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कुरान पर याचिका दायर करने के बाद से बदनाम करने के हो रहे प्रयास: रेप के आरोप पर बोले वसीम रिजवी

उत्तर प्रदेश में ‘शिया सेन्ट्रल वक़्फ़ बोर्ड’ के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान सदस्य सैयद वसीम रिजवी के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज होगा। लखनऊ जिला कोर्ट ने पुलिस को इस सम्बन्ध में आदेश जारी किया है। 30 जून, 2021 को इस मामले में कोर्ट के पास शिकायत-पत्र आया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। थाना सआदतगंज को आदेश दिया गया है कि वो 3 दिनों के भीतर इस मामले की जाँच कर रिपोर्ट सौंपे।

हालाँकि, वसीम रिजवी का कहना है कि उनके प्रतिद्वंद्वियों से साँठगाँठ कर के उन पर ये आरोप लगाया गया है। रिजवी पर रेप का आरोप लगाने वाली उनके पूर्व ड्राइवर की बीवी है। पीड़िता का कहना है कि उनके ड्राइवर पति को बहाने से बाहर भेज कर रिजवी उसका यौन शोषण करते थे। साथ ही ये आरोप भी लगाया गया है कि विरोध करने पर वह उनकी अश्लील तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी देते थे।

महिला का कहना है कि जब उससे ये सब सहन नहीं हुआ तो उसने अपने पति को सारी बातें बता दीं। आरोप है कि जब उक्त ड्राइवर ने इस सम्बन्ध में वसीम रिजवी से बात करने की कोशिश की तो उसके साथ मारपीट की गई। सआदतगंज के थाना प्रभारी बृजेश कुमार यादव ने बताया कि कोर्ट के आदेश की जानकारी मिल गई है। पुलिस को इसकी प्रति का इंतजार है। इसके बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ऑपइंडिया को रिजवी ने बताया, "ड्राइवर को मैंने काम से निकाल दिया तो वह किसी और जगह काम करने लगा। इसके 10 दिन बाद उसकी बीवी ने शिकायत की। पुलिस ने जाँच की लेकिन कुछ मिला नहीं तो एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद वह कोर्ट पहुँच  गई। कुरान की भड़काऊ आयतें हटाने के लिए याचिका दाखिल करने के बाद से मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।"

रिजवी ने बताया कि उनका ड्राइवर सलमान हैदर उनके बारे में जानकारी लीक करता था। उनके विरोधियों को उनकी गतिविधियों के बारे में बताता था। इसके बाद उसे नौकरी से निकाल उन्होंने वह घर भी खाली करवा लिया जो उसे रहने के लिए दिया था। उन्होंने ड्राइवर की बीवी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि उनकी छवि धूमिल करने के लिए ये सब किया जा रहा है।

बता दें कि वसीम रिजवी ने पिछले दिनों कुरान की 26 आयतें हटाने की माँग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि ये आयतें हिंसा को बढ़ावा देती हैं। हालाँकि, उनकी याचिका रद्द करते हुए कोर्ट ने उन पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया था। लखनऊ में उन पर हमला और पत्थरबाजी भी हुई थी।

मिया खलीफा पर कम्युनिस्ट लाल, मलाला वाली किताब पर कट्टरपंथी नजर: भारत के वामपंथी-लिबरल गैंग की हैं दुलारी

क्यूबा ने आरोप लगाया है कि पूर्व पोर्न स्टार मिया खलीफा अमेरिका के साथ मिल कर वहाँ दंगे भड़काने में लगी हुई हैं। क्यूबा ने राष्ट्रपति मिगेल डियाज़ कनेल बेरमुडेज़ (Miguel Díaz-Canel Bermúdez) ने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ मिल कर मिया खलीफा क्यूबा की वामपंथी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को हवा देने में लगी हुई हैं। उधर पाकिस्तान में एक्टिविस्ट मलाला यूसुफजई को ‘महत्वपूर्ण व्यक्तित्व’ बताने वाली किताब के खिलाफ कार्रवाई हुई है।

मिया खलीफा पर पैसे लेकर क्यूबा में दंगे कराने का आरोप

बता दें कि क्यूबा में पिछले 30 सालों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन चल रहा है। लोग दशकों से सत्ता पर काबिज वामपंथी नेताओं से मुक्ति चाहते हैं। उधर मिया खलीफा ने कहा है कि क्यूबा की सरकार के खिलाफ बयान देने के लिए उन्हें कहीं से कोई रुपए नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि वो ये काम मुफ्त में और अपना समय निकाल कर कर रही हैं, किसी सरकार ने उन्हें इसके लिए पैसे नहीं दिए हैं।

पिछले कुछ दिनों से मिया खलीफा ने क्यूबा के राष्ट्रपति को भर-भर कर गालियाँ बकी हैं। एक वीडियो में उन्होंने मिगेल डियाज को ‘कुतिया का बेटा’ कहा, तो एक अन्य ट्वीट में उन्हें स्पेनिश में ‘f**king a**hole’ कह कर सम्बोधित किया। बता दें कि भारत के हिंसक ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन करने से भी वो नहीं चूकी थीं। ‘गणतंत्र दिवस’ के दिन पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा और प्रदर्शन स्थल पर यौन शोषण की घटनाओं वाले इस आंदोलन का उन्होंने समर्थन किया था।

जहाँ तक क्यूबा की बात है, वहाँ सैकड़ों प्रदर्शनकारी पुलिस से रोज भिड़ रहे हैं और हिंसा का दौर चालू है। देश की अर्थव्यवस्था लगातार नीचे गिर रही है लेकिन पुलिस प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करने और उनके साथ क्रूरता करने में लगी हुई है। कोरोना के कारण भी स्थिति बेहाल है। सोशल मीडिया से लेकर शहरों और गाँवों तक में विरोध चालू है। ये प्रदर्शन सैन अंटोनिओ और लॉस बनोस से शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी सोशल मीडिया पर लाइव जाकर भी विरोध कर रहे हैं।

पाकिस्तान: मलाला यूसुफजई को ‘महत्वपूर्ण व्यक्तित्व’ बताने वाली किताबें जब्त

पाकिस्तान के प्रशासन ने एक पुस्तक की कई प्रतियों को सिर्फ इसीलिए जब्त कर लिया, क्योंकि उनमें एक्टिविस्ट मलाला यूसुफजई को ‘महत्वपूर्ण व्यक्तित्व’ की सूची में स्थान दिया गया था। इस्लाम को लेकर उनके ‘विवादित विचारों’ का आरोप लगा कर ये किया गया। ये किताबें वहाँ के पंजाब प्रांत में पढ़ाई जा रही थीं। ‘द पंजाब करिकुलम एंड टेक्स्टबुक बोर्ड (PCTB)’ द्वारा ‘ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP)’ द्वारा प्रकाशित इन पुस्तकों को कक्षा 7 के बच्चों को पढ़ाया जा रहा था।

इसमें मलाला यूसुफजई की तस्वीर 1965 में भारत के साथ युद्ध में मारे गए मेजर अजीज भट्टी के साथ लगाई गई थी। इस सूची में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना, कवि अल्लामा इक़बाल शिक्षाविद सर सैयद अहमद खान, मुल्क के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान और समाजसेवी अब्दुल सत्तार की तस्वीरें थीं। बोर्ड ने पहले इसके प्रकाशन पर मनाही लगाई हुई थी। मलाला के खिलाफ पाकिस्तानी प्रशासन में गुस्सा है।

तभी ‘ऑल पाकिस्तान प्राइवेट स्कूल फेडरेशन’ ने एक डॉक्यूमेंट्री बना कर मलाला यूसुफजई की ‘सच्चाई दिखाने’ का फैसला लिया है। उसका दावा है कि वो युवाओं के सामने नोबेल विजेता की ‘सच्चाई सामने लाएगा’। संस्था के अध्यक्ष कासिफ मिर्जा ने कहा कि ‘आई एम नॉट मलाला’ नामक इस डॉक्यूमेंट्री के जरिए 2 लाख प्राइवेट स्कूलों के 2 करोड़ छात्रों को बताया जाएगा कि इस्लाम और निकाह को लेकर कैसे मलाला पाश्चात्य एजेंडा चलाती हैं।

उन्होंने कहा कि मलाला के कथित संघर्ष से कभी युवा प्रभावित न हो जाएँ, इसीलिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मलाला ने निकाह और परिवार के ढाँचे का विरोध करते हुए पापपूर्ण जीवन जीने की वकालत की है। उन्होंने ‘लिव इन’ को इस्लाम में हराम करार दिया। मलाला यूसुफजई ने पाकिस्तान की सेना को अपनी किताब में आतंकी बताया, ये भी आरोप हैं। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटने के बाद पाकिस्तानी नैरेटिव फैलाने के लिए मलाला की भारत में भी आलोचना हो चुकी है।

पुलवामा में सुरक्षा बलों ने ढेर किए 3 लश्कर आतंकी, फायरिंग के बाद पाकिस्तानी ड्रोन गायब; कुलगाम में IED निष्क्रिय

जम्मू-कश्मीर में फिर से पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने की खबर है। बीएसएफ की फायरिंग के बाद ड्रोन गायब हो गया। वहीं पुलवामा में सुरक्षा बलों ने लश्कर के तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया। इसी तरह कुलगाम में आतंकियों द्वारा लगाई गई आईईडी को सुरक्षा बलों ने निष्क्रिय कर दिया है।

पुलवामा में ढेर किए गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर अबु हुरैरा उर्फ एजाज भी शामिल है। वह A++ केटेगरी का आतंकी था। लिहाजा उसका मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। लश्कर आतंकियों के इलाके में छिपे होने की सूचना मिलने पर सेना, पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने संयुक्त रूप से सर्च ऑपरेशन चलाया था। खुद को फँसा देख आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी।

इसके बाद सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी ढेर हो गए। अबु हुरैरा के अलावा बाकी दो आतंकी स्थानीय थे। इनके पास से हथियारों की भी बरामदगी हुई है। फिलहाल इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है। कश्मीर जोन पुलिस के मुताबिक, तलाशी अभियान जारी है।

इससे पहले मंगलवार (13 जुलाई 2021) की रात करीब 10 बजे जम्मू में अरनिया सेक्टर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास संदिग्ध ड्रोन स्पॉट किया गया। ड्रोन दिखने के बाद बीएसएफ के जवानों ने उस पर 5-6 राउंड फायरिंग की, जिसके बाद वो फिर से पाकिस्तान की सीमा के अंदर अँधेरे में गायब हो गया।

घटना को लेकर बीएसएफ ने बयान जारी कर कहा है कि 13-14 जुलाई की दरम्यानी रात अरनिया सेक्टर में बीएसएफ जवानों ने लगभग 9 बजकर 52 मिनट पर 200 मीटर की दूरी पर एक टिमटिमाती लाल लाइट देखी थी। इसके बाद जवानों ने फायिरंग शुरू कर दी, जिस कारण वो वापस लौट गया।

गौरतलब है कि इससे पहले जम्मू के एयरपोर्ट में रविवार (27 जून 2021) को ड्रोन के जरिए दो बड़े धमाके किए गए थे। देर रात करीब 2 बजे हुए इस धमाके से एक इमारत की छत को नुकसान पहुँचा था। तब से अब तक करीब 6 बार जम्मू-कश्मीर में ड्रोन देखे गए हैं।

एक अन्य घटना में जम्मू-कश्मीर के कुलगाम सेक्टर में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने के लिए आतंकियों ने आईईडी प्लांट की थी। पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक, घटना काजीगुंड इलाके के दामेजन गाँव के बाहर की है। यहाँ एक चिनार के पेड़ के नीचे आतंकियों ने आईईडी लगाया था, जिसे निष्क्रिय कर दिया गया।

14 साल की कराटे गर्ल पंखे से लटकी मिली, सन्नी खान के ‘लव जिहाद’ से सोशल मीडिया में उबाल

पश्चिम बंगाल में एक 14 वर्षीय कराटे खिलाड़ी की आत्महत्या सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले सोमवार (5 जुलाई, 2021) को हुई ये घटना हावड़ा की है। राष्ट्रीय स्तर पर कई कराटे टूर्नामेंट में भाग ले चुकी पामेला अधिकारी की लाश उसके ही घर से मिली। नाबालिग ने कमरे में सीलिंग फैन से लटक कर आत्महत्या की। पामेला अधिकारी कक्षा 8 की छात्रा थी। वो इंस्टाग्राम पर खासी सक्रिय थी।

पुलिस का कहना है कि एक युवक उसे कुछ दिनों से ब्लैकमेल कर रहा था। हाल ही में वो उस युवक से संपर्क में आई थी और फिर उसके काफी करीब आ गई थी। ब्लैकमेल को सहन न कर पाने के कारन उसने मौत को गले लगा लिया। पुलिस को पामेला अधिकारी के मोबाइल फोन से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें लिखा है कि ब्लैकमेलिंग से तंग आकर वो इतना बड़ा कदम उठा रही है।

पुलिस ने लाश को बरामद करने के बाद उसी दिन पोस्टमॉर्टेम कराया। पामेला अधिकारी ने आत्महत्या से पहले अपने हाथ पर अपने मोबाइल फोन का पासवर्ड भी लिख रखा था। पुलिस ने पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर सन्नी खान नाम के युवक के खिलाफ आत्महत्या के लिए भड़काने का मामला दर्ज किया गया। इस घटना के बाद से ही वो फरार चल रहा है। उसकी तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

परिवार का कहना है कि पामेला अधिकारी सोशल मीडिया में खासी सक्रिय रहती थी और उसने कई तस्वीरें भी अपलोड की थीं। उसे कई जगह से मॉडलिंग के ऑफर्स भी आ रहे थे। परिवार ने पुलिस को बताया कि सन्नी खान नाम के युवक ने भी एक मॉडलिंग असाइनमेंट को लेकर उससे संपर्क किया था। दोनों सोशल मीडिया के माध्यम से ही एक-दूसरे से परिचित बने थे। फिर वो लोग इस असाइनमेंट पर विचार-विमर्श के लिए कहीं मिले भी थे।

उसी दौरान सन्नी खान ने पामेला अधिकारी के अंतरंग क्षणों की कुछ तस्वीरें ले लीं। इसके बाद उन्हीं फोटोग्राफ्स के सहारे वो उसे ब्लैकमेल करने लगा। पामेला अधिकारी ने उसकी माँगों को ठुकरा दिया था। सुसाइड नोट में छात्रा ने लिखा है कि चूँकि वो समाज द्वारा कलंक लगाए जाने की आशंका से भयभीत थी, इसीलिए उसने आत्महत्या का विकल्प चुना। पामेला यूट्यूब पर भी सक्रिय थी। सन्नी खान उसकी तस्वीरें लीक करने की धमकी दे रहा था।

इंस्टाग्राम पर लोगों ने कहा कि इस मामले में भले न्याय मिल जाए, लेकिन हिन्दू लड़कियों को फँसाने की कोई साजिश तो चल ही रही है। लोग इसे ‘लव जिहाद’ भी बता रहे हैं। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि मात्र 14 वर्ष की उम्र की लड़की के साथ कोई ऐसा कैसे कर सकता है? साथ ही लोगों ने इस बात पर अफ़सोस जताया कि उसके साथ-साथ देश ने एक कराटे की प्रतिभा भी खो दी, जो आगे जाकर नाम कमा सकती थी।

द्वारकाधीश मंदिर पर वज्रपात, 52 गज की ध्वजा में समाहित हो गई बिजली: कोई नुकसान नहीं, देखें Video

गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर पर मंगलवार (13 जुलाई 2021) को बिजली आकाशीय बिजली गिरी। घटना दोपहर करीब 2.30 बजे के आसपास हुई। इससे केवल मंदिर के शिखर पर लगी 52 गज की ध्वजा को नुकसान हुआ। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक,बिजली गिरने से मंदिर की दीवारें काली पड़ गई हैं। लेकिन अन्य कोई नुकसान नहीं हुआ। द्वारकाधीश धाम के चारों ओर घनी बस्ती है। ऐसे में अगर आकाशीय बिजली रिहायशी इलाके में गिरती तो बड़ा हादसा हो सकता था। बहरहाल लोगों का कहना है कि भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें बचा लिया। स्थानीय लोगों के मुताबिक ऐसा पहली बार हुआ है जब मंदिर पर वज्रपात हुआ हो।

द्वारका के एसडीएम निहार भेटारिया ने बताया कि बिजली गिरने के बाद मंदिर के प्रशासन ने जाँच की। किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ है।

लोगों ने सोशल मीडिया पर इसको लेकर रिएक्शन भी दिए। रमेश गोस्वामी नाम के यूजर ने ट्वीट कर कहा भगवान ने आपदा को अपने सिर पर ले लिया। बिजली ध्वज दंड का आलिंगन करते हुए मंदिर में समा गई।

हिरेन पांडे नाम के एक यूजर ने कहा कि यह भगवान श्रीकृष्ण की कृपा थी कि बिजली गिरने से मंदिर को किसी तरह का कोई नुकसान नहीं हुआ।

गुजरात में गोमती नदी के तट पर स्थित यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इसे जगत मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इसका निर्माण 2200 साल पहले वज्रनाभ ने करवाया था। मंदिर को पुरी, रामेश्वरम और बद्रीनाथ के बाद हिंदू धर्म के चार पवित्र धामों में से एक माना जाता है।

द्वारकाधीश मंदिर में लगे ध्वज का विशेष महत्व है। इस पवित्र ध्वज को 52 गज की ध्वजा कहा जाता है। यहाँ प्रतिदिन तीन बार ध्वजा चढ़ाई जाती है। कभी-कभी तो ध्वजा चढ़ाने के लिए भक्तों को महीनों का लम्बा इंतजार करना पड़ता है।

‘अल्लाहु अकबर’ का नारा और 22 अफगानी जवानों की हत्या, चौराहे पर निहत्थे खड़ा कर तालिबान ने किया नरसंहार: वीडियो वायरल

अफ़ग़ानिस्तान के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर चुके तालिबान ने अब फिर से अपना क्रूर चेहरा दिखाना शुरू कर दिया है। अफ़ग़ानिस्तान के 22 कमांडो को तालिबान ने क्रूरता से मार डाला। इस नरसंहार का वीडियो भी सामने आया है। इन जवानों ने तालिबान के सामने आत्म-समर्पण कर दिया था और वो निहत्थे थे, लेकिन आतंकियों ने उनकी एक न सुनी। उन्होंने ‘अल्लाहु अकबर’ का नारा लगाते हुए सभी को मार डाला।

ये घटना उत्तरी फरयाब प्रांत के दौलताबाद की है। 16 जून, 2021 को ये घटना हुई थी। अफगानिस्तान की सरकार ने अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित कुछ चुने हुए जवानों को शहर पर फिर से कब्ज़ा करने के लिए भेजा था, जिसमें एक पूर्व जनरल का बेटा भी शामिल था। लेकिन, उन्हें तुरंत ही घेर लिया गया। उनके लिए हवाई सपोर्ट या फिर अतिरिक्त टुकड़ी भी नहीं आई। आतंकियों का कहना था कि सैनिकों के पास गोला-बारूद और हथियार खत्म हो गए थे, जिसके बाद वो पकड़े गए

लेकिन, वीडियो से पता चला है कि असल में निहत्थे जवानों को क्रूरता से मारा गया। सभी 22 जवानों को हाथ खड़े कर के सड़क पर चलने को कहा गया, फिर ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई। तालिबान ने सरकारी सशस्त्र बलों को अपने-अपने बेस खाली करने को कहा है और वादा किया है कि वो उन्हें घर जाने के लिए सुरक्षित रास्ता देगा। अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपनी सेना हटा ली है और जो बचे-खुचे वहाँ हैं, उन्हें भी वापस बुलाया जा रहा है।

लोगों में खौफ पैदा करने के लिए बीच चौराहे पर इस घटना को अंजाम दिया गया। कइयों को तो जमीन पर घुटनों के बल झुकने के लिए मजबूर किया गया, फिर उनकी हत्या की गई। इस दौरान कुछ लोग मिन्नतें भी कर रहे थे कि उनकी हत्या न की जाए। पश्तो भाषा में कुछ लोग कहते दिख रहे हैं, “उन्हें मत मारो। मैं विनती करता हूँ, उन्हें छोड़ दो।” फिर दो गोलियों की आवाज़ आती है और दर्जनों राउंड फायरिंग की जाती है।

साथ ही तालिबानी ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे भी लगा रहे होते हैं। एक अन्य वीडियो में इस नरसंहार के बाद सड़क पर लाशें पड़ी हुई दिखती हैं। साथ ही उन लाशों के कपड़ों में से भी तालिबान ने अपने काम की चीजें निकाल लीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि ये कमांडो बख्तरबंद गाड़ियों में आए थे और 2 घंटे तक तालिबान के साथ इनकी लड़ाई चली, पर अंत में इनके पास संसाधन ही नहीं बचे थे।

उनके समर्थन के लिए पीछे से कोई टुकड़ी नहीं आई क्योंकि अन्य जवान व अधिकारी इस बात से डरे हुए थे कि तालिबान को उनकी गुप्त योजना का पता चल गया है और वहाँ जाने पर उन सभी को भी मार डाला जाएगा। एक अधिकारी का कहना था कि अन्य अधिकारियों ने इन जवानों को धोखा दिया। मृतकों में एक शोहराब आजमी भी थे, जो जो रिटायर्ड अफगान जनरल हाजिर आजमी के बेटे थे

हाजिर आजमी को तालिबान के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ा स्तंभ माना जाता था। तालिबान का दावा है कि 24 कमांडो अब भी उसकी कैद में हैं। तालिबान फिर से अफगानिस्तान में सत्ता हासिल करने की राह पर है। तालिबान 85% अफगानिस्तान पर कब्जे का दावा कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने जानबूझ कर ग्रामीण इलाकों से सेना हटा ली है, ताकि शहरी क्षेत्रों पर फोकस रहे।

विशेषज्ञों का कहना है कि तालिबान ने मुल्क के 30% हिस्से पर कब्ज़ा जमाया है। अगर शहरों में कब्ज़ा के लिए निकले तालिबान को सरकारी बल नेस्तनाबूत कर देते हैं तो तालिबान फिर से वार्ता की टेबल पर आने को मजबूर हो जाएगा और शांति समझौता होगा। लेकिन, तालिबान की जीत होती है तो काबुल से सरकार उखड़ जाएगी। UN ने शरणार्थी समस्या पैदा होने की भी आशंका जताई है। 90 के दशक में अफगानिस्तान में तालिबान का राज हुआ करता था।

भगवान नरसिंह का निवास स्थान जो सदियों तक धरती में दबा रहा: आंध्र प्रदेश का सिंहाचलम मंदिर और मान्यताएँ

भगवान विष्णु के सबसे उग्र अवतारों में से एक हैं नरसिंह अवतार। जैसा कि गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म का प्रभाव बढ़ता है, तब वो इस धरती पर अधर्म के नाश के लिए अवतार लेते हैं। भगवान ने नरसिंह अवतार, हिरण्यकश्यप रूपी अधर्म के नाश के लिए और धर्म रूप प्रह्लाद की रक्षा के लिए लिया था। श्री हरि के इन्हीं चौथे अवतार भगवान नरसिंह को समर्पित है आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में स्थित सिंहाचलम मंदिर। वैसे तो भगवान नरसिंह के कई मंदिर भारत में हैं। लेकिन इस मंदिर को उनका निवास स्थान माना जाता है और यह कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं प्रह्लाद ने करवाया था।

इतिहास

सिंहाचलम मंदिर, सिंहाचल पर्वत पर स्थित है। सिंहाचल का अर्थ है, सिंह (शेर) का पर्वत। जब प्रह्लाद की नारायण भक्ति से महाशक्तिशाली राक्षस उसके पिता हिरण्यकश्यप के अहंकार को ठेस पहुँची तो उसने अपने ही बेटे को बहुत कष्ट दिए और उसे मारने के लिए कई उपाय किए। लेकिन प्रभु की कृपया से प्रह्लाद पूरी तरह से सुरक्षित रह गया। अंततः जब हिरण्यकश्यप का अत्याचार हद से अधिक बढ़ गया तो भगवान विष्णु ने उसका संहार करने के लिए नरसिंह अवतार लिया। भगवान नरसिंह ने हिरण्यकश्यप का वध किया और अपने अनन्य भक्त प्रह्लाद की रक्षा की। इसके बाद ही सिंहाचल पर्वत पर प्रह्लाद ने ही भगवान नरसिंह को समर्पित मंदिर की स्थापना की। यह युगों पुरानी घटना है इसलिए मंदिर की स्थापना के संबंध में कोई पुख्ता जानकारी नहीं है।

समय बीतता गया और अंततः यह मंदिर मानवीय लापरवाही का शिकार हो गया। रखरखाव के अभाव में मंदिर अपनी स्थापना के सदियों बाद धरती में समा गया। इस मंदिर के दोबारा अस्तित्व में आने की घटना का वर्णन स्थल पुराण में है। लुनार वंश के राजा पुरुरवा अपनी पत्नी उर्वशी के साथ अपने विमान में बैठकर कहीं जा रहे थे। लेकिन किसी अदृश्य शक्ति के प्रभाव में आकर उनका विमान सिंहाचल पर्वत पर पहुँच गया और देववाणी से प्रेरित होकर उन्होंने धरती के अंदर से भगवान नरसिंह की यह प्रतिमा बाहर निकाली और देववाणी के आदेशानुसार उस प्रतिमा को चंदन के लेप से ढँक कर पुनःस्थापित कराया। उसी देववाणी के द्वारा यह आदेश दिया गया कि साल में एक ही बार यह चंदन का लेप भगवान नरसिंह की प्रतिमा से हटाया जाएगा।

इसके बाद वर्तमान मंदिर से प्राप्त कई शिलालेखों से मंदिर के निर्माण और जीर्णोद्धार कराने वालों की जानकारी प्राप्त होती है। इन शिलालेखों में सबसे पहले सन् 1098-99 के दौरान चोल राजा कुलोत्तुंगा प्रथम के द्वारा मंदिर में निर्माण की जानकारी सामने आती है। इसके बाद सन् 1137-1156 के दौरान वेलानंदू की महारानी के द्वारा मंदिर में स्थापित प्रतिमा को सोने से ढँकने की जानकारी प्राप्त होती है। इसके अलावा एक अन्य शिलालेख में विजयनगर साम्राज्य के राजा श्री कृष्ण देवराय और उनकी रानी के द्वारा मंदिर में 991 मोतियों की एक माला और अन्य बहुमूल्य रत्न समर्पित किए जाने के बारे में बताया गया है।

संरचना

मंदिर का निर्माण द्रविड़ वास्तुकला के अनुसार हुआ है। मंदिर में एक गोपुरम है और उसके बाद एक 16 स्तंभों वाला एक मंडप है जिसे मुखमंडपन कहा जाता है। इसे जुड़ा हुआ एक बरामदा है जो काले ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है। इस बरामदे में पत्थर पर पुराणों की घटनाओं पर आधारित नक्काशी की गई है और यह नक्काशी अपने आप में अद्वितीय है जो सिर्फ सिंहाचलम मंदिर में ही देखने को मिलती है। इसके बाद मंदिर के उत्तरी हिस्से में नाट्यमंडपम है जो 96 स्तंभों से मिलकर बना है।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान वाराह-नरसिंह की प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा भगवान विष्णु के वाराह अवतार और नरसिंह अवतार से मिलकर बनी है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ भगवान नरसिंह के साथ माता लक्ष्मी भी विराजमान हैं। राजा पुरुरवा को जो आदेश हुआ था, उसका पालन आज भी मंदिर में होता है। मुख्य प्रतिमा चंदन के लेप से ढँकी हुई है और साल में एक बार ही अक्षय तृतीया के दिन यह चंदन का लेप हटाया जाता है। यही वह दिन है जब भक्त अपने भगवान की मूल प्रतिमा का दर्शन प्राप्त कर पाते हैं। जिस दिन चंदन का लेप प्रतिमा से हटाया जाता है उसे चंदनोत्सवम के रूप में मनाया जाता है।

मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण किया गया है। इस पूरे मार्ग में छायादार वृक्षों की उपस्थिति है और भक्तों के विश्राम के लिए इन वृक्षों के नीचे विशाल पत्थर हैं। मंदिर तक पहुँचने का पूरा मार्ग अनन्नास और आम के पेड़ों से सजा हुआ है। मार्ग पर बीच-बीच में तोरण द्वार बने हुए हैं। शनिवार और रविवार को मंदिर में भक्तों की अच्छी-खासी भीड़ देखी जाती है।

कैसे पहुँचे?

भगवान नरसिंह का सिंहाचलम मंदिर विशाखापट्टनम से 16 किमी की दूरी पर स्थित है। विशाखापट्टनम सभी प्रकार से यातायात के साधनों से परिपूर्ण है। यहाँ सुसंचालित अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा भी है जो मंदिर से लगभग 9 किमी की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा विशाखापट्टनम जंक्शन से मंदिर की दूरी लगभग 14 किमी है। विशाखापट्टनम रेलमार्ग से भारत के सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। सड़क मार्ग से भी विशाखापट्टनम न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से जुड़ा हुआ है।

पंजाब कॉन्ग्रेस के अंदरूनी रिंग में AAP की एंट्री, राहुल से प्रशांत किशोर की मुलाकात: कहीं कोई तीसरी पार्टी तो नहीं कर रही इंतजार?

चुनाव दूर न रहे तो कुछ राजनीतिक दलों का अंदरूनी लोकतंत्र अक्सर असंतोष, मीटिंग, और युद्ध प्रधान हो जाता है। आगामी पंजाब चुनावों ने कॉन्ग्रेस के अंदरूनी लोकतंत्र में पिछले ढाई महीने से ऐसी ही हलचल मचाई है। दल का राजनीतिक माहौल यात्राएँ, मीटिंग, शिकायतों और वक्तव्यों से प्रभावित है। पहले से ही नाराज चल रहे नवजोत सिंह सिद्धू ने पिछले दो महीने से अपनी नाराजगी का गियर बदल दिया तो हाईकमान ने उनकी नाराजगी को मापने के लिए तीन सदस्यीय टीम भेज दी।

टीम ने सिद्धू के साथ मीटिंग वगैरह करके हाईकमान को रिपोर्ट सौंपी तो सिद्धू दिल्ली पहुँच गए। राहुल और प्रियंका के साथ मीटिंग वगैरह की। वे लौट गए तो कैप्टन अमरिंदर सिंह दिल्ली आए। मीटिंग वगैरह करके वे भी लौट चुके हैं। अब प्रशांत किशोर मीटिंग के लिए आए और आज उन्होंने राहुल गाँधी और अन्य नेताओं के साथ मीटिंग की

प्रशांत किशोर की कॉन्ग्रेस के नेताओं के साथ आज की मीटिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि मीटिंग से कुछ समय पहले ही नवजोत सिंह सिद्धू ने यह बयान दिया कि; उनकी विरोधी आम आदमी पार्टी ने हमेशा पंजाब को लेकर उनके कामों को सराहा है। फिर बात चाहे 2017 से पहले की हो जब वे बेअदबी, ड्रग्स, भ्रष्टाचार, बिजली की समस्या वगैरह पर बोलते थे या फिर आज की हो जब वे पंजाब मॉडल लेकर आए हैं। आम आदमी पार्टी को पता है कि पंजाब के लिए असल में कौन लड़ रहा है।

यह ट्वीट बड़ा महत्वपूर्ण है और शायद सिद्धू ने आज इस ट्वीट के जरिए पंजाब कॉन्ग्रेस की अंदरूनी लड़ाई को नया मोड़ दे दिया है। पर हाल के दिनों में सिद्धू को ट्विटर पर करीब से फॉलो करने वालों के लिए उनका आज का ट्वीट शायद आश्चर्यचकित न करे। उनके 2 जुलाई के इस ट्वीट को देखें;


सिद्धू ने अपनी इस ट्वीट में पहली बार पंजाब में बिजली को लेकर जब इतना विस्तृत लिखा तभी लगने लगा था कि कहीं न कहीं ये आम आदमी पार्टी के साथ एक कॉमन ग्राउंड खोजने की कोशिश कर रहे हैं। इतिहास गवाह है कि आम आदमी पार्टी के लिए हर राज्य में सत्ता की उनकी लड़ाई के चारों तरफ बनाया गया विमर्श अक्सर बिजली प्रधान होता है।

आज नवजोत सिंह सिद्धू ने बिना लिखे कॉन्ग्रेस हाईकमान को यह बता दिया है कि; चुनाव के शुभ अवसर पर उन्हें न केवल असंतुष्ट होने का अधिकार है बल्कि आम आदमी पार्टी को भी उनके असंतोष को इज़्ज़त देने का अधिकार है। इसके बाद कॉन्ग्रेस के लिए स्थिति लगभग स्पष्ट सी दिखती है। दल और उसके शीर्ष नेतृत्व को अब इस बात पर फैसला लेना है कि पंजाब की राजनीति में सिद्धू की लड़ाई को जितनी इज़्ज़त आम आदमी पार्टी देती है उतनी ही कॉन्ग्रेस दे सकती है या नहीं? और यदि कॉन्ग्रेस उतनी ही इज़्ज़त देने के लिए तैयार है तो फिर कैप्टन के असंतोष को कौन इज़्ज़त देगा? कहीं ऐसा तो नहीं कि कोई तीसरा दल पंजाब की राजनीति में अमरिंदर सिंह के योगदान को और अधिक इज़्ज़त देने के लिए तैयार बैठा है? यदि इस प्रश्न का उत्तर ‘हाँ’ है तो फिर वह दल कौन सा है?

कॉन्ग्रेस हाईकमान के लिए यह स्थिति सुखद तो नहीं है बल्कि आम राजनीतिक पेंचों से कहीं आगे की है जिसे सुलझाना हर बीतते दिन के साथ मुश्किल होता जा रहा है। जब तीन सदस्यीय दल पंजाब कान्ग्रेस में काफी समय से चल रहे विवाद को सुलझाने पंजाब पहुँचा था तब लगा था कि शायद किसी फॉर्मूले पर समझौता हो जाए। पर तब यह सोच का आधार यह था कि अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह के बीच चल रही रस्साकशी में बस कान्ग्रेस के नेताओं ने ही अपने-अपने गुट बनाए हैं। परगट सिंह के सिद्धू के साथ आने के बाद भी यह लगा था कि मामला पार्टी तक ही सीमित रहेगा। अब जबकि आम आदमी पार्टी ने भी रिंग में एक कदम रख दिया है, मामला सीधा नहीं रहा। देखना यह है कि कहीं कोई और दल रिंग में अपना कदम न रख दे। इसके अलावा यह देखने वाली बात होगी कि इन राजनीतिक घटनाओं के बीच खालिस्तानी ताक़तें कहाँ दिखाई देती हैं।

यौन शोषण, ड्रग्स, बिना टिकट उत्पात: यूरो 2020 फाइनल मैच से पहले वेम्बली स्टेडियम का हुआ बुरा हाल: देखें वीडियो

वेम्बली स्टेडिम के बाहर 11 जुलाई (रविवार) को हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें और वीडियोज सामने आई हैं। इसमें UEFA यूरो 2020 फाइनल फुटबॉल मैच में इटली की जीत से आहत इंग्लैंड समर्थक तोड़फोड़ करते, इटली के ध्वज को जलाने की कोशिश करते, उस पर थूकते, लोगों से बदसलूकी करते नजर आ रहे हैं।

इससे पहले रिपोर्ट सामने आई थी कि कैसे इंग्लैंड के फैन बिन टिकट स्टेडियम में घुसे और मैच से दो घंटे पहले ही हर सुरक्षा बैरियर के साथ खिलवाड़ किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्मादी समर्थकों ने दिव्यांग लोगों के प्रवेश द्वार से धावा बोला। हालत ये हो गई कि जो समर्थक टिकट खरीदकर आए थे वो अपनी सीटों पर नहीं बैठ पाए।

एक आइरिश टीवी प्रेसेंटेटर लॉरा वुड्स, जो उस समय वहाँ मौजूद थीं, ने कहा, “जब मैं लाइन में खड़ी थी तब देखा कि एक दिव्यांग व्यक्ति के अंदर जाने के लिए वेम्बली में एक गेट खुला, और देखते ही देखते इसमें लगभग 40 लोग बिना टिकट के स्टेडियम में जाने की कोशिश करने लगे।” 

वेम्बली स्टेडियम के बैरीकेड तोड़ते इंग्लैंड समर्थक

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि घटना के समय समर्थक सीट के लिए लड़ रहे थे और कुछ समर्थक तो आखिर में उन सीटों पर जाकर बैठ गए जो खिलाड़ियों के परिवार वालों के लिए आरक्षित थी। इन सबके चलते इटली कोच के बेटे एंड्रिया मैनसिनी को खेल देखने के लिए सीढ़ियों पर बैठना पड़ा क्योंकि सीट सारी भर चुकी थी।

कई रिपोर्ट्स ऐसी भी आई हैं जो बताती है कि भीड़ ने वेम्बली स्टॉफ के साथ बदसलूकियाँ की। कुछ स्टाफ को सुरक्षित जगहों पर जाने को कह दिया गया क्योंकि अगर वो अपनी जगह तैनात रहते तो उनकी जान को खतरा हो सकता था।

एक वॉलिंटियर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “मैं स्टेडियम के बाहर खड़ी थी। हमें हमारे बचाव के लिए भागना पड़ा। हमे अंदर जाने से मना किया गया था। क्योंकि स्थिति बहुत बेकार थी।”  वॉलिंटियर ने बताया कि उनकी टीम को फौरन किसी सुरक्षित जगह पर भेजा गया। इस बीच समर्थको ने बियर के डिब्बे मिसाइल की तरह फेंकने शुरू कर दिए थे।

मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रबंधक को चाकू से धमकाया गया जबकि एक महिला समर्थक वास्तविकता में यौन शोषण का शिकार हुई। पूरे हड़कम्प में कुछ समर्थकों को कोकेन भी फेंकते देखा जा सकता है। 21 सेकेंड की वीडियो में देख सकते हैं कि एक हिंसक समर्थक किसी चीज पर चढ़ता है और भीड़ पर कोक फेंक देता है। वही भीड़ उसका ऐसे उत्साह बढ़ाती है जैसे उनका यही उद्देश्य हो।

इस हिंसा में इंग्लैंड खिलाड़ियों को भी सोशल मीडिया पर उलटा सीधा कहा गया। हिंसा के बाद पुलिस ने इंग्लैंड समर्थकों की बदसलूकी के चलते उन पर एक्शन लिया। वहीं जो प्लेयर मैच में पेनल्टी मिस कर गए उनपर सोशल मीडिया पर गुस्सा उतारा गया। इस पूरे मामले में 53 दंगाइयों की गिरफ्तारी हुई है। 19 अधिकारियों को चोट आई है। पुलिस का कहना है कि इस तरह की हिंसा को किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। घटना के बाद जाँच की जा रही है और पड़ताल के बाद अपराधियों को पकड़कर सजा दी जाएगी।

सीएम योगी ने पंजाब में बिजली संकट से घिरे उद्योगपतियों को दिया बड़ा ऑफर, कम दरों पर 24 घंटे बिजली सहित कई पेशकश

पंजाब इन दिनों एक बड़े बिजली संकट का सामना कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप कॉन्ग्रेस शासित राज्य में बड़े उद्योग लगभग बंद हो गए हैं। सभी उद्योगों को बिजली की आपूर्ति न मिलने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंजाब के उद्योगपतियों को कम दरों पर 24 घंटे बिजली देने की पेशकश की है। यदि वे यूपी में नई इकाइयों को शिफ्ट करते हैं या स्थापित करते हैं, तो उन्हें इस ऑफर का लाभ मिलेगा। लुधियाना के उद्योगपतियों की सोमवार (12 जुलाई 2021) को इस संबंध में उत्‍तर प्रदेश के सीएम के साथ लखनऊ में बैठक हुई, जो 3 घंटे तक चली।

फेडरेशन ऑफ डाइंग फैक्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष व बिजनेसमैन टीआर मिश्रा ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ”रविवार (11 जुलाई) को मुझे यूपी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया, जिन्होंने मुझे बताया कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ लुधियाना के उद्योगपतियों से मिलना चाहते हैं। उद्योगपति उत्तर प्रदेश में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। हम इस प्रस्ताव से सहमत हुए और हमने लखनऊ के लिए उड़ान भरी। यहाँ हमने सीएम के साथ बैठक की, जो लगभग तीन घंटे तक चली।”

उन्होंने आगे कहा, “सीएम योगी ने वादा किया है कि पंजाब की तुलना में उद्योगों को 24 घंटे निर्बाध बिजली दी जाएगी, वह भी सस्ती दरों पर। इसके अलावा, यूपी सरकार औद्योगिक इकाइयों की उचित सुरक्षा और अधिक निश्चित करेगी। हमें आने वाले नोएडा अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निकट यमुना एक्सप्रेस वे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में औद्योगिक क्लस्टर स्थापित करने के लिए अतुलनीय प्रोत्साहन और विकल्प का वादा किया गया है, जो भारत का सबसे बड़ा हवाई अड्डा होगा।”

लुधियाना की फैक्ट्रियों में 90% मजदूर यूपी से हैं

यूपी सरकार द्वारा निर्धारित प्रस्तावों पर औद्योगिक संघ और व्यवसायी चर्चा कर रहे हैं। उनके द्वारा जल्द ही सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। मिश्रा ने सीएम द्वारा दिए गए प्रस्तावों को आकर्षक बताते हुए कहा, “सबसे बड़ा फायदा यह है कि लुधियाना के कारखानों में काम करने वाले लगभग 90% श्रमिक यूपी से हैं।”

उद्योग जगत के लिए शांतिपूर्ण माहौल का सीएम योगी ने किया वादा

सीएम से मिले प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख गुरमीत सिंह कुलार ने कहा कि बैठक काफी अच्छी रही। उन्होंने कहा, ”यूपी सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए समर्थन और फास्ट ट्रैक की अनुमति देने का वादा किया है। सीएम योगी ने कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से बनाए रखते हुए उद्योग जगत के लिए पूरी तरह से शांतिपूर्ण वातावरण सुनिश्चित किया।” उन्होंने कहा कि यूपी ईस्टर्न कॉरिडोर का हिस्सा है, जो सस्ते और आसान माल की आवाजाही सुनिश्चित करेगा।

अतिरिक्त मुख्य सचिव अरविंद कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। कुलार ने कहा कि सरकार ने इच्छुक व्यवसायियों को पूर्ण विकसित औद्योगिक क्षेत्र उपलब्ध कराने का वादा किया है। यूपी सरकार द्वारा प्रस्तावित जमीन की कीमत 5,000 रुपए प्रति वर्ग गज (per square yard) बताई गई थी। इन्फ्रास्ट्रक्चर एवं औद्योगिक विकास सचिव नीना शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को निवेशकों को मिलने वाले वित्तीय लाभों की जानकारी दी।

गौरतलब है कि पंजाब के उद्योगपति इस साल मार्च से ही यूपी के सीएम योगी से मिलने की योजना बना रहे थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण बैठक में देरी हुई। मिश्रा ने कहा, “यह महज संयोग है कि यह ऐसे समय में हुआ जब पंजाब बिजली संकट से जूझ रहा है।”