, “मुझे उनको भी निकलवाना है। मैं भारतीय एंबेसी से अनुरोध करता हूँ कि उन्हें बचा लें।” खान ने भारतीय एंबेसी को मदद के लिए आभार व्यक्त करते हुए याद किया कि कैसे उनका जीवन अब बदल चुका है।
खान कहते हैं, “मैंने अपना सब खो दिया। बड़ी मुश्किल से 60 हजार रुपए और कुछ सूटकेस अपने साथ लेकर आ पाया।…मैं वहाँ बचपन से था। मेरा घर और दुकान लूट ली गई। मैं अपनी भावनाएँ नहीं कंट्रोल कर पाया, जब मैंने अपनी टूटती दुकान की वीडियो देखी। तालिबान ने सब ले लिया।”
अफगान से लौटे भारतीय की आपबीती
मोहम्मद खान जैसे तमाम अफगानियों की आपबीती के अलावा कई भारतीय भी हैं जो अफगान से लौटे हैं। इन्हीं में से एक नवीन हैं जो सोमवार देर रात 12: 55 बजे अपने घर सरकाघाट (हिमाचल प्रदेश) पहुँचे हैं। नवीन बताते हैं कि पिछले 5 दिनों में उनका कई बार मौत से सामना हुआ। उनके लिए कैंप से लेकर एयरपोर्ट तक पहुँचना बहुत ही भयानक रहा। वह बताते हैं कि उन्होंने ऐसी दर्दनाक घटनाएँ देखी, जिसे याद करके रूह काँप जाए।
नवीन ने बताया कि जब वह किसी तरह एयरपोर्ट की तरफ चले तो उससे पहले एक गेट पर पहुँचे। यहाँ ब्रिटिश आर्मी थी। उस गेट के पास सभी के पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज चेक किए जा रहे थे। वहाँ करीब 30 से 40 हजार लोग थे और भगदड़ मची हुई थी। इस दौरान कई बच्चे, बुजुर्ग पाँवों के नीचे आ रहे थे। फायरिंग भी हो रही थी। इसके बावजूद लोग एयरपोर्ट जाने के लिए आतुर थे। कई लोग अपने बच्चों को आर्मी के जवानों की तरफ फेंक रहे थे।
नवीन कहते हैं कि उन्होंने दो दिनों तक बिस्कुट खाकर ही गुजारा किया। उनके लिए एयरपोर्ट तक पहुँचना मुश्किल था। करीब ढाई किलोमीटर के रास्ते में बहुत ही डरावना मंजर देखा। जैसे-तैसे एयरपोर्ट पहुँचे जिसके बाद सभी ने राहत की साँस ली।
महिलाओं को लेकर तालिबान का पक्ष
उल्लेखनीय है कि तालिबानियों का चेहरा अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। पिछले हफ्ते तक जहाँ बातें हो रही थीं कि महिलाओं को समान अधिकार दिया जाएगा। वहीं हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में तालिबानी प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने ये बयान दिया है कि महिलाओं को अपनी सुरक्षा के मद्देनजर काम पर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि कुछ तालिबानियों को महिलाओं को चोट न पहुँचाने के लिए ट्रेनिंग नहीं दी गई है।
मुजाहिद ने कहा था, “हम चिंतित हैं कि हमारी फोर्स में जो नए हैं, वो अभी तक बहुत अच्छी तरह से प्रशिक्षित नहीं हुए हैं, वे महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार कर सकते हैं।” उन्होंने कहा, “हम नहीं चाहते कि हमारी सेनाएँ, अल्लाह न करे, महिलाओं को नुकसान पहुँचाएँ या परेशान करें।”
तालिबान की सांस्कृतिक मामलों की समिति के डिप्टी अहमदुल्ला वासेक ने भी एक दिन पहले इसी तरह की टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि तालिबान को कामकाजी महिलाओं से तब तक कोई दिक्कत नहीं है जब तक वे हिजाब पहनती हैं। लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा था कि वर्तमान में महिलाओं को काम पर नहीं जाने के लिए कहा जा रहा है क्योंकि वर्तमान में यह एक सैन्य स्थिति है। उन्होंने कहा था कि स्थिति सामान्य होने पर महिलाएँ काम पर जाना शुरू कर सकती हैं।
अक्सर विवादों में रहने वाले कमाल आर खान के खिलाफ फिल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी ने ऐक्शन लेते हुए उनके खिलाफ मानहानि का दावा किया है। बाजपेयी ने कहा कि कमाल आर खान उन्हें ‘चरसी’ और ‘गंजेड़ी’ कहकर संबोधित किया, इसके कारण उनकी छवि धूमिल हुई है। दरअसल, कमाल आर खान ने एक ट्वीट में मनोज बाजपेयी को एक फिल्म के रिव्यू में चरसी और गंजेड़ी कहकर संबोधित किया था। उन्होंने बाजपेयी की वेब सीरीज ‘दी फैमिली मैन’ की तुलना सॉफ्ट पॉर्न से की थी और उनकी पत्नी और बेटी के बारे में भी अशोभनीय बातें कही थीं।
मनोज बाजपेयी ने मंगलवार को कमाल आर खान के खिलाफ इंदौर के एक कोर्ट में मानहानि का दावा किया है। खबरों के अनुसार, मनोज बाजपेयी ने कमाल आर खान के खिलाफ आईपीसी की धारा 500 के अंतर्गत ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के कोर्ट में आपराधिक मानहानि का दावा किया है। गौरतलब है कि कमाल आर खान इस तरह के विवादों में अक्सर पड़ जाते हैं। ऐसा ही उनका एक मामला सलमान खान के साथ आया था, जिसमें सलमान खान ने उनके खिलाफ मानहानि का दावा ठोका था। कमाल ने सलमान की फिल्म राधे योर मोस्ट वांटेड भाई को एक घटिया फिल्म बताया था और सलमान खान पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप लगाया था।
दरअसल, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता और बॉलीवुड के बेहतरीन कलाकारों में शुमार किये जाने वाले मनोज बाजपेयी को लेकर कमाल आर खान ने 26 जुलाई को एक ट्वीट किया था। कमाल आर खान ने मनोज वाजपेयी अभिनीत ‘द फैमिली मैन’ के ट्विटर पर कथित रिव्यू के दौरान यह बात कही थी। बुधवार को उन्होंने एक पोल जारी कर लिखा, “क्या आपको लगता है कि अब हर बॉलीवुड वाला अगले 2 वर्षों में मेरे खिलाफ मानहानि का दावा ठोकने वाला है?”
I am not a Lukkha and Faaltu in life, So I don’t watch web series. Better you ask Sunil Pal. But why do you like to watch a Charsi, Ganjedi Manoj? You can’t be selective. If you hate Charsi Ganjedi in Bollywood, So you should hate everyone. https://t.co/MBQTyevI0L— KRK (@kamaalrkhan) July 26, 2021
मनोज बाजपेयी इस साल ‘दी फैमिली मैन’ सीज़न 2 के अलावा नेटफ्लिक्स एंथॉलजी फिल्म ‘रे’, ज़ी5 पर रिलीज़ हुई ‘डायल 100’ और ‘साइलेंस’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं। वे फिलहाल ‘डिस्पैच’ नाम की फिल्म में काम कर रहे हैं। मनोज आने वाले दिनों में मलयाली भाषा की फिल्म ‘कुरुप’ में दुलकर सलमान के साथ नजर आएँगे।
मनोज वाजपेयी के मानहानि के दावे पर कमाल आर खान ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया दिया है। उन्होंने लिखा, “अभी तक मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है, लेकिन मीडिया बता रही है कि मनोज बाजपेयी ने मेरे खिलाफ इंदौर में मानहानि का दावा किया है। अगर मनोज मुंबई में रहते हैं तो केस दर्ज कराने के लिए इंदौर क्यों गए? उन्हें मुंबई पुलिस और न्यायपालिका पर विश्वास नहीं है? आप सभी जानते हैं कि इंदौर से कौन है?”
उसी ट्वीट में उन्होंने आगे लिखा, “उसने मनोज को मुझे परेशान करने के लिए मुंबई के बजाय इंदौर से केस दर्ज कराने के लिए कहा। दादू जी आप मुझे परेशान करके अपना करियर नहीं बचा सकते। आप पूरा बॉलीवुड को मेरे खिलाफ खड़ा कर रहे हैं ताकि मैं आपकी फिल्मों की समीक्षा न कर सकूँ, लेकिन ऐसा नहीं होगा। मैं फिर भी आपकी सभी फिल्मों की समीक्षा करूँगा।”
उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कोई नोटिस मिलता है तो उनकी वकील चंदन अवस्थी उनका बचाव करने के लिए इंदौर कोर्ट में उपस्थित रहेंगी।
विवादित उर्दू शायर मुनव्वर राना के बेटे तबरेज राना को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उत्तर प्रदेश की रायबरेली पुलिस ने उसे लखनऊ के लालकुआं से बुधवार (25 अगस्त) शाम को पकड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तबरेज ने प्रॉपर्टी विवाद के चलते खुद पर फायरिंग करवाई थी और फिर साजिश के तहत अपने चाचा और भाइयों को नामजद कर दिया था। इसके बाद कोर्ट ने तबरेज के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। एबीपी के पत्रकार नीरज पांडे और दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
शायर मुनव्वर राणा का बेटा गिरफ्तार। प्रॉपर्टी विवाद में खुद पर करवाई थी फायरिंग। चाचा व भाइयों को कराया था नामजद।कोर्ट से जारी था तबरेज राणा पर गैर जमानती वारंट। रायबरेली पुलिस ने किया तबरेज राणा को गिरफ्तार।
— Niraj Pandey (ABP News) (@NirajPandeyLive) August 25, 2021
#MunnawarRana का बेटा गिरफ्तार…प्रॉपर्टी के झगडे में खुद पर चलवाई थी गोली…सीसीटीवी फुटेज में गोली चलाने वाले के साथ दिख रहा है मुन्नवर राणा का बेटा l pic.twitter.com/mHcD5jK0nP
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी पुलिस की जाँच में तबरेज राना पर फायरिंग की कहानी फर्जी पाई गई थी, जिसके बाद पुलिस ने CCTV फुटेज की जाँच की। राना का बेटा CCTV में कई शूटर्स के साथ नजर आया था। इसके बाद से तबरेज की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही थी, लगभग दो महीने बाद पुलिस ने आज उसे पकड़ ही लिया।
बताया जा रहा है कि मुनव्वर राना का उनके भाइयों के साथ जमीन विवाद चल रहा है। इसे लेकर 28 जून को रायबरेली में दो बाइक सवार युवकों ने राना के बेटे तबरेज पर हमला कर दिया था। तबरेज का कहना था कि जब तक उसने अपनी बंदूक निकाली तब तक दोनों मौके से भाग गए। इस मामले में तबरेज ने सदर कोतवाली में केस भी दर्ज कराया था।
पुलिस ने जब सिरे से इस मामले की जाँच की तो सीसीटीवी फुटेज में बड़ा खुलासा हुआ। पुलिस का कहना है कि तबरेज ने ही खुद पर गोली चलवाई थी और इसे हमले की शक्ल देना चाहता था।
बेटे पर लगे आरोपों और घर पर हुई छापेमारी को लेकर मुनव्वर राना लगातार यूपी पुलिस और योगी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। यहाँ तक कि उन्होंने अपने बेटे के एनकाउंटर का शक भी जताया था और कहा था कि पुलिस इसे कानपुर का बिकरु कांड बनाने की कोशिश कर रही है।
बता दें कि अपने विवादित बयानों के लिए मशहूर शायर ने हाल ही में महर्षि वाल्मीकि की तुलना तालिबान से की थी। उन्होंने कहा था, ”इंसान का कैरेक्टर बदलता रहता है। वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। हमें तो अफगानी अच्छे लगते हैं। वाल्मीकि को आप भगवान कह रहे हैं, लेकिन आपके मजहब में तो किसी को भी भगवान कह दिया जाता है।” राना ने न्यूज नेशन पर पत्रकार दीपक चौरसिया से बात करते हुए कहा था कि वाल्मीकि रामायण लिख देता है तो वो देवता हो जाता है, उससे पहले वो डाकू होता है।
इससे पहले उन्होंने शनिवार (17 जुलाई 2021) को कहा था, “अगर औवेसी की मदद से यूपी में योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बने तो मैं प्रदेश छोड़कर चला जाऊँगा। ये भी मान लूँगा कि ये राज्य मुसलमानों के रहने लायक नहीं है।”
अयोध्या के श्रीराम मंदिर मामले में फैसला देने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में शामिल रहे रिटायर जज न्यायमूर्ति अशोक भूषण के प्रयागराज स्थित पैतृक निवास के बाहर सोमवार को बम फेंकने की घटना सामने आई है। सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर कई थानों की पुलिस फोर्स पहुँच गई। वहीं, आईजी केपी सिंह का कहना है कि यह बमबाजी की नहीं, बल्कि पटाखा छोड़ने की घटना है और जिन लोगों ने ऐसा किया है।
न्यायमूर्ति अशोक भूषण का कर्नलगंज थाना क्षेत्र के हाशिमपुर रोड पर पैतृक मकान है। इस मकान में उनके भाई और इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल भूषण रहते हैं, जबकि न्यायमूर्ति अशोक भूषण कैंट थाना क्षेत्र के अशाेक नगर में अपने परिवार के साथ रहते हैं।
लोगों का कहना है कि सोमवार की शाम बाइक सवार बदमाशों ने हाशिमपुर स्थित आवास के बाहर एक-एक कर दो बम फोड़कर फरार हो गए। सूचना के बाद पुलिस के उच्च अधिकारी फारेंसिक व बीडीएस टीम के साथ पहुँच गए और मामले की छानबीन करने लगे। अधिकारियों ने आरोपियों को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच को सतर्क किया और सर्विलांस लगाने का निर्देश दिया।
जस्टिस अशोक भूषण ने बताया कि घर की रंगाई-पुताई का काम चल रहा था, इसलिए सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर बंद था। हालाँकि, पुलिस सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज के आधार पर जाँच कर रही है। वहीं, पड़ोसियों का कहना है कि पिछले कई दिनों से हाशिमपुर रोड पर अराजक तत्वों को घूमते हुए देखा गया है और वे नशेड़ियों जैसे दिख रहे थे।
आइजी केपी सिंह का कहना है कि आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम लगाई गई है। उन्होंने कहा कि कर्नलगंज थाने में तेज रफ्तार बाइक चलाने और विस्फोटक फेंकने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। क्राइम ब्रांच और सर्विलांस ने आरोपियों की पहचान कर ली है।
केपी सिंह के अनुसार, जस्टिस भूषण के आवास के सामने चाय की दुकान है और ठेला लगाने वाले का आरोपितों से पारिवारिक विवाद है। उसी विवाद में आरोपितों ने चाय वाले को धमकाने के लिए दहशत फैलाने की कोशिश की।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आतंकी गिरोह की धमकियों के कारण सारे शहर में हाई अलर्ट है। ऐसे में बुधवार (अगस्त 25, 2021) को एक वीडियो वायरल हुई है। इस वीडियो में एक तांगा वाला रायबरेली रोड तेलीबाग में स्थित लोहे की दुकान के बाहर अपना तांगा लेकर खड़ा है जिसमें एक ऐसा झंडा बना हुआ है, जिसे वायरल वीडियो में पाकिस्तान का बताया जा रहा है। वहीं एक यूट्यूब वीडियो के मुताबिक बताया जा रहा है कि ये निशान पाकिस्तानी झंडे का नहीं है बल्कि ये कर्बला का निशान है।
कथित तौर पर वीडियो 3-4 दिन पुराना है। इसमें देख सकते हैं कि वीडियो में तांगा चालक अपना नाम नूर आलम बताता है और खुद को राजीव नगर घुसियाना का निवासी कहता है। उसके मुताबिक उसके तांगे पर बना झंडा 20-22 साल से बना हुआ है। लेकिन उसने कभी इन पर ध्यान नहीं दिया। आलम के अनुसार, उसे लगा कि उसके तांगे पर पेंट है।
वीडियो में सुन सकते हैं कि हिंदुस्तान की सड़कों पर ‘पाकिस्तानी झंडे’ (वायरल वीडियो में नूर आलम से बहस करने वाला शख्स यही बताता है) वाला तांगा देख युवक भड़क जाता है और तांगे वाले से हिंदुस्तान जिंदाबाद कहने की बात करता है। इस पर नूर आलम ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’, ‘जय हिंद’ और ‘भारत माता की जय’ कहता है। बाद में युवक उसे ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ का नारा लगाने को कहता है। लेकिन नूर ऐसा कहने से मना कर देता है। इस बीच तांगा चालक का दूसरा साथी रशीद आता है और युवक से बहस करता है।
दोनों पाकिस्तान मुर्दाबाद कहने से मना कर देते हैं। वह कहते हैं कि यदि कहेंगे तो हिंदुस्तान-पाकिस्तान जिंदाबाद कहेंगे। वायरल वीडियो के संबंध में अधिकारियों के आदेश पर इंस्पेक्टर पीजीआइ आनंद शुक्ला ने तांगा चालक को थाने बुलवाया। जब तांगा चालक से पूछताछ की गई तो वह माफी माँगने लगा। माफी माँगने और दोबारा ऐसी गलती न करने की हिदायत देकर उसके तांगे पर बने झंडों को पेंट करके उसे छोड़ दिया गया।
थाने से निकलने के बाद नूर आलम ने रास्ते में तिरंगा झंडा खरीदा। तिरंगे को सलाम कर तांगे में लगाया और फिर हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हुए घर चला गया। इस वाकये की वीडियो भी दैनिक जागरण के डिप्टी न्यूज एडिटर पवन तिवारी ने शेयर की है।