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बिजनेस स्टैंडर्ड ने लद्दाख में भारत-चीन के बीच फिर से करवा दी झड़प, सेना ने खोली झूठ की पोल

भारतीय सेना ने बुधवार (जुलाई 14, 2021) को बयान जारी कर बिजनेस स्टैंडर्ड (Business Standard) की एक रिपोर्ट को निराधार बताया। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि पूर्वी लद्दाख में एक बार फिर भारतीय सेना और चीनी फौजियों के बीच झड़प हुई है।

उक्त मीडिया रिपोर्ट को फर्जी बताते हुए सेना ने कहा, “गलवान या किसी इलाके में दोनों ओर से कोई झड़प नहीं हुई है।” बयान में रिपोर्ट लिखने वाले पत्रकार की मंशा को दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए कहा गया कि खबर का तथ्यों से कोई वास्ता नहीं है। बयान में कहा गया है, “आर्टिकल गलतियों और फर्जी जानकारी से भरा हुआ है। रिपोर्ट में लिखी गई ये बात कि चीन के साथ समझौता तोड़ा गया, बिलकुल गलत और फर्जी है।”

बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित रिपोर्ट

भारतीय सेना के बयान में कहा गया है कि इस साल फरवरी में जिन इलाकों से सेना को हटाया गया था, उस पर कब्जा करने के लिए किसी भी पक्ष की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया। बयान में बताया गया कि दोनों पक्षों की ओर से शेष मुद्दों को हल करने के लिए बातचीत की जा रही हैऔर संबंधित क्षेत्रों में नियमित गश्त जारी है। जमीन पर स्थिति अभी भी शांत बनी हुई है। भारतीय सेना लगातार पीएलए की गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं। सेना के मुताबिक प्रकाशित लेख अपुष्ट तथ्यों पर आधारित है और इसका वह कड़ा खंडन करते हैं।

उल्लेखनीय है बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी अजय शुक्ला की रिपोर्ट में लिखा गया था कि पूर्वी लद्दाख में सीमा पर दोबारा झड़प हुई। उन्होंने सूत्रों के हवाले से कहा था कि दोनों पक्षों में कम से कम एक बार झड़प हुई है। लेख का दावा था कि इस बार भी झड़प की जगह वही है जहाँ पिछले साल दोनों पक्ष आमने-सामने आए थे।

लेख में सैन्य स्रोतों का हवाला देते हुए दावा किया गया था कि चीन ने कम से कम एक या संभवत: 2 एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल के रेजीमेंट को तैनात किया है जो वायुशक्ति में भारत की श्रेष्ठ हवाई ताकत को नष्ट कर देगा।

राहुला गाँधी ने शेयर की थी

भारतीय सेना द्वारा पूरी तरह से खारिज कर दिए गए इस लेख को कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी साझा किया था। गाँधी ने एक ट्वीट में बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित लेख की तस्वीर साझा की और कहा कि भारत सरकार की विदेश और रक्षा नीति ने देश को कमजोर किया है।

हैरानी की बात ये है कि भारतीय सेना द्वारा लेख में किए गए दावों का कड़ा खंडन करने के बाद भी, गाँधी ने लेख को अपनी वॉल पर सजे रहने दिया है। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने बिना तथ्यों को जाने झूठ फैलाने में अपना योगदान दिया। इससे पहले राहुल गाँधी राफेल सौदे में भारत सरकार पर बेबुनियाद आरोप लगा चुके हैं, वो भी तब जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्लीनचिट दे चुकी है।

शिवसेना का नेता, ₹8 करोड़ की रोल्स रॉयस का मालिक; 34840 रुपए की बिजली चोरी का केस

हाल ही में महाराष्ट्र में 8 करोड़ रुपए की रोल्स रॉयस (Rolls Royce) कार खरीदने वाले शिवसेना नेता और कल्याण के नामचीन व्यवसायी संजय गायकवाड़ पर लगभग 35 हजार रुपए की बिजली चोरी का मामला दर्ज किया गया। हालाँकि, एफआईआर दर्ज होने के बाद नेता ने पूरे बिल का भुगतान कर दिया है।

महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (MSEDCL) के अधिकारियों की शिकायत पर कल्याण के कोलसेवाड़ी पुलिस स्टेशन में संजय गायकवाड़ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, MSEDCL के अधिकारियों को मार्च में कल्याण ईस्ट कोलसेवाड़ी स्थित कंस्ट्रक्शन साइट पर गायकवाड़ द्वारा की जा रही बिजली चोरी के बारे में पता चला था। जब गायकवाड़ ने 3 महीने बाद भी जुर्माना राशि के साथ बिल का भुगतान नहीं किया, तो एमएसईडीसीएल के अधिकारियों ने 30 जून 2021 को बिजली चोरी के आरोप में उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी की ओर से जारी एक बयान में सोमवार को कहा गया कि 12 जुलाई को गायकवाड़ ने 49,840 रुपए का भुगतान किया, जिसमें 34,840 रुपए बिजली चोरी के थे और ‘सेटलमेंट’ राशि के रूप में 15,000 रुपए दिए गए।

इसी बीच शिवसेना के पदाधिकारी ने दावा किया कि एमएसईडीसीएल द्वारा उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। गायकवाड़ का कहना है कि वह सरकार को करोड़ों रुपए का टैक्स भरते हैं। उनके खिलाफ बिजली चोरी जैसा मामला बेहद जल्दबाजी में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि बिजली का जो बिल बकाया था, वह भी उन्होंने भर दिया है। संजय गायकवाड़ ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच करने की माँग की है।

‘राज्यों को एडवांस में दे दी सारी जानकारी’: वैक्सीन की उपलब्धता पर बोले स्वास्थ्य मंत्री, भीड़भाड़ को लेकर गंभीर हुआ केंद्र

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने कोरोना वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया है। उन्होंने विभिन्न राज्य सरकारों और नेताओं के बयान एवं पत्रों से मिली जानकारियों का जवाब दिया। लेकिन, साथ ही चेताया कि विश्लेषण से इस स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है और निरर्थक बयान सिर्फ लोगों में घबराहट पैदा करने के लिए किए जा रहे हैं।

वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने दिया आरोपों का जवाब

मनसुख मांडविया ने कहा कि सरकारी और निजी अस्पतालों के जरिए टीकाकरण हो सके, इसलिए जून महीने में 11.46 करोड़ वैक्सीन की डोज राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को उपलब्ध कराए गए थे। साथ ही जानकारी दी कि जुलाई के महीने में इस उपलब्धता को बढ़ाकर 13.50 करोड़ किया गया है। उन्होंने बताया कि जुलाई में राज्यों में वैक्सीन के कितने डोज उपलब्ध कराई जाएगी, इसकी जानकारी केंद्र सरकार ने राज्यों को 19 जून, 2021 को ही दे दी थी।

बकौल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, इसके बाद 27 जून व 13 जुलाई को केंद्र की ओर से राज्यों को जुलाई के पहले व दूसरे सप्ताह के लिए उन्हें हर दिन की वैक्सीन उपलब्धता की जानकारी बैच के हिसाब से एडवांस में ही दी गई। उन्होंने कहा कि राज्यों को यह अच्छी तरह से पता है कि उन्हें कब और कितनी मात्रा में वैक्सीन डोज मिलेंगे। साथ ही समझाया कि केंद्र सरकार ने ऐसा इसलिए किया है ताकि राज्य सरकारें जिला स्तर तक वैक्सीनेशन का काम सही योजना बनाकर कर सकें और लोगों को कोई परेशानी नहीं हो।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने ट्विटर पर रखी अपनी बात

मनसुख मांडविया ने आगे कहा, “अगर केंद्र पहले से ही अपनी तरफ से ये जानकारियाँ एडवांस में दे रही है और इसके बावजूद भी हमें कुप्रबंधन और वैक्सीन लेने वालों की लंबी कतारें दिख रही हैं तो यह बिल्कुल स्पष्ट है कि समस्या क्या है और इसकी वजह कौन है। मीडिया में भ्रम व चिंता पैदा करने वाले बयान देने वाले नेताओ को इस बात पर आत्म-निरीक्षण करने की जरूरत है क्या उन्होंने शासन प्रक्रिया व इससे सबंधित जानकारियों से इतनी दूरी बना ली है कि वैक्सीन आपूर्ति के संदर्भ में पहले से ही दी जा रही जानकारियों का उन्हें कोई अता-पता नहीं है?”

भीड़भाड़ वाले इलाकों में कोरोना दिशानिर्देशों के उल्लंघन पर केंद्र गंभीर

इधर केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिख कर निर्देश दिया है कि वो भीड़भाड़ वाले इलाकों में कोरोना दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन कराएँ। उन्होंने लिखा है कि अब जब सब कुछ लॉकडाउन के बाद खुल रहा है, ये प्रक्रिया ठीक तरह से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के कई इलाकों में हिल स्टेशंस से लेकर ट्रांसपोर्ट तक में लोगों की भीड़ काफी बढ़ गई है, जिसे नियंत्रित किए जाने की ज़रूरत है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि ये भीड़ न तो सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कर रही है और न ही लोग मास्क लगाने को लेकर गंभीर हैं। उन्होंने याद दिलाया कि अभी तक कोरोना की दूसरी लहर ख़त्म नहीं हुई है, ऐसे में ‘दवाई भी और कड़ाई भी’ का पालन करते हुए कोरोना दिशानिर्देशों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। अधिकारियों को कहा गया है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में नियमों का पालन नहीं कराया गया तो कार्रवाई हो सकती है।

एक दिन पहले उत्तर-पूर्व के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि ये सही है कि कोरोना की वजह से पर्यटन, व्यापार-कारोबार बहुत प्रभावित हुआ है। लेकिन, साथ ही उन्होंने चेताया भी था, “आज मैं बहुत जोर देकर कहूँगा कि हिल स्टेशंस में, मार्केट्स में बिना मास्क पहने, भारी भीड़ का उमड़ना ठीक नहीं।” देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों से पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई तस्वीरें सामने आई हैं, जहाँ लोगों को भारी भीड़ जुटाते हुए देखा गया।

महंत यति नरसिंहानंद का दावा उनकी हत्या के लिए आए 3 मुस्लिमों सहित 4 विदेशी गिरफ्तार, यूपी पुलिस ने नकारा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित डासना देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद की हत्या की कोशिश की गई है। उन्होंने मंगलवार (13 जुलाई 2021) को ट्विटर पर दावा किया कि उनकी हत्या करने के लिए 4 विदेशी आए थे, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसमें से 3 मुस्लिम भी शामिल थे।

मंगलवार (13 जुलाई 2021) को स्वामी यति नरसिंहानंद एक ट्वीट में दावा किया कि बुलंदशहर पुलिस की सतर्कता के कारण, विदेशी राष्ट्रीयता के साथ एक व्यक्ति और 3 मुस्लिम पुरुषों को गिरफ्तार किया गया है। ये उनकी हत्या करने के लिए आए थे। हालाँकि, इस मामले में बुलंदशहर पुलिस का कहना है कि जिन लोगों को हिरासत में लिया गया था उनका महंत यति से कोई संबंध नहीं था।

मामले में बुलंदशहर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि तीन लोगों को हिरासत में लिया था। नियमित तौर पर इस केस की जाँच की गई है, लेकिन पूछताछ में यति नरसिंहानंद के समारोह से कोई संबंध स्थापित नहीं किया जा सका। पुलिस ने बताया है कि तीनों युवक कर्नाटक के बेंगलुरु के रहने वाले हैं और मुरादाबाद में इस्तेमाल हो चुकी कारों और यूपीएस बैटरी का काम करते हैं। तीनों युवक मुरादाबाद से अलीगढ़-आगरा होते हुए बेंगलुरु जा रहे थे। हालाँकि, रास्ता भटककर तीनों बुलंदशहर के रास्ते उस जगह पहुँच गए, जहाँ पर डासना देवी महंत यति नरसिंहानंद का कार्यक्रम चल रहा था।

अभी तक तो पुलिस को युवकों के पास से किसी भी तरीके की संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है, लेकिन पुलिस इसकी आगे की जाँच कर रही है।

हालाँकि, इससे पहले कई बार स्वामी यति नरसिंहानंद की हत्य़ा की कोशिश की गई थी। 17 मई 2021 को दिल्ली पुलिस ने पहाड़गंज के एक होटल से जान मोहम्मद डार नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया था। उसके पास से भगवा कपड़ा बरामद किया गया था। कश्मीर के रहने वाले डार को यति नरसिंहानंद की हत्या की सुपारी मिली थी। उसे हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दी गई थी। उसे आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के एक सरगना ने भेजा था।

इसी प्रकार बुधवार (जून 2, 2021) को दो संदिग्ध युवक डासना देवी मंदिर परिसर में घुसे थे। सेवादारों को जब शक हुआ तो उन्होंने इन दोनों की तलाशी ली। इनके पास से तीन सर्जिकल ब्लेड व कुछ आपत्तिजनक दवाएँ बरामद की गई। महंत के अनुयायियों के मुताबिक वह ‘सायनाइड’ था।

पाकिस्तान में चीनी इंजीनियर्स को ले जा रही बस में भीषण धमाका: 10 से ज्यादा की मौत, 39 घायल

पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkwha) के ऊपरी कोहिस्तान में दसू हाइड्रपॉवर प्लांट (Dasu hydropower plant) के पास बुधवार (जुलाई  14, 2021) को कथिततौर पर एक आंतकी हमले में एक बस को बम ब्लास्ट में उड़ा दिया गया। धमाके के समय बस में कुछ चीनी इंजीनियर्स समेत कई मजदूर थे।

इनमें 6 से 9 चीनी नागरिक, 2 सैन्यकर्मी समेत 13 लोगों के मौत की खबर आ रही है। 39 लोग घायल हैं। 1 चीनी इंजीनियर और एक फौजी को गायब कहा जा रहा है। मृतकों की संख्या आगे भी बढ़ सकती है।

घटना की बाबत ऊपरी कोहिस्तान के उपायुक्त आरिफ खान यूसुफजई ने पाकिस्तानी मीडिया डॉन को अपना बयान दिया। उन्होंने बताया कि ये धमाका आज सुबह करीब 7:30 बजे हुआ। उस समय एक बस में बरसीन कैंप से प्लांट साइट तक चीनी इंजीनियरों सहित 30 से अधिक श्रमिकों को ले जाया जा रहा था।

उपायुक्त ने इस बात की पुष्टि की कि बस में चीनी इंजीनियरों के अलावा कुछ सैन्यकर्मी और स्थानीय मजदूर भी थे। खैबर-पख्तूनख्वा के शीर्ष पुलिस अधिकारी महानिरीक्षक मोअज्जम जाह अंसारी ने 6 चीनी नागरिकों, 2 सैनिकों और 2 स्थानीय लोगों की मौत की पुष्टि की।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि धमाका इतना तेज था कि बस एक नाले में गिर गई और भारी नुकसान हुआ। एक चीनी नागिरक और एक जवान गायब हैं। उन्होंने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य जारी है।

इस बीच, जल और बिजली विकास प्राधिकरण (वापडा) ने अपना बयान जारी कर इस ब्लास्ट को एक ‘दुर्घटना’ करार दिया है। वापडा के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि भी नहीं की है कि बस में चीनी कर्मचारी यात्रा कर रहे थे। फिलहाल घटनास्थल पर बचाव के प्रयास जारी हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। घटनास्थल पर पुलिस मौजूद है।

डॉन के मुताबिक एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि ब्लास्ट की वजह अभी पता नहीं चल पाई हैं। इलाके में चूँकि मोबाइल नेटवर्क काम नहीं कर रहे थे इसलिए ये जानकारी जुटा पाना मुश्किल हो गया है। अधिकारी का कहना है कि वह स्पष्ट नहीं है कि असलियत में क्या हुआ। ये पता चलना बाकी है कि ये विस्फोट हुआ है या कोई दुर्घटना है। प्रारंभिक जाँच में स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।

बता दें कि दसू जलविद्युत परियोजना चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) का हिस्सा है, जो बीजिंग की बेल्ट एंड रोड पहल के तहत 65 अरब डॉलर की निवेश योजना है, जिसका उद्देश्य पश्चिमी चीन को दक्षिणी पाकिस्तान में ग्वादर समुद्री बंदरगाह से जोड़ना है।

उज्जैन में मिला 1000 साल पुराने मंदिर का ढाँचा, महाकाल परिसर के विस्तार के लिए हो रही खुदाई

मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के आसपास खुदाई के दौरान करीब 1000 वर्ष पुराने मंदिर का ढाँचा मिला है। पुरातत्व विभाग के अधिकारी डॉ. रमेश यादव के हवाले से दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि 11वीं-12 सदी का मंदिर नीचे दबा हुआ है। इस खुदाई से परमार काल की वास्तुकला की अद्भुत कलाकृति सामने आई है।

खुदाई महाकाल मंदिर के विस्तार के लिए की जा रही है। बीते 30 मई 2021 को मंदिर के अगले हिस्से में जमीन के अंदर से देवी की मूर्ति निकली थी, जिसके बाद खुदाई को प्रशासन ने वहीं पर रोक दिया। इसकी जानकारी मिलने पर संस्कृति विभाग ने आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट के चार अधिकारियों को मंदिर का निरीक्षण करने के लिए भोपाल से भेजा था।

टीम को लीड कर रहे डॉ. यादव ने बताया है कि मंदिर के उत्तर वाले हिस्से में ढाँचा मिला है। दक्षिण में जमीन से चार मीटर नीचे एक दीवार भी मिली है, जिसके करीब 2100 साल पुराने होने का अनुमान है।

अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मंदिर का निर्माण किसने करवाया था, इसको लेकर फिलहाल अध्य्यन चल रहा है। मंदिर के ढाँचे का अलाइनमेंट करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुँचा जा सकता है। वहीं उज्जैन के कलेक्टर आशीष सिंह ने कहा है कि पुरातात्विक अवशेष को बचाने की कोशिशों के कारण कार्य बहुत ही धीमा हो गया है।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल भी मंदिर परिसर की खुदाई के दौरान हवन कुंड, चूल्हा समेत कई अन्य चीजें मिली थीं। अब दोबारा से चीजें मिल रही हैं, जो काफी महत्वपूर्ण है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार अब तक हुई खुदाई में परमारकालीन मंदिर के पाषाण खंभ, छत का हिस्सा, शिखर आदि के अवशेष मिले हैं। साथ ही दो हजार साल पुराने शुंग और कुषाण काल में निर्मित मिट्टी के बर्तनों के भी अवशेष मिल चुके हैं।

गौरतलब है कि महाकाल मंदिर के विस्तार को इसी साल जनवरी में हरी झंडी दिखाई गई थी। प्रदेश की शिवराज सरकार ने इसके लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। दिसंबर 2020 में फ्रांस के राजदूत अपनी पत्नी के साथ महाकाल के दर्शन के लिए आए थे। दर्शन के बाद उन्होंने ऐलान किया था कि फ्रांस की सरकार ‘महाकाल मंदिर विकास योजना’ में 80 करोड़ रुपए दान करेगी।

₹25000 करोड़ का MSCB घोटाला, 3 लाख किसानों ने खोए जमीन-शेयर: अजित पवार से जुड़ी कंपनियों को ₹750 Cr का लोन

‘महाराष्ट्र स्टेट कोऑपरेटिव बैंक (MSCB)’ बैंक घोटाले का असर करीब 3 लाख किसानों पर पड़ा है। 25,000 करोड़ रुपए के इस घोटाले से महाराष्ट्र के सहकारिता एवं कृषि क्षेत्र पर बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा है। ‘टाइम्स नाउ’ की खबर के अनुसार, पीड़ित किसानों की संख्या 3 लाख से ऊपर भी जा सकती है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पाया है कि MSCB के अधिकारियों व नेताओं ने मिल कर इन किसानों के साथ धोखाधड़ी की।

ये किसान कई माध्यमों से चीनी मिलों की सहकारिता संस्थानों से जुड़े हुए हैं। जब महाराष्ट्र में इन चीनी मिलों का निर्माण शुरू हो रहा था, तब इनमें से कई किसानों ने इसके लिए अपनी जमीनें दान में दी थीं। बदले में उन्हें इन चीनी मिलों का शेयरहोल्डर बनाया गया था। बाद में MSCB के निदेशकों ने इन चीनी मिलों को प्राइवेट कंपनियों के माध्यम से खरीद लिया। ये फर्जी कंपनियाँ थीं। साथ ही इसके लिए काफी कम रकम चुकाई गई।

एक बार जब ये चीनी मिलें इन फर्जी कंपनियों के स्वामित्व में चली गईं, किसानों ने न सिर्फ इन चीनी मिलों में अपने शेयर्स खो दिए, बल्कि उनकी जमीनें भी उनके हाथ से चली गईं। इन किसानों को सिर्फ इतनी ही अनुमति दी है कि वो गन्ने के उत्पादन करें और अपने उत्पाद को इन चीनी मिलों को बेच दें। जबकि किसानों को MRP रेट से 10-30% ज्यादा मिलने थे क्योंकि केंद्र के अंतर्गत आने वाली कॉपरेटिव सुगर मिलें उन्हें यही रकम देती थी।

किसानों को जो रकम मिलनी थी, उसका बीच में ही बैंक के पदाधिकारियों और नेताओं ने गबन कर लिया। जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने MSCB पर प्रतिबंध लगाए, तब भी किसानों को नुकसान हुआ। इस बैंक की कई शाखाओं में किसानों के खाते थे और वो इनमें डिपॉजिट भी रखा करते थे। इसी तरह ED को एक जरंदेश्वर SSK चीनी मिल के बारे में पता चला है, जिसे एक ‘गुरु कॉमोडिटीज’ नामक फर्जी कंपनी ने 65.75 करोड़ रुपए में खरीदा था।

इसके तुरंत बाद इस कंपनी ने इस चीनी मिल को जरदेश्वर प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दे दिया। ये वही कंपनी है, जो महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजित पवार और उनकी पत्नी से जुड़ी हुई है। इसके बाद इस कंपनी ने इस चीनी मिल का इस्तेमाल कर के MSCB से 750 करोड़ रुपयों का लोन लिया। ED की नजर ऐसे 13 चीनी मिलों पर है, जिनका इस्तेमाल इस तरह के लोन लेने और हवाला कारोबार के लिए हुआ।

कुल मिला कर क्रम ये चलता था कि कोई फर्जी कंपनी चीनी मिल को खरीदी लेती थी। इसके बाद इसे अजित पवार, उनकी पत्नी और अन्य रिश्तेदारों से जुड़ी किसी कंपनी को लीज पर दे दिया जाता था। फिर महाराष्ट्र कोऑपटिव बैंक से इस पर बड़ी मात्रा में लोन मिलता था। इनमें पुणे के अम्बिका और जय जवान किसान मिल्स, अहमदनगर का जगदंब किसान मिल नंदुरबार का पुष्पांतरि मिल और औरंगाबाद का कन्नाड़ चीनी मिल शामिल हैं

ED जल्द ही इन चीनी मिलों को अटैच करेगा। पुणे, सतारा, रत्नागिरी, और सिंधुदुर्ग कोऑप्रेटिव बैंक के कई पदाधिकारियों को केंद्रीय जाँच एजेंसी ने पहले ही समन भेज रखा है। अजित पवार और उनसे जुड़ी कंपनियों पर जो 750 करोड़ का लोन उठाने का आरोप है, उस पर भी जाँच चल रही है। इन्हीं बैंक शाखाओं के जरिए इन कंपनियों को लोन मिलता था। इसीलिए, अधिकारियों से पूछताछ होगी।

हाल ही में केंद्र सरकार ने सहकारिता मंत्रालय का गठन कर के अमित शाह को इसकी कमान सौंपी, जिससे NCP (राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी) के संस्थापक-अध्यक्ष शरद पवार नजर नजर आए। उन्होंने दावा किया कि राज्य में सहकारिता विभाग में नियम-कानून महाराष्ट्र के कानून के हिसाब से चलते हैं और महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा ड्राफ्ट किए गए कानून में हस्तक्षेप करने का केंद्र सरकार को कोई अधिकार नहीं है।

फैयाज ने नाबालिग भतीजी के कपड़े उतारे-खुद की पैंट भी… हाईकोर्ट ने दी बेल, कहा-पेनिट्रेशन नहीं तो बलात्कार का प्रयास नहीं

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने अपनी भतीजी से रेप की कोशिश के आरोपित फैयाज अहमद डार को जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि बगैर पेनिट्रेशन के आरोपित द्वारा अपने और पीड़िता के कपड़े उतारने को भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) की धारा 376/51 के तहत बलात्कार का प्रयास नहीं माना जा सकता। उसे जमानत देते हुए इसे POCSO एक्ट की धारा 7/8 के तहत इसे यौन हमले का मामला बताया।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार ने कहा, “इस मामले में याचिकाकर्ता ने कथित तौर पर पीड़िता के कपड़े उतार दिए थे। अपनी पैंट भी खोल ली थी। यह अपराध करने का प्रयास करने की तैयारी करने की एक कोशिश थी। लेकिन, इस निष्कर्ष पर पहुँचना मुश्किल है कि याचिकाकर्ता का इरादा बलात्कार करने का था या याचिकाकर्ता द्वारा किया गया कृत्य बलात्कार करने के प्रयास के समान है।”

फैयाज पर अपनी ही नाबालिग भतीजी से रेप की कोशिश करने के आरोप में आईपीसी की धारा 376, 354, 511 और पोक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत केस दर्ज किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता आरोपित के पड़ोस में रहती थी और मोबाइल एक्सेसरीज खरीदने के लिए उसकी दुकान पर गई थी।

नाबालिग पीड़िता के बयान के मुताबिक, आरोपित ने कथित तौर पर टेप से उसका मुँह बंद कर दिया था। उसने उसकी और अपनी पैंट उतार दी थी। लेकिन, इसी दौरान आरोपित का भाई वहाँ आ गया तो उसने उसके मुँह से टेप निकाल दिया और वहाँ से चला गया।

फैयाज को जमानत देते हुए हाईकोर्ट ने कहा, “पीड़िता के बयान पर विश्वास किया जाए तो शुरुआती तौर पर यह रेप करने की कोशिश की तरह था। इसलिए आईपीसी की धारा 511 नहीं लगता है। यह धारा 354 के तहत दंडनीय हो सकता है।”

मेडिकल जाँच में यह सामने आया था कि न तो पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाया गया था और न ही उसके शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान थे। कोर्ट ने कहा, “अपराध करने की तैयारी और प्रयास के बीच बहुत मामूली सा अंतर है।” हाईकोर्ट ने आरोपित को 50,000 रुपए के निजी मुचलके पर जमानत देते हुए कहा, “हम यह नहीं भूल सकते हैं कि जमानत एक नियम है। गिरफ्तारी को सही तरीके से किया गया है। इसलिए याचिकाकर्ता को जमानत का अधिकार है।”

कुरान पर याचिका दायर करने के बाद से बदनाम करने के हो रहे प्रयास: रेप के आरोप पर बोले वसीम रिजवी

उत्तर प्रदेश में ‘शिया सेन्ट्रल वक़्फ़ बोर्ड’ के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान सदस्य सैयद वसीम रिजवी के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज होगा। लखनऊ जिला कोर्ट ने पुलिस को इस सम्बन्ध में आदेश जारी किया है। 30 जून, 2021 को इस मामले में कोर्ट के पास शिकायत-पत्र आया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। थाना सआदतगंज को आदेश दिया गया है कि वो 3 दिनों के भीतर इस मामले की जाँच कर रिपोर्ट सौंपे।

हालाँकि, वसीम रिजवी का कहना है कि उनके प्रतिद्वंद्वियों से साँठगाँठ कर के उन पर ये आरोप लगाया गया है। रिजवी पर रेप का आरोप लगाने वाली उनके पूर्व ड्राइवर की बीवी है। पीड़िता का कहना है कि उनके ड्राइवर पति को बहाने से बाहर भेज कर रिजवी उसका यौन शोषण करते थे। साथ ही ये आरोप भी लगाया गया है कि विरोध करने पर वह उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी देते थे।

महिला का कहना है कि जब उससे ये सब सहन नहीं हुआ तो उसने अपने पति को सारी बातें बता दीं। आरोप है कि जब उक्त ड्राइवर ने इस सम्बन्ध में वसीम रिजवी से बात करने की कोशिश की तो उसके साथ मारपीट की गई। सआदतगंज के थाना प्रभारी बृजेश कुमार यादव ने बताया कि कोर्ट के आदेश की जानकारी मिल गई है। पुलिस को इसकी प्रति का इंतजार है। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ऑपइंडिया को रिजवी ने बताया, "ड्राइवर को मैंने काम से निकाल दिया तो वह किसी और जगह काम करने लगा। इसके 10 दिन बाद उसकी बीवी ने शिकायत की। पुलिस ने जाँच की लेकिन कुछ मिला नहीं तो एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद वह कोर्ट पहुँच  गई। कुरान की भड़काऊ आयतें हटाने के लिए याचिका दाखिल करने के बाद से मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।"

रिजवी ने बताया कि उनका ड्राइवर सलमान हैदर उनके बारे में जानकारी लीक करता था। उनके विरोधियों को उनकी गतिविधियों के बारे में बताता था। इसके बाद उसे नौकरी से निकाल उन्होंने वह घर भी खाली करवा लिया जो उसे रहने के लिए दिया था। उन्होंने ड्राइवर की बीवी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उनकी छवि धूमिल करने के लिए ये सब किया जा रहा है।

बता दें कि वसीम रिजवी ने पिछले दिनों कुरान की 26 आयतें हटाने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि ये आयतें हिंसा को बढ़ावा देती हैं। हालाँकि, उनकी याचिका रद्द करते हुए कोर्ट ने उन पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया था। लखनऊ में उन पर हमला और पत्थरबाजी भी हुई थी।

मिया खलीफा पर कम्युनिस्ट लाल, मलाला वाली किताब पर कट्टरपंथी नजर: भारत के वामपंथी-लिबरल गैंग की हैं दुलारी

क्यूबा ने आरोप लगाया है कि पूर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा अमेरिका के साथ मिल कर वहाँ दंगे भड़काने में लगी हुई हैं। क्यूबा ने राष्ट्रपति मिगेल डियाज़ कनेल बेरमुडेज़ (Miguel Díaz-Canel Bermúdez) ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ मिल कर मिया खलीफा क्यूबा की वामपंथी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को हवा देने में लगी हुई हैं। उधर पाकिस्तान में एक्टिविस्ट मलाला यूसुफजई को ‘महत्वपूर्ण व्यक्तित्व’ बताने वाली किताब के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

मिया खलीफा पर पैसे लेकर क्यूबा में दंगे कराने का आरोप

बता दें कि क्यूबा में पिछले 30 सालों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा है। लोग दशकों से सत्ता पर काबिज वामपंथी नेताओं से मुक्ति चाहते हैं। उधर मिया खलीफा ने कहा है कि क्यूबा की सरकार के खिलाफ बयान देने के लिए उन्हें कहीं से कोई रुपए नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि वो ये काम मुफ्त में और अपना समय निकाल कर कर रही हैं, किसी सरकार ने उन्हें इसके लिए पैसे नहीं दिए हैं।

पिछले कुछ दिनों से मिया खलीफा ने क्यूबा के राष्ट्रपति को भर-भर कर गालियाँ बकी हैं। एक वीडियो में उन्होंने मिगेल डियाज को ‘कुतिया का बेटा’ कहा, तो एक अन्य ट्वीट में उन्हें स्पेनिश में ‘f**king a**hole’ कह कर सम्बोधित किया। बता दें कि भारत के हिंसक ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन करने से भी वो नहीं चूकी थीं। ‘गणतंत्र दिवस’ के दिन पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा और प्रदर्शन स्थल पर यौन शोषण की घटनाओं वाले इस आंदोलन का उन्होंने समर्थन किया था।

जहाँ तक क्यूबा की बात है, वहाँ सैकड़ों प्रदर्शनकारी पुलिस से रोज भिड़ रहे हैं और हिंसा का दौर चालू है। देश की अर्थव्यवस्था लगातार नीचे गिर रही है लेकिन पुलिस प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने और उनके साथ क्रूरता करने में लगी हुई है। कोरोना के कारण भी स्थिति बेहाल है। सोशल मीडिया से लेकर शहरों और गाँवों तक में विरोध चालू है। ये प्रदर्शन सैन अंटोनिओ और लॉस बनोस से शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया पर लाइव जाकर भी विरोध कर रहे हैं।

पाकिस्तान: मलाला यूसुफजई को ‘महत्वपूर्ण व्यक्तित्व’ बताने वाली किताबें जब्त

पाकिस्तान के प्रशासन ने एक पुस्तक की कई प्रतियों को सिर्फ इसीलिए जब्त कर लिया, क्योंकि उनमें एक्टिविस्ट मलाला यूसुफजई को ‘महत्वपूर्ण व्यक्तित्व’ की सूची में स्थान दिया गया था। इस्लाम को लेकर उनके ‘विवादित विचारों’ का आरोप लगा कर ये किया गया। ये किताबें वहाँ के पंजाब प्रांत में पढ़ाई जा रही थीं। ‘द पंजाब करिकुलम एंड टेक्स्टबुक बोर्ड (PCTB)’ द्वारा ‘ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP)’ द्वारा प्रकाशित इन पुस्तकों को कक्षा 7 के बच्चों को पढ़ाया जा रहा था।

इसमें मलाला यूसुफजई की तस्वीर 1965 में भारत के साथ युद्ध में मारे गए मेजर अजीज भट्टी के साथ लगाई गई थी। इस सूची में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना, कवि अल्लामा इक़बाल शिक्षाविद सर सैयद अहमद खान, मुल्क के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान और समाजसेवी अब्दुल सत्तार की तस्वीरें थीं। बोर्ड ने पहले इसके प्रकाशन पर मनाही लगाई हुई थी। मलाला के खिलाफ पाकिस्तानी प्रशासन में गुस्सा है।

तभी ‘ऑल पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल फेडरेशन’ ने एक डॉक्यूमेंट्री बना कर मलाला यूसुफजई की ‘सच्चाई दिखाने’ का फैसला लिया है। उसका दावा है कि वो युवाओं के सामने नोबेल विजेता की ‘सच्चाई सामने लाएगा’। संस्था के अध्यक्ष कासिफ मिर्जा ने कहा कि ‘आई एम नॉट मलाला’ नामक इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए 2 लाख प्राइवेट स्कूलों के 2 करोड़ छात्रों को बताया जाएगा कि इस्लाम और निकाह को लेकर कैसे मलाला पाश्चात्य एजेंडा चलाती हैं।

उन्होंने कहा कि मलाला के कथित संघर्ष से कभी युवा प्रभावित न हो जाएँ, इसीलिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मलाला ने निकाह और परिवार के ढाँचे का विरोध करते हुए पापपूर्ण जीवन जीने की वकालत की है। उन्होंने ‘लिव इन’ को इस्लाम में हराम करार दिया। मलाला यूसुफजई ने पाकिस्तान की सेना को अपनी किताब में आतंकी बताया, ये भी आरोप हैं। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटने के बाद पाकिस्तानी नैरेटिव फैलाने के लिए मलाला की भारत में भी आलोचना हो चुकी है।