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वादा किए थे गरीबों का किराया दोगे… कब दोगे? नहीं दोगे तो कारण बताओ: केजरीवाल सरकार से दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल सरकार को कोरोना महामारी के दौरान गरीब किराएदारों के किराए भुगतान के वादे पर 6 सप्ताह में फैसला लेने को कहा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार (22 जुलाई, 2021) को कहा कि नागरिकों से किसी मुख्यमंत्री का वादा स्पष्ट रूप से ‘लागू करने योग्य होता है।’ इसी के साथ ही कोर्ट ने AAP सरकार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के इस वादे पर फैसला करने का निर्देश दिया कि कोविड-19 महामारी के दौरान यदि कोई गरीब किराएदार किराए का भुगतान करने में असमर्थ है तो सरकार उसका भुगतान करेगी।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने एक आदेश में कहा, “इस अदालत की राय है कि सीएम द्वारा दिया गया वादा/आश्वासन/प्रतिनिधि स्पष्ट रूप से लागू करने योग्य वादे के बराबर है, जिसके कार्यान्वयन पर सरकार द्वारा विचार किया जाना चाहिए। यह आवश्यक है कि शासन करने वालों द्वारा नागरिकों से किया गया वादा बिना किसी वैध और उचित कारणों के नहीं टूटे।” 

कोर्ट ने कहा, “सीएम द्वारा दिए गए आश्वासन पर सरकार को विचार करना होगा और इसे लागू करना है या नहीं, यह फैसला लेना है।” कोर्ट ने दिल्ली सरकार को सीएम द्वारा दिए गए आश्वासन को पूरा करने के लिए नीति बनाने के लिए कदम उठाने और सीएम के प्रस्ताव को लागू नहीं करने का फैसला करने पर कारण बताने का आदेश दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है कि केजरीवाल द्वारा दिया गया आश्वासन कि सरकार किराए का भुगतान करेगी, चुनाव के दौरान का राजनीतिक वादा नहीं था। कोर्ट ने कहा, ”यह आश्वासन एक राजनीतिक वादा नहीं है। यह चुनावी रैली में नहीं कहा गया था। यह सीएम द्वारा दिया गया एक बयान है।”

यह फैसला दिहाड़ी मजदूरों एवं श्रमिकों की एक याचिका पर आया, जिसमें पिछले साल 29 मार्च को केजरीवाल द्वारा किए गए उस वादे को लागू करवाने का अनुरोध किया गया कि केजरीवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मकान मालिकों से निवेदन किया था कि जो गरीब हैं, उनसे किराया अभी नहीं लें। इसके साथ ही यह भी वादा किया था कि अगर कोई भी किराएदार किराया नहीं चुका पाता है तो फिर सरकार उसका किराया चुकाएगी।

दिल्ली सरकार को 6 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश देते हुए, कोर्ट ने उन लोगों के हित को ध्यान में रखने के लिए कहा, जिन्हें सीएम द्वारा दिए गए बयान में लाभ मिलने की उम्मीद थी। कोर्ट ने इसके लिए नीति तैयार करने के लिए कहा है।

दैनिक भास्कर समूह के सिर्फ वित्तीय लेनदेन पर नजर, संपादकीय से जुड़े फैसले लेने का आरोप गलत: आयकर विभाग

आयकर विभाग ने टैक्स चोरी के आरोपों में मीडिया समूह दैनिक भास्कर के विभिन्न शहरों में स्थित परिसरों पर गुरुवार (22 जुला, 2021) को छापे मारे। ये छापेमारी भोपाल, जयपुर, अहमदाबाद और कुछ अन्य स्थानों पर की गई है।

इस छापेमारी के बाद दैनिक भास्कर के एडिटर ओम गौड़ का एक इंटरव्यू वायरल हो रहा है, जिसमें वो कह रहे हैं कि आईटी विभाग ने उन्हें उनका काम करने से रोका। गौड़ कहते हैं, “वो आए और बैठ गए। उन्होंने खबर पब्लिश करने से पहले दिखाने के लिए कहा। उन्होंने स्टोरी देखी, बदलाव करने के लिए कहा और उसके बाद ही पब्लिश की गई।”

वीडियो वायरल होने के बाद आयकर विभाग ने सिलसिलेवार ट्वीट करते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उनके अधिकारियों ने समाचारों में ‘परिवर्तन का सुझाव दिया’। हालाँकि उन्होंने अपने ट्वीट में किसी भी मीडिया समूह (दैनिक भास्कर का भी नहीं) का नाम नहीं लिया।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “कुछ मीडिया सेक्शंस की तरफ से ये आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक पब्लिकेशन के दफ्तरों में सर्च के दौरान IT के अफसरों ने खबरों में बदलाव करने के लिए कहा और एडिटोरियल से जुड़े फैसले खुद लेने लगे। ये आरोप बिल्कुल झूठे हैं और आईटी विभाग द्वारा इसका स्पष्ट रूप से खंडन किया जाता है।”

ट्वीट में आगे कहा गया, विभाग के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए जाँच टीम ने सिर्फ वित्तीय दस्तावेजों और लेन-देन की पड़ताल की है।”

आयकर विभाग ने ट्वीट में मीडिया समूह के राष्ट्रीय संपादकों द्वारा कुछ समाचार चैनलों को दिए गए साक्षात्कार का भी जिक्र किया। विभाग ने कहा, ‘‘मीडिया को दिए साक्षात्कार के मुताबिक ओम गौड़ लखनऊ में हैं। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया कि लखनऊ कार्यालय पर छापेमारी ही नहीं की गई है, ओम गौड़ से सवाल-जवाब भी नहीं किए गए हैं। जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे निराधार हैं और प्रायोजित लग रहे हैं।”

गौरतलब है कि दिल्ली और मुंबई की आयकर विभाग की विभिन्न टीमों द्वारा गुरुवार (22 जुलाई 2021) को तड़के 4:30 बजे दैनिक भास्कर के भोपाल, इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद और महाराष्ट्र में स्थित 40 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई। मीडिया समूह द्वारा टैक्स चोरी की सूचना मिलने पर आयकर विभाग ने यह कार्रवाई की।

हालाँकि टैक्स से संबंधित अनियमितता के मामले में छापामारी होने पर एक बार फिर से वही ‘प्रेस की आजादी पर कायरतापूर्ण हमला’ और ‘आपातकाल’ का रोना शुरू हो गया। कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सूरजेवाला और लिबरल मीडियाकर्मी रोहिणी सिंह ने आयकर विभाग की कार्रवाई को सरकार की कायरतापूर्ण कार्रवाई बताया।

वहीं मीडिया समूहों ‘दैनिक भास्कर’ और ‘भारत समाचार’ पर आयकर के छापों को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों के बीच सरकार ने गुरुवार को कहा कि एजेंसियाँ अपना काम करती हैं और ‘इनमें हमारा कोई हस्तक्षेप नहीं होता।’ सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने इस बारे में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में यह बात कही। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए। कई बार जानकारी के अभाव में भी बहुत सारे विषय ऐसे आते हैं जो सत्य से परे होते हैं।

अपनी साली शमिता शेट्टी को लेकर फिल्म बनाने वाले थे राज कुंद्रा, नए App से करते लॉन्च: महिला ‘डायरेक्टर’ का खुलासा

अश्लील फिल्मों के मामले में गिरफ्तार राज कुंद्रा के बारे में एक बाद एक कई खुलासे हो रहे हैं। एक तरफ जहाँ राज कुंद्रा पुलिस जाँच में सहयोग नहीं दे रहें हैं, वहीं बाहर राज कुंद्रा को लेकर कई लोग बयान दे चुके हैं। ऐसे में एक्ट्रेस गहना वशिष्ठ ने राज कुंद्रा को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं। बता दें कि गहना खुद ऐसे ही मामले में जेल से जमानत पर छूटकर बाहर आई हैं। 

नवभारत टाइम्स से खास बात करते हुए गहना वशिष्ठ ने बताया कि राज एक नया ऐप लाने जा रहे थे, जिसमें वो अपनी साली और शिल्पा शेट्टी की बहन शमिता शेट्टी को लेकर फिल्म बनाने वाले थे। इस फिल्म को गहना डायरेक्ट करने वाली थी।

गहना ने अपने इंटरव्यू में बताया कि जेल जाने से पहले वो राज कुंद्रा से मिली थीं। जहाँ उन्होंने बताया था कि वो ‘बॉलीफेम’ नाम से एक ऐप लॉन्च करने जा रहे हैं। इस ऐप पर वो रियलिटी शो, चैट शो, म्यूजिक वीडियो, कॉमेडी शो और फिल्में लाने की प्लानिंग कर रहे थे। इन फिल्मों में कोई बोल्ड सीन्स नहीं होने वाले थे।

गहना ने कहा, “इस दौरान हम लोगों ने स्क्रिप्ट पर चर्चा की और एक स्क्रिप्ट शमिता शेट्टी तो दूसरी स्क्रिप्ट पर सई ताम्हनकर को कास्ट करने के बारे में सोच रहे थे। मैं गिरफ्तार होने से पहले 3-4 दिन पहले इनके शूट के बारे में सोच रही थी। मैं इनकी फिल्मों को डायरेक्ट करने वाली थी।”

एक्ट्रेस ने आगे कहा कि वह शमिता शेट्टी से कभी नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि वह जानती थीं कि उनका काम केवल फिल्म का निर्देशन करना था और उन्हें फिल्म के लिए ‘शमिता शेट्टी की फीस या शर्तों’ के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

इसके साथ ही अपने इस इंटरव्यू में गहना ने कंगना रनौत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कंगना जिस थाली में खाती हैं, उसी में छेद करती हैं। कंगना रनौत को महेश भट्ट ने ब्रेक दिया और वह आज उन्हीं पर ऊँगली उठा रही हैं। वहीं गहना वशिष्ठ ने पूनम पांडे और शर्लिन चोपड़ा पर भी निशाना साधा। उन्‍होंने कहा कि पॉर्नोग्राफी का केस तो इन्‍हीं दोनों पर सबसे पहले होना चाहिए।

बता दें कि अभिनेत्री-मॉडल पूनम पांडे ने दावा किया कि बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी कुंद्रा के पति राज कुंद्रा ने 2019 में एक अनुबंध पर असहमति के कारण उनका नंबर लीक कर दिया था। पूनम ने यह भी बयान दिया कि असहमति के बाद उनका नंबर और कुछ तस्वीरें लीक हुई थीं। 

गहना ने इससे पहले राज कुंद्रा का समर्थन करते हुए कहा था कि जिन वीडियोज पर विवाद हो रहा है, वो नॉर्मल वीडियोज थीं, जैसे एकता कपूर बनाती हैं। उन्होंने कहा था, “मुझे राज के अरेस्ट के बारे में पता चला, मैं सिर्फ यह कहना चाहूँगी कि कोई भी पॉर्न नहीं बना रहा है, कोई गंदे वीडियो नहीं बना रहा। नार्मल वीडियो थे जैसे एकता कपूर ‘गंदी बात’ बनाती हैं और ‘पार्च्ड’ न जाने कितनी फिल्में हैं। इन सारी सीरीज़ में उनसे कम बोल्डनेस है।”

गौरतलब है कि अश्लील कंटेंट शूट करने और प्रकाशित करने के आरोप में मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद कुंद्रा को 23 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। राज कुंद्रा के खिलाफ IPC और IT एक्ट के अलावा ‘स्त्री अशिष्ट रूपण प्रतिषेध अधिनियम (Indecent Representation of Women (Prohibition) Act)’ के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

मुंबई पुलिस ने कहा है कि राज कुंद्रा इस मामले के मुख्य साजिशकर्ता हैं, इसीलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है। जाँच अभी जारी है, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि उसके पास राज कुंद्रा के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। क्राइम ब्रांच ने पोर्न फ़िल्में बनाने वाले एक ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जो लड़कियों को फिल्मों में लॉन्च करने का लालच देकर उनसे अश्लील कंटेंट्स बनवाता है। इसके बाद इन वीडियोज को पोर्न साइट्स और कुछ मोबाइल एप्स पर रिलीज किया जाता है।

‘न्यूड ऑडिशन’ वाली हिरोइन को रेप-मौत की धमकी, कह रहे – ‘पोर्न देखते हो, इसीलिए बनाते हैं… राज कुंद्रा ने क्या गलत किया’

कारोबारी राज कुंद्रा की पोर्नोग्राफी केस में गिरफ्तारी के बाद उनकी पत्नी और अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी ने पहली बार सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर जेम्स थर्बर का कोट लिखा, “गुस्से में पीछे मुड़कर न देखें या डर से आगे न देखें, बल्कि जागरुक होकर देखें।” इस बीच राज कुंद्रा पर न्यूड ऑडिशेन के लिए दवाब बनाने का आरोप लगाने वाली मॉडल सागरिका शोमा सुमन ने फोन पर धमकियाँ मिलने का आरोप लगाया है।

पहले बात राज कुंद्रा की पत्नी की। अपने पोस्ट में शिल्पा ने राज कुंद्रा की गिरफ्तारी के बाद इस चुनौतीपूर्ण समय को लेकर बात की। किताब के पन्ने की तस्वीर को अभिनेत्री ने शेयर किया, जिसमें कहा गया है, “जो निराशाएँ हमने महसूस की हैं, जो दुर्भाग्य से सहा है और जिन्होंने हमें चोट पहुँचाई है, हम गुस्से में उनकी तरफ मुड़कर देखते हैं। हम डर के कारण उन संभावनाओं की ओर देखते हैं कि कहीं नौकरी न चली जाए या किसी बीमारी अथवा किसी अपने की मौत न देखनी पड़े।”

पोस्ट में आगे लिखा है कि अभी हमें गुस्से में नहीं बल्कि सही तरीके से यह सोचना है कि क्या है औऱ क्या हो रहा है। आगे लिखा गया, “यह जानकर मैं गहरी साँस लेता हूँ कि मैं जिंदा रहने के लिए भाग्यशाली हूँ। मैंने पहले भी चुनौतियों को सहा है औऱ भविष्य में भी चुनौतियों का सामना करूँगा। आज मुझे जीवन से कोई डिगा नहीं सकता है।”

बहरहाल शिल्पा शेट्टी की पोस्ट से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पति के जेल जाने के बाद उपजे संकट के समय में वो खुद को संभालने की कोशिश कर रही हैं।

मॉडल शोना ने धमकी मिलने का लगाया आरोप

राज कुंद्रा पर न्यूड ऑडिशन देने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाने वाली मॉडल सागिरका शोना सुमन ने अब जान से मारने और रेप की धमकी भरे कॉल्स आने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के मुताबिक सागिरका ने कहा, “मैं बहुत परेशान हूँ। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कॉल आ रहे हैं। वे मुझे जान से मारने औऱ रेप की धमकी दे रहे हैं। नंबर बदल कर पूछा जा रहा है कि राज कुंद्रा ने गलत क्या किया है? वो लोग मुझ पर उनका व्यापार बंद कराने का आरोप लगा रहे हैं। वो लोग कह रहे हैं कि तुम पोर्न देखते हो, इसीलिए हम बनाते हैं।”

गौरतलब है कि पोर्न फिल्में बनाकर उन्हें हॉटशॉट्स ऐप पर अपलोड करने के मामले में राज कुंद्रा को मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया है। इसी मामले में मॉडल सागिरका शोना सुमन ने कुंद्रा पर वेब सीरीज के बहाने न्यूड ऑडिशन के लिए दवाब बनाने का आरोप लगाया था।

लेपाक्षी मंदिर: जमीन से आधा इंच ऊपर हवा में लटका हुआ ‘हैंगिंग पिलर’, अंग्रेज इंजीनियर भी जिसका नहीं जान पाए रहस्य

भारत ऐसे महान मंदिरों की भूमि है, जो अनूठी वास्तुकला और पौराणिक इतिहास के लिए जाने जाते हैं। इन मंदिरों में ऐतिहासिक तथ्यों के अलावा कोई न कोई ऐसे रहस्य जरूर होते हैं, जो इन्हें बाकी मंदिरों से अलग बनाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में स्थित है, सुप्रसिद्ध श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर, जिसे लेपाक्षी मंदिर भी कहा जाता है। भगवान शिव, भगवान विष्णु और वीरभद्र को समर्पित लेपाक्षी मंदिर सदियों से ऐसे रहस्यों से परिपूर्ण रहा, जिन्हें आज भी सुलझाया नहीं जा सका है।

मंदिर का इतिहास

मंदिर के निर्माण के बारे में दो मान्यताएँ हैं। पहली मान्यता यह है कि मंदिर का निर्माण अगस्त्य ऋषि ने करवाया था और मंदिर का इतिहास भी रामयणकालीन है। कहा जाता है कि जब लंका नरेश रावण, माता सीता का अपहरण करके ले जा रहा था, तब पक्षीराज जटायु ने माता सीता की रक्षा करने के लिए इसी स्थान पर युद्ध किया था। रावण के प्रहार से जटायु घायल होकर यहीं गिरे थे और बाद में माता सीता की खोज में आए श्री राम और अनुज लक्ष्मण से इसी स्थान पर मिले। यहाँ भगवान राम ने करुणा भाव से जटायु को अपने गले से लगा लिया था। उसी समय से इस स्थान के नाम ‘लेपाक्षी’ का प्रादुर्भाव हुआ।

हालाँकि वर्तमान दृश्य मंदिर के निर्माण के बारे में प्रारम्भिक प्रमाण सन् 1533 के दौरान विजयनगर साम्राज्य से संबंधित हैं। मंदिर में स्थित शिलालेख से यह जानकारी मिलती है कि मंदिर का निर्माण विजयनगर साम्राज्य के राजा अच्युत देवराय के अधिकारियों विरूपन्ना और विरन्ना ने करवाया था। कूर्मसेलम पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर विजयनगर साम्राज्य की मुराल वास्तुकला का बेहतरीन उदाहरण है।

मंदिर की संरचना

लेपाक्षी का यह वीरभद्र स्वामी मंदिर दो बाड़ों के अंदर स्थित है। पहले बाड़े में प्रवेश के लिए तीन द्वार हैं। मुख्य द्वार पर एक शानदार गोपुरम का निर्माण किया गया है। उत्तरमुखी मुख्य मंदिर दूसरे बाड़े के केंद्र में स्थित है। मंदिर में गर्भगृह, अंतराल, प्रदक्षिणा मार्ग, मुखमंडप और कई स्तंभों वाला एक बरामदा है। मुखमंडप के समकोण पर एक पूर्व मुखी भगवान विष्णु को समर्पित मंदिर है। भगवान विष्णु के मंदिर के ठीक सामने भगवान शिव को समर्पित एक दूसरा मंदिर है, जिन्हें पाप विनाशेश्वर के नाम से जाना जाता है। इनके साथ ही एक तीसरा मंदिर भी है, जो पार्वती तीर्थ कहलाता है।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान वीरभद्र विराजमान हैं। वीरभद्र, भगवान शिव का क्रोधी स्वरूप माने जाते हैं, जो राजा दक्ष के यज्ञ के समय माता सती द्वारा आत्मदाह किए जाने के बाद अवतरित हुए थे। गर्भगृह और अंतराल से जुड़े हुए तीन तीर्थ हैं, जो रामलिंग तीर्थ, भद्रकाली तीर्थ और हनुमलिंग तीर्थ कहे जाते हैं और तीनों ही पूर्वमुखी हैं। इसके अलावा मुख मंडप के उत्तरी भाग में नवग्रहों को समर्पित वेदी भी स्थित है।

मंदिर का मुख्य आकर्षण मंदिर का महामंडप है। यह महामंडप कई स्तंभों से मिलकर बना हुआ है, जिसमें मानव आकार के तुंबुरा, ब्रह्मा, दत्तात्रेय, नारद, रंभा, पद्मिनी और नटराज की मूर्तियाँ उत्कीर्णित की गई हैं। मंदिर के महामंडप और मुखमंडप में बनाई गई पेंटिंग विजयनगर साम्राज्य की मुराल वास्तुकला का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण मानी जाती हैं।

मंदिर के रहस्य

दरअसल अपनी वास्तुकला और पौराणिक इतिहास के अलावा लेपाक्षी का यह मंदिर अपने उस एक स्तंभ के लिए जाना जाता है, जो जमीन से आधा इंच ऊपर है, अर्थात हवा में लटका हुआ है। अंग्रेजों के समय में भी कई बार इस मंदिर में स्थित इस ‘हैंगिंग पिलर’ का रहस्य जानने का प्रयत्न किया गया। अंग्रेज अधिकारियों ने इस स्तंभ को उसकी जगह से हटाने का प्रयास किया लेकिन असफल रहे। पहले तो ऐसा लगा कि इस स्तंभ का मंदिर की इमारत में कोई योगदान नहीं है लेकिन जब स्तंभ को हटाने का प्रयास किया गया तब मंदिर के दूसरे हिस्सों में भी विचलन देखने को मिला।

इसके अलावा लेपाक्षी के इस मंदिर में एक पैर का निशान भी स्थित है, जो त्रेतायुग का माना जाता है। कई मान्यताओं के अनुसार यह पैर का निशान भगवान राम का है जबकि कई लोगों का यह भी मानना है कि यह पैर का निशान माता सीता का है।

कैसे पहुँचें?

यह मंदिर लेपाक्षी गाँव में स्थित है, जो आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले का एक छोटा सा गाँव है। यहाँ से नजदीकी हवाईअड्डा बेंगलुरु में स्थित है, जो लगभग 120 किमी की दूरी पर है।

लेपाक्षी मंदिर का नजदीकी रेलवे स्टेशन हिंदूपुर में स्थित है, जिसकी दूरी मंदिर से लगभग 14 किमी है। इसके अलावा लेपाक्षी अनंतपुर, हिंदूपुर और बेंगलुरु से सड़क मार्ग से भी जुड़ा हुआ है। आंध्र प्रदेश के कई शहरों से लेपाक्षी के लिए परिवहन के साधन आसानी से उपलब्ध हैं।

माया-अखिलेश की परशुराम प्रतिमा-सम्मेलन वाह-वाह, रैना बोले तो थू-थू: यूपी के ब्राह्मणों से चुनावी बरस का ‘प्यार’ कितना खरा

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी सुरेश रैना की ‘मैं ब्राह्मण हूँ’ वाले बयान की जमकर आलोचना हो रही है। दिलचस्प यह है कि उत्तर प्रदेश से आने वाले रैना के इस बयान पर बवाल तब मचाया जा रहा है, जब राज्य में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर ‘ब्राह्मण’ वर्ग को लुभाने में अभी से विपक्ष जुट गया है। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा परशुराम प्रतिमा लगाने जा रही है तो मायावती की बसपा ब्राह्मण सम्मेलन करने वाली है। दिलचस्प यह भी है कि अखिलेश और मायावती के इस पॉलिटिकल स्टंट पर वाह-वाह करने वाली जमात ही रैना के बयान पर थू-थू करने में जुटी है।

उत्तर प्रदेश के विपक्षी दलों का ब्राह्मणों पर अचानक ‘प्यार’ उमड़ना उनकी वह सियासी ताकत है जो पिछले तीन चुनावों से राज्य में दिख रही है। बीते तीन चुनाव में जो पार्टी सबसे ज्यादा ब्राह्मण विधायक जितवाने में कामयाब रही है सरकार उसी की बनी है। तिलक, तराजू और तलवार, उसको मारो जूते चार जैसे नारे से ​शुरुआती सियासत करने वाली बसपा ने बाद में नारा दिया ब्राह्मण शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा और इस नारे की बदौलत ही वह 2007 में अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में कामयाब रही।

पर असल सवाल यह है कि क्या ब्राह्मण विपक्ष के इस मौसमी प्यार के जाल में फँसेगा? उस पहले राज्य में ब्राह्मणों की राजनैतिक हैसियत पर नजर डालते हैं।

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की जनसंख्या 8-10 प्रतिशत बताई जाती है। कुछ लोग इससे अधिक भी बताते हैं और कुछ लोग इससे कम भी। भूमिहार या त्यागी वर्ग की संख्या मिला दें तो यह 10-12 प्रतिशत हो जाती है। यह ऐसा प्रतिशत है, जो किसी की सरकार को बनाने और बिगाड़ने का दमखम रखता है। ऐसे में ब्राह्मण जनसंख्या अगर किसी दल से छिटक जाए तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है।

यही कारण है कि एक बार फिर ब्राह्मणों को साधने में लगे हैं। पार्टी महासचिव सतीशचंद्र मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के शॉर्प शूटर अमर दूबे की पत्नी खुशी दूबे का केस लड़ने की बात कह खुद को ब्राह्मण समाज का रहनुमा और बसपा को ब्राह्मण हितैषी होने की कोशिश की है। अब वे 23 जुलाई को अयोध्या में ब्राह्मण सम्मेलन करने जा रहे हैं। वहीं, मनुवाद के नाम पर इस वर्ग को गाली देने वाले मुलायम यादव और उनके उत्तराधिकारी अखिलेश यादव अब परशुराम की मूर्ति बनाकर उन्हें अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रहे हैं।

वैसे राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए इसकी उम्मीद कम ही लगती है कि 2017 के विधानसभा चुनावों में जिस बीजेपी के टिकट पर 46 ब्राह्मण विधायक जीते थे, उससे यह वर्ग किनारा करेगा। साथ ही अतीत के वे अनुभव भी इस वर्ग को ऐसा करने से रोकेंगे जो बताते हैं कि तमाम दावों के बावजूद सपा-बसपा सत्ता में आने पर उसे हाशिए में धकेल देती है।

वाह रे दैनिक भास्कर! तुम्हारा काम ‘पत्रकारिता’, इनकम टैक्स का काम ‘बदला’

टैक्स चोरी के आरोप दैनिक भास्कर के कई दफ्तरों पर आयकर विभाग का छापा पड़ने के बाद से सोशल मीडिया ‘स्वतंत्र भास्कर’ नाम का हैशटैग चलाया जा रहा है। इस हैशटैग के जरिए यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि यह कार्रवाई लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर चोट है। कथित निर्भीक पत्रकारिकता के कारण बदले की कार्रवाई हो रही है।

दैनिक भास्कर ने खुद भी इस हैशटैग से एक लेख लिखा है, “मैं स्वतंत्र हूँ क्योंकि मैं भास्कर हूँ… भास्कर में चलेगी पाठकों की मर्जी।” अपने कार्यालयों पर हुई रेड के बाद समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी गई है कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान देश के सामने सरकारी खामियों की असल तस्वीर उजागर करने की वजह से आईटी विभाग ने छापा मारा है

सोशल मीडिया पर चल रहे हैशटैग और दैनिक भास्कर के दावे से इतर यदि देखें को समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया है कि मीडिया समूह के कार्यालयों में आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत तलाशी ली जा रही है। इस दौरान मुंबई, दिल्ली, भोपाल, इंदौर, जयपुर, कोरबा, नोएडा और अहमदाबाद में फैले आवासीय और व्यावसायिक परिसरों से युक्त कुल 32 परिसरों को कवर किया गया है।

सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि समूह विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ा है, जिनमें मीडिया, बिजली, कपड़ा और रियल एस्टेट प्रमुख क्षेत्र हैं। इसका सालाना टर्नओवर 6000 करोड़ रुपए से अधिक का है। समूह में होल्डिंग और सहायक कंपनियों सहित 100 से अधिक कंपनियाँ हैं। इस समूह से जुड़े तीन मुख्य नाम सुधीर अग्रवाल, पवन अग्रवाल और गिरीश अग्रवाल हैं।

समाचार एजेंसी के ट्वीट

सूत्र बताते हैं कि फर्जी खर्च और नकली संस्थाओं के नाम पर खरीद का दावा करके समूह द्वारा भारी कर चोरी की गई। इस उद्देश्य के लिए समूह ने अपने कर्मचारियों के साथ शेयरधारकों और निदेशकों के रूप में कई पेपर कंपनियाँ बनाई। सूत्र ये भी बताते हैं कि पैसों का इस्तेमाल इस तरह होता कि वो दोबारा से या तो निजी या फिर व्यापार निवेश में शेयर प्रीमियम या फिर विदेशी निवेश के तौर पर पहुँच जाते थे। समूह से जुड़े लोगों का नाम पनामा लीक पेपर मामले में भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक इन्हीं सब विभागीय डेटाबेस बैंकिंग पूछताछ और अन्य कई पूछताछ का विश्लेषण करने के बाद तलाशी की जा रही है।

सूत्रों के हवाले से कही जा रही बातें वह तथ्य हैं, जो इस बात को साबित करती हैं कि विभाग के पास अपनी कार्रवाई के लिए आधार है। ऐसे में इसके लिए सरकार पर जो ऊँगली उठाई जा रही है और विपक्ष जो अपने सवाल दाग रहा है उन्हें लेकर सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने जवाब दिया है। उन्होंने कहा है कि एजेंसियाँ अपना काम करती हैं। इसमें सरकार की ओर से कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाता है।

बावजूद इसके दैनिक भास्कर के कार्यालयों पर छापा पड़ने के बाद विपक्षी नेता समेत कई गिरोह के लोग इसे लेकर मोदी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं और दैनिक भास्कर इसे ऐसे दर्शा रहा है कि किसी विसंगति के कारण ये छापा नहीं पड़ा, बल्कि उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता के कारण ऐसा हुआ है। अपने आर्टिकल में दैनिक भास्कर ने बाकायदा अपनी उन रिपोर्ट्स के स्क्रीनशॉट लगाए हैं जो कोरोना समय में सरकार पर ऊँगली उठा रही थी। खबरें जाहिर हैं कुछ समय पुरानी हैं और आलोचनात्मक भी। लेकिन इनका इस छापे को लेकर क्या सरोकार है ये समझ से परे की बात है।

आईटी विभाग की कार्रवाई को लेकर जो बातें कही जा रही हैं यदि उनमें से कुछ झूठ है या निराधार है तो शायद यहाँ पर वो बताना ज्यादा महत्वपूर्ण है कि कैसे ये कार्रवाई दैनिक भास्कर समूह पर ‘बदले’ का हिस्सा है और उनके कर्मचारियों को दफ्तर में बंधक बना कर रख लिया गया। अपनी कोरोना की रिपोर्टिंग पर विस्तृत जानकारी देना और फिर पाठकों में एजेंसी की कार्रवाई को गलत दिखा कर ये संप्रेषित करना कि आईटी का छापा सरकार विरोधी रिपोर्टिंग के कारण हुआ बिलकुल भ्रामक है और विक्टिम कार्ड के अलावा कुछ नहीं है। पाखंडी मीडिया की सबसे बड़ी ताकत यही है कि यदि रिपोर्टिंग पर बात आए तो निष्पक्ष पत्रकारिता का हवाला दे दो और यदि संस्थान पर छापा पड़े तो उसका ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ दो।

मुल्लों को ‘तांत्रिक’ लिखकर समुदाय विशेष के अपराधों पर पर्दा डालने वाली मीडिया, अखबारों और लेखों में कानून और संविधान की पाठ पढ़ाने वाली मीडिया का इससे बड़ा पाखंड और क्या हो सकता है कि जब वह खुद कानून के दायरे में आती है तो संविधान, अदालत सारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को धता बता विक्टिम कार्ड खेलने लगती है।

बाढ़ का बुलेटिन पढ़ता हूँ… बिहार को डूबोने वाली नदियों को, पानी को हजार लानतें भेजता हूँ

नमस्कार,
मैं लानत कुमार झा

आज बात बिहार की। वहाँ के बाढ़ की। मीडिया को तो आपके जीने-मरने से मतलब नहीं। उसे पेगासस का झूठा प्रलाप भाता है। राकेश टिकैत के बड़बोले बोल पर उसका मन नाचता है। पर मैं गोदी मीडिया का पत्रकार हूँ। व्हाट्सप्प (Whatsapp) यूनिवर्सिटी से ज्ञान पाता हूँ। इसलिए हाजिर हूँ बिहार और बाढ़ की बात लेकर। वैसे चुनावी मौसम होता तो हर ओर इसका ही शोर होता। मैग्सेसे, गोयनका, पुलित्जर… सारे के सारे कुमार इसकी ही बात करते। सबसे तेज वीरांगना माइक लेकर तसला पर बैठ कवर करती।

इस बरस मौसम का मिजाज बदला-बदला सा लगता है। इसलिए लानतों की बरसात करता हूँ। सुशासन की सरकार पर नहीं। न बीते जंगलराज पर। न कॉन्ग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों पर। ये सारे के सारे तो निर्दोष हैं। निरीह हैं। लानतों की हकदार वे नदियाँ हैं जो उफनती हैं। वह पानी है जो खेत-खलिहान से लेकर घर-द्वार में घुसती है। आगे बढ़ने से पहले नीचे के ट्वीट का वीडियो देखिए;

वीडियो दरभंगा जिले के महिसौत गाँव का है। बाढ़ की वजह से दाह संस्कार के लिए सूखी जमीन नहीं बची है। ऐसे में शिवनी यादव के दाह संस्कार के लिए उनके परिजनों ने मचान बनाया है। उस पर मिट्टी की वह कोठी रखी है जिसमें कल तक वे अनाज रखते थे। कोठी में शिवनी यादव का शव रखा गया। फिर लकड़ी डाली गई। परिजनों की मौजूदगी में बेटे रामप्रताप ने नाव से मुखाग्नि दी। बाढ़ में डूबे गाँव को छोड़ शिवनी परलोक चले गए।

लेकिन यह जीवटता भी कुछ को नहीं भाई। सरकार और व्यवस्था को लगे कोसने। इस मामले में लानत की हकदार वह मोबाइल है, जिससे तस्वीर खींची गई। वह कैमरा है जिससे वीडियो बनाई गई। दोनों को हजार लानतें भेजता हूँ ताकि उन्हें पता चले कि यह कोई नई बात नहीं है। हर साल इस मौसम में कई ऐसे ही परलोक की यात्रा करते हैं। इसमें नया क्या? खबर क्या?

अब आगे बढ़ते हैं। खबर है कि कोसी, भूतही बलान और कमला एक अल्पविराम के बाद फिर उफान मारने लगी हैं। हजारों प्रभावित हैं। इनको भी लानत भेजता हूँ। नदियों को उफनने का इतना शौक ही क्यों है? कई नदियाँ मर गईं। दिल्ली की यमुना नाला बन गई। ‘रन’ में तो विजय बोला भी था- साला छोटी गंगा बोल नाले में कूदा दिया। तो हे बिहार की नदियों उफनने और बचे रहने का तुमको ही कौन सा चस्का है?

लानतें उन हजारों-लाखों लोगों को भी भेजता हूँ जो इस बाढ़ का रोना रोते हैं। क्या जरूरत है कि तुम्हें वहीं पड़े रहने की जहाँ हर साल बाढ़ आती है। तुमको भी सालाना नौटंकी करना है। वहीं रहोगे भी और हर साल कोसोगे भी। ये नहीं कहीं और निकल लें।

सरकार बेचारी करे क्या। हर साल तुम्हें बाढ़ से बचाने के नाम पर तटबंध तो मजबूत करती ही है। तो लानतें टूटने वाले तटबंध को भेजो। उसे हर साल मजबूत कर खुद का व्हाइट हाउस खड़ी करने वाली बाँहों को नहीं। जब तुम डूबते हो तो चूड़ा, तिरपाल भी सरकार बाँटती ही है। कुछ डूबकर मर जाते हो तो नाव लेकर मदद करने भी पहुँच जाती ही है। अब पानी में डूबे घर में साँप के काटने से कोई मर जाए तो सरकार क्या करे। तुम्हारी तरफ से लानत उस साँप को भेजता हूँ। लानत उस सड़क को भी, उस पुल को भी जो डूबती है, टूटती है। सरकार का काम था बनाना, उसने वह कर दिया। डूबना तो तुम्हारे नसीब का लिखा है। सो, लानत अपने नसीब को भेजो।

लानत उस पब्लिक को है जो हर साल डूबती है। डूबकर अपनी ही चुनी हुई सरकार, अपने ही चुने हुए प्रतिनिधि को गरियाती है और चुनावी बरस में फिर से उनको ही चुनती है। अरे बेगैरतों जब तुमने उन्हें दिल्ली-पटना में रहने के लिए चुना है तो वे बाढ़ में तुम्हारे डूबे गाँव के टूरिज्म पर क्यों आएँ?

बनना है तो गोपाल जी ठाकुर बनो। अशोक यादव बनो। सीखो इनसे आपदा में अवसर बनाना। पानी न हो तो मखाना कहाँ से आए? मखाना न हो तो मखाने की माला कैसे बने? माला न हो तो ‘महाराज’ सिंधिया के गले की शोभा कैसे बढ़े? जब शोभा न हो तो कैसी तुम्हारी संस्कृति? दुनिया में कौन तुम्हें पहचानेगा? इसलिए सबको भेजे लानतें वापस लेता हूँ। डूबे हुए लोगों को इकट्ठे सारे लानते भेजता हूँ। सुशासन के दर पर सलाम ठोकता हूँ।

गाँव बकरीद की कुर्बानी में व्यस्त, इधर खेत में भाई के साथ मिल बीवी का गला काट रहा था शब्बीर

जब पूरा गाँव कुर्बानी देकर बकरीद मनाने में व्यस्त था, तब एक शौहर ने बड़े भाई के साथ मिल अपनी बीवी की गला काटकर हत्या कर दी। मामला जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के चसाना थाने का है। इस मामले में पुलिस ने 20 घंटे के अंदर मोहम्मद शब्बीर और उसके बड़े भाई अब्दुल मजीद को गिरफ्तार कर लिया है।

रियासी के एसएसपी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि खुंदरधन निवासी मंजूर अहमद पुत्र मोहम्मद अब्दुल्ला ने पुलिस को बताया कि 22 वर्षीया उसकी बहन शमीम अख्तर की बेरहमी से उसके शौहर मोहम्मद शब्बीर ने हत्या कर दी है। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी।

दरअसल, शमीम अख्तर की शादी करीब तीन साल पहले मोहम्मद शब्बीर से हुई थी। शादी के कुछ दिन तक सब कुछ ठीक रहा है, लेकिन कुछ समय बाद दोनों के बीच अनबन शुरू हो गई। ये अनबन रिश्तों में खटास का कारण बन गई। रिश्ते बिगड़ने के बाद शब्बीर ने बीवी शमीम को उसके माता-पिता के घर भेज दिया।

मंजूर ने पुलिस को बताया कि बुधवार को जब शमीम खेत में मवेशी (जानवर) चरा रही थी, तभी उसका पति मोहम्मद शब्बीर अपने भाई अब्दुल मजीद के साथ आ धमका। इसके बाद अब्दुल और शब्बीर ने शमीम पकड़ कर धारदार हथियार से उसकी गर्दन काट दी, जिससे शमीम की मौके पर ही मौत हो गई।

सूचना मिलने के बाद पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू की। इस दौरान पुलिस ने पहाड़ी पर चार घंटे तक निगरानी करने के बाद एक आरोपी अब्दुल मजीद को गिरफ्तार कर लिया। मजीद खुंदरधन के जंगलों में भागना चाहता था और वहाँ से वह कश्मीर घाटी में जाना चाहता था। भागने से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

उससे पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि दूसरा आरोपी राजौरी जिले में है। उसके बाद पुलिस ने एक टीम तैयार की और उसकी गिरफ्तारी के लिए हरसंभव जगह पर छापेमारी की। मुगल रोड के माध्यम से कश्मीर घाटी में भागने से पहले ही पुलिस ने मोहम्मद शब्बीर को भी गिरफ्तार कर लिया।

गौरतलब है कि 21 जुलाई यानी बुधवार को बकरीद था और इस दौरान गाँव के लोग इसे मनाने में व्यस्त थे। इसी दौरान यह घटना घटी। बाद में जब गाँव के लोगों ने शमीम का खून से लथपथ शव खेतों में देखा तो परिजनों को सूचित किया।

घटना के बाद परिजनों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को परिजनों को सौंप दिया। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं, एसएसपी शैलेंद्र सिंह ने पुलिस टीम के प्रयासों की सराहना की।

काबुल फतह पहली सीढ़ी, तालिबान के निशाने पर कश्मीर और केरल: ड्रग्स के धंधे पर फल-फूल रहा आतंकवाद

पाकिस्तान का साथ पाकर जिस तरह तालिबान अफगानिस्तान में अपने पैर पसार रहा है उसे देख सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर कहीं न कहीं भारत पर पड़ सकता है। खुद पाकिस्तान के पत्रकार अमजद अयूब मिर्जा ने द स्टेट्समैन में लेख लिख कर इस बात का खुलासा किया है कि पाकिस्तान की सेना अफगानिस्तान में भड़की अराजकता का इस्तेमाल न केवल कश्मीर में बल्कि केरल में भी आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए कर सकती है।

अमजद बताते हैं कि इस जानकारी को अफगान के उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सलेह ने कन्फर्म किया है कि पाकिस्तान के समर्थन के बिना तालिबान उत्तरी अफगानिस्तान से देश के पूर्वी हिस्से में काबुल तक इतनी तेजी से नहीं बढ़ सकता था। यानी साफ है कि अफगानिस्तान में हो रही तबाही में पाकिस्तान महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है और इसी को देख सुरक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि उसका आगे का मकसद कश्मीर और केरल के मुसलमानों को भड़काने का है।

मिर्जा की रिपोर्ट से पता चलता है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी पहले की तरह दोबारा कश्मीर में अराजकता फैलाना चाहते हैं और इस बार उनके निशाने पर केरल भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान केरल में इस्लामी कट्टरपंथ फैलाकर स्थिति का फायदा लेना चाहता है ताकि भारत में आसानी से वह अपने मनसूबों को अंजाम दे सके। मिर्जा इस ओर भी इशारा करते हैं कि केरल में तालिबानी सोच को बढ़ावा मिलना कोई संयोग नहीं बल्कि सोची समझी साजिश है।

अफगानिस्तान में इस समय तालिबान जिस तरह अपना कब्जा कर रहा है उसके पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद के सैंकड़ों आतंकी हैं। वहाँ तालिबान देश के मुख्य हिस्सों पर अपना नियंत्रण कर रहा है और दूसरी ओर आतंकी संगठन के आतंकी उसके बल को मजबूत करके खुलेआम आतंक फैला रहे हैं।

दोनों आतंकी संगठनों के आतंकवादी कुनार, ननगरहर, हेलमंद और कंधार प्रांत में सक्रिय हैं। यहाँ वह अपनी आतंकी गतिविधियों को बिना किसी रुकावट के जारी रख सकते हैं। साथ ही साथ केरल और कश्मीर में कट्टर इस्लामियों का समर्थन पाकर यहाँ हमले भी करवा सकते हैं। मिर्जा अपनी रिपोर्ट में इस बात को भी उजागर करते हैं कि अफगानिस्तान से अच्छे संबंध होने के बावजूद भारत ने अब तक आधिकारिक रूप से वहाँ की सरकार को अपना समर्थन नहीं दिया है। उनके मुताबिक भारत को डर है कि यदि ऐसा हुआ तो तालिबान की हिंसा का अगला निशाना भारत बन सकता है।

तालिबान के प्रभाव के साथ बढ़ सकता है नार्को-आतंवाद

उल्लेखनीय है कि अफगानिस्तान में चल रही हलचल के बीच भारतीय खुफिया एजेंसी अलर्ट पर हैं। उन्हें डर है कि तालिबान की जड़ें मजबूत होने के साथ इसका असर नारकोटिक्स स्मगलिंग पर पड़ेगा। नारकोटिक्स विभाग के अधिकारियों का मानना ​​है कि केरल सहित भारत में हाई क्वालिटी ड्रग जैसे हेरोइन और कोकीन की बढ़ती बरामदगी इस बात का संकेत हैं कि यहाँ तालिबान का प्रभाव बढ़ रहा है। हाल की बात करें तो केरल में मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर हवाई अड्डों पर पकड़े गए ड्रग्स की सप्लाई अफगानिस्तान से ही की गई थी। एनसीबी के अधिकारियों का भी इस संबंध में कहना है कि अफगानिस्तान में दो दशकों से अधिक समय से विदेशी सैनिकों की मौजूदगी के बावजूद, तालिबान ने अपने वित्त पोषण के प्राथमिक स्रोत के रूप में अफीम की खेती को जारी रखा है।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में अफगानिस्तान से अपनी सेना को वापस बुलाने का निर्णय लिया। ऐसे में नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, एक्साइज एंड नारकोटिक्स (NACEN) के पूर्व महानिदेशक जी श्रीकुमार मेनन ने कहा, “अगले कुछ महीनों में विदेशी सैनिकों की पूरी तरह से वापसी के बाद और तालिबान द्वारा अफगानिस्तान पर नियंत्रण किए जाने के बाद नार्को-आतंकवाद में तेजी आएगी। स्थिति चिंताजनक है क्योंकि भारत की आंतरिक सुरक्षा को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।”

वह कहते हैं कि तालिबान की फंडिंग में ड्रग्स के कारोबार का बड़ा योगदान है। यदि वे विदेशी सैनिकों की वापसी के बाद सत्ता हासिल करते हैं, तो हथियार प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा जिसके लिए भारी धन की आवश्यकता होगी। इसके लिए वह अफीम की खेती को बढ़ाएँगे, जो अंततः भारत जैसे देशों को भेजी जाएगी। इससे मिलने वाले फंड का इस्तेमाल कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के लिए भी किया जाएगा। मेनन कहते हैं कि समुद्री मार्ग नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए सबसे अधिक संवेदनशील है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए ये असंभव है कि वो जो रोजाना समुद्र में जाने वाले जहाज को चेक करें। वह कहते हैं कि हमारे देश का समुद्र तट बहुत बड़ा है और चूंकि ड्रोन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, इसलिए उन्हें मादक पदार्थों की तस्करी के लिए इस्तेमाल करने के प्रयासों से इंकार नहीं किया जा सकता है।