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रेप पीड़िता को कॉल- दिल्ली से आया हूँ, राहुल गाँधी ने भेजा है, मामला सुलझाना है: रिपोर्ट में दावा, कॉन्ग्रेस MLA का बेटा है आरोपित

कुछ महीने पहले मध्य प्रदेश के इंदौर में युवा कॉन्ग्रेस की एक पदाधिकारी ने अपनी ही पार्टी के विधायक मुरली मोरवाल के बेटे करण पर रेप का आरोप लगाया था। आरोपित फरार है और उसकी सूचना देने पर पुनिस ने इनाम भी घोषित कर रखा है। लेकिन इसी बीच इस मामले में एक ऑडियो वायरल हुआ है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार ऑडियो में पीड़िता से कोई शख्स मामले को सुलझाने की बात कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार कॉल करने वाला खुद को राहुल गाँधी के ऑफिस से जुड़ा बता रहा है। उसका दावा है कि वह इस मामले को सुलझाने के लिए दिल्ली से भेजा गया है। पीड़िता से यह भी कह रहा है कि कमलनाथ के हिसाब से दुनिया नहीं चलती। उनके ऊपर भी लोग हैं। कमलनाथ मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती कॉन्ग्रेस सरकार के मुखिया थे और हाल में बड़ी जोर-शोर से चर्चा चली थी कि उन्हें कॉन्ग्रेस की कमान भी सौंपी जा सकती है।

दैनिक भास्कर की खबर का स्क्रीनशॉट

रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता ने पूछा कि क्या उसे कमलनाथ (पूर्व मुख्यमंत्री व कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता) ने भेजा है, जिस पर युवक कहता है कि कमलनाथ से ऊपर भी कई लोग हैं। उन्होंने ही उसको इंदौर में पूरा मामला सुलझाने को भेजा है, वरना उसका इंदौर में कोई काम नहीं था। युवक इस बातचीत में पीड़िता को राजनीति में आगे बढ़ाने का लालच देकर कहता है कि वह उसे आगे बढ़ा सकता है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित संबंधित रिपोर्ट के मुताबिक युवक और पीड़िता के बीच हुई बातचीच इस प्रकार है:

युवक – मैं इंदौर आ गया हूँ, आपकी इच्छा हो तो आकर मिल लीजिए।
पीड़िता – क्या बात करूँ मैं आपसे, आप बताओ न।
युवक – देखो मैडम, आपके लिए ही स्पेशल आया हूँ, मुझे कोई काम नहीं था, इंदौर में। आपकी इच्छा हो तो मिल लो, नहीं मिलना तो मना कर दो। मैं आगे बोल दूँगा कि आपने मिलने से मना कर दिया।
पीड़िता – नहीं, मैं तो कोई समझौता चाहती नहीं हूँ, मैं लड़ना चाहती हूँ।
युवक – समझौता तो करना ही नहीं है अपने को, मैं आपके फायदे की बात बता रहा हूँ मैम।
पीड़िता – आपने बोला तो सही कि कमलनाथ जी चाहते हैं।
युवक – अरे मैडम सुनो, कमलनाथ जी के चाहने से कुछ नहीं होता। दुनिया उनके हिसाब से नहीं चलती है। कमलनाथ जी के ऊपर भी कई लोग होते हैं। मैं दिल्ली से आया हूँ मैम।
पीड़िता – आप सच्चाई बताओ, किसने बोला फिर मैं आपसे मिलती हूँ।
युवक – मेरे को राहुल गाँधी जी के ऑफिस से मैसेज आया था कि कोई इश्यू क्रिएट हुआ है। बड़ा मैटर है। विधायक के बेटे ने आपके साथ कुछ किया है। कुल मिलाकर जाकर देखो सच्चाई क्या है झूठ क्या है।
पीड़िता – दिल्ली से भी किसने भेजा है, राहुल जी ने या किसने? कुछ तो बताओ, मेरा डर खत्म हो जाएगा, तब मिलूँगी।
युवक – मुझे पीवी राजू ने भेजा है जो राहुल गाँधी के ऑफिस में हैं। उनसे मेरी चर्चा हुई थी कि राहुल गाँधी की इच्छा है। आपको ग्रोथ चाहिए, राजनीति करनी है ना?
पीड़िता – अरे राजनीति करनी है तो अपनी इज्जत दाँव पर लगाकर थोड़ी राजनीति करनी है।
युवक – मैं आपको आगे बढ़ा सकता हूँ। मुझे आपसे सवाल नहीं करना है। मैं सच्चाई जानने आया हूँ कि प्रॉब्लम क्या है। विधायक जी का लड़का गलत है तो सजा मिलनी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि 3 महीने पहले पीड़िता ने पुलिस को अपनी शिकायत में कहा था कि करण मोरवाल उसे कुछ महीनों पहले भंवरकुआँ थाना क्षेत्र में एक होटल में लेकर गया था और उसके बाद उसका कई बार रेप हुआ। मोरवाल ने उसको किसी को कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी।

केस इंचार्ज ज्योति शर्मा बताती हैं कि युवती कैंट रोड पर पिछले साल दिसंबर में करण के संपर्क में आई थी। इसी दौरान दोनों की दोस्ती हुई। धीरे-धीरे दोनों में बातें होने लगीं। युवती ने बताया है कि कई बार करण मोरवाल उससे मिलने इंदौर भी आया। इसके बाद इंदौर बायपास स्थित होटल में उसे प्रपोज किया और शादी करने का झाँसा देकर उसे नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया।

इस संबंध में तीन महीने पहले शिकायत होने के बाद से पुलिस करण की तलाश कर रही है। इस बीच करण की ओर से कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका भी डाली गई थी, लेकिन 12 जुलाई को यह खारिज कर दी गई। आरोपित का कहना था कि घटना वाले दिन वह अस्पताल में भर्ती था, हालाँकि पीड़िता की ओर से पेश किए गए उन साक्ष्यों ने इस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उसकी रिकॉर्डिंग और वॉट्सऐप चैंटिग मौजूद थी।

राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी ने इनसाइडर ट्रेडिंग के नियम भी तोड़े, SEBI ने लगाया जुर्माना: पोर्न केस में पहले से ही हैं फँसे

पोर्न केस में फँसे राज कुंद्रा और उनकी अभिनेत्री पत्नी शिल्पा शेट्टी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। अब यह दंपती भेदिया कारोबार (Insider Trading) के नियमों को तोड़ने का दोषी पाया गया है। इसको लेकर भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शिल्पा शेट्टी, राज कुंद्रा और उनकी कंपनी वियान इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर तीन लाख रुपए का जुर्माना लगाया है।

बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार सेबी के निर्णायक अधिकारी (एओ) सुरेश मेनन ने आदेश प्राप्त होने के 45 दिन के भीतर जुर्माना जमा करने को कहा है। यह तीनों अलग-अलग या संयुक्त रूप से भी जमा कर सकते हैं। कुंद्रा की कंपनी वियान शेयर बाजार में लिस्टेड है। कंपनी ने अक्टूबर 2015 में चार लोगों को 5 लाख रुपए के इक्विटी शेयर तरजीही तौर पर आवंटित किया था। इसके तहत शिल्पा शेट्टी औऱ राज कुंद्रा को 2.57 करोड़ रुपए कीमत के 1,28,800 आवंटित किए गए थे।

पीआईटी विनियमों के विनियम 7 (2) के प्रावधान अनुसार अगर दो दिनों में कंपनी 10 लाख रुपए से अधिक का लेनदेन करती है तो कंपनी के प्रमोटर्स को इसका खुलासा करना होता है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सेबी के मुताबिक, उसे यह जानकारी 3 साल की देरी से वर्ष 2019 में दी गई। दरअसल, सेबी ने सितंबर 2013 से दिसंबर 2015 के बीच वियान इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ट्रेडिंग की जाँच की थी, जिसमें वीआईएल को विनियम 7(2) के उल्लंघन का दोषी पाया गया था।

गौरतलब है कि पोर्न फ़िल्में बनाने और फिर उन्हें कुछ एप्स के जरिए बेचने के आरोप में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कारोबारी राज कुंद्रा को गिरफ्तार किया था। राज कुंद्रा के खिलाफ IPC और IT एक्ट के अलावा ‘स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम (Indecent Representation of Women (Prohibition) Act)’ के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद से ही हर दिन कुछ न कुछ खुलासा हो रहा है।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के शताब्दी समारोह में शामिल हुए वामपंथी येचुरी और डी राजा, TheHindu छाप चुका है फुल पेज ऐड

चीन पर दुनिया को Covid-19 महामारी देने, मानवाधिकारों का उल्लंघन करने और भारत समेत अन्य देशों के खिलाफ विस्तारवादी नीति अपनाने का आरोप लगाया जा रहा है और सीमा पर आक्रामकता के चलते लगातार उसकी आलोचना हो रही है। वहीं, सीपीआईएम के सीताराम येचुरी और सीपीआई के डी. राजा समेत कई अन्य वामपंथी नेता चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाले वर्षगाँठ कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

ज्ञात हो कि बुधवार (28 जुलाई 2021) को चीनी दूतावास के द्वारा चीन की कम्युनिस्ट पार्टी CPC की स्थापना का शताब्दी समारोह आयोजित किया गया। इस आयोजन में सीपीआईएम के सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी. राजा, तमिलनाडु की सत्ताधारी डीएमके सांसद एस. सेंथिलकुमार और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक की केन्द्रीय समिति के सचिव जी. देवराजन शामिल हुए। इस आयोजन में चीन का नेतृत्व CPC के इंटरनेशनल डिपार्टमेंट के काउन्सलर डू शियाओलिन (Du Xiaolin) ने किया। हालाँकि, यह प्रश्न उठाया जा सकता है कि जब पूरे देश में नागरिकों के मन में चीन के प्रति क्रोध है ऐसे में कुछ चंद नेता चीन की उस CPC के स्थापना समारोह में खुशी-खुशी शामिल हो रहे हैं, जिसका भारत विरोध जग-जाहिर है।

हालाँकि, इसके उलट भारतीय वामपंथियों का इतिहास हमेशा से चीन के प्रति नरमी दिखाने का रहा है। हाल ही में वामपंथी प्रकाशन समूह ‘द हिन्दू’ ने 01 जुलाई 2021 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की शताब्दी समारोह पर चीन द्वारा भुगतान किए गए पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित किया था। यह पेड कंटेंट समाचार पत्र के तीसरे पेज पर था। दिलचस्प बात यह थी कि चीन द्वारा जो पेड कंटेंट प्रकाशित किया गया था, वह नियमित रिपोर्ट की तरह ही था, लेकिन सिर्फ बारीकी से देखने पर यह पता लगाया जा सकता था कि यह चीन द्वारा पेड कंटेंट है।

पिछले कुछ समय से भारत के साथ चीन के संबंध लगातार तल्ख बने हुए हैं। पिछले साल गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प में हमारे 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए थे। हालाँकि, इस झड़प में चीन को भी अच्छा-खासा नुकसान झेलना पड़ा था। इस झड़प की शुरुआत चीन ने ही की थी और उसके बाद हमारे वीर जवानों ने चीन को मुँहतोड़ जवाब दिया। दुःख की बात यह है कि भारत में रहकर और भारतीय राजनीतिक व्यवस्था के बलबूते अपनी जमीन तैयार करने वाले वामपंथी नेताओं ने भारतीय सैनिकों की वीरगति पर चीन के विरोध में एक शब्द भी नहीं कहा था।

इसके उलट सीपीआईएम के बांग्ला मुखपत्र ‘गणशक्ति’ ने अपने पहले पन्ने पर भारतीय सेना के बलिदान का मखौल उड़ाते हुए उन्हें ही दोषी ठहराया था। इसके लिए किसी भारतीय नहीं बल्कि चीनी प्रवक्ता का बयान छापा गया था। चीनी प्रवक्ता के हवाले से दावा किया गया था कि भारतीय सेना ने न सिर्फ़ सीमा सम्बन्धी नियमों का उल्लंघन किया बल्कि गलवान घाटी में भी स्थिति से छेड़छाड़ की। यानी वामपंथियों द्वारा देश की सीमा पर हमारे लिए सुरक्षा करते हुए चीनी सैनिकों की धोखेबाजी भरे हमले में जान गँवाने वाले हमारे ही सैनिकों पर सवाल उठाया जा रहा था और वो भी उनके बयान को आधार बना कर, जिनकी सेना ने ये घिनौना कृत्य किया।

हालाँकि, CPC की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में सीपीआईएम के सीताराम येचुरी की उपस्थिति कोई आश्चर्य की बात नहीं है, क्योंकि चीन के प्रति सहानुभूति का प्रदर्शन वह पहले भी कर चुके हैं। पिछले साल ही गलवान में हुए संघर्ष के बाद कॉन्ग्रेस और चीन के सत्ताधारी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के बीच एक खुफिया समझौते की बात सामने आई थी। उसी समय सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें येचुरी चीन का समर्थन करते नजर आए थे। साथ ही वो इस बात पर जोर भी दे रहे थे कि एक देश के वामपंथियों को दूसरे देशों के वामपंथी विचारधारा के लोगों से संपर्क बनाए रखना चाहिए, खासकर चीन और रूस से।

चीन के प्रति झुकाव की बात कबूल करते हुए उन्होंने कहा था कि वामपंथी देश होने के बावजूद चीन ने वैश्विक परिदृश्य के लिहाज़ से खुद को बहुत बदला है। हालाँकि, उइगर मुस्लिमों के अधिकारों के उल्लंघन और हॉन्गकॉन्ग में चीन द्वारा किए जा रहे दमन पर उन्होंने अपना रूख स्पष्ट करने की बजाय यही कहा था कि ‘क्या भारत में भी बोलने की पूरी आज़ादी है?’ भारत और चीन के विवाद में वामपंथियों की भूमिका हमेशा से ही संदिग्ध रही थी। 1962 के युद्ध में तो सीपीआई ने देशद्रोह का खुलेआम प्रदर्शन करते हुए यहाँ तक कह दिया था कि घायल जवानों को रक्तदान करना पार्टी विरोधी गतिविधियों में गिना जाएगा।

‘जब जिहादी कर रहे थे नरसंहार तब बचाई थी जान’: ‘बिहारी गुंडा’ पर TMC की महुआ मोइत्रा को दो टूक

विवादित बयानों और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा का रिश्ता नया नहीं है। एक बार फिर वे इसी वजह से विवादों के केंद्र में हैं। अब उन पर लोकसभा के अपने एक साथी को ‘बिहारी गुंडा’ कहने का आरोप लगा है। झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया है कि महुआ मोइत्रा ने बुधवार (28 जुलाई 2021) को तीन बार उनके लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया।

पेगासस मसले पर पक्ष-विपक्ष के बीच जारी टकराव के बीच यह आरोप सामने आया है। सांसद दुबे ने ट्विटर के जरिए टीएमसी एमपी मोइत्रा पर हिंदी भाषी लोगों और उत्तर भारतीयों के प्रति नफरत फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “तृणमूल ने बिहारी गुंडा शब्द का इस्तेमाल करके बिहार के साथ-साथ पूरे हिंदी भाषी लोगों को गाली दी है।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को टैग करते उन्होंने लिखा, “आपकी सांसद महुआ मोइत्रा की गाली ने देश के सामने उत्तर भारतीयों और खासकर हिंदी भाषी लोगों के प्रति आपकी पार्टी की नफरत को सामने ला दिया है।”

इन आरोपों पर महुआ मोइत्रा ने कहा, “मैं नाम लिए जाने के आरोपों से थोड़ा खुश हूँ। कोरम नहीं होने के कारण आईटी समिति की बैठक नहीं हुई। अब जो मौजूद ही नहीं था उसे मैं कैसे नाम दूँ! उपस्थिति रजिस्टर की जाँच करें!”

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद की आईटी समिति ने ‘नागरिकों की डेटा सुरक्षा और गोपनीयता’ को लेकर विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों का बयान दर्ज करने के लिए बैठक बुलाई थी। इस दौरान करीब 10 बीजेपी सांसदों ने जोर देकर कहा था कि कोरम की कमी को देखते हुए पैनल को बैठक नहीं करनी चाहिए। आईटी कमेटी की मीटिंग के दौरान 19 सदस्य मौजूद थे, लेकिन भाजपा के सदस्यों ने अटेंडेंस शीट पर हस्ताक्षर नहीं किया था। नियमों के मुताबिक, जो भी सदस्य हस्ताक्षर नहीं करता है उसे मीटिंग से अनुपस्थित माना जाता है। अब महुआ मोइत्रा इसी अटेंडेंस शीट की आड़ लेकर आरोपों को खारिज करने की कोशिश कर रही हैं।

हालाँकि, यह पहला मौका नहीं जब महुआ मोइत्रा अपने साथी नेताओं के खिलाफ जातिवादी, क्षेत्रीय या धार्मिक टिप्पणी को लेकर विवादों में हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर कथित ‘गुंडा-राज’ चलाने का आरोप लगाया था। महुआ ने हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते हुए ट्वीट किया था, “सीएम योगी आज पश्चिम बंगाल में आ रहे हैं। वह कहते हैं कि टीएमसी के गुंडों को एक-एक करके मार देंगे। गुड्डूजी- सुनो- आपकी ठोक दो संस्कृति आपके साम्प्रदायिक वानर सेना पर काम कर सकती है, यहाँ वो काम नहीं करेगी।”

इसी साल मार्च में उन्होंने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को ‘चोटीवाला राक्षस’ कहा था। महुआ मोइत्रा की नफरत इस साल मई में तब भी दिखी जब दिल्ली पुलिस ने ट्विटर को नोटिस जारी किया था। मोइत्रा ने ट्वीट किया था, “हमारे सुसु पॉटी रिपब्लिक में आपका स्वागत है! गौमूत्र पिएँ, गोबर मलें और नियमों व कानूनों को शौचालय में फ्लश कर दें।”

महुआ मोइत्रा का ट्वीट (साभार: ट्विटर)

टीएमसी सांसद ने सुसु-पॉटी उपहास से लोगों को आश्चर्य में डाल दिया कि आखिर इसका ट्विटर के मुद्दे से क्या लेना-देना। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने मैनिपुलेटेड टैग मामले में पूछताछ के लिए ट्विटर को नोटिस जारी किया। इसी को लेकर मोइत्रा ने ये ट्वीट किया था।

इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर जब गवर्नर जगदीप धनखड़ ने कानून-व्यवस्था को लेकर नाराजगी दिखाई तो वे उन्हें भी निशाना बनाने से बाज नहीं आईं।

दुबे के आरोपों के बाद महुआ मोइत्रा की चौतरफा आलोचना हो रही है। इसी क्रम में वरिष्ठ पत्रकार बृजेश कुमार ने ट्वीट कर कहा है, “जब ज़िन्ना के डायरेक्ट एक्शन के इशारे को समझते हुए जेहादी कत्लेआम मचा रहे थे, उस समय ये ‘बिहारी गुंडे’ ही थे, जिन्होंने पाकिस्तान के नाम पर कोलकाता की सड़कों पर नरसंहार को अंजाम देने वाले बर्बर दंगाइयों को मार भगाया था और बंगाली भद्रलोक की जान बचाई थी! ललनाओं को याद रखना होगा ये!”

कोरोना से अनाथ हुई लड़कियों के विवाह का खर्च उठाएगी योगी सरकार: शादी से 90 दिन पहले/बाद ऐसे करें आवेदन

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीएम बाल सेवा योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत जिन बच्चों ने कोरोना महामारी के तहत अपने माता-पिता को खोया है, सरकार उनकी मदद करेगी। इस योजना को जहाँ प्रभावित बच्चों के पालन-पोषण से लेकर उनकी शिक्षा और सुरक्षित भविष्य के लिए तैयार किया गया है। वहीं इसी योजना के अंतर्गत कोरोना में अनाथ हुई बच्चियों की शादी की उम्र आने पर उन्हें 1 लाख 1 हजार रुपए देने का ऐलान भी है।

जानकारी के मुताबिक, जब लड़कियों की उम्र शादी लायक होगी तो सरकार उन्हें 1 लाख 1 हजार रुपए देगी और इसके लिए योगी सरकार ने बुधवार (जुलाई 28,2021) को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। वहीं, महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस योजना का लाभ पाने के लिए निर्धारित प्रारूप भी जिलों में भेज दिया है। आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जाँच 15 दिनों में पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रमुख सचिव वी हेकाली झिमोमी की ओर से जारी आदेश में कहा गया, “उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त कर रहीं लड़कियों को ही उनके विवाह के लिए आर्थिक सहायता, अनुदान की धनराशि दी जाएगी। विवाह के लिए निर्धारित की गई तिथि को वर की आयु 21 वर्ष तथा वधू की आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। विवाह की तिथि के 90 दिन पहले या फिर विवाह होने के 90 दिन बाद तक इस योजना में आवेदन करना होगा।”

प्रदेश सरकार की इस योजना का लाभ पाने के लिए लड़कियाँ खुद या उनके माता/पिता या फिर अभिभावक ऑफलाइन आवेदन करेंगे। इसके साथ ही जरूरी दस्तावेज लगाने आवश्यक होंगे। फिर, आवेदन पत्र को ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी या विकास खंड या जिला प्रोबेशन अधिकारी के पास जमा करना होगा।

शहरी क्षेत्रों में इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन संबंधित लेखपाल या फिर जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के पास जमा करना होगा। ये सुविधा उनके लिए नहीं है जिनका विवाह दो जून से पहले हुआ। इस तारीख के बाद होने वाले विवाह के लिए अनुदान दिया जाएगा। बता दें कि 2 जून को ही उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना अस्तित्व में आई थी।

आवेदन के साथ जमा होने वाले दस्तावेजों में; लड़की तथा उसके वर्तमान अभिभावक की ताजा फोटो, माता-पिता/वैध संरक्षक का मृत्यु प्रमाणपत्र तथा कोविड-19 से मृत्यु संबंधी साक्ष्य, वर व वधू का आयु प्रमाणपत्र, विवाह का कार्ड व उत्तर प्रदेश के निवासी होने का प्रमाण-पत्र तथा आय प्रमाणपत्र लगाना होगा।

प्रमुख सचिव का कहना है कि बाल सेवा योजना के अंतर्गत जितनी लड़कियाँ आती हैं उनसे या उनके गार्जियन से जिला बाल संरक्षण इकाई सीधे संपर्क कर उनके आवेदन पत्र प्राप्त करें और 15 दिनों के अंदर उसे पूरा कराएँ। उनके मुताबिक, जिलास्तरीय टास्क फोर्स इसके लिए जिला बाल संरक्षण इकाई की निगरानी करेगी तथा यह सुनिश्चित कराएगी कि ऐसी सभी लड़कियों के आवेदन पत्र समय से प्राप्त कर लिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए योगी सरकार द्वारा शुरू की गई योजना का लाभ उन परिवारों को मिलेगा जिनकी वार्षिक आय तीन लाख या कम होगी। बच्चियों की शादी में मदद के अलावा, इस योजना के तहत हर बच्चे को हर माह 4 हजार रुपया मिलेगा। साथ ही 11 साल से 18 साल तक के बच्चों को 12वीं तक की मुफ्त शिक्षा मिलेगी।

फिल्म का नाम- बर्तन वाली, शूटिंग न्यूड होकर: राज कुंद्रा के सेट्स पर रोवा खान धमकी दे करवाती थी रोल

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की पोर्न फिल्म मामले में गिरफ्तारी के बाद नित नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले में एक्ट्रेस-मॉडल गहना वशिष्ठ के साथ अब रोवा खान की भी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दो पीड़ित लड़कियों ने पुलिस को दिए बयान में गहना वशिष्ठ और रोवा खान पर पोर्न फिल्मों की शूटिंग के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है।

पीड़ितों ने मड आईलैंड वाले बंगले पर पोर्न फिल्मों की शूटिंग किए जाने की बात कही है। पीड़ितों में से एक 25 वर्षीय एक्ट्रेस के मुताबिक, साल 2018 में वह रौनक नाम के एक कास्टिंग डायरेक्टर से मिली थी और उसने फरवरी 2021 में रोवा खान से मिलवाया था। पीड़िता ने बताया, “2 फरवरी 2021 को रौनक ने मुझसे मलाड में मिलने को कहा। इसके बाद वह रोवा खान के साथ कार में आया और दोनों मुझे मड आईलैंड के ग्रीन पार्क बंगले में ले गए। वहाँ छोटे कपड़े पहनाने के बाद अश्लील स्क्रिप्ट पढ़ने को कहा गया।”

पीड़िता के मुताबिक, उसे इस काम के बदले 25,000 रुपए देने को कहा गया था। पहले उसे ‘सिंगल मदर’ की एक स्क्रिप्ट पढ़ने के लिए दी गई, लेकिन बाद में उसे दुबली-पतली बताकर स्क्रिप्ट बदल दी गई और उसके बदले में ‘बर्तन वाली’ नाम की दूसरी स्क्रिप्ट दी गई।

पीड़िता ने बताया, “रोवा खान ने पहले ही मेरा नो ऑब्जेक्शन वीडियो बनवा लिया था। शूटिंग के दौरान मुझे हीरो के कमरे में बेड पर लेटने के लिए कहा गया और असहज करने वाले डायलॉग्स दिए गए। इस कारण मैं हकला रही थी, जिस पर रोवा ने चिल्लाकर मुझे कहा कि तुम्हारा कभी कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं रहा जो इतना शर्मा रही हो।”

एक्ट्रेस के मुताबिक, आधी शूटिंग करने के बाद उसे न्यूड होने के लिए कहा गया। रोवा ने कहा कि कुछ भी असली नहीं होगा, लेकिन असली जैसा होगा। मना करने पर रोवा ने उसके खिलाफ केस दर्ज करने की धमकी भी दी। पीड़िता ने बताया कि अर्धनग्न हालत में वो शूटिंग कर ही रही थी कि पुलिस की रेड हो गई।

जोया राठौर को राज कुंद्रा के सहयोगी उमेश कामत ने कई बार किया कॉल

कई बोल्ड वेब सीरीज कर चुकी एक्ट्रेस जोया राठौर ने एबीपी न्यूज को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया है कि राज कुंद्रा के पीए उमेश कामत ने उन्हें एडल्ट वीडियोज में काम करने के लिए कई बार कॉल किया था। इसी साल फरवरी में गिरफ्तार होने से दो दिन पहले तक उसने फोन किया था।

जोया ने आरोप लगाया है कि उमेश कामत ने उन्हें व्हाट्सएप पर न्यूड ऑडिशन देने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। गिरफ्तारी से पहले कामत ने जोया को 20,000 रुपए प्रतिदिन का ऑफर दिया था। जोया का कहना है कि हॉटशॉट्स के लिए काम करने वाला रॉय नाम का एक व्यक्ति भी उन्हें फोन करता था। रॉय ने जोया को कहा था कि यूके बेस्ड अंतरराष्ट्रीय न्यूड वेब सीरीज के लिए उसे 70,000 रुपए प्रतिदिन मिलेंगे।

गौरतलब है कि पोर्न फिल्में बनाने और फिर उन्हें कुछ एप्स के जरिए बेचने के आरोप में मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कारोबारी राज कुंद्रा को 18 जुलाई गिरफ्तार किया था। राज कुंद्रा के खिलाफ IPC और IT एक्ट के अलावा ‘स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम (Indecent Representation of Women (Prohibition) Act)’ के तहत भी मामला दर्ज किया गया था। उनके साथ ही 11 और लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था।

बंगाल की गद्दी किसे सौंपेंगी? गाँधी-पवार की राजनीति को साधने के लिए कौन सा खेला खेलेंगी सुश्री ममता बनर्जी?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पाँच दिनों के दिल्ली दौरे पर हैं। ऐसे दौरे राष्ट्रीय राजनीति की महत्वाकांक्षा रखने वाले क्षेत्रीय नेताओं के लिए नई बात नहीं है। ऐसे दौरों के लिए सार्वजनिक तौर पर बहाना चाहे जो रहे, सुश्री बनर्जी से पहले भी कई क्षेत्रीय छत्रप यह काम करते रहे हैं, कभी विपक्षी दलों की एकता के नाम पर, कभी केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ भारत को एक करने के नाम पर तो कभी देश में बढ़ती ‘फासिस्ट’ ताकतों के नाम पर। इस किरदार में कभी चंद्रबाबू नायडू नज़र आए, कभी के चंद्रशेखर राव तो कभी शरद पवार। वर्तमान में यह काम ममता बनर्जी ने अपने जिम्मे ले लिया है क्योंकि फिलहाल राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका को तलाशने वाले लोगों में सबसे आगे वही हैं। 

ऐसा नहीं कि राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका की खोज में ममता बनर्जी पहली बार उतरी हैं। इससे पहले 2014 लोकसभा चुनाव के समय भी उन्होंने यह प्रयास किया था। तब उनके साथ अन्ना हजारे थे। हजारे को अपनी लोकप्रियता पर भरोसा था और इसीलिए उन्होंने ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर लॉन्च करने की जिम्मेदारी उठाई थी। यह बात अलग है कि तब उनका प्रयास नाकाम रहा था।

अब ममता बनर्जी दोबारा अपनी भूमिका खोजने निकली हैं। किसी भी राजनीतिक नेतृत्व के लिए यह स्वाभाविक है कि जब तक वो राजनीति में सक्रिय है, अपने लिए वृहद भूमिका की तलाश करता रहे। ऐसे में ममता बनर्जी का यह प्रयास राजनीति के लिहाज से सही भी है और तार्किक भी। जो बात यहाँ देखने वाली है, वह ये है कि विपक्षी दलों की सोच में एकजुटता को लेकर तारतम्य कितना है?

हाल ही में जब प्रशांत किशोर ने शरद पवार से मुलाकात की थी, तब पवार एक नॉन बीजेपी नॉन कॉन्ग्रेस फ्रंट बनाने के पक्ष में थे। उसके बाद प्रशांत किशोर राहुल गाँधी से मिले। तब लग रहा था कि राहुल गाँधी के साथ उनकी मुलाक़ात पंजाब की राजनीति से सम्बंधित थी पर अब ममता बनर्जी के दिल्ली दौरे और उसमें होने वाली बैठकों के बाद लग रहा है कि फिलहाल पवार के नॉन कॉन्ग्रेस नॉन बीजेपी फ्रंट के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है और विपक्षी दल अब केवल भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध एकजुट होने के प्रस्ताव पर सहमत हो गए हैं।

विपक्षी एकता में गाँधी-वाम के प्रश्न

प्रश्न यह है कि एकजुटता के इस प्रस्ताव में कौन से दल शामिल हैं और कौन-कौन से एकजुट होंगे? वामदलों की भूमिका क्या होगी, खासकर तब जब वे दो राज्यों में से एक पश्चिम बंगाल में अपने बचे-खुचे वोट तृणमूल कॉन्ग्रेस को देकर अपना राजनीतिक भविष्य ही नहीं बल्कि अस्तित्व दाँव पर लगा चुके हैं। 

वामदलों की भूमिका के बाद यह प्रश्न महत्वपूर्ण रहेगा कि कॉन्ग्रेस की ओर से गाँधी परिवार इस प्रस्ताव पर अपनी भूमिका कहाँ देख रहा है? राष्ट्रीय राजनीति में शीर्ष की खोज में वर्षों तक मेहनत से लगे रहने वाले राहुल गाँधी इस एकजुटता में खुद को कहाँ पाते हैं?

क्या राहुल खुद से प्रश्न नहीं करेंगे कि; पश्चिम बंगाल में अपनी पार्टी के वोट ममता बनर्जी को क्या इसलिए दिलवाए थे कि वे राज्य की राजनीति छोड़कर दिल्ली का रुख कर लें? शरद पवार की क्या भूमिका रहेगी? क्या ममता बनर्जी खुद को केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित रखते हुए राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पर पहुँच पाएँगी? और यदि वे अन्य राज्यों में अपने दल के लिए जमीन तलाशेंगी, तो इस पर और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया क्या होगी?

यह प्रश्न भी उठेगा कि एकजुटता की यह तैयारी अगले लोकसभा चुनावों के लिए हो रही है या फिर उससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए? ये ऐसे प्रश्न हैं, जो केवल एक बार नहीं बल्कि बार-बार उठेंगे और इन पर किसी तरह की अस्पष्टता विपक्षी एकजुटता के आड़े आएगी। 

बंगाल में हिंसा, केंद्र में राजनीति

ममता बनर्जी के वर्तमान दिल्ली दौरे का समय चयन बड़ा दिलचस्प है। वे इस दौरे पर तब हैं, जब कलकत्ता उच्च न्यायालय चुनाव उपरांत राज्य में हुई हिंसा पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट पर सुनवाई कर रहा है और रिपोर्ट से तमाम ऐसी बातें और घटनाएँ सामने आ रही हैं, जिन्हें सत्ताधारी दल ने अभी तक किसी न किसी तरीके से रोक रखा था। साथ ही सुनवाई सम्बंधित राज्य सरकार की दलीलें, तर्क और असंवैधानिक कार्यकलाप सामने आ रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर इन बातों की चर्चा क्या उस महत्वाकांक्षी नेत्री के लिए शुभ हैं, जो अपने लिए वृहद राजनीतिक भूमिका की खोज में निकली है? वैसे भी केंद्र से अपने संबंधों को लेकर विवाद में रहने वाली सुश्री बनर्जी के लिए आने वाले दिन बहुत सुलभ होंगे, इस बात की संभावना कम ही लगती है। दिल्ली में भूमिका की तलाश में निकली ममता बनर्जी क्या पश्चिम बंगाल सरकार को अपने राजनीतिक वारिस को पूरी तरह से सौंपने का जोखिम उठा सकेगी?

फिलहाल दिल्ली में ममता बनर्जी और अन्य नेताओं के बीच होने वाली बैठकें उत्साहजनक भले प्रतीत होती हों पर इन बैठकों में विश्वास की मात्रा कम है। हाल में शरद पवार की प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बैठक पर लगातार बातें हो रही हैं। पेगासस स्पाईवेयर को आगे रख कर ममता बनर्जी बयान दे सकती हैं पर उन्हें भी यह पता है कि इस तथाकथित जासूसी के बारे में शुरुआती धुल धक्कड़ अब जम चुका है। ऐसे में पेगासस को राजनीतिक बयानों के लिए काम में लगाया तो जा सकता है पर परिणामों को लेकर उस पर विश्वास नहीं किया जा सकता।

फिलहाल ममता बनर्जी का यह दौरा पानी नापने की एक कोशिश से अधिक प्रतीत नहीं होता। इसके राजनीतिक परिणाम विपक्ष को एकजुट करने में कोई भूमिका निभा सकेंगे, इसे लेकर संदेह लम्बे अरसे तक बना रहेगा।

बिन बुलाए घर पर आकर करने लगा किस, कहा- शिल्पा से रिश्ते ठीक नहीं हैं: राज कुंद्रा पर शर्लिन चोपड़ा ने लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप

अश्लील फिल्में बनाने और बेचने के मामले में बुरी तरह फँसे बिजनेसमैन राज कुंद्रा पर बॉलीवुड एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा ने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। कथिततौर पर जहाँ कई पीड़िताओं ने कुंद्रा की ऐप (Hotshots) के विरुद्ध सामने आकर बयान दिया है। वहीं शर्लिन चोपड़ा का बयान उनसे अलग आया है।

इससे पहले उन्होंने पोर्नोग्राफी केस में मुंबई क्राइम ब्रांच की प्रॉपर्टी सेल के सामने अपना बयान दिया था। उन्होंने अप्रैल 2021 में कुंद्रा के विरुद्ध एफआईआर भी करवाई थी। अपनी शिकायत में उन्होंने कहा कि साल 2019 की शुरुआत में राज कुंद्रा ने उनके बिजनेस मैनेजर को कॉल किया और किसी प्रपोजल को डिस्कस करने की बात कही। बिजनेस मीटिंग के बाद 27 मार्च 2019 को शर्लिन की राज से किसी बात को लेकर बहस हुई और वह बिन बुलाए घर आ गए।

ई-टाइम्स के मुताबिक, एक्ट्रेस कहती हैं कि राज ने उनको किस करना शुरू कर दिया था जबकि वह मना कर रही थीं। शर्लिन के अनुसार, वह कभी भी एक शादीशुदा शख्स के साथ रिश्ता नहीं बनाना चाहती थीं और न ही उनके साथ कोई व्यापार करना चाहती थीं। मगर, राज ने कहा कि उनके और शिल्पा के बीच रिश्ते बहुत कॉम्प्लिकेटेड हैं और वह घर में ज्यादातर दुखी रहते है। शर्लिन कहती हैं कि वह राज को रुकने के लिए कह रही थी, क्योंकि डरी हुई थीं। कुछ समय बाद उन्हें खुद को राज से छुड़ाने में सफलता मिली और वह भागकर वाशरूम में चली गईं।

इस आरोप से पहले बता दें कि शर्लिन चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करके बताया था कि वही वह पहली शख्स थीं जिन्होंने महाराष्ट्र साइबर सेल की जाँच टीम को बयान दिया था। अपने ट्विटर पर वीडियो अपलोड करते हुए उन्होंने कहा था,

“पिछले काफी समय से मुझे पत्रकार राज कुंद्रा के मामले में कुछ कहने के लिए बोल रहे हैं। आप सबको मैं बता दूँ कि महाराष्ट्र साइबर सेल की जाँच टीम को जिसने सबसे पहले इस मामले में अपना बयान दिया वो कोई और नहीं वो मैं हूँ। महाराष्ट्र साइबर सेल की टीम को जिस व्यक्ति ने सबसे पहले आर्म्सप्राइम के बारे में बताया वो कोई और व्यक्ति नहीं मैं हूँ। कहने का मतलब यह है कि जब मुझे साइबर सेल द्वारा नोटिस भेजा गया था। मैं अंडर ग्राउंड नहीं हुई, लापता नहीं हुई, ये देश छोड़कर जाने की कोशिश नहीं की। मार्च 2021 में मैंने साइबर सेल के ऑफिस पर जाकर अपना निष्पक्ष बयान दिया। दोस्तों इस विषय पर कहने को बहुत कुछ है लेकिन फिलहाल इस पर कुछ कहना ठीक नहीं है। इसलिए मैं अनुरोध करती हूँ कि आप महाराष्ट्र साइबर सेल से संपर्क करें और अपने प्रश्न उनके सामने रखें। उनसे मेरे बयान के कुछ अंश शेयर कर देने की विनती करें।”

उल्लेखनीय है कि राज कुंद्रा को पोर्नोग्राफी केस में 19 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद खबर आई कि वह 23 जुलाई तक हिरासत में रहेंगे, फिर कोर्ट ने यह अवधि 27 जुलाई तक बढ़ाई और इसके बाद दोबारा उन्हें 14 दिन तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया। इस बीच उन्होंने अपनी जमानत के लिए याचिका भी दायर की, लेकिन मुंबई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनकर उस याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट को बताया गया कि कई लड़कियों ने सामने आकर कुंद्रा की ऐप के विरुद्ध बयान दर्ज करवाया है।

हिंदू लड़की के साथ Live-In रिलेशन में रहा अजमल, धोखा दे निकाह किसी और से फिक्स… हंगामे के बाद ऐसे धराया

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का रहने वाला मोहम्मद अजमल नाम का युवक दिल्ली में एक हिंदू लड़की के साथ ‘लिव इन रिलेशनशिप‘ में रह रहा था। कुछ दिन पहले वह गर्लफ्रेंड से बिजनौर जाने का बोलकर आया और दूसरी लड़की के साथ निकाह करने लगा। इसका पता लगते ही लड़की दिल्ली से सीधे बिजनौर के मंडावर पहुँची और पुलिस स्टेशन में शिकायत की। काफी हंगामे के बाद वह लड़के अजमल को लेकर दिल्ली वापस लौट गई।

मामले की शुरुआत राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से होती है। अजमल नाम का शख्स यहाँ एक सैलून में नाई का काम करता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक हिंदू लड़की से होती है। दोनों में घनिष्ठता इतनी अधिक हो जाती है कि दोनों ‘लिव इन रिलेशनशिप’ में रहने लगते हैं। एक साल तक दोनों लिव इन में रहते हैं। इसी दौरान एक दिन अजमल ने लड़की से कहा कि वो बिजनौर अपने घर जा रहा है। हालाँकि, उसने उसे धोखा दिया और वहाँ जाने का कारण नहीं बताया। गौरतलब है कि अजमल बिजनौर के मंडावर कस्बे के मंगल बाजार का रहने वाला है।

घर आने के बाद पड़ोस की रहने वाली एक लड़की के साथ उसने अपना निकाह तय कर लिया। 27 जुलाई 2021 को उसका निकाह होने वाला था कि युवती दिल्ली के सराय काले खाँ से बिजनौर के मंडावर पहुँच गई। मंडावर थाने के एसएचओ मनोज कुमार के मुताबिक, युवती ने अजमल का निकाह रुकवाने की मदद माँगी। इसके बाद उसके निकाह को रोककर उसे थाने बुलाया गया। वहाँ पहुँचते ही लड़की ने हंगामा शुरु कर दिया।

उसने कहा कि उसे केवल यही लड़का चाहिए, एक साल तक उसे पत्नी के रूप में साथ रखा था। मामला बढ़ता देख पुलिस वालों ने लड़के को लड़की को सौंप दिया और वो उसे अपने साथ दिल्ली ले गई। उसने कहा कि दिल्ली में ही वह उसके साथ शादी करेगी। हालाँकि, हिंदू लड़की का मामला समझकर वीएचपी के लोगों ने भी उसे काफी समझाया, लेकिन लड़की ने किसी की नहीं सुनी।

झारखंड: दिनदहाड़े खुली सड़क पर जज की हत्या, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हथौड़े से मारने के मिले निशान, देखें Video

झारखंड के धनबाद में बुधवार (जुलाई 28, 2021) को दिनदहाड़े अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश उत्तम आनंद की हत्या कर दी गई। छानबीन में पता चला कि एक ऑटो रिक्शा ने सुबह के समय उन्हें टक्कर मारी थी। घटना की वीडियो भी जारी की गई है। पुलिस अब इस केस में हर एंगल से जाँच कर रही है।

पुलिस का कहना है कि जज उत्तम आनंद रंधीर वर्मा चौक पर अपनी सुबह की वॉक के लिए गए थे जब उनके साथ यह घटना हुई। सड़क पर घायल अवस्था में उन्हें तड़पता देख पहले तो कोई नहीं आया, लेकिन फिर पीएचडी कर्मचारी पवन पांडे ने उन्हें देख अस्पताल तक पहुँचाया, जहाँ जल्द ही डॉक्टरों ने उन्हें मृत करार दे दिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायाधीश उत्तम आनंद धनबाद के चर्चित रंजय हत्याकांड की सुनवाई कर रहे थे। 3 दिन पहले ही उन्होंने यूपी के ईनामी शूटर अभिनव सिंह व अमन सिंह के गुंडे रवि ठाकुर व आनंद वर्मा की जमानत खारिज की थी। वह हजारीबाग के रहने वाले थे और 6 महीने पहले ही बोकारो से धनबाद आए थे। 

बुधवार को उनकी मृत्यु के बाद से ये सस्पेंस बना हुआ था कि आखिर ये दुर्घटना है या फिर हत्या। लेकिन सीसीटीवी फुटेज और सामने आई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने तस्वीर को साफ कर दिया है। पुलिस ने केस को हत्या के मामले में दर्ज किया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके सिर पर हथौड़े से मारने वाले निशान पाए गए हैं। साथ ही ये भी पता चला है कि जिस ऑटो से उन्हें टक्कर मारी गई वह पाथरडीह की सुगनी देवी का है। सुगनी के अनुसार रात में उसका ऑटो चोरी हो गया था।

धनबाद एसएसपी संजीव कुमार ने कहा, “हमने हत्या का मामला दर्ज किया है और सभी संभावित कोणों से जाँच कर रहे हैं। हमने उक्त घटना के सीसीटीवी फुटेज को बरामद कर लिया है। हालाँकि, हमें अभी तक कोई मकसद नहीं मिला है।” मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी भी नहीं हुई है।

सामने आई फुटेज- जिसे लेकर परिजनों का कहना है कि उसमें जज ही हैं, इसमें देख सकते हैं- सड़क पर एक व्यक्ति वॉक के लिए चल रहा है। लेकिन तभी एक ऑटो रिक्शा आता है और जानबूझकर अपना ऑटो रिक्शा उसी ओर घुमाता जिधर व्यक्ति चल रहा होता है। गाड़ी व्यक्ति को मारती है और दोबारा सड़क के बीच में होकर वहाँ से चली जाती है। 

मृतक की पत्नी कृति सिन्हा का कहना है कि उनके पति सुबह 5 बजे घर से निकले थे, जब वह काफी देर लौटे नहीं तो सबने उन्हें खोजना शुरू किया। उनका कहना है कि स्थानीय लोग उनके पति को अस्पताल लेकर आए और पीछे से उन्हें ऑटो ने ही मारा है। उस ऑटो वाले के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के अधीक्षक अरुण कुमार चौधरी ने इस संबंध में बताया, “मरीज को सुबह करीब 5.30 बजे अज्ञात के रूप में भर्ती कराया गया था। उनके सिर के पिछले हिस्से में चोट आई थी। सुबह करीब साढ़े आठ बजे उसने दम तोड़ दिया।”

झारखंड हाईकोर्ट के वकील प्रभात सिन्हा ने इस केस को स्पष्ट तौर पर हत्या का मामला कहा है। सीसीटीवी फुटेज में भी यह दिख रहा है कि ऑटो ड्राइवर ने जानबूझकर जज को निशाना बनाया। वहीं सोशल मीडिया पर घटना की वीडियो आने के बाद लोग हेमंत सोरेन सरकार पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। ध्यान दिलाया जा रहा है कि ट्विटर पर काम की बात का ढोंग करने वाले हेमंत सोरेन के राज्य में कानून व्यवस्था का ये हाल है। 

वहीं, बार काउंसिल के स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद यह मामला पूरी तरह से हत्या का लग रहा है । उन्होंने कहा कि झारखंड में विधि व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो गई है। दो दिन पूर्व ही रांची के तमाड में अधिवक्ता मनोज झा की भी गोली मारकर अपराधियों ने हत्या कर दी और आज न्यायाधीश की मौत हुई है पुलिस मामले की गंभीरता से जाँच करें।