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‘योगी बैठ्या है बक्कल तार दिया करे…’: राकेश टिकैत ने कहा था- चुनाव से पहले लखनऊ को दिल्ली की तरह घेरेंगे

कृषि कानूनों को रद्द करने की माँग को लेकर दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे कथित किसान नेताओं ने अब लखनऊ घेरने का एलान किया है। इसको लेकर उत्तर प्रदेश भाजपा ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक कार्टून के माध्यम से चेतावनी दी है। ट्वीट किए गए कार्टून में दिखाया गया है कि एक यूपी का एक बाहुबली राकेश टिकैत से कहता है, “सुना लखनऊ जा रहे तुम, किमें पंगा न लिए भाई। योगी बैठ्या है बक्कल तार दिया करे और पोस्टर भी लगवा दिया करे।”

बता दें कि किसान नेता राकेश टिकैत ने ऐलान किया था कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए किसान अब दिल्ली की तरह लखनऊ का भी घेराव करेंगे और यूपी चुनाव में जनता से भाजपा को हराने की अपील करेंगे। इस पर भाजपा की तरफ से तीखा पलटवार किया गया है। टिकैत ने बीजेपी नेता को लुटेरा बताते हुए कहा था कि पीएम मोदी को गुजरात भेजना पड़ेगा। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को देश की सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।

टिकैत ने कहा था कि 8 महीने आंदोलन करने के बाद संयुक्त मोर्चा ने फैसला किया है कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब और पूरे देश में जाकर किसानों के सामने अपनी बात रखी जाएगी। इसकी तैयारी के लिए 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में बड़ी पंचायत की जाएगी।

बता दें कि हाल ही मे किसान संघों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि वे स्वतंत्रता दिवस पर भाजपा नेताओं और मंत्रियों को राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराने देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे हरियाणा में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। टाइम्स नाउ से बात करते हुए एक किसान नेता ने कहा कि वे राज्य में ट्रैक्टर परेड निकालेंगे और भाजपा नेताओं को काले झंडे दिखाएँगे।

शनिवार (जुलाई 24, 2021) को भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने धमकी देते हुए कहा था, “किसान संसद से किसानों ने गूँगी-बहरी सरकार को जगाने का काम किया है। किसान संसद चलाना भी जानता है और अनदेखी करने वालों को गाँव में सबक सिखाना भी जानता है। भुलावे में कोई न रहे।”

वहीं, भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने समानांतर संसद चलाने की धमकी दी थी। टिकैत ने यह धमकी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा ‘किसानों’ को केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने के बाद दी। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर तथाकथित किसानों ने विरोध प्रदर्शन कवर करने गए मीडियाकर्मी पर लाठियों से हमला किया गया था।

‘Ghost Stories’ में गर्भपात के बाद महिला को खाते दिखाया भ्रूण: अनुराग कश्यप के खिलाफ शिकायत

फिल्ममेकर अनुराग कश्यप 2020 में आई शॉर्ट फिल्म ‘घोस्ट स्टोरीज’ को लेकर मुश्किलों में फँस गए हैं। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म में चार कहानियाँ दिखाई गईं थीं, जिनमें एक कहानी को अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया था। इस फिल्म के एक सीन लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है।। 

ये शिकायत तब आई है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए भी सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गाइडलाइंस जारी कर दी है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर अब तक कोई सेंसर बोर्ड की पाबंदी नहीं थी। नियमों के मुताबिक, सभी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को दर्शकों की शिकायत दर्ज करने और उसका निवारण करने के लिए कहा गया है। ओटीटी प्लेटफॉर्म के कंटेंट पर नजर रखने के लिए साल 2021 में सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने नियम बनाए हैं। इसके तहत ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर आ रही शिकायतों को दूर किया जाएगा। इस नियम को लागू हुए कुछ महीने हुए हैं और पहली शिकायत आ गई है। यह शिकायत अनुराग कश्यप के खिलाफ है।

नेटफ्लिक्स इंडिया को इस मामले में अनुराग कश्यप के खिलाफ एक शिकायत मिली है। खबरों के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने फिल्म के एक सीन को लेकर आपत्ति जताई है, जिसमें एक्ट्रेस शोभिता धूलिपाला गर्भपात के बाद भ्रूण को खा जाती है। शिकायत में कहा गया है कि फिल्म में इस सीन को दिखाए जाने की कोई जरूरत नहीं थी और अगर वो इसे दिखाना भी चाहते थे तो उन्हें ऐसी महिलाओं के लिए एक वॉर्निंग इश्यू करनी चाहिए, जो इस तकलीफ से गुजर चुकी हैं।

शिकायत का जवाब 24 घंटे के भीतर माँगा गया है। नेटफ्लिक्स के प्रवक्ता ने इस पूरे मामले पर कहा है, “पार्टनर-मैनेज्ड प्रोडक्शन के तौर पर हमने प्रोडक्शन कंपनी से शिकायत को साझा करने के लिए संपर्क किया है।” वहीं, इस मामले पर इंस्टा स्टोरी में अनुराग अपनी प्रतिक्रिया भी दे चुके हैं। उन्होंने लिखा था– “तो ये शुरू हो गया है… नेटफ्लिक्स के पास घोस्ट स्टोरीज को लेकर शिकायत आई है। ये अंत है।”

दरअसल, ‘घोस्ट स्टोरीज़’ एक एंथोलॉजी हॉरर फिल्म है, जिसमें 4 अलग स्टोरीज को जोड़ कर दिखाया गया है। इस फिल्म को जोया अख्तर ने डायरेक्ट किया है। फिलहाल यह शिकायत नेटफ्लिक्स के ग्रीवेंस रिड्रेसल अधिकारी के पास दर्ज है, जिसका समाधान जल्द से जल्द करना होगा।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के जलसे में भारत के वामपंथियों की ता थैया, पीछे-पीछे कॉन्ग्रेसी भी कह सकते हैं- हम भी आ गए भैया!

लगभग महीने भर से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। भारत में इस समारोह की शुरुआत The Hindu ने एक पूरे पेज के बधाई युक्त विज्ञापन से की थी। इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए वामपंथी नेताओं ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार का यशगान किया। अब सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी राजा और कुछ अन्य नेताओं ने चीनी दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया

भारत के वामपंथियों ने (जी हाँ, ये भारतीय वामपंथी कहलाना पसंद नहीं करते) चीनियों के विश्वास की हमेशा रक्षा की है। ऐसे में शताब्दी समारोह में शामिल न होने का कोई कारण नहीं था। वैसे भी, कोई अपने बॉस को कैसे मना कर सकता है और भारत के वामपंथियों के वर्तमान बॉस पूरी दुनिया पर बॉस गिरी झाड़े पड़े हैं।

पिछले पाँच वर्षों में चीन के साथ हमारे संबंध केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि और क्षेत्रों में भी कैसे रहे हैं, यह जगजाहिर है। पिछले वर्ष लद्दाख में चीनी सेना द्वारा सीमा पर अतिक्रमण की जो कोशिश की गई वह भी सबके सामने है। गलवान घाटी में दोनों सेनाओं के बीच झड़प हुई और चीनी सैनिकों ने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए हमारे जवानों पर हमला किया। पूरा देश जब चीन की वैचारिक और सामरिक आक्रामकता के विरुद्ध एक है, उस समय इन वामपंथी नेताओं का चीनी दूतावास के समारोह में भाग लेना क्या संदेश देता है? जब ये नेता चीन की कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी सरकार की खुलकर बड़ाई करते हैं तब देश के नागरिकों को कैसा सन्देश जाता है? भारत में तथाकथित फासीवाद का रोना रोने वाले ये वामपंथी जब अलोकतांत्रिक चीनी सरकार की वैश्विक स्तर पर चल रही अतिक्रमण की नीतियों की आलोचना तक नहीं कर पाते तो क्या संदेश जाता है?

ये ऐसे प्रश्न हैं जो बार-बार उठते हैं और जब उठते हैं तब इन्हें दुनिया भर के कम्युनिस्ट कुतर्क या बौद्धिकता के तीर से मार गिराते हैं। ऐसे में यह प्रश्न अनुत्तरित रह जाता है कि जो कम्युनिस्ट अपनी हर बौद्धिक जुगाली में एक सीमाविहीन दुनिया की कल्पना करते हुए रूमानी हुए रहते हैं वे ‘अपने बॉस’ से यह तक नहीं पूछ पाते कि बॉस, आपने हमें इस काम पर लगा दिया है कि हम विश्व भर को एक सीमाविहीन दुनिया का सपना दिखाएँ पर खुद पूरी दुनिया की सीमाओं पर अतिक्रमण करते क्यों घूम रहे हैं? क्यों नहीं पूछते कि हे बॉस, हम आपकी घटिया करतूतों की रक्षा में ‘ग्लोबल वर्ल्ड’ जैसे घटिया तर्क देते हैं और आपने खुद के देश को ग्लोबल वर्ल्ड से अलग क्यों रखा है? नहीं पूछते कि साम्राज्यवाद के विरुद्ध जुगाली करते-करते आप खुद साम्राज्यवादी कैसे बन गए और एशिया से लेकर अफ्रीका तक अपनी कॉलोनी बसाने पर आमादा हैं? 

सबसे मजे की बात यह है कि कम्युनिस्ट मीडिया, उसके संपादक, उसके बुद्धिजीवी और पत्रकार ऐसा करना तो अफोर्ड भी कर सकते हैं पर भारतीय चुनावों में भाग लेकर सरकार बनाने वाले ये वामपंथी लोकतंत्रविहीन चीन और उसकी सरकार का यशगान कैसे अफोर्ड कर लेते हैं? वह भी तब जब इन्हें चुनाव लड़कर सरकार बनाने और राज करने के लिए जनता के बीच जाना पड़ता है। यह करने के लिए किस स्तर की ढिठाई की आवश्यकता पड़ती होगी और वो ढिठाई ये कहाँ से आयात करते होंगे? 

भारत के वामपंथी देश भर की भावनाओं की परवाह इक्कीसवीं सदी में नहीं करते, ऐसे समय में जब बातें और मुलाकातें छिपाए नहीं छिपती। ऐसे में यह विचारयोग्य बात है कि जब हम सुनते हैं कि 1962 के युद्ध में ये चीन के साथ खड़े थे तो इस बात पर हमें विश्वास क्यों न हो? जब हम सुनते हैं कि हमारे ये वामपंथी भारत-चीन लड़ाई के समय चीन के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे थे या भारतीय सरकार को अतिक्रमणवादी बता रहे थे तब हमें इन बातों पर विश्वास क्यों न हो?

हमारे वामपंथियों को तो कॉन्ग्रेस पार्टी की तरह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ किसी समझौता ज्ञापन को भी छिपाने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा भी नहीं कि सीपीसी के साथ समझौता ज्ञापन पर दस्तखत के सालों बाद भारत को पता चले कि दुनिया में ऐसे भी विषय हैं जिन पर लोकतान्त्रिक भारत की ‘ग्रैंड ओल्ड पार्टी’ और अलोकतांत्रिक चीन की सीपीसी एक ही तरह से सोचते हैं। या हम उस दिन की कल्पना करें जब वामपंथियों की कला सीख कर कॉन्ग्रेसी भी भविष्य में चीनी दूतावास के समारोहों में खुलेआम दिखाई दे सकते हैं!

जान बचानी है तो TMC ज्वाइन करो: जिस रितु से हुआ गैंगरेप उसे धमकी, ऑपइंडिया से कहा- हिंदू होना, BJP को वोट देना गुनाह

ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नुपुर जे शर्मा ने 26 जुलाई को हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की जीत के बाद पार्टी के अत्याचारों की शिकार हुई रितु (बदला हुआ नाम) से बात की। रितु ने पुलिस की उदासीनता के कारण बढ़ रही अपनी पीड़ा और राज्य में पीड़ितों की बेबसी के बारे में खुलकर बताया था।

टीएमसी के गुंडों ने पिता के सामने ही रितु के साथ सामूहिक बलात्कार किया था और इस मामले में मदद करने की बजाय पुलिस ने उसे और उसके पिता को ही लगातार परेशान किया। पिता-बेटी पर घटना को अलग रूप देने और इसे रिकॉर्ड में दर्ज करने का दबाव डाला गया। रितु ने ऑपइंडिया की एडिटर नुपुर जे शर्मा को बताया कि उसे धमकी भरे फोन भी आए हैं। फोन पर धमकाया गया कि अगर वह पुलिस के पास जाने की कोशिश की तो पुलिस भी उसके साथ बलात्कार करेगी।

रितु ने कल (28 जुलाई, बुधवार) को दावा किया कि उसे जबरदस्ती स्थानीय टीएमसी बदमाश मामून शेख के पास ले जाया गया, जिसके इशारे पर 2 मई 2021 को टीएमसी के गुंडों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया था। उन लोगों ने रितु पर एनएचआरसी में दर्ज बलात्कार की शिकायत को वापस लेने का दबाव डाला और टीएमसी में शामिल नहीं होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

पीड़ितों ने सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा को अपनी दुर्दशा के बारे में बताया। उसके बाद एनएचआरसी को शिकायत दर्ज कराई गई।

28 जुलाई को दर्ज शिकायत में रितु (बदला हुआ नाम) ने NHRC में अपनी पहली शिकायत दर्ज करने के बाद से मिल रही धमकियों और उसके एवं उसके पिता पर की गई बर्बरता का विवरण संक्षेप में प्रस्तुत किया गया है।

रितु की कॉपी (बदला हुआ नाम) एनएचआरसी में दर्ज दूसरी शिकायत

एनएचआरसी की शिकायत में रितु ने लिखा है कि उसने 23 जुलाई को एनएचआरसी के समक्ष अपनी पहली शिकायत दर्ज करवाई, उसके बाद से ही उस पर पुलिस और स्थानीय टीएमसी गुंडों द्वारा शिकायत वापस लेने और अपना बयान बदलने के लिए लगातार दबाव डाला गया।

23 जुलाई को उसने कहा कि कुछ पुलिसकर्मियों ने उसके पिता को गाली दी और उसे (पीड़िता को) उसके सामने पेश करने के लिए कहा। रितु ने अपनी शिकायत में लिखा कि उनकी बॉडी लैंग्वेज से यह स्पष्ट था कि वे उसे नुकसान पहुँचाना चाहते थे। उन्होंने उस दिन कुछ जाने-माने लोगों को फोन करके खुद को बचाया, जिन्होंने एनएचआरसी से संपर्क किया।

26 और 27 जुलाई को टीएमसी नेताओं ने उसके परिवार और रिश्तेदारों से संपर्क किया। रितु के शिकायत वापस नहीं लेने और अपना बयान वापस नहीं लेने पर उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। रितु ने अपनी शिकायत में कहा कि टीएमसी के गुंडों ने उसके परिवार और रिश्तेदारों पर काफी दबाव डाला।

‘मेरा एकमात्र अपराध यह है कि मैं हिंदू हूँ और मैंने BJP को वोट दिया’

फिर 28 जुलाई (बुधवार) को उसे जबरदस्ती टीएमसी के मामून शेख के पास ले जाया गया, जिसने उससे कहा कि वो टीएमसी में शामिल हो जाए वरना उसे और उसके परिवार को मार दिया जाएगा। रितु ने अपनी शिकायत में कहा, “उन्होंने मुझे स्पष्ट रूप से कहा कि मुझे बचाने वाला कोई नहीं है, इसलिए मुझे टीएमसी में शामिल हो जाना चाहिए।”

रितु की शिकायत का अंश

उसने कहा, “मैं बेहद डरी हुई हूँ। पुलिस और टीएमसी दोनों एक साथ हैं और मुझ पर अपनी शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। मेरा एकमात्र अपराध यह है कि मैं एक हिंदू हूँ और मैंने भाजपा को वोट दिया। कृपया मुझे और मेरे परिवार की जान बचा लीजिए।”

NHRC में अपनी पहली शिकायत में रितु ने 7 टीएमसी गुंडों द्वारा उस पर की गई बर्बरता के बारे में बताया था। इन लोगों ने उसे नग्न किया और उसके पिता के सामने बारी-बारी से उसका बलात्कार किया। उसने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया था कि टीएमसी के गुंडे पिता-पुत्री को टीएमसी में शामिल होने और भाजपा छोड़ने की धमकी दे रहे थे।

बंगाल पीड़िता के साथ ऑपइंडिया का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू

26 जुलाई को ऑपइंडिया से बात करते हुए रितु ने खुलासा किया कि कैसे टीएमसी के गुंडों ने राज्य पुलिस की मिलीभगत से बंगाल के अंदरूनी हिस्सों के कई गाँवों और कस्बों में उन पर और कई अन्य भाजपा पीड़ितों के साथ अत्याचार किया। कथित तौर पर टीएमसी के लिए काम करने वालों द्वारा उनके इलाके के कई घरों पर बेरहमी से हमला किया गया था।

टीएमसी के गुंडों द्वारा कुछ महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार की खबर भी जंगल की आग की तरह फैली थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए रितु कहती हैं कि जहाँ गाँव जल गया और महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ, वहाँ पुलिस नजर नहीं आई। उनका कहना है कि जब मदद के लिए फोन किया जा रहा था तो पुलिस ने फोन तक नहीं उठाया।

ऑपइंडिया की एडिटर-इन-चीफ नुपुर जे शर्मा के साथ रितु का इंटरव्यू यहाँ पर पढ़ा जा सकता है।

तमिलनाडु: तिरुनेलवेली में पहाड़ी पर बने मंदिर को किया अपवित्र, पवित्र चट्टानों पर लिखा- अल्लाह, 786

तमिलनाडु में एक बार फिर हिन्दू मंदिर को निशाना बनाया गया है। तिरुनेलवेली के अलवरकुरिची में अथथ्री पहाड़ी पर स्थित चट्टानों को काट कर बनाए गए मंदिरों को नुकसान पहुँचाया गया है। कथिर न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार अथथ्री पहाड़ी पर स्थित मंदिरों को कथित तौर पर मुस्लिमों के द्वारा अपवित्र किया गया है। उन्होंने पवित्र चट्टानों पर इस्लामिक प्रतीक चिन्ह चंद्रमा के साथ 786 लिखा है और साथ ही आरोपितों द्वारा ‘अल्लाह’ शब्द भी लिखा गया है।

हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाए जाने के बाद भक्तों में आक्रोश है और उन्होंने तमिलनाडु सरकार एवं उसके हिन्दू धार्मिक और चैरिटेबल एंडोवमेंट (HR&CE) विभाग के द्वारा तुरंत ही इस मुद्दे पर कार्रवाई करने और हिन्दू मंदिरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है।

HR&CE विभाग के पास तिरुनेलवेली के अथथ्री पहाड़ी पर स्थित अरुल्मिगु अनुसूईया देवी समेदा अथथ्री परमेश्वर मंदिर और गोरक्कर मंदिर के प्रशासन की जिम्मेदारी है। यहाँ से निकलने वाली कदाना नदी जो कि अथथ्री गंगा तीर्थम के नाम से जानी जाती है, दुर्लभ सफेद कछुओं का निवास स्थान है। हिन्दू भक्तों को अब इस पवित्र पहाड़ी पर अपने मंदिरों के अवैध अतिक्रमण का डर सता रहा है।

भक्तों को आशंका है कि इस्लामिक संगठन पवित्र पहाड़ी पर अतिक्रमण करने का प्रयास कर रहे हैं और राज्य वन विभाग पर इन संगठनों की सहायता का आरोप लगाया जा रहा है। इसके पहले भी तमिलनाडु में हिन्दू मंदिरों को निशाना बनाया जा चुका है। हाल ही में पुडुक्कोट्टई में एक चोल कालीन ‘कैलाशनाथर’ शिव मंदिर को अपवित्र कर दिया गया था और साथ ही अज्ञात आरोपितों के द्वारा मंदिर में स्थापित देवताओं की प्रतिमाओं के सिर को धड़ से अलग कर दिया गया था।

तमिलनाडु के ही रानीपेट के एक मंदिर में भी हिन्दू घृणा का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ अपमानजनक अवस्था में रखी हुई मिलीं। देवी अम्मन और माँ दुर्गा की प्रतिमाओं को अस्त-व्यस्त किया गया था। प्रतिमाओं पर हस्तमैथुन किया गया था जिसके बाद पवित्र प्रतिमाओं पर सीमेन बिखरा पड़ा था और उनके कपड़े भी जला दिए गए थे।

कर्ज में डूबा, 4 साल से एडमिशन नहीं: दामाद के परिवार का मेडिकल कॉलेज, दरियादिल हुई भूपेश बघेल सरकार

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार ने चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण को लेकर विधानसभा में बुधवार (28 जुलाई 2021) को विधेयक पेश किया। दुर्ग में स्थित इस मेडिकल कॉलेज के सरकारी अधिग्रहण को लेकर जारी विवादों के बीच यह कदम उठाया गया है। आरोप है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कर्ज में डूबे इस मेडिकल कॉलेज पर सरकारी दरियादिली अपने रिश्तेदारों को फायदा पहुँचाने के लिए दिखा रहे हैं। हालाँकि इन आरोपों को वे पूर्व में ही सिरे से नकार चुके हैं। इस बीच यह मामला हाईकोर्ट में भी पहुँच गया है।

चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज का संचालन पिछले करीब 12 सालों से विवादों में रहा है। आखिरी बार 2017 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के इंस्पेक्शन के बाद 150 सीटों पर दाखिला दिया गया था। लेकिन उसके बाद से कॉलेज की हालत और भी खराब होती चली गई। कॉलेज की आर्थिक स्थिति सही नहीं रही और वर्तमान में कॉलेज की यह हालत है कि पिछले 4 सालों से कॉलेज में जीरो ईयर की स्थिति है। अर्थात कॉलेज में चार सालों से कोई एडमिशन नहीं हुआ है। यहाँ तक कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों को भी कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सका।

इस विवादित मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण के निर्णय के विरोध में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई है और याचिका दाखिल करने वाले कोई और नहीं बल्कि जिनके नाम पर यह कॉलेज है, उन चंदूलाल चंद्राकर के पोते अमित चंद्राकर हैं। अमित का आरोप है कि बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने अवैध दस्तावेजों का उपयोग करके बैंक से लोन लिया है। अमित के द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया है कि उनके दादा के द्वारा अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के लिए कई सालों पहले जमीन लीज पर ली गई थी। लेकिन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के द्वारा इस जमीन को गिरवी रखकर इंडियन बैंक से लोन ले लिया गया और लोन की राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है जिसके कारण कॉलेज आज घाटे में है।

लोन की राशि न जमा होने के कारण बैंक ने भी अब कॉलेज को नीलाम करने की घोषणा कर दी थी। इसी बीच राज्य सरकार द्वारा कॉलेज और अस्पताल के अधिग्रहण संबंधी विधेयक को विधानसभा में पेश किया गया है। अमित द्वारा बैंक और राज्य सरकार के निर्णयों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है जिस पर आगामी दिनों में सुनवाई हो सकती है। छत्तीसगढ़ कॉन्ग्रेस के जॉइंट सेक्रेटरी अमित चंद्राकर ने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया था कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने दामाद को इस बिल के जरिए फायदा पहुँचाना चाहते हैं।

राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने इस मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण के लिए छत्तीसगढ़ चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज दुर्ग (अधिग्रहण) बिल, 2021 विधानसभा में पेश किया। इस अधिग्रहण के संबंध में विवाद इसलिए हो रहा है क्योंकि कॉलेज के मालिकाना हक़ उस परिवार के पास हैं, जिसमें बघेल की बेटी की शादी हुई है। सीएम भूपेश बघेल की बेटी दिव्या की शादी मंगल प्रसाद चंद्राकर के भतीजे क्षितिज चंद्राकर से हुई है। क्षितिज ‘ऑल इंडिया प्रोफेसनल कॉन्ग्रेस’ की छत्तीसगढ़ यूनिट के अध्यक्ष भी हैं। वो कहते हैं कि उनके पिता और चाचा 6-7 वर्ष पहले ही सौहार्दपूर्ण तरीके से अलग हो गए हैं। लेकिन, फिर भी वो छात्रों के हित में कॉलेज के अभिग्रहण का समर्थन करते हैं।

हालाँकि यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि भले ही इस अधिग्रहण को छात्रों के हित में उठाया जाने वाला कदम बताया जा रहा है लेकिन 01 जुलाई 2021 को ही मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट के सचिव ने पत्र लिखकर चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के छात्रों को राज्य के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित करने के लिए कहा था जिसके कारण छात्रों के भविष्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसे लेकर भूपेश बघेल सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि भूपेश बघेल अपने दामाद का निजी महाविद्यालय बचाने के लिए उसे सरकारी कोष से खरीदने की कोशिश में हैं। सिंधिया ने आरोप लगाया था कि प्रदेश की राशि का उपयोग अपने दामाद के लिए किया जा रहा है, वो भी एक ऐसे मेडिकल कॉलेज जिस पर धोखाधड़ी के आरोप MCI द्वारा लगाए गए थे। सिंधिया के अलावा केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी दिवालिया घोषित हो चुके इस कॉलेज के अधिग्रहण को लेकर राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार की आलोचना की थी।

मेडिकल कॉलेजों में OBC को 27%, EWS को 10% आरक्षण: MBBS में 56% और पीजी में 80% की वृद्धि – मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला

त्वरित फैसले लेने के लिए विख्यात केंद्र की मोदी सरकार ने गुरुवार (29 जुलाई 2021) को मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया है।

केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह ऐतिहासिक फैसला ऑल इंडिया कोटा स्कीम के तहत वर्तमान शैक्षणिक वर्ष 2021-22 से ही लागू होगा। इसके तहत MBBS, MS, BDS, MDS, डेंटल, मेडिकल और डिप्लोमा में 5,550 कैंडिडेट्स को फायदा मिलेगा। केंद्र सरकार के इस निर्णय से हर साल एमबीबीएस में लगभग 1,500 ओबीसी एवं 550 ईडब्ल्यूएस छात्रों को प्रवेश मिल सकेगा। वहीं, मेडिकल के स्नातकोत्तर कोर्स में 2,500 ओबीसी छात्रों और करीब 1,000 ईडब्ल्यूएस छात्रों को प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।

इस मामले में फैसला लेने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2021 को इसी मुद्दे को लेकर बैठक की थी। मीटिंग के तीन दिन बाद ही केंद्र सरकार ये ऐतिहासिक फैसला लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “यह हमारे हजारों युवाओं को हर साल बेहतर अवसर प्राप्त करने और हमारे देश में सामाजिक न्याय का एक नया प्रतिमान बनाने में मदद करेगा।”

पीआईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय 2014 के बाद से चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों के अनुरूप है। बीते 6 सालों में देश में 56 प्रतिशत एमबीबीएस की सीटें बढ़ी हैं। 2014 में एमबीबीएस के लिए 54,348 सीटें थीं, जो बढ़कर 2020 में 84,649 तक पहुंच गई हैं। वहीं, इस अवधि में पीजी सीटों में 80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। पीजी में सीटों की संख्या 2014 में 30,191 थीं, जो 2020 में बढ़कर 54,275 हो गई हैं। इसके अलावा, इसी अवधि के दौरान देश में 179 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जिससे देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 558 हो गई है। इनमें 289 सरकारी और 269 प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं।

गया के मिस्बाह ने ‘प्यार’ में तो चंडीगढ़ के रियाज ने माँ की ‘ममता’ में बदला नाम: बन गए हिंदू

बिहार के गया जिले से एक मुस्लिम युवक द्वारा प्यार में धर्म परिवर्तन करने का मामला सामने आया है। मोहम्मद मिस्बाह नाम का यह युवक अब प्रिंस कुमार बन गया है। मिस्बाह से प्रिंस बने युवक का कहना है कि उसे हिंदू धर्म से लगाव है और उसने अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन किया है।

मिस्बाह औरंगाबाद के रफीगंज का रहने वाला है। उसे एक हिंदू लड़की से प्यार हो गया। प्रेमिका को लेकर मिस्बाह घर से भागा तो उस पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हो गया। प्रेमिका नाबालिग थी। पॉक्सो एक्ट लगने के बावजूद मिस्बाह को इसलिए जेल नहीं हुई क्योंकि उसकी प्रेमिका ने 164 के तहत जो बयान दिया उसमें प्रेमी को दोषी नहीं ठहराया गया। अब मिस्बाह की प्रेमिका बालिग हो चुकी है। मिस्बाह ने प्रिंस बनने का फैसला कर लिया। मिस्बाह ने हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया है।

मिस्बाह से प्रिंस बने युवक को उम्मीद है कि अब उसकी प्रेमिका के परिवार वाले मान जाएँगे। अपने प्यार को पाने के लिए उसने धर्म बदल डाला। प्रिंस का कहना है कि उसे हिंदू धर्म से लगाव हो गया था। वो खुद अपनी मर्जी से हिंदू धर्म अपना रहा है। उसके ऊपर किसी का कोई दबाव नहीं है। फिलहाल मिस्बाह ऊपर दर्ज पॉक्सो का केस खत्म नहीं हुआ है।

वहीं चंडीगढ़ में एक मुस्लिम पुरुष से निकाह करने वाली हिंदू महिला के बेटे ने भी धर्म परिवर्तन किया है। हिन्दू महिला निकाह के कुछ समय बाद पति से अलग हो गई थी। उसके 31 साल के बेटे रियाज खान ने अपना नाम बदलने का फैसला किया है। स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी है।

उन्होंने ट्वीट में अखबार में प्रकाशित इससे सम्बंधित सूचना का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया है। इसमें कहा गया है, “मेरा पूर्व नाम रियाज खान उर्फ विक्की खान था। मेरी माता सोनी हिंदू धर्म की अनुयायी रही हैं तथा मैं अपनी माता के धर्म को ही बचपन से मानता आया हूँ। बालिग होने के बाद मेरा पूरा विश्वास हिंदू धर्म पर आ चुका था।”

साथ ही कहा है, “मैं अपनी माता के साथ बचपन से अपने पिता से अलग निवास कर रहा हूँ तथा मैं अपने पिता द्वारा दिए गए नाम रियाज खान उर्फ विक्की खान का त्याग करते हुए अपना नाम सोनी उर्फ विक्की कर रहा हूँ।”

आगे बताया गया है, “अब से मैं अपने नए नाम सोनी उर्फ विक्की के नाम से जाना एवं पहचाना जाऊँगा तथा अब से मेरा नया नाम सोनी उर्फ विक्की ही मेरा सही नाम होगा तथा समस्त शासकीय अर्धशासकीय एवं निजी निकायों, संस्थाओं एवं कार्यालय वे अभिलेखों में मेरा पूर्व नाम रियाज खान के स्थान पर मेरा नया नाम सोनी समझा जाएगा।”

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का रहने वाले अनुसूचित जाति के एक शख्स का पुणे में धर्मांतरण करने का मामला सामने आया था। बाद में उसने अपने मूल हिंदू धर्म में वापसी कर ली। डेविड कुमार नाम का शख्स पुणे के एक बेकरी में काम करता था। इसी दौरान बेकरी संचालकों ने उसकी गरीबी दूर करने के नाम पर उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया। धर्मान्तरण के बाद युवक ने अपना नाम डेविड कुमार से बदलकर मोहम्मद बिलाल रख लिया था। गाँव के ही संत रविदास मंदिर में पुजारी राधा मोहन ने पूजा-पाठ कराकर डेविड कुमार की घर वापसी कराई थी।

कमाल की विकिपीडिया! 55 साल के मिलिंद सोमन को 2020 में पैदा किया, वो भी 2 बार; नंगा दौड़ा केस भी कराया

बॉलीवुड एक्टर व मॉडल मिलिंद सोमन ने कल (जुलाई 28, 2021) सोशल मीडिया पर विकिपीडिया की गलती उजागर की। उन्होंने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दिखाया कि कैसे विकिपीडिया पर उनके जन्मदिन को लेकर एक नहीं दो-दो तारीखें मौजूद हैं। अपने ट्वीट में वह पूछते हैं कि क्या किसी ने विकिपीडिया को हैक कर लिया है।

मिलिंद अपने ट्वीट में लिखते हैं, “क्या किसी ने विकिपीडिया को हैक कर लिया है? गजब बात है मैं पिछले ही साल दो अलग-अलग तारीखों पर पैदा हुआ।”

एक्टर द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि विकिपीडिया पोस्ट में उनका जन्मदिन 4 नवंबर 2020 और 28 जुलाई 2020 दिखाया गया, जबकि हकीकत में 55 वर्षीय मिलिंद की बर्थडेट 4 नवंबर 1965 है। हाल में वह अपनी इंस्टाग्राम पर न्यूड तस्वीर डालने के कारण चर्चा में आए थे।

मिलिंद ने अपने ट्वीट में विकी पेज पर मौजूद अन्य गलतियाँ भी गौर करवाईं। वह गलती पर सर्कल करते हैं जहाँ लिखा है कि गोवा बीच पर न्यूड दौड़ लगाने की वजह से मिलिंद के खिलाफ आईपीसी की धारा- 294 और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत केस दर्ज किया गया है। मिलिंद इस पेज को शेयर करते हुए लिखते हैं, “हाँ, मैं दौड़ा था और वह तस्वीर मेरे इंस्टाग्राम पेज पर भी है भी, लेकिन केस दर्ज?”

बता दें कि इस ट्वीट पर उनके फैन्स की अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है। वहीं उनकी पत्नी अंकिता कोंवार ने भी इस ट्वीट पर रिप्लाई किया है। उन्होंने लिखा, “हाहाहा, वैसे अगर न्यूज चैनल को ये नहीं पड़ी है कि वो जानकारियों को सत्यापित करें। तो विकी को क्या जरूरत पड़ी है। विकी के हिसाब से मैं इस साल 20 की हो जाऊँगी।”

गौरतलब है कि अंकिता कोंवार अभी अपने एक पोस्ट को लेकर खासी चर्चा में हैं। इसमें उन्होंने लिखा था, ”अगर आप नॉर्थ ईस्ट इंड‍िया से हैं तो तभी भारतीय हो सकते हैं जब आप देश के लिए मेडल जीतकर लाते हैं। वरना आपको चिंकी, चाइनीज, नेपाली या अब एक नया एडिशन कोरोना के नाम से जाना जाता है।”

‘मेरी रगों में मुस्लिम खून है’ – सुनील दत्त को संजय दत्त का जवाब… और वो किताब, जिसे भेजा गया लीगल नोटिस

लेखक यासीर उस्मान ने बॉलीवुड स्टार संजय दत्त पर एक किताब लिखी है, जिसका नाम दिया है- ‘संजय दत्त: द क्रेजी अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ बॉलीवुड्स बैड ब्वॉय’। इस किताब का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है।

किताब के इस हिस्से में कहा गया है कि संजय दत्त के पिता सुनील दत्त को यकीन नहीं हो रहा था कि उनका बेटा किसी तरह के आतंकी गतिविधि में संलिप्त है। जब सुनील दत्त उनसे मिलने के लिए पुलिस हेडक्वार्टर गए तो संजय दत्त पिता के गले लगकर रोने लगे। सुनील दत्त अपने बेटे के मुँह से सुनना चाहते थे कि मीडिया में जो कुछ दिखाया जा रहा है वह गलत है, उनका बेटा आतंकी नहीं हो सकता है।

‘संजय दत्त: द क्रेजी अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ बॉलीवुड्स बैड ब्वॉय’ का अंश

तभी संजय दत्त ने स्वीकार किया कि उनके पास एक असॉल्ट राइफल और कुछ गोला-बारूद है, जो उन्हें अनीस इब्राहिम ने दिया था। इस बात से हैरान सुनील दत्त ने जब यह जानने की कोशिश की कि उन्होंने ऐसा क्यों किया तो किताब के लेखक के मुताबिक संजय दत्त ने कहा था, “क्योंकि मेरी रगों में मुस्लिम खून है और शहर में जो रहा है, उसे मैं सहन नहीं कर सका।” इसी किताब के अनुसार फिल्म निर्माता महेश भट्ट का कहना था, “सुनील दत्त काफी शर्मिंदा हुए। उनके बेटे ने जो कहा, जो किया, उन्हें उस पर उसे विश्वास नहीं हो रहा था।”

‘संजय दत्त: द क्रेजी अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ बॉलीवुड्स बैड ब्वॉय’ का अंश

हाल ही में जावेद अख्तर ने एक ट्वीट करते हुए कहा था कि शाहजहाँ की रगों में राजपूतों (75%) का भी खून था, इसके बावजूद लोग उन्‍हें ‘विदेशी’ कहकर बुलाते हैं। इस पर किताब के इस पन्ने को शेयर करते हुए नितिन गुप्ता ने लिखा, “जावेद अख्तर की खुद की इंडस्ट्री में ये हो चुका है और वो शाहजहाँ के 75% राजपूत खून की बात कर रहा है।”

यासिर उस्मान ने खलीज टाइम्स से बात करते हुए कहा था कि एके-56 रखने के लिए जेल की सजा के बाद भी लोग इस तरह से प्रतिक्रिया दे रहे थे, “ओह, वह सिर्फ अपने परिवार की रक्षा कर रहा था।” उन्होंने कहा, “मैं एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से मिला, उन्होंने हँस कर मुझसे कहा कि जरा कल्पना कीजिए, वह संजय दत्त है, जो भारत के सबसे बड़े सितारों में से एक है, सुनील दत्त का बेटा है, जो सत्ताधारी दल के एक निर्वाचित सांसद हैं। क्या आपको सच में लगता है कि अगर उसने हमें फोन किया होता, तो उसे सुरक्षा नहीं मिलती?”

दूसरी बात उस अधिकारी ने किताब के लेखक यासिर उस्मान को बताई थी कि जब संजय दत्त ने एके-56 खरीदा तो उनके पास पहले से ही तीन लाइसेंसी हथियार थे। ऐसा नहीं है कि वह उतने मासूम थे, जितना कि फिल्म इंडस्ट्री उन्हें दिखा रही है।

संजय दत्त के धर्म को लेकर बदले दृष्टिकोण पर यासिर उस्मान ने बताया, “1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद राजनीतिक रूप से हमारे आसपास की दुनिया बदल गई। बॉम्बे में दो चरणों में दंगे हुए। शिवसेना उस समय कॉन्ग्रेस की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी थी। सुनील दत्त कॉन्ग्रेस के सांसद थे। प्रतिद्वंद्वियों ने एक ऐसा नैरेटिव बनाना शुरू किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि सुनील दत्त केवल मुसलमानों की मदद कर रहे थे। यह तथ्यात्मक रूप से गलत था। मैं उनके निर्वाचन क्षेत्र के कई लोगों से मिला, जिन्होंने कहा कि यह दुष्प्रचार था। फिर 1993 में हुए धमाके हुए, यह असल में परिवार के खिलाफ गया।”

वो आगे कहते हैं, “यह एक पूरा प्रकरण है, जहाँ सुनील दत्त पुलिस स्टेशन में अपने बेटे से पूछते हैं – “तुमने ऐसा क्यों किया?” संजय दत्त कहते हैं, “मेरी रगों में मुस्लिम खून है।” इस मामले में किसी भी तरफ से कोई मदद नहीं मिलने पर सुनील दत्त बाला साहेब ठाकरे (शिवसेना के संस्थापक) से मिलने गए। सुनील दत्त उनसे बोले कि वह किसी राजनीतिक दल के सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि एक पिता के रूप में वहाँ आए हैं।”

उसके बाद बाला साहेब ठाकरे ने उनकी मदद के लिए सब कुछ किया। शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में उन्हें एक महान देशभक्त कहा गया। आखिरकार संजय दत्त जब जमानत पर बाहर आए तो उनके माथे पर एक बड़ा सा तिलक लगा हुआ था। वे सीधे मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर गए। बेशक मंदिर जाने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इससे पहले वे अपने धर्म को लेकर इतने मुखर नहीं थे। इस तरह राजनीतिक नैरेटिव भी बदला गया, जिसने दत्त परिवार को सीधे प्रभावित किया।”

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‘संजय दत्त: द क्रेजी अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ बॉलीवुड्स बैड ब्वाय’ का अंश

महेश भट्ट ने उनकी मुस्लिम पहचान को लेकर कहा था, “वह अपने गले की लॉकेट में कुरान शरीफ की आयत पहनता है।” फिर बाद में कहते हैं, “अब तो वह बदल गया है। टीका लगाता है आजकल।” वहीं, अपने जेल के अनुभव के बारे में बात करते हुए संजय दत्त ने कहा था, “मैं गीता पढ़ा करता था। मैंने हिंदू धर्म की बहुत सारी पुस्तकें पढ़ीं। मैं बहुत बड़ा शिवभक्त हूँ।”

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‘संजय दत्त: द क्रेजी अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ बॉलीवुड्स बैड ब्वाय’ का अंश

हालाँकि, इस किताब को लेकर काफी कंट्रोवर्सी है। लेखक ने संजय दत्त की जीवनी के नाम पर किताब बेची, लेकिन उन्होंने संजय दत्त से संपर्क नहीं किया। इस बात को लेकर संजय दत्त ने यासिर उस्मान और पब्लिकेशन के खिलाफ लीगल एक्शन लेने की बात की थी और उन्हें इसके लिए लीगल नोटिस भी भेजा था।

संजय दत्त की तरफ से भेजे गए लीगल नोटिस पर ‘संजय दत्त: द क्रेजी अनटोल्ड लव स्टोरी ऑफ बॉलीवुड बैड ब्वॉय’ के पब्लिसर्स ने कहा था कि किताब के फैक्ट्स पब्लिक डोमेन से मिली जानकारी के आधार पर लिखे गए हैं। किताब में जो भी बातें लिखी गई हैं, वो संजय दत्त के पुराने इंटरव्यू के अलावा 1990 के दशक में पत्र-पत्रिकाओं में छपी बातों से ही लिए गए हैं। उन्हीं बातों के आधार पर इस किताब का पब्लिकेशन किया गया है।

यासिर उस्मान ने इस नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “अगर आप किताब पढ़ते हैं तो यह एक पूरी तस्वीर पेश करती है। मैं पुस्तक की प्रत्येक पंक्ति के साथ खड़ा हूँ, क्योंकि प्रत्येक कथन का विधिवत श्रेय दिया गया है। इसके अलावा, यह विशुद्ध रूप से उन साक्षात्कारों पर आधारित है, जो उन्होंने पत्रिकाओं को दिए हैं और मुझे भी। मेरा दूसरा सबसे बड़ा स्रोत उनकी बहनें नम्रता और प्रिया द्वारा लिखित पुस्तक ‘मिस्टर एंड मिसेज दत्त’ है। मेरा तीसरा स्रोत वे फिल्म निर्माता हैं, जो उन्हें जानते हैं।”