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राजस्थान में टॉपर से भी ऊपर शिक्षा मंत्री के रिश्तेदार: RAS इंटरव्यू में मिले नंबर 80, लिखित परीक्षा में 50% भी मुश्किल

राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा इस समय एक अजीब संयोग को लेकर चर्चा में है। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के रिश्तेदारों को इंटरव्यू में एक समान नंबर मिलने पर कई लोग सवाल उठा रहे हैं। हालाँकि डोटासरा रिश्तेदारों को ‘प्रतिभावान’ बता इन सवालों को खारिज कर चुके हैं।

अब दैनिक भास्कर ने विस्तार से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इससे मंत्री के रिश्तेदारों की कथित प्रतिभा को समझा जा सकता है। इस रिपोर्ट के अनुसार RAS 2018 की टॉपर रही मुक्ता राव से भी अधिक नंबर इंटरव्यू में डोटासरा के रिश्तेदारों ने हासिल किया है। इसका दूसरा पक्ष यह है कि लिखित परीक्षा में इन रिश्तेदारों को 50 फीसदी अंक भी नहीं मिले थे।

जिन रिश्तेदारों को लेकर यह पूरा विवाद खड़ा हुआ है वह डोटासरा की बहू प्रतिभा के भाई गौरव और बहन प्रभा हैं। दिलचस्प यह है कि 2016 में इसी परीक्षा के इंटरव्यू में प्रतिभा को भी 80 और डोटासरा के बेटे अविनाश को 85 नंबर मिले थे। उस समय लिखित परीक्षा में अविनाश 50 फीसदी हासिल करने में नाकाम रहे थे तो प्रतिभा को 800 की लिखित परीक्षा में 402 नंबर मिले थे।

यदि RAS 2018 की टॉपर रही मुक्ता राव के नंबर देखें तो उन्हें इंटरव्यू में 77 नंबर ही मिले हैं। लिखित परीक्षा की बात की जाए तो यहाँ बड़ा अंतर देखने को मिलता है। मुक्ता के लिखित परीक्षा में 449 नंबर थे, वहीं गौरव और प्रभा को क्रमशः 379 और 366 नंबर ही मिले।

RAS 2016 में डोटासरा के बेटे अविनाश को लिखित परीक्षा में 343 नंबर ही मिले थे। इसी परीक्षा में प्रतिभा को 402 नंबर मिले थे। लेकिन RAS 2016 के टॉपर रहे भवानी सिंह को भी इंटरव्यू में इन दोनों से कम 70 नंबर ही मिले थे।

इस मामले डोटासरा बता चुके हैं कि RAS 2016 के समय प्रतिभा की नौवीं रैंक आई थी और तब प्रतिभा उनकी पुत्रवधू भी नहीं थीं। प्रतिभा के साथ उनके बेटे का रिश्ता RAS ट्रेनिंग के दौरान हुआ। डोटासरा ने प्रतिभा के भाई-बहन के बारे में कहा था कि दोनों ही अपने क्षेत्र के टॉपर हैं, ऐसे में उनका 80 अंक प्राप्त करना संभव है। डोटासरा ने कहा था, “प्रतिभा की बहन प्रभा अपने दौर की टॉपर है और बीडीएस करने के बाद कई सालों से RAS की तैयारी में जुटी हुई है। उसका भाई गौरव भी दिल्ली यूनिवर्सिटी का टॉपर है।” डोटासरा राजस्थान प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं।

गौरतलब है कि इंटरव्यू प्रक्रिया पहले से ही सवालों के घेरे में है। साक्षात्कार के दौरान ही 23 लाख रु. घूस लेकर अच्छे नंबर दिलाने के मामले में कनिष्ठ लेखाकार को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सदस्य राजकुमारी गुर्जर के पति का भी नाम सामने आया है।

अक्टूबर 2022 में तैयार हो जाएगा नया संसद, सेंट्रल विस्टा एवेन्यू इसी साल नवंबर में होगा रेडी: मॉनसून सत्र में सरकार ने बताया

भारत सरकार ने गुरुवार (22 जुलाई 2021) को सदन में बताया कि देश का नया संसद भवन अगले साल अक्टूबर 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा। अगले साल ही देश की आजादी के 75 वर्ष भी पूरे होंगे। इसके अलावा, सेंट्रल विस्टा एवेन्यू इसी साल नवंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा।

सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान के विकास के अन्य हिस्सों, जिनमें केंद्रीय सचिवालय भवन और केंद्रीय सम्मेलन केंद्र, प्रधानमंत्री निवास, स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) भवन और उपराष्ट्रपति भवन के लिए इसी साल 31 मई 2021 को पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी थी। जबकि, देश की नई संसद के लिए मंत्रालय ने पिछले साल 17 जून 2020 को मंजूरी दिया था।

इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है, “सेंट्रल विस्टा डेवलपमेंट मास्टर प्लान के तहत लिस्टेड किसी भी हेरिटेज बिल्डिंग को नष्ट नहीं किया जाएगा। निर्माण के दौरान भी राष्ट्रीय अभिलेखागार और राष्ट्रीय संग्रहालय विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए खुला रहेगा।”

सरकार ने पर्यावरण संबंधी मंजूरी को लेकर आगे बताया कि पर्यावरण स्वीकृति देने से पहले सेंट्रल विस्टा मास्टर प्लान की सभी परियोजनाओं का पर्यावरण प्रभाव आकलन (ईआईए) अध्ययन किया गया था।

सरकार ने कहा, “पर्यावरण संबंधी मंजूरी (EC) के लिए आवेदन किए प्रोजेक्ट्स के अलावा, इस अध्ययन में एक्जीक्यूटिव एन्क्लेव (प्रधानमंत्री कार्यालय, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय शामिल हैं) में प्रस्तावित भवनों का पर्यावरण प्रभाव और नई संसद भवन (जिसके लिए 17 जून, 2020 को पर्यावरण संबंधी मंजूरी पहले ही प्राप्त हो चुका है) का चल रहा निर्माण भी शामिल है।”

इसी प्रक्रिया में सरकार ने आगे बताया, “इस अध्ययन के आधार पर विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) के विचार के लिए एक व्यापक ईआईए रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। ईएसी ने ईआईए रिपोर्ट की जांच के बाद ईसी की सिफारिश की। नियत प्रक्रिया के बाद पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के 31 मई, 2021 के पत्र के माध्यम से पर्यावरण मंजूरी दी गई थी।”

27 साल की लड़की ने तोड़े ‘रिश्ते’, जहीर ने गोली मारने के बाद गला रेता: Pak के पूर्व राजनयिक की बेटी थी मृतका

पाकिस्तान में उसके ही पूर्व राजनयिक शौकत मुकादम की 27 साल की बेटी नूर मुकादम की ​बेरहमी से हत्या करने की घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार नूर को पहले गोली मारी गई और फिर उसका गला रेता गया। इस मामले में पुलिस ने जहीर जकीर को गिरफ्तार किया है। नूर की लाश जहीर के इस्लामाबाद के घर से ही बरामद की गई थी।

रिपोर्टों के अनुसार जहीर और नूर पहले से एक-दूसरे को जानते थे। बताया जा रहा है कि ब्रेकअप की वजह से जहीर उससे नाराज था। मंगलवार 20 जुलाई 2021 को उसने हत्या को अंजाम दिया। इस घटना में एक और व्यक्ति जख्मी भी हो गया। डॉन ने पुलिस के हवाले से बताया है कि जकीर पाकिस्तान के एक बड़े कारोबारी का बेटा है। उसे तीन दिन की रिमांड पर लिया गया है। वहीं मृतका के पिता शौकत मुकादम दक्षिण कोरिया और कजाकिस्तान में पाकिस्तान के राजदूत रह चुके हैं।

नूर के पिता की शिकायत पर जहीर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शौकत मुकादम ने शिकायत में कहा है कि वे 19 जुलाई की शाम बकरीद के लिए बकरी खरीदने रावलपिंडी गए थे। उनकी पत्नी दर्जी से कपड़े लेने गई थी। शाम को जब वह घर लौटे तो बेटी घर में नहीं थी। उसका मोबाइल बंद था। उन्होंने उसकी तलाश शुरू की। कुछ समय बाद नूर ने उन्हें कॉल कर बताया था कि वह अपने दोस्तों के साथ लाहौर जा रही है और एक-दो दिन में वापस आ जाएगी। लेकिन इसके बाद उन्हें कोशर पुलिस थाने से बेटी की हत्या किए जाने का कॉल आया।

घटना पर अपना दुख जाहिर करते हुए पाकिस्तान विदेश कार्यालय के प्रवक्ता जाहिद हफीज चौधरी ने ट्वीट किया है, “एक वरिष्ठ सहयोगी और पाकिस्तान के पूर्व राजदूत की बेटी की हत्या से गहरा दुख हुआ। शोक संतप्त परिवार के प्रति हार्दिक संवेदना, और मुझे उम्मीद है कि इस जघन्य अपराध के लिए अपराधी को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।”

यह घटना ऐसे वक्त में सामने आई है जब अफगानी राजदूत की बेटी को प्रताड़ित किए जाने की घटना के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कूटनयिक संबंधों में तल्खी आ चुकी है। शनिवार (17 जुलाई 2021) को पाकिस्तान में तैनात अफगान राजदूत नजीबुल्लाह अलीखिल की बेटी सिलसिला अलीखिल को अगवा कर प्रताड़ित किए जाने की घटना सामने आई थी।

TMC सांसद ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से कागज छीना और फाड़ कर उपसभापति की कुर्सी की तरफ फेंका, देखें वीडियो

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद शांतनु सेन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव के हाथ से स्टेटमेंट पेपर छीनने और फाड़ कर फेंकने के बाद गुरुवार (जुलाई 22, 2021) को राज्यसभा सत्र स्थगित करना पड़ा। सदन को कल (शुक्रवार 23 जुलाई 2021) सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

देखें वीडियो

राज्यसभा की कार्यवाही। (40-46 सेकेंड से)

गुरुवार को राज्यसभा में भारी विरोध के कारण सदन को दो बार स्थगित करना पड़ा। राज्यसभा में तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसदों ने सदन में उस समय भारी हंगामा किया, जब आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव पेगासस मामले पर स्टेटमेंट देने के लिए खड़े हुए थे। सांसद शांतनु सेन ने आईटी मंत्री के हाथ से स्टेटमेंट पेपर छीनकर फाड़ दिया। इतना ही नहीं, सेन ने पेपर फाड़ने के बाद उसके टुकड़े उपसभापति की कुर्सी की तरफ उछाल दिए। इसके बाद मार्शल को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा। वहीं, कुछ अन्य विपक्षी सांसद सदन के वेल में पहुँचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

उपसभापति हरिवंश ने वैष्णव को अपना बयान पूरा करने देने के लिए विरोध करने वाले सांसदों से अपनी-अपनी सीटों पर वापस जाने का आग्रह किया। हालाँकि, कागज छीनने और फाड़ने की वजह से मंत्री अपना पूरा स्टेटमेंट नहीं पढ़ पाए और उन्होंने इसकी एक प्रति सदन के पटल पर रख दी।

भाजपा सांसद स्वप्न दासगुप्ता ने एएनआई को बताया, “ऐसा लगता है कि विपक्ष के कुछ लोग, विशेष रूप से टीएमसी के कुछ सांसदों ने उठकर मंत्री (आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव जब पेगासस पर बोल रहे थे) के हाथों से कागज ले लिया और इसे फाड़ दिया। यह पूरी तरह से अनुचित व्यवहार है।”

उन्होंने कहा, “वह एक बयान दे रहे थे। आपको उसके बाद उनसे सवाल करने का अधिकार था, लेकिन बहस के लिए जाने के बजाय, क्या हम सदन के अंदर इस प्रकार की गुंडागर्दी देखते हैं? यह पूरी तरह से सभी मानदंडों के खिलाफ है, मुझे लगता है कि इसकी निंदा की जानी चाहिए।”

वहीं, विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा, “विपक्ष विशेष रूप से टीएमसी और कॉन्ग्रेस के सदस्य इतने नीचे गिर जाएँगे कि वे राजनीतिक विरोधी होते हुए भी देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने वाले काम करेंगे। आज सदन में एक सदस्य ने बयान देने वाले मंत्री से कागजात छीन लिए।”

सदन के स्थगित होने के बाद मौखिक युद्ध

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और टीएमसी सांसद सेन के दुर्व्यवहार के बाद उनके बीच बहस हुई।

दोनों के बीच तीखी नोक-झोंक हुई और अंत में मार्शल को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। तब जाकर स्थिति नियंत्रण में आई।

इसी सोमवार (19 जुलाई 2021) को संसद का मानसून सत्र हुआ है। इस दौरान विपक्षी दलों के लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्रवाही सुचारू रूप से नहीं चल पाई है और ना ही सदन में कोई काम हो पाया है।

‘राज्यपाल $^*& है… रंगा-बिल्ला को दौड़ा कर जूते मारो’: PM मोदी और गृहमंत्री शाह पर कॉन्ग्रेस MLA के बिगड़े बोल

राजस्थान में कॉन्ग्रेस विधायक और यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष गणेश घोघरा ने कार्यकर्ताओं के सामने बयानबाजी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ बेहद अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए घोघरा ने रंगा-बिल्ला जैसे शब्द का इस्तेमाल किया। साथ ही उन दोनों को दौड़ा-दौड़ा कर मारने की बात कही।

पेगासस मामले में केंद्र सरकार का विरोध करने बैठे कॉन्ग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए घोघरा ने कहा, “केंद्र सरकार हमारी जासूसी करवा रही है और राज्यपाल उनके द&%^ के रूप में यहाँ बैठे हैं।” उन्होंने अपने भाषण में पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह को रंगा-बिल्ला बताते हुए कहा कि उन्हें दौड़ा-दौड़ा कर जूतों से पीटना चाहिए।

पेगासस जासूसी मामले में जयपुर में आज (जुलाई 22, 2021) कॉन्ग्रेस ने राजभवन का घेराव किया था। इसी दौरान जब घोघरा यह सब कह रहे थे, प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और गहलोत सरकार के मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा वहीं मौजूद थे। लेकिन किसी ने भी उन्हें टोका नहीं बल्कि उनके भाषण पर नेता, कार्यकर्ता ताली बजाते हुए नजर आए। टाइम्स नाऊ द्वारा जारी की गई घोघरा की वीडियो में सुन सकते हैं कि वो कहते हैं,

“यहाँ पर हमारे राज्यपाल बैठे हुए हैं। लेकिन ये भी भारतीय जनता पार्टी के दलाल हैं। लेकिन कॉन्ग्रेस के हमारे नेता आम व्यक्तियों के साथ खड़े हैं। मेरे साथियों हमें उठ खड़े होने की जरूरत है। आज नोटबंदी, जीएसटी, महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ चुकी है। आज ये हमारी स्वतंत्रता को वापस भुलाने वाला देश बनाने जा रहे हैं। अरे हमारे विचार हमारी व्यक्तिगत बातों को टेप किया जा रहा है…ऐसा कुकृत्य कौन कर सकता है केवल मोदी जी, वो रंगा बिल्ला….उनको दौड़ा-दौड़ा कर जूता मारना चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि वीडियो में अपशब्दों का इस्तेमाल करते सुनाई पड़ रहे गणेश घोघरा राजस्थान यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष भी हैं। इससे पहले वह खुद को हिंदू मानने से इनकार करते हुए आदिवासियों के लिए एक अलग धर्मकोड की माँग कर चुके हैं।

कौन थे रंगा-बिल्ला?

कॉन्ग्रेस नेता घोघरा, जिन रंगा-बिल्ला से पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की तुलना कर रहे हैं वह दोनों कार चोर थे, जो मुंबई पुलिस से बचकर दिल्ली आए थे और अगस्त 1978 में यहाँ पर उन्होंने एक नौसेना अधिकारी के दो बच्चों का अपहरण किया था। जब दोनों से यह अपराध संभल नहीं पाया तो दोनों ने पहले अधिकारी के बेटे को मारा और फिर लड़की का बलात्कार करके उसे भी खत्म कर दिया।

‘किसान अपनी संसद चलाएँगे’: जंतर-मंतर से टिकैत का नया पैंतरा, पत्रकार पर लाठी से हमला

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अब समानांतर संसद चलाने की धमकी दी है। टिकैत ने यह धमकी आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार द्वारा ‘किसानों’ को केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने के बाद दी है। वहीं, प्रदर्शन स्थल पर तथाकथित किसानों ने विरोध प्रदर्शन कवर करने गए मीडियाकर्मी पर लाठियों से हमला किया।

समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, राजनीतिक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए लगभग एक साल से विरोध प्रदर्शन कर रहे टिकैत ने कहा, “किसान अपनी संसद चलाएँगे। सदन में किसानों के लिए आवाज नहीं उठाने पर संसद सदस्यों (सांसदों) की उनके निर्वाचन क्षेत्रों में आलोचना की जाएगी।”

विरोध को देखते हुए सिंघु बॉर्डर और टिकरी बॉर्डर के साथ-साथ जंतर-मंतर पर भी भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

राकेश टिकैत ने घोषणा की कि जंतर मंतर पर संसद की कार्यवाही की निगरानी ‘किसान’ करेंगे

भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता जंतर मंतर पर ‘किसान संसद’ आयोजित करने के लिए सभी प्रदर्शन स्थलों के प्रदर्शनकारियों के साथ जंतर-मंतर पहुँचे। टिकैत ने कथित तौर पर कहा है कि संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है, किसान ‘किसान संसद’ आयोजित करेंगे और संसद की कार्यवाही की निगरानी जंतर-मंतर पर करेंगे, जो उस संसद से सिर्फ 150 मीटर की दूरी पर है।

बीकेयू नेता ने कहा, “मैं आठ अन्य (विरोध प्रदर्शन करने वाले किसानों) के साथ सिंघू सीमा के लिए निकलूँगा और फिर जंतर-मंतर जाऊँगा। हम जंतर मंतर पर ‘किसान संसद’ का आयोजन करेंगे। हम संसद की कार्यवाही की निगरानी करेंगे।”

महिला मीडियाकर्मी के साथ अभद्रता

जानकारी के मुताबिक, जंतर मंतर धरना स्थल पर ‘किसानों’ ने मीडियाकर्मियों पर हमला किया। एक घायल मीडियाकर्मी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि वहाँ पर कुछ ऐसे लोग सक्रिय हैं, जो पत्रकारों को गालियाँ दे रहे थे। खून से लथपथ न्यूज 18 के कैमरामैन नागेंद्र ने कहा, “उन्होंने एक महिला रिपोर्टर को गालियाँ दीं, जो किसानों के विरोध प्रदर्शन को कवर कर रही थीं और जब हमने उन्हें ऐसा करने से रोका तो उन्होंने मेरे सिर पर डंडे से हमला किया।”

इस वीडियो को बीजेपी आईटी सेल के प्रभारी अमित मालवीय ने भी अपने ट्विटर प्रोफाइल पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा है, “News18 के कैमरामैन नागेंद्र को किसान प्रदर्शन के दौरान पीटा गया… इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह विरोध वैसा नहीं है जैसा इसे दर्शाया गया है। मीडिया को निशाना बनाना, लाल किले में तोड़फोड़ करना, ऐसे समय में सीमाओं को अवरुद्ध करना जब बुवाई और कटाई का मौसम चरम पर है?”

सीएनएन न्यूज18 की वरिष्ठ संपादक पल्लवी घोष ने अपने सहयोगी पर हुए हमले की निंदा की है। उन्होंने ट्वीट किया, “जंतर मंतर पर कृषि कानूनों के विरोध के दौरान नेटवर्क 18 के वीडियो पत्रकार पर किया गया हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है।”

हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने विरोध के बारे में चुप्पी साध ली, लेकिन आज धरना स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कॉन्ग्रेस नेता श्रीनिवास बी वी ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “श्री राहुल गाँधी जी संसद भवन में किसानों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।”

इससे पहले, ऑपइंडिया ने बताया था कि AAP सरकार ने 21 जुलाई को सितंबर 2020 में बनाए गए तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की माँग कर रहे ‘किसानों’ को दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति दी है। रिपोर्टों के अनुसार, किसान पुलिस एस्कॉर्ट के साथ बसों में सिंघु सीमा से जंतर-मंतर आएँगे।

किसान संघों ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि वे मानसून सत्र के दौरान जंतर मंतर पर किसान संसद का आयोजन करेंगे और 22 जुलाई से सिंघु बॉर्डर के 200 प्रदर्शनकारी इसमें शामिल होंगे। किसान संघ के नेताओं ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों से वादा किया था कि वे जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित करेंगे और कोई भी प्रदर्शनकारी संसद नहीं जाएगा।

कहीं कुर्बानी पर बवाल तो कहीं नमाज के बाद चप्पल को लेकर छूरेबाजी: हिंदुओं के घर में भर गया खून

उत्तर प्रदेश के मेरठ में बुधवार (जुलाई 21, 2021) को बकरीद के मौके पर हिंसा व प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी देने पर हुए बवाल की कई घटना सामने आईं। जिले के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के डाबका गाँव में दो युवकों द्वारा घर में प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी देने से जहाँ पूरे गाँव भर का माहौल गरमाया। वहीं मोहल्ला मुन्नालाल के भैंसा रोड पर मस्जिद से नमाज पढ़कर लौट रहे दो पक्षों में मात्र चप्पल बदल जाने की बात से खूनी संघर्ष हो गया। इसी तरह जिले के सराय लाल दास में हिंदुओं के घरों में पशुओं का खून भरने की खबर है।

प्रतिबंधित पशु की घर में दी गई कुर्बानी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र के डाबका गाँव में रहमत और सत्तार नाम के दो युवकों ने अपने घर में बकरीद के मौके पर प्रतिबंधित पशु की कुर्बानी दी। ग्रामीणों का कहना है कि उनके गाँव में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था, इसलिए जब उन्हें इसकी सूचना मिली तो सभी में रोष व्याप्त हो गया। समय पर पुलिस को घटना की सूचना दी गई और घटनास्थल पर पहुँच कर पशु के अवशेषों को तिरपाल से ढका गया। बाद में दोनों पशुओं को आरोपितों के घर में गड्ढा खुदवाकर दफना दिया गया।

पुलिस को घटनास्थल से दो बड़े छूरे और अन्य कटान के सामान बरामद हुए हैं। इसके अलावा पुलिस की छानबीन में आरोपितों के घर से कटी हुई भैंस का मीट भी मिला है। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि ईद पर आज तक उनके गाँव मे घरों मे कुर्बानी नहीं हुई थी, लेकिन इस बार गाँव में कुछ परिवारों ने कुर्बानी दी। मामले पर ग्रामीणों की सुनने के बाद कंकरखेड़ा थाने के इंस्पेक्टर तपेश्वर सागर ने बताया कि ग्रामीणों ने तहरीर दे दी है। इसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कुछ रिपोर्ट्स का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में कुछ आरोपितों को पकड़ लिया है। वहीं कुछ रिपोर्ट बताती है कि आरोपित पुलिस को आता देख मौके से भाग गए। ग्रामीणों का साफ कहना है कि वह अपने गाँव के घरों में कुर्बानी नहीं होने देंगे। गाँव वालों की नाराजगी देखते हुए वहाँ पुलिस बल की तैनाती की गई है।

चप्पल बदल जाने पर हुआ खूनी संघर्ष

इस घटना के अलावा मेरठ के मोहल्ला मुन्नालाल से भी हिंसा की एक खबर आई। नवभारत टाइम्स के मुताबिक, बकरीद की सुबह करीब 8 बजे कॉलोनी के पास बने मस्जिद से ईद की नमाज पढ़कर कुछ युवक अपने घर लौट रहे थे। तभी, रास्ते में दो युवकों के बीच मस्जिद में चप्पल बदलने को लेकर कहासुनी हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों में जमकर मारपीट, छूरेबाजी, और पत्थरबाजी हुई। संघर्ष में 5 लोग घायल हो गए। पुलिस का कहना है कि मारपीट की सूचना पर मौके पर टीम पहुँची और घायलों को सीएचसी भिजवाया। इंस्पेक्टर धमेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से थाने पर तहरीर नहीं दी गई थी। तहरीर मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।

हिंदुओं के घर में भर गया खून

ऐसे ही जिले के सराय लाल दास स्थित सेठ गली में खाली पड़े मकान में किसी आसिफ नाम के युवक द्वारा कुर्बानी देने का मामला सामने आया। जहाँ नाला जाम होने के कारण पशुओं का खून स्थानीय हिंदुओं के घर में जा पहुँचा। खून देखकर हैरान हुए लोगों ने इसकी जानकारी वार्ड परिषद को दी और फिर अधिकारी मौके पर पहुँचे। क्षेत्र में इस घटना के बाद हंगामा होते-होते बचा। सिटी मजिस्ट्रेट ने भारी पुलिस बल के साथ पहुँच कर वहाँ नगर निगम के सहयोग से पाइप से सफाई करवाई और पशु के अवशेषों को गाड़ी में भरकर वहाँ से ले जाया गया। अपने घरों को खून से सना देख स्थानीय हिंदुओं ने माँग की कि पशु काटने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए।

चीन: 30 से अधिक अज्ञात वायरस का पता चला, 14000 साल से बर्फ में जमे थे; आधे से अधिक हैं जिंदा

जर्नल माइक्रोबायोम में 20 जुलाई को ‘ग्लेशियर आइस आर्काइव्स नियरली 15,000 ईयर ओल्ड माइक्रोब्ड एंड फेज’ शीर्षक से एक स्टडी प्रकाशित की गई। इसमें वैज्ञानिकों के एक समूह ने बर्फ के दो सैंपलों में जमे हुए 30 अति प्राचीन वायरस की खोज करने का दावा किया है। वैज्ञानिकों ने दावा किया कि उनमें से अधिकतर वायरस को पहले कभी नहीं देखा गया था। वैज्ञानिकों ने साल 2015 में तिब्बत के पठार के उन बर्फ के सैंपल लिए थे, जो कम-से-कम 14,400 साल पहले जमने शुरू हुए थे।

ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी बार्ड पोलर एंड क्लाइमेट रिसर्च सेंटर के प्रमुख लेखक और शोधकर्ता झी-पिंग झोंग ने इसको लेकर बयान जारी किया है। उन्होंने कहा, “ये हिमनद धीरे-धीरे बने हैं और धूल एवं गैसों के साथ-साथ कई वायरस भी इस वर्फ में जम गए। पश्चिमी चीन में हिमनदों का अच्छी तरह से अध्ययन नहीं किया गया है और हमारा लक्ष्य इस जानकारी का इस्तेमाल करके पुराने वातावरण पर प्रकाश डालना है। वायरस उसी वातावरण का हिस्सा हैं।”

इससे जुड़े रिसर्च पेपर का प्री प्रिंट फॉर्मेट पिछले साल जनवरी 2020 में Biorxiv में प्रकाशित हुआ था। उस समय झोंग ने कहा था, “हम अल्ट्रा-क्लीन माइक्रोबियल और वायरल सैंपलिंग प्रक्रियाओं को स्थापित करते हैं और इनका अध्ययन के लिए इसे गुलिया आइस कैप के दो आइस कोर पर अप्लाई करते हैं।”

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों को 33 वायरस के जेनेटिक कोड मिले हैं। इनमें से चार वायरस उन परिवारों से हैं, जो आमतौर पर बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। इसके अलावा, 28 वायरस ऐसे पाए गए, जिन्हें इससे पहले कभी नहीं खोजा गया था। वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि ये वायरस जानवरों या इंसानों के बजाय मिट्टी या पौधों से जन्में हैं। बर्फ में जमने के कारण इनमें से लगभग आधे अभी भी जिंदा हैं।

इस शोध के सह-लेखक और ओहियो स्टेट सेंटर ऑफ माइक्रोबायोम साइंस के निदेशक मैथ्यू सुलिवन ने कहा, “ये ऐसे वायरस हैं जो बेहद कठिन वातावरण में पनपे होेंगे। इन वायरस में ऐसे जीन के निशान होते हैं, जो उन्हें ठंडे वातावरण में कोशिकाओं को संक्रमित करने में मदद करते हैं। चरम स्थितियों में एक वायरस कैसे जीवित रहता है, इसे आनुवंशिक निशान से पता लगाया जा सकता है। ”

उन्होंने आगे कहा कि जिस तकनीक का इस्तेमाल कर वे बर्फ के अंदर वायरस और रोगाणुओं का पता लगाते हैं, उससे मंगल जैसे दूसरे कठिन वातावरण वाले स्थानों पर समान आनुवंशिक अनुक्रमों का अध्ययन करने के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने में मदद मिलेगी।

इस स्टडी में शामिल वरिष्ठ लेखक लोनी थॉम्पसन ने कहा कि इस खोज से शोधकर्ताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्लेशियरों में वायरस जलवायु परिवर्तन पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। उन्होंने कहा, “हम इन कठिन वातावरण के वायरस और रोगाणुओं और वास्तव में वहाँ क्या है के बारे में बहुत कम जानते हैं।” ऐसे शोधों के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “इसका दस्तावेजीकरण और समझ बहुत ही आवश्यक है। जलवायु परिवर्तन पर बैक्टीरिया और वायरस कैसी प्रतिक्रिया देते हैं? क्या होता है जब हम हिमयुग से आज के जैसे गर्म युग में आते हैं?”

‘बकरीद पर बद्रीनाथ धाम में नमाज’: स्थानीय हिंदू बोले- सीमा न लाँघें, 15 के खिलाफ पुलिस ने दर्ज किया मामला

हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम में बुधवार (21 जुलाई 2021) को 15 मुस्लिम श्रमिकों द्वारा ईद की नमाज अदा किए जाने के मुद्दे ने अब जोर पकड़ लिया है। कार्रवाई की माँग करते हुए हिन्दू संगठनों ने उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को ज्ञापन दिया है, जिस पर उन्होंने चमोली के पुलिस अधीक्षक को जाँच के आदेश दिए हैं। पुलिस का कहना है कि इस मामले को भ्रामक तरीके से फैलाया जा रहा है और इसकी जाँच चल रही है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक बद्रीनाथ धाम में आस्था पथ नामक संस्था के पार्किंग स्थल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसी निर्माण कार्य में संलग्न श्रमिकों में से कुछ मुस्लिम समुदाय के भी हैं। बुधवार को 15 की संख्या में मुस्लिम श्रमिकों ने बद्रीनाथ धाम में ईद की नमाज पढ़ी। हालाँकि चमोली पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बताया कि श्रमिकों ने एक बंद कमरे में नमाज पढ़ी थी। लेकिन पर्यटन मंत्री को दिए गए ज्ञापन में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि बद्रीनाथ धाम में जानबूझकर नमाज पढ़ी गई है। उन्होंने ज्ञापन में इस बात पर भी ध्यान दिलाया है कि जब बद्रीनाथ धाम पूरी तरह से हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए बंद है और वहाँ हिंदुओं को दर्शन तक की अनुमति नहीं है तो फिर वहाँ नमाज कैसे पढ़ी जा सकती है?

विहिप के पदाधिकारियों द्वारा पर्यटन मंत्री को ज्ञापन दिए जाने के बाद पुलिस ने मामले की जाँच की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी श्रमिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दैनिक जागरण का कहना है कि पुलिस ने इनके खिलाफ कोविड प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर मामला दर्ज किया है। हालाँकि चमोली पुलिस ने इस घटना को लेकर जो ट्वीट किया है उसमें स्पष्ट तौर पर कहा है कि मजदूरों ने बंद कमरे में बिना लाउडस्पीकर और मौलवी के नमाज पढ़ी। इस दौरान कोरोना गाइडलाइन का भी पालन किया गया। साथ ही आरोपों की जाँच करने की भी बात कही है।

बद्रीनाथ धाम में नमाज पढ़े जाने की घटना के बाद स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा है। उन्होंने इस मामले में बद्रीनाथ थाने में जाकर ज्ञापन भी दिया। एक स्थानीय नागरिक का कहना है कि उनसे अक्सर पहचान-पत्र माँगे जाते हैं। इसके कारण उन्हें कभी-कभी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। इसी तरह ठेकेदारों को भी ध्यान देना चाहिए कि जब वो अपने मजदूर लेकर आएँ तो उन्हें बद्रीनाथ धाम के रीति-रिवाजों से परिचित कराएँ। साथ ही उसने यह भी कहा कि सभी ठेकेदारों से यह निवेदन है कि वो अपनी सीमाओं को न लाँघे, क्योंकि वो (हिन्दू) सोए नहीं हैं और अपने रिवाजों की रक्षा के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि बद्रीनाथ धाम के मूल स्थानीय निवासियों को न तो मंदिर में दर्शन करने दिया जा रहा है और न ही तप्त कुंड में स्नान करने की अनुमति है। उन्होंने बताया कि मंदिर समिति के ऐक्ट नंबर 183 में साफ तौर पर कहा गया है कि बद्रीनाथ धाम में मंदिर की धार्मिक गतिविधियों के अलावा कोई अन्य गतिविधि संचालित नहीं होगी। फिर भी बाहर से आकर कुछ मुस्लिमों ने यहाँ नमाज अदा की जो निंदनीय है। यह हिंदुओं के आस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ है। एक अन्य स्थानीय महिला ने अनुरोध किया है कि नमाज पढ़ने वाले मुस्लिमों की परमिशन रद्द की जाए और ठेकेदार को भी यह हिदायत दी जाए कि उसके द्वारा आगे से बद्रीनाथ धाम में कोई भी ऐसा कार्य न किया जाए।

साल 1971, भारत के सामने हथियार डालती पाक फौज: अफगान उपराष्ट्रपति ने तस्वीर पोस्ट कर पाकिस्तान को मारे ताने

तालिबान को पाकिस्तान द्वारा दी जा रही सहायता के सबूत देने के बाद अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह ने बुधवार (21 जुलाई 2021) को ट्विटर पर पाकिस्तान ट्रोल्स को करारा जवाब दिया। दरअसल, सालेह ने अपनी ट्विटर एकाउंट से 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान के ईस्टर्न कमांड के इंचार्ज जनरल नियाजी (आमिर अब्दुल्लाह खान नियाजी) की भारत के सामने सरेंडर करती हुई फोटो पोस्ट की। यह फोटो अक्सर पाकिस्तानियों को चिढ़ाने के लिए काफी होती है।

सालेह ने फोटो पोस्ट करते हुए लिखा, “इतिहास में हमारे पास ऐसी कोई तस्वीर नहीं रही है और न ही रहेगी। हाँ, कुछ समय के लिए मैं हिल गया था जब रॉकेट हमारे ऊपर से गुजरा और थोड़ी दूर पर गिरा। तो पाकिस्तान के प्रिय ट्विटर हमलावरों, तालिबान और आतंकवाद इस तस्वीर के घावों पर मरहम नहीं लगा पाएंगे, इसलिए कोई और तरीका ढूँढ़े।”

सालेह द्वारा पोस्ट की गई इस फोटो को कहानी लिखे जाने तक 22,000 से अधिक लाइक और 8,000 से अधिक रिट्वीट मिल चुके हैं। हालाँकि, इस पर भी कई पाकिस्तानी इसी झूठी कल्पना से खुश हैं कि उन्होंने कभी कोई युद्ध हारा ही नहीं। दरअसल, काबुल में बकरीद के मौके पर राष्ट्रपति भवन में जब अशरफ गनी नमाज पढ़ रहे थे, तब वहाँ एक रॉकेट हमला हुआ था। इस पर उपराष्ट्रपति ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिसके बाद उन पर पाकिस्तानी ट्रोल ट्विटर के जरिए हमला कर रहे थे।

सालेह द्वारा शेयर की गई यह ऐतिहासिक तस्वीर 16 दिसंबर 1971 की है। बांग्लादेश मुक्ति संघर्ष के दौरान तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) में पाकिस्तानी फौज के आला अधिकारियों ने 93,000 फौजियों के साथ भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था, उसी दौरान यह तस्वीर खींची गई थी। भारत ने पाकिस्तान पर अपनी सैन्य विजय को ‘स्वर्णिम विजय वर्ष’ के रूप में मनाया था।

सालेह ने कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ तालिबान का पाकिस्तान खुले तौर पर समर्थन कर रहा है। अफगानिस्तान के उपराष्ट्रपति ने इसके संबंध में सबूत होने की बात भी कही। रिपोर्ट्स के अनुसार, सालेह ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा था कि तालिबान तीन भागों में विभाजित है, जिनमें से एक का नेतृत्व पाकिस्तान की स्पेशल एंटी-टेररिस्ट सेल के द्वारा किया जा रहा है।

हाल ही में सालेह ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें पाकिस्तान के नेता मोहसिन दावर खुले तौर पर अपने ही देश द्वारा तालिबान की सहायता करने की बात कह रहे हैं। हालाँकि, सालेह ने पाकिस्तान को यह कहते हुए चेतावनी भी दी है कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान में आतंकियों के समर्थन के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।