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चीन में बाढ़ का हजार साल पुराना रिकॉर्ड टूटा, मॉल से लेकर मेट्रो तक में विनाशकारी बाढ़ का पानी भरा, देखें वीडियो

चीन के मध्य चीनी प्रांत हेनान में कुदरत कहर बनकर बरस रही है। मूसलाधार बारिश के कारण इस क्षेत्र में आए बाढ़ से हालात बिगड़ गए हैं। 20 जुलाई 2021 (मंगलवार) को राजधानी झेंग्झाऊ समेत कई शहरों में शाम 4 बजे से शाम 5 बजे के बीच 20 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई थी, जिस कारण इलाके की सड़कें जलमग्न हो गई हैं। अचानक आई बाढ़ से लोग जलमग्न सड़कों, शॉपिंग मॉल, कार्यालयों और भूमिगत मेट्रो ट्रेनों में फँस गए हैं।

चीन के बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में फँसे हुए लोग अब वीडियो के जरिए अपनी व्यथा व्यक्त कर रहे हैं। भारी बारिश के कारण हो रही तबाही का नजारा लगातार डरावना होता जा रहा है। कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर इस आपदा की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं। मान्या कोएत्से नाम की एक ट्विटर यूजर ने ट्वीट कर कई वीडियो शेयर किए। एक वीडियो में मेट्रो स्टेशन पर पानी गर्जना करते देखा जा सकता है।

एक अन्य वीडियो में लोग मेट्रो ट्रेनों में फँसे नजर आए। उनकी छाती तक पानी पहुँच गया है।

दूसरे वीडियो में दिख रहा है कि बाढ़ के कारण सड़कों पर कारें बह रही हैं। वहीं, एक शख्स को पानी में डूबी सड़क से बाहर निकलने की कोशिश करते देखा गया है।

एक वीडियो में दिखाया गया है कि मॉल में लोग फँसे हुए हैं और उन्हें रेस्क्यू करने की कोशिश की जा रही है।

कई लोग एक इमारत के लोवर फ्लोर में फँस गए थे, जिन्हें रस्सी के जरिए बाहर निकाला जा रहा है।

बाढ़ का सबसे डरावना वीडियो बच्चों के फँसे होने का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि छोटे-छोटे बच्चे बाढ़ ग्रस्त किंडरगार्टन में फंसे हैं। कोएत्से ने कहा, “आधी रात से ठीक पहले, झेंग्झाऊ में बाढ़ वाले किंडरगार्टन से 150 से अधिक लोगों (बच्चों और शिक्षकों) को बचाया गया था। बचाव अभियान के दौरान कुछ बच्चों और दमकलकर्मियों को मुस्कुराते हुए देखकर खुशी हुई।”

एबीसी के पूर्व चीनी संवाददाता बिल बर्टल्स ने भी इस भयावह बाढ़ के वीडियो को साझा किया है। एक वीडियो में एक परिवार कार में फँसा दिख रहा है, जबकि बाढ़ का पानी उनके ठीक ऊपर बह रहा है।

एक अन्य वीडियो में भारी बारिश के कारण सड़क टूटती देखी जा सकती है।

1,000 वर्षों में सबसे भारी वर्षा

चीन के अधिकारियों के मुताबिक, हेनान प्रांत में 1,000 वर्षों के दौरान यह सबसे भारी बारिश है। इस आपदा के कारण 12 मेट्रो यात्रियों समेत कम-से-कम 25 लोगों की मौत हुई है। चीनी मीडिया का दावा है कि बारिश और बाढ़ के कारण 1.24 मिलियन लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं 1,60,000 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।

चीनी अधिकारियों ने कहा है कि झेंग्झाऊ में शनिवार से मंगलवार के बीच 617.1 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो शहर में वार्षिक औसत वर्षा (640.8 मिमी) के करीब है।

दिल्ली में UP सरकार की जमीन, रोहिंग्या ने कर रखा था कब्जा: बुलडोजर से योगी सरकार ने साफ करवाया

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पास मदनपुर खादर में योगी सरकार ने रोहिंग्याओं के अवैध कब्जे से 150 करोड़ रुपए की जमीन खाली करवाई है। ईद के अगले दिन, गुरुवार (जुलाई 22, 2021) की सुबह 4 बजे प्रशासन ने यह कार्रवाई की। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा करके रोहिंग्या कैंप बनाया गया था। इसी पर योगी सरकार ने बुलडोजर चलाकर जमीन को कब्जे से मुक्त करवाया है। पूरी कार्रवाई में सिंचाई विभाग की 2.10 हेक्टेयर जमीन मुक्त की गई है।

यूपी सरकार में जल शक्ति मंत्री डॉ महेंद्र सिंह ने इस संबंध में अपने ट्वीट से जानकारी दी। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई का एक वीडियो शेयर करते हुए कहा, “दिल्ली में फिर से चला योगी का बुलडोजर। योगी सरकार की दिल्ली में बड़ी कार्रवाई। मदनपुर खादर में सुबह 4 बजे ही कार्रवाई कर, सिंचाई विभाग की भूमि पर अवैध कब्जे से रोहिंग्या कैंम्पों को हटाया गया एवं अवैध कब्जे तोड़े गए। इस दौरान यूपी सिंचाई विभाग की 2.10 हेक्टेयर जमीन मुक्त कराई गई।”

इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य मंत्री ने बताया कि उक्त जमीन पर लोगों ने कब्जा करके अपने पक्के मकान बना लिए थे। इसके बाद स्थानीय सरकार की मदद से वहाँ रोहिंग्या लोगों को बसाया गया। इस संबंध में उन्होंने एलजी से बात की और एलजी ने उन्हें आश्वासन दिया कि जमीन को खाली कराने के लिए सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा था कि वह प्रदेश की एक-एक इंच की जमीन को खाली करवाएँगे। 

बता दें कि जिस मदनपुर खादर इलाके में यूपी सरकार की कार्रवाई हुई है। वो इलाका ओखला विधानसभा में आता है और वहाँ के विधायक का नाम अमानतुल्लाह खान है। ऐसे में यूपी के जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह का कहना है कि वहाँ के विधायक ने कुछ अराजकता की है और उनके विरुद्ध शिकायत भी हुई है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले यूपी के अन्य इलाकों में अतिक्रमण को लेकर कार्रवाई की गई थी। इसमें प्रशासन ने सरकारी जमीनों पर बने धार्मिक स्थलों को हटवाया था। हालाँकि इस बार दिल्ली से सटे इलाके में योगी सरकार का बुल्डोजर चला है और इस कार्रवाई में रोहिंग्याओं के कब्जे से सिंचाई विभाग की जमीन के बड़े हिस्से को मुक्त करवाया गया है।

इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग इस कदम की आलोचना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे पोस्ट में देख सकते हैं कि बिन अवैध कब्जे वाली बात का जिक्र किए कार्रवाई के लिए योगी सरकार को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। सैयद फरमान तस्वीरें साझा करते हुए लिखते हैं, 

“ईद-उल-अज़हा से अगले दिन जब कुर्बानियों से थक कर मुसलमान सो रहे थे। उस वक़्त यूपी पुलिस ने बहादुरी दिखाते हुए रोहिंग्या की मस्जिद को तोड़ दिया। साथ ही मस्जिद से थोड़ी दूर ही 16 झुग्गियाँ जिन में लगभग 100 लोग थे, सब तोड़ दी हैं। यूपी सरकार को इतनी नफ़रत, इतना ग़ुस्सा आख़िर किस बात का है? पहले रात के अंधेरे में झुग्गियों में आग लगा दी गई और अब बची हुई मस्जिद जिसकी तस्वीरें आप देख रहे है उसको तहस-नहस कर दिया। अब ये लोग सड़क पर है, ना इनके पास रहने के लिए जगह है और बैठने का कोई ठिकाना। सलाम है दोगली सरकार को। जय हो मोदी दी।”

सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा

गिरफ्तारी से बचने के लिए राज कुंद्रा ने क्राइम ब्रांच को दिए थे ₹25 लाख? 70 पोर्न वीडियो बनवाए, कुछ 30 मिनट से भी लंबे

पोर्नोग्राफी मामले में अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद से ही लगातार खुलासे हो रहे हैं। अब इस मामले में फरार अरविंद श्रीवास्तव उर्फ यश ठाकुर ने जो दावा किया है उससे मुंबई पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ठाकुर का दावा है कि राज कुंद्रा ने गिरफ्तारी से बचने के लिए क्राइम ब्रांच को 25 लाख रुपए की घूस दी थी। उसने खुद से भी रिश्वत माँगे जाने का दावा किया है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि क्राइम ब्रांच 70 वीडियो की जाँच कर रही है। ये वीडियो कथित तौर पर कुंद्रा के आदेश पर बनाए गए थे। इन्हें छोटे-छोटे प्रोडक्शन हाउस ने बनाया था और वे भी जाँच के दायरे में हैं। इनमें से कुछ वीडियो 30 मिनट से भी अधिक के हैं। कुंद्रा को सोमवार (19 जुलाई 2021) देर रात गिरफ्तार किया गया था। अदालत में पेशी के बाद उन्हें 23 जुलाई तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया था।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यश ठाकुर ने दावा किया है कि पुलिस पहले ही राज कुंद्रा को गिरफ्तार कर सकती थी, लेकिन इससे बचने के लिए उन्‍होंने क्राइम ब्रांच के अध‍िकारी को 25 लाख रुपए घूस दिए थे। मिड डे की रिपोर्ट के अनुसार ठाकुर ने दावा किया है कि इस मामले में उन्होंने मार्च में महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो से शिकायत भी की थी। उन्होंने इस बारे में एक ईमेल लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि क्राइम ब्रांच अधिकारी ने राज कुंद्रा से 25 लाख रुपए रिश्वत ली है। साथ ही उनसे भी घूस की माँग की गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो ( ACB) ने इस ईमेल को अप्रैल महीने में मुंबई पुलिस कमिशनर को फॉरवर्ड किया था और मामले की जाँच करने के लिए कहा था।

Fliz Movies का मालिक है यश ठाकुर

यश ठाकुर एक यूएस बेस्ड फर्म का मालिक बताया जाता है। वह Fliz Movies का मालिक है, जिसके नाम से मॉडल्‍स और ऐक्‍ट्रेसेस से वेब सीरीज और शो के नाम पर कॉन्‍ट्रैक्‍ट साइन करवाया जाता था। इस फर्म का नाम पहले Neufliks था। यश ठाकुर पर आरोप है कि राज कुंद्रा की कंपनी जो पोर्न फिल्‍में बनाती थीं, वो कथित तौर पर यश ठाकुर की कंपनी की वेबसाइट पर अपलोड की जाती थीं। क्राइम ब्रांच के कार्रवाई करते हुए यश ठाकुर के अकाउंट्स से 4.5 करोड़ रुपए सीज किए थे।

मुंबई के पुलिस आयुक्त हेमंत नागराले से पुलिस अधिकारियों द्वारा कुंद्रा से रिश्वत लेने के बारे में सवाल किया गया तो उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था। उन्होंने एक रिपोर्टर के सवाल का जवाब देते हुए कहा, “मुझे सवाल और जवाब सत्र (Questions and Answers Sessions) पसंद नहीं हैं। अब ये आप पर है कि आप सवाल पूछना बंद करें या मैं आपको ब्लॉक कर दूँ?” वहीं बुधवार (जुलाई 21, 2021) शाम को मुंबई पुलिस के आधिकारिक प्रवक्ता डीसीपी चैतन्य एस ने कहा कि उन्हें आरोपों के बारे में जानकारी नहीं है।

गौरतलब है कि अश्लील फिल्में बनाने के केस में गिरफ्तार शिल्पा शेट्टी के पति और बिजनेसमैन राज कुंद्रा 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में हैं। इसी बीच, मुंबई पुलिस ने बुधवार शाम को राज कुंद्रा के ऑफिस विआन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और कुछ अन्य ठिकानों पर छापा मारा। इसमें राज कुंद्रा के ऑफिस में लगे कुछ कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क और सर्वर को सीज किया गया है। माना जा रहा है कि यहीं से वी ट्रांसफर के जरिए अश्लील वीडियो अपलोड किए जाते थे। इसके अलावा कुछ अन्य दस्तावेज भी पुलिस ने जब्त किए हैं। 

राज कुंद्रा ने मानो आने वाले खतरे को भाँप लिया था उन्हें शायद पता था कि आने वाले समय में वो भारतीय जाँच एजेंसी की रडार पर आ सकते हैं और इसी वजह से कुंद्रा ने अपना प्लान “बी” बनाया था। क्राइम ब्रांच को मिले व्हाट्सएप चैट इस प्लान “बी”का खुलासा करते हैं।

लुकआउट नोटिस जारी

पुलिस ने राज कुंद्रा का आई फोन और लैपटॉप भी जब्त किया है। कुंद्रा के अलावा उनके बहनोई प्रदीप बश्खी के खिलाफ भी ‘लुकआउट’ नोटिस जारी हुआ है। मुंबई पुलिस के मुताबिक, प्रदीप बख्शी भी इस केस में आरोपित हैं। बख्शी ‘हॉटशॉट’ ऐप बनाने वाली कंपनी केनरिन के को-ओनर हैं।

पोर्न ही फ्यूचर

मुंबई पुलिस के अनुसार, कुंद्रा इस रैकेट को बहुत सुनियोजित ढंग से चला रहे थे। इसमें मुनाफा कमाने के लिए उनके पास एक प्रॉपर स्ट्रैटेजी थी। एक्सेस किए गए सबूतों से यह पता चला कि राज कुंद्रा सेक्सुअल एक्ट्स की लाइव स्ट्रीमिंग को सबसे अच्छा विकल्प मान रहे थे और इसी में भविष्य देख रहे थे। उनका प्लान था कि वो इस बिजनेस को बॉलीवुड जितना बड़ा बनाएँगे।

‘हॉटशॉट्स’ के जरिए स्ट्रीमिंग

मुंबई क्राइम ब्रांच ने ‘Hotshots’ एप के जरिए अश्लील वीडियो बनाने और उसको पब्लिश करने के मामले में राज कुंद्रा को ‘प्रमुख साजिशकर्ता’ के रूप में नामित किया है। पुलिस के मुताबिक कुंद्रा ‘हॉटशॉट्स’ ऐप के जरिए पोर्न वीडियोज की स्ट्रीमिंग में शामिल थे। उन्होंने वर्ष 2019 में अपने ऐप ‘हॉटशॉट्स’ को 25,000 डॉलर (18,65,410 रुपए) में बेच दिया था। हालाँकि यह सिर्फ जाँच को भटकाने के लिए था क्योंकि ऐप को बेचने के बाद भी वो मुंबई से इसे कंट्रोल कर रहे थे। पोर्न वीडियोज के लिए कुंद्रा ही कंटेट उपलब्ध करवाते थे। उन्होंने अपने वियान इंडस्ट्रीज के ऑफिस से यूके की फर्म को कंट्रोल किया था। फिलहाल, उसे मोबाइल से हटा लिया गया है।

पुनीत कौर को पोर्न के लिए मैसेज

यूट्यूब पर ‘कौर ब्यूटी’ नामक चैनल चलाने वाली यूट्यूबर पुनीत कौर ने खुलासा किया था कि राज कुंद्रा ने अपने एप ‘Hotshots’ के लिए उनसे संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि राज कुंद्रा ने उन्हें मैसेज किया था। पुनीत कौर का कहना है कि पहले तो उन्हें ऐसा लगा जैसे ये कोई स्पैम मैसेज है, लेकिन बाद में उन्हें विश्वास नहीं हुआ कि ये व्यक्ति सचमुच लोगों को ‘लालच देकर फँसा’ रहा है।

केरल के बैंक में ₹300+ करोड़ का घोटाला: CPM नेताओं की मौन सहमति? जो फँसे वो भी वामपंथी ही

केरल के त्रिशूर जिले के इरिंजालकुडा क्षेत्र में स्थित करुवन्नूर सहकारी बैंक में बड़ा घोटाला हुआ है। इस बैंक को वहाँ की वामपंथी लेफ्ट पार्टी संचालित करती है। बैंकिंग प्रबंधन द्वारा करीब 300 करोड़ रुपए के फ्रॉड का अनुमान लगाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी मेंबर के नाम पर करोड़ों रुपए का कर्ज घोटालेबाजों को दिया गया, जबकि इसके बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी।

आरोप यह लगाया जा रहा है कि ये कर्ज सीपीएम के नेताओं की मौन सहमति के आधार पर ही घोटालेबाजों को बाँटे गए। सहकारिता विभाग द्वारा संयुक्त रजिस्ट्रार को सौंपी गई रिपोर्ट और ग्राहकों की शिकायतों के आधार पर अधिकारियों ने धोखाधड़ी का शुरुआती आकलन किया है। जानकारी यह भी सामने आई है कि मामले के मुख्य आरोपित माने जा रहे बैंक के पूर्व मैनेजर एमके बीजू ने ही 379 कर्जों को पारित करने की पहल की थी।

इरिंजालकुडा पुलिस ने मामले में बैंक के दस्तावेजों को जब्त कर लिया है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है। इसके अलावा बैंक की संचालन परिषद को भी भंग नहीं किया गया। फिलहाल केस की जाँच को क्राइम ब्रांच ने अपने हाथ में ले लिया है।

शुरुआत में छह लोगों के खिलाफ केस

बैंक फ्रॉड के मामले में इससे पहले इरिंजालकुडा पुलिस ने 120 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत पर बैंक के पूर्व सचिव और प्रबंधक सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। लेकिन अब पता चला है कि घोटाला पहले की शिकायत से तीन गुना अधिक है। इसके अलावा इस फ्रॉड को छिपाने के लिए राजनीतिक प्रभाव के भी इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।

निवेश से ज्यादा ऋण

रिपोर्ट के मुतबाकि घोटालेबाजों ने शुरू में 50,000 रुपए का कर्ज दिया और उसके बाद दस्तावेजों पर हस्ताक्षर के बाद 50 लाख रुपए का कर्ज लिया। खास बात ये है कि जिनके नाम पर ये धोखाधड़ी की गई, वो भी सीपीएम के ही समर्थक हैं। घोटाला सामने आने के बाद अब वे कर्ज के जाल में फँस गए हैं।

इस केस में व्हिसिल ब्लोअर और बैंक के कर्मचारी रहे सुरेश कुमार के अनुसार, यदि सभी अवैध लेनदेन का हिसाब किया जाए तो कुल धोखाधड़ी 300 करोड़ रुपए से कहीं अधिक हो जाएगी। इस घपलेबाजी की शुरुआत साल 2003 में ही हो गई थी। उन्होंने 2005 में सीपीएम के सीनियर लीडर्स को इसके बारे में बताया था, लेकिन नेताओं ने शिकायत को नजरअंदाज कर दिया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैंक में पाँच साल में 300 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है। सहकारी क्षेत्र के नियमों के अनुसार, कुल निवेश का केवल 70 प्रतिशत ही बैंक ऋण के रूप में जारी किया जा सकता है। लेकिन ऐसे सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए बैंक ने 2018-19 में 437.71 करोड़ रुपए के ऋण जारी किए, जबकि कुल निवेश सिर्फ 401.78 करोड़ रुपए ही था।

CPM लीडर्स घोटाले से अवगत थे

त्रिशूर स्थित सीपीएम के जिला सचिवालय से कुछ नेता बैंकिंग कार्यप्रणाली को कंट्रोल कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक सीपीएम के नेताओं को इसकी जानकारी थी। बावजूद इसके 100 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। सीपीएम ने सहकारी रजिस्ट्रार के ऑफिस में महत्वपूर्ण पदों पर अपने लोगों को ही रखा था।

53 साल पुराना केस, SC में अपील स्वीकार होने से पहले दुनिया छोड़ गया 108 साल का शख्स: दिल्ली कोर्ट में ‘तारीख पर तारीख’ चिल्लाते हुए तोड़फोड़

सुप्रीम कोर्ट में अपनी अर्जी पर सुनवाई से पहले महाराष्ट्र के 108 वर्षीय सोपान नरसिंगा गायकवाड़ की मौत हो गई है। भूमि विवाद से जुड़ा यह मामला 1968 का है। 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी थी। इससे पहले 27 साल तक यह मामला हाईकोर्ट में लंबित रहा। फिर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और शीर्ष अदालत ने 12 जुलाई को इस केस पर सुनवाई की मँजूरी दी थी।

गायकवाड़ के वकील विराज कदम ने बताया कि सुनवाई के बाद पता चला कि उनके मुवक्किल की मौत कुछ दिन पहले ही हो चुकी है। अब उनके कानूनी उत्तराधिकारी यह मुकदमा लड़ेंगे। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस ऋषिकेश रॉय ने इस मामले में नोटिस जारी कर दूसरी पार्टी से आठ हफ्तों में जवाब माँगा है।

याचिकाकर्ता के वकील विराज कदम ने बताया, ‘‘दुर्भाग्य से जो व्यक्ति निचली अदालत से उच्चतम न्यायालय तक यह मामला लाया वह सुनवाई पर शीर्ष अदालत की सहमति की खबर सुनने के लिए जिंदा नहीं है। 12 जुलाई को अदालत द्वारा मामले को लेने से पहले ही उसकी मौत हो गई, लेकिन ग्रामीण इलाके से सुनवाई के बाद उनके देहांत की जानकारी मिली। अब उनका प्रतिनिधित्व उनके कानूनी उत्तराधिकारी करेंगे।”

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति ऋषिकेश रॉय की पीठ ने 23 अक्टूबर 2015 और 13 फरवरी 2019 को आए उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर करने में 1,467 दिनों और 267 दिनों की देरी को माफ करने के लिए दायर आवेदन पर नोटिस जारी किया है।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने कहा, ‘‘हम इस तथ्य का संज्ञान ले रहे हैं कि याचिकाकर्ता की उम्र 108 साल है और उच्च न्यायालय ने इस मामले को मेरिट के आधार पर नहीं लिया एवं मामले को वकील के अनुपस्थित होने के आधार पर खारिज कर दिया।” पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता ग्रामीण इलाके का है और हो सकता है कि वकील वर्ष 2015 में मामला खारिज होने के बाद उससे संपर्क नहीं कर सका हो।

वहीं, दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट में जब एक शख्स को अपने केस में नई तारीख मिली तो वो गुस्सा हो गया। इस शख्स ने कंप्यूटर में लात मारनी और कुर्सियों को फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद उसने चिल्लाते हुए ‘दामिनी’ फिल्म के सनी देओल का डायलॉग ‘तारीख पे तारीख मिलती है, इंसाफ नहीं मिलता जज साब’ भी बोला।

कड़कड़डूमा कोर्ट रूम नंबर 66 में 17 जुलाई को ये मामला हुआ। शास्त्रीनगर के राकेश नाम के शख्स का यहाँ एक मामला चल रहा है। ये केस 2016 से चल रहा है। 17 जुलाई को मामले की तारीख थी, राकेश तारीख पर आया था। मामले की सुनवाई चल गई और जज ने अगली तारीख दे दी। इस पर राकेश आग बबूला हो गया। पुलिस ने राकेश को गिरफ्तार कर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। उसके खिलाफ धारा 353, 427 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया है।

‘मैं ब्राह्मण हूँ, इसलिए…’ – क्रिकेट की कमेंट्री में सुरेश रैना ने कहा, सोशल मीडिया पर बवाल, जडेजा भी लपेटे में

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी सुरेश रैना के ‘मैं ब्राह्मण हूँ’ वाले बयान को लेकर उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक रैना को तमिलनाडु प्रीमियर लीग में कंमेंटेटर के तौर पर बुलाया गया था, जहाँ उन्होंने तमिलनाडु की संस्कृति के बारे में बात करते हुए कहा कि वो भी एक ब्राह्मण हैं, इसलिए राज्य की संस्कृति को अपनाने में उन्हें दिक्कत नहीं हुई है।

दरअसल, तमिलनाडु में सोमवार (19 जुलाई 2021) को मैच की कमेंट्री के दौरान साथी कमेंटेटर ने उनसे तमिलनाडु की संस्कृति से जुड़ा सवाल किया था। इसी के जवाब में उन्होंने यह कहा। रैना ने कहा, “मैं भी एक ब्राह्मण हूँ। 2004 से चेन्नई के साथ खेल रहा हूँ और यहाँ का कल्चर मुझे बहुत पसंद है। टीम के साथियों के साथ प्यार है। अनिरुद्ध श्रीकांत, एस बद्रीनाथ, लक्ष्मीपति बालाजी के साथ खेला हूँ। मैं भाग्यशाली रहा हूँ कि मैं चेन्नई सुपरकिंग्स की टीम में रहा हूँ औऱ उम्मीद है कि और मैच खेलूँगा।” बता दें कि रैना को चेन्नई में थाला चिन्ना के नाम से बुलाया जाता है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के रहने वाले 34 वर्षीय सुरेश रैना को तमिलनाडु प्रीमियर लीग के पाँचवें सीजन में कमेंट्री के लिए आमंत्रित किया गया था। यह मैच लाइका कोवई और सलेम स्पार्टन्स के बीच खेला गया था।

बहरहाल रैना का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसको लेकर उनकी खासी आलोचनाएँ भी की जा रही हैं। उन पर जातिवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया जा रहा है।

मिशन अंबेडकर नाम के सोशल मीडिया हैंडल ने रैना और रवीन्द्र जडेजा पर जाति को लेकर निशाना साधा। यूजर ने लिखा, “रैना और रवींद्र आप अपनी द्विज जाति का महिमामंडन कर सकते हैं। यह वर्ण व्यवस्था की महिमा है। लेकिन एक शूद्र और एक अछूत अपने वर्ण का महिमामंडन कैसे करेंगे?”

एक अन्य यूजर ने कहा, “सुरेश रैना आपको शर्म आनी चाहिए। आप चेन्नई के साथ लंबे समय से खेलने की बातें करते हैं, लेकिन ऐसा लगता है आप चेन्नई के बारे में जान ही नहीं पाए।”

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल अप्रैल 2020 में रवींद्र जडेजा ने तलवार के साथ ट्वीट किया था, “एक तलवार अपनी चमक खो सकती है, लेकिन इसे चलाने वाला इसकी अवज्ञा कभी नहीं करता। राजपूत ब्वॉय।”

UP के सबसे गरीब 40 लाख लोगों को हर साल 5 लाख का मुफ्त इलाज, दिसंबर तक 50000 युवाओं को सरकारी नौकरी

उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से वंचित करीब 40 लाख अंत्योदय कार्ड धारक परिवारों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस योजना में शामिल होने पर इनमें से प्रत्येक परिवार को निजी और सरकारी अस्पतालों में सालाना पाँच लाख रुपए तक के नि:शुल्क इलाज की सुविधा मिलेगी।

बुधवार (जुलाई 21, 2021) को लोकभवन में मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद राज्‍य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि अन्त्योदय कार्डधारक परिवारों को मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल किए जाने पर इस योजना हेतु आवंटित बजट से अधिक संभावित व्यय होने की स्थिति में अनुपूरक माँग पत्र के माध्यम से अतिरिक्त बजट आवंटित किया जाए। उनके अनुसार मंत्रिपरिषद ने भविष्य में इस योजना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन की आवश्यकता होने पर इसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।

सिंह ने कहा कि इस निर्णय से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े अन्त्योदय कार्डधारक परिवारों को बीमारी की स्थिति में होने वाले व्यय से सुरक्षा मिलेगी तथा अंत्योदय कार्डधारक परिवार इस निर्णय से सीधे लाभान्वित होंगे।

प्रदेश में आयुष्यमान भारत योजना में 1 करोड़ 18 लाख लोग शामिल किए गए हैं। जबकि मुख्यमंत्री आरोग्य योजना में 10 लाख लोगों को शामिल किया गया। इस तरह से इन दोनों योजनाओं में बचे रह गए 40 लाख अंत्योदय कार्ड धारकों को 5 लाख का बीमा देने के लिए मुख्यमंत्री जनारोग्य में जोड़ा जाएगा, जिसमें 102 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

वहीं प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने अपराधियों को एक बार फिर कड़ा संदेश देते हुए कहा कि यूपी में जिसे अपनी प्रॉपर्टी जब्‍त करवानी हो, वह गलत काम करे। आबकारी इंस्पेक्टर के नियुक्ति पत्र बाँटने के अवसर पर उन्‍होंने ये बातें कहीं।

युवा किसी के बहकावे में नहीं आएँ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनको किसी के बहकावे में नहीं आना चाहिए। पहले की सरकारों पर हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि यूपी में अब किसी को भी गलत करने की छूट नहीं है। इस अवसर पर उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर तक 50000 और नौजवानों को सरकारी नौकरी मिलेगी।

The Family Man की हिरोइन की शादी 2 बच्चों के पिता मुस्तफा राज से, पहली बीवी ने कहा – ‘नहीं लिया था तलाक’

द फैमिली मैन वेब सीरीज में काम कर चुकी अभिनेत्री प्रियमणि की मुस्तफा राज से शादी को न्यायालय में चुनौती दी गई है। चुनौती देने वाला कोई और नहीं बल्कि मुस्तफा की पहली पत्नी है, जिनका कहना है कि मुस्तफा ने उनसे वैधानिक तौर पर तलाक नहीं लिया था। वहीं मुस्तफा इसे पैसे ऐंठने का तरीका बता रहे हैं।

प्रियमणि ने 2017 में मुस्तफा राज से शादी की थी। लेकिन अब मुस्तफा की पहली पत्नी आयशा ने न्यायालय में मुकदमा दर्ज किया है। आयशा का कहना है कि मुस्तफा ने अभी तक वैधानिक तौर पर उनसे तलाक नहीं लिया है। आयशा ने प्रियमणि और मुस्तफा की शादी को अवैध बताते हुए कहा है कि मुस्तफा ने प्रियमणि से शादी करते समय कोर्ट में खुद को कुँवारा बताया था लेकिन सच यह है कि उन्होंने तलाक फाइल करने के लिए भी कोई कार्रवाई नहीं की है। आयशा और मुस्तफा के दो बच्चे भी हैं।

हालाँकि मुस्तफा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सिर्फ पैसे वसूलने की साजिश है। मुस्तफा ने कहा कि वह नियमित तौर पर आयशा और बच्चों की परवरिश के लिए पैसे भेजते हैं लेकिन आयशा यह सब और अधिक पैसे वसूलने के लिए कर रही हैं। मुस्तफा ने कहा कि 2010 से वह आयशा से अलग हैं और 2013 में उन दोनों का तलाक हुआ था और इसके बाद उन्होंने 2017 में प्रियमणि के साथ शादी की थी, तो इतने दिनों तक आयशा सामने क्यों नहीं आईं?

आयशा ने मुस्तफा के खिलाफ घरेलू हिंसा का आरोप भी लगाया है। काफी समय बीत जाने के बाद मुकदमा दर्ज किए जाने के सवाल पर आयशा का कहना है कि दो बच्चों की माँ और कर भी क्या सकती है? उन्होंने कहा कि पहले तो मामले को आपस में सुलझाने की कोशिश की गई लेकिन जब बात नहीं बनी तो यह कदम उठाना ही पड़ा।

प्रियमणि दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने हाल ही में रिलीज हुई वेब सीरीज द फैमिली मैन में भी मुख्य भूमिका निभाई है। प्रियमणि, प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन की चचेरी बहन हैं। प्रियमणि के पति मुस्तफा राज व्यापारी हैं और इवेंट मैनेजमेंट का काम करते हैं।

दैनिक भास्कर समूह कर रहा था टैक्स की चोरी? जाँच के लिए आयकर विभाग का छापा… ‘आपातकाल’ गिरोह का रोना शुरू

देश के एक मीडिया समूह दैनिक भास्कर पर आयकर विभाग का छापा पड़ा है। दिल्ली और मुंबई की आयकर विभाग की विभिन्न टीमों द्वारा गुरुवार (22 जुलाई 2021) को तड़के 4:30 बजे दैनिक भास्कर के भोपाल, इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद और महाराष्ट्र में स्थित 40 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई है। मीडिया समूह द्वारा टैक्स चोरी की सूचना मिलने पर आयकर विभाग ने यह कार्रवाई की है।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक मीडिया समूह द्वारा बड़ी टैक्स चोरी की सूचना के बाद न केवल दैनिक भास्कर के व्यवसायिक ठिकानों बल्कि उसके प्रमोटर्स के घरों और दफ्तरों पर भी आयकर विभाग की टीम पहुँची है। कार्रवाई के दौरान टैक्स से जुड़े दस्तावेजों को जब्त कर जाँच की जा रही है।

हालाँकि टैक्स से संबंधित अनियमितता के मामले में छापामारी होने पर एक बार फिर से वही ‘प्रेस की आजादी पर कायरतापूर्ण हमला’ और ‘आपातकाल’ का रोना शुरू हो चुका है। कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सूरजेवाला और लिबरल मीडियाकर्मी रोहिणी सिंह ने आयकर विभाग की कार्रवाई को सरकार की कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया।

ज्ञात हो कि मध्य प्रदेश में दैनिक भास्कर का मुख्यालय स्थित है। इसके अलावा कई अन्य राज्यों में विभिन्न भाषाओं में दैनिक भास्कर अपने संस्करण प्रकाशित करता है। दैनिक भास्कर देश का सबसे बड़ा मीडिया समूह माना जाता है।

Pegasus मामले में पलटा एमनेस्टी, कहा- ‘लिस्ट NSO स्पाइवेयर से संबंधित थी ही नहीं’; पहले PM-प्रेजिडेंट तक को लपेटा था

कई भारतीय पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नेताओं की फोन टैपिंग को लेकर इजराइल की साइबर सुरक्षा कंपनी पेगासस की भारत में आजकल खूब चर्चा हो रही है। कहा गया कि फ्रांस के एक नॉन प्रॉफिट संस्थान फॉरबिडेन स्टोरीज़ और एमनेस्टी इंटरनेशनल को NSO के फोन रिकॉर्ड का ‘सबूत’ हाथ लगा, जिसे उन्होंने भारत समेत दुनिया भर के कई मीडिया संगठनों के साथ साझा किया।

अब इस कहे गए में नाटकीय U-टर्न है। इज़राइली मीडिया आउटलेट कैलकलिस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अब स्पष्ट किया है कि उसने कभी दावा नहीं किया कि यह लिस्ट NSO से संबंधित थी। रिपोर्ट में कहा गया है, “एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कभी भी इस सूची को ‘NSO पेगासस स्पाइवेयर सूची’ के रूप में प्रस्तुत नहीं किया है। दुनिया के कुछ मीडिया ने ऐसा किया होगा। यह लिस्ट कंपनी के ग्राहकों के हितों की सूचक है।”

इसमें कहा गया, “एमनेस्टी, और जिन खोजी पत्रकारों और मीडिया आउटलेट्स के साथ वे काम करते हैं, उन्होंने शुरू से ही बहुत स्पष्ट भाषा में साफ कर दिया है कि यह एनएसओ की सूची ग्राहकों के हितों में है।” – जिसका अर्थ है कि वे लोग NSO क्लाइंट की तरह हो सकते हैं, जिन्हें जासूसी करना पसंद है।

पत्रकार किम जेटटर के अनुसार एमनेस्टी अब अनिवार्य रूप से कह रहा है कि सूची में ऐसे लोग शामिल हैं, जिनकी NSO के क्लाइंट आमतौर पर जासूसी करने में रुचि रखते हैं, न कि वो लोग जिन पर जासूसी की गई। एमनेस्टी का कहना है कि वे शुरू से ही बहुत स्पष्ट थे कि सूची NSO जासूसी टारगेट की सूची ‘नहीं’ थी। हालाँकि उनके ट्वीट इससे इतर कुछ और ही कह रहे थे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दावा किया था कि उसकी सिक्योरिटी लैब ने दुनिया भर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के कई मोबाइल उपकरणों का गहन फॉरेंसिक विश्लेषण किया। इस शोध में पाया गया कि NSO ग्रुप ने पेगासस स्पाइवेयर के जरिए मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की लगातार, व्यापक स्तर पर और गैरकानूनी तरीके से निगरानी की है। 

एमनेस्टी इंटरनेशनल की सुरक्षा लैब ने 10 देशों के 17 मीडिया संगठनों के 80 से अधिक पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के समूह के फोन टैपिंग का फॉरेंसिक विश्लेषण का दावा किया था। इसमें उसे आधे से अधिक मामलों में पेगासस स्पायवेयर के निशान मिले थे। 

अब के दावों से उलट ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल’ ने कहा था कि फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों का नाम भी उन 14 वर्तमान या पूर्व राष्ट्राध्यक्षों की सूची में शामिल है, जिन्हें कुख्यात इजराइली ‘स्पाइवेयर’ कम्पनी ‘एनएसओ ग्रुप’ द्वारा हैकिंग के लिए टारगेट किया गया था। एमनेस्टी के महासचिव ऐग्नेस कालामार्ड ने कहा था, “इन अभूतपूर्व खुलासों से दुनिया भर के नेताओं को काँप जाना चाहिए।”

रिपोर्ट में कहा गया कि पत्रकारिता संबंधी पेरिस स्थित गैर-लाभकारी संस्था ‘फॉरबिडन स्टोरीज एवं मानवाधिकार समूह ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा हासिल की गई और 16 समाचार संगठनों के साथ साझा की गई 50,000 से अधिक सेलफोन नंबरों की सूची से पत्रकारों ने 50 देशों में 1,000 से अधिक ऐसे व्यक्तियों की पहचान की है, जिन्हें एनएसओ के ग्राहकों ने संभावित निगरानी के लिए कथित तौर पर चुना।

‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की खबर के अनुसार, ‘एमनेस्टी’ और पेरिस स्थित गैर-लाभकारी पत्रकारिता संस्था ‘फॉरबिडन स्टोरीज’ को लीक किए गए 50,000 फोन नंबरों की सूची में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और इराक के राष्ट्रपति बरहम सालिह शामिल हैं। 

गौरतलब है कि एमनेस्टी की तरफ से यह बयान इजरायली कंपनी NSO द्वारा रिपोर्ट को खारिज करने के बाद आया है। NSO ने जाँच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा था कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और फॉरबिडेन स्टोरीज का डाटा गुमराह करता है। यह डाटा उन नंबरों का नहीं हो सकता है, जिनकी सरकारों ने निगरानी की है। इसके अलावा एनएसओ अपने ग्राहकों की खुफिया निगरानी गतिविधियों से वाकिफ नहीं है।

जासूसी के दावे और इसके उलट दावों के बीच सॉफ्टवेयर बनाने और बेचने वाली इजरायली कंपनी NSO ग्रुप ने साफ कह दिया था कि जिन नंबरों की सूची बताकर कहा जा रहा है कि उनकी जासूसी करने के लिए पेगासस का इस्तेमाल हुआ, वह वास्तविक में उनकी न है और न कभी थी। कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा कि पेरिस के गैर लाभकारी समूह ‘फॉरबिडन स्टोरीज’ ने जो 50 हजार नंबरों का डेटा हासिल किया है, वो उनका है ही नहीं। 

प्रवक्ता के मुताबिक, वह NSO की लिस्ट न है और न कभी थी। ये केवल मनगढ़ंत जानकारी है। ये नंबर कभी भी NSO कस्टमरों के निशाने में थे ही नहीं। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि बार-बार जो इस लिस्ट में शामिल नामों को लेकर कहा जा रहा है वह बिलकुल झूठ और फर्जी है। इसके साथ ही समूह ने ‘द वायर’ को संबंधित रिपोर्ट छापने पर मानहानि का मुकदमा दायर करने की धमकी दी।

अपडेट: शुरुआती यू-टर्न के बाद, एमनेस्टी ने एक बयान जारी करके रिवर्स यू-टर्न लेने की कोशिश की। बयान में गजब का खेला दिखाया है। एमनेस्टी ने दोहराया कि जासूसी हुई है। लेकिन जो मूल मुद्दा था, उसमें उलझ गए और मीडिया को भी उलझाया – वामपंथी तो लहालोट हो लिए… उलझाया क्योंकि एमनेस्टी ने बयान में यह नहीं बताया कि उनकी कथित सूची NSO से ही लीक हुई थी या नहीं… और यही पूरे फसाद की जड़ है।