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हिमाचल में भूस्खलन: 1 मिनट 1 सेकंड के वीडियो में मौत का तांडव – 9 की मृत्यु, 3 घायल

महाराष्ट्र में बारिश-बाढ़ के बाद भूस्खलन के कारण 138+ लोगों की जान के बाद अब हिमाचल प्रदेश से बुरी खबर। यहाँ भूस्खलन हुआ किन्नौर (Kinnaur) जिले के बटसेरी (Batseri) गुंसा के पास। इस हादसे में दिल्ली और चंडीगढ़ से हिमाचल घूमने आए 9 पर्यटकों की मौत हो गई जबकि 3 घायल हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार किन्नौर जिले में बटसेरी के गुंसा के पास छितकुल से सांगला की ओर आ रही पर्यटकों की गाड़ी भूस्खलन में फँस गई। इस दौरान पहाड़ी के टूटते और उस पर से भारी-भरकम पत्थर को गिरते देख किसी स्थानीय ने इसे रिकॉर्ड कर लिया।

प्रसार भारती ने अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर किया है। वीडियो में आप स्पष्ट तौर पर भूस्खलन और उसके खौफनाक दृश्यों को देख सकते हैं।

इस हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुँच गई है। हालाँकि पहाड़ी से लगातार गिरते पत्थर के कारण रेस्क्यू में दिक्कत आ रही है। प्रशासन के साथ बटसेरी के स्थानीय लोग भी रेस्क्यू में जुटे हुए हैं।

भूस्खलन होने से गाँव के लिए बास्पा नदी पर बना करोड़ों का पुल टूट गया है, जिससे गाँव का संपर्क कट गया है।

‘गाँधी की हत्या के बाद कॉन्ग्रेस ने करवाया था ब्राह्मणों का नरसंहार, पुलिस ने दर्ज नहीं किया एक भी केस’: इतिहासकार का खुलासा

ये अब किसी से छिपा नहीं है कि महात्मा गाँधी की हत्या के बाद मुंबई व पूरे महाराष्ट्र में ब्राह्मणों के खिलाफ दंगे भड़क गए थे और उनका नरसंहार हुआ था। अब लेखक व इतिहासकार विक्रम सम्पत ने कहा है कि महात्मा गाँधी की हत्या के बाद ब्राह्मण-विरोधी नरसंहार कॉन्ग्रेस नेताओं ने करवाया था। उन्होंने बताया कि इन मामलों में एक भी केस दर्ज नहीं किया गया था। विक्रम सम्पत ने ‘Times Now’ चैनल पर नविका कुमार से बात करते हुए ये बात कही

बता दें कि विक्रम सम्पत को विनायक दामोदर सावरकर पर शोध कर के उनकी जीवनी लिखने के लिए जाना जाता है। उन्होंने सावरकर पर ‘Savarkar (Part 1): Echoes from a Forgotten Past, 1883–1924’ और ‘Savarkar (Part 2): A Contested Legacy, 1924-1966’ नामक पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने इन दोनों पुस्तकों में वीर सावरकर की पूरी जीवनी को समेटा है।

विक्रम सम्पत ने कहा कि ये आज भी अधिकतर लोगों को पता नहीं है कि 1984 में दिल्ली व पंजाब में हुए सिख नरसंहार की तरह ही 1948 में भी कॉन्ग्रेस ने मुंबई में ब्राह्मणों का नरसंहार करवाया था। उन्होंने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया था और ब्राह्मण समाज के हजारों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। बता दें कि नाथूराम गोडसे ‘चितपावन ब्राह्मण’ समुदाय से सम्बन्ध रखते थे।

उन्होंने बताया कि उस दंगे में कई कॉन्ग्रेस नेताओं और समर्थकों ने भाग लिया था। विक्रम सम्पत ने जानकरी दी कि नागपुर में कॉन्ग्रेस के 100 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उनके खिलाफ एक भी केस दर्ज नहीं हुआ। बकौल सम्पत, भारतीय लोकतंत्र के इस काले अध्याय को हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों से मिटा दिया गया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को तो पता भी नहीं है कि ऐसा कुछ हुआ था।

विक्रम सम्पत ने कहा, “वीर सावरकर पर पुस्तक लिखने के दौरान कई ऐसे लोग सामने आए, जिनके पूर्वजों को उस ब्राह्मण विरोधी नरसंहार में निशाना बनाया गया था। उन्होंने अपनी कहानी मुझे बताई। महात्मा गाँधी की हत्या में वीर सावरकर को आरोपित बनाया गया, जिसके बाद उन्हें एक तरह से राजनीति में बहिष्कृत कर दिया गया। अदालत ने उन्हें निर्दोष साबित किया, लेकिन बावजूद इसके उन्हें लेकर गलत धारणाएँ तैयार की गईं।

विक्रम सम्पत ने आरोप लगाया कि लिबरल लोग अपने विचार से अलग धारणाओं को जगह नहीं देते हैं और भारत में जब भी इतिहास की बात आती है तो एक संकीर्ण नैरेटिव को आगे बढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि चूँकि इतिहास के कई पन्नों को जानबूझ कर मिटा दिया गया है, उन्हें फिर से खँगालना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि आक्रांताओं और स्वतंत्रता संग्राम को लेकर आज़ादी के बाद शासक के हिसाब से इतिहास लिखा गया।

महादेव रानाडे, गोपाल कृष्ण गोखले, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और वीर सावरकर जैसे नाम इसी चितपावन ब्राह्मण जाति से सम्बन्धित हैं। तब महिलाओं और बच्चों तक को शिकार बनाया गया था। इस कत्लेआम में 20 हजार के करीब मकान और दुकानें जला दी गईं। नरसंहार में वीर सावरकर के भाई नारायण दामोदर सावरकर भी मारे गए थे। तकरीबन 1000 से 5000 चितपावन ब्राह्मणों को निर्ममता से रात के अंधेरों में मौत के घाट उतार दिया गया। संख्या 8000 भी हो सकती है।

उस ज़माने में भी इस सम्बन्ध में अखबार में खबरें कम ही आईं, हालाँकि विदेश के अख़बारों ने इस पर रिपोर्ट छापी थी। विदेशी लेखकों ने बताया है कि गाँधी के अनुयाइयों द्वारा फैलाई गई इस हिंसा में ब्राह्मणों के प्रति नफरत फैलाने वाले संगठनों ने भी हवा दी। इनमें कुछ ऐसे संगठन भी थे जिनका नाम ज्योतिबा फुले से जुड़ा है। RSS और हिन्दू महासभा के दफ्तरों में तोड़फोड़ हुई थी। एक लेखक ने बताया था कि पुलिस ने कभी कोई भी सरकारी रिकॉर्ड उनसे शेयर नहीं किया।

इरफान ने बनाया फेक सुसाइड वीडियो, हुआ गिरफ्तार: इंस्टाग्राम पर फॉलोवर बढ़ाने के लिए करता था कारनामा

मुंबई में एक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को एडिटिंग सॉफ्टवेयर और स्पेशल इफेक्ट्स के जरिए आत्महत्या का वीडियो बनाने और उसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट कर आत्महत्या को प्रोमोट करने के जुर्म में गिरफ्तार किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर इरफान खान (20 वर्ष) ने इंस्टाग्राम और दूसरे सोशल मीडिया एकाउंट्स पर अपने फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए ट्रेन की पटरी पर बैठकर तेज रफ्तार में आती ट्रेन के नीचे आकर अपनी जान देने का वीडियो बनाया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इरफान विले पार्ले (वेस्ट) का रहने वाला है और वीडियो बांद्रा और खार स्टेशन के बीच शूट किया गया है। इस वीडियो में आरोपित इरफान एक ऐसे आशिक की ऐक्टिंग करता है, जिसे उसकी प्रेमिका छोड़ कर चली गई है और वह ट्रेन की पटरी पर बैठ हुआ है जहाँ तेज रफ्तार से आती हुई एक ट्रेन उसे उड़ाती हुई निकाल जाती है। असल में इरफान ने एडिटिंग सॉफ्टवेयर और स्पेशल इफेक्ट्स की सहायता से ट्रेन के सामने आत्महत्या करने का यह वीडियो तैयार किया था और सोशल मीडिया एकाउंट्स में अपलोड कर दिया।

मुंबई रेलवे पुलिस कमिश्नर खालिद ने बताया कि सोशल मीडिया पर यह वीडियो अपलोड होने के बाद रेलवे पुलिस की टीम ने आरोपित इरफान को ट्रैक किया और उसके घर पहुँची, लेकिन वहाँ इरफान नहीं मिला। हालाँकि, बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। डीसीपी प्रदीप चह्वान ने बताया कि आरोपित इरफान के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 336 और 505(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही उसके खिलाफ इंडियन रेलवे ऐक्ट की धारा 145 और 147 भी लगाई गई है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपित इरफान ने सोशल मीडिया में फॉलोवर बढ़ाने के लिए ऐसा वीडियो बनाया था।

हालाँकि, इरफान ने एक और वीडियो जारी करके सफाई दी है कि उसका इरादा किसी को आत्महत्या के लिए उकसाने का नहीं था। वीडियो को पोस्ट करने के लिए उसने माफी माँगी है और बताया कि इस वीडियो का एक सेकंड पार्ट भी आने वाला था, जिसमें वह सपने से उठता है और अपनी अम्मी-अब्बू के साथ है और खुश है।

जर्मनी में समलैंगिकों की जान आफत में, इस्लामिक देशों से आए मुस्लिम शरणार्थियों के घृणा का बन रहे हैं शिकार

इस्लामिक देशों से यूरोप के विभिन्न हिस्सों में प्रवासियों का आना यूरोप के समलैंगिकों (homosexuals) के लिए एक बुरा सपना बन गया है, क्योंकि बार-बार उन पर होने वाले हमलों के कारण अब उन्हें खतरा महसूस होने लगा है। ऐसी ही एक घटना में दो हफ्ते पहले जर्मनी के कोलोन शहर में हुई, जहाँ एक बार के पास समलैंगिकों से कार को टकरा दी गई। इससे यूरोप में समलैंगिक समुदाय में दहशत की एक नई लहर दौड़ गई।

जिहाद वॉच की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 15 दिन पहले जर्मनी के कोलोन शहर के एक गे (Gay) बार Schaafenstraße में समलैंगिक जश्न मना रहे थे। तभी कई अन्य विजिटर्स वहाँ पर आए, जिनमें से अधिकतर आप्रवासी थे, जो दूसरी जगहों पर कोविड-19 प्रतिबंधों के कारण यहाँ पर पार्टी करने के लिए आए थे। इस दौरान उन्होंने गली में पेशाब कर, बोतल फेंक और होमोफोबिक (समलैंगिकों के प्रति घृणा) कृत्य करके उन्हें डराना और उनका अपमान करना शुरू कर दिया।

दो हफ्ते पहले, Schaafenstraße के पास स्थिति तब बिगड़ गई, जब कुछ आगंतुकों ने बार के पास समलैंगिकों की ओर तेज गति से कारों को दौड़ाया। यह सिलसिला आगे भी चलता रहा। बार मालिकों के अनुसार, “हफ्तों से चाव कारें रात में 60-70 किमी/घंटा की रफ्तार से रिंग स्ट्रीट से गली के लोगों की ओर दौड़ाई जा रही हैं। हम पीड़ित हैं और डरे हुए व अपमानित महसूस कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि सुरक्षा की कमी से मौत या गंभीर चोट लग सकती है।

शहर के मेयर एंड्रियास हूपके ने शहर में कार हमले को निंदनीय बताया। उन्होंने कहा, “हमें सरकार से पूर्ण पैकेज की आवश्यकता है। किसी समलैंगिक पर गाड़ी चढ़ाया जाए, उससे पहले शाम को पुलिस को यहाँ खड़ा होना पड़ेगा। सिविल सेवकों की तत्काल आवश्यकता है। शहर इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।”

एक अन्य समलैंगिक, डेविड लोवरिक ने कहा कि उन्हें कोलोन में पहले ही पीटा जा चुका है, क्योंकि वह समलैंगिक हैं। BILD से बात करते हुए लोवरिक ने कहा कि उन्हें समलैंगिक होने के कारण अरबों, तुर्कों और रूसियों से नियमित रूप से जान से मारने की धमकी मिलती है। डेविड लोवरिक मेकअप इनफ्लुएंसर हैं और वह इस बार में अक्सर आते रहते हैं। वह यहाँ पर शांतिपूर्ण ढंग से सेलीब्रेट करने के लिए आते हैं, लेकिन उन पर Schaafenstraße में ‘faggot’ और ‘you should be gassed’ जैसी गंदी टिप्पणियाँ की जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ हफ्तों से स्थिति पहले से कहीं ज्यादा होमोफोबिक हो गई है।

इस्लामिक देशों से भाग रहे सिखों और हिंदुओं के लिए विश्व सिख संगठन कनाडा में चाहता है CAA जैसा कानून

कनाडा के विश्व सिख संगठन (WSO) ने 19 जुलाई को कनाडा सरकार से अफगान में सिखों और हिंदुओं के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू करने का आग्रह किया। इस संबंध में मनमीत सिंह भुल्लर फाउंडेशन, खालसा एंड कनाडा और कनाडा के विश्व सिख संगठन (डब्ल्यूएसओ) ने एक संयुक्त बयान जारी किया था।

अपने बयान में उन्होंने कनाडा सरकार से अफगानिस्तान में फँसे अल्पसंख्यक हिंदुओं और सिखों के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू करने का आग्रह करते हुए लिखा था, “जैसे-जैसे अफगानिस्तान में जमीनी हालात बिगड़ते जा रहे हैं, हम अफगान दुभाषियों को देख रहे हैं, जिन्होंने कनाडाई लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया, वे अब खतरे में हैं और हर पल डर के साए में जीने को मजबूर हैं।” उन्होंने कनाडा सरकार से युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में कमजोर आबादी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तेजी से कार्य करने का अनुरोध किया है। दरअसल, तालिबान ने अफगानिस्तान में संघर्ष को तेज कर दिया है और ज्यादातर इलाके अब उसके कब्जे में हैं।

संगठन ने दावा किया कि मार्च 2020 में काबुल में गुरुद्वारा श्री गुरु हर राय साहिब पर आत्मघाती हमले के बाद जो हिंदू और सिख भारत चले गए हैं, उनके पास पुनर्वास का कोई विकल्प नहीं है। गौरतलब है कि इसी साल 20 मई को भारत सरकार ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए आवेदन माँगे थे। ऐसे शरणार्थियों को नागरिकता देने का यह आदेश सीएए का हिस्सा नहीं था।

मनमीत सिंह भुल्लर फाउंडेशन के तरजिंदर भुल्लर के हवाले से बयान में आगे कहा गया है, ”अब इस काम में तेजी लाने का समय आ गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि हम कई अफगान सिखों और हिंदुओं की सहायता करने के लिए अग्रसर हैं। जो हर दिन हर एक घंटे खतरे का सामना कर रहे हैं।” WSO अध्यक्ष ने कहा कि अन्यथा अफगानिस्तान में बचे हिंदुओं और सिखों को निशाना बनाकर मार दिया जाएगा।

आज तक ने 22 जुलाई को बताया कि अफगानिस्तान के जलालाबाद में रहने वाले 60 सिख और हिंदू परिवारों में से 53 भारत चले गए थे। जलालाबाद के एक गुरुद्वारे में अब भी सिर्फ सात परिवार रह रहे हैं। 21 जुलाई को, टाइम्स ऑफ इंडिया ने रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि अफगानिस्तान में रहने वाले सिखों और हिंदुओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से देर होने से पहले उनकी मदद करने का आग्रह किया है। काबुल के गुरुद्वारा के अध्यक्ष गुरनाम सिंह ने कहा था कि काबुल में तालिबान के डर से लगभग 150 सिख और हिंदू रह रहे हैं। उन्होंने कहा, “अभी के लिए, हम काबुल में रह रहे हैं और सुरक्षित हैं लेकिन किसी को नहीं पता कि हम कब तक सुरक्षित रहेंगे।”

WSO ने CAA को बताया था विवादित कानून

बता दें कि भारत सरकार ने 2019 में नागरिकता संशोधन एक्ट में बदलाव किया था, जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे हिन्दू, सिख, जैन, पारसी, ईसाई और बौद्ध मूल के लोगों को भारत में शरण दी जा सकती है। हालाँकि, इसको लेकर देश में काफी विरोध भी हुआ था, लेकिन सरकार अपने फैसले पर अडिग रही थी।

WSO वर्तमान में कनाडा सरकार से आग्रह कर रहा है कि “युद्धग्रस्त अफगानिस्तान में कमजोर आबादी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तेजी से कार्य करे। इसे सुनिश्चित करने के लिए Immigration and Refugee Protection Act की धारा 25.2 के तहत एक विशेष कार्यक्रम तैयार करें।” पीड़ित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए एक विशेष कानून की माँग सीएए के उद्देश्य के समान ही है। हालाँकि, इस संगठन ने स्पष्ट रूप से सीएए के 2019 में पारित होने के बाद से बार-बार इसे ‘विवादास्पद कृत्य’ कहा था।

WSO ने दिल्ली दंगों 2020 के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया था

खासतौर पर डब्ल्यूएसओ ने सीएए के विरोध के बाद फरवरी 2020 में भड़के दिल्ली दंगों के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहराया था। दंगों को भड़काने के लिए कपिल मिश्रा को दोषी ठहराते हुए संगठन ने कहा, “एक बार फिर, हम भारत में अल्पसंख्यकों पर सांप्रदायिक हमले देख रहे हैं, जिसमें पुलिस भीड़ की मदद कर रही है और खुद हिंसा में लिप्त है। पत्रकारों पर भी हमले हुए हैं। यह बहुत परेशान करने वाली बात है कि यह सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी के एक सदस्य (कपिल मिश्रा) थे, जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन समाप्त नहीं होने पर हिंसा की चेतावनी दी थी।”

उन्होंने कहा, “भारत ने बार-बार अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले देखे हैं, जिनमें सिख, मुस्लिम और ईसाई शामिल हैं, जिन्हें या तो राज्य द्वारा मंजूरी दी गई है या उनकी अनदेखी की गई है।”

तौफीन ने नाबालिग लड़की से की सोशल मीडिया पर दोस्ती, अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर बार-बार किया गैंगरेप

राजस्थान के बीकानेर में अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर गैंगरेप करने का मामला सामने आया है। तीन लोगों पर 16 साल की लड़की के साथ गैंगरेप करने का आरोप लगा है। वारदात के सिलसिले में दो नामजद और एक अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मुख्य आरोपित का नाम विक्की उर्फ तौफीन नायच बताया जा रहा है। तौफीन के साथ सोनू और एक अन्य लड़के पर भी दुष्कर्म का आरोप है। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता के पिता ने जयनारायण व्यास कॉलोनी थाने में मामला दर्ज कराया है। जिसकी जाँच अब सीओ सदर पवन भदौरिया को सौंपी गई है। पीड़िता के पिता के FIR के अनुसार उसके साथ 22 जनवरी 2021 से 13 जुलाई 2021 तक वीडियो बनाने व अभद्रता करने के साथ रेप किया गया। इससे वह इतनी ज्यादा डरी हुई थी कि उसने अपने परिवारवालों को कुछ नहीं बताया, लेकिन अब उसने हिम्मत करके इसके बारे में परिजनों को बताया।

साभार: दैनिक भास्कर

जिसके बाद पीड़िता के पिता ने FIR दर्ज करवाया। इसमें कहा गया कि आरोपितों ने उनकी बेटी के साथ सोशल मीडिया पर दोस्ती की। इसके बाद वो उसके घर में घुस कर फोटो खींच लिए और अश्लील वीडियो बना ली। इसके बाद आरोपितों ने इसी वीडियो क्लिप को वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ रेप करना शुरू कर दिया। अब पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी है।

गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रतापनगर की रहने वाली एक 25 वर्षीया हिंदू विवाहिता के साथ रेप करने और उसका जबरन धर्मान्तरण कराने का मामला सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित महिला का पति शराब पीकर अक्सर उसके साथ मारपीट करता था। ऐसे में उसके पड़ोस में रहने वाला शाहिद उसे अच्छा काम दिलाने के बहाने कश्मीर लेकर गया था और वहाँ इस घटना को अंजाम दिया।

शाहिद साल 2016 में काम दिलाने का लालच देकर महिला और उसके बेटे को कश्मीर लेकर गया था। वहाँ जाने के बाद महिला के बेटे को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ रेप किया और उसका जबरन धर्मान्तरण करवा दिया।

Tokyo Olympics: पुरुष नौकायन टीम सेमीफाइनल में, बैडमिंटन में पीवी सिंधु, टेबल टेनिस में मनिका बत्रा और सुतीर्थ मुखर्जी की जीत

टोक्यो ओलंपिक के तीसरे दिन (25 जुलाई 2021) भारतीय बैडमिंटन प्लेयर पीवी सिंधु ने शानदार जीत के साथ अपने ओलंपिक सफर की शुरुआत की। इसके साथ ही भारत के अर्जुन लाल जाट और अरविंद सिंह ने नौकायन प्रतिस्पर्धा के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। टेबल टेनिस प्लेयर मनिका बत्रा ने भी जीत के साथ दूसरे राउंड में अपनी जगह बनाई।

सिंधु ने 29 मिनट में जीता अपना मैच

भारतीय बैडमिंटन प्लेयर पीवी सिंधु ने अपने पहले मैच में इजरायल की सेनिया पोलिकारपोवा को 21-7, 21-10 से हराते हुए दूसरे राउंड में जगह बना ली। सिंधु ने इस मुकाबले को मात्र 29 मिनट में जीत लिया। मैच की शुरुआत से ही आगे रही सिंधु ने पहला सेट 13 मिनट में 21-7 से अपने नाम किया। दूसरे सेट में भी सिंधु ने 11-4 की बढ़त ली लेकिन इजरायल की पोलिकारपोवा इस बढ़त को तोड़ नहीं पाईं और 16 मिनट में ही सिंधु के हाथों 21-10 से हार गईं। सिंधु ने इस जीत के साथ दूसरे राउंड में अपनी जगह पक्की कर ली है, जहाँ उनका मुकाबला 27 जुलाई 2021 को हॉन्गकॉन्ग की च्युंग एनगान यी से होगा।

नौकायन में पुरुष टीम ने बनाई सेमीफाइनल में जगह

भारत के अर्जुन लाल जाट और अरविंद सिंह की टीम ने पुरुषों की नौकायन लाइटवेट डबलस्कल्स स्पर्धा के रेपचेज दौर में तीसरे स्थान पर रहते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली है। शुरुआत में 1,000 मीटर तक चौथे स्थान पर रहने वाली भारतीय जोड़ी ने स्पर्धा को तीसरे स्थान पर रहते हुए खत्म किया। इस दौरान उन्होंने 6:51.36 का समय निकाला और सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई। इस प्रतिस्पर्धा में दो खिलाड़ी एक नाव में होते हैं, जिन्हें 2-2 चप्पू दिए जाते हैं।

टेबल टेनिस में भी भारत को जीत

मिक्स्ड इवेंट में हारने के बाद भारत की स्टार खिलाड़ी मनिका बत्रा ने महिला टेबल टेनिस मुकाबले के एकल इवेंट में ब्रिटेन की तिन तिन हो को 4-0 से हरा दिया और अगले दौर में प्रवेश किया। दूसरे दौर में उनका मुकाबला यूक्रेन की मार्गरेटा पेसोत्सका से होगा। मनिका ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए तिन-तिन हो 11-7, 11-10, 11-10, 11-9 से हराया। इस तरह मनिका ने किसी भी राउंड में प्रतिद्वंदी को हावी होने का कोई मौका नहीं दिया और अपनी जीत सुनिश्चित की। हालाँकि मिक्स्ड इवेंट में मनिका को हार का सामना करना पड़ा था।

महिला टेबल टेनिस के एकल इवेंट के एक अन्य मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी सुतीर्थ मुखर्जी ने स्वीडन की लिंडा बर्गस्ट्रॉम को बेहद कड़े मुकाबले में 4-3 से हरा दिया। सुतीर्थ ने पहले दो राउंड में पिछड़ने के बाद वापसी की और 5-11, 11-9, 11-13, 9-11, 11-3, 11-9, 11-5 का स्कोर करते हुए जीत हासिल की और दूसरे दौर में प्रवेश किया। यहाँ उनका मुकाबला पुर्तगाल की फु यु से होगा।

हालाँकि टेनिस में भारतीय जोड़ी को हार का सामना करना पड़ा। भारतीय खिलाड़ी सानिया मिर्जा और अंकित रैना की जोड़ी को यूक्रेन की लिडमयला और नादिया किचनोक ने हरा दिया। सानिया-अंकित अपना पहला सेट 6-0 से जीतने में कामयाब रहीं थीं लेकिन भारतीय जोड़ी को दूसरे सेट में 6-7 और तीसरे सेट में 8-10 से हार का सामना करना पड़ा। 10 मीटर एयर रायफल में भी भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन कमजोर रहा और क्वालिफिकेशन राउंड में भारतीय निशानेबाज दीपक कुमार और दिव्यांश सिंह पंवार क्रमशः 28 वें और 33 वें स्थान पर रहे।

AltNews वाले मोहम्मद जुबैर ने दी जान से मार डालने की धमकी: यूपी में FIR दर्ज, इजरायल वाली खबर का मामला

उत्तर प्रदेश में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई है। मोहम्मद जुबैर प्रोपेगंडा फैक्ट-चेक पोर्टल AltNews के सह-संस्थापक हैं। यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में एक व्यक्ति की शिकायत के आधार पर चरथावल थाने में ये FIR दर्ज की गई। शिकायतकर्ता ने खुद को सोशल मीडिया व न्यूज़ चैनल्स यूजर बताया है। आरोप है कि उन्होंने गलत खबर दिखाई और उसके बाद गाली-गलौज व धमकीबाजी भी की।

शिकायत कर्ता ने कहा है कि वो अक्सर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार चैनलों का यूज करता रहता है। इसी क्रम में 13 मई, 2021 को ‘सुदर्शन न्यूज़’ नाम के चैनल पर इजरायल और फिलिस्तीन के बीच चल रहे युद्ध को लेकर एक खबर दिखाई गई थी। प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि AltNews के सह-संस्थापक मोहम्मद ने इसे गलत खबर बताते हुए इसकी जगह पर खुद गलत खबर दिखा दी।

मोहम्मद ज़ुबैर पर मुजफ्फरनगर में FIR दर्ज

शिकायर्कता के अनुसार, इसके बाद उसने फोन कॉल कर के मोहम्मद जुबैर से इसका कारण पूछा। साथ ही उनकी गलती की तरफ ध्यान दिलाया। FIR में वादी ने लिखा है, “जब मैंने फोन पर मोहम्मद जुबैर से बात की तो उन्होंने मुझे इस मामले में न पड़ने के लिए धमकाया। साथ ही मुझे जान से मार डालने की भी धमकी दी। पुलिस से निवेदन है कि इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर के कानूनी कार्रवाई की जाए।”

‘सुदर्शन न्यूज़ टीवी’ के एंकर प्रोड्यूसर शुभम त्रिपाठी ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यूपी पुलिस ने ‘फर्जी फैक्टचेकर’ मोहम्मद जुबैर पर बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध पर चैनल के प्रोमो पर ज़ुबैर ने ट्वीट किए थे। शुभम त्रिपाठी के अनुसार, मोहम्मद जुबैर ने ‘सुदर्शन न्यूज़’ के खिलाफ अफवाह फैलाई थी, जबकि ‘सुदर्शन’ ने साक्ष्यों के साथ प्रोमो का सच बता दिया था।

FIR में मोहम्मद जुबैर के खिलाफ ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-192 (गलत राय बनाने की मंशा से किसी पुस्तक या अभिलेख या इलेक्ट्रॉनिक कंटेंट में झूठ लिखना), धारा-504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और धारा-506 (आपराधिक धमकी देना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के आदेश पर ‘ऑल्टन्यूज़’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी

वहीं पिछले महीने गाजियाबाद के लोनी थाने में दो समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने और फेक न्यूज़ फैलाने के आरोप में पत्रकार सबा नकवी और AltNews के मोहम्मद ज़ुबैर के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। ये दोनों उत्तर प्रदेश के लोनी थाने में हाजिरी देने भी पहुँचे थे। ताबीज को लेकर आपसी विवाद को इन लोगों ने ‘जबरन जय श्री राम बुलवाने’ वाला आरोप लगा कर सम्प्रदायिक रंग दे दिया था।

वैक्सीन ‘हलाल’, ‘शरिया कानून’ के हिसाब से है इस्तेमाल की अनुमति: Covid-19 वैक्सीन पर WHO का स्पष्टीकरण

विश्व भर में मुस्लिमों की अच्छी-खासी जनसंख्या को Covid-19 वैक्सीन के प्रति भरोसा दिलाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को यह बताना पड़ा कि वैक्सीन ‘हलाल’ है और ‘इस्लामिक शरिया कानून’ के मुताबिक इसके उपयोग की अनुमति है।

23 जुलाई 2021 को ट्विटर पर WHO ने ट्वीट अपने आधिकारिक एकाउंट से Covid-19 वैक्सीन के बारे में जानकारी दी। WHO ने इस ट्विटर थ्रेड के माध्यम से वैक्सीन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर स्पष्टीकरण दिया। हालाँकि, लगभग सभी मुद्दे वैक्सीन के उपयोग, उससे जुड़ी कुछ भ्रामक जानकारियों और वैक्सीन की आवश्यकता से जुड़े थे लेकिन आखिर में WHO को भी वैक्सीन के ‘हराम या हलाल’ होने का स्पष्टीकरण देना पड़ा। WHO ने ट्वीट में बताया कि Covid-19 वैक्सीन ‘हलाल’ हैं, क्योंकि इनके निर्माण में किसी भी प्रकार के जानवर के अंश का प्रयोग नहीं किया जाता है। साथ ही, WHO ने यह भी बताया कि मेडिकल फ़िक (Fiqh) सिम्पोसियम द्वारा यह आदेशित किया गया है कि वैक्सीन की इस्लामिक ‘शरिया कानून’ के मुताबिक उपयोग की अनुमति है।

दरअसल 22 फरवरी 2021 को इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक को-ऑपरेशन (OIC) के इंटरनेशनल इस्लामिक फ़िक (Fiqh) एकेडमी द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए Covid-19 वैक्सीन और इस्लामिक शरिया कानून के मुताबिक उसकी अनुमति से संबंधित मुद्दे पर बैठक का आयोजन किया गया था। इस बैठक में Covid-19 वैक्सीन के उपयोग को लेकर स्पष्टीकरण दिया गया था। इस बैठक में वैक्सीन के कंपोनेन्ट, वैक्सीन को लेकर शरिया कानून और वैक्सीन की खरीद पर चर्चा की गई।

रासायनिक क्रिया शरिया कानून के अनुसार वैध:

बैठक के बाद जारी किए गए वक्तव्य में बताया गया कि औषधि विज्ञान के विशेषज्ञों ने यह पुष्टि की है कि Covid-19 वैक्सीन के निर्माण में कोरोना वायरस का मैसेंजर RNA, DNA मटेरियल, कॉमन कोल्ड वायरस, दूसरे वायरस और बैक्टीरिया, बायोरिएक्टर, पोटेशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, एसिटिक एसिड और ऐसे ही कई अन्य पदार्थ शामिल हैं। अतः यह स्पष्ट है कि वैक्सीन के निर्माण में सूअर या इंसान के किसी भी अवयव का उपयोग नहीं किया जाता है। इन तमाम ‘वैज्ञानिक’ अध्ययनों के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि वैक्सीन के निर्माण में इन घटकों के बीच जो रासायनिक अभिक्रियाएं और परिवर्तन होते हैं, वो इस्लामिक न्यायतंत्र के मुताबिक ‘शरिया कानून’ के अनुकूल हैं। अंततः बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया कि इस्लामिक शरिया कानून के मुताबिक Covid-19 वैक्सीन के उपयोग की पूर्णतः अनुमति है।

मेडिकल फ़िक सिम्पोसियम द्वारा Covid-19 वैक्सीन पर दिया गया स्पष्टीकरण

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब मलेशिया और इंडोनेशिया में Covid-19 वैक्सीन के हलाल या हराम होने पर बहस छिड़ गई थी। इस्लाम में उन चीजों का उपयोग नहीं किया जाता है, जिनके निर्माण में ‘हराम’ वस्तुओं का उपयोग होता है। इसके अलावा, जिन वस्तुओं के उपयोग की अनुमति शरिया कानून के मुताबिक दी जाती है, उन्हें इस्लाम में ‘हलाल’ माना गया है। मुस्लिमों के बीच यह अफवाह थी कि Covid-19 वैक्सीन के निर्माण में सूअर के अवयवों का उपयोग किया जाता है, इसलिए मुस्लिम समुदाय में कई बार वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट देखने को भी मिली।

दिल्ली में मिर्गी के इलाज के नाम पर जाकिर ने सालों किया महिला और उसकी नाबालिग भांजी का रेप, कराया धर्मांतरण: FIR दर्ज

दिल्ली के शाहदरा इलाके में एक महिला और उसकी नाबालिग भांजी के साथ कई सालों तक रेप किया गया और उनका धर्मांतरण कराया गया। इस मामले में आरोपित जाकिर के खिलाफ शाहदरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

इलाज के नाम पर हैवानियत :

एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित महिला ने दावा किया कि 2005 में जब उसकी उम्र 10 साल की थी तब उसे पहली बार मिर्गी का दौरा पड़ा। इसके बाद लोगों की सलाह पर इसके उपचार के लिए वह जाकिर से मिली जो कि उसके घर आने लगा और घर के सदस्यों को अपने वश में कर लिया। महिला के अनुसार जाकिर ने उसके घर में ही अपनी गद्दी जमा ली और जिन को खुश करने एवं बलि के नाम पर महिला के परिवार वालों से पैसे ऐंठने लगा। महिला के अनुसार पहली बार 13 साल की उम्र में उसके साथ जाकिर ने रेप किया। इसके बाद जाकिर कई सालों तक महिला के साथ ऐसे ही रेप करता रहा और 4 बार महिला का अबॉर्शन भी कराया गया। महिला ने बताया कि रेप करने के बाद जाकिर कहता था कि यह सब शैतान ने किया है।

इसके साथ ही जाकिर ने महिला और उसके भाई का धर्म परिवर्तन करा दिया। महिला ने बताया कि हलफनामे में उसके जन्म के साल को 1985 लिखाया गया जबकि वह 1995 में पैदा हुई थी। इतना ही नहीं महिला ने यह भी दावा किया कि जाकिर ने महिला के पिता का अंतिम संस्कार भी नहीं होने दिया और मोहम्मद यूसुफ नाम बताकर उन्हें दफना दिया गया। महिला ने बताया कि जाकिर ने महिला से घर में ही तीन बार कुबूल कहकर निकाह कर लिया। महिला ने यह भी बताया कि जाकिर पहले से शादीशुदा है और उसकी एक बच्ची भी है।

जाकिर ने महिला की भांजी के साथ भी रेप किया। उसने बताया कि जब वह चौथी क्लास में थी तो जाकिर ने पहली बार उसके साथ रेप किया और उसके बाद से लगातार यह सिलसिला चलता रहा। भांजी ने बताया कि 2017-18 के दौरान जब उसने विरोध करना शुरू किया तो जाकिर ने उसके हाथ पर कई बार ब्लेड से कट मारे और यह कहता कि यह सब जिन को बलि देने के लिए किया जा रहा है नहीं तो वह सभी को परेशान करता रहेगा।

न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर :

एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार पीड़ित महिला ने बताया कि जब वह अपनी भांजी के साथ शाहदरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गए तो वहाँ किसी एक की रिपोर्ट दर्ज करने की बात कही गई। इस पर महिला ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। अदालत में जब महिला का बयान दर्ज किया गया तब उसकी भांजी ने भी अपने साथ हुए दुष्कर्म की बात बताई, तब अदालत के आदेश पर शाहदरा थाने में भांजी की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई। हालाँकि दोनों ने ही पुलिस पर लापरवाही का भी आरोप लगाया है। भांजी का कहना है कि उसकी उम्र 16 साल ही है लेकिन सभी कागजात दिखाने के बाद भी पुलिस ने उसकी उम्र 21 साल लिख दी।

हिन्दू संगठन आए सहायता के लिए आगे:

यूनाइटेड हिन्दू फ्रंट के कार्यकारी अध्यक्ष जी भगवान गोयल ने कहा है कि उनके सामने महिला और उसकी भांजी के रेप और धर्मांतरण का मामला सामने आया है। गोयल ने बताया कि इस मामले में शाहदरा के डीसीपी से बात की गई है और संगठन पीडिताओं को न्याय दिलाने में उनकी पूरी मदद करेगा। साथ ही समाज सेविका अनिता गुप्ता ने कहा है कि माँ शक्ति एनजीओ के माध्यम से दोनों पीड़िताओं की सहायता की जाएगी। उन्होंने कहा कि मामला धर्मांतरण और रेप का है, पॉक्सो ऐक्ट का मामला होने के बाद भी आरोपित को जमानत मिलना समझ से परे है।