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मीराबाई की मदद को PM मोदी जब आए आगे… चानू ने मणिपुर के CM को बताया तो वे भी रह गए हैरान

टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल हासिल करने वाली मीराबाई चानू की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीधी मदद की थी। मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इसके बारे में दुनिया को बताते हुए प्रधानमंत्री का आभार जताया है। सिंह के अनुसार जब चानू ने उन्हें इसके बारे में बताया तो वे भी हैरान रह गए थे।

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने टोक्यो ओलंपिक में जाने से पहले दो खिलाड़ियों की अमेरिका में अच्छी मेडिकल केयर और ट्रेनिंग में मदद की थी। इनमें से एक चानू थीं। दूसरे एथलीट का नाम मुख्यमंत्री ने नहीं बताया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि चानू ने एक सार्वजनिक समारोह में उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली मदद के बारे में बताया था। सीएम ने कहा कि मैं चानू से प्रधानमंत्री से मिली मदद के बारे में सुनकर हैरान था। चानू ने उनसे बताया कि अगर उन्हें मांसपेशियों के ऑपरेशन और अभ्यास के लिए अमेरिका जाने का मौका नहीं मिलता, तो वह अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पातीं। उन्होंने बताया कि पीएम मोदी को जैसे ही एथलीट के बारे में पता चला उन्होंने उनके इलाज के लिए तुरंत मदद का हाथ आगे बढ़ाया। सिंह ने कहा कि मणिपुर के लोग यह जानकर बहुत खुश हुए कि पीएम मोदी ने चानू की मदद की।

प्रधानमंत्री से मुलाकात का जिक्र करते हुए सिंह ने बताया, “जब हमने चानू की मदद करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया तो पीएम मोदी मुस्कुराते रहे। उन्होंने एक और एथलीट की भी मदद की। यह उनकी महानता है।”

सिंह ने कहा, “चानू को पीठ में दर्द की शिकायत थी। यह संदेश जब पीएमओ में मिला, तब पीएम मोदी ने बिना कोई देर किए विदेश में उनके इलाज और ट्रेनिंग पर होने वाले सभी खर्च का जिम्मा लिया।” मणिपुर के मुख्यमंत्री ने कहा, “मुझे बताया गया है कि वह अकेली नहीं हैं, जिसकी पीएम मोदी ने मदद की। प्रधानमंत्री ने कभी भी कहीं भी इसका उल्लेख नहीं किया। मैं नाम नहीं लूँगा, लेकिन एक और एथलीट है जिसे पीएम मोदी ने इलाज और ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजा था।”

गौरतलब है कि पदक हासिल करने के बाद चानू ने भी पीएम को धन्यवाद कहा था। उन्होंने कहा था, “मैं प्रधानमंत्री और खेल मंत्री को धन्यवाद देना चाहती हूँ कि उन्होंने मुझे बहुत कम समय में अभ्यास के लिए अमेरिका भेजा था। सभी तैयारियों को एक दिन में पूरा किया गया था। उनके कारण ही मुझे अच्छा प्रशिक्षण मिला और मैं पदक जीतने में सफल रही। मेरी सफलता का श्रेय टारगेट ओलंपिक पोडियम जैसी योजनाओं को भी जाता है।”

45 साल में 54 विरासत देश लौटे, इनमें से 41 तो मोदी सरकार के 7 साल में आईं: 14 कलाकृतियाँ वापस करेगा ऑस्ट्रेलिया

साल 2014 में केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद विदेशों से 41 कलाकृतियों को वापस भारत लाया गया है। ये अब तक लौटाई गई कुल वस्तुओं का 75 फीसदी से भी अधिक है। इसकी जानकारी केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने गुरुवार (5 अगस्त 2021) संसद में एक सवाल के जवाब में दी।

केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में कहा कि 1976 से अब तक विदेशों से कुल 54 पुरावशेष वापस लाए गए हैं, जिनमें से 41 को पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत वापस लाया गया है।रेड्डी ने कहा, “यह गर्व की बात है कि चोरी कर विदेशों में भेजी गई अपनी विरासत वस्तुओं को हम विदेशों से वापस लाने में सक्षम हैं। पिछले सात वर्षों में बरामद पुरावशेषों की संख्या अब तक की सबसे अधिक है। 2014 के बाद से भारत 41 विरासत वस्तुओं को वापस लाया है, जो कुल वस्तुओं का 75 प्रतिशत से भी अधिक है।”

उन्होंने इस सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों के कारण भारत की विरासत के पुरावशेषों को फिर से वापस लाया जा सका है। संस्कृति मंत्री ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि हाल की सफलता हमारे सांस्कृतिक संबंधों में लगातार सुधार के कारण है जो हमारे प्रधानमंत्री के विभिन्न राष्ट्राध्यक्षों के साथ घनिष्ठ व्यक्तिगत संबंधों के कारण संभव हुए हैं और इसलिए उनकी शीघ्र वापसी संभव हुई है।” रेड्डी ने ASI, CBI जैसी विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अथक प्रयासों की भी सराहना की।

रेड्डी ने कहा, “1976 से कॉन्ग्रेस सरकार ने करीब 25 सालों तक शासन किया, लेकिन इस दौरान 10 से भी कम पुरावशेषों को भारत वापस लाया गया। यह भारतीय संस्कृति, सभ्यता और विरासत को संरक्षित करने के प्रति कॉन्ग्रेस सरकारों की उदासीनता और सम्मान की कमी को दिखाता है।”

गौरतलब है कि एक सप्ताह पहले ही ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी ने भारत सरकार को सांस्कृतिक महत्व की 14 कलाकृतियों को वापस करने का फैसला किया था। 29 जुलाई 2021 को ऑपइंडिया ने बताया कि कुल 14 कलाकृतियों को वापस लाया जा रहा है, जिसमें छह कांस्य या पत्थर की मूर्तियाँ, एक पीतल का जुलूस मानक, एक चित्रित स्क्रॉल और छह तस्वीरें शामिल हैं। यह कलेक्शन करीब 2.2 मिलियन डॉलर (करीब 16.34 करोड़ रुपए) का है। इनमें से कुछ कलाकृतियाँ 12वीं शताब्दी की हैं। नेशनल गैलरी ऑस्ट्रेलिया (NGA) के निदेशक ने कहा था, “यह सांस्कृतिक जिम्मेदारी है और ये ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच आपसी सहयोग का परिणाम है।”

एडल्ट फिल्में बनाने वाली ‘उल्लू’ के CEO विभु अग्रवाल यौन शोषण में फँसे, कंपनी की कंट्री हेड अंजलि रैना पर भी केस

मुंबई पुलिस ने फिल्म निर्माता विभु अग्रवाल के खिलाफ यौन शोषण के आरोप में केस दर्ज किया है। पुलिस ने बताया, ”फिल्म निर्माण कंपनी उल्लू डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ विभु अग्रवाल के खिलाफ मुंबई में एक महिला ने यौन शोषण (sexual harassment) का आरोप लगाया है, जिसके चलते मुंबई पुलिस ने उन पर आईपीसी की धारा 354 के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उनकी कंपनी की कंट्री हेड अंजलि रैना पर भी केस दर्ज किया गया है।”

विभु की उल्लू डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी है। यह कंपनी एडल्ट फिल्में बनाने के लिए जानी जाती है। बताया जा रहा है कि 2013 में विभु अग्रवाल ने बॉलीवुड फिल्म ‘बात बन गई’ प्रोड्यूस की थी। इसके बाद साल 2018 में उन्होंने उल्लू एप लॉन्च किया था। इस पर हिंदी और अंग्रेजी के अलावा भोजपुरी, बंगाली, पंजाबी, मराठी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और गुजराती भाषा में एडल्ट कंटेंट उपलब्ध कराए जाते हैं।

गौरतलब है कि पोर्न फिल्में बना कर एप के माध्यम से बेच कर कमाई करने के आरोपों में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को भी 19 जुलाई, 2021 को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने राज कुंद्रा को पर्याप्त सबूतों के आधार पर पकड़ा था। पोर्न वीडियोज के मामले में कुंद्रा के खिलाफ फरवरी 2021 में शिकायत हुई थी। शिकायत में कुंद्रा पर अश्लील सामग्री सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का आरोप लगाया गया था।

एक मंदिर जिसे इस्लामिक आक्रांताओं ने तोड़ा, जहाँ खिलजी ने इस्लाम नहीं कबूल करने पर कर दी थी 1200 छात्र-शिक्षकों की हत्या

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है भोजशाला सरस्वती मंदिर। काशी विश्वनाथ और श्री कृष्णजन्मभूमि जैसे कई ऐसे मंदिर हैं जिन्हें मुस्लिम आक्रांताओं ने नष्ट कर अथवा उसी के हिस्सों का प्रयोग कर उन्हें मस्जिद में बदल दिया। भोजशाला भी उनमें से एक है जहाँ वर्तमान समय में बसंत पंचमी का उत्सव भी मनाया जाता है और शुक्रवार की नमाज भी पढ़ी जाती है और यह सब हुआ इस्लामिक कट्टरपंथी अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा मंदिर को नष्ट किए जाने बाद।

इतिहास

परमार राजवंश के शासक राजा भोज ने धार में एक महाविद्यालय की स्थापना की थी जिसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा। राजा भोज माता सरस्वती के महान उपासक थे और संभवतः यही कारण था कि उनकी रूचि शिक्षा एवं साहित्य में बहुत ज्यादा थी। राजा भोज ने ही सन् 1034 में भोजशाला के रूप में एक भव्य पाठशाला का निर्माण किया और यहाँ माता सरस्वती की एक प्रतिमा स्थापित की। इसे तब सरस्वती सदन कहा था। भोजशाला को माता सरस्वती का प्राकट्य स्थान भी माना जाता है।

भोजशाला मंदिर से प्राप्त कई शिलालेख 11वीं से 13वीं शताब्दी के हैं। इन शिलालेखों में संस्कृत में व्याकरण के विषय में वर्णन किया गया है। इसके अलावा कुछ शिलालेखों में राजा भोज के बाद शासन सँभालने वाले राजाओं की स्तुति की गई। कुछ ऐसे भी शिलालेख भी हैं जिनमें शास्त्रीय संस्कृत में नाटकीय रचनाएँ उत्कीर्णित हैं। माता सरस्वती के इस मंदिर को कवि मदन ने अपनी रचनाओं में वर्णित किया था। यहाँ प्राप्त हुई माता सरस्वती की मूल प्रतिमा वर्तमान में लन्दन के संग्रहालय में है।

माता सरस्वती का मंदिर होने के साथ भोजशाला भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक था। इसके आलावा यह स्थान विश्व का प्रथम संस्कृत अध्ययन केंद्र भी था। इस विश्वविद्यालयमें देश-विदेश के हजारों विद्वान आध्यात्म, राजनीति, आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष, कला, नाट्य, संगीत, योग, दर्शन आदि विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। इसके अतिरिक्त इस शिक्षा केंद्र में वायुयान, जलयान तथा कई अन्य स्वचालित (ऑटोमैटिक) यंत्रों के विषय में भी अध्ययन किया जाता था।

इस्लामिक आक्रमण

ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक सन् 1305 में मुस्लिम आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण किया और उसे नष्ट कर दिया। बाद में सन् 1401 में दिलावर खां ने भोजशाला के एक भाग में मस्जिद का निर्माण करा दिया। अंततः सन् 1514 में महमूद शाह खिलजी ने भोजशाला के शेष बचे हिस्से पर मस्जिद का निर्माण करा दिया। समय के साथ यहाँ विवाद बढ़ता गया और अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भोजशाला को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया।

हिन्दू जनजागृति समिति की एक रिपोर्ट के अनुसार सन् 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय भोजशाला के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी खिलजी की इस्लामिक सेना का विरोध किया था। खिलजी द्वारा लगभग 1,200 छात्र-शिक्षकों को बंदी बनाकर उनसे इस्लाम कबूल करने के लिए कहा गया लेकिन इन सभी ने इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया। इसके बाद इन विद्वानों की हत्या कर दी गई थी और उनके शव को भोजशाला के ही विशाल हवन कुंड में फेंक दिया गया था।

इस तरह एक और हिन्दू मंदिर इस्लामिक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गया। बसंत पंचमी के दिन हिन्दू यहाँ माता सरस्वती की उपासना करने के लिए आते हैं, लेकिन यह पूजा-पाठ भी कानून के दायरे में रहकर और भीषण सुरक्षा-व्यवस्था के बीच संपन्न होती है। सन् 2013 में बसंत पंचमी, शुक्रवार के दिन ही थी जिसके कारण भोजशाला में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी और पुलिस को यहाँ कार्रवाई करनी पड़ी थी।

कैसे पहुँचे?

इंदौर का देवी अहिल्याबाई हवाईअड्डा, धार का नजदीकी हवाईअड्डा है जो भोजशाला मंदिर से मात्र 65 किमी की दूरी पर है। हालाँकि धार में रेल सुविधा का अभाव है। ऐसे में इंदौर रेलवे जंक्शन ही धार का नजदीकी रेलवे स्टेशन है जो यहाँ से लगभग 60 किमी दूर है। सड़क मार्ग से धार पहुँचना आसान है क्योंकि सड़क मार्ग से यह इंदौर, भोपाल और उज्जैन जैसे शहरों से जुड़ा हुआ है और यहाँ से धार के लिए अनेकों परिवहन के साधन उपलब्ध हैं।

टोक्यो ओलंपिक: आखिरी क्षणों में महिला हॉकी टीम के हाथ से फिसला कांस्य, 4 मिनट में 3 गोल दाग उड़ा दिए थे ब्रिटेन के होश

टोक्यो ओलंपिक 2020 के 15वें दिन यानी शुक्रवार (6 अगस्त) को भारतीय महिला हॉकी टीम इतिहास रचने से चूक गई। ग्रेट ब्रिटेन की टीम ने आखिरी क्षणों में निर्णायक गोल दाग मैच 4-3 से जीता और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।

पहले क्वार्टर में ब्रिटेन ने भारत पर पूरी से दबाव बनाए रखा। वहीं, दूसरे क्वार्टर टीम इंडिया ब्रिटेन पर शिकंजा कसने में कामयाब रही। रानी रामपाल की टीम ने इस क्वार्टर में तीन गोल किए और ब्रिटेन पर 3-2 की बढ़त बना ली। भारत ने ब्रिटेन के खिलाफ ये तीन गोल 4 मिनट के अंदर किए। दो गोल गुरजीत कौर और एक वंदना कटारिया ने किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वंदना का इस टूर्नामेंट में यह चौथा गोल था। हालाँकि, ब्रिटेन ने तीसरे क्वार्टर के बाद चौथे क्वार्टर में एक बार फिर भारत पर 4-3 से बढ़त बना ली। ब्रिटेन ने 48वें मिनट में गोल किया है और आखिरकार यही अंतिम नतीजा रहा।

गुरजीत कौर का शानदार प्रदर्शन

गुरजीत कौर ने दो शानदार गोल दागकर टीम इंडिया की धमाकेदार वापसी कराई। गुरजीत ने 2 मिनट के अंदर ये दोनों गोल किए। उन्होंने पहला गोल 25वें मिनट और दूसरा गोल 26वें मिनट में किया। इस गोल के साथ भारत ने ब्रिटेन की बराबरी करते हुए स्कोर 2-2 से बराबर कर लिया।

गौरतलब है कि टोक्यो ओलंपिक के 14वें दिन यानी गुरुवार (5 अगस्त) को भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को करारी शिकस्त देकर ब्रॉन्ज मेडल पर कब्जा किया था। टीम इंडिया दूसरे हॉफ में लगातार गोल दागकर जर्मनी को 5-4 से मात देकर इतिहास रचा था इस दमदार जीत के साथ भारत ने अपने चार दशक का सूखा खत्म कर देश को गौरवान्वित कर किया।

1984 सिख विरोधी दंगा पीड़ितों के लिए मोदी सरकार का पैकेज, मृतकों के आश्रितों को ₹3.50 लाख

केंद्र की मोदी सरकार ने 1984 के सिख दंगा पीड़ितों के लिए पुनर्वास पैकेज की घोषणा की है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय द्वारा गुरुवार (05 अगस्त 2021) को घोषित किए गए इस पैकेज में मृतकों के आश्रितों के लिए 3.50 लाख रुपए एवं घायलों के लिए 1.25 लाख रुपए की व्यवस्था की गई है।

अल्पसंख्यक मंत्रालय द्वारा लोकसभा में जानकारी दी गई कि इस योजना में राज्य सरकारों द्वारा मृतकों की विधवाओं और बुजुर्ग परिजनों को 2,500 रुपए की मासिक पेंशन देने का भी प्रावधान किया गया है। मंत्रालय द्वारा बताया गया कि पेंशन पर आने वाला खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

लोकसभा में मंत्रालय द्वारा जानकारी दी गई कि 2014 में केंद्र सरकार द्वारा 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए लोगों को राहत देने की योजना शुरू की गई थी। 2021-22 के केंद्रीय बजट में इसके लिए 4.5 करोड़ रुपए का प्रावधान भी किया गया था। मंत्रालय ने कहा कि बढ़ाई गई राहत राशि का भुगतान राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने फंड से करेंगे, बाद में गृह मंत्रालय द्वारा यूटिलाइजेशन रिसिप्ट के आधार पर उन्हें फंड जारी किया जाएगा।

ज्ञात हो कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद राजधानी दिल्ली समेत देश के कई अन्य स्थानों में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे थे। कई दिनों तक चलने वाले इस नरसंहार में दिल्ली में ही लगभग 3,000 लोगों की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा लगभग 50,000 सिख बेघर हो गए थे। सिखों के खिलाफ हुए इस क्रूर नरसंहार के बाद ही प्रधानमंत्री राजीव गाँधी ने कहा था, “जब बड़ा पेड़ गिरता है तो आसपास की जमीन हिलती है।”

पाकिस्तान में गणेश मंदिर तोड़ने पर भारत सख्त, सालभर में 7 मंदिर बन चुके हैं इस्लामी कट्टरपंथियों का निशाना

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के रहीमयार खान के पास स्थित भोंग शहर में कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकियों द्वारा भगवान गणेश के मंदिर में तोड़फोड़ की गई है। कट्टरपंथियों ने मंदिर में घुसकर भगवान गणेश और शिव-पार्वती की मूर्तियों को तोड़ दिया और मंदिर में लगे झूमर व घंटों को भी तहस-नहस कर दिया। इस हमले में मंदिर परिसर को भी काफी नुकसान पहुँचाया गया है।

सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने संज्ञान लेते हुए पाक उच्चायुक्त को तलब किया और अपना विरोध दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान में पहले भी कई हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाया गया है। एक बार फिर हिन्दू मंदिर पर हुआ हमला बताता है कि पाकिस्तान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में पूरी तरह से असफल रहा है।

पाकिस्तान में हिन्दू महिलाओं के अपहरण, बलात्कार और उनके धर्मांतरण की खबरें लगातार आती रहती हैं, लेकिन मुल्क की कुल जनसंख्या की मात्र 2.14% हिन्दू आबादी पर होने वाले अत्याचार सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं हैं। हिन्दुओं के व्यापार, घर-संपत्ति और पूजा स्थलों को भी लगातार निशाना बनाया जाता रहा है।

यहाँ हम पाकिस्तान के उन प्रमुख मंदिरों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, जो पिछले एक साल में इस्लामिक कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गए।

भोंग का गणेश मंदिर

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भगवान गणेश के मंदिर में बुधवार (04 अगस्त 2021) को हुए आतंकी हमले के बारे में बताया जा रहा है कि मंदिर में भगवान की मूर्तियों को पत्थर और लकड़ी के लट्ठ से मारकर तोड़ा गया। वो यहीं नहीं रुके। घटना को अंजाम देने के बाद उन्होंने मंदिर को आग के हवाले भी कर दिया। इस दौरान पाकिस्‍तान के इस्लामिक कट्टरपंथ‍ियों ने इस पूरी घटना को फेसबुक पर लाइव भी किया।

इस्लामाबाद का कृष्ण मंदिर

इस्लामाबाद में जुलाई 2020 में भगवान कृष्ण के निर्माणाधीन मंदिर पर हमला किया गया था। यह इस्लामाबाद का पहला हिन्दू मंदिर था। नगरीय प्रशासन ने पहले इस मंदिर के निर्माण के लिए फंड भी जारी किया था, जो बाद में रोक दिया गया था। वर्तमान में हिन्दू पंचायत द्वारा अपने खर्चे पर मंदिर का निर्माण किया जा रहा है।

हनुमान मंदिर पर हमला

पिछले साल अगस्त में सिंध के ल्यारी इलाके में विभाजन के पहले के हनुमान मंदिर को बिल्डर द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। मंदिर के आसपास रहने वाले 18 परिवारों ने बताया कि वो बचपन से उस मंदिर को देखते आए हैं और वहाँ दर्शन के लिए जाते रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पहले बिल्डर ने मंदिर को किसी भी तरह का नुकसान न पहुँचाने की बात कही थी, लेकिन बाद में हिंदू समाज को धोखा दे दिया गया।

ध्वस्त किया गया हनुमान मंदिर (फोटो: नेशनल हेराल्ड)

दुर्गा माता मंदिर को बना निशाना

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नगरपारकर इलाके में साल 2020 में अक्टूबर में श्रीराम पर हमला हुआ था जहाँ, स्थापित माता दुर्गा माता की प्रतिमा के सिर को धड़ से अलग कर दिया गया था। साथ ही मंदिर को अज्ञात कट्टरपंथियों द्वारा अपवित्र करने का कार्य भी किया गया था।

सैकड़ों की भीड़ ने तोड़ा कृष्ण द्वार मंदिर

बीते दिसंबर में सैकड़ों पाकिस्तानी कट्टरपंथियों की भीड़ ने खैबर पख्तूनख्वा के करक जिले में कृष्ण द्वार मंदिर को आग के हवाले कर दिया था। सन 1919 के इस मंदिर को 1947 में विभाजन के समय बंद कर दिया था और कई दशक बाद 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ था। हालाँकि, इसी साल जुलाई में खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने 350 लोगों के खिलाफ यह कहते हुए केस वापस ले लिया था कि हिन्दुओं ने उन्हें माफ कर दिया है।

रावलपिंडी का 100 साल पुराना मंदिर

इसी साल मार्च में रावलपिंडी के गैरिसन सिटी में कट्टरपंथियों ने निर्माणाधीन हिन्दू मंदिर में तोड़फोड़ की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 12 लोग मंदिर में घुस आए थे और उन्होंने मंदिर के दरवाजों समेत अन्य हिस्सों को नुकसान पहुँचाया था।

पुराना किले में स्थित मंदिर पर हमला (फोटो: न्यूज भारती)

माता रानी के मंदिर में तोड़फोड़

जनवरी 2020 में सिंध के चाचरो में कट्टरपंथी इस्लामिक भीड़ ने माता रानी भटियाणी देवी के मंदिर पर हमला कर उसे नुकसान पहुँचाया था। भीड़ ने न केवल माता रानी की प्रतिमा को अपवित्र किया था, बल्कि हिन्दू धर्म ग्रंथों को भी जला दिया था।

अपवित्र किया गया माता रानी मंदिर (फोटो : स्वराज्य)

हालाँकि, गणेश मंदिर में हुए हमले की खबर सोशल मीडिया पर फैलने के बाद फजीहत से बचने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ट्वीट करके इस मामले में कार्रवाई करने की बात कही है। खान ने कहा है कि पंजाब प्रांत के आईजी को आरोपितों की गिरफ्तारी का आदेश दे दिया गया है साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर का जीर्णोद्धार सरकार कराएगी।

वैसे पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के इस ट्वीट का कोई विशेष अंतर नहीं पड़ने वाला, क्योंकि पाकिस्तान में हिन्दुओं के प्रति जो धर्मांधता देखी जा रही है वह लगातार बढ़ती ही जा रही है और इसका खामियाजा हिन्दुओं के मंदिरों को भी भुगतना पड़ रहा है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के 365 हिन्दू मंदिरों में से 13 मंदिरों की देखरेख शरणार्थी ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड के पास है, बाकी मंदिर अपने हाल पर छोड़ दिए गए हैं।

जिस हिरोइन ने कहा था मेरे रेप और हत्या के हो रहे प्रयास, उसके घर पर पड़ा छापा तो मिले ड्रग्स

बांग्लादेश की मशहूर अभिनेत्री शमसुन्नाहर स्मृति उर्फ पोरी मोनी को पुलिस की रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) ने गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारी अवैध रूप से घर में शराब और ड्रग्स रखने के कारण हुई है। टीम ने बुधवार (अगस्त 4, 2021) को ढाका स्थित उनके घर में चार घंटे छापेमारी के बाद वहाँ से 30 विदेशी शराब की बोतलें बरामद कीं। इसके बाद उन्होंने अभिनेत्री को हिरासत में लिया। पुलिस का दावा है कि शराब के साथ ड्रग्स भी बरामद हुए हैं।

इससे पहले 4 अगस्त को पोरी ने फेसबुर पर लाइव आकर कहा था, भाई, आप मेरी हालत समझ रहे हैं। बनानी थाने से कोई नहीं आ रहा है। मुझे उनकी मदद की जरूरत है। मुझे डर लग रहा है। तीन दिनों से मैं बिस्तर से नहीं उठ सकी हूँ। घर के गेट पर 20 मिनट से कोई आवाज कर रहा है। मुझे दरवाजा खोलने में डर लग रहा है। वे खुद को पुलिसकर्मी बता रहे हैं। लेकिन जब मैंने बनानी पुलिस स्टेशन से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा, उनके पुलिस स्टेशन से कोई पुलिसकर्मी नहीं भेजा गया। मैं शुरू से ही मौत से डरती थी। कोई मुझे मारना चाहता है। अगर कोई पुलिस की पहचान के साथ मुझे मारने आया तो मैं क्या करूँगी?”

उल्लेखनीय है कि पोरी मोनी पर हुई इस कार्रवाई से दो माह पहले उन्होंने जून में एक फेसबुक पोस्ट के जरिए बांग्लादेश के एक उद्योगपति नसीर उद्दीन महमूद पर रेप और हत्या के प्रयास का आरोप लगाया था। अभिनेत्री का कहना था कि नसीर ने उनपर हमला क्लब में किया था। ढाका बोट क्लब के संस्थापक सदस्य नसीर रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा था, जिसके विरुद्ध अभिनेत्री ने शिकायत की थी।

एक्ट्रेस ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को ‘माँ’ संबोधित करते हुए फेसबुक पोस्ट लिखा था। इसमें उनका दावा था कि उन्होंने कानून लागू करने वाले अधिकारियों से मदद माँगी लेकिन उन्हें न्याय नहीं मिला। उन्होंने बांग्ला भाषा में लिखी पोस्ट में कहा, “आखिर मैं कहाँ न्याय माँगूँगी? मैं पिछले चार दिन से इसके लिए भटक रही हूँ…। हर कोई मुझसे सारी बातें सुनता है, लेकिन उस पर कार्रवाई नहीं करता। मैं एक लड़की हूँ और अभिनेत्री भी हूँ लेकिन उससे पहले मैं एक इंसान हूँ। मैं चुप नहीं रह सकती।”

पोरी मोनी का फेसबुक पोस्ट

शौहर करता था अप्राकृतिक सेक्स, देवर ने किया रेप: ससुर ने बाहर से बंद कर दिया था दरवाजा

उत्तर प्रदेश के रामपुर में हलाला के नाम पर रेप का मामला उजागर हुआ है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसके शौहर ने तीन तलाक देने के बाद उसे अपने भाई के साथ कमरे में बंद करके उसका रेप करवाया। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर 7 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। महिला का शौहर और देवर समेत सभी फिलहाल फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, पूरा मामला 16 जुलाई को रामपुर के स्वार थाना क्षेत्र के एक गाँव का है। गुरुवार को इस केस में शौहर समेत 7 लोगों को आरोपित बनाया गया। पीड़िता ने शिकायत की थी कि उसका निकाह 1 साल पहले ही हुआ था। निकाह के कुछ महीने तक चीजें सही चलीं लेकिन बाद में ससुरालवालों ने मायके से कार और 10 लाख रुपए लाने की डिमांड शुरू कर दी और 16 जुलाई को आखिर में उसे तीन तलाक दे दिया गया।

पीड़िता बताती है कि जब उसने तीन तलाक की शिकायत थाने में देने को कही तो इस पर ससुराल वालों ने आपस में सलाह मशविरा किया और उसके सामने छोटे देवर से निकाह करने का प्रस्ताव रखा ताकि हलाला की शर्त पूरी हो सके। पीड़िता ने इंकार किया। लेकिन उससे कहा गया कि इस निकाह के बाद उसका दोबारा से उसके शौहर से ही निकाह करवा दिया जाएगा। 

इसके बाद उसके लाख मना करने पर भी 16 जुलाई को ससुर ने उसे और देवर को एक कमरे में भेजकर गेट बाहर से बंद कर दिया। अंदर देवर ने जबरदस्ती उसके साथ रेप किया और सुबह जाकर महिला किसी तरह से ससुराल के चंगुल से निकल कर भाग पाई। उसने अपने मायके में घटना की जानकारी दी। इसके बाद मायके वाले उसे लेकर थाने पहुँचे और घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई।

एफआईआर में पीड़िता ने कहा कि उसका शौहर उसके साथ जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाता था। ऐसा उसे प्रताड़ित करने के लिए किया जाता था। पुलिस ने इस मामले में IPC की धारा 377 के तहत केस दर्ज किया है। रिपोर्ट के अनुसार, रामपुर के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ संसार सिंह ने बताया कि महिला से हलाला के नाम पर रेप की घटना मामले में पति समेत 7 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। आरोपित पति, देवर और ससुर की तलाश में टीमें भेजी गई हैं। आरोपित घर छोड़कर फरार हैं। जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

बता दें कि हलाला का एक मामला पिछले साल मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आया था। 26 वर्षीय महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि शौहर ने तीन तलाक देकर ससुर के साथ हलाला करने का दबाव बनाया। पुलिस ने महिला के शौहर आदिल खान, ससुर आजाद खान व देवर आबिद खान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व छेड़छाड़ का केस दर्ज कर लिया था।

अफगानिस्तान: पहले कॉमेडियन और अब कवि, तालिबान ने अब्दुल्ला अतेफी को घर से घसीट कर निकाला और मार डाला

अफगानिस्तान के लोकप्रिय कॉमेडियन नजर मोहम्मद उर्फ खाशा की हत्या करने के बाद अब तालिबान ने अफगानिस्तान के उरुज्गन (Uruzgan) प्रांत के कवि और इतिहासकार अब्दुल्ला अतेफी की हत्या कर दी है। प्रांत के गवर्नर के मुताबिक, मारने से पहले अतेफी को प्रताड़ित किया गया।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान से सम्बंधित मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार फ्रड बेझन (Frud Bezhan) ने ट्वीट करके अतेफी की हत्या की जानकारी दी। बेझन ने बताया कि कवि और इतिहासकार अतेफी की हत्या अफगानिस्तान के दक्षिणी प्रांत उरुज्गन के चोरा जिले में हुई, जो बीते जून से तालिबान के कब्जे में है।

उरुज्गन प्रांत के गवर्नर मोहम्मद उमर सिरजाद ने बताया कि जहाँ कहीं भी तालिबान का नियंत्रण है, वहाँ शिक्षाविदों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कवियों, कलाकारों और महिलाओं को प्रताड़ित किया जा रहा है, डराया-धमकाया जा रहा है और उन्हें मार दिया जा रहा है। सिरजाद के मुताबिक, अब्दुल्ला अतेफी की हत्या करने से पहले उन्हें घर से घसीट कर बाहर लाया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया।

अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने अतेफी की हत्या की निंदा की और कहा कि अफगानिस्तान के विद्वान खतरे में हैं और तालिबान इन्हें खत्म करके अफगानिस्तान को बंजर बनाना चाहता है। सालेह ने यह भी कहा कि अतेफी की गलती सिर्फ इतनी थी कि वो अर्थव्यवस्था और इतिहास के जानकर थे। हालाँकि, तालिबान के प्रवक्ता ने अतेफी की हत्या में तालिबानी लड़ाकों की संलिप्तता से इनकार किया है।

ज्ञात हो कि इससे पहले 22 जुलाई 2021 को कंधार निवासी कॉमेडियन खाशा का तालिबान आतंकियों ने अपहरण कर लिया था। अपहरण करने के बाद उन्हें ले जाते समय कार में आतंकियों ने खाशा को कई बार थप्पड़ मारे थे। अंत में तालिबान आतंकियों ने उन्हें एक पेड़ पर बाँध दिया और फिर गला काटकर उनकी हत्या कर दी। स्थानीय पुलिस के रूप में काम करने वाले कॉमेडियन का कटा हुआ सिर जमीन पर पड़ा हुआ मिला था।