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लिंग स्तंभन दोष है तो मांसाहार के बजाय दूध-फल-सब्जियों की ओर लौटिए… Cardiology Congress में पेश की गई रिसर्च

मांस खाते हैं? खाना चाहिए। चॉइस है। जोर-जबरदस्ती होनी भी नहीं चाहिए। फायदे-नुकसान तो भला किस चीज में नहीं है। वैसे एक नई स्टडी आई है। ग्रीस में एथेंस विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने यह स्टडी की है। इसके अनुसार मांस (रेड मीट) नहीं या कम खाने वाले मर्दों में स्तंभन दोष (erectile dysfunction) में सुधार की संभावना बढ़ जाती है।

इसका वैज्ञानिक कारण भी बताया गया है। बहुत सिंपल भाषा में समझिए इसे। बताया गया कि उच्च रक्तचाप (high blood pressure) वाले मर्दों में सामान्य रक्तचाप (normal blood pressure) वाले लोगों की तुलना में स्तंभन दोष की संभावना लगभग दोगुनी होती है।

इसी दोगुनी संभावना को कम करने के लिए ग्रीस में एथेंस विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने एक रिसर्च किया। रिसर्च किसी ऑपरेशन या दवाई के लिए नहीं बल्कि दैनिक खान-पान के आधार पर। इसके लिए 250 लोगों को चुना (औसत मध्यम आयु वर्ग के लोग) गया और इस रिसर्च को किया है।

जब रिसर्च हो गया तो नतीजे चौंकाने वाले रहे। विशेषज्ञों ने यह पाया कि कम मांस या मांसाहार का सेवन नहीं करने वाले मर्दों में बेहतर रक्त प्रवाह, उच्च टेस्टोस्टेरोन के साथ-साथ लिंग स्तंभन भी शानदार रहा।

किस तरह का आहार स्तंभन दोष में मददगार

भूमध्यसागरीय आहार (Mediterranean diet) में विशेष तौर पर फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज, जैतून का तेल (olive oil), दूध या दूध से बने उत्पाद, फलियाँ, बादाम-काजू-अखरोट-किशमिश, पूर्ण बीज, मांस (सेवन सीमित करने पर जोर) आदि पर जोर दिया जाता है।

इस रिसर्च को ग्रीस के एथेंस विश्वविद्यालय के डॉ अथानासियोस एंजेलिस के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने बताया:

“हमारे अध्ययन में, भूमध्यसागरीय आहार (मांसाहार कम या नहीं के बराबर) लोगों के बेहतर व्यायाम क्षमता, स्वस्थ धमनियों और रक्त प्रवाह के अलावा उच्च टेस्टोस्टेरोन के स्तर और बेहतर लिंग स्तंभन से भी जुड़ा पाया गया। यह आहार पैटर्न रक्त वाहिकाओं के कार्य को बढ़ाकर और टेस्टोस्टेरोन में गिरावट को सीमित करके उच्च रक्तचाप के साथ-साथ लिंग स्तंभन जैसे दोष को भी सुधार करने में सक्षम है।”

ग्रीस के एथेंस विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की यह रिसर्च ईएससी कॉन्ग्रेस 2021 (European Society of Cardiology Congress 2021) में प्रस्तुत की गई है।

गाय के साथ शोएब ने किया रेप, चारा लेकर आया था: UP पुलिस ने पशु क्रूरता कानून में भेजा जेल

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में गाय के साथ घिनौनी हरकत करने का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की खबर के मुताबिक, ई-रिक्शा चालक शोएब को एक गाय के साथ गंदा काम करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। हालाँकि, वह उस समय वहाँ से भागने में सफल रहा, लेकिन पुलिस ने उसे गुरुवार (अगस्त 26, 2021) को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया।

यह मामला गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र की है। इस घटना को उस समय अंजाम दिया गया, जब 22 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर गाय का मालिक सुमित अपने ससुराल गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सुमित मसूरी थाना क्षेत्र के पूठी का रहने वाला है। उसका कहना है कि जब वो रक्षाबंधन पर अपने ससुराल गया था, उसी समय शोएब नाम का लड़का ई-रिक्शे में चारा लेकर उसके घर पहुँचा। सुमित का आरोप है कि शोएब ने गाय को अकेला देखकर उसके साथ गंदा काम किया।

सुमित के छोटे भाई ने शोएब को गाय के साथ गंदा काम करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया, मगर वह किसी तरह से वहाँ से भागने में कामयाब हो गया। इसके बाद सुमित ने शोएब के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा-11 में केस दर्ज कराया। बताया जा रहा है कि डासना निवासी शोएब को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस मामले में अधिक जानकारी के लिए ऑपइंडिया ने मसूरी थाना क्षेत्र में संपर्क करने की कोशिश की, मगर लाइन लगातार व्यस्त आने की वजह से बात नहीं हो पाई।

गौरतलब है कि किसी गाय के साथ गंदा काम करने का ये पहला मामला नहीं है। आए दिन पशुओं पर की जाने वाली ऐसी बर्बरता की खबरें हमें सुनने को मिलती रहती हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के टप्पल थाने के अंतर्गत स्थित नूरपुर गाँव में एक आवारा गाय को पीटने की खबर आई। इतना ही नहीं, जब एक युवक ने गाय के साथ क्रूरता का विरोध किया तो उसे भी पीट-पीट कर घायल कर दिया गया। शनिवार (जुलाई 3, 2021) को हुई इस घटना के दौरान गाय और उक्त युवक घायल हो गए।

इस पूरी घटना के मामले में इरफान व इरशाद पुत्र बल्लू और दिलशाद पुत्र उन मुहम्मद के अलावा 3 अज्ञात FIR दर्ज करवाई गई। रिंकू सिंह ने अपनी तहरीर में बताया था कि दोपहर को वह अपने ट्रैक्टर पर ईंट लाद कर टप्पल से लौट रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि कुछ युवक एक छुट्टा गाय को परेशान कर रहे हैं। इस पर उन्होंने उन लड़कों को टोका और पास बैठे बुजुर्गों से उन्हें मना करने का निवेदन किया।

इस पर आरोपित भड़क गए और उन्होंने लाठी-डंडों और सरिये से रिंकू सिंह की पिटाई शुरू कर दी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि उनके हाथ और पसलियों में चोटें आई। इस घटना के सामने आते ही ‘अखंड भारत हिंदू सेना’ के सह जिला संयोजक गणेश हिंदू, हिंदू वाहिनी मंच के जिलाध्यक्ष अजय शर्मा, युवा सोच आर्मी के फाउंडर रोहित गोस्वामी और सचिन पंडित ने प्रशासन से माँग की थी कि आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

दोहा समझौते से मुकरा तालिबान, हालात ठीक नहीं: अफगानिस्तान पर सर्वदलीय बैठक में बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर

अफगानिस्तान के हालातों पर हुई सर्वदलीय बैठक में आज (अगस्त 26, 2021) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को वहाँ की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इस समय उनका ध्यान केवल अफगानिस्तान में फँसे लोगों को बाहर निकालने में है और केंद्र सरकार इस दिशा में सबकुछ कर रही है।

डॉक्टर एस जयशंकर ने बताया कि तालिबान के मुद्दे पर भारत की नीति ‘वेट एंड वॉच’ की है। बैठक में बताया गया कि भारत वहाँ से अपने सारे कूटनीतिक स्टाफ को वापस बुला चुका है और ऑपरेशन ‘देवी शक्ति’ के जरिए वहाँ से अपने नागरिकों तथा अफगानियों को वापस ला रहा है।

आपरेशन ‘देवी शक्ति’ के तहत 6 उड़ानें हैं। अभी तक कई भारतीयों को वापस ले आया गया है। लेकिन फिर भी कुछ लोग हैं जो उड़ान के दिन नहीं पहुँच सके। वह निश्चित रूप से उन सभी को निकालने का प्रयास करेंगे।

विदेश मंत्री बताते हैं कि अभी तक भारत ने कई भारतीयों समेत अफगान नागरिकों को भी वहाँ से निकाला है। जानकारी के अनुसार, आज भी 35 लोग काबुल से भारत लाए गए हैं। इन्हें मिलाकर तकरीबन 800 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें ज्यादातर भारतीय और अफगान सिख व हिंदू समुदाय के लोग हैं।

विदेश मंत्री ने इस बैठक में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द अफगान में फँसे लोगों को निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि तालिबान, दोहा में किए गए समझौते से मुकर गया है और फिलहाल, अफगानिस्तान की स्थिति अच्छी नहीं है।

मालूम हो कि तालिबान और अमेरिका के बीच फरवरी 2020 में हुए दोहा समझौते में धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतंत्र को रेखांकित किया गया था। इसमें काबुल में एक ऐसी सरकार की बात कही गई थी जिसमें अफगानिस्तान के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो।

हालाँकि, कुछ समय पहले तालिबान द्वारा पूरे अफगानिस्तान पर कब्जे किए जाने के बाद हालात बदल गए। कई लोगों को अपना घर-कारोबार के साथ देश तक छोड़ना पड़ा। देश के राष्ट्रपति अशरफ गनी तक भागकर दुबई जा बैठे। इस बीच पूरे मुल्क में तालिबान की बर्बरता जारी है।

बता दें कि इस सर्वदलीय बैठक को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट करके बताया था कि अफगानिस्तान में घटनाक्रम के मद्देनजर पीएम नरेंद्र मोदी ने आदेश दिया है कि संसद में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं को पूरी जानकारी दी जाए।

इस महत्वपूर्ण बैठक में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, द्रमुक नेता टी आर बालू, अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल सहित अन्य नेताओं ने हिस्सा लिया। इनके अलावा इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल तथा संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद थे। इस बैठक के बाद विपक्ष ने माँग की है कि भारतीय प्रोजेक्ट्स का ख्याल रखा जाए।

जीसस का हैंडपंप, जीसस की बाल्टी: बांका के SC/ST इलाकों में 3 साल में 10000 हिंदू बना दिए गए ईसाई

बिहार में ईसाई धर्मांतरण के जोर पकड़ने को लेकर ऑपइंडिया लगातार आगाह करता रहा है। खासकर, ग्रामीण इलाकों से गरीबों को प्रलोभन देकर धर्मांतरित करने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। हाल ही में गया और सारण से इस तरह के मामले सामने आए थे। कुछ समय पहले हमने अपनी वीडियो रिपोर्टों में बताया था कि कैसे हिंदुओं को उनके धर्मग्रंथों के नाम पर बरगला कर चर्च अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अब एक रिपोर्ट सामने आई है जिससे बता चलता है कि बिहार के बांका जिले के अनुसूचित जाति और जनजाति (SC/ST) की बहुलता वाले जंगली-पहाड़ी इलाकों में ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार जोरों पर है।

बांका में जारी धर्मांतरण को लेकर दैनिक जागरण ने डॉ. राहुल कुमार की एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है। इसमें बताया गया है कि पिछले दो-तीन सालों के अंदर लगभग 10000 अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को ईसाई बनाया गया है। खराब आर्थिक स्थिति का फायदा उठाते हुए यह चर्च धर्मांतरण करवा रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक बांका के चांदन, कटोरिया और बौंसी में चर्च, धर्मांतरण के कार्य में संलिप्त हैं। चर्च, धर्मांतरण के लिए ऐसी बस्तियों का चयन कर रहे हैं जहाँ संसाधनों की कमी है। इन जगहों पर ईसाई धर्म के प्रचार के लिए हर रविवार को चर्च के प्रतिनिधि बैठक का आयोजन करते हैं। साथ ही धर्म बदलने वालों के लिए हर रविवार को जीसस की एक प्रार्थना सभा का आयोजन भी होता है। इसके अनुसार जयपुर, भैरोगंज, बाबूमहल, बेलहरिया, आमगाछी, बसमत्ता, चांदन सहित कई अन्य इलाकों के चर्च वर्षों से ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार और धर्मांतरण का केंद्र बने हुए हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि जब लॉकडाउन में लोगों की परेशानियाँ बढ़ीं तो यहाँ हैंडपंप (चापाकल) लगाए जाने लगे और उन्हें ‘जीसस वेल’ कहा जाने लगा। लोगों से कहा गया कि हैंडपंप में जीसस प्रवेश कर गए हैं जिससे यह जल का एक प्राकृतिक स्त्रोत बन जाएगा। साथ ही गरीबों को यह बताया जा रहा है कि जीसस ही असली भगवान हैं और जो परिवार ईसाई बन जाता है उसे जीसस वेल और बाल्टियाँ दी जाती हैं। ईसाई धर्म स्वीकार करने वाले परिवार के बच्चों को पढ़ाई के लिए चर्च बुलाया जाता है जहाँ उन्हें आवश्यक शिक्षा सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसके अलावा इन परिवारों की लड़कियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है।

रिपोर्ट में बांका के पुलिस अधीक्षक अरविन्द कुमार गुप्ता के हवाले से कहा गया है, “लोकतंत्र धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, ऐसे में कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म को अपनाने के लिए स्वतंत्र है।” धर्मांतरण के मामले पर उन्होंने कहा कि जबरन धर्मांतरण अपराध है, लेकिन अभी तक इसकी कोई शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले ही बिहार के ही सारण से धर्मांतरण की खबरें आई थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार सारण के इसुआपुर प्रखंड के सुम्हां रामचौड़ा गाँव और मढ़ौरा में ईसाई मिशनरी हिंदुओं को तरह-तरह के प्रलोभन देकर पिछले एक साल से ग्रामीणों का धर्मांतरण करा रही है। ग्रामीणों का कहना था कि एक साल में 500 से अधिक लोग धर्म परिवर्तन कर चुके हैं। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने धर्मांतरण किया है।

बता दें कि जुलाई 2021 में दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि गया में पिछले दो साल में करीब आधा दर्जन गाँवों में धर्मांतरण हुआ है। वहीं, जिन लोगों पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगा था, वो खुद भी कभी हिंदू थे।

‘The Empire में बाबर का महिमामंडन नहीं किया गया’- ट्रेलर देख हुई थी शिकायत, हॉटस्टार ने एक्शन लेने से किया इनकार

डिज्नी प्लस हॉटस्टार की आने वाली वेब सीरीज/शो ‘द एम्पायर’ को लेकर विवाद थमा नहीं है। लोग इस बात से नाराज हैं कि इस सीरीज के जरिए लाखों हिंदुओं को मारने वाले ‘बाबर’ का महिमामंडन किया जा रहा है। इस संबंध में प्लेटफॉर्म के ग्रीवांस ऑफिसर के पास कई शिकायतें पहुँची हैं, लेकिन सुनवाई करना तो दूर, इस मुद्दे पर ये कह दिया गया है कि ट्रेलर देख कर ये नहीं कहा जा सकता है कि इसमें बाबर का या किसी समुदाय का महिमामंडन हुआ है।

द एम्पायर को लेकर की गई शिकायत

कुल मिलाकर डिज्नी प्लस हॉटस्टार (नोवी डिजिटल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड) के ग्रीवांस अधिकारी कनिष्क कुमार ने ‘द एम्पायर’ सीरीज को लेकर मिलीं शिकायतों पर किसी प्रकार की सुनवाई या कार्रवाई करने से मना कर दिया है। प्लेटफॉर्म का ऐसा रवैया तब है, जब आईटी रूल्स 2021 के तहत नियुक्त ग्रीवांस अधिकारी को शिकायतें भेजी गईं, जैसा कि नियम बताता है।

अधिकारी ने प्लेटफॉर्म की ओर से साफ कहा है कि उन्होंने सीरीज में बाबर का महिमामंडन नहीं किया और न ही सीरीज में अयोध्या का जिक्र है। शिकायतों पर संज्ञान लेने से इंकार करते हुए ग्रीवांस अधिकारी की ओर से ‘ऑब्जर्वेशन’ के नाम पर कहा गया है कि सिर्फ यूट्यूब पर सीरीज के छोटे-छोटे सीन देख कर ये नहीं कह सकते कि इससे किसी समुदाय की भावनाएँ आहत होंगी।

अधिकारी द्वारा जारी बयान का एक बिंदु

उल्लेखनीय है कि ‘द एम्पायर’ को देश की सबसे महंगी और ग्रैंड वेब सीरीज बताया जा रहा है। इस फिल्म में शबाना आजमी, कुणाल कपूर, डिनो मोरिया, दृष्टि धामी और राहुल देव प्रमुख भूमिका में नजर आएँगे। 8 एपिसोड की यह सीरीज पाश्चात्य लेखिका एलेक्स रदरफोर्ड की किताब ‘एम्पायर ऑफ द मोगुल: रेडर्स फ्रॉम द नॉर्थ’ पर आधारित है और यह 27 अगस्त को OTT पर रिलीज होने जा रही है। 

डिज्नी प्लस हॉटस्टार के यूट्यूब चैनल पर इस सीरीज का ट्रेलर 7 अगस्त 2021 को जारी किया गया था। इसके बाद ही इस पर प्रतिक्रियाएँ आनी शुरू हुईं। नोवी डिजिटल एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड के ग्रीवांस अधिकारी कनिष्क कुमार द्वारा जारी बयान में भी उल्लेख किया गया है कि उन्हें 10 अगस्त 2021 को ‘द एम्पायर’ के संबंध में शिकायत वाला ईमेल आया था। इसी के जवाब में उन्होंने शिकायतकर्ता के पक्ष को खारिज करते हुए उसे ‘प्रीमैच्योर’ करार दिया और लिखा कि चाहे फिल्म हो या सीरीज, बिना उसे पूरी देखे राय निर्मित नहीं करनी चाहिए।

ग्रीवांस अधिकारी द्वारा लिया गया निर्णय

ट्रेलर के बाद हुई शिकायतों को खारिज करने का है अधिकार?

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के ग्रीवांस अधिकारी अपने आप इस बात को मान चुके हैं कि अगर कोई शख्स ट्रेलर देख कर शिकायतें करता है तो उन्हें उसे खारिज करने का अधिकार है। अपनी बात को सही साबित करने के लिए उन्होंने ‘ग्रहण’ का उदाहरण दिया है। इसमें बताया गया है कि उन्हें ‘ग्रहण’ सीरीज को लेकर भी ऐसी शिकायतें मिली थीं, लेकिन तब भी यही बात निकल कर आई थी कि छोटे ट्रेलर से धारणा नहीं बनानी चाहिए। इसके बाद उस अपील को प्रीमैच्योर कहकर खारिज कर दिया गया था।

कोर्ट से मिली डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को राहत

उल्लेखनीय है कि इसी साल भारत सरकार ने डिजिटल मीडिया यूजर्स की शिकायतों और उनकी समस्याओं के मद्देनजर नए आईटी रूल्स लागू किए थे। लेकिन कुछ दिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरीज और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड के लिए गाइडलाइंस) रूल्स, 2021 के दो प्रावधानों के पालन करने पर रोक लगाकर इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को राहत प्रदान कर दी। हाईकोर्ट ने नियम 9(1) और 9(3) पर रोक लगाते हुए पाया था कि प्रथम दृष्टतया ये प्रावधान फ्रीडम ऑफ स्पीच के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2002 के मूल प्रावधानों के खिलाफ भी हैं।

नीरज चोपड़ा का भाला पाकिस्तानी अरशद नदीम के हाथ में: वीडियो से सारी शंकाओं को दूर किया गोल्डन बॉय ने

टोक्यो ओलंपिक के गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को एक इंटरव्यू दिया था। इसके बाद सोशल मीडिया में इसे लेकर कुछ शंकाएँ एक पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर अरशद नदीम को लेकर हो गई थी। अब नीरज चोपड़ा ने एक वीडियो ट्वीट कर सारी शंकाओं को विराम दे दिया है।

नीरज ने वीडियो में कहा:

“सभी को नमस्कार। सबसे पहले तो सभी का नमस्कार करता हूँ कि आप लोगों ने इतना सपोर्ट किया, इतनी दुआएँ दीं, इतना प्यार दिया। काफी अच्छा लग रहा है।

साथ में मैं बताना चाहूँगा कि अभी एक मुद्दा उठ रहा है, जो अभी मैंने एक इंटरव्यू में कहा कि जो जैवलिन है, वो पहली थ्रो करने से पहले अरशद नदीम जो पाकिस्तानी जैवलिन थ्रोअर है, उससे जैवलिन ली… तो उसका काफी बड़ा मुद्दा बना दिया है, जोकि एक बहुत ही सिंपल सी बात है कि हम जो हमारी पर्सनल जैवलिन होती है, वो हम उसको उसमें रखते हैं, जिसे सभी थ्रोअर उसे यूज कर सकते हैं। ये रूल है। इसमें ऐसा बिल्कुल कुछ भी गलत नहीं है कि वो जैवलिन लेके प्रिरेअर कर रहा था अपनी थ्रो के लिए और मैंने अपनी थ्रो के लिए उसको माँगा।

ये इतनी बड़ी बात नहीं है। मुझे काफी दुख है कि इस बात को मेरा सहारा लेके इतना बड़ा मुद्दा बना रहे हैं। आप सभी से यही विनती करता हूँ कि ऐसा ना करें। स्पोर्ट्स सभी को मिल कर चलना सिखाता है। हम सभी जैवलिन थ्रोअर प्यार से रहते हैं, सभी आपस में अच्छे से बात करते हैं, तो कोई भी ऐसी बात न कहें, जिससे हमको ठेस पहुँचे। थैंक यू।”

नीरज चोपड़ा-अरशद नदी-जैवलीन मामला

नीरज चोपड़ा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया था कि वह फाइनल राउंड की शुरुआत में अपने भाले को खोज रहे थे और उन्हें वह मिल नहीं रहा था। तभी, उन्होंने पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम को अपने जैवलीन के साथ घूमते देखा। चोपड़ा ने नदीम से फौरन उनका भाला लौटाने को कहा। नदीम ने उन्हें उस भाले को दिया और फिर चोपड़ा ने खेल में पार्टिसिपेट किया। चोपड़ा कहते हैं कि इसी वाकये की वजह से वह पहली थ्रो के समय थोड़ा हड़बड़ाहट में थे।

पत्नी की इच्छा के विरुद्ध यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं… लेकिन यौन सुख के लिए निजी अंग में ऊँगली व मूली करना अपराध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक फैसले में कहा है कि पति द्वारा पत्नी के साथ जबरदस्ती बनाया गया शारीरिक संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आएगा। कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया और पति को ‘वैवाहिक बलात्कार’ (Marital Rape) के आरोपों से मुक्त कर दिया है। हालाँकि, कोर्ट ने व्यक्ति के खिलाफ अपनी पत्नी से अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में धारा 377 के तहत मामला चलाने की अनुमति दी।

कोर्ट का कहना है कि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन क्रिया बलात्कार नहीं है, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो, अगर पत्नी की उम्र अठारह वर्ष से अधिक है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी के साथ यौन संबंध या यौन कृत्य, जिसकी पत्नी अठारह वर्ष से कम उम्र की न हो, बलात्कार नहीं है। इस मामले में शिकायतकर्ता आवेदक नंबर 1 की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी है, इसलिए आवेदक नंबर 1/पति द्वारा उसके साथ संभोग करना या कोई भी यौन कृत्य करना, बलात्कार का अपराध नहीं माना जाएगा, भले ही वह बलपूर्वक या उसकी इच्छा के विरुद्ध हो।”

कोर्ट ने यह भी कहा, “हालाँकि, प्राइवेट पार्ट में उँगली और मूली डालने के अलावा उसने और क्या अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाए, शिकायतकर्ता ने यह नहीं बताया। केवल इस आधार पर आईपीसी की धारा 377 के तहत तय किए गए लगाए गए आरोपों को गलत नहीं कहा जा सकता है। खासकर आईपीसी की धारा 377 के संदर्भ में, जहाँ अपराधी का इरादा बार-बार पीड़ित के प्राइवेट पार्ट में किसी वस्तु को डाल कर अप्राकृतिक यौन संतुष्टि पाना था और ऐसा कृत्य आईपीसी की धारा 377 के तहत अपराध है।”

बता दें कि इस मामले में सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक आपराधिक रिवीजन दायर की गई थी। सत्र न्यायालय ने पत्नी की शिकायत पर पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 498-ए, 34, 376 और 377 के तहत और ससुराल पक्ष के खिलाफ 498ए के तहत आरोप तय किए थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि शादी के कुछ दिनों बाद ही वे उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे और उसके साथ शारीरिक हिंसा की। पति के खिलाफ आरोप यह था कि उसने विरोध के बावजूद पत्नी की योनि (Vagina) में उँगलियाँ और मूली डालकर उसके साथ अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाए।

रिवीजन याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए न्यायालय ने पति को आईपीसी की धारा 376 के तहत आरोपमुक्त कर दिया और आईपीसी की धारा 377, 498ए और 34 के तहत आरोपों को बरकरार रखा है।

गौरतलब है कि हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अप्राकृतिक सेक्स और दहेज के लिए प्रताड़ित किए जाने के एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि 15 वर्ष से अधिक उम्र की नाबालिग ‘पत्नी’ के साथ यौन संबंध को ‘बलात्कार’ नहीं माना जाएगा। इसी के साथ हाईकोर्ट ने आरोपित खुशाबे अली को जमानत दे दी थी।

दरअसल, नाबालिग लड़की ने अपने वयस्क पति खुशाबे अली के खिलाफ दहेज, मारपीट, आपराधिक धमकी और जबरन यौन संबंध बनाने के आरोप में मुरादाबाद के भोजपुर थाने में केस दर्ज कराया था। इसके बाद आरोपित ने जमानत के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के आरोपित पति की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मोहम्मद असलम ने यह फैसला सुनाया।

हिरोइन और TMC सांसद नुसरत जहां ने दिया बेटे को जन्म, पति ने कहा था – ‘6 महीने से साथ नहीं, मेरा बच्चा नहीं’

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) सांसद और अभिनेत्री नुसरत जहां ने गुरुवार (26 अगस्त 2021) को एक बेटे को जन्म दिया। एक दिन पहले ही उन्हें कोलकाता के न्योटिया (Neotia) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा उम्मीदवार रहे एक्टर यश दासगुप्ता उन्हें हॉस्पिटल लेकर गए थे।

कुछ महीने पहले नुसरत जहां की प्रेग्नेंसी की खबरों के बीच नुसरत के पति निखिल ने मीडिया से कहा था कि उन्हें नुसरत की प्रेग्नेंसी के बारे में कुछ नहीं पता है। उन्होंने नुसरत के बच्चे का पिता होने से भी इनकार किया था। निखिल ने दावा किया था कि नुसरत की प्रेग्नेंसी की खबर से वह खुद भी हैरान हैं। नुसरत के पति निखिल ने एबीपी आनंदा से कहा था कि उनकी और नुसरत की शादी टूट गई है और वे छह महीने से ज्यादा समय से साथ नहीं रह रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह से ये बच्चा उनका नहीं है। निखिल ने ये भी कहा था कि उनके और नुसरत के बीच कोई संपर्क नहीं है।

हालाँकि, काफी समय से नुसरत के बीजेपी उम्मीदवार रहे एक्टर यश दासगुप्ता के साथ कथित तौर रिलेशनशिप की खबरें भी आती रही हैं। ये दोनों ‘एसओएस कोलकाता’ की शूटिंग के दौरान करीब आए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नुसरत और यश दिसंबर में अजमेर शरीफ गए थे और उन्होंने नया साल साथ में राजस्थान में मनाया था। इसके अलावा, दोनों एक साथ दक्षिणेश्वर मंदिर भी गए थे। दोनों को कई बार साथ में वक्त गुजारते हुए देखा गया है। नुसरत और यश सोशल मीडिया पर एक दूसरे के साथ काफी तस्वीरें पोस्ट करते रहते हैं।

‘हिंदुओं का कत्लेआम करने वाले अकबर का शासनकाल सर्वश्रेष्ठ तो रामराज्य क्या?’: मनोज मुंतशिर ने पूछा तो गालीबाजी पर उतरे कट्टरपंथी

कवि मनोज मुंतशिर ने अपने हालिया वीडियो में मुगल बर्बरता का खुलासा किया है, जिसके बाद उन्हें लिबरलों, इस्लामियों और वामपंथी ‘इतिहासकारों’ के नफरतों का सामना करना पड़ रहा है। जिस पोस्ट में उन्होंने वीडियो को प्रमोट किया, उस पर काफी सारे अभद्र कमेंट्स किए गए। इतना ही नहीं, ‘इतिहासकार’ इरफान हबीब, तथाकथित पौराणिक कथाकार देवदत्त पटनायक और आरजे फहद उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने भारतीयों के खिलाफ मुगल आक्रमणकारियों की बर्बरता के बारे में बोलने पर कवि मनोज को खारिज किया।

कवि द्वारा शेयर किए गए वीडियो की एक क्लिप में वह यह पूछते हुए दिखाई दे रहे थे कि हम भारतीय अपनी विरासत की विकृति को कैसे स्वीकार कर सकते हैं। उन्होंने पूछा कि हजारों भारतीयों को मारने वाले आक्रमणकारियों और लुटेरों को नायक के रूप में कैसे दिखाया जा सकता है। उन्होंने मुगलों की ‘महिमामंडित डकैतों’ (‘glorified dacoits’) के रूप में आलोचना की। उन्होंने लोगों से अपनी विरासत को पहचानने और बर्बर एवं लुटेरों को नायकों के रूप में महिमामंडित करने से बचने के लिए कहा।

वामपंथी ‘इतिहासकार’ इरफान हबीब ने कहा, “एक कवि और लेखक को इतिहास के रूप में संदिग्ध और काल्पनिक तर्कों का उपयोग करके जहर उगलते हुए देखना दुखद है।”

दिलचस्प बात यह है कि तथाकथित पौराणिक कथाकार देवदत्त पटनायक ने मनोज को इतिहास का पाठ पढ़ाने के लिए विकिपीडिया का इस्तेमाल किया। उसने कहा, “इस आदमी को इतिहास किसने पढ़ाया? वह बंगाल पर मराठा आक्रमण को क्या कहेंगे?” इस दौरान पटनायक ने विकिपीडिया का लिंक भी शेयर किया।

आरजे फहद ने रेख्ता के लिए मनोज का साक्षात्कार लेने पर खेद व्यक्त किया और कहा, “मुझे खेद है कि मैंने रेख्ता के लिए इस नफरत फैलाने वाले और धर्मांध व्यक्ति का साक्षात्कार लिया। इतना जहर कहाँ से लाते हैं ये लोग?”

वहीं, इस्लामी हुसैन हैदरी ने कहा, “यह पहली बार नहीं है जब वह नफरत या झूठ फैला रहे हैं और यह आखिरी बार भी नहीं होगा। यह कोई आउट ऑफ ब्लू (अप्रत्याशित) वीडियो नहीं है। खैर, सरकार और समाज ने दंडित करने के बजाय मुस्लिम विरोधी जहर उगलने के लिए प्रोत्साहित किया हुआ है, सो उगल रहा है।”

मनोज द्वारा शेयर किए गए हालिया वीडियो में क्या है?

हाल ही में मनोज मुंतशिर ने अपने यूट्यूब चैनल पर जो वीडियो शेयर किया है उसमें उन्होंने धर्म, जाति और अन्य बाधाओं से परे नायकों को चुनने की बात की। उन्होंने मुगलों के इतिहास को ‘गौरवशाली’ बताकर पढ़ाने और हिंदुओं के खिलाफ हुए अत्याचारों को छुपाने पर इतिहासकारों और शिक्षकों से सवाल किया। मनोज ने पूछा कि अकबर द्वारा हिंदुओं पर जजिया हटाने का जिक्र क्यों है, जबकि इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि शासक के रूप में उसने अपने कार्यकाल के दौरान फिर से जजिया लगाया था।

साथ ही, उन्होंने सवाल किया कि जब किताबों में ‘ग’ से गणेश हटा कर ‘ग’ से गधा लिख दिया गया तो किसी ने आपत्ति क्यों नहीं की। मनोज ने कहा कि रावण के ब्राह्मण होने के बावजूद कोई भी ब्राह्मण उसकी पूजा नहीं करता, क्योंकि वह दुष्ट था। उन्होंने कहा कि हमें अपने नायकों को उनके कर्मों के आधार पर चुनना चाहिए, न कि उनकी पहचान के आधार पर। उन्होंने वर्षों से तथाकथित इतिहासकारों और सरकारों द्वारा किए गए ज़बरदस्त मुगल महिमामंडन के खिलाफ बात की थी।

उन्होंने अकबर के कार्यकाल को भारतीय इतिहास में सर्वश्रेष्ठ कहने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, “शासक के रूप में उनका कार्यकाल इतिहास में सबसे अच्छा कैसे होगा जब हजारों हिंदुओं को इस्लाम में परिवर्तित नहीं करने के लिए मार दिया गया था। अगर उनका कार्यकाल सबसे अच्छा था, तो राम राज्य क्या था?” मनोज ने उन नेताओं पर सवाल उठाया जिन्होंने इस तथ्य की अनदेखी करते हुए कि मुगलों ने हजारों हिंदुओं को बेरहमी से मार डाला और मंदिरों को नष्ट कर दिया, मुगलों के नाम पर सड़कों का खुशी-खुशी उद्घाटन किया।

8 साल का बच्चा, हाथ में रक्षा सूत्र… दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल के टीचर ने जबदस्ती पिलास से काटा… जख्मी हुआ हाथ

बिहार की राजधानी पटना में एक स्कूल है- दिल्ली मॉडल पब्लिक स्कूल (DMPS)। इस स्कूल से झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। स्कूल में 8 साल के एक बच्चे को इसलिए सजा दी गई, क्योंकि उसने अपनी कलाई पर ‘कलावा’ (लाल रंग का रक्षा सूत्र) बाँध रखा था। बच्चा कक्षा 4 में पढ़ता है। स्कूल के दीप नारायण नाम के शिक्षक ने गुस्से में पिलास (एक प्रकार का औजार, जो तार को मोड़ने, काटने और ऐंठने आदि के लिए इस्तेमाल किया जाता है) से इस तरह कलावा काटा कि बच्चे की कलाई पर गहरी चोट आई। उसकी कलाई पर कटने के निशान साफ तौर पर देखी जा सकती है।

इस बात की जानकारी बच्चे की बड़ी बहन प्रज्ञा भूमिहार ने ट्विटर के माध्यम से दी। ऑपइंडिया ने इस मामले की अधिक और सही जानकारी के लिए प्रज्ञा से संपर्क किया। प्रज्ञा ने जो हमें बताया, वह और भी हैरान करने वाला था। उन्होंने बताया कि घटना मंगलवार (अगस्त 24, 2021) की है, जिसकी जानकारी उन्हें बुधवार (अगस्त 25, 2021) को तब हुई, जब वह अपने भाई को स्कूल के लिए तैयार करते हुए स्कूल ड्रेस पहना रही थीं। उन्होंने बताया कि उनका भाई इस घटना से इतना ज्यादा डरा हुआ था कि उसने किसी को भी कुछ नहीं बताया।

घटना के बारे में पूरी जानकारी देते हुए प्रज्ञा ने बताया कि दो दिन पहले स्कूल के पीटी टीचर ने सभी बच्चों को लाल धागा (रक्षा सूत्र) काट कर आने के लिए कहा था। टीचर ने कहा था कि धागा बाँध कर स्कूल नहीं आना है। वह बताती हैं कि उनके भाई के हाथ में पतला सा धागा था, जो कि वाराणसी का प्रसाद था। प्रज्ञा ने कहा,

“जब मेरे भाई ने इस बारे में बताया तो मैंने कहा कि जाओ टीचर को बोलना कि यह वाराणसी का प्रसाद है, मैं इसे नहीं काटूँगा। दूसरे दिन सारे छात्र धागा काट करके गए थे, लेकिन मेरा भाई नहीं गया था, क्योंकि हम लोग वो धागा नहीं काटते हैं, मेरे परिवार में हर कोई वह रक्षा सूत्र हमेशा बाँधता है। मेरे भाई के हाथ में रक्षा सूत्र देख कर उसे (टीचर) इतना गुस्सा आया कि उसने पिलास लेकर उसे ऐसे खींचा कि उसका हाथ भी कट गया और उसने धागा भी काट कर फेंक दिया। इसके बाद उसने बोला कि देखते हो न मैं सीनियर भैया लोग को कैसे पीटता हूँ, वैसे ही तुम लोग को भी सजा मिलेगी।”

इतना ही नहीं, स्कूल में उसी टीचर ने उनकी बहन को भी रक्षा सूत्र पहनने के लिए सजा दिया। प्रज्ञा बताती हैं,

“उसने रक्षा सूत्र पहनने के लिए मेरी बहन को 2-4 राउंड दौड़ाया। उसने सभी से रक्षा सूत्र काटने के लिए कहा। सभी लड़कियों ने काट लिया, लेकिन मेरी बहन ने नहीं काटा। उसने कहा कि सर, आप मुझे जो भी सजा देंगे, दे दीजिए, लेकिन मैं धागा नहीं काटूँगी। तो उसने उसे फील्ड में दौड़ाया। चूँकि वह बड़ी है तो उसने मना कर दिया, लेकिन भाई अभी छोटा है, तो गुस्से में उसका धागा इस तरह काटा कि उसका हाथ भी कट गया। इससे वह इतना डरा हुआ था कि उसने घर में किसी को कुछ नहीं बताया। दूसरे दिन जब मैं स्कूल ड्रेस पहना रही थी, तब मैंने देखा। जिसके बाद पूछने पर उसने सारी घटना बताई।”

प्रज्ञा का कहना है कि वह आज (अगस्त 26, 2021) इस मामले पर बात करने के लिए स्कूल जा रही हैं। उन्होंने बताया कि फोन पर स्कूल प्रशासन से बात हुई है, लेकिन वह लोग इसे हल्के में ले रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल में धागा काट दिया जाता है। प्रज्ञा ने कहा कि उनके पास उस पीटी टीचर का तो नंबर नहीं है, लेकिन उन्होंने स्कूल के एक अन्य सीनियर टीचर से इस बारे में बात की तो उनका कहना है कि स्कूल में धागा बाँध कर आने की अनुमति नहीं है, धागा ज्यादा था तो हमने काट दिया। लेकिन प्रज्ञा का कहना है,

“वह बहुत पतला सा धागा था। ज्यादा नहीं था और ज्यादा था भी तो उससे क्या दिक्कत थी, वह एक धागा था और उसे हाथ में बाँधने से किसी को क्या असहज महसूस हो सकता है? जब बच्चे को उससे असहज महसूस नहीं हो रहा है, तो उन्हें क्यों दिक्कत हो रहा है? वह कोई बड़ा सा तलवार, कटारी या एके 47 थोड़े है, जो किसी को असहज महसूस होगा।”

हमने भी मामले पर स्कूल का पक्ष जानने के लिए स्कूल प्रशासन से बात करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। संपर्क होते ही स्कूल प्रशासन का पक्ष भी लिखा जाएगा। 

प्रज्ञा से बातचीत में एक और हैरानी की बात सामने आई कि इनके अलावा किसी भी बच्चे के माता-पिता ने इस पर आपत्ति नहीं जताई। सभी ने अपने-अपने बच्चों को धागा काट कर स्कूल भेजा था। आजकल लोगों में नास्तिकता न जानें क्यों घर कर रही है और आपको जानकर ताज्जुब होगा कि नास्तिकों में सबसे आगे हिंदू हैं, वो हिंदू जिनकी संस्कृति-संस्कारों का लोहा पूरा विश्व मानता है। यदि आप उन नास्तिकों से बात करें और उनको समझाने की कोशिश करें तो उनका जवाब आता है, “I don’t believe in bhagwan or God and all this, just don’t try to impose your believe to us or me.” ये उन नई पीढ़ी के अंग्रेज हिंदुओ की आवाज में है, जो आजकल ज़्यादा ही ‘मॉडर्न’ हो रहे हैं, जो चर्च जाने को शान समझते हैं, परंतु मंदिर जाना और पूजा पाठ करना उन्हें ढोंग से कम नहीं लगता।

इसी का फायदा उठाते हुए जान-बूझकर हिंदू समाज की भावनाओं से खिलवाड़ करने से कोई झिझकता नहीं है। भारत हिंदू बहुल देश है, लेकिन इसके बावजूद हिन्दुओं की भावनाओं से खिलवाड़ होता है, ऐसा क्यों? इस पर हिंदू समाज को आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। जाति व सम्प्रदाओं में बँटे हिंदू समाज की कमजोरी का लाभ हिंदू विरोधी लेते हैं। समाज जब किसी मामले पर विरोध करता है तो दोषी के माफी माँगने पर मामला समाप्त हो जाता है।

देश के संविधान अनुसार कोई भी दूसरे की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ नहीं कर सकता, लेकिन हिंदू भावनाओं से स्वतंत्रता मिलने से लेकर आज तक खिलवाड़ होता चला आ रहा है। इसका बड़ा कारण तुष्टिकरण की नीति भी है। मत प्राप्त करने हेतु सत्ता में बैठे लोग हिंदू भावनाओं से होते खिलवाड़ की अनदेखी करते आए, जबकि अगर जाने-अनजाने में अल्पमत समाज के धर्म को लेकर किसी ने टिप्पणी कर दी है तो सरकार कठोर कार्रवाई करती है और समाज तो मरने-मारने तक पहुँच जाता है।

जितनी आसानी से हिंदू धर्म को निशाना बनाकर उनके देवी-देवताओं, पूजास्थलों की गरिमा, आस्था को ठेस पहुँचाने के बाद भी ठेठी दिखाई जाती है, क्या उतनी ही आसानी से अन्य धर्मों पर भी ऐसा कुछ बना लेने का साहस होगा? यदि हिंदू इस पर प्रतिकार करने उठता है तो वह असहिष्णु हो जाता है। इस देश में गजब का तमाशा चल रहा है। एक तो हिंदू धर्म से घृणा कर उसके धर्म पर विमर्श या कला के नाम पर अनर्गल टीका, टिप्पणी, फिल्म, वेब सीरीज बनाकर अपमानित करना और दूजा कि वह चुपचाप सब कुछ बैठकर सहता रहा आए। क्यों भाई तथाकथित ठेकेदारों क्यों? इतनी नफरत और घृणा क्यों? क्या हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं, धर्म का कोई भी स्थान नहीं है? यदि धर्म की रक्षा करनी है तो इन सबकी जड़ों में प्रहार करना होगा, अन्यथा ये विधर्मी इसी तरह से अपमानित एवं आस्था से खिलवाड़ करते रहेंगे।

स्कूल प्रशासन से संपर्क हो गया है। इस पूरे मामले पर उनका पक्ष जानने के लिए पढ़ें